2We’re Not Afraid to Die…. if We Can AII Be Together”

[“हम मरने से नहीं डरते… यदि हम सब साथ हो सकें”]

Gordon Cook and Alan East

TEXTBOOK QUESTIONS

Understanding the Text

Q. 1. List the steps taken by the captain

कप्तान द्वारा उठाये गये कदमों की सूची बनाइए

  1. to protect the ship when the rough weather began.

खराब मौसम होना शुरू होने पर जहाज की रक्षा करने हेतु।

  1. to check the flooding of the water in the ship.

जहाज में पानी भर जाने को रोकने हेतु। जा

Ans. (i) To slow the ship, the storm jib was dropped. A heavy rope was tied across the stern. Everything was tightly fastened.

जहाज को धीमा करने हेतु जहाज के तिकोने बादबान को नीचे कर दिया। जहाज के पिछले हिस्से के आर-पार भारी रस्से को बाँध दिया गया। प्रत्येक चीज को मजबूती से बाँध दिया गया।

(ii) He managed to stretch canvas and fix water-proof hatch covers across the widely open holes.

उसने चौडे, खुले छिद्रों के आर-पार मोटा कैनवास फैला दिया तथा फर्श के तल में बने द्वार के ढक्कन इन छिद्रों पर लगा दिए।

Q. 2. Describe the mental condition of the voyagers on 4 and 5 January.

चार एवं पाँच जनवरी को जहाज के यात्रियों की मानसिक दशा का वर्णन कीजिए।

Ans. By January 4, they were able to pump out most of the water that had flooded in. They had their first meal in almost two days. However, their condition became desperate again by dawn on January 5 because of winds and high waves. Jon asked the author whether they were going to die and said that they were not afraid of dying if they could all be together. The author was determined to fight the sea with everything he had. He stopped the ship using an improvised anchor. That evening Mary and the author sat together holding hands. Both the author and Mary felt that the end was very near.

– चार जनवरी तक वे अधिकतर पानी को पम्पों द्वारा जहाज से बाहर निकालने में सफल हो गये थे। उन्होंने करीब दो दिन बाद अपना पहला भोजन खाया था। तथापि उनकी हालत 5 जनवरी के सवेरे तक फिर बुरी हो गयी क्योंकि हवाएँ तेज थीं तथा लहरें बहुत ऊँची थीं। जोन ने लेखक से पूछा कि क्या वे मरने जा रहे हैं और यह कहा कि वे मरने से नहीं डरते अगर वे सभी साथ-साथ रहें । लेखक ने संकल्प कर लिया कि वह समुद्र से संघर्ष करेगा और प्रत्येक उस चीज का सहारा लेगा जो उसके पास थी। लेखक ने कामचलाऊ लंगर का प्रयोग कर जहाज को रोका। शाम को मेरी तथा लेखक हाथ पकड़ कर बैठे थे। लेखक तथा मेरी दोनों ने महसूस किया कि अन्त निकट था।

Q. 3. Describe the shifts in the narration of the events as indicated in the three sections of the text. Give a sub-title to each section.

पाठ के तीन भागों में वर्णित घटनाओं के क्रम का वर्णन कीजिए। प्रत्येक भाग को एक उपशीर्षक दीजिए।

Ans. 1. Preparation for the Voyage and the Encounter with the Deadly Waves—The first section of the text describes preparations for the great voyage around the earth. The first leg of their journey from Plymouth, England, to Cape Town passed pleasantly. From Cape Town onwards to the east, they had to face strong gales and alarmingly high waves. On the evening of January 2, the ship was struck by a very gigantic wave which smashed the ship and threw the author overboard. However, he was saved miraculously. He had his ribs and teeth broken and his mouth was filled with blood. The water that had flooded the ship had to be pumped out. They made calls on their radio for the help with no response. Sue had a head injury and black eyes.

2. From Respite to Desperation—The second section begins with some respite from the storm and its consequences. The water level was under control and they could take some rest. They hoped to reach the islands provided the wind and the waves abated. They had their first meal in two days. By January 5, their situation was again desperate. Jon declared that he was not afraid of dying. The author made all efforts to save the ship. However, the storm subsided by the morning of January 6. The author made fresh calculations in his chart-room.

3. The Victory of Courage and Optimism—The third section describes their landing on the island of Amsterdam, their welcome by the inhabitants and the author’s reflection on the courage and optimism of everyone of them, including the children.

_1. यात्रा की तैयारी तथा घातक लहरों से मुकाबला-पाठ का प्रथम भाग पृथ्वी के चारों ओर की जाने वाली समुद्री यात्रा की तैयारी का वर्णन करता है। उनकी यात्रा का प्रथम चरण इंग्लैण्ड के प्लाइमाउथ से दक्षिण अफ्रीका के शहर केप टाउन आनन्द के साथ सम्पन्न हो जाता है। केप टाउन से पूर्व की ओर यात्रा के दौरान उन्हें तेज हवाओं तथा भयानक रूप से ऊँची लहरों का सामना करना पड़ता है। 2 जनवरी की शाम को जहाज से एक भयानक आकार की लहर टकराई जिसने जहाज को तोड़ डाला तथा लेखक को समुद्र में फेंक दिया। किन्तु लेखक रहस्यमय ढंग से बच गया। उसकी पसलियाँ तथा दाँत टूट गये और मुँह खून से भर गया। जहाज में भर गये पानी को बाहर निकालना आवश्यक था। उन्होंने रेडियो पर सहायता के लिए सन्देश भेजे, लेकिन परिणाम कुछ नहीं निकला। सू को सिर की चोट लगी तथा आँखें काली हो गयीं। _

2. राहत से निराशा की ओर— पाठ का दूसरा भाग तूफान तथा इसके परिणामों से कुछ मुक्ति मिल जाने

ता है। जहाज में पानी का स्तर नियन्त्रण में आ गया था तथा वे थोडा आराम कर सकते थे। उन्हें उम्मीद थी कि वे द्वीपों पर पहुँच सकते थे बशर्ते हवाएँ तथा लहरें थोड़ी थम जायें। उन्होंने दो दिन बाद अपना प्रथम भोजन किया। 5 जनवरी तक उनकी हालत पुनः निराशाजनक हो गयी। जोन ने कहा कि उसे मरने से डर नहीं लगता। लेखक ने जहाज को बचाने के सभी प्रयास किए। जो भी हो, तूफान 6 जनवरी की सुबह तक कम हो गया। लेखक ने चार्टरूम में जाकर ताजी. गणनाएँ कीं।

3. साहस एवं आशावादिता की विजय- तीसरा भाग एम्स्टर्डम द्वीप पर उनके उतर जाने का वर्णन करता है। वहाँ के निवासियों द्वारा लेखक एवं उसके साथी लोगों का स्वागत किए जाने तथा लेखक द्वारा अपने साथियों के साहस तथा आशावाद पर चिन्तन किये जाने का वर्णन भी इस भाग में होता है।

Talking about the Text:

Discuss the following questions with your partners :

Q. 1. What difference did you notice between the reaction of the adults and the children when faced with danger?

खतरे से सामना होने की स्थिति में बड़ों एवं बच्चों की प्रतिक्रिया में आपने क्या अन्तर देखा?

Ans. We don’t find any difference between the reaction of the adults and the children when faced with danger. Both behave courageously without giving up. We see in this story that the author makes use of all the resources of his body and mind to cope successfully with the dangerous sea. Even when he finds that their end was near he does not give up the fight. The sight of his injured children does not discourage him. His wife, Mary, is equally bold. She keeps at the wheel at the crucial moments. Similarly, Larry and Herb are cheerful and optimistic under the direst stress.

Strangely enough, even the children show a rare courage in face of danger. They help the adults by not making much of their injuries and by not panicking. Jon, by stating that they are not afraid of dying only makes things easier for the author. Similarly, Sue draws caricatures of her parents to make them laugh even in the direst of situation. __

खतरे से सामना होने पर बच्चों एवं बड़ों की प्रतिक्रिया में हम कोई फर्क नहीं देखते। दोनों ही हिम्मत हारे बिना साहस के साथ व्यवहार करते हैं। हम इस कहानी में देखते हैं कि लेखक अपने शरीर एवं मस्तिष्क के सारे संसाधनों का उपयोग करते हुए खतरनाक समुद्र से सफलता के साथ संघर्ष करता है। जब उसे यह लगता है कि उनका अन्त निकट आ पहुंचा है तब भी वह हिम्मत नहीं हारता और संघर्ष करता रहता है। उसके घायल बच्चों का दृश्य भी उसे निरुत्साहित नहीं करता। लेखक की पत्नी मेरी भी समान रूप से साहसी है। वह संकट के क्षणों में स्टेअरिंग व्हील पर काम करती रहती है। इसी प्रकार लॉरी एवं हर्ब भी भयानक मानसिक तनाव के दौरान भी प्रसन्न एवं आशान्वित बने रहते हैं।

आश्चर्य की बात है कि बच्चे भी खतरे के समक्ष दुर्लभ साहस का प्रदर्शन करते हैं। वे अपनी चोटों को महत्त्व न देकर तथा भयाक्रान्त न होकर बड़ों की सहायता ही करते हैं। जोन ने यह कहकर कि वे मौत से नहीं डरते लेखक के लिए रास्ता ही आसान बनाया है। इसी प्रकार सू ने अपने माता-पिता के व्यंग्य-चित्र बनाकर उन्हें मुश्किलतम क्षणों में भी हँसने को बाध्य किया है।

Q. 2. How does the story suggest that optimism helps to endure “the direst stress” ?

कहानी किस प्रकार यह दिखाती है कि आशावाद भयानक तनाव को भी सहन करने में मदद करता है?

Ans. Optimism and courage together make even impossible things not only possible, but also easily achievable. Had the author given up under the direst stress, he would have perished along with his family and the crew. He could face the dangers with determination and courage because he was a hopeful man. Hope and courage make him victorious in the end. Not only the author, but also his wife, Mary and children, Jon and Sue, are optimistic despite their injuries and pains. Larry and Herb fight off the direst stress by keeping cheerful and optimistic to the very end. Thus, this story conveys a message of optimism to the readers.

___ आशावाद एवं साहस न केवल असम्भव को सम्भव बना देते हैं बल्कि आसानी से प्राप्य भी बना देते हैं। अगर लेखक ने भयानक मानसिक तनाव के कारण समर्पण कर दिया होता तो वह अपने परिवार तथा चालक दल के सहित नष्ट हो गया होता। वह खतरों का सामना संकल्प एवं साहस के साथ कर सका क्योंकि वह एक आशावादी व्यक्ति था। आशा एवं साहस उसे अन्त में विजयी बनाते हैं। न केवल लेखक बल्कि उसकी पत्नी मेरी तथा बच्चे जोन एवं सू भी आशावादी रहते हैं, उनकी चोटों एवं कष्टों के बावजूद भी। लॉरी तथा हर्ब भयानक तनाव को भी परास्त कर देते हैं, अन्त तक प्रसन्न एवं आशावादी बने रहकर। इस प्रकार यह कहानी पाठकों को आशावाद का सन्देश देती है।

Q. 3. What lessons do we learn from such hazardous experiences when we are face-to-face with death?

हम ऐसे खतरनाक अनुभवों, जब हम मृत्यु के समक्ष होते हैं, से हम क्या शिक्षाएँ ग्रहण करते हैं?

Ans. Such hazardous experiences bring out the best in man. In the present story we learn about the great qualities of the author and the others who were with him on the journey. The first lesson to be learnt from this story is, “Hope for the best and be prepared for the worst.”

We also learn that only hoping for the best is not enough. We must work hard with courage to achieve the best. Failures must inspire us to go forward rather than stop and give up. We also learn that courage and determination to fight out to the very end take the ship to its destination. Finally, we learn that we should have love and sympathy for those who stand by us in different situations. We learn this from Jon and Sue.

ऐसे खतरनाक अनुभव मनुष्य के श्रेष्ठ गुणों को सामने लाते हैं। इस कहानी में हम लेखक तथा उसके साथ यात्रा पर जाने वाले अन्य लोगों के महान् गुणों के बारे में जान लेते हैं। प्रथम शिक्षा जो इस कहानी से ली जा सकती है वह है, “श्रेष्ठ के प्रति आशान्वित रहो, किन्तु अनिष्टतम के लिए तैयार रहो।” 12 हम यह भी सीखते हैं कि केवल श्रेष्ठ की आशा करना पर्याप्त नहीं होता। हमें साहस के साथ कठिन श्रम करना होगा ताकि हम श्रेष्ठ को प्राप्त कर सकें। असफलताएँ हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करनी चाहिए,

न कि रुक जाने एवं समर्पण करने के लिए। हम यह भी जानते हैं कि साहस एवं संकल्प, अन्त तक संघर्ष करने का, जहाज को उसकी मंजिल तक पहुँचाता है। अन्त में हम यह भी सीखते हैं कि मुश्किल परिस्थितियों में हमारे साथ खड़े रहने वालों के प्रति प्रेम एवं सहानुभूति रखनी चाहिए। यह बात हम जोन एवं सू से सीखते हैं।

Q. 4. Why do you think people undertake such adventurous expeditions in spite of the risks involved ?

आपके अनुसार लोग ऐसे साहसिक अभियानों पर खतरों के बावजूद क्यों जाते हैं?

Ans. Love of adventure is instinctive in man. He loves taking risks. Just as flying is instinctive for a young bird, similarly, undertaking dangerous expeditions is instinctive for man. There is nothing bad about acts of adventure so long as they do not harm others. Adventurous acts develop many positive qualities in man. Determination, courage, optimism, love and sympathy are some of the positive qualities that adventures develop in us. The people involved in the present expedition have all these qualities.

साहसिक कार्यों के प्रति लगाव मनुष्य की जन्मजात प्रवृत्ति होती है। मनुष्य को खतरे उठाना अच्छा लगता है। जिस प्रकार एक शिशु पक्षी के लिए उड़ना जन्मजात प्रवृत्ति होती है उसी तरह खतरनाक अभियानों पर जाना मनुष्य की जन्मजात प्रवृत्ति है। खतरे के कार्यों में बुरा कुछ भी नहीं होता बशर्ते वे दूसरों को हानि न पहुँचाते हों। साहसिक कार्य मनुष्य के भीतर कई सकारात्मक गुणों को विकसित करते हैं। संकल्प, साहस, आशावाद, प्रेम एवं सहानुभूति ऐसे ही कुछ सकारात्मक गुण हैं जो साहसिक कार्य हमारे भीतर विकसित करते हैं। प्रस्तुत अभियान में शामिल लोगों में ये सब गुण मौजूद हैं।

ADDITIONAL QUESTIONS

Short Answer Type Questions (Word Limit: 10-15 Words)

Q. 1. What was the purpose of the writer’s voyage? लेखक की समुद्री यात्रा का उद्देश्य क्या था?

Ans. The purpose of the writer was to repeat the round-the-world voyage made 200 years earlier by Captain James Cook.

लेखक का उद्देश्य कैप्टन कुक द्वारा 200 वर्ष पूर्व दुनिया के चारों ओर की गयी समुद्री यात्रा को दोहराना था।

Q. 2. For how much time had the writer been preparing for the voyage?

समुद्री यात्रा के लिए लेखक कितने समय से तैयारी कर रहा था?

Ans. He had been preparing for the voyage for the last sixteen years.

वह पिछले 16 वर्षों से समुद्री यात्रा के लिए तैयारी कर रहा था।

Q. 3. What preparations did they make?

उन्होंने क्या तैयारियाँ की?

Ans. They sharpened their sea-faring skills for sixteen years. They professionally built their ship and tested it in the roughest weather they could find.

.उन्होंने समुद्री यात्रा सम्बन्धी अपने चातुर्य को सोलह वर्षों तक तीक्ष्ण बनाया। उन्होंने अपने जहाज को कुशलता से निर्मित किया तथा इसका बुरे से बुरे मौसम—जो उन्हें मिल सकता था—में परीक्षण किया।

Q.4. How much distance did they cover in the first leg of their voyage?

समुद्री यात्रा के प्रथम चरण में उन्होंने कितनी दूरी तय की?

Ans. The first leg of their journey was from Plymouth (England) to Cape Town (the southernmost tip of Africa). The distance they covered was 1,05,000 kilometres.

उनकी यात्रा का प्रथम चरण इंग्लैण्ड के प्लाइमाउथ से शुरू हुआ और अफ्रीका के सुदूर दक्षिण शहर केप टाउन में समाप्त हुआ। उन्होंने 1,05,000 किमी. की दूरी तय की।

Q.5. How did the first leg of their journey pass? What happened after they left Cape Town?

उनकी यात्रा का प्रथम चरण कैसा रहा? केप टाउन से रवाना होने के बाद क्या हुआ?

Ans. The first leg of their journey passed off pleasantly. But they had to face strong gales and high waves from their second day out of Cape Town.

उनकी यात्रा का प्रथम चरण आनन्दपूर्ण तरीके से सम्पन्न हो गया किन्तु केप टाउन से रवाना होने के दूसरे दिन से उन्हें तगड़ी हवाओं तथा ऊँची लहरों का सामना करना पड़ा।

Q. 6. What happened at dawn on 2 January?

दो जनवरी के सवेरे क्या हुआ?

Ans. At dawn on 2 January they had to face gigantic waves. They could see a vast sea rolling towards them. The winds screamed loudly.

2 जनवरी के सवेरे उन्हें विशाल लहरों का सामना करना पड़ा। उन्हें एक विशाल समुद्र उनकी ओर लुढ़कता दिखाई देता। हवाएँ जोर-जोर से चीखती थीं।

Q. 7. What was the first indication of the coming disaster?

आने वाले विनाश का प्रथम संकेत क्या था?

Ans. The first indication of the coming disaster came at 6 p.m. There was an ominous silence. The wind dropped and the sky grew dark.

आने वाले विनाश का पहला संकेत शाम 6 बजे आया। एक अनिष्ट से भरी चुप्पी छा गयी। हवा ठहर गयी और आकाश में अँधेरा हो गया।

Q. 8. How did the disaster come?

विनाश किस प्रकार आया?

Ans. A tremendous explosion shook the deck. A torrent of water broke over the ship. The writer’s head smashed into the wheel and he flew overboard.

एक भयानक विस्फोट ने जहाज को हिला दिया। पानी की एक तेज धारा जहाज पर आकर गिरी। लेखक का सिर स्टेअरिंग व्हील से जोर से टकराया और वह जहाज के बाहर जा गिरा।

Q. 9. What happened to the writer and how was he saved?

लेखक के साथ क्या हुआ तथा वह कैसे बचा?

Ans. The ship was about to overturn. A wave hurled it upright. His life-line jerked and he was thrown back into the ship.

* जहाज उलटने ही जा रहा था। एक लहर ने इसे झटके से सीधा कर दिया। उसकी जीवन-रक्षक रस्सी ने झटका खाया और वह वापस जहाज में जा गिरा।

Q. 10. What injuries did the writer suffer?

लेखक को क्या चोटें आयीं? .

Ans. He was badly injured. His left ribs were broken. His mouth was filled with blood and broken teeth. .

वह बुरी तरह घायल हो गया। उसकी बायीं पसलियाँ टूट गयीं। उसका मुँह खून एवं टूटे हुए दाँतों से भर गया।

Q. 11. What happened to the ship?

जहाज को क्या नुकसान हुआ?

Ans. The ship was badly smashed. The decks gave way and water entered the ship from all sides. The starboard side bulged inwards.

जहाज बुरी तरह टूट-फूट गया। जहाज की फर्श (डैक) टूट-फूट गयी तथा सभी तरफ से जहाज में पानी भरने लगा। जहाज का दायां पासा पूरी तरह अन्दर की ओर धंस गया।

Q. 12. What did the travellers do to save themselves? यात्रियों ने स्वयं को बचाने के लिए क्या किया?

Ans. They had to pump out the water which had entered the ship. The writer managed to plug the holes with canvas and water-proof hatch covers.

उन्हें जहाज में घुस आये पानी को पम्पों के द्वारा बाहर निकालना पड़ा। लेखक ने किसी तरह छिद्रों को मोटे कपड़े तथा फर्श (डैक) पर बने दरवाजों की मदद से बन्द कर दिया।

Q. 13. How did the children behave during the disaster?

विनाश के दौरान बच्चों का व्यवहार कैसा था?

Ans. The children, Sue and Jon, behaved courageously and patiently. They did not panic though they also suffered serious injuries.

__बच्चों-स्यू तथा जोन ने साहस एवं धैर्य के साथ व्यवहार किया। उन्होंने हड़कम्प नहीं मचाया यद्यपि उन्हें भी गम्भीर चोटें लगीं।

Q. 14. How did the travellers face the second disaster?

यात्रियों ने दूसरे विनाश का सामना किस प्रकार किया?

Ans. The writer was determined to fight the sea. He stopped the ship, keeping its undamaged side facing the waves.

लेखक ने समुद्र से संघर्ष करने की ठान ली। उसने जहाज को रोक लिया तथा इसके सुरक्षित हिस्से को आती हुई लहरों के सामने कर दिया।

Q. 15. How did the travellers feel when they saw the islands?

यात्रियों ने कैसा महसूस किया जब उन्हें टापू दिखाई दिया?

Ans. They felt great relief and joy. The children ran to embrace their father.

उन्होंने अत्यन्त चैन एवं आनन्द का अनुभव किया। बच्चे अपने पिता का आलिंगन करने दौड़े।