RBSE Class 10 Sanskrit स्पन्दन Chapter 13 महाराजः सूरजमल्लः विजयते वस्तुनिष्ठ – प्रश्नाः

1. महाराजस्य सूरजमल्लस्य अन्यत् नाम आसीत्
(अ) सज्जनसिंह
(आ) सुजानसिंह
(इ) सुरजनसिंह
(ई) बदनसिंह

2. महाराजः सूरजमल्लः आसीत्
(अ) जाट-राजा
(आ) मराठा-राजा
(इ) सिक्ख-राजा
(ई) राजपूत-राजा

3. सूदन कवेः सूरजमल्लविषयकं काव्यमस्ति
(अ) रामचरितम्
(आ) सूरजमल्लचरितम्
(इ) सुजानचरितम्
(ई) भूपालचरितम्

4. ‘वंशभास्कर’ इति ख्यातस्य ग्रन्थस्य रचनाकारोऽस्ति
(अ) भास्कराचार्यः
(आ) सूर्यमल्लः मिश्रण
(इ) मल्लिनाथः
(ई) महाराज: सूरजमल्लः

5. सूरजमल्लस्य कालः अस्ति
(अ) नवमी शती ई०
(आ) दशमी शताब्दी ई०
(इ) अष्टादश-शताब्दः ई०
(ई) विंश-शताब्दः ई.

6. धम्र्याद् हि युद्धात् श्रेयोऽन्यत् क्षत्रियस्य न विद्यते इति वचनमस्ति
(अ) श्रीमदभगवत् गीतायाम्।
(आ) रामायणे-युद्धकाण्डे
(इ) पुराणेषु
(ई) रघुवंशे

उत्तराणि:

1. (आ)
2. (अ)
3. (इ)
4. (आ)
5. (इ)
6. (अ)

RBSE Class 10 Sanskrit स्पन्दन Chapter 13 महाराजः सूरजमल्लः विजयते लघूत्तरात्मक – प्रश्नाः

प्रश्न 1.
महराज-सूरजमल्लस्य पितुर्नाम किमासीत्?
(महाराज सूरजमल के पिता का क्या नाम था?)
उत्तरम्:
महाराज सूरजमल्लस्य पितुः नाम महाराजा बदनसिंहः आसीत्।
(महाराज सूरजमल के पिता का नाम महाराजा बदनसिंह थी।)।

प्रश्न 2.
‘जाट-प्लेटो’ कः कथ्यते?
(जाट-प्लेटो कौन कहलाता है?)
उत्तरम्:
सूरजमल्लः ‘जाट-प्लेटो’ इति कथ्यते।
(सूरजमल जाट प्लेटो कहलाता है।)

प्रश्न 3.
सूरजमल्लस्य औपचारिक-शिक्षा-विषये भवन्तः किं जानन्ति?
(सूरजमल की औपचारिक शिक्षा के विषय में आप क्या जानते हैं?)
उत्तरम्:
सूरजमल्लः औपचारिक शिक्षारहितः आसीत्।
(सूरजमल औपचारिक शिक्षा से रहित था।)

प्रश्न 4.
सुजान-चरित-काव्ये सूरजमल्लस्य कति युद्धानां वर्णनम् उपलभ्यते?
(सुजान-चरित काव्य में सूरजमल के कितने युद्धों का वर्णन है?)
उत्तरम्:
सुजान-चरित-काव्ये सूरजमल्लस्य सप्त-युद्धानां वर्णनम् अस्ति।
(सुजान-चरित-काव्य में सूरजमल के सात युद्धों की वर्णन है।)

प्रश्न 5.
सूरजमल्लस्य जन्म केदा अभवत्?
(सूरजमल का जन्म कब हुआ?)
उत्तरम्:
सूरजमल्लस्य जन्म वसन्तपञ्चभ्याम् (13 फेब्रवरी-दिने 1707) तमे ईस्वीय वर्षे अभवत्।
(सूरजमल का जन्म वसन्त पंचमी (13 फरवरी 1707 ई०) में हुआ।)

प्रश्न 6.
सूरजमल्लस्यै मृत्यु कदा कथं च अभवत्?
(सूरजमल की मृत्यु कब और कैसे हुई ?)
उत्तरम्:
सूरजमल्लः युध्यमान: 25 डेसेम्बर 1763 ईस्वी वर्षे इति दिवसे रणे चाभिमुखे हतः।
(सूरजमल युद्ध करते हुए। 25 दिसम्बर 1763 ई० के दिन मारे गये।)

RBSE Class 10 Sanskrit स्पन्दन Chapter 13 महाराजः सूरजमल्लः विजयते निबन्धात्मक – प्रश्नाः

प्रश्न 1.
सूरजमल्लस्य जन्म-समये भारतवर्षस्य परिस्थितिः कीदृशी आसीत्?
(सूरजमल के जन्म के समय भारत की क्या परिस्थिति थी?)
उत्तरम्:
तस्य जनिः तदा अभूत् यदा भारतदेशस्य राजनीतिः अत्यन्तं दोलायमाना आसीत्। भारतं च विध्वंशक-शक्तिनां बाहुपाशे सर्वथा निबद्धमासीत्। नादिरशाहः अहमदशाह अब्दाली इत्येताभ्यां पापिभ्याम् उत्तरभारते महताप्रमाणेन नरवधा: गोवधाश्च क्रियन्ते स्म तीर्थानि मन्दिराणि च विध्वंस्तानि क्रियते स्म। भारतं लुण्ठितुम् आगच्छतः बाह्याक्रमणकारिणः निरोद्धं न कोऽपि शासकः सज्जः आसीत्।

(उसका जन्म जब हुआ जब भारत देश की राजनीति अत्यन्त डगमगा रही थी। (अस्थिर थी) और भारत विध्वंशक शक्तियों के बाहुपाश में पूरी तरह बँध चुका था। नादिरशाह, अहमद शाह अब्दाली इन पापियों के द्वारा उत्तर भारत में बड़ी मात्रा में नरवध और गौवध किए जा रहे थे। तीर्थ और मन्दिरों को विशेष रूप से ध्वस्त किया जा रहा था। भारत को लूटने के लिए आते हुए आक्रमणकारियों को रोकने के लिए कोई शासक तैयार नहीं था।)

प्रश्न 2.
सूरजमल्लमहाराजस्य गुणान् वर्णयन्तु।
(सूरजमल महाराज के गुणों का वर्णन कीजिए।)
उत्तरम्:
मल्लेषु मल्लः सूरजमल्लः शरीर सौष्ठवस्य, सौन्दर्यस्य, सरलतायाः चारित्रिक दृढ़तायाः, धार्मिकतायाः, वीरतायाः, करुणायाः, त्यागस्य, बलिदानस्य शरणागत-रक्षणस्य, प्रजावात्सल्यस्य, राष्ट्रवादस्य, सर्वपंथ समादरस्य च साक्षात् प्रतिमूर्तिरासीत्। सः स्वकाल खण्डस्य अत्यन्त दुर्धर्षः, अतिशयेन तेजस्वी, नितान्त नीति-निपुण: अद्वितीयश्च योद्धा आसीत्।

(मल्लों में मल्ल सूरजमल शारीरिक गठन, सुन्दरता, सरलता, चारित्रिक दृढ़ता, धार्मिकता, वीरता, करुणा, त्याग, बलिदान, शरणागत-रक्षण, प्रजावात्सल्य, राष्ट्रवाद, सर्वपंथ समादर की साक्षात् प्रतिमूर्ति था। वह अपने समय को अत्यन्त अनुल्लंघनीय, अति तेजस्वी, पूर्णत: नीति में निपुण और अद्वितीय योद्धा था।)

RBSE Class 10 Sanskrit स्पन्दन Chapter 13 महाराजः सूरजमल्लः विजयते अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तराणि

अधोलिखित प्रश्नान् संस्कृतभाषया पूर्णवाक्येन उत्तरम् – (निम्न प्रश्नों के उत्तर संस्कृत भाषा में पूर्ण वाक्य में दीजिए-)

प्रश्न 1.
महाराज सूरजमल्लः कस्मिन् पर्वे जन्म लेभे?
(महाराज सूरजमल ने किस पर्व पर जन्म लिया?)
उत्तरम्:
महाराजः सूरजमल्ल: वसन्तपञ्चम्याः पर्वे जन्म लेभे।
(महाराज सूरजमल ने वसन्त पंचमी के पर्व पर जन्म लिया।)

प्रश्न 2.
सूरजमल्लस्य अपरं नाम किम् आसीत्?
(सूरजमल का दूसरा नाम क्या था?)
उत्तरम्:
सूरजमल्लस्य अपरं नाम सुजानसिंहः आसीत्।
(सूरजमल का दूसरा नाम सुजानसिंह था।)

प्रश्न 3.
सूरजमल्लः कस्मिन् शताब्दे भारतस्य नायकेषु अन्यतमः आसीत्?
(कौन-सी शताब्दी में सूरजमल भारत के नायकों में से एक था?)
उत्तरम्:
अष्टादशः शताब्दे सः भारतस्य नायकेषु अन्यतमः आसीत्।
(18वीं सदी में वह भारत के नायकों में से एक था।)

प्रश्न 4.
सूरजमल्लस्य जन्मकाले भारतस्य राजनीतिः कीदृशी आसीत्?
(सूरजमल के जन्म के समय भारत की राजनीति कैसी थी?
उत्तरम्:
सूरजमल्लस्य जन्मकाले भारतस्य राजनीतिः दोलायमाना आसीत्।
(सूरजमल के जन्म के समय भारत की राजनीति डाँवाडोल थी।)

प्रश्न 5.
सूरजमल्लस्य जन्मकाले भारतं केषां बाहुपाशे आसीत्?
(सूरजमल के जन्म के समय भारत किनके बाहुपाश में था?)
उत्तरम्:
तदा भारतं विध्वंसक-शक्तीनां बाहुपाशे आसीत्।
(तब भारत विध्वंशक शक्तियों के बाहुपाश में था।)

प्रश्न 6.
नरवधाः गोवधाः कैः क्रियन्ते स्म?
(नरवध और गौवध किनके द्वारा किये जा रहे थे?)
उत्तरम्:
नादिरशाह-अहमदशाह अब्दाली इत्येताभ्यां उत्तर भारते महता प्रमाणेन नरवधाः गौवधाः च क्रियन्ते स्म।
(नादिरशाह, अहमदशाह अब्दाली इन पापियों द्वारा नरवध और गौवध किए जा रहे थे।)

प्रश्न 7.
तीर्थानि मन्दिराणि च कैः ध्वस्तानि?
(तीर्थ और मन्दिर किसने नष्ट किए?)
उत्तरम्:
तीर्थानि मन्दिराणि च नादिरशाह अहमदशाहदिभिः ध्वस्तानि।
(तीर्थ और मन्दिर नादिरशाह और अहमदशाह आदि ने ध्वस्त किए।)

प्रश्न 8.
शासकाः कान् अवरोद्धम् अक्षमाः आसन्?
(शासक किनको रोकने में अक्षम थे?)
उत्तरम्:
शासका: लुंठनाम् आगच्छतोऽवरोद्धम् अक्षमाः आसन्।
(शासक लूटने के लिए आते हुए लोगों को रोकने में असमर्थ थे।)

प्रश्न 9.
स्वकालस्य अद्वितीयः योद्धा कः आसीत्?
(अपने समय का अद्वितीय योद्धा कौन था?)
उत्तरम्:
स्वकालस्य अद्वितीय योद्धाः सूरजमल्लः आसीत्।
(अपने समय का अद्वितीय योद्धा सूरजमल था।)

प्रश्न 10.
सूरजमल्लेन कति युद्धेषु विजयश्रीः चुम्बिता?
(सूरजमल ने कितने युद्धों में विजयश्री को चूमा?)
उत्तरम्:
सूरजमल्लेन सप्तसु महत्सु युद्धेषु विजयश्रीः चुम्बिता।
(सूरजमल ने सात युद्धों में विजयश्री को चूमा।)

प्रश्न 11.
सुजानचरितम् काव्यं केन रचितम्?
(सुजान चरित्र काव्य किसने रचा?)
उत्तरम्:
सुजानचरितम् इति काव्यं महाकवि सूदनेन रचितम्।
(सुजान-चरित काव्य महाकवि सूदन ने रचा।)

प्रश्न 12.
सूरजमल्लस्य सप्तयुद्धानां वर्णनं कस्मिन् काव्ये लभ्यते?
(सूरजमल के सात युद्धों का वर्णन किस काव्य में प्राप्त होता है?)
उत्तरम्:
सूरजमल्लस्य सप्तयुद्धानां वर्णनं महाकवि सूदनेन विरचिते सुजान-चरिते लभ्यते।
(सूरजमल के सात युद्धों का वर्णन महाकवि सूदन द्वारा रचित सुजान-चरित में मिलता है।)

प्रश्न 13.
सुजानचरित काव्ये युद्धानां कीदृशं वर्णनमस्ति?
(सुजानचरित काव्य में युद्धों का कैसा वर्णन है?)
उत्तरम्:
सुजानचरित काव्ये युद्धानां रोमांचकं सजीवं च वर्णनमस्ति।
(सुजान-चरित में युद्धों का रोमांचक और सजीव वर्णन है।)

प्रश्न 14.
कीदृशं सूरजमल्लं दृष्ट्वा अरयः विस्मिताः जायन्ते स्म?
(कैसे सूरजमल को देखकर शत्रु आश्चर्यचकित हो जाते थे?)
उत्तरम्:
रणाङ्गणे पाणियुगलेन खड्गं चालयन्तं वीक्ष्य तस्य अरयोऽपि विस्मिताः जायन्ते स्म।
(युद्ध क्षेत्र में दोनों हाथों से तलवार को चलाते हुए को देखकर उसके शत्रु भी आश्चर्यचकित हो जाते थे।)

प्रश्न 15.
‘वंशभास्कर’ केन रचितम् अस्ति?
(वंशभास्कर किसने लिखा है?)
उत्तरम्:
‘वंशभास्कर’ सूर्यमल्लमिश्रणेन रचितम् अस्ति।
(वंशभास्कर सूर्यमल्ल मिश्रण द्वारा लिखा हुआ है।)

प्रश्न 16.
‘वंशभास्कर’ इति ग्रन्थः कस्यां भाषयां लिखितमास्ति?
(वंशभास्कर ग्रन्थ किस भाषा में लिखा हुआ है?)
उत्तरम्:
‘वंशभास्कर’ इति ग्रन्थ डिंगल भाषायां लिखितः।
(वंशभास्कर ग्रन्थ डिंगल भाषा में लिखा हुआ है।)

प्रश्न 17.
मुगलसाम्राज्यस्योपरि कः प्रत्यक्षं प्रहारमकरोत्?
(मुगल साम्राज्य पर सीधा प्रहार किसने किया?)
उत्तरम्:
मुगलसाम्राज्यस्य उपरि महाराज: सूरजमल्लः प्रत्यक्षं प्रहारम् अकरोत्।
(मुगल साम्राज्य पर महाराजा सूरजमल ने प्रत्यक्ष प्रहार किया।)

प्रश्न 18.
कस्य समक्षं मुगलानाम् अहंकाररस्य नैकवारं पराजयः अभवत्?
(किसके समक्ष मुगलों का अहंकार अनेक बार पराजित हो गया?)
उत्तरम्:
महाराज सूरजमल्लस्य समक्षं मुगलानाम् अहंकारस्य नैकवार पराजयः अभवत्।
(महाराज सूरजमल के समक्ष मुगलों का अहंकार अनेक बार पराजित हुआ।)

प्रश्न 19.
कः शासकः सूरजमल्लेन सह सन्धिमकरोत्?
(किस शासक ने सूरजमल के साथ सन्धि की?)
उत्तरम्:
मीरबख्शी सलावतखान: सूरजमल्लेन सह सन्धिमकरोत्।
(मीरबख्शी सलावतखान ने सूरजमल के साथ सन्धि की।)

प्रश्न 20.
सलावतखानः सन्धिकाले किं प्रतिज्ञातवान्?
(सलावत खान ने संधि काल में क्या प्रतिज्ञा की?)
उत्तरम्:
सलावतखानः प्रतिज्ञातवान् यदहं पिप्पलवृक्षच्छेदनं, गोवधं, मन्दिर ध्वंसनं च कदापि न करिष्यामि।
(सलावत खान ने प्रतिज्ञा की कि मैं पीपल का पेड़ नहीं काढूँगा, गोवध और मन्दिर तोड़ने का कार्य कभी भी नहीं करूंगा।)

प्रश्न 21.
सूरजमल्लस्य प्रभावशालिताया कि निदर्शनमस्ति?
(सूरजमल की प्रभावशालता का क्या उदाहरण है?)
उत्तरम्:
यतः मीरबख्शी सलावतखान सदृशः शासकोऽपि संधिमकरोत्।
(क्योंकि मीरबख्शी सलावतखान जैसे शासकों ने भी संधि प्रतिज्ञा की।)

प्रश्न 22.
सूरजमल्लं मुक्तकण्ठेन के प्रशंसन्ति?
(सूरजमल की मुक्तकंठ से कौन प्रशंसा करते हैं?)
उत्तरम्:
अष्टादशः शताब्दस्य प्रायशः सर्वेऽपि इतिहासज्ञाः वृत्तान्त लेखकाश्च सूरजमल्लं मुक्तकण्ठं प्रशंसन्ति।
(18वीं शताब्दी के प्रायः सभी इतिहासवेत्ता और वृत्तान्त लेखक मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हैं।)

प्रश्न 23.
जाट-जातौ सूरजमल्लः किं स्थानं धत्ते?
(जाट जाति में सूरजमल कैसा स्थान धारण करता है?)
उत्तरम्:
जाट-जातौ सूरजमल्लः तदेव स्थानं धत्ते यत् स्थानं विदेशीयेषु प्लेटो नेपोलियन लूथर इत्यादिनामस्ति।
(जाट जाति में सूरजमल का वही स्थान धारण करता है जो स्थान विदेशियों में प्लेटो, नेपोलियन, लुथर आदि हैं।)

प्रश्न 24.
सूरजमल्लः केन विरुदेन भूषितः?
(सूरजमल किस विरुद से भूषित किया?)
उत्तरम्:
सूरजमल्लः ‘जाट-प्लेटो’ इति विरुदेन भूषितः।
(सूरजमल को जाट-प्लेटो विरुद से विभूषित किया गया।)

प्रश्न 25.
महाराज सूरजमल्लः केन कनिष्कः उक्त?
(महाराज सूरजमल को किसके द्वारा कनिष्क कहा गया?)
उत्तरम्:
हिन्दू-इतिहासज्ञाः तं 18 शताब्दस्य कनिष्कः इति उक्तः।
(हिन्दू इतिहासकारों ने उसे अठारहवीं सदी का कनिष्क कहा।)

स्थूलाक्षरपदानि आधृत्य प्रश्न निर्माणं कुरुत – (मोटे अक्षर वाले पदों के आधार पर प्रश्न निर्माण कीजिए-)

प्रश्न 1.
महाराज-सूरजमल्लस्य परमः प्रभावः अद्यापि इतिहासे गुञ्जति।
(महाराज सूरजमल का परम प्रभाव आज भी इतिहास में गूंजता है।)
उत्तरम्:
कस्य परमः प्रभावः अद्यापि इतिहासे गुञ्जति?
(किसका परम प्रभाव आज भी इतिहास में गूंजता है?)

प्रश्न 2.
धर्मात् युद्धात् श्रेयोऽन्यत् क्षत्रियस्य न विद्यते।
(धर्मयुद्ध से श्रेयस्कर क्षत्रिय को अन्य नहीं ।)
उत्तरम्:
कस्मात् श्रेयोऽन्यत् क्षत्रियस्य न विद्यते?
(किससे श्रेयस्कर अन्य क्षत्रिय के लिए नहीं है?)

प्रश्न 3.
इति मातृशिक्षा-पालयन्।
(इस प्रकार माँ का शिक्षा का पालन करते हुए।)
उत्तरम्:
इति कस्याः शिक्षां पालयन्?
(इस प्रकार किसकी शिक्षा का पालन करते हुए?)

प्रश्न 4.
राष्ट्रधर्म रक्षणाय प्राणान् पणीकृतम्।
(राष्ट्रधर्म की रक्षा के लिए प्राणों की बाजी लगा दी।)
उत्तरम्:
क़स्मै प्राणान् पणीकृतम्?
(किसके लिए प्राणों की बाजी लगा दी?)

प्रश्न 5.
सः मुगलसाम्राजस्य उपरि प्रत्यक्षं प्रहारम् अकरोत्।
(उसने मुगल साम्राज्य के ऊपर प्रत्यक्ष प्रहार किया।)
उत्तरम्:
सः कस्य उपरि प्रत्यक्ष प्रहारम् अकरोत्?
(उसने किसके ऊपर प्रत्यक्ष प्रहार किया?)

प्रश्न 6.
तत्समक्षं मुगलानाम् अहङ्कारस्य नैकवारं पराजयः अभवत्।
(उसके सामने मुगलों के अहंकार की अनेक बार हार हुई ।)
उत्तरम्:
तत्समक्षं केषां अहङ्कारस्य नैकवारं पराजयः अभवत्?
(उसके सामने किनके अहंकार की अनेक बार हार हुई?)

प्रश्न 7.
इदं सूरजमल्लस्य प्रभावशालितायाः निदर्शनम्?
(यह सूरजमल की प्रभावशीलता का उदाहरण है।)
उत्तरम्:
इदं सूरजमल्लस्य कस्याः निदर्शनम्?
(यह सूरजमल की किसका उदाहरण है?)

प्रश्न 8.
भारतस्य राजनीति: दोलायमान् आसीत्।
(भारत की राजनीति अस्थिर थी।)
उत्तरम्:
भारतदेशस्य राजनीतिः कीदृशी आसीत्?
(भारत देश की राजनीति कैसी थी?)

प्रश्न 9.
सूरजमल्लः भारतस्य नायकेषु अन्यतमः आसीत्।
(सूरजमल भारत के नायकों में से एक था।)
उत्तरम्:
सूरजमल्लः केषु अन्यतमः आसीत्?
(सूरजमल किनमें से एक था?)

प्रश्न 10.
भारतं विध्वंसक-शक्तीनां बाहुपाशे आसीत्।
(भारत विध्वंसकारी शक्तियों के चंगुल में था।)
उत्तरम्:
भारतं कासा बाहुपाशे आसीत्?
(भारत किनके बाहुपाश (चंगुल) में था?)

प्रश्न 11.
युद्धानां रोमांचक सजीवं च वर्णनम् अकरोत्।
(युद्धों का रोमांचक और सजीव वर्णन किया।)
उत्तरम्:
युद्धानां कीदृशी वर्णनं अकरोत्?
(युद्धों का कैसा वर्णन किया?)

प्रश्न 12.
तस्य जन्म 1707 तमे ईस्वीयवर्षऽभवत्।
(उसका जन्म 1707 ई० में हुआ ।)
उत्तरम्:
तस्य जन्म कदा अभवत्?
(उसका जन्म कब हुआ?)

प्रश्न 13.
तीर्थानि मन्दिराणि च विध्वंस्तानि क्रियन्ते स्म।
(तीर्थ और मन्दिर ध्वस्त किये जा रहे थे।)
उत्तरम्:
कानि विध्वंस्तानि क्रियन्ते स्म?
(क्या ध्वस्त किये जा रहे थे?)

प्रश्न 14.
तस्यायः विस्मिताः जायन्ते स्म।
(उसके शत्रु चकित हो जाते थे।)
उत्तरम्:
के विस्मिता: जायन्ते स्म?
(कौन चकित हो जाते थे?)

प्रश्न 15.
मल्लस्य अस्य शौर्य-वर्णनं कुर्वन् सूर्यमल्ल मिश्रणः लिखति?
(इस वीर के शौर्य का वर्णन करते हुए सूर्यमल्ल मीसण लिखता है।)
उत्तरम्:
मल्लस्य अस्य किं कुर्वन् सूर्यमल्ल मिश्रण लिखति?
(इस योद्धा का क्या करता हुआ सूर्यमल्ल मीसण लिखता है?)

प्रश्न 16.
सूर्यमल्ल मिश्रणः ‘वंशभास्कर’ ग्रन्थे लिखति।
(सूर्यमल्ल मीसण वंशभास्कर’ ग्रन्थ में लिखता है।)
उत्तरम्:
सूर्यमल्ल मिश्रण: कस्मिन् ग्रन्थे लिखति?
(सूर्यमल्ल मीसण किस ग्रन्थ में लिखता है?)

प्रश्न 17.
‘वंशभास्कर’ ग्रन्थः डिंगल भाषायां लिखित।
(वंशभास्कर ग्रन्थ डिंगल भाषा में लिखा हुआ है।)
उत्तरम्:
वंशभास्कर ग्रन्थः कस्यां भाषायां लिखित?
(वंशभास्कर ग्रन्थ किस भाषा में लिखा हुआ है?)

प्रश्न 18.
वीरोत्पादने अत्र कदापि न्यूनता नासीत्।
(वीरों के उत्पादन में यहाँ कभी कमी नहीं रही।)
उत्तरम्:
केषाम् उत्पादने अत्र कदापि न्यूनता नासीत्?
(किनके उत्पादन में यहाँ कभी कमी नहीं रही?)

प्रश्न 19.
वीरप्रसविनी भूमिरिपमुच्यते इतिहासविदिभिः
(इतिहासवेत्ताओं द्वारा यह वीरप्रसविनी भूमि कही जाती है।)
उत्तरम्:
कैः इयं भूमिः वीरप्रसविनी उच्यते?
(किनके द्वारा यह भूमि वीर प्रसविनी कही जाती है?)

प्रश्न 20.
सूरजमल्लः आभारतम् अतीव प्रसिद्धोऽस्ति।
(सूरजमल सारे भारत में अतीव प्रसिद्ध हैं।)
उत्तरम्:
सूरजमल्लः कियत्पर्यन्तम् अतीव प्रसिद्धः अस्ति?
(सूरजमल कहाँ तक अतिप्रसिद्ध हैं?)

पठ-परिचयः
इस राजस्थान धरा पर अन्न के उत्पादन में कमोवेशी हो सकती है, परन्तु वीरों के उत्पादन में यहाँ कभी कमी नहीं रही। इसलिए इतिहासकारों और कवियों द्वारा यह भूमि वीर प्रसविनी कही जाती है। जैसे यहाँ के महाराणा प्रताप का यशोगान सब जगह सुना जाता है। वैसे ही भरतपुर के महाराज सूरजमल पूरे भारत में अति प्रसिद्ध हैं। इस पाठ में उन्हीं के निर्मल जीवन चरित्र को अति संक्षेप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

मूलपाठ, शब्दार्थ, हिन्दी-अनुवाद

1. महाराजस्य सूरजमल्लस्य जन्म वसन्तपञ्चम्याम् (13 फेब्रवरी-दिने) 1707 तमे ईस्वीयवर्षे अभवत्। स हि महाराजस्य बेदनसिंहस्य ज्येष्ठपुत्रः तस्योत्तराधिकारी चासीत्। सूरजमल्लस्य अपरम् एकं नाम सुजानसिंहः इत्यासीत्। अष्टादश शताब्दस्य भारतस्य नायकेषु अन्यतमः आसीत् सूरजमल्लः। तस्य जनिः तदा अभूत् यदा भारतदेशस्य राजनीतिः अत्यन्तं दोलायमाना आसीत्, भारतं च विध्वंसक-शक्तीनां बाहुपाशे सर्वथा निबद्धम् आसीत्। नादिरशाहः, अहमदशाह अब्दाली इत्येताभ्यां पापिभ्याम् उत्तर-भारते महता प्रमाणेन नरवधाः गोवधाश्च क्रियन्ते स्म, तीर्थानि मन्दिराणि च विध्वस्तानि क्रियन्ते स्म। भारतं लुण्ठितुम् आगच्छतः बाह्याक्रमणकारिणः निरोद्धं न कोऽपि शासकः सज्जः आसीत्।

शब्दार्थाः-दोलायमाना = अस्थिरा (डोलती, झूलती हुई)। बाहुपाशे = भुजयो: बन्धने ( भुजाओं के बंधन में)। विध्वस्तानि = विनष्टानि (नष्ट हो गये)। लुण्ठितुम् = लुण्ठनाय (लूटने के लिए)। निरोद्धम् = अवरोद्धम् (रोकने के लिए)। ज्येष्ठपुत्रः = वरिष्ठः सुतः (बड़ा बेटा)। अपरम् = अन्यत्र (दूसरा)। शताब्दस्य = शताब्दी का। अन्यतमः = एक। सर्वथा = पूर्णतः (पूरी तरह)। सज्जः = तत्परः (तैयार)।

हिन्दी-अनुवाद-महाराज सूरजमल का जन्म वसन्त पंचमी (13 फरवरी के दिन) 1707 ईसवी वर्ष में हुआ। वह ही महाराज बदन सिंह का ज्येष्ठ पुत्र और उसका उत्तराधिकारी था। सूरजमल का दूसरा एक नाम सुजान सिंह था। अठारहवीं शताब्दी के भारत के नायकों में से एक सूरजमल था। उसका जन्म तब हुआ जब भारत देश की राजनीति अस्थिर थी और भारत विध्वंशक शक्तियों के भुजपाश में पूर्णत: बँधा हुआ था। नादिरशाह, अहमदशाह अब्दाली इन पापियों के द्वारा उत्तर भारत में महान् प्रभाव से नरवध और गोवध किए जा रहे थे। भारत को लूटने के लिए आये हुए बाहरी आक्रमणकारियों को रोकने के लिए कोई शासक तैयार नहीं था।

व्याकरणिक-बिन्दवः-ज्येष्ठपुत्र:= ज्येष्ठः च असौ पुत्रः (कर्मधारय समास)। तस्योत्तराधिकारी = तस्य + उत्तर + अधिकारी (गुण व दीर्घ सन्धि)। इत्येताभ्यां = इति + एताभ्याम् (यण संधि) बाहु-पाशे = बाहोः पाशे।

2. मल्लेषु मल्लः सूरजमल्लः शरीर-सौष्ठवस्य, सौन्दर्यस्य, सरलतायाः, चारित्रिक-दृढ़तायाः, धार्मिकतायाः, वीरतायाः, करुणायाः, त्यागस्य, बलिदानस्य, शरणागत-रक्षणस्य, प्रजावत्सल्यस्य, राष्ट्रवादस्य, सर्वपन्थसमादरस्यच साक्षात् प्रतिमूर्तिरासीत्। सूरजमल्लः स्वकालखण्डस्य अत्यन्तं दुर्धर्षः, अतिशयेन तेजस्वी, नितान्तं नीतिनिपुणः, अद्वितीयश्च योद्धा आसीत्। तेन प्रायशः सप्तसु महत्युद्धेषु विजयश्रीः चुम्बिता। कविः सूदनः स्वकीये ‘सुजानचरितम्’ इति काव्ये तेषां सप्त-युद्धानां रोमाञ्चक सजीवं च वर्णनम् अकरोत्।

शब्दार्था:-मल्लेषु = वीरेषु (वीरों में)। दुर्धर्षः = अनुल्लंघनीय (जिसे आसानी से दबाया या हराया नहीं जा सकता) नीतिनिपुणः = नीतौ निपुणः (नीति में निपुण)। शरीरसौष्ठवः = शरीरस्य सुघटनम् (सुन्दर शरीर)। दृढ़ताया = मजबूती। बलिदानस्य = आत्मत्यागस्य (आत्माहुति)। प्रजावात्सल्य = प्रजासु पुत्रवत् व्यवहारम् (प्रजाजनों पर वात्सल्य व्यवहार)।

हिन्दी-अनुवाद-मल्लों में मल्ल सूरजमल, शारीरिक गठन, सुन्दरता, सरलता, चरित्र की दृढ़ता, धार्मिक भावना, वीरता, करुणा, त्याग, बलिदान, शरणागत रक्षक प्रजावत्सल, राष्ट्रवाद और सर्वसम्प्रदायों में समान भाव की साक्षात् मूर्ति था। सूरजमल अपने समय का अत्यन्त अनतिक्रमणीय (अपराजेय) अत्यधिक तेजस्वी, पूर्णतः नीति में निपुण और अद्वितीय (कोई दूसरा जिसकी बराबरी न कर सके) वीर-योद्धा था। उसने प्रायः सात महायुद्धों में विजय श्री को (चूमा) प्राप्त किया। कवि सूदन ने अपने सुजानचरित काव्य में उनके सात युद्धों का रोमांचक और सजीव वर्णन किया है।

व्याकरणिक-बिन्दवः-चारित्रिक = चरित्र+ठक्। शरीरसौष्ठ्व = शरीरस्य सौष्ठवम् (षष्ठी तत्पुरुष समास)। सप्तसु युद्धेषु = सप्तयुद्धेषु (सप्तमी तत्पुरुष)। सुजानचरितम् = सुजानस्य चरितम्। सजीवं = सटीकं (यथार्थ, सार्थक)।

3. रणाङ्गणे पाणियुगलेन खड्गं चालयन्तं तं वीक्ष्य तस्यारयोऽपि विस्मिताः जायन्ते स्म। युद्धरतस्य मल्लस्य अस्य शौर्य-वर्णनं कुर्वन् प्रसिद्धः कविवरः सूर्यमल्ल-मिश्रणः ‘वंशभास्कर’ ग्रन्थे डिंगल-भाषायां लिखति

सह्यो भलैं ही जट्टनी, जय अरिष्ट अरिष्ट।
जिहिं जाठर रविमल्ल हुव, आमेरन को इष्ट॥

अस्य पद्यस्य हिन्दीच्छाया किञ्चिदित्थम्

नहीं जाटनी ने सही, व्यर्थ प्रसव की पीर।
जन्मा उसके गर्भ से, सूरजमल सा वीर॥

शब्दार्थाः-रणाङ्गणे = रणक्षेत्रे (युद्ध के मैदान में)। पाणियुगलेन = भुजद्वयेन करयुगलेन (दोनों हाथों से)। अरयोऽपि = शत्रवः अपि (शत्रु भी)। वीक्ष्य = दृष्ट्वा (देखकर)। खड्गम् = असिम् (तलवार को)। विस्मिताः = आश्चर्यचकिताः (आश्चर्यचकित हुए)।

हिन्दी-अनुवाद-रणक्षेत्र में दोनों हाथों से तलवार चलाते हुए को देखकर उसके शत्रु भी आश्चर्यचकित हो जाते थे। युद्ध में रत इस योद्धा के शौर्य का वर्णन करते हुए प्रसिद्ध कवि सूर्यमल्ल मिश्रण ‘वंशभास्कर’ ग्रन्थ में डिंगलभाषा में लिखते हैं

सह्यो भले ही जाट्टनी, जय अरिष्ट अरिष्ट।
जिहि जाठर रविमल्ल हुव आमेरन को इष्ट॥

इस पद्य की हिन्दी इस प्रकार है

नहीं जाटनी ने सही, व्यर्थ प्रसव की पीर।
जन्मा उसके गर्व से, सूरजमल सा वीर।

व्याकरणिक-बिन्दवः-रणाङ्गणे = रण+अङ्गणे (दीर्घ सन्धि)। रणस्य अङ्गणे = रण क्षेत्र में। पाणियुगलम् = पाणेयः युगलम् (षष्ठी तत्पुरुष)।

4. महराणा-प्रतापस्य छत्रपति शिवाजिमहाराजस्य चाऽनन्तर महाराजः सूरजमल्लः एव सः वीरः यः उत्साह-साहस-चातुरी-दृढ़तादिबलेन मुगलसाम्राज्यस्य उपरि प्रत्यक्षं प्रहारम् अकरोत् तत्समक्षं मुगलानाम् अहङ्कारस्य। नैकवार पराजयः अभवत्। मीरबख्शी सलावतखान-सदृशः शासकोऽपि तेन सह सन्धिं करोति यद् अद्यारभ्य अहं पिप्पलवृक्षच्छेदनं- गोहननं- मन्दिरादिध्वंसनं च नैव करिष्यामि। इदं सूरजमल्लस्य प्रभावशालतायाः एकं निदर्शनम्। तदानीन्तनः न कोऽपि भारतीय-शासकः मल्लेन तुल्यः दृश्यते। अष्टादश-शताब्दस्य प्रायशः सर्वेऽपि इतिहासज्ञाः वृत्तान्त-लेखेकाश्च तं मुक्तकण्ठं प्रशंसन्ति।

शब्दार्थाः-नैकवारम् = बहुबारम् (अनेक बार)। तदानीन्तनः = तत्कालीनः (उस समय का)। अनन्तरं = तत्पश्चात् (उसके बाद)। प्रहार = आघक्तम् (चोट)। तत्समक्षम् = उसके सामने। पराजयः = हार। अद्यारभ्य = आज से लेकर। पिप्पल वृक्षच्छेदनम् = पीपल का पेड़। ध्वंसनम् = विनाश। निदर्शनम् = उदाहरण, आदर्श। मुक्तकण्ठः = स्पष्ट, मुक्तकंठ से।

हिन्दी-अनुवाद-महाराणा प्रताप और शिवाजी महाराज के बाद महाराज सूरजमल ही वह वीर था जिसने उत्साह, साहस, चतुराई और दृढ़ता आदि के बल से मुगल साम्राज्य के ऊपर प्रत्यक्ष प्रहार किया। उनके समक्ष मुगलों के अहंकार की अनेक बार पराजय हुई। मीरबख्शी, सलावत खान के समान शासक भी उसके साथ सन्धि करता है कि आज से मैं पीपल के पेड़ों को काटने, गाय मारने और मन्दिरों को नष्ट करने का काम नहीं करूंगा। यह सूरजमल की प्रभावशीलता का उदाहरण है। उस समय का कोई भी भारतीय शासक उस योद्धा के समान दिखाई नहीं देता। अठारहवीं शताब्दी के प्रायः सभी इतिहासकार और वृत्तान्त लेखक मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हैं।

व्याकरणिक-बिन्दवः-नैकवारम् = न+एकवारम् (वृद्धि सन्धि)। तत्समक्षम् = तस्य समक्षम् (षष्ठी तत्पुरुष)। शासकोऽपि = शासकः + अपि। (विसर्ग पूर्वरूप संधि)। अद्यारभ्य = अद्य+आरभ्य (दीर्घ संधि)। अरभ्य = आ+र+ल्यप्। छेदनम् = छिद्+ल्युट्।

5. जाट-जातौ सूरजमल्ल तदेव स्थानं धत्ते यत्खलु स्थानं विदेशीयेषु प्लेटो-नेपोलियन-लूथर इत्यादीनामस्ति। कश्चिदेकः लेखकस्तु तं ‘जाट-प्लेटो’ इति विरुदेन भूषितवानेव। हिन्दु- इतिहासज्ञाः तं 18 शताब्दस्य ‘कनिष्कः’ इति मुस्लिमाश्च तं ‘अन्तिमः प्रतापी हिन्दु-नरेशः’ इति घोषितवन्तः। औपचारिक शिक्षा-रहितोऽपि सूरजमल्लः वस्तुतः समकालीनेषु वीरेषु भीमः, नीतिज्ञेषु कृष्णः, अर्थशास्त्रज्ञेषु च कौटिल्यः आसीत् इति मन्यते। सैय्यद गुलाम अली नकवी स्वीये ‘इमादुस्सादात’ इत्याख्ये ग्रन्थे लिखति यत् राजनीतेः, राजस्वस्य, नागरिक- न्यायस्य च प्रबन्ध-नैपुण्ये आसफजाह-बहादुर-निजामं विहाय हिन्दुस्थाने तत्समये नैकोऽपि कश्चिद् तत्तुल्यः आसीत्।

शब्दार्था:- धत्ते = दधाति (रखता है)। विरुदेन = उपाधिना (उपाधि से)। घोषितवन्तः = घोषितं कृतम् (घोषित किया गया)। वस्तुतः = वास्तव में। विहाय = छोड़कर। तत्समयं = उस समय। नैकोऽपि = के अलावा, कश्चिद् = कोई भी। तत्तुल्य = के समान।

हिन्दी-अनुवाद-जाट-जाति में सूरजमल ने वही स्थान बनाया जो स्थान निश्चित ही विदेशियों में प्लेटो, नेपोलियन, लूथर इत्यादि का है। कोइ एक लेखक ने तो उसको ‘जाट-प्लेटो’ की विरुद से भूषित किया। हिन्दू इतिहासज्ञों ने उसको 18वीं शताब्दी का कनिष्क, मुसलमानों ने उसको अन्तिम प्रतापी हिन्दू-नरेश’ ऐसा घोषित किया। औपचारिक शिक्षा-रहित भी सूरजमल वास्तव में समकालीन वीरों में भीम, नीतिज्ञों में कृष्ण, अर्थशास्त्रियों में कौटिल्य था। ऐसा माना जाता है सैयद गुलाम अली नकवी अपने इमादुस्सादात नाम के ग्रन्थ में लिखता है कि राजनीति का, राजस्व का, नागरिक न्याय का और प्रबन्ध की निपुणता में आसफजाह बहादुर-निजाम के अलावा हिन्दुस्तान में उस समय एक भी कोई भी उसके समान नहीं था।

व्याकरणिक-बिन्दवः-तदेव = तत् + एव। (हल सन्धि।) इत्याख्ये = इति +आख्ये (यण सन्धि) नैपुण्य = निपुण + व्यञ्। विहाय = वि+हो+ल्यप्। नैको = न एको।

6. ‘इळा न देणी आपणी’ इति मातृशिक्षां पालयन्, ‘धय॒द् हि युद्धात् श्रेयोऽन्यत् क्षत्रियस्य न विद्यते’ इति गीतोपदेशं च परिपालयन् राष्ट्रधर्म-रक्षणाय प्राणान् पणीकृत्य अपि युध्यमानः 25 डेसेम्बर 1763 ई० इति दिवसे रणे चाभिमुखे हतः।

प्रताप इव, शिवाजी इव, बन्दा बैरागी इव, गुरुगोविन्दसिंह इवे च सूरजमल्लस्य परमः प्रभावः अद्यापि इतिहासे गुञ्जति इव। शब्दार्थाः-इळा न देणी आपणी = स्वकीया मातृभूमिः न दातव्या (अपनी मातृभूमि नहीं देनी चाहिए)। तत्तुल्यः = तेन सदृशः (उसके समान)। इळाः = भूमिः (धरती)। श्रेयः = कल्याणम् (कल्याण)। प्राणान् पणीकृत्य = प्राणों की बाजी लगाकर। युध्यमानः = युद्धरत (युद्ध करते हुए)। अभिमुखे = सम्मुखे (सामना करते हुए)। वैरागी = (संन्यासी)। पणीकृत्य = वाजी लगाकर, दाब पर लगाकर भी। गुञ्जति = गूंजता है।

हिन्दी-अनुवादः-अपनी मातृभूमि नहीं देनी चाहिए। इस माँ की शिक्षा का पालन करते हुए धर्म-युद्ध’ से बढ़कर क्षत्रीय के लिए और कुछ नहीं है।’ इस गीता के उपदेश का पालन करते हुए राष्ट्रधर्म की रक्षा के लिए प्राणों की बाजी लगाकर भी युद्धरत 25 दिसम्बर 1763 ई० के दिन युद्ध में सामना करते हुए मारा गया।

व्याकरणिक-बिन्दवः-मतृशिक्षाः = मातुः शिक्षा (षष्ठी तत्पुरुष) पालयन् = पाल्+शतृ। गीतोपदेशः = गीता+उपदेश (गुण सन्धि) गीतायाः उपदेशः (षष्ठी तत्पुरुष) राष्ट्रधर्म-रक्षणाय = राष्ट्रस्य धर्म रक्षणाय (षष्ठी, द्वितीय)।