Rajasthan Board RBSE Class 12 Political Science Chapter 30 भारत के पड़ोसी देशों से संबंध (पाकिस्तान, चीन और नेपाल)

RBSE Class 12 Political Science Chapter 30 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

RBSE Class 12 Political Science Chapter 30 बहुंचयनात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
1950 में नेपाल का कौनसा शासक भारत की शरण में आया
(अ) पृथ्वीनारायण शाह
(ब) राजा त्रिभुवन
(स) शमशेर बहादुर
(द) गिरिजा प्रसाद कोइराला

प्रश्न 2.
भारत – चीन के बीच भौगोलिक सीमा का नाम है
(अ) मैकमोहन सीमा
(ब) मनमोहन सीमा
(स) तिब्बत सीमा
(द) रैडक्लिफ सीमा

प्रश्न 3.
भारत चीन सम्बन्धों को मधुर बनाये रखने हेतु नेहरू जी ने कौनसे सिद्धान्त प्रतिपादित किये
(अ) शान्ति सिद्धान्त
(ब) सीमा सिद्धान्त
(स) पंचशील सिद्धान्त
(द) गुटनिरपेक्षता सिद्धान्त

प्रश्न 4.
भारत पाक सम्बन्धों में तनाव का कारण है
(अ) तिब्बत समस्या
(ब) बाँध की समस्या
(स) कश्मीर विवाद
(द) अफगानिस्तान विवाद

प्रश्न 5.
भारत संविधान की कौन-सी धारा कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करती है
(अ) धारा 356
(ब) धारा 352
(स) धारा 360
(द) धारा 370

उत्तरमाला:
1. (ब), 2. (अ), 3. (स), 4. (स), 5. (द)।।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 30 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
पाकिस्तान अपना स्वतन्त्रता दिवस कब मनाता है?
उत्तर:
पाकिस्तान अपना स्वतन्त्रता दिवस 14 अगस्त को मनाता है।

प्रश्न 2.
भारत की सीमाओं से सटे देशों के नाम लिखिए।
उत्तर:
भारत की सीमाओं से सटे देशों के नाम हैं – पाकिस्तान, चीन, नेपाल, बंग्लादेश, भूटान, म्यांमार व अफगानिस्तान।

प्रश्न 3.
भारत – नेपाल के मध्य मशहूर सन्धि कब हुई थी?
उत्तर:
भारत व नेपाल के मध्य मशहूर ‘शान्ति व मैत्री सन्धि सन् 1950 में हुई थी।

प्रश्न 4.
आधुनिक नेपाल को संस्थापक किसे माना गया है?
उत्तर:
पृथ्वीनारायण शाह को आधुनिक नेपाल का संस्थापक माना गया है।

प्रश्न 5.
1959 में भारत ने किसे शरण दी थी, जिसे चीन ने शत्रुतापूर्ण कार्यवाही माना था?
उत्तर:
31 मार्च 1959 को तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा ने भारत में शरण ली थी। चीन ने इसे भारत की शत्रुतापूर्ण कार्यवाही माना।

प्रश्न 6.
चीन के हिस्से में ब्रहमपुत्र नदी को क्या कहा जाता है?
उत्तर:
चीन के हिस्से में ब्रहमपुत्र नदी को यारलुंग सांगपो कहा जाता है।

प्रश्न 7.
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने चीन की यात्रा कब की थी?
उत्तर:
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 14 से 16 मई 2015 चीन की यात्रा पर रहे।

प्रश्न 8.
चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग की सितम्बर 2014 में अहमदाबाद यात्रा में कितने समझौते किये गए थे?
उत्तर:
चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग की सितम्बर 2014 में अहमदाबाद यात्रा में तीन समझौते किये गए थे।

प्रश्न 9.
कारगिल युद्ध में चीन का रवैया कैसा था?
उत्तर:
कारगिल युद्ध में चीन ने तटस्थता का रवैया अपनाया।

प्रश्न 10.
पाकिस्तान आतंकवाद की गतिविधि पर कितनी राशि व्यय करता है?
उत्तर:
पाकिस्तान आतंकवाद की गतिविधि पर अपने सकल घरेलू उत्पाद की 8 प्रतिशत से अधिक राशि व्यय करता है।

प्रश्न 11.
भारत को अपनी सीमाओं की हिफाजत पर प्रतिवर्ष कितना धन खर्च करना पड़ता है?
उत्तर:
भारत को अपनी सीमाओं की हिफाजत पर प्रतिवर्ष लगभग 9 हजार करोड़ रुपये खर्च व्यय करना पड़ता है।

प्रश्न 12.
पाकिस्तान ने कश्मीर में सर्वप्रथम किस दिन घुसपैठ की थी?
उत्तर:
पाकिस्तानपाकिस्तान ने कश्मीर में सर्वप्रथम 22 अक्टूबर 1947 को घुसपैठ की थी।

प्रश्न 13.
पाकिस्तान ने कश्मीर की कितनी भूमि पर कब्जा कर रखा है?
उत्तर:
पाकिस्तान ने कश्मीर के 32000 वर्गमील क्षेत्रफल पर कब्जा कर रखा है।

प्रश्न 14.
1971 का युद्ध किस कारण हुआ?
उत्तर:
पाकिस्तान द्वारा पूर्वी पाकिस्तान के बंगालियों पर भीषण अत्याचार किये जा रहे थे। जिसके कारण लगभग 1 करोड़ शरणार्थी भारत में शरण ले चुके थे। 3 दिसम्बर 1971 को पाकिस्तानी वायुयानों ने भारत के हवाई अड्डों पर भीषण बमबारी की और युद्ध आरम्भ हो गया।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 30 लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत की उत्तरी पूर्वी सीमा पर नेपाल का क्या सामरिक महत्त्व है?
उत्तर:
भारत के उत्तर-पूर्व में स्थित नेपाल सामरिक दृष्टि से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण देश है। चीन द्वारा तिब्बत पर कब्जा कर लेने के बाद भारत – चीन सम्बन्धों में नेपाल की सामरिक स्थिति का राजनीतिक महत्त्व बढ़ गया है। उत्तर में भारत की सुरक्षा काफी हदत तक नेपाल की सुरक्षा पर निर्भर करती है। पं. जवाहरलाल नेहरू ने 17 मार्च 1950 को कहा था-‘नेपाल पर किये जाने वाले किसकी भी आक्रमण को भारत सहन नहीं कर सकता ।

नेपाल पर कोई भी सम्भावित आक्रमण निश्चित रूप से भारतीय सुरक्षा के लिए खतरा होगा। सन् 1956 में भारत के राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने अपनी नेपाल यात्रा के दौरान कहा था कि नेपाल की शान्ति व सुरक्षा के लिए कोई भी खतरा भारतीय शान्ति व सुरक्षा के लिए खतरा है। नेपाल के मित्र हमारे मित्र हैं और नेपाल के शत्रु हमारे शत्रु हैं।

प्रश्न 2.
1959 में चीन ने नेपाल के साथ क्या सन्धि की थी?
उत्तर:
भारत के लिए नेपाल का सामरिक महत्त्व है। भारत का मानना है कि नेपाल पर कोई भी सम्भावित आक्रमण निश्चित रुप से भारत की सुरक्षा के लिए खतरा होगा । तिब्बत में चीन की गतिविधियाँ बढ़ने से नेपाल की सुरक्षा के बारे में भारत की चिन्ता बढ़ना स्वाभावित ही है। चीन व नेपाल की बढ़ती निकटता को भी भारत अपने हित में नहीं समझता है। सन् 1959 में नेपाल के प्रधानमंत्री कोइराला ने चीन की यात्रा की और चाऊ – एन – लाई को पुनः नेपाल आने के लिए आमंत्रित किया।

चीन व नेपाल के मध्य एवरेस्ट शिखर के बारे में एक समझौता भी हुआ जिसकी भारत ने कठोर आलोचना की। भारत की चेतावनियों के बावजूद नेपाल के महाराजा नरेन्द्र ने काठमाण्डू-ल्हासा मार्ग बनाने के संबंध में चीन से समझौता करके भारत के लिए खतरा उत्पन्न कर दिया। महाराजा महेन्द्र चीन की यात्रा पर भी गये।। भारत व नेपाल के सुरक्षासम्बन्धी हित समान होने पर भी नेपाल में भारतीय हितों की उपेक्षा करते हुए साम्यवादी चीन के साथ समझौते किये।

प्रश्न 3.
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नेपाल यात्रा में उन्हें क्या विश्वास दिलाया?
उत्तर:
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 3 – 4 अगस्त 2014 को नेपाल का अधिकारिक दौरा किया। श्री मोदी ने नेपाल की संविधान सभा एवं विधायी संसद को सम्बोधित किया। मोदी जी पशुपतिनाथ मन्दिर भी गये और काठमाण्डू से दिल्ली तक की यात्री बस सेवा ‘पशुपतिनाथ एक्सप्रेस’ को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। राष्ट्रीय पुलिस अकादमी के निर्माण के लिए भारत सरकार ने 550 करोड़ भारतीय रुपये की लागत की सहायता प्रस्तावित की।

प्रधानमंत्री ने नेपाल सेना को एक उन्नत हल्का हेलीकॉप्टर मार्क – III सौंपा। 25 अप्रैल 2015 को नेपाल में आये भूकम्प के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन मैत्री’ अभियान के अन्तर्गत तत्काल सहायता प्रदान की और हजारों लोगों तक राहत पहुँचाई।। श्री मोदी ने अपनी यात्रा के दौरान दोनों देशों के सम्बन्धों को पटरी पर लौटाने के लिए हर संभव प्रयास करने का विश्वास दिलाया। नेपाल की जनता ने भी उनका जोरदार स्वागत किया।

प्रश्न 4.
नेपाल की अर्थव्यवस्था में भारत का योगदान बताइए।
उत्तर:
नेपाल की अर्थव्यवस्था में भारत का योगदान-नेपाल के विकास कार्यों में सबसे अधिक धन भारत का ही लगा हुआ है। नेपाल को भारत से हर तरह का प्रशिक्षण, तकनीकी और गैर – तकनीकी सहायता मिलती है। कोलम्बो योजना के अन्तर्गत भारत ने अनेक नेपाली नागरिकों को प्रशिक्षण दिया है। भारत ने नेपाल की कई परियोजनाओं के लिए सहायता दी है। इन परियोजनाओं में नेपाल के पूर्व-पश्चिम राजमार्ग पर कोहलापुर – महाकाली क्षेत्र में 22 पुलों का निर्माण भी शमिल है।

दिसम्बर 1991 में भारत ने नेपाल के महान देशभक्त वी. एच. कोइराली की स्मृति में भारत नेपाल फाउण्डेशन’ बनाने का प्रस्ताव किया। दोनों देश औद्योगिक क्षेत्र में साझा उद्यम लगाने को भी सहमत हुए। भारत ने विराटनगर में मेडिकल कॉलेज, रंगेली में टेलीफोन एक्सचेंज, रेल लाइनों के नवीनीकरण आदि में भी आर्थिक सहयोग दिया है।

प्रश्न 5.
नेपाल में मधेशी आन्दोलन का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर:
मधेश’ नेपाल की पहाड़ियों और बिहार-उत्तर प्रदेश के मैदान के बीच पड़ने वाला तराई का क्षेत्र या मध्य देश है। यह क्षेत्र केवल 50 किमी चौड़ी पट्टी में है जिसमें नेपाल की लगभग आधी जनसंख्या निवास करती है। यह नेपाल का सबसे गरीब, पिछड़ा व उपेक्षित क्षेत्र है। इस क्षेत्र में भारतीय मूल के मैथिल, भोजपुरी तथा अवधी बोलने वाले पिछड़े और दलित समाज के लोग रहते हैं। नेपाल के सत्ताधारियों ने मधेशियों के साथ सदैव भेदभाव किया है।

नए संविधान में पहाड़ी नेताओं ने जनसंख्या के तर्क की उपेक्षा करते हुए संसद में अपने बहुमत को सुनिश्चित कर लिया। फलतः मधेशी नेताओं ने युद्ध छेड़ दिया। नेपाल सरकार ने मधेशी आन्दोलन का दमन कर दिया और मानवाधिकारों का हनन किया। परिणामस्वरूप मधेशियों ने भारत – नेपाल सीमा को बन्द कर दिया। विवश होकर भारत सरकार को मधेशियों का साथ देना पड़ा। अन्ततः माओवादियों ने मधेशियों से नए समझौते कर उन्हें संसद, सरकार व अन्य स्थानों पर आगे बढ़ने के अवसर प्रदान किये।

प्रश्न 6.
गुजरात सरकार के साथ चीन ने कौन-से तीन समझौते किये थे?
उत्तर:
चीन व गुजरात सरकार के साथ हए समझौते – चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 17 सितम्बर 2014 को तीन दिवसीय भारत यात्रा पर सर्वप्रथम अहमदाबाद पहुँचे। वहां प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति में चीन और गुजरात सरकार के बीच तीन समझौते हुए जो कि इस प्रकार हैं

  1. पहला समझौता ग्वांगडोंग की तर्ज पर गुजरात के विकास से सम्बन्धित था।
  2. दूसरा समझौता ग्वांगझू की तरह अहमदाबाद का विकास करने से सम्बन्धित था।
  3. तीसरा समझौता वडोदरा के पास औद्योगिक पार्क को विकसित करने से सम्बन्धित था।

प्रश्न 7.
भारत – चीन व्यापार पर लघु टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
भारत – चीन व्यापार – व्यापार की दृष्टि से चीन हमारे लिए नम्बर एक को साझेदार है किन्तु चीन में हमारा व्यापार दसवें नम्बर पर भी नहीं है। यद्यपि यह सही है कि जबकि सम्पूर्ण विश्व जबरदस्त आर्थिक मन्दी की चपेट में है तब हम किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठा सकते और चीन के साथ अपने व्यापार को यथावत जारी रखना देश के हित में है। भारत व चीन के मध्य व्यापार के संबंध में यदि गंभीरता से सोचा जाए तो यह प्रतिकूल और असन्तुलित है।

250 अरब डॉलर के लगभग पहुँची व्यापार लगभग इकतरफा है। उल्लेखनीय है कि चीन विश्व का सबसे बड़ा बाजार है और सस्ते श्रम का विपुल भण्डार है। अत्याधुनिक तकनीक के क्षेत्र में चीन भारत की तुलना में काफी आगे है। चीन के साथ आर्थिक साझेदारी होना तो ठीक है किन्तु व्यापार – सन्तुलन की भी आवश्यकता बनी हुई है।

प्रश्न 8.
चीन के साथ भारत के तीन प्रमुख विवाद क्या हैं?
उत्तर:
चीन के साथ भारत के प्रमुख विवाद: चीन के साथ भारत के तीन प्रमुख विवाद निम्नलिखित हैं
(1) सीमा विवाद – ब्रिटिश शासन काल ने चीन व भारत के मध्य मैकमोहन रेखा’ के द्वारा सीमा निर्धारण कर दिया गया था जिसे दोनों देशों ने मान्यता दे दी थी किन्तु चीन ने मन से कभी भी इसे स्वीकार नहीं किया। यही कारण था कि 1962 में सीमा विवाद की आड़ में चीन ने भारत पर आक्रमण किया। सीमा विवाद को सुलझाने हेतु कई राजनयिक वार्ताएँ व शिखर वार्ताएँ हुई किन्तु कोई परिणाम नहीं निकल सका।

(2) तिब्बत विवाद – भारत ने तिब्बत में चीन की प्रभुसत्ता को स्वीकार किया जो कि एक बड़ी भूल थी। 1956 ई. में जब किशोर दलाईलामा भारत यात्रा पर आए और उन्होंने तिब्बत लौटने की अनिच्छा दिखाई किन्तु नेहरुजी ने उन्हें समझा बुझा कर भेज दिया। किन्तु साम्यवादी चीन के अत्याचारों से त्रस्त होकर दलाईलामा ने 1959 में अपने समर्थकों के साथ पुनः भारत में शरण ली। चीन ने इसे शत्रुतापूर्ण कार्यवाही समझा।

(3) जल विवाद – चीन दक्षिण से उत्तर की ओर जल प्रवाहित करने की महत्वाकांक्षी परियोजना पर कार्य कर रहा है। ब्रहमपुत्र, जिसे चीन में यारलुंग सांगपो कहते हैं, ऊँचे पहाड़ों में दैत्याकार बांध निर्माण कर चीन अपनी जल सुरक्षा तो सुनिश्चित कर रहा है। किन्तु इससे समस्त भारतीय उपमहाद्वीप की जल सुरक्षा तथा पर्यावरण के लिए संकट उत्पन्न हो गया है।

प्रश्न 9.
चीन से तनाव के चलते रूस हमारा सहयोगी कैसे बना?
उत्तर:
चीन में माओ ने साम्यवादी विदोस का जो मॉडल अपने आविष्कार के रूप में सामने रखा था वह केवल एक विकल्प था। इससे कहीं अधिक आकर्षक विकल्प भारत ने प्रस्तुत किया। यह विकल्प अपने विकास के लिए सशस्त्र छापामार युद्ध का नहीं वरन् शान्तिपूर्ण मिश्रित अर्थव्यवस्था वाला जनतान्त्रिक विकल्प था। यही कारण था कि चीन के उग्रवादी और विस्तारवादी रवैये के विरुद्ध सोवियत रूस का भारत के प्रति झुकाव बढ़ता चला गया।

चूंकि चीन और रुस के मध्य भी सीमा विवाद था। अतः रूस ने सन्तुलन के रुप में सहायता हेतु भारत को चुना। रूस-भारत मैत्री धीरे-धीरे बढ़ती चली गई। आज रूस भारत का एक ऐसा मित्र है जो हर संकट के समय उसके साथ खड़ा है। भारत-पाकिस्तान या फिर भारत – चीन के मध्य जब कभी तनाव पैदा हुआ तो रूस ने हमेशा भारत का साथ दिया।

प्रश्न 10.
चीन भारत की सुरक्षा परिषद की सदस्यता का समर्थन खुल कर क्यों नहीं कर रहा है?
उत्तर:
चीन के सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य बननने में यद्यपि भारत ने उसे समर्थन दिया था किन्तु चीन भारत की सुरक्षा परिषद की सदस्यता का समर्थन खुल कर नहीं कर रहा है। वस्तुत: विश्व राजनीति में कोई भी राष्ट्र अपने हितों को नजरअंदाज कर दूसरों की सहायता नहीं करता है। चीन की सरकार जानती है कि भारत का समर्थन कर उसे कुछ भी प्राप्त होने वाला नहीं है। भारत का समर्थन न करके वह अपनी क्षेत्रीय प्रभुसत्ता को बनाये रख सकता है। भारत के साथ सीमा विवाद व जल विवाद के अतिरिक्त और भी बहुत से मुद्दे विवाद के बने हुए हैं। शत्रुता के इस भाव के कारण भी वह भारत का समर्थन नहीं कर रहा है। रूस व भारत की निकटता एक अन्य कारण है।

प्रश्न 11.
ताशकंद समझौते में क्या निश्चत किया गया था?
उत्तर:
अप्रैल 1965 में कच्छ के रण को लेकर भारत व पाकिस्तान के मध्य युद्ध आरम्भ हुआ। 4 सितम्बर 1965 को सुरक्षा परिषद की अपील पर युद्ध विराम हुआ। 22 सितम्बर 1965 को दोनों देशों के मध्य युद्ध बन्द हो गया। युद्ध के पश्चात तनाव की स्थिति को पूर्णतया समाप्त करने के उद्देश्य से सोवियत प्रधानमन्त्री ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति अय्यूब खाँ और भारत के प्रधानमन्त्री लाल बहादुर शास्त्री को वार्ता के लिए ताशकंद में आमन्त्रित किया।

सोवियत संघ के प्रयत्नों से 10 जनवरी 1966 को प्रसिद्ध ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर हुए। इसके द्वारा भारत व पाकिस्तान शान्ति बहाली के लिए सहमत हुए। किन्तु इस समझौते के कारण भारत को वह समस्त प्रदेश पाकिस्तान को वापस देने पड़े जो उसने अपार जन व धन की हानि उठाकर युद्ध में प्राप्त किये थे।

प्रश्न 12.
पाकिस्तान को आतंकवाद का गढ़ क्यों कहते है?
उत्तर:
विश्व भर में धार्मिक कट्रवाद और आतंकवाद को बढ़ाने में पाकिस्तान की सर्वाधिक भूमिका रही है। अफगानिस्तान में दशकों से चल रहे गृहयुद्ध से परेशान जो शरणाथी पाकिस्तान पहुँचे थे उन्हें पेशेवर जेहादियों के रुप में कश्मीर में प्रवेश कराने में पाकिस्तान की प्रत्यक्ष भूमिका रही है। भारत के विरुद्ध आतंकवाद को पाकिस्तान के समर्थन की पुष्टि मुम्बई में हुए बम विस्फोटों (1993) से होती है।

सामरिक दबावों के कारण वैश्विक महाशक्तियों ने पाकिस्तान के धार्मिक कट्टरवाद और आतंकी कार्रवाइयों को अनदेखा किया है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने कई अवसरों पर विश्व राजनीति के तहत पाकिस्तान में तालिबान का समर्थन किया। इसमें कोई संदेह नहीं है कि आज पाकिस्तान आतंकवादियों का गढ़ बन चुका है।

प्रश्न 13.
प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान से सम्बन्ध सुधारने के क्या उपाय किये हैं?
उत्तर:
26 मई 2014 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को आमन्त्रित किया था। जिससे लगा था कि दोनों देशों के मध्य वार्ताओं का सिलसिला आरम्भ होगा किन्तु पाकिस्तानी हाई कमिश्नर द्वारा अलगाववादी हुर्रियत नेताओं से मुलाकात के बाद 25 अगस्त 2014 को इस्लामाबाद में होने वाली विदेश सचिव स्तर की बातचीत को भारत ने रोक दिया। 26 – 27 नवम्बर 2014 को काठमाण्डू में आयोजित 18 वें सार्क सम्मेलन में भी नरेन्द्र मोदी और नवाज शरीफ के मध्ये कोई बातचीत नहीं हुई।

नरेन्द्र मोदी ने एक बार पुनः संबंध सुधारने के प्रयास किये जबकि 25 दिसम्बर 2015 क्रिसमस के दिन वे नवाज शरीफ को उनके जन्मदिन की बधाई देने और उनकी नातिन की शादी पर आशीर्वाद देने अचानक लाहौर पहुँचे। ऐसा प्रतीत हुआ। कि दोनों देशों के मध्य संबंध सामान्य होंगे। किन्तु एक हफ्ते बाद ही यह आशा धूमिल हो गई जबकि 1 जनवरी 2016 को भारत के पठानकोट में पाकिस्तान ने आतंकवादी हमला कराया। ऐसे में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दोनों देशों के मध् य संबंध सुधारने के सभी प्रयास विफल हो गये हैं।

प्रश्न 14.
मुम्बई और पठानकोट हमलों के पीछे पाकिस्तान की क्या मंशा थी?
उत्तर:
पाकिस्तान ने 26 नवम्बर 2008 को मुम्बई व 2 जनवरी 2016 को पंजाब के पठानकोट में आतंकवादी हमले कराये। 26 नवम्बर 2008 को पाकिस्तान ने मुम्बई में जो आतंकवादी हमला कराया उसमें 164 लोगों की जानें गई तथा 308 व्यक्ति घायल हुए। साथ ही भय व आतंक का वातावरण व्याप्त हो गया। इस हमले के पीछे पाकिस्तान की मंशा थी

  1. भारत की आर्थिक नगरी मुम्बई को गंभीर क्षति पहुँचाना तथा
  2. देश में अस्थिरता उत्पन्न करना। 2 जनवरी 2016 को पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों ने पठानकोट वायुसेना स्टेशन पर हमला किया। इस हमले का उद्देश्य भारत के सैन्य साजो – सामान को क्षति पहुँचाना था। उल्लेखनीय है कि वायु सेना स्टेशन पर हेलीकॉप्टर और सेना के लड़ाकू विमान खड़े थे। पाकिस्तान की मंशा उन्हें नष्ट करना था।

प्रश्न 15.
भारत ने पाकिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन पर क्या कार्यवाही की है?
उत्तर:
पाकिस्तान के पश्चिम में बलूचिस्तान नाम का प्रान्त है। सन् 1947 में ब्रिटिश सरकार ने इस क्षेत्र को पाकिस्तान के साथ मिला दिया था किन्तु 1970 के दशक से यह क्षेत्र पृथक होने की मांग कर रहा है। इन लोगों का मानना है कि इनका मूल निवास सीरिया में है। बलूचिस्तान संघर्ष के मूल में कई मुद्दे हैं जैसे कि आर्थिक असमानता, क्षेत्रीय असमानता, विकास के मुद्दे, शैक्षिक पिछड़ापन आदि।

बलूचिस्तान के लोगों द्वारा उठाई गई मांगों का पाकिस्तानी सेना द्वारा निर्ममतापूर्वक दमन किया गया तथा वहां के निर्दोष लोगों पर अमानुषिक अत्याचार किये गए। हजारों लोगों को जबरदस्ती गायब कर दिया गया। हजारों को गोली से उड़ा दिया गया। एमनेस्टी इंटरनेशनल तथा ह्यूमन राइट्स वॉच जैसे संगठनों के द्वारा पाकिस्तान पर मानवाधिकार हनन का आरोप लगाया जा रहा है।

पाकिस्तान यह बेबुनियाद आरोप लगाता आ रहा है कि बलूचिस्तान के लोगों को उकसाने में भारत का हाथ है। भारत ने अब अपनी नीति में परिवर्तन कर दिया है। जब नवाज शरीफ ने स्वतन्त्रता दिवस के भाषण में कश्मीर का जिक्र किया तो प्रतिक्रियास्वरूप श्री मोदी जी ने बलूचिस्तान का जिक्र कर दांव पलट दिया। जहां इससे पाकिस्तान परेशान है वहीं बलूच राष्ट्रवादियों ने मोदी जी को धन्यवाद दिया। इससे वहां के लोगों को अन्तर्राष्ट्रीय समर्थन जुटाने में मदद मिलेगी। भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद् में भी बलूचिस्तान में हो रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन की बात की।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 30 निबंधात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत:
नेपाल सम्बन्धों का ताना – बाना बार – बार क्यों गड़बड़ा जाता है? दोनों देशों में इस तनाव के प्रमुख कारण क्या हैं?
उत्तर:
भारत – नेपाल सम्बन्ध एवं उनमें प्रमुख कारण – भारत के नेपाल के साथ बहुत प्राचीनकाल से सम्बन्ध रहे हैं। नेपाल के साथ हमारे जितने घनिष्ठ आत्मीय और सांस्कृतिक सम्बन्ध हैं संभवतः उतने गहरे सम्बन्ध किसी दूसरे देश के साथ नहीं हो सकते हैं। लेकिन तिब्बत पर चीन द्वारा कब्जा कर लेने के पश्चात से चीन की नेपाल में रूचि बढ़ रही है वहीं चीन भारत के लिए भी खतरा बनता जा रहा है। उत्तर में भारत की सुरक्षा आज एक बड़ी सीमा तक नेपाल की सुरक्षा पर निर्भर करती है। चीन निरन्तर नेपाल को भारत विरोधी बनाता जा रहा है। इसके साथ-साथ ही अन्य कुछ ऐसे कारण है जिनसे भारत और नेपाल सम्बन्धों का ताना बाना गड़बड़ा रहा है। प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं

(1) व्यापार एवं पारगमन सन्धि – सन् 1989 में भारत ने नेपाल के साथ व्यापार व पारगमन सन्धि की अवधि पूरी हो जाने पर उसका नवीनीकरण करने से मना कर दिया । सीमा शुल्क और जांच संबंधी कार्यों में कठोरता बरती गई। भारत चाहता है कि नेपाल सरकार सन् 1950 की शान्ति व मैत्री सन्धि का सम्मान करे। इस सन्धि के अनुच्छेद 7 के अनुसार – एक देश के नागरिकों को दूसरे देश में निवास, सम्पत्ति उद्योग-व्यापार में भागीदारी व घूमने फिरने के समान अधिकार पारस्परिक आधार पर दिये जाएंगे।” परिणामस्वरूप दोनों देशों के नागरिकों को ये अधिकार प्राप्त हुए किन्तु नेपाल ने 1967 के बाद भारतीयों के लिए वर्क परमिट लगाने की पाबंदी लगा दी।

(2) साम्यवादी चीन के साथ समझौते  – नेपाल ने अनेक बार भारत के हितों की अवहेलना करते हुए साम्यवादी चीन के साथ समझौते किये हैं। ये सभी समझौते भारतीय हितों के विरुद्ध रहे हैं। नेपाल में चीन की गतिविधियाँ भारत विरोधी व ध्वंसात्मक रही हैं। नेपाल द्वारा काठमाण्डू-ल्हासा सड़क मार्ग बनाने के संबंध में चीन के साथ समझौता स्पष्टतः भारत विरोधी कदम था। एवरेस्ट पर्वत के संबंध में नेपाल-चीन में प्रारम्भ समझौता भारत के प्रति विश्वासघात था।

(3) नेपाल की ‘शान्ति-क्षेत्र घोषणा की माँग-नेपाल द्वारा आग्रह किया जा रहा है कि नेपाल को शान्ति क्षेत्र घोषित किया जाए। भारत सरकार का दृष्टिकोण यह है कि नेपाल ही क्यों सम्पूर्ण उपमहाद्वीप को ‘शान्ति क्षेत्र घोषित किया जाए। भारत इसे एक विरोधी प्रस्ताव मानता है। उसके अनुसार यह अप्रत्यक्ष रूप से भारत पर एक प्रकार का दोषारोपण है। कि भारत नेपाल के लिए खतरा है। नेपाल द्वारा स्वयं को शान्ति क्षेत्र घोषित कराने के पीछे प्रधान उद्देश्य भारत के प्रभाव और विशिष्ट स्थिति को नकारना है जिसे वह अपने राष्ट्रीय व्यक्तित्व की खोज में बाधक मानता है।

(4) मधेशी आन्दोलन-नेपाल के नेताओं ने अपने नये संविधान में मधेशियों की न्यायसंगत मांगों को कोई स्थान नहीं दिया। मधेश नेपाल की पहाड़ियों व बिहार-उत्तर प्रदेश के मैदान के बीच पड़ने वाला तराई का क्षेत्र है। यह नेपाल का पिछड़ा, निर्धन व उपेक्षित क्षेत्र है जहाँ कि नेपाल की आधी जनता निवास करती है। नेपाल के शासकों के द्वारा मधेश निवासियों के साथ सदैव से भेदभाव किया जा रहा है।

हर प्रकार से उपेक्षित होकर मधेशियों ने आन्दोलन आरम्भ कर दिया और मधेशियों ने भारत-नेपाल सीमा को बन्द कर दिया। भारत से विभिन्न वस्तुओं के न पहुँचने से सम्पूर्ण नेपाल में पैट्रोल, गैस व दवाइयों की कमी आ ग़ई । मजबूर होकर भारत सरकार को मधेशियों का साथ देना पड़ा। और सीमा को खुलवाया इससे भी दोनों देशों में तनाव उत्पन्न हो गया।

(5) अन्य कारण – नेपाल के साथ भारत के संबंध अत्यन्त आत्मीय सांस्कृतिक संबंध रहे हैं किन्तु आज दोनों देशों के मध्य संबंधों के उतार – चढ़ाव के लिए उपर्युक्त कारणों के अतिरिक्त कुछ अन्य कारण भी उत्तरदायी हैं जैसे कि

  1. भारत नेपाली भूमि में शरण लेने वाले तस्करों व आतंकवादियों को लेकर खिन्न रहता है।
  2. नेपालियों की शिकायत मुनाफाखोर भारतीय व्यापारियों को लेकर है।
  3. भारत के मन में चीन व पाकिस्तान को लेकर नेपाल के प्रति आशंकाएँ हैं जबकि नेपाल का कहना है कि उसके मित्रों व शत्रुओं का निर्णय भारत नहीं कर सकता।

प्रश्न 2.
भारत – नेपाल सम्बन्धों के बीच चीन की अभिरुचि को बाधक क्यों माना जाता है? चीन की नेपाल में विशेष रुचि क्यों हैं?
उत्तर:
नेपाल हिमालय की पहाड़ियों में बसा हुआ एक छोटा – सा देश है। यह भारत व चीन के मध्य एक अंत: स्थ राज्य (बफर स्टेट) है। नेपाल की इस स्थिति के कारण ही आधुनिक नेपाल के निर्माता पृथ्वी नारायण शाह ने कहा था कि यह देश दो चट्टानों के बीच खिले हुए फूल के समान है। हमें चीनी सम्राट के साथ मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध रखने चाहिए तथा हमारे सम्बन्ध दक्षिणी सागरों के सम्राट भारत से भी मधुर होने चाहिए। नेपाल की चीन से निकटता भारत – नेपाल संबंधों में बाधक है। इसके निम्नलिखित कारण हैं

(1) चीन द्वारा तिब्बत पर कब्जा – भारत के लिए नेपाल को सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण स्थान है। चीन द्वारा तिब्बत पर कब्जा कर लेने के बाद भारत – चीन संबंधों में नेपाल की सामरिक स्थिति का राजनीतिक महत्व बढ़ गया है। उत्तर में भारत की सुरक्षा एक बड़ी सीमा तक नेपाल की सुरक्षा पर निर्भर करती है। चीन द्वारा तिब्बत पर कब्जा कर लेने से भारत का चिन्तित होना स्वाभाविक था।

(2) एवरेस्ट पर्वत शिखर समझौता – सन् 1959 में नेपाल के प्रधानमंत्री कोइराला ने चीन की यात्रा की और चीनी प्रमुख चाऊ – एन – लाई को नेपाल आने के लिए आमन्त्रित किया। चीन व नेपाल के मध्य एवरेस्ट पर्वत शिखर के बारे में एक समझौता भी हुआ जिसकी भारत में कड़ी आलोचना हुई। कोइराला मंत्रिमण्डल को कुछ समय बाद भंग कर दिया गया तथा नेपाली कांग्रेस के कुछ लोगों ने भारत में शरण ली और वहीं से जन-आन्दोलन आरम्भ किया। इससे भारत व नेपाल के मध्य कटुता आ गई।

(3) काठमाण्डू – ल्हासा मार्ग- भारत की चेतावनियों के बावजूद नेपाल के राजा महेन्द्र ने काठमाण्डू – ल्हासा मार्ग बनाने के संबंध में चीन से समझौता कर भारत के लिए खतरा उत्पन्न कर दिया। राजा महेन्द्र चीन की यात्रा पर भी गये।

(4) सन् 1962 का भारत – चीन युद्ध – सन् 1962 में चीन ने सीमा विवाद की आड़ में भारत पर आक्रमण किया। ऐसे समय में नेपाल ने भारत का साथ देने की जगह तटस्थता की नीति अपनाई। इससे भारत में नेपाल के प्रति आशंका पैदा हुई यद्यपि बाद के वर्षों में दोनों देशों के नेताओं ने परस्पर यात्राएं की है तथा कई सन्धियाँ व समझौते भी किये जाते रहे। हैं किन्तु नेपाल में चीन का हस्तक्षेप आशंकाएँ उत्पन्न करता रहा है।

चीन की नेपाल में विशेष अभिरुचि भारत के विरुद्ध एक कदम है। नेपाल में चीन की गतिविधियाँ भारत विरोधी व ध्वंसात्मक रही है। चीन व नेपाल के मध्य समझौते भारत के प्रति विश्वासघात है। चीन भारत के सभी पड़ोसियों से सम्बन्ध बढ़ा रहा है। इससे भारत की सुरक्षा को खतरा होना स्वाभाविक है। चीन की नेपाल में बढ़ती अभिरुचि भी इसी रणनीति का एक हिस्सा है।

प्रश्न 3.
भारत – नेपाल रिश्तों पर आलोचनात्मक विवेचना कीजिए।
उत्तर:
नेपाल की स्थिति भारत व चीन के मध्य अंत:स्थ राज्य (बफर स्टेट) के रूप में है। पिछले 200 वर्षों के इतिहास में नेपाल की विदेश नीति की प्रधान विशेषता रही है कि उसने भारत व चीन दोनों ही पड़ोसियों के साथ अच्छे सम्बन्ध रखने के प्रयास किये गए हैं। यदि नेपाल के दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह सर्वथा उचित भी है।

चीन द्वारा तिब्बत पर अधिकार कर लेने के बाद नेपाल का सामरिक महत्त्व और अधिक बढ़ गया है। उत्तर में भारत की सुरक्षा आज एक बड़ी सीमा तक नेपाल की सुरक्षा पर निर्भर करती है। नेपाल की शान्ति व सुरक्षा के लिए कोई भी खतरा भारत की शान्ति व सुरक्षा के लिए खतरा है।

ऐसे में नेपाल की चीन के प्रति बढ़ती निकटता से भारत का आशंकित होना स्वाभाविक ही है। नेपाल का चीन के प्रति झुकाव स्वयं को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से होता है। किन्तु चीन को भारत के सभी पड़ोसियों से मित्रता बढ़ाना संदेह के दायरे में आता है। इतिहास साक्षी है कि चीन के मंसूबे भारत के संदर्भ में मित्रता की भावना से प्रेरित तो कदापि नहीं है वरन ये भारत के विरुद्ध निर्धारित रणनीति का ही हिस्सा प्रतीत होते हैं।

आरम्भ से भारत व नेपाल के मध्य संबंध यद्यपि अत्यन्त मधूर थे किन्तु आज नेपाल का रवैया भारत के प्रति पहले की अपेक्षा उग्र हो गया है। इस तनाव वृद्धि के कई कारण हैं। जैसे कि 1950 की विषम सन्धि, नदी जल विवाद, नेपाल में मुनाफाखोर भारतीय व्यापारी। भारत को भी नेपाल से शिकायतें हैं जैसे कि नेपाली भूमि में शरण लेने वाले तस्कर व आतंकवादी तथा नेपाल की चीन व पाकिस्तान से बढ़ती निकटता।

स्वाधीन नेपाल का कहना है कि उसके मित्रों या शत्रुओं का निर्णय भारत नहीं कर सकता । नेपाल का यह कथन उसके दृष्टिकोण से उचित हो सकता है किन्तु भारत के मन में चीन व पाकिस्तान को लेकर आशंकाएँ उत्पन्न होना स्वाभाविक ही है। ऐसी स्थिति में नेपाल भारत से पहले जैसी सहायता वे समर्थन की आशा भी नहीं कर सकता है। भारत का दृष्टिकोण है कि नेपाल की स्थिरता और विकास का मॉडल भारतीय साँचे के अनुरुप हो।

भारत द्वारा नेपाल की राजशाही को समर्थन देने की नीति ने भारत – नेपाल संबंधों में काफी तनाव पैदा किया है। इसी तरह नेपाली माओवादियों को भारतीय माओवादियों के साथ रखकर उनकी राजनीतिक भूमिका का आकलन भी हमारे लिए अनुकूल नहीं रहा नेपाल में भारत के हितों को हम मात्र चीन के साथ उसके रिश्तों के चश्मे से ही नहीं देख सकते। नेपाली समाज भारत से कम विविधता वाला नहीं । वहाँ भी आर्थिक विकास का असन्तुलन बहुत विकट है। अतीत की साझेदारी की यादों के आधार पर ही भावी संबंधों का निर्धारण करना तर्कसंगत नहीं होगा।

प्रश्न 4.
भारत – चीन सम्बन्धों का ऐतिहासिक आधार क्या है? वर्तमान में दोनों देशों के संबंध कैसे हैं?
उत्तर:
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि -1950 के दशक में भारत व चीन के मध्य संबंध मधुर थे तथा ‘हिन्दी-चीनी भाई भाई’ के नारे गूंजते थे। दोनों देशों के मध्य हजारों वर्ष पुराने सांस्कृतिक सम्बन्धों का उल्लेख होता रहता था। भारत पहला जनतान्त्रिक देश था जिसने जनवादी चीन को मान्यता दी थी। पं. जवाहरलाल नेहरु ने अपने मित्र सहयोगी के.एम. पणिक्कर को भारतीय राजदूत के रूप में चीन भेजा था। भारत ने ही चीन को सुरक्षा परिषद में उसकी स्थायी सीट दिलाने में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था।

पं. जवाहरलाल नेहरु और कृष्ण मेनन के प्रयत्नों से ही बांडुंग शिखर सम्मेलन में चीन को आमन्त्रित किया गया था। तिब्बत के मसले पर भारत ने चीन की सम्प्रभूता को स्वीकार किया था और इसी आधार पर पंचशील समझौते पर हस्ताक्षर किये थे। तब यह लगा था कि सीमा विवाद के बावजूद दोनों देशों के सम्बंध सद्भावपूर्ण बने रहेंगे। इतने सद्भावपूर्ण माहौल में सन् 1962 में चीन द्वारा सीमा विवाद की आड़ में भारत पर किया गया आक्रमण सभी को चौंकाने वाली घटना थी। ‘हिन्दी-चीनी भाई भाई’ के नारे लगाने वाली भारतीय जनता हतप्रभ थी। युद्ध के निम्नलिखित परिणाम हुए

  1. गुटनिरपेक्ष अफ्रीकी – एशियाई समुदाय में भारत बिल्कुल अकेला पड़ गया।
  2. भारत के सुनियोजित आर्थिक विकास की सभी योजनाएं गड़बड़ा गई।
  3. भारत अन्तर्राष्ट्रीय रंगमंच पर पहले जैसी प्रभावी भूमिका निभाने में असमर्थ हो गया।

वर्तमान स्थिति – भारत व चीन के मध्य सीमा विवाद के समाधान हेतु राजनयिक वार्ताओं के कई दौर चले किन्तु गतिरोध की स्थिति बनी रही। चीन ने हिमालयी पर्वतीय क्षेत्र के पचास हजार वर्ग किमी से अधिक विस्तृत भू – भाग पर पहले ही कब्जा कर लिया था और बड़े पैमाने पर अपनी फौजें तैनात कर दी थीं।

इसके बाद चीन ने लद्दाख के अक्साई चीन प्रदेश पर भी अपना कब्जा कर लिया था। चीन अपनी विस्तारवादी नीति पर आज भी कायम है तथा भारत की चारों ओर से सामरिक घेराबन्दी कर रहा है फिर चाहे यह हिमालय हो या समुद्र मार्ग। चीन के उग्रवादी और विस्तारवादी रवैये के कारण भारत का झुकाव सोवियत संघ की ओर बढ़ता चला गया।

भारत व चीन के मध्य जल विवाद भी कम विकट नहीं है। किन्तु फिर भी 1975 के बाद से राजनयिक यात्राओं, वार्ताओं व समझौतों के माध्यम से दोनों देशो के मध्य संबंध सुधारने के प्रयास किये जाते रहे हैं। संबंधों में सुधार दोनों ही देशों के हित में है। दोनों देशों के मिल जाने पर विश्व राजनीति में एशिया का प्रभाव बढ़ना अवश्यम्भावी है।

वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन की तथा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत की यात्रा की किन्तु चीन द्वारा अभी भी खुले दिलोदिमाग से अन्तर्राष्ट्रीय मंचों की साझेदारी हेतु समर्थन व्यक्त नहीं किया जा रहा है। यह संशय की स्थिति संबंधों में सहजता का बोध नहीं कराती है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की मांग के संबंध में भी चीन का रवैया सकारात्मक नहीं है।

प्रश्न 5.
भारत – चीन के आर्थिक रिश्तों ने दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को कैसे जोड़ा है? विस्तार से लिखिए।
उत्तर:
भारत व चीन के मध्य आर्थिक रिश्ते भारत के प्रतिकूल तथा असन्तुलित है। 250 अरब डॉलर के करीब पहुँचा व्यापार लगभग एकतरफा है। इससे चीन का दबाव निरन्तर बढ़ रहा है। चीन हमारे लिए नम्बर एक का साझेदार है किन्तु चीन में हमारा व्यापार दसवें स्थान पर भी नहीं है। यद्यपि यह सही है कि जब सम्पूर्ण विश्व जबरदस्त आर्थिक मन्दी की स्थिति से गुजर रहा है, हम किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठा सकते और चीन के साथ अपने व्यापार को यथावत जारी रखना देश के हित में है।

चीन विश्व का सबसे बड़ा बाजार है और सस्ते श्रम का विपुल भण्डार है। अत्याधुनिक तकनीक के क्षेत्र में भी वह भारत की तुलना में काफी आगे है। खाद्य सुरक्षा से लेकर ऊर्जा सुरक्षा तक अनेक उदाहरण हैं जो इस तथ्य को पुष्ट करते हैं। 17 सितम्बर 2014 को चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग भारत आये। 18 सितम्बर को दोनों देशों के बीच 12 करार हुए। चीन भारत में लगभग 1,200 अरब रुपये का निवेश पांच वर्ष में करने के लिए सहमत हुआ है।

बुलेट ट्रेन चलाने, रेलवे स्टेशनों को आधुनिक बनाने पर भी चीन का भारत को सहयोग मिलेगा। 14 से 16 मई 2015 तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चीन की यात्रा पर रहे। दोनों देशों के मध्य 10 अरब डॉलर के 24 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। मोदी जी ने चीन के निवेशकों को भारत में निवेश के लिए आमन्त्रित किया। उन्होंने चीन के नागरिकों को ई-वीजा देने की भी घोषणा की।

आज बदली हुई अन्तर्राष्ट्रीय परिस्थितियों में भारत व चीन का निकट आना अवश्यम्भावी हो गया है। विश्व व्यवस्था में भारत की बढ़ती हैसियत, आर्थिक विकास व आधुनिक तकनीक विशेषकर सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय पेशेवरों की विशेषज्ञता ये कुछ ऐसे कारण हैं जिनसे दोनों देश करीब आ रहे हैं। पिछले पाँच वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार में कई गुना बढ़ोत्तरी हो चुकी है और अब धीरे-धीरे व्यापार सन्तुलन भी स्थापित हो रहा है।

प्रश्न 6.
भारतीय विदेश नीति के प्रमुख घटक के रूप में चीन की क्या स्थिति हैं?
उत्तर:
भारतीय विदेश नीति के प्रमुख घटक के रूप में चीन की स्थिति-भारतीय विदेश नीति के प्रमुख घटक के रूप में चीन की स्थिति का अध्ययन निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत किया जा सकता है
(1) प्रारम्भिक सम्बन्ध – प्रारम्भ में भारत व चीन के संबंध मैत्रीपूर्ण थे। चीन की 1949 ई. की साम्यवादी क्रान्ति का भारत ने समर्थन किया। साथ ही चीन को राजनयिक मान्यता देने के साथ – साथ संयुक्त राष्ट्र संघ में भी मान्यता दिलाने का प्रयास किया।

(2) तिब्बत को लेकर तनाव-सन् 1950 में चीन ने जब तिब्बत पर अधिकार कर लिया था तब भारत ने तिब्बत में चीन की प्रभुसत्ता को स्वीकार कर लिया था, चीन के साथ विदेश नीति में यह भारत की सबसे बड़ी भूल थी। चीन और भारत के बीच नेपाल को एक अत:स्थ राज्य (बफर स्टेट) के रूप में महत्त्वपूर्ण समझा गया और तिब्बत की भी ऐसी ही सामरिक उपयोगिता थी। चीन के अत्याचारों से त्रस्त होकर सन् 1959 में दलाई लामा ने अपने समर्थकों के साथ भारत में शरण ली। चीन ने इसे भारत की शत्रुतापूर्ण कार्यवाही माना।

(3) सीमा संबंधी विवाद-ब्रिटिश शासन काल में भारत व चीन के मध्य में सीमा निर्धारण किया गया था। यद्यपि चीन ने इसे उस समय मान्यता दे दी थी किन्तु मन से इसे कभी स्वीकार नहीं किया। सीमा विवाद के समाधान हेतु राजनयिक वार्ताओं के कई दौर चले किन्तु गतिरोध बना रहा। सन् 1962 में सीमा विवाद की आड़ में चीन ने भारत पर आकस्मिक आक्रमण भी कर दिया था जिससे सभी हतप्रभ थे।

(4) चीन की विस्तारवादी नीति-चीन ने हिमालयी पर्वतीय क्षेत्र में पचास हजार वर्ग किमी से भी अधिक भू-भाग पर पहले ही कब्जा कर रखा है। साथ ही अपनी सैनाएँ भी तैनात कर रखी है। लद्दाख के अक्साई चिन प्रदेश पर भी चीन ने कब्जा कर लिया था। चीन अपनी विस्तारवादी नीति पर आज भी कायम है तथा भारत के चारों ओर सामरिक घेरेबन्दी कर रहा है। इस सामरिक घेरेबन्दी में पाकिस्तान भी उसके साथ है। इधर रूस भी पाकिस्तान व चीन के सामरिक गठजोड़ में सम्मिलित होने का प्रयास कर रहा है।

सन् 1954 में भारत व चीन के मध्य पंचशील समझौता हुआ था। जिसकी उपेक्षा चीन निरन्तर करता आ रहा है। यद्यपि वर्तमान में तनावों के मध्य ही संबंधों को सुधारने की प्रक्रिया आरम्भ हुई है। प्रतिवर्ष नियमित शिखर वार्ताओं की व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त अन्तर्राष्ट्रीय मुद्दों पर भी दोनों देश समान दृष्टिकोण अपना रहे है। किन्तु चीन द्वारा भारत की जो सामरिक घेराबन्दी की जा रही है उसकी उपेक्षा नहीं की जा सकती है।

प्रश्न 7.
भारत – पाक सम्बन्धों की विपरीत धुरी है कश्मीर। इसे आधार बनाकर लिखें कि कश्मीर में हालात पाकिस्तान की वजह से कैसे बिगड़े?
उत्तर:
भारत – पाक सम्बन्धों के मध्य सभी समस्याओं में सर्वाधिक ज्वलन्त समस्या-कश्मीर की समस्या है जो कि विभाजन के पश्चात् से अनवरत रुप से बनी हुई है। अलाप माईकेल के शब्दों में -”कश्मीर समस्या अनिवार्यत: भूमि या पानी की समस्या नहीं, यह दोनों देशों के लोगों और प्रतिष्ठा का प्रश्न है। समस्या का आरम्भ – स्वतन्त्रता के पश्चात् भारत व पाकिस्तान दो नये राष्ट्र अस्तित्व में आये जहाँ तक देशी रियासतों का प्रश्न था ? ब्रिटिश सरकार ने घोषणा की कि देशी रियासतें अपनी इच्छानुसार भारत अथवा पाकिस्तान में विलय हो सकती हैं।

अधिकांश रियासतों के द्वारा ऐसा ही किया गया किन्तु कुछ रियासतें समस्या बन गई जैसे कि हैदराबाद, जूनागढ़ व कश्मीर। समय रहते हैदराबाद व जूनागढ़ की समस्या का भी समाधान हो गया किन्तु कश्मीर की समस्या यथावत बनी रही। कश्मीर की विशिष्ट स्थिति-भारत की उत्तर-पश्चिम सीमा पर स्थित यह राज्य भारत और पाकिस्तान दोनों को जोड़ता है। यहाँ की जनसंख्या का बहुसंख्यक भाग मुस्लिम धर्मी था परन्तु वहाँ का शासक हरिसिंह एक हिन्दू राजा था। अगस्त 1947 में कश्मीर शासक ने विलय के संबंध में कोई तात्कालिक निर्णय नहीं लिया।

पाकिस्तानी घुसपैठ – पाकिस्तान इसे अपने साथ मिलाना चाहता था। 22 अक्टूबर 1947 को उत्तर – पश्चिम सीमा प्रान्त के कबायलियों के भेष में पाकिस्तानी सेना ने कश्मीर में घुसपैठ कर आक्रमण कर दिया। साथ ही सीमा पर सेना का जमाव भी कर दिया। चार दिनों के अन्दर ही हमलावर श्रीनगर से 25 मील दूर बारामुला तक पहुँच गये।

26 अक्टूबर को कश्मीर के शासक ने भारत सरकार से सहायता मांगी। साथ ही कश्मीर को भारत में सम्मिलित करने की प्रार्थना की। परिणामस्वरूप भारत सरकार ने अपनी सेनाएं कश्मीर भेज दी। युद्ध समाप्ति पर जनमत संग्रह की शर्त के साथ कश्मीर को भारत का अंग मान लिया गया।

सुरक्षा परिषद द्वारा समाधान के प्रयास-इस निर्णय से रुष्ट होकर पाकिस्तान ने कश्मीर क्षेत्र में घुसपैठ बढ़ा दी जिससे यह क्षेत्र दोनों राष्ट्रों के बीच युद्ध का क्षेत्र बन गया। विवश होकर 1 जनवरी 1948 को भारत सरकार ने सुरक्षा परिषद में शिकायत की। परिणामतः सुरक्षा परिषद ने एक आयोग की नियुक्ति की जिसने स्थिति का अध्ययन कर 13 अगस्त 1948 को दोनों पक्षों से युद्ध बन्द करने और समझौता करने हेतु कुछ सिफारिशें प्रस्तुत की।

एक लम्बी वार्ता के बाद 1 जनवरी 1949 को युद्ध विराम हो गया। कश्मीर के विलय का अन्तिम निर्णय जनमत संग्रह से किया जाना था। आयोग के द्वारा कराये गये समझौते के आधार पर पाकिस्तान के पास कश्मीर का 32000 वर्गमील का क्षेत्रफल रह गया जिसकी जनसंख्या 7 लाख थी। पाकिस्तान ने इस क्षेत्र को आजाद कश्मीर का नाम दिया।

सन् 1965 का भारत-पाक युद्ध-अप्रैल 1965 में पाकिस्तान की दो टुकड़ियां कच्छ के रण में घुस आई और कई क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया। साथ ही कश्मीर में भी घुसपैठ आरम्भ कर दी। यह योजनाबद्ध आक्रमण था। 4-5 अगस्त को हजारों छापामार पाकिस्तानी सैनिक कश्मीर में घुस आये। पूर्ण युद्ध आरम्भ हो गया। अन्तत: सुरक्षा परिषद की अपील पर 22 सितम्बर 1965 को युद्ध समाप्त हो गया। 4 जनवरी 1966 को ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर हुए।

पाकिस्तान का उत्तरदायित्व – इसमें कोई सन्देह नहीं है कि कश्मीर में हालात पाकिस्तान के कारण ही बिगड़े हैं। भारत द्वारा कई बार वार्ताओं के द्वारा समस्या के समाधान के प्रयास किये गए किन्तु पाकिस्तान के अड़ियल रवैये के कारण कोई समाधान नहीं हो सका। कश्मीर मुद्दे को अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर उठाये जाने के बावजूद पाकिस्तान ने उनके निर्णय की भी अनदेखी की। वर्तमान में पाकिस्तान आतंकवाद का गढ़ बन चुका है तथा आतंकवादी गतिविधियों का केन्द्र कश्मीर बेन रहा है।

यह खेद का विषय है कि पाकिस्तान को आरम्भ से कुछ विश्व शक्तियों का प्रश्रय मिलता रहा किन्तु आज स्थिति जटिलतम बन चुकी है। वर्तमान में पाकिस्तान के मंसूबों में सुधार आये बिना स्थिति का सहज समाधान संभव नहीं है किन्तु इतिहास साक्षी है। कि भारत सरकार भी पाकिस्तान को उसके साम्प्रदायिक व वैमनस्यपूर्णभावना से प्रेरित इरादों में सफल नहीं होने देगी।

प्रश्न 8.
पाकिस्तान भारत को परेशान करने के उद्देश्य से हमारे अन्य पड़ोसियों से सम्बन्ध बढ़ा रहा है। इससे भारत पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
उत्तर:
भारत को आशा थी कि देश के विभाजन के बाद अस्तित्व में आये दोनों राष्ट्र-भारत व पाक सौहार्दपूर्ण वातावरण में अपना विकास कर सकेंगे। किन्तु पाकिस्तान ने विभाजन के बाद से ही अनेको ऐसी समस्याएं उत्पन्न कर दी जिनसे दोनों देशों के मध्य संबंध अत्यन्त कटुतापूर्ण हो गए।

सन् 1947, 1965 व 1971 में पाकिस्तान की आक्रामक नीति के कारण तीन युद्ध भारत व पाकिस्तान के मध्य हुए जिनमें पाकिस्तान को पराजय का मुँह देखना पड़ा किन्तु फिर भी अपनी वैमनस्यपूर्ण नीति के तहत वह निरन्तर भारत के विरुद्ध घुसपैठ व आतंकवादी कार्यवाहियाँ कर रहा है। इसके अतिरिक्त पाकिस्तान भारत की घेराबन्दी करने के लिए एवं सीमा सुरक्षा को कमजोर बनाने के लिए भारत के पड़ोसियों से सम्बन्ध बढ़ा रहा है।

सन् 1980 – 90 के दशक में पाकिस्तान ने संयुक्त राज्य अमेरिका व चीन से भारी मात्रा में सैनिक साजो सामान और आर्थिक सहायता प्राप्त की। ये दोनों देश दक्षिण एशिया में सोवियत विस्तारवाद पर नियन्त्रण के उद्देश्य से पाकिस्तान को सुदृढ़ व शक्तिशाली बनाने के लिए आधुनिकतम टैंक रोधी मिसाइलें, एफ -15, एफ -16, एफ -16 सी जैसे विध्वंसक वायुयानों की आपूर्ति करते रहे हैं।

यह सब भारत के लिए चिन्ता का विषय है क्योंकि चीन पर भी पूर्णतया विश्वास नहीं किया जा सकता है। इसी प्रकार चीन – पाकिस्तान आर्थिक गलियारा चीन – पाक संबंधों में केन्द्रीय महत्त्व रखता है किन्तु भारत द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है क्योंकि यह पाक अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरता है।

ताजा खबरों के अनुसार पाकिस्तान चीन से परमाणु शक्ति चालित लड़ाकू पनडुब्बी प्राप्त कर सकता है। साथ ही ग्वादर बंदरगाह पर चीनी नौसेना के जहाज तैनात करने की बात पाकिस्तान ने कही है। पाकिस्तान ने नेपाल में भी लोकतन्त्र की स्थापना के समय अपना समर्थन दिया। इसके अलावा भी वह नेपाल से संबंध विकसित कर रहा है। उदाहरणार्थ दोनों देशों में सैन्य सहयोग बढ़ रहा है। पहले नेपाल में राजशाही को बनाये रखने में भी पाकिस्तान ने सैन्य सहायता दी थी।

1982 ई. में दोनों देशों के मध्य व्यापार समझौता हुआ। पाकिस्तान के श्रीलंका व म्यांमार से भी कूटनीतिक व आर्थिक संबंध हैं। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान इन देशों को भी सैन्य साजो – सामान व्यापक पैमाने पर निर्यात करता है तथा सैनिक प्रशिक्षण भी देने का कार्य कर रहा है। भारत के उत्तर में चीन, पूर्व में म्यांमार, दक्षिण में श्रीलंका तथा पश्चिम में स्वयं पाकिस्तान है। इस प्रकार पाकिस्तान भारत को चारों ओर से घेरने की नीति पर चल रहा है। परिणामस्वरूप भारत पर भी रक्षा संबंधी व्यय का दबाव बढ़ रहा है।

प्रश्न 9.
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पाक विदेश नीति पर निबन्धात्मक लेख लिखिए।
उत्तर:
64 मई 2014 को श्री नरेन्द्र मोदी जी ने भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। पाकिस्तान के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हुए उन्होंने अपने शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान के प्रधानमन्त्री नवाज शरीफ को आमन्त्रित किया। इससे प्रतीत हुआ कि दोनों देशों में बातचीत का सिलसिला शुरु होगा किन्तु पाकिस्तानी हाई कमिश्नर द्वारा अलगाववादी हुर्रियत नेताओं से मुलाकात के बाद 25 अगस्त 2014 को इस्लामाबाद में होने वाली विदेश सचिव स्तर की बातचीत को भारत ने रोक दिया। 26 – 27 नवम्बर 2014 को काठमाण्डू में आयोजित 18 वें सार्क सम्मेलन में भी मोदी-शरीफ के मध्य कोई बातचीत नहीं हुई।

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक बार पुनः इस दिशा में प्रयास किया जबकि क्रिसमस (25 दिसम्बर 2015) के दिन वे नवाज शरीफ को उनके जन्मदिन की बधाई देने और उनकी नातिन की शादी पर आशीर्वाद देने अचानक लाहौर पहुँचे। ऐसा प्रतीत हुआ कि दोनों देश अब वार्ता के द्वारा ही कोई शांतिपूर्ण समाधान खोज लेंगे। किन्तु एक सप्ताह बाद ही नववर्ष के दिन (1 जनवरी 2016) यह उत्साह चकनाचूर हो गया जबकि सीमा पार से पठानकोट में पाकिस्तान ने सशस्त्र

आतंकवादी हमला किया। पाकिस्तान ने इसके बाद लगातार कश्मीर में आतंकवादियों की घुसपैठ कराई और हमारे आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप का प्रमाण दिया। केन्द्र सरकार लगातार प्रयासरत है कि वहाँ शान्ति बहाल हो, लेकिन कश्मीरी आतंकियों के पाकिस्तान में बैठे सरगना उन्हें भारतीय फौजों के खिलाफ न केवल उकसा रहे हैं अपितु सैन्य और आर्थिक सहायता भी पहुँचा रहे हैं।

पठानकोट हमले के पश्चात् पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने कश्मीर के उड़ी सेना शिविर पर हमले किये जिसमें 20 से अधिक भारतीय वीरगति को प्राप्त हुए। इसकी प्रतिक्रियास्वरूप भारतीय सेना द्वारा पाक अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक की गयी। इस प्रकार पाकिस्तान की कार्यवाहियों ने भारतीय प्रधानमन्त्री को सख्त रवैया अपनाने के लिए विवश किया

। 15. अगस्त 2016 को पहली बार लाल किले की प्राचीर से बोलते हुए घोषणा की गई कि अब कश्मीर की वार्ता तो होगी पाकिस्तान से, किन्तु वह होगी अधिकृत कश्मीर पर, जिसे उसने अनधिकृत रूप से कब्जाया हुआ है। प्रधानमन्त्री ने इसी के साथ पाकिस्तानी प्रान्त बलूचिस्तान में मानवाधिकार का मामला भी उठाया। इस प्रकारे भारत ने पहली बार आक्रामक रुख अपनाया। इसके बाद पाकिस्तान ने भारत के विरुद्ध अनर्गल बयानबाजी आरम्भ कर दी। साथ ही घुसपैठ व आतंकवादी कार्रवाइयाँ आरम्भ कर दीं।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 30 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

 RBSE Class 12 Political Science Chapter 30 बहुंचयनात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
सन् 1971 के भारत – पाक युद्ध के पश्चात् किस नए देश का जन्म हुआ?
(अ) भूटान
(ब) नेपाल
(स) बांग्लादेश
(द) मालदीव

प्रश्न 2.
भारतीय प्रधानमन्त्री लाल बहादुर शास्त्री के द्वारा पाकिस्तान के साथ किस समझौते पर हस्ताक्षर किए गये थे?
(अ) शिमला समझौता
(ब) सिन्धु जल समझौता
(स) भारत-पाक समझौता
(द) ताशकंद समझौता

प्रश्न 3.
भारत व चीन के बीच पंचशील समझौते पर किस वर्ष हस्ताक्षर किए गए थे?
(अ) 1954
(ब) 1956
(स) 1957
(द) 1960

प्रश्न 4.
किस पड़ोसी देश के साथ भारत ने 1962 का युद्ध लड़ा था?
(अ) पाकिस्तान.
(ब) बांग्लादेश
(स) चीन
(द) म्यांमार

प्रश्न 5.
भारत व पाकिस्तान के मध्य शिमला समझौता कब हुआ?
(अ) 28 जून 1971
(ब) 28 जून 1972
(स) 3 जुलाई 1971
(द) 3 जुलाई 1972

प्रश्न 6.
निम्न में से भारत के किस राज्य से धारा 370 सम्बन्धित है?
(अ) जम्मू और कश्मीर
(ब) बिहार
(स) मणिपुर
(द) त्रिपुरा

प्रश्न 7.
मधेशी आन्दोलन का सम्बन्ध किस देश से है?
(अ) चीन
(ब) भारत
(स) नेपाल
(द) पाकिस्तान

प्रश्न 8.
सलाल जल विद्युत परियोजना के सम्बन्ध में भारत की किस देश से सन्धि हुई थी?
(अ) चीन
(ब) पाकिस्तान
(स) नेपाल
(द) श्रीलंका

प्रश्न 9.
चीन में यारलुंग सांगपो किस नदी को कहा जाता है?
(अ) ब्रह्मपुत्र को
(ब) यमुना को
(स) गंगा को
(द) अलकनंदा को

प्रश्न 10.
भारत व चीन के मध्य बफर स्टेट है
(अ) भूटान
(ब) नेपाल
(स) तिब्बत
(द) बंगलादेश

उत्तर:
1. (स), 2. (द), 3. (अ), 4. (स), 5. (द), 6. (अ), 7. (स), 8. (ब), 9. (अ), 10. ब)

RBSE Class 12 Political Science Chapter 30 अति लघुउत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत की विदेश नीति का मूल तत्व क्या है?
उत्तर:
भारत की विदेश नीति का मूल तत्व है – पड़ोसी देशों के साथ सद्भाव, शान्ति व मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध रखे जाएँ।

प्रश्न 2.
विभाजन के तुरन्त बाद भारत व पाकिस्तान के मध्य किन समस्याओं को लेकर आपस में कटुती उत्पन्न हो गयी।
उत्तर:

  1. हैदराबाद विवाद
  2. जूनागढ़ विवाद
  3. ऋणों की अदायगी का प्रश्न
  4. नदी जल विवाद
  5. शरणार्थियों का प्रश्न
  6.  कश्मीर पर कब्जा

प्रश्न 3.
भारत व पाकिस्तान के मध्य सर्वाधिक जटिल समस्या क्या है?
उत्तर:
भारत व पाकिस्तान के मध्य सर्वाधिक जटिल कश्मीर समस्या है।

प्रश्न 4.
देश के विभाजन के समय कश्मीर का राजा कौन था?
उत्तर:
देश के विभाजन के समय कश्मीर का शासक हरि सिंह था।

प्रश्न 5.
किस देश को आतंकवाद का गढ़ कहा जाता है?
उत्तर:
पाकिस्तान को आतंकवाद का गढ़ कहा जाता है।

प्रश्न 6.
सन् 1948 में कश्मीर समस्या पर नियुक्त संयुक्त राष्ट्र आयोग में किन – किन देशों के प्रतिनिधि सम्मिलित थे?
उत्तर:

  1. चेकोस्लाबिया
  2. अर्जेन्टाइना
  3. संयुक्त राज्य अमेरिका
  4. कोलम्बिया
  5. बेल्जियम

प्रश्न 7.
पाकिस्तान ने सेण्टो (CENT0) की सदस्यता का त्याग कब किया।
उत्तर:
पाकिस्तान ने सन् 1979 में सेण्टो की सदस्यता त्याग दी।

प्रश्न 8.
पाकिस्तान को गुट निरपेक्ष आन्दोलन की सदस्यता कब प्रदान की गई ?
उत्तर:
पाकिस्तान को सितम्बर 1979 के हवाना शिखर सम्मेलन में गुटनिरपेक्ष आन्दोलन की सदस्यता प्रदान की गई।

प्रश्न 9.
भारत के किस प्रधानमन्त्री ने दिल्ली – लाहौर – दिल्ली बस सेवा का उद्घाटन किया और कब?
उत्तर:
फरवरी 1999 में भारत के प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी ने दिल्ली – लाहौर – दिल्ली बस सेवा का उद्घाटन किया।

प्रश्न 10.
भारत के किस राज्य का अपना एक अलग संविधान है?
उत्तर:
जम्मू और कश्मीर राज्य का।

प्रश्न 11.
भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत कश्मीर को विशेष दर्जा प्राप्त है?
उत्तर:
अनुच्छेद 370 के तहत

प्रश्न 12.
कच्छ के रण को लेकर भारत व पाकिस्तान के मध्य कब संघर्ष हुआ?
उत्तर:
अप्रैल 1965 में।

प्रश्न 13.
सिन्धु नदी जल संधि कब व किसके मध्य हुई?
उत्तर:
सिन्धु नदी जल संधि भारत और पाकिस्तान के मध्य सितम्बर 1960 में हुई थी। इस पर पं० जवाहरलाल नेहरू व जनरल अय्यूब खाँ ने हस्ताक्षर किये थे।

प्रश्न 14.
सन् 1965 ई० में किन दो देशों के मध्य युद्ध हुआ?
उत्तर:
सन्सन् 1965 ई० में भारत और पाकिस्तान के मध्य युद्ध हुआ।

प्रश्न 15.
ताशकन्द समझौता कब व किसके मध्य हुआ? अथवा ताशकन्द समझौता किन दो देशों के बीच हुआ था ?
उत्तर:
सन् 1966 में भारत और पाकिस्तान के मध्य ताशकन्द समझौता हुआ।

प्रश्न 16.
ताशकंद समझौता कहाँ हुआ था?
उत्तर:
ताशकंद समझौता भारत – पाकिस्तान के मध्य सन् 1966 में तत्कालीन सोवियत संघ के ताशकंद शहर में हुआ था। इस पर लाल बहादुर शास्त्री वे जनरल अय्यूब खाँ ने हस्ताक्षर किये थे।

प्रश्न 17.
सन् 1971 के भारत – पाकिस्तान युद्ध के कोई दो राजनीतिक परिणाम बताइये।
उत्तर:

  1. बांग्लादेश के रूप में एक स्वतंत्र देश का जन्म।
  2. 3 जुलाई, 1972 को इन्दिरा गाँधी एंव जुल्फिकार अली भुट्टो के मध्य शिमला समझौता हुआ।

प्रश्न 18.
शिमला समझौता कब व किसके मध्य हुआ और इस पर किसने हस्ताक्षर किये ?
उत्तर:
शिमला समझौता 3 जुलाई, 1972 को भारत – पाकिस्तान के मध्य हुआ था। इस समझौते पर श्रीमती इन्दिरा गाँधी वं जुल्फिकार अली भुट्टो ने हस्ताक्षर किये थे।

प्रश्न 19.
करगिल संघर्ष का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर:
करगिल संघर्ष का मुख्य कारण पाकिस्तानी सेना द्वारा विभाजन रेखा के निकट भारतीय क्षेत्र के कुछ भागों पर कब्जा करना था।

प्रश्न 20.
नरेन्द्र मोदी जी ने प्रधानमन्त्री पद की शपथ कब ली?
उत्तर:
नरेन्द्र मोदी जी ने 26 मई 2014 को प्रधानमन्त्री पद की शपथ ग्रहण की।

प्रश्न 21.
पाकिस्तान के किस प्रान्त के संबंध में मानवाधिकार हनन का मामला उठाया जा रहा है?
उत्तर:
बलूचिस्तान प्रान्त के संबंध में

प्रश्न 22.
चीन में क्रान्ति कब हुई?
उत्तर-:
सन् 1949 में चीन की क्रान्ति हुई।

प्रश्न 23.
पंचशील के सिद्धान्तों की घोषणा कब और किसने की?
उत्तर:
29 अप्रैल, 1954 को भारतीय प्रधानमंत्री पं० जवाहरलाल नेहरू एवं चीन के प्रमुख चाऊ एन लाई ने संयुक्त रूप से पंचशील के सिद्धान्तों की घोषणा की।

प्रश्न 24.
तिब्बत के किस धार्मिक नेता ने कब भारत में शरण ली?
उत्तर:
तिब्बत के धार्मिक नेता दलाई लामा ने सन् 1959 में भारत में शरण ली।

प्रश्न 25.
चीन ने भारत पर कब आक्रमण किया?
उत्तर:
चीन ने 20 अक्टूबर 1962 को भारत पर आक्रमण किया।

प्रश्न 26.
तत्कालीन भारत के किस विदेश मंत्री ने 12 फरवरी 1979 की चीनी यात्रा को टोही मिशन की संज्ञा दी थी।
उत्तर:
अटल बिहारी वाजपेयी ने।

प्रश्न 27.
किस भारतीय प्रधानमंत्री ने चीनी नागरिकों को ई. वीजा देने की घोषणा की थी?
उत्तर:
नरेन्द्र मोदी ने।

प्रश्न 28.
कैलाश – मानसरोवर यात्रा के लिए नाथूला मार्ग को कब खोला गया?
उत्तर:
जून 2015 में।

प्रश्न 29.
चीन व नेपाल के मध्य संपन्न दो समझौते के ४ थे जिनसे भारत आशंकित हुआ?
उत्तर:
(1) एवरेस्ट पर्वत शिखर के बारे में समझौता,
(2) काठमाण्डू – ल्हासा मार्ग बनाने के संबंध में समझौता ।

प्रश्न 30.
यह किस भारतीय राष्ट्रपति का कथन है,-‘नेपाल की शांति और सुरक्षा के लिए कोई भी खतरा भारतीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा है। नेपाल के मित्र हमारे मित्र हैं और नेपाल के शत्रु हमारे शत्रु हैं।
उत्तर:
यह कथन भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का है।

प्रश्न 31.
भारत की सहायता से निर्मित किन्हीं दो नेपाली परियोजनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
(i) देवीघाट जल विद्युत परियोजना
(ii) कोहलापुर – महाकाली क्षेत्र में 22 पुलों का निर्माण।

प्रश्न 32.
नेपाल को स्वयं के शांति क्षेत्र घोषित कराने के पीछे मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर:
भारत के प्रभाव व विशिष्ट स्थिति को नकारना जिसे नेपाल अपनी राष्ट्रीय व्यक्तित्व की खोज में बाधक मानता

प्रश्न 33.
किस देश ने 1962 के भारत – चीन युद्ध में तटस्थता की नीति अपनाई थी।
उत्तर:
नेपाल ने।।

प्रश्न 34.
नेपाल में देशव्यापी लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शन कब हुए?
उत्तर:
अप्रैल 2006 में।

प्रश्न 35.
नेपाल में राजशाही कब समाप्त हुई?
उत्तर:
28 मई 2008 को।

प्रश्न 36.
‘आपरेशन मैत्री’ अभियान क्या था?
उत्तर:
यह 25 अप्रैल 2015 को नेपाल में आये भूकम्प के बाद भारत द्वारा चलाया गया अभियान था। इसके अन्तर्गत पीड़ित लोगों को तत्काल सहायता पहुँचायी गयी।

प्रश्न 37.
किस भारतीय प्रधानमंत्री ने काठमाण्डू-दिल्ली यात्री बस सेवा पशुपतिनाथ एक्सप्रेस को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया था?
उत्तर:
नरेन्द्र मोदी ने। प्रश्न 38. नेपाल ने पेट्रो चाइना के साथ कब समझौता किया? उत्तर-28 अक्टूबर 2015 को। प्रश्न 39. नेपाल का मनोविज्ञान क्या है?
उत्तर-नेपाल भारत और चीन के साथ समान दूरी के आधार पर सम्बन्ध विकसित करना चाहता है जिससे चीन को भी संतुष्ट किया जा सके।

प्रश्न 40.
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली’ ने चीन से क्या आग्रह किया है?
उत्तर:
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली’ ने चीन से आग्रह किया है कि नेपाल से तिब्बत होते हुए चीन तक रेल लाइन बनाई जाए जिससे कि भारत पर उनकी निर्भरता कम हो सके।

प्रश्न 41.
नेपाल किस प्रकार के राज्य का उदाहरण है।
उत्तर:
अंत:स्थ राज्य (बफर स्टेट का)।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 30 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत और पाकिस्तान के सम्बन्धों को प्रभावित करने वाली कौन – कौन – सी समस्याएँ थी? बताइए।
उत्तर:
भारत और पाकिस्तान के सम्बन्धों को प्रभावित करने वाली समस्याएँ- भारत और पाकिस्तान के सम्बन्धों को प्रभावित करने वाली प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं

  1. विभाजन से उत्पन्न होने वाली समस्याएँ जैसे-हैदराबाद विवाद, जूनागढ़ विवाद, कर्जा की अदायगी का प्रश्न, नदी जल विवाद, शरणार्थियों का प्रश्न और कश्मीर पर कब्जा आदि।
  2. पाकिस्तान द्वारा भारत विरोधी नीति अर्थात धार्मिक युद्ध (जिहाद) की नीति से उत्पन्न होने वाली समस्याएँ और आतंकवाद को खुला समर्थन।
  3. पाकिस्तन की सीटो व सेण्टो की सदस्यता लेकर भारत की घेराबन्दी तथा चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ भारत विरोधी समूह निर्मित करना।

प्रश्न 2.
स्वतंत्रता के पश्चात् भारत और पाकिस्तान में सैन्य तनाव को दर्शाने वाले तथ्य बताइए।
उत्तर:
स्वतंत्रता के पश्चात् भारत और पाकिस्तान में सैन्य तनाव दर्शाने वाले तथ्य-स्वतंत्रता के पश्चात् भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव दर्शाने वाले तथ्य निम्नलिखित हैं

  1. कश्मीर के एक भाग पर पाकिस्तान ने अनधिकृत कब्जा कर रखा है।
  2. भारत एवं पाकिस्तान अपनी सैन्य तैयारियों पर अपने सकल घरेलू उत्पाद का क्रमश: 2.9 प्रतिशत एवं 4.7 प्रतिशत व्यय करते हैं।
  3. पाकिस्तान जेहाद एवं आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों पर अपने सकल घरेलू उत्पाद का 8 प्रतिशत से अधिक व्यय करता है जबकि भारत का इस क्षेत्र में व्यय शून्य है।
  4. भारत को सियाचिन सहित सीमाओं की सुरक्षा पर प्रतिवर्ष लगभग रु. 9000 करोड़ अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है।
  5. पाकिस्तान द्वारा भारत में तस्करी के माध्यम से अनुचित घुसपैठ होती रहती है।

प्रश्न 3.
13 अगस्त 1948 को संयुक्त राष्ट्र आयोग ने भारत-पाकिस्तान को युद्ध बंद करने व समझौता करने हेतु कौन-कौनसे आधार प्रस्तुत किए?
उत्तर:
13 अगस्त 1948 को संयुक्त राष्ट्र आयोग ने भारत और पाकिस्तान को युद्ध बंद करने व समझौता करने हेतु निम्नलिखित आधार प्रस्तुत किए

  1. पाकिस्तान अपनी सेनाएँ कश्मीर से हटाए तथा इसके साथ-साथ कबायलियों व घुसपैठियों को भी वहाँ से हटने का निर्देश दे।
  2. सेनाओं द्वारा खाली किए गए प्रदेश का शासन का प्रबंध स्थानीय अधिकारी करें।
  3. पाकिस्तान उपर्युक्त वर्णित शर्तों को पूर्ण करने की सूचना भारत को प्रदान करे तब समझौते के अनुसार वह भी अपनी सेनाओं का अधिकांश भाग वहाँ से हटा ले।
  4. भारत सरकार युद्ध विराम के दौरान उतनी ही सेनाएँ रखे जितनी कि इस प्रदेश में कानून और व्यवस्था बनाए रखने हेतु आवश्यक हो।

प्रश्न 4.
कश्मीर समस्या पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
कश्मीर समस्या- भारत एवं पाकिस्तान के मध्य की प्रमुख समस्यां कश्मीर समस्या है। सन् 1947 में विभाजन के पश्चात् भारत एवं पाकिस्तान दोनों देशों के मध्य कश्मीर के मुद्दे पर विवाद बना रहा। पाकिस्तान की सरकार का दावा था कि कश्मीर पाकिस्तन का है। सन् 1948 में दोनों देशों के मध्य कश्मीर को लेकर युद्ध हुआ।

1948 ई. के युद्ध के फलस्वरूप कश्मीर के दो हिस्से हो गये। एक हिस्सा पाकिस्तन अधिकृत कश्मीर कहलाया एवं दूसरा हिस्सा भारत का जम्मू – कश्मीर राज्य बना। दोनों हिस्सों के मध्य एक नियन्त्रण सीमा रेखा भी है। दोनों देशों के मध्य प्रमुख समस्या यह है कि पाकिस्तान का कहना है कि मुस्लिम जनसंख्या की अधिकता के कारण कश्मीर पाकिस्तन का भाग है जबकि भारत का कहना है कि कश्मीर का विलय भारत में नियमानुसार हुआ है।

अत: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भी भारत का ही एक भाग है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात पर अड़े हुए हैं। दोनों देशों के मध्य सन् 1965 व सन् 1971 के युद्धों के पश्चात् भी इस समस्या का समाधान नहीं हो पाया। कश्मीर समस्या के समाधान हेतु दोनों देशों के मध्य लगातार बातचीत होती रही है लेकिन यह समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है।

प्रश्न 5.
बांग्लादेश का उदय किस प्रकार हुआ? अथवा बांग्लादेश का निर्माण कब व कैसे हुआ?
उत्तर:
सन् 1947 से 1971 तक बांग्लोदश पाकिस्तान का एक अंग था। अंग्रेजी शासन के समय के बंगाल एवं असम के विभाजित हिस्सों से पूर्वी पाकिस्तान का यह क्षेत्र बना था। इस क्षेत्र के लोग पश्चिमी पाकिस्तान के दबदबे तथा अपने ऊपर उर्दू भाषा को लादने के विरुद्ध थे। इस क्षेत्र की जनता ने प्रशासन में न्यायोचित प्रतिनिधित्व तथा राजनीतिक सत्ता से समुचित हिस्सेदारी की मांग भी उठायी।

1965 के भारत – पाकिस्तान युद्ध के पश्चात् यहाँ के हालात बहुत खराब हुए। पाकिस्तन के तानाशाह शासक जनता के शासक बन गए। पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) में असन्तोष बढ़ता जा रहा था। शेख मुजीब के नेतृतव में पूर्वी पाकिस्तान में स्वायत्तता का आन्दोलन प्रारम्भ हो गया।

पूर्वी पाकिस्तान पूर्णतया मुजीब के साथ था। पाकिस्तानी जनरल याहियो खाँ ने बंगालियों पर अत्याचार करने प्रारम्भ कर दिये। घोर अत्याचारों से घबराकर लोग घर – बार, सामान छोड़ जान बचाने हेतु भारत की सीमा में प्रवेश करने लगे। 10 हजार शरणार्थी प्रतिदिन भारत आने लगे। शरणार्थियों की संख्या भारत में 1 करोड़ तक पहुँच गई। इसी समय 3 दिसम्बर, 1971 को पाकिस्तानी वायुयानों ने भारत के हवाई अड्डों पर भीषण बमबारी कर दी। 14 दिसम्बर, 1971 को भारतीय वायु सेना ने जवाबी हमला किया।

भारत के विमानों ने पाकिस्तान के महत्वपूर्ण हवाई अड्डों पर बम वर्षा की। भीषण युद्ध के बाद पाकिस्तानी सेना को पराजय का सामना करना पड़ा तथा एक नए देश बांग्लादेश का उदय हुआ। 16 दिसम्बर, 1971 को ढाका में एक सैनिक समारोह में जनरल नियाजी ने भारत के लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोरा के सम्मुख आत्म-समर्पण कर दिया। उनके साथ 93 हजार सैनिकों ने भी हथियार डाल दिये। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। बांग्लादेश स्वतन्त्र हो गया।

प्रश्न 6.
पंचशील समझौते के विषय में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
सन् 1954 में चीन के प्रधानमन्त्री चाऊ एन लाई भारत यात्रा पर आये। इस यात्रा के दौरान चीनी प्रधानमन्त्री व भारतीय प्रधानमन्त्री जवाहरलाल नेहरू ने 29 अप्रैल 1954 को पंचशील समझौते पर हस्ताक्षर किये। सभी तरफ हिन्दी-चीनी भाई भाई के नारे पूँज रहे थे। पंचशील समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के मध्य मैत्रीपूर्ण संबंधों का संचालन करना था। इस समझौते में निम्नलिखित पाँच सिद्धान्त थे

  1. एक – दूसरे की सम्प्रभुता और क्षेत्रीय अखण्डता का सम्मान करना।
  2. एक दूसरे के विरुद्ध आक्रमण न करना।
  3. पारस्परिक सद्भावना के साथ कार्य करना।
  4. एक-दूसरे के आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना।
  5. शान्तिपूर्ण सह – अस्तित्व की नीति का अनुकरण करना । शान्तिपूर्ण सह – अस्तित्व का अर्थ है कि दो राष्ट्र विरोध । विचारधारा के बावजूद शान्तिपूर्वक रह सकते हैं।

प्रश्न 7.
दलाईलामा ने भारत में शरण क्यों ली ? तिब्बत के बारे में चीन का दृष्टिकोण क्या है?
उत्तर:
दलाई लामा तिब्बत के धार्मिक नेता हैं। चीन ने सन् 1950 में जब तिब्बत पर अधिकार कर लिया तो तिब्बत के अधिकांश लोगों ने चीनी कब्जे का विरोध किया। सन् 1956 में जब दलाई लामा भारत यात्रा पर आए तो उन्होंने तिब्बत लौटने की अनिच्छा जाहिर की। तब पं. जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें समझाकर वापस भेज दिया कि कहीं चीन इससे नाराज न हो जाए।

तिब्बत में चीन के बढ़ते हुए अत्याचारों से परेशान होकर सन् 1958 में चीनी आधिपत्य के विरुद्ध तिब्बत में सशस्त्र विद्रोह हुआ जिसे चीनी सेनाओं ने दबा दिया। तिब्बत की स्थिति अधिक बिगड़ने पर सन् 1959 में दलाई लामा ने भारत में शरण ली। भारत द्वारा दलाई लामा को दी गई शरण का चीन ने इसलिए विरोध किया क्योंकि चीन तिब्बत को अपना अभिन्न अंग मानता है।

प्रश्न 8.
तिब्बत, भारत और चीन के मध्य तनाव का बड़ा मामला कैसे बना ?
उत्तर:
ऐतिहासिक रूप से तिब्बत, भारत व चीन के मध्य विवाद का बड़ा मामला रहा है। अतीत में समय-समय पर चीन ने तिब्बत पर अपना प्रशासनिक नियंत्रण जताया तथा कई बार तिब्बत स्वतंत्र भी हुआ। सन् 1950 में चीन ने तिब्बत पर नियंत्रण कर लिया। तिब्बत के अधिकतर लोगों ने चीनी कब्जे का विरोध किया। सन् 1958 में चीनी आधिपत्य के विरुद्ध तिब्बत में सशस्त्र विद्रोह हुआ। इस विद्रोह को चीन की सेनाओं ने दबा दिया।

स्थिति को बिगड़ती हुई देखकर तिब्बत के धार्मिक नेता दलाई लामा ने सीमा पार कर भारत में प्रवेश किया तथा सन् 1959 में भारत से शरण माँगी। भारत ने दलाई लामा को शरण दे दी। चीन ने भारत के इस कदम का कड़ा विरोध किया। सन् 1950 और 1960 के दशक में भारत के अनेक राजनीतिक दल तथा राजनेताओं ने तिब्बत की आजादी के प्रति अपना समर्थन जताया। इन दलों में सोशलिस्ट पार्टी तथा जनसंघ शामिल थे। चीन ने ‘स्वायत्त तिब्बत क्षेत्र बनाया है और इस क्षेत्र को वह चीन का अभिन्न अंग मानता है।

तिब्बती जनता चीन के इस दावे को नहीं मानती कि तिब्बत, चीन का अभिन्न अंग है। अधिक से अधिक संख्या में चीनी लोगों को तिब्बत लाकर वहाँ बसाने की चीन की नीति का तिब्बती जनता ने विरोध किया। तिब्बती, चीन के इस दावे को भी अस्वीकार करते हैं कि तिब्बत को स्वायत्तता दी गयी है। वे मानते हैं कि तिब्बत की पारम्परिक संस्कृति तथा धर्म को नष्ट करके चीन वहाँ साम्यवाद फैलाना चाहता है।

प्रश्न 9.
चीन ने तिब्बत में सन् 1958 से अब तक क्या दृष्टिकोण अपना रखा है? इस सम्बन्ध में भारत का क्या दृष्टिकोण रहा है?
उत्तर:
सन् 1950 में चीन ने तिब्बत पर अधिकार कर लिया था। सन् 1958 में चीनी आधिपत्य के विरुद्ध तिब्बत में सशस्त्र विद्रोह हुआ। इस विद्रोह को चीन की सेनाओं ने दबा दिया। स्थिति बिगड़ती देखकर तिब्बत के धार्मिक नेता दलाई लामा ने सीमा पार कर भारत में प्रवेश किया और सन् 1959 में भारत से शरण माँगी। भारत ने दलाई लामा को शरण दे दी। चीन ने भारत के इस कदम का कड़ा विरोध किया। पिछले 50 सालों में बड़ी संख्या में तिब्बती जनता ने भारत में शरण ली है।

चीन ने ‘स्वायत्त तिब्बत क्षेत्र बनाया है और इस क्षेत्र को वह चीन को अभिन्न अंग मानता है। तिब्बती जनता चीन के इस दावे को नहीं मानती कि तिब्बत चीन का अभिन्न अंग है। अधिकांश संख्या में चीनी वाशिंदों को तिब्बत लाकर वहाँ बसाने की चीन की नीति का तिब्बती जनता ने विरोध किया। तिब्बत मामले पर भारत का दृष्टिकोण भी साफ नहीं है। वह तिब्बत को एक अलग क्षेत्र तो मानता है किन्तु चीन के साथ सम्बन्धों को खराब न होने देने के लिए इस मुद्दे को हवा नहीं देना चाहता।

प्रश्न 10.
नेपाल के लोग अपने देश में लोकतंत्र को बहाल करने में कैसे सफल हुए?
उत्तर:
अतीत में नेपाल एक हिन्, राज्य था, आधुनिक काल में यहाँ कई वर्षों तक संवैधानिक राजतन्त्र रहा। इस दौर में नेपाल की राजनीतिक पार्टियाँ एवं आम जनता खुले एवं उत्तरदायी शासन की आवाज उठाते रहे। लेकिन राजा ने सेना की सहायता से शासन पर पूरा नियन्त्रण कर लिया एवं नेपाल में लोकतंन्त्र की राह अवरूद्ध हो गयी। लेकिन एक मजबूत लोकतन्त्र समर्थक आन्दोलन से विवश होकर सन् 1990 में राजा ने नये लोकतान्त्रिक संविधान की माँग मान ली, परन्तु नेपाल

में लोकतान्त्रिक सरकारों का कार्यकाल बहुत छोटा एवं समस्याओं से भरा रहा। सन् 1990 के दशक में नेपाल के माओवादी, नेपाल के अनेक हिस्सो में अपना प्रभाव कायम करने में कामयाब हुए माओवादियों, राजा एवं सत्ताधारी लोगों के बीच त्रिकोणीय संघर्ष हुआ सन् 2002 में राजा ने संसद को भंग कर दिया एवं सरकार को गिरा दिया। इस प्रकार नेपाल में जो भी थोड़ा – बहुत लोकतन्त्र था, उसे राजा ने खत्म कर दिया। अप्रैल 2006 में नेपाल में देशव्यापी लोकतन्त्र समर्थक प्रदर्शन हुआ। अन्ततोगत्वा नेपाल के लोग अपने देश में लोकतन्त्र बहाल करने में सफल हुए।

प्रश्न 11.
भारत और नेपाल के मध्य कौन – कौन से मन – मुटाव के मुद्दे हैं? संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
भारत और नेपाल के मध्य मन-मुटाव के मुद्दे-भारत और नेपाल के मध्य निम्नलिखित मन-मुटाव के मुद्दे हैं

  1. नेपाल की चीन के साथ मित्रता को लेकर भारत ने समय-समय पर अपनी अप्रसन्नता प्रकट की है।
  2. नेपाल सरकार भारत विरोधी तत्वों के विरुद्ध आवश्यक कदम नहीं उठाती है। इससे भी भारत अप्रसन्न है।
  3. भारत की सुरक्षा एजेन्सियाँ नेपाल में चल रहे माओवादी आन्दोलन को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा समझती हैं। क्योंकि भारत में बिहार से लेकर आन्ध्रप्रदेश तक विभिन्न राज्यों में नक्सलवादी समूह का उदय हुआ है।
  4. नेपाल के लोगों को यह सोचना है कि भातर की सरकार नेपाल के आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रही है ओर उसके नदी जल तथा पनबिजली पर आँख गड़ाये हुए है।
  5. चारों तरफ स्थल भाग से घिरे हुए नेपाल को यह लगता है कि भारत उसको अपने भू-क्षेत्रों से होकर समुद्र तक पहुँचने से रोकता है।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 30 निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत – चीन सम्बन्धों के विषय में आप क्या जानते हैं ? उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
प्राचीन समय से ही भारत – चीन के सम्बन्ध घनिष्ठ रहे हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत व चीन का सम्बन्ध भारतीय नेताओं की अदूरदर्शिता, आदर्शवादिता एवं बुद्धिहीनता तथा चीन के विश्वासघात से परि पूर्ण मिलता है। भारत की । चीन सम्बन्धी नीति बहुत विचित्र रही है क्योंकि भारत ने यह जान लिया था कि चीन, भारत का परम मित्र है और उसके भारत के साथ सम्बन्ध सांस्कृतिक व व्यापारिक वृत्त में भ्रमण करते हैं। भारत – चीन सम्बन्धों का अध्ययन केवल मैत्री भाव व असंलग्नता की नीति पर आधारित न होकर मित्रता के उतार-चढ़ाव पर भी आधारित है। उपर्युक्त संदर्भ में भारत – चीन सम्बन्धों का अध्ययन निम्नांकित बिन्दुओं के अन्तर्गत किया जा सकता है

(क) भारत का दृष्टिकोण – भारत चीन के साथ प्रारम्भ से ही मित्रता की इच्छा व्यक्त करता रहा है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान नेहरू जी ने स्पष्ट किया था “चीन, भारत से सदैव मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध रखेगा। चीन में जब माओत्से – तुंग के नेतृत्व में साम्यवादी शासन की स्थापना हुई तो भारत ने उसके साथ मैत्रीपूर्ण सम्बन्धों को और भी सुदृढ़ किया ।” सन् 1947 से 1959 ई. तक भारत व चीन के सम्बन्ध मैत्रीपूर्ण रहने के निम्नांकित कारण थे

  1. भारत द्वारा साम्यवादी चीन को मान्यता प्रदान करना।
  2. चीन को संयुक्त राष्ट्र संघ की सदस्यता दिलाने में भारत की भूमिका।
  3. पंचशील के सिद्धान्तों में दोनों देशों की सहमति
  4. कोरिया के प्रश्न पर सहयोग।

(ख) तिब्बत पर भारतीय नीति-सदियों से चीन, तिब्बत पर अपने अधिकार की चर्चा कर रहा था। जब चीन में साम्यवादी सरकार स्थापित हुई तब उसने तिब्बत पर अपना अधिकार घोषित कर दिया। 1950 ई. में चीन सरकार ने तिब्बत पर नियंत्रण स्थापित कर लिया। भारत ने चीनी सरकार से वार्तालाप भी किया। इसके अनुसार भारत ने तिब्बत में चीन का अधिकार स्वीकार कर लिया, जो भारत की एक बड़ी भूल थी। चीन ने तिब्बत पर अपनी सार्वभौमिकता स्थापित कर ली। इस प्रकार सन् 1956 तक भारत तथा चीन के सम्बन्ध मधुर रहे।

(ग) चीन का भारत के प्रति कटु व्यवहार-सन् 1956 ई. में तिब्बत के खम्पा क्षेत्र में चीनी शासन के विरुद्ध विद्रोह हो गया। यह विद्रोह सन् 1959 ई. तक चला। चीन सरकार ने इसे कठोरता से कुचल दिया। 31 मार्च सन् 1959 ई. को दलाई लामा ने अपने कुछ साथियों के साथ भारत में राजनीतिक शरण ली। उसके बाद लाखों तिब्बती शरणार्थियों ने हिमाचल प्रदेश व मसूरी में शरण ली। चीन की सरकार द्वारा भारत सरकार पर दोषारोपण किया गया कि भारत ने शत्रुतापूर्ण कार्य किया है और इस प्रकार चीन तथा भारत के सम्बन्ध कटुतापूर्ण हो गये।

(घ) चीन का विश्वासघाती कदम – भारत ने अपनी शान्तिपूर्ण नीति का प्रदर्शन करते हुए 10 मई, 1962 ई. को चीन के समक्ष सीमा सम्बन्धी प्रश्न का समाधान करने का प्रस्ताव रखा लेकिन चीन ने उसकी अवहेलना करते हुए 20 अक्टूबर को भारत पर आक्रमण कर दिया जबकि भारत युद्ध के लिए तैयार नहीं था।

(ङ) भारत के प्रति उपेक्षापूर्ण दृष्टिकोण – सन् 1965 में भारत व पाकिस्तान के मध्य युद्ध प्रारम्भ हुआ। उस समय चीन ने पाकिस्तान के समर्थन में कई बातें कहीं। उसने भारत को आक्रमणकारी घोषित किया। भारत को चीन ने चेतावनी भी दी कि वह सिक्किम की सीमा पर निर्माण कार्य को स्थगित कर दे। भारत ने चीन की इस चेतावनी की चिन्ता नहीं की क्योंकि भारत का पक्ष न्याययुक्त था। अंतत: चीन ने अपनी चेतावनी के प्रति चुप्पी साध ली और सन् 1971 ई. में संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ मिलकर संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत विरोधी प्रस्ताव पारित करके भारत को आक्रमणकारी घोषित करवाया।

(च) परिवर्तित स्थिति में भारत-चीन सम्बन्ध- भारत व चीन एशिया महाद्वीप की दो बड़ी शक्तियाँ हैं। दोनों देशों के सम्बन्ध लगभग 25 वर्षों से सौहार्दपूर्ण नहीं रहे हैं। दोनों देश, विशेषकर भारत ने बीजिंग से सम्बन्ध सुधारने की पहल की, परन्तु चीन के नेताओं ने भारत के पत्रकारों के सामने एक सुझाव रखा कि यदि भारत लद्दाख के क्षेत्र में चीनी दावे को स्वीकार कर ले, तो पूर्वी संभाग में वह वर्तमान नियंत्रण रेखा को अन्तर्राष्ट्रीय सीमा मान लेगा, लेकिन भारत ने चीन की यह शर्त स्वीकार नहीं की। 20 नवम्बर, 2006 ई. को चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ ने भारत की यात्रा की। चीनी राष्ट्रपति का

भारत दौरा दोनों देशों के अच्छे सम्बन्ध बनाने में सहायक हुआ। पर्यटन के जरिए सन् 2007 को भारत-चीन मैत्री वर्ष के रूप में मनाया गया। हू जिंताओ ने भारत व चीन के मध्य आर्थिक सहयोग संवर्द्धन हेतु एक नए पंचशील का आह्वान किया तथा इसके पाँच सूत्रों का पालन करने की बात की गयी जिससे भारत – चीन सम्बन्धों में सुधार होकर मित्रता हो सके।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार आने के पश्चात् 17 सितम्बर 2014 को चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग भारत यात्रा पर आए और 12 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। 14 से 16 मई 2015 के मध्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन की यात्रा कर 10 अरब डालर के 24 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। धीरे-धीरे भारत व चीन के सम्बन्धों में सुधार हो रहा है। यदि भारत और चीन का सीमा समझौता हो जाए तो नि:संदेह अंतर्राष्ट्रीय राजनीति व क्षेत्रीय राजनीति पर इसका दूरगामी प्रभाव होगा।

प्रश्न 2.
भारत के पड़ोसी देशों के साथ सम्बन्धों (विशेष रूप से पाकिस्तान, चीन व नेपाल के सन्दर्भ में) पर एक लेख लिखिए।
उत्तर:
भारत के अपने पड़ोसी देशों विशेषकर पाकिस्तान, चीन व नेपाल के साथ संबंध अत्यन्त संवेदनशील बने हुए हैं। यद्यपि भारत की विदेश नीति का मूल तत्व है कि पड़ोसी देशों के साथ सद्भाव, शान्ति और मैत्रीपूर्ण संबंध रखे जायें किन्तु कहा जाता है कि मैत्रीपूर्ण संबंधों का निर्वहन करने के लिये दोनों पक्षों की परस्पर सहमति और सद् इच्छा का होना
आवश्यक है। इस दृष्टि से भारत अपनी सीमाओं से सटे पड़ोसियों के साथ सौहार्दपूर्ण सम्बन्धों का समर्थक तो अवश्य है।

किन्तु अपनी सीमाओं में घुसपैठ, अतिक्रमण और देश के अन्दरूनी मामलों में हस्तक्षेप की कीमत पर चुप नहीं बैठ सकता है। अतः जब कभी पड़ोसी राष्ट्र सीमाओं का अतिक्रमण करने लगते हैं तो भारत को जवाब देना पड़ता है। भारत व पाकिस्तान – सन् 1947 में देश के विभाजन के बाद भारत व पाकिस्तान दो राष्ट्र अस्तित्व में आये। स्वतन्त्रता के शीघ्र बाद पाकिस्तान द्वारा कश्मीर विवाद उठाया गया तथा इसी आधार पर युद्ध भी आरम्भ किंतु उसे हार का सामना करना पड़ा। उसके पश्चात् भी पाकिस्तान ने 1965 व 1971 में भारत के विरुद्ध युद्ध आरम्भ किये किन्तु दोनों बार उसे पराजय का मुंह देखना पड़ा।

1965 के युद्ध की समाप्ति पर ताशकंद समझौता 1966 तथा 1971 के युद्ध के बाद शिमला समझौता (1972) सम्पन्न हुआ। दोनों ही समझौतों का उद्देश्य दोनों देशों के मध्य शान्ति स्थापित करना था किन्तु इस दिशा में किये गये सभी प्रयास असफल रहे। पाकिस्तान ‘जेहाद’ (धर्मयुद्ध) के आधार पर भारत के विरुद्ध निरन्तर समस्यायें उत्पन्न कर रहा है। सीमावर्ती क्षेत्र में घुसपैठ व आतंकवादी कार्यवाइयाँ प्रतिदिन की बात हो गई है।

संक्षेप में कहा जा सकता है कि भारत व पाकिस्तान के मध्य कश्मीर की समस्या स्थायी रूप से बनी हुई है। इसके अतिरिक्त धार्मिक आधार पर गठित पाकिस्तान ने सदैव ही भारत के साथ वैमनस्यपूर्ण व्यवहार किया है। पाकिस्तानी सत्ता में जनता की सीधी भागीदारी कभी नहीं रही। सेना ने ही अधिकांश रूप से सत्ता सँभाली है। अशिक्षा, बेरोजगारी व गरीबी

के साए में पलता – बढ़ता पाकिस्तान सदैव से भारत के लिए सरदर्द रहा है। पाकिस्तान की आंतरिक एवं बाह्य परिस्थितियाँ दोनों ही भारत के लिए खतरे का पर्याय बनी हुई हैं। भारत व नेपाल-नेपाल हिमालय की पहाड़ियों में बसा भारत व चीन के मध्य एक सीमांत राज्य (बफर स्टेट) है। विश्व के एकमात्र हिन्दू राज्य नेपाल में वर्तमान में जनतान्त्रिक धर्मनिरपेक्ष शासन प्रणाली है।

नेपाल भारत व चीन दोनों देशों के साथ संबंध अच्छे रखना चाहता है। वस्तुत: उसकी स्थिति को देखते हुए यह तर्कसंगत भी है। चीन द्वारा तिब्बत पर कब्जा कर लेने के बाद नेपाल का भारत के लिए सामरिक महत्व और अधिक बढ़ गया है। आज भारत की सुरक्षा उत्तर की ओर नेपाल की सुरक्षा पर निर्भर करती है।

दोनों देशों की अदृश्य अन्तर्राष्ट्रीय सीमा कभी भी रोक – टोक वाली नहीं रही। नेपाल एकमात्र ऐसा विदेशी राष्ट्र है जिसके नागरिक भारतीय सेना में भर्ती किये जाते हैं।किन्तु यह दुर्भाग्य का विषय है कि वर्तमान में नेपाल का रवैया भारत के प्रति उग्र होता जा रहा है।

इसके मुख्य कारण हैं-1950 की भारत नेपाल सन्धि, नदी-जल विवाद, मुनाफाखोर भारतीय व्यापारी, भारत द्वारा नेपाल की राजशाही को समर्थन, नेपाली माओवादियों के प्रति भारत का दृष्टिकोण आदि। भारत को भी नेपाल से कुछ शिकायतें हैं जैसे कि नेपाल की भूमि में शरण लेने वाले तस्कर व आतंकवादी, नेपाल की चीन व पाकिस्तान से बढ़ती निकटता आदि।

इस संदर्भ में भारतीय दृष्टिकोण में कुछ परिवर्तन आना चाहिए हालाँकि चीन व पाकिस्तान को लेकर भारत की आशंकाएँ पूर्णतया निर्मूल नहीं हैं किन्तु यह भी सत्य है कि अतीत की यादों के आधार पर ही भावी संबंधों का निर्धारण नहीं किया जा सकता। परिवर्तित परिस्थितियों में दृष्टिकोण में परिवर्तन लाना अति आवश्यक है।

भारत व चीन -1950 के दशक में भारत – चीन संबंध अत्यन्त सौहार्दपूर्ण थे किन्तु 1962 में चीन के द्वारा किये गए आकस्मिक आक्रमण ने भारत के प्रति चीन के इरादों को स्पष्ट कर दिया है। भारत व चीन के मध्य सीमा रेखा के रूप में मैकमोहन रेखा को चीन ने कभी स्वीकार नहीं किया। दोनों देशों के मध्य अन्य विवादास्पद मुद्दे रहे हैं – नदी जल विवाद, तिब्बत का मामला, चीन की विस्तारवादी नीति, रस्म अदायगी के लिए समझौते व संवाद आदि।

चीन ने जहाँ एक ओर नेपाल के साथ एवरेस्ट शिखर समझौता व काठमाण्डू – ल्हासा मार्ग समझौते किये वहीं वह पाकिस्तान व संयुक्त राज्य अमेरिका से भी आत्मीयता के संबंध बनाने में संलग्न है। इतना ही नहीं पाकिस्तान व चीन दोनों ने ही भारत के पड़ोसी राष्ट्रों से विभिन्न सैनिक व कूटनीतिक संबंध स्थापित करके भारत की घेराबन्दी करने का अभियान चलाया हुआ है। वर्तमान परिस्थितियों में भारत को अपनी विदेश नीति में कुछ संशोधन करने की आवश्यकता है और निस्संदेह वह ऐसा कर भी रहा है। प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पाकिस्तान के प्रति अपनाया गया सख्त रवैया इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।

प्रश्न 3.
नेपाल में लोकतंत्र की स्थापना किस प्रकार हुई?इसका विस्तार से वर्णन कीजिए?
उत्तर:
नेपाल में लोकतंत्र की स्थापना- नेपाल हिमालय की पहाड़ियों में बसा हुआ एक छोटा-सा देश है। भारत व चीन के मध्य एक सीमांतराज्य (बफर स्टेट) है। यह विश्व का एकमात्र हिन्दू राज्य था। वर्तमान में यहाँ जनतांत्रिक धर्म निरपेक्ष शासन प्रणाली है।। नेपाल में लोकतंत्र की स्थापना का वर्णन निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत प्रस्तुत हैं|

(i) नेपाल में संवैधानिक राजतन्त्र नेपाल में बहुत लम्बे समय तक संवैधानिक राजतंत्र रहा है। संवैधानिक राजतंत्र के दौर में नेपाल के राजनीतिक दलों एवं आम जनता ने उत्तरदायी शासन की माँग की लेकिन राजा ने सेना की सहायता से शासन पर पूरा नियंत्रण स्थापित कर लिया। इस तरह नेपाल में लोकतंत्र की राह अवरुद्ध हो गयी।

(ii) लोकतंत्र समर्थक आन्दोलन एवं संवैधानिक लोकतन्त्र की स्थापना-नेपाल में सन् 1990 ई. में लोकतांत्रिक संविधान की माँग मान ली गई। इस प्रकार नेपाल में सन् 1990 ई. में लोकतांत्रिक सरकार का गठन हुआ। नेपाल में लोकतांत्रिक सरकारों का कार्यकाल बहुत छोटा एवं समस्याओं से भरा रहा।

(iii) माओवादियों का शासन के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष-सन् 1990 के दशक में नेपाल के माओवादियों ने नेपाल के अनेक हिस्सों में अपना नियन्त्रण स्थापित कर लिया। माओवादी राजा एवं सत्ताधारी लोगों के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह करना चाहते थे। इस कारण राजा की सेना तथा माओवादी गुरिल्लों के मध्य हिंसक लड़ाई छिड़ गई। हिंसक घटनाओं में लगभग 20 हजार से अधिक लोक पिछले डेढ़ दशक में मारे गए।

(iv) संवैधानिक लोकतंत्र की समाप्ति – नेपाल में राजा की सेना, लोकतन्त्र समर्थकों तथा माओवादियों के बीच त्रिकोणीय संघर्ष हुआ फलस्वरुप सन् 2002 में राजा ने संसद को भंग कर दिया एवं सरकार को गिरा दिया। 1 फरवरी 2005 को नरेश ने नेपाल में आपातकाल लागू कर लोकतंत्र का विध्वंस करते हुए पूर्ण राजशाही स्थापित कर दी।

(v) लोकतन्त्र की बहाली – अप्रैल 2006 में नेपाल में देशव्यापी लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शन हुए। नेपाल में लोकतंत्र बहाली के लिए बढ़ते अन्तर्राष्ट्रीय दबाव एवं राजशाही के विरुद्ध प्रबल जन आन्दोलन के आगे झुकते हुए राजा ज्ञानेन्द्र को 24 अप्रैल 2006 को पूरानी संसद को बहाल करने की घोषणा करनी पड़ी।

(i) माओवादियों के संघर्ष की समाप्ति-नेपाल में 11 वर्षों से चला आ रहा माओवादियों का सशस्त्र संघर्ष 21 नवम्बर 2006 को तब समाप्त हो गया, जब राजनीतिक दलों की अंतरिम सरकार के साथ माओवादियों ने समग्र शान्ति समझौते पर हस्ताक्षर कर दिये। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि नेपाल नरेश के सभी अधिकार समाप्त हो जायेंगे एवं शाही महल से जुड़ी समस्त सम्पत्ति सरकार की होगी। भारत ने समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार एवं माओवादियों के मध्य हुई इस सन्धि से नेपाल शान्ति एवं लोकतन्त्र के मार्ग पर आगे बढ़ सकेगा।

(vii) राजशाही की पूर्णतः समाप्ति और संविधान सभा द्वारा लोकतान्त्रिक गणराज्य की घोषणा–नेपाल में विगत 240 वर्ष से चली आ रही राजशाही 28 मई 2008 को समाप्त हो गई एवं नव निर्वाचित संविधान सभा ने देश को धर्म निरपेक्ष संघीय लोकतान्त्रिक गणराज्य घोषित किया। संविधान सभा के इस निर्णय से नेपाल के महाराज का दर्जा आम नागरिकों के समान हो गया।