9 Uttanka’s Gurudakshina

[उत्तंक की गुरुदक्षिणा]

कहानी के विषय में : हिन्दू पौराणिक कथाओं में उत्तंक एक प्रसिद्ध गुरु का शिष्य है। गुरु-पत्नी द्वारा गुरुदक्षिणा में चाही गई कर्ण-बालियाँ प्राप्त करने के लिए वह अनेक बाधाओं को पार करता है। उत्तंक ने इस कार्य को सफलतापूर्वक पूर्ण किया।

कठिन शब्दार्थ : Mythical (मिथिकल), = पौराणिक। wise (वाइज़) = ज्ञानी। dwelt (ड्वेल्ट)

रहेते थे। hermitage (हामाट) = आश्रम। mud (मड) = मिट्टी। straw (स्ट्रॉ) = घास-फूस।।

passed by (पास्ट बाइ) = व्यतीत हो गये। gift (गिफ्ट) = उपहार । please (प्लीज़) = प्रसन्न करना।

grew up (ग्र्यू अप) = बड़ा हो गया। mistress (मिस्ट्रेस) = स्वामिनी । bow (बो) = झुकना।

wear (वेअ(र)) = पहिनना | ear-rings = कानों की बालिया। (फीस्ट) = भोज, दावत। devotion (डिवोशन) = भक्ति। dismay (डिसमे) = निराशा। artheless (नेवदलेस्) = फिर भी, तो भी। set out (सेट आउट) = चल दिया। through the Forest (श्रू द् फॉरिस्ट) = जंगल में होकर। ।

हिन्दी अनुवाद : प्राचीन काल में, भारत के विद्वान ऋषि वनों में आश्रमों में रहा करते थे तथा वे अपने आश्रम मिट्टी व घास-फूस से बनाया करते थे, ऐसे ही एक आश्रम में; एक तरुण बालक, उत्तंक रहता था। अनेक वर्ष व्यतीत हो गये और वह बड़ा हो गया। शीघ्र ही उसने वह सब सीख लिया जो कि उसका गुरु उसको सिखा सकता था।

एक दिन वह अपने गुरु के पास गया और कहा, “गुरुजी, आपने मुझे इतने वर्षों तक शिक्षा दी, और मैंने एक बार भी उसका प्रतिफल आपको नहीं दिया। आप मुझे कोई उपहार बतलाइये, जिसे मैं लेकर आ सकूँ

और जो आपके हृदय को प्रसन्न कर सके।” .

– उसके गुरु ने कहा, “बेटे, कोई ऐसी चीज नहीं है जिसकी मुझे इच्छा हो। तुम अपनी स्वामिनी (गुरु . की पत्नी) के पास जाओ और उससे पूछो।”

इसलिए उत्तंक अपनी स्वामिनी के पास गया, और उसके सामने (सम्मान से) नीचे झुकते हुए पूछा कि क्या कोई ऐसी वस्तु थी जिसकी उसे इच्छा थी।

“हाँ”, उसने उत्तर दिया। “मैंने बहुत दिनों से इच्छा की है कि कानों की बालियाँ जो रानी पहनती है,..

मैं उन्हें पहनूँ। उसके पास जाओ और उनको (बालियों को) मेरे लिए ले आओ। चार दिनों में एक बड़ा भोज आयोजित होगा। मैं उन्हें उस दिन पहनना चाहती हूँ। मेरे लिए वे बालियाँ ले आओ तो मैं तुम्हारी सच्ची भक्ति को जानूंगी।”

यह सुनकर उत्तंक निराशा से भर गया (अर्थात् बहुत निराश हो गया)। फिर भी, वह जंगल में होता. हुआ नगर को चल दिया, जहाँ कि वह जानता था कि राजा निवास करता था।

He had not…………….he found her. (Pages 52-53)

कठिन शब्दार्थ : far (फा(र)) = बहुत दूर। huge यूज्) = विशाल। bull (बुल) = साँड, बैल। drew back in fear = डर से पीछे हट गया। called out (कॉल्ड आउट) = पुकार कर कहा। held out (हेल्ड आउट) = आगे बढा दिया। turned his head away (टॅन्ड हिज हेड अवे) = अपना सिर फेर लिया। boldlv (बोल्डलि) = हिम्मत से, साहस से। to look about him (टु लुक एबाउट हिम) = अपने चारों तरफ देखने के लिए। royal (रॉइअल) = शाही। throne (थ्रोन) = राज-सिंहासन। lose (लूज) = खो देना। favour (फेव(र)) = अनुकम्पा। chamber (चैम्ब (र)) = (बड़ा) कमरा, कक्ष। uust (डस्ट) = धल । travel (ट्रैवल) = यात्रा। stain (स्टेन) = ‘धब्बे लगे हुए। in search of (इन आव) = तलाश में। he found her (ही फाउण्ड हँ(र)) = वह उसको मिल गई। felt ashamed (फेल्ट अशेम्ड) = शर्म महसूस हुई।

हिन्दी अनुवाद : वह बहुत दूर नहीं गया था कि तभी उसने एक विशाल सांड को अपनी ओर आते

देखा। जैसे ही वह निकट आया; उत्तक ने एक व्यक्ति को सांड पर बैठे देखा जो इतना भारी-भरकम था कि वह (उतंग )भय से पीछे हट गया |किन्तु वह आदमी जोर से पुकरते हुय बोला “उतक इसे पि लो” और उसने गंदे पानी से भरा हुआ एक प्याला उसके आगे बढ़ा दिया। उत्तंक ने अपना सिर फेर लिया. लेकिन

उस आदमी ने कहा,”पी लो. उत्तंक, यह रास्ते में तुम्हारी सहायता करेगा।”

अन्त में वह राजा के महल में आ गया। वह साहसपूर्वक अन्दर गया और जब तक कि उसने को शाही सिंहासन पर बैठा न देख लिया तब तक वह कुछ भी देखने के लिए नहीं रुका। ‘महाराज उतंक ने सम्मान से नीचे झुकते हुए कहा, “मैं, यहाँ से कई मील दूर जंगल के एक आश्रम से आया है। मेर को भोज के दिन रानी के कानों की बालियाँ पहनने की इच्छा है और यदि मैं उनको उनके पास जाऊँगा, तो अपने गुरु की, नजरों में मैं उनकी अनुकम्पा से वंचित हो जाऊँगा।”

– राजा, दया से लड़के पर मुस्कुराया। उसने कहा, “तुमको रानी से पूछना चाहिए। उसके कमर और उससे पूछो (माँगो)।”

उत्तंक रानी के कक्ष में गया किन्तु वह उससे नहीं मिल सका। वह वापस राजा के पास आ कहा-“महाराज! मैं उनसे नहीं मिल सका हूँ।”

उत्तंक जब वहाँ खड़ा था तब राजा ने उस पर निगाह डाली। उसके कपड़ों पर यात्रा की धूल जमीन थी, उसके हाथ तथा पाँव गन्दे थे और उन पर गंदे धब्बे थे। “क्या तुम इस प्रकार रानी के पास जाओगे उसने कहा।

उत्तंक को शर्म महसूस हुई। स्नान करके तथा स्वच्छ होकर, वह फिर रानी की तलाश में गया। इस बार वह उसे मिल गई।

The queen held………………………in the ground. (Page 53)

कठिन शब्दार्थ : sparkling (स्पाक्लिङ्) = चमक रहे। palm (पाम) = हथेली। willingly (विलिंगलि) = अपनी इच्छा से। beware (बिवेअ(र)) = सावधान रहना। have long been coveted (हैव लॉन्ग बीन कवट्ड) = बहुत लम्बे समय से ललचाई दृष्टि से देखी जा रही है। duski (डस्क) = गोधूलि बेला, साँझ (सन्ध्या काल)। lean against (लीन अगेन्स्ट्) = के संहारे झुकना। trunk (ट्रंक) = पेड़ का तना। beside (बिसाइड) = पास में, बगल में। snatch (स्नैच) = बलपूर्वक लेते हुए, छीनते हुए। disappear (डिसॅपिअ(र)) = अदृश्य होते हुए, गायब होते हुए। sprang to his feet (स्पैग टु हिज फीट) = अपने पैरों पर उछल पड़ा। rags (रैग्ज) = चिथड़े, फटे कपड़े। wriggled (रिग्ल्ड ) = बल खाते हुए। hole (होल) = बिल, छेद। .

हिन्दी अनुवाद : रानी ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और उत्तंक ने देखा कि कानों की बालियाँ उसकी हथेली पर चमक रही थीं। “तुम एक अच्छे लड़के हो, उत्तंक”, उसने कहा। “मैं कानों की ये बालियाँ तुम्हें अपनी इच्छा से दे रही हूँ। किन्तु सावधान रहना! ये कानों की बालियाँ बहुत दिनों से साँपों का राजा लालसापूर्ण तरीके से प्राप्त करना (लेना) चाहता है। उनको खो मत देना।”

उत्तंक ने उसे धन्यवाद दिया और अपने घर के लिए चल दिया। साँझ (सन्ध्याकाल) हो रही थी और वह थक गया था। कानों की बालियों को जमीन पर अपनी बगल में रखते हुए, वह एक पेड़ के तने का सहारा लेकर आराम करने लगा। अचानक, उसने देखा कि एक हाथ ने कानों की बालियों को बलपूर्वक ले लिया (छीन लिया) और (हाथ) गायब हो गया। वह अपने पैरों पर तेजी से उछल कर खड़ा हो गया और समय पर ही चिथड़े पहने हुए एक आदमी को जंगल में होकर भागते हुए देखने के लिए मुड़ गया, (अर्थात् समर रहते ही, वह मुड़ा और चिथड़े पहने हुए एक आदमी को जंगल में होकर भागते हुए देख लिया ।) जितना से उत्तंक भाग सकता था उतनी तेजी से वह उसके पीछे दौड़ा जबकि अचानक वह आदमी एक साप में परिवर्तित हो गया और वह बल खाते हुए रेंग कर जमीन के एक बिल (छेद) में घुस गया।

Uttanka was greatly………………….my power. (Page 53)

कठिन शब्दार्थ : distressed (डिस्ट्रेस्ट) = दु:खी हुआ। try as he did (ट्राई ऐज हो । उसने खूब कोशिश की। could think of no way (कुड थिन्क ऑव नो वे) = कोई रास्ता नहीं सूझ सका to get through (टु गेट थू) = अन्दर घुसने के लिये। so small a hole (सो स्मॉल अ होल्) ।

  1. dawn (डॉन) = उषा काल, रात्रि समाप्त हो रही होती है और दिन निकल रहा होता है। अर्थात् न तो रात्रि हो न ही दिन होता है—बीच का समय। |
  2. disk (डस्क) = गोधूलि, संध्या काल, दिन समाप्त हो रहा होता है और रात्रि आरम्भ हो रही होती है। अब

दिन होता है और न रात्रि—बीच का समय। .

..

lament (लेमेन्ट) = विलाप करना। chtning (लाइट्नङ्) = बिजली चमकना। thunderbolt (थन्ड्बोल्ट्) = गरज की आवाज Tate (फट) = भाग्य । thunder (थन्डे(र)) = गरज से बिजली गिरना । shook (शुक) = हिल गई। force (फोस) = बल, शक्ति । quiet (क्वाइअट) nave (वीव) = बुनना। next to (नेवस्ट ट्र) = उस स्थान के बिल्कल पास ही। kingdom = राज्य। heed (हीड) = ध्यान देना। thrend (थ्रेड) = धागा। wheel (वील) = पहिया। spoke (स्पोक) = पहिये की ताडी struck (स्टक) = आश्चर्यचकित । a favour (अफेव(र)) = एक वरदान |

हिन्दी अनुवाद : उत्तक बहुत दु:खी हुआ, जैसा कि उसने खब प्रयास किया, वह उस छोटे से बिल

के अन्दर जाने का कोई तरीका (रास्ता) नहीं सोच सका। वह अपने भाग्य पर विलाप करने के लिए बैठ गया, जब उसके सामने एक आदमी प्रकट हुआ।

चिन्ता मत करो, मेरे पुत्र”, उसने कहा, “मैं तुम्हारी सहायता करने के लिए आया हूँ।” ज्योंही वह होला तो गरज की आवाज़ आई और बिजली चमकी तथा गरज के साथ आकाश से बिजली गिरी। उसकी शक्ति से सारी पृथ्वी हिल गई। अचानक, सब कुछ पुनः शान्त हो गया, किन्तु जहाँ उत्तंक खड़ा हुआ था वहां पर जमीन में एक बड़ा बिल बन गया। ..

उत्तंक ने उस बिल में प्रवेश किया और अपने आपको साँपों के राजा के राज्य में पाया। वह धीरे-धीरे चला और दो स्त्रियों के पास आया, जो कपड़े का एक टुकड़ा बुन रही थीं। उसने उन स्त्रियों से सर्पराज के महल का रास्ता पूछा। उन स्त्रियों ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया, और कपड़ा बुनती रहीं। उसने देखा कि उनका कपड़ा काले और सफेद धागों का बना था। . इसके पश्चात् वह एक पहिए के निकट आया जिसमें बारह ताड़ियाँ थीं। छः लड़के उसे (पहिये को) घुमाए जा रहे थे। “तुम क्या कर रहे हो?” उसने लड़कों से पूछा। उन्होंने उसे कोई उत्तर नहीं दिया और अपना कार्य करते रहे । इसलिए वह चलता गया तब उसने एक आदमी को एक सुन्दर घोड़े पर देखा। ..

उत्तंक उसके पास गया। वह घोड़े से इतना आश्चर्यचकित हुआ कि वह उस आदमी के सामने सम्मान से झुका और कहा-“ओ स्वामी, मैं आपका झुककर अभिवादन करता हूँ। मुझे एक वरदान दीजिए।”

वह आदमी मुड़ा और कहा-“मैं तुम्हारे लिये क्या कर सकता हूँ?” उत्तंक ने उत्तर दिया-“सर्पराज मेरे नियन्त्रण में ला दिया जाये।” .

Blow into this………………..nothing to fear. (Pages 53-54)

कठिन शब्दार्थ : Blow (ब्लो) = फूंक मारना। blew and blew = बार-बार फूंक मारी। dart (डार्ट) = अचानक फूट पड़ना, तेजी से निकलना। flame (फ्लेम) = ज्वाला, आग की लपट। hot through (शॉट थ्र) = तेजी से फैल गई। space (स्पेस्) = जगह, स्थान। beg (बेग) = प्रार्थना करना।

.. Clamoured (क्लैमॅड) = होहल्ला, शोर कर दिया। just in time (जस्ट इन टाइम) = बिल्कल समय पर। bless (ब्लेसड) = आशीर्वाद देना। courage (करिज़) = साहस। related (रिलेटिड) । का वर्णन किया। adventure (अड्वेन्च(र) = साहसिक कार्य। ambrosia (अम्ब्रॉसिया) = [ का भोजन. अमत। eternal (इटनल) = सदैव, अनन्त। youth (यूथ्) = जवानी। maidens ज) = स्त्रियाँ। cencane (सीजन्ज) = ऋतुएँ। deserve (डिजव) = पात्र, योग्य। fortune

भाग्य। protect (प्रटेक्ट) = रक्षा करना।

“हिन्दी अनुवाद : “इस घोडे के अन्दर फूंक मारो”, आदमी ने उत्तर दिया। “

उन्तक घोड़े के पास गया और बार-बार फूंक मारी, और घोड़े के शरीर के प्रत्येक बाल से आग की लपट तेजी से निकली जो सर्पराज के राज्य के प्रत्येक स्थान पर तेजी से फ़ैल गई|उसके मकानों को जला दिया और सभी साप झपट कर बाहर निकल आये, और उत्तंक से उनके (सर्पो के) जीवन को बचाने

करने लगे।

“सर्पराज को उसकी कानों की बालियाँ लौटा देनी चाहिए”, उत्तंक ने कहा।

समस्त साँपों ने तब कानों की बालियाँ लौटाने के लिए राजा के सामने कोलाहल (होहल्ला) किया

उसने (राजा ने) बालियाँ लौटा दीं।

उस मनुष्य ने उत्तंक को वह घोड़ा दे दिया और कुछ ही क्षणों में वह अपने आश्रम में दावत (भोज) के लिए अपनी स्वामिनी को कानों की बालियां देने के लिए ठीक समय पर पहुँच गया। उसने उसके महान साहस के लिए उसे आशीर्वाद दिया।

जब उत्तंक ने अपने साहसी कार्यों का वर्णन किया, उसके गुरु मुस्कुराये और कहा-“जो गंदा पानी तुमने पिया, वह अमृत था, मेरे लड़के, वह तुम्हें चिर युवा रखेगा। वे दो स्त्रियाँ जो काले और सफेद धागों से बुन रही थीं, वह रात्रि और दिन हैं। बारह ‘ताड़ियों वाला पहिया, वर्ष और इसके बारह महीने हैं, और लड़के-ऋतुएँ हैं। वह मनुष्य, वर्षा का भगवान् (इन्द्रदेव) था, और घोड़ा—अग्नि का भगवान् (अग्निदेव) था। तुम्हारी देखभाल, साँझ-सँभाल भली-भाँति की गई है, मेरे बच्चे, और तुम आशीर्वाद के योग्य हो, पात्र हो । अब तुम संसार में जाओ, क्योंकि एक महान् सौभाग्य तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा है।” . इस प्रकार, उत्तंक अपने कर्तव्यों का पालन करके, अपनी जीविका प्राप्त करने के लिए संसार में गया। वह अन्य आदमियों की भाँति नहीं था, क्योंकि वह जानता था कि ईश्वर ने उसकी रक्षा की थी। उसको किसी चीज़ का डर नहीं था। ।