Rajasthan Board RBSE Class 12 Home Science Chapter 10 आहार-आयोजन की प्रक्रिया

RBSE Class 12 Home Science Chapter 10 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से सही उत्तर चुनें –
(i) खाद्य पदार्थ की कम – से – कम मात्रा जो हमें उस खाद्य पर आधारित व्यंजन बनाने के लिए चाहिये, है –
(अ) भोज्य समूह
(ब) खाद्य पदार्थ
(स) सन्दर्भ इकाई
(द) माप
उत्तर:
(स) सन्दर्भ इकाई

(ii) हरी पत्तेदार सब्जियों की प्रति सन्दर्भ इकाई मात्रा है –
(अ) 50 ग्राम
(ब) 200 ग्राम
(स) 100 ग्राम
(द) इनमें से कोई भी नहीं
उत्तर:
(ब) 200 ग्राम

(iii) चार परिवार की किशोर बालिकाएँ प्रतिदिन एक गिलास दूध पीती हैं जिसकी मात्रा होगी –
(अ) असमान
(ब) निश्चित
(स) समान
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(अ) असमान

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
1. आहार-आयोजन पूरे दिन को एक………मानकर करना चाहिये।
2. आहार में विभिन्नता लाने के लिए विविध भोज्य पदार्थों का चुनाव………से करना चाहिये।
3. अपने परिवार के लिए सन्तुलित आहार का आयोजन करने के लिए हमें………का प्रयोग करना चाहिये।
4. आहार-आयोजन के………एवं प्रभावित करने वाले………को ध्यान में रखते हुए आहार आयोजन करना चाहिये।
5. सस्ते व उपलब्ध भोज्य पदार्थों का चयन कर हम कम………में भी सन्तुलित आहार का आयोजन कर सकते हैं।

उत्तर:
1. इकाई
2. भोज्य समूह
3. संदर्भ इकाई
4. सिद्धान्त, कारकों
5. आय।

प्रश्न 3.
निम्न सिद्धान्तों का आहार – योजना में महत्त्व समझाइये।
1. आहार समय
2. पोषणिक आवश्यकताएँ
3. भोजन की स्वीकार्यता।
उत्तर:
1. आहार समय – आहार – आयोजन में आहार – समय का अति महत्त्वपूर्ण स्थान है। एक दिन में मुख्यतः 3 – 4 आहार की योजना बनाई जाती है, लेकिन व्यक्ति विशेष एवं परिवार के सदस्यों की आवश्यकता व आदतों के अनुरूप दिनभर में दिये जाने वाले आहारों की संख्या घटाई या बढ़ाई जा सकती है।

प्रत्येक आहार के मध्य कम – से – कम 2 से 3 घंटों का अंतर होना चाहिए। प्रथम आहार का समय प्रातः 7 बजे से प्रारम्भ करके अंतिम आहार रात्रि 8-9 बजे के मध्य होना चाहिए। रात्रि में यदि अंतिम आहार देर से लेना हो तो भोजन हल्का होना चाहिए जिससे पाचन सम्बन्धी समस्याएँ पैदा न हों।

2. पोषणिक आवश्यकताएँ:
परिवार के सभी सदस्यों की पोषण सम्बन्धी आवश्यकताओं की पूर्ति करना आहार-आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धान्त है। प्रत्येक सदस्य की पोषणिक आवश्यकताएँ उसके लिंग, आयु, शारीरिक स्थिति व श्रम पर निर्भर करती हैं। गृहिणी एक ही भोजन में सदस्यों की आवश्यकतानुसार भोज्य पदार्थों की मात्रा कम अथवा ज्यादा कर या व्यंजन में परिवर्तन कर संतुलित आहार बना सकती हैं, जैसे –किशोरों को सादे पराठे के स्थान पर भरवाँ पराठे (दाल वाले) एवं बच्चों को दूध के स्थान पर दही, मट्ठा, खीर, कस्टर्ड आदि देकर उनकी पोषक तत्त्वों की आवश्यकता की पूर्ति की जा सकती है।

छोटे बच्चों एवं शिशुओं के आहार में दूध की मात्रा सर्वाधिक होती है, जबकि किशोरावस्था में अधिक प्रोटीनयुक्त पदार्थ, जैसे-दालें, अण्डे, माँस, मछली आदि भोज्य पदार्थों की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार वृद्धावस्था में सुरक्षा प्रदान करने वाले भोज्य पदार्थ एवं स्वास्थ्य को बढ़ाने वाले भोज्य पदार्थों; जैसे – ताजे फल एवं हरी सब्जियों की अधिक आवश्यकता होती है। इसी प्रकार, परिवार की गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली महिलाओं एवं रोगी व्यक्तियों की भोजन तथा पोषण सम्बन्धी आवश्यकताएँ सामान्य अवस्था वाले व्यक्तियों से भिन्न होती हैं।

3. भोजन की स्वीकार्यता:
आहार – आयोजन करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि आहार – योजना में भोज्य पदार्थों का चयन एवं जो भोज्य पदार्थ पकाए गये हैं, वे सदस्यों की रुचि के अनुकूल, स्वादिष्ट एवं आकर्षक रूप से परोसे एवं पकाए गए हों अन्यथा आहार – आयोजन की सम्पूर्ण मानसिक एवं शारीरिक प्रक्रिया तथा समय एवं शक्ति सभी व्यर्थ है।

जैसे – दालों व हरी सब्जियों को पराठे व पकोड़े के रूप में बना देने पर बच्चे रुचि के अनुसार प्रयोग करते हैं। भोजन परोसते समय भी कम अथवा अधिक मात्रा का ध्यान रखना चाहिए; यथा – अत्यधिक कम मात्रा में भोज्य पदार्थ परोसने पर संतुष्टि नहीं होती है। एवं अधिक मात्रा में परोसने पर भूख समाप्त हो जाती है।

प्रश्न 4.
संदर्भ इकाई किसे कहते हैं तथा इसका आहार – आयोजन में क्या महत्त्व है?
उत्तर:
संदर्भ इकाई से अभिप्राय खाद्य पदार्थ की उस कम-से-कम मात्रा से है जिसकी हमें उस खाद्य पर आधारित व्यंजन बनाने के लिए आवश्यकता होती है। पोषणिक आवश्यकताओं के अनुरूप संतुलित आहार उपलब्ध कराने तथा सीमित साधनों द्वारा अपने स्वयं व अपने परिवार के लिए संतुलित आहार का आयोजन करने के लिए हमें संदर्भ इकाई का उपयोग । करना चाहिए। सन्दर्भ इकाई की सहायता से हम स्वयं अपने लिए संतुलित आहार का आयोजन कर सकते हैं।

आहार – आयोजन के लिए कच्चे खाद्य पदार्थों की एक संदर्भ इकाई की मात्राएँ निम्नानुसार हैं –
RBSE Solutions for Class 12 Home Science Chapter 10 आहार-आयोजन की प्रक्रिया
सन्दर्भ इकाई का आहार – आयोजन में महत्त्व:

  • सन्दर्भ इकाई की सहायता से भोज्य पदार्थों को बिना तौले या मापे घर में उपलब्ध किसी भी बर्तन में भरे जाने वाले विभिन्न भोज्य पदार्थों की मात्रा का अनुमान लगाकर संतुलित आहार का आयोजन कर सकते हैं।
  • न केवल विद्यार्थी अपितु कम पढ़ी-लिखी अथवा अनपढ़ गृहिणी भी सन्दर्भ इकाई द्वारा सुगमतापूर्वक आहार – आयोजन कर सकती है।
  • सस्ते भोज्य पदार्थों द्वारा भी आहार को संतुलित किया जा सकता है।
  • परिवार की आय एवं पारिवारिक सदस्यों की रुचि के अनुसार गृहिणी भोज्य समूहों में से विभिन्न भोज्य पदार्थों का आसानी से चयन कर संतुलित भोजन बना सकती है।
  • सन्दर्भ इकाई की सहायता से गृहिणी परिवार के प्रत्येक सदस्य की रुचि का ध्यान रखते हुए पोषणिक आवश्यकताओं के अनुरूप आहार-आयोजन सुगमता से कर सकती है।

प्रश्न 5.
एक कुशल गृहिणी के रूप में आप अपने घर का आहार-आयोजन कैसे करेंगी? समझाइए।
उत्तर:
एक कुशल गृहिणी द्वारा अपने स्तर से परिवार में आहार – आयोजन की प्रक्रिया की जाती है। आहार-आयोजन द्वारा ही कुछ गृहिणियाँ गृह से सम्बन्धित राशन महीने भर पहले खरीद लेती हैं; कुछ गृहिणियाँ आयोजनानुसार फल एवं सब्जी सप्ताह भर के लिए पहले से खरीद लेती हैं तथा अगले दिन सुबह से शाम तक के भोजन के लिए सोच लेती हैं अथवा सुबह के बाद शाम के समय के भोजन के लिए सब्जी काटकर अथवा दाल भिगोकर रखती हैं।

एक कुशल गृहिणी के रूप में आहार – आयोजन करते समय निम्न बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए –

1. गृहिणी को आहार – आयोजन पूरे दिन को एक इकाई मानकर करना चाहिए।

2. गृहिणी परिवार के सदस्यों की आवश्यकता, रुचि एवं आदतों के अनुरूप दिनभर में दिये जाने वाले आहारों की संख्या को घटा अथवा बढ़ा सकती है।

3. आहार – आयोजन करते समय गृहिणी को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि प्रत्येक आहार के मध्य 2 से 3 घंटे का अंतराल रहे तथा प्रथम आहार प्रातः 7 बजे से प्रारम्भ करके अंतिम आहार रात्रि 8 – 9 बजे के मध्य रखना चाहिए।

4. रात्रि में अंतिम आहार 8 – 9 बजे के बाद लेने की आदत हो, तो गृहिणी को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि रात्रि का यह भोजन हल्का हो जिससे पाचन सम्बन्धी समस्या उत्पन्न न हो।

5. भोज्य पदार्थों की मात्रा सदस्यों की पोषणिक आवश्यकताओं के अनुरूप होनी चाहिए, इस ओर कुशल गृहिणी को आहार-आयोजन के समय विशेष ध्यान रखना चाहिए।

6. भोजन बनाने हेतु गृहिणी को खाद्य पदार्थों की मात्रा का अनुमान अवश्य लगा लेना चाहिए। जैसे-रोटी बनाने के लिए कुछ गृहिणियाँ मुट्ठी भरकर गिनती हुई आटा लेती हैं अथवा कटोरी / कप / गिलास द्वारा मात्रा का अनुमान लगाती हैं। इसी प्रकार दाल अथवा चावल बनाते समय कटोरी / गिलास से मात्रा का अनुमान लगा लेना चाहिए।

7. कुशल गृहिणी को आहार – आयोजन के समय भोजन परोसे जाने वाले बर्तनों की ओर भी ध्यान देना चाहिए। जैसे – घर में बड़े व वयस्क सदस्यों को बड़ी कटोरी / गिलास / कप में एवं छोटे बच्चों को छोटी – छोटी कटोरियों एवं गिलास में ही भोजन परोसना चाहिए।

8. एक कुशल गृहिणी को आहार – आयोजन करते समय परिवार के प्रत्येक सदस्य को उसकी पोषणिक आवश्यकताओं के अनुरूप संतुलित आहार उपलब्ध कराने तथा सीमित साधनों द्वारा परिवार के लिए संतुलित आहार का आयोजन करने हेतु संदर्भ इकाई का उपयोग करना चाहिए।

RBSE Class 12 Home Science Chapter 10 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Home Science Chapter 10 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
आहार आयोजन बनाने से होती है –
(अ) धन की बचत
(ब) समय की बचत
(स) शक्ति की बचत
(द) इन तीनों की बचत
उत्तर:
(द) इन तीनों की बचत

प्रश्न 2.
प्रथम आहार का समय होना चाहिये –
(अ) सुबह 7 बजे
(ब) सुबह 8 बजे
(स) सुबह 6 बजे
(द) सुबह 9 बजे
उत्तर:
(अ) सुबह 7 बजे

प्रश्न 3.
फलों की प्रति संदर्भ इकाई मात्रा है –
(अ) 50 ग्राम
(ब) 100 ग्राम
(स) 200 ग्राम
(द) 150 ग्राम
उत्तर:
(ब) 100 ग्राम

प्रश्न 4.
एक किशोरी के लिये संतुलित आहार में दाल की संदर्भ इकाई मात्रा कितने ग्राम होनी चाहिए –
(अ) 40 ग्राम
(ब) 50 ग्राम
(स) 20 ग्राम
(द) 30 ग्राम
उत्तर:
(द) 30 ग्राम

प्रश्न 5.
एक सामान्य आकार व मोटाई की रोटी कितने ग्राम आटे की बनी होती है –
(अ) 40 ग्राम
(ब) 50 ग्राम
(स) 30 ग्राम
(द) 20 ग्राम
उत्तर:
(स) 30 ग्राम

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
1. प्रत्येक आहार के मध्य कम-से-कम…………से…………घंटों को अन्तराल होना चाहिए।
2. किसी भी प्रकार की सब्जी के लिये कम-से-कम…………कच्ची सब्जी की आवश्यकता होती है।
3. छोटी किशोरी की मुख्यतः ऊर्जा सम्बन्धी…………कम होती है।
4. हमारी आहार-योजना सामान्यतः…………ही होनी चाहिए।
5. एक…………योजना एक दिन के लिये नमूनामात्र है।
6. दूध, दालें, फल व सब्जियाँ…………वे सुरक्षात्मक भोज्य पदार्थ हैं।

उत्तर:
1. 2, 3
2. 100 ग्राम
3. आवश्यकताएँ
4. सन्तुलित
5. आहार
6. वृद्धिकारक।

RBSE Class 12 Home Science Chapter 10 अति लघूत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सन्तुलित आहार किसे कहते हैं?
उत्तर:
जिस आहार में सभी पौष्टिक तत्त्व उचित व आवश्यक मात्रा में उपस्थित रहते हैं, उसे सन्तुलित आहार कहते हैं।

प्रश्न 2.
दिनभर के प्रत्येक आहार के मध्य कम-से-कम कितना अंतराल होना चाहिए?
उत्तर:
दिनभर के प्रत्येक आहार के मध्य कम-से-कम 2 – 3 घण्टे का अन्तर अवश्य होना चाहिए।

प्रश्न 3.
गृहिणी को विभिन्न भोज्य पदार्थों को मापने के लिए क्या करना चाहिए?
उत्तर:
गृहिणी को विभिन्न भोज्य पदार्थों को मापने के लिए घर में उपलब्ध किसी बर्तन; जैसे – गिलास, कटोरी, कप, चम्मच आदि का प्रयोग करना चाहिए।

प्रश्न 4.
सन्दर्भ इकाई किसे कहते हैं?
उत्तर:
खाद्य पदार्थ की उस कम – से – कम मात्रा को जो उस खाद्य पदार्थ पर आधारित व्यंजन बनाने के लिए। चाहिए सन्दर्भ इकाई कहते हैं।

प्रश्न 5.
फल की प्रति सन्दर्भ इकाई मात्रा कितनी होती है?
उत्तर:
फले की 100 ग्राम प्रति सन्दर्भ इकाई मात्रा होती है।

प्रश्न 6.
एक सामान्य वयस्क को परोसी जाने वाली सब्जी के लिए कच्ची सब्जी की मात्रा कितनी होनी चाहिए?
उत्तर:
एक सामान्य वयस्क को परोसी जाने वाली किसी भी सब्जी के लिए कम-से-कम 100 ग्राम कच्ची सब्जी की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 7.
सन्दर्भ इकाई का उपयोग करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
पोषणिक आवश्यकताओं के अनुसार, सीमित साधनों द्वारा परिवार के विभिन्न सदस्यों को सन्तुलित आहार प्रदान करने के लिए सन्दर्भ इकाई का उपयोग करना आवश्यक है।

प्रश्न 8.
भोजन में विविधता लाने हेतु क्या किया जा सकता है?
उत्तर:
भोजन में विविधता लाने हेतु एक ही खाद्य पदार्थ से कई प्रकार के व्यंजन बनाए जा सकते हैं; जैसे-अनाज से रोटी के साथ पूरी, पराठा, बाटी आदि।

प्रश्न 9.
आहार – आयोजन करते समय किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए?
उत्तर:
आहार – आयोजन करते समय, आहारआयोजन के सिद्धान्तों एवं प्रभावित करने वाले कारकों को ध्यान में रखना चाहिए।

प्रश्न 10.
रात्रि को आहार कैसा होना चाहिए?
उत्तर:
रात्रि का आहार हल्का तथा सुपाच्य होना चाहिए, ताकि पाचन संबंधी समस्याएँ उत्पन्न न हों।

प्रश्न 11.
दिन का अन्तिम आहार किस समय लेना चाहिए?
उत्तर:
दिन का अन्तिम आहार रात्रि 8-9 बजे के मध्य लेना चाहिए।

प्रश्न 12.
एक सामान्य अंडे व मध्य आकार के फल का भार कितना होता है?
उत्तर:
एक सामान्य अंडे व मध्यम आकार के फल का भार 50 ग्राम व 100 ग्राम होता है।

प्रश्न 13.
किशोरी के लिये संतुलित आहार में दूध की मात्रा कितनी होनी चाहिए?
उत्तर:
किशोरी के लिये संतुलित आहार में दूध की मात्रा 100 ग्राम संदर्भ इकाई होनी चाहिए।

प्रश्न 14.
एक माँसाहारी व्यक्ति 30 ग्राम दाल के स्थान पर कितने ग्राम अंडा / मॉस / मछली आदि की एक इकाई का सेवन कर सकते हैं?
उत्तर:
50 ग्राम अण्डा / माँस / मछली आदि की एक इकाई का सेवन कर सकते हैं।

प्रश्न 15.
वृद्धिकारक एवं सुरक्षात्मक भोज्य पदार्थों के नाम लिखिए।
उत्तर:
दूध, दालें, फल व सब्जियाँ, माँस, अंडा व मछली वृद्धिकारक व सुरक्षात्मक खाद्य पदार्थ होते हैं।

RBSE Class 12 Home Science Chapter 10 लघूत्तरीय प्रश्न (SA-I)

प्रश्न 1.
आहार – आयोजन में सन्दर्भ इकाई का प्रयोग किया जाना क्यों आवश्यक है? उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर:
सन्दर्भ इकाई द्वारा व्यंजन में आवश्यक खाद्य पदार्थ की मात्रा बनी रहती है। जैसे – यदि हम आम भाषा जैसे दो रोटी, एक कटोरी दाल, 1 / 2 कप रायता, एक प्लेट चावल आदि के रूप में आहार योजना बनाएँ तो ऐसी योजना के फलस्वरूप खाये जाने वाले भोज्य पदार्थों की मात्रा दो परिवारों के सदस्यों के लिए अलग – अलग होगी, क्योंकि परिवार में भोज्य पदार्थों को मापने व परोसने में प्रयोग किए जाने वाले बर्तन या इकाई अलग – अलग होते हैं। अत: सन्दर्भ इकाई से इस समस्या को सुलझाया जा सकता है।

प्रश्न 2.
संदर्भ इकाई की सहायता से आहार – आयोजन के क्या लाभ हैं?
उत्तर:

  • संदर्भ इकाई की सहायता से छात्र – छात्राएँ ही नहीं, अपितु कम पढ़ी-लिखी गृहिणियाँ भी संतुलित आहार – आयोजन सरलता से कर सकती हैं।
  • भोज्य समूहों के अन्तर्गत विभिन्न प्रकार के भोज्य पदार्थ सम्मिलित हैं। अपनी आर्थिक स्थिति, रुचि, उपलब्धता आदि के अनुसार विविध भोज्य पदार्थों का चयन कर भोजन को संतुलित बनाया जा सकता है।
  • परिवार के सदस्यों की रुचि व आवश्यकतानुरूप आहार – आयोजन किया जा सकता है।
  • कम आय में भी आहार को आसानी से सन्तुलित कर सकते हैं।

RBSE Class 12 Home Science Chapter 10 लघूत्तरीय प्रश्न (SA-II)

प्रश्न 1.
सन्दर्भ इकाई क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
सन्दर्भ इकाई (Reference Portion):
खाद्य पदार्थ की उस कम – से – कम मात्रा को कहते हैं, जो उस खाद्य पदार्थ पर आधारित व्यंजन बनाने के लिए चाहिए। उदाहरणार्थ, एक सामान्य आकार व मोटाई की रोटी 30 ग्राम आटे से बनी होती है जो न तो बहुत छोटी न बड़ी होती है व न हीं पतली या मोटी। तीसे ग्राम सूखी दाल से पकी दाल एक मध्यम आकार वाली कटोरी को भर देती है, जिसे एक सामान्य व्यक्ति एक समय में आसानी से ग्रहण कर लेता है।

एक सामान्य व मध्यम आकार के फल का भार 50 ग्राम व 100 ग्राम होता है। इसी प्रकार एक व्यक्ति के लिए बनाये गये माँसाहारी व्यंजन जैसे-माँस, मछली आदि के लिए कम – से – कम 50 ग्राम कच्चे खाद्य की आवश्यकता होगी। इसी प्रकार एक सामान्य वयस्क को परोसी जाने वाली किसी भी प्रकार की सब्जी के लिए कम-से-कम 100 ग्राम कच्ची सब्जी की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 2.
एक किशोरी का आहार किस प्रकार सन्तुलित बनाया जा सकता है?
उत्तर:
एक किशोरी की प्रतिदिन की आहार योजना में सन्तुलन होना चाहिए। उदाहरण के लिए, किसी दिन अनाज की 10 इकाइयों की जगह 8-9 इकाइयाँ तो किसी दिन 11 – 12 इकाइयों का उपभोग भी कर सकते हैं। इसी प्रकार किसी दिन हरी पत्तेदार सब्जी बिल्कुल भी न खा सकें तो किसी दिन इसकी डेढ़ से दो गुनी मात्रा खाने में ली जा सकती है।

लेकिन ऐसा कोई परिवर्तन लम्बे समय तक (कमी या अधिकता की ओर) नहीं होना चाहिए। लम्बे समय तक ऊर्जादायक भोज्य पदार्थ जैसे मिठाइयों का सेवन अधिक मात्रा में मोटापे की ओर ले जाएगा तो वृद्धिकारक या सुरक्षात्मक भोज्य पदार्थ जैसे दालें, फल व सब्जियों में कमी होने पर शारीरिक वृद्धि में रुकावट या रोगग्रस्त होने की सम्भावनाएँ हो सकती हैं। अतः हमारी आहार योजना सन्तुलित भी होनी चाहिए।

RBSE Class 12 Home Science Chapter 10 निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
आहार-आयोजन करने से पूर्व उसके किन सिद्धान्तों एवं कारकों को ध्यान में रखना चाहिए?
उत्तर:
आहार-आयोजन से पूर्व निम्नलिखित सिद्धान्तों एवं कारकों को ध्यान में रखना चाहिए –

  • आहार-आयोजन पूरे दिन को एक इकाई मानकर करना चाहिए अर्थात् पूरे दिन के लिए दिए जाने वाले विभिन्न आहारों की योजना पहले ही बना लेनी चाहिए।
  • एक दिन में मुख्यतः 3 – 4 आहार की योजना बनाई जाती है। लेकिन व्यक्ति विशेष व परिवार के सदस्यों की आवश्यकता व आदतों के अनुरूप दिनभर में दिए जाने वाले आहारों की संख्या घटाई या बढ़ाई जा सकती है।
  • प्रत्येक आहार के मध्य कम – से – कम 2 से 3 घण्टों का अन्तराल होना चाहिए तथा प्रथम आहार का समय प्रात: 7 बजे से प्रारम्भ करके अन्तिम आहार रात्रि 8-9 बजे के मध्य कर लेना चाहिए। रात्रि में यदि आहार देने की आवश्यकता हो तो हल्का और सुपाच्य आहार दिया जाना चाहिए।
  • भोज्य पदार्थों का चुनाव एवं मात्रा सदस्यों की पोषणिक आवश्यकताओं के अनुरूप होनी चाहिए।
  • गृहिणी को आहार – आयोजन उपलब्ध समय, शक्ति व धन के अनुरूप एवं पारिवारिक सदस्यों की रुचि को ध्यान में रखकर करना चाहिए।

प्रश्न 2.
एक किशोरी के लिए आहार-आयोजन करते समय कुशल गृहिणी को किन विशेष बातों को ध्यान में रखना चाहिए?
उत्तर:
एक किशोरी के लिए आहार – आयोजन करते समय गृहिणी को यह ध्यान रखना चाहिए कि एक किशोरी के लिए दिनभर में विविध भोज्य पदार्थों की कितनी संदर्भ इकाइयाँ सम्मिलित करनी चाहिए, जिससे उसका आहार संतुलित हो सके। एक 13 से 16 वर्ष की किशोरी के लिए, ‘राष्ट्रीय पोषण संस्थान, हैदराबाद’ द्वारा दिनभर में आवश्यक विविध भोज्य पदार्थों की इकाई एवं कुल मात्रा अग्रानुसार प्रस्तावित की गई हैं –
किशोरी के लिए संतुलित आहार:
(13-16 वर्ष)
RBSE Solutions for Class 12 Home Science Chapter 10 आहार-आयोजन की प्रक्रिया
अण्डा / माँस / मछली का सेवन करने वाले दाल के स्थान पर 50 ग्राम माँसाहारी भोजन का सेवन कर सकते हैं। उपर्युक्त तालिका के आधार पर एक किशोरी के संतुलित आहार के लिए कुशल गृहिणी द्वारा विभिन्न भोज्य समूहों में से विभिन्न इकाइयों का चयन करना चाहिए। गृहिणी द्वारा किशोरियों की भोजन सम्बन्धी आदतों एवं भोजन के समयानुकूल भोज्य पदार्थ की विभिन्न इकाइयों को प्रतिदिन के विविध आहारों में रुचिकर व्यंजनों के रूप में सम्मिलित करना चाहिए। एक किशोरी के लिए गृहिणी तालिकानुसार आहार-आयोजन कर सकती है –
17-18 वर्ष की किशोरी के लिए आहार-योजना
RBSE Solutions for Class 12 Home Science Chapter 10 आहार-आयोजन की प्रक्रिया
उपरोक्त तालिका के आधार पर एक कुशल गृहिणी को किशोरी के भोजन का आयोजन करते समय निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए –

  1. भोज्य पदार्थों तथा व्यंजनों में परिवर्तन किया जा सकता है।
  2. भोजन में विविधता लाने हेतु एक ही खाद्य पदार्थ से कई प्रकार के व्यंजन भी बनाए जा सकते हैं; जैसे – अनाज से रोटी के साथ-साथ पूरी, पराठा, बाटी, उपमा इत्यादि बनाया जा सकता है।
  3. आहार – आयोजन करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि एक दिन के लिए आवश्यक समस्त पौष्टिक पदार्थों का समायोजन हो जाए।
  4. प्रत्येक व्यक्ति में व्यक्तिगत भिन्नता पाई जाती है। अत: किशोरियों के लिए भोजन का आयोजन करते समय उनकी उम्र, क्रियाशीलता तथा शारीरिक गठन को भी ध्यान में रखना चाहिए। उदाहरणार्थ, आयु के आधार पर किशोरियों की पोषणिक आवश्यकताएँ भिन्न-भिन्न होंगी।
  5. किशोरियों की आहार – योजना में लचीलापन होना चाहिए, किन्तु इस लचीलेपन में यह ध्यान रखना चाहिए कि यह कमी या अधिकता लम्बे समय के लिए न हो।
  6. किशोरियों की व्यक्तिगत पसंद व खुराक को भी ध्यान में रखना चाहिए।
  7. आहार – आयोजन में संतुलन होना चाहिए। अधिक शर्करा व वसायुक्त भोजन के सेवन से मोटापा बढ़ सकता है तथा पौष्टिक पदार्थों की कमी से कुपोषण तथा रोग होने की संभावना रहती है।
  8. यह आवश्यक नहीं है कि हम महँगे भोज्य पदार्थों का ही सेवन करें। इसके स्थान पर सस्ते तथा पौष्टिक भोज्य पदार्थों को भी सम्मिलित किया जा सकता है।

RBSE Class 12 Home Science Chapter 10 प्रयोगात्मक प्रश्न

I. भोज्य समूहों की संदर्भ इकाई
प्रश्न 1.
भोज्य पदार्थों की संदर्भ इकाई हेतु भोज्य समूह तथा भोज्य पदार्थों की तालिका का निर्माण करिए।
उत्तर:

प्रश्न 2.
घर में सामान्य तौर पर बनाए जाने वाली वस्तुओं की तालिका बनाइए तथा विषयाध्यापिका इसे प्रयोगशाला में छात्राओं द्वारा बनवाएँ।
उत्तर:
अग्र तालिका में व्यंजनों की माप हेतु प्रयुक्त की गई कटोरी तथा प्लेट की माप एक औसत कटोरी तथा प्लेट की है –
सामान्य व्यंजनों को बनाने हेतु कच्चे भोज्य पदार्थों की आवश्यकता एवं तैयार परोस मात्रा तालिका



अभ्यास – कार्य:
1. अध्यापिका छात्राओं की सहायता से उपर्युक्त व्यंजनों का प्रदर्शन करेंगी।
2. छात्राओं को अध्यापिका कच्चे भोज्य पदार्थ की संदर्भ इकाई द्वारा तैयार व्यंजन की तैयार परोस मात्रा का अनुभव देंगी।

Rajasthan Board RBSE Class 12 Home Science Chapter 10 आहार-आयोजन की प्रक्रिया

RBSE Class 12 Home Science Chapter 10 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से सही उत्तर चुनें –
(i) खाद्य पदार्थ की कम – से – कम मात्रा जो हमें उस खाद्य पर आधारित व्यंजन बनाने के लिए चाहिये, है –
(अ) भोज्य समूह
(ब) खाद्य पदार्थ
(स) सन्दर्भ इकाई
(द) माप
उत्तर:
(स) सन्दर्भ इकाई

(ii) हरी पत्तेदार सब्जियों की प्रति सन्दर्भ इकाई मात्रा है –
(अ) 50 ग्राम
(ब) 200 ग्राम
(स) 100 ग्राम
(द) इनमें से कोई भी नहीं
उत्तर:
(ब) 200 ग्राम

(iii) चार परिवार की किशोर बालिकाएँ प्रतिदिन एक गिलास दूध पीती हैं जिसकी मात्रा होगी –
(अ) असमान
(ब) निश्चित
(स) समान
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(अ) असमान

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
1. आहार-आयोजन पूरे दिन को एक………मानकर करना चाहिये।
2. आहार में विभिन्नता लाने के लिए विविध भोज्य पदार्थों का चुनाव………से करना चाहिये।
3. अपने परिवार के लिए सन्तुलित आहार का आयोजन करने के लिए हमें………का प्रयोग करना चाहिये।
4. आहार-आयोजन के………एवं प्रभावित करने वाले………को ध्यान में रखते हुए आहार आयोजन करना चाहिये।
5. सस्ते व उपलब्ध भोज्य पदार्थों का चयन कर हम कम………में भी सन्तुलित आहार का आयोजन कर सकते हैं।

उत्तर:
1. इकाई
2. भोज्य समूह
3. संदर्भ इकाई
4. सिद्धान्त, कारकों
5. आय।

प्रश्न 3.
निम्न सिद्धान्तों का आहार – योजना में महत्त्व समझाइये।
1. आहार समय
2. पोषणिक आवश्यकताएँ
3. भोजन की स्वीकार्यता।
उत्तर:
1. आहार समय – आहार – आयोजन में आहार – समय का अति महत्त्वपूर्ण स्थान है। एक दिन में मुख्यतः 3 – 4 आहार की योजना बनाई जाती है, लेकिन व्यक्ति विशेष एवं परिवार के सदस्यों की आवश्यकता व आदतों के अनुरूप दिनभर में दिये जाने वाले आहारों की संख्या घटाई या बढ़ाई जा सकती है।

प्रत्येक आहार के मध्य कम – से – कम 2 से 3 घंटों का अंतर होना चाहिए। प्रथम आहार का समय प्रातः 7 बजे से प्रारम्भ करके अंतिम आहार रात्रि 8-9 बजे के मध्य होना चाहिए। रात्रि में यदि अंतिम आहार देर से लेना हो तो भोजन हल्का होना चाहिए जिससे पाचन सम्बन्धी समस्याएँ पैदा न हों।

2. पोषणिक आवश्यकताएँ:
परिवार के सभी सदस्यों की पोषण सम्बन्धी आवश्यकताओं की पूर्ति करना आहार-आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धान्त है। प्रत्येक सदस्य की पोषणिक आवश्यकताएँ उसके लिंग, आयु, शारीरिक स्थिति व श्रम पर निर्भर करती हैं। गृहिणी एक ही भोजन में सदस्यों की आवश्यकतानुसार भोज्य पदार्थों की मात्रा कम अथवा ज्यादा कर या व्यंजन में परिवर्तन कर संतुलित आहार बना सकती हैं, जैसे –किशोरों को सादे पराठे के स्थान पर भरवाँ पराठे (दाल वाले) एवं बच्चों को दूध के स्थान पर दही, मट्ठा, खीर, कस्टर्ड आदि देकर उनकी पोषक तत्त्वों की आवश्यकता की पूर्ति की जा सकती है।

छोटे बच्चों एवं शिशुओं के आहार में दूध की मात्रा सर्वाधिक होती है, जबकि किशोरावस्था में अधिक प्रोटीनयुक्त पदार्थ, जैसे-दालें, अण्डे, माँस, मछली आदि भोज्य पदार्थों की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार वृद्धावस्था में सुरक्षा प्रदान करने वाले भोज्य पदार्थ एवं स्वास्थ्य को बढ़ाने वाले भोज्य पदार्थों; जैसे – ताजे फल एवं हरी सब्जियों की अधिक आवश्यकता होती है। इसी प्रकार, परिवार की गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली महिलाओं एवं रोगी व्यक्तियों की भोजन तथा पोषण सम्बन्धी आवश्यकताएँ सामान्य अवस्था वाले व्यक्तियों से भिन्न होती हैं।

3. भोजन की स्वीकार्यता:
आहार – आयोजन करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि आहार – योजना में भोज्य पदार्थों का चयन एवं जो भोज्य पदार्थ पकाए गये हैं, वे सदस्यों की रुचि के अनुकूल, स्वादिष्ट एवं आकर्षक रूप से परोसे एवं पकाए गए हों अन्यथा आहार – आयोजन की सम्पूर्ण मानसिक एवं शारीरिक प्रक्रिया तथा समय एवं शक्ति सभी व्यर्थ है।

जैसे – दालों व हरी सब्जियों को पराठे व पकोड़े के रूप में बना देने पर बच्चे रुचि के अनुसार प्रयोग करते हैं। भोजन परोसते समय भी कम अथवा अधिक मात्रा का ध्यान रखना चाहिए; यथा – अत्यधिक कम मात्रा में भोज्य पदार्थ परोसने पर संतुष्टि नहीं होती है। एवं अधिक मात्रा में परोसने पर भूख समाप्त हो जाती है।

प्रश्न 4.
संदर्भ इकाई किसे कहते हैं तथा इसका आहार – आयोजन में क्या महत्त्व है?
उत्तर:
संदर्भ इकाई से अभिप्राय खाद्य पदार्थ की उस कम-से-कम मात्रा से है जिसकी हमें उस खाद्य पर आधारित व्यंजन बनाने के लिए आवश्यकता होती है। पोषणिक आवश्यकताओं के अनुरूप संतुलित आहार उपलब्ध कराने तथा सीमित साधनों द्वारा अपने स्वयं व अपने परिवार के लिए संतुलित आहार का आयोजन करने के लिए हमें संदर्भ इकाई का उपयोग । करना चाहिए। सन्दर्भ इकाई की सहायता से हम स्वयं अपने लिए संतुलित आहार का आयोजन कर सकते हैं।

आहार – आयोजन के लिए कच्चे खाद्य पदार्थों की एक संदर्भ इकाई की मात्राएँ निम्नानुसार हैं –
RBSE Solutions for Class 12 Home Science Chapter 10 आहार-आयोजन की प्रक्रिया
सन्दर्भ इकाई का आहार – आयोजन में महत्त्व:

  • सन्दर्भ इकाई की सहायता से भोज्य पदार्थों को बिना तौले या मापे घर में उपलब्ध किसी भी बर्तन में भरे जाने वाले विभिन्न भोज्य पदार्थों की मात्रा का अनुमान लगाकर संतुलित आहार का आयोजन कर सकते हैं।
  • न केवल विद्यार्थी अपितु कम पढ़ी-लिखी अथवा अनपढ़ गृहिणी भी सन्दर्भ इकाई द्वारा सुगमतापूर्वक आहार – आयोजन कर सकती है।
  • सस्ते भोज्य पदार्थों द्वारा भी आहार को संतुलित किया जा सकता है।
  • परिवार की आय एवं पारिवारिक सदस्यों की रुचि के अनुसार गृहिणी भोज्य समूहों में से विभिन्न भोज्य पदार्थों का आसानी से चयन कर संतुलित भोजन बना सकती है।
  • सन्दर्भ इकाई की सहायता से गृहिणी परिवार के प्रत्येक सदस्य की रुचि का ध्यान रखते हुए पोषणिक आवश्यकताओं के अनुरूप आहार-आयोजन सुगमता से कर सकती है।

प्रश्न 5.
एक कुशल गृहिणी के रूप में आप अपने घर का आहार-आयोजन कैसे करेंगी? समझाइए।
उत्तर:
एक कुशल गृहिणी द्वारा अपने स्तर से परिवार में आहार – आयोजन की प्रक्रिया की जाती है। आहार-आयोजन द्वारा ही कुछ गृहिणियाँ गृह से सम्बन्धित राशन महीने भर पहले खरीद लेती हैं; कुछ गृहिणियाँ आयोजनानुसार फल एवं सब्जी सप्ताह भर के लिए पहले से खरीद लेती हैं तथा अगले दिन सुबह से शाम तक के भोजन के लिए सोच लेती हैं अथवा सुबह के बाद शाम के समय के भोजन के लिए सब्जी काटकर अथवा दाल भिगोकर रखती हैं।

एक कुशल गृहिणी के रूप में आहार – आयोजन करते समय निम्न बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए –

1. गृहिणी को आहार – आयोजन पूरे दिन को एक इकाई मानकर करना चाहिए।

2. गृहिणी परिवार के सदस्यों की आवश्यकता, रुचि एवं आदतों के अनुरूप दिनभर में दिये जाने वाले आहारों की संख्या को घटा अथवा बढ़ा सकती है।

3. आहार – आयोजन करते समय गृहिणी को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि प्रत्येक आहार के मध्य 2 से 3 घंटे का अंतराल रहे तथा प्रथम आहार प्रातः 7 बजे से प्रारम्भ करके अंतिम आहार रात्रि 8 – 9 बजे के मध्य रखना चाहिए।

4. रात्रि में अंतिम आहार 8 – 9 बजे के बाद लेने की आदत हो, तो गृहिणी को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि रात्रि का यह भोजन हल्का हो जिससे पाचन सम्बन्धी समस्या उत्पन्न न हो।

5. भोज्य पदार्थों की मात्रा सदस्यों की पोषणिक आवश्यकताओं के अनुरूप होनी चाहिए, इस ओर कुशल गृहिणी को आहार-आयोजन के समय विशेष ध्यान रखना चाहिए।

6. भोजन बनाने हेतु गृहिणी को खाद्य पदार्थों की मात्रा का अनुमान अवश्य लगा लेना चाहिए। जैसे-रोटी बनाने के लिए कुछ गृहिणियाँ मुट्ठी भरकर गिनती हुई आटा लेती हैं अथवा कटोरी / कप / गिलास द्वारा मात्रा का अनुमान लगाती हैं। इसी प्रकार दाल अथवा चावल बनाते समय कटोरी / गिलास से मात्रा का अनुमान लगा लेना चाहिए।

7. कुशल गृहिणी को आहार – आयोजन के समय भोजन परोसे जाने वाले बर्तनों की ओर भी ध्यान देना चाहिए। जैसे – घर में बड़े व वयस्क सदस्यों को बड़ी कटोरी / गिलास / कप में एवं छोटे बच्चों को छोटी – छोटी कटोरियों एवं गिलास में ही भोजन परोसना चाहिए।

8. एक कुशल गृहिणी को आहार – आयोजन करते समय परिवार के प्रत्येक सदस्य को उसकी पोषणिक आवश्यकताओं के अनुरूप संतुलित आहार उपलब्ध कराने तथा सीमित साधनों द्वारा परिवार के लिए संतुलित आहार का आयोजन करने हेतु संदर्भ इकाई का उपयोग करना चाहिए।

RBSE Class 12 Home Science Chapter 10 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Home Science Chapter 10 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
आहार आयोजन बनाने से होती है –
(अ) धन की बचत
(ब) समय की बचत
(स) शक्ति की बचत
(द) इन तीनों की बचत
उत्तर:
(द) इन तीनों की बचत

प्रश्न 2.
प्रथम आहार का समय होना चाहिये –
(अ) सुबह 7 बजे
(ब) सुबह 8 बजे
(स) सुबह 6 बजे
(द) सुबह 9 बजे
उत्तर:
(अ) सुबह 7 बजे

प्रश्न 3.
फलों की प्रति संदर्भ इकाई मात्रा है –
(अ) 50 ग्राम
(ब) 100 ग्राम
(स) 200 ग्राम
(द) 150 ग्राम
उत्तर:
(ब) 100 ग्राम

प्रश्न 4.
एक किशोरी के लिये संतुलित आहार में दाल की संदर्भ इकाई मात्रा कितने ग्राम होनी चाहिए –
(अ) 40 ग्राम
(ब) 50 ग्राम
(स) 20 ग्राम
(द) 30 ग्राम
उत्तर:
(द) 30 ग्राम

प्रश्न 5.
एक सामान्य आकार व मोटाई की रोटी कितने ग्राम आटे की बनी होती है –
(अ) 40 ग्राम
(ब) 50 ग्राम
(स) 30 ग्राम
(द) 20 ग्राम
उत्तर:
(स) 30 ग्राम

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
1. प्रत्येक आहार के मध्य कम-से-कम…………से…………घंटों को अन्तराल होना चाहिए।
2. किसी भी प्रकार की सब्जी के लिये कम-से-कम…………कच्ची सब्जी की आवश्यकता होती है।
3. छोटी किशोरी की मुख्यतः ऊर्जा सम्बन्धी…………कम होती है।
4. हमारी आहार-योजना सामान्यतः…………ही होनी चाहिए।
5. एक…………योजना एक दिन के लिये नमूनामात्र है।
6. दूध, दालें, फल व सब्जियाँ…………वे सुरक्षात्मक भोज्य पदार्थ हैं।

उत्तर:
1. 2, 3
2. 100 ग्राम
3. आवश्यकताएँ
4. सन्तुलित
5. आहार
6. वृद्धिकारक।

RBSE Class 12 Home Science Chapter 10 अति लघूत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सन्तुलित आहार किसे कहते हैं?
उत्तर:
जिस आहार में सभी पौष्टिक तत्त्व उचित व आवश्यक मात्रा में उपस्थित रहते हैं, उसे सन्तुलित आहार कहते हैं।

प्रश्न 2.
दिनभर के प्रत्येक आहार के मध्य कम-से-कम कितना अंतराल होना चाहिए?
उत्तर:
दिनभर के प्रत्येक आहार के मध्य कम-से-कम 2 – 3 घण्टे का अन्तर अवश्य होना चाहिए।

प्रश्न 3.
गृहिणी को विभिन्न भोज्य पदार्थों को मापने के लिए क्या करना चाहिए?
उत्तर:
गृहिणी को विभिन्न भोज्य पदार्थों को मापने के लिए घर में उपलब्ध किसी बर्तन; जैसे – गिलास, कटोरी, कप, चम्मच आदि का प्रयोग करना चाहिए।

प्रश्न 4.
सन्दर्भ इकाई किसे कहते हैं?
उत्तर:
खाद्य पदार्थ की उस कम – से – कम मात्रा को जो उस खाद्य पदार्थ पर आधारित व्यंजन बनाने के लिए। चाहिए सन्दर्भ इकाई कहते हैं।

प्रश्न 5.
फल की प्रति सन्दर्भ इकाई मात्रा कितनी होती है?
उत्तर:
फले की 100 ग्राम प्रति सन्दर्भ इकाई मात्रा होती है।

प्रश्न 6.
एक सामान्य वयस्क को परोसी जाने वाली सब्जी के लिए कच्ची सब्जी की मात्रा कितनी होनी चाहिए?
उत्तर:
एक सामान्य वयस्क को परोसी जाने वाली किसी भी सब्जी के लिए कम-से-कम 100 ग्राम कच्ची सब्जी की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 7.
सन्दर्भ इकाई का उपयोग करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
पोषणिक आवश्यकताओं के अनुसार, सीमित साधनों द्वारा परिवार के विभिन्न सदस्यों को सन्तुलित आहार प्रदान करने के लिए सन्दर्भ इकाई का उपयोग करना आवश्यक है।

प्रश्न 8.
भोजन में विविधता लाने हेतु क्या किया जा सकता है?
उत्तर:
भोजन में विविधता लाने हेतु एक ही खाद्य पदार्थ से कई प्रकार के व्यंजन बनाए जा सकते हैं; जैसे-अनाज से रोटी के साथ पूरी, पराठा, बाटी आदि।

प्रश्न 9.
आहार – आयोजन करते समय किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए?
उत्तर:
आहार – आयोजन करते समय, आहारआयोजन के सिद्धान्तों एवं प्रभावित करने वाले कारकों को ध्यान में रखना चाहिए।

प्रश्न 10.
रात्रि को आहार कैसा होना चाहिए?
उत्तर:
रात्रि का आहार हल्का तथा सुपाच्य होना चाहिए, ताकि पाचन संबंधी समस्याएँ उत्पन्न न हों।

प्रश्न 11.
दिन का अन्तिम आहार किस समय लेना चाहिए?
उत्तर:
दिन का अन्तिम आहार रात्रि 8-9 बजे के मध्य लेना चाहिए।

प्रश्न 12.
एक सामान्य अंडे व मध्य आकार के फल का भार कितना होता है?
उत्तर:
एक सामान्य अंडे व मध्यम आकार के फल का भार 50 ग्राम व 100 ग्राम होता है।

प्रश्न 13.
किशोरी के लिये संतुलित आहार में दूध की मात्रा कितनी होनी चाहिए?
उत्तर:
किशोरी के लिये संतुलित आहार में दूध की मात्रा 100 ग्राम संदर्भ इकाई होनी चाहिए।

प्रश्न 14.
एक माँसाहारी व्यक्ति 30 ग्राम दाल के स्थान पर कितने ग्राम अंडा / मॉस / मछली आदि की एक इकाई का सेवन कर सकते हैं?
उत्तर:
50 ग्राम अण्डा / माँस / मछली आदि की एक इकाई का सेवन कर सकते हैं।

प्रश्न 15.
वृद्धिकारक एवं सुरक्षात्मक भोज्य पदार्थों के नाम लिखिए।
उत्तर:
दूध, दालें, फल व सब्जियाँ, माँस, अंडा व मछली वृद्धिकारक व सुरक्षात्मक खाद्य पदार्थ होते हैं।

RBSE Class 12 Home Science Chapter 10 लघूत्तरीय प्रश्न (SA-I)

प्रश्न 1.
आहार – आयोजन में सन्दर्भ इकाई का प्रयोग किया जाना क्यों आवश्यक है? उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर:
सन्दर्भ इकाई द्वारा व्यंजन में आवश्यक खाद्य पदार्थ की मात्रा बनी रहती है। जैसे – यदि हम आम भाषा जैसे दो रोटी, एक कटोरी दाल, 1 / 2 कप रायता, एक प्लेट चावल आदि के रूप में आहार योजना बनाएँ तो ऐसी योजना के फलस्वरूप खाये जाने वाले भोज्य पदार्थों की मात्रा दो परिवारों के सदस्यों के लिए अलग – अलग होगी, क्योंकि परिवार में भोज्य पदार्थों को मापने व परोसने में प्रयोग किए जाने वाले बर्तन या इकाई अलग – अलग होते हैं। अत: सन्दर्भ इकाई से इस समस्या को सुलझाया जा सकता है।

प्रश्न 2.
संदर्भ इकाई की सहायता से आहार – आयोजन के क्या लाभ हैं?
उत्तर:

  • संदर्भ इकाई की सहायता से छात्र – छात्राएँ ही नहीं, अपितु कम पढ़ी-लिखी गृहिणियाँ भी संतुलित आहार – आयोजन सरलता से कर सकती हैं।
  • भोज्य समूहों के अन्तर्गत विभिन्न प्रकार के भोज्य पदार्थ सम्मिलित हैं। अपनी आर्थिक स्थिति, रुचि, उपलब्धता आदि के अनुसार विविध भोज्य पदार्थों का चयन कर भोजन को संतुलित बनाया जा सकता है।
  • परिवार के सदस्यों की रुचि व आवश्यकतानुरूप आहार – आयोजन किया जा सकता है।
  • कम आय में भी आहार को आसानी से सन्तुलित कर सकते हैं।

RBSE Class 12 Home Science Chapter 10 लघूत्तरीय प्रश्न (SA-II)

प्रश्न 1.
सन्दर्भ इकाई क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
सन्दर्भ इकाई (Reference Portion):
खाद्य पदार्थ की उस कम – से – कम मात्रा को कहते हैं, जो उस खाद्य पदार्थ पर आधारित व्यंजन बनाने के लिए चाहिए। उदाहरणार्थ, एक सामान्य आकार व मोटाई की रोटी 30 ग्राम आटे से बनी होती है जो न तो बहुत छोटी न बड़ी होती है व न हीं पतली या मोटी। तीसे ग्राम सूखी दाल से पकी दाल एक मध्यम आकार वाली कटोरी को भर देती है, जिसे एक सामान्य व्यक्ति एक समय में आसानी से ग्रहण कर लेता है।

एक सामान्य व मध्यम आकार के फल का भार 50 ग्राम व 100 ग्राम होता है। इसी प्रकार एक व्यक्ति के लिए बनाये गये माँसाहारी व्यंजन जैसे-माँस, मछली आदि के लिए कम – से – कम 50 ग्राम कच्चे खाद्य की आवश्यकता होगी। इसी प्रकार एक सामान्य वयस्क को परोसी जाने वाली किसी भी प्रकार की सब्जी के लिए कम-से-कम 100 ग्राम कच्ची सब्जी की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 2.
एक किशोरी का आहार किस प्रकार सन्तुलित बनाया जा सकता है?
उत्तर:
एक किशोरी की प्रतिदिन की आहार योजना में सन्तुलन होना चाहिए। उदाहरण के लिए, किसी दिन अनाज की 10 इकाइयों की जगह 8-9 इकाइयाँ तो किसी दिन 11 – 12 इकाइयों का उपभोग भी कर सकते हैं। इसी प्रकार किसी दिन हरी पत्तेदार सब्जी बिल्कुल भी न खा सकें तो किसी दिन इसकी डेढ़ से दो गुनी मात्रा खाने में ली जा सकती है।

लेकिन ऐसा कोई परिवर्तन लम्बे समय तक (कमी या अधिकता की ओर) नहीं होना चाहिए। लम्बे समय तक ऊर्जादायक भोज्य पदार्थ जैसे मिठाइयों का सेवन अधिक मात्रा में मोटापे की ओर ले जाएगा तो वृद्धिकारक या सुरक्षात्मक भोज्य पदार्थ जैसे दालें, फल व सब्जियों में कमी होने पर शारीरिक वृद्धि में रुकावट या रोगग्रस्त होने की सम्भावनाएँ हो सकती हैं। अतः हमारी आहार योजना सन्तुलित भी होनी चाहिए।

RBSE Class 12 Home Science Chapter 10 निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
आहार-आयोजन करने से पूर्व उसके किन सिद्धान्तों एवं कारकों को ध्यान में रखना चाहिए?
उत्तर:
आहार-आयोजन से पूर्व निम्नलिखित सिद्धान्तों एवं कारकों को ध्यान में रखना चाहिए –

  • आहार-आयोजन पूरे दिन को एक इकाई मानकर करना चाहिए अर्थात् पूरे दिन के लिए दिए जाने वाले विभिन्न आहारों की योजना पहले ही बना लेनी चाहिए।
  • एक दिन में मुख्यतः 3 – 4 आहार की योजना बनाई जाती है। लेकिन व्यक्ति विशेष व परिवार के सदस्यों की आवश्यकता व आदतों के अनुरूप दिनभर में दिए जाने वाले आहारों की संख्या घटाई या बढ़ाई जा सकती है।
  • प्रत्येक आहार के मध्य कम – से – कम 2 से 3 घण्टों का अन्तराल होना चाहिए तथा प्रथम आहार का समय प्रात: 7 बजे से प्रारम्भ करके अन्तिम आहार रात्रि 8-9 बजे के मध्य कर लेना चाहिए। रात्रि में यदि आहार देने की आवश्यकता हो तो हल्का और सुपाच्य आहार दिया जाना चाहिए।
  • भोज्य पदार्थों का चुनाव एवं मात्रा सदस्यों की पोषणिक आवश्यकताओं के अनुरूप होनी चाहिए।
  • गृहिणी को आहार – आयोजन उपलब्ध समय, शक्ति व धन के अनुरूप एवं पारिवारिक सदस्यों की रुचि को ध्यान में रखकर करना चाहिए।

प्रश्न 2.
एक किशोरी के लिए आहार-आयोजन करते समय कुशल गृहिणी को किन विशेष बातों को ध्यान में रखना चाहिए?
उत्तर:
एक किशोरी के लिए आहार – आयोजन करते समय गृहिणी को यह ध्यान रखना चाहिए कि एक किशोरी के लिए दिनभर में विविध भोज्य पदार्थों की कितनी संदर्भ इकाइयाँ सम्मिलित करनी चाहिए, जिससे उसका आहार संतुलित हो सके। एक 13 से 16 वर्ष की किशोरी के लिए, ‘राष्ट्रीय पोषण संस्थान, हैदराबाद’ द्वारा दिनभर में आवश्यक विविध भोज्य पदार्थों की इकाई एवं कुल मात्रा अग्रानुसार प्रस्तावित की गई हैं –
किशोरी के लिए संतुलित आहार:
(13-16 वर्ष)
RBSE Solutions for Class 12 Home Science Chapter 10 आहार-आयोजन की प्रक्रिया
अण्डा / माँस / मछली का सेवन करने वाले दाल के स्थान पर 50 ग्राम माँसाहारी भोजन का सेवन कर सकते हैं। उपर्युक्त तालिका के आधार पर एक किशोरी के संतुलित आहार के लिए कुशल गृहिणी द्वारा विभिन्न भोज्य समूहों में से विभिन्न इकाइयों का चयन करना चाहिए। गृहिणी द्वारा किशोरियों की भोजन सम्बन्धी आदतों एवं भोजन के समयानुकूल भोज्य पदार्थ की विभिन्न इकाइयों को प्रतिदिन के विविध आहारों में रुचिकर व्यंजनों के रूप में सम्मिलित करना चाहिए। एक किशोरी के लिए गृहिणी तालिकानुसार आहार-आयोजन कर सकती है –
17-18 वर्ष की किशोरी के लिए आहार-योजना
RBSE Solutions for Class 12 Home Science Chapter 10 आहार-आयोजन की प्रक्रिया
उपरोक्त तालिका के आधार पर एक कुशल गृहिणी को किशोरी के भोजन का आयोजन करते समय निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए –

  1. भोज्य पदार्थों तथा व्यंजनों में परिवर्तन किया जा सकता है।
  2. भोजन में विविधता लाने हेतु एक ही खाद्य पदार्थ से कई प्रकार के व्यंजन भी बनाए जा सकते हैं; जैसे – अनाज से रोटी के साथ-साथ पूरी, पराठा, बाटी, उपमा इत्यादि बनाया जा सकता है।
  3. आहार – आयोजन करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि एक दिन के लिए आवश्यक समस्त पौष्टिक पदार्थों का समायोजन हो जाए।
  4. प्रत्येक व्यक्ति में व्यक्तिगत भिन्नता पाई जाती है। अत: किशोरियों के लिए भोजन का आयोजन करते समय उनकी उम्र, क्रियाशीलता तथा शारीरिक गठन को भी ध्यान में रखना चाहिए। उदाहरणार्थ, आयु के आधार पर किशोरियों की पोषणिक आवश्यकताएँ भिन्न-भिन्न होंगी।
  5. किशोरियों की आहार – योजना में लचीलापन होना चाहिए, किन्तु इस लचीलेपन में यह ध्यान रखना चाहिए कि यह कमी या अधिकता लम्बे समय के लिए न हो।
  6. किशोरियों की व्यक्तिगत पसंद व खुराक को भी ध्यान में रखना चाहिए।
  7. आहार – आयोजन में संतुलन होना चाहिए। अधिक शर्करा व वसायुक्त भोजन के सेवन से मोटापा बढ़ सकता है तथा पौष्टिक पदार्थों की कमी से कुपोषण तथा रोग होने की संभावना रहती है।
  8. यह आवश्यक नहीं है कि हम महँगे भोज्य पदार्थों का ही सेवन करें। इसके स्थान पर सस्ते तथा पौष्टिक भोज्य पदार्थों को भी सम्मिलित किया जा सकता है।

RBSE Class 12 Home Science Chapter 10 प्रयोगात्मक प्रश्न

I. भोज्य समूहों की संदर्भ इकाई
प्रश्न 1.
भोज्य पदार्थों की संदर्भ इकाई हेतु भोज्य समूह तथा भोज्य पदार्थों की तालिका का निर्माण करिए।
उत्तर:

प्रश्न 2.
घर में सामान्य तौर पर बनाए जाने वाली वस्तुओं की तालिका बनाइए तथा विषयाध्यापिका इसे प्रयोगशाला में छात्राओं द्वारा बनवाएँ।
उत्तर:
अग्र तालिका में व्यंजनों की माप हेतु प्रयुक्त की गई कटोरी तथा प्लेट की माप एक औसत कटोरी तथा प्लेट की है –
सामान्य व्यंजनों को बनाने हेतु कच्चे भोज्य पदार्थों की आवश्यकता एवं तैयार परोस मात्रा तालिका



अभ्यास – कार्य:
1. अध्यापिका छात्राओं की सहायता से उपर्युक्त व्यंजनों का प्रदर्शन करेंगी।
2. छात्राओं को अध्यापिका कच्चे भोज्य पदार्थ की संदर्भ इकाई द्वारा तैयार व्यंजन की तैयार परोस मात्रा का अनुभव देंगी।