Rajasthan Board RBSE Class 12 English Prudence Non-Fiction Chapter 4 On the Ignorance of the Learned

RBSE Class 12 English Prudence Non-Fiction Chapter 4 Textual Questions

Question 1.
Who is unacquainted with the maxims and manners of the world?
(a) the scientist
(b) the lawyer
(c) the learned pedant
(d) the artist
Answer:
(c) the learned pedant

Question 2.
Whom should we read to know the force of human genius?
(a) Shakespeare
(b) Milton
(c) Pope
(d) Gray
Answer:
(a) Shakespeare

Answer the following questions in 15-20 words each :
निम्न प्रत्येक प्रश्न का उत्तर 15-20 शब्दों में दीजिए :

Question 1.
whom do you consider learned ?
आप किसको विद्वान मानते हैं?
Answer:
We may consider a man learned who knows of things that are far removed from common life and actual observation.
हम उस व्यक्ति को विद्वान मान सकते हैं जो उन चीजों के बारे में जानता हो जो आम जीवन और वास्तविक निरीक्षण से बहुत दूर हो।

Question 2.
who is a pragmatist ?
व्यवहारिकतावादी कौन होता है?
Answer:
A pragmatist is a person who is practical and free from any scholastic discipline in his approach to matters in life.
व्यवहारिकतावादी वह व्यक्ति होता है जो जीवन के मामलों में अपने तरीकों में व्यवहारिक हो और किसी भी शैक्षिक अनुशासन से मुक्त हो।

Question 3.
Do the learned practise their own pieces of wisdom ?
क्या विद्वान अपने ज्ञान की बातों को अमल में लाते हैं?
Answer:
The leanred men do not practise their own pieces of wisdom because they are un connected with the experiences of life.
विद्वान लोग अपने ही ज्ञान की बातों को अमल में नहीं लाते क्योंकि वे जीवन के अनुभवों से सम्बन्धित नहीं होतीं।

Question 4.
What, according to Hazlitt, is knowledge ? Hazlitt
के अनुसार ज्ञान क्या होता है?
Answer:
Accoding to Hazlitt, knowledge is the knowing of the real meaning, and value of things that are related to life and its experiences. Hazlitt
के अनुसार उन चीजों के वास्तविक अर्थ और मूल्य को जानना जिनका जीवन और इसके अनुभवों से सम्बन्ध है, ज्ञान कहलाता है।

Answer the following questions in 50 words each :
निम्न प्रत्येक प्रश्न का उत्तर 50 शब्दों में दीजिए :

Question 1.
What does Hazlitt have to say about the learned men ? Do they possess true knowledge ?
विद्वान व्यक्तियों के बारे में Hazlitt का क्या कहना है? क्या उनके पास सच्चा ज्ञान होता है?
Answer:
About learned men, Hazlitt says that they are a kind of men who are untiring readers of books .They have no ideas of their own and are incapable of making independent observations on any subject. They do not possess true knowledge as they are content with sense borrowed from others.

विद्वान व्यक्तियों के बारे में Hazlitt का कहना है वे इस प्रकार के व्यक्ति होते हैं जो पुस्तकों के कभी न थकने वाले पाठक होते हैं। उनके पास खुद के कोई विचार । नहीं होते और किसी भी विषय पर स्वतन्त्र विचार रखने में असमर्थ होते हैं। उनके पास सच्चा ज्ञान नहीं होता क्योंकि वे दूसरों से लिये हुये ज्ञान से सन्तुष्ट होते हैं।

Question 2.
What are the areas Hazlitt thinks the learned people are ignorant of ?
Hazlitt के विचार से वे कौन से क्षेत्र हैं जिनके बारे में विद्वान लोग अनभिज्ञ होते हैं?
Answer:
Hazlitt believes that the learned people are mere scholars who know nothing but books. They have no real knowledge of men and things connected with practical life. They do not know what happens around them and are ignorant of the language and beauty of nature and art and other aspects of life

Hazlitt का मानना है कि विद्वान लोग केवल ऐसे ज्ञानी होते हैं जो पुस्तकों के अलावा कुछ नहीं जानते। उनके पास व्यवहारिक जीवन से जुड़े लोगों और बातों का कोई वास्तविक ज्ञान नहीं होता। उन्हें नहीं पता कि उनके आस-पास क्या हो रहा है और प्रकृति और कला की भाषा और सौन्दर्य और जीवन के दूसरे पहलुओं के बारे में वे अनजान होते हैं।

Question 3.
Do you think Hazlitt’s views are relevant today ?
क्या आप मानते हैं कि Hazlitt के विचार आज प्रासंगिक हैं?
Answer:
In “On the Ignorance of the Learned”, Hazlitt criticises formal education and truly says that this system does not promote true knowledge. It depends most on rote learning which weakens the internal strength of thought. So, the need today is to educate the mind free from all scholastic disciplines.

“On the Ignorances of the Learned” में Hazlitt औपचारिक शिक्षा की आलोचना करते हैं और सही कहते हैं कि यह प्रणाली सच्चे ज्ञान को बढ़ावा नहीं देती। यह रटने पर अधिक-से-अधिक विश्वास करती है जो विचारों की आन्तरिक ताकत को कमजोर करती है। इसलिये आज मस्तिष्क को शैक्षिक अनुशासन से मुक्त होकर शिक्षित करने की आवश्यकता है।

Question 4.
Is the essay Hazlitt’s answer to the problem of evil ?
क्या यह निबन्ध बुराई की समस्या पर Hazlitt को उत्तर है?
Answer:
The essay “On the Ignorance of the Learned” is indeed Hazlitt’s answer to the evil of pedantry. He criticises pedantry severely as it takes the learner or the reader away from nature and the perceptual world. It also hinders the accquisition of true knowledge and the unbiased development of the mind.

यह निबन्ध “On the Ignorance of the Learned” वास्तव में Hazlitt का पांडित्य-प्रदर्शन के प्रति एक उत्तर है। Hazlitt पांडित्य प्रदर्शन की कठोर आलोचना करते हैं क्योंकि यह सीखने वाले या पढ़ने वाले व्यक्ति को प्रकृति से और प्रत्यक्ष संसार से दूर ले जाता है। यह सच्चा ज्ञान प्राप्त करने व मस्तिष्क के पक्षपात रहित विकास में भी बाधक है।

Answer the following questions in about 100 words each :
निम्न प्रत्येक प्रश्न का उत्तर 100 शब्दों में दीजिए :

Question 1.
Do you agree that learning and pedantry go together ?
क्या आप सहमत है कि ज्ञान और पांडित्य-प्रदर्शन आपस में मेल खाते हैं?
Answer:
In the essay “On the Ignorance of the Learned”, Hazlitt has clearly distinguished learning from pedantry. To him, learning is not the knowledge of what is already known. And this is what pedantry exactly does. It teaches and propagates which is before us, about us, and which is part of common experiences, passions and pursuit of life. This is the knowledge that one can get from books and other artificial sources. But by learning Hazlitt means knowing something which is the farthest removed from common experience and actual observation. Thus, learning and pedantry do not go together.

निक्ध “On the Ignorance of the Learned” में Hazlitt ने ज्ञान और पांडित्य-प्रदर्शन के बीच स्पष्ट भेद किया है। उसके लिये ज्ञान इसके बारे में जानना नहीं होता जिसे हम पहले से जानते हैं, और पांडित्य-प्रदर्शन ठीक यही करता है। यह उसे सिखाता और प्रसारित करता है जो हमारे सामने है, आस-पास है और जो आम अनुभवों, भावनाओं और पेशों का हिस्सा है। यह वह ज्ञान है जिसे कोई भी पुस्तकों से या दूसरे कृत्रिम स्रोतों से प्राप्त कर सकता है। लेकिन ज्ञान से Hazlitt का तात्पर्य उस चीज को जानने से है जो आम अनुभव और वास्तविक अवलोकन से बहुत . दूर है। इस प्रकार, ज्ञान और पांडित्य प्रदर्शन में कोई मेल नहीं है।

Question 2.
In the essay, Hazlitt expresses his longing and passion for nature and perceptual world. Explain.
इस निबन्ध में Hazlitt ने प्रकृति और प्रत्यक्ष संसार के प्रति अपनी तीव्र इच्छा और लालसा को व्यक्त किया है। व्याख्या कीजिए।
Answer:
In the essay “On the Ignorance of the Learned” Hazlitt expresses his longing and passion for nature and the perceptual world while criticizing the learned. Hazlitt says that the perceptual world is the best book in itself. He further says that those who understand this nature and world rightly are learned in true sense. Hazlitt criticizes such scholars who spend their valuable life in reading and memorising so called theories written in thick books. Hazlitt advises us all to read the lively book present before us in the form of beautiful world.

निबन्ध “On the Ignorance of the Learned” में विद्वानों की आलोचना करते हुए Hazlitt प्रकृति और प्रत्यक्ष संसार के प्रति अपनी तीव्र इच्छा और लालसा को व्यक्त करता है। Hazlitt कहता है कि प्रत्यक्ष संसार अपने आप में सर्वोत्तम पुस्तक हैं वह आगे कहता है कि जो इस प्रकृति और संसार को ठीक प्रकार से समझते है, सच्चे अर्थ में वही विद्वान हैं Hazlitt ऐसे अन्वेषकों की आलोचना करता है जो अपने कीमती जीवन को मोटी किताबों में लिखे तथाकथित सिद्धान्तों को पढ़ने एवं याद करने में व्यतीत करते हैं। Hazlitt हम सभी को सुन्दर संसार के रूप में उपस्थित जीवन्त पुस्तक को पढ़ने का परामर्श देता है ।

RBSE Class 12 English Prudence Non-Fiction Chapter 4 Additional Questions

RBSE Class 12 English Prudence Non-Fiction Chapter 4 Short Answer Type Questions

Answer the following questions in about 50 words each:
निम्न प्रत्येक प्रश्न का उत्तर 50 शब्दों में लिखिए :

Question 1.
Why does Hazlitt begin the essay with a poem by Butlar ?
Hazlitt ने इस निबन्ध का प्रारम्भ Butlar की कविता से क्यों किया है?
Answer:
Hazlitt begins the essay with Butler’s poem because both concur on pedantry. Just as a man who learns too many languages does not acquire skill in expressing sense, similarly a pedant who reads too many books is incapable of free expression and thought.

Hazlitt इस निबन्ध का प्रारम्भ Butler की कविता से करते हैं क्योंकि पांडित्य-प्रदर्शन पर दोनों की एक राय है। जैसे कोई व्यक्ति जो बहुत सारी भाषायें सीख लेता है ज्ञान को व्यक्त करने की कला नहीं सीख पाता, वैसे ही विद्यादम्भी जो बहुत सारी पुस्तकें पढ़ता है स्वतन्त्र अभिव्यक्ति और विचारों में अक्षम होता है।

Question 2.
What does the author say about the lounger who is seen with a book in his hand ?
लेखक का उस आराम से खड़े व्यक्ति के बारे में क्या कहना है जो पुस्तक हाथ में लिए दिखायी पड़ता है?
Answer:
About the lounger who is seen with a book in his hand, the author says that he has neither power nor interest in understanding things around him. He is a book-worm who is incapable of making any observation and also rejecting any that has not been clearly made in the book.

आराम से खड़े व्यक्ति जो एक पुस्तक हाथ में लिये दिखायी देता है के बारे में लेखक का कहना है कि उसके पास अपने चारों ओर की चीजों को समझने की न तो शक्ति और इने रुचि होती है। वह एक किताबी-कीड़ा है जो कोई विचार रखने और किसी ऐसे विचार को नकारने में भी अक्षम होता है जो पुस्तक में स्पष्ट न दिया हो।

Question 3.
What, according to Hazlitt, is the result of relying on books for sense ?
Hazlitt के अनुसार, ज्ञान के लिये पुस्तकों पर अत्यधिक निर्भरता का क्या परिणाम होता है?
Answer:
According to Hazlitt, if a person makes a habit of reading too much and relying on books to derive sense, all his internal strength of thought is weakened. His faculties of the mind are rendered listless and dull. Such a person loses all capability for genuine thought and action.

Hazlitt के अनुसार यदि कोई बहुत ज्यादा पढ़ने और पुस्तकों से ज्ञान प्राप्त करने की निर्भरता की आदत बना लेता है तो उसके विचारों की सारी आन्तरिक क्षमता कमजोर हो जाती है। उसकी मानसिक क्षमतायें निरुत्साही और नीरस हो जाती हैं। ऐसा व्यक्ति मौलिक विचारों और कार्य की सारी योग्यताओं को खो देता है।

Question 4.
Why does the author compare the learned with the copiers of pictures ?
लेखक विद्वानों की तुलना चित्रों की नकल करने वालों से क्यों करता है?
Answer:
The author compares the learned with the copiers of pictures because both are alike when set upon to do something on their own. Then their heads turn and they do not know where thay are. Their deficiencies in doing the task come to the fore and they find themselves lost.

लेखक विद्वानों की तुलना चित्रों की नकल करने वालों से करता है, क्योंकि दोनों एक जैसे होते हैं जब उनको अपने आप किसी काम को करने के लिये लगाया जाए। उनके मस्तिष्क घूम जाते हैं और उन्हें पता नहीं होता कि वे कहाँ हैं। काम को करने में उनकी कमियाँ सामने आ जाती हैं और फिर उन्हें कुछ समझ नहीं आता।

Question 5.
Who, according to Hazlitt, is an idler at school ?
Hazlitt के अनुसार स्कूल में निकम्मा. कौन होता है?
Answer:
According to Hazlitt, an idler at school is one who has health and spirits and who gives his wit and limbs a free use. Such a person is happy and carefree and enjoys nature with open arms and gay abandon. He is also keenly interested in the affairs of his friends and acquaintances.

Hazlitt के अनुसार, स्कूल में निकम्मा वह होता है जिसके पास स्वास्थ्य और जोश होता है और जो अपनी बुद्धि और हाथ-पैरों का स्वतन्त्र उपयोग करता है। ऐसा व्यक्ति मस्त और चिन्ता मुक्त होता है। और प्रकृति का बाहें फैलाकर और परिणाम की चिन्ता किये बिना आनन्द उठाता है। वह अपने मित्रों और परिचितों के मामलों में भी उत्सकुता से रुचि लेता है।

Question 6.
How does Hazlitt define learning ?
Hazlitt ने ज्ञान को कैसे परिभाषित किया है?
Answer:
Hazlitt defines learning as knowledge which can be had from books and other artificial sources. The knowledge of something which is before us, about us and which appeals to our experiences, passions and persuits is not learning. It is the knowing of what is removed from common life and actual observation.

Hazlitt ने ज्ञान को उस ज्ञान के रूप में परिभाषित किया है जो पुस्तकों और दूसरे कृत्रिम स्रोतों से प्राप्त किया जा सकता है। जो हमारे सामने है, आस-पास है और जो हमारे अनुभवों, भावनाओं और धन्धों को अच्छा लगता है। को ज्ञान, ज्ञान नहीं है। यह उस चीज के जानने को कहते हैं जो आम जीवन और वास्तविक अवलोकन से परे हो।

Question 7.
“The learned pedant is conversant with books only.” Explain.
विद्वान विद्यादम्भी केवल पुस्तकों का ही जानकार होता है।” व्याख्या कीजिये।
Answer:
By saying that the learned pedant is conversant with books only, Hazlitt means that he knows nothing but books. His mind is filled with the stuff which others have filled in their books. He has no other interests and no practical knowledge of things yet he is their professed master.

विद्वान विद्यादम्भी केवल पुस्तकों का जानकार होता है से Hazlitt आशय है कि वह पुस्तकों के अलावा कुछ नहीं जानता। उसका. मस्तिष्क उन बातों से भरा होता है। जो दूसरों ने अपनी पुस्तकों में भरा है। उसे और किसी बात में रुचि नहीं होती और चीजों का व्यवहारिक ज्ञान भी नहीं होता फिर भी वह उनका घोषित विषेशज्ञ होता है।

Question 8.
What, according to Hazlitt, is the ignorance of the learned ?
Hazlitt के अनुसार, विद्वान की अज्ञानता क्या है?
Answer:
According to Hazlitt, the ignorance of the learned is their lack of familiarity with things. of practical experience and actual observation. The learned are ignorant of the beauties of nature, the spirit of music, art, poetry, sports, trade or occupation. They know nothing of the practical aspect of life.

Hazlitt के अनुसार विद्वान् की अज्ञानता। उनके व्यवहारिक अनुभव और वास्तविक अवलोकन से परिचय की कमी है। विद्वान प्रकृति के सौंदर्य, संगीत, कला, काव्य, खेल, व्यापार, या व्यवसाय की भावना से अनभिज्ञ, होते हैं, वे जीवन के व्यावहारिक पहलू के बारे में कुछ नहीं जानते।

Question 9.
What is affection and imposture for common people ?
आम लोगों को लिए बनावटीपन और धोखेबाजी क्या है?
Answer:
Hazlitt believes that for common people what holds importance is all that is connected with the daily affairs and experience of their lives. They understand only the things that they have opportunity to know and motives to study or practice. Beyond that everything also is affection and imposture for them.

Hazlitt का मानना है आम लोगों के लिये वह सब महत्वपूर्ण है जो उनके जीवन के रोजमर्रा के मामलों और अनुभवों से जुड़ा हो। वे केवल उन बातें को समझते हैं जिन्हें जानने का उनके पास अवसर है और जिनका अध्ययन या अभ्यास करने की उनके पास इच्छा है। इससे परे बाकी सब कुछ उनके लिये बनावटीपन और धोखेबाजी है।

Question 10.
What do the common people have which the learned are devoid of ?
आम लोगों के पास क्या चीज होती है जो विद्वान के पास नहीं होती?
Answer:
Hazlitt says that common people make use of their limbs. They understand their work and the people they deal with. They poises eloquence to express their passions. They know many good things of life. Most of all, they have commonsense. The learned have always been devoid of all these things.

Hazlitt का कहना है कि आम लोग अपने हाथ-पैरों का उपयोग करते हैं। वे अपने काम और उन लोगों को समझते हैं जिनसे वे व्यवहार करते हैं। उनके पास अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए वाक्पटुता होती है। सबसे अधिक, उनके पास विवेक होता है। विद्वान् के पास ये चीजें कभी नहीं रहीं।

Question 11.
Who are the most sensible people in Hazlitt’s opinion ?
Hazlitt के विचार से कौन सबसे ज्यादा समझदार लोग होते हैं?
Answer:
In Hazlitt’s opinion, the men of business and of the world whom we meet in the society’ are the most sensible people. They are the most realistic and practical in their attitudes and pursuits. They do not talk of what things ought to be. They say what they see and know.

Hazlitt के विचार से काम-धन्धे वाले और दुनियाँदारी वाले लोग जिनसे हम समाज में मिलते हैं, सबसे समझदार लोग होते हैं। वे ऐसे बात नहीं करते कि चीजें कैसी होनी चाहिये। वे वही कहते हैं जो वे देखते हैं और जानते हैं।

Question 12.
What has Hazlitt to say about women ?
महिलाओं के बारे में Hazlitt का क्या कहना है?
Answer:
About women Hazlitt says that they have more good sense and fewer pretensions. than men. As they do not reason at all, they judge things more truly and naturally. They do not think and speak by rule. They have more wit eloquence and more sense as well.

महिलाओं के बारे में Hazlitt का कहना है कि उनके अन्दर पुरुषों की तुलना में ज्यादा अच्छी भावना और कम आडम्बर होता है। क्योंकि वे तर्क नहीं करती हैं इसलिये वे चीजों का सच्चे और स्वाभाविक रूप से आंकलन करती हैं। वे सिद्धान्तों के आधार पर सोचती और बोलती नहीं है। उनके पास अधिक बुद्धि और वाकपटुता और विवेक भी होता है।

RBSE Class 12 English Prudence Non-Fiction Chapter 4 Long Answer Type Questions

Answer the following questions in 100 words each :
निम्न प्रत्येक प्रश्न का उत्तर 100 शब्दों में लिखिए :

Question 1.
Give a character sketch of the learned as drawn by Hazlitt.
विद्वान का चरित्र-चित्रण प्रस्तुत कीजिये जैसाकि Hazlitt ने खींचा है।
Answer:
Hazlitt describes the learned as men who are the untiring readers of books. They depend too much on them and are content with borrowed sense. They have no ideas of their own and are incapable of making independent observations. They draw intellectual support from books and are as Hazlitt says more “literary drudges” whose imaginations are enslaved by scholastic disciplines. They do not possess true knowledge and are deficient in common-sense. They are mere scholars who are ignorant of the beauty and language of nature and the spirit of art, music, poetry, sports and trade and other things of life.

Hazlitt विद्वानों का वर्णन ऐसे व्यक्तियों के रूप में करता है जो पुस्तकों के कभी न थकने वाले पाठक होते हैं। वे उन पर बहुत निर्भर रहते हैं और उधार लिये ज्ञान से सन्तुष्ट होते हैं। उनके अपने कोई विचार नहीं होते और वे स्वतन्त्र अवलोकन करने में अक्षम होते हैं। वे पुस्तकों से बौद्धिक सहारा लेते हैं और जैसा कि Hazlitt ने कहा है केवल साहित्यिक कोल्हू के बैल होते हैं जिनकी कल्पनायें शैक्षिक अनुशासन की गुलाम बनी होती हैं। उनके पास सच्चा ज्ञान नहीं होता और उनमें विवेक की कमी होती है। वे केवल ऐसे विद्वान होते हैं जो प्रकृति की भाषा और सौन्दर्य तथा कला, संगीत, काव्य, खेल व व्यापार की भावना और जीवन की दूसरी बातों से अनभिज्ञ होते हैं।

Question 2.
Why is Hazlitt against classical education ?
Hazlitt शास्त्रीय शिक्षा के विरुद्ध क्यों है?
Answer:
Hazlitt is against classical education because it has harmful effects on both the students and teachers. It lays emphasis on rote learning and knowledge derived from books. The result is that the students tend to memorize things without understanding. They grow up to be book-worms and are dependent on books to sense. The tea he fresh ion. The system kills the internal strength of thought of its followers and enslave them to the various scholastic disciplines. Under its effect, instead of discovering themselves in new ways; people rely on the artificial aspects of life.

Hazlitt शास्त्रीय शिक्षा के विरुध्द है क्योंकि इसका विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। यह रटने और पुस्तकों से प्राप्तं ज्ञान पर जोर देती है। परिणाम यह होता है कि विद्यार्थी बिना समझे चीजों को याद करने लग जाते हैं। वे बड़े होकर किताबी-कीड़े और ज्ञान लेने के लिये पुस्तकों पर निर्भर हो जाते हैं। शिक्षक विद्यादम्भी होने लगते हैं और कल्पना की ताज़गी खो देते हैं। यह प्रणाली अपने अनुयायियों के सोचने की आन्तरिक शक्ति को नष्ट कर देती है और उनको विभिन्न शैक्षिक अनुशासनों का गुलाम बना देती। है। इसके प्रभाव में स्वयं को नये-नये तरीकों से खोजने की बजाय लोग जीवन के कृत्रिम पहलुओं पर निर्भर होने लगते हैं।

Question 3.
How are the ordinary men better than the learned according to Hazlitt?
सामान्य लोग विद्वानों से किस प्रकार ज्यादा अच्छे होते हैं?
Answer:
Hazlitt believes that the ordinary men are better than the learned in many ways. Unlike the learned, the ordinary men make use of their limbs and live by their labour or skill. They understand the work they do and also the people they work with. They have eloquence to express their views, emotions and passions. They have also wit and spirit to enjoy life. They use language freely and naturally without any hassles. They know more of good things and of character than the learned pedant. Above all, they have commonsense which the learned never had in all the ages.

Hazlitt का मानना है कि सामान्य लोग विद्वानों की तुलना में कई तरह से ज्यादा अच्छे होते हैं। विद्वानों के विपरीत, सामान्य लोग अपने हाथ-पैरों का उपयोग करते हैं और अपनी मेहनत या कुशलता के बल पर जीते हैं। वे उस काम को समझते हैं, जिसे वे करते हैं और उन लोगों को भी जिनके साथ वे काम करते हैं। उनके पास अपने विचार, भावनायें और लालसायें व्यक्त करने के लिये वाक्पटुता होती है। उनके पास जीवन का आनन्द लेने की बुद्धि और मनोभाव भी होता है। वे स्वतन्त्र व स्वाभाविक रूप से बिना किसी परेशानी के भाषा का प्रयोग करते हैं। वे अच्छी बातों और चरित्र के बारे विद्वान विद्यादम्भी से अधिक जानते है। इन सबसे महत्वपूर्ण, उनमें विवेक होता है जो सभी युगों में विद्वान के पास कभी नहीं रहा।

Question 4.
“Leave me to my repose.” Whose motto is it and why?
मुझे मेरे आराम पर छोड़ दो”। यह किसका आदर्श वाक्य है और क्यों?
Answer:
According to Hazlitt, “Leave me to my repose.” is the motto of the sleeping and the dead. By this, the author refers to the learned who, like sleepers in sleep, are engrossed in books and, like the dead, are unaware of the things and happenings around. They are not even willing to come out this state for fear of losing their intellectual support and being left to themselves. Without books, they cannot even breathe. Their intellectual faculties are so enfeebled by the habit of borrowing ideas and sense from others that books become their crutches without which they must fall.

Hazlitt के अनुसार “मुझे मेरे आराम पर छोड़ दो” सोये और मरे हुये लोगों का आदर्श वाक्य होता है। इससे लेखक का तात्पर्य उन विद्वानों से है जो, जैसे सोये हुये लोग नींद में होते हैं, पुस्तकों में खोये रहते हैं और मरे हुये लोगों के समान, अपने चारों ओर की बातों और घटनाओं से अनजान होते हैं। वे अपनी अवस्था से अपना बौद्धिक सहारा खोने और स्वयं के सहारे रह जाने के डर से बाहर ही नहीं निकलना चाहते। बिना पुस्तकों के वे साँस भी नहीं ले सकते। उनकी बौद्धिक क्षमतायें दूसरों से विचार और ज्ञान लेने की आदत से इतनी कमजोर हो जाती हैं कि पुस्तकें उनकी बैसाखियाँ बन जाती हैं जिनके बिना वे गिर जायेंगे।