Rajasthan Board RBSE Class 10 Science Chapter 17 पृथ्वी के बाहर जीवन की खोज

पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

बहुचयनात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
एलियन शब्द का अर्थ है
(क) जादू
(ख) पृथ्वी के बाहर का जीव
(ग) विचित्र जीव
(घ) गाय जैसा जीव

प्रश्न 2.
पृथ्वी के बाहर जीवन पाया जा सकता है
(क) किसी भी तारे पर
(ख) कहीं भी
(ग) पृथ्वी जैसे ग्रह पर
(घ) किसी भी ग्रह पर

प्रश्न 3.
सौरमण्डल के बाहर जाने वाला पहला अन्तरिक्ष यान था
(क) चन्द्रयान-2
(ख) मंगलयान
(ग) पायोनियर-एक
(घ) पायोनियर-10

प्रश्न 4.
अन्तरिक्ष में होने वाली फुसफुसाहट को सुनने हेतु काम आने वाला यन्त्र है?
(क) रेडियो दूरसंवेदी
(ख) दूरदर्शी यंत्र
(ग) सूक्ष्मदर्शी यंत्र
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 5.
किस स्थान पर रह कर एक दिन में 15 बार सूर्योदय देख सकते हैं ?
(क) ध्रुवों पर
(ख) अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन पर
(ग) मंगल पर
(घ) चन्द्रमा पर

उत्तरमाला-
1. (ख)
2. (ग)
3. (घ)
4. (क)
5. (ख)

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 6.
पृथ्वी के बाहर मानव के रहने का स्थान कौनसा है?
उत्तर-
अभी तक ज्ञात नहीं है।

प्रश्न 7.
ग्लोबल वार्मिंग का संकट किस जीव के कारण उत्पन्न हुआ है?
उत्तर-
ग्लोबल वार्मिंग का संकट मानव ने उत्पन्न किया है।

प्रश्न 8.
पृथ्वी का भौतिक वातावरण व पृथ्वी पर पाए जाने वाले जीव मिलकर, एक सजीव इकाई की तरह कार्य करते हैं, इस अवधारणा को क्या कहते
उत्तर-
गैअन नियमन।

प्रश्न 9.
पृथ्वी जैसा ग्रह के बनते समय वातावरण अत्यधिक गर्म व विस्फोटक था, इसे ठण्डा होने में लगभग कितना समय लगा होगा?
उत्तर-
लगभग 50 करोड़ से एक अरब वर्ष का समय पिण्ड को ठण्डा होने में लगा होगा। लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 10.
हमारी गैलेक्सी आकाशगंगा में पृथ्वी के जैसे कितने अन्य ग्रह हो सकते हैं?
उत्तर-
आकाशगंगा सूर्य जैसे अरबों तारे हैं। इनमें से कई के सौर परिवार हैं। अनेक तारों के सौर परिवार में पृथ्वी जैसे ग्रह भी हैं। गैलेक्सी आकाशगंगा में एक अरब पृथ्वी के जैसे संसार हैं, इनमें से अनेक पृथ्वी की भाँति ही चट्टानें हैं। अब तक देखे गये ब्रह्माण्ड में लगभग 100 अरब आकाशगंगायें हैं।

प्रश्न 11.
एलियन शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर-
पृथ्वी के बाहर के जीव को ही एलियन कहते हैं।

प्रश्न 12.
डार्विन के अनुसार पृथ्वी पर पहले जीव की उत्पत्ति कैसे हुई होगी?
उत्तर-
डार्विन के अनुसार पहले पृथ्वी गर्म गोले के रूप में जन्मी, पृथ्वी धीरे-धीरे ठण्डी हुई तब इसका वातावरण बना। वातावरण में उपस्थित तत्वों के संयोग से सरल यौगिक व उनसे जटिल यौगिक बने। इन यौगिकों में जीवन के आधार अणु जैसे जल, अमीनो अम्ल, नाभिकीय अम्ल आदि भी थे। इन अणुओं के घनीभूत होने पर आकस्मिक रूप से प्रथम जीव की उत्पत्ति हुई। उस प्रथम जीव ने ही जैव विकास की प्रक्रिया द्वारा मानव सहित सभी जीवों को जन्म दिया।

प्रश्न 13.
पायोनियर 10 के छोड़े जाने के समय वैज्ञानिक किस बात से डर रहे थे?
उत्तर-
1972 में पायोनियर 10 के छोड़े जाने के समय वैज्ञानिकों को यह भय था कि पृथ्वी बाह्य की सभ्यता, हमारी किसी भूल से नाराज होकर हमें पृथ्वीवासियों पर हमला कर सकती है। यात्रा के दौरान पायोनियर 10 अन्तरिक्ष यान किसी विकसित सभ्यता के सम्पर्क में आ सकता था। विकसित सभ्यता अन्तरिक्ष यान को उन पर मानव सभ्यता द्वारा किया हमला मानकर हम पर पलटवार भी कर सकती थी। इस गलतफहमी को दूर करने के लिए अन्तरिक्ष यान पर एक प्लेट पर मानव स्त्री-पुरुष को मित्रता की मुद्रा में चित्रित किया गया तथा सांकेतिक भाषा में यान के पृथ्वी से भेजे जाने की बात प्रदर्शित की गई थी। अन्तरिक्ष यान बृहस्पति के पास से होते हुए हमारे सौरमण्डल से बाहर चला गया किन्तु बाह्य सभ्यता का कोई संकेत नहीं मिला है।

प्रश्न 14.
सृजनात्मक व विनाशात्मक बलों का क्या अर्थ है?
उत्तर-
जब किसी पिण्ड पर जीवन उत्पन्न हो जाता है तो उसके पश्चात् जीवन ग्रह के भौतिक वातावरण के साथ पुनर्भरण (feedback) संवाद करने लगता है। यह संवाद सकारात्मक व नकारात्मक दोनों प्रकार का हो सकता है। प्रायः यह नकारात्मक होता है और जीवन प्रारम्भिक अवस्था में ही नष्ट हो जाता है। जिन ग्रहों पर जीवन का अपने वातावरण से सकारात्मक पुनर्भरण संवाद स्थापित हो पाता है वहाँ पर ही जीवन का आगे विकास होता है जैसा कि पृथ्वी पर हुआ। इस बात के प्रमाण मिले हैं कि जीव व उनका भौतिक वातावरण सकारात्मक संवाद करते हुए साथ-साथ विकसित हुए हैं। इस सकारात्मक पुनर्भरण संवाद को वैज्ञानिक जेम्स लवलोक व लिन मार्गुलिस ने गैअन (धरती माता) नियमन नाम दिया है।

निबन्धात्मक प्रश्न
प्रश्न 15.
पायोनियर 10 के छोड़े जाने के समय पृथ्वी बाहर के जीवों के विषय में मानवीय सोच क्या थी? काल्पनिक मुसीबत से बचने के लिए क्या उपाय किए गए थे?
उत्तर-
रेडियो खगोलिकी के विकास के साथ यह ज्ञात होने लगा कि जिन रासायनिक अणुओं ने पृथ्वी पर जीवन को जन्म दिया वे अणु अन्तरिक्ष में बहुतायत से उपस्थित हैं। अतः अन्तरिक्ष में उपस्थित पृथ्वी जैसे असंख्य ग्रहों में से कुछ पर जीवन उपस्थित हो सकता है। 1972 में पायोनियर 10 के छोड़े जाने के समय तो पृथ्वी बाहर, मानव से बहुत अधिक विकसित, जीवन होने की संभावना स्पष्ट रूप से स्वीकारी जाने लगी थी। परन्तु वैज्ञानिकों को उस समय यह भी डर था कि पृथ्वी बाह्य की सभ्यता, हमारी किसी भूल से नाराज होकर हम पृथ्वीवासियों पर आक्रमण कर सकती है। पायोनियर 10 अन्तरिक्ष यान को बृहस्पति ग्रह के पास से होते हुए हमारे सौरमण्डल से बाहर जाना था। इस बात का भी डर था कि अपनी अनन्त यात्रा के दौरान पायोनियर 10 अन्तरिक्ष यान किसी विकसित सभ्यता के सम्पर्क में आ सकता था। विकसित सभ्यता पायोनियर 10 अन्तरिक्ष यान को उन पर मानव सभ्यता द्वारा किया हमला मान हम पर पलटवार भी कर सकती थी। इस गलतफहमी को दूर करने के लिए पायोनियर 10 अन्तरिक्ष यान पर एक प्लेट पर मानव स्त्री-पुरुष को मित्रता की मुद्रा में चित्रित किया गया तथा सांकेतिक भाषा में यान के पृथ्वी से भेजे जाने की बात प्रदर्शित की गई थी। योजना अनुसार पायोनियर 10 अन्तरिक्ष यान बृहस्पति के पास से होते हुए हमारे सौरमण्डल से बाहर चला गया किन्तु किसी बाह्य सभ्यता का कोई संकेत नहीं मिला है।
RBSE Solutions for Class 10 Science Chapter 17 पृथ्वी के बाहर जीवन की खोज 15

प्रश्न 16.
अपने आपको अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन में मानकर दिनचर्या का वर्णन करिए।
उत्तर-
अन्तरिक्ष स्टेशन पर पहुँचकर सर्वप्रथम सम्पूर्ण स्टेशन, कमरे व प्रयोगशालाओं का निरीक्षण किया। ऊर्जा उत्पादन के सौर पैनल को देखा। स्टेशन पर निरीक्षण के दौरान जो घटक खराब थे उन्हें उपलब्ध घटकों की सहायता से बदल दिया गया। पृथ्वी से साथ लाये हुए भोजन को देखा तथा निश्चित तिथि पश्चात् पृथ्वी से भोजन भेजने की तारीख नोट की। पेय पदार्थों व अन्य सामग्री की भी सूची तैयार की व पृथ्वी पर नेट, टेलीविजन के द्वारा सूचना भेजी गई। वहाँ पर भोजन चिमटी की सहायता से खाता था व पेय पदार्थों को स्ट्रॉ की सहायता से सीधा मुँह में खींचता था। ट्रे पर चुम्बक लगा हुआ था जिस पर ही चिमटी रखता था अन्यथा वह हवा में तैरने लगती थी।

स्टेशन का सम्पूर्ण निरीक्षण उपरान्त व्यवस्थित होकर जो निर्देश दिये गये थे, उसकी रूपरेखा बनाकर कार्य प्रारम्भ कर दिया। जैसे ही परिणाम व जानकारी मिलती, उसकी सूचना चित्र सहित पृथ्वी पर भेजता रहा। नमूने का संग्रह कर लिया। मुझे प्रतिदिन बन्द कमरे में ही शौच, भोजन, आराम व कार्य करना पड़ता था। वहाँ रहते। हुए मेरे पास समय कम था परन्तु लक्ष्य अधिक थे। अतः मुझे कम समय में ही अधिक व्यस्त रहकर सभी निर्देशित बिन्दुओं पर कार्य करना था। जब भी मैं कमरे से बाहर आकर कोई कार्य करता था तो सबसे पहले अन्तरिक्ष सूट पहनकर ही बाहर आता था। कभी-कभी बागवानी का कार्य भी करता था। पृथ्वी से मेरा सम्पर्क निरन्तर बना रहता था। किसी भी क्षण पृथ्वी से कोई सूचना आती तो उसका निष्पादन अतिशीघ्र करना होता था। वहाँ के कुछ कमरों में वायुमण्डलीय दाब पर हवा भरी होती है, जिससे मुझे कमरे में अन्तरिक्ष सूट पहनने की आवश्यकता नहीं रहती थी।

प्रश्न 17.
पृथ्वी के बाहर जीवन के विषय में वर्तमान वैज्ञानिक सोच को। समझाइए। आपकी अपनी सोच क्या है?
उत्तर-
पूर्व में तो कल्पनाशक्ति के सहारे बिना किसी प्रमाण के तरह-तरह की कहानियाँ रची गईं। कहा जाता था कि आकाशीय पिण्डों पर विविध प्रकार के जीव रहते हैं। पृथ्वी से बाहर के जीव को एलियन कहते थे। एलियन पर, उड़नतश्तरी आदि पर फिल्में भी बनी हैं किन्तु यह सब अप्रमाणित हैं । विज्ञान के विकास उपरान्त इस विषय पर कार्य हो रहा है व खोज चल रही है। देखा जा रहा है कि अन्य पिण्डों पर भी जीवन है या नहीं ? अन्तरिक्ष की जानकारी से यह ज्ञात हुआ कि हमारी अपनी आकाशगंगा में सूर्य जैसे अरबों तारे हैं। इनमें से अनेक के सौर परिवार हैं। अनेक तारों के सौर परिवार में पृथ्वी जैसे ग्रह भी हैं जहाँ जीवन हो सकता है। खगौलिकी के विकास आधार पर यह कहा जा रहा है कि जिन अणुओं से जीव की उत्पत्ति पृथ्वी पर हुई है, वैसे अणु अन्तरिक्ष में पर्याप्त मात्रा में हैं, इससे यह विश्वास बढ़ा है कि अन्य पिण्डों पर जीवन हो सकता है।

इस विषय को पुष्ट करने के लिए 1972 में पायोनियर 10 को छोड़ा गया जो बृहस्पति ग्रह के पास से होते हुए हमारे सौरमण्डल से बाहर गया किन्तु जीवन होने के कोई संकेत प्राप्त नहीं हुए। वैज्ञानिकों को विश्वास है कि अगले 20 या 30 वर्षों में एलियन के विषय में पक्के प्रमाण जुटा लिये जायेंगे। अन्य ग्रहों पर जीवन की उत्पत्ति उस ग्रह के वातावरण पर निर्भर है, वहाँ इस प्रकार का वातावरण होना चाहिए जिसमें सकारात्मक संवाद हो वे जीव के जीवन के अनुकूल हो। ग्रहों को प्रारम्भिक वातावरण बहुत अस्थिर होता है। जीवन को बनाए रखने के लिए ग्रह के तापक्रम को एक सीमा में बनाए रखना होता है।

इस सम्बन्ध में हमारी सोच अनुसार अभी तक किसी भी अन्य ग्रह पर जीव होने के प्रमाण नहीं हैं। यदि वे हैं भी तो सूक्ष्मजीव के रूप में हैं। दिन प्रतिदिन इस विषय की सोच के लिए अथक प्रयास किये जा रहे हैं। अन्तरिक्ष में स्टेशन व प्रयोगशालायें बनाई जा चुकी हैं, जहाँ से विभिन्न प्रकार की जानकारियाँ व चित्र नेट के द्वारा पृथ्वी पर आ रहे हैं। आशा है कि अगले 20 से 30 वर्षों में इस सम्बन्ध में अधिक जानकारी मिले।

प्रश्न 18.
उपग्रहों के महत्त्व को विस्तार से समझाइये।
उत्तर-
उपग्रहों से प्रारम्भ में वायुमण्डल की जानकारी प्राप्त की गई। कृत्रिम उपग्रह पृथ्वी के ऊपर रह वायुमण्डल व पृथ्वी की सतह के विषय में जो सूचनाएँ उपलब्ध कराते हैं, वे पृथ्वी की सतह से नहीं प्राप्त की जा सकतीं । आज विश्व की संचार व्यवस्था पूर्णतः कृत्रिम उपग्रह आधारित हो गई है। इंटरनेट के ठीक से कार्य नहीं करने पर टेलीविजन के साथ व्यापारिक गतिविधियों पर भी विराम लग जाता है। दूसरे देशों की जासूसी करने के साथ दूसरे देश के कृत्रिम उपग्रह नष्ट करके इसे आर्थिक संकट में डाला जा सकता है। इससे कृत्रिम उपग्रहों का सैन्य महत्त्व भी हो गया है। अलग-अलग ग्रहों की जानकारी प्राप्त करना भी इसका लक्ष्य है। सौरमण्डल के ग्रहों के साथ-साथ गैलीलियो, फोबोस, टाइटन, यूरोपा आदि उपग्रहों का अध्ययन भी किया जा रहा है। इसका महत्त्व क्षुद्र ग्रह भी है क्योंकि इनमें कुछ कीमती धातुएँ व अन्य तत्व पाये जाते हैं। कई देश इसकी खनन तैयारी करने का प्रयास कर रहे हैं। ये उपग्रह देश के लिए भूगोलिक, दूरसंवेदन की सूचनाएँ भेजते हैं। मौसम आदि के विषय में महत्त्वपूर्ण जानकारी जुटाकर भेज रहे हैं। रेडियो, दूरदर्शन, टेलीफोन, इन्टरनेट, टेलीमेडिसिन, दूरशिक्षा आदि के संचालन में मदद कर रहे हैं। भारत ने अपना भूतुल्यकाली उपग्रह प्रेक्षण वाहन विकसित किया जिनका उपयोग भूतुल्यकाली यानों के प्रक्षेपण में किया जाता है। इन्टरनेट के विकास के बाद मानव जीवन में कृत्रिम उपग्रहों का आर्थिक महत्त्व बढ़ गया है। कोई देश अपने दुश्मन के उपग्रह को नष्ट कर उसको हानि पहुँचा सकता है।

प्रश्न 19.
विश्व अन्तरिक्ष अभियान में भारत का महत्त्व समझाइये।।
उत्तर-
भारत में अन्तरिक्ष अनुसंधान का प्रारम्भ 1948 में अहमदाबाद में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला के रूप में हुआ। 1962 में भारत सरकार ने डॉ. विक्रम साराभाई के नेतृत्व में भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान समिति का गठन किया तथा इस समिति ने तिरुवनन्तपुरम् के पास थुम्बा रॉकेट प्रक्षेपण स्टेशन निर्मित किया। भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान समिति ने इस संस्थान को 1969 में इसरो में बदल दिया। भारत ने प्रथम रॉकेट रोहिणी-75 को 1969 में छोड़ा। भारत ने रूस से समझौता कर 1975 में रूसी रॉकेट की सहायता से पहला अन्तरिक्ष यान आर्यभट्ट अन्तरिक्ष में भेजा था। यह यान उड़ान भरकर पृथ्वी की कक्षा में स्थापित हो गया तथा भारत ने अन्तरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में 11वाँ स्थान बना लिया। इसके पश्चात् भास्कर श्रृंखला के दो उपग्रह भी रूस की सहायता से भेजे। 1981 में एप्पल उपग्रह यूरोपियन अन्तरिक्ष एजेन्सी के एरियन रॉकेट की मदद से भेजा, जिसे पृथ्वी से 36,000 किमी. ऊँचाई पर स्थापित किया गया। इस ऊँचाई पर स्थित उपग्रह की घूर्णन गति पृथ्वी के बराबर होती है, जिससे यह सभी जानकारियाँ हमारे देश को भेजने लगा।

अन्तरिक्ष अभियान के दो प्रमुख भाग रॉकेट व अन्तरिक्ष यान होते हैं। रॉकेट अन्तरिक्ष यान को ऊपर ले जाने वाले वाहन का कार्य करता है। भारत ने जल्दी ही उपग्रह प्रक्षेपक वाहन-3 (S.L.V.-3) के रूप में ऐसा रॉकेट तैयार किया जो भारतीय उपग्रहों को अन्तरिक्ष में ले जाने में सक्षम था। अपने स्वयं के रॉकेट से अन्तरिक्ष यान भेजने की क्षमता प्राप्त कर भारत विश्व के छठे स्थान पर आ गया। इसके बाद तो भारत ने अनेक उपग्रह अन्तरिक्ष में भेजे हैं, जिनसे भूगोलिक, दूरसंवेदन, मौसम आदि विषय की जानकारी जुटाकर पृथ्वी पर भेज रहे हैं। ये उपग्रहे रेडियो, दूरदर्शन, टेलीफोन, इन्टरनेट, टेलीमेडिसिन, दूरशिक्षा आदि के संचालन में मदद कर रहे हैं। भारत को बड़ी सफलता शक्तिशाली रॉकेट ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण वाहन (PSLV) के विकास से मिली। इस वाहन की विश्वसनीयता के कारण प्रत्येक देश इस अन्तरिक्ष वाहन से ही अपना वाहन भेजना पसन्द करते हैं। इस वाहन में संचालन का खर्च भी अन्य देशों की तुलना में कम पड़ता है। इस प्रकार हम आज विदेशी मुद्रा भी कमा रहे हैं।

जून, 2016 में एक साथ 20 उपग्रह अन्तरिक्ष में भेजकर भारत ने नया रिकॉर्ड स्थापित किया, जिसमें से 17 उपग्रह विदेशी थे। भारत ने अपना भूतुल्यकारी उपग्रह प्रेक्षण वाहन भी बना लिया है। शक्तिशाली रॉकेटों के बल पर भारत ने 2008 में चन्द्रमा की कक्षा में चन्द्रयान-प्रथम को स्थापित कर चन्द्रमा की सतह पर भारत का झण्डा लगाने व चन्द्रमा पर जल खोजने में सफलता प्राप्त की। मंगल की कक्षा में मंगलयान को स्थापित कर भारत ने प्रथम स्थान बना लिया है। भारत जल्दी ही चन्द्रयान-द्वितीय को चन्द्रमा की कक्षा में स्थापित कर एक गाड़ी चन्द्रमा की सतह पर उतारने वाला है। वर्तमान में सूर्य पर आदित्ययान भेजने की योजना बनाई जा रही है।

यही नहीं, निजी प्रयास से टीम इंडस 2017 में चन्द्रमा पर रोबोट उतारने वाला है। मून एक्सप्रेस नामक एक निजी कम्पनी ने पृथ्वी से चाँद तक पहुँचाने वाली सेवा प्रारम्भ करने की अनुमति नासा से प्राप्त कर ली है।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1.
अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन पृथ्वी से कितनी दूरी पर है?
(अ) 230 से 235 कि.मी.
(ब) 330 से 335 कि.मी.
(स) 330 से 435 कि.मी.
(द) अनन्त दूरी पर

प्रश्न 2.
अन्तरिक्ष स्टेशन एक दिन में पृथ्वी के कितने चक्कर लगा लेता है?
(अ) 12 से अधिक
(ब) 13 से अधिक
(स) 14 से अधिक
(द) 15 से अधिक

प्रश्न 3.
सकारात्मक पुनर्भरण संवाद को गैअन नियमन नाम देने वाले थे
(अ) जैम्स लवलोक
(ब) लिन मार्गुलिस
(स) अ व ब दोनों
(द) आदित्य चौपड़ा

प्रश्न 4.
जीवन के आधार अणु होते हैं
(अ) जल
(ब) अमीनो अम्ल
(स) नाभिकीय अम्ल
(द) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 5.
इसरो की स्थापना में किस भारतीय वैज्ञानिक की अहम भूमिका रही
(अ) डॉ. सी.वी. रमन
(ब) डॉ. होमी जहाँगीर भाभा
(स) डॉ. विक्रम साराभाई
(द) डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम

प्रश्न 6.
भारत का प्रथम अन्तरिक्ष यान था|
(अ) आर्यभट्ट
(ब) रोहिणी
(स) गूगल
(द) एप्पल

प्रश्न 7.
भारत का प्रथम रॉकेट था
(अ) रोहिणी-35
(ब) रोहिणी-75
(स) रोहिणी-85
(द) रोहिणी-95

उत्तरमाला-
1. (स)
2. (द)
3. (स)
4. (द)
5. (स)
6. (अ)
7. (ब)

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
फिल्म ‘कोई मिल गया’ पृथ्वी से बाहर जीवन की खोज के सन्दर्भ में किस पर आधारित है ?
उत्तर-
एलियन पर आधारित है।

प्रश्न 2.
अन्तरिक्ष स्टेशन में गुरुत्व बल क्यों होता है?
उत्तर-
पृथ्वी के निकट होने के कारण।

प्रश्न 3.
कौनसा कृत्रिम उपग्रह बृहस्पति की परिक्रमा कर रहा है?
उत्तर-
जूनो उपग्रह।

प्रश्न 4.
पृथ्वी पर सरल पूर्वकेन्द्रिकी कोशिका बनने के प्रमाण कब मिले हैं ?
उत्तर-
3.5 अरब वर्ष पूर्व बनने के प्रमाण मिले हैं।

प्रश्न 5.
अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन कहाँ पर स्थापित है?
उत्तर-
पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित उपग्रह है।

प्रश्न 6.
अन्तरिक्ष स्टेशन निर्माण में किनकी भागीदारी है?
उत्तर-
जापान, कनाडा, रूस, अमेरिका व यूरोपियन स्पेस एजेन्सी की भागीदारी है।

प्रश्न 7.
अन्तरिक्ष स्टेशन पर ऊर्जा उत्पादन के लिए क्या व्यवस्था है?
उत्तर-
सौर पैनल से ऊर्जा उत्पादित होती है।

प्रश्न 8.
कौनसा अन्तरिक्ष यान 1972 में छोड़ा गया था?
उत्तर-
पायोनियर 10

प्रश्न 9.
बाहरी जीवन की खोज के लिए 1999 में क्या प्रयास किया गया?
उत्तर-
सर्च फोर एक्स्ट्रा टेरेस्ट्रीयल इन्टेलीजेन्स की स्थापना की गई।

लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
वैज्ञानिक जगत में अन्तरिक्ष में जीवन के लिए क्या सोच है?
उत्तर-
वैज्ञानिक जगत में माना जा रहा है कि अन्तरिक्ष में जीवन प्रचुर संख्या में उपस्थित है। शनिग्रह के उपग्रह टाइटन पर उपस्थित द्रव मीथेन के सागर में जीवन होने की सम्भावना प्रकट की गई है। अपने सौरमण्डल के बृहस्पति ग्रह के उपग्रह यूरोपा पर भी जीवन खोजा जा रहा है। यह जीवन सूक्ष्म जीवों के रूप में निरन्तर पृथ्वी पर आता रहता है। यह भी माना जाता है कि जीवन की उत्पत्ति पृथ्वी पर नहीं हुई थी। पृथ्वी पर जीवन सूक्ष्म रूप में बाहर अन्तरिक्ष से आया है। अनेक बार अन्तरिक्ष से आए जीवन को प्राप्त करने के दावे किये गये हैं परन्तु वे दावे पूरी तरह से प्रमाणित नहीं हो सके हैं।

प्रश्न 2.
खगोल जैव वैज्ञानिकों ने पृथ्वी पर जीवन के विकास के कुछ अवरोधक बताये हैं, उन अवरोधकों को बताइए।
उत्तर-
ये अवरोधक निम्न प्रकार से हैं|

  • सामान्य रासायनिक अणुओं से जनन सक्षम अणुओं की उत्पत्ति पहला अवरोधक रहा होगा।
  • इन अणुओं के संयोग से सरले पूर्वकेन्द्रिकी कोशिका की उत्पत्ति दूसरा अवरोधक रहा होगा।
  • पूर्वकेन्द्रिकी से सुकेन्द्रिकी कोशिका की उत्पत्ति तीसरा अवरोधक रहा होगा। इस बात की पुष्टि इस तथ्य से होती है कि पृथ्वी पर सरल पूर्वकेन्द्रिकी कोशिका 3.5 अरब वर्ष पूर्व बनने के प्रमाण मिले हैं। इसके पश्चात् लगभग 1.8 अरब वर्ष तक जीवन का विकास रुका रहा था।

प्रश्न 3.
क्या अन्तरिक्ष में रहने पर यात्रियों के स्वास्थ्य पर कोई प्रभाव होता है तथा यान को भी कोई खतरा हो सकता है?
उत्तरे-
अन्तरिक्ष में भारहीनता के कारण यात्रियों के स्वास्थ्य पर अनेक विपरीत प्रभाव पड़ते हैं। अतः उन्हें व्यायाम करना आवश्यक है, इसके लिए वहाँ ट्रेडमिल की व्यवस्था की गई है। अन्तरिक्ष में सूनेपन व छोटे कमरे में रहने पर कई प्रकार की मनोवैज्ञानिक परेशानियाँ भी उत्पन्न होती हैं। यान को भी दुर्घटना से खतरा है क्योंकि पृथ्वी के समीप के अन्तरिक्ष में बहुत कचरा एकत्रित हो चुका है। काम में आ चुके रॉकेट या उनके टुकड़े, निष्क्रिय हो चुके कृत्रिम उपग्रह, उपग्रह को नष्ट करने के लिए छोड़े गये हथियार, प्राकृतिक सूक्ष्म उल्का पिण्ड इत्यादि बेकार सामान अन्तरिक्ष स्टेशन से टकराकर परेशानी पैदा कर सकते हैं। अन्तरिक्ष में चक्कर लगाते पिण्डों की तेज गति के कारण छोटे से टुकड़े की टक्कर बड़ा नुकसान कर सकती है।

प्रश्न 4.
क्या पृथ्वी के बाहर जीवन योग्य वातावरण का निर्माण सम्भव है?
उत्तर-
पृथ्वी का वह कौनसा गुण है जो इसे जीवन योग्य बनाता है। पृथ्वी पर सूर्य (तारे) से न तो इतना अधिक प्रकाश आता है जिससे सम्पूर्ण जल वाष्प । बनकर उड़ जावे और न ही इतना कम आता है जिससे सम्पूर्ण जल बर्फ में जमकर पत्थर की भाँति कठोर हो जावे। पृथ्वी का यही गुण इसे जीवन योग्य बनाता है। अन्तरिक्ष में पृथ्वी के अतिरिक्त यदि जीवन होगा तो वह किसी ऐसे ग्रह पर होगा जो अपने तारे से पृथ्वी जितनी दूरी पर होगा अर्थात् जिस ग्रह पर पानी द्रव अवस्था में रह सकता हो। ऐसे ग्रह पृथ्वी की जैसे होंगे। यद्यपि अन्तरिक्ष में अनेक पृथ्वी जैसे ग्रह खोज लिये गये हैं जिन पर जीवन है या नहीं, इस बात का पता लगाने के प्रयास किये जा रहे हैं। अभी तक पृथ्वी के बाहर कहीं भी जीवन नहीं है तथा न ही वहाँ पर जीवन योग्य वातावरणं का निर्माण सम्भव है। हालाँकि शोध चल रहे हैं, सम्पूर्ण ज्ञान होने पर ही सम्भावना व्यक्त की जा सकती है।

प्रश्न 5.

  • जून 2016 में भारत ने एक साथ कितने उपग्रह अंतरिक्ष में छोड़े?
  • एलियन क्या है?
  • भारत की अंतरिक्ष एजेन्सी का नाम लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2017-18 )

उत्तर-

  • जून 2016 में भारत ने एक साथ 20 उपग्रह अंतरिक्ष में छोड़े।
  • पृथ्वी से बाहर के जीव को एलियन कहते हैं ?
  • भारत की अंतरिक्ष एजेन्सी का नाम है-इसरो (ISRO)

प्रश्न 6.
भारत के प्रथम अन्तरिक्ष यान का नाम लिखिए। भारत द्वारा छोड़े गये उपग्रहों का महत्त्व समझाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2018)
उत्तर-
भारत ने पहला अन्तरिक्ष यान आर्यभट्ट अन्तरिक्ष में भेजा था। इन उपग्रहों से मौसम आदि के विषय में महत्त्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है। रेडियो, दूरदर्शन, टेलीफोन, इंटरनेट, टेलीमेडीसन, दूरशिक्षा आदि के संचालन में इन उपग्रहों से सहायता प्राप्त होती है।

निबन्धात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन पर विस्तार से बताइए।
उत्तर-
जापान, कनाडा, रूस, अमेरिका व यूरोपियन स्पेस एजेन्सी की भागीदारी से अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किया गया है। वर्तमान में चीन भी अपना अन्तरिक्ष स्टेशन बनाने के लिए प्रयास कर रहा है। यह पृथ्वी की कक्षा में उपस्थित सबसे बड़ी कृत्रिम संरचना है। यह स्टेशन बिना किसी दूरदर्शी यंत्र के सूर्योदय से पूर्व व सूर्यास्त के बाद श्वेत गतिशील बिन्दु के रूप में दिखाई देता है। वृत्ताकार पथ पर यह पृथ्वी से 330 से 435 किलोमीटर की दूरी बनाए रखता है व एक दिन में पृथ्वी के 15 से अधिक चक्कर लगा लेता है।
RBSE Solutions for Class 10 Science Chapter 17 पृथ्वी के बाहर जीवन की खोज 1
इस स्टेशन पर अनेक कक्ष हैं जिनमें रहने के लिए व प्रयोगशालायें हैं। यहाँ बागवानी भी की जाती है। ऊर्जा का उत्पादन सौर पैनलों द्वारा होता है। कमरों में वायुमण्डलीय दाब पर हवा भरी होती है, जिससे अन्तरिक्ष यात्री बिना अन्तरिक्ष सूट पहने आराम से कई महीने रहकर कार्य कर सकते हैं परन्तु बाहर आने पर उन्हें अन्तरिक्ष सूट पहनना पड़ता है। इस स्टेशन को बनाने वाले घटकों को पृथ्वी पर बनाकर रूसी व अमेरीकी रॉकेटों की सहायता से अन्तरिक्ष में भेजा गया है जहाँ अन्तरिक्ष में उन्हें जोड़-जोड़कर यह रूप दिया गया। पुराने व खराबे भागों को समयसमय पर बदला जाता है।

पृथ्वी के नजदीक होने के कारण स्टेशन पर गुरुत्व बल होता है किन्तु कक्षीय गति के कारण यान स्वतन्त्रतापूर्वक गिरती वस्तु की तरह होता है। स्वतन्त्रतापूर्वक गिरती वस्तु भारहीनता की स्थिति में होने के कारण यह अन्तरिक्ष में टिक पाती है। नवम्बर 2000 से यह स्टेशन है, जिस पर यात्री जाते व आते रहते हैं। भारतीय मूल की अमेरिकन नागरिक सुनिता विलियम्स एक से अधिक बार कार्य से आ-जा चुकी है। विलियम्स अपने साथ गीता, गणेश की मूर्ति व कुछ समोसे भी लेकर गई थी। यहाँ पर चयनित यात्री विशेष उद्देश्य के लिए ही जाते हैं। रूस के अन्तरिक्ष यान । सोयूज में एक सीट खाली रहती है। इस सीट का किराया चुकाकर वह यात्री जा सकता है। वहाँ के यात्री रेडियो, टेलीविजन, इन्टरनेट के माध्यम से पृथ्वी के कार्यक्रमों से जुड़े रहते हैं तथा वार्ता भी कर सकते हैं। अन्तरिक्ष यात्री समय-समय पर अपने परिवार के सदस्यों से भी बात करते रहते हैं।

इनका भोजन प्लास्टिक थैलियों में भेजा जाता है। पेय पदार्थों को स्ट्रॉ की सहायता से ही मुँह में खींचना होता है, खाने की चीजों को चिमटी से खाना पड़ता है व चिमटी को ट्रे में रखने के लिए चुम्बक का प्रयोग करते हैं वरना वह हवा में तैरने लगती है। यद्यपि लम्बे समय तक अन्तरिक्ष में रहने पर स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है अतः कुछ समय पश्चात् पुनः पृथ्वी पर आ जाते हैं। पृथ्वी के पास अन्तरिक्ष में अधिक कचरा एकत्रित (कार्य में आ चुके रॉकेट, उनके निष्क्रिय भाग, कृत्रिम उपग्रह को निष्क्रिय करने के लिए छोड़े गये हथियार, प्राकृतिक सूक्ष्म उल्का पिण्ड) हो गया है। इससे अन्तरिक्ष स्टेशन से टकराने का खतरा है। अन्तरिक्ष में। चक्कर लगाते पिण्डों की तेज गति के कारण छोटे से टुकड़े की टक्कर बड़ा नुकसान कर सकती है।