4 Drought [सूखा ( अनावृष्टि)]

कठिन शब्दार्थ एवं हिन्दी अनुवाद

The village was called Kashipur. ……………………….. passers-by. (Page 20)

कठिन शब्दार्थ-tenants (टेनॅन्ट्स) = काश्तकार ruthless (रुथलिस्) = निर्दयी priest (प्रीस्ट) = पुरोहित। offering prayers (ऑफरिंग प्रेयर्स) = पूजा-पाठ करना। nearing (नीअरिंग) = समीप आ रहा। patch of cloud (पैच आफ क्लाउड) = बादल का एक टुकड़ा। rainless (रेनलॅस) = बिना बादलों वाला, वर्षा रहित । firmament (फार्मेण्ट) = आकाश poured (पोर्ड )= उंडेल रहा था fire (फायर) = आग। in front (इन फ्रण्ट) = सामने। stretching out (स्ट्रैचिंग आउट) = फैलाये हुए था। horizon (हॅराइजन) = क्षितिज (वह स्थल जहाँ पृथ्वी तथा आकाश मिले हुए दिखाई देते हैं)। broken up (ब्रोकन अप) = टूट गया था। tens of thousands = कई हजार। fissures (फिशर्स) = गहरी दरारों के रूप में फट जाना। blaze (ब्लेज) = ज्वाला Mother Earth (मदर अर्थ) = धरती माता। unceasingly (अनसीजिंगली) = बिना रुके हुए। gazed (गेज्ड) = निरन्तर देखता रहता था। sinuous (सिनुअस) = घुमावदार | dazed (डेज्ड) = भौचक्का कर देता था I drunkenness (इन्कननिस) = नशे की बेहोशी। ruins (रुइन्ज) = खण्डहर | courtyard (कोर्टयार्ड) = आँगन (परिसर) | public highway (पब्लिक हाइवे) = जनमागे| passers-by (पाससे-बाई) = राहगीर।

हिन्दी अनुवाद-वह गाँव काशीपुर कहलाता था। वह एक छोटा-सा गाँव था, लेकिन उसका जमींदार -उससे भी अधिक छोटा था (अर्थात् छोटी प्रवृत्ति का था)। फिर भी उसके काश्तकार उसके सामने खड़े होने का

साहस नहीं कर सकते थे। वह बहुत ही निर्दयी था।

उस दिन उसके सबसे छोटे पुत्र का जन्मदिन था। दोपहर का समय था। पुरोहित तारकरत्न, जमींदार के घर से अपने घर वापस जाने के रास्ते पर था, जहाँ वह पूजा-पाठ कर रहा था। मई के महीने का अन्त समीप आ रहा था लेकिन आकाश में बादल (मेघ) का एक टुकड़ा भी दिखाई नहीं देता था। वर्षारहित आकाश आग बरसा रहा था।

सामने ही खेत क्षितिज तक फैला हुआ दिखाई दे रहा था। खेत धधक कर उठती हुई आग की लपटों में कई हजार गहरी दरारों के रूप में फट गया था और यह ऐसा दिखाई देता था मानो कि धरती माता का जीवन रक्त धुएँ के रूप में निरन्तर बिना रुके उनमें होकर बहकर निकल रहा हो। यदि कोई व्यक्ति उन घुमावदार उड़ती हुई आग की लपटों पर लगातार देखता रहता हो तो ऐसा लगता था मानो कि वह नशे में बेहोश होकर भौंचक्का-सा देख रहा हो।

सड़क के किनारे खेत के एक सिरे पर गफूर जुलाहे का मकान था। अब उसके मकान की कच्ची दीवारें तो खण्डहर हो गई थीं, उसके घर का आँगन (प्रांगण) जनमार्ग को स्पर्श कर रहा था और घर की व्यक्तिगत एकान्तता (गोपनीयता) राहगीरों की दया पर आ पड़ी थी।

“Hey ! Gafur ! …………………….. eating somebody’s straw”. (Pages 20-21)

कठिन शब्दार्थ-called out (कॉल्ड आउट) = पुकारना scoundrel (स्काउन्ड्रेल) = बदमाश | shivering (शिवरिंग) = काँपते हुए। acacia (ऐकेशिया) = एक प्रकार का बबूल का पेड़। leaned (लीन्ड) = सहारा लेकर खड़ा (गड़ा) हुआ था। demanded (डिमान्डिड) = पूछ लिया। indicating (इन्डीकेटिंग) = इशारा करते हुए। crimson (क्रिमजन) = लाल। indignation (इन्डिग्नेशन) = क्रोध, घृणा। harsh (हार्श) = कठोर । to follow (टु फौलो) = समझना। import (इम्पोर्ट) = (यहाँ-) अर्थ। flay (फ्ले) = कोड़े लगाना । threshed (धैस्ट) = कूटकर भूसा अलग कर देना। paddy (पैडी) = धान

हिन्दी अनवाद-“अरे! गफर! क्या कोई अन्दर है ?” तारकरत्न ने सड़क के किनारे एक पेड की छाया में खड़े होकर पुकारते हुए कहा।

“आपको क्या काम है ? पिताजी तो बुखार से पीड़ित हैं।” गफूर की दस वर्ष की छोटी पुत्री ने दरवाजे पर आते हुए जवाब दिया।

“बुखार! उस बदमाश को बुला!” तारकरत्न ने जोर से चिल्लाते हुए कहा।

यह शोर-गुल बुखार में काँपते हुए गफूर को बाहर ले आया। एक पुराने बबूल के पेड़ से जो कि उसकी टूटी दीवार के सहारे झुका हुआ था, एक बैल बँधा हुआ था।

“यह सब मैं क्या देख रहा हूँ?” बैल की तरफ इशारा करते हुए तारकरल ने पूछा । “क्या तुम्हें एहसास है, जमींदार इस सब को सहन नहीं करेगा?” उसका चेहरा घृणा से और धूप (सूर्य) की गर्मी से लाल हो रहा था। उससे तो यही आशा थी कि उसके शब्द बहुत ही क्रोधपूर्ण तथा कठोर होंगे। लेकिन गफूर सिर्फ उसकी तरफ देखता रहा, वह उसके शब्दों के अर्थ को नहीं समझ सका।

“अच्छा”, तारकरत्न ने कहा, “मैंने इसको सुबह वहाँ बँधे हुए देखा और अभी भी यह वहीं बँधा हुआ है। अगर यह बैल मर जायेगा तो तुम्हारा मालिक जीते जी तुम्हारी चमड़ी उतार लेगा।”

“माई-बाप, मैं क्या करूँ? मैं तो मजबूर हूँ। मुझे पिछले कुछ दिनों से बुखार है। मैं तो इसे चराने के लिए बाहर भी नहीं ले जा सकता। मैं अपने को बहुत बीमार महसूस करता हूँ।”

“क्या तुम इसको अपने आप ही चरने के लिए खुला नहीं छोड़ सकते ?”

“मैं इसे कहाँ छोडॅ. माई-बाप। लोगों ने अभी अपने परे धान से अनाज नहीं निकाला है। वह अभी भी खेतों में पड़ा हुआ है। भूसे को भी इकट्ठा नहीं किया है। सब कुछ अधजला सा हो गया है। ………… कहीं भी घास की एक पत्ती भी नहीं है। माई-बाप, मैं इसको कैसे खुला छोड़ सकता हूँ? वह किसी के भी धान में मुँह मार सकता है या किसी के भूसे को खा सकता है।”

Tarkaratna softened ………………………… a wisp of it. (Page 21)

कठिन शब्दार्थ-softened (सॉफॅन्ड) = नरम पड़ गया। at least (ऐट लीस्ट) = कम से कम। munch (मन्च) = जुगाली करना। escaped him (इस्केप्ट हिम) = उसको बचा लिया। that much (दैट मच) = उतना भी। belly (बैली) = उदर (पेट)। bull (बुल) = बैल। callous (कैलस) =

हिन्दी अनुवाद-“अच्छा, तो क्या तू उनके रुपये का कर्जदार नहीं है ?” तारकरत्न ने बिना हिले-डुले ही कहा। “तू उनके रुपये क्यों नहीं चुकायेगा ? क्या तू आशा करता है कि जमींदार तेरा खर्चा चलायेगा?”

“लेकिन मैं उन्हें क्या देकर चुकाऊँगा? हम उनके लिए चार बीघा खेत जोतते हैं। लेकिन पिछले दो वर्षों से सूखे के समय में खेतों में धान ही सूख गया है। मेरी पुत्री और मेरे लिये खाने के लिए ही पर्याप्त नहीं मिलता है। इस झोंपड़ी की तरफ देखो ! जब बारिश होती है तो मैं अपनी पुत्री के साथ एक कोने में सिमटे पड़े रहकर रात गुजारता हूँ, हम अपनी टाँगें भी नहीं फैला सकते। महेश (बैल) की तरफ देखो! आप उसकी पसलियाँ गिन सकते हो। उसके (महेश) लिए मुझे थोड़ी-सी सूखी घास उधार दे दो ताकि उसको एक या दो दिन के लिए कुछ खाने को मिल सके।” और ऐसा कहते हुए गफूर तारकरत्न के पैरों में जमीन पर गिर पड़ा।

“नहीं, नहीं! एक तरफ हट जा! मुझे अपने घर जाने दे, बहुत देर हो रही है।” तारकरत्न ने कुछ गति की मानो कि वह वहाँ से जा रहा हो, मुस्कराते हुए। “हे भगवान् ! वह तो अपने सींग मेरी तरफ ही घुमा रहा था! क्या वह मुझे सींग मारेगा ?” तेजी से बैल की तरफ से वापस कदम बढ़ाते हुए वह भय तथा क्रोध में चिल्लाया।

गफूर अपने पैरों से लड़खड़ा गया। “वह एक मुट्ठीभर ही खाना चाहता है”, उसने तारकरत्न के हाथ में चावल एवं फलों की गीली (भीगी) गठरी की तरफ इशारा करते हुए कहा।

“खाने को चाहिये? वास्तव में! जैसा मालिक वैसा जानवर । खाने को तो भूसे का एक तिनका भी नहीं है और चावल और फल चाहिये। इसे दूर ले जाओ और उसको कहीं और जगह बाँध दो ! कितने पैने सींग हैं! वह तो इन्हीं दिनों किसी दिन किसी को घायल कर उसका गाढ़ा खून निकाल कर जान से ही मार देगा।” किनारा करते हुए पुरोहित तेजी से बाहर निकलने लगा।

Looking away …………………………. before Mahesh. (Page 22)

कठिन शब्दार्थ-watched (वाच्ट) = ध्यान से देखा । muttered (मटॅर्ड) = धीमे से बड़बड़ाया। patting (पैटिंग) = थपथपाते हुए। whispered (विस्पर्ड) = धीमे से कहा । stretched out (स्ट्रैच्ट आउट) = आगे की तरफ फैला दी। with pleasure (विद प्लेजर) = आनन्द महसूस करते हुए। alive (अलाइव) = जीवित । dreadful year (रैंडफुल ईयर) = भयानक सूखे की साल (वर्ष)। let you loose (लैट यू लूज) = तुम्हें खुला छोड़ दूँ। strength (स्ट्रैन्थ) = ताकत । cattle market (कैटल मार्किट) = मवेशी बाजार। wiping (वाइपिंग) = पोंछते हुए। fetched (फैट) = लाया। tiny bunch (टाइनी बन्च) = एक छोटा-सा गुच्छा। discoloured (डिस्कलर्ड) = बदले हुए बुरे रंग का। otherwise (अदरवाइज) = वर्ना (नहीं तो) | softly (सोफ्टली) = कोमलता से। placing (प्लेसिंग) = रखते हुए।

हिन्दी अनुवाद-उससे हटकर देखते हुए, गफूर ने चुपचाप महेश को ध्यान से देखा जिसकी दो गहरी और भूखी आँखें दर्द तथा भूख से भरी हुई थीं। “एक मुट्ठीभर भी नहीं दिया”, उसने बैल की गर्दन तथा पीठ पर थपथपाते हुए धीरे से बड़बड़ाते हुए कहा। “महेश, तुम मेरे पुत्र हो”, उसने उसके कान में धीमे से कहा। “तुम बूढ़े हो गये और तुमने हमारी आठ वर्ष तक सेवा की। मैं तुमको पर्याप्त खाने को भी नहीं दे सकता लेकिन तुम जानते हो कि मैं तुमको कितना प्यार करता हूँ, क्या तुम यह नहीं जानते ?”

महेश ने केवल अपनी गर्दन को आगे की ओर फैला दी और आनन्द-विभोर होते हुए अपनी आँखें बन्द कर ली।

“मुझे बताओ” गफूर कहता गया, “इस भयानक सूखे की साल में, मैं तुमको किस प्रकार जीवित रख सकता हूँ? यदि मैं तुमको खुला छोड़ देता हूँ तो तुम दूसरे लोगों के धान को खाना शुरू कर दोगे या उनके केले के पत्तों को खाकर जुगाली करते रहोगे। मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकता हूँ ? तुम्हारे शरीर में कोई ताकत भी बाकी नहीं रह गई है—तुमको कोई नहीं चाहता है। वे तो

मैं, तुमको मवेशी हाट में जाकर बेच दूँ ………।” इसी बात पर उसकी आँखें फिर आँसुओं से भर गईं। अपने हाथ के पीछे के हिस्से से अपने

आँसुओं को पोंछते हुए और इधर-उधर देखते हुए, वह झोंपड़ी के पिछवाड़े से एक बदरंग (जिसका रंग बिगड़ा हो) पुराने भूसे के एक छोटे से गुच्छे को ले आया। उसने उसको (उस भूसे के गुच्छे को) महेश के सामने रखते हुए कोमलता से कहा, “मेरे बच्चे, इसे जल्दी से खालो वरना …………

“Father ……………………………………………….. another word.” (Pages 22-23)

कठिन शब्दार्थ-looking out (लुकिंग आउट) = बाहर की तरफ देखते हुए। roof (रूफ) = छत का ऊपरी भाग (यहाँ छप्पर)। was rotting (वाज रॉटिंग) = गला हुआ बदबूदार (बेकार)। ashamed (अशेम्ड) = शर्मिन्दा होते हुए। wasn’t exactly (वाजन्ट इग्जैक्टलि) = ऐसी बात नहीं थी। crumble (क्रम्बल) = ‘विकीर्ण होना (टूट कर गिर जाना)। last (लास्ट) = स्थित रहना। anxious (एक्शस) = चिन्तित । already (ऑलरैडी) = पहले से ही। pen (पैन) = मवेशी भेड़ों आदि के लिए एक छोटा-सा बाड़ा। nonsense (नॉनसैंस) = बेवकूफ। restless (रेस्टलेस) = बेचैन । in connection with (इन कनेक्शन विट) = सम्बन्ध में।

हिन्दी अनुवाद-“पिताजी………………..’’

“क्या बात है?”

“आओ और खाओ”, गफूर की पुत्री ने दरवाजे के बाहर देखते हुए जवाब दिया। “आपने फिर छप्पर से फूस निकालकर महेश को क्यों दिया है ?”

उसको भी डर लगा हुआ था। उसने शर्मिन्दा होते हुए जवाब दिया, “यह तो पुराना फूस था और वह गलकर खराब हो रहा था।”

“पिताजी, मैंने आपकी उसे खींचने की आवाज सुनी थी।”

“नहीं लाड़ली (अत्यधिक प्रिय), यह बात बिल्कुल भी नहीं थी ……..

“लेकिन आपको पता है, पिताजी, दीवार टूट कर गिर जायेगी …..

गफूर शान्त था। उसके पास सिवाय उस झोंपड़ी के कुछ भी नहीं बचा था। यह बात उससे अधिक अच्छी तरह और कौन जानता था कि अगर वह सावधान नहीं रहेगा तो वह दूसरी बरसात के मौसम को भी पार नहीं कर पायेगी। और फिर भी क्या यह वास्तव में ठीक था ?

“अपने हाथ धो लो और आकर खाना खा लो। मैंने तुम्हारा खाना परोस दिया है।” छोटी लड़की ने कहा।

“मुझे चावल का पानी दे दो; मुझे यह उसे खिलाने दो।”

“वहाँ कुछ भी नहीं है, पिताजी वह तो हँडिया में ही सूख गया है।”

लगभग एक सप्ताह गुजर गया था। गफूर शरीर से बीमार तथा चिन्तित प्रांगण में बैठा हुआ था। परसों से महेश वापस ही नहीं आया था।

वह स्वयं भी बिल्कुल असहाय था। सुबह भोर से ही अमीना (गफूर की पुत्री) हर जगह बैल की तलाश करती रही थी। शाम का धुंधलापन पहले से ही शुरू हो गया था जब वह घर आई। उसने कहा, “पिताजी, क्या आपने सुना है मानिक घोष ने महेश को पुलिस के बाड़े में भेज दिया है।”

क्या बकवास करती है!”

“हाँ, पिताजी, यह बिल्कुल सच है। उसके नौकर ने मुझसे कहा कि अपने पिताजी को बैल की तलाश करने के लिए दरियापुर जाने के लिए कहना ……. ‘’

‘उसने (महेश) क्या किया ?”

“पिताजी, वह उनके बगीचे में घुस गया।”

“वे कहते हैं, तीन दिन बीतने पर, पुलिस उसको मवेशी बाजार में बेच देगी।”

अमीना यह नहीं समझती थी कि ‘मवेशी बाजार’ का क्या अर्थ होता था। उसने तो अक्सर अपने पिताजी को बेचैन होते हुए देखा था जब भी उसका जिक्र महेश के सम्बन्ध में किया जाता था, परन्तु आज तो वह बिना कोई दूसरा शब्द बोले ही झोंपड़ी के बाहर चले गये।

Under the cover of night ……………… across to them. (Pages 23-24)

कठिन शब्दार्थ-secretly (सीक्रेटलि) = चुपचाप (गुप्त रूप से) I came round (केम राउन्ड) = चक्कर लगाकर आ गया। lend (लैण्ड) = उधार देना। was acquainted (वाज एक्वेन्टिड) = परिचित था। object (ऑबजैक्ट) = वस्तु। security (सिक्योरिटी) = जमानत (प्रतिभूति)। usual (यूजुअल) = सामान्य की तरह । elderly (एल्डरलि) = बड़ी उम्र का। examining (इग्जामिनिंग) = बारीकी से निहार रहा था। sharp eyes (शार्प आइज) = तेज निगाहों से। hunched up (हन्च्ट अप) = कूबड़ की तरह झुककर। untied (अनटाइड) = गाँठ खोल कर निकाला। smoothing (स्मूथिंग) = बार-बार हाथ फेरते हुए। suddenly (सडनलि) = यकायक। bolt upright (बोल्ट अपराइट) = सीधा तनकर। hoarsely (होर्सलि) = फटे-फटे कर्कश स्वर से। in surprise (इन सरप्राइज) = आश्चर्यचकित होकर। property (प्रॉपर्टी) = सम्पत्ति। my pleasure (माइ प्लेजर) = मेरी खुशी की बात। tone (टोन) = स्वर। deposit (डिपाजिट) = किसी वस्तु के सौदे की बात हो जाने पर जमा राशि। chorus (कोरस) = एक लय में। flinging (फ्लिंगिंग) = फेंकते हुए।

हिन्दी अनुवाद-रात के अंधेरे में छिपते हुए, गफूर चक्कर लगाकर चुपचाप बन्सी की दुकान पर आ गया।

“चाचा, तुमको मुझे एक रुपया उधार देना होगा,” उसने उसकी गद्दी के नीचे पीतल की एक तश्तरी रखते हुए कहा। बन्सी इस वस्तु से अच्छी तरह परिचित था। पिछले दो वर्षों में उसने इसी जमानत पर कम से

कम पाँच बार एक रुपया उधार दिया था। आज भी उसने कोई आपत्ति (ऐतराज) नहीं की।

अगले दिन सुबह ही महेश अपने प्रतिदिन के सामान्य स्थान पर बँधा हुआ दिखाई दिया। एक बड़ी उम्र का व्यक्ति अपनी तेज निगाहों से उसकी बारीकी से जाँच-पड़ताल कर रहा था। पास ही में (ज्यादा दूर नहीं) एक तरफ गफूर कूबड़-सा बनकर जमीन पर बैठा हुआ था। बारीकी से देखभाल समाप्त हुई, वृद्ध आदमी ने अपने दुशाले के एक कोने से गाँठ खोलकर एक दस रुपये का नोट निकाला और उसको दबाकर बार-बार हाथ फेरते हुए उसने कहा, “यह लो मैं इसमें कोई खाऊँगा-कमाऊँगा नहीं। मैं तो इसकी पूरी कीमत दे रहा हूँ।”

अपना हाथ फैलाते हुए, गफूर ने नोट (रुपयों) को ले लिया, लेकिन वह चुपचाप बना रहा। जैसे ही वे दो आदमी, जो उस वद्ध आदमी के साथ आये थे उस जानवर (महेश) के गले में पडी रस्सी को अपने हाथ में लेने को तैयार हुए, वह यकायक सीधा तनकर खड़ा हो गया। उसने कर्कश आवाज में चिल्लाकर कहा, “उस रस्सी को मत छूना । मैं तुमको कहे देता हूँ। सावधान, मैं तुमको आगाह किये देता हूँ!”

वे आश्चर्यचकित होकर रह गये। “क्यों ?” वृद्ध आदमी ने आश्चर्यचकित होकर पूछा।

“इसका कोई क्यों (कारण) नहीं है। यह मेरी सम्पत्ति है। मैं इसको नहीं बेचूंगा। यह मेरी खुशी की (मर्जी की) बात है।” उसने उसी स्वर में जवाब दिया, और उसने नोट को फेंक दिया।

“लेकिन कल तो तुमने इस अमानत की राशि को स्वीकार कर लिया था”, तीनों आदमियों ने एक लय में कहा।

“इसे वापस ले लो,” दो रुपये का नोट उन पर फेंकते हुए, उसने कहा।

Gafur begged for …………………………………. any water, either” (Page 24)

कठिन शब्दार्थ-Vague (वेग) = अस्पष्ट। endearment (एन्डीयरमॅण्ट) = प्रेम। realize (रीअलाइज) = महसूस करना। unrelenting (अनरिलैन्टिंग) = कठोर। a trace of mercy (अ ट्रेस ऑव मरसी) = दया, कृपा की एक झलक। anywhere (ऐनीवेयर) = कहीं भी। aspect (एसपैक्ट) = रूप (पक्ष)| overcast (ओवरकास्ट) = बादलों से घिरा। moisture (मॉइस्चर) = नमी। laden (लेड्न) = लदा हुआ। as though (ऐज दउ) = मानो कि। blazing (ब्लेजिंग) = तेज गर्म ज्वाला के साथ जलता हुआ। endlessly (एण्डलैसलि) = अनन्त रूप में। end of time (एन्ड ऑव टाइम) = अन्तिम समय तक। used to (यूज्ड टू) = आदती होना। hired labour (हायर्ड लेबर) = मजदूरी पर काम करने वाला। temperature (टेम्प्रेचर) = बुखार । to seek work (टू सीक वर्क) = काम की तलाश में। but in vain (बट इन वेन) = लेकिन सब व्यर्थ। courtyard (कोर्टयार्ड) = प्रांगण। quietly (क्वाइटलि) = चुपचाप। leaning against (लीनिंग अगेन्स्ट) = के सहारे । mimicked (मिमिक्ट) = नकल बनाते हुए कहा। violent (वाइअलॅन्ट) = कठोर (निष्ठुर)। growled (ग्राउल्ड) = गुर्राया। distorted (डिस्टॉर्टिड) = विकृत (बिगड़ा हुआ रूप का) | lock up (लॉक अप) = ताला लगा देना।

हिन्दी अनुवाद-गफूर पड़ोसियों से चावल के पानी की भीख माँगकर लाया और महेश को खिलाया। उसके सिर तथा सींगों पर थपथपाते हुए उसने उसको प्रेम की अस्पष्ट आवाज में उसके कानों में कुछ धीमे से कहा।

उस समय जून के महीने का लगभग मध्य (बीच का) था। कोई भी व्यक्ति जिसने भारत के गर्मी के मौसम के आकाश को नहीं देखा होगा, यह महसूस करेगा कि वह (गर्मी के मौसम का आकाश) कितनी भयंकर, कितनी कठोर गर्मी हो सकती होगी। कहीं भी दया की एक झलक दिखाई नहीं देती। आज तो यह विचार भी, कि किसी दिन आसमान (आकाश) का यह रूप बदल जायेगा, कि यह कोमल, नम बादलों से घिरा हुआ-बादलों से लदा हुआ हो जायेगा, असम्भव था। ऐसा प्रतीत होता था मानो कि सम्पूर्ण प्रज्वलित (तेज अग्नि-ज्वाला की तरह जलता हुआ) आसमान अन्तिम समय (समय के अन्त होने तक) दिन-प्रतिदिन अनन्त रूप से जलता रहेगा।

दोपहर को गफूर घर वापस आ गया। उसे मजदूरी लेकर काम करने की (मजदूर की तरह) आदत नहीं थी और यह केवल चार या पाँच दिन ही हुए थे जबकि उसका बुखार उतर गया था। उसका शरीर अभी भी कमजोर तथा थका हुआ था। वह काम की तलाश में बाहर गया था लेकिन सब व्यर्थ ही रहा। उसे काम मिलने में कोई भी सफलता नहीं मिली। भूखा, प्यासा, थका हुआ, उसकी आँखों के सामने हर वस्तु अन्धकारपूर्ण दिखाई दे रही थी। “बेटी अमीना, क्या खाना बन गया है ?” उसने बाहर प्रांगण से ही पुकार कर कहा।

बिना कोई जवाब दिये, उसकी पुत्री चुपचाप बाहर आ गई और दीवार के सहारे खड़ी हो गई।

‘क्या खाना तैयार है ?” गफूर के बिना कोई उत्तर पाये ही फिर दोहराते हुए कहा।

“तूने क्या कहा ? नहीं ? क्यों ?”

“चावल नहीं हैं ? तूने मुझे सुबह ही क्यों नहीं बताया ?”

“क्यों, मैंने आपको पिछली रात को ही कह दिया था।”

“मैंने आपको पिछली रात को ही कह दिया था”, गफूर ने नकल उतारते हुए कहा। “मैं कैसे याद रखू कि तूने गत रात मुझको क्या कहा था ?” अपनी ही आवाज की ध्वनि पर उसका क्रोध अधिकाधिक उग्र होता गया। उसने गुर्राते हए कहा, “वास्तव में, चावल ही नहीं हैं!” उसका चेहरा हमेशा से पहले की तरह से भी अधिक विकृत हो गया। “तुझे क्या फर्क पड़ता है कि तेरे पिता को खाना मिले या नहीं ? लेकिन देवी जी (गफूर की पुत्री) को तो अपना तीन बार खाना मिलना ही चाहिये। आगे से (भविष्य में) मैं जब बाहर जाया करूँगा तो चावल को ताले में रखा करूँगा। मुझे तो पीने को थोड़ा-सा पानी ही दे दे-मैं प्यास से मरा जा रहा हूँ ………………. तो तेरे पास पीने के लिए पानी भी नहीं है!”

Amina remained ……………………. I will not go. (Page 25)

कठिन शब्दार्थ-bowed head (बोड हैड) = सिर झुकाये हुए। self-control (सैल्फ कन्ट्रोल) = आपा (आत्म नियंत्रण) । rushing at (रशिंग एट) = उसकी तरफ झपटते हुए। slapped (स्लैप्ट) = चाँटा लगा दिया। noisily (नॉइजिलि) = जोर की आवाज करता हुआ। utter (अटर) = कहा। earthen pitcher (अर्दन पिचर) = मिट्टी का घड़ा। silent tears (साइलैन्ट टीअर्स) = सुप्त आँसू । overwhelmed (ओवरवेल्म्ड) = भर गया (पराजित हो गया)। remorse (रिमोर्स) = पश्चात्ताप। affectionate (अफैक्शनेट) = स्नेही (स्नेहशील)। dutiful (ड्यूटीफुल) = कर्त्तव्यपरायण । quiet (क्वाइअट) = शान्त रहने (चुप रहने) वाली। to blame (टू ब्लेम) = दोष लगाना। lasted (लास्टिड) = बना रहता। unaware (अनअवेयर) = अनजान । private tank (प्राइवेट टैंक) = निजी तालाब | public (पब्लिक) = आम आदमी। bottom (बॉटम) = तला। crowding (क्राउडिंग) = भीड़ हो जाना| jostling (जोसलिंग) = धक्का-मुक्की होना (करना) | chit of a girl (चिट ऑफ ए गर्ल) = छोटी-सी लड़की। approach (एप्रोच) = पहुँचना । begging (बैगिंग) = मिन्नतें करने पर (प्रार्थना करने पर)। messenger (मैसिन्जर) = दूत (नौकर)। bitterly (बिटरलि) = तीखेपन से। sent for (सैन्ट फॉर) = बुलवाया है। later (लेटर) = बाद में। impudence (इमप्युडॅन्स) = निर्लज्जता। intolerable (इनटॉलरेबल) = असहनीय। to drag (टु ड्रेग) = खदेड़कर ले जाना। thrashing (थैसिंग) = छड़ी या कोड़े से पीटना। roared (रोअर्ड) = दहाड़ कर बोला। ugly names (अगली नेम्स) = गालियाँ । lost (लॉस्ट) = खो दिया । similar (सिमिलर) = उसी प्रकार के। compliments (कॉम्लीमैण्ट्स) = प्रशंसाएँ (यहाँ गालियों

जैसी भाषा) | rent (रैण्ट) = लगान (किराया)।

हिन्दी अनुवाद-अमीना पहले की तरह ही सिर झुकाये खड़ी रही। यह महसूस करते हुए कि घर में पानी की एक बूंद भी नहीं है उसने अपना सारा (सम्पूर्ण) आपा (आत्मनियंत्रण) खो दिया। उसकी तरफ झपटते हए उसने उसके चेहरे पर एक जोर का चाँटा लगा दिया। “अभागी (कमबख्त) लड़की! तू सारे दिन क्या करती है ? इतने लोग मरते हैं-तू क्यों नहीं मर जाती ?”

लड़की ने एक शब्द भी नहीं बोला। उसने खाली घड़े को लिया और भरी दोपहरी (कड़ी धूप) में अपने सुप्त आँसुओं को चुपचाप पौंछती हुई घर के बाहर निकल गई।

जिस क्षण ही वह दृष्टि से ओझल हुई, उसका पिता पश्चात्ताप से भर गया (पराजित हो गया)। वही अकेला जानता था कि बिना माँ की लड़की को उसने किस प्रकार पाला-पोसा है। वह जानता था कि इस स्नेहशील, कर्त्तव्यपरायण तथा शान्त स्वभाव की उसकी पुत्री का कोई दोष नहीं था। जब तक उनके यहाँ चावल का थोड़ा-सा भी भण्डार रहा, तब भी उनको कभी भी पर्याप्त खाना खाने के लिए नहीं मिला। दिन में तीन बार खाना मिलना तो असम्भव बात थी। पानी के न होने के कारण से भी वह अनजान नहीं था। गाँव के तीन तालाबों में से दो तालाब तो बिल्कुल सूख गये थे। थोड़ा-सा पानी जो कि अभी भी वहाँ था, शिबू बाबू के निजी तालाब में था और वह सामान्य जन के लिए नहीं था। दूसरे तालाबों के तले में कुछ गड्ढे (छेद) खोदे गये थे लेकिन वहाँ थोड़े-से पानी के लिए इतनी अधिक भीड़ तथा धक्का-मुक्की होती थी कि यह छोटी-सी लड़की उन तक पहुँच ही नहीं सकती थी। वह एक सिरे पर घण्टों खड़ी रहती और बहुत मिन्नतों (विनतियों, प्रार्थनाओं) के बाद यदि कोई उस पर दया कर दे, तो वह थोड़ा-सा पानी लेकर घर वापस आ जाती थी। वह इन सब बातों को जानता था। शायद आज वहाँ पानी नहीं होगा या किसी व्यक्ति को उस पर दया करने को समय ही नहीं मिला होगा। उसने सोचा कि इस तरह की कोई बात अवश्य हुई होगी और फिर उसकी स्वयं की आँखें भी आँसुओं से भर गईं।

“गफूर! क्या तुम घर के अन्दर हो ?” किसी ने बाहर प्रांगण में से पुकार कर कहा, जमींदार का एक दूत वहाँ आ गया था।

“हाँ, मैं घर के अन्दर ही हूँ, क्यों क्या बात है ?” गफूर ने तीखेपन से जवाब दिया।

“मालिक (जमींदार) ने तुमको बुलवाया है, चलो आओ।”

“अभी तक मैंने कुछ भी खाया-पिया नहीं है। मैं बाद में आऊँगा,” गफूर ने कहा। उस दूत को ऐसी निर्लज्जता असहनीय लगी (प्रतीत हुई)।

“यह मालिक का आदेश है कि तुम्हें खदेड़कर उनके पास ले जाऊँ और छड़ी से या कोड़े से तुम्हारी अच्छी-सी पिटाई कर दूं।” उसने उस आदमी (गफूर) को गालियाँ देते हुए, दहाड़ कर कहा। गफूर ने दूसरी बार अपना आपा (आत्म-नियंत्रण) खो दिया। उसने उसी प्रकार के सुर में जवाब दे दिया, “हम किसी के गुलाम नहीं हैं। हम यहाँ रहने का किराया (लगान) देते हैं। मैं नहीं जाऊँगा।”

ही उससे पानी जमीन पर बहने लगा, महेश उस पानी को चूस (चाट) रहा था। गफूर का दिमाग पूर्ण रूप से बेकाबू हो गया। किसी दूसरे क्षण का इन्तजार किये बिना ही उसने अपने हल की मूठ, जिसको कि उसने मरम्मत करवाने के लिए कल ही छोड़ा था, को कसकर पकड़ लिया और अपने दोनों हाथों से उसको महेश की झुकी हुई गर्दन पर बहुत जोर से दे मारा। केवल एक बार ही महेश ने अपना सिर उठाने की कोशिश की लेकिन तुरन्त ही उसका भूख से पीड़ित दुबला-पतला शरीर लड़खड़ाकर जमीन पर गिर पड़ा। उसके कानों से खून की कुछ बूंदें लुढ़क पड़ीं। उसका पूरा शरीर एक या दो बार हिला-डुला और फिर अपनी आगे की तथा पीछे की टाँगों को जितनी दूर तक वे पहुँच सकती थीं, फैलाते हुए, महेश मरकर गिर गया। अमीना ने फूट फूट कर रो पड़ते हुए कहा, “पिताजी, यह आपने क्या किया ? हमारा महेश मर गया है!”

Gafur did not move ……………………… have given.” (Pages 26-27)

कठिन शब्दार्थ-staring (स्टेअरिंग) = ताकते रहना (निरन्तर एकटक देखते रहना)| without | blinking (विदाउट ब्लिंकिंग) = बिना पलक झपकाते हुए। motionless (मोशनलिस) = गतिहीन

(स्थिर) | beady (बीडी) = माला के मनकों जैसी। before two hours were out (बिफोर टु आवर्स वर आउट) = दो घण्टे बीतने से पहले ही। tanners (टैनर्ज) = चर्मशोधक (जानवरों की खाल से काम में लाने योग्य चमड़ा बनाने वाले)| at the end of the village (एट द ऐण्ड ऑव द विलिज) = गाँव के एक छोर पर | crowding (क्राउडिंग) = इकट्ठे होकर। bamboo pole (बैम्बू पोल) = एक लम्बा बॉस। shuddering (शडरिंग) = काँपते हुए (थरथराते हुए) । shining knives (शाइनिंग नाइज) = चमकते हुए चाकू। closed (क्लोज्ड) = बन्द कर लीं। penance (पैनन्स) = प्रायश्चित । sacred (सैक्रेड) = पवित्र । demanded (डिमान्डिड) = आवश्यकता थी। squatting (स्क्वॉटिंग) = उकडू बैठना । chin (चिन) = ठोड़ी। rousing (राउजिंग) = जगाकर उठाते हुए। dead of night (डैड ऑव नाइट) = आधी रात को। fallen asleep = सो गई थी। rubbing (रबिंग) = मलते हुए। incredulously (इनक्रेडुलसलि) = विश्वास न करते हुए। privacy (प्राइवेसी) = गोपनीयता। a long way (ए लोंग वे) = बहुत दूर। set out (सेट आउट) = चल दिया। to call his own (टू कॉल हिज ओन) = जिसको वह अपना कह सके। crossing (क्रोसिंग) = पार करते हुए। stock-still (स्टॉक स्टिल) = बिल्कुल स्थिर। star-spangled (स्टार स्पैन्गल्ड) = सितारों से आच्छादित । tiniest (टाइनीऐस्ट) = छोटे से छोटा, जरा-सा भी। bit (बिट) = टुकड़ा। pray (d) = प्रार्थना करता हूँ। guilt (गिल्ट) = अपराध (दोष)। You have given (यू हेव गिवन) = जो तुमने (ईश्वर, अल्लाह) दिये हैं।

हिन्दी अनुवाद-गफूर अपनी जगह से न तो हिला और न ही उसको कोई जवाब दिया। वह बिना पलक झपकाये हुए माला के मनकों के समान दो स्थिर काली आँखों की ओर निहारता रहा, टकटकी लगाकर देखता रहा।

दो घण्टे बीतने से पहले ही गाँव के एक छोर पर रहने वाले चर्मशोधक (जानवरों की खाल से उपयोग में लाये जाने वाले चमड़े को तैयार करने वाले) इकट्ठे होकर वहाँ आ गये और एक बाँस पर महेश को ले गये। उनके हाथों में चमकते हुए चाकुओं का दृश्य देखकर थरथराते हुए गफूर ने अपनी आँखें बन्द कर ली लेकिन बोला कुछ भी नहीं।

पड़ौसियों ने उसको बतलाया (सूचित किया) कि जमींदार ने सलाह-मशविरे के लिए तारकरत्न को बुलवाया है। एक पवित्र जानवर को मारने पर किया जाने वाला प्रायश्चित गफूर किस प्रकार करेगा?

गफूर ने इन सब चर्चाओं का कोई जवाब नहीं दिया लेकिन अपने घुटनों, पर अपनी ठोड़ी टिकाये हुए, वह उकडू बैठा रहा।

“बेटी अमीना, आओ चलें”, आधी रात को अपनी पुत्री को सोते से जगाकर गफूर ने कहा। वह प्रांगण में ही सो गई थी। अपनी आँखें मलते हुए उसने (अमीना) पूछा, “कहाँ, पिताजी?” “फुलबरे के जूट के कारखाने में काम करने के लिए”, पिता ने कहा।

लड़की अविश्वासपूर्वक उसकी तरफ ताकती रही। अपनी सभी दुर्दशा, विपत्ति तथा गरीबी के दौरान तो उसने फुलबरे जाने से मना कर दिया था। यह अक्सर उसको यह कहते हुए सुना करती थी, “वहाँ कोई धर्म नहीं है, वहाँ कोई आदर-सम्मान नहीं है, वहाँ महिलाओं के लिए कोई गोपनीय (अलग रहने का) स्थान नहीं

“जल्दी करो, मेरी बच्ची; हमको बहुत दूर जाना है”, गफूर ने कहा।

अमीना अपने पानी पीने के बर्तन और अपने पिता की पीतल की प्लेट को साथ ले चलने के लिए ले रही थी। गफूर ने कहा, “लाड़ली बेटी, उनको वहीं अकेला छोड़ दे। वे महेश के लिए प्रायश्चित करने की कीमत चुका देंगे।”

आधी रात को गफूर अपनी पुत्री का हाथ पकड़े हुए वहाँ से चल दिया। उसको लगा कि गाँव में उसका अपना कोई भी नहीं है। उसको किसी से कुछ कहना भी नहीं था। प्रांगण (परिसर) को पार करते हुए जब वह बबूल पेड़ के पास पहुंचा तो वह बिल्कुल स्थिर-सा (जड़वत्) वहाँ रुक गया और जोर से फूट-फूट कर रो पडा। अल्लाह”, उसने तारों से आच्छादित काले आसमान की तरफ अपना चेहरा उठाते हए कहा, “मुझे जितना चाहो उतना दण्ड देना-महेश अपने होठों पर प्यास लिये ही मर गया। किसी ने भी उसको चराई के लिए जरा-सा भी जमीन का टुकडा नहीं छोडा। प्रार्थना है उन लोगों को कभी माफी न देना जिन्होंने उसको तेरे द्वारा दी हुई न तो कभी घास खाने दी और न तेरे द्वारा दिया हुआ पानी ही पीने दिया।”