Rajasthan Board RBSE Class 12 English Prudence Non-Fiction Chapter 2 Why the Novel Matters

RBSE Class 12 English Prudence Non-Fiction Chapter 2 Textual Questions

Choose the correct option :

Question 1.
What does the metaphor ‘the bottle of wine’ represent ?
(a) body
(b) spirit
(c) soul
(d) body and soul
Answer:
(a) body

Question 2.
In what sense is the Bible a great novel ?
(a) It is the book of life.
(b) It is about God
(c) It is philosophy
(d) It is science.
Answer:
(a) It is the book of life.

Answer the following questions in 15-20 words each :
निम्न प्रत्येक प्रश्न का उत्तर 15-20 शब्दों में दीजिए :

Question 1.
What does Lawrence mean by “Whatever in me alive is me” ?
“जो भी मैं जीवित हूँ वह मैं हूँ” इस बात से लारेन्स का क्या अभिप्राय है ?
Answer:
Lawrence means to say that his soul along with his live body is what he calls “me” or his personality.
लारेन्स के कहने का अभिप्राय यह है कि उसकी आत्मा और उसका जीवित शरीर ही तथाकथित “मैं” या उसका व्यक्तित्व है।

Question 2.
According to Lawrence, what is the exact meaning of living?
लारेन्स के अनुसार जीने का सही अर्थ क्या है ?
Answer:
The exact meaning of living is that you live without following a pattern of living like a character of a novel.
जीवन का सही अर्थ यह है कि आप एक उपन्यास के चरित्र के अनुसार जीवन को किसी व्यवस्था का पालन किये बिना जीते हैं।

Question 3.
What is the central idea of “Why the Novel Matters” ?
“उपन्यास क्यों महत्त्वपूर्ण है” का प्रधान विचार क्या है ?
Answer:
The central idea is that the novel makes man “live” and it is superior to other fields of study.
प्रधान विचार यह है कि उपन्यास मनुष्य को जीवित रखता है और यह ज्ञान के अन्य क्षेत्रों से बेहतर है।

Question 4.
For what purpose does the writer use the concept of “tremulation” ?
लेखक ‘कम्पन के सिद्धान्त’ को किस उद्देश्य के लिए प्रयोग करता है ?
Answer:
The writer says that our ideas are tremulations upon ether and they quiver a man alive but less important than him.
लेखक कहता है कि हमारे विचार शून्य में कम्पन हैं और एक जीवित व्यक्ति को प्रभावित करते हैं परन्तु वे उसकी तुलना में कम महत्वपूर्ण है।

Answer the following questions in 50 words each :
निम्न प्रत्येक प्रश्न का उत्तर 50 शब्दों में दीजिए :

Question 1.
Why is a novelist different from a philosopher, a scientist or a stupid person?
एक उपन्यासकार एक दार्शनिक, एक वैज्ञानिक और एक मूर्ख व्यक्ति से भिन्न क्यों है ?
Answer:
A novelist is different from a philosopher, a scientist and a stupid person because he is alive and deals with alive characters in the novel. While a philosopher talks about soul and God but ignores his body which is alive. A scientist studies the dead objects and a stupid person trusts a philosopher and a scientist.

एक उपन्यासकार, एक वैज्ञानिक, एक दार्शनिक, एक मूर्ख व्यक्ति, से इस प्रकार अलग है कि उपन्यासकार जीवित है और अपने उपन्यास के जीवित पात्रों से व्यवहार करता है। जबकि एक दार्शनिक आत्मा और ईश्वर की बात करता है परन्तु शरीर की उपेक्षा करता है जो कि जीवित है। एक वैज्ञानिक बेजान वस्तुओं का अध्ययन करता है। एक मूर्ख व्यक्ति वैज्ञानिक एवं दार्शनिक पर विश्वास करता है।

Question 2.
What is the idea of Lawrence about the Bible ?
बाइबल के बारे में लारेन्स का विचार क्या है ?
Answer:
As the novel is the book of life, the Bible too is a novel but a great confused novel. It is about God but in fact it is about man alive. The characters of the Bible like Jesus Christ, Adam, Eve, Sarai, Abrabam etc., are but man alive. Even the Lord is another man alive.

जिस प्रकार उपन्यास एक जीवन की किताब है, बाइबल भी एक महान अव्यवस्थित उपन्यास है। यह ईश्वर के बारे में है परन्तु वास्तव में यह जीवित मनुष्य के बारे में है। बाइबिल के चरित्र जैसे कि ईसा मसीह, ऐडम, ईव, सराइ, अब्राहम इत्यादि जीवित मनुष्य ही हैं। यहाँ तक कि ईश्वर भी एक दूसरा जीवित मनुष्य है।

Question 3.
What is the similarity between life and fiction?
जीवन और उपन्यास में क्या समानता है ?
Answer:
A fiction or a novel deals with a man alive. A reader is interested in the characters of a novel because they are alive or in other words they are life-like and they are always changing. If they stop changing they cease to be alive. Similarly our life too should on changing to remain alive.

एक उपन्यास एक जीवित मनुष्य के बारे में होता है। एक पाठक एक उपन्यास के पात्रों में रुचि लेता है। क्योंकि वे जीवित होते हैं। दसरे शब्दों में वे वास्तविक जीवन जैसे होते हैं और हमेशा बदलते रहते हैं। अगर वे बदलना बन्द कर देते हैं, तो उनका जीवित होना भी समाप्त हो जाता है। इसी प्रकार जीवित बने रहने के लिये हमारे जीवन को भी बदलते रहना चाहिए।

Question 4.
Describe the characteristics of a novel.
एक उपन्यास की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
Answer:
A novel has the following characteristics :

  1. A novel is the book of life.
  2. It deals with man alive.
  3. Its characters must be alive.
  4. Its characters should be life like.
  5. Its characters must be kept changing to sustain the interest of readers.
  6. If its characters stop changing, they cease to be interesting.

एक उपन्यास की निम्न विशेषताएँ होती है :

  1. एक उपन्यास जीवन की किताब होता है।
  2. यह जीवित मनुष्य के बारे में होता है।
  3. इसके पात्र अवश्य ही सजीव होने चाहिए।
  4. इसके पात्र वास्तविक जीवन जैसे होने चाहिए।
  5. पाठकों की रुचि बनाये रखने के लिए पात्रों के जीवन में परिवर्तन होते रहना चाहिए।
  6. अगर पात्रों के जीवन में परिवर्तन होना बन्द हो जाता है तो वे रुचिपूर्ण नहीं रह जाते हैं।

Answer the following questions in about 100 words each :
निम्न प्रत्येक प्रश्न का उत्तर 100 शब्दों में दीजिए।

Question 1.
In what ways is the novel, according to Lawrence, the book of life?
किस प्रकार से, लारेन्स के अनुसार, उपन्यास जीवन की किताब है ?
Answer:
According to Lawrence, the novel is the book of life because it deals with human life and man alive. It has characters who are very much life like. That is why readers’ interest is generated in them. Another important thing about them is that they are alive and keep changing. If they cease to change, they are dead and readers stop taking interest in them. They reflect human life which is very much similar to the real life. Even the books like the Bible are great confused novel about man alive. Its characters and the Lord himself are men alive.

लारेन्स के अनुसार, उपन्यास जीवन की एक किताब है क्योंकि यह मानव जीवन और जीवित मनुष्य के बारे में हैं। इसके जो पात्र हैं वे बहुत कुछ वास्तविक जीवन जैसे होते हैं। यही वजह है कि पाठकों की रुचि उनमें पैदा हो जाती है। दूसरी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि वे जीवित होते हैं और बदलते रहते हैं। अगर वे बदलना बन्द कर देते हैं, तो वे मृत हो जाते हैं और पाठक उनमें रुचि लेना भी बन्द कर देते हैं। वे मानवीय जीवन को प्रतिबिम्बित करते है जो कि वास्तविक जीवन जैसा ही होता है। यहाँ तक कि बाइबल जैसी किताब भी एक महान परन्तु अव्यवस्थित उपन्यास है जो कि जीवित मनुष्य के बारे में है। इसके पात्र और ईश्वर स्वयं जीवित व्यक्ति हैं।

Question 2.
All things flow and change, and even change is not absolute’. Discuss.
‘सभी चीजें गति करती हैं और बदलती हैं, यहाँ तक कि परिवर्तन भी एक जैसा नहीं है।’ चर्चा कीजिए।
Answer:
Lawrence says that the novel is the book of life, because it is about man alive. But the element that makes the novel full of life is the change. The novel reflects life because it reflects change in its characters and the story. The characters are life like because they change which generates interest in them. Everything in the world changes because it has a flow and which is a sign of life. Even change is not absolute and uniform. If the characters cease to change, they are dead and no reader would find them interesting. The same is applicable to real life also where change means life.

लारेन्स कहते हैं कि उपन्यास जीवन की किताब हैं क्योंकि यह जीवित मनुष्य के बारे में है। लेकिन जो तत्व उपन्यास को जीवन से परीपूर्ण बनाता है वह परिवर्तन है। उपन्यास जीवन को प्रतिबिम्बित करता है क्योंकि यह परिवर्तन को पात्रों और कहानी में प्रतिबिम्बित करता है। पात्र वास्तविक जीवन जैसे होते हैं क्योंकि वे बदलते रहते हैं जिससे उनमें रुचि पैदा होती है। संसार में प्रत्येक वस्तु बदलती है क्योंकि उससे बहाव होता है जो कि जीवन का एक चिह्न है। यहाँ तक कि परिवर्तन भी एक जैसा और पूर्ण नहीं होता है। अगर पात्र बहलाना बन्द कर देते हैं तो वे मृत प्राय हैं और कोई पाठक उनमें रुचि नहीं लेगा। वास्तविक जीवन में भी ऐसी ही है जहाँ परिवर्तन का अर्थ जीवन है।

RBSE Class 12 English Prudence Non-Fiction Chapter 2 Additional Questions

RBSE Class 12 English Prudence Non-Fiction Chapter 2 Short Answer Type Questions

Answer the following questions in about 50 words each :
निम्न प्रत्येक प्रश्न का उत्तर 50 शब्दों में लिखिए :

Question 1.
What are the things that mark animate things from the inanimate?
वे कौन-सी चीजें हैं जो सजीव चीजों की निर्जीव चीजों से विशिष्टता बताती हैं ?
Answer:
The things that mark animate things from the inanimate are :

  1. Animate things have flicker in them but the inanimate ones don’t.
  2. Animate things are a congregation of many parts but the inanimate ones are never whole.
  3. Animate things are complete in themselves but inanimate are not.
  4. Animate things do some activity but inanimate ones don’t.

चीजें जो सजीव चीजों की निर्जीव चीजों से विशिष्टता बताती हैं वे हैं –

  1. सजीव चीजों में स्फुरण होता है लेकिन निर्जीव चीजों में नहीं।
  2. सजीव चीजें बहुत से भागों का एक संगठन होती हैं लेकिन निर्जीव चीजें कभी सम्पूर्ण नहीं होती हैं।
  3. सजीव चीजें स्वयं में सम्पूर्ण होती हैं लेकिन निर्जीव चीजें नहीं।
  4. सजीव चीजों में क्रियाशीलता होती है लेकिन निर्जीव चीज़ों में नहीं।

Question 2.
What is the simple truth that eludes the philosopher or the scientist?
वह कौन-सा साधारण सत्य है जो दार्शनिक या वैज्ञानिक से दूर भागता है ?
Answer:
Neither a philosopher nor a scientist sees life as a whole. A philosopher considers thought to be life. A scientist takes each body part as a living being. Thus, they both don’t see the truth that life is a whole and no part alone can define life.

न तो दार्शनिक, न ही वैज्ञानिक जीवन को इसकी सम्पूर्णता में देखता है। दार्शनिक विचार को जीवन मानता है। वैज्ञानिक शरीर के प्रत्येक भाग को जीवित प्राणी मानता है। इस प्रकार वे दोनों इस सत्य को नहीं देखते हैं कि जीवन एक पूर्ण है और कोई भी भाग अकेला जीवन को परिभाषित नहीं कर सकता है।

Question 3.
How does Lawrence reconcile inconsistency of behaviour with integrity?
लॉरेन्स व्यवहार के विरोधाभास का अखण्डता से किस प्रकार सामंजस्य बिठाते हैं ?
Answer:
Lawrence is aware of the changes in human behaviour. He says that love for change is natural for everybody. But even in change, one maintains a certain integrity. Everybody’s behaviour keeps changing from time to time, but that change follows a certain pattern according to the will of that person.

लॉरेन्स मानव व्यवहार में परिवर्तनों से परिचित हैं। वह कहते हैं कि परिवर्तन के प्रति प्रेम प्रत्येक व्यक्ति के लिए स्वाभाविक है। लेकिन परिवर्तन में भी व्यक्ति एक प्रकार की अखण्डता बनाये रखता है। प्रत्येक व्यक्ति के व्यवहार में समय-समय पर परिवर्तन आता रहता है लेकिन वह परिवर्तन उस व्यक्ति की इच्छा के अनुसार एक निश्चित रूप में होता है।

Question 4.
How does the novel reflect the wholeness of a human being ?
उपन्यास मनुष्य की सम्पूर्णता पर किस प्रकार प्रकाश डालता है ?
Answer:
The novel presents life in its true sense. The novel reflects a human being as a whole i.e. a congregation of spirit, soul and all body parts like hands, brain, mind etc. Each body part flickers with a life of its own. Thus, it is as alive as spirit or soul. In this sense, a human being is a whole of many parts put together.

उपन्यास जीवन को उसके वास्तविक स्वरूप में प्रस्तुत करता है। उपन्यास मनुष्य को उसकी सम्पूर्णता में प्रदर्शित करता है अर्थात् भावना, आत्मा और शरीर के अन्य अंगों जैसे- हाथ, मस्तिष्क, बुद्धि आदि के एक संघठन के रूप में। शरीर का प्रत्येक भाग अपने स्वयं के जीवन से स्फुरण करता है। इस प्रकार, यह उतना ही जीवित होता है जितनी कि भावना या आत्मा। इस रूप में, एक मनुष्य बहुत-से अंशों से। मिलकर बना एक पूर्ण है।

Question 5.
Why does the author consider the novel superior to philosophy, science or even poetry?
लेखक उपन्यास को दर्शन, विज्ञान या यहाँ तक कि कविता से भी श्रेष्ठ क्यों मानता है ?
Answer:
Philosophy, science or even poetry sees life from only one perspective. Philosophy considers thought to be life. Science takes each body part viz. brain, nerves, glands etc., to be life. Poetry takes even a single emotion to be life. But the novel describes life in its wholeness. Thus, the novel is superior to philosophy, science or even poetry.

दर्शन, विज्ञान या यहाँ तक कि कविता भी जीवन को मात्र एक पक्ष से देखती है। दर्शन विचार को जीवन मानता है। विज्ञान शरीर के प्रत्येक अंग जैसे – मस्तिष्क, तंत्रिकाओं, ग्रन्थियों आदि को जीवन मानता है। कविता किसी एक भावना को ही जीवन मान लेती है। लेकिन उपन्यास जीवन का उसकी सम्पूर्णता में वर्णन करता है। इस प्रकार उपन्यास दर्शन, विज्ञान या यहाँ तक कि कविता से भी श्रेष्ठ है।

Question 6.
What does the author mean by ‘tremulations on ether’ and ‘the novel as a tremulation’?
‘शून्य में कम्पन’ तथा ‘उपन्यास एक कम्पन’ से लेखक का क्या अभिप्राय है ?
Answer:
‘Tremulations on ether’ is meant by words, thoughts, sighs and aspirations etc., that depart when one is dead. These no longer dwell in body when it is decayed or dead. These departed feelings while staying out of the body are called ‘tremulations on ether’. ‘Novel as a tremulation’ is referred to the vibrations that quiver us.

‘शून्य में कम्पन’ से अभिप्राय उन शब्दों, विचारों, आहों और महत्वाकांक्षाओं इत्यादि से है जो व्यक्ति की मृत्यु के बाद उससे अलग हो जाते हैं। शरीर के क्षीण या मृत हो जाने पर ये उसमें रहना बन्द कर देते हैं। शरीर से अलग हुई ये भावनाएँ जब शरीर से बाहर रहती हैं तो इन्हें ‘शून्य में कम्पन’ कहा जाता है। ‘उपन्यास एक कम्पन’ का सम्बन्ध उन कम्पनों से है जो हमें विचलित कर देते हैं।

Question 7.
What are the arguments presented in the essay against the denial of the body by spiritual thinkers ?
आध्यात्मिक विचारकों के द्वारा शरीर के खण्डन के विरोध में इस निबन्ध में क्या तर्क दिये गये हैं ?
Answer:
Spiritual thinkers give more importance to soul than body. They talk about the upliftment of soul and neglect body. The author says that it is our body which provides us all the worldly comforts and which is present beyond doubts. Hence we should not neglect our body for the sake of an unknown thing (soul).

आध्यात्मिक विचारक शरीर की अपेक्षा आत्मा को अधिक महत्व देते हैं। वे आत्मोन्नति के विषय में बात करते हैं और शरीर की उपेक्षा करते हैं। लेखक कहता है कि हमारा शरीर ही है जो हमें सभी प्रकार के सांसारिक सुख प्रदान करता है और जो निस्सन्देह वर्तमान है। अतः हमें एक अज्ञात वस्तु (आत्मा) के लिए अपने शरीर की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।

Question 8.
Discuss the curious ideas of ourselves that the author has described in this essay.
हमारे बारे में उन विचित्र विचारों पर चर्चा कीजिए जिनका लेखक ने इस निबन्ध में वर्णन किया है।
Answer:
The author has described that we think of ourselves as a body with a spirit in it, or a body with a soul in it, or a body with a mind in it. We don’t take our body as living. These are very curious ideas we have about ourselves.

लेखक ने वर्णन किया है कि हम स्वयं को भावना से युक्त शरीर, या आत्मा से युक्त शरीर, या सोच से युक्त शरीर मानते हैं। हम अपने शरीर को जीवित नहीं मानते हैं। ये वे अत्यधिक विचित्र विचार हैं। जो हम स्वयं के बारे में रखते हैं।

Question 9.
State the difference between ‘me alive’ and ‘me’.
‘Me alive’ व ‘me’ के बीच अन्तर बताइये।
Answer:
‘Me alive’ refers to one’s being alive with the consciousness of one’s wholeness. The author does not see any difference between ‘me alive’ and ‘me’. Each part of body that shows the sign of life is ‘me alive’ for the author. He says: whatever is ‘me alive’ is ‘me’.

‘Me alive’ व्यक्ति के अपनी सम्पूर्णता की जागरूकता के साथ जीवित रहने के सन्दर्भ में है। लेखक ‘me alive’ व ‘me’ में कोई अन्तर नहीं देखता है। शरीर का प्रत्येक अंग जिसमें जीवन का चिह्न दिखाई देता है, लेखक के लिए ‘me alive’ है। वह कहता है : जो कुछ भी ‘me alive’ है, वह ‘me’ है।

Question 10.
What is the difference between a novel and a book ? (S. S. Exam. 2012)
उपन्यास व किताब में क्या अन्तर है ?
Answer:
Novel is a bright book of life. It describes life in a wholeness. It shows characters in an a live way. It teaches readers what really life is. But book is the medium of defining life. It makes one alive in true sense. The book teaches what is right or what is wrong. But the book should not be taken as the sole basis of our knowledge of life.

उपन्यास जीवन की एक प्रकाशवान पुस्तक है। यह जीवन का सम्पूर्णता के रूप में वर्णन करता है। यह पात्रों को जीवंत तरीके से प्रदर्शित करता है। यह पाठकों को जीवन के वास्तविक अर्थ की शिक्षा देता है। किन्तु किताबे जीवन को परिभाषित करने का माध्यम है। यह किसी को भी सच्चे अर्थ में जीवित बनाती हैं। किताब सिखाती है क्या सही है और क्या गलत। किन्तु किताब को जीवन के ज्ञान का सम्पूर्ण आधार नहीं माना जाना चाहिए।

Question 11.
Why does the author say, “The years drink up the wine, and at last throw the bottle away” ?
लेखक यह क्यों कहता है, “समय शराब को पी जाता है और अन्त में बोतल फेंक देता है?
Answer:
The author says that people think soul, spirit or mind to be the essence of life. They compare the soul, spirit or mind with the wine and the body to its bottle. They see one’s death in the sense that time has consumed the essence of life and the bottle i.e. body is of no use now.

लेखक कहता है कि लोग आत्मा, भावना या सोच को जीवन का सार मानते हैं। वे आत्मा, भावना या सोच की तुलना शराब से करते हैं और शरीर की तुलना इसकी बोतल से। वे व्यक्ति की मृत्यु को इस रूप में देखते हैं कि समय ने जीवन के सार का उपभोग कर लिया है और अब बोतल अर्थात् शरीर व्यर्थ है।

Question 12.
‘The whole is greater than the part’. Discuss with reference to this essay.
‘पूर्ण अंश से बड़ा होता है। इस निबन्ध के सन्दर्भ में चर्चा कीजिए।
Answer:
The author gives this statement with reference to people’s strange ideas of themselves. A philosopher takes thought to be life. A scientist takes each body part to be life. But the author states that the whole body consisting of thought as well as visible organs is life.

लेखक लोगों के स्वयं के बारे में विचित्र विचारों के सन्दर्भ में यह बात कहता है। एक दार्शनिक विचार को जीवन मानता है। एक वैज्ञानिक शरीर के प्रत्येक भाग को जीवन मानता है। लेकिन लेखक कहता है कि विचारों और शरीर के सभी दृश्य अंगों को मिलाकर पूरा शरीर जीवन है।

Question 13.
The author says, “I do hope you begin to get my idea.” What idea is he talking about?
लेखक कहता है, “मैं अवश्य आशा करता हूँ कि आप मेरी बात समझने लगे हैं।” वह किस बात के बारे में बात कर रहा है ?
Answer:
While saying so, the author is talking about his idea of the supremacy of the novel in shaping people’s lives. Novel is superior to poetry, philosophy, science, or any other book. In this sense, it gives people better lessons in their lives. It gives them all round wisdom of life.

ऐसा कहते समय, लेखक लोगों के जीवन को आकार देने में उपन्यास की श्रेष्ठता के विचार के बारे में बात कर रहा है। उपन्यास कविता, दर्शन, विज्ञान या किसी अन्य पुस्तक से बढ़कर है। इस रूप में, यह लोगों को उनके जीवन के बारे में अधिक अच्छी शिक्षाएँ देता है। वह उन्हें जीवन की बहुमुखी समझ देता है।

Question 14.
The interest in a novel springs from the reactions of characters to circumstances. It is more important for characters to be true to themselves (integrity) that to what is expected of them (consistency). (A foolish consistency is the hobgoblin of little minds – Emerson.) Discuss.
उपन्यास में रुचि परिस्थितियों के प्रति पात्रों की प्रतिक्रियाओं से जगती है। पात्रों के लिए consistency अर्थात् उनसे जो अपेक्षा की जाती है, की बजाय integrity अर्थात् स्वयं के प्रति ईमानदारी अधिक महत्त्वपूर्ण है। (Emerson ने कहा है – एक मूर्खतापूर्ण स्थिरता तुच्छ मस्तिष्कों के शैतान बौनों की भाँति है।) इस पर चर्चा कीजिए।
Answer:
While reading a novel, the readers may expect its characters to behave in a certain way. But this consistency in characters is far less important than the integrity of their characters. The integrity in them gives the reader lessons in life. Emerson has rightly condemned consistency by calling it the hobgoblin of little minds.

उपन्यास को पढ़ते समय पाठक इसके पात्रों से एक विशिष्ट प्रकार से व्यवहार करने की आशा कर सकते हैं। लेकिन पात्रों से की जाने वाली यह अपेक्षा उनकी स्वयं के प्रति ईमानदारी से बहुत कम महत्त्वपूर्ण है। उनकी स्वयं के प्रति ईमानदारी पाठक को जीवन की शिक्षाएँ देती है। Emerson ने स्थिरता (पात्रों से की जाने वाली अपेक्षा) की यह कहकर ठीक ही निन्दा की है कि यह तुच्छ मस्तिष्कों के शैतान बौनों की भाँति है।

Question 15.
‘The novel is the one bright book of life’. ‘Books are not life’. Discuss the distinction between the two statements.
‘उपन्यास जीवन की एक उत्तम पुस्तक है’। ‘पुस्तकें जीवन नहीं हैं। इन दोनों कथनों के बीच भेद पर चर्चा कीज्रिए।
Answer:
The novel can rightly be called the one bright book of life. It shows characters in such a way that they seem life like. It describes life in its wholeness. But books are not life. Books are just the medium of defining life. Ruskin has rightly said – “Life is living while books are the dead things”.

उपन्यास को ठीक ही कहा जा सकता है कि यह जीवन की एक उत्तम पुस्तक है। यह पात्रों को इस तरीके से प्रदर्शित करता है कि वे जीवंत प्रतीत होते हैं। यह जीवन को उसकी सम्पूर्णता में वर्णन करता है। लेकिन पुस्तकें जीवन नहीं हैं। पुस्तकें जीवन को परिभाषित करने का माध्यम मात्र हैं। Ruskin ने ठीक ही कहा है – “जीवन जीवित है जबकि पुस्तकें मृत वस्तुएँ हैं”।

RBSE Class 12 English Prudence Non-Fiction Chapter 2 Long Answer Type Questions

Answer the following questions in about 100 words each:
निम्न प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 100 शब्दों में लिखिए :

Question 1.
What is life for a novelist ?
उपन्यासकार के लिए जीवन क्या है ?
Answer:
The main thing about a novelist is that he sees life as a whole. Different people see life from their different limited view. A parson talks about life after death. But a novelist is not interested in anything after life. A philosopher talks about infinity, and the pure spirit which knows all things. But a novelist realises that infinity is just a part of body. A scientist considers each body part as life. But to a novelist, a brain or a liver or a heart alone is not life. He views life as a whole of thoughts, spirit, soul and body parts.

एक उपन्यासकार के बारे में मुख्य बात यह है कि वह जीवन को पूर्ण रूप में देखता है। अलग-अलग लोग जीवन को अपने अलग-अलग सीमित दृष्टिकोण से देखते (समझते) हैं। एक पादरी मृत्यु के बाद जीवन के बारे में बात करता है। किन्तु उपन्यासकार जीवन के बाद अर्थात् मृत्यु के बाद किसी चीज में रुचि नहीं लेता है। एक दार्शनिक अनन्त के बारे में और शुद्ध भावना के बारे में बात करता है जो सब कुछ जानती है। लेकिन एक उपन्यासकार अनुभव करता है कि अनन्त शरीर का एक अंश मात्र है। एक वैज्ञानिक शरीर के प्रत्येक अंग को जीवन मानता है। लेकिन एक उपन्यासकार के लिए, एक मस्तिष्क या एक जिगर या एक हृदय अकेला जीवन नहीं है। वह जीवन को विचारों, भावों, आत्मा और शरीर के अंगों को पूर्णता के रूप में देखता है।

Question 2.
What is the theory of right, and wrong, good and bad according to D. H. Lawrence ?
डी. एच. लारेन्स के अनुसार सही और गलत, और अच्छे और बुरे का सिद्धान्त क्या है ?
Answer:
According to D. H. Lawrence there is right and wrong, good and bad in the life. But what is right in one case is wrong in another case. One thing may be good at one time but may be bad at other time. In the novel a man may become a corpse for his so called goodness or another may go dead because of his wickedness. Right or wrong or good or bad is an instinct generating from the consciousness of man alive. We realize life when this instinct is given full play as in the novel to make it alive.

डी. एच. लारेन्स के अनुसार जीवन में अच्छा और बुरा, सही और गलत होता है। परन्तु जो कुछ एक मामले में सही हो सकता है वही दूसरे मामले में गलत हो सकता है। कोई चीज एक स्थान पर अच्छी हो सकती है वही दूसरे स्थान पर बुरी हो सकती है। उपन्यास में एक व्यक्ति अपनी तथाकथित अच्छाई के लिए शव जैसा हो जाता है वहीं दूसरा कोई व्यक्ति अपनी दुष्टता के लिए मर जाता है। सही या गलत या अच्छा या बुरां एक प्राकृतिक आवेग है जो कि एक जीवित व्यक्ति की संचेतना से उत्पन्न होता है। हम जीवन को तभी अनुभव करते हैं जब इस भावना को खेलने का पूरा मौका दिया जाता है जैसा कि उपन्यास में होता है।