Rajasthan Board RBSE Class 10 English Literature Prose Chapter 4 The Tale of the Bishnois

Activity 1: Comprehension

A. Tick the correct alternative:

1. Who was the mother of Jambaji?

(a) Hamsadevi

(b) Ramsadevi

(c) Amritadevi

(d) Kauslyadevi

2. What was the age of Jambaji when the great disaster overtook the Marwar?

(a) Twenty three

(b) Thirty five

(c) Twenty five

(d) Twenty one

3. How many Bishnois sacrificed their lives to guard their sacred heritage?

(a) 336

(b) 363

(c) 633

(d) 636

Answers.

1.(a),

2.(c),

3.(b),

B. Say whether the following statements are true or false. Write T for true and F for false:

1. The Bhils resisted the encroachment made by hordes of cattle keepers from West and Central Asia.

2. The Rathore of Kanauj finally conquested the Bhils in 1451 AD.

3. Thakur Lohat was the father of Jambaji.

4. The land was not covered by Khejdi trees.

5. A copper plate was presented to the Bishnois by Diwan.

6. Rao Jodhaji was the ruler of Marwar in 1451 AD.

Answers.

1.-T,

2.-T,

3.-T,

4.-F,

5.-T,

6.-T

C. Answer the following questions in about 30 – 40 words each:

Question 1.

What kinds of animals and trees found in the desert of Marwar?

मारवाड़ के मरुस्थल में किस प्रकार के पौधे तथा जानवर पाए जाते हैं?

Answer.

The desert of Marwar was not a treeless waste of land and rocks. The land was covered by thousands of khejdi and plenty of ber and sangri trees. These trees were home to thousands of animals. There were plenty of antelopes, blackbucks, chinkaras and nilgais.

मारवाड़ का रेगिस्तान वृक्षविहीन, बंजर तथा चट्टानों से भरा नहीं था। यह क्षेत्र हजारों की संख्या में खेजड़ी वृक्षों, भरपूर मात्रा में बेर तथा सांगरी के पेड़ों से आच्छादित था। ये वृक्ष हजारों पशुओं की शरणस्थली थे। यहाँ काफी संख्या में हिरण, काला हिरण, चिंकारा तथा नीलगाय थे।

Question 2.

Who were the original residents of Marwar?

मारवाड़ के मूल निवासी कौन हैं?

Answer.

The Bhils were the original residents of Marwar. About 3000 years ago, invading hordes of cattle keepers from west and central Asia entered Marwar. The Bhils resisted their advance. But the superior horses and weapons of the invaders forced the Bhils to retreat towards the Aravallis. Finally, the Rathores of Kanauj, in 13th AD, established their rule in Marwar.

मारवाड़ के मूल निवासी भील थे। लगभग 3000 वर्ष पूर्व पश्चिम तथा मध्य एशिया के पशुपालकों के झुंड मारवाड़ में आ घुसे। भीलों ने इसका प्रतिरोध किया। किंतु आक्रमणकारियों के समुन्नत घोड़े तथा हथियारों ने उन्हें अरावली की तरफ लौटने को मजबूर कर दिया। अंत में कन्नौज के राठौरों ने 13वीं शताब्दी में मारवाड़ पर अपना शासन स्थापित कर लिया।

Question 3.

How was the vegetation of Marwar affected?

किस प्रकार से मारवाड़ का वनस्पतिकरण प्रभावित हुआ?

Answer.

As the time passed, the large herds of cattle began to affect the vegetation. The seedings and saplings were grazed down by the cattle. They had little chance to grow into full-sized trees. Gradually, the growing population and the large herds of animals affected the vegetation of the region quite adversely.

समय गुजरने के साथ बड़ी संख्या में पुशओं के झुंडों ने वनस्पतिकरण को प्रभावित करना आरंभ कर दिया। छोटे-छोटे निकलते हुए पौधों को पशुओं के द्वारा चर डाला गया। इनके पूर्ण वृक्ष के रूप में तैयार होने की संभावना बहुत ही कम रह गई। धीरे-धीरे बढ़ती जनसंख्या तथा पशुओं के बड़े झुंडों ने उस क्षेत्र के वनस्पतिकरण को बुरी तरह से प्रभावित किया।

Question 4.

Who conquered the Bhils finally and became the ruler of the whole Marwar?

भीलों पर किसने विजय प्राप्त करके अंततः संपूर्ण मारवाड़ पर शासन कायम किया?

Answer.

The Bhils were the original inhabitants of Marwar. Invading herds of cattle keepers from west and central Asia forced the Bhils to retreat to the Aravallis. Finally, in the thirteenth century, the Rathores of Kanauj invaded the Bhils and conquered them. The Rajputs now became the rulers of the whole of Marwar.

भील मूल रूप से मारवाड़ के निवासी थे। पशुपालकों का आक्रमणकारी गिरोह जो कि पश्चिम तथा मध्य एशिया से आया था, ने भीलों को अरावली की तरफ पीछे लौटने को विवश कर दिया। अंत में, तेरहवीं शताब्दी में कन्नौज के राठौरों ने आक्रमण कर भीलों को पराजित किया। राजपूत अब मारवाड़ के शासक बन गए।

Question 5.

What were the names of the parents of Jambaji?

जंबाजी के माता-पिता का क्या नाम था?

Answer.

Jambaji was born in the year 1451 AD in the village of Pipasar in Marwar. His father was the headman of the village. His name was Thakur Lohat. The name of his mother was Hansadevi. The boy Jambaji was given the job of taking the animals out for grazing.

जंबाजी का जन्म 1451 ई० में मारवाड़ के पीपासर नामक गाँव में हुआ था। उनके पिता जी गाँव के | प्रधान थे। उनके पिता का नाम ठाकुर लोहाट तथा माता का नाम हंसा देवी था। बालक जंबाजी को बाहर ले जाकर पशुओं को चराने का काम सौंपा गया।

Question 6.

What was the most fascinating and enthralling thing for Jambaji?

जंबाजी के लिए सर्वाधिक सम्मोहित करनेवाली चीज क्या थी?

Answer.

As a little boy, Jambaji was given the task of looking after his father’s large herd of cattle and sheep. For the little boy, it was great fun to take the animals out for grazing. Lying in the shade of a Khejdi tree, he would watch the herds of blackbucks. He was fascinated by the easy and graceful movements of antelopes. He thought that there was no sight more enthralling than a fight between two well-grown stags.

बचपन में जंबाजी को अपने पिता के बड़ी संख्या में पशुओं तथा भेड़ों की झुंड की देखभाल का काम सौंपा गया। इस छोटे बच्चे के लिए खेजड़ी के वृक्ष के नीचे बैठकर पशुओं को चराना बड़ा ही आनंददायक कार्य था। वह काले हिरणों के झुंड को देखा करता था। वह हिरणों को स्वच्छंदतापूर्वक विचरण करता देख बड़ा ही रोमांचित हो उठता था। वह सोचता कि दो बढ़ते हुए हिरणों के बीच संघर्ष को देखने से ज्यादा रोमांचक कुछ भी नहीं हो सकता।

Question 7.

What were the two commandments of Jambaji’s message?

जंबाजी के नियमों के दो प्रयुक्त संदेश क्या थे?

Answer.

Jambaji’s message included 29 basic tenets. However, two of the major commandments formed the crux of his message. The first commandment urged the followers never to cut down any green tree. The second one forbade the killing of any animals. This message of humanity and respect for all living things was accepted eagerly by these followers.

जंबाजी के संदेशों में 29 सिद्धांत शामिल थे। तथापि, उनके दो धर्मादेश उनके संदेश के मूल हैं। उनका प्रथम धर्मादेश अपने अनुयायियों को किसी भी हरे वृक्ष को नहीं काटने का आग्रह करता था। दूसरा ध र्मादेश किसी भी जानवर को नहीं मारने का था। मानवता तथा सभी जीवों को सम्मान देने के इस संदेश में उनके अनुयायियों ने बड़े ही आतुरतापूर्वक अपनाया।

Question 8.

Why were Bishnois called by this name?

बिश्नोइयों को इस नाम से क्यों पुकारा जाता है?

Answer.

The religious guru of Bishnois was Jambaji. His message included twenty-nine basic tenets. Prohibition against the cutting down of any green tree or the killing of any animal were the main two commandments. The followers of Jambaji were called Bishnois. They were also called twenty-niners (bis = 20 and noi = 9). They were called so as they followed twenty-nine precepts laid down by Jambaji.

बिश्नोइयों के धार्मिक गुरु जंबाजी थे। उनके संदेशों में 29 सिद्धांत शामिल हैं। किसी भी हरे वृक्ष को नहीं काटना तथा किसी भी जीव की हत्या नहीं करना उनके दो मुख्य धर्मादेश थे। जंबाजी के अनुयायी बिश्नोई कहे गए। इन्हें twenty-niners (bis = 20 and noi = 9) कहा गया। वे इसलिए बिश्नोई कहलाए, क्योंकि उन्होंने जंबाजी के 29 नीति उपदेशों का अनुसरण किया।

Question 9.

What was the use of lime kilns?

चूने की भट्ठियों का क्या उपयोग है?

Answer.

The famous red sandstone of Jodhpur was found in the surrounding areas of Marwar. The red sandstone needed a lot of lime to treat it. Limestone could not be used in the rough form. It had to be cured. The limestone was cured in the lime kilns.

मारवाड़ के आसपास के क्षेत्रों में जोधपुर के प्रख्यात लाल रेतीले पत्थर पाए जाते थे। जोधपुर के शासक को बड़ी संख्या में लाल रेलीले पत्थरों की आवश्यकता थी। चूने-पत्थर को कच्चे रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकता। इसे अभिसाधित करना होता है। चूना-पत्थर भट्ठियों में अभिसोधित होता है।

Question 10.

Why did the Diwan send his men to Khejadali?

दीवान ने अपने आदमियों को खेजड़ी क्यों भेजा?

Answer.

The Diwan ordered that the lime kilns be started near Khejadali. The lime kilns needed a lot of fuel to operate them. When the workers got ready to cut the trees for fuel, Bishnois resisted them. It was against their religion to cut down any green tree. They would not let the workers touch the trees. The Diwan was enraged. He personally accompanied the workers on horseback to Khejadali village. He ordered the trees be cut.

दीवान ने यह आदेश दिया कि चूने की भट्ठी खेजड़ी गाँव के निकट प्रारंभ की जाए। चूने की भट्टी को संचालित करने के लिए बड़ी मात्रा में ईंधन की आवश्यकता होती थी। जब श्रमिक ईंधन के लिए। पेड़ों को काटने के लिए उद्धत हुए। बिश्नोइयों ने इसका विरोध किया। किसी भी हरे वृक्ष को काटना | उनके धर्म के विरुद्ध था। उन्होंने श्रमिकों को पेड़ों को छूने तक नहीं दिया। दीवान क्रोधित हो उठा। वह स्वयं घोड़े पर सवार होकर श्रमिकों के साथ पेड़ों को काटने के लिए खेजड़ी गाँव आया।

Question 11.

What promise did Abhay Singh make to the Bishnois?

बिश्नोइयों से अभय सिंह ने कौन-सा वायदा किया?

Answer.

Abhay Singh, the ruler of Jodhpur himself rode to Khejadali to mend matters. He assured thousands of weeping Bishnois that he would fully respect their religious principles. His promise was inscribed on a copper plate. The inscription assured that no green tree would be cut near any Bishnoi village. Nor would any animal be hunted in its vicinity.

जोधपुर का शासक अभय सिंह मामले को सुलझाने के लिए स्वयं खेजड़ी गाँव गया। उसने हजारों की संख्या में विलाप करते बिश्नोइयों को यह आश्वस्त किया कि वह उनके धार्मिक सिद्धांतों को पूर्ण सम्मान करेगा। ताँबे के प्लेट पर उत्कीर्ण इस आश्वासन को बिश्नोइयों को सौंप दिया गया। इसमें यह आश्वासन दिया गया कि बिश्नोई गाँव के निकट कोई हरा वृक्ष नहीं काटा जाएगा। इसमें यह भी लिखा गया कि इस क्षेत्र में किसी भी जानवर का शिकार नहीं किया जाएगा।

Question 12.

What was written on the inscription presented to Bishnois?

बिश्नोइयों को दिए गए ताम्रपत्र में क्या लिखा था?

Answer.

After the massacre of 363 Bishnois, the ruler of Jodhpur, Abhay Singh, mended matters. He arranged their wounded feeling by assuring them that he would fully respect their religious principles. A copper plate inscribed with this promise was presented to the Bishnois. The inscription promised that no green tree would ever be cut near any Bishnoi village. It was also inscribed that no animal would be hunted down in its vicinity.

363 बिश्नोई लोगों का कत्लेआम करने के बाद जोधपुर के शासक, अभय सिंह ने स्थिति सुधारी। उन्होंने विश्वास दिलाया कि वह उनके धार्मिक सिद्धांतों का सम्मान करेगा। उसके ताँबे की प्लेट पर लिख गए संदेश को बिश्नोइयों को सौंप दिया गया। उसमें वादा किया गया था कि आगे से, किसी भी बिश्नोई गाँव के समीप किसी पेड़ को नहीं काटा जाएगा। न ही उनके समीप किसी जानवर का शिकार किया जाएगा।

D. Answer the following questions in about 60 – 80 words each:

Question 1.

What was the disaster Marwar faced when Jambaji was twenty five years old?

जब जंबाजी 25 वर्ष के थे तो मारवाड़ में कौन-सी आपदा आई थी?

Answer.

When Jambaji was twenty-five years old, a great disaster over took the Marwar region. Marwar had already had small quantity of rain. But now the rain ceased altogether. A severe drought befell the region. The cattle were the worst sufferers. The second year was very bad. There was not a blade of grass left anywhere. People cut down trees to feed the animals with their leaves. The drought continued for eight consecutive years. When the stored grain was exhausted, people started eating khejdi pods and the flour of dried ber seeds. They hunted every one of the starving black bucks. Finally, they migrated to other places. Thousands of cattle died on the way.

जब जंबाजी 25 वर्ष के थे, तो मारवाड़ क्षेत्र में एक बड़ी आपदा आई। मारवाड़ में पहले भी कम वर्षा होती थी, लेकिन इस बार बिल्कुल ही बारिश नहीं हुई। पशुओं की स्थिति बहुत ही ज्यादा खराब थी। दूसरा वर्ष और भी खराब था। घास का कोई तिनका भी कहीं नहीं था। लोग अपने पशुओं को खिलाने के लिए पत्तों के हेतु पेड़ों को काट रहे थे। सूखा लगातार आठ वर्षों तक जारी रहा। जब संग्रहित अन्न समाप्त हो गया तो लोग खेजड़ी की फलियों और सूखे बेरों का आटा खाने लगे। वे अपने आहार के लिए काले हिरणों का शिकार करने लगे। अंततः वे दूसरे क्षेत्रों में चले गए। इस क्रम में हजारों की संख्या में पुशओं की मृत्यु हो गई।

Question 2.

How did Jambaji’s teachings affect the villagers?

जंबाजी की शिक्षा ने ग्रामीणों को किस प्रकार से प्रभावित किया?

Answer.

The disastrous drought made Jambaji think that man’s false pride destroyed the world around him. Jambaji realized that if life was to flourish again, he would have to live in a different way. He wanted the earth to be covered once again by plenty of khejdi, ber and sangri trees. He wanted herds of blackbucks to frolic again. In 1485, he began to preach a new message. His message included 29 basic tenets. The two major commandments urged the people never to cut down any green tree or kill any animal. Jambaji’s message of humanity impressed his followers and they eagerly accepted it.

इस आपदों ने जंबाजी को यह सोचने को विवश कर दिया कि मनुष्य के छद्म अहंकार ने उसके इर्द-गिर्द के संसार को नष्ट कर दिया है। जंबाजी ने यह अनुभव किया कि यदि जीवन को एक बार फिर से समृद्ध करना है तो हमें अपनी जीवन पद्धति में परिवर्तन करना होगा। वे चाहते थे कि पृथ्वी एक बार फिर से प्रचुर मात्रा में खेजड़ी, बेर तथा सांगरी के वृक्षों से आच्छादित हो। वे चाहते थे कि काले हिरणों के झुंड एक बार फिर कुलाँचे भरें। 1485 में, उन्होंने एक नया संदेश दिया। उनके संदेश में 29 मूलभूत सिद्धांत शामिल थे। इनमें से दो प्रयुक्त धर्मादेश में लोगों से कहा गया है कि कभी भी किसी हरे वृक्ष को न काटें और न ही किसी जीव-जंतु की हत्या करें। जंबाजी के मानवता के संदेश को उनके अनुयायियों ने बड़े ही आतुरतापूर्वक स्वीकार किया।

Question 3.

What did Bishnois sacrifice their lives for?

बिश्नोइयों ने किसके लिए अपने जीवन की आहुति दी?

Answer.

Bishnois sacrificed their lives for a noble cause. Their religion very strongly prevented cutting down of any green tree. In 1730, the Maharaiah, Abhay Singh needed a lot of red sandstone for his new palace. Lime kilns needed a lot of fuel. Abhay Singh’s Diwan ordered his men to cut down trees for fuel near Khejadali. When the workers got ready to cut the trees for fuel, Bishnois would not let them touch the trees. Amritadevi, the wife of Bishnoi Ramkhod, sacrificed herself and her three daughters to save the trees from cutting down. Similarly, 363 Bishnois laid down their lives to guard their sacred heritage. The massacre moved Abhay Singh. He rode to Khejadali to mend matters. He assured Bishnois that he would fully respect their religious principles in future.

बिश्नोइयों ने एक पवित्र उद्देश्य के लिए अपने जीवन की आहुति दी। उनका धर्म कड़े शब्दों में किसी भी हरे वृक्ष को काटे जाने का प्रतिकार करता है। 1730 में महाराजा अभय सिंह को अपने नए महल के निर्माण हेतु बड़ी मात्रा में लाल रेतीले पत्थरों की आवश्यकता थी। चूने की भट्ठी को काफी मात्रा में ईंधन की जरूरत पड़ती है। अभय सिंह के दीवान ने अपने आदमियों को आदेश दिया कि खेजड़ी गाँव के निकट के वृक्षों को काट डालें। जब श्रमिक ईंधन के लिए पेड़ों को काटने के लिए आगे बढ़े, तो बिश्नोइयों ने उन्हें वृक्षों के पास नहीं जाने दिया। बिश्नोई रामखोद की पत्नी अमृतादेवी ने अपनी तीन पुत्रियों के साथ पेड़ों को कटने से बचाने के लिए अपनी जान दे दी। इसी प्रकार से 363 बिश्नोइयों ने अपनी पवित्र विरासत की रक्षा हेतु अपनी प्राण गों की आहुति दे दी। इस नरसंहार के कारण अभय सिंह को मामले को सुलझाने के लिए खेजड़ी जाना पड़ा। उन्होंने बिश्नोइयों को यह आश्वासन दिया कि वे भविष्य में उनके धार्मिक सिद्धांतों का पूरा सम्मान करेंगे।

Question 4.

How did Bishnois save the trees?

बिश्नोइयों ने किस प्रकार से वृक्षों की रक्षा की?

Answer.

Bishnois are the followers of Jambaji. The two major commandments of Jambaji’s message were very important to them. The first commandment forbade the cutting down of any green tree. When the Dewan of Abhay Singh ordered his workers to cut down the trees around Khejadali village, Bishnois opposed them. They would not allow his men to touch the trees. Amritadevi, the wife of Bishnoi Ramkhod, was cut down along with her three daughters trying to save their trees. Similarly, 363 Bishnois laid down their lives. They didn’t allow the Diwan and his men to cut down the trees so long they were alive.

बिश्नोई जंबाजी के अनुयायी हैं। जंबाजी के दो प्रमुख धर्मादेश उनके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण थे। प्रथम धर्मादेश किसी भी हरे वृक्ष को काटे जाने से रोकता है। जब अभय सिंह के दीवान ने खेजड़ी गाँव के आसपास के वृक्षों को काटने का आदेश अपने श्रमिकों को दिया तो बिश्नोइयों ने इसका विरोध किया। वे दीवान के आदमियों को वृक्षों को छूने तक नहीं देते थे। अमृता देवी जो कि बिश्नोई रामखोद की पत्नी थी, वृक्षों की रक्षा करते हुए अपने तीन पुत्रियों के साथ कट कर मर गई। इसी प्रकार, 363 बिश्नोइयों ने भी अपने प्राण दे दिए। जब तक वे जिंदा रहे, उन्होंने दीवान के आदमियों को वृक्षों को काटने नहीं दिया।

Question 5.

Why were Abhay Singh’s men

अभय सिंह के आदमी क्यों भयभीत हो गए?

Answer.

The Diwan and his men massacred 363 Bishnois. They sacrificed their lives but didn’t allow the Diwan and his men to touch their trees. They came forward to hug the trees and be cut down with them. The Maharajah’s men had never imagined that things could take such a horrible turn. They were truly frightened. They rushed back to Jodhpur. They gave reports of the bloody massacre to Abhay Singh.

दीवान तथा उसके आदमियों ने 363 बिश्नोइयों का कत्लेआम कर दिया। बिश्नोइयों ने अपना जीवन कुर्बान कर दिया किंतु दीवान तथा उनके आदमियों को वृक्षों को छूने तक नहीं दिया। वे वृक्षों को अपने आलिंगन में ले लेते थे तथा उन्हीं के साथ कट जाते थे। महाराजा के आदमियों को यह अनुमान नहीं था कि स्थितियाँ ऐसा भयानक रूप ले लेंगी। वे बहुत ही भयभीत हो गए। वे जोधपुर लौट गए। उन्होंने इस खूनी नरसंहार की सूचना अभय सिंह को दी।

Question 6.

What made Abhay Singh visit Khejadali?

अभय सिंह को खेजड़ी क्यों जाना पड़ा?

Answer.

Amritadevi, the wife of Bishnoi Ramkhod, and her three daughters were cut down with the trees and more of them came forward to hug the trees and to be cut down with them. When the news of the massacre reached Abhay Singh, the ruler of Jodhpur,he was moved by the courage and morality shown by the Bishnois. He personally rode to Khejadali to mend matters. He assured the people that from now on he would fully respect their religious principles. Cutting down of any green tree and killing of animals were banned around any Bishnoi village.

बिश्नोई रामखोद की पत्नी अमृतादेवी तथा उसकी तीन पुत्रियाँ वृक्षों के साथ कट गईं तथा कई वृक्षों के साथ आलिंगन होकर कटने को तैयार हो गए। जब इस नरसंहार की खबर जोधपुर के शासक अभय सिंह को मिली, तो वे स्तब्ध रह गए। वे स्वयं इस मामले को सुलझाने के लिए खेजड़ी गए। उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया कि वे अब से उनके धार्मिक सिद्धांतों का पूर्ण सम्मान करेंगे। बिश्नोइयों के गाँवों के आसपास के हरे वृक्षों को काटने तथा जीव-जंतुओं की हत्या पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

Question 7.

What do you learn by this tale? frightened?

इस कहानी से आपको क्या शिक्षा मिलती है?

Answer.

The tale of the Bishnois is a tale of courage, sacrifice and determination of Bishnois to save their ecological heritage. Bishnois could do anything even sacrifice their lives to save their religious heritage. The hot headed Diwan gave orders to his men to cut down trees around Khejadali village to fuel the lime kilns. A brave and determined community like that of the Bishnois understood the need of saving their trees. They wanted to stop Marwar being turned into a treeless waste of sand and rocks. Their principled stand made even the ruler of Jodhpur Abhay Singh bow down and accept their demands.

बिश्नोइयों की कथा उनके साहस, त्याग तथा दृढ़ संकल्प की कथा है जिससे कि वे अपनी पारिस्थितिकी विरासत की रक्षा कर सके। बिश्नोइयों ने अपने धार्मिक विरासत की रक्षा की। चूने की भट्ठियों के लिए ईंधन हेतु दीवान ने अपने आदमियों को यह आदेश कि खेजड़ी गाँव के आसपास के वृक्षों को काट डाला जाए। बिश्नोइयों जैसे बहादुर तथा दृढ़-संकल्पी समुदाय को वृक्षों के महत्व का पता था। उन्होंने मारवाड़ को रेत और पत्थरों के अवशिष्टों से युक्त होने से बचाया। उनके द्वारा निर्मित सिद्धांत पर जोधपुर के शासक अभय सिंह भी नतमस्तक हुए तथा उनकी माँगों को स्वीकार किया।

Question 8.

What impressions do you get from the action of the Diwan? What would you have done if you had been in place of Diwan?

दीवान के क्रियाकलापों से आपके मन पर क्या प्रभाव पड़ता है? यदि आप दीवान के स्थान पर होते तो क्या करते?

Answer.

The cruel and hot-headed Diwan was intoxicated with power and authority. The action of the Diwan was revengeful. It ended in a bloody massacre. The Bishnois sacrificed their lives to save their religious and cultural heritage. The Diwan’s action was an act against humanity. It I had been in place of the Diwan, I would have respected their principled stand to save their ecological heritage.I would have found alternative sources to fuel the lime kilns. I would have never allowed such a bloody massacre.I would saved their trees as well as their lives.

क्रूर तथा क्रोधी दीवान अपनी शक्ति तथा सत्ता मद में मतवाला था। दीवान का कृत्य बदले की भावना से प्रेरित था। इसका अंत खूनी नरसंहार से हुआ।बिश्नोइयों ने अपनी धार्मिक तथा सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए अपने प्राणों की बलि दे दी। दीवान का यह कृत्य मानवता के खिलाफ था। यदि मैं दीवान के स्थान पर होता तो मैं उनके पारिस्थितिकी विरासत की रक्षा करने में सिद्धांत का सम्मान करता। मैं चूने की भट्ठी के लिए ईंधन की आपूर्ति हेतु किसी दूसरे विकल्प की तलाश करता। मैं कभी भी इस तरह के खूनी नरसंहार की अनुमति नहीं देता। मैं उनके पेड़ों के साथ-साथ उनके जीवन की भी रक्षा करता।।

Question 9.

How did Abhay Singh console the enraged Bishnois?

क्रोधित बिश्नोइयों को अभय सिंह ने किस प्रकार से सांत्वना दिया?

Answer.

The news of the bloody massacre reached Jodhpur. The ruler, Abhay Singh was moved by the high morals and the principled stand of the Bishnois. He himself rode to Khejadali village to mend matters. He assured the weeping and anguished Bishnois that he would respect their religious principles in future. Cutting down of any green tree and killing of animals would be banned around any Bishnoi village. He inscribed his promise on a copper plate and presented it to the Bishnois.

खुनी नरसंहार की खबर जोधपुर पहुँची। शासक अभय सिंह बिश्नोइयों के उच्च नैतिक मापदंडों और सिद्धांतों से बहुत ही प्रभावित हुआ।वह स्वयं इस मामले को सुलझाने हेतु खेजड़ी गाँव गया। उसने रोते बिलखते बिश्नोइयों को यह आश्वासन दिया कि वह भविष्य में उनके धार्मिक सिद्धांतों का पूरा सम्मान करेगा। हरे वृक्ष को काटने तथा जीव-जंतुओं की हत्या करने पर किसी भी बिश्नोई गाँव के आसपास प्रतिबंध रखेगा। उसने अपने आश्वासन को ताँबे के एक प्लेट पर अंकित करवाकर बिश्नोइयों को प्रदान किया।

Question 10.

What message was inscribed on the copper plate?

ताम्रपत्र पर कौन-सा संदेश उत्कीर्ण था?

Answer.

The bloody massacre moved Abhay Singh’s heart. He was highly impressed by the principled stand and high morals shown by the Bishnois. He himself rode to Khejadali village to assuage the feelings of the Bishnois.He presented a copper plate to them.The plate inscribed the message of the ruler. The message was very clear. It respected the religious principles of Bishnois. It banned cutting down of any green tree or killing of animals in the vicinity of any Bishnoi village.

खूनी नरसंहार ने अभय सिंह के हृदय को परिवर्तित कर दिया। वह बिश्नोइयों की उच्च नैतिकता तथा सिद्धांतों से बेहद प्रभावित हुआ। वह स्वयं बिश्नोइयों की भावनाओं का सम्मान करने हेतु खेजड़ी गाँव गया। उसने उन्हें ताँबे का एक प्लेट भेंट किया। इस प्लेट में राजा का संदेश अंकित था। संदेश बहुत ही साफ था। इसमें बिश्नोइयों के धार्मिक सिद्धांतों के प्रति सम्मान का भाव था। इसमें किसी भी बिश्नोई गाँव के आसपास हरे वृक्षों को काटने या जीव-जंतुओं की हत्या करना निषेध था।

Activity 2: Vocabulary

A. The negative prefix ‘in’ is more often used with words of Latin origin while ‘un’ is more frequently found with words of English origin.

Example: credible – incredible

lucky – unlucky

Now make the following words negative by adding the prefix ‘in’ or ‘un’:

Well, covered, humanity, fertility, comfortable, affected, convenient, acceptable, different, bearable, eligible, reasonable.

Answer.

RBSE Solutions for Class 10 English Chapter 4 The Tale of the Bishnois 1

B. We can interchange nouns, verbs,adjectives, adverbs with the help of suffixes.

Example: human — ity = humanity

girl – ish = girlish

Example: Jambaji’s message of humanity was eagerly accepted.

Given below are some suffixes. Use them with the following words appropriately making slight changes in spelling where it is necessary. Use them in your own sentences:

-ly, -able, -ful, -less, -ship, -hood, -dom, -ness, -ar, -or

Suffixes: Faith, rapid, consider, noise, mother, dictator, wise, hard, lie, donate.

Answer.

RBSE Solutions for Class 10 English Chapter 4 The Tale of the Bishnois 2

C. Write one word beginning with the letter given, for the group of words put in bracket. The first one is done for you as an example.

1. Marwar is a treeless waste of sand and rocks. (land with very few plants or animals)

2. A camel can enjoy a midday s………. in the shade of babul tree. (rest or sleep in the early afternoon)

3. The cattle were the worst sufferers in the first year of d………. . (dry or no rainfall at all)

4. Jambaji wanted the region to be covered again by an a………. of Khejdi, Ber, Ker etc. (in sufficient quantity)

5. Shelly and Keats were c………. poets. (belonging to the same period)

6. Abhay Singh wanted to construct a beautiful p………. for himself. (official home of kings)

7. We should pay due regards to our a………. from time to time. (forefathers who lived a long time ago)

8. Bishnois celebrate the memory of their m………. by planting more and more trees. (persons killed because of beliefs)

Answer.

2. siesta,

3. drought,

4. abundance,

5. contemporary,

6. palace,

7. ancestors,

8. martyrs

D. Two groups of words are given here. Make compound words choosing suitable words from each group like horseback, nine twenty.

Group (1): black, lender, office, fourth,sand, continent, moon, tree, life, four, some,lords, over, ordinary

Group (2): money, stone, buck, hence, sub, hour, full, lover, time, how, land, took,eighty, extra.

Answer.

RBSE Solutions for Class 10 English Chapter 4 The Tale of the Bishnois 3

E. Homophones: Also known as sound alike words, are words that are pronounced identically although they have different meaning and different spellings as well, for example ‘cattle’and ‘kettle’, ‘plain’ and ‘plane? Try to find out some more homophones (at least two) in the lesson you have read. Find their homophones using dictionary. Also try to find the homophones of the following words.

Sight, four, won, would, piece, their, heir, allowed, rose, two.

Answer.

I. Two Homophones in the lesson are:

1. (i) Waist: the area between the ribs and the hips.

(ii) Waste: using more of something than is necessary.

2. (i) Principal: most important/the person who is in charge of a school or college.

(ii) Principle: a moral rule or a strong belief.

II. Find the homophones of the following words.

RBSE Solutions for Class 10 English Chapter 4 The Tale of the Bishnois 4

Activity 3: Grammar

Active and Passive Voice

Look at the following sentences:

(i) King Abhay Singh presented a copper plate to the Bishnois.

(ii) A copper plate was presented to the Bishnois by King Abhay Singh.

In the first sentence the subject of the verb acts, so the verb is said to be in

Active voice.

In the second sentence the subject of the verb is acted upon, therefore the verb is said to be in Passive Voice. It is the verb that is expressed in the active or in he passive voice.

When do we use the passive voice?

(i) When we are more interested in the action than the doer of that action: e.g. The bank was looted yesterday. (The thieves looted the bank yesterday.) The burglar was caught in the house. (The house owner caught the burglar.)

(ii) When we don’t know the doer of action or when he/she can’t be mentioned. e.g. The gate was opened. (Somebody opened the gate.) Five terrorists were killed in Kashmir. (The army killed five terrorists in Kashmir.)

There are certain rules to be followed when the verb of active voice is changed into passive voice.

(i) The object of the verb in active voice becomes the subject of passive voice.

Sita sings songs.

Songs are sung by Sita.

(ii) Usually transitive verbs are passive voiced, but some intransitive verbs become transitive when a preposition is added to them and they can be passive voiced:

He aimed at a lion.

A lion was aimed at by him.

(iii) When the verb in active voice has two objects (i.e. direct and indirect) either of them can be made subject in passive voice:

She gave me a gift.

I was given a gift by her.

A gift was given to me by her.

(iv) We use ‘let’ while changing imperative sentences of active voice into passive voice. The construction of the sentence in passive voice will be as under:

Let + object + be + Past Participle.

E.g. open the door.

Let the door be opened.

Please sit down.

You are requested to sit down.

If the imperative sentence is negative

Let + object + not + be + past participle.

Don’t shut it.

Let it not be shut.

(v) Interrogative sentences in active voice are changed thus:

(a) Who found this box?

By whom was this box found?

(b) Why do you study English?

Why is English studied by you?

(c) Have you finished your homework?

Has your homework been finished by you?

(d) Do you like him?

Is he liked by you?

(vi) If there is to infinitive in active voice,

it is changed into perfect infinitive to form the sentence in passive voice:

It is time to leave the school.

It is time for the school to be left.

Or It is time to shut the mall.

It is time for the mall to be shut.

(vii) Sentences having, modal auxiliaries in active voice are changed into passive voice thus:

Active: The aux. + root form of the verb.

Passive: The aux. + be + past participle of the root verb

He can lift the box.

The box can be lifted by him.

May God bless you!

May you be blessed.

The teacher should punish the boys.

The boys should be punished by the teacher,

(viii) Always keep in mind that pronouns are changed in voice thus:

RBSE Solutions for Class 10 English Chapter 4 The Tale of the Bishnois 5

(ix) Always use past participle form of the verb of active voice to form passive voice:

(x) Change of Tenses is followed thus:

(a) In the Present Simple Tense ‘is, ‘am. ‘are’ are used with the third form of the verb:

He reads English novels.

English novels are read by him.

(b) In the Past Simple Tense ‘was’, were’, are used with the third form of the verb.

She taught English in schools.

English was taught in schools by her.

(c) In Future Simple Tense ‘be’is used after ‘shall/will’:

They will never harm us.

We will be never harmed by them.

(d) In Present continuous and Past continuous tenses being’ is added to ‘is’, ‘am’, ‘are’, was’, were’ and the past participle form of the verbs is used:

The girls are watching the match.

The match is being watched by the girls

The woman was cooking food.

Food was being cooked by the woman.

(e) In the Present Perfect , The Past Perfect and the Future Perfect Tenses been’is added to the perfect tense:

He has sent me a present.

I have been sent a present by him.

I will have written this matter by now.

This matter will have been written by me by then.

Note: There is no passive voice in Future Continuous, and all the Perfect.

Continuous form of the Present , the Past and the future tenses.

Exercise

A. Change the following sentences into passive voice. Omit the agent.

1. Somebody had put out the light.

2. People serve ice-cream with meal.

3. They are expecting good news.

4. They admire the bravery of the Indian soldiers.

5. The Principal has dissolved the committee.

6. The Election commission announces elections for the state assemblies.

7. People hold honesty as the best policy.

Answer.

1. The light had been put out.

2. Ice-cream is served with the meal.

3. Good news is being expected.

4. The bravery of the Indian soldiers is admired.

5. The committee has been dissolved.

6. Elections for the state assemblies are announced.

7. Honesty is held as the best policy.

B. Convert the following sentences into passive form:

1. The teacher has appointed him monitor.

2. I opened the door.

3. He can lift the box.

4. Why do you suspect me?

5. Are they offering him a chair?

6. Whom do we like most?

7. Who wrote Macbeth?

8. Put him this question.

9. Show him the way.

10. Don’t tease her.

11. Give him a suitable reply.

12. Has someone informed the police?

13. Everyone believed that the movement was a failure.

14. People think that the government is working well.

Answer.

1. He has been appointed monitor by the teacher.

2. The door is was opened by me.

3. The box can be lifted by him.

4. Why an I suspected by you?

5. Is he being offered a chair by them?

6. Who is liked most by you?

7. By whom was Macbeth written?

8. Let this question be put to him.

9. Let the way be shown to him.

10. Let she not be teased.

11. Let a suitable reply be given to him.

12. Has the police be informed?

13. It was believed that the movement was a failure.

14. It is thought that the government is working well.

C. Convert the following sentences from Passive to Active Voice:

1. Khejdi trees are not allowed to be cut in Rajasthan.

2. The green cover of the Indian sub continent has been ravaged by grazing animals.

3. Bishnois were not to be cowed.

4. Jambhaji’s followers were called Bishnois.

5. The door was painted green by him.

6. By whom is English taught to you?

7. He was given the task of looking after his puppy.

Anwers.

1. They don’t allow khejdi trees to be cut in Rajasthan.

Or

Rajasthan doesn’t allow Khejdi trees to be cut.

2. Grazing animals have ravaged the green cover of the Indian sub-continent.

3. The could not cow the Bishnois.

4. They called Jambhaji’s followers Bishnois.

5. He painted the door green.

6. Who teaches you English?

7. They have given him the task of looking after his puppy.

Activity 4: Speech Activity

Divide the whole class into four to six groups/pairs. Each group will discuss the contribution of Bishnois to protect the ecology of desert amongst them and then each team leader would present their views before the whole class.

Answers.

Group A: Bishnois contributed a lot to protect the ecology of the desert.

Group B: No doubt about it. It was made possible by their religious leader Jambaji.

Group C: Who was Jambaji?

Group D. Jambaji was born in 1451 AD during the reign of Rao Jodhaji.

Group A: What was so great about Jambaji?

Group B: When Jambaji was twenty-five years old, a great disaster overtook the region.

Group C: A terrible drought overtook the region.

Group D: People cut down all the trees and hunted down all animals.

Group A: In the end, people migrated to other areas and thousands of cattle perished on the way.

Group B: Dying animals and starving children moved Jambaji.

Group C: He realised that pride and selfishness of man were destroying the world around him.

Group C: Jambaji wanted the earth to be covered again by khejdi, ber, ker and sangri trees.

Group D. Jambaji’s message included twenty-nine tenets. His two major commandments were a prohibition against the cutting down of any green tree or the killing of any animal.

Group A: Jambaji’s followers were called Bishnois or twenty niners.

Group B: The preserved the trees around their villages and protected black bucks and all other birds and animals.

Group C: Gradually their territory became covered by trees and the Bishnois became a prosperous people.

Group D. In 1730, they defied Maharajah Abhay Singh’s order and didn’t allow his men to cut trees in their village.

Group A: 363 Bishnois laid down their lives to save their khejdi trees.

Group B: A few years ago they planted 363 trees to honour their 363 martyrs.

Group C: In this way, Bishnois laid down even their lives to protect the ecology of the desert.

Group D: Even today, Bishnois follow the message of their religious leader, Jambaji, not to cut trees and kill blackbucks and other birds and animals.

Activity 5: Composition

Question 1.

Write a paragraph in about 150 words on ‘Trees are essential for our life’.

‘वृक्ष हमारे जीवन के लिए आवश्यक हैं’ विषय पर लगभग 150 शब्दों में एक अनुच्छेद लिखिए।

Answer.

Can we imagine the kind of life on the planet earth without trees and forests? Trees, forests and green belts are lungs and life-lines of the environment. Trees and forests help to maintain ecology and the environment of the world. They bring rain. All the green belts and great forests of the world have heavy rainfall. Those parts where there is no greenery and forests have turned into deserts. The Sahara, and the Thar turned into deserts due to lack of greenery and forests. Trees help a lot to avoid soil erosion. Trees keep the soil intact. They are essential for our life. They give out oxygen, so necessary for life. They have been providing fruits and fuel for the tribals. It is so sad that slowly but surely this world is inching towards becoming a vast treeless and barren desert. If we want to avoid it,we should grow more and more trees.

हमें अपने गृह पृथ्वी को बिना पेड़ और जंगल के नहीं सोच सकते! वृक्ष और जंगल हमारे वातावरण के फेफड़े और जीवन हैं। जंगल और वृक्ष पर्यावरण और परिस्थिति को संतुलित करते हैं। ये वर्षा लाते हैं। संसार के सभी हरे-भरे जंगलों में भारी वर्षा होती है। जिन जगहों पर हरियाली नहीं है, वह जंगल मरुस्थल में बदल जाते हैं। सहारा और थार मरुस्थल हरियाली की कमी के कारण मरुस्थल में बदल गए। वृक्ष मिट्टी के कटाव को रोकते हैं। वृक्ष मिट्टी को अक्षुण्ण रखते हैं। ये हमारे लिए अनिवार्य हैं। ये ऑक्सीजन छोड़ते हैं जो कि हमारे जीवन के लिए जरूरी है। ये आदिवासियों को फल और ईंधन देते हैं। नि:संदेह यह बड़े दुख की बात है कि हमारा संसार धीरे-धीरे वृक्षरहित मरुस्थल बनता रहा है। अगर हम इसे बचाना चाहते हैं तो हमें अधिक से अधिक वृक्ष लगाने चाहिए।

Question 2.

Write a short paragraph on Importance of animals’.

‘पशुओं का महत्व’ विषय पर एक संक्षिप्त अनुच्छेद लिखिए।

Answer.

We can’t imagine this beautiful world without trees and animals. Both are interconnected. Animals can survive only if they have forests to live in. No trees and no forest will also mean having no animals. Human beings have had very old and long association with animals. Domesticated animals like cows, bulls, goats, camels, horses have been extensively used for agricultural needs and for getting milk and meat. Pets like dogs have found entry in the world of men. Their wool and furs protect us from cold while their leather is used for making foot wears. Man should realize the importance of animals. He should treat them kindly without resorting to cruelty and indifference.

हम अपने सुंदर संसार को बिना वृक्ष और जानवरों के नहीं सोच सकते। जानवर तभी जिंदा रह सकते हैं अगर उनके पास रहने के लिए जंगल हैं। मानव जाति का पशुओं से बड़ा और पुराना रिश्ता है। पालतू जानवर जैसे गाय, भैंस, बकरी, ऊँट, घोड़े कृषि की जरूरतों के लिए बहुत ही उपयोगी होते हैं। और दूध और मांस देते हैं। पशु जैसे कुत्ता आदमी की दुनिया में जगह बना चुका है। उनके ऊन और फर हमें ठंड से बचाते हैं और उनके चमड़ी से जूते बनते हैं। आदमी को पशुओं की महत्ता का एहसास होना चाहिए। उन्हें पशुओं के साथ सहदयता से व्यवहार करना चाहिए और बिना किसी निर्दयता और अनधिमान से।

Additional Questions and Answers

A. Answer the following questions in about 30-40 words each:

Question 1.

What is so incredible to see amidst a treeless waste in today’s Marwar?

आज वृक्षविहीन मारवाड़ को देखना किस प्रकार से अविश्वसनीय-सा लगता है?

Answer.

What is today’s Marwar? It is nothing more than a waste of sand and rocks.Nothing big can grow here. The only things that grow there are the thorny shrubs, a few tufts of short grass. Occasionally we can see stunted ber and babul trees. However, we are pleasantly surprised to see groves of well grown khejdi trees. We can see such trees only around a Bishnoi village in the desert.

आज का मारवाड़ कैसा है? आज यह रेत और पत्थर के टुकड़ों के सिवाय कुछ भी नहीं है। यहाँ कोई भी बड़ा पौधा नहीं उग सकता। यदि कोई बढ़ रहा है तो वह है झाड़-झंखाड़ तथा छोटे-छोटे घासों के गुच्छे। यदा-कदा हम छोटे-छोटे बेर और बबूल के पेड़ देख सकते हैं। तथापि हमें बढ़े हुए खेजड़ी के वृक्षों को देखकर सुखद आश्चर्य हुआ। हम रेगिस्तान में स्थित बिश्नोई गाँवों में ही ये वृक्ष देख सकते हैं।

Question 2.

Why is the khejdi called a kalpavriksha?

खेजड़ी वृक्षों को कल्पवृक्ष क्यों कहा जाता है?

Answer.

A khejdi tree is the life-line of the Marwar desert. It is a kind of tree that fulfills all wishes. It is a cousin of the babul tree. It is rightly called the ‘kalpavriksha’. A full grown camel can enjoy a midday short sleep in its shade. Its leaves nourishes goats, sheep, cattle and camels. Its pods can be made into a delicious curry. Even its thorn’s guard and the farmers fields against invadin

खेजड़ी वृक्ष मारवाड़ के रेगिस्तान की जीवन रेखा है। यह एक ऐसा वृक्ष है, जो सभी इच्छाओं की पूर्ति करता है। इसे बबूल के पेड़ का सखा कहा जाता है। ठीक ही इसे ‘कल्पवृक्ष’ कहा गया है। एक ऊँट दोपहर में इसकी छाया में आराम कर सकता है। इसके पत्ते से बकरियों, भेड़ों, पशुओं तथा ऊँटों को आहार प्राप्त होता है। इसकी फलियों से स्वादिष्ट करी बनाई जा सकती है। यहाँ तक कि इसके काँटे भी किसानों की उपद्रवी जानवरों से रक्षा करते हैं।

Question 3.

Describe Marwar before it had not yet been conquered by the desert.

मारवाड़ के पहले की अवस्था का वर्णन कीजिए जब वह रेगिस्तान के रूप में तब्दील नहीं हुआ था।

Answer.

There was a time when the vast territory of Mewar had not turned itself into a treeless desert of sand and rocks. Of course, the climate was the same as it is today. The land was covered with thousand upon thousands of Khejdi trees. There were a large number of ber, ker and sangri trees. Once these plains were home to thousands of antelopes, blackbucks, chinkaras and nilgais. On this bounty lived the original inhabitants of Mewar, the Bhils.

एक समय था जबकि मारवाड़ का विस्तृत क्षेत्र वृक्षविहीन रेत और पत्थरों से भरी मरुभूमि नहीं था। निश्चित रूप से, मौसम जैसा आज है वैसा उन दिनों भी था। धरती हजारों खेजड़ी के वृक्षों से आच्छादित थी। बड़ी संख्या में बेर और सांगरी के वृक्ष थे। एक समय इस इलाके के मैदानी क्षेत्र हजारों हिरन, काला हिरण, चिंकारा तथा नीलगायों के शरणस्थली थे।

Question 4.

How did the large herds of cattle begin to affect the vegetation of Marwar?

पशुओं के बड़े-बड़े झुंडों ने किस प्रकार से मारवाड़ के वनस्पतिकरण को प्रभावित किया?

Answer.

As centuries passed, the number of animals increased beyond the means to sustain them. The large herds of cattle began to affect the fragile vegetation of Marwar. The cattle grazed down the seedlings and saplings. They had little chance of growing into well-grown trees. This affected the vegetation. Animals and the Bhils found it difficult to sustain themselves.

शताब्दियों के गुजरने के साथ ही, पशुओं की संख्या में वृद्धि हुई लेकिन उनके निर्वहन के साधनों में वृद्धि नहीं हुई। पशुओं के बड़े-बड़े झुंडों ने मारवाड़ के वनस्पतिकरण को प्रभावित करना शुरू किया। पशुओं ने उगते और बढ़ते हुए पौधों को चर डाला। अब उनके बड़े पौधों के रूप से वृद्धि होने की संभावना समाप्त हो गई। इसने वनस्पतिकरण को प्रभावित करना प्रारंभ किया। पशुओं तथा भीलों को अपने जीवन का निर्वहन करना मुश्किल हो गया।

Question 5.

How did Marwar pass through different rulers and races?

किस प्रकार से मारवाड़ ने विभिन्न शासकों तथा जातियों का सामना किया?

Answer.

The Bhils were the original tribal people that inhabited Marwar in the olden times. At three thousand years ago, hordes of ‘cattle keepers’ poured into Marwar from West and Central Asia. The Bhils resisted them. Superior weapons and horses of the invaders overpowered the Bhils. They were made to retreat towards the Aravallis. Finally, the Rathors of Kanauj conquered the Bhils in 13th century AD.

भील मूल जनजाति के लोग थे जो प्राचीन काल में मारवाड़ में रहते थे। तीन हजार वर्ष पूर्व, पशु-पालकों के समूह जो परिश्चम तथा मध्य एशिया के थे, मारवाड़ में घुस आए। भीलों ने उनका विरोध किया। किंतु उत्कृष्ट हथियारों तथा घोड़ों से सुसज्जित आक्रमण कारियों ने भीलों को हरा दिया। उन्हें अरावली की तरफ लौटने को विवश होना पड़ा। अंत में, कन्नौज के राठौरों ने 13वीं शताब्दी में भीलों पर विजय प्राप्त की।

Question 6.

Describe the birth of Jambaji and his childhood.

जंबाजी के जन्म तथा उनके बचपन का वर्णन कीजिए।

Answer.

In 1451 AD, an extraordinary child was born in the village of Pipasar. His father Thakur Lohat was the headman of the village. His mother was Hamsadevi.The boy was called Jambaji. As a little boy, he was given the task of looking after his father’s large herd of cattle and sheep. He enjoyed the fight between two well grown stags.

सन 1451 ई० में पीपासर गाँव में एक असाधारण बच्चे ने जन्म लिया। उसके पिता ठाकुर लोहात उस गाँव के प्रधान थे। उनकी माता का नाम हंसा देवी था। लड़के का नाम जंबाजी रखा गया। जब वे छोटे थे, तो उन्हें अपने पिता के पशओं तथा भेडों के झंड की देखभाल की काम सौंपा गया। वह दो बड़े हिरणों की लड़ाई को बड़े आनंद से देखता था।

Question 7.

When did the disaster overtake the whole region? How long the animals suffered during the drought?

आपदा ने कब पूरे क्षेत्र को अपनी गिरफ्त में ले लिया? सूखे के दौरान कब तक पशु इससे प्रभावित रहे?

Answer.

Jambaji was 25 years old when the whole region was ravaged by a severe drought. There were no rains at all. In the first year the animals were fed on the bajra straw stored in the houses. The second year was even worse the animals were fed on tree-leaves. Even then the animals died of hunger. The drought continued for eight long years.

जंबाजी उस समय 25 वर्ष थे, जब संपूर्ण क्षेत्र भयानक सूखे के विध्वंस से पीड़ित था। कहीं भी बिलकुल भी वर्षा नहीं हुई थी। प्रथम वर्ष में, जानवरों ने घरों में संग्रहित बाजरे का भूसा खाया। दूसरा वर्ष बहुत ही खराब था। पशुओं को पेड़ों के पत्ते खाकर जीवन का निर्वाह करना पड़ा। इसके बाद पशु भूख से मरने लगे। सूखा 8 वर्ष की लंबी अवधि तक रहा।

Question 8.

Describe the misery of the people during the disastrous drought. How were they forced to migrate in masses?

सूखे की आपदा के दौरान लोगों के दुखः तकलीफों का वर्णन कीजिए। बड़ी संख्या में उन्हें किस प्रकार से समाधान करना पड़ा?

Answer.

All branches and leaves of trees were cut down and they began to dry up. The stored grain was exhausted.People ate khejdi pods and the flour of dried ber seeds. After that they tore the bark off sangri trees, powdered and cooked it. All blackbucks were hunted down. In the end, the people lost all hopes and migrated in masses.

वृक्षों की सभी शाखाएँ तथा पत्तियाँ काट डाली गईं तथा वे सूखने लगे। संग्रहित अन्न समाप्त हो गए। लोग खेजड़ी की फलियाँ और सूखे बेरों का आटा खाने लगे। इसके बाद लोग सांगरी वृक्षों की छालों का पाउडर बनाकर तथा उन्हें पकाकर खाने लगे। सारे काले हिरणों का शिकार कर लिया गया। अंत में लोगों ने सारी उम्मीदें छोड़ दीं तथा बड़ी संख्या में पलायन करने लगे।

Question 9.

How did the disastrous drought haunt Jambaji day and night?

सूखे की आपदा किस प्रकार से जंबाजी को रात-दिन तंग करती थी?

Answer.

Jambaji was haunted by the disastrous drought day and night. It had continued for eight long years. He could see sufferings all around him. He had spent many sleepless nights. The dying cattle and the starving children haunted him day and night.

जंबाजी को सूखे की आपदा दिन-रात तंग करती थी। यह 8 लंबे वर्षों तक जारी रही। वह अपने आसपास की विषम परिस्थितियों को देख सकता था। उसने कई रातें जाग कर बिताई। मरते हुए पशु तथा भूख से बिलखते बच्चे उन्हें रात-दिन मानसिक रूप से विचलित करते थे।

Question 10.

What did he see in the vision? What did he decide to change?

दृष्टि-बोध की स्थिति में उन्होंने क्या देखा? उन्होंने इसमें परिवर्तन लाने के लिए क्या किया?

Answer.

Jambaji, finally at the age of 34 had a vision. He saw that man was intoxicated with his own power. He was destroying the world around him. If life was to flourish again in the barren desert, human beings would have to change their approach towards life. Jambaji wanted the earth to be covered once again by the growth of khejdi, ber, ker and sangri trees. He wanted herds of blackbucks to wander again fearlessly everywhere.

जंबाजी को, अंततः 34 वर्ष की अवस्था में दृष्टि-बोध हुआ। उन्होंने देखा कि मनुष्य अपनी ही शक्ति के मद में चूर है। वह अपने आसपास के संसार को नष्ट कर रहा है। यदि बंजर रेगिस्तान में जीवन को एक बार फिर समृद्ध करना है तो मनुष्य को जीवन के प्रति अपने दृष्टिकोण में परिवर्तन लाना होगा। जंबाजी चाहते थे कि धरती एक बार फिर खेजड़ी, बेर तथा सांगरी के वृक्षों से आच्छादित हो। वे चाहते थे कि काले हिरणों

का झुंड निर्भय होकर चारों तरफ विचरण करें।

Question 11.

What was Jambaji’s message and how was it received by the people?

जंबाजी का संदेश क्या था तथा इसे लोगों के द्वारा किस प्रकार से स्वीकार किया गया?

Answer.

Jambaji’s message included twenty nine basic principles. Two of his major commandments formed the core of his message. The first one was against the cutting down of any green tree. The second commandment forbade the killing of any animal. Jambaji’s message of humanity and respect for all living things was warmly received by the people. His teachings prompted people to preserve greenery and trees.

जंबाजी के संदेश में उनतीस मूलभूत सिद्धांत शामिल थे। उनके दो प्रमुख धर्मादेश उनके संदेश का मूल थे। उनका प्रथम धर्मादेश था–किसी भी हरे वृक्ष को नहीं काटना। उनका दूसरा धर्मादेश था—किसी भी जीव-जंतु की हत्या से निषेध करना। मानवीयता तथा सभी जीवों के प्रति सम्मान की भावना को प्रदर्शित करनेवाले उनके संदेश को सभी लोगों के द्वारा उत्साहपूर्वक स्वागत किया गया। उनकी शिक्षा ने लोगों को हरीतिमा तथा पेड़ों को बरकरार रखने हेतु प्रोत्साहित किया।

Question 12.

Why were Jambaji’s followers called Bishnois?

जंबाजी के अनुयायियों को बिश्नोई क्यों कहा गया?

Answer.

The followers of Jambaji were called Bishnois. Jambaji’s message included twenty nine basic principles. Preserving trees and not killing any animal were the two main commandments. The followers were called Bishnois or ‘twenty-niners’. ‘Bis’ means twenty and ‘noi’ means nine.

जंबाजी के अनुयायियों को बिश्नोई कहा गया। जंबाजी के संदेश में उनतीस आधारभूत सिद्धांत शामिल थे। वृक्षों का संरक्षण तथा किसी भी जानवर को नहीं मारना उनके दो प्रमुख धर्मादेश थे। अनुयायियों को बिश्नोई अर्थात ‘twenty-niners’ कहा गया। ‘बीस’ का मतलब ‘twenty’ तथा ‘नोई’ का मतलब ‘nine’।।

Question 13.

How did Bishnois become a prosperous community?

बिश्नोई एक समृद्ध समुदाय कैसे बन गए?

Answer.

Bishnois followed the twenty nine basic principles laid down by their religious head Jambaji. They preserved trees around their villages. They also protected blackbucks,chinkaras, peafowl and all other birds and animals. Gradually, their land was covered by trees. Their cattle had enough to feed themselves. The land recovered its fertility. The Bishnois became a prosperous people.

बिश्नोई ने अपने धार्मिक आराध्य जंबाजी द्वारा प्रदत्त 29 आधारभूत सिद्धांतों को अपनाया। उन्होंने अपने गाँव के आसपास वृक्षों का संरक्षण किया। उन्होंने काले हिरण, चिंकारा, मोर तथा अन्य पशु-पक्षियों को भी संरक्षण प्रदान किया। धीरे-धीरे उनकी भूमि वृक्षों से आच्छादित हो गई। उनके पशुओं को खाने के लिए पर्याप्त आहार था। धरती की उर्वरता वापस लौट आई। बिश्नोई एक समृद्ध समुदाय बन गया।

Question 14.

How did Abhay Singh decision of building a palace for himself brought him in conflict with the Bishnois?

अभय सिंह के द्वारा महल के निर्माण का निर्णय किस प्रकार उनका बिश्नोइयों से विवाद का कारण बन गया?

Answer.

The ruler of Jodhpur, Abhay Singh decided to construct a new palace for himself. It was to be made of red sandstone. That needed a lot of lime. The limestones needed lime kilns to be cured. They needed a lot of fuel to run the kilns. Abhay Singh’s Diwan started a lime kiln near a Bishnoi village where khejdi trees were found in plenty. But the Bishnois wouldn’t allow the cutting of khejdi trees as it was against the principles of their religion. It became a cause of conflict between them.

जोधपुर के शासक अभय सिंह ने एक नया महल बनाने का निर्णय किया। यह लाल रेतीले पत्थर से तैयार होना था। इसके लिए बहुत अधिक मात्रा में चूने की जरूरत थी। चूने-पत्थर को शोधित करने हेतु चूने की भट्ठी की जरूरत थी। चूने की भट्ठी के लिए अधिक मात्रा में ईंधन की आवश्यकता थी। अभय सिंह के दीवान ने बिश्नोई गाँव के निकट चूने की भट्ठी स्थापित किया, क्योंकि वहाँ खेजड़ी के वृक्ष पर्याप्त मात्रा में थे। लेकिन बिश्नोइयों ने उन्हें खेजड़ी वृक्षों को काटने की अनुमति नहीं दी क्योंकि यह उनके धार्मिक सिद्धांतों के खिलाफ था। यह उनके बीच विवाद का कारण बन गया।

Question 15.

Why was the Diwan enraged?

दीवान क्यों क्रोधित हुआ?

Answer.

The Diwan ordered his men to start a lime kiln near Khejadali, a village of Bishnois. He needed the wood of khejdi trees which were growing in plenty there. When his workers started cutting down the trees, the Bishnois would not let them touch the trees. It was against their religion to cut down any green tree. When the matter was reported to the Diwan he was so much enraged that he himself went to Khejadali to confront the Bishnois.

दीवान ने अपने आदमियों को बिश्नोइयों के गाँव खेजड़ी के निकट चूने की भट्ठी प्रारंभ करने का निर्देश दिया। उसे खेजड़ी के वृक्ष की लकड़ियों की आवश्यकता थी, जो उस इलाके में प्रचुर मात्रा में थे। जब उसके श्रमिकों ने वृक्षों को काटना शुरू किया, तो बिश्नोइयों ने उन्हें वृक्षों को छूने नहीं दिया किसी। भी हरे वृक्ष को काटना उनके धर्म के खिलाफ था। जब दीवान को इस बात की खबर हुई तो वह बहुत ही ज्यादा क्रोधित हो उठा तथा स्वयं बिश्नोइयों का सामना करने खेजडी गाँव पहँचा।।

Question 16.

How did the determined Bishnois sacrifice their lives to save their trees the sacred heritage for them?

अपनी पवित्र विरासत की रक्षा करने के लिए दृढ़-संकल्पित बिश्नोइयों ने किस प्रकार से अपने प्राणों की आहुति दी?

Answer.

The Diwan of Abhay Singh himself rode to Khejadali. He ordered his men to cut down the trees for fuel to the lime kilns. The Bishnois were determined. Amritadevi along with her three daughters continued clasping the trees till they were cut down with then. When Bishnois of the surrounding villages come to know of the massacre, they came in large numbers to help their brave brothers and sisters. 363 people laid down their lives to save their sacred heritage.

अभय सिंह का दीवान स्वयं खेजड़ी गाँव आया। उसने चूने की भट्ठी हेतु ईंधन के लिए वृक्षों को काटने का निर्देश अपने आदमियों को दिया। किंतु बिश्नोई दृढ़-संकल्पित थे। अमृता देवी अपनी तीन पुत्रियों के साथ पेड़ों को तब तक अपने आलिंगन में लिए रहीं, जब तक वह उनके साथ कट नहीं गईं। जब आसपास के गाँवों के बिश्नोई को इस बात की खबर मिली तो बड़ी संख्या में वे अपने बहादुर भाई-बहनों की सहायता हेतु पहुँचे। अपनी पवित्र विरासत की रक्षा हेतु 363 लोगों ने अपनी जान दे दी।

Question 17.

How did Amritadevi and her daughters sacrifice their lives to save their sacred heritage?

किस प्रकार से अमृता देवी तथा उनकी पुत्रियों ने अपनी पवित्र विरासत की रक्षा हेतु अपने प्राण न्योछावर कर दिए?

Answer.

The Diwan and his men were determined to cut down the khejdi trees for fuel to the lime kilns. The Bishnois were determined too. Amritadevi, the wife of Bishnoi Ramkhod would not allow the workers to touch the trees. She and her three daughters clasped the trees till they were cut with the trees. So they laid down their lives to preserve their sacred heritage.

दीवान तथा उनके आदमी चूने की भट्ठी के ईंधन के लिए पेड़ों को काटने पर आमादा थे। किंतु बिश्नोई भी दृढ़ संकल्पित थे। बिश्नोई रामखोद की पत्नी अमृता देवी ने श्रमिकों को पेड़ों के पास नहीं जाने दिया। उसने अपनी तीन पुत्रियों के साथ पेड़ों को तब तक आलिंगन में लिए रखा, जब तक वे पेड़ों के साथ कट नहीं गईं। अतः उन्होंने अपनी पवित्र विरासत की रक्षा हेतु अपने प्राणों का उत्सर्ग कर दिया।

Question 18.

How did Abhay Singh calm down the passions and mend matters by assuring the Bishnois?

अभय सिंह ने आवेश को कैसे शांत किया तथा बिश्नोइयों को किस प्रकार के आश्वासन देकर मामले को सुलझाया?

Answer.

Abhay Singh realised that his might could not subdue the high morals and sacrifices of the Bishnois. He himself rode to Khejadali and presented a copper plate to the Bishnois. It contained a a written promise that he would respect the principles of their religion in future. No green tree would be cut down and no animal be hunted near any Bishnoi village

अभय सिंह ने यह महसूस किया कि उन्हें बिश्नोइयों के उच्च नैतिक मूल्यों तथा त्याग का दमन नहीं करना चाहिए था। वह स्वयं खेजड़ी गाँव गए तथा विश्नोइयों को एक ताँबे का प्लेट प्रदान किया। इसमें यह लिखित आश्वासन दिया था कि उनके धार्मिक सिद्धांतों का भविष्य में पूरा सम्मान करेगा। बिश्नोई गाँव के निकट किसी भी वृक्ष को काटा नहीं जाएगा तथा बिश्नोई गाँव के आसपास किसी जानवर का शिकार नहीं किया जाएगा।

Question 19.

Describe the theme of the Tale of the Bishnois.

बिश्नोइयों की कहानी के विषय-वस्तु का वर्णन कीजिए।

Answer.

The tale of the brave Bishnois is a saga of sacrifice to save their sacred heritage. 363 Bishnois laid down their lives. But they didn’t allow the Diwan and his workers to touch their trees till they were cut down with them.High morals and selfless sacrifices bend down even the mighty rules.

बहादुर बिश्नोइयों की कहानी अपनी पवित्र विरासत की रक्षा हेतु बलिदान देने वालों का आख्यान है। 363 बिश्नोइयों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी किंतु उन्होंने दीवान तथा उसके आदमियों को तब तक पेड़ों को छूने की अनुमति नहीं दी जब तक कि वे उनके साथ कट नहीं गए। उच्च नैतिकता तथा नि:स्वार्थ त्याग के सामने शक्तिशाली शासक को भी झुकना पड़ा।

B. Answer the following questions in about 60-80 words each:

Question 1.

Describe the history of Marwar till it was finally ruled by the Rathore of Kanauj.

कन्नौज के राठौर के शासन के पूर्व के मारवाड़ के इतिहास का वर्णन कीजिए।

Answer.

Marwar has a long and illustrious history. In the beginning it was inhabited by th Bhils. They were the original tribals of Marwar. In those times, Marwar had thousands upon thousands of khejdi, ber, ker and sangri trees. About three thousand years ago, the ‘cattle-keepers’ from west and central Asia invaded India and powered into Marwar as well. The Bhils resisted their advance. The superior weapons and horses of the invaders forced the Bhils to retreat to the Aravallis. In 13th century AD, the Bhils were conquered by the Rathores of Kanauj. During these centuries, Marwar saw many ecological changes. Gradually it was reduced to a treeless waste of sand and rocks.

मारवाड़ का एक लंबा और सुविख्यात इतिहास रहा है। प्रारंभ में यहाँ भील निवास करते थे। वे मारवाड़ के मूल आदिवासी थे। उस समय मारवाड़ में हजारों हजार की संख्या में खेजड़ी, बेर तथा सांगरी के पेड़ थे। तीन हजार वर्ष पूर्व, पश्चिम तथा मध्य एशिया के पशपालक भारत में घुस आए तथा उन्होंने मारवाड में अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया। भीलों ने उनका प्रतिरोध किया। आक्रमणकारियों के समुन्नत हथियार तथा घोड़ों ने भीलों को अरावली की तरफ लौटने को विवश कर दिया। तेरहवीं शताब्दी में भीलों पर कन्नौज के राठौर ने विजय प्राप्त कर लिया। इन शताब्दियों में मारवाड़ में कई प्रकार के पारिस्थितिकी परिवर्तन हुए। इसके बाद धीरे-धीरे यह क्षेत्र वृक्षविहीन रेत और पत्थरों की बंजर भूमि में परिवर्तित हो गया।

Question 2.

Describe the terrible drought that overtook Marwar for eight long years. Also describe the sufferings that animals and men suffered during that period.

उस भीषण सूखे का वर्णन कीजिए जिसने मारवाड़ को आठ वर्षों तक अपने गिरफ्त में रखा। उन कठिनाइयों का भी जिक्र कीजिए जिसका सामना उस अवधि के पशुओं और मनुष्यों ने किया।

Answer.

A terrible drought overtook Marwar when Jambaji was a young man of twenty five years. The devastating drought continued for eight long years. Marwar had already scanty rains but then rains ceased altogether. People fed the animals on the stored bajra straw in their houses during the first year. The second year of the drought was really very bad. The people started cutting the trees and leaves and branches to feed their animals. The trees began to dry up. The condition of the people was no better than those of the animals. Their stored grain was exhausted. The people ate Khejdi pods and flour of dried ber seeds. They hunted down each one of the starving blackbucks. The people lost all hopes. They migrated in masses. The region was reduced into a barren, treeless desert of sand and rocks.

भीषण सूखा मारवाड़ में तब आया, जब जंबाजी 25 वर्ष के नौजवान थे। विनाशकारी सूखा आठ वर्षों तक रहा। मारवाड़ क्षेत्र में पहले ही कम वर्षा होती थी, किंतु अब तो बिलकुल ही बंद हो गई। लोग अपने पशुओं के चारे के लिए पेड़ों की टहनियाँ तथा पत्ते काटने लगे। इससे वृक्ष सूखने लगे। मनुष्यों की हालत भी पशुओं से बेहतर नहीं थी। उनके खाद्यान्न का संग्रह समाप्त हो गया। लोग खेजड़ी की फलियों और सूखे बरों का आटा खाने लगे। वे काले हिरणों का शिकार करने लगे। लोग निराश हो उठे। लोग उस क्षेत्र को छोड़कर जाने लगे। वह क्षेत्र वृक्षविहीन, रेत और पत्थरों की बंजर भूमि बनकर रह गया।

Question 3.

Describe Jambaji’s easly life. How was he affected by the drought and what did he decide to do?

जंबाजी के सहज जीवन की व्याख्या कीजिए। सूखे का उनके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा तथा उन्होंने क्या कहने का निश्चय किया?

Answer.

Jambaji was born in 1451 in the village of Pipasar in Marwar. His father the Lohat Singh was the headman of the village. His mother was Hamsadevi. Jambaji was to look after his father’s large herd of cattle and sheep. He enjoyed his job. He was twenty five when a terrible drought overtook the region. Jambaji was greatly affected by the drought. The dying cattle and starving children haunted him dav and night. He had a vision. He saw that man destroyed the world around him intoxicated by his own power. If life was to flourish again, man would have to change his attitude. Jambaji wanted the earth to be covered once again by plenty of khejdi, ber, ker and sangri trees. He knew to achieve his aim and began to broadcast his message in 1485. His main commandments were not to cut any green tree and not to kill any animal.

जंबाजी का जन्म 1451 में मारवाड़ के पीपासर नामक गाँव में हुआ था। उनके पिता लोहत सिंह गाँव के प्रधान थे। उनकी माता का नाम हंसा देवी था। जंबाजी अपने पिता के पशुओं तथा भेड़ों के बड़े झुंड की देखरेख करते थे। जब वह 25 वर्ष के थे, तो एक भयानक सूखा उनके क्षेत्र में पड़ा। जंबाजी पर इस सूखे का गहरा असर पड़ा। मरते हुए पशुओं तथा भूखे बच्चों को देख वह दिन-रात विचलित रहते। उन्हें एक दृष्टि-बोध हुआ। उन्होंने देखा कि मनुष्य अपनी शक्ति के मद में चूर होकर अपने आसपास की दुनिया को नष्ट कर रहा है। यदि मनुष्य को समृद्धि लानी है, तो उसे अपने दृष्टिकोण में परिवर्तन लाना होगा। जंबाजी चाहते थे कि धरती एक बार फिर से खेजड़ी, बेर तथा सांगरी के पेड़ों से आच्छादित हो जाए। वे अपने लक्ष्यों को पूरा करने का तरीका जान गए। 1485 में अपने लक्ष्यों को प्रसारित किया। उनके प्रमुख धर्मादेश थे-वृक्षों को नहीं काटना तथा किसी भी जीव-जंतु की हत्या नहीं करना।

Question 4.

How were the followers of Jambaji called the Bishnois? Describe the contribution of the Bishnois in safeguarding the trees and the animals of their regions.

जंबाजी के अनुयायी बिश्नोई क्यों कहलाए? अपने क्षेत्र में वृक्षों तथा जानवरों की रक्षा में बिश्नोइयों के योगदान की चर्चा कीजिए।

Answer.

Jambaji’s message of humanity and respect for all living things was readily accepted his followers. His followers were called Bishnois. They were also called ‘twenty-niners’. They were called so because they followed the twenty nine basic principles laid down by their religious head, Jambaji. The main two commandments of his message were never to cut any green tree and never to hunt or kill any wild animal. Bishnois have continued with their magnificent obsession for more than five centuries. They have contributed a lot in safeguarding the trees and animals in Rajasthan, Haryana and Madhya Pradesh. Even today one can distinguish a Bishnoi village in the desert by the grove of khejdi, ber, ker and sangri trees.

जंबाजी के मानवता तथा सभी जीवों के सम्मान करने के संदेश को उनके अनुयायियों के द्वारा सहर्ष स्वीकार किया गया। उनके अनुयायी बिश्नोई कहलाए। उन्हें ‘twenty-niners’ कहा गया। इन्हें ऐसा इसलिए कहा गया, क्योंकि वे अपने धार्मिक प्रभुत्व द्वारा प्रदत्त 29 मूलभूत सिद्धांतों का अनुसरण करते थे। उनके दो प्रमुख धर्मादेश थे—कभी भी किसी हरे वृक्ष को नहीं काटना तथा कभी भी किसी जंगली जीव की हत्या नहीं करना। बिश्नोइयों ने इन सिद्धांतों को पाँच शताब्दियों से भी अधिक समय तक पालन किया। उन्होंने राजस्थान, हरियाणा तथा मध्य प्रदेश में वृक्षों तथा जंतुओं की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। आज भी रेगिस्तान में स्थित बिश्नोई गाँव को खेजड़ी, बेर तथा सांगरी वृक्षों के बगीचों से पहचाना जा सकता है।

Question 5.

Why and where did the massacre take place? How in the end were the Bishnois assured by Abhay Singh?

कहाँ और क्यों नरसंहार हुआ? किस प्रकार से अंत में अभय सिंह ने बिश्नोइयों को आश्वस्त किया?

Answer.

The mad anger of Abhay Singh’s Diwan was responsible for the terrible massacre that took place in 1730. Maharajah Abhay Singh of Jodhpur decided to construct a new palace for him. The limestone needed lime kilns to cure it. Lime kilns needed a lot of fuel. The Diwan found a lot of khejdi trees around Khejadali village of Bishnois. He ordered his workers to cut down the trees for fuel. Cutting of any green tree was against the principles of their religion. They didn’t allow the workers to touch their trees. The Diwan was enraged and asked his men to go ahead. Amritadevi came with her three daughters and clasped the four trees. They were cut down to pieces with the trees. Many more Bishnois came forward to save their sacred heritage. 363 Bishnois laid down their lives in doing so. Abhay Singh was moved by their high morals and courage. He rode to Khejadali and assured the Bishnois to respect the principles of their religion in future. He promised never ever to cut any green trees or kill any wild animal near any Bishnoi village. He inscribed his promise on a copper plate and handed over it to them.

अभय सिंह के दीवान के पागलपन से भरा क्रोध उस भयावह नरसंहार का जिम्मेदार था, जो कि 1730 में हुआ था। जयपुर के महाराजा अभय सिंह ने अपने लिए एक नया महल बनाने का निर्णय किया। चूने पत्थर को शोधित करने के लिए चूने की भट्ठियों की आवश्यकता थी। चूने की भट्ठियों के लिए बड़ी मात्रा में ईंधन की आवश्कता थी। बिश्नोइयों के गाँव खेजड़ी के आसपास दीवान ने बड़ी संख्या में खेजड़ी के वृक्षों को देखा। उसने अपने श्रमिकों को ईंधन के लिए इन वृक्षों को काटने का आदेश दिया। किसी भी हरे वृक्ष को काटना उनके धार्मिक सिद्धांतों के खिलाफ था। उन्होंने श्रमिकों को पेड़ों को छूने नहीं दिया। दीवान क्रोधित हो उठा तथा अपने श्रमिकों को पेड़ों को काटने को कहा। अमृता देवी अपनी तीन पुत्रियों के साथ आई तथा चार वृक्षों के साथ चिपक गईं। सभी वृक्षों के साथ टुकड़ों में काट डाले गए। और भी कई बिश्नोई अपनी पवित्र विरासत की रक्षा हेतु आए। इस प्रकार से 363 बिश्नोइयों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। बिश्नोइयों की उच्च नैतिकता तथा साहस के आगे अभय सिंह नतमस्तक हो गया। वह खेजड़ी गया तथा बिश्नोइयों को यह आश्वस्त किया कि वह भविष्य में उनके धार्मिक सिद्धांतों का सम्मान करेगा। उसने यह आश्वासन किया कि वह कभी भी बिश्नोई गाँव के आसपास किसी हरे वृक्ष को काटने अथवा किसी जंगली जानवर की हत्या करने की अनुमति नहीं देगा। उसने एक ताँबे के प्लेट पर इस आश्वासन को अंकित करवाया तथा उन्हें सौंप दिया।

Question 6.

Describe the message that the tale of Bishnois intend to give to the readers and the world at large.

बिश्नोइयों की कथा द्वारा अपने पाठकों तथा विश्व को दिए गए संदेश की व्याख्या कीजिए।

Answer.

The lesson The tale of the Bishnois’ is an attempt to highlight the importance of trees and the preservation of wild animals. It is a serious warning to man and his deceptive attitudes. This world will be reduced into a vast treeless desert of sand and rocks if plundering of nature and the environment continues unabated. The world has to learn a lot from the Bishnois. They sacrificed even their lives to keep their sacred heritage. They preserved their khejdi, ber, ber and sangri trees and paid a very high price-lives of 363 innocent men. Another lesson that the tale teaches us that even the might of the kings low down before high morals and sacrifices for a noble cause. It is quite encouraging that the Bishnois are still obsessed with their magnificent and noble cause-to make the frolicking antelopes roaming around it.

पाठ ‘बिश्नोइयों की कथा’ में वृक्षों तथा जंगली जीव-जंतुओं के संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला गया है। यह मनुष्य तथा उसके कपटपूर्ण दृष्टिकोण के प्रति एक गंभीर चेतावनी है। यह विश्व वृक्षविहीन रेत और पत्थरों से युक्त एक बंजर भूमि में परिवर्तित हो जाएगा, यदि प्रकृति और पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ इसी प्रकार से जारी रहती है। विश्व को बिश्नोइयों से बहुत कुछ सीखना चाहिए। उन्होंने अपनी पवित्र विरासत को बचाने हेतु अपने जीवन को कुर्बान कर दिया। उन्होंने 363 निर्दोष लोगों की जान की बहुमूल्य कीमत देकर खेजड़ी, बेर तथा सांगरी के वृक्षों की रक्षा की। यह पाठ एक शिक्षा यह भी देता है कि पवित्र उद्देश्यों के लिए उच्चतम मानवीय त्याग के समक्ष राजा की शक्ति भी नतमस्तक हो जाती है। यह उत्साहवर्द्धक बात है कि बिश्नोई अभी भी अपने पवित्र उद्देश्यों के लिए पूरी तरह से समर्पित हैं ताकि उल्लासित हिरणे चारों तरफ कुलाँचे भर सकें।

Questions for Practice

1. What are the only growing things in Marwar desert today?

आज मारवाड़ के रेगिस्तान में कौन-सी एकमात्र बढ़ती हुई चीज है?

2. Why is the khejadi tree called the ‘Kalpariksha?

खेजड़ी के पेड़ों को ‘कल्प वृक्ष’ क्यों कहा जाता है?

3. Who were Bhils and how were they finally subdued?

भील कौन थे तथा उनका दमन कैसे हुआ?

4. Describe Jambaji as a boy.

जंबाजी को एक बच्चे के रूप में वर्णित कीजिए।

5. What was the disaster that overtook the whole region?

किस आपदा ने पूरे क्षेत्र को अपने गिरफ्त में ले लिया?

6. Describe the sufferings that men and animals had to face during the drought.

सूखे के दौरान उन कठिनाइयों को वर्णित कीजिए जिनका सामना मनुष्यों तथा पशुओं ने किया।

7. Why did the Diwan order the khejdi trees to be cut near Khejadali village?

दीवान ने खेजाडली गाँव के निकट खेजड़ी के वृक्षों को काटने का आदेश क्यों दिया?

8. Why did Abhay Singh personally came to Khejadali?

अभय सिंह व्यक्तिगत रूप से खेजड़ी गाँव क्यों गए?