Rajasthan Board RBSE Class 10 English Literature Prose Chapter 2 On Violence

Activity 1: Comprehension
A. Choose the correct alternatives:

1. Physical violence kills people:
(a) incidentally (b) willingly
(c) unwillingly (d) none

2. Violence in individuals comes:
(a) by birth (b) after birth
(c) through education (d) none.

3. While showing violence to others, man
(a) very thoughtful about his own safety (b) not very much cruel
(c) conscious about his family (d) even ready to be killed

4. A person without the sense of love is
(a) better than animals (b) worse than animals
(c) equal to animals (d) worse than snakes

5. The state of bliss in human mind may be generated by
(a) violence (b) mercy
(c) education (d) destruction

Answers.
1. (b), 2. (b), 3. (d), 4. (b), 5. (c).

B. Answer the following questions in about 30 40 words each:

Question 1.
What are the characteristics of physical violence?
शारीरिक हिंसा के क्या लक्षण हैं?
Answer.
Physical violence is full of cruelty, antagonism and hatred. It is always done without giving thought. The intention is to kill or hurt the other people knowingly.

शारीरिक (भौतिक) हिंसा क्रूरता, नफरत और विरोध से पूर्ण होता है। यह हमेशा बिना कुछ सोचे-समझे ही किया जाता है। इसके तहत किसी दूसरे व्यक्ति को जान-बूझ कर मार देने की भावना होती है।

Question 2.
What are the characteristics of inward violence?
अंतर्मन की हिंसा के क्या लक्षण होते हैं?
Answer.
Inward violence is full of dislike, hate and criticism for other people. Its purpose is to change people by force to our own way of thinking. It is related to both quarrelling with the others and oneself.

अंतर्मन की हिंसा किसी अन्य व्यक्ति को न पसंद करना, उसके प्रति अपने अंदर घृणा का भाव पालना और उसकी निंदा करना, से पूर्ण होता है। इसका उद्देश्य किसी दूसरे व्यक्ति को अपनी धारणा के अनुसार चलने के लिए वाध्य करना होता है इसका संबंध स्वयं से और किसी दूसरे के साथ संघर्ष, दोनों से होता है।

Question 3.
What is more important than having a Ph.D. degree?
पीएच. डी. की डिग्री होने से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण है?
Answer.
Love, affection, kindness and consideration are more important than having a Ph.D. degree. In the absence of these values people tend to adopt violent ways of life. Hence, they contribute to the world of destruction.

दूसरों के प्रति प्रेम, स्नेह, दयालुता और विचार करने की क्षमता पीएच. डी. की डिग्री होने से कहीं अच्छा है। इन तमाम मूल्यों के अभाव में व्यक्ति अपने जीवन में हिंसा के मार्ग को अपना लेता है। और इस तरह से एक व्यक्ति विश्व में अपना योगदान हिंसा के रूप में देता है।

Question 4.
How can a person become rational?
किस तरह कोई व्यक्ति समझदार हो सकता है?
Answer.
Antagonism, hate, cruelty, criticism and anger-all are natural in man. Education helps man go beyond all these weaknesses. Obviously, it makes man a rational human being.

क्रूरता, क्रोध, विरोध और घृणा-ये सभी मनुष्य के स्वभाविक गुण हैं। शिक्षा मनुष्य को इन सभी दुर्गुणों से मुक्त होने में मददगार होती है। निश्चय ही यह मनुष्य को समझदार व्यक्ति बनाने का काम करता है।

Question 5.
What does man realize in older age?
वृद्धावस्था में मनुष्य क्या अनुभव करता है?
Answer.
In older age man realizes the misery of his life. He finds that his life is full of sorrow and confusion. He constantly seeks love and affection. His life was worse than the animals.

वृद्धावस्था में मनुष्य आने जीवन की दुर्दशा का अनुभव करता है। वह पाता है कि उसका पूरा जीवन गलतियों और भ्रांतियों से भरा है। वह स्थायी प्रेम और स्नेह की उम्मीद करता है। उसका जीवन तो पशुओं से भी बदतर स्थिति को प्राप्त हो चुका होता है।

Question 6.
When does human life become full of joy?
मनुष्य का जीवन कब आनंद से पूर्ण होता है?
Answer.
When human being is free, lives happily and joyously without hate and conflict with others. Their life become quite different with a clear meaning and full of joy.

जब मनुष्य स्वतंत्र होता है, जीवन किसी दूसरे से बिना किसी संघर्ष और घृणा के खुशियों और आनंद से भरा होता है। उसका जीवन औरों से बिलकुल अलग अर्थपूर्ण और आनंद से परिपूर्ण होता है।

C. Answer the following questions in about 60 words each:
Question 1.
How does education contribute to overpower violence?
शिक्षा किस प्रकार से हिंसा पर नियंत्रण करने में सहायक सिद्ध होता है?
Answer.
Education can help prevent violence through formal education. Formal education provides an opportunity for children to learn important social skills, critical thinking skills, problem solving strategies, and communication skills. The presence of violence, antagonism, hate and cruelty is natural in man. Anger and ugly criticism also incite man to adopt violent means. These weaknesses make him a really brutal man, who has a clever brain to defend his brutal acts. Education is an effective weapon, which helps him not only get through examinations and get jobs, but become a rational being also. Only an educated man can have a beautiful and healthy mind.

शिक्षा अपने औपचारिक स्वरूप के माध्यम से हिंसा को रोकने में सहयोग करता है। औपचारिक शिक्षा बच्चों को महत्त्वपूर्ण सामाजिक कौशल सीखने,समीक्षात्मक विवेक क्षमता, समस्याओं के समाधान की रणनीति, संप्रेषण की क्षमता का विकास करने का अवसर प्रदान करता है। हिंसा, विरोध की प्रवृत्ति,करत और क्रूरता-इन सभी मानवों के स्वभाविक गुण हैं। क्रोध और भद्दी आलोचना, भी मनुष्य को हिंसक बनने में मददगार होता है। ये तमाम कमजोरियां वास्तव में मनुष्य को हिंसक बनाते हैं। लेकिन जिस व्यक्ति के पास कुशाग्र बुद्धि होता है तो वह उसे हिंसक बनने से रोकता है। शिक्षा इस मामले में एक सशक्त हथियार है जो न केवल उसे परीक्षा पास करने और नौकरी पाने में सहायक होता है बल्कि एक समझदार व्यक्ति भी बनाता है। र्फि एक शिक्षित व्यक्ति के पास ही एक सुन्दर और स्वस्थ मस्तिष्क होता है।

Question 2.
What are the author’s views about the old and the new cultures?
पुरानी और नई संस्कृति के प्रति लेखक का क्या विचार है?
Answer.
The author does not support the old culture. He thinks that it is dead, buried, burnt, exploded and vaporized. It is full of violence and aggression, which have produced all the confusions and misery in the society. On the other hand, the author thinks that the new culture being free from violence has power to change the world. A new culture can teach people about the outward cruelty of man to man in the name of God, religion, self-importance and security of the family. The world needs a new culture, a new Society.

लेखक पुरानी संस्कृति का कतई समर्थन नहीं करते। वे समझते हैं कि वह मर चुका है, दफन हो चुका है, जल चुका है, फट चुका है और वाष्पित हो चुका है। यह हिंसा और शत्रुतापूर्ण व्यवहार से पूर्ण है जो समाज में भ्रम और दुर्दशा को प्रदर्शित करता है। दूसरी ओर लेखक सोचते हैं कि नई संस्कृति हिंसा से मुक्त होगा जिसके पास विश्व को बदल देने की क्षमता है। एक नई संस्कृति मनुष्य को मनुष्य के साथ ईश्वर, धर्म, अपने महत्त्व और परिवार की सुरक्षा के नाम पर हिंसा की भावना से बाहर निकलने का शिक्षा देगा। आज विश्व को एक नई संस्कृति, एक नए समाज की आवश्यकता है।

Question 3.
How can the world of Nature be best enjoyed?
किस प्रकार से संसार के प्राकृतिक स्वरूप का बेहतर ढंग से आनंद ले सकते हैं?
Answer.
The world of nature can best be enjoyed when we have an open mind and heart. We can enjoy the presence of nature when we are free of fear and violence. Only some people know about this extraordinary bliss, which is part of education. A peaceful mind can feel a deep silence all around. A sense of great beauty and loneliness helps us enjoy this supreme joy of nature. People must get education to enjoy the world of nature.

जब हमारा मस्तिष्क और हृदय खुला होता है तो हम संसार के प्राकृतिक स्वरूप का बेहतर आनंद ले सकते हैं। जब हम हिंसा और भय से मुक्त होते हैं तो हम प्रकृति की उपस्थिति का आनंद लेते हैं। बहुत कम ही लोग इस परमानंद के वारे में जानते हैं, जो कि शिक्षा का ही एक स्वरूप है। एक शांत | मन अपने चारों ओर गहन नीरवता का अनुभव करता है। एक अत्यंत ही रमणीयता और एकांतता का भाव हमें प्रकृति के परमानंद का अनुभव करने की शिक्षा देता है। लोगों के लिए आवश्यक है कि वह प्रकृति का बेहतरीन आनंद प्राने के लिए निश्चित तौर पर शिक्षित हो।

Question 4.
When does life become a terrible business?
जीवन किस समय भयावह वयवसाय बन जाता है?
Answer.
Violence, antagonism, hate, cruelty, ugly criticism and anger are inherent weaknesses in man. The author desires that human beings should be given proper knowledge about all these drawbacks of life because they only instigate man to adopt violent means When human beings are exposed to the reality of these weaknesses, they are forced to think about its consequences, otherwise they will also become part of the rest of the world. They lead a life devoid of love. affection, charity and generosity. The absence of these human values made life a terrible business.

हिंसा, विरोध, घृणा, क्रूरता, निंदा और क्रोध मनुष्य की स्वभाविक कमजोरियां है। लेखक बताते हैं कि मनुष्यों को जीवन की इन समस्त कमजोरियों के वारे । में सही ज्ञान दिया जाय क्योंकि ये दुर्गुणे महज व्यक्ति को हिंसा के लिए प्रेरित करने का काम करती हैं। जब मनुष्य के सामने इन सभी दुर्गुणों का पोल खुल जाता है तो वह इसके परिणाम के वारे में सोचने को मजबूर हो जाता है अन्यथा वह भी बांकी विश्व समुदाय का अंग बन जाता है। ये जीवन को प्रेम, स्नेह, दान और उदारता से रहित कर देता है। इन मानवीय मूल्यों से रहित होने पर जीवन एक भयावह व्यवसाय बन कर रह जाता है।

Question 5.
How does J. Krishna murti point out the dangers of violence?
जे. कृष्णमूर्ति ने किस प्रकार हिंसा के खतरों को दर्शाया है?
Answer.
The author is a reputed writer and educationist. He is a champion of mankind and the presence of violence in the world is a matter of great concern for him. He judges the dangerous effect of violence on mankind. He points out dangerous the two type of violence. Physical violence kills and hurts people consciously and deliberately. Whereas inward violence burns them within. The ultimate violence is the war which kills our ideas. It never allows love, affection, charity and generosity to develop in human beings. In the absence of these values they lose rationality and become enemies to mankind. It never builds a new culture where human beings may live happily and enjoy the supreme joy of nature. Therefore, the author is very worried of violence spread all over the world.

लेखक एक जाने माने शिक्षाविद और रचनाकार हैं। वे मानवता के पुरोधा और वर्तमान विश्व में व्याप्त हिंसा, उनके लिए विचार का एक विषय वस्तु है। वे हिंसा को मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरे के रूप में आंकते हैं। वे हिंसा को दो तरह से खतरा मानते हैं। व्यक्ति शारीरिक हिंसा के तहत दूसरों को जान-बूझ कर अथवा बड़ी सावधानी से या तो जान से मार देते हैं या हर आघात पहुंचाते हैं। वहीं अंतर्मन की हिंसा मनुष्य को उसे अंदर ही अंदर जलाता है। हिंसा की अंतिम परिणति युद्ध होता है जो हमारे विचारों को मार देती है। यह केभी दान, प्रेम, स्नेह, और उदारता को मानवता के विकास हेतु इजाजत नहीं देता। इन सभी मानवीय मूल्यों के अभाव में वे विवेक की क्षमता को खो देते हैं और मानवता का दुश्मन बन जाते हैं। यह कभी भी नई संस्कृति की स्थापना नहीं करता है जिसमें मनुष्य खुशी से रह सके और प्रकृति के सर्वोच्च आनंद अर्थात परमानंद को प्रापत कर सके। अतः लेखक विश्व में चारो ओर व्याप्त हिंसा के वातावरण से अत्यंत दु:खी हैं।

Activity 2: Vocabulary
A. Given below is the list of a few affixes and a few words. Form new words by putting suitable affixes before the given words:
affixes: mis, dis, in, ir, il, im
words: advantage, legal, possible, rational, sane, behave, like, satisfaction, security,
Example: Irrational behaviour is a negative attribute.

B. Given below is the list of a few suffixes and a few words. Form new words by adding suitable suffixes after the given words:
suffixes: ness, ty, ity, ation, y, ment, ful, ly, fully
words: develop, cruel, health, consider, brutal, dust, happy, care, bliss conscious, constant
Example: A regular exercise keeps us

C. Complete the following table by forming verbs:
RBSE Solutions for Class 10 English Chapter 2 On Violence 1

D. Fill in the blanks with synonyms of words given in the brackets:
1. The world is full of …………… violence. (very large)
2. Unfortunately, people are motivated by ………. (opposition and hatred)
3. Nowadays …………… has become a rare virtue. (kindness)
4. The state of …………… can only be felt when violence is out of mind. (perfect happiness)
5. Violence and anger are …………… in man. (natural)
Answers.
1. enormous
2. antagonism
3. generosity
4. bliss
5. inherent

E. Fill in the blanks with antonyms of words given in the brackets:
1. In the ………….. mind only negative thoughts enter. (sane)
2. ……….. behaviour in human beings is intolerable. (rational)
3. A peaceful mind can observe the ………of nature. (ugliness)
4. A positive attitude is always……… (criticized)
5. A true ……………of past and present is desirable. (ignorance)
Answers.
1. insane
2. irrational
3. bliss
4. appreciated
5. awareness

Activity 3: Grammar
1. Simple Past Tense:
Exercise
Put in the blanks the correct form of the verbs given in brackets:
1. Columbus …………. America. (discover)
2. He …………… favourably from eight institutions. (hear)
3. She ………. from Agra on last Monday. (return)
4. When ………… you last ………… your father? (see)
5. It is exactly five years ago today that we …………… married. (get)
6. The Police ……….. the thief yesterday. (catch)
7. He suddenly …………… that he was travelling in wrong direction. (realize)
8. He …………… me up just now. (ring)
9. I …………… a letter from my wife last week. (have)
10. The thief had escaped before he ……… into the room. (come)
Answers.
1. Discovered 2. Heard 3. Returned 4. did, see 5. Got 6. Caught 7. Realized 8. Rang 9. Had 10. came

2. Past Progressive/Continuous Tense:
Exercise:-
Complete the following sentences using Past Continuous or Past Simple:
1. I …………… (wash) my hands when the telephone …………… (ring).
2. They all ………….. (have) breakfast when I got up.
3. The door bell …………… (ring) while she was reading.
4. My aunt …………… (walk) in the park when I met her.
5. She …………… (talk) to her neighbours when the baby began to cry.
6. He suddenly ……….. (realize) that he ……………. (travel) in the wrong direction.
7. As I ………… (cross) the road I …. (step) on a banana skin and (fall) heavily.
8. He …………… (leave) the blind school and ……. (enroll) at another school.
9. The Hartman’s …………… (feel) that David …………… (head) for grief.
10. I was thinking about the problem at night, but I never …………… (find) the answer.
Answers.
1. was washing, rang 2. were having 3. Rang 4. was walking 5. was talking
6. Realized, was travelling 7. was crossing, stepped, fell 8. left, was enrolling
9. felt, was heading 10. found.

3. Past Perfect Tense:
Exercise
Put the verbs given in the brackets in the correct forms, using Past perfect (had+ past participle form or Past Simple):
1. He said he …………… (be + not) present at the meeting
2. John wanted to know why Mary …………… (come) home late.
3. Until he …………… (explain), the students …………… (not understand).
4. He …………… (go) blind before he …………… (be) nine years of age.
5. The fire …………… (burn) for three hours when the firemen ……. (arrive).
6. His neighbours …………… (will) not speak to him until he ………. (apologize)
7. The workers …………… (will) not call off the strike unless their demands …………… (accept).
8. He told me that he …….. never …. (meet) you.
Answers.
1. had been
2. had come
3. had explained, did not understand
4. had gone, was
5. had been burning, arrived
6. did, had apologized.
7. had, were accepted.
8. had, met.

Activity 4: Speech Activity
(See Textbook page 30)

Activity 5: Composition
Question 1.
Write a paragraph in about 100 words describing the advantages of nonviolence.
अहिंसा के गुणों की व्याख्या करते हुए लगभग 100 शब्दों को एक अनुच्छेद लिखें।
Answer.
Non-violence means lack of desire to harm or kill others. It is the personal practice of being harmless to oneself and others. The principle of nonviolence is based on moral, religion or spiritualism. Non-violence has ‘active’ or activist elements. Several people accept the need for non-violence as a means to achieve political and social change. For example, the Tolstoy and Gandhian non-violence is a philosophy and strategy for social change that rejects the use of violence. In modern times, nonviolent methods of action have been a powerful tool for social protest and political change. Nonviolence helps us to live peacefully and enjoy a joyful life.

अहिंसा का तात्पर्य उस इच्छा से है जिसमें व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को न तो किसी प्रकार की हानि पहुंचाना चाहता है और न ही उसे मारना चाहता। यह अपने और दूसरों के प्रति किसी हानि रहित रहने का व्यक्तिगत प्रयोग है। अहिंसा का उद्देश्य व्यक्ति की आध्यात्मिक, धार्मिक और नैतिक मूल्यों पर आधारित होता है। अहिंसा एक सक्रिय गतिविधि अथवा कर्मठता का तत्त्व है। अधिकांश जन अहिंसा को राजनैतिक और सामाजिक बदलाव का सशक्त हथियार मानते हैं। उदाहरण के लिए गांधीजी और लियो टॉलस्टाय का अहिंसा सामाजिक बदलाव लाने का एक दर्शन और रणनीति था जिसमें हिंसा को सिरे से नकार दिया गया। वर्तमान समय में अहिंसा समाजिक विरोध जताने और राजनैतिक बदलाव लाने हेतु कार्य करने का एक सशक्त तरीका और माध्यम बन गया है। अहिंसा हमें शांतिपूर्ण तरीके से और खुशियों से भरपूर आनंद के
साथ जीवन जीने में सहायक है।

Question 2.
Write a paragraph in about 100 words describing how you behave with your teachers. You may include the following points :
आपका अपने शिक्षक के साथ केसा व्यवहार करते हैं इस विषय पर लगभग 100 शब्दों में एक अनुच्छेद लिखें जिसमें निम्नलिखित विंदुओं को भी शामिल करें:
(i) Regular in the class/showing respect (कक्षा में नियमित उपस्थिति/सम्मान देते हुए)
(ii) Punctuality of time (समय की पावंदी)
(iii) The school uniform (विद्यालय का पोशाक)
(iv) Showing homework (गृहकार्य दिखाना)
(v) Participation in games and sports (खेल और खेल प्रतियोगिता में भाग लेना)
Answer.
I always respect my teachers. Whenever I see them, I greet them and get their blessings. I am regular in my class. I often attend prayer and attentively hear lectures given by the teachers. My sense of punctuality cannot be doubted. The attendance register is the proof of my punctuality in the class. My school uniform is never dirty. It often shines in the class. The subject teachers are very pleased with me because I always do my homework on time. If some question is asked in the class, I give prompt answer. My behaviour in the class and respect for my teacher have a good reputation for me in the school. I always follow the examples set by the teachers. I often learn good lessons of life from them.

मैं हमेशा अपने शिक्षकों का सम्मान करता हूं। जब भी मैं उन्हें देखता हूं, तत्क्षण मैं उनका चरण-स्पर्श करता हूं और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करता हूं। मैं कक्षा में भी नियमित ढंग से उपस्थित रहता हूं। प्रायः प्रार्थना में मैं उपस्थित होता हूं और शिक्षकों द्वारा दिए गए वक्तव्यों को भी बड़े ध्यान के साथ सुनता हूं। मेरे नियमितता के क्रम पर किसी प्रकार का संदेह नहीं किया जा सकता है। मेरा विद्यालय की पोशाक कभी गंदा नहीं रहता। यह कक्षा में निश्चित रूप से चमकता रहता है। मेरे सभी विषयों के शिक्षक मेरे प्रति स्नेह का भाव रखते हैं क्योंकि मैं अपना सभी गृहकार्य समय से पूरा करता हूं। यदि कक्षा में कोई प्रश्न पूछा जाता है तो मैं उसका सटीक उत्तर देता हूं। शिक्षकों के प्रति सम्मान का भाव और कक्षा में मेरा व्यवहार मुझे विद्यालय में एक अच्छा छवि प्रदान करता है। शिक्षक द्वारा दिए गए उदाहरणों के चरित्र को मैं हमेशा सहजता से अंगीकार कर लेता हूं। मैं उनके द्वारा बताए गए जीवन की अच्छी बातों को प्रायः सीखता रहता हूँ।

Additional Questions and Answers

A. Multiple Choice Questions
1. Physical violence is related to kill people:
(a) unknowingly
(b) deliberately
(c) helpfully
(d) by mistake

2. Wars are fought for destroying:
(a) houses
(b) colleges
(c) ideas
(d) temples

3. Education prevents people from becoming
(a) rational beings
(b) educated beings
(c) lame beings
(d) brutal beings

4. Antagonism and hate are present in:
(a) animals
(b) trees
(c) all living beings
(d) man

5. A new culture is essential to build:
(a) a new society
(b) new books
(c) hostile beings
(d) an old society

6. Why is the old society dead?
(a) It has no power to create a new society.
(b) It has countless examples of noble works.
(c) The young people are guided well.
(d) It provides the beauty of mind.

7. Our Ph. D degree is failed because of the lack of:
(a) hate
(b) antagonism
(c) love and affection
(d) violence

8. we need a ………. heart to enjoy the bliss of nature.
(a) closed
(b) little
(c) hostile
(d) open

9. The new culture is often based on ……..
(a) success and position
(b) status and position
(c) generosity and kindness
(d) hatred

10. Great beauty and loneliness are the signs of :
(a) hot day
(b) early morning
(c) lively blue sky
(d) late evening

Answers.
1.(b),
2.(c),
3.(d),
4.(d),
5.(a),
6.(a),
7.(c),
8.(d),
9.(c),
10.(b)

B. Short Answer Type Questions (30-40 words)

Question 1.
How is physical violence different from inward violence?
भौतिक हिंसा (शारीरिक हिंसा) अंतर्मन की हिंसा से किस तरह भिन्न है?
Ans. Physical violence kills and hurt people knowingly and purposely. It forces people to say cruel things without thinking about others. It is full of antagonism and hate. On the other hand, inward violence provokes people to hate, criticize and dislike others. People inwardly battle and quarrel with themselves and others. They criticize other people and force them to their way of thinking

भौतिक हिंसा में मनुष्य दूसरों को जान-बूझ कर और एक निश्चित उद्देश्य के साथ आघात पहुंचाता है। अथवा जान से मारता है। यह व्यक्ति को बिना कुछ सोचे ही दूसरों को क्रूर बातें कहने के लिए वाध्य करता है। यह विरोध और घृणा से भरा होता है। वहीं दूसरी ओर अंतर्मन की हिंसा व्यक्ति को करत करने के लिए, निंदा और दूसरे को पसंद नहीं करने देता है। व्यक्ति स्वयं और दूसरों के साथ आंतरिक स्तर पर लड़ता और संघर्ष करता है। वे दूसरों की निंदा करते हैं और उसे अपने विचारधारा पर चलने के लिए मजबूर करता है।

Question 2.
Why are wars fought?
युद्ध क्यों लड़ा जाता है?
Answer.
Wars are the ultimate form of violence. They are fought to for religious identities. People fight with one another to show their dominant ideas. During wars, people are always ready to kill, destroy and maim the other people. They are also found ready to kill themselves so that they could protect their status and position.

हिंसा की अंतिम परिणति युद्ध है। वे अपना धार्मिक पहचान बनाए रखने के लिए लड़ा करते हैं। लोग एक-दूसरे के साथ अपने प्रभावी विचारधारा के लिए लड़ते हैं। युद्ध के दौरान लोग हमेशा दूसरे कोमारने,उसका विनाश करने और उसे अशक्त बनाने के लिए तैयार रहते हैं। वे यहां तक कि खुद को भी समाप्त करने के लिए तैयार रहते हैं ताकि वह अपने पद और प्रतिष्ठा की रक्षा कर सके।

Question 3.
How does education help people?
शिक्षा मनुष्य को किस प्रकार से सहयोग करती है?
Answer.
Education is the most effective tool which helps people not only to pass examination and get good jobs, but to overcome our weaknesses of violence. Violence, hate, antagonism, anger and cruelty found in man are the greatest enemies which create a violent society. Education supports people to overcome these drawbacks and build a new society.

शिक्षा मनुष्य का एक सशक्त हथियार है जो लोगों को न केवल परीक्षा पास करने और नौकरी पाने में सहायता करता है बल्कि हमें हिंसा जैसी कमजोरियों को अपने से दूर करने का राह दिखाती है। क्रोध, क्रूरता, हिंसा, विरोध और नफरत, ये तमाम दुर्गुणों जो मनुष्य में पाई जाती है, उसका सबसे बड़ा शत्रु है जो समाज में हिंसा फैलाने का काम करता है। शिक्षा इन समस्त कमजोरियों से बाहर आने में हमारी मदद करता है और एक नए समाज के निर्माण में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है।

Question 4.
Why is a new society necessary to be created?
नए समाज के निर्माण की क्या आवश्यकता है?
Answer.
The old society which is created by our forefathers is dead and buried. It has no power to produce kind and generous human beings as it is based on violence. Human beings need love and affection, kindness and generosity to lead a peaceful life. In their absence, our life becomes a terrible business. Only a new culture can create a new society based on noble qualities.

पुराना समाज जिसका निर्माण हमारे पूर्वजों ने किया था, वह आज के संदर्भ में मर चुका है और उसका अंतिम संस्कार भी हो चुका है। इसके पास क्षमता नहीं है कि यह मनुष्य को उदार और दयालु प्रकृति बना सके क्योंकि इसका नींव ही हिंसा पर रखा गया है। मनुष्यता के लिए तो आवश्यक है कि उसमें प्रेम, स्नेह, उदारता और दयालुता का गुण उसमें विद्यमान हो ताकि वह शांतिपूर्ण जीवन जी सके। इसके अभाव में हमारा जीवन एक भयावह व्यापार बन कर रह जाएगा। मात्र नई संस्कृति ही एक नए समाज का निर्माण कर सकती है जो उच्च गुणों से युक्त मानवों से मिल कर बना होगा।

Question 5.
How can you protect your children from becoming violent?
आप अपने बच्चों को हिंसक बनने से केसे बचायेंगे?
Answer.
Our children should be made aware of the fact that the old culture is based on aggression. It has created all the confusion and misery to the society. If they do not have proper knowledge of old culture, they may become part of this culture and adopt violent ways of life. Education can teach them the drawbacks of violent and cruel old culture and encourage them to change it into full of love, peace and joy.

हम अपने बच्चों को इस कटु सत्य से अवगत करा कर रखेंगे कि यह जो पुरानी संस्कृति है, हिंसा पर आधारित है। इसने हर प्रकार से समाज में भ्रम और सामाजिक दुर्दशा फैलाने का ही काम किया है। यदि उसके पास इसका सही से ज्ञान नहीं होगा तो वह भी इस पुरानी संस्कृति का अंग बन कर रह जाएगा और अपने जीवन में हिंसा के मार्ग को अपना लेगा। शिक्षा उन्हें पुरानी क्रूर सभ्यता की खामियों का ज्ञान देगा और उसे भरपूर प्रेम, शांति और आनंद पाने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

Question 6.
How is a person with Ph.D. unsuccessful in his life?
पीएच.डी. की डिग्री होने के बाद भी कोई व्यक्ति अपने जीवन में केसे असफल रहता है?
Answer.
Education helps a person overcome violence, hate, anger and antagonism. If a person gets education and obtains even Ph. D. and he is not free of these weaknesses, there is no love, affection, kindness and generosity in his life. He is bound to become part of the rest of the world, which is based on violence. His degree will never help him to become a rational being. Hence, he may be counted as a failure person even after having Ph.D.

शिक्षा व्यक्ति को कत, क्रोध, हिंसा और विरोध जैसे दुर्गुणों से बाहर आने में मदद करती है। यदि किसी व्यक्ति ने शिक्षिा हासिल कर लिया है और उसने पीएच. डी. की डिग्री भी हासिल कर लिया है पर इसके बावजूद उसका जीवन, प्रेम, स्नेह, दयालुता और उदारता से पूर्ण नहीं है और तमाम दुर्गुणों से मुक्त नहीं हुआ है। तो वह संसार के उस शेष भाग का अंग है जो हिंसा पर आधारित है। उसकी डिग्री उसे एक समझदार व्यक्ति बनने में कोई मदद नहीं कर रही है। अत: उसके पास पीएच. डी. की डिग्री होने के बाद भी उसे एक अफल व्यक्ति के रूप में गिना जा सकता है।

Question 7.
How does people generally treat life in the world?
किस तरह से एक व्यक्ति संसार में अपने जीवन को लेते हैं?
Answer.
Life is something enormous and people never try to understand the essence of life. They generally carve out a little hole for themselves and remain in that hole as long as they live in the world. They are bound to fight with the other people and lead a miserable life. They are not different from the rest of the world; they have deliberately chosen a violent way of life. They must know that violence, hate, anger, cruelty and antagonism create only confusion and misery in our life.

कुछ मामलों में जीवन बहुत बड़ा है और लोग इसके सार को नहीं समझते हैं। सामान्यतः वे अपने लिए एक छोटा से गड्ढा खोद लेते हैं और जब तक वे इस संसार में रहते हैं, उसी गड्ढे में रहना पसंद करते हैं। वे अपने-आप को दूसरों के साथ लड़ने में ही झोंक देते हैं और दु:खी जीवन जीना पसंद करते हैं। वे विश्व के बांकी लोगों से अलग नहीं हैं, वे जान-बूझकर अपने जीवन में हिंसा के मार्ग का चयन करते हैं। हालांकि वे यह बेहतर ढंग से जानते हैं कि हिंसा, नफरत, क्रोध, क्रूरता और विरोध हमारे जीवन में सिर्फ भ्रम उत्पन्न करने और संकट बढ़ाने का काम करते हैं।

Question 8.
What is the message of the author spread through this article?
लेखक अपने इस लेख के माध्यम से हमें क्या संदेश देना चाहते हैं?
Answer.
The message of the author spread through this article is very crucial and of high quality for the mankind. He desires that people should live freely and happily. They should overcome hate, anger cruel thoughts and criticism and know the essence of life. The people must know the real meaning of life because it is full of joy and charity. Education can help them become rational beings and enjoy the joy of life.

इस लेख के माध्यम से लेखक हमें जो संदेश देते हैं वह मानवता के लिए अत्यंत ही उच्च स्तर का और महत्त्वपूर्ण है। वे चाहते हैं कि लोग स्वच्छंद भाव से और खुशी के साथ अपना जीवन जीये। वे अपने जीवन के सार को समझें और क्रोध, घृणा और क्रूर विचारधारा से बाहर निकले। लोग जीवन के वास्तविक अर्थ को समझे क्योंकि जीवन तो सहयोग और आनंद से परिपूर्ण है। शिक्षा उन्हें विवेकी अर्थात समझदार बनने में मदद करता है और जीवन का असली आनंद लेने में सहायता करता है।

Question 9.
How can the world be a peaceful place to live in?
जीवन जीने के लिए विश्व किस तरह शांतिपूर्ण हो जाएगा?
Answer.
A peaceful world would be a world of new culture. Old culture which is created by our forefathers based on violence should be changed to new culture. We have to educate ourselves to create a kind and generous new culture. For this noble cause, the young people will have to come forward and help in building it, which will prevent hate, anger, cruelty and antagonism to spread in our society. The new culture will have a different meaning of life full of joy and clarity. Hence, the world will automatically be converted into a peaceful place to live in.

नई संस्कृति से युक्त संसार के माध्यम से विश्व शांतिपूर्ण हो सकता है। हिंसा पर आधारित पुरानी संस्कृति जिसे हमारे पूर्वजों ने स्थापित किया था, उसे नई संस्कृति के रूप में परिणत करने की जरूरत है। हमें अपने-आप को शिक्षित करने की आवश्यकता है और नई दयालुता पूर्ण तथा उदार संस्कृति को तैयार करने की आवश्यकता है। इस उच्च आदर्श को पाने के लिए नई पीढ़ि के युवाओं को आगे आना होगा और इसे स्थापित करने में सहयोग करना होगा, जो क्रोध, घृणा, क्रूरता और विरोध जैसे दुर्गुणों से मुक्त होगा, जो हमारे समाज में विभिन्न स्तर पर व्याप्त है। नई संस्कृति में जीवन का एक अलग अर्थ होगा जिसमें खुशियों और सादगी का महत्त्व होगा। इस तरह, यह संसारे स्वतः ही जीने के लिए एक शांतिपूर्ण स्थान के रूप में परिणत हो जाएगा।

Question 10.
What does the author suggest to enjoy the bliss of nature?
लेखक ने प्रकृति के परमानंद को प्राप्त करने के लिए क्या सलाह दिया?
Answer.
In the early morning when the birds sing and the cuckoo cooed, a deep silence is found everywhere. We feel a queer sense of great beauty and loneliness. Unfortunately, everybody is unaware of this heavenly bliss of nature. The author suggests that if we should have an open heart and mind, we get this internal power to enjoy supreme joy of nature. An open mind is always free of fear and violence. We can achieve this quality of life by getting education. Only education has power to bring such a state of mind for the people.

सबेरे सबेरे जब पक्षियां गाती हैं और कोयलें अपना कूक सुनाती है, उस समय चारो ओर घना सन्नाटा छाया होता है। उस एकाकीपन और अपूर्व सुन्दरता का अद्भुत नजारा हम अनुभव करते हैं। संयोगवस प्रकृति के इस महान परमानंद से सभी लोग अनभिज्ञ रहते हैं। लेखक सलाह देते हैं कि यदि हमारा विचार और हृदय खुला है तो हम प्रकृति के इस सुन्दरतम स्वरूप का सर्वोत्कृष्ट आनंद ले सकते हैं। एक खुला मस्तिष्क हमेशा हिंसा और भय से मुक्त होता है। शिक्षा के माध्यम से हम बेहतरीन जीवन-स्तर को प्राप्त कर सकते हैं। एक मात्र शिक्षा में ही वह शक्ति है कि इसके माध्यम से शांतिपूर्ण मानसिक स्तर को प्राप्त कर सकते हैं।

Question 11.
How did the author thinks the world can to be changed?
लेखक किस तरह सोचते हैं कि विश्व को बदला जा सकता है?
Answer.
According to the author, the world is where we live together with relatives, family, friends and neighbours. We are at the centre and they are the extended sphere of this world. We interact with them to show our likes and dislikes. The world where we live is not changeable. When we change ourselves, we can also change the world around us.

लेखक के अनुसार संसार वहीं है जहां हम अपने सगे-संबंधियों, परिवार के सदस्यों, मित्र गणों और पड़ोसियों के साथ मिल कर रहते हैं। हम उसके केंद्र विन्दु हैं और ये सभी हमारे चारो ओर विस्तृत संसार के गोले के समान हैं। हम इनके साथ मिल-जुल कर रहते हैं और अपनी पसंद-नापसंद को इनके साथ साझा करते हैं। इस संसार में हम जिस स्थान पर रहते हैं वह बदलने वाला नहीं है। यदि हम अपने-आप को बदल लेते हैं तो हम आसानी से अपने आस-पास के संसार को बदल देते हैं।

C. Long Answer Type Questions (60 Words)
Question 1.
How is violence interpreted by the author in this article?
इस लेख में लेखक ने हिंसा की व्याख्या किस तरह से किया है?
Answer.
According to the author, there is enormous violence in the world. It is generally found in two forms physical and inward violence. Physical violence is meant to kill and hurt other people consciously, and is full of antagonism and hate. Inward violence creates dislike, hatred and criticism for the other people inwardly. The ultimate form of violence is the war, which is fought in the name of religions and many other ideas. In this process, people become part of rest of the violent world. The presence of violence in human beings never allow them to become rational beings. They are counted as worse than animals. In the absence of love, affection, kindness and generosity, they become part of a terrible business. Life is something different which has a clear meaning full of joy.

लेखक के अनुसार इस संसार में हिंसा बड़े पैमाने पर फैला है। सामान्यत: यह इस संसार में दो रूपों में पाया जाता है–शारीरिक (भौतिक) हिंसा और अंतर्मन की हिंसा। भौतिक हिंसा का अर्थ होता है। कि जान-बूझ कर किसी दूसरे को आघात पहुंचाना या कर मार देना तथा यह विरोध और करतों से भरा होता है। वहीं अंतर्मन की हिंसा में दूसरों के प्रति मन ही मन नापसंदगी, नफरत और आलोचना को पालता है। इस प्रकार से हिंसा का अंतिम परिणति युद्ध होता है जो कि धर्म और अन्य कई विचारों के नाम पर लड़ा जाता है। इस प्रक्रिया में मनुष्य उस शेष हिंसक संसार का एक अंग बन कर रह जाता है। मनुष्य के अंदर विद्यमान हिंसा की यह प्रक्रिया कभी भी एक उदार प्रकृति का मानव नहीं बनने देता। उसकी गणना पशुओं से भी गिरे हुए जीव के रूप में होती है। प्रेम,स्नेह, दयालुता और उदारता के अभाव में वह एक भय प्रदान करने वाला एक व्यवसाय बन कर रह जाता है। लेकिन जीवन तो इससे भिन्न है जो आनंद से भरपूर अर्थ को अपने में समाहित किए हुए है।

Question 2.
Can a complete destruction of society bring about a new culture?
समाज का पूर्णत: विध्वंस क्या एक नई संस्कृति को ला पाएगा?
Answer.
Revolutions can bring only a fundamental change in the society and not a new culture. It can change only the social order. Love, care, affection and kindness are totally different values. They always remain the same in human beings. Changing them forcefully will only mean repeating them. They cannot be attending from an old to new house are outwardly clever, educated, cultured and inwardly they are violent. If we have desire to bring about change in the society, we shall have to fundamentally change the animal instinct found in them. The inward power always overcomes the outward circumstances. Only education has power to bring such change in human beings. Therefore, complete destruction of society cannot bring about fundamental change in the society.

क्रांति किसी भी समाज में कुछ मूल भूत बंदलावों ला सकता है न कि एक नई संस्कृति को लाने में समर्थ है। यह तो सामाजिक क्रम को बदल सकता है। ध्यान रखना, प्रेम, स्नेह, दयालुता और उदारता, ये सभी एकदम अलग मूल्य हैं। ये सभी मानवों में एक निश्चित मात्रा में सदा विद्यमान होते हैं। इनमें जोर-जबरदस्ती बदलाव करने का अर्थ है इनका फिर से दोहराना। ये कभी भी पुराने घर से नए घर को बदलने की प्रक्रिया का अनुशरण नहीं करते और वाह्य तौर पर जो शिक्षित, तेज, सुसंस्कृत दिखते। वे अंदर से हिंसक हो सकते हैं। यदि हम समाज में बदलाव लाने की तमन्ना रखते हैं तो हमें उसमें मूल-भूत तत्त्व के रूप में पाए जा रहे पाशविक। व्यवहारों को बदलना होगा। वाह्य परिस्थितियों से ही हमारी आंतरिक परिस्थितियां जागृत होती है। एक मात्र शिक्षा में ही वह शक्ति होती है कि मनुष्य के अंदर कोई बदलाव ला सके। अत: समाज का पूरी तरह से विध्वंस कर देने से समाज में कोई मूल-भूत बदलाव नहीं आ सकता है।

Question 3.
How can you change yourself?
आप अपने-आपको किस प्रकार से बदलेंगे?
Answer.
We all are at the centre of this world and has our family as a part of this world. It is really the most difficult task to change the wold where we live with our family. Even most of us have no desire to change. When we are young, we are full of vitality, energy and curiosity and have a desire to change. As we get a little older, go to college, we may begin to settle down. We forget our endeavour to change ourselves remains in the same order. There are still some people who really want to change the world because they take it as their core responsibility. They try to be aware of the change and make efforts to bring about change. we must have proper idea of change which we intend to bring about otherwise our effort will produce no result and we shall become part of the rest of the violent world.

हम इस संसार के केंद्र में बैठे हैं और हमारा परिवार इस संसार का एक अंग है। यह वाकई एक कठिन सवाल है कि संसार को बदल दें जहां हम अपने परिवार के साथ रहते हैं। यहां तक कि हममें से अधिकांश की यह कतई इच्छा नहीं रहती कि संसार में बदलाव लाया जाय। जब हम नौजवान होते हैं तो हमारे अंदर ऊर्जा, जीवन-शक्ति और कौतुहल विद्यमान होता है और हमारे अंदन बदलव लाने की इच्छा भी होती है। जब हम थोड़े बड़े होते हैं, कॉलेज जाते हैं, हमारी कोशिश होती है कि हम व्यवस्थित हो जाएं। हम अपने-आप बदलने की बातों को भूल जाते हैं, इस खातिर कोई प्रयास ही नहीं करते (जो कि हमारे अंदर यथावत बना रहता है। लेकिन हममें से कुछ ऐसे भी व्यक्ति होते हैं जो वास्तव में बदलाव को चाहते हैं और वे इसलिए प्रयास भी करते हैं, क्योंकि वे इसे अपना एक महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी मानते हैं। उनका प्रयास होता है कि वे बदलाव के प्रति सजग रहें और इसके लिए लगातार प्रयास भी करते रहें। निश्चय ही हमारे अंदर भी बदलाव के कुछ युक्तिसंगत विचार होते हैं, हमउसे योजना का रूप दे सकते हैं अन्यथा हमारा प्रयास निरर्थक जाएगा और हम भी उस शेष हिंसक विश्व का एक अंग बन कर रह जाएंगे।

Question 4.
“Not to understand violence is to be really ignorant, is to be without intelligence and without culture?” Explain.
“यह कभी नहीं समझना चाहिए कि हिंसा वास्तव में, बिना समझदारी के बिना संस्कृति के, नजदअंदाज करने की वस्तु है।” व्याख्या करें।
Answer.
There is enormous violence in the world. Only human beings are rational beings who can feel pain and suffering of others. When we do not try to understand the causes of violence, it means our rationality is lost. We do not belong to a culture which is based on love, affection, kindness generosity. Instead, we belong to the old culture created by our forefathers, based on violence. On the other hand, if we are educated, we have developed a deep sense to judge things on the base of our rationality. We should not be ignorant of violence, otherwise our rationality is useless. Ignorant people are irrational and devoid of culture and have no feeling of love, affection, kindness and generosity in their life.

विश्व में बड़े पैमाने पर हिंसा व्याप्त है। केवल मनुष्य ही एक समझदार प्राणि है जो दर्द को महशूश करता है और दूसरों के कष्ट को भी। जब हम हिंसा के कारणों को नहीं समझना चाहेंगे तो इसका अर्थ यह हुआ कि हमारी समझदारी समाप्त हो चुकी है। हम उस संस्कृति से संब) नहीं हैं जिसका आधार प्रेम, स्नेह, दयालुता और उदारता है। इसके बदले हम उस संस्कृति से संब) हैं जिसे हमारे पूर्वजों ने हिंसा को द्वारा स्थापित किया था। लेकिन दूसरी ओर, यदि हम शिक्षित हैं, तो अपनी बुद्धिमानी का उपयोग कर हम अपने-आप में उस गहरे ज्ञान को विकसित कर सकते हैं जिसके आधार पर किसी चीज को तर्क कर सके और उसे बेहतर समझ सके। हम हिंसा के प्रति लापरवाह न बनें अन्यथा हमारी बुद्धिमानी बेकार हो जाएगी। अज्ञानी व्यक्ति नासमझ होते हैं और संस्कृति से दूर होते हैं तथा वह अपने जीवन में प्रेम, स्नेह, दयालुता और उदारता जैसे गुणों से अनभिज्ञ होते हैं।

Question 5.
Why is one seeking to have pleasure and discard pain?
कोई भी व्यक्ति क्यों आनंदित होना चाहता है और दुखों से किनारा करना चाहता है?
Answer.
We think that living in pleasure is more convenient than suffering in pain. At a time, we avoid pain and cling to pleasure. Life in the same manner is full of opposite phases for pleasure and pain, hope and despair etc. But it is natural to avoid pain life in both darkness and light. The moment we want to avoid pain or sorrow, we are going to invent escapes. The problem in not resolved by either sorrow or pleasure. So, we should cling to pleasure or escape from pain. If we do so get more attached to pleasure.

हम समझते हैं कि आनंद पूर्वक रहना दर्द में रहने से कहीं आसान है। एक ही समय में हम दर्द को नजरअंदाज कर देते हैं और आनंद से लिपटते हैं। समत्व भाव में जीवन विपरीत चरणों के मेल से पुर्ण होता है जिसमें दर्द का भी उतना ही महत्त्व है जितना कि आनंद का, उम्मीद का और उम्मीदों के टूटने का आदि। लेकिन यह एक प्राकृतिक गुण है कि जीव दर्द को नापसंद करते हैं चाहे वह जीवन के सुखद दौर हों अथवा दुखद। हम उस दर्दनाक अथवा दुखद घटना को नजरअंदाज कर देना चाहते हैं, हम उससे बच कर निकल जाने का रास्ता ढूंढते हैं। दुख अथवा आनंद से समस्या का समाधान नहीं हो जाता है। यही वजह है। कि हम दर्द से दूर होना चाहते हैं और आनंद को लपक कर अपने गले लगा लेना चाहते हैं। और जब हम ऐसा करते हैं तो आनंद के और भी करीब होते जाते हैं।

Questions for Practice
1. How is violence enormous in the world?
विश्व में हिंसा किस तरह से व्याप्त है?

2. When can education prove itself an effective tool?
शिक्षा किस समय अपने-आप को एक महत्त्वपूर्ण हथियार के रूप में सावित करती हैं।

3. Why is the change of old culture essential?
पुरानी संस्कृति का बदलाव क्यों आवश्यक है?

4. What is the aim of the author as seen in the present article?
इस लेख में लेखक ने क्या उद्देश्य जताया है?

5. What requests does the author make to the young people?
नौजवान लोगों से लेखक ने क्या आग्रह किया है?

6. How is violence a matter of great concern for the present world?
वर्तमान संसार में हिंसा किस प्रकार से एक गंभीर विषय है?