Rajasthan Board RBSE Class 12 Home Science Chapter 27 वस्त्रों का संग्रहण

RBSE Class 12 Home Science Chapter 27 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से सही उत्तर चुनें –
(i) वस्त्रों के संग्रहण से बचत होती है –
(अ) समय
(ब) धन
(स) श्रम
(द) ये सभी
उत्तर:
(द) ये सभी

(ii) किन वस्त्रों को समय-समय पर खुली हवा में फैलाकर तह बदलनी चाहिए।
(अ) ऊनी वस्त्रों की
(ब) सूती वस्त्रों की
(स) रेशमी वस्त्रों की
(द) ये सभी
उत्तर:
(स) रेशमी वस्त्रों की

(iii) मौसम के अनुसार वस्त्रों का संग्रहण करते हैं –
(अ) अल्पकाल के लिए
(ब) दीर्घकाल के लिए
(स) एक महीने के लिए
(द) इसमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) दीर्घकाल के लिए

(iv) अखबार कपड़ों को बचाता है –
(अ) कीड़ों से
(ब) नमी से
(स) फफूंद से
(द) सड़ने से
उत्तर:
(अ) कीड़ों से

(v) वस्त्र रखने की संदूक और अलमारी होनी चाहिए –
(अ) साफ व नम
(ब) बड़ी व खुली
(स) स्वच्छ व सूखी
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(स) स्वच्छ व सूखी

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
1. संग्रहण से वस्त्रों को ………… होने से बचाया जा सकता है।
2. संग्रहण से वस्त्रों की ………… एवं ………… बढ़ जाती है।
3. ………… कपड़ों के साथ ………… कपड़ों का संग्रहण नहीं करना चाहिए।
4. संग्रहण करते समय ………… की गोलियों का इस्तेमाल करना चाहिए।
5. सर्वप्रथम वस्त्रों की ………… करनी चाहिए, तत्पश्चात् संग्रहण।
उत्तर:
1. नष्ट
2. कार्यक्षमता एवं आयु
3. साफ, गन्दे / ऊनी, रेशमी
4. नेफ्थलीन
5. छंटाई।

प्रश्न 3.
वस्त्रों का संग्रहण क्यों अनिवार्य है?
उत्तर:
वस्त्रों की उचित सुरक्षा एवं विधिवत् संग्रहण का सामान्य ज्ञान प्रत्येक गृहिणी के लिए आवश्यक है। वस्त्र चाहे कितना भी आकर्षक और कीमती हो बिना उचित संरक्षण के वह पहनने योग्य नहीं रहता है। अत: वस्त्र लम्बे समय तक उपयोगी बना रह सके इसके लिए उसका उचित संरक्षण आवश्यक है। कभी-कभी यदि हमें अचानक किसी उत्सव या समारोह में जाना पड़े तो उचित संग्रहण के अभाव में हमें उचित वस्त्र सही समय पर उपलब्ध नहीं हो सकते।

अत: हमें आवश्यकता पड़ने पर वस्त्र सही सलामत तथा अच्छी अवस्था में प्राप्त हों इसके लिए आवश्यक है कि हम उनका संग्रहण उचित प्रकार से करें। परन्तु कई बार समय के अभाव या सही आदत न होने के कारण वस्त्रों को लापरवाही के साथ इधर-उधर डाल देते हैं तथा वस्त्रों को समेटते भी नहीं हैं और न ही उन्हें हैंगर पर टांगते हैं और न ही सही समय पर धोए जाते हैं। ऐसे में यदि हमें किसी कार्य से बाहर जाना हो तो वह हमें नहीं मिल पायेंगे। अत: यह अत्यन्त आवश्यक है कि वस्त्रों का संग्रहण उचित तरीके से किया जाये।

प्रश्न 4.
स्वच्छता से संग्रहित वस्त्रों का महत्त्व बताइए?
उत्तर:
वस्त्रों के संरक्षण में उचित रख-रखाव का विशेष महत्त्व है। सामान्य रूप से सभी वस्त्र प्रत्येक मौसम में धारण नहीं किए जाते, अत: कुछ वस्त्रों को वर्ष में कुछ समय के लिए अनिवार्य रूप से संग्रहीत करना पड़ता है। इन वस्त्रों को बंद अलमारी या बॉक्स में ही रखा जाना चाहिए जिससे नमी, फफूंद, कीड़े तथा चूहों से हानि की आशंका नहीं होती। वस्त्रों को गंदा या मैला नहीं रखना चाहिए। वस्त्रों को धोकर सुखाने के बाद ही रखें। कोमल वस्त्रों को कागज में लपेटकर रखने से वे सुरक्षित रहते हैं।

प्रश्न 5.
वस्त्रों का उचित संग्रहण करते समय किन बिन्दुओं को ध्यान में रखेंगे।
उत्तर:
वस्त्रों की देखभाल एवं संग्रहण के समय ध्यान रखने योग्य बिन्दु –

  1. संग्रहण से पूर्व वस्त्रों की भली-प्रकार मरम्मत कर लें। इससे वस्त्रों की आयु में वृद्धि होती है।
  2. वस्त्रों से सुई – पिन इत्यादि निकालकर रखें, क्योंकि इनसे वस्त्र का रेशा खिंचने की आशंका रहती है।
  3. वस्त्रों का संग्रहण उपयुक्त स्थान का चयन करके करें।
  4. नमीयुक्त स्थान पर वस्त्रों का संग्रहण न करें; इससे फफूंद लगने का खतरा रहता है।
  5. धूल, गंदगी व धूप से वस्त्रों को बचाकर रखें।
  6. वस्त्रों को संग्रहण से पूर्व भली प्रकार धोकर सुखा लें।
  7. पूरी तरह सुखाकर, नमी रहित करने के पश्चात् ही वस्त्रों को संरक्षित करें।
  8. स्वच्छ वस्त्रों को गंदे वस्त्रों के साथ न मिलाएँ।
  9. हवा में वस्त्रों का पसीना सुखाकर ही धोएँ।
  10. वस्त्रों पर प्रेस करके उचित प्रकार तह लगाकर हैंगर में टाँगकर रखें।
  11. ऊनी वस्त्रों के संग्रहण में अखबार का प्रयोग करें। इससे कीड़े नहीं लगते।
  12. वस्त्रों के रेशे के अनुसार फिनाइल अथवा नैफ्थलीन की गोलियाँ रखें।
  13. वस्त्रों को समय-समय पर धूप तथा हवा लगाएँ। इससे वस्त्रों में दुर्गन्ध तथा कीड़े नहीं रहते।

प्रश्न 6.
वस्त्रों को समय-समय पर धूप दिखाना क्यों अनिवार्य है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
समय – समय पर वस्त्रों को धूप तथा हवा लगाने से वस्त्र सुरक्षित रहते हैं। इससे वस्त्रों में दुर्गन्ध नहीं आती तथा नमी भी समाप्त होती रहती है। यदि वस्त्रों में नमी बनी रहे तो फफूंदी लगने अथवा कीड़ों के उत्पन्न होने की आशंका बनी रहती है। ऊनी वस्त्रों को वर्षा ऋतु के पश्चात् एक बार तेज धूप में 3-4 घण्टे के लिए सुखाना अति आवश्यक होता है।

प्रश्न 7.
संग्रहण करने से पूर्व वस्त्रों की छंटाई व मरम्मत आवश्यक है। क्यों? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
वस्त्रों के संरक्षण में उनकी छंटाई का विशेष महत्त्व है। धोकर सुखाए गए वस्त्रों को छंटाई के लिए सर्वप्रथम स्वच्छ दरी, पलंग अथवा चादर पर रखें। इसके पश्चात् इन वस्त्रों में से सर्वप्रथम छोटे वस्त्र जैसे-रूमाल, मोजे, टाई, अंत:वस्त्र अलग करके तह लगाकर इस प्रकार अलमारी में अलग खाने में रखें कि वह अलग से पता चल जाए। तत्पश्चात् बड़े वस्त्रों को अलग कर लें; जैसे-पायजामा, पेटीकोट, ब्लाउज इत्यादि। अनुपयोगी पुराने फटे वस्त्रों को अलग कर लें। इन सभी वस्त्रों को छंटाई के पश्चात् तह लगाकर रखें, जिससे आवश्यकतानुसार उचित वस्त्र आसानी से मिल जाएँ।

वस्त्रों के संग्रहण से पूर्व उनकी मरम्मत का भी विशेष महत्त्व है। दैनिक रूप से प्रयोग में आने वाले वस्त्र फट जाते हैं या उधड़ जाते हैं। यही नहीं, वस्त्रों के हुक या बटन तो प्रायः टूटते ही रहते हैं। वस्त्रों में आने वाले इस प्रकार के दोषों की संग्रहण पूर्व मरम्मत अति आवश्यक है। यदि संग्रहण से पूर्व वस्त्रों की मरम्मत नहीं की जाएगी तो उनके अधिक फट जाने या उधड़ जाने की आशंका बनी रहती है। कभी-कभी वस्त्रों में लगी जिप भी सही काम करना बंद कर देती है। ऐसी स्थिति में जिप को तुरन्त सुधारने का प्रयास करना चाहिए।

प्रश्न 8.
दैनिक प्रयोग में आने वाले वस्त्रों की सफाई अनिवार्य है। विवेचना करें।
उत्तर:
दैनिक प्रयोग में आने वाले वस्त्रों की सफाई निम्न कारणों से अनिवार्य मानी जाती है –

  • दैनिक प्रयोग में आने वाले वस्त्रों की सफाई से उनका जीवनकाल बढ़ जाता है।
  • बनियान, अण्डरवीयर आदि को प्रतिदिन धोना इसलिए अनिवार्य है क्योंकि ये प्रतिदिन पहनने से गन्दे हो जाते हैं तथा सफाई न करने पर इनमें अनेक प्रकार के रोगों के कीटाणु पनपने लगते हैं। बनियान पसीने से भीगकर गन्दी हो जाती है तथा सीलन से फफूंदी व जीवाणु पनपने लगते हैं।
  • वस्त्रों को अधिक गंदा नहीं होने देना चाहिए क्योंकि ये बहुत अधिक गंदा होने पर पूर्ण रूप से साफ नहीं किए जा सकते हैं तथा धोने में साबुन व डिटर्जेण्ट की अधिक मात्रा प्रयोग करनी पड़ती है।
  • रूमाल, मोजे आदि भी प्रतिदिन धोना अनिवार्य है क्योंकि ये गन्दे होने के कारण संक्रमण द्वारा रोग उत्पन्न कर सकते
  • ऊनी वस्त्रों की धुलाई प्रतिदिन संभव नहीं होती है। अतः नियमित रूप से ब्रुश से इन्हें साफ कर लेना चाहिए क्योंकि धूल ही बाद में मैल में बदल जाती है।

प्रश्न 9.
महँगे व कीमती वस्त्रों की संग्रहण प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विवाह, त्यौहार, उत्सव एवं विभिन्न समारोह में कीमती व महँगे वस्त्रों को धारण किया जाता है। बनारसी, ब्रोकेड, असली जरी-गोटे और कीमती रत्नों से जड़ित वस्त्र इत्यादि को विशेष देखभाल और संग्रहण की आवश्यकता होती है क्योंकि इन्हें लम्बे समय तक सहेज कर रखना होता है। इसके लिए सन्दूक, अटैची और बन्द अलमारी का उपयोग किया जाता है। इन महँगे व कीमती कपड़ों को कभी गर्म कपड़ों के साथ नहीं रखना चाहिए। असली सोने चाँदी से जड़े वस्त्र, बनारसी साड़ियाँ, ब्रोकेड, जरी-गोटे के वस्त्रों को साफ-सुथरे मलमल के कपड़े में लपेटकर रखने चाहिए। इससे जरी व गोटा और कीमती रत्न काले नहीं पड़ते और खराब नहीं होते हैं।

जिस स्थान पर वस्त्रों का संग्रहण कर रहे हैं, जैसे – सन्दूक, अलमारी उनको साफ करके नीम की सूखी पत्तियाँ बिछा देनी चाहिए। अब साफ कपड़ा बिछाकर उस पर कीमती कपड़ों को रखना चाहिए। समय-समय पर इन जरी वाले वस्त्रों को हवा में फैलाकर तह बदलकर रखते रहना चाहिए। इससे कीमती वस्त्रों की गुणवत्ता बनी रहती है। रेशमी वस्त्रों को भी उपरोक्त कीमती वस्त्रों की तरह से सहेज कर रखना चाहिए। चूँकि रेशमी वस्त्र कीमती होने के साथ नाजुक भी होते हैं। अत: इनको विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है।

RBSE Class 12 Home Science Chapter 27 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Home Science Chapter 27 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
संग्रहण से पहले वस्त्रों को –
(अ) धोना चाहिए
(ब) सुखाना चाहिए
(स) प्रेस करनी चाहिए
(द) तीनों कार्य करने चाहिए
उत्तर:
(द) तीनों कार्य करने चाहिए

प्रश्न 2.
सबसे कठिन संग्रहण होता है –
(अ) कीमती वस्त्रों का
(ब) दैनिक उपयोग के वस्त्रों का
(स) ऊनी वस्त्रों का
(द) रजाई व चद्दर का
उत्तर:
(ब) दैनिक उपयोग के वस्त्रों का

प्रश्न 3.
कम्बल व रजाई का संग्रहण किया जाता है –
(अ) शीत ऋतु के बाद
(ब) वर्षा ऋतु के बाद
(स) ग्रीष्म ऋतु के बाद
(द) शीत ऋतु से पहले
उत्तर:
(अ) शीत ऋतु के बाद

प्रश्न 4.
ऊनी वस्त्रों को कीड़ों से बचाने के लिए रखा जाता है –
(अ) कपड़े में लपेटकर
(ब) अखबार में लपेटकर
(स) रेशमी वस्त्रों के साथ
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) अखबार में लपेटकर

प्रश्न 5.
संग्रहण का प्रथम चरण है –
(अ) स्थान
(ब) वस्त्रों की छटाई
(स) स्वच्छ संग्रहण
(द) तत्क्षण मरम्मत
उत्तर:
(अ) स्थान

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
1. वस्त्र ही एक ऐसी चीज है जिसका हर व्यक्ति से हर समय ………… रहता है।
2. सभी वस्त्रों को उनकी प्रकृति व किस्म के अनुसार ………… व अधिक समय के लिए सहेज कर रखना चाहिए।
3. किसी भी ………… में दाग-धब्बे वाले वस्त्रों का संग्रहण नहीं करना चाहिए।
4. संग्रहण करते समय कभी-भी ………… कपड़ों को साफ वस्त्रों के साथ नहीं रखना चाहिए।
5. समय-समय पर जरी वाले वस्त्रों को ………… में फैलाकर तह बदलकर रखते रहना चाहिए।
6. रजाइयों और ………… के कवर को डिटॉल युक्त पानी से धोकर व सुखाकर रखना चाहिए।
उत्तर:
1. नाता
2. अल्प
3. परिस्थिति
4. गन्दे
5. हवा
6. कम्बलो।

RBSE Class 12 Home Science Chapter 27 अति लघूत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वस्त्र संग्रहण में वस्त्रों की छंटाई से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
सूती, ऊनी, हल्के, भारी, सर्दी एवं गर्मी के कपड़े आदि को अलग-अलग करके संग्रहण करना वस्त्रों की छंटाई कहलाती है।

प्रश्न 2.
संग्रहण से पूर्व वस्त्रों की धुलाई करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
वस्त्रों में उपस्थित गंदगी एवं दाग रखे-रखे और अधिक भद्दे हो जाते हैं और कपड़े को नुकसान,पहुँचाते हैं।

प्रश्न 3.
कीड़ों की रोकथाम के लिए वस्त्रों के बीच किसकी गोलियाँ रखी जाती हैं?
उत्तर:
नेफ्थलीन की गोली रखी जाती हैं।

प्रश्न 4.
कम्बल, रजाई आदि के संग्रहण से पूर्व क्या करना चाहिए?
उत्तर:
कम्बल, रजाई आदि के संग्रहण से पूर्व इन्हें डिटॉल युक्त पानी में खंगाल कर सुखा लेना चाहिए।

प्रश्न 5.
ऊनी वस्त्रों का संग्रहण किस प्रकार करना चाहिए?
उत्तर:
ऊनी वस्त्रों के अखबार में लपेट कर संग्रहण करना चाहिए जिससे इनमें कीड़े न लगें।

प्रश्न 6.
वस्त्रों की छंटाई करते समय किस बात का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर:
वस्त्रों की छंटाई करते समय उनमें लगे हुक, काज, बटन व चैन आदि चैक करने चाहिए।

प्रश्न 7.
दैनिक रूप से पहनने वाले वस्त्रों को कहाँ पर रखना चाहिए?
उत्तर:
दैनिक रूप से पहनने वाले वस्त्रों को ऐसी जगह पर रखना चाहिए जहाँ से वे बिना परेशानी के मिल सकें।

प्रश्न 8.
वस्त्रों के संग्रहण से किसकी बचत होती है?
उत्तर:
वस्त्रों के संग्रहण से श्रम, धन व समय की बचत होती है।

RBSE Class 12 Home Science Chapter 27 लघूत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पहनने के साधारण वस्त्रों की देखभाल आप किस प्रकार करेंगे?
उत्तर:
पहनने के साधारण वस्त्रों की देखभाल –

  • जहाँ तक संभव हो वस्त्रों को घर पर ही धोना चाहिए। इससे उनका जीवनकाल बढ़ जाता है।
  • बनियान, अण्डरवियर आदि को प्रतिदिन धोना चाहिए।
  • वस्त्रों को कभी भी बहुत अधिक गंदा न होने दें; क्योंकि बहुत गंदा होने पर एक तो वे पूर्ण रूप से साफ नहीं होते हैं दूसरे धोने के लिए इन्हें काफी रगड़ना व मसलना पड़ता है। इससे ये क्षीण हो जाते हैं।
  • पैंट, कमीज, कुर्ता, साड़ी इत्यादि को हैंगर पर टॉगकर सुखाएँ; इससे उन पर प्रेस आसानी से हो जाती है।

प्रश्न 2.
वस्त्रों को गंदगी से बचाने के लिए आप क्या करेंगे?
उत्तर:
वस्त्रों को गंदा होने से बचाने के लिए उन्हें नियमित रूप से धूलरहित करते रहना चाहिए। गर्म वस्त्रों के संदर्भ में यह बात अधिक महत्त्वपूर्ण मानी जाती है। गर्म वस्त्रों की अधिक धुलाई संभव नहीं होती; अतः इन्हें नियमित रूप से झाड़कर ब्रुश से साफ करके रखना चाहिए, क्योंकि वस्त्रों पर पड़ी धूल ही बाद में मैल का रूप धारण कर लेती है।

प्रश्न 3.
वस्त्रों की देखभाल में सामान्यतः किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर:
वस्त्रों की देखभाल –

  • वर्षा ऋतु के बाद वस्त्रों को धूप में सुखाना चाहिए।
  • ऊनी वस्त्रों को सदैव अलग संदूक व अलमारी में रखना चाहिए।
  • कोट-पैंट व साड़ियों को हैंगर पर लटकाकर रखना चाहिए।
  • वस्त्रों को धोबी को न देकर स्वयं ही धोना चाहिए।
  • वस्त्रों को मोंगरी से पीटकर नहीं धोना चाहिए।
  • उत्सवों पर पहनने वाले बहुमूल्य वस्त्रों की ड्राई-क्लीनिंग (Dry-cleaning) करानी चाहिए।

प्रश्न 4.
वस्त्रों की सुरक्षा के प्रमुख उपाय कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
वस्त्रों की सुरक्षा के उपाय –

  • वस्त्रों को रखने से पूर्व अलमारी में डी. डी. टी. पाउडर छिड़ककर अखबार का कागज बिछा देना चाहिए।
  • वस्त्रों को रखने से पूर्व पूर्ण रूप से सुखा लें तथा देख लें कि वस्त्रों में नमी तो नहीं है।
  • ऊनी वस्त्रों को अखबार में लपेटकर रखें।
  • बहुमूल्य वस्त्रों की सूखी धुलाई करवाकर रखें।
  • वस्त्र रखने के संदूक में नैफ्थलीन की गोलियाँ डाल दें।
  • भिन्न-भिन्न तंतुओं से निर्मित वस्त्रों को अलग-अलग रखें।
  • ऊनी वस्त्रों को सदैव धोकर ब्रुश से साफ करके रखें।
  • ऊनी वस्त्रों को वर्षा ऋतु के उपरान्त एक-दो बार अवश्य ही 3-4 घण्टे के लिए तेज धूप में सुखाएँ।

RBSE Class 12 Home Science Chapter 27 निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
वस्त्र संग्रहण के चरण बताइए।
उत्तर:
वस्त्र संग्रहण के चरण निम्नलिखित हैं –

  1. स्थान का चयन
  2. वस्त्रों की छंटाई
  3. यथास्थान रखना
  4. उपयोग में सावधानी।

(1) स्थान का चयन:
वस्त्रों के संग्रहण हेतु उपयुक्त स्थान का चयन करना चाहिए। अलमारी को पानी से दूर रखना चाहिए जिससे वस्त्र नमी न सोखें। वस्त्र खिड़की-दरवाजे से दूर होने चाहिए, ताकि धूल-मिट्टी वस्त्रों को गन्दा न करे। वस्त्र रखने वाली अलमारी, संदूक, अटैची जो भी हो साफ व सूखी होनी चाहिए।

(2) वस्त्रों की छंटाई:
वस्त्रों के संरक्षण में उनकी छंटाई का विशेष महत्त्व है। धोकर सुखाए गये वस्त्रों को छंटाई के लिए सबसे पहले स्वच्छ दरी अथवा चादर पर रखें। इसके बाद बड़े वस्त्र जैसे-पायजामा, पेटीकोट, ब्लाउज आदि तथा छोटे वस्त्र जैसे – रूमाल, मौजे, टाई, अन्त:वस्त्र अलमारी में अलग-अलग खाने में रखें कि वह अलग से पता चल जाए। इन सभी वस्त्रों को छंटाई के बाद तह लगाकर रखें जिससे आवश्यकतानुसार उचित वस्त्र आसानी से मिल जाएँ।

(3) यथास्थान रखना:
वस्त्रों को उपयोगिता के आधार पर इन्हें यथास्थान रख दें। छोटे वस्त्र आसानी से दिखाई दें। बड़े वस्त्र जैसे-पायजामा, पेटीकोट, आदि जिन पर प्रेस की आवश्यकता न हो उन्हें ढंग से बड़े खाने में रखें, प्रेस किये गये वस्त्र अलमारी में हैंगर पर टाँग कर रखें।

(4) उपयोग में सावधानी:
अलमारी में से वस्त्रों को उपयोग में लेते समय सावधानी रखनी चाहिए। तह किये वस्त्रों में से एक वस्त्र निकालते समय ध्यान रखें कि अन्य वस्त्रों की तह न बिगड़े। वस्त्र को अलमारी से निकालने के बाद उसे अच्छी तरह बन्द कर दें ताकि वस्त्र साफ-सुरक्षित रहें।

प्रश्न 2.
वस्त्रों के संग्रहण की विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वस्त्रों के संग्रहण की विधियाँ:

विभिन्न प्रकार के वस्त्रों के संग्रहण की विधियाँ निम्नलिखित हैं –
(1) दैनिक प्रयोग में आने वाले वस्त्रों का संग्रहण:
प्रतिदिन पहनने वाले वस्त्रों की प्रतिदिन धुलाई करके, वस्त्रों को अच्छी तरह से तह करके खुली या बन्द अलमारी के विभिन्न खानों में रख देना चाहिए। इस्तरी किये गये वस्त्रों को हैंगर पर टॉग देना चाहिए ताकि क्रीज खराब न हो।

(2) मौसमानुसार वस्त्रों का संग्रहण:
ऊनी वस्त्रों का संग्रहण करने से पूर्व धोकर अथवा सूखी धुलाई करवाकर अलग बॉक्स में रखना चाहिए। बॉक्स को अच्छी तरह से धूप दिखाकर नीम की सूखी पत्तियाँ अथवा नैफ्थलीन की गोलियाँ चारों कोनों में डालकर रखना चाहिए जिससे वस्त्रों में कीड़ा न लगे। रजाई एवं कम्बल को भी सुखाकर नैफ्थलीन की गोलियाँ डालकर रखना चाहिए।

(3) अवसर के अनुसार वस्त्रों का संग्रहण:
महँगे वस्त्रों तथा विवाह, त्योहार एवं उत्सव आदि में पहनने वाले वस्त्रों को संदूक, अटैची एवं बन्द अलमारी में रखने से पहले नीम की सूखी पत्तियाँ बिछाकर, अखबार या साफ कपड़ा बिछाकर रखना चाहिए। जरीदार कपड़े को अच्छी तरह तह कर साफ पुराने कपड़े में लपेटकर रखना चाहिए ताकि जरी खराब न हो।

(4) रेशमी वस्त्रों के संग्रहण:
निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए –

  • रेशमी वस्त्रों के संग्रहण हेतु बॉक्स या अटैची को सुखा लें, उसमें अखबार बिछायें तथा साबुत लाल मिर्च की पोटली बनाकर रखें ताकि वस्त्रों में कीड़े न लगे।
  • रेशमी वस्त्रों को अच्छी तरह से तह करके पुराने साफ कपड़े में लपेटकर रखें
  • रेशमी वस्त्रों को कुछ दिनों के अन्तराल पर खुली हवा में फैलाकर तह बदलकर रखें जिससे वे फटें नहीं।