8 A Discourse on Prayer[प्रार्थना पर एक प्रवचन]

-M.K. Gandhi

लेखक परिचय :

महात्मा गाँधी, हमारे देश के राष्ट्रपिता, का जन्म 2 अक्टूबर, 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। वह ब्रिटेन द्वारा शासित भारत में भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के प्रमुख नेता थे। गाँधीजी ने सत्य (Truth) की खोज में अपना समस्त जीवन समर्पित कर दिया तथा राजनैतिक क्षेत्र में अहिंसा के मार्ग का नेतृत्व किया। उन्होंने सत्य एवं अहिंसा के सिद्धान्तों को न केवल व्यक्तिगत जीवन में अपनाया बल्कि राजनीति के क्षेत्र में भी उन्हें लागू किया। उनकी प्रसिद्ध आत्मकथा है, ‘My Experiments with Truth’ (सत्य के साथ मेरे प्रयोग)। भारत में उन्हें बापू कहकर भी पुकारा जाता है।

पाठ-परिचय:

प्रस्तुत अंश प्रार्थना की आवश्यकता के बारे में गाँधीजी के प्रवचन से लिया गया है जो उन्होंने छात्रों के एक समूह को साबरमती आश्रम में दिया था। लेखक. मन एवं हृदय की शुद्धता की आवश्यकता पर जोर डालते हैं जिसे सच्ची प्रार्थनाओं से प्राप्त किया जा सकता है। धर्म में हमारी आस्था हमें अनुशासन एवं कर्तव्य की भावना सिखाती है।

कठिन शब्दार्थ एवं हिन्दी अनुवाद –

I am glad that………………….non-observance. (Page 102)

कठिन शब्दार्थ-glad (ग्लैड) = प्रसन्न होना। necessity (नॅसेसरि) = आवश्यकता । believe (बिलीव) = विश्वास करना। soul (सोल्) = आत्मा। essence (एसन्स) = सार, तत्त्व। core of life (को(र) ऑव लाइव) = जीवन का मूल, सबसे महत्त्वपूर्ण भाग। egotism (ईगोटिज्म्) = स्वार्थ, अहंकार । reason (रीज़न) = समझने की शक्ति, तर्क। instinct (इंस्टिंक्ट) = सहज प्रवृत्ति। superstition (सुपॅस्टिश्न्) = अन्धविश्वास। acknowledge (अक्नॉलिज्) = स्वीकार करना । some sort of (सम् सॉट ऑव्) = किसी प्रकार का। divine (डिवाइन) = ईश्वर, पवित्र । rankest (रैन्किस्ट) = सुस्पष्ट, साफ-साफ। agnostic (ऐग्नॉस्टिक) = अज्ञेयवादी, वह व्यक्ति जो यह विश्वास करता है कि ईश्वर के बारे में कुछ भी ज्ञात नहीं किया जा सकता। atheist (एथिइस्ट) = नास्तिक, वह व्यक्ति जो ईश्वर की सत्ता में विश्वास नहीं करता। moral (मॉरॅल) = .. नातक । principle (प्रिन्सप्ल) = सिद्धान्त। associates (असोशिएट्स) = शामिल कर लेता है, मिला लेता है। observance (अबजवॅन्स्) = अनुपालन।

हिन्दी अनुवाद : मैं इस बात से प्रसन्न हूँ कि आप सब यह चाहते हो कि मैं प्रार्थनाओं के अर्थ और उनकी आवश्यकता के विषय में आपको बतलाऊँ। मेरा विश्वास है कि प्रार्थना धर्म की आत्मा एवं धर्म का सार-तत्त्व है और इसलिये प्रार्थना को मनुष्य के जीवन का मूल अर्थात् सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण भाग होना चाहिये, क्योंकि कोई भी व्यक्ति धर्म के बिना जीवित नहीं रह सकता। कुछ व्यक्ति ऐसे होते हैं जो अपनी समझने की शक्ति (जिसके आधार पर वे तर्क करते हैं) के अहंकार में यह घोषित कर देते हैं कि धर्म से उनका कोई सम्बन्ध नहीं है (धर्म से उनका कोई लेना-देना नहीं है)। लेकिन यह तो एक ऐसे मनुष्य के समान हे जो कहता है कि वह साँस तो लेता है लेकिन उसके नाक नहीं है। चाहे यह तर्क (समझने की शक्ति) से हो, चाहे सहज प्रवत्ति से हो या चाहे अन्धविश्वास से हो, ‘मनुष्य ईश्वर से किसी न किसी प्रकार का सम्बन्ध होना स्वीकार करता है (मानता है)। सस्पष्ट अज्ञेयवादी या नास्तिक भी नैतिक सिद्धान्त की आवश्यकता को स्वीकार करता है और इसके अनुपालन से किसी अच्छी बात को तथा इसके अनुपालन नहीं करने से किसी बरी । बात को सम्बन्धित कर देता है। । .

Now, I come to………………no inward peace. (Page 102)

कठिन शब्दार्थ-next thing (नेक्स्ट थिग) = अगली बात । viz. (विज) = videlicet अथार्त |very (वैरी)=वही vital (वाइटल) = अत्यन्त महत्त्वपूर्ण । petitional (पॅटिशनल) = प्रार्थना या याचना सम्बन्धी। wider sense (वाइड(र) सन्स) = विस्तृत भाव में। inward (इनवड) = आन्तरिक communion (कॅम्यनयन) = विचारों का आदान-प्रदान, सम्पर्क | cleansing (क्लेन्जिंग) = स्वच्छता। purification (प्युअरिफिकेशन) = शुद्धता । layers (लेअसे) = तह । ignorance (इगनॅरॅन्स) = अना anyalon (इनवेलॅप) = ढक रखा है, लपेट रखा है। hungers (हगंज) = इच्छा रखता है | awakening

(अवेकनिंग) = जाग्रति। fall back (फॉल बैक) = निर्भर होना, काम में लाना (किसी अन्य उपाय के असफल रहने पर)। mere (मिअ(र)) = केवल। formula (फोमयला) = सूत्र । futile (फ्यूटाइल) = व्यर्थ, निष्फल । stir (स्टॅ(र)) = झकझोरना, उद्वेलित करना। a bit of = ज़रा सा | magic (मैजिक) = जादू। companions (कॅमपैनिअन्ज) = साथियों।

हिन्दी अनुवाद : अब मैं अगली बात पर आता हूँ, अर्थात् प्रार्थना मनुष्य के जीवन का वास्तविक मूल है क्योंकि यह धर्म का सबसे महत्त्वपूर्ण भाग है। प्रार्थना या तो याचना होती है, अथवा विस्तृत अर्थ में, आन्तरिक सम्पर्क होता है। यहाँ तक कि जब यह (प्रार्थना) केवल याचना से सम्बन्धित ही हो, तब भी यह याचना आत्मा की स्वच्छता और शुद्धता के लिये होनी चाहिये, अज्ञानता और अन्धकार की परतें जिन्होंने इसको ढक रखा है, से मुक्त करने के लिये होनी चाहिए। इसलिए वह व्यक्ति जो स्वयं में पवित्रता जागृत करने की लालसा रखता है, उसे प्रार्थना पर निर्भर रहना ही पड़ेगा। किन्तु, प्रार्थना केवल शब्दों का अथवा कानों का अभ्यास ही नहीं है, यह निरर्थक सूत्रों को दोहराना मात्र नहीं है। कितनी भी मात्रा में राम-नाम जपना बेकार है—यदि इससे (राम-नाम जपने से) हमारी आत्मा उद्वेलित नहीं होती है। प्रार्थना में बिना हृदय के शब्द होने को अपेक्षा शब्दों के बिना हृदय होना अधिक अच्छा है। (भाव यह है—प्रार्थना हृदय से करनी चाहिए चाहे हम शब्द बोलें अथवा न बोलें)। और मैं अपने स्वयं एवं साथियों का थोड़ा-सा अनुभव आपको बतला रहा हूँ, जब मैं कहता हूँ कि जिसने प्रार्थना के जादू का अनुभव किया है, वह व्यक्ति बिना भोजन के कई दिनों तक रह सकता है किन्तु वह व्यक्ति बिना प्रार्थना के एक क्षण भी नहीं रह सकता है क्योंकि, बिना प्रार्थना के आन्तरिक शान्ति (मन की शान्ति) नहीं मिलती है। . .

If that is………………out of the flesh. (Pages 102-103)

कठिन शब्दार्थ-offer prayer (ऑफ(र) प्रेअ(र)) = प्रार्थना करना। erring (अरिंग) = गलती करने वाले | mortal (मॉटल) = मरणशील, मनुष्य । retire (रिटाइअ(र)) = अलग हो जाना, सेवा-निवृत्त हो जाना | perpetually (पपेचुअलिं) = लगातार, निरन्तर । effort (एफट) = प्रयास। throw off (थ्रो आफ) = दूर कर दें| attachment (अटैचमॅन्ट) = लगाव । for a while (फो(र) अ वाइल) = थोड़ी देर के लिए| endeavour (इनडेव(र)) = प्रयास। flesh (फ्लेश) = कच्चा मांस, यहाँ अर्थ है—भोतिक शरीर।

हिन्दा अनुवाद : यदि ऐसी बात है तो कोई भी कह देगा कि हमको अपने जीवन के प्रत्यक निनट प्राथना करते रहना चाहिये। इसके बारे में कोई सन्देह नहीं है। लेकिन हम गलतियाकरने वाले व्यक्ति जो एक क्षण के लिय भी आन्तरिक सम्पर्क करने (ईश्वर में ध्यान लगाने) के लिये अपने स्वयं के अन्दर ही ” (अपने आपको इस भौतिक शरीर से) अलग करना कठिन पाते हैं,निरन्तर ईश्वर के सम्पर्क में रहना (ईश्वर में ध्यान लगाना) असंभव पायेगे| इसलिए हम कुछ घंटे निश्चित कर लें जब हम कुछ समय के लिये संसार के बन्धनों को उखाड़ फेकने का एक गंभीर प्रयास करे , यह कहना ठीक रहेगा कि हम अपने आपको उस भौतिक शरीर के बाहर रखने का एक गम्भीर प्रयास करें।

I have talked of………………automatically right. (Page 103)

कठिन शब्दार्थ-have dealt with (हैव डेल्ट विद) = व्यवहार में लिया है। serve (सेव)= सेवा करना । fellow men (फेलो मेन) = साथी व्यक्ति, सहजीवी व्यक्ति, properly (प्रॉपलि) उचित रूप से। wide awake (वाइड अवेक) = पूर्ण रूप से जागृत। external (इक्सटॅनल) = बाहरी। struggle (स्ट्रगल) = संघर्ष। breast (ब्रेस्ट) = सीना, हृदय । anchor (एन्क(२))= (जहाज अथवा नाव का) लंगर,संबल। rely upon (रिलाइ अपॉन) = निर्भर रहना। victim (विक्टिम) = शिकार । Gorable (मिजरबल) = बहुत दुःखी। apart from (अपाट फ्रॉम) = इसके अतिरिक्त। bearing अरिंग) = प्रभाव। incalculable (इनकैलक्युलॅबल) = जिसकी गणना नहीं की जा सके अर्थात् Finmates (इनमेट्स) = साथ-साथ रहने वाले, ‘साथी। insistence (इन्सिस्टॅन्स) = आग्रह। efficacy (एफिकसि) = प्रभावोत्पादकता। vital concern राधिक महत्त्व का। bestow (बिस्टो) = प्रदान करना। slumber (स्लम्बॅ(र)) = नींद | woefully = भयंकर दुःखां तथा दयनीय रूप से। negligent (नेगलिजॅन्ट) = लापरवाह।stern (स्टॅन) = कठोर। discipline (डिसप्लिन्) = अनुशासन। obvious बविअस) = स्पष्ट। rectify (रेक्टिफाइ) = सही करना। angle (एंगल) = कोण। square = वर्ग। automatically (ऑटमैटिकॅलि) = अपने आप।

हिन्दी अनुवाद : मैंने प्रार्थना की आवश्यकता के विषय में बात की है और मैंने प्रार्थना के सार-तत्त्व को

व्यवहार में लिया है। हम अपने साथी व्यक्तियों की सेवा करने के लिए पैदा हुए हैं और हम ऐसा उचित रूप : से तब तक नहीं कर सकते जब तक कि हम पूर्ण रूप से जागरूक न हों। अन्धकार तथा प्रकाश (अज्ञानता तथा ज्ञान) की शक्तियों का एक बाह्य संघर्ष हमारे हृदय में होता रहता है, और वह व्यक्ति, जिसके पास प्रार्थना का संबल (लंगर) सहारे के लिए नहीं हो वह अन्धकार (अज्ञानता) की शक्तियों का शिकार हो जायेगा। (ईश्वर की) प्रार्थना करने वाला व्यक्ति स्वयं के साथ भी एवं संसार के साथ भी शान्ति से रहेगा; वह व्यक्ति जो हृदय में बिना प्रार्थना के, सांसारिक जीवन व्यतीत करता है, बहुत दु:खी रहेगा और वह संसार को भी दु:खी कर . देगा। मनुष्य की मृत्यु के पश्चात् उसकी स्थिति पर इसका प्रभाव पड़ने के अतिरिक्त, सांसारिक जीवन में प्रार्थना का मनुष्य के लिए अगणनीय मूल्य है, अत्यधिक मूल्य है। हम आश्रम में साथ-साथ रहने वाले जो सत्य की तलाश में तथा सत्य पर आग्रह के लिये यहाँ आते हैं, प्रार्थना की प्रभावोत्पादकता में विश्वास रखने की घोषणा तो करते थे लेकिन इसको अभी तक अत्यधिक महत्त्व का कभी नहीं बनाया गया था। हम इस पर अभी उतना ध्यान नहीं देते जितना कि हम अन्य मामलों पर देते हैं। एक दिन मैं अपनी नींद से जागा और . महसूस किया कि मैं इस मामले में अपने कर्त्तव्य के प्रति अत्यन्त दु:खी तथा दयनीय रूप से लापरवाह रहा हूँ। इसलिये मैंने कठोर अनुशासन का उपाय अपनाने का सुझाव दिया और किसी भी प्रकार का बहुत बुरा होने से दूर, मैं आशा करता हूँ कि हम इसके लिये अधिक अच्छे व उपयुक्त हैं। क्योंकि यह बिल्कुल स्पष्ट है। तुम खुद का ध्यान रखो और शेष बातें खुद का ध्यान रखेंगी। वर्ग के किसी एक कोण को सही कर दो, और दूसरे कोण अपने आप ही सही हो जायेंगे। ..

Begin, therefore………..from the brute. (Page 103)

काठन शब्दार्थ-soulful (सोल्फ्ल ) = आत्मामय, जीवंत। close the day (क्लोज् द डे) =

समाप्त करो। free (फ्री) = मुक्त। nightmare (नाइटमेअ(र)) = दु:स्वप्न। form (फोम) = रूप। । . amverse (यूनिवस) = ब्रह्माण्ड। including (इनक्लूडिंग) = सम्मिलित करते हुए। obey (अबे) = पालन करना। restraining (रिस्ट्रेनिंग) = नियन्त्रण रूपी। mission (मिशन) = लक्ष्य। go to pieces

टुकड़े-टुकड़े हो जाना। impose (इम्पोज़) = लगाना। spiritual (स्पिरिचुअल) = आध्यात्मिक, आत्मा orestraints (रिस्ट्रेन्टस) = नियन्त्रित करता है। separate (सेपट्) = अलग रखना। brute (ब्रूट) =जंगली पशु।

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, हिन्दी अनुवाद : इसलिए आप अपना दिन (दिन के कार्य को) प्रार्थना से आरम्भ करो. और इसे ॥(प्रार्थना को) इतना आत्मा समाप्त करो (अर्थात् सोने रात्रि व्यतीत करें। इतना आत्मामय बना दो कि यह आपके साथ सन्ध्याकाल तक रहे। अपने दिन को प्रार्थना के साथ करा (अर्थात् सोने के पर्व भी प्रार्थना करो) ताकि आप स्वप्नों और दु:स्वप्नों से मुक्त एक शान्तिपूर्ण रात्रि व्यतीत करे । (अर्थात् रात्रि में आपको स्वप्न अथवा दुःस्वप्न नहीं दीखें)। प्रार्थना के रूप के विषय में चिंता मत करो। यह प्रार्थना किसी भी रूप में हो सकती है; किन्तु यह प्रार्थना ऐसी होनी चाहिए जो हमको ईश्वर के सम्पर्क में र्ख सके

ब्रह्माण्ड की सभी वस्तुएँ जिनमें सूर्य और चन्द्रमा और तारे सम्मिलित हैं—कुछ नियमों का पालन नियमों का पालन करती है इन नियमो के नियन्त्रणात्मक प्रभाव के बिना संसार एक क्षण भी नहीं चलेगा। आप, जिसके जीवन का लक्ष्य अपने साथियों की सेवा करना है, के (लक्ष्य के) टुकड़े-टुकड़े हो जायेंगे, यदि आप स्वयं पर किस प्रकार का अनुशासन नहीं रखोगे और प्रार्थना एक आवश्यक आध्यात्मिक अनुशासन है। यह अनुशासन एवं नियन्त्रण है जो हमको जंगली जानवर से पृथक् करता है।