Rajasthan Board RBSE Class 12 Home Science Chapter 15 वृद्धावस्था में पोषण

RBSE Class 12 Home Science Chapter 15 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से सही उत्तर चुनें –
(i) मानव जीवन के विकास क्रम में उम्र का आखिरी पड़ाव कहलाता है –
(अ) बाल्यावस्था
(ब) वृद्धावस्था
(स) शैशवावस्था
(द) युवावस्था।
उत्तर:
(ब) वृद्धावस्था

(ii) वृद्धावस्था के दौरान अस्थि से सम्बन्धित रोग को कहते हैं –
(अ) एनीमिया
(ब) ऑस्टियोपोरोसिस
(स) रिकेट्स
(द) बेरी-बेरी।
उत्तर:
(ब) ऑस्टियोपोरोसिस

(iii) वृद्धावस्था में…………परिवर्तनों की गति तीव्र होती है
(अ) विघटनात्मक
(ब) सृजनात्मक
(स) मानसिक
(द) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(अ) विघटनात्मक

(iv) वृद्धावस्था में आधारीय उपापचय दर में आ जाती है –
(अ) कमी
(ब) तीव्रता
(स) समानता
(द) ये सभी।
उत्तर:
(अ) कमी

(v) वृद्धावस्था में शरीर में तन्तुओं की मरम्मत हेतु मुख्य रूप से आवश्यक होता होती है –
(अ) ऊर्जा
(ब) वसा
(स) प्रोटीन
(द) जला
उत्तर:
(स) प्रोटीन

(vi) लौह तत्व की कमी से हो सकता है –
(अ) कुपोषण
(ब) रक्ताल्पता
(स) ऑस्टियोपोरोसिस
(द) रिकेट्स।
उत्तर:
(ब) रक्ताल्पता

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति करिए –
1. जीवन-चक्र का आखिरी पड़ाव, जिसमें शरीर-निर्माण कार्य नहीं के बराबर होता है, उसे कहते हैं…………।
2. वृद्धावस्था की पौषणिक आवश्यकताएँ मुख्यत: इस समय में होने वाले…………परिवर्तनों पर निर्भर करती हैं।
3. अधिक…………का सेवन मोटापा तथा अनेक बीमारियों; जैसे—मधुमेह, हृदय सम्बन्धी रोगों को जन्म देता है।
4. वृद्धजनों का भोजन सादा, सात्विक, हल्का एवं…………होना चाहिए।

उत्तर:
1. वृद्धावस्था
2. शारीरिक
3. वसा
4. सुपाच्य।

प्रश्न 3.
वृद्धावस्था को जरावस्था क्यों कहते हैं?
उत्तर:
वृद्धावस्था में शरीर – निर्माण कार्य नहीं के बराबर होते हैं तथा शरीर जीर्ण-शीर्ण होने लगता है, दाँत कमजोर हो जाते हैं, आहार-नाल में पाचक रस कम मात्रा में बनते हैं, जिससे पाचन एवं अवशोषण कम हो जाता है, जोड़ों में कठोरता आ जाती है, स्वाद कलिकाओं की तीव्रता में कमी, स्मृति का कमजोर होना, ऊँचा सुनना, कम दिखाई देना आदि समस्याएँ होने के कारण वृद्धावस्था को जरावस्था कहते हैं।

प्रश्न 4.
एक वृद्ध को किस प्रकार की पोषण संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है? समझाइए।
उत्तर:
वृद्धावस्था में प्रतीपगामी विकास (Regressive Development) की गति तीव्र होने के कारण विभिन्न शारीरिक अंगों की कार्य-प्रणाली में क्षीणता आने लगती है। इसलिए निम्न पोषण सम्बन्धी समस्याएँ उत्पन्न हो जाती हैं –

  • वृद्धावस्था में आहारनाल से स्रावित होने वाले पाचक रसों – आमाशयी, अग्न्याशयी व आंत्र एवं पित्त रस में कमी आने के कारण भोजन का पाचन ठीक से नहीं हो पाता है, जिससे अपच की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
  • आमाशयिक संवरणी (Cardiac Sphincter) के क्षीण हो जाने के कारण अम्लीय भोजन बार-बार ग्रसनी तक . पहुँचता है, जिससे डकार एवं छाती में जलन जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो जाती हैं।
  • आहारनाल द्वारा भोजन के पाचन के साथ – साथ विविध पोषक तत्वों के अवशोषण की दर में भी कमी आती है तथा विविध प्रकार के कुपोषण की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं।
  • आहारनाल की मांसपेशियों की क्षीणता के कारण आँतों की क्रमाकुंचन की गति में कमी के कारण अवशिष्ट पदार्थ समय-समय पर निष्कासित न होने के कारण कब्ज की शिकायत हो जाती है।

प्रश्न 5.
एक वृद्ध महिला का आहार-आयोजन करते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर:
एक वृद्ध महिला के लिए आहार – आयोजन करते समय निम्न बातों को ध्यान में रखना चाहिए –

  • भोजन हल्का, सादा, सुपाच्य एवं कम मिर्च-मसाले वाला होना चाहिए।
  • भोजन शारीरिक क्षमता के अनुसार होना चाहिए, जिसे आसानी से सरलतापूर्वक पचाया जा सके।
  • भोजन में तले-भुने भोज्य पदार्थों के स्थान पर ताजे एवं मुलायम फलों का, हरी सब्जियों का, दूध एवं दूध से बने हुए पदार्थों का अधिक मात्रा में प्रयोग करना चाहिए।
  • रात्रि का भोजन करने से – घंटे पहले भूख बढ़ाने के लिए सूप का सेवन अवश्य करना चाहिए।
  • रात्रि का भोजन सोने से 2 – 3 घंटे पूर्व करना चाहिए।
  • वृद्ध महिला के आहार में तरल भोज्य पदार्थ; जैसे-सब्जियों का सूप, शिकंजी, छाछ, दाल, चावल का पानी, स्क्वैश, जल आदि का अधिकाधिक उपयोग करना चाहिए। 7. भोजन में प्रोटीन एवं विटामिनयुक्त पदार्थों का समावेश होना चाहिए।

RBSE Class 12 Home Science Chapter 15 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Home Science Chapter 15 वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
वृद्ध व्यक्तियों में हॉर्मोन के असन्तुलन के कारण अस्थियों में किस तत्व की कमी हो जाती है?
(अ) जल की
(ब) खनिजों की
(स) रक्त की
(द) प्रोटीन की
उत्तर:
(ब) खनिजों की

प्रश्न 2.
नाड़ी संस्थान के कमजोर होने से वृद्धों में स्वाद कलिकाओं में तीव्रता हो जाती है –
(अ) अधिक
(ब) कम
(स) सामान्य
(द) कोई प्रभाव नहीं पड़ता
उत्तर:
(ब) कम

प्रश्न 3.
शारीरिक, सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक परिवर्तनों का प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है –
(अ) पोषण स्तर पर
(ब) स्वास्थ्य पर
(स) पोषण स्तर तथा स्वास्थ्य पर
(द) किसी पर नहीं
उत्तर:
(स) पोषण स्तर तथा स्वास्थ्य पर

प्रश्न 4.
वृद्धावस्था में संक्रमण के कारण किस रोग की संभावना बढ़ जाती है?
(अ) दस्त
(ब) अतिसार
(स) दस्त व अतिसार
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(स) दस्त व अतिसार

प्रश्न 5.
वृद्धावस्था में प्रतिदिन अधिकतम कितनी वसा आहार में लेनी चाहिए?
(अ) 40 ग्राम
(ब) 30 ग्राम
(स) 50 ग्राम
(द) 60 ग्राम
उत्तर:
(ब) 30 ग्राम

प्रश्न 6.
वृद्ध व्यक्तियों को प्रतिदिन कम-से-कम कितना पानी पीना चाहिए?
(अ) 1 – 1.5 लीटर
(ब) 1.5 से 2 लीटर
(स) 2-3 लीटर
(द) 500 मिली.से 1 लीटर
उत्तर:
(ब) 1.5 से 2 लीटर

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
1. वृद्धावस्था में शारीरिक वजन में कमी तथा मांसपेशियों की…………में गिरावट आती है।
2. मांसपेशियों का क्षय होने के कारण त्वचा…………हो जाती है।
3. वृद्धावस्था में आंत…………का खतरा बढ़ जाता है।
4. वृद्धावस्था में तन्तुओं की मरम्मत हेतु…………की आश्यकता अधिक होती है।
5. वृद्धावस्था में…………वसायुक्त आहार लेना चाहिए
6. लौह तत्व की कमी से वृद्धावस्था में…………की संभावना बढ़ जाती है।

उत्तर:
1. क्रियाशीलता
2. झुरींदार
3. संक्रमण
4. प्रोटीन
5. कम
6. रक्ताल्पता।

RBSE Class 12 Home Science Chapter 15 अति लघूत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वृद्धावस्था कब प्रारम्भ होती है?
उत्तर:
60 वर्ष की उम्र से वृद्धावस्था प्रारम्भ होती है।

प्रश्न 2.
वृद्धावस्था को जरावस्था क्यों कहते हैं ?
उत्तर:
वृद्धावस्था में शरीर निर्माण कार्य नहीं के बराबर होता है तथा शरीर जीण-शीर्ण होने लगता है। अत: इसे जरावस्था कहते हैं।

प्रश्न 3.
ओस्टियोपोरोसिस रोग शरीर के किस अंग को प्रभावित करता है ?
उत्तर:
ओस्टियोपोरोसिस नामक रोग हड्डियों को प्रभावित करता है।

प्रश्न 4.
वृद्धावस्था में जोड़ों के दर्द की समस्या का क्या कारण है ?
उत्तर:
हड्डियों को मांसपेशियों से जोड़ने वाले ऊतक में कोलेजन फाइबर की मात्रा बढ़ जाने से जोड़ों में कठोरता आ जाती है, जिससे जोड़ों में दर्द होने लगता है।

प्रश्न 5.
तंत्रिका तंत्र की कोशिकाओं के क्षीण होने से वृद्धावस्था में क्या-क्या परिवर्तन आते हैं? ।
उत्तर:
वृद्धावस्था में तंत्रिका, तंत्र की कोशिकाओं के क्षीण होने पर स्वाद कलिकाओं की तीव्रता में कमी, स्मृति का कमजोर होना, ऊँचा सुनना, कम दिखाई देना आदि समस्याएँ उत्पन्न हो जाती हैं।

प्रश्न 6.
उम्र बढ़ने के साथ – साथ व्यक्ति के शरीर में कौन-कौन-से रोग पनपने लगते हैं?
उत्तर:
उम्र बढ़ने के साथ – साथ वृद्ध व्यक्तियों में श्वसन सम्बन्धी तकलीफें, हृदय सम्बन्धी रोग, मधुमेह, अपच, छाती में जलन एवं कब्ज आदि रोग शरीर में पनपने लगते हैं। .

प्रश्न 7.
वृद्धावस्था में मानसिक परेशानियाँ किन-किन कारणों से बढ़ती हैं?
उत्तर:
वृद्धावस्था में शारीरिक कष्टों के बढ़ने के कारण, आर्थिक तंगी के कारण एवं अकेलेपन के कारण | मानसिक परेशानियाँ बढ़ती हैं।

प्रश्न 8.
वृद्धावस्था में पौषणिक आवश्यकताएँ किन पर निर्भर करती हैं?
उत्तर;
वृद्धावस्था में पौषणिक आवश्यकताएँ प्रमुख रूप से व्यक्ति के शारीरिक परिवर्तनों पर निर्भर करती हैं।

प्रश्न 9.
वृद्धावस्था में ऊर्जा की माँग में कमी क्यों आती है?
उत्तर:
वृद्धावस्था में आधारीय उपापचय दर में कमी आ जाती है तथा शारीरिक क्रियाशीलता में भी कमी आने के कारण ऊर्जा की माँग में कमी आती है।

प्रश्न 10.
वृद्धावस्था में अधिक वसा का प्रयोग हानिकारक क्यों है?
उत्तर;
इस अवस्था में अधिक वसा के प्रयोग से मोटापा, मधुमेह, हृदय सम्बन्धी रोग, कब्ज एवं वमन आदि रोग हो जाते हैं।

प्रश्न 11.
शारीरिक थकान एवं कब्ज को दूर करने हेतु वृद्ध व्यक्तियों को किस प्रकार का आहार लेना चाहिए?
अथवा
कब्ज की स्थिति में वृद्ध व्यक्तियों को किस प्रकार का आहार लेना चाहिए।
उत्तर:
शारीरिक थकान एवं कब्ज को दूर करने के लिए वृद्ध व्यक्तियों को प्रतिदिन के आहार में विटामिन युक्त भोज्य पदार्थों; जैसे-ताजे फल व हरी सब्जियों का पर्याप्त मात्रा में समावेश करना चाहिए।

प्रश्न 12.
लौह तत्व की कमी से कौन-सा रोग हो जाता है?
उत्तर:
लौह तत्त्व की कमी से रक्ताल्पता नामक रोग हो जाता है।

प्रश्न 13.
कैल्सियम युक्त भोज्य पदार्थों की कमी से वृद्धावस्था में कौन-सा रोग हो जाता है ?
उत्तर:
कैल्सियम युक्त भोज्य पदार्थों की कमी से वृद्धावस्था में ऑस्टियोपोरोसिस नामक रोग हो जाता है।

प्रश्न 14.
वृद्धावस्था किसे कहते हैं?
उत्तर:
प्रौढ़ावस्था के बाद आने वाली अवस्था को वृद्धावस्था या जरावस्था कहते हैं।

RBSE Class 12 Home Science Chapter 15 लघूत्तरीय प्रश्न (SA-I)

प्रश्न 1.
वृद्धावस्था में दांत कमजोर होने एवं स्वाद नलिकाओं की क्षीणता का क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर:
वृद्धावस्था में मुँह में मसूड़े कमजोर होने के कारण दाँत कमजोर हो जाते हैं और गिरने लगते हैं। ऐसे में ठोस व सख्त भोजन काटने व चबाने में परेशानी आती है। उनकी स्वाद नलिकाओं की तीक्ष्णता में कमी आने एवं लार के कम स्रावण के कारण वृद्ध भोजन का पूर्ण स्वाद नहीं ले पाते साथ ही मुँह में होने वाला आंशिक पाचन प्रभावित होता है।

प्रश्न 2.
वृद्धावस्था में प्रोटीन की अधिक आवश्यकता क्यों होती है
उत्तर:
वृद्धावस्था में शरीर के तन्तुओं में टूट – फूट की प्रक्रिया अधिक होती है, अत: इन तन्तुओं की मरम्मत हेतु प्रोटीन की अधिक आवश्यकता होती है चूँकि वृद्ध व्यक्तियों की भूख में कमी आ जाती है एवं पाचन क्षीण होने लगता है। ऐसी स्थिति में वे प्रोटीन युक्त भोजन जैसे दालें कम खाने लगते हैं किन्तु उनकी प्रोटीन की आहारिक आवश्यकता में कमी नहीं आती है, इसलिए उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन पदार्थ जैसे दूध एवं दुग्ध पदार्थ ग्रहण करने चाहिए।

प्रश्न 3.
वृद्ध व्यक्तियों के लिए आहार – आयोजन करने से पूर्व किन-किन बातों की ओर विशेष ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर:
वृद्ध व्यक्तियों के लिए आहार-आयोजन करने से पूर्व निम्न बातों की ओर ध्यान देना चाहिए –

  • आहार में कम मिर्च-मसालों का प्रयोग होना चाहिए।
  • वसा का प्रयोग कम-से-कम होना चाहिए।
  • आहार में उच्चकोटि के प्रोटीन; जैसे-दूध एवं दूध से बने भोज्य पदार्थों का समावेश अवश्य होना चाहिए।
  • आहार हल्का एवं सुपाच्य बनाना चाहिए।
  • भोजन इस प्रकार का बनाना चाहिए जिसे आसानी से चबाया जा सके।
  • भोजन में तरल भोज्य पदार्थों का भरपूर प्रयोग किया जाना चाहिए।

RBSE Class 12 Home Science Chapter 15 लघू उत्तरीय प्रश्न (SA-II)

प्रश्न 1.
वृद्धावस्था में होने वाले शारीरिक परिवर्तनों को लिखिए।
उत्तर:
वृद्धावस्था में निम्नलिखित शारीरिक परिवर्तन उत्पन्न होते हैं –

  • शरीर के अंगों की क्रियाशीलता में कमी आती है।
  • उपापचय, वजन तथा मांसपेशियों की क्रियाशीलता में भी कमी हो जाती है।
  • मुख में काटने एवं चबाने के दाँत कमजोर हो जाते हैं या टूट जाते हैं।
  • आहारनाल में पाचक रस कम बनते हैं। अत: भोजन का पाचन एवं अवशोषण कम हो जाता है।
  • हड्डियों को मांसपेशियों से जोड़ने वाले ऊतकों में कोलेजन की मात्रा बढ़ने से जोड़ों में कठोरता आ जाती है।
  • तंत्रिका तंत्र की कोशिकाओं के क्षीण होने से स्वाद कलिकाओं की तीव्रता में कमी आ जाती है।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी आने के कारण वृद्ध बार-बार बीमार हो जाते हैं।
  • आयु बढ़ने के साथ-साथ श्वसन संबंधी तकलीफें एवं हृदय सम्बन्धी रोग तथा मधुमेह आदि रोग हो जाते हैं।

प्रश्न 2.
वृद्धावस्था में अपच, डकार, छाती में जलन एवं कब्ज की शिकायत क्यों रहती है ?
उत्तर:

  • वृद्धों में आहार नाल से स्रावित होने वाले पाचक रसों-आमाशयी, अग्न्याशयी एवं आंत्र व पित्तरस में कमी आने के कारण भोजन का पाचन ठीक प्रकार से नहीं हो पाता। फलस्वरूप अपच की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
  • आमाशयिक संवरणी (Cardiac Sphincter) के क्षीण हो जाने के कारण अम्लीय भोजन बार-बार ग्रसनी तक पहुँचता है जिससे डकार (Belching) व छाती में जलन (Heart – Burn) की समस्याएँ हो जाती हैं।
  • आहार नाल की माँसपेशियों की क्षीणता के कारण आंतों की क्रमाकुंचन की गति में कमी आती है व अपशिष्ट समय-समय पर निष्कासित नहीं हो पाता और कब्ज की समस्या बनी रहती है।

प्रश्न 3.
वृद्धावस्था में पौषणिक आवश्यकताएँ किन-किन बातों पर निर्भर करती हैं ?
उत्तर:
वृद्धावस्था में पौषणिक आवश्यकताएँ शारीरिक परिवर्तनों पर निर्भर करती हैं। शारीरिक क्रियाशीलता में काफी कमी आने के कारण ऊर्जायुक्त पदार्थों की कम मात्रा में आवश्यकता होती है। अधिक ऊर्जायुक्त भोजन लेने से शारीरिक वजन बढ़ता है जो विभिन्न बीमारियों को जन्म देता है। वृद्धावस्था में शरीर के तन्तुओं में टूट – फूट की प्रक्रिया अधिक होने के कारण प्रोटीनयुक्त पदार्थों की अधिक आवश्यकता होती है।

वृद्धावस्था में उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन पदार्थ; जैसे-दूध एवं दूध से बने पदार्थ ग्रहण करने चाहिए। वृद्धावस्था में वसा का प्रयोग भी कम करना चाहिए, क्योंकि वसा का प्रयोग भी मोटापा एवं अनेक बीमारियों; जैसे – मधुमेह, हृदय सम्बन्धित रोगों को जन्म दे सकता है। वसा के अत्यधिक प्रयोग से वमन या कै एवं कब्ज भी हो सकता है।

इस अवस्था में आमाशय से स्रावित होने वाले पाचक रस में कमी आने पर लौह तत्वों एवं कैल्सियम का अवशोषण कम हो जाता है, जिससे लौह लवणयुक्त भोज्य पर्याप्त मात्रा में सम्मिलित किये जाने चाहिए। शारीरिक क्रिया तंत्र सुचारु एवं सामान्य बनाये रखने हेतु विटामिनों का समावेश करने के लिए ताजे फल व हरी सब्जियों का पर्याप्त मात्रा में सेवन किया जाना चाहिए, अन्यथा वृद्ध अनेक प्रकार की शारीरिक समस्याओं; जैसे – थकान हो जाना, कब्ज होना आदि से ग्रसित हो सकते हैं।

प्रश्न 4.
वृद्धावस्था में दिये जाने वाले आहार का विवरण प्रस्तुत करिए।
उत्तर:
वृद्धावस्था में आहार का निर्धारण करते समय इस अवस्था में होने वाले शारीरिक एवं मानसिक परिवर्तनों को ध्यान में रखना आवश्यक होता है। वृद्धावस्था में आधारीय उपापचय की दर घट जाती है। इस परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए आहार में वसा की मात्रा को कम करना आवश्यक होता है।

वृद्धावस्था में शरीर की अस्थियों तथा दाँतों में कुछ संरचनात्मक परिवर्तन दृष्टिगोचर होने लगते हैं। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए, इस अवस्था में आहार में कैल्सियम तथा कुछ अन्य खनिज लवणों की अधिक मात्रा का समावेश होना चाहिए। इसके अतिरिक्त इस अवस्था में लार ग्रन्थियों का स्राव भी कुछ घट जाता है।

पाचन – तन्त्र में आवश्यक अन्य पाचक रसों की मात्रा एवं सक्रियता भी कुछ घटने लगती है। वृद्धावस्था में कार्बोहाइड्रेट का पाचन भी कठिन हो जाता है। पाचन तंत्र के अतिरिक्त वृद्धावस्था में उत्सर्जन तंत्र तथा अन्त:स्रावी ग्रन्थियों की सक्रियता भी प्रभावित होने लगती है। वृद्धावस्था में आहार में प्रोटीन युक्त खाद्य-पदार्थों का अनिवार्य रूप से समावेश होना चाहिए। वृद्धावस्था में आहार – नियोजन के समय खनिज – लवणों की अतिरिक्त मात्रा का भी समावेश होना चाहिए। इसका एक मुख्य कारण वृद्धावस्था में अवशोषण की दर घट जाना भी होता है।

प्रश्न 5.
एक वृद्ध पुरुष तथा महिला की दैनिक सन्तुलित आहार तालिका बनाइये।
उत्तर:
एक वृद्ध पुरुष तथा महिला की दैनिक सन्तुलित आहार तालिका निम्न प्रकार है –
RBSE Solutions for Class 12 Home Science Chapter 15 वृद्धावस्था में पोषण

RBSE Class 12 Home Science Chapter 15 निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
वृद्धावस्था में किन-किन पौष्टिक तत्वों की आवश्यकता होती है ? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वृद्धावस्था में पोषक तत्वों की आवश्यकता वृद्धावस्था में पोषक तत्वों की आवश्यकता प्रौढ़ावस्था के समान ही होती है, लेकिन आधारीय उपापचय की दर कम हो जाने से ऊर्जा की कम आवश्यकता पड़ती है तथा थायमिन भी कम मात्रा में आवश्यक होता है।

1. ऊर्जा:
पच्चीस साल की आयु तक आधारीय उपापचय की दर बढ़ती है, लेकिन पच्चीस साल के बाद आधारीय उपापचय की दर निरन्तर कम होने लगती है। साठ साल की आयु के बाद यह काफी तीव्र गति से कम होने लगती है। वृद्ध महिला अथवा पुरुष के लिए ऊर्जा की कम आवश्यकता उनके स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है, क्योंकि वृद्धावस्था में अधिक कैलोरी से उनका शारीरिक भार बढ़ने लगता है जो कि अनेक प्रकार की बीमारियों को आमन्त्रित करता है।

2. प्रोटीन:
इस अवस्था में प्रोटीन की आवश्यकता उतनी ही होती है जितनी कि प्रौढ़ावस्था में अर्थात् एक ग्राम प्रोटीन प्रति किलोग्राम शारीरिक भार की आवश्यकता होती है। वृद्धावस्था में शरीर के अन्दर नयी कोशिकाएँ अधिक नहीं बनती हैं, बल्कि कोशिकाओं की टूट-फूट पहले से अधिक ही होती है। इसलिए प्रोटीन की आवश्यकता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

3. कार्बोहाइड्रेट:
आहार में ऊर्जा की कमी करने के लिए कार्बोहाइड्रेट युक्त पदार्थ भी कम मात्रा में लेने चाहिए।

4. वसा:
वृद्धावस्था में वसा अधिक की मात्रा नहीं लेनी चाहिए। अधिक वसा से शरीर में विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ हो जाती हैं। साथ ही शारीरिक भार में वृद्धि होती है, धमनियाँ मोटी हो जाती हैं जिससे रक्त का प्रवाह सुचारु नहीं रह पाता जिससे हृदय सम्बन्धी रोग उत्पन्न हो जाते हैं।

5. खनिज लवण:
कैल्सियम-वृद्धावस्था में प्राय: कैल्सियम की कमी पायी जाती है जिसके कारण ओस्टीयोपोरोसिस नामक रोग हो जाता है। इस रोग से बचने के लिए कैल्सियम की उचित मात्रा में आवश्यकता होती है। इसलिए वृद्ध पुरुष अथवा महिला को अपने आहार में प्रतिदिन दूध-दही को शामिल करना चाहिए।

6. लौह लवण:
वृद्धावस्था में आयरन की आवश्यकता प्रौढ़ावस्था के समान ही होती है। मासिक धर्म के बन्द हो जाने से आयरन की हानि तो कम होती है साथ ही वृद्धावस्था में आयरन का अवशोषण भी कम हो जाता है।

7. विटामिन्स:
वृद्धावस्था में विटामिन ‘ए’ विटामिन ‘डी’ एवं विटामिन ‘सी’ उचित मात्रा में लेना चाहिए जिससे वृद्धावस्था में महिला/पुरुष शारीरिक रूप से सही बना रहे। नाड़ी को क्रियाशील बनाये रखने के लिए विटामिन ‘बी’ समूह भी आहार में पर्याप्त मात्रा में होना आवश्यक है।

प्रश्न 2.
वृद्धावस्था में गतिहीन, मध्यम श्रेणी तथा परिश्रमी कार्य हेतु शाकाहारी एवं मांसाहारी भोज्य पदार्थों की तालिका बनाइए।
उत्तर:

RBSE Class 12 Home Science Chapter 15 प्रयोगात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
वृद्ध पुरुष व महिला के लिए सन्तुलित आहार तालिका बनाइए।
उत्तर:
वृद्धावस्था में आहार – आयोजन अति महत्वपूर्ण है। इस अवस्था में शारीरिक क्रियाशीलता को बनाये रखने और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सभी भोज्य समूहों में से विविध भोज्य पदार्थों का पर्याप्त मात्रा में समावेश निम्नलिखित तालिकानुसार किया जाना चाहिए –
वृद्ध पुरुष व महिला के लिए संतुलित आहार ( भोज्य इकाइयाँ)

प्रश्न 2.
एक वृद्ध व्यक्ति के लिए एक दिन का आहार, आहार-आयोजन तालिका द्वारा स्पष्ट करिए।
उत्तर:
वृद्ध पुरुष की एक दिन की आहार – आयोजन तालिका


नोट – मसाले, हरी मिर्च, हरा धनिया, अदरक, लहसुन आदि का प्रयोग कम मात्रा में किया जाता है।

प्रश्न 3.
वृद्धावस्था को ध्यान में रखते हुए दिनभर के भोजन में भोज्य इकाइयों का विभाजन एवं उनके कुल योग की तालिका बनाइए।
उत्तर:
दिनभर के भोजन में भोज्य इकाइयों का विभाजन एवं योग

ऊपर दी गई आहार आयोजन तालिका में वृद्धावस्था को ध्यान में रखते हुए अर्द्ध ठोस व तरल भोज्य पदार्थों का समावेश किया गया है। साथ-ही-साथ थोड़ी-थोड़ी देर में विभिन्न व्यंजनों को सम्मिलित किया गया है। उपरोक्त आहार से वृद्ध व्यक्ति की पौषणिक आवश्यकताएँ पूर्ण हो जाएँगी। वृद्ध महिला के लिए आहार आयोजन आप स्वयं कर सकते हैं।