Rajasthan Board RBSE Class 12 Home Science Chapter 29 घरेलू हिसाब-किताब

RBSE Class 12 Home Science Chapter 29 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से सही उत्तर चुनें –
(i) निश्चित अवधि पर जो व्यय दोहराये जाते हैं, वे हैं –
(अ) उपभोग व्यय
(ब) निश्चित व्यय
(स) अर्द्ध-निश्चित व्यय
(द) पारिवारिक व्यय
उत्तर:
(ब) निश्चित व्यय

(ii) उपभोग वस्तुओं की माँग में वृद्धि होने पर बढ़ती है –
(अ) उत्पादन की गति
(ब) उत्पादन की गति व मात्रा
(स) उत्पादन की मात्रा
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) उत्पादन की गति व मात्रा

(iii) बजट का तात्पर्य है –
(अ) पारिवारिक आय का ब्यौरा
(ब) पारिवारिक खर्चों का ब्यौरा
(स) आय-व्यय का विस्तृत ब्यौरा
(द) विभिन्न मदों पर किया जाने वाला व्यय
उत्तर:
(स) आय-व्यय का विस्तृत ब्यौरा

(iv) घरेलू हिसाब-किताब का प्रकार है –
(अ) बाजार खर्च
(ब) धोबी का हिसाब
(स) सम्पत्ति का हिसाब
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति करो –
1. ………… आर्थिक क्रियाओं का संचालक है।
2. उपभोग के बाद बचने वाली धनराशि ………… कहलाती है।
3. ………… व्यय, आय एवं परिस्थिति के अनुसार परिवर्तित होते रहते हैं।
4. आय को व्यय करने से पहले ………… बजट बनाना चाहिये।
5. घरेलू हिसाब से ………… का उचित संतुलन बनाए रखना आसान हो जाता है।
उत्तर:
1. उपभोग व्यय
2. बचत
3. अर्द्धनिश्चित
4. पारिवारिक
5. आय-व्यय।

प्रश्न 3.
पारिवारिक व्यय किसे कहते हैं? इसे कितने भागों में विभाजित किया जा सकता है? समझाइये।
उत्तर:
परिवार की आवश्यकताएँ व सुख:
सुविधाएँ पूरी करने हेतु जो व्यय होता है, उसे पारिवारिक व्यय कहते हैं। प्रत्येक व्यक्ति अपनी आय के अनुरूप ही अपनी आवश्यकताओं पर होने वाले व्यय को तय करता है। अत: परिवार की आय का वह अंश जो पारिवारिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु निश्चित समय में खर्च किया जाता है, पारिवारिक व्यय कहलाता है। पारिवारिक व्यय को दो भागों में विभक्त किया गया है –
(1) उपभोग व्यय
(2) बचत

(1) उपभोग व्यय:
पारिवारिक आय का वह भाग जो आवश्यकता पूर्ति हेतु खर्च होता है, उपभोग व्यय कहलाता है। परिवार की प्रतिमाह की आवश्कयताएँ; जैसे-भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा, मनोरंजन, चिकित्सा आदि पर अनिवार्य रूप से खर्च होता है। अत: आय का अधिकतर भाग उपभोग की वस्तुओं पर व्यय होता है।

(2) बचत:
पारिवारिक आय का वह भाग जो उपभोग व्यय के पश्चात शेष रह जाता है, बचत कहलाता है। यह भाग भविष्य निधि के रूप में संचित रहता है अथवा उत्पाद के रूप में विनियोग किया जाता है।

प्रश्न 4.
उपभोग व्यय पर प्रकाश डालते हुए इसके प्रकारों के बारे में बताइए।
उत्तर:
उपभोग व्यय:
आय का वह भाग जो उपभोग के लिए विभिन्न सामग्री पर खर्च किया जाता है, उपभोग व्यय कहलाता है। परिवार की अधिकांश आय उपभोग की वस्तुओं; जैसे-भोजन, वस्त्र, मकान आदि पर खर्च की जाती है। उपभोग व्यय तीन प्रकार के होते हैं –

(1) निश्चित व्यय:
इस प्रकार के व्यय एक निश्चित अवधि पर दोहराने पड़ते हैं; जैसे राशन का बिल, मकान का किराया, स्कूल की फीस आदि अनिवार्य रूप से व्यय करनी पड़ती है। इस व्यय की मदें सामान्यतया प्रतिमाह एक समान होती

(2) अर्द्धनिश्चित व्यय:
इस प्रकार के व्यय में आय एवं परिस्थिति के अनुसार परिवर्तन लाया जा सकता है। जैसे अधिक आय होने पर उच्च कोटि का भोजन किया जा सकता है। इस व्यय के अन्तर्गत आराम एवं विलासिता की वस्तुएँ आती है। त्यौहारों एवं विशेष पर्वो पर किया गया व्यय भी इस श्रेणी में आता है।

(3) अन्य व्यय:
ये व्यय अनिर्धारित होते हैं तथा व्यक्ति की आय पर निर्भर करते हैं; जैसे—मनोरंजन, आभूषण, वाहन, भ्रमण इत्यादि। यदि व्यक्ति की आय अधिक होती है तो इन चीजों पर व्यय करता है।

प्रश्न 5.
आय एवं व्यय एक निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है। कैसे?
उत्तर:
जीवन यापन करने हेतु कुछ मूल आवश्यकताएँ हैं जो हर व्यक्ति के लिए जरूरी है; जैसे-भोजन, आवास एवं वस्त्र। इनको पूरा करने हेतु धन की आवश्यकता होती है जो व्यक्ति कार्य करके प्राप्त करता है। इस प्रकार मिलने वाले धन को अपनी आवश्यकता पूर्ति हेतु व्यय करता है। प्रत्येक व्यक्ति अपनी कार्य क्षमता के अनुरूप धर्नाजन करता है एवं अपनी इच्छानुसार एवं आवश्यकता के अनुरूप खर्च निर्धारित करता है। यह एक अनवरत् प्रक्रिया है। परिवार के उपभोग व्यय हेतु व्यक्ति कार्य करके आय प्राप्त करता है।

उपभोग वस्तुओं हेतु बाजार में मांग बढ़ती है तथा उत्पादन बढ़ता है। उत्पादित माल के वितरण से अनेक परिवार आय प्राप्त करते हैं तथा पुन: इस आय का उपभोग व्यय करते हैं। इससे विश्व में विभिन्न आर्थिक गतिविधियों का संचालन होता है। अत: आय एवं व्यय एक निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है।

प्रश्न 6.
बजट की परिभाषा एवं प्रकार लिखिए।
उत्तर:
आय के उचित उपयोग हेतु योजनाबद्ध प्रबन्ध बनाना आवश्यक है। अत: आय को व्यय करने से पहले बजट बनाना आवश्यक है, क्योंकि बजट किसी निश्चित अवधि के पूर्व में अनुमानित आय-व्यय का ब्यौरा होता है।

(i) बजट के प्रकार:
बजट मुख्यत: तीन प्रकार के हो सकते हैं –
(1) सन्तुलित बजट-इस बजट में जितनी आय होती है उतना ही व्यय किया जाता है। इसमें बचत नहीं होती है और न ही कर्ज लेने की आवश्यकता होती है। इस प्रकार के बजट का निर्माण परिवार की कुल आय को देखकर किया जाता है। इस प्रकार के बजट में प्रमुख कमी यह है कि इसमें भविष्य की आवश्यकताओं तथा आकस्मिक आवश्यकताओं को प्राय: अनदेखा किया जाता है।

इस बजट से परिवार अपनी वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति तो कर लेता है, परन्तु भविष्य के लिए हमेशा चिन्तित रहता है। इस प्रकार का बजट परिवार के भविष्य को सुरक्षित नहीं बना सकता। अत: इसे मजदूरी का बजट माना जाता है।

(2) बचत का बजट:
यह बजट सबसे अच्छा होता है। इसमें परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति भी होती रहती है साथ ही भविष्य के लिए बचत भी कर ली जाती है। इस बजट से परिवार के सभी सदस्यों को अधिकतम सन्तुष्टि प्राप्त होती है तथा आय-व्यय में संतुलन बना रहता है। इसके साथ भविष्य के लिए कुछ धन संचित कर लिया जाता है। अर्थशास्त्रियों का भी मानना है कि बचत का बजट ही सबसे उत्तम बजट है।

(3) घाटे का बजट:
जब आय से अधिक व्यय होता है तो वह घाटे का बजट होता है। इस प्रकार के बजट में ऋण लेना पड़ता है। अत: कभी भी घाटे का बजट नहीं बनाना चाहिए। इस बजट से परिवार की अर्थव्यवस्था चरमरा जाती है तथा परिवार आर्थिक संकट से घिर जाता है। घाटे का बजट कम समय के लिए बनाया जा सकता है, परन्तु लगातार घाटे का बजट बनाने से परिवार कर्ज के बोझ से दब जाता है।

प्रश्न 7.
घरेलू हिसाब-किताब की आवश्यकता लिखिए।
उत्तर:
किसी एक निश्चित समयावधि में परिवार द्वारा किए गए घरेलू खर्च का लिखित ब्यौरा हिसाब-किताब कहलाता है। आजकल के दौर में हिसाब-किताब करना अति आवश्यक है, बहुत से व्यक्ति ऐसे भी होते हैं जो हिसाब-किताब किसी डायरी या पुस्तिका में नहीं लिखते बल्कि अपने मस्तिष्क में लिख लेते हैं, पर मस्तिष्क में लिखे गये हिसाब की अपनी कुछ सीमाएँ होती हैं। लिखित हिसाब-किताब को लम्बे समय तक रखा जा सकता है।

आवश्यकता होने पर समय-समय पर समीक्षा (Review) करके खर्च करने के तौर-तरीकों का मूल्यांकन किया जा सकता है, यदि वर्तमान में किया गया खर्च अनावश्यक है तो भविष्य में उसे सुधारा जा सकता है या रोका जा सकता है तथा आवश्यकता पड़ने पर उसे दिखाया जा सकता है। हिसाब-किताब की आवश्यकता को निम्नलिखित बिन्दुओं द्वारा समझाया गया है –

(1) धन के व्यवस्थापन हेतु:
हिसाब-किताब के माध्यम से बाजार वस्तु के मूल्य की जानकारी होती रहती है जिससे वस्तु की सही कीमत के अनुसार व्यय होता है। इस प्रकार प्रत्येक व्यक्ति अपनी आय और व्यय को देख करके उनमें उचित तालमेल बिठाकर धन व्यवस्थापन कर लेता है। जिससे परिवार को आर्थिक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता।

(2) अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाने के लिए प्रतिदिन के हिसाब:
किताब से केवल आवश्यक वस्तुओं पर ही व्यय होता है क्योंकि इसमें कुछ बचत का भी प्रावधान होता है, अत: अनावश्यक खर्चों पर लगाम लग जाती है।

(3) सही कीमत की जानकारी किन:
किन वस्तुओं के मूल्य में वृद्धि हुई और किन वस्तुओं के मूल्य में कमी आयी है; इस सबकी जानकारी प्रत्येक दिन के हिसाब-किताब रखने से हो जाती है जिससे वस्तु की सही कीमत के बारे में ज्ञान अर्जित हो जाता है।

(4) निश्चित समय में किये व्यय की जानकारी:
हिसाब, लिखित होने से इसे लम्बे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है जिससे एक निश्चित समयावधि में कितनी आय हुई है और कितना खर्च हुआ है, इसकी जानकारी हो जाती है।

(5) सोच – समझकर खर्च करने के लिए:
हिसाब-किताब को देखकर के खर्च करने के तौर-तरीकों का मूल्यांकन किया जा सकता है, यदि वर्तमान में किया गया व्यय अनावश्यक है तो भविष्य में उसे रोका जा सकता है। व्यय करने का तरीका सुधारा जा सकता है।

(6) पारिवारिक लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु:
प्रत्येक व्यक्ति का उद्देश्य होता है कि वह अपने परिवार को उन्नत बनाये, इसके लिए वह अपने अनावश्यक खर्चों पर किये गये व्यय हिसाब-किताब के माध्यम से देख करके रोक देता है। इस बचे हुए धन को वह भविष्य के लिए सुरक्षित रख देता है जिससे विभिन्न पारिवारिक लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायता मिलती है। अत: यह आवश्यक है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने आय व व्यय का हिसाब अवश्य रखना चाहिए।

प्रश्न 8.
घरेलू हिसाब-किताब लिखने की मुख्य विधियों के नाम लिखिए एवं किसी एक को समझाइए।
उत्तर:
हिसाब-किताब को रखने के लिए व्यक्ति निम्नलिखित विधियों में से कोई भी एक या उससे अधिक विधियाँ अपनी आवश्यकतानुसार अपना सकता है। ये विधि चार प्रकार की होती हैं –
RBSE Solutions for Class 12 Home Science Chapter 29 घरेलू हिसाब-किताब-1
1. पृष्ठ विधि (Sheet Method):
पृष्ठ विधि द्वारा हिसाब-किताब रखना बहुत ही आसान एवं लचीला है। इसके अन्तर्गत खर्च की गयी राशि का हिसाब एक पृष्ठ पर लिख लिया जाता है और इसे किसी ऐसी जगह जैसे-दरवाजे के पीछे या किसी अलमारी पर बोर्ड पर लगाकर टाँग दिया जाता है तथा जैसे-जैसे खर्चा होता है उसे उस पृष्ठ पर लिख लिया जाता है। सप्ताह या महीने के अन्त में कुल खर्चा जोड़कर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि खर्च व्यवस्था के अनुसार हुआ है या नहीं।

2. लिफाफा विधि (Envelope Method):
लिफाफा विधि प्रतिमाह होने वाले निश्चित खर्च; जैसे-मकान किराया, बच्चों की स्कूल फीस, बीमा राशि का भुगतान, अखबार आदि पर व्यय के लिए काम में ली जाती है। इस विधि को प्रयोग करने के दो तरीके हैं –

  • एक लिफाफे में विभिन्न मदों पर होने वाले खर्च की कुल राशि रख दी जाती है तथा लिफाफे के ऊपर कुल रखी गई राशि एवं विभिन्न मदों पर किया जाने वाला खर्च लिख दिया जाता है। परिवार का कोई भी सदस्य लिफाफे से अंकित राशि निकालकर भुगतान कर सकता है।
  • इस विधि में प्रत्येक मद के लिए अलग-अलग लिफाफे में राशि रख दी जाती है। प्रत्येक लिफाफे पर मद व राशि भी लिख दी जाती है। परिवार का कोई भी सदस्य लिफाफे के द्वारा भुगतान कर सकता है।

3. नोट-बकविधि (Note Book Method):
इस विधि के अन्तर्गत किसी एक कॉपी या डायरी में दिनांक या वार या क्रम से घरेलू खर्चों का हिसाब लिखा जाता है। इस प्रकार लिखे गये हिसाब को काफी समय तक रखा जा सकता है तथा आवश्यकता पड़ने पर पुराने हिसाब का मूल्यांकन भी किया जा सकता है।

4. कार्ड भरना विधि (Card Filling Method):
इस विधि के अन्तर्गत परिवार के सदस्यों को अलग-अलग खर्चे की जिम्मेदारियाँ दी जाती हैं तथा साथ ही उस खर्च की धनराशि भी दी जाती है। प्रत्येक सदस्य दिये गये पैसों से महीने भर खर्च करता रहता है और उसका हिसाब कार्ड पर लिख लेता है। माह के अन्त में सब सदस्य अपना-अपना हिसाब गृहस्वामी को दे देते हैं।

यह विधि अधिक आय वाले परिवारों में या उन घरों में अपनाई जाती है जहाँ परिवार के सभी सदस्य घर में सामान खरीदने की जिम्मेदारी लेते हैं। उपर्युक्त विधियों में से एक या एक से अधिक विधि अपनाकर परिवार अपने घर का हिसाब रख सकता है। हिसाब रखने से यह अनुमान लग जाता है कि व्यय, बजट के अनुसार किया जा रहा है या नहीं। (छात्र कोई भी एक विधि लिख सकते हैं।)

RBSE Class 12 Home Science Chapter 29 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Home Science Chapter 29 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
वस्तुओं पर किये जाने वाला व्यय है –
(अ) पारिवारिक व्यय
(ब) निश्चित व्यय
(स) अनिश्चित व्यय
(द) उपभोग व्यय।
उत्तर:
(द) उपभोग व्यय।

प्रश्न 2.
विशेष पर्वो एवं त्यौहारों पर किये जाने वाला व्यय है –
(अ) अर्द्धनिश्चित व्यय
(ब) अतिरिक्त व्यय
(स) अनिर्धारित व्यय
(द) ये सभी।
उत्तर:
(अ) अर्द्धनिश्चित व्यय

प्रश्न 3.
निम्न में से कौन-सा बजट आदर्श बजट होगा?
(अ) सन्तुलित बजट
(ब) बचत का बजट
(स) घाटे का बजट
(द) अ एवं बा
उत्तर:
(ब) बचत का बजट

प्रश्न 4.
आय में वृद्धि होने पर व्यय का प्रतिशत कम हो जाता है –
(अ) भोजन पर
(ब) वस्त्र पर
(स) आवास पर
(द) मनोरंजन पर।
उत्तर:
(अ) भोजन पर

प्रश्न 5.
बजट बनाने के लाभ हैं –
(अ) स्पष्ट लक्ष्य
(ब) आय-व्यय संतुलन
(स) उचित मदों पर खर्च
(द) ये सभी।
उत्तर:
(द) ये सभी।

प्रश्न 6.
विभिन्न सामग्री पर किया गया खर्च लिखने को आम भाषा में कहते हैं –
(अ) व्यय
(ब) बजट
(स) हिसाब-किताब
(द) लेखा-जोखा।
उत्तर:
(स) हिसाब-किताब

प्रश्न 7.
हिसाब-किताब लिखने से क्या लाभ हैं?
(अ) वस्तु की कीमत की जानकारी मिलती है
(ब) अनावश्यक खर्च पर रोक लगाई जा सकती है
(स) धन के व्यवस्थापन में मदद मिलती है
(द) ये सभी।
उत्तर:
(द) ये सभी।

प्रश्न 8.
धन व्यवस्थापन के दो मुख्य सोपान है –
(अ) आय एवं व्यय
(ब) बचत एवं विनियोजन
(स) हिसाब एवं किताब
(द) बजट एवं आय।
उत्तर:
(अ) आय एवं व्यय

प्रश्न 9.
हिसाब-किताब रखने के मुख्यतया कितने प्रकार है?
(अ) दो
(ब) तीन
(स) चार
(द) पाँच।
उत्तर:
(ब) तीन

प्रश्न 10.
हिसाब-किताब रखने की प्रमुख विधियाँ हैं –
(अ) दो
(ब) तीन
(स) चार
(द) पाँचा
उत्तर:
(स) चार

प्रश्न 11.
घाटे का बजट वह है जिसमें –
(अ) व्यक्ति की आय एवं खर्च बराबर होता है।
(ब) व्यय व्यक्ति की आय से कम होता है।
(स) व्यय कुछ नहीं होता सब आय में ही प्राप्त होता है।
(द) व्यय आय से अधिक होता है।
उत्तर:
(द) व्यय आय से अधिक होता है।

प्रश्न 12.
सन्तुलित बजट में –
(अ) आय व व्यय का सदैव सन्तुलन रहता है
(ब) व्यय आय से अधिक होता है
(स) व्यय आय से काफी कम होता है
(द) व्यय होता ही नहीं है।
उत्तर:
(अ) आय व व्यय का सदैव सन्तुलन रहता है

प्रश्न 13.
बजट की आवश्यकता होती है –
(अ) परिवार के आर्थिक लक्ष्य को स्पष्ट करने में
(ब) आवश्यकताओं की प्राथमिकता निर्धारित करने में
(स) सीमाओं के ज्ञान के अनुसार आय-व्यय का वितरण
(द) ये सभी।
उत्तर:
(द) ये सभी।

प्रश्न 14.
हिसाब-किताब की आवश्यकता होती है –
(अ) धन व्यवस्थापन के लिए
(ब) अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाने के लिए
(स) पारिवारिक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए
(द) ये सभी
उत्तर:
(द) ये सभी

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
1. मनुष्य…………क्रियाओं की मूल इकाई है।
2. आय एवं व्यय की प्रक्रिया…………चलती है।
3. पारिवारिक …………द्वारा किसी भी परिवार के आय एवं व्यय का ब्यौरा तैयार किया जाता है।
4. बजट बनाते समय परिवार के सभी सदस्यों का होना चाहिए।
5. आय का वितरण प्रत्येक सदस्य की को ध्यान में रखकर करना चाहिए।
6. बजट द्वारा सरकार…………नीतियों का निर्धारण करती है।
7. घरेलू हिसाब-किताब किसी एक निश्चित समय में परिवार द्वारा किये गये घरेलू …………का लिखित ब्यौरा है।
8. आमतौर पर महीने के…………सप्ताह में सबसे अधिक खर्च होता है।
9. लिफाफा विधि प्रतिमाह होने वाले…………खर्च के भुगतान के लिए काम में ली जाती है।
10. …………एवं…………धन व्यवस्थापन के प्रमुख सोपान हैं।
11. जब पारिवारिक आय-व्यय में सदैव संतुलन रहता है तो बजट…………बजट कहलाता है।
12. जब बजट में व्यय पारिवारिक आय से अधिक होता है तो इसे…………का बजट कहते हैं।

उत्तर:
1. आर्थिक
2. निरन्तर
3. बजट
4. सहयोग
5. आवश्यकताओं
6. आर्थिक
7. खर्च
8. प्रथम
9. निश्चित
10. आय, व्यय
11. सन्तुलित
12. घाटे।

RBSE Class 12 Home Science Chapter 29 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
व्यय किसे कहते हैं?
उत्तर:
परिवार द्वारा विभिन्न आर्थिक प्रयत्नों से उपार्जित धन को कैसे, कितना तथा किस प्रकार खर्च करना है, व्यय कहलाता है।

प्रश्न 2.
बचत किसे कहते हैं?
उत्तर:
उपभोग के बाद शेष बची धनराशि को बचत कहते हैं।

प्रश्न 3
पारिवारिक बजट किसे कहते हैं?
उत्तर:
परिवार की आय एवं व्यय के विस्तृत ब्यौरे को पारिवारिक बजट कहते हैं।

प्रश्न 4.
पारिवारिक बजट बनाने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर:
पारिवारिक बजट बनाने का मुख्य उद्देश्य गृह अर्थव्यवस्था को सुचारु बनाये रखना है।

प्रश्न 5.
पारिवारिक बजट की सर्वाधिक उपयोगिता किसके लिए है?
उत्तर:
पारिवारिक बजट की सर्वाधिक उपयोगिता गृहिणियों के लिए है।

प्रश्न 6.
पारिवारिक बजट कितने प्रकार के हो सकते
उत्तर:
पारिवारिक बजट तीन प्रकार के हो सकते हैं –

  • संतुलित बजट
  • बचत का बजट
  • घाटे का बजट।

प्रश्न 7.
दैनिक हिसाब-किताब के प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

  • दूध,
  • बाजार-खर्च
  • सब्जी व फल
  • ईंधन
  • धोबी।

प्रश्न 8.
पारिवारिक बजट के कितने अंग होते हैं?
उत्तर:
पारिवारिक बजट के निम्नलिखित अंग होते हैं –

  • परिवार का परिचय
  • परिवार की आय
  • बजट की अवधि
  • व्यय की मद।

प्रश्न 9.
बजट की सफलता किस पर निर्भर करती है?
उत्तर:
बजट की सफलता व्यय नियन्त्रण पर निर्भर करती है।

प्रश्न 10.
पारिवारिक बजट के दो लाभ बताइए।
उत्तर:

  • पारिवारिक बजट हमें अपनी आय की सीमा में रहने में सहायता करता है।
  • बजट से एक परिवार के आर्थिक लक्ष्य स्पष्ट हो जाते हैं और यह अनावश्यक खर्च हटाने में सहायता करता है।

प्रश्न 11.
आदर्श बजट किसे कहते हैं?
उत्तर:
आदर्श बजट वह कहलाता है जो आय और व्यय के बीच में समानता रखे।

प्रश्न 12.
आय एवं व्यय किस प्रकार की प्रक्रिया है?
उत्तर:
आय एवं व्यय निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है।

प्रश्न 13.
घरेलू हिसाब-किताब किसे कहते हैं?
उत्तर:
परिवार द्वारा एक निश्चित समय में किए गए खर्च का ब्यौरा घरेलू हिसाब-किताब कहलाता है।

प्रश्न 14.
घरेलू हिसाब-किताब की कोई दो मुख्य आवश्यकताएँ बताइए।
उत्तर:
घरेलू हिसाब-किताब की मुख्य आवश्यकताएँ हैं –

  • अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाना।
  • धन व्यवस्थापन करना।

प्रश्न 15.
हिसाब-किताब की पृष्ठ विधि क्या है?
उत्तर:
हिसाब – किताब की पृष्ठ विधि में एक पृष्ठ पर हिसाब लिख जाता है जिसे बोर्ड पर टांग दिया जाता है अथवा दरवाजे के पीछे लगा दिया जाता है एवं सप्ताह या माह के अंत में जोड़ कर खर्चे का अनुमान लगाया जाता है।

प्रश्न 16.
हिसाब-किताब की नोट बक विधि क्या है?
उत्तर:
एक कॉपी में तिथिवार / क्रमानुसार खर्चों को लिखा जाता है तथा माह के अन्त में मूल्यांकन किया जाता है। कॉपी में लिखा गया हिसाब वर्षों तक सुरक्षित रहता है एवं | कभी भी उसका मूल्यांकन किया जा सकता है।

RBSE Class 12 Home Science Chapter 29 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
उपभोग व्यय कितने प्रकार से हो सकता है?
उत्तर:
उपभोग व्यय तीन प्रकार से हो सकता है –

  • निश्चित व्यय – राशन बिल, मकान किराया।
  • अर्द्धनिश्चित व्यय – त्यौहारों पर होने वाला खर्च।
  • अन्य व्यय – मनोरंजन, आभूषण, भ्रमण।

प्रश्न 2.
बजट को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
किसी परिवार के किसी विशेष अवधि में होने वाले आय-व्यय को पारिवारिक बजट कहा जाता है। ग्रॉस एवं क्रेण्डल के अनुसार, “बजट भविष्य में होने वाले व्ययों का आयोजन है।” महिन्द्र कौरमान के अनुसार, “पारिवारिक बजट भूतकाल के खर्चों का एक विवरण है जिसमें भविष्य के खर्चों और आय के विवरण का ब्यौरा रहता है जो विभिन्न समयों में विभिन्न कार्यों में खर्च किया जाता है।”

प्रश्न 3.
आदर्श बजट क्या है?
उत्तर:
आदर्श बजट वह बजट कहलाता है, जो आय और व्यय के मध्य समानता रखे। बजट बनाने का एक सरल तरीका है। एक माह में जितना खर्च घर का होता है उसको दो-तीन माह तक लिखें उसके पश्चात् यह अनुमान लगायें कि किस वस्तु पर खर्च अधिक हुआ, किस वस्तु पर कम। अगर व्यय अधिक हो रहा है तो इधर-उधर के खर्चों में कटौती कर देनी चाहिए। खर्च को पूरा करने के लिए कर्ज लेने की आदत नहीं डालनी चाहिए। यदि किसी कारण से कर्ज लेना भी पड़ जाये तो उसे शीघ्र ही वापस कर देना चाहिए।

प्रश्न 4.
बजट के मुख्य बिन्दुओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
बजट के मुख्य बिन्दु:
अपने परिवार की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ रखने के लिए प्रत्येक परिवार को अपने व्यय के बजट को अपनी आय के अनुसार ही बनाना चाहिए। पारिवारिक बजट बनाते समय निम्नलिखित बिन्दुओं को ध्यान में रखना चाहिए –

  • जिस व्यक्ति द्वारा बजट बनाया जाना है उसे परिवार की आय का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए एवं परिवार के किसी भी सदस्य को अपनी आय न तो छुपानी चाहिए एवं न ही बढ़ाकर बतानी चाहिए।
  • आय के अनुसार ही व्यय होना चाहिए।
  • अत्यावश्यक आवश्यकताओं पर व्यय पहले होना चाहिए।
  • बजट में प्रत्येक पारिवारिक सदस्य की संतुष्टि का प्रावधान होना चाहिए।
  • आवश्यकता पड़ने पर परिवर्तन के दृष्टिकोण से बचत को लचीला (Flexible) बनाना चाहिए।
  • भविष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बजट में 10% की बचत का प्रावधान होना चाहिए।
  • मासिक बजट बनाते समय वार्षिक बजट का ध्यान रखना चाहिए।

प्रश्न 5.
बजट की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर:
बजट की आवश्यकता:
आय एवं व्यय एक निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है। व्यक्ति अपनी योग्यता एवं श्रम के अनुरूप आय अर्जित करता है। उसे अपनी मनपसंद वस्तुएँ खरीदने पर खर्च करता है। गृह अर्थव्यवस्था को सुचारु बनाये रखने के लिए पारिवारिक बजट की अवधारणा को विकसित किया गया है।

पारिवारिक बजट में आय को ध्यान में रखते हुए एक निश्चित आगामी अवधि में होने वाले समस्त व्ययों का विवरण अंकित किया जाता है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि “पारिवारिक बजट एक प्रकार का व्यवस्थित प्रलेख अथवा प्रपत्र होता है, जिसमें सम्बन्धित परिवार के निश्चित अवधि में होने वाले आय – व्यय को दर्शाया जाता है।” अत: आय-व्यय के सन्तुलन को बनाये रखने के लिए बजट बनाना अत्यधिक अनिवार्य है।

प्रश्न 6.
एक मध्यमवर्गीय परिवार का अनुमानित बजट तैयार कीजिए। उससे होने वाले विभिन्न लाभों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
RBSE Solutions for Class 12 Home Science Chapter 29 घरेलू हिसाब-किताब-2
नोट-यह बजट परिवार में पति-पत्नी, दो स्कूल जाने वाले बालक तथा वृद्ध पिता को कुल सदस्य मानकर बनाया गया

प्रश्न 7.
एक मध्यम वर्ग परिवार की आय 16,000 रु प्रति माह है? इस परिवार का ऐन्जिल सिद्धान्त की सहायता से बजट तैयार कीजिए।
उत्तर:
16,000 रुपये प्रति माह वाले परिवार का ऐन्जिल सिद्धान्त के अनुसार बजट
RBSE Solutions for Class 12 Home Science Chapter 29 घरेलू हिसाब-किताब-3
प्रश्न 8.
पारिवारिक बजट से लाभ बताइये।
उत्तर:
पारिवारिक बजट से लाभ:
पारिवारिक बजट बनाने से निम्नलिखित लाभ हैं –

  • बजट आय की सीमा में रहने में सहायता करता है।
  • बजट परिवार के आर्थिक लक्ष्यों को स्पष्ट करता है तथा अनावश्यक खर्चों को हटाने में सहायता करता है।
  • बजट बनने से आय और व्यय की सही जानकारी मिल जाती है। बजट भविष्य की योजनाएँ बनाने में सहायता करता है।
  • बजट बनाकर दीर्घकालीन लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है।
  • बचत बजट का एक आवश्यक अंग है। बजट बनाने से बचत की आदत पड़ जाती है। बजट से अभिप्राय है कि वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं में सामंजस्य रखा जाये।
  • बजट उत्तम सन्दर्भ प्रदान करता है। कई बार पिछला हिसाब देखने से वस्तुओं की कीमतों के घटने-बढ़ने का सही ज्ञान हो जाता है।
  • बजट के द्वारा परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सुधार किया जा सकता है।
  • परिवार के प्रत्येक सदस्य की इच्छा-पूर्ति की जा सकती है तथा पारिवारिक जीवन-स्तर सुधर सकता है।
  • बजट बनाने से बचत को प्रोत्साहन मिलता है।
  • बजट के माध्यम से जो बचत होती है, उससे भविष्य सुरक्षित रहता है।

प्रश्न 9.
साप्ताहिक एवं मासिक हिसाब-किताब किसे कहते हैं?
उत्तर:
साप्ताहिक एवं मासिक हिसाब:
किताब-साप्ताहिक हिसाब में व्यक्ति एक दिन में होने वाले कुल खर्च की राशि लिखता है और सप्ताह के अन्त में उसको जोड़कर साप्ताहिक खर्च का हिसाब रखता है। इसी प्रकार माह के कुल सप्ताहों का खर्च जोड़कर माह में किये गये कुल खर्च का हिसाब रख सकता है। इस प्रकार व्यक्ति को पता चल जाता है कि माह के किस सप्ताह में सबसे अधिक खर्चा हुआ है।

अधिकांशत: माह के पहले सप्ताह में सबसे अधिक व्यय होता है। साप्ताहिक एवं मासिक खर्चों के हिसाब द्वारा वार्षिक खर्चे का ब्यौरा तैयार किया जा सकता है साथ ही प्रतिमाह की आय में उस महीने का व्यय निकालकर यह ज्ञात किया जा सकता है कि मासिक खर्चा आय से कम हुआ है या अधिक। हिसाब-किताब लिखने के लिए डायरी या कोई पुस्तिका या साधारण रजिस्टर काम में लाया जा सकता है।

प्रश्न 10.
लिफाफा विधि के अन्तर्गत किस प्रकार हिसाब-किताब रखा जाता है ? समझाइये।
उत्तर:
लिफाफा विधि:
लिफाफा विधि हर माह होने वाले निश्चित व्यय के लिए काम में प्रयोग की जाती है। निश्चित व्यय; जैसे-मकान का किराया, बच्चों की फीस, बीमा राशि का भुगतान, अखबार, दूध, बिजली का बिल आदि हैं। इस विधि को दो प्रकार से प्रयोग में लाया जाता है।

प्रथम विधि:
इस विधि के अन्तर्गत एक लिफाफे में विभिन्न मदों पर होने वाले खर्च की कुल राशि रख दी जाती है तथा लिफाफे के ऊपर कुल रखी गई राशि एवं विभिन्न मदों पर किया जाने वाला खर्च लिख दिया जाता है। परिवार का कोई भी सदस्य लिफाफे से अंकित राशि निकालकर भुगतान कर देता है।

दूसरी विधि:
इस विधि में हर मद के लिए अलग-अलग लिफाफे में राशि रख दी जाती है। प्रत्येक लिफाफे पर मद व राशि भी लिख दी जाती है। परिवार का कोई भी सदस्य लिफाफे के द्वारा भुगतान कर सकता है। अत: व्यक्ति अपनी आवश्यकता एवं सुविधानुसार लिफाफा विधि के अन्तर्गत किसी भी विधि को अपना सकता है।

प्रश्न 11.
हिसाब-किताब रखने से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
हिसाब-किताब का अर्थ-व्यक्ति अपने परिवार की विभिन्न प्रकार की इच्छाओं एवं आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए धन कमाता है। कमाये हुए धन को वह अपनी आवश्यकताओं पर खर्च कर देता है जिससे उसे तृप्ति प्राप्त होती है। उसने कितना कमाया और कितना खर्च किया इस सब के हिसाब को वह अपनी डायरी में लिखता है। इस प्रकार उसे बाजार की प्रत्येक वस्तु की कीमत की जानकारी हो जाती है साथ ही पारिवारिक आय एवं व्यय में सामंजस्य बिठाकर धन व्यवस्थापन करता है। इस प्रक्रिया को ही साधारण भाषा में हिसाब-किताब रखना कहते हैं।

हिसाब-किताब की परिभाषा:
“किसी एक निश्चित समयावधि में परिवार द्वारा किये गये घरेलू खर्च का लिखित ब्यौरा या कथन ही हिसाब-किताब है।” इसकी सहायता से परिवार वालों को विभिन्न वस्तुओं एवं सेवाओं पर किये गये व्यय की पूर्ण जानकारी प्राप्त होती है।

प्रश्न 12.
हिसाब-किताब के प्रकार बताइए।
उत्तर:
हिसाब-किताब के निम्न प्रकार हैं –

(1) बाजार खर्च:
आय का प्रमुख भाग उपभोग की वस्तुएँ लाने में व्यय होता है। जिनमें खाद्य पदार्थ, फल-सब्जियाँ, साबुन आदि सम्मिलित हैं। प्रत्येक गृहिणी को दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर हुए खर्च का ब्यौरा लिखना चाहिए। बाजार खर्च की डायरी बनाकर उसमें प्रतिदिन का हिसाब-किताब शाम को लिखना चाहिए।

(2) दूध का हिसाब:
प्रतिदिन कितना दूध लिया गया है, इसका ब्यौरा किसी नोट बुक अथवा कागज पर लिखा जाना चाहिए जिससे माह के अन्त में ठीक से हिसाब-किताब किया जा सके।

(3) धोबी का हिसाब:
धोबी से धुलवाए गए कपड़े इस्त्री करवाए गए एवं भट्टी लगवाए गए कपड़ों का पूरा ब्यौरा किसी डायरी/नोटबुक में तिथिवार कपड़ों की संख्या एवं करवाया गया कार्य लिखना चाहिए जिससे माह के अन्त में हिसाब करते समय परेशानी न आए।

(4) सम्पत्ति का हिसाब:
इस हिसाब के अन्तर्गत मकान का किराया अथवा जमा की गई किस्त, वाहन की किस्त एवं बीमा आदि का ब्यौरा रखा जाता है तथा इनके भुगतान के पश्चात प्राप्त रसीदों को भी संभाल कर रखा जाता है।

(5) बीमा तथा अन्य बचत साधन का हिसाब:
मासिक खर्च के बाद बचत का विनियोग बीमा, बैंक, पोस्ट आफिस या अन्य किसी बचत खाते में किया जाता है। शेयर/ऋण पत्र/मियादी जमा आदि का ब्यौरा इसी हिसाब के अन्तर्गत आता है। इनको जमा रसीदों एवं सभी कागजों को एक जगह संभाल कर रखा जाता है।

RBSE Class 12 Home Science Chapter 29 निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
व्यय की प्रमुख मदों का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
उत्तर:
व्यय की प्रमुख मदें:
समस्त वस्तुओं, सेवाओं, शीर्षकों, उपशीर्षकों को विभाजित कर सम्भावित आय के खर्च का पूर्ण विवरण लिखा जाता है। सेवाओं और वस्तुओं की मात्राओं का उल्लेख, इनकी कीमत तथा इन पर खर्च किये जाने वाले कुल धन का हिसाब लिखा होता है। एक परिवार के बजट में स्थान पाने वाले व्यय की मदें, आवश्यकता सम्बन्धी व्यय; जैसे-भोजन, वस्त्र, आवास तथा अन्य आवश्यक व्यय भी अंकित रहते हैं।

(1) भोजन:
यह एक ऐसा व्यय है जिस पर प्रत्येक परिवार व्यय करता है। कई परिवार भोजन पर खर्च करने के लिए कर्ज भी लेते हैं क्योंकि जीवित रहने के लिए इस आवश्यकता की पूर्ति आवश्यक है। परिवार की आय का अधिकांश भाग भोजन पर व्यय होता है। यह एक ऐसी आवश्यकता है जिसकी पूर्ति इस हिसाब से होनी चाहिए कि परिवार के सदस्यों की केवल भूख शान्त होने के साथ-साथ उनकी कार्य-क्षमता भी बनी रहे। भोजन के लिए महँगे पदार्थों का चयन न करके पौष्टिक पदार्थों का चयन करना चाहिए।

(2) वस्त्र:
परिवार की दूसरी अनिवार्य आवश्यकता वस्त्रों से सम्बन्धित होती है। वस्त्रों की आवश्यकता केवल शरीर को ढकने के लिए ही नहीं बल्कि विभिन्न मौसमों में शरीर की सुरक्षा करने के लिए भी होती है जिससे शरीर स्वस्थ बना रहे तथा कार्यक्षमता प्रभावित न हो। प्रत्येक परिवार अपने रहन-सहन के स्तर तथा आय के अनुसार आय का 18% व्यय वस्त्रों पर करता है। इस मद में केवल पहनने के ही वस्त्र नहीं आते बल्कि पहनने के अतिरिक्त घर के बिस्तर, तौलिए, पर्दे तथा वस्त्रों की सिलाई पर होने वाला व्यय भी इसी मद में सम्मिलित होता है।

(3) आवास:
आहार और वस्त्रों के बाद आवास की आवश्यकता होती है। मकान का किराया, मरम्मत, गृह-कर, बिजली का खर्च आदि इसी मद के अन्तर्गत आते हैं।

(4) अन्य आवश्यक व्यय:
(i) शिक्षा:
स्कूल, कॉलेज की फीस, किताब कापियों पर किया गया खर्च, उच्च शिक्षा का समुचित प्रबन्ध करना परिवार का एक महत्त्वपूर्ण उत्तरदायित्व है।

(ii) मनोरंजन:
प्रत्येक परिवार अपनी आय का कुछ अंश मनोरंजन पर खर्च करता है क्योंकि मनोरंजन का प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में महत्त्वपूर्ण स्थान है। परिवार में बच्चों के लिए खिलौने, कहानी की किताबें, टी.वी., वीडियो, सिनेमा, पिकनिक आदि पर व्यय करना होता है। हर परिवार मनोरंजन पर व्यय अवश्य करता है।

(iii) आवागमन:
इस मद में परिवार के किसी भी सदस्य के द्वारा बस, स्कूटर आदि पर किया गया खर्च आता है।

(iv) स्वास्थ्य और चिकित्सा:
परिवार के किसी भी सदस्य के अस्वस्थ होने पर किया जाने वाला खर्च इसी मद के अन्तर्गत आता है; जैसे-दवाइयों पर किया जाने वाला व्यय, डॉक्टर की फीस, अस्पताल का खर्च आदि।

(v) अचानक आने वाले खर्च:
इसके अतिरिक्त अचानक आने वाले खर्च भी आ जाते हैं जिनके लिए बचत आवश्यक है; जैसे-लम्बी यात्रा, लम्बी बीमारी, मकान तथा वाहन पर होने वाला खर्च, अकस्मात मृत्यु आदि पर होने वाला खर्च इसी श्रेणी में आता है। बजट तभी लचीला रहता है जब ऐसे अचानक आने वाले खर्चों के लिए व्यवस्था की गयी हो।

(vi) अन्य खर्च:
इसके अतिरिक्त अन्य खर्चों में नौकर को दिया जाने वाला वेतन, धोबी को दिया जाने वाला बिल तथा कुछ और भी अन्य खर्च सम्मिलित हो जाते हैं; जैसे-जेब-खर्च, पत्र-पत्रिकाओं पर होने वाला व्यय, शादी-विवाह पर होने वाला खर्च, सगे-सम्बन्धियों को लेन-देन, मेहमानों के आने पर अतिरिक्त खर्च आदि अन्य खर्चे में आते हैं।
बजट की एक आवश्यक मद है बचत-बचत दो प्रकार की होती है –

  • वह बचत जो कि धन को नियोजित करके की जाती है। यह बचत भविष्य के लिए होती है।
  • छोटी बचत जिसके लिए धन कहीं नियोजित नहीं किया जाता बल्कि अचानक आने वाले खर्चों के लिए घर के प्रतिदिन के खर्चों में से कुछ धन बचाकर रखना बचत कहलाती है।

प्रश्न 2.
घरेलू हिसाब-किताब की परिभाषा दीजिए। हिसाब-किताब रखने के लिए दैनिक हिसाब-किताब तालिका बनाइये।
उत्तर:
घरेलू हिसाब-किताब की परिभाषा:
“घरेलू हिसाब-किताब किसी एक निश्चित समय में परिवार द्वारा किये गये घरेलू खर्च का लिखित लेखा-जोखा या कथन है।” बहुत से लोग मुँहजुबानी हिसाब-किताब कर लेते हैं। ये व्यक्ति किसी डायरी या पुस्तिका में हिसाब-किताब नहीं लिखते बल्कि वे अपने मस्तिष्क में लिख लेते हैं। हिसाब-किताब हमेशा लिखित होना चाहिए, जिससे आसानी से धन का व्यवस्थापन हो सके।

लिखित हिसाब लम्बे समय तक सुरक्षित रखा रहता है तथा आवश्यकता पड़ने पर उसकी समीक्षा की जा सकती है। व्यय के तौर-तरीकों का मूल्यांकन किया जा सकता है, यदि वर्तमान में किया गया खर्च अनावश्यक है तो भविष्य में उसे सुधारा जा सकता है और परिवार के किसी भी सदस्य को आवश्यकतानुसार तुरन्त दिखाया जा सकता है। इसीलिए अधिकतर व्यक्ति अपना हिसाब-किताब डायरी में लिखकर रखते हैं।
प्रतिदिन या दैनिक हिसाब-किताब तालिका
RBSE Solutions for Class 12 Home Science Chapter 29 घरेलू हिसाब-किताब-4
दैनिक हिसाब-किताब के अन्तर्गत प्रतिदिन विभिन्न वस्तुओं या सेवाओं पर किये जाने वाले खर्च के ब्यौरे को लिखा जाता है। यह हिसाब समझने में अति आसान होता है। उपरोक्त तालिका के आधार पर पूरे माह का हिसाब लिखकर जोड़ लिया जाता है। यह एक परिवार का एक महीने के कुल व्यय को स्पष्ट करता है।

प्रश्न 3.
बजट से होने वाले विभिन्न लाभ बताइए।
उत्तर:
बजट से होने वाले विभिन्न लाभ –
(1) आय का उचित उपयोग:
सामान्य रूप से परिवार की आय को उपयोग में लाने का दायित्व गृहिणी का ही माना जाता है। उससे अपेक्षा की जाती है कि वह परिवार की आय का सदुपयोग करेगी। पारिवारिक बजट में सभी आवश्यकताएँ एवं व्यय की मदों का स्पष्ट उल्लेख किया जाता है। बजट बनाकर किया गया व्यय सार्थक होता है।

(2) अनावश्यक पारिवारिक व्यय पर नियन्त्रण:
बजट बनाने से व्यय पर नियन्त्रण करना होता है, ताकि व्यय परिवार की आय से अधिक न होने पाये। यदि परिवार के व्यय पर बजट बनाकर नियन्त्रण नहीं किया जाता है तो परिवार को ऋण का आश्रय लेना पड़ जाता है।

(3) ऋण से मुक्ति:
जब बजट के कारण अनावश्यक खर्चों की सम्भावना कम हो जाती है और आय का सर्वोत्तम उपयोग होता है तो ऋण से भी छुटकारा मिल जाता है। ऋण से छुटकारा मिलने पर परिवार अनेक दुष्परिणामों से बच जाता है क्योंकि ऋण का बोझ अत्यन्त दुःखदायी होता है, जिससे परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य बिगड़ जाता है एवं पारिवारिक शक्ति बिगड़ जाती है।

(4) बचत:
पारिवारिक बजट में बचत का भी एक अंश होता है, जिसके अन्तर्गत एक निश्चित धनराशि का प्रावधान होता है, ताकि समय आने पर विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति उस बचत में से की जा सके। इस प्रकार भविष्य को सुरक्षित बनाया जा सकता है।

(5) मितव्ययता की आदत:
परिवार में बजट तैयार करने से आय का सर्वोत्तम उपयोग सम्भव होता है। अत: इससे परिवार के सदस्यों में मितव्ययता की आदत बन जाती है।

(6) आय – व्यय में सामंजस्य:
पारिवारिक बजट द्वारा परिवार के सभी सदस्यों को आय की उचित जानकारी हो जाती है। अत: उनमें परस्पर व्यय एवं आय के सम्बन्ध में मतभेद रहने की सम्भावना कम हो जाती है। परिणामस्वरूप परिवार में सुख-शान्ति बनी रहती है।

(7) प्रत्येक सदस्य की आवश्यकता की पूर्ति:
पारिवारिक बजट द्वारा परिवार के प्रत्येक सदस्य की अनिवार्य आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा जाता है एवं उनकी पूर्ति करने का प्रयास किया जाता है।

(8) बजट द्वारा विभिन्न:
वस्तुओं की आवश्यकताओं की प्राथमिकता का निर्धारण किया जाता है। बजट में आवश्यक आवश्यकताओं की भी पूर्ति पर पहले एवं कम आवश्यक आवश्यकताओं को भविष्य के लिए निर्धारित किया जा सकता है।

(9) बजट बनाने से परिवार:
के आर्थिक लक्ष्य स्पष्ट हो जाते हैं, चाहे वह अल्पकालीन लक्ष्य हों अथवा दीर्घकालीन लक्ष्य। जैसे—सीमा को यह अच्छी तरह ज्ञात है कि वह प्रतिदिन कितना व्यय भोज्य पदार्थों पर करेगी, कितना बच्चे की उच्च शिक्षा पर एवं कितना विवाह हेतु। अतः बजट द्वारा वह अपनी आय का वर्तमान एवं भविष्य की आवश्यकताओं के बीच में सुचारु रूप से वितरण कर सकती है।

प्रश्न 4.
हिसाब-किताब रखने के प्रकार लिखिए। उचित उदाहरण द्वारा प्रत्येक प्रकार का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
हिसाब-किताब के प्रकार-हिसाब-किताब तीन प्रकार का होता है –
RBSE Solutions for Class 12 Home Science Chapter 29 घरेलू हिसाब-किताब-5
1. प्रतिदिन या दैनिक हिसाब-किताब (Daily Account):
इसके अन्तर्गत विभिन्न वस्तुओं या सेवाओं पर किये जाने वाले खर्च का ब्यौरा प्रतिदिन लिखा जाता है। इसे निम्न उदाहरण-तालिका द्वारा समझा जा सकता है –
RBSE Solutions for Class 12 Home Science Chapter 29 घरेलू हिसाब-किताब-6
उपर्युक्त तालिका के अनुसार पूरे महीने का हिसाब लिखकर महीने के अन्तिम दिन जोड़ लिया जाता है। यह एक परिवार का एक महीने के व्यय का हिसाब दर्शाता है।

2. साप्ताहिक एवं मासिक हिसाब-किताब (Weekly and Monthly Account):
साप्ताहिक हिसाब-किताब में व्यक्ति एक दिन में होने वाले कुल खर्च धनराशि को सप्ताह के अन्त में उसको जोड़कर इसका हिसाब रखता है। इसी प्रकार महीने के कुल सप्ताहों का खर्च जोड़कर महीने में किये गये कुल खर्च का हिसाब रखता है। साप्ताहिक एवं मासिक हिसाब-किताब को तालिका द्वारा दिखाया जा सकता है –
RBSE Solutions for Class 12 Home Science Chapter 29 घरेलू हिसाब-किताब-7
इस प्रकार के हिसाब से व्यक्ति को पता चल जाता है कि महीने के किस सप्ताह में सबसे अधिक खर्च हुआ है या होता है। अधिकतर माह के पहले सप्ताह में अधिक व्यय होता है।

3. वार्षिक हिसाब-किताब (Annual Account):
दैनिक एवं साप्ताहिक खर्चों के ब्यौरे के हिसाब से वार्षिक खर्चों का ब्यौरा तैयार किया जा सकता है। वार्षिक हिसाब को निम्न तालिका द्वारा समझा जा सकता है –
RBSE Solutions for Class 12 Home Science Chapter 29 घरेलू हिसाब-किताब-8

प्रश्न 5.
एक परिवार की आय 60,000 रु. प्रतिमाह है। इस परिवार का ऐंजिल्स के सिद्धान्त की सहायता से बजट तैयार कीजिए।
उत्तर:
पारिवारिक बजट के सम्बन्ध में जर्मनी के सुप्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. अर्नेस्ट ऐंजिल्स ने सन् 1857 में ‘सेक्सोनी प्रान्त’ के विभिन्न वर्गों के परिवारों के बजट का व्यवस्थित अध्ययन करने पर निम्नलिखित निष्कर्ष निकाले –

  • जैसे-जैसे पारिवारिक आय में वृद्धि होती है, वैसे-वैसे परिवार द्वारा भोजन पर किये जाने वाले व्यय का प्रतिशत घटता जाता है।
  • वस्त्र, गृह, प्रकाश एवं ईंधन आदि पर होने वाले व्यय का प्रतिशत मान सदैव स्थिर रहता है।
  • सांस्कृतिक आवश्यकताओं पर, विलासिता पर, मनोरंजन एवं शिक्षा तथा स्वास्थ्य पर किये जाने वाले व्यय का प्रतिशत मान बढ़ जाता है।

60,000 रु. प्रतिमाह आय वाले परिवार का बजट ऐंजिल्स के सिद्धान्त के अनुसार –
गृह स्वामी का नाम             : श्री दयाल सरन शर्मा
घर का पता                        : 43, नई सड़क, भरतपुर
परिवार के सदस्यों की संख्या : 4 (पुरुष 1, स्त्री 1, बच्चे 2)
मासिक आय                       : 60,000 रु. प्रति माह

Rajasthan Board RBSE Class 12 Home Science Chapter 29 घरेलू हिसाब-किताब

RBSE Class 12 Home Science Chapter 29 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से सही उत्तर चुनें –
(i) निश्चित अवधि पर जो व्यय दोहराये जाते हैं, वे हैं –
(अ) उपभोग व्यय
(ब) निश्चित व्यय
(स) अर्द्ध-निश्चित व्यय
(द) पारिवारिक व्यय
उत्तर:
(ब) निश्चित व्यय

(ii) उपभोग वस्तुओं की माँग में वृद्धि होने पर बढ़ती है –
(अ) उत्पादन की गति
(ब) उत्पादन की गति व मात्रा
(स) उत्पादन की मात्रा
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) उत्पादन की गति व मात्रा

(iii) बजट का तात्पर्य है –
(अ) पारिवारिक आय का ब्यौरा
(ब) पारिवारिक खर्चों का ब्यौरा
(स) आय-व्यय का विस्तृत ब्यौरा
(द) विभिन्न मदों पर किया जाने वाला व्यय
उत्तर:
(स) आय-व्यय का विस्तृत ब्यौरा

(iv) घरेलू हिसाब-किताब का प्रकार है –
(अ) बाजार खर्च
(ब) धोबी का हिसाब
(स) सम्पत्ति का हिसाब
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति करो –
1. ………… आर्थिक क्रियाओं का संचालक है।
2. उपभोग के बाद बचने वाली धनराशि ………… कहलाती है।
3. ………… व्यय, आय एवं परिस्थिति के अनुसार परिवर्तित होते रहते हैं।
4. आय को व्यय करने से पहले ………… बजट बनाना चाहिये।
5. घरेलू हिसाब से ………… का उचित संतुलन बनाए रखना आसान हो जाता है।
उत्तर:
1. उपभोग व्यय
2. बचत
3. अर्द्धनिश्चित
4. पारिवारिक
5. आय-व्यय।

प्रश्न 3.
पारिवारिक व्यय किसे कहते हैं? इसे कितने भागों में विभाजित किया जा सकता है? समझाइये।
उत्तर:
परिवार की आवश्यकताएँ व सुख:
सुविधाएँ पूरी करने हेतु जो व्यय होता है, उसे पारिवारिक व्यय कहते हैं। प्रत्येक व्यक्ति अपनी आय के अनुरूप ही अपनी आवश्यकताओं पर होने वाले व्यय को तय करता है। अत: परिवार की आय का वह अंश जो पारिवारिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु निश्चित समय में खर्च किया जाता है, पारिवारिक व्यय कहलाता है। पारिवारिक व्यय को दो भागों में विभक्त किया गया है –
(1) उपभोग व्यय
(2) बचत

(1) उपभोग व्यय:
पारिवारिक आय का वह भाग जो आवश्यकता पूर्ति हेतु खर्च होता है, उपभोग व्यय कहलाता है। परिवार की प्रतिमाह की आवश्कयताएँ; जैसे-भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा, मनोरंजन, चिकित्सा आदि पर अनिवार्य रूप से खर्च होता है। अत: आय का अधिकतर भाग उपभोग की वस्तुओं पर व्यय होता है।

(2) बचत:
पारिवारिक आय का वह भाग जो उपभोग व्यय के पश्चात शेष रह जाता है, बचत कहलाता है। यह भाग भविष्य निधि के रूप में संचित रहता है अथवा उत्पाद के रूप में विनियोग किया जाता है।

प्रश्न 4.
उपभोग व्यय पर प्रकाश डालते हुए इसके प्रकारों के बारे में बताइए।
उत्तर:
उपभोग व्यय:
आय का वह भाग जो उपभोग के लिए विभिन्न सामग्री पर खर्च किया जाता है, उपभोग व्यय कहलाता है। परिवार की अधिकांश आय उपभोग की वस्तुओं; जैसे-भोजन, वस्त्र, मकान आदि पर खर्च की जाती है। उपभोग व्यय तीन प्रकार के होते हैं –

(1) निश्चित व्यय:
इस प्रकार के व्यय एक निश्चित अवधि पर दोहराने पड़ते हैं; जैसे राशन का बिल, मकान का किराया, स्कूल की फीस आदि अनिवार्य रूप से व्यय करनी पड़ती है। इस व्यय की मदें सामान्यतया प्रतिमाह एक समान होती

(2) अर्द्धनिश्चित व्यय:
इस प्रकार के व्यय में आय एवं परिस्थिति के अनुसार परिवर्तन लाया जा सकता है। जैसे अधिक आय होने पर उच्च कोटि का भोजन किया जा सकता है। इस व्यय के अन्तर्गत आराम एवं विलासिता की वस्तुएँ आती है। त्यौहारों एवं विशेष पर्वो पर किया गया व्यय भी इस श्रेणी में आता है।

(3) अन्य व्यय:
ये व्यय अनिर्धारित होते हैं तथा व्यक्ति की आय पर निर्भर करते हैं; जैसे—मनोरंजन, आभूषण, वाहन, भ्रमण इत्यादि। यदि व्यक्ति की आय अधिक होती है तो इन चीजों पर व्यय करता है।

प्रश्न 5.
आय एवं व्यय एक निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है। कैसे?
उत्तर:
जीवन यापन करने हेतु कुछ मूल आवश्यकताएँ हैं जो हर व्यक्ति के लिए जरूरी है; जैसे-भोजन, आवास एवं वस्त्र। इनको पूरा करने हेतु धन की आवश्यकता होती है जो व्यक्ति कार्य करके प्राप्त करता है। इस प्रकार मिलने वाले धन को अपनी आवश्यकता पूर्ति हेतु व्यय करता है। प्रत्येक व्यक्ति अपनी कार्य क्षमता के अनुरूप धर्नाजन करता है एवं अपनी इच्छानुसार एवं आवश्यकता के अनुरूप खर्च निर्धारित करता है। यह एक अनवरत् प्रक्रिया है। परिवार के उपभोग व्यय हेतु व्यक्ति कार्य करके आय प्राप्त करता है।

उपभोग वस्तुओं हेतु बाजार में मांग बढ़ती है तथा उत्पादन बढ़ता है। उत्पादित माल के वितरण से अनेक परिवार आय प्राप्त करते हैं तथा पुन: इस आय का उपभोग व्यय करते हैं। इससे विश्व में विभिन्न आर्थिक गतिविधियों का संचालन होता है। अत: आय एवं व्यय एक निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है।

प्रश्न 6.
बजट की परिभाषा एवं प्रकार लिखिए।
उत्तर:
आय के उचित उपयोग हेतु योजनाबद्ध प्रबन्ध बनाना आवश्यक है। अत: आय को व्यय करने से पहले बजट बनाना आवश्यक है, क्योंकि बजट किसी निश्चित अवधि के पूर्व में अनुमानित आय-व्यय का ब्यौरा होता है।

(i) बजट के प्रकार:
बजट मुख्यत: तीन प्रकार के हो सकते हैं –
(1) सन्तुलित बजट-इस बजट में जितनी आय होती है उतना ही व्यय किया जाता है। इसमें बचत नहीं होती है और न ही कर्ज लेने की आवश्यकता होती है। इस प्रकार के बजट का निर्माण परिवार की कुल आय को देखकर किया जाता है। इस प्रकार के बजट में प्रमुख कमी यह है कि इसमें भविष्य की आवश्यकताओं तथा आकस्मिक आवश्यकताओं को प्राय: अनदेखा किया जाता है।

इस बजट से परिवार अपनी वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति तो कर लेता है, परन्तु भविष्य के लिए हमेशा चिन्तित रहता है। इस प्रकार का बजट परिवार के भविष्य को सुरक्षित नहीं बना सकता। अत: इसे मजदूरी का बजट माना जाता है।

(2) बचत का बजट:
यह बजट सबसे अच्छा होता है। इसमें परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति भी होती रहती है साथ ही भविष्य के लिए बचत भी कर ली जाती है। इस बजट से परिवार के सभी सदस्यों को अधिकतम सन्तुष्टि प्राप्त होती है तथा आय-व्यय में संतुलन बना रहता है। इसके साथ भविष्य के लिए कुछ धन संचित कर लिया जाता है। अर्थशास्त्रियों का भी मानना है कि बचत का बजट ही सबसे उत्तम बजट है।

(3) घाटे का बजट:
जब आय से अधिक व्यय होता है तो वह घाटे का बजट होता है। इस प्रकार के बजट में ऋण लेना पड़ता है। अत: कभी भी घाटे का बजट नहीं बनाना चाहिए। इस बजट से परिवार की अर्थव्यवस्था चरमरा जाती है तथा परिवार आर्थिक संकट से घिर जाता है। घाटे का बजट कम समय के लिए बनाया जा सकता है, परन्तु लगातार घाटे का बजट बनाने से परिवार कर्ज के बोझ से दब जाता है।

प्रश्न 7.
घरेलू हिसाब-किताब की आवश्यकता लिखिए।
उत्तर:
किसी एक निश्चित समयावधि में परिवार द्वारा किए गए घरेलू खर्च का लिखित ब्यौरा हिसाब-किताब कहलाता है। आजकल के दौर में हिसाब-किताब करना अति आवश्यक है, बहुत से व्यक्ति ऐसे भी होते हैं जो हिसाब-किताब किसी डायरी या पुस्तिका में नहीं लिखते बल्कि अपने मस्तिष्क में लिख लेते हैं, पर मस्तिष्क में लिखे गये हिसाब की अपनी कुछ सीमाएँ होती हैं। लिखित हिसाब-किताब को लम्बे समय तक रखा जा सकता है।

आवश्यकता होने पर समय-समय पर समीक्षा (Review) करके खर्च करने के तौर-तरीकों का मूल्यांकन किया जा सकता है, यदि वर्तमान में किया गया खर्च अनावश्यक है तो भविष्य में उसे सुधारा जा सकता है या रोका जा सकता है तथा आवश्यकता पड़ने पर उसे दिखाया जा सकता है। हिसाब-किताब की आवश्यकता को निम्नलिखित बिन्दुओं द्वारा समझाया गया है –

(1) धन के व्यवस्थापन हेतु:
हिसाब-किताब के माध्यम से बाजार वस्तु के मूल्य की जानकारी होती रहती है जिससे वस्तु की सही कीमत के अनुसार व्यय होता है। इस प्रकार प्रत्येक व्यक्ति अपनी आय और व्यय को देख करके उनमें उचित तालमेल बिठाकर धन व्यवस्थापन कर लेता है। जिससे परिवार को आर्थिक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता।

(2) अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाने के लिए प्रतिदिन के हिसाब:
किताब से केवल आवश्यक वस्तुओं पर ही व्यय होता है क्योंकि इसमें कुछ बचत का भी प्रावधान होता है, अत: अनावश्यक खर्चों पर लगाम लग जाती है।

(3) सही कीमत की जानकारी किन:
किन वस्तुओं के मूल्य में वृद्धि हुई और किन वस्तुओं के मूल्य में कमी आयी है; इस सबकी जानकारी प्रत्येक दिन के हिसाब-किताब रखने से हो जाती है जिससे वस्तु की सही कीमत के बारे में ज्ञान अर्जित हो जाता है।

(4) निश्चित समय में किये व्यय की जानकारी:
हिसाब, लिखित होने से इसे लम्बे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है जिससे एक निश्चित समयावधि में कितनी आय हुई है और कितना खर्च हुआ है, इसकी जानकारी हो जाती है।

(5) सोच – समझकर खर्च करने के लिए:
हिसाब-किताब को देखकर के खर्च करने के तौर-तरीकों का मूल्यांकन किया जा सकता है, यदि वर्तमान में किया गया व्यय अनावश्यक है तो भविष्य में उसे रोका जा सकता है। व्यय करने का तरीका सुधारा जा सकता है।

(6) पारिवारिक लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु:
प्रत्येक व्यक्ति का उद्देश्य होता है कि वह अपने परिवार को उन्नत बनाये, इसके लिए वह अपने अनावश्यक खर्चों पर किये गये व्यय हिसाब-किताब के माध्यम से देख करके रोक देता है। इस बचे हुए धन को वह भविष्य के लिए सुरक्षित रख देता है जिससे विभिन्न पारिवारिक लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायता मिलती है। अत: यह आवश्यक है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने आय व व्यय का हिसाब अवश्य रखना चाहिए।

प्रश्न 8.
घरेलू हिसाब-किताब लिखने की मुख्य विधियों के नाम लिखिए एवं किसी एक को समझाइए।
उत्तर:
हिसाब-किताब को रखने के लिए व्यक्ति निम्नलिखित विधियों में से कोई भी एक या उससे अधिक विधियाँ अपनी आवश्यकतानुसार अपना सकता है। ये विधि चार प्रकार की होती हैं –
RBSE Solutions for Class 12 Home Science Chapter 29 घरेलू हिसाब-किताब-1
1. पृष्ठ विधि (Sheet Method):
पृष्ठ विधि द्वारा हिसाब-किताब रखना बहुत ही आसान एवं लचीला है। इसके अन्तर्गत खर्च की गयी राशि का हिसाब एक पृष्ठ पर लिख लिया जाता है और इसे किसी ऐसी जगह जैसे-दरवाजे के पीछे या किसी अलमारी पर बोर्ड पर लगाकर टाँग दिया जाता है तथा जैसे-जैसे खर्चा होता है उसे उस पृष्ठ पर लिख लिया जाता है। सप्ताह या महीने के अन्त में कुल खर्चा जोड़कर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि खर्च व्यवस्था के अनुसार हुआ है या नहीं।

2. लिफाफा विधि (Envelope Method):
लिफाफा विधि प्रतिमाह होने वाले निश्चित खर्च; जैसे-मकान किराया, बच्चों की स्कूल फीस, बीमा राशि का भुगतान, अखबार आदि पर व्यय के लिए काम में ली जाती है। इस विधि को प्रयोग करने के दो तरीके हैं –

  • एक लिफाफे में विभिन्न मदों पर होने वाले खर्च की कुल राशि रख दी जाती है तथा लिफाफे के ऊपर कुल रखी गई राशि एवं विभिन्न मदों पर किया जाने वाला खर्च लिख दिया जाता है। परिवार का कोई भी सदस्य लिफाफे से अंकित राशि निकालकर भुगतान कर सकता है।
  • इस विधि में प्रत्येक मद के लिए अलग-अलग लिफाफे में राशि रख दी जाती है। प्रत्येक लिफाफे पर मद व राशि भी लिख दी जाती है। परिवार का कोई भी सदस्य लिफाफे के द्वारा भुगतान कर सकता है।

3. नोट-बकविधि (Note Book Method):
इस विधि के अन्तर्गत किसी एक कॉपी या डायरी में दिनांक या वार या क्रम से घरेलू खर्चों का हिसाब लिखा जाता है। इस प्रकार लिखे गये हिसाब को काफी समय तक रखा जा सकता है तथा आवश्यकता पड़ने पर पुराने हिसाब का मूल्यांकन भी किया जा सकता है।

4. कार्ड भरना विधि (Card Filling Method):
इस विधि के अन्तर्गत परिवार के सदस्यों को अलग-अलग खर्चे की जिम्मेदारियाँ दी जाती हैं तथा साथ ही उस खर्च की धनराशि भी दी जाती है। प्रत्येक सदस्य दिये गये पैसों से महीने भर खर्च करता रहता है और उसका हिसाब कार्ड पर लिख लेता है। माह के अन्त में सब सदस्य अपना-अपना हिसाब गृहस्वामी को दे देते हैं।

यह विधि अधिक आय वाले परिवारों में या उन घरों में अपनाई जाती है जहाँ परिवार के सभी सदस्य घर में सामान खरीदने की जिम्मेदारी लेते हैं। उपर्युक्त विधियों में से एक या एक से अधिक विधि अपनाकर परिवार अपने घर का हिसाब रख सकता है। हिसाब रखने से यह अनुमान लग जाता है कि व्यय, बजट के अनुसार किया जा रहा है या नहीं। (छात्र कोई भी एक विधि लिख सकते हैं।)

RBSE Class 12 Home Science Chapter 29 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Home Science Chapter 29 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
वस्तुओं पर किये जाने वाला व्यय है –
(अ) पारिवारिक व्यय
(ब) निश्चित व्यय
(स) अनिश्चित व्यय
(द) उपभोग व्यय।
उत्तर:
(द) उपभोग व्यय।

प्रश्न 2.
विशेष पर्वो एवं त्यौहारों पर किये जाने वाला व्यय है –
(अ) अर्द्धनिश्चित व्यय
(ब) अतिरिक्त व्यय
(स) अनिर्धारित व्यय
(द) ये सभी।
उत्तर:
(अ) अर्द्धनिश्चित व्यय

प्रश्न 3.
निम्न में से कौन-सा बजट आदर्श बजट होगा?
(अ) सन्तुलित बजट
(ब) बचत का बजट
(स) घाटे का बजट
(द) अ एवं बा
उत्तर:
(ब) बचत का बजट

प्रश्न 4.
आय में वृद्धि होने पर व्यय का प्रतिशत कम हो जाता है –
(अ) भोजन पर
(ब) वस्त्र पर
(स) आवास पर
(द) मनोरंजन पर।
उत्तर:
(अ) भोजन पर

प्रश्न 5.
बजट बनाने के लाभ हैं –
(अ) स्पष्ट लक्ष्य
(ब) आय-व्यय संतुलन
(स) उचित मदों पर खर्च
(द) ये सभी।
उत्तर:
(द) ये सभी।

प्रश्न 6.
विभिन्न सामग्री पर किया गया खर्च लिखने को आम भाषा में कहते हैं –
(अ) व्यय
(ब) बजट
(स) हिसाब-किताब
(द) लेखा-जोखा।
उत्तर:
(स) हिसाब-किताब

प्रश्न 7.
हिसाब-किताब लिखने से क्या लाभ हैं?
(अ) वस्तु की कीमत की जानकारी मिलती है
(ब) अनावश्यक खर्च पर रोक लगाई जा सकती है
(स) धन के व्यवस्थापन में मदद मिलती है
(द) ये सभी।
उत्तर:
(द) ये सभी।

प्रश्न 8.
धन व्यवस्थापन के दो मुख्य सोपान है –
(अ) आय एवं व्यय
(ब) बचत एवं विनियोजन
(स) हिसाब एवं किताब
(द) बजट एवं आय।
उत्तर:
(अ) आय एवं व्यय

प्रश्न 9.
हिसाब-किताब रखने के मुख्यतया कितने प्रकार है?
(अ) दो
(ब) तीन
(स) चार
(द) पाँच।
उत्तर:
(ब) तीन

प्रश्न 10.
हिसाब-किताब रखने की प्रमुख विधियाँ हैं –
(अ) दो
(ब) तीन
(स) चार
(द) पाँचा
उत्तर:
(स) चार

प्रश्न 11.
घाटे का बजट वह है जिसमें –
(अ) व्यक्ति की आय एवं खर्च बराबर होता है।
(ब) व्यय व्यक्ति की आय से कम होता है।
(स) व्यय कुछ नहीं होता सब आय में ही प्राप्त होता है।
(द) व्यय आय से अधिक होता है।
उत्तर:
(द) व्यय आय से अधिक होता है।

प्रश्न 12.
सन्तुलित बजट में –
(अ) आय व व्यय का सदैव सन्तुलन रहता है
(ब) व्यय आय से अधिक होता है
(स) व्यय आय से काफी कम होता है
(द) व्यय होता ही नहीं है।
उत्तर:
(अ) आय व व्यय का सदैव सन्तुलन रहता है

प्रश्न 13.
बजट की आवश्यकता होती है –
(अ) परिवार के आर्थिक लक्ष्य को स्पष्ट करने में
(ब) आवश्यकताओं की प्राथमिकता निर्धारित करने में
(स) सीमाओं के ज्ञान के अनुसार आय-व्यय का वितरण
(द) ये सभी।
उत्तर:
(द) ये सभी।

प्रश्न 14.
हिसाब-किताब की आवश्यकता होती है –
(अ) धन व्यवस्थापन के लिए
(ब) अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाने के लिए
(स) पारिवारिक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए
(द) ये सभी
उत्तर:
(द) ये सभी

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
1. मनुष्य…………क्रियाओं की मूल इकाई है।
2. आय एवं व्यय की प्रक्रिया…………चलती है।
3. पारिवारिक …………द्वारा किसी भी परिवार के आय एवं व्यय का ब्यौरा तैयार किया जाता है।
4. बजट बनाते समय परिवार के सभी सदस्यों का होना चाहिए।
5. आय का वितरण प्रत्येक सदस्य की को ध्यान में रखकर करना चाहिए।
6. बजट द्वारा सरकार…………नीतियों का निर्धारण करती है।
7. घरेलू हिसाब-किताब किसी एक निश्चित समय में परिवार द्वारा किये गये घरेलू …………का लिखित ब्यौरा है।
8. आमतौर पर महीने के…………सप्ताह में सबसे अधिक खर्च होता है।
9. लिफाफा विधि प्रतिमाह होने वाले…………खर्च के भुगतान के लिए काम में ली जाती है।
10. …………एवं…………धन व्यवस्थापन के प्रमुख सोपान हैं।
11. जब पारिवारिक आय-व्यय में सदैव संतुलन रहता है तो बजट…………बजट कहलाता है।
12. जब बजट में व्यय पारिवारिक आय से अधिक होता है तो इसे…………का बजट कहते हैं।

उत्तर:
1. आर्थिक
2. निरन्तर
3. बजट
4. सहयोग
5. आवश्यकताओं
6. आर्थिक
7. खर्च
8. प्रथम
9. निश्चित
10. आय, व्यय
11. सन्तुलित
12. घाटे।

RBSE Class 12 Home Science Chapter 29 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
व्यय किसे कहते हैं?
उत्तर:
परिवार द्वारा विभिन्न आर्थिक प्रयत्नों से उपार्जित धन को कैसे, कितना तथा किस प्रकार खर्च करना है, व्यय कहलाता है।

प्रश्न 2.
बचत किसे कहते हैं?
उत्तर:
उपभोग के बाद शेष बची धनराशि को बचत कहते हैं।

प्रश्न 3
पारिवारिक बजट किसे कहते हैं?
उत्तर:
परिवार की आय एवं व्यय के विस्तृत ब्यौरे को पारिवारिक बजट कहते हैं।

प्रश्न 4.
पारिवारिक बजट बनाने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर:
पारिवारिक बजट बनाने का मुख्य उद्देश्य गृह अर्थव्यवस्था को सुचारु बनाये रखना है।

प्रश्न 5.
पारिवारिक बजट की सर्वाधिक उपयोगिता किसके लिए है?
उत्तर:
पारिवारिक बजट की सर्वाधिक उपयोगिता गृहिणियों के लिए है।

प्रश्न 6.
पारिवारिक बजट कितने प्रकार के हो सकते
उत्तर:
पारिवारिक बजट तीन प्रकार के हो सकते हैं –

  • संतुलित बजट
  • बचत का बजट
  • घाटे का बजट।

प्रश्न 7.
दैनिक हिसाब-किताब के प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

  • दूध,
  • बाजार-खर्च
  • सब्जी व फल
  • ईंधन
  • धोबी।

प्रश्न 8.
पारिवारिक बजट के कितने अंग होते हैं?
उत्तर:
पारिवारिक बजट के निम्नलिखित अंग होते हैं –

  • परिवार का परिचय
  • परिवार की आय
  • बजट की अवधि
  • व्यय की मद।

प्रश्न 9.
बजट की सफलता किस पर निर्भर करती है?
उत्तर:
बजट की सफलता व्यय नियन्त्रण पर निर्भर करती है।

प्रश्न 10.
पारिवारिक बजट के दो लाभ बताइए।
उत्तर:

  • पारिवारिक बजट हमें अपनी आय की सीमा में रहने में सहायता करता है।
  • बजट से एक परिवार के आर्थिक लक्ष्य स्पष्ट हो जाते हैं और यह अनावश्यक खर्च हटाने में सहायता करता है।

प्रश्न 11.
आदर्श बजट किसे कहते हैं?
उत्तर:
आदर्श बजट वह कहलाता है जो आय और व्यय के बीच में समानता रखे।

प्रश्न 12.
आय एवं व्यय किस प्रकार की प्रक्रिया है?
उत्तर:
आय एवं व्यय निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है।

प्रश्न 13.
घरेलू हिसाब-किताब किसे कहते हैं?
उत्तर:
परिवार द्वारा एक निश्चित समय में किए गए खर्च का ब्यौरा घरेलू हिसाब-किताब कहलाता है।

प्रश्न 14.
घरेलू हिसाब-किताब की कोई दो मुख्य आवश्यकताएँ बताइए।
उत्तर:
घरेलू हिसाब-किताब की मुख्य आवश्यकताएँ हैं –

  • अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाना।
  • धन व्यवस्थापन करना।

प्रश्न 15.
हिसाब-किताब की पृष्ठ विधि क्या है?
उत्तर:
हिसाब – किताब की पृष्ठ विधि में एक पृष्ठ पर हिसाब लिख जाता है जिसे बोर्ड पर टांग दिया जाता है अथवा दरवाजे के पीछे लगा दिया जाता है एवं सप्ताह या माह के अंत में जोड़ कर खर्चे का अनुमान लगाया जाता है।

प्रश्न 16.
हिसाब-किताब की नोट बक विधि क्या है?
उत्तर:
एक कॉपी में तिथिवार / क्रमानुसार खर्चों को लिखा जाता है तथा माह के अन्त में मूल्यांकन किया जाता है। कॉपी में लिखा गया हिसाब वर्षों तक सुरक्षित रहता है एवं | कभी भी उसका मूल्यांकन किया जा सकता है।

RBSE Class 12 Home Science Chapter 29 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
उपभोग व्यय कितने प्रकार से हो सकता है?
उत्तर:
उपभोग व्यय तीन प्रकार से हो सकता है –

  • निश्चित व्यय – राशन बिल, मकान किराया।
  • अर्द्धनिश्चित व्यय – त्यौहारों पर होने वाला खर्च।
  • अन्य व्यय – मनोरंजन, आभूषण, भ्रमण।

प्रश्न 2.
बजट को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
किसी परिवार के किसी विशेष अवधि में होने वाले आय-व्यय को पारिवारिक बजट कहा जाता है। ग्रॉस एवं क्रेण्डल के अनुसार, “बजट भविष्य में होने वाले व्ययों का आयोजन है।” महिन्द्र कौरमान के अनुसार, “पारिवारिक बजट भूतकाल के खर्चों का एक विवरण है जिसमें भविष्य के खर्चों और आय के विवरण का ब्यौरा रहता है जो विभिन्न समयों में विभिन्न कार्यों में खर्च किया जाता है।”

प्रश्न 3.
आदर्श बजट क्या है?
उत्तर:
आदर्श बजट वह बजट कहलाता है, जो आय और व्यय के मध्य समानता रखे। बजट बनाने का एक सरल तरीका है। एक माह में जितना खर्च घर का होता है उसको दो-तीन माह तक लिखें उसके पश्चात् यह अनुमान लगायें कि किस वस्तु पर खर्च अधिक हुआ, किस वस्तु पर कम। अगर व्यय अधिक हो रहा है तो इधर-उधर के खर्चों में कटौती कर देनी चाहिए। खर्च को पूरा करने के लिए कर्ज लेने की आदत नहीं डालनी चाहिए। यदि किसी कारण से कर्ज लेना भी पड़ जाये तो उसे शीघ्र ही वापस कर देना चाहिए।

प्रश्न 4.
बजट के मुख्य बिन्दुओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
बजट के मुख्य बिन्दु:
अपने परिवार की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ रखने के लिए प्रत्येक परिवार को अपने व्यय के बजट को अपनी आय के अनुसार ही बनाना चाहिए। पारिवारिक बजट बनाते समय निम्नलिखित बिन्दुओं को ध्यान में रखना चाहिए –

  • जिस व्यक्ति द्वारा बजट बनाया जाना है उसे परिवार की आय का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए एवं परिवार के किसी भी सदस्य को अपनी आय न तो छुपानी चाहिए एवं न ही बढ़ाकर बतानी चाहिए।
  • आय के अनुसार ही व्यय होना चाहिए।
  • अत्यावश्यक आवश्यकताओं पर व्यय पहले होना चाहिए।
  • बजट में प्रत्येक पारिवारिक सदस्य की संतुष्टि का प्रावधान होना चाहिए।
  • आवश्यकता पड़ने पर परिवर्तन के दृष्टिकोण से बचत को लचीला (Flexible) बनाना चाहिए।
  • भविष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बजट में 10% की बचत का प्रावधान होना चाहिए।
  • मासिक बजट बनाते समय वार्षिक बजट का ध्यान रखना चाहिए।

प्रश्न 5.
बजट की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर:
बजट की आवश्यकता:
आय एवं व्यय एक निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है। व्यक्ति अपनी योग्यता एवं श्रम के अनुरूप आय अर्जित करता है। उसे अपनी मनपसंद वस्तुएँ खरीदने पर खर्च करता है। गृह अर्थव्यवस्था को सुचारु बनाये रखने के लिए पारिवारिक बजट की अवधारणा को विकसित किया गया है।

पारिवारिक बजट में आय को ध्यान में रखते हुए एक निश्चित आगामी अवधि में होने वाले समस्त व्ययों का विवरण अंकित किया जाता है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि “पारिवारिक बजट एक प्रकार का व्यवस्थित प्रलेख अथवा प्रपत्र होता है, जिसमें सम्बन्धित परिवार के निश्चित अवधि में होने वाले आय – व्यय को दर्शाया जाता है।” अत: आय-व्यय के सन्तुलन को बनाये रखने के लिए बजट बनाना अत्यधिक अनिवार्य है।

प्रश्न 6.
एक मध्यमवर्गीय परिवार का अनुमानित बजट तैयार कीजिए। उससे होने वाले विभिन्न लाभों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
RBSE Solutions for Class 12 Home Science Chapter 29 घरेलू हिसाब-किताब-2
नोट-यह बजट परिवार में पति-पत्नी, दो स्कूल जाने वाले बालक तथा वृद्ध पिता को कुल सदस्य मानकर बनाया गया

प्रश्न 7.
एक मध्यम वर्ग परिवार की आय 16,000 रु प्रति माह है? इस परिवार का ऐन्जिल सिद्धान्त की सहायता से बजट तैयार कीजिए।
उत्तर:
16,000 रुपये प्रति माह वाले परिवार का ऐन्जिल सिद्धान्त के अनुसार बजट
RBSE Solutions for Class 12 Home Science Chapter 29 घरेलू हिसाब-किताब-3
प्रश्न 8.
पारिवारिक बजट से लाभ बताइये।
उत्तर:
पारिवारिक बजट से लाभ:
पारिवारिक बजट बनाने से निम्नलिखित लाभ हैं –

  • बजट आय की सीमा में रहने में सहायता करता है।
  • बजट परिवार के आर्थिक लक्ष्यों को स्पष्ट करता है तथा अनावश्यक खर्चों को हटाने में सहायता करता है।
  • बजट बनने से आय और व्यय की सही जानकारी मिल जाती है। बजट भविष्य की योजनाएँ बनाने में सहायता करता है।
  • बजट बनाकर दीर्घकालीन लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है।
  • बचत बजट का एक आवश्यक अंग है। बजट बनाने से बचत की आदत पड़ जाती है। बजट से अभिप्राय है कि वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं में सामंजस्य रखा जाये।
  • बजट उत्तम सन्दर्भ प्रदान करता है। कई बार पिछला हिसाब देखने से वस्तुओं की कीमतों के घटने-बढ़ने का सही ज्ञान हो जाता है।
  • बजट के द्वारा परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सुधार किया जा सकता है।
  • परिवार के प्रत्येक सदस्य की इच्छा-पूर्ति की जा सकती है तथा पारिवारिक जीवन-स्तर सुधर सकता है।
  • बजट बनाने से बचत को प्रोत्साहन मिलता है।
  • बजट के माध्यम से जो बचत होती है, उससे भविष्य सुरक्षित रहता है।

प्रश्न 9.
साप्ताहिक एवं मासिक हिसाब-किताब किसे कहते हैं?
उत्तर:
साप्ताहिक एवं मासिक हिसाब:
किताब-साप्ताहिक हिसाब में व्यक्ति एक दिन में होने वाले कुल खर्च की राशि लिखता है और सप्ताह के अन्त में उसको जोड़कर साप्ताहिक खर्च का हिसाब रखता है। इसी प्रकार माह के कुल सप्ताहों का खर्च जोड़कर माह में किये गये कुल खर्च का हिसाब रख सकता है। इस प्रकार व्यक्ति को पता चल जाता है कि माह के किस सप्ताह में सबसे अधिक खर्चा हुआ है।

अधिकांशत: माह के पहले सप्ताह में सबसे अधिक व्यय होता है। साप्ताहिक एवं मासिक खर्चों के हिसाब द्वारा वार्षिक खर्चे का ब्यौरा तैयार किया जा सकता है साथ ही प्रतिमाह की आय में उस महीने का व्यय निकालकर यह ज्ञात किया जा सकता है कि मासिक खर्चा आय से कम हुआ है या अधिक। हिसाब-किताब लिखने के लिए डायरी या कोई पुस्तिका या साधारण रजिस्टर काम में लाया जा सकता है।

प्रश्न 10.
लिफाफा विधि के अन्तर्गत किस प्रकार हिसाब-किताब रखा जाता है ? समझाइये।
उत्तर:
लिफाफा विधि:
लिफाफा विधि हर माह होने वाले निश्चित व्यय के लिए काम में प्रयोग की जाती है। निश्चित व्यय; जैसे-मकान का किराया, बच्चों की फीस, बीमा राशि का भुगतान, अखबार, दूध, बिजली का बिल आदि हैं। इस विधि को दो प्रकार से प्रयोग में लाया जाता है।

प्रथम विधि:
इस विधि के अन्तर्गत एक लिफाफे में विभिन्न मदों पर होने वाले खर्च की कुल राशि रख दी जाती है तथा लिफाफे के ऊपर कुल रखी गई राशि एवं विभिन्न मदों पर किया जाने वाला खर्च लिख दिया जाता है। परिवार का कोई भी सदस्य लिफाफे से अंकित राशि निकालकर भुगतान कर देता है।

दूसरी विधि:
इस विधि में हर मद के लिए अलग-अलग लिफाफे में राशि रख दी जाती है। प्रत्येक लिफाफे पर मद व राशि भी लिख दी जाती है। परिवार का कोई भी सदस्य लिफाफे के द्वारा भुगतान कर सकता है। अत: व्यक्ति अपनी आवश्यकता एवं सुविधानुसार लिफाफा विधि के अन्तर्गत किसी भी विधि को अपना सकता है।

प्रश्न 11.
हिसाब-किताब रखने से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
हिसाब-किताब का अर्थ-व्यक्ति अपने परिवार की विभिन्न प्रकार की इच्छाओं एवं आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए धन कमाता है। कमाये हुए धन को वह अपनी आवश्यकताओं पर खर्च कर देता है जिससे उसे तृप्ति प्राप्त होती है। उसने कितना कमाया और कितना खर्च किया इस सब के हिसाब को वह अपनी डायरी में लिखता है। इस प्रकार उसे बाजार की प्रत्येक वस्तु की कीमत की जानकारी हो जाती है साथ ही पारिवारिक आय एवं व्यय में सामंजस्य बिठाकर धन व्यवस्थापन करता है। इस प्रक्रिया को ही साधारण भाषा में हिसाब-किताब रखना कहते हैं।

हिसाब-किताब की परिभाषा:
“किसी एक निश्चित समयावधि में परिवार द्वारा किये गये घरेलू खर्च का लिखित ब्यौरा या कथन ही हिसाब-किताब है।” इसकी सहायता से परिवार वालों को विभिन्न वस्तुओं एवं सेवाओं पर किये गये व्यय की पूर्ण जानकारी प्राप्त होती है।

प्रश्न 12.
हिसाब-किताब के प्रकार बताइए।
उत्तर:
हिसाब-किताब के निम्न प्रकार हैं –

(1) बाजार खर्च:
आय का प्रमुख भाग उपभोग की वस्तुएँ लाने में व्यय होता है। जिनमें खाद्य पदार्थ, फल-सब्जियाँ, साबुन आदि सम्मिलित हैं। प्रत्येक गृहिणी को दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर हुए खर्च का ब्यौरा लिखना चाहिए। बाजार खर्च की डायरी बनाकर उसमें प्रतिदिन का हिसाब-किताब शाम को लिखना चाहिए।

(2) दूध का हिसाब:
प्रतिदिन कितना दूध लिया गया है, इसका ब्यौरा किसी नोट बुक अथवा कागज पर लिखा जाना चाहिए जिससे माह के अन्त में ठीक से हिसाब-किताब किया जा सके।

(3) धोबी का हिसाब:
धोबी से धुलवाए गए कपड़े इस्त्री करवाए गए एवं भट्टी लगवाए गए कपड़ों का पूरा ब्यौरा किसी डायरी/नोटबुक में तिथिवार कपड़ों की संख्या एवं करवाया गया कार्य लिखना चाहिए जिससे माह के अन्त में हिसाब करते समय परेशानी न आए।

(4) सम्पत्ति का हिसाब:
इस हिसाब के अन्तर्गत मकान का किराया अथवा जमा की गई किस्त, वाहन की किस्त एवं बीमा आदि का ब्यौरा रखा जाता है तथा इनके भुगतान के पश्चात प्राप्त रसीदों को भी संभाल कर रखा जाता है।

(5) बीमा तथा अन्य बचत साधन का हिसाब:
मासिक खर्च के बाद बचत का विनियोग बीमा, बैंक, पोस्ट आफिस या अन्य किसी बचत खाते में किया जाता है। शेयर/ऋण पत्र/मियादी जमा आदि का ब्यौरा इसी हिसाब के अन्तर्गत आता है। इनको जमा रसीदों एवं सभी कागजों को एक जगह संभाल कर रखा जाता है।

RBSE Class 12 Home Science Chapter 29 निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
व्यय की प्रमुख मदों का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
उत्तर:
व्यय की प्रमुख मदें:
समस्त वस्तुओं, सेवाओं, शीर्षकों, उपशीर्षकों को विभाजित कर सम्भावित आय के खर्च का पूर्ण विवरण लिखा जाता है। सेवाओं और वस्तुओं की मात्राओं का उल्लेख, इनकी कीमत तथा इन पर खर्च किये जाने वाले कुल धन का हिसाब लिखा होता है। एक परिवार के बजट में स्थान पाने वाले व्यय की मदें, आवश्यकता सम्बन्धी व्यय; जैसे-भोजन, वस्त्र, आवास तथा अन्य आवश्यक व्यय भी अंकित रहते हैं।

(1) भोजन:
यह एक ऐसा व्यय है जिस पर प्रत्येक परिवार व्यय करता है। कई परिवार भोजन पर खर्च करने के लिए कर्ज भी लेते हैं क्योंकि जीवित रहने के लिए इस आवश्यकता की पूर्ति आवश्यक है। परिवार की आय का अधिकांश भाग भोजन पर व्यय होता है। यह एक ऐसी आवश्यकता है जिसकी पूर्ति इस हिसाब से होनी चाहिए कि परिवार के सदस्यों की केवल भूख शान्त होने के साथ-साथ उनकी कार्य-क्षमता भी बनी रहे। भोजन के लिए महँगे पदार्थों का चयन न करके पौष्टिक पदार्थों का चयन करना चाहिए।

(2) वस्त्र:
परिवार की दूसरी अनिवार्य आवश्यकता वस्त्रों से सम्बन्धित होती है। वस्त्रों की आवश्यकता केवल शरीर को ढकने के लिए ही नहीं बल्कि विभिन्न मौसमों में शरीर की सुरक्षा करने के लिए भी होती है जिससे शरीर स्वस्थ बना रहे तथा कार्यक्षमता प्रभावित न हो। प्रत्येक परिवार अपने रहन-सहन के स्तर तथा आय के अनुसार आय का 18% व्यय वस्त्रों पर करता है। इस मद में केवल पहनने के ही वस्त्र नहीं आते बल्कि पहनने के अतिरिक्त घर के बिस्तर, तौलिए, पर्दे तथा वस्त्रों की सिलाई पर होने वाला व्यय भी इसी मद में सम्मिलित होता है।

(3) आवास:
आहार और वस्त्रों के बाद आवास की आवश्यकता होती है। मकान का किराया, मरम्मत, गृह-कर, बिजली का खर्च आदि इसी मद के अन्तर्गत आते हैं।

(4) अन्य आवश्यक व्यय:
(i) शिक्षा:
स्कूल, कॉलेज की फीस, किताब कापियों पर किया गया खर्च, उच्च शिक्षा का समुचित प्रबन्ध करना परिवार का एक महत्त्वपूर्ण उत्तरदायित्व है।

(ii) मनोरंजन:
प्रत्येक परिवार अपनी आय का कुछ अंश मनोरंजन पर खर्च करता है क्योंकि मनोरंजन का प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में महत्त्वपूर्ण स्थान है। परिवार में बच्चों के लिए खिलौने, कहानी की किताबें, टी.वी., वीडियो, सिनेमा, पिकनिक आदि पर व्यय करना होता है। हर परिवार मनोरंजन पर व्यय अवश्य करता है।

(iii) आवागमन:
इस मद में परिवार के किसी भी सदस्य के द्वारा बस, स्कूटर आदि पर किया गया खर्च आता है।

(iv) स्वास्थ्य और चिकित्सा:
परिवार के किसी भी सदस्य के अस्वस्थ होने पर किया जाने वाला खर्च इसी मद के अन्तर्गत आता है; जैसे-दवाइयों पर किया जाने वाला व्यय, डॉक्टर की फीस, अस्पताल का खर्च आदि।

(v) अचानक आने वाले खर्च:
इसके अतिरिक्त अचानक आने वाले खर्च भी आ जाते हैं जिनके लिए बचत आवश्यक है; जैसे-लम्बी यात्रा, लम्बी बीमारी, मकान तथा वाहन पर होने वाला खर्च, अकस्मात मृत्यु आदि पर होने वाला खर्च इसी श्रेणी में आता है। बजट तभी लचीला रहता है जब ऐसे अचानक आने वाले खर्चों के लिए व्यवस्था की गयी हो।

(vi) अन्य खर्च:
इसके अतिरिक्त अन्य खर्चों में नौकर को दिया जाने वाला वेतन, धोबी को दिया जाने वाला बिल तथा कुछ और भी अन्य खर्च सम्मिलित हो जाते हैं; जैसे-जेब-खर्च, पत्र-पत्रिकाओं पर होने वाला व्यय, शादी-विवाह पर होने वाला खर्च, सगे-सम्बन्धियों को लेन-देन, मेहमानों के आने पर अतिरिक्त खर्च आदि अन्य खर्चे में आते हैं।
बजट की एक आवश्यक मद है बचत-बचत दो प्रकार की होती है –

  • वह बचत जो कि धन को नियोजित करके की जाती है। यह बचत भविष्य के लिए होती है।
  • छोटी बचत जिसके लिए धन कहीं नियोजित नहीं किया जाता बल्कि अचानक आने वाले खर्चों के लिए घर के प्रतिदिन के खर्चों में से कुछ धन बचाकर रखना बचत कहलाती है।

प्रश्न 2.
घरेलू हिसाब-किताब की परिभाषा दीजिए। हिसाब-किताब रखने के लिए दैनिक हिसाब-किताब तालिका बनाइये।
उत्तर:
घरेलू हिसाब-किताब की परिभाषा:
“घरेलू हिसाब-किताब किसी एक निश्चित समय में परिवार द्वारा किये गये घरेलू खर्च का लिखित लेखा-जोखा या कथन है।” बहुत से लोग मुँहजुबानी हिसाब-किताब कर लेते हैं। ये व्यक्ति किसी डायरी या पुस्तिका में हिसाब-किताब नहीं लिखते बल्कि वे अपने मस्तिष्क में लिख लेते हैं। हिसाब-किताब हमेशा लिखित होना चाहिए, जिससे आसानी से धन का व्यवस्थापन हो सके।

लिखित हिसाब लम्बे समय तक सुरक्षित रखा रहता है तथा आवश्यकता पड़ने पर उसकी समीक्षा की जा सकती है। व्यय के तौर-तरीकों का मूल्यांकन किया जा सकता है, यदि वर्तमान में किया गया खर्च अनावश्यक है तो भविष्य में उसे सुधारा जा सकता है और परिवार के किसी भी सदस्य को आवश्यकतानुसार तुरन्त दिखाया जा सकता है। इसीलिए अधिकतर व्यक्ति अपना हिसाब-किताब डायरी में लिखकर रखते हैं।
प्रतिदिन या दैनिक हिसाब-किताब तालिका
RBSE Solutions for Class 12 Home Science Chapter 29 घरेलू हिसाब-किताब-4
दैनिक हिसाब-किताब के अन्तर्गत प्रतिदिन विभिन्न वस्तुओं या सेवाओं पर किये जाने वाले खर्च के ब्यौरे को लिखा जाता है। यह हिसाब समझने में अति आसान होता है। उपरोक्त तालिका के आधार पर पूरे माह का हिसाब लिखकर जोड़ लिया जाता है। यह एक परिवार का एक महीने के कुल व्यय को स्पष्ट करता है।

प्रश्न 3.
बजट से होने वाले विभिन्न लाभ बताइए।
उत्तर:
बजट से होने वाले विभिन्न लाभ –
(1) आय का उचित उपयोग:
सामान्य रूप से परिवार की आय को उपयोग में लाने का दायित्व गृहिणी का ही माना जाता है। उससे अपेक्षा की जाती है कि वह परिवार की आय का सदुपयोग करेगी। पारिवारिक बजट में सभी आवश्यकताएँ एवं व्यय की मदों का स्पष्ट उल्लेख किया जाता है। बजट बनाकर किया गया व्यय सार्थक होता है।

(2) अनावश्यक पारिवारिक व्यय पर नियन्त्रण:
बजट बनाने से व्यय पर नियन्त्रण करना होता है, ताकि व्यय परिवार की आय से अधिक न होने पाये। यदि परिवार के व्यय पर बजट बनाकर नियन्त्रण नहीं किया जाता है तो परिवार को ऋण का आश्रय लेना पड़ जाता है।

(3) ऋण से मुक्ति:
जब बजट के कारण अनावश्यक खर्चों की सम्भावना कम हो जाती है और आय का सर्वोत्तम उपयोग होता है तो ऋण से भी छुटकारा मिल जाता है। ऋण से छुटकारा मिलने पर परिवार अनेक दुष्परिणामों से बच जाता है क्योंकि ऋण का बोझ अत्यन्त दुःखदायी होता है, जिससे परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य बिगड़ जाता है एवं पारिवारिक शक्ति बिगड़ जाती है।

(4) बचत:
पारिवारिक बजट में बचत का भी एक अंश होता है, जिसके अन्तर्गत एक निश्चित धनराशि का प्रावधान होता है, ताकि समय आने पर विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति उस बचत में से की जा सके। इस प्रकार भविष्य को सुरक्षित बनाया जा सकता है।

(5) मितव्ययता की आदत:
परिवार में बजट तैयार करने से आय का सर्वोत्तम उपयोग सम्भव होता है। अत: इससे परिवार के सदस्यों में मितव्ययता की आदत बन जाती है।

(6) आय – व्यय में सामंजस्य:
पारिवारिक बजट द्वारा परिवार के सभी सदस्यों को आय की उचित जानकारी हो जाती है। अत: उनमें परस्पर व्यय एवं आय के सम्बन्ध में मतभेद रहने की सम्भावना कम हो जाती है। परिणामस्वरूप परिवार में सुख-शान्ति बनी रहती है।

(7) प्रत्येक सदस्य की आवश्यकता की पूर्ति:
पारिवारिक बजट द्वारा परिवार के प्रत्येक सदस्य की अनिवार्य आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा जाता है एवं उनकी पूर्ति करने का प्रयास किया जाता है।

(8) बजट द्वारा विभिन्न:
वस्तुओं की आवश्यकताओं की प्राथमिकता का निर्धारण किया जाता है। बजट में आवश्यक आवश्यकताओं की भी पूर्ति पर पहले एवं कम आवश्यक आवश्यकताओं को भविष्य के लिए निर्धारित किया जा सकता है।

(9) बजट बनाने से परिवार:
के आर्थिक लक्ष्य स्पष्ट हो जाते हैं, चाहे वह अल्पकालीन लक्ष्य हों अथवा दीर्घकालीन लक्ष्य। जैसे—सीमा को यह अच्छी तरह ज्ञात है कि वह प्रतिदिन कितना व्यय भोज्य पदार्थों पर करेगी, कितना बच्चे की उच्च शिक्षा पर एवं कितना विवाह हेतु। अतः बजट द्वारा वह अपनी आय का वर्तमान एवं भविष्य की आवश्यकताओं के बीच में सुचारु रूप से वितरण कर सकती है।

प्रश्न 4.
हिसाब-किताब रखने के प्रकार लिखिए। उचित उदाहरण द्वारा प्रत्येक प्रकार का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
हिसाब-किताब के प्रकार-हिसाब-किताब तीन प्रकार का होता है –
RBSE Solutions for Class 12 Home Science Chapter 29 घरेलू हिसाब-किताब-5
1. प्रतिदिन या दैनिक हिसाब-किताब (Daily Account):
इसके अन्तर्गत विभिन्न वस्तुओं या सेवाओं पर किये जाने वाले खर्च का ब्यौरा प्रतिदिन लिखा जाता है। इसे निम्न उदाहरण-तालिका द्वारा समझा जा सकता है –
RBSE Solutions for Class 12 Home Science Chapter 29 घरेलू हिसाब-किताब-6
उपर्युक्त तालिका के अनुसार पूरे महीने का हिसाब लिखकर महीने के अन्तिम दिन जोड़ लिया जाता है। यह एक परिवार का एक महीने के व्यय का हिसाब दर्शाता है।

2. साप्ताहिक एवं मासिक हिसाब-किताब (Weekly and Monthly Account):
साप्ताहिक हिसाब-किताब में व्यक्ति एक दिन में होने वाले कुल खर्च धनराशि को सप्ताह के अन्त में उसको जोड़कर इसका हिसाब रखता है। इसी प्रकार महीने के कुल सप्ताहों का खर्च जोड़कर महीने में किये गये कुल खर्च का हिसाब रखता है। साप्ताहिक एवं मासिक हिसाब-किताब को तालिका द्वारा दिखाया जा सकता है –
RBSE Solutions for Class 12 Home Science Chapter 29 घरेलू हिसाब-किताब-7
इस प्रकार के हिसाब से व्यक्ति को पता चल जाता है कि महीने के किस सप्ताह में सबसे अधिक खर्च हुआ है या होता है। अधिकतर माह के पहले सप्ताह में अधिक व्यय होता है।

3. वार्षिक हिसाब-किताब (Annual Account):
दैनिक एवं साप्ताहिक खर्चों के ब्यौरे के हिसाब से वार्षिक खर्चों का ब्यौरा तैयार किया जा सकता है। वार्षिक हिसाब को निम्न तालिका द्वारा समझा जा सकता है –
RBSE Solutions for Class 12 Home Science Chapter 29 घरेलू हिसाब-किताब-8

प्रश्न 5.
एक परिवार की आय 60,000 रु. प्रतिमाह है। इस परिवार का ऐंजिल्स के सिद्धान्त की सहायता से बजट तैयार कीजिए।
उत्तर:
पारिवारिक बजट के सम्बन्ध में जर्मनी के सुप्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. अर्नेस्ट ऐंजिल्स ने सन् 1857 में ‘सेक्सोनी प्रान्त’ के विभिन्न वर्गों के परिवारों के बजट का व्यवस्थित अध्ययन करने पर निम्नलिखित निष्कर्ष निकाले –

  • जैसे-जैसे पारिवारिक आय में वृद्धि होती है, वैसे-वैसे परिवार द्वारा भोजन पर किये जाने वाले व्यय का प्रतिशत घटता जाता है।
  • वस्त्र, गृह, प्रकाश एवं ईंधन आदि पर होने वाले व्यय का प्रतिशत मान सदैव स्थिर रहता है।
  • सांस्कृतिक आवश्यकताओं पर, विलासिता पर, मनोरंजन एवं शिक्षा तथा स्वास्थ्य पर किये जाने वाले व्यय का प्रतिशत मान बढ़ जाता है।

60,000 रु. प्रतिमाह आय वाले परिवार का बजट ऐंजिल्स के सिद्धान्त के अनुसार –
गृह स्वामी का नाम             : श्री दयाल सरन शर्मा
घर का पता                        : 43, नई सड़क, भरतपुर
परिवार के सदस्यों की संख्या : 4 (पुरुष 1, स्त्री 1, बच्चे 2)
मासिक आय                       : 60,000 रु. प्रति माह