Rajasthan Board RBSE Class 12 English Prudence Poetry Chapter 10 Transformation

RBSE Class 12 English Prudence Poetry Chapter 10 Textual Questions

1. Choose the correct alternative :

Question (a)
“I have drunk the infinite like a Giant’s wine” What does ‘wine’ refer to ?
(i) spirituality
(ii) world
(iii) life
(iv) death
Answer:
(i) spirituality

Question (b)
“I am no more a vassal of flesh A slave to Nature and her leaden rule” The poet here denotes :
(i) He is no longer just a slave of the flesh.
(ii) He is no longer just a slave to nature.
(iii) He is a man open to endless beauty and blessings that God provides.
(iv) All of the above.
Answer:
(iv) All of the above

2. Answer the following questions in 15-20 words each :
निम्न प्रत्येक प्रश्न का उत्तर 15-20 शब्दों में दीजिए :

Question (a)
who does ‘Infinite’ refer to ?
‘अनन्त’ किसकी ओर संकेत करता है?
Answer:
The word ‘Infinite’ refers to God. The poet has experienced the Infinite after his trans formation from physical to eternal entity.
शब्द ‘अनन्त’ ईश्वर की संकेत करता है। कवि ने भौतिक अस्तित्व से चिरकालीन अस्तित्व में परिवर्तन के बाद अनन्त का अनुभव कर लिया है।

Question (b)
How is ‘Time’ a drama ?
‘समय’ ‘नाटक’ कैसे है?
Answer:
‘Drama’ means platform. The poet says that time is the platform from which he can experience boundless divine bliss.
नाटक’ का अर्थ है ‘मंच’। कवि कहता है कि समय ही वह मंच है जहाँ से वह असीमित दैवीय परमानन्द का अनुभव कर सकता है।

Question (c)
What does the soul of the poet want to do ?
कवि की आत्मा क्या करना चाहती है?
Answer:
The soul of the poet wants to belong to the whole universe like a vast sun that emits eternal deathless light.
कवि को आत्मा अब विशाल सूर्य की भाँति पूरे ब्रह्माण्ड की होना चाहती है जो स्थाई अन्तहीन प्रकाश देता रहता है।

Question (d)
How is the poet’s body a living tool ?
कवि का शरीर किस प्रकार जीवन्त माध्यम है?
Answer:
The poet’s body is ‘God’s living tool’ means that God will now spread his message to the whole mankind through him.
कवि का शरीर ‘ईश्वर का जीवन्त माध्यम है’ का अर्थ है कि ईश्वर अब उसके द्वारा अपना सन्देश सारी मानवता तक फैला सकता है।

Answer the following questions in 50 words each :
निम्न प्रत्येक प्रश्नों का उत्तर 50 शब्दों में दीजिये:

Question (a)
What does the poet mean by “subtle rhythmic stream”?
“रहस्यमयी लयबद्ध धारा” से कवि का क्या तात्पर्य है?
Answer:
In the expression “subtle rhythmic stream”, the poet compares this state of his life to the peaceful rhythmic flow of water in a stream. Through the comparison he means to say that after achieving transformation of his self into a spiritual entithy, he has attained supreme peace and joy in life.

‘रहस्यमयी लयबद्ध धारा’ अभिव्यक्ति में कवि ने अपने जीवन की अवस्था की तुलना जलधारा में पानी के शान्तिपूर्ण लयबद्ध बहाव से की है। इस तुलना के माध्यम से वह कहना चाहता है कि अपने शरीर के आध्यात्मिक अस्तित्व में परिवर्तन को प्राप्त कर लेने के बाद उसने जीवन में सर्वोत्तम शान्ति और सुख पा लिया है।

Question (b)
“For the influx of the Unknown and Supreme” What does the poet mean by the above line and who is he referring to ?
उक्त वाक्य से कवि का क्या तात्पर्य है और वह किसकी ओर संकेत कर रहा है।
Answer:
By the line “For the influx of the Unknown and the Supreme”, the poet means to say that his nerves have become the channels of divine bliss. Through them, the excitement and rapture, wonder and blessings of life from God come into him in abundance and fill his body with divine energy.

अज्ञात और सर्वोच्च (परमात्मा) के अधिकाधिक अन्त:प्रवाह के लिये” इस वाक्य में कवि के कहने का अर्थ है। कि उसकी नाड़ियाँ दैवीय आनन्द के मार्ग बन गयीं हैं। इनके द्वारा ईश्वर से प्राप्त रोमांच और असीम आनन्द, आश्चर्य और अनुकम्पा उसके अन्दर बहुतायत में आती हैं और उसके शरीर को ईश्वरीय ऊर्जा से भर देती है।

Question (c)
What does the poet mean by “My illumined cells joy’s flaming scheme” ?
‘मेरी आध्यात्मिक ज्ञान से अविभूत कोशिकायें आनन्द की प्रज्वलित रूपरेखा हैं’ से कवि का क्या तात्पर्य है?
Answer:
By “My illumined cells joy’s flaming scheme”, the poet means to say that after tasting divinity in plenty, the cells of his body have been energised with divine power. This supreme power brings him boundless joy and peace in life. His body is thrilled with the experience of this bliss.

“मेरी आध्यात्मिक ज्ञान से अविभूत कोशिकायें आनन्द की प्रज्वलित रूप रेखा हैं,” से कवि का तात्पर्य है कि देवत्व का प्रचुर मात्रा में रसास्वादन कर लेने के बाद उसके शरीर की कोशिकायें दैवीय शक्ति की ऊर्जा से भर गयीं हैं। यह सर्वोच्च शक्ति उसे जीवन में असीम सुख और शन्ति लाती है। उसका शरीर इस परमानन्दं के अनुभव से रोमांचित है।

Question (d)
What does the title, “Transformation” suggest ?
शीर्षक “Transformation” क्या संकेत देता है?
Answer:
The title of the poem, ‘Transformation’, suggests that the poet has now attained the state of an enlightened being. There has come a change in his physical state into an eternal state of supreme bliss. He now belongs not only to the world but also to the whole universe.

कविता “Transformation” का शीर्षक यह दर्शाता है कि कवि ने एक ज्ञानबोध हुए व्यक्ति की अवस्था को प्राप्त कर लिया है। उसकी भौतिक अवस्था से सर्वोच्च परमानन्द की अनादि अवस्था में परिवर्तन हुआ है। अब वह इस संसार का ही नहीं सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का वासी है।

Answer the following questions in 100 words each:
निम्न प्रत्येक प्रश्न का 100 शब्दों में उत्तर दोः

Question (a)
Critically analyse the holistic view of the poem.
कविता के सम्पूर्ण परिदृष्य का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिये।
Answer:
The poem, “Transformation” is a philosophical poem. The title of the poem, itself, is very suggestive. It explains the change in the poet’s existing form into a divine form. Once this change is attained, the poet’s breath catches a rhythm that gives him supreme joy and peace. The poet experiences God and the influx of His power in him. Time no longer remains a mystery to him. He can now understand things beyond time. He feels that he now belongs to the whole universe and his body is just a tool to spread God’s message to the whole world.

कविता “Transformation” एक दार्शनिक कविता है। इस कविता का शीर्षक स्वयं ही संकेतात्मक है। यह कवि के वर्तमान रूप के दैवीय रूप में परिवर्तन की व्याख्या करता है। एक बारं यह परिवर्तन हो गया है तो कवि की साँस ऐसी लय पकड़ लेती है जो उसे सर्वोच्च सुख और शान्ति प्रदान करती है। कवि को अपने अन्दर ईश्वर का और इसकी शक्ति के अन्त: प्रवाह का अनुभव होता है। समय अब उसके लिये कोई रहस्य नहीं रह गया है। अब वह समय के पार की बातों को समझ सकता है। वह यह महसूस करता है कि अब वह सारे ब्रह्माण्ड को वासी है और उसका शरीर सारे संसार में ईश्वर का संदेश फैलाने का साधन मात्र है।

Question (b)
Explainthe metaphors used in the poem.
कविता में प्रयुक्त उपमाओं की व्याख्या कीजिये।
(i) narrow mesh
(ii) vassal
(iii) tool
(iv) vast sun
Answer:

  1. Narrow mesh : The poet compares carnal pleasures, emotions, attachments etc., to a narrow mesh. A man is entangled in them so he remains removed from the divine bliss.
    संकरा जाल: कवि सांसारिक सुखों, भावनाओं और सम्बन्धों की तुलना एक संकरे जाल से करता है। व्यक्ति उन्हीं में उलझा रहता है और इसीलिये दैवीय सुख से दूर रहता है।
  2. Vassal : A vassal is tied to his master’s bidding so is man to his physical existance.
    गुलाम : गुलाम अपने मालिक की आंज्ञाओं से बँधा होता है इसी प्रकार मनुष्य अपने भौतिक अस्तित्व के आदेशों को मानने के लिये बाध्य होता है।
  3. Tool : A tool is used to accomplish a work. After the liberation of his soul, the poet’s body is God’s tool to spread His message to mankind.
    औजारः औजार किसी काम को पूरा करने के लिये प्रयोग किया जाता है। आत्मा के स्वतन्त्र होने के बाद कवि का शरीर ईश्वर का मानवंती तक संदेश फैलाने का साधन हो गया है।
  4. Vast sun : The sun illumines the universe and provides unending energy to the life and matter in it. The poet desires to be such a being as would enlighten generation after generation.
    विशाल सूर्यः सूर्य ब्रह्माण्ड को प्रकाशित करता है और उसमें ज़ीवन और पदार्थ को असीमित ऊर्जा प्रदान करता है। कवि ऐसा व्यक्ति बनने की कामना करता है जो पीढ़ी दर पीढ़ी ज्ञान बोध कराता रहे।

RBSE Class 12 English Prudence Poetry Chapter 10 Additional Questions

Answer the following questions in 50 words each :
निम्न प्रत्येक प्रश्न का उत्तर 50 शब्दों में दीजिए :

Question 1.
“I have drunk the Infinite like a giant’s wine.” Explain.
“मैंने अनन्त को विशाल राक्षसे की मदिरा के समान पियां है।” व्याख्या कीजिये।
Answer:
The poet has attained transformation from mere physical existence into a divine self. He says that he has now realised God and has tasted spirituality in great measure. The realisation of divinity has given him boundless joy and peace in life and filled his body organs with divine energy.

कवि ने शारीरिक अस्तित्व से दैवीय व्यक्तित्व में परिवर्तन प्राप्त कर लिया है। कवि कहता है कि उसने ईश्वर को प्राप्त कर लिया है और अत्यधिक मात्रा में अध्यात्म का रसास्वादन कर लिया है। देवत्व की प्राप्ति ने उसे जीवन में असीमित सुख और शान्ति दी है और उसके शरीर के अंगों में दैवीय ऊर्जा भर दी है।

Question 2.
What effect does the transformation have on the poet?
परिवर्तन का कवि पर क्या प्रभाव पड़ा है?
Answer:
The poet’s transformation into a divine entity has helped him to breathe peacefully. Now his organs are filled with divine energy. His nerves have become channels of divine rapture. His soul is free from the limitations of physical existence and his body has become God’s tool to spread His message to mankind.

कवि के दैवत्व के अस्तित्व में परिवर्तन ने उसे शान्तिपूर्वक साँस लेने में सहायता की है। अब उसके अंग दैवीय ऊर्जा से भर गये हैं। अब उसकी नाड़ियाँ परमानन्द का मार्ग हो गयीं हैं। उसकी आत्मा भौतिक अस्तित्व की बाध्यताओं से स्वतंत्र है और उसका शरीर ईश्वर का मानवता के लिये सन्देश का माध्यम हो गया है।

Question 3.
“I am no more a vassal of flesh”. What is the poet referring to ?
“मैं अब शरीर का गुलाम नहीं हूँ।” कवि किस ओर संकेत कर रहा है?
Answer:
By saying “I am no more a vassal of flesh”, the poet is referring to his enlightenment and freedom from the compulsions of his physical existence. He says that he is no more bound to the orders of his body. He is now free from all worldly desires, emotions, attachments and attractions.

“मैं अब इस शरीर का दास नहीं हूँ’ कहकर कवि अपने ज्ञान बोध और अपनी भौतिक अस्तित्व की बाध्यताओं से स्वतंत्रता की ओर संकेत कर रहा है। उसका कहना है कि वह अब अपने शरीर के आदेशों को मानने के लिये बाध्य नहीं है। अब वह सभी शरीर के आदेशों को मानने के लिये बाध्य नहीं है। अब वह सभी सांसारिक इच्छाओं, भावनाओं, सम्बन्धों और आकर्षणों से मुक्त है।

Question 4.
What does “measureless sight” refer to in the poem ?
कविता में असीमित दृश्य” किस ओर संकेत करता है?
Answer:
In the poem, by the phrase “measureless sight”, the poet refers to the unlimited view of the universe. The poet’s enlightenment lets him see beyond time. His spirit is now open to the endless beauty and blessings and wonder that existence of the flesh hides from view of an ordinary being.

कविता में “असीमित दृश्य” शब्द-समूह से कवि ब्रह्माण्ड के असीमित दृश्य की ओर संकेत करता है। कवि का ज्ञान बोध उसे समय के पार देखने देता है। उसकी आत्मा अब अनन्त सौन्दर्य और अनुकम्पा और वे आश्चर्य जो शरीर का अस्तित्व साधारण व्यक्ति से छिपा लेता है, के लिये तैयार है।

Answer the following question in 100 words :
निम्न प्रश्न का उत्तर 100 शब्दों में दीजिए :

Question
What philosophy does the poet enunciate in the poem ?
कविता में कवि किस दर्शन तत्व ज्ञान को व्यक्त करता है?
Answer:
In the poem, ‘Transformation’, the poet enunciates the philosophy of enlightenment, the knowledge of the Divine. The poet professes that enlightenment helps the spirit to conquer all the worldly attachments, false attractions, worldly desires and pleasures that bind human beings and keep them as slaves. It presents an unlimited view of the universe to the enlightened. Time no longer remains a mysterious thing to him. His whole body is illumined with divine power that brings him boundless joy and peace. Such a person becomes a messenger of God on this earth.

कविता ‘Transformation’ में कवि ज्ञान बोध अर्थात् दैवीय ज्ञान के दर्शन का वर्णन करते हैं। कवि यह मानते हैं कि ज्ञान बोध उन सभी सांसारिक सम्बन्धों, झूठे आकर्षणों, शारीरिक इच्छाओं और भोग को जीतने में आत्मा की सहायता करती है जो मनुष्यों को बाँधते हैं और उन्हें गुलाम बनाते हैं। यह परिवर्तन उसी ज्ञानी पुरुष के सम्मुख ब्रह्माण्ड का असीमित दृश्य प्रस्तुत करता है। उसके लिए समय रहस्यमयी वस्तु नहीं रह जाता। उसका सारा शरीर उस दैवीय ऊर्जा से जगमगा जाता है जो उसे असीमित सुख और शान्ति प्रदान करती हैं। ऐसा व्यक्ति पृथ्वी पर ईश्वर का दूत बन जाता है।