Rajasthan Board RBSE Class 12 Chemistry Chapter 6 

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 6 तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रशन

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 6 तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम अति लघूतात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
ऐलुमीनियम एवं आयरन के ऑक्साइड अयस्क का नाम व रासायनिक सूत्र लिखिए।
उत्तर:
ऐल्युमीनियम : बॉक्साइट (Al2O3 2H2O)
आयरन : हेमेटाइट (Fe2O3)

प्रश्न 2.
धातुमल किसे कहते हैं? एक उदाहरण से समझाइए।
उत्तर:
धातुमल (Slag) : गालक (flux) अयस्क में उपस्थित अगलनीय अशुद्धियों को गलनीय (fusible) पदार्थ में बदल देते हैं, जिसे धातुमल (slag) कहते हैं।
उदाहरणार्थ – CaO + SiO2 → CasiO3
अशुद्धि गोलक धातुमल (कैल्शियम सिलिकेट)

प्रश्न 3.
कॉपर के सल्फाइड वे ऑक्साइड अयस्क का नाम एवं रासायनिक सूत्र लिखिए।
उत्तर:
सल्फाईड अयस्क : कॉपर पायराइट (CuFes2)
ऑक्साइड अयस्क : क्यूप्राइट (Cu2O)

प्रश्न 4.
प्रकृति में मुक्त अवस्था में पायी जाने वाली किन्हीं दो धातुओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
सोना (Au), प्लेटिनम (Pt).

प्रश्न 5.
भूपर्पटी में सर्वाधिक मात्रा में उपस्थित धातु का नाम लिखिए।
उत्तर:
ऐलुमीनियम (A) (भारानुसार 7.5%].

प्रश्न 6.
जिंक के सल्फाइड अयस्क का नाम एवं रासायनिक सूत्र लिखिए।
उत्तर:
जिंकं ब्लैण्ड (ZnS).

प्रश्न 7.
खनिज व अयस्क में क्या अन्तर होता है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
सभी अयस्क (Ores) खनिज (Minerals) होते हैं लेकिन सभी खनिज अयस्क नहीं होते हैं।

प्रश्न 8.
ढलवाँ लोहा तथा पिटवाँ लोहा में कार्बन की प्रतिशतता कितनी होती है?
उत्तर:
ढलवाँ लोहा में कार्बन 3% तथा पिटवाँ लोहा में कार्बन 0.2 से 0.5% उपस्थित होता है।

प्रश्न 9.
जर्मन सिल्वर का संघटन बताइए।
उत्तर:
जर्मन सिल्वर : Cu (50-61.6%,) Z(19-17.2%), Ni (30-21%.)

प्रश्न 10.
ऐनोड पंक किसे कहते हैं?
उत्तर:
धातुओं के शोधन की विद्युत् अपघटनी विधि में विद्युत् अपघटन के कारण ऐनोड से धातु घुलकर शुद्ध कैथोड पर जमा हो जाती है तथा अशुद्धियाँ विलयन में पृथक् होकर नीचे बैठ जाती हैं। जिसे ऐनोड पंक (Anode Punk) कहते हैं।

प्रश्न 11.
फेन प्लवन विधि में संग्राही एवं फेन स्थायीकारक के नाम व भूमिका दीजिए।
उत्तर:
संग्राही पदार्थ सल्फाइड कणों को जल प्रतिकर्षी बनाते हैं। जिससे ये कण जल पर तैर सकें। उदाहरणार्थ-सोडियम ऐथिल जैन्थेट स्थायीकारक झाग या फेन को स्थायित्व प्रदान करते हैं। जैसे-ऐनिलीन, क्रिसॉल।

प्रश्न 12.
बॉक्साइट अयस्क में उपस्थित किन्हीं दो अशुद्धियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
Fe2O3 तथा SiO2.

प्रश्न 13.
निकिल धातु के शोधन में मॉण्ड प्रक्रम से सम्बन्धित रासायनिक अभिक्रियाएँ लिखिए।
उत्तर:
RBSE Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 6 तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम

प्रश्न 14.
सिल्वर एवं गोल्ड का विद्युत् लेपन करने पर इनके कौन से संकुल आयनों का प्रयोग करते हैं?
उत्तर:
सिल्वर एवं गोल्ड के विद्युत् लेपन में एक संयोजी सायनाइड संकुल M[Au(CN)2] तथा त्रिसंयोजक सायनाइड संकुलों M[Au(CN)4] का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 15.
झाग प्लवन विधि में अवनमक की क्या भूमिका है?
उत्तर:
झाग प्लवन विधि में अवनमक (Depressants) झाग को कम करने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। जैसे-सोडियम सायनाइड (NaCN) तथा सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3)।

प्रश्न 16.
नीलम और रूबी रत्न प्रस्तर किसके अशुद्ध रूप हैं?
उत्तर:
नीलम – Al2O2 में Co की अशुद्धि
रूबी – Al2O3 में Cr की अशुद्धि
अर्थात् नीलम और रूबी रत्न Al2O3 के अशुद्ध रूप हैं।

प्रश्न 17.
धातु के विद्युत् शोधन में ऐनोड एवं कैथोड किस धातु के बने होते हैं?
उत्तर:
ऐनोड : अशुद्ध धातु
कैथोड : शुद्ध धातु

प्रश्न 18.
ऐलुमिनो थर्माइट में क्रोमियम ऑक्साइड के अपचयन की रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर:
Cr2O3 + 2Al→ 2Cr + Al2O3.

प्रश्न 19.
अम्लीय एवं क्षारीय गालक के एक-एक उदाहरण का नाम व सूत्र लिखिए।
उत्तर:
अम्लीय गालक : सिलिका (SiO2)
क्षारीय गालक : कैल्शियम ऑक्साइड (CaO)

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 6 तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
Al धातु के निष्कर्षण में निक्षालन (Leaching) का क्या महत्व है?
उत्तर:
बॉक्साइट ऐलुमीनियम का प्रमुख अयस्क है। इसमें प्रायः सिलिका (SiO2), आयरन ऑक्साइड (Fe2O3) तथा टाइटेनियम ऑक्साइड (TiO2) की अशुद्धियाँ पायी जाती हैं। इन अशुद्धियों को निक्षालन (Leaching) द्वारा दूर किया जा सकता है। निक्षालन के दौरान चूर्णित बॉक्साइट अयस्क को सान्द्र NaOH विलयन के साथ 473-523K पर गर्म करते हैं। ऐलुमिना सोडियम मेटा ऐलुमिनेट के रूप में तथा सिलिका सोडियम सिलिकेट के रूप में घुल जाते हैं तथा Fe2O3, TiO2 और अन्य अशुद्धियाँ छूट जाती हैं।
अत: ऐलुमिनियम के निष्कर्षण में निक्षालन द्वारा बॉक्साइट अयस्क से शुद्ध ऐलुमिना प्राप्त की जाती है।

RBSE Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 6 तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम

प्रश्न 2.
निस्तापन एवं भर्जन को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
सान्द्रित अयस्कों से मुक्त अवस्था में अशोधित या अशुद्ध धातु प्राप्त करने का प्रक्रम निष्कर्षण (Extraction) कहलाता है।
यह प्रक्रम निम्न दो पदों में सम्पन्न होता है –
(क) सान्द्रित अयस्क को धातु ऑक्साइड में परिवर्तित करना।
(ख) धातु ऑक्साइड का अशुद्ध धातु में अपचयन।

प्रश्न 3.
ऐलुमीनियम के निष्कर्षण के लिए विद्युत् अपघटनी सेल का नामांकित चित्र बनाइए तथा इसमें होने वाली सम्पूर्ण अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर:
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प्रश्न 4.
विद्युत् अपघटनी विधि से ताँबे का शोधन कैसे किया जाता है। आवश्यक समीकरण की सहायता से समझाइए।
उत्तर:
कृपया अनुच्छेद 6.3.3 में धातु का शोधन या परिष्करण शीर्षक के अन्तर्गत विद्युत् अपघटनी शोधन विधि का अध्ययन करें।

प्रश्न 5.
ऐलिंघम आरेख की सहायता से हेमेटाइट अयस्क के अपचयन में ऊष्मागतिकी सिद्धान्त की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
ऐलिंघम आरेख की सहायता से हेमेटाइट के अपचयन की व्याख्या (Explanation for the Reduction of Haematite with the Help of Elingham Diagram) – आयरने के निष्कर्षण में कोक का प्रयोग होता है अर्थात् वात्या भट्टी में फेरिक ऑक्साइड का अपचयन कोक द्वारा होता है। एलिंघम आलेख से विदित होता है कि कार्बन तथा आयरन के ऑक्साइड का निर्माण लगभग 1073 K पर होता है।
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अपचयन की व्याख्या हम निम्न प्रकार कर सकते हैं –

1. ऐलिंघम आरेख से यह जानकारी मिलती है कि Fe2O3 के निर्माण की मानक गिब्स ऊर्जा (∆G°), CO से CO2 के निर्माण के लिये आवश्यक मानक गिब्स ऊर्जा (∆G°) अधिक है। इसका अर्थ यह है कि 1073 K से कम ताप पर हेमेटाइट Fe2O3 कार्बन मोनो-ऑक्साइड से (CO) अपचयित हो जायेगा।
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2. 1073 K के ऊपर Fe2O5 के निर्माण की मानक मुक्त ऊर्जा, कोक से CO के निर्माण के लिये मानक मुक्त ऊर्जा (∆G°) के मान से अधिक है, अतः 1073 K ताप से अधिक ताप पर हेमेटाइट (Fe2O3) कोक के द्वारा अपचयित होता है।
Fe3O3(s) + 3C(s) → 2Fe(s) + 3CO(g)
कोक
अत: वात्या भट्टी में Fe2O3 का अपचयन कोक के द्वारा हो जाता है, जब तापमान 1073 K से अधिक हो यदि तापमान 1073 K से कम हो तो Fe2O3, CO के द्वारा अपचयित होता है।

प्रश्न 6.
झाग प्लवन विधि में निम्न पदों के उदाहरण दीजिए –

  1. झाग कारक
  2. प्लवनकारक/संग्राही
  3. फेन स्थायीकारक
  4. सक्रियकारक
  5. अवनमक (डिप्रेशर)

उत्तर:

  1. झागकारक (Frothing agents) – चीड़ का तेल, यूकेलिप्टस का तेल, कपूर का तेल, क्रेओसोलिक अम्ल।
  2. प्वलनकारक/संग्राहक (Floating Agents/Collectors) – सोडियम ऐथिल जेन्थेट।
  3. फेन स्थायीकारक (Forth Stabilisers) – क्रीसॉल, ऐनिलीन।
  4. सक्रियकारक (Activators) – सोडियम सल्फाइड तथा कॉपर सल्फेट।
  5. अवनमक (Depressants) – सोडियम सायनाइड, सोडियम कार्बोनेट।

प्रश्न 7.
ऐलुमीनियम के धातुकर्म में निम्न की उपयोगिता बताइए –
(i) क्रायोलाइट
(ii) कार्बन या कोक चूर्ण
(iii) ग्रेफाइट छड़।
उत्तर:
(i) ऐलुमीनियम निष्कर्षण में क्रायोलाइट की भूमिका
(a) यह ऐलुमिना के गलनांक को कम कर देता है।
(b) यह चालकता में वृद्धि करता है।

(ii) कार्बन या कोक चूर्ण की भूमिका
(a) विकिरण द्वारा होने वाली ऊष्मीय हानि (Heat loss) को रोकता है।
(b) कार्बन ऐनोड की खपत कम करता है।

(iii) ग्रेफाइट छड़ की भूमिका
(a) ग्रेफाइट छड़ ऐनोड का कार्य करती है।
(b) ऐलुमीनियम के अपचयन में सहायक होती है।

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 6 तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धान्त एवं प्रक्रम निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
हॉल हेराल्ट विधि द्वारा बॉक्साइट अयस्क से ऐलुमिना प्राप्त करने में होने वाली रासायनिक अभिक्रियाएँ लिखिए। इसके विद्युत् अपघटनीय सेल का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
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प्रश्न 2.
निम्न के उदाहरण देते हुए संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए –
(i) उच्चतापधातुकर्म (Pyrometallurgy)
(ii) विद्युत्धातुकर्म (Electronmetallurgy)
(iii) जलधातुकर्म (Hydrometallurgy)
उत्तर:
(i) उच्चतापधातुकर्म (Pyrometallurgy) – धातु ऑक्साइड को अपचायक के साथ तीव्र गर्म करके धातु में परिवर्तन की प्रक्रिया को उच्च ताप धातुकर्म (Pyrometallurgy) कहते हैं। उदाहरणार्थ- आयरन, कॉपर ऑक्साइडों का अपचयन वात्या भट्टी में उच्च ताप पर किया जाता है।
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(ii) विद्युत्धातुकर्म (Electrometallurgy) – अधिक क्रियाशील धातुओं के गलित लवण का विद्युत् अपघटन द्वारा अपचयन की प्रक्रिया विद्युत् धातुकर्म (Electrometallurgy) कहलाती है। उदाहरणार्थ-Na, Mg, Al आदि को विद्युत् धातुकर्म से प्राप्त किया जाता है।
(iii) जलधातुकर्म (Hydrometallurgy) – इसमें किसी अशुद्ध धातु अयस्क को धातु के विलेय संकुल में परिवर्तित कराते हैं। प्रबल अपचायक धातु से विस्थापन द्वारा शुद्ध प्राप्त करने की प्रक्रिया जल धातुकर्म (Hydrometallurgy) कहलाती है। इस विधि से Ag तथा Au धातुओं का निष्कर्षण किया जाता है।

प्रश्न 3.
कॉपर ऑक्साइड के अपचयन में सिलिका का अस्तर क्यों लगाया जाता है? इसमें होने वाली अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए। परिवर्तक का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
सिलिका का अस्तर गालक (flux) का कार्य करता है, जो FeO की अशुद्धियों को धातुमल (slag) में परिवर्तित कर देता है।
CaO + SiO2 + CaSiO3
FeO + SiO2 → FeSiO3
अशुद्धि  गालक  धातुमल
बेसेमर परिवर्तक में निम्नलिखित अभिक्रियाएँ होती हैं –
2Cu2S + 3O2 → 2Cu2O + 2SO2
Cu2S + 2Cu2O → 6Cu + SO2
फफोलेदार कॉपर
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प्रश्न 4.
(a) सिल्वर के धातुकर्म में सिल्वर धातु के निक्षालन के लिए वायु की उपस्थिति में किस विलयन का उपयोग किया जाता है? इसमें होने वाली अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।
(b) आयरन ऑक्साइड से आयरन प्राप्त करने के लिए वात्या भट्टी में कम ताप परास (ताप < 1073K) पर C एवं CO में से कौन अच्छा अपचायक होता है? क्यों?
उत्तर:
(a) सिल्वर के धातुकर्म में सिल्वर धातु के निक्षालन (Leaching) में सोडियम सायनाइड (NaCN) विलयन का प्रयोग किया जाता है। सिल्वर इसके साथ सायनाइड संकर लवण बनाती है। सम्बन्धित अभिक्रियाएँ निम्नवत् हैं –
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(b) निम्न ताप परास पर C तथा CO दोनों अपचायक का कार्य करते हैं। लेकिन C की तुलना में CO शीघ्रता से CO2 में ऑक्सीकृत हो जाती है। अत: निम्न ताप (ताप < 1073K) पर CO कार्बन की तुलना में श्रेष्ठ अपचायक है।

प्रश्न 5.
कॉपर अयस्क (या रद्दी कॉपर) जिसमें कॉपर की मात्रा कम होती है के निक्षालन से कॉपर निष्कर्षण हेतु किस अपचायक का उपयोग किया जाता है? समझाइए।
उत्तर:
निम्न कोटि कॉपर में कॉपर की प्रतिशतता. बहुत कम होती। है। इसका निक्षालन वायु की उपस्थिति में अम्लों से कराते हैं। इससे कॉपर Cu2+ के रूप में विलयन में चला जाता है।

2Cu(s) + 2H2SO4(aq) + O2(g) → 2CuSO4(aq) + 2H2O(l)
या Cu(s) + 2H+ (aq) + \frac { 1 }{ 2 } O2(g) → Cu2+ (aq) + H2O(l)

प्रश्न 6.
धातुओं के शोधन में निम्न विधियों के सिद्धान्तों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए –
(i) विद्युत् अपघटनी शोधन
(ii) वॉन-आर्केल विधि
(iii) वर्णलेखिकी
(iv) द्रवीकरण (या द्रव गलन परिष्करण)।
उत्तर:
निष्कर्षण की विभिन्न विधियों से प्राप्त धातु अशुद्ध (Impure) होती है। इसे कच्ची धातु (Crude Metal) कहते हैं। इसमें निम्न अशुद्धियाँ मिश्रित होती हैं जिन्हें दूर किया जाना आवश्यक होता है –

  • धातुओं के अन अपचयित ऑक्साइड
  • धातुमल तथा गालक
  • अन्य अवांछित धातुएँ
  • अधातुएँ जैसे – c, Si, P, S, As आदि।

प्रश्न 7.
लोहे के धातुकर्म में वात्या भट्टी के विभिन्न क्षेत्रों में होने वाली अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए। वात्या भट्टी का नामांकित चित्र बनाइये।
उत्तर:
(क) आयरन (लोहे) का इसके ऑक्साइड अयस्क से निष्कर्षण (Extraction of Iron from its Oxide Ore)
आयरन ऐलुमीनियम के पश्चात् भूपर्पटी में सर्वाधिक पायी जाने वाली धातु है। इसकी उपलब्धता 5.1% है।
(i) अयस्क (Ores) : आयरन के कुछ प्रमुख अयस्क निम्नवत् हैं –
हेमेटाइट – Fe2O3 (मुख्य)
लिमोनाइट – 2Fe2O3. 3H2O
आयरन पायराइट – Fes2
सिडेराइट – FeCO3
मैग्नेटाइट – Fe3O4
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प्रश्न 8.
झाग प्लवन विधि से किन धातु अयस्कों का सान्द्रण किया जाता है? इस विधि का संक्षिप्त वर्णन कीजिए एवं नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
अयस्क का सान्दण या अयस्क प्रसाधन (Concentration of Ores or Benefication of Ores or Ore Dressing)
अयस्क से गैंग को पृथक् करना अयस्क प्रसाधन या अयस्क का सान्द्रण कहलाता है। सान्द्रण की विधियाँ अयस्क में उपस्थित गैंग की प्रकृति पर निर्भर करती हैं। कुछ विधियाँ निम्न हैं –
(i) हस्त चयन विधि (Hand Picking Method)-यह सबसे पुरानी विधि है। इसमें अयस्कों के कणों को हाथ के द्वारा चुनकर पृथक् करते हैं। अयस्क एवं अशुद्धि के कणों की आकृति तथा आकार में अन्तर होने के कारण हस्त चयन द्वारा अयस्क को सुगमता से पृथक कर सकते हैं।

(ii) घनत्वीय पृथक्करण विधि या गुरुत्व पृथक्करण विधि (Gravity Separation Method)-यह विधि अयस्क तथा उसमें उपस्थित कणों के आपेक्षिक घनत्वों के अन्तर के आधार पर कार्य करती है। इस विधि में अयस्क को कूटकर तथा पीसकर छान लेते हैं और बड़े उथले। टैंकों में भरकर जल की तेज धारा से धोते हैं। अयस्क के भारी कण नीचे बैठ जाते हैं और हल्के गैंग कण जल के साथ बह जाते हैं। इसे लेवीगेशन विधि (Levigation method) भी कहा जाता है। प्रायः ऑक्साइड का सान्द्रण इसी विधि से करते हैं। उदाहरण-Al2O3, SnO2, Fe3O4 आदि, इस विधि में एक विशेष रूप से निर्मित विलफ्ले टेबल (Wilfley table) का भी प्रयोग कर सकते हैं। इस विधि से ऐलुमीनियम, टिन तथा लोहे के ऑक्साइडों के साथ-साथ सिल्वर व गोल्ड के ऑक्साइड भी सान्द्रित किये जाते हैं।
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प्रश्न 9.
कॉपर अयस्क के धातुकर्म में परावर्तनी भट्टी में होने वाली अभिक्रियाओं के समीकरण दीजिए। परावर्तनी भट्टी का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
कॉपर अयस्क के धातुकर्म में परावर्तनी भट्टी में निम्नलिखित अभिक्रियाएँ होती हैं –
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प्रश्न 10.
निम्न पर टिप्पणी लिखिए –
(i) आधात्री (गैंग)/मैट्रिक्स
(ii) गालक
(iii) धातुमल।
उत्तर:
(i)आधात्री (गैंग)/मैट्रिक्स (Gangue or Matrix)- सामान्यतः खनिजों में मिट्टी, कंकड़, पत्थर आदि व्यर्थ अपद्रव्य (Impurities) मिले रहते हैं। इन्हें गैंग या आधात्री (Gangue or Matrix) कहते हैं।

(ii) गालक (Flux) – निस्तापन/भर्जन के पश्चात् कुछ अगलनीय या असंगलित अशुद्धियाँ जो अयस्क में शेष रह जाती हैं, जिन्हें आधात्री कहते हैं, को हटाने के लिए मिलाए जाने वाले पदार्थ गालक (flux) कहलाते हैं। उदाहरणार्थ –
अल्मीय गालक (Acidic flux) : SiO2
क्षारीय गालक (Basic flux) : CaO, MgO

(iii) धातुमल (Slag)-गालक अगलनीय अशुद्धियों को गलनीय पदार्थ में बदल देते हैं। ये गलनीय पदार्थ धातुमल (Slag) कहलाते हैं। ये सामान्यतः धातु सिलिकेट या फॉस्फेट के रूप में गलनीय कीट होते हैं। जिन्हें समय-समय पर पृथक् कर लिया जाता है।
आधात्री (Gangue) + गालक (flux) → धातुमल (Slag) (गलनीय कीट)

प्रश्न 11.
निम्नलिखित विधियों द्वारा धातु शोधन का संक्षिप्त वर्णन कीजिए –
(i) दण्ड विलोडन
(ii) क्षेत्र (जोन) परिशोधन
उत्तर:
निष्कर्षण की विभिन्न विधियों से प्राप्त धातु अशुद्ध (Impure) होती है। इसे कच्ची धातु (Crude Metal) कहते हैं। इसमें निम्न अशुद्धियाँ मिश्रित होती हैं जिन्हें दूर किया जाना आवश्यक होता है –

  • धातुओं के अन अपचयित ऑक्साइड
  • धातुमल तथा गालक
  • अन्य अवांछित धातुएँ
  • अधातुएँ जैसे-c, Si, P, S, As आदि।

धातु एवं इनमें उपस्थित अशुद्धियों की प्रकृति/गुण के आधार पर इनके शोधन की कई विधियाँ प्रयोग में लायी जाती हैं। जिनमें से कुछ निम्नवत् हैं –

(क) आसवन (Disitillation)
(ख) द्रवीकरण (या गलन परिष्करण) (Liquification)
(ग) दण्ड विलोडन (Polling)
(घ) विद्युत् अपघटनी शोधन (Electrolytic Refining)
(च) क्षेत्र परिशोधन (Zone Refining)
(छ) वाष्प प्रावस्था परिष्करण (Vapour Phase Refining)
(i) मॉण्ड प्रक्रम (Mond’s Process)
(ii) वॉन आर्केल विधि (Van Arckel Method)
(ज) वर्णलेखिकी (क्रोमेटोग्राफी) (Chromatography) विधि

प्रश्न 12.
Cr2O3 निर्माण के लिए ∆G° का मान -540kJmol-1 है। तथा Al2O3 निर्माण के लिए ∆C° का मान – 827 kJ mol-1 है। क्या Al धातु द्वारा Cr2O5 का अपचयन सम्भव है?
उत्तर:
दोनों समीकरण निम्न प्रकार हैं –
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प्रश्न 13.
निम्न अभिक्रियाओं को पूर्ण संतुलित कीजिए-
(i) 2Cu2O + Cu2S →………. + ……
(ii) Ag2S +NaCN →……… + ………
(iii) Al2O3 + NaOH →……… + ………
(iv) CuFeS2 + O2 →……… + ………. + SO2
(v) Cu2S + ………. → Cu + SO2
उत्तर
(i) 2Cu2O + Cu2S → 6Cu + SO2
(ii) Ag2S + 4NaCN → 2Na [Ag(CN)2] + Na2SO4
(iii) Al2O3 + 2NaOH → 2NaAlO2 + H2O
(iv) 2CuFeS2 + O2 → Cu2S + 2Fes + SO2
(v) { Cu }_{ 2 }s+2{ cu }_{ 2 }O\underrightarrow { \triangle } 6Cu+{ SO }_{ 2 }