6 Feast of the Dead [मृतक का भोजन]

-Cevdet Kudret

लेखक के विषय में : सेव्डेट कुड्रेट (1907 से 1992) का जन्म इस्तांबुल में हुआ था. उसके के विभिन्न हाई स्कूलों (उच्च माध्यमिक विद्यालयों) में साहित्य अध्यापक के रूप में कार्य किया अपनी कविता संग्रह ‘दा फॅस्ट एक्ट’ (1929), अपने नाटक ‘दा वूल्व्ज’ तथा अपने उपन्यास ” कोमरेड्ज’ (1943) के लिए जाने जाते हैं।

कहानी के विषय में : दर्सन आगा’, एक निर्धन तुर्की परिवार का एकमात्र कमाने वाला, का निधन जाता है। मुस्लिम परम्परा के अनुसार शोकाकुल परिवार के लिए भोजन धनी पड़ौसियों से आता है। कर दिनों के उपरान्त भोजन आना बंद हो गया जिससे वह (शोकाकुल) परिवार बेचैन हो जाता है। बडापत्र निराश होकर कुछ आपूर्ति प्राप्त करने के लिए ठण्ड में ही बाहर निकलता है, किन्तु वह खाद्य सामग्री विक्रेता उस लड़के के उधार पर आपूर्ति प्राप्त करने के सभी प्रयत्नों को ठुकरा देता है। घर पहुँचने पर वह लड़का बीमार पड़ जाता है जबकि छोटा भाई अपनी माँ से पूछता है कि क्या बड़ा वाला मरने जा रहा है जिससे पड़ौस के घरों से पुनः भोजन आने का रास्ता बन जाए।

कठिन शब्दार्थ एवं हिन्दी अनुवाद

January changed………of their lunch. (Pages 36-37)

कठिन शब्दार्थ : grimmer (ग्रिम(र)) = अधिक कठोर। carrier (कैरिअ(र)) = ढोने वाला। fountain (फाउन्टन) = फव्वारा, झरना। deserted (डिटिड्) = छोड़ दिया। capital (कैपिट्ल) = पूँजी। panting (पेन्टिंग) = हाँफते हुए। make both hands meet = आय-व्यय पूरा करना। hoisting (हॉइस्टिंग) = उठाये हुए। trip (ट्रिप) = यात्रा, भ्रमण । to and fro (टु एण्ड फ्रो) = इधर उधर। rely (रिलाई) = निर्भर होना। earnings (अनिङ्ज) = आमदनी। pathetic (पीटक्) – दयनीय, करुणाजनक। hardened (हाड्न्ड) = जम जाना। bowl (बोल) = कूडी। tap (टैप) = नल. broth (ब्रॉथ) = शोरबा | aroma (अॅरोमा) = भोजन की सुगन्ध । cheese (चीज) = पनीर । beckones (बैकन्ड) = संकेत कर बुलाया। leftovers (लेफ्ट्ओ वज्) = बचा हुआ, जूठन । satisfy (साटस्कार = शान्त करना।

हिन्दी अनुवाद : जनवरी ने हवा का रंग बदल दिया। दुनिया अधिक कठोर लगती थी तथा लोग केवल काम के लिए ही जाते थे। बलूत के पेड़ों के नीचे, मस्जिदों के अहातों में तथा अन्य शीतल स्थानो पर जहां गर्मियों में बच्चे एकत्रित होते थे, कोई नहीं होता था। झरने कभी भी निर्जन नहीं हुए। लगभग प्रतिदिन कोई न कोई वहाँ दिनभर के लिए पानी लेने जाता था।

उस दोपहर को वह लड़का जो फव्वारे पर था, हाँफते हुए गली की ओर भागा और उसे जो सबसे पहला व्यक्ति दिखा उससे कहा।

‘दर्सन आगा मर गया!’ पानी ढोने वाला दर्सन आगा गली में एक परिचित व्यक्ति था। वह मुश्किल से ही अपना खर्चा चला पाता था अपनी पत्नी तथा दो बच्चों के साथ एक छोटे से मकान में रहता था। दो पानी के पात्र तथा एक डंडा जिसके दोनों सिरों पर जंजीर झूलती थी उसकी कुल पूँजी थी। डंडे को अपने कंधे पर उठाकर, पात्रों के. हिन्दीलो से जन्हें जंजीरों में अटकाकर वह प्रत्येक सुबह निकल जाता था।

“पानी, क्या किसी को पानी चाहिए? …

उसकी आवाज गली के अन्तिम मकान तक चली जाती थी। जिन्हें पानी की जरूरत होती व उत्तर में आवाज देते “दर्सन आगा, एक चक्कर” या “दो चक्कर” या “तीन चक्कर।”

‘एक चक्कर’ का अर्थ पानी के दो पात्र था। फिर दर्सन आगा पहाड़ी पर झरने तक चढ़ता, अपने पात्रों को भरकर मकानों तथा झरने के बीच दिन भर इधर-उधर जाता रहता था। प्रत्येक चक्कर के लिए उसे तीन कुरुश मिलते थे। पैसा कमाने का यह तरीका सुई से कुआ खोदने जैसा था । यदि उन्हें उसकी आमदनी पर निर्भर रहना ला होता तो चार मुँहों के लिए भोजन खिलाना असम्भव होता लेकिन ईश्वर का धन्यवाद कि उसकी पत्नी गुलनाज को सप्ताह में तीन या चार बार कपड़े धोने के लिए बुला लिया जाता था। वह कारुणिक, हानिरहित से एक या दो पात्र पानी का अधिक प्रयोग करने की बेईमानी से अपनी पति की जरा-सा अधिक कमाने में मदद करने की कोशिश करती थी जिससे कि उसका पति तीन कुरुश से कुछ अधिक कमा सकें। .

अब यह सब अचानक बन्द हो गया। दर्सन आगा पिछली रात को जमी हुई बर्फ पर खड़े होने की कोशिश में फिसल गया और उसका सिर नल के नीचे रखी पत्थर की कुंडी से टकरा गया। जब गुलनाज ने यह समाचार सुना तो वह स्तम्भित रह गई। अब वह क्या करेगी? एक नौ वर्ष का और दूसरा छह वर्ष का, दो बच्चों के साथ पति द्वारा छोड़ दिया जाना कोई आसान बात नहीं थी। वह सप्ताह में दो या तीन बार कपड़े धोकर किस तरह उनका पेट भर सकती थी? उसने बहुत सोचा परन्तु किसी भी निर्णय पर नहीं पहुँच सकी।

जिस घर में मृत्यु हो जाती है वहाँ पड़ौसियों द्वारा एक या दो दिन तक भोजन भेजे जाने की परम्परा है। गुलनाज व उसके बच्चों के लिए सर्वप्रथम भोजन उस सफेद मकान से आया जहाँ राइफ इफेंडी, एक धनवान व्यापारी रहता था। दर्सन आगा की मृत्यु वाले दिन दोपहर में, एक नौकरानी एक बड़ी थाली लेकर आई। इस पर मुर्गी के शोरबे में पकाई नूडल्स की प्लेटें, गाढ़ी चटनी में डला मांस, पनीर रोल तथा मिठाइयाँ रखी थीं।

सच बात तो यह है कि उस दिन किसी ने भी खाने के बारे में नहीं सोचा लेकिन जैसे ही थाली पर से ढक्कन हटाया गया, भोजन की सुगन्ध ने उन्हें आने का संकेत किया। वे मेज के चारों ओर एकत्रित हो गये यांकि हो सकता है उन्हें ऐसा अच्छा भोजन पहले नहीं मिला हो, यह उन्हें अत्यधिक स्वादिष्ट लगा। एक बार खाकर, उनके लिए यह स्वाभाविक था कि शाम के भोजन के समय मेज के पास बैठकर दोपहर के बचे हुए भोजन से अपनी भूख शान्त करें।

Another neighbour…………….to talk outside. (Pages 37-38)

कठीन शब्दार्थ : neighbour (नेब(र) = पड़ौसी। meals (मील्ज) = भोजन। generous (जनरस्) = उदार। unbearable (अन्बेअरबल) = असहनीय। foot step (फुट्स्टे प्) = पदचाप। meagre (मीग(र)) = अत्यल्प मात्रा। trace (ट्रेस्) = अंश, चिन्ह । inconsiderate (इन्कन्सिडरट)

विलापन, अविवेकपूर्ण । vision (विशन) = दृश्य । sounded (साउन्ड्ड) = सुनाई दिया। murmurs .

(मम(र)) = बड़बड़ाना, बुदबुदाना। creaking (क्रीकिंग) = चरचराना। credit (क्रेडिट) = उधार। P (रप्) = शाल। loaves (लोज) = पाव रोटी। laundering (लॉन्डरिंग) = कपड़े धोना। yap (गिडि येप) = मूर्ख जानवर। heavenly (हेन्लि ) = स्वर्ग जैसा, आनन्ददायक। fevered (फिवर्द)= व्यग्र। tummy (टमि) = पेट। parched (पाच्ट्) = रखा गया। faded (फेड्ड) = गया। hollow (हॉलो) = गड्ढे पड़ जाना।

“हिन्दी-अनुवाद : एक अन्य पडौसी ने अगले दिन के भोजन का ध्यान रखा। ऐसा तीन या चार दिन तक

चलता रहा| बाद के दिनों में आने वाला कोई भी भोजन सफेद मकान से आने वाले भोजन की भाँति स्वादिष्ट तथा भरपूर नही था वे कभी गुलनाज के बर्तन में पकाये हुए भोजन की अपेक्षा काफी अधिक मात्रा में अच्छे थे यदि ऐसा जारी रह पाता तो गलनाज तथा उसके बच्चे अपने जीवन के अन्त तक इस दू;ख को आसानी से सहन कर सकते थे। लेकिन जब थालियों का आना बन्द हो गया तथा मुख्य सड़क पर के स्टोर से जो कोयला वे खरीद रहे थे, अब नहीं खरीदा जा सकता था, वे यह महसूस करने लगे कि यह दू;ख असहनिये था।

जब पहले दिन भोजन रुका, उन्होंने दोपहर तक अपनी आशा लगाये रखी, जब भी बाहर कोई सुनते, दरवाजे की ओर दौड़ते। लेकिन केवल अपने दैनिक कार्यों पर जाते लोग मिलते। रात्रि के अ के समय उन्हें महसूस हुआ कि उनके लिए कोई भी भोजन नहीं लायेगा, इसलिए जैसा पहले ही घर पर ही भोजन पकाना पड़ा।

पिछले कुछ दिनों के दौरान उन्हें एक काफी भिन्न प्रकार के भोजन की आदत पड़ गई थी अत्यन्त अल्प मात्रों में गुलनाज द्वारा न के बराबर मवखन में पकाये गये भोजन से समन्वय बैसा लगा। फिर से इसकी आदत डालने के अलावा उनके पास और कोई चारा भी नहीं था। बहुत शीघ्र म आटा, आलू तथा अनाज भी समाप्त हो गया। अगले कुछ दिनों तक उन्हें घर में जो कुछ मिला. उन्होंने जैसे—दो प्याज, लहसुन की एक कली तथा आलमारी के एक कोने में मिले एक मुट्ठी सूखे हुए सेम। में, एक दिन ऐसा भी आया जब घर के सभी बर्तन, टोकरियाँ, शीशियाँ तथा सन्दूकें खाली हो गयीं। उस दिन पहली बार वे खाली पेट ही सो गये।

इससे आगे का दिन भी ऐसे ही गुजरा । अगली दोपहर तक छोटा बच्चा भूख के कारण रोने लगा। गुलनाज यह आशा करती रही कि कोई उसे कपड़े धोने के लिए बुलवा लेगा। लेकिन गली के लोगों ने सोचा कि उसे काम करने के लिए बुलाना अविवेकपूर्ण होगा। इससे भी अगले दिन किसी ने भी उठने के बारे में नहीं सोचा। उन सभी को भोजन के दृश्य दिखाई दिये। छोटे बच्चे को नर्म मोटी रोटी का, बड़े को इसके बजाय मिठाइयों का दृश्य दिखा। उसे बस केवल एक बार और ये वस्तुयें मिल जायें, वह इनमें से प्रत्येक को मुँह भरभर के स्वाद लेकर खायेगा। वह कितना मूर्ख था कि अपने पूरे हिस्से को तत्काल खा गया!

अपने बच्चों की बड़बड़ाहट को सुनते हुए गुलनाज बिस्तर में ही पड़ी रही, उसके गालों पर से चुपचाप आँसू दुलकते रहे । बाहर गली में जीवन पहले की भांति ही चलता रहा। एक दरवाजा बन्द हुआ। वह जान गई कि यह पड़ौस का स्कूल जाने वाला लड़का था। बाहर पदचाप सुनाई दी। इस बार यह तहसीन इफेन्डी, नाई था जो अपनी दुकान खोलने के लिए गली में होकर जा रहा था। इसके बाद वाला विद्युत कम्पनी का क्लर्क था, फिर मोची और फिर ब्रेडवाला जो प्रतिदिन उसी समय सफेद मकान पर आता है । उसके घोड़े के दोनों ओर बंधी हुई टोकरियों में ब्रेड भरी हुई थी। टोकरियों की चरचराहट दूर से ही सुनी जा सकती थी।

सबसे पहले बड़े लड़के ने ही इसे सुना और अपने छोटे भाई की ओर देखा । गुलनाज ठंडे कमर न खड़ी हो गई तथा बाहर जाने के लिए अपने ऊपर शाल लपेटा। उसने रोटी के दो पाव उधार में मागन निश्चय किया। जब उसे कपड़े धोने से पैसा मिलेगा तब वह दे सकती थी। उसने दरवाजा खोला तथा स्यंजी, सफेद ब्रेड से टोकरियों को किनारे तक भरा देखा। ठीक जैसे ही वह ब्रेडवाले से कुछ कहन का उसकी नाक में एक सुन्दर गन्ध भर गई, वह घोड़े को चिल्लाया, “मूर्ख जानवर” और गुलनाज का पूरा छूट गया। उसके मुँह से कोई भी शब्द नहीं निकला और आनन्ददायक खुशबू वाला भोजन उसक पास से गुजर गया। लेकिन वह हाथ बढ़ाकर इसे ले नहीं पाई।

यह अन्दर आई परन्तु आशापूर्वक इन्तजार कर रहे अपने बेटों की व्यग्र आँखों में आँखें नहा . कमरे में एक भी शब्द नहीं बोला गया। लड़कों ने बस उसके खाली हाथों को देखा और अपना नजर बाद में काफी देर बाद छोटे लड़के ने खामोशी तोड़ी।

. “माँ, मैं यह अब और सहन नहीं कर सकता, मेरे पेट में कुछ हो रहा है।”

“मेरे प्यारे बेटे, चिन्ता मत करो। यह भूख है। मुझे भी यह महसूस हो रही है।”

“मैं मर रहा हूँ। मैं मर रहा हूँ।” बड़े लड़के ने अपनी आँखें खोली तथा अपने भाई की और देखा |

. गुलनाज ने दोनों की ओर निगाह डाली। छोटा बच्चा खामोश हो गया। उसका चेहरा गहरे रंग का, सूखकर झुलस गये, उसकी रक्तहीन त्वचा कुम्हला गई व उसमें गड़े पड गये। अन्त में, गुलनाज ने बड़े लडके को संकेत किया और वे बात करने के लिए कमरे से बाहर चले गये।

“We must go……….the white house.” (Pages 38-39)

कठिन शब्दार्थ : grocer (ग्रोसर) = पंसारी। shabby (शैबि) = फटीचर, जीर्ण-शीर्ण । steady(स्टेडी) = स्थिर बने रहना। warmth (वॉम्थ्) = गरमाहट। privacy (प्रिवसि) = एकान्त में। pretended (प्रिटेन्ड्ड) = बहाना किया। tricks (ट्रिक्स) = तरीके। trade (ट्रेड) = धन्धा । eambarassed (इम्बैरस्ट्) = घबरा गया, शर्मिन्दा हुआ। iciness (आइसिनिस) = रूखापन। corner (कॉन(र)) = नुक्कड़। admiration (एड्मरेश्न्) = प्रशंसा। chattering (चैटरिंग) = कटकटाना। blanket (ब्लैंकिट) = कम्बल, आवरण। piled (पाइल्ड) = जमा दिया। motionless (मोश्नल्स्) निश्चल। vacantly (वैकन्टलि) = अनिच्छा भाव से। paced (पेस्ट) = टहला। desperate (डिस्पेअ(र)) = निराश। exhaustion (एग्जॉस्चन्) = थकावट। junk (जंक) = सूखा हुआ। moaned (मोन्ड) = कराहा। delirium (डिलिरिअम) = काँपते हुए। audible (ऑडब्ल्) = श्रवणीय, सुना जा सकने योग्य। frightened (फ्राइट्न्ड) = भयभीत।

हिन्दी अनुवाद : “हमें बोडोस, पंसारी के पास जाना होगा। हम उससे थोड़े से चावल, आटा तथा । आल माँग सकते हैं। उससे कहना हम कुछ ही दिन में उसे पैसा दे देंगे।”

लड़के का जगह-जगह से फटा कोट बाहर की ठंड को दूर रखने के लिए पर्याप्त नहीं था। उसकी गंगों में शक्ति नहीं थी और जब वह चल रहा था तो दीवार के सहारे अपने को स्थिर किये हुए था। अन्त में वह पहाड़ी पर स्थित दुकान पर पहुँचा और गर्म कमरे में घुस गया। पंसारी से अकेले में बात करने की आशा में तथा थोड़ी देर तक गरमाहट का आनन्द लेने के लिए सभी ग्राहकों के जाने तक उसने इन्तजार किया। फिर उसने अंगीठी के पास से अपनी जगह छोडी और एक पाउण्ड चावल, एक पाउण्ड आटा तथा एक पाउण्ड आलुओं के लिए आदेश दिया। उसने अपना हाथ इस तरह अपनी जेब में डाला जैसे कि वह. पैसों तक पहुँचने – की कोशिश कर रहा हो, फिर उसने घर पैसा छूट जाने का बहाना किया।

“ओह, मुझे लगता है कि मैं यह घर पर ही भूल आया हूँ। इस ठंड में घर जाकर फिर वापस आने से मुझे नफरत है। इसे लिख लो मैं कल पैसा दे दूंगा।”

यह एक साहसिक प्रयत्न था परन्तु पंसारी धंधे का तरीका बहुत अच्छी तरह जानता था।

“पहले पैसा लाओ। फिर तुम सामान ले जा सकते हो। तुम बहुत दुबले हो गये हो। जिसके घर पर पैसा होता है वह इतना दुबला नहीं होता है।”

उसकी झूठ का पता चल जाने से लज्जित होकर लड़का जल्दी से बाहर निकल गया। दुकान में प्रवेश करने से पूर्व की अपेक्षा उसने गली में रूखेपन को अधिक असहनीय पाया।

नुक्कड़ पर उसने सफेद मकान की चिमनी से धुआँ निकलते हुए देखा। इसमें रहने वाले लोग कितने खुश थे। उसको उनसे ईर्ष्या नहीं हुई। उसने तो बस उन लोगों की जिन्होंने उसे उसका जीवन का सर्वोत्तम भोजन दिया था, प्रशंसा की।

दाँत कटकटाते हुए जितना तेजी से सम्भव था वह घर की ओर चला। अपनी माँ तथा भाई से उसे कछ कहने की आवश्यकता नहीं हई। उसके खाली हाथों ने स्वयं ही अपनी कहानी बता दी। उसने अपने कपडे

उतारे और अपने पलंग तक गया और जब वह बोला, उसने कहा, “मुझे ठंड लगी है, मुझे ठंड लगी है।” .. कम्बल उठाकर उसके काँपते हए शरीर पर आ गिरा।।

गुलनाज को जो कुछ भी मिला उसने उसके ऊपर ढेर लगा दिया। कंपकंपी लगभग दो घण्टे तक रही। पार व थकावट हो गई। लडका पीठ के बल निश्चल पड़ा था। उसकी आँखें शून्य में ताक रही थीं। ‘कन की चादरों को हटाया तथा उसके तपते हुए शरीर को अपने ठंडे हाथों से शीतलता प्रदान करने की कोशिशकी।

शाम तक वह निराश होकर घर में टहलती रही। उसे नहीं मालूम कि क्या करना था। वह सोच नही सकी

|सूरज ढल गया। उसने लडके के शरीर पर से हटायी चादरों के छोटे से ढेर को देखा। क्या कोई उसे इन सबके बदले पैसा नही देगा? उसे याद आया उसके पड़ोसिया ने कबाड़ की दुकान के बारे में बाते की थी जहा वे काम में लि गई वस्तएँ बेचते थे लेकिन यह अब तक बन्द हो गई होगी। उसे सुबह तक इंतजार करना पड़ेगा |

इस निर्णय के साथ ही उसके दिमाग को शान्ति मिल गई और उसने टहलना बन्द कर दिया तथा अपने बेटे के पास बैठ गई। लड़के का बुखार बढ़ गया। वह नजरें गड़ाये स्थिर बैठी रही। छोटा लड़का भूख के कारण सो नहीं सका। वह भी अपनी आँखें खोलकर देख रहा था। बीमार लड़का जरा-सा कराहा और बूखार में उछला और करवट ली। उसके गाल तप रहे थे तथा वह कंपकंपी में बातें कर रहा था। छोटा बेटा अपने बिस्तर में बैठ गया ऐसी आवाज में बोला जो केवल उसकी माँ ही सुन पाई, “माँ, क्या मेरा भाई मर जायेगा?” .

वह ऐसी कांपी जैसे कि उसके शरीर को ठंडी हवा ने छू लिया हो । उसने भयभीत नजरों से अपने बेटे की ओर देखा, “तुम ऐसा क्यों पूछ रहे हो?”

लड़का एक पल खामोश रहा फिर उसके कान के निकट झुककर अपनी आवाज भाई से छिपाने की कोशिश करते हुए धीरे से बोला :

“क्योंकि तब सफेद मकान से खाना आयेगा।”