Rajasthan Board RBSE Class 12 Political Science Chapter 26 आतंकवाद, राजनीति का अपराधीकरण, भ्रष्टाचार

RBSE Class 12 Political Science Chapter 26 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

RBSE Class 12 Political Science Chapter 26 बहुंचयनात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भ्रष्टाचार का आरम्भिक केन्द्र औद्योगिक एवं व्यापारिक घरानों द्वारा दिया जाने वाला चन्दा माना जाता है, ये चंदा देते हैं।
(अ) धार्मिक संस्थानों को
(ब) राजनीतिक दलों को
(स) मजदूर संघों को।
(द) कर्मचारी संगठनों को।

प्रश्न 2.
आतंकवाद के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन-सा सही नहीं है?
(अ) यह एक शान्ति प्रिय आन्दोलन है।
(ब) यह अहिंसा पर आधारित है।
(स) यह एक सकारात्मक अवधारणा है।
(द) यह एक विखंडनकारी प्रवृत्ति है।

प्रश्न 3.
वर्तमान समय में विश्व शान्ति को किससे खतरा है?
(अ) गाँधीवाद
(ब) मार्क्सवाद
(स) फेबियनवाद
(द) आतंकवाद

प्रश्न 4.
इस्लामी आतंकवाद का निम्नलिखित में कौन – सा उद्देश्य नहीं है?
(अ) विश्व में मुस्लिम राष्ट्र की स्थापना करना।
(ब) पश्चिमी गैर मुस्लिम शक्तियों का हिंसक गतिविधियों से प्रतिरोध करना।
(स) विश्व में शान्ति स्थापित करना।।
(द) विश्व में इस्लामी कानूनों और सिद्धान्तों को लागू करना।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित में से कौन-सा देश आतंकवाद को प्रश्रय देता है?
(अ) फिलिपीन्स
(ब) इण्डोनेशिया
(स) पाकिस्तान
(द) कम्बोडिया

प्रश्न 6.
LTTE ‘लिट्टे’ किस देश में सक्रिय था?
(अ) भारत
(ब) मलाया
(स) श्रीलंका
(द) चीन

प्रश्न 7.
निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य आतंकवाद से सर्वाधिक प्रभावित है?
(अ) अरुणाचल प्रदेश
(ब) जम्मू एवं कश्मीर
(स) सिक्किम
(द) गोवा

प्रश्न 8.
विमुद्रीकरण क्यों लागू किया गया?
(अ) मुद्रा की अधिकता पर अंकुश लगाने के लिए
(ब) काला धन बाहर लाने के लिए
(स) फटे एवं खराब नोट के प्रचलन को रोकने के लिए
(द) यह एक नियमित प्रक्रिया है।

उत्तर:
1. (ब), 2. (द), 3. (द), 4. (स), 5. (स), 6. (स), 7. (ब), 8. (ब)।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 26 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
आतंकवाद मूलतः कैसी प्रवृत्ति है?
उत्तर:
आतंकवाद मूलत: एक विखंडनकारी प्रवृत्ति है।

प्रश्न 2.
आतंकवाद के दो कारण बताइए।
उत्तर:
आतंकवाद के दो कारण:

  1. दलीय व चुनावी राजनीति का दुरुपयोग।
  2. नवयुवक वर्ग में बढ़ता हुआ तीव्र असंतोष।

प्रश्न 3.
आतंकवाद का अन्य किन प्रवृत्तियों से निकट सम्बन्ध है?
उत्तर:
आतंकवाद का जम्मू व कश्मीर के इस्लामिक आतंकवाद, राज्यों में सक्रिय नक्सलवाद जैसी आदि अनेक प्रवृत्तियों से निकट सम्बन्ध है।

प्रश्न 4.
आतंकवाद को किस आधार पर समर्थन प्राप्त होता है?
उत्तर:
युवाओं में धर्मान्धता व कट्टरपन की भावना को पैदा करना तथा समाज में लोगों को मुख्य राष्ट्रीय धारा से विमुख करने में विदेशी सहयोग के आधार पर आतंकवाद को समर्थन प्राप्त होता है।

प्रश्न 5.
भारत के किस राज्य में सर्वाधिक आतंकी संगठन सक्रिय हैं?
उत्तर:
भारत के जम्मू-कश्मीर राज्य में सर्वाधिक आतंकी संगठन सक्रिय हैं।

प्रश्न 6.
किस विद्वान ने कहा है कि “हिंसा आतंकवाद का प्रारम्भ है, इसका परिणाम है और इसका अंत है?
उत्तर:
यह कथन ‘डेविड फ्रॉमकिन’ का है।

प्रश्न 7.
भारत के आतंकवाद प्रभावित किन्हीं पाँच राज्यों के नाम बताइए।
उत्तर:
जम्मू और कश्मीर, पंजाब, आंध्र प्रदेश, त्रिपुरा तथा मणिपुर आदि राज्य आतंकवाद से प्रभावित हैं।

प्रश्न 8.
राजनीतिक अपराधीकरण के दो कारण बताइए।
उत्तर:
राजनीतिक अपराधीकरण के दो कारण

  1. भौतिकवादी प्रवृत्ति,
  2. राष्ट्रीयता की भावना का अभाव।

प्रश्न 9.
भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कौन-सा कानून है?
उत्तर:
भ्रष्टाचार को रोकने के लिए ”भ्रष्टाचार निरोधक कानून’ निर्मित किया गया है।

प्रश्न 10.
भ्रष्टाचार का मूल स्त्रोत क्या है?
उत्तर:
भ्रष्टाचार का मूल स्त्रोत औद्योगिक घरानों, व्यापारियों और औद्योगिक संस्थानों द्वारा राजनीतिक दलों को दिया जाने वाला चंदा है।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 26 लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
आतंक के मनोवैज्ञानिक तत्वों के बारे में लिखिए।
उत्तर:
आतंक के मनोवैज्ञानिक तत्व – आतंकवाद एक मनोवैज्ञानिक हमला है। इसका लक्ष्य एक प्रकार से मनोवैज्ञानिक परिणामों को प्राप्त करना होता है। आतंकवाद के मनोवैज्ञानिक तत्वों को निम्नलिखित बिन्दुओं के माध्यम से स्पष्ट कर सकते हैं

  1. अभित्रास – अभित्रास का अर्थ व्यक्तियों को डराने या धमकाने से लगाया जाता है। यह एक सक्रिय मनोवैज्ञानिक तत्व है। इसके माध्यम से आतंकवादी गिरोह अपनी गतिविधियों से व्यक्तियों को डराने या धमकाने का प्रयास करते हैं। इससे वे समाज में लोगों के मन में उनके प्रति खौफ पैदा करते हैं।
  2. उकसाने की प्रवृत्ति समाज में आतंकवादी गिरोह लोगों को धर्म, भावनाओं या अन्य आधारों पर भड़काने का कार्य करते हैं, ऐसा करके वे लोगों में दूरी बढ़ाना चाहते हैं।
  3. कर्म द्वारा प्रचार – आतंकवादी गुट सम्पूर्ण समाज में हिंसक कर्म या गतिविधियों के द्वारा प्रचार करते हैं। जैसे-समाज में धर्म के नाम दंगे या तोड़-फोड़ करना, हजारों लोगों को मौत के घाट उतार देना तथा बम बिस्फोट करना आदि। इन तरीकों से आतंकवादी समाज में आतंक का संचार करते हैं।

प्रश्न 2.
आतंकवादी कार्यवाही के प्रमुख लक्ष्य क्या हैं?
उत्तर:
आतंकवादी कार्यवाही के लक्ष्य: आतंकवादी कार्यवाही के मुख्यतः तीन लक्ष्य हैं।

  1. कार्यनीतिक लक्ष्य – कार्यनीतिक स्तर पर लोगों को डराना, धमकाना, आतंकित करना तथा उन पर हमला करना सम्मिलित होता है। इस लक्ष्य के माध्यम से आतंकी गिरोह समाज में लोगों पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने के लिए इन समस्त गतिविधियों का सहारा लेते हैं।
  2. रणनीतिक लक्ष्य इस लक्ष्य या चरण के अन्तर्गत अति नाटकीय ढंग से आतंक एवं हिंसा की कार्यवाही को सम्पन्न किया जाता है अर्थात् किसी भी हिंसक गतिविधि को समाज में लोगों पर करने के लिए उसका उचित प्रकार से नीतियाँ या षड्यन्त्र के द्वारा क्रियान्वयन किया जाता है।
  3. अभित्सित लक्ष्य – इस लक्ष्य के माध्यम से आतंकी गिरोह सत्ता से लाभ प्राप्त करना चाहते हैं। इसके लिए वे अधिक-से-अधिक लोगों का ध्यान खींचने की कोशिश करते हैं, जिससे वे इस लक्ष्य को प्राप्त कर सके।

प्रश्न 3.
आतंकवादी घटना के अत्यधिक मीडिया कवरेज के क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं? बताइए।
उत्तर:
आतंकवादी घटना के अत्यधिक मीडिया कवरेज के दुष्परिणाम: आतंकवादी घटना के अत्यधिक मीडिया कवरेज के अनेक दुष्परिणाम होते हैं जो निम्नलिखित हैं

  1. आतंकी गुटों के निर्माण में सहायक मीडिया कवरेज के कारण आतंकवादी अनेक गुटों के निर्माण के लिए प्रेरित होते हैं। मीडिया के कवरेज के परिणामस्वरूप अनेक राज्यों, देशों व अन्य स्थानों पर आतंकवादी क्रियाओं को करने में उन्हें सहायता मिलती है।
  2. नवीन सूचनाओं की जानकारी आतंकवादियों को मीडिया कवरेज के परिणामस्वरूप अन्य क्षेत्रों के विषय में नवीन जानकारी उपलब्ध हो जाती है, जिससे वे अपनी नई आतंकी गतिविधियों का क्रियान्वयन करते हैं।
  3. प्रतिकूल प्रभाव – मीडिया कवरेज से प्रशासन की कार्य-कुशलता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
  4. लोकप्रियता हासिल करना – धार्मिक व साम्प्रदायिक कारणों से आतंकवादियों को सस्ती लोकप्रियता हासिल होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

प्रश्न 4.
भारत में आतंकवाद के स्वरूप पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
भारत में आतंकवाद का स्वरूप- भारत में आतंकवाद के स्वरूप को निम्नलिखित तथ्यों के माध्यम से स्पष्ट कर सकते हैं ।

  1. भारत में सभी आतंकवादी संगठन हिंसा व भय पैदा करने के विभिन्न तरीकों को अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रयोग करते हैं।
  2. भारत में पंजाब व जम्मू – कश्मीर में आतंकवाद पूर्णतया पृथकतावादी श्रेणी में आता है।
  3. भारत में आतंकवादियों ने धर्मान्तरण करवाने के लिए धर्म के नाम पर व्यापक भय पैदा करने के लिए निर्मम व क्रूर आतंकी तरीकों का प्रयोग करते आए हैं।
  4. भारत में अन्य स्थानीय आतंकी संगठनों के अतिरिक्त पाकिस्तान समर्थित एवं प्रशिक्षित विदेशी आतंकी संगठन भी सक्रिय हैं।
  5. भारत में हुई अनेक विध्वंसकारी घटनाओं में अपराधी, तस्कर गिरोहों, कट्टरपंथियों तथा विदेशी एजेन्सियों की सक्रिय भूमिका रही है।

प्रश्न 5.
इस्लामी आतंकवाद से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
इस्लामी आतंकवाद से अभिप्राय-”इस्लामी आतंकवाद” इस्लाम का ही एक रूप है, जो विगत् 20-30 वर्षों में अत्यधिक शक्तिशाली बन गया है। इस्लामी आतंकवादियों का किसी एक गुट विशेष के प्रति समर्पण का भाव नहीं होकर एक समुदाय विशेष के प्रति समर्पण भाव होता है। समुदाय के प्रति प्रतिबद्धता इस्लामिक आतंकवाद की मुख्य प्रवृत्ति है।

पंथ या अल्लाह के नाम पर आत्म – बलिदान और बर्बरता, जबरन धन वसूली और निर्मम नृशंस हत्याएँ करना ऐसे आतंकवाद की विशेषता बन गई है। इस्लाम का यह रूप किसी अन्य समुदाय के लोगों से भी अधिक मुस्लिमों की हत्या करता है और उनको उत्पीड़ित करता है। इस समय दुनिया में ज्यादातर मुस्लिमों की मौत की वजंह अमेरिकी ड्रोन नहीं बल्कि उनकी वजह मुस्लिमों पर होने वाले इस्लामी हमले हैं। मुस्लिमों पर मुस्लिम ही अत्याचार करते हैं। जम्मू और कश्मीर राज्य में इस्लामी आतंकवाद पूर्णतया धार्मिक व पृथक्तावादी श्रेणी में आता है।

प्रश्न 6.
भ्रष्टाचार क्या है?
उत्तर:
भ्रष्टाचार से आशय-भ्रष्टाचार का अर्थ है कोई व्यक्ति अथवा संगठन अपने निर्धारित कानूनी दायरे से परे जाकर अनुचित ढंग से किसी व्यक्ति अथवा संगठन को लाभ पहुँचाए तथा बदले में धन अथवा अन्य सुविधाएँ प्राप्त कर सार्वजनिक हितों को नुकसान पहुँचाए। भ्रष्टाचार मुख्य रूप से राजनीतिक दलों को चुनावों में व्यापारियों द्वारा दिए जाने वाले चंदे से आरम्भ होता है।

भ्रष्टाचार के अधिकांश मामले खरीद, अनुदान, निर्माण, ऋण, नियुक्ति तथा स्थानान्तरण आदि क्षेत्रों से सम्बन्धित होते हैं। जब कोई व्यक्ति न्याय व्यवस्था के मान्य नियमों के विरुद्ध जाकर अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए गलत आचरण करने लगता है तो वह व्यक्ति * भ्रष्टाचारी” कहलाता है। इस प्रक्रिया के कारण चुनावों के पश्चात् सत्ता में आने वाले दलों से व्यापारिक घराने और औद्योगिक संस्थान अनुचित लाभ उठाने का प्रयास करते हैं और यहीं से आरम्भ होती है भ्रष्टाचार की व्यवस्था।

प्रश्न 7.
राजनीतिक अपराधीकरण का अर्थ बताइए।
उत्तर:
राजनीतिक अपराधीकरण का अर्थ – राजनीतिक अपराधीकरण वह प्रवृत्ति है जिसके अन्तर्गत अपराधिक पृष्ठभूमि के लोग प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से राजनीतिक प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। राजनीति में प्रवेश करने, सत्ता को प्राप्त करने व सत्ता में बने रहने के लिए राजनीतिज्ञों द्वारा समय – समय पर अपराधियों की सहायता लेना राजनीतिक अपराधीकरण कहलाती है।

भारत में राजनीति को एक लाभप्रद व्यवसाय के रूप में मान लेने की प्रवृत्ति ही राजनीतिक अपराधीकरण को जन्म देती है। भारतीय राजनीति का अपराधीकरण एक ऐसी परिघटना है, जिसने भारतीय लोकतन्त्र को दिशाविहीन कर दिया है। चुनावों में बाहुबल और धनबल के बुरे प्रभाव ने सम्पूर्ण लोकतान्त्रिक व्यवस्था को क्षत-विक्षत कर दिया है। इस प्रवृत्ति के परिणामस्वरूप ही चुनावी राजनीति का अपराधीकरण हो गया है।

प्रश्न 8.
राजनीतिक अपराधीकरण को समाप्त करने के लिए क्या-क्या कदम उठाए जा सकते हैं?
उत्तर:
राजनीतिक अपराधीकरण को समाप्त करने के लिए उठाए गए कदम राजनीतिक अपराधीकरण को समाप्त करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं

  1. प्रभावी ऑनलाइन निर्वाचन की व्यवस्था को प्रारम्भ करना।
  2. निर्वाचन आयोग का निष्पक्ष तौर पर गठन किया जाना चाहिए।
  3. त्वरित न्यायिक निर्णयों द्वारा अपराधी तत्वों को चुनाव लड़ने से प्रतिबन्धित करना।
  4. उन राजनीतिक दलों पर जुर्माना एवं दंड लगाने का प्रावधान हो जो अपराधियों को टिकट देते हैं।
  5. संविधान द्वारा राजनीतिक दलों की कार्यप्रणाली व कार्य व्यवहार को नियंत्रित करने हेतु कानूनी व्यवस्था को प्रावधान किया जाना चाहिए।
  6.  राजनीतिक दलों में आन्तरिक लोकतन्त्र व जवाबदेही का विकास करना।
  7. कानूनों में आवश्यक संशोधन कर अपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाना।
  8. राजनीति में सक्रिय अपराधियों के विरुद्ध चल रहे मुकदमों के शीघ्र निस्तारण हेतु फास्ट ट्रैक न्यायालयों की विशेष व्यवस्था करना।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 26 निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
आतंकवाद की समस्या पर लेख लिखिए।
उत्तर:
आतंकवाद की समस्या-आतंकवाद शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द Terror’ से हुई है, जिसका अर्थ है “To make tremble”- किसी को भय से कँपकपाने को मजबूर करना। सामान्य अर्थ में किसी भी प्रकार से भय उत्पन्न करने की विधि को आतंकवाद कहा जा सकता है। दूसरे शब्दों में कहे। तो व्यक्ति य व्यक्ति समूह जब अपने अनुपित माँगों की पूर्ति के लिए व्यापक स्तर पर हिसाव व अशांति आधारित नकारात्मक प्रयत्न करता है तो उसे आतंकवाद कहा जाता है।’ आतंकवाद को आमतौर पर धार्मिक, जातीय, क्षेत्रीय व नस्लीय आधार पर समर्थन मिलता है। आधुनिक युग में तथाकथित अधिनायकवादी शासन का मूल आधार भय ही है। आतंक

वादियों का मूल लक्ष्य वर्तमान या विधिसंगत शासन को । बलपूर्वक हटाकर कर सत्ता हथियाना होता है। आतंकवाद विश्व की सबसे खतरनाक हिंसक मनोवैज्ञानिक युद्ध प्रणाली है। शीतयुद्ध की समाप्ति के पश्चात् विश्व के लिए आतंकवाद सबसे बड़ा खतरा बन गया है। आतंकवाद उन नवीन संस्कारों में. शामिल है जिससे आणविक, जैविक व रासायनिक हथियारों के प्रयोग वे सामूहिक विनाश की आशंका बनी हुई है। आतंकवाद की रणनीति रही है कि हिंसा के माध्यम से सुनियोजित ढंग से आम जनता में दहशत पैदा की जाए, सत्ता की। प्रतिक्रियाओं से लाभ उठाया जाए तथा अपनी माँगों को सरकार से आगे उभारा जाए।

भारत के सम्पूर्ण इतिहास में शक्ति को प्राप्त करने के लिए आतंक का प्रयोग बार-बार होता रहा है। भारत में पिछली सदी के दो दशकों के सिक्ख आतंकवाद, जम्मू-कश्मीर का इस्लामिक आतंकवाद, वर्तमान में विभिन्न भारतीय राज्यों में सक्रिय नक्सलवाद और उत्तर – पूर्व के विभिन्न राज्यों के उग्रवाद को आतंकवाद की परिभाषा में सम्मिलित किया जा सकता है। भारत के जम्मू-कश्मीर राज्य में अनेक स्थानीय आतंकी संगठनों के अतिरिक्त अन्य पाकिस्तान समर्थित एवं प्रशिक्षित

विदेशी आतंकी संगठन भी सक्रिय हैं परन्तु 20 व 21वीं सदी के अधिकांश आतंकवादी गुट अपने मंसूबों को पूरा करने में पूरी तरह से असफल रहे हैं। भारत में पंजाब के आतंकी पूरी तरह से असफल हुए हैं। कश्मीर में आतंकवादी गुटो को धार्मिक कारणों से अधिक जनाधार प्राप्त है लेकिन वो भी हमारे सुरक्षा बलों के आगे घुटने टेकने को मजबूर हैं। आई.एस. आई.एस, बोकोहरम, तालिबान व अन्य मुस्लिम आतंकवादी संगठन अभी तक राजनीतिक रूप से असफल ही रहे हैं। आज आतंकवाद विश्व शांति और सुरक्षा के लिए सबसे गम्भीर चुनौती बना हुआ है। विश्व के समस्त देश जब तक एकजुट होकर इसका सामना नहीं करेंगे, तब तक यह समस्या समाप्त नहीं होगी। इसलिए शासन को इस जटिल समस्या से निपटने के लिए अनेक कठोर कदम उठाने चाहिए।

प्रश्न 2.
भारतीय राजनीति अपराधीकरण से किस प्रकार प्रभावित होती है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारतीय राजनीति अपराधीकरण से अनेक प्रकार से प्रभावित होती है, जिसे निम्नलिखित तथ्यों के माध्यम से स्पष्ट किया जा सकता है

  1. भारतीय राजनीति में अपराधीकरण की प्रवृत्ति से स्वार्थों में वृद्धि होती है। राजनीति में नेता अपने हितों की पूर्ति के लिए राष्ट्रीय हितों की अवहेलना करते हैं। वे गलत तरीकों से अपने कार्यों को पूर्ण करने का प्रयास करते हैं।
  2. कुछ व्यक्ति राजनीति में प्रवेश करने के लिए अपराधियों की सहायता लेते हैं ताकि वे राजनीति में प्रवेश कर शासन की शक्ति का लाभ उठा सकें।
  3. भारतीय राजनीति में कुछ नेता शासन का दुरुपयोग करने के लिए या सत्ता हथियाने के लिए भी अपराधियों की मदद लेते हैं, वे शासन पर अपना एकाधिकार स्थापित कर सकें।
  4. भारत में राजनीति को नेताओं ने एक लाभप्रद व्यवसाय मान लिया है। इस प्रवृत्ति ने भी राजनीति को काफी प्रभावित किया है।
  5. भारतीय राजनीति में कुछ नेता लोगों पर या किसी क्षेत्र पर अपना प्रभुत्व या साख जमाने के लिए भी अपराधीकरण की प्रक्रिया का सहारा लेते हैं।
  6. भारतीय राजनीति आज अपराधीकरण की प्रक्रिया के कारण एक दलीय या दलगत राजनीति बनकर रह गई है।

यदि हम 16वीं लोकसभा का विश्लेषण करें तो पाएँगे कि लोकसभा के 34 प्रतिशत सदस्य आपराधिक पृष्ठभूमि वाले हैं जिनके विरुद्ध आपराधिक मामले विचाराधीन हैं। हमारे जन प्रतिनिधियों में आपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों की निरन्तर बढ़ती संख्या लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जा सकता। भारतीय राजनीति में निरन्तर बढ़ते हुए अपराधियों की संख्या इसके अपराधीकरण का स्तर प्रदर्शित कर रही है। राजनीतिक दल चुनाव जीतने के चक्कर में अपराधियों का भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं। अपराधी भी राजनीतिक दल की उम्मीदवारी प्राप्त कर चुनाव जीत रहे हैं और मंत्री बनकर इस देश के नीति निर्धारक बन रहे हैं। इस प्रकार भारतीय राजनीति अपराधीकरण से प्रभावित हो रही है।

प्रश्न 3.
भ्रष्टाचार दीमक की तरह है जो किसी राष्ट्र की जड़े खोखली करता है।” इस कथन के परिप्रेक्ष्य में रोकने के उपाय सुझाइए।
उत्तर:
कोई व्यक्ति या संगठन अपने निर्धारित कानूनी दायरे से परे जाकर अनुचित ढंग से किसी व्यक्ति अथवा संगठन को लाभ पहुँचाए तथा बदले में धन या अन्य सुविधाएँ प्राप्त कर सार्वजनिक हितों को नुकसान पहुँचाये तो यह भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है। यह सत्य है कि भ्रष्टाचार किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में एक दीमक की तरह होता है जो धीरे – धीरे किसी राष्ट्र की जड़ों को खोखला करता रहता है। भारतीय समाज में भ्रष्टाचार अपने विकराल रूप में इस तरह फैल चुका है कि अब यह मात्र व्यवहार न होकर एक एकीकृत मनोवृत्ति बन चुका है। भले ही इसका मुख्य प्रभाव लगातार विकसित होते मध्य वर्ग पर अधिक दिखता है पर उच्च वर्ग से लेकर निम्न वर्ग तक कोई भी इससे अछूता नहीं रहा।

भ्रष्टाचार के कारण देश विकास के पथ पर शीघ्रता से नहीं बढ़ पा रहा है। देश के बहुत अधिक संसाधन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाते हैं। यदि हम भ्रष्टाचार के कारणों की बात करें तो मुख्य कारण हमारे समाज का भौतिकवादी दृष्टिकोण है। समाज में उसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा व सम्मान है जिसके पास अपार धन है। समाज के व्यक्ति इस बात पर ध्यान नहीं देते कि धन कहाँ से आता है। सांस्कृतिक मूल्य और संस्थागत साधनों का धीरे – धीरे अवमूल्यन हो रहा है। अब एक ही उद्देश्य है- अधिकाधिक धन लाभ और सत्ता प्राप्ति। इनके प्राप्ति के साधनों पर कोई भी ध्यान नहीं देता है। व्यापारियों व राजनेताओं की सांठ – गांठ भी भ्रष्टाचार बढ़ा रहीहै।

चुनाव में राजनेता बड़े व्यापारियों से आर्थिक सहायता माँगते हैं। इसके बदले में व्यापारी लाभ प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। यह चक्र भ्रष्टाचार को निरन्तर प्रोत्साहन प्रदान करता है। भ्रष्टाचार के दुष्परिणाम बड़े ही भयावह व डरावने लगते हैं। समाज में आर्थिक विषमता पनप रही है, काले धन का अम्बार लग रहा है। इस कारण देश की अर्थव्यवस्था पंगु बन जाती है। बेरोजगारी को बढ़ावा मिल रहा है। उच्च स्तर पर हो रहा भ्रष्टाचार निचले स्तर के कर्मचारियों को कामचोर व निकम्मा बना रहा है। इस प्रकार भ्रष्टाचार से राष्ट्र की जड़े खोखली हो रही हैं।

भ्रष्टाचार को रोकने के उपाय – भ्रष्टाचार को निम्नलिखित उपायों द्वारा रोका जा सकता है

  1. केंन्द्रीय मन्त्रियों और सांसदों के विरुद्ध कार्यवाही करने के लिए शक्तिशाली लोकपाल संस्था की स्थापना करना।
  2. किसी भी लोकसेवक के विरुद्ध भ्रष्टाचार की शिकायत आने पर उसकी तुरन्त जाँच पड़ताल करना तथा दोषी पाये जाने पर उनकी सम्पत्ति जब्त करना।
  3.  विभागों/बैंकों/सार्वजनिक उपक्रमों में भ्रष्टाचार विरोधी कार्यों का निरीक्षण और उन पर रोक लगाना।
  4. आम जनता को सरकारी नीतियों, प्रक्रियाओं एवं गतिविधियों की जानकारी प्रदान करना।
  5. भ्रष्टाचार के दोषी व्यक्ति को त्वरित न्याय प्रक्रिया द्वारा कठोर दण्ड देना।
  6. राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे की पूरी तरह जाँच-पड़ताल करनी चाहिए।
  7. विमुद्रीकरण प्रक्रिया द्वारा निरन्तर कालाधन बाहर लाया जाना चाहिए।

प्रश्न 4.
भारत में राजनीतिक अपराधीकरण के वर्तमान परिदृश्य बताते हुए उसके कारण एवं निवारण के उपायों की समीक्षा कीजिए।
उत्तर:
भारत में राजनीतिक अपराधीकरण का वर्तमान परिदृश्य भारत में राजनीति को एक उपयोगी व्यवसाय के रूप में मान लेने की प्रवृत्ति ही राजनीतिक अंपराधीकरण को जन्म देती है। दलीय राजनीति में अपराधीकरण की अधिक सम्भावना रहती है क्योंकि इसमें सत्ता में आने का रास्ता चुनाव के माध्यम से ही खुलता है। वर्तमान में भारतीय राजनीति में निरन्तर बढ़ते हुए अपराधियों की संख्या इसके अपराधीकरण का स्तर प्रदर्शित करती है। सभी राजनीतिक दलों द्वारा अपने उम्मीदवारों का चयन अलोकतान्त्रिक व निरंकुश ढंग से किया जाता है। सभी दल ईमानदार छवि वाले लोगों की तुलना में धनबल और बाहुबल वाले जिताऊ उम्मीदवारों को ही टिकट देते हैं।

राजनीतिक अपराधीकरण के कारण:

  1. राष्ट्रीयता की भावना का अभाव।
  2. न्यायिक प्रणाली की कमियाँ भी इस समस्या को बढ़ावा देती हैं।
  3. राजनीति में धन व बल का मिश्रण होना।…
  4. कुशल, ईमानदार व निष्पक्ष नेतृत्व का अभाव।
  5. कानूनों को प्रभावशाली रूप से लागू न करना।
  6. पुलिस, नेताओं व अधिकारियों में परस्पर अनैतिक सांठ-गांठ का पाया जाना।
  7. भौतिकवादी प्रवृत्ति अर्थात् सुविधाओं को पूर्ण करने वाले साधनों की अत्यधिक चाह की प्रवृत्ति ।
  8. गरीबी शिक्षा एवं बेरोजगारी की अत्यधिक व्याप्ति।।
  9. जनता द्वारा आपराधिक प्रवृत्ति के नेताओं को स्वीकार करना।
  10. निर्वाचन प्रणाली की कमियाँ।

निवारण के उपाय:

  1. निर्वाचन आयोग का पारदर्शी गठन करना।
  2. नोटा जैसे उपायों की समुचित व्यवस्था करना, जिससे आपराधिक पृष्ठभूमि के व्यक्ति चुनाव न जीत सकें।
  3. कानूनों को कठोर बनाते हुए, उन्हें प्रभावी ढंग से क्रियान्वित कराना।
  4. आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को चुनावी प्रक्रिया में शामिल न करना।
  5. फास्ट – ट्रेक’ न्यायालयों की विशेष व्यवस्था करना।
  6. प्रभावी ऑनलाइन निर्वाचन की व्यवस्था प्रारम्भ करना।
  7. अपराधियों को टिकट देने वाले राजनीतिक दलों पर जुर्माना व दण्ड का प्रावधान करना।
  8. गरीबी, अशिक्षा व बेरोजगारी का सम्यक तरीके से निवारण करना।
  9. जनता द्वारा आपराधिक प्रवृत्ति के राजनेताओं को स्वीकारकरना।
  10.  निर्वाचन प्रणाली की कमियाँ दूर करना।
  11. शासन की क्षमता व गुणवत्ता में गिरावट को दूर करना।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 26 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Political Science Chapter 26 बहुंचयनात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
आतंकवाद से प्रभावित होने वाले देशों में से एक है
(अ) चीन
(ब) संयुक्त राज्य अमेरिका
(स) भारत
(द) भूटान

प्रश्न 2.
‘Terror’ शब्द किस भाषा का है?
(अ) ग्रीक
(ब) लैटिन
(स) स्पेनिश
(द) पुर्तगाली

प्रश्न 3.
आतंक के प्रयोग से तात्पर्य है|
(अ) भय पैदा करना
(ब) शांति स्थापित करना
(स) न्याय स्थापित करना
(द) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 4.
आतंकवाद को आमतौर पर समर्थन मिलता है
(अ) धार्मिक आधार पर
(ब) जातीय आधार पर
(स) नस्लीय आधार पर
(द) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 5.
आतंकवाद का मुख्य उद्देश्य है
(अ) आतंक स्थापित करना
(ब) शांति स्थापित करना
(सं) सामाजिक न्याय की स्थापना करना
(द) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 6.
राष्ट्रीय एकता व अखण्डता के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण चुनौती है
(अ) क्षेत्रवाद
(ब) भाषावाद
(स) सम्प्रदायवाद
(द) आतंकवाद

प्रश्न 7.
विश्व की सबसे खतरनाक हिंसक मनोवैज्ञानिक युद्ध प्रणाली है
(अ) आतंकवाद
(ब) साम्यवाद
(स) नक्सलवाद
(द) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 8.
प्रथम सैनिक साम्राज्य था
(अ) असीरियाई
(ब) मंगोल
(स) दोनों
(द) कोई भी नहीं

प्रश्न 9.
9 / 11 की आतंकवादी घटना कहाँ हुई थी?
(अ) भारत में
(ब) संयुक्त राज्य अमेरिका में
(स) जापान में
(द) रूस में

प्रश्न 10.
निम्न में से आतंकवादी संगठन है
(अ) आई.एस.आई.एस.
(ब) तालिबान
(स) अलकायदा
(द) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 11.
“A Theory of Conflict” नामक पुस्तक किस वर्ष प्रकाशित हुई थी?
(अ) 1972
(ब) 1973
(स) 1974
(द) 1975

प्रश्न 12.
आतंकवाद में मुख्य रूप से कितने पात्र शामिल हैं?
(अ) 4
(ब) 2
(स) 3
(द) 1

प्रश्न 13.
2016 में कितने आतंकवादी संगठनों को प्रतिबन्धित किया गया है?
(अ) 37
(ब) 38
(स) 39
(द) 40

प्रश्न 14.
बम्बई में किस वर्ष बम – विस्फोटों में 317 लोगों की हत्या हुई थी?
(अ) 1991
(ब) 1992
(स) 1993
(द) 1994

प्रश्न 15.
सबसे गम्भीर आतंकवाद कौन-सा है?
(अ) साधारण आतंकवाद
(ब) विशिष्ट आतंकवाद
(स) इस्लामिक आतंकवाद
(द) कोई भी नहीं

प्रश्न 16.
नक्सली आतंकवाद से सम्बन्धित राज्य है
(अ) झारखण्ड
(ब) छत्तीसगढ़
(स) उड़ीसा
(द) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 17.
भारतीय लोकतंत्र के लिए सबसे गम्भीर चुनौती है
(अ) राजनीति का अपराधीकरण
(ब) भ्रष्टाचार
(स) विमुद्रीकरण
(द) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 18.
राजनीति के अपराधीकरण का मुख्य कारण है
(अ) राष्ट्रीय चरित्र का पतन
(ब) गरीबी, अशिक्षा व बेरोजगारी
(स) पुलिस, राजनीतिज्ञों, नौकरशाहों व अपराधियों की सांठ-गांठ
(द) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 19.
वर्तमान लोकसभा है
(अ) 16र्वी
(ब) 17र्वी
(स) 15वीं
(द) 11वीं

प्रश्न 20.
16वीं लोकसभा में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले सदस्यों का प्रतिशत है
(अ) 15%
(ब) 35%
(स) 34%
(द) 41%

प्रश्न 21.
किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को दीमक की तरह खोखला कर रहा है
(अ) भ्रष्टाचार
(ब) आतंकवाद
(स) समाजवाद
(द) नक्सलवाद

प्रश्न 22.
भ्रष्टाचार का प्रमुख दुष्परिणाम है
(अ) आर्थिक विषमता
(ब) बेरोजगारी.
(स) कालेधन का बढ़ना
(द) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 23.
नोटों का विमुद्रीकरण निम्न में से किस वर्ष किया गया?
(अ) 2015
(ब) 2016
(स) 2017
(द) 2014

उत्तर:
1. (स), 2. (ब), 3. (अ), 4. (द), 5. (अ), 6. (द), 7. (अ), 8. (अ), 9. (ब), 10. (द),
11. (द), 12. (स), 13. (ब), 14. (स), 15. (स), 16. (द), 17. (अ), 18. (द), 19. (अ),
20. (स), 21. (अ), 22. (द), 23. (ब)

RBSE Class 12 Political Science Chapter 26 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
विश्व शांति को सर्वाधिक नुकसान किसने पहुँचाया है?
उत्तर:
आतंकवाद ने।

प्रश्न 2.
वर्तमान विश्व में आतंकवाद किन-किन आधारों पर जीवित है?
उत्तर:
धार्मिक व जातीय आधार पर।

प्रश्न 3.
विश्व में आज सबसे गम्भीर समस्या क्या है?
उत्तर:
इस्लामिक आतंकवाद।

प्रश्न 4.
आतंकवाद की मुख्य प्रवृति क्या है?
उत्तर:
हिंसा की नाटकीय प्रस्तुति आतंकवाद की मुख्य प्रवृति है।

प्रश्न 5.
आन्दोलन से क्या आशय है?
उत्तर:
जब एक व्यक्ति या समूह अपनी उचित माँगों की पूर्ति के लिए शांतिपूर्वक व अहिंसक ढंग से सकारात्मक प्रयास करता है तो उसे आन्दोलन कहते हैं।

प्रश्न 6.
आतंकवाद क्या है?
उत्तर:
जब एक व्यक्ति अथवा समूह अपनी अनुचित माँगों की पूर्ति के लिए व्यापक स्तर पर हिंसा पर आधारित नकारात्मक प्रयत्न करता है तो उसे आतंकवाद कहा जाता है।

प्रश्न 7.
आतंकवाद को किन आधारों पर समर्थन मिलता है?
उत्तर:
आतंकवाद को आमतौर पर धार्मिक, जातीय, क्षेत्रीय तथा नस्लीय आधार पर समर्थन मिलता है।

प्रश्न 8.
आतंक के प्रयोग’ से क्या आशय है?
उत्तर:
आतंक के प्रयोग’ से आशय है-भय पैदा करना।

प्रश्न 9.
अधिनायकवादी शासन का मूल आधार क्या है?
उत्तर:
अधिनायकवादी शासन का मूल आधार भय है।

प्रश्न 10.
आतंकवादियों का मुख्य लक्ष्य क्या है?
उत्तर:
आतंकवादियों का मुख्य लक्ष्य वर्तमान विधि संगत शासन को बलपूर्वक हटाकर सत्ता हथियांना होता है।

प्रश्न 11.
विश्व की सबसे खतरनाक हिंसक मनोवैज्ञानिक युद्ध प्रणाली कौन – सी है?
उत्तर:
आतंकवाद।

प्रश्न 12.
किस युद्ध के बाद आतंकवाद एक जटिल समस्या बन गया है?
उत्तर:
शीतयुद्ध की समाप्ति के पश्चात् विश्व के लिए आतंकवाद सबसे बड़ा खतरा बन गया है।

प्रश्न 13.
आधुनिक युग में आतंकवाद ने किस युद्ध को भी पीछे छोड़ दिया है?
उत्तर:
गुरिल्ला युद्ध को।

प्रश्न 14.
आतंकवाद का मुख्य पोषक देश कौन – सा है?
उत्तर:
पाकिस्तान।

प्रश्न 15.
9 / 11 की घटना के बाद किस देश ने आतंकवाद के खिलाफ कार्यवाही का नाम देकर अफगानिस्तान के इराक की सम्प्रभुता पर हमला किया था।
उत्तर:
संयुक्त राज्य अमरिका ने।

प्रश्न 16.
किन्हीं दो आतंकवादी संगठनों के नाम बताइए।
उत्तर:

  1. तालिबान
  2. अलकायदा।

प्रश्न 17.
आतंकवाद की दो विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
दो विशेषताएँ:

  1. निर्मम नृशंस हत्याएँ करना।
  2. जबर्दस्ती धन वसूली करना।

प्रश्न 18.
वर्ष 2014 में आतंकवादियों ने किस देश के स्कूल में घुसकर 132 मासूम बच्चों की हत्या की थी?
उत्तर:
पाकिस्तान।

प्रश्न 19,
आतंकवाद में मुख्य रूप से तीन पात्र कौन होते हैं?
उत्तर:
आतंकवाद में मुख्य रूप से तीन पात्र हैं

  1. आतंकवादी गुट
  2. विरोधी गुट
  3. सरकार।

प्रश्न 20.
किस वर्ष तक भारत में 38 आतंकवादी संगठनों को (यूएपीए) के तहत प्रतिबंधित किया जा चुका है।
उत्तर:
भारत में वर्ष 2016 तक 38 आतंकवादी संगठनों को यूएपीए के तहत प्रतिबंधित किया जा चुका है।

प्रश्न 21.
कश्मीर में आतंकवादी गुटों को किस कारण अधिक जनाधार प्राप्त है?’
उत्तर:
धार्मिक कारणों से।

प्रश्न 22.
कश्मीरी आतंकवादियों को किस देश से समर्थन प्राप्त हो रहा है?
उत्तर:
पाकिस्तान से।

प्रश्न 23.
पृथक्तावादी श्रेणी का आतंकवाद भारत के किन – किन राज्यों में है?
उत्तर:
पंजाब व जम्मू कश्मीर राज्यों में।

प्रश्न 24.
भारत में आतंकवाद व नक्सलवाद से प्रभावित किन्हीं दो राज्यों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. जम्मू और कश्मीर
  2. आसाम।

प्रश्न 25.
आतंकवादी कार्यवाही के कोई दो लक्ष्य बताइए।
उत्तर:

  1. आतंकवादी कार्यवाहियों की बढ़-चढ़कर जिम्मेवारी लेना।
  2. सत्ता से लाभ प्राप्त करना।

प्रश्न 26.
आतंकवाद के कोई दो मनोवैज्ञानिक तत्व बताइए।
उत्तर:

  1. उकसाना
  2. संघर्ष।

प्रश्न 27.
आतंकवादी गिरोहों की कार्यवाही के दो मकसद कौन – कौन से हैं?
उत्तर:

  1. हिंसा के माध्यम से जनसंचार के माध्यमों का ध्यान आकर्षित करना।
  2. भय और आतंक का वातावरण उत्पन्न करना।

प्रश्न 28.
आतंकवादी घटना के अत्यधिक मीडिया कवरेज से होने वाली कोई दो हानियाँ लिखिए।
उत्तर:

  1. प्रशासनिक मशीनरी की कार्यकुशलता पर प्रतिकूल प्रभाव।
  2. आतंकवादी गुटों में निर्माण को प्रोत्साहन प्राप्त होना।

प्रश्न 29.
श्रीलंका में कौन-सा आतंकवादी संगठन अपने उद्देश्य में असफल रहा था?
उत्तर:
लिट्टे।

प्रश्न 30.
किस विद्वान ने कहा है कि आतंकवाद का विश्व स्तर पर पतन हुआ है? रंगमंच खून से तर-बतर है और चरित्र मृत्यु है।”
उत्तर:
पूर्व सोवियत संघ के विद्वान यूरी त्रिफोनाव ने।

प्रश्न 31.
यह किसने कहा कि आतंकवादी चाहते हैं कि बहुत सारे लोग देखें और सारे लोग सुनें, कि बहुत सारे लोग मरे।”
उत्तर:
बैनाजिन किंस ने।

प्रश्न 32.
किस परिघटना ने भारतीय लोकतंत्र को दिशाविहीन कर दिया है?
उत्तर:
भारतीय राजनीति के अपराधीकरण ने।

प्रश्न 33.
चुनावों में किस प्रभाव ने लोकद‘त्रिक व्यवस्था को क्षत – विक्षत कर दिया है?
उत्तर:
चुनावों में बाहुबल और धनबल के बुरे प्रभाव ने सम्पूर्ण लोकतांत्रिक व्यवस्था को क्षत – विक्षत कर दिया है।

प्रश्न 34.
भारतीय लोकतंत्र के लिए सबसे गम्भीर चुनौती क्या बनी हुई है?
उत्तर:
राजनीतिक अपराधीकरण।

प्रश्न 35.
चुनावों में भ्रष्टाचार को कम करने के लिए चुनाव प्रक्रिया में कौन-कौन से सुधार किए जा रहे हैं।
उत्तर:

  1. ई.वी.एम. मशीनों का प्रयोग
  2. चुनावों संवेदनशील बूथों की वीडियोग्राफी
  3. निष्पक्ष चुनाव पर्यवेक्षकों की नियुक्ति

प्रश्न 36.
राजनीतिक अपराधीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
राजनीति में प्रवेश करने, सत्ता को प्राप्त करने तथा सत्ता में बने रहने के लिए राजनीतिज्ञों द्वारा समय – समय पर अपराधियों की सहायता लेना राजनीतिक अपराधीकरण कहलाता है।

प्रश्न 37.
राजनीति के अपराधीकरण का संकीर्ण अर्थ क्या है?
उत्तर:
राजनीति के अप्राधीकरण का संकीर्ण अर्थ अपराधियों का विधानसभा और भारतीय संसद में प्रत्यक्ष प्रवेश व हस्तक्षेप से है।

प्रश्न 38.
राजनीति के अपराधीकरण को रोकने के कोई दो उपाय बताइए।
उत्तर:

  1. राजनीतिक दलों में अंदरूनी लोकतंत्र व जवाबदेही का विकास करना।
  2. त्वरित – न्यायिक निर्णयों द्वारा अपराधी तत्वों को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित करना। चा है?

प्रश्न 39.
भारतीय राजनीति के अपराधीकरण की जाँच के लिए किस समिति का गठन किया गया था?
उत्तर:
भारतीय राजनीति के अपराधीकरण की गम्भीरता से जाँच-पड़ताल व अध्ययन हेतु शासन द्वारा एम.एन. वोहरा की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया था।

प्रश्न 40.
भ्रष्टाचार का मूल स्त्रोत क्या है? .
उत्तर:
भ्रष्टाचार का मूल स्त्रोत औद्योगिक घरानों, व्यापारियों तथा औद्योगिक संस्थानों द्वारा राजनीतिक दलों को दिया जाने वाला चंदा है।

प्रश्न 41.
भ्रष्टाचार के अधिकांश मामले किन क्षेत्रों से सम्बन्धित होते हैं।
उत्तर:
भ्रष्टाचार के अधिकांश मामले खरीद अनुदान, निर्माण, लाइसेन्स-परमिट आवंटन, ऋण, नियुक्ति एवं स्थानान्तरण आदि क्षेत्रों से सम्बन्धित होते हैं।

प्रश्न 42.
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अधिकारी का क्या कार्य है?
उत्तर:
ब्यूरो के अधिकारी किसी भी कर्मचारी अथवा अधिकारी के विरुद्ध शिकायत प्राप्त होते ही त्वरित कार्यवाही कर रंगे हाथों आरोपी को गिरफ्तार करते हैं तथा उनके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही कर सजा दिलाते हैं।

प्रश्न 43.
भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए किस प्रणाली को लागू किया गया है?
उत्तर:
भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए सतर्कता आयुक्त प्रणाली” को लागू किया गया है।

प्रश्न 44.
भ्रष्टाचार के कोई दो दुष्परिणाम बताइए।
उत्तर:

  1. योग्य तथा निष्ठावान व्यक्तियों को समुचित अवसर नहीं मिल पाते हैं।
  2. समाज में आर्थिक विषमता पनपती है। इससे गरीबी – अमीरी की खाई अधिक चौड़ी होती है।

प्रश्न 45.
भ्रष्टाचार रोकने के कोई दो उपाय लिखिए।
उत्तर:

  1. भ्रष्टाचार में दोषी पाये जाने वाले व्यक्ति को त्वरित न्याय प्रक्रिया द्वारा कठोर दण्ड दिये जाने की आवश्यकता है।
  2. राजनीतिक दलों को मिलने वाले चन्दे की पूरी तरह जाँच-पड़ताल की जानी चाहिए।

प्रश्न 46.
भारत सरकार ने विमुद्रीकरण कब व क्यों किया?
उत्तर:
भ्रष्टाचार की रोकथाम व भारत के विभिन्न भागों में नकली मुद्रा को निष्प्रभावी करने के लिए केन्द्र सरकार ने 8 नवम्बर 2016 को विमुद्रीकरण का निर्णय किया।

प्रश्न 47.
8 नवम्बर 2016 को भारत सरकार के विमुद्रीकरण के निर्णय का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर:

  1. काले धन का पता लगाना
  2. भ्रष्टाचार को रोकना
  3. आतंकवाद का पोषण कर रही नकली मुद्रा को निष्प्रभावी बनाना
  4. चुनावों में काले धन के प्रयोग को बन्द करना।

प्रश्न 48.
किस निर्णय को भारतीय अर्थव्यवस्था के इतिहास में काले धन की सफाई अभियान के रूप में जाना जाता है?
उत्तर:
8 नवम्बर 2016 के विमुद्रीकरण के निर्णय को।

प्रश्न 49.
विमुद्रीकरण से भारत में आतंकी गतिविधियों के नियन्त्रण में किस प्रकार मदद मिली?
उत्तर:
आतंकवादी अधिकांशत: नकली मुद्रा की सहायता से देश के कोने – कोने में आतंकवादी गतिविधियाँ कर रहे थे। विमुद्रीकरण के कारण उनकी मुद्रा चलन से बाहर हो गयी। उन्हें अपनी गतिविधियाँ चलाना मुश्किल हो गया।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 26 लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
आतंकवाद का अर्थ बताइए।
उत्तर:
आतंकवाद का अर्थ – आतंकवाद शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द “Terror’ से हुई है। जिसका अर्थ है। “To make tremble”- किसी को डराकर मजबूर करना। जब व्यक्ति या व्यक्ति समूह अपनी अनुचित माँगों की पूर्ति के लिए व्यापक स्टार पर हिंसा व अशान्ति पर आधारित नकारात्मक प्रयत्न करता है तो उसे आतंकवाद कहा जाता है। आतंकवाद को आमतौर पर धार्मिक, जातीय, क्षेत्रीय एवं नस्लीय आधार पर समर्थन मिलता है। आतंकवादी आधुनिक अस्त्र तथा शस्त्र का प्रयोग करते हैं जो राष्ट्र के विरोध, समाज को डराने या भयभीत करने के लिए किया जाता है। आतंकवाद एक ऐसी प्रवृत्ति है जिसमें अवांछित तत्व अपनी अवैधानिक माँगों को पूरा कराने हेतु जघन्य अपराध करने से नहीं चूकते। अपने राजनीतिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये लूट – मार एवं निर्दोष लोगों का कत्ल करना, आतंकवाद कहलाता है।

उपर्युक्त निवेचन से स्पष्ट है कि आतंकवाद

  1. समाज या राज्य के विरुद्ध होता है।
  2. अवैध अर्थात गैर कानूनी होता है।
  3. केवल विरोधी पक्ष पर ही नहीं सजातीय समुदाय पर भी नियन्त्रण करता है।
  4.  उनके द्वारा की गई हिंसात्मक कार्यवाही तर्कसंगत नहीं होती।
  5. इसके शिकार समाज के सभी वर्ग – समुदाय के लोग होते हैं।

प्रश्न 2.
आतंकवाद की मुख्य विशेषताए बताइए।
उत्तर:
आतंकवाद की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  1. आतंकवाद राज्य या समाज के विरुद्ध होता है।
  2. आतंकवाद का मुख्य रूप से राजनैतिक उद्देश्य होता है।
  3. आतंकवाद अवैध तथा गैरकानूनी होता है।
  4. आतंकवाद से जन साधारण में बेबसी तथा लाचारी की भावना पैदा होती है।
  5. आतंकवाद बुद्धिसंगत विचार को समाप्त कर देता है।
  6. आतंकवाद से लड़ने या भागने की प्रतिक्रिया होती है।
  7. इसमें की गई हिंसा में मनमानी होती है क्योंकि पीड़ितों का चयन बेतरतीब तथा अंधाधुंध होता है।
  8. यह अनियमित, क्रूर उत्पीड़न या जान – माल के नुकसान की तकनीक है।

प्रश्न 3.
आतंकवाद के उद्देश्यों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
आतंकवाद के उद्देश्य निम्नलिखित हैं

  1. जनसमर्थन प्राप्त करना।
  2. देश की आतंरिक स्थिरता को भंग करना और विकास को रोकना।
  3. शासन की सैन्य एवं मनोवैज्ञानिक शक्ति को विघटित और ध्वंस करना।
  4. सामान्य आतंकवादियों का मनोबल बढ़ाना।
  5. आंदोलन का प्रचार-प्रसार करना।
  6. शासन को प्रतिक्रिया तथा प्रतिक्रियाहीनता दिखाने के लिए प्रेरित करना।

प्रश्न 4.
आतंकवाद की कार्यप्रणाली को बताइए।
उत्तर:
आतंकवाद की कार्य प्रणाली – अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आंतकवादी निम्नलिखित प्रणालियों को अपनाते हैं|

  1. निर्दोष लोगों की हत्या करना
  2. किसी समुदाय विशेष के लोगों पर हमला करना
  3.  वम विस्फोटों द्वारा सार्वजनिक सम्पत्ति को नुकसान पहुँचाना।
  4. सेना, अन्य सुरक्षा बलों तथा राज्य पुलिस पर हमला करना
  5. घृणात्मक प्रचार करता।

उपर्युक्त के अलावा आतंकवादी निम्नलिखित गतिविधियों को अंजाम देते हैं-

  1. समाज में किसी वर्ग विशेष को अन्य वर्गों के साथ की गई हिंसापूर्ण कार्यवाही।
  2. महत्वपूर्ण व्यक्ति का अपहरण अथवा हत्या एवं उन्हें छोड़ाने के लिए सरकार से अनुचित माँगें मनवाने का प्रयास करना।
  3. वायुयानों का अपहरण बैंक डकैतियाँ आदि।
  4. युवाओं में धर्मान्धता व कट्टरता की भावना पैदा कर उन्हें राष्ट्रीय धारा से विमुख करना।

प्रश्न 5.
धर्मान्धता और आतंकवाद पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए?
उत्तर:
धर्मान्धता और आतंकवाद – आतंकवाद को धर्म से सम्बद्ध मानने की प्रवृत्ति बहुत दिनों से विवाद का विषय रही है। यह एक जटिल प्रश्न है कि आतंकवाद को किसी धर्म विशेष से जोड़ा जाए अथवा नहीं। यह बात बिलकुल असत्य है कि किसी विशेष धर्म के अनुयायी आतंकवाद को पोषित करते हैं। पश्चिमी देशों के आतंकवाद के विश्लेषकों का मत है कि कुछ देशों में धर्म विशेष का आतंकवाद से सम्बन्ध बहुत चिंता का विषय है जो विगत 25 – 30 वर्षों में एक शक्तिशाली प्रवृत्ति व घटना के रुप में उभरा है।

आतंकवादियों में किसी एक गुट विशेष के प्रति समर्पण का भाव नहीं होकर एक समुदाय विशेष के प्रति समर्पण भाव रखना एक नकारात्मक प्रवृत्ति हैं, जो एक स्वस्थ लोकतांत्रिक समाज के लिए लाभदायक नहीं होती है। आत्म बलिदान एवं असीमित बर्बरता, ब्लैकमेलिंग, जबरन धन वसूली एवं निर्मम तरीके से हत्याएँ करना ऐसे आतंकवाद की विशेषता बन गई है। जम्मू कश्मीर में आतंकवाद पूर्णतया पृथक्तावादी श्रेणी में आता है। पाकिस्तान में वर्ष 2014 में स्कूल में घुसकर मासूम बच्चों पर अन्धाधुन्ध गोलीबारी कर 132 बच्चों की हत्या आतंकवाद का वास्तविक भयानक चेहरा है।

प्रश्न 6.
“वर्तमान समय में आतंकवाद लोकतंत्र के लिए गम्भीर चुनौती है।”एक लोकतंत्र समर्थक के रूप में आप इस समस्या को दूर करने के कोई दो उपाय सुझाइए।
उत्तर:
वर्तमान में आतंकवाद लोकतंत्र के लिये गम्भीर चुनौती है। इसे समाप्त करने के लिये निम्नलिखित दो उपाय सुझाए जा सकते हैं.
(i) राष्ट्रीय समस्याओं पर आम सहमति तैयार करना – आतंकवाद केवल बल प्रयोग द्वारा समाप्त नहीं किया जा सकता है। हमें इसे जन्म देने वाले मूल कारणों को समझकर उन्हें दूर करना होगा एवं समाज के विभिन्न वर्गों व समुदायों के बीच कमजोर पड़ गयी भाईचारे की भावना को भी बढ़ाना होगा। इसी के साथ राष्ट्रीय समस्याओं को दलीय व चुनावी राजनीति से दूर रखकर उनके बारे में सम्पूर्ण देश में आम सहमति बनाने की आवश्यकता है तभी हम सबको एक कर पायेंगे।

(i) पुलिस एवं सुरक्षा बलों को आधुनिकीकरण – भारतीय पुलिस व सुरक्षा बल आज भी पुराने हथियारों के बल पर आतंकवादियों का मुकाबला कर रहे हैं, जबकि आतंकवादी विदेशों से आधुनिकतम हथियार लाकर प्रयोग कर रहे हैं। ऐसे में पुराने शस्त्र उनके समक्ष व्यर्थ सिद्ध हो रहे हैं। अतः आतंकवाद का सामना करने के लिए पुलिस व सुरक्षा बलों को आधुनिकतम हथियारों से सुसज्जित करना परमावश्यक है।

प्रश्न 7.
“साम्प्रदायिकता, पृथक्तावाद और आतंकवाद तीनों एक ही सिक्के के भिन्न – भिन्न पहलू हैं।” कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
यह सत्य है कि साम्प्रदायिकता पृथक्तावाद और आतंकवाद तीनों एक ही सिक्के के भिन्न – भिन्न पहलू हैं। इन तीनों के मध्य अन्तर्कियाएँ चलती रहती हैं। आशय यह है कि साम्प्रदायिकता का पृथक्तावादी अथवा आतंकवादी प्रवृत्ति में रूपान्तरण की सम्भावना है। इसी तरह से पृथक्तावाद के साम्प्रदायिकता एवं आतंकवाद में बदल जाने की सम्भावना है। इसी प्रकार आतंकवाद का साम्प्रदायिक तथा पृथक्तावादी रूप लेने की भी सम्भावना है। झारखंड, बिहार, उड़ीसा, मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ के नक्सली आतंकी गिरोहों की आतंकवादी कार्यवाहियों का स्वरूप पृथक्तावादी गिरोहों की कार्यवाहियों से भिन्न होता है।

प्रश्न 8.
भारत में आतंकवाद व नक्सलवाद प्रभावित राज्य व क्षेत्र कौन-कौन से हैं।
उत्तर:
भारत में आतंकवाद व नक्सलवाद प्रभावित राज्य व क्षेत्र – भारत में आतंकवाद व नक्सलवाद प्रभावित राज्य क्षेत्र निम्नलिखित हैं

  1. जम्मू और कश्मीर
  2. पंजाब
  3. उत्तर एवं पश्चिमोत्तर भारत
  4. नई दिल्ली
  5. उत्तर भारत
  6. पूर्वोत्तर के राज्य – आसाम, मेघालय, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, नागालैण्ड, मणिपुर राज्य
  7. दक्षिणी भारत – आन्ध्रप्रदेश, तमिलनाडु व कर्नाटक राज्य आदि।

प्रश्न 9.
आतंकवाद की सफलता का आधार क्या है?
उत्तर:
आतंकवाद की सफलता काफी हद तक उसके समर्थन के आधार पर निर्भर है, जिसमें केवल राजनैतिक एवं सामाजिक समर्थन ही सम्मिलित नहीं होता अपितु पैसे, हथियार और प्रशिक्षण का समर्थन भी होता है। आतंकवादी विभिन्न स्रोतों से पैसा प्राप्त करते हैं; जैसे – समर्थकों से दान एवं अन्य लोगों से अवैध वसूली, मादक वस्तुओं की तस्करी तथा क्रय,

बंधक व्यक्तियों और अपहरण किए हुए विमानों से फिरौती एकत्रित करना आदि। उदाहरणार्थ, पी.एल.ओ. विद्रोही अरब, राज्यों, चीन और रूस से हथियार प्राप्त करते हैं। भारत में खालिस्तानी आतंकवादी और कश्मीरी उग्रवादी प्रशिक्षण और हथियार कई पड़ोसी देशों से प्राप्त कर रहे हैं। लिट्टे की उग्रवादी गतिविधियाँ हमारे दक्षिण भारत में एक या दो राज्यों के लिए समस्या बन गई थीं।

प्रश्न 10.
नक्सलवादी आतंकवाद से क्या आशय है?
उत्तर:
नक्सलवादी आतंकवाद का आशय है – माओत्से तुंग के क्रांतिकारी (हिंसक) वामपंथी दर्शन से प्रेरित आतंकवाद, जो अपना लक्ष्य बताता है : सामाजिक – आर्थिक न्याय पर आधारित व्यवस्था की स्थापना। सर्वप्रथम 1967 – 71 के वर्षों में बंगाल, बिहार तथा पश्चिम बंगाल आदि राज्यों में नक्सलवाद के रूप में आतंकवाद सामने आया। इसका सबसे अधिक जोर पश्चिम बंगाल में था. और विभिन्न क्षेत्रों में इसके प्रमुख नेता थे: पश्चिम बंगाल में चारू मजूमदार और कनु सान्याल, केरल में कुनीकल नारायणन और के. पी. आर. गोपालन आदि। नक्सलवादियों ने लोकतांत्रिक राजनीति का पूर्ण विरोध करते हुए जनक्रान्ति पर बल दिया और इसके लिए सबसे प्रमुख तरीका अपनाया गया-भूमिहीन मजदूरों को संगठित । कर गुरिल्ला युद्ध पद्धति के आधार पर भूमिपतियों के विरुद्ध खूनी संघर्ष।

प्रश्न 11.
राजनीतिक अपराधीकरण का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसको रोकने के लिए दो सुझाव दीजिए।
उत्तर:
राजनीतिक अपराधीकरण का अर्थ – राजनीतिक अपराधीकरण वह प्रवृत्ति है जिसके अन्तर्गत आपराधिक पृष्ठभूमि के लोग प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से राजनीतिक प्रकृिया को प्रभावित करते हैं। राजनीति में प्रवेश करने, सत्ता को प्राप्त करने व सत्ता में बने रहने के लिए राजनीतिज्ञों द्वारा समय – समय पर अपराधियों की मदद लेना राजनीतिज्ञों अपराधीकरण कहलाता है।
राजनीतिक अपराधीकरण को रोकने के लिए दो सुझावे

  1. काननों में वांछित संशोधन व परिवर्तन कर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले तत्वों के चुनाव लड़ने पर प्रतिबन्ध लगाना।
  2. उन राजनीतिक दलों पर जुर्माना तथा दण्ड लगाने का प्रावधान को जो अपराधियों को टिकट देते हैं।

प्रश्न 12.
राजनीतिक अपराधीकरण की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
राजनीतिक अपराधीकरण की विशेषताएँ – राजनीतिक अपराधीकरण की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  1. चुनावों में अपराधियों एवं असामाजिक तत्वों का उम्मीदवार बनना।
  2. सरकारी तन्त्र का दुरुपयोग।
  3. मतदाताओं को आर्थिक प्रलोभन एवं बाहुबल का प्रयोग।
  4. मतदाताओं को बल प्रयोग द्वारा मतदान केन्द्रों में जाने से रोकना।
  5. आपराधिक प्रवृत्ति वाले लोगों को सरकार में प्रतिष्ठित पद मिलना
  6. हत्याएँ, जाली मतदान एवं मतदान केन्द्रों पर कब्जा।
  7. मतदाता सूचियों से नाम हटाना।

प्रश्न 13.
राजनीति के अपराधीकरण के कोई पाँच कारण बताइए।
उत्तर:
राजनीति के अपराधीकरण के कारण- राजनीति के अपराधीकरण के पाँच कारण निम्नलिखित हैं

  1.  राजनेताओं व राजनीतिक दलों द्वारा साधनों की पवित्रता में विश्वास न करना।
  2. पुलिस, राजनीतिकों, नौकरशाहों व अपराधियों में परस्पर अनैतिक सांठ – गांठ का होना।
  3. जनता द्वारा आपराधिक प्रवृत्ति के राजनीतिज्ञों को स्वीकार करना।
  4.  दलीय राजनीति व सत्ता प्राप्ति की अत्यधिक राजनीतिक लालसा।
  5. निष्पक्ष, ईमानदार व राष्ट्रहितों के प्रति कटिबद्ध नेतृत्व का अभाव होना।

प्रश्न 14.
भारत में राजनीतिक अपराधीकरण को कौन-कौन से अर्थों में देखा जा सकता है।
उत्तर:
भारत में राजनीति के अपराधीकरण को दो भिन्न अर्थों में देखा जा सकता है

  1. संकीर्ण अर्थ में
  2. व्यापक अर्थ में

(i) संकीर्ण अर्थ में:
अपराधियों का विधानसभा एवं भारतीय संसद में प्रत्यक्ष प्रवेश व हस्तक्षेप

(ii) व्यापक अर्थ में:
अपराधियों के प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से चुनावी राजनीति एवं शासन को प्रभावित करने से सम्बन्धित है। इसमें धन व बाहुबल से किसी राजनीतिक दल की मदद करना, चुनावों में फर्जी मतदान करना, विपक्षी उम्मीदवार के मतदाताओं को धमकाना, हत्या कर देना आदि गतिविधियाँ सम्मिलित हैं। देश में पिछले दो-तीन चुनावों में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों का सभी राजनीतिक दलों ने भरपूर उपयोग किया है। पार्टी के लिए धन जुटाने से लेकर बल व पैसे के जोर पर मतदाताओं का रूख बदलने में अपराधियों की भूमिका में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। चुनावों का प्रबन्धन, चुनाव प्रचार में भीड़ जुटाना, बैठकों एवं सम्मेलनों में पैसे से या डराकर भीड़ इकट्ठी करना, नियोजित ढंग से आपराधिक पृष्ठभूमि के कार्यकर्ताओं की फौज बनाना एक सामान्य-सी बात हो गई है।

प्रश्न 15.
एम.एन.वोहरा समिति की रिपोर्ट का सार बताइए।
उत्तर:
भारतीय राजनीति के अपराधीकरण की गंभीरता की जाँच वं अंध्ययन हेतु शासन द्वारा एम. एन. वोहरा की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गयी थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत में माफिया नेटवर्क एक समानांतर सरकार चला रहा है। शासकीय मशीनरी या राज्य का तंत्र हाशिये पर आ गया है। भारतीय मतदाता की उदासीनता, अगंभीरता व भाव शून्यता ने इस प्रवृत्ति में अत्यधिक वृद्धि की है। माफिया गिरोहों को स्थानीय नेताओं से संरक्षण प्राप्त होने से उन्होंने गैर कानूनी रूप से लाभ प्राप्त करना प्रारम्भ कर दिया। कालांतर में माफिया राजनेताओं का द्वि – गठबंधन, त्रि – गठबंधन में बदल गया है। पुलिस, अपराधी और राजनेताओं का गठजोड़ भारतीय लोकतंत्र को दीमक की भाँति निगल रहा है।

प्रश्न 16.
लोकसेवकों के किन व्यवहारों को ‘भ्रष्ट’ कहा गया है?
उत्तर:
कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत लोकसेवकों के निम्नलिखित व्यवहार भ्रष्ट कहे गए हैं-

  1. अवैध रूप से कोई भी वस्तु या आर्थिक लाभ प्राप्त करना।
  2. सार्वजनिक संपत्ति या धोखाधड़ी से दुरुपयोग करना।
  3.  उच्च स्थिति या पद पर रहने वाले व्यक्ति द्वारा ऐसे लोगों से भेंट/उपहार स्वीकार करना जिनके साथ उनके पद के नाते संबंध हों।
  4. जानबूझ कर नियमों की अनदेखी करते हुए कर आदि के भुगतान करने से बचने में नागरिकों की मदद करना।
  5. आधिकारिक हैसियत से किए गए कार्य के लिए पुरस्कार स्वरूप भेंट स्वीकार करना।।
  6. किसी बहाने से किसी कर्तव्य को करने से इंकार करना जिससे दूसरों को लाभ होता हो।

प्रश्न 17.
भ्रष्टाचार निरोधक कानून एवं सतर्कता आयुक्त प्रणाली पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
भ्रष्टाचार निरोधक कानून – भारत में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए अनेक कानून बनाये गए हैं जिसमें भ्रष्टाचार निरोधक कानून सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं। इस कानून के तहत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कार्यवाही करता है। ब्यूरो के अधिकारी किसी भी कर्मचारी या अधिकारी के विरुद्ध शिकायत प्राप्त होते ही त्वरित कार्यवाही कर रंगे हाथों गिरफ्तार करते हैं एवं उनके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही कर सजा दिलाते हैं।

सर्तकता आयुक्त प्रणाली – भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियन्त्रण के लिए सतर्कता आयुक्त प्रणाली भी लागू की गई है। इस प्रणाली के अन्तर्गत प्रत्येक विभाग में एक अधिकारी को सर्तकता अधिकारी बनाया गया है। यह अधिकारी भ्रष्टाचार सम्बन्धित मामलों की जाँच कर विधि सम्मत कार्यवाही करता है। सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि किसी भी मामले में आरोपित अधिकारी को क्षेत्र में महत्वपूर्ण पदों पर पदस्थान नहीं दिया जाएगा।

प्रश्न 18.
भ्रष्टाचार के दुष्परिणाम बताइए।
उत्तर:
भ्रष्टाचार के दुष्परिणाम – भ्रष्टाचार के प्रमुख दुष्परिणाम निम्नलिखित हैं

  1. सार्वजनिक निर्माण कार्यों का स्तर घटिया होता है एवं अनेक बार में कार्य केवल कागजों पर ही होकर रह जाते हैं।
  2. निर्धन व्यक्तियों के जीवन जीने के प्राकृतिक अधिकारों पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
  3. भ्रष्टाचार के कारण योग्य तथा निष्ठावान व्यक्तियों को समुचित अवसर प्राप्त नहीं होते।
  4. समाज में आर्थिक विषमता पनपती है। इससे गरीबी-अमीरी की खाई अधिक चौड़ी होती है।
  5. बेरोजगारी को बढ़ावा मिलता है।
  6. काले धन में वृद्धि होती है जिस कारण देश की अर्थव्यवस्था पंगु बन जाती है।
  7. उच्च स्तरों पर पनपने वाला भ्रष्टाचार निचले स्तर के कर्मचारियों को निकम्मा एवं कामचोर बना देता है?
  8. आम आदमी का सरकारी तंत्र पर से विश्वास घटता है। इससे जनहित के मुद्दों पर लोगों में असंतोष पनपने लगता है।

प्रश्न 19.
भ्रष्टाचार रोकने के कोई पाँच उपाय बताइए।
उत्तर:
भ्रष्टाचार रोकने के उपाय-भ्रष्टाचार रोकने के पाँच उपाय निम्नलिखित हैं।

  1. बेनामी सौदा निषेध अधिनियम 1988 को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए।
  2. भ्रष्ट लोकसेवकों की गलत तरीको से अर्जित की गई सम्पत्ति कानूनी प्रक्रिया के अन्तर्गत जब्त कर लेनी चाहिए।
  3. दोषी पाये जाने वाले व्यक्ति को त्वरित न्याय प्रक्रिया द्वारा कठोर दण्ड दिये जाने की आवश्यकता है।
  4. सार्वजनिक महत्व के पदों पर संदिग्ध आचरण वाले लोक सेवकों को पदस्थापित नहीं किया जाना चाहिए।
  5. सरकारी निर्णयों में कम से कम गोपनीयता होनी चाहिए। अधिकांश मामले पारदर्शी रखे जाएँ।

प्रश्न 20.
समाज में भ्रष्टाचार पर विमुद्रीकरण का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
भ्रष्टाचार पर विमुद्रीकरण का प्रभाव-समाज में फैले हुए भ्रष्टाचार पर विमुद्रीकरण का निम्नलिखित प्रभाव पड़ा

  1. नरेन्द्र मोदी द्वारा मुद्रा के विमुद्रीकरण करने से विभिन्न विभागों में पाया जाने वाली नकली मुद्रा निष्प्रभावी हो गई।
  2.  इससे चुनावों में प्रयोग किए जाने वाले काले धन पर रोक लगी है।
  3. विमुद्रीकरण से समाज के श्वेतपोश व्यक्तियों / अपराधियों पर वे उनके व्यापार पर काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
  4. इससे अनैतिक नकदी के लेन – देन पर रोक लग गयी।
  5. इससे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की प्रगति में वृद्धि हुई है।
  6. इससे आतंकवादी संगठनों को प्रोत्साहन देने वाले व्यक्तियों की संपत्ति को जब्त किया गया है।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 26 निबंधात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
आतंकवाद का आशय स्पष्ट करते हुए उसके उत्पन्न होने के कारणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आतंकवाद से आशय – आतंकवाद शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द “Terror’ से हुई है, जिसका अर्थ है। ‘To make tremble’ – किसी को डराकर मजबूर करना।
जब व्यक्ति अथवा व्यक्ति समूह अपनी अनुचित माँगों की पूर्ति के लिए व्यापक स्तर पर हिंसा व अशांति पर आधारित नकारात्मक प्रयत्न करता है तो उसे आतंकवाद कहा जाता है। आतंकवाद को आमतौर पर धार्मिक जातीय क्षेत्रीय व जलीय आधार पर समर्थन मिलता है। आतंकवादी आधुनिक अस्त्र एवं शस्त्र का प्रयोग करते हैं जो राष्ट्र के विरोध, समाज को डराने या भयभीत करने के लिए किया जाता है। आतंकवाद एक ऐसी प्रवृत्ति है जिसमें अवांछित तत्व अपनी अवैधनिक माँगों को पूरा कराने हेतु जघन्य अपराध करने से नहीं चूकते।।

आतंकवाद के कारण: आतंकवाद के लिए निम्नलिखित कारण उत्तरदायी हैं:
(i) शोषण एवं अन्याय की प्रवृत्तियाँ – आतंकवाद के लिए शोषण एवं अन्याय दोनों उत्तरदायी हैं। राज्य विधानमंडलों में अनेक भूमिसुधार कानून पारित किये गए। लेकिन भूमिहीनों की स्थिति को नहीं सुधारा जा सका। नक्सलवादी भातंकवाद का एवं बिहार जैसे राज्य में जातीय हिंसा का यह एक प्रमुख कारण है।

(ii) अवैध शस्त्रों की आपूर्ति- आतंकवादी आधुनिक अवैधानिक शस्त्र अपने पास रखते हैं। साथ ही अपने गिरोह के न्य सदस्यों को देते हैं। अवैध शस्त्रों पर कठोर प्रतिबन्ध नहीं है। अनेक बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ हथियारों का निर्माण करती इन कम्पनियों के तालिबान, अलकायदा आदि दर्जनों आतंकी संगठनों से सम्बन्ध रहे हैं।

(ii) आतंकवादियों को विदेशी सहायता – आज विश्व में अनेक देश आतंकवादियों को शरण देते हैं। प्रशिक्षण देते ईं एवं साथ ही आर्थिक मदद करते हैं। दूसरे देशों में अस्थिरता पैदा करने के लिये वे आतंकवादियों को आर्थिक मदद देते हैं। हरणार्थ – पाकिस्तान कश्मीर में आतंकवादियों को प्रत्येक प्रकार की सहायता उपलब्ध करा रहा है।

(iv) भ्रष्टाचार- आज विश्व में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। चारों तरफ भ्रष्टाचार ही दिखाई देता है। आज उच्च से उच्च अधिकारी रिश्वत के आगे अपना धैर्य खो बैठते हैं। धन के समक्ष नतमस्तक हो जाते हैं।

(v) न्याय में देरी – आतंकवाद के लिये सरकार के तीनो अंगों कार्यपालिका, न्यायपालिका एवं व्यवस्थापिका में समन्वय होना आवश्यक है। व्यवस्थापिका सभी अवैधानिक तत्वों के लिये कठोर कानून बनाये। कार्यपालिका उसे लागू करे और न्यायपालिका कानून का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों को दण्डित करने में कोई देरी न करे। कानून को कठोरता से लागू करना बहुत आवश्यक है। आतंकवादी के लिये आजीवन कारावास या मृत्युदण्ड की व्यवस्था हो।

(vi) आर्थिक क्षेत्र में सन्तुलित विकास को अभाव – भारत के विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक विषमता दूर करनी चाहिए। महाराष्ट्र अन्य राज्यों की अपेक्षा आर्थिक दृष्टि से सम्पन्न प्रदेश है परन्तु विदर्भ महाराष्ट्र के अन्तर्गत होते हुए भी आर्थिक दृष्टि से पिछड़ा हुआ है। यह आर्थिक विषमता आतंकवाद को जन्म देती है।

(vii) दलीय राजनीति – राजनीतिक दल वोटों के लिए अनुचित कार्य करने से नहीं चूकते हैं। राजनीति में बडे – बडे नेता राजनीतिक पद का लाभ प्राप्त करने के लिए आपराधिक तत्वों को शरण देते हैं कई बार राजनीतिक दल आतंकवादी संगठनों का निहित स्वार्थ के कारण सहयोग देते हैं।

(viii) युवकों में असन्तोष – आज के युग में बेरोजगारी की गम्भीर समस्या है। शिक्षित बेरोजगारी सबसे अधिक है। अशिक्षित व्यक्ति प्रत्येक प्रकार का कार्य कर लेता है लेकिन शिक्षित व्यक्ति शारीरिक श्रम करने में हिचकिचाते हैं एवं शारीरिक श्रम से घृणा करते हैं। निर्धनता अपराध की जननी कही जाती है। मरता क्या न करता। जब यह असन्तोष नवयुवकों में व्याप्त हो जाता है तो वे अवैधानिक कार्य करने लगते हैं। कालान्तर में ऐसे नवयुवक आतंकवादी बन जाते हैं।

प्रश्न 2.
भ्रष्टाचार से क्या अभिप्राय है? इसके क्या कारण हैं? भ्रष्टाचार को समाप्त करने के उपाय लिखिए।
उत्तर:
(1) भ्रष्टाचार का अभिप्राय – भ्रष्टाचार का शाब्दिक अर्थ है। भ्रष्ट आचरण, जो कि दो शब्दों से मिलकर बना है। ‘भ्रष्ट एवं आचरण’ इसका अर्थ है- ऐसा आचरण जो किसी भी दृष्टि से अनैतिक एवं अनुचित हों। भ्रष्टाचार का व्यापक अर्थ है कोई व्यक्ति अथवा संगठन अपने निर्धारित कानूनी दायरे से परे जाकर अनुचित ढंग से किसी व्यक्ति या संगठन को लाभ पहुँचाये एवं बदले में धन या सुविधाएँ प्राप्त कर सार्वजनिक हितों को नुकसान पहुँचाये।
(2) भ्रष्टाचार विरोधी समिति सन् 1962 के अनुसार – “एक सार्वजनिक पद या जनजीवन में उपलब्ध एक विशेष स्थिति के साथ संलग्न शक्ति एवं प्रभाव का अनुचित स्वार्थपूर्ण प्रयोग भ्रष्टाचार है।”
(3) भ्रष्टाचार के कारण – भ्रष्टाचार के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं

(i) सामाजिक मूल्यों में परिवर्तन – आज का युग भौतिकवादी युग है। प्रत्येक व्यक्ति धन चाहता है। चाहे वह धन अवैधानिक रूप में कहीं से आये क्योंकि समाज में धन वाले व्यक्ति प्रतिष्ठित है। आज संस्कृति तथा नैतिक मूल्यों का लोप होता जा रहा है। व्यक्तियों का एक मात्र उद्देश्य है धन एवं पद प्राप्ति। इनके प्रप्ति के साधनों पर कोई ध्यान नहीं देता है।

(ii) राजनीति को विस्तृत क्षेत्र – आज जनसंख्या वृद्धि के कारण राजनीति का क्षेत्र व्यापक हो चुका है। जनता की आवश्यकताएँ बढ़ चुकी हैं। नियम एवं कानूनों का क्षेत्र काफी व्यापक हो चुका है। आज व्यक्ति के पास समय नहीं है। लोग कार्यों को तुरन्त कराना चाहते हैं, जिसके लिये उन्हें रिश्वत देने से भी परहेज नहीं है। व्यक्ति प्रत्येक विभाग में न्याय चाहता है किन्तु न्याय केवल धने वाले व्यक्ति को ही मिलता है। जनसाधारण न्याय से वंचित रह जाता है। ऐसी स्थिति में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है।

(iii) व्यापारियों एवं राजनीतिज्ञों की सांठ-गांठ- कई बार व्यापारी एवं नेताओं में परस्पर गठजोड़ होता है। चुनाव में राजनीतिज्ञ बड़े व्यापारियों से आर्थिक सहायता माँगते हैं। उसके बदले में व्यापारी लाभ प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। यह चक्र भ्रष्टाचार को निरन्तर बढ़ावा देता है।

(iv) भ्रष्टाचार को नियन्त्रित करने वाले कानूनों का अभाव – भारत में भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिये क. अलग से विभाग नहीं है। ईमानदार कर्मचारी एवं ईमानदार अधिकारी को काम नहीं करने दिया जाता है। उसका स्थानान्तर कर दिया जाता है। झूठे आरोप लगाकर उसको निलम्बित करा दिया जाता है। सरकार द्वारा भ्रष्टाचार को नियन्त्रित करने के लिए कोई कठोर कदम नहीं उठाया जाता है। लोकपाल एवं लोकायुक्त की स्थिति बहुत प्रभावशाली नहीं है।

(v) दल समर्थकों को सार्वजनिक पद प्रदान करना – जब कोई दल सत्ता में आता है तो अपने पक्ष के लोगों को ही सार्वजनिक पद देता है। आज राजनीति में जातिवाद एवं भाई-भतीजावाद चल रहा है क्योंकि एक बार सत्ता में आने पर।
यह भूल जाते हैं कि नैतिकता भी उनके जीवन का एक अंग है या नहीं। नैतिकता विरोधी भावना ही भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है।

(vi) त्रुटिपूर्ण निर्वाचन प्रणाली- आज के युग में निर्वाचन प्रणाली बहुत दूषित है। राजनीतिक चुनाव में विजयी उम्मीदवार की आय के स्त्रोतों को प्रस्तुत किया जाना चाहिए फिर चुनाव के दौरानं जो धन खर्च होता है, उसका लेखा-जोखा होना चाहिए। ऐसा न होने से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है।

(vii) भ्रष्टाचार के अन्य कारण – चरित्र एवं नैतिकता का पतन, अशिक्षा, संग्रहवृत्ति का विस्तार, बेरोजगारी, निर्धनता, प्रशासकीय ज्ञान का अभाव, विकास के आसमान अवसर आदि भी कई बार भ्रष्टाचार के कारण होते हैं।

भ्रष्टाचार को समाप्त करने के उपाय:
भ्रष्टाचार को समाप्त करने के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं-

  1. बेनामी सौदा निषेध अधिनियम 1988 को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाय
  2. लोकसेवकों की गलत तरीकों से अर्जित की गई सम्पत्ति कानूनी प्रक्रिया के अन्तर्गत जब्त कर लेनी चाहिए।
  3.  दोषी पाये जाने वाले व्यक्ति को त्वरित न्याय प्रक्रिया द्वारा कठोर दण्ड दिये जाने की आवश्यकता है।
  4. सार्वजनिक महत्व के पदों पर सन्दिग्ध आचरण वाले लोकसेवकों को पदस्थापित नहीं किया जाना चाहिए।
  5.  सरकारी निर्णयों में कम से कम गोपनीयता होनी चाहिए। अधिकांश मामले पारदर्शी रहें।
  6. राजनीतिक दलों को मिलने वाले चन्दे की पूर्ण रूप से जाँच-पड़ताल की जानी चाहिए।
  7. नागरिकों को सरकारी निर्णयों-प्रक्रियाओं तथा गतिविधियों को जानने का पूर्ण अधिकार होना चाहिए।
  8. विमुद्रीकरण प्रक्रिया में काला धन बाहर लाया जाना चाहिए।
  9. उच्च स्तर पर लिए जाने वाले निर्णय त्वरित गति से नीचे तक पहुँचने चाहिए।

प्रश्न 3.
आतंकवाद की समाप्ति या आतंकवाद को नियंत्रित करने के उपाय बताइए।
उत्तर:
आतंकवाद की समाप्ति या उसे नियंत्रित करने के उपाय
(1) राष्ट्रीय समस्याओं पर आम सहमति निर्मित करना – आतंकवाद से निपटने के लिए राजनीतिक स्तर पर प्रयास किए जाने चाहिए। आवश्यकता इस बात की है कि ‘दलीय हित – अहित’ और चुनावी हित – अहित को ध्यान में रखते हुए समस्या के प्रारंभिक स्तर पर ही पूरी इच्छा और सामर्थ्य के साथ उसका समाधान ढूंढा जाए। राष्ट्रीय समस्याओं को दलीय राजनीति से ऊपर रखते हुए उनके सम्बन्ध में आम सहमति को अपनाए जाने की आवश्यकता है।

(2) अपराधी के लिए तत्काल दण्ड की व्यवस्था – आतंकवाद को नियंत्रित करने के लिए अपराधी के लिए तत्काल दंड’ की व्यवस्था को अपनाते हुए साधारण जनता के मन – मस्तिष्क में कानून और न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास और अपराधी तत्त्वों में अनिवार्य रूप से भय को उत्पन्न करना होगा।

(3) पुलिस तथा सुरक्षा बलों का आधुनिकीकरण – पुलिस और सुरक्षा बलों का आधुनिकीकरण किया जाना चाहिए। पुलिस राज की स्थिति से आतंकवाद को बढ़ावा ही मिलता है। वस्तुतः समस्त प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार किये जाने की आवश्यकता है। आज स्थिति यह है कि माफिया, तस्कर व सभी प्रकार के अपराधी तत्वों ने आतंकवाद का बाना धारण कर लिया है। प्रशासनिक व्यवस्था को कुशल बनाकर माफिया, तस्कर और अपराधी तत्वों को आतंकवादी तत्वों से अलग करना होगा।

(4) सरकार और जनता के बीच व्यापक सहयोग – आतंकवाद को नियंत्रित करने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है। कि आतंकवाद के विरुद्ध सरकार और जनता के बीच व्यापक सहयोग स्थापित किया जाना चाहिए। जन सहयोग के बिना किसी भी सरकार के लिए आतंकवाद को नियंत्रित कर पाना संभव नहीं हो सकता। अतः इस दिशा में सरकार और जनता को मिलकर कार्य करना होगा।

(5) सशक्त कानून की व्यवस्था – सशक्त कानून की व्यवस्था की जानी चाहिए, जिससे कि हथियारों का निर्माण ऽवल सार्वजनिक क्षेत्र में हो। निजी क्षेत्र में हथियारों का निर्माण न हो। पक्के तौर पर ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए।

(6) प्रभावी गुप्तचर तरीकों का उपयोग – आतंकवादियों, उनकी कार्यशैली तथा उनके वित्तीय और हथियारों के स्रोतों आदि के बारे में सूचना एकत्र करने में अधिक प्रभावी गुप्तचर तरीकों का उपयोग किया जाना चाहिए।

(7) सैनिकों का वैज्ञानिक प्रशिक्षण – आतंकवादियों से निबटने के लिए सैनिकों को वैज्ञानिक तौर पर प्रशिक्षण देना हए।

(8) सुदृढ़ सुरक्षा उपाय – महत्त्वपूर्ण स्थानों पर निरंतर सुरक्षा उपायों में सुधार करना चाहिए।

प्रश्न 4.
भ्रष्टाचार का समाज पर पड़ने वाले प्रभावों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
समाज पर भ्रष्टाचार का प्रभाव:
(1) आर्थिक विकास का अवरुद्ध होना – भ्रष्टाचार के कारण देश की आर्थिक विकास की दिशा अवरुद्ध हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप देश की आर्थिक व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

(2) हिंसा व अराजकता का उदयभ्रष्टाचार की समस्या ने समाज में हिंसा व अराजकता को उत्पन्न किया है क्योंकि भ्रष्ट व्यक्ति के पास कानून लागू करने वालों को अपने फायदे के लिए खरीदने की धन की शक्ति होती है।

(3) कालेधन में वृद्धि भ्रष्टाचार के द्वारा भ्रष्ट व्यक्ति अपने कार्यों के दौरान अनुचित तरीकों से धन में वृद्धि करते हैं. जिससे काला धन बढ़ता है। समाज में काले धन की वृद्धि से अमीर और अमीर बनते जाते हैं तथा गरीब और गरीब हो जाते हैं।

(4) प्रशासन की अनुशासनहीनता – भ्रष्टाचार का उदय सबसे पहले प्रशासन के विभागों से ही उत्पन्न होते हैं क्योंकि आज हर विभागों में उच्च स्तर से निचले स्तर पर स्वार्थी व्यक्ति भ्रष्ट गतिविधियों में संलग्न पाया जाता है।

(5) अन्य समस्याओं का उदयभ्रष्टाचार के आधार पर समाज में जातिवाद, भाषावाद तथा सांप्रदायिक आधारों पर विभाजन देखने को मिलता है क्योंकि उच्च भ्रष्ट व्यक्ति इन्हीं आधारों पर अनैतिक तरीके से लोगों को उकसाने का कार्य करते हैं तथा राष्ट्रीय हितों के बजाय स्व हितों को प्राथमिकता देते हैं।

(6) अन्य प्रभाव:

  1. भ्रष्टाचार से व्यक्ति का नैतिक व चारित्रिक पतन होता है।
  2.  इसने समाज में भाई-भतीजावाद की प्रवृत्ति में वृद्धि की है।
  3.  इस समस्या ने समाज में सभी साधारण व्यक्तियों के जीवन को कष्टप्रद बना दिया है।
  4. भ्रष्टाचार ने जनता की दृष्टि में अधिकारियों की विश्वसनीयता को कम कर दिया है।
  5.  इसने सरकार को केन्द्र तथा राज्य दोनों स्तरों पर अस्थिर बनाया है।
  6. इसने खाने-पीने की वस्तुओं तथा दवाओं में मिलावट करने की समस्या को बढ़ाया है।
  7. बेरोजगारी को बढ़ावा मिलता है।
  8. समाज में आर्थिक विषमता बढ़ती है।
  9. निर्धन व्यक्तियों के जीवन जीने के प्राकृतिक अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।