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सामाजिक विज्ञान (Social Science)हिंदी माध्यम2026-27

RBSE Class 10 SST Chapter 1 Solutions in Hindi — [इतिहास] यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय | पासबुक हल, नोट्स

📅 अंतिम अपडेट: 2026-09-10📖 RBSE/NCERT Solutions
भाग 1 — समाधान (इतिहास पाठ 1)

📖 1. समाधान: पाठगत एवं पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नोत्तर

राजस्थान बोर्ड कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान (इतिहास) — सभी पाठगत प्रश्नों एवं पाठ्यपुस्तक अभ्यास के संपूर्ण सटीक उत्तर।

पाठगत प्रश्न

गतिविधि—पृष्ठ 3

प्रश्न—आपकी राय में (पाठ्यपुस्तक का) चित्र-1 किस प्रकार एक कल्पनादर्शी दृष्टि को प्रतिबिम्बित करता है?

उत्तर—यह चित्र सन् 1848 में एक फ्रांसीसी कलाकार फ्रेडरिक सॉरयू द्वारा निर्मित चित्र है। इसमें उसने अपने सपनों के एक संसार की कल्पना की जो विश्वव्यापी 'जनतांत्रिक और सामाजिक गणतंत्रों' से मिलकर बना था। इस चित्र में यूरोप और अमेरिका के लोग दिखाए गए हैं जो प्रजातांत्रिक एवं सामाजिक गणतंत्र बनाने की दिशा में अग्रसर होंगे। इसमें सभी लोग एक लम्बी पंक्ति में स्वतन्त्रता की मूर्ति की वन्दना करते हुए दिखाए गए हैं। चित्रकार की कल्पना में विश्व के लोग अलग राष्ट्रों के समूहों में बँटे हुए हैं जिनकी पहचान उनके वस्त्रों तथा राष्ट्रीय वेशभूषा से होती है। ऊपर स्वर्ग से ईसा मसीह, संत और फरिश्ते इस दृश्य पर अपनी नजरें जमाए हुए हैं। यह चित्र दुनिया के राष्ट्रों के बीच भाईचारे का प्रतीक है। इस प्रकार यह चित्र चित्रकार की कल्पनादर्शी दृष्टि को प्रतिबिम्बित करता है। इस कल्पनादर्शी स्थिति के साकार होने की सम्भावना अत्यन्त कम है।

चर्चा करें—पृष्ठ 4

प्रश्न—रेनन् की समझ के अनुसार एक राष्ट्र की विशेषताओं का संक्षिप्त विवरण दें। उसके मतानुसार राष्ट्र क्यों महत्त्वपूर्ण है?

उत्तर—रेनन् की समझ के अनुसार एक राष्ट्र की निम्नलिखित विशेषताएँ होती हैं—

(1) एक राष्ट्र लम्बे प्रयासों, त्याग और निष्ठा का चरम बिन्दु होता है।

(2) इसका आधार वीरता से परिपूर्ण अतीत, महापुरुषों के नाम तथा प्राचीन गौरव होते हैं।

(3) एक जन-समूह के राष्ट्र होने की आवश्यक शर्ते हैं—अतीत में समान गौरव का होना, वर्तमान में एक समान इच्छा, संकल्प का होना, साथ मिलकर महान कार्य करना और भविष्य में इसी प्रकार के कार्य करने की इच्छा रखना।

(4) राष्ट्र एक बड़ी और व्यापक एकता है। उसका अस्तित्व प्रतिदिन होने वाला जनमत संग्रह है।

(5) राष्ट्र की किसी देश के विलय या उस पर उसकी इच्छा के विरुद्ध आधिपत्य स्थापित होने में कोई रुचि नहीं होती।

(6) यह एक सामाजिक पूँजी है जिस पर एक राष्ट्रीय विचार आधारित किया जाता है।

(7) प्रांत राष्ट्र के निवासी हैं, अगर सलाह लिए जाने का किसी का अधिकार है, तो वह निवासी ही है।

राष्ट्र का महत्त्व—रेनन् के अनुसार राष्ट्रों का होना आवश्यक है क्योंकि उनका होना स्वतन्त्रता की पारण्टी है। यदि संसार में केवल एक कानून और उसका केवल एक स्वामी हो तो स्वतन्त्रता का लोप हो जाएगा।

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सामाजिक विज्ञान (इतिहास) कक्षा X

चर्चा करें—पृष्ठ 10

प्रश्न—उन राजनीतिक उद्देश्यों का विवरण दें जिन्हें 'आर्थिक कदमों' द्वारा हासिल करने की उम्मीद लिस्ट को है।

उत्तर—जर्मनी के ट्यूबिंगन विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर फ्रेडरिख लिस्ट की मान्यता थी कि ज़ॉलवेराइन नामक शुल्क संघ जर्मनी के एकीकरण में सहायक है। उसके अनुसार ज़ॉलवेराइन का लक्ष्य जर्मन लोगों को आर्थिक रूप में एक राष्ट्र के रूप में बाँध देना है। यह शुल्क संघ जर्मन राष्ट्र की आर्थिक अवस्था जितना बाह्य रूप से उसके हितों की रक्षा करके उसे सुदृढ़ बनाएगा, उतना ही आन्तरिक उत्पादन को बढ़ाकर भी यही कार्य करेगा। उसे प्रान्तीय हितों को आपस में जोड़कर राष्ट्रीय भावना को जगाना और उठाना चाहिए। लिस्ट का विचार था कि एक मुक्त आर्थिक व्यवस्था द्वारा राष्ट्रीय भावनाओं को जागृत किया जा सकता है।

चर्चा करें—पृष्ठ 11

प्रश्न—व्यंग्यकार क्या दर्शाने का प्रयास कर रहा है? (चित्र 6)

उत्तर—1820 के आस-पास व्यंग्यकार द्वारा बनाया गया एक अनाम व्यंग्य चित्र 'चिंतकों का क्लब' है। इसमें चिंतक मुँह पर पट्टी बाँधे बैठे हुए हैं। यहाँ व्यंग्यकार यह दर्शाने का प्रयास कर रहा है कि सन् 1815 में स्थापित रूढ़िवादी शासन व्यवस्थाएँ पूर्ण निरंकुश थीं। कोई भी उनके खिलाफ नहीं बोल सकता था। वे आलोचना और असहमति बर्दाश्त नहीं करती थीं। वे उन सभी गतिविधियों को दबा देती थीं जो निरंकुश सरकारों की वैधता पर सवाल उठाती थीं। ज्यादातर सरकारों ने सेंसरशिप के नियम बनाये थे जिनके द्वारा अखबारों, किताबों, नाटकों तथा गीतों में व्यक्त बातों पर नियंत्रण लगाया गया था। इस प्रकार व्यंग्यकार दर्शाता है कि चिंतकों का क्लब तो था लेकिन उनके मुँह पर पट्टी बाँधी गयी थी।

चर्चा करें—पृष्ठ 15

प्रश्न—राष्ट्रीय पहचान के निर्मित होने में भाषा और लोक परम्पराओं के महत्त्व की चर्चा करें।

उत्तर—राष्ट्रीय पहचान के निर्माण में भाषा और लोक परम्पराओं का महत्त्व निम्नलिखित है—

(i) किसी क्षेत्र विशेष या देश की भाषा और लोक परम्पराएँ लोगों द्वारा एक साथ व्यतीत किए गए अतीत व सामूहिक एकता से जीवन-यापन की जानकारी देती हैं।

(ii) भाषा और लोक परम्पराएँ लोगों को सांस्कृतिक रूप से समान होने की भावना प्रदान करती हैं।

(iii) भाषा व लोक परम्पराएँ लोगों को एकता एवं गर्व के धागे से बाँधती हैं।

चर्चा करें—पृष्ठ 16

प्रश्न—सिलेसियाई बुनकरों के विद्रोह के कारणों का वर्णन करें। पत्रकार के नजरिये पर टिप्पणी करें।

उत्तर—सिलेसियाई बुनकरों ने ठेकेदारों के विरुद्ध विद्रोह कर दिया, जिसके निम्नलिखित कारण थे—

(1) सिलेसिया के बुनकर ठेकेदारों से कच्चा माल लेकर उनके लिए कपड़े तैयार करते थे, परन्तु ठेकेदार बुनकरों को निर्मित कपड़े के दाम बहुत कम देते थे।

(2) बुनकरों की दशा शोचनीय थी। बेरोजगारी के कारण काम की माँग बढ़ने लगी। इस स्थिति का लाभ उठाकर ठेकेदारों ने निर्मित वस्तुओं की कीमतें और गिरा दीं।

पत्रकार का नजरिया—बुनकरों के प्रति पत्रकार का नजरिया सहानुभूतिपूर्ण था। बुनकरों की शोचनीय दशा देखकर पत्रकार दुःखी था। अपनी शोचनीय आर्थिक स्थिति से मुक्ति पाने के लिए ही बुनकरों ने ठेकेदारों के विरुद्ध विद्रोह किया था।

चर्चा करें—पृष्ठ 18

प्रश्न—ऊपर उद्धृत (स्रोत-ग) तीन लेखकों द्वारा महिलाओं के अधिकार के प्रश्न पर व्यक्त विचारों की तुलना करें। उनसे उदारवादी विचारधारा के बारे में क्या स्पष्ट होता है?

उत्तर—(1) एक उदारवादी राजनीतिज्ञ कार्ल वेल्कर ने पुरुषों एवं महिलाओं का कार्यक्षेत्र अलग-अलग बतलाया तथा कहा कि लिंगों में बराबरी परिवार के मेल-मिलाप तथा गरिमा को खतरे में डाल देगी। उदारवादी होने के बावजूद वे महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार देने के पक्ष में नहीं थे।

(2) लुइजे ऑटो-पीटर्स एक राजनीतिक कार्यकर्त्ता थी जिसने महिलाओं की पत्रिका और बाद में एक नारीवादी राजनीतिक संगठन की स्थापना की। उसके अनुसार पुरुषों के अथक प्रयास केवल पुरुषों के लाभ के लिए हैं, समस्त मानव

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जाति के लाभ के लिए नहीं। परन्तु स्वतन्त्रता को विभाजित नहीं किया जा सकता। अतः स्वतन्त्र पुरुषों को परतन्त्रता से घिरे रहना स्वीकार नहीं होना चाहिए। इस प्रकार उन्होंने महिलाओं की स्वतंत्रता की वकालत की।

(3) एक अन्य लेखक के अनुसार महिलाओं को राजनीतिक अधिकारों से वंचित रखना अनुचित और अविवेकपूर्ण है। यह लज्जा की बात है कि एक पुरुष होने के नाते एक सबसे मूर्ख पशु-पालक को मत देने का अधिकार है, जबकि अत्यन्त योग्य महिलाएँ जो कि काफी सम्पत्ति की मालकिन हैं, मत देने के अधिकार से वंचित हैं।

तीनों लेखकों के विचारों से स्पष्ट होता है कि उनमें उदारवादी विचारधारा के प्रश्न पर बड़ा मतभेद है। उदारवादी लेखक और चिंतक महिला अधिकारों के प्रश्न पर एकमत नहीं हैं।

गतिविधि—पृष्ठ 20

प्रश्न—इस व्यंग्य चित्र (चित्र 13-पृष्ठ 20) का वर्णन करें। इसमें बिस्मार्क और संसद के निर्वाचित डिप्टीज के बीच किस प्रकार का सम्बन्ध दिखाई देता है? यहाँ चित्रकार लोकतान्त्रिक प्रक्रियाओं की क्या व्याख्या करना चाहता है?

उत्तर—इस व्यंग्य चित्र में प्रशा के प्रधानमन्त्री बिस्मार्क को एक हंटर घुमाते हुए तथा संसद के सदस्यों को अपना बचाव करते हुए दिखाया गया है। अपने बचाव के लिए सभी प्रतिनिधि बिस्मार्क के लिए आदर प्रदर्शित करते हुए संसद में सिर झुकाए बैठे हैं।

यह व्यंग्य चित्र दर्शाता है कि बिस्मार्क जर्मन सांसदों के मस्तिष्कों पर शासन करता था। इस चित्र में कलाकार ने बिस्मार्क के जनतांत्रिक होने की व्यंग्यात्मक व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया है कि इसमें जनतंत्र नाममात्र के लिए ही अस्तित्व में है। यथार्थ में यह बिस्मार्क का एकतंत्र है। इस प्रकार बिस्मार्क की लोकतान्त्रिक प्रक्रियाओं में कोई आस्था नहीं थी। व्यंग्यकार ने इस चित्र के द्वारा बिस्मार्क के लोकतन्त्र का उपहास किया है।

गतिविधि—पृष्ठ 21

प्रश्न—पाठ्यपुस्तक के चित्र 14 (क) को देखें। क्या आप को लगता है कि इनमें से किसी भी क्षेत्र में रहने वाले खुद को इतालवी मानते होंगे?

पाठ्यपुस्तक के चित्र 14 (ख) की जाँच करें। कौनंसा क्षेत्र सबसे पहले एकीकृत इटली का हिस्सा बना? सबसे आखिर में कौनंसा क्षेत्र शामिल हुआ? किस साल सबसे ज्यादा राज्य एकीकृत इटली में शामिल हुए?

उत्तर—(क) इनमें से केवल सार्डीनिया क्षेत्र में रहने वाले लोग खुद को इतालवी मानते होंगे, क्योंकि उस समय केवल सार्डीनिया-पीडमॉण्ट में ही एक इतालवी राजवंश का शासन था।

(ख) (i) लोम्बार्डी का क्षेत्र सबसे पहले एकीकृत इटली का हिस्सा बना।

(ii) पेपल का क्षेत्र (रोम) सबसे बाद में एकीकृत इटली में शामिल हुआ।

(iii) 1860 ई. में सबसे ज्यादा राज्य एकीकृत इटली में शामिल हुए।

गतिविधि—पृष्ठ 22

प्रश्न—चित्रकार ने गैरीबाल्डी को सार्डीनिया-पीडमॉण्ट के राजा को जूते पहनाते दिखाया है। अब इटली के नक्शे को फिर देखो। यह व्यंग्य-चित्र (पाठ्यपुस्तक का चित्र 15) क्या कहने का प्रयास कर रहा है?

उत्तर—1860 ई. में गैरीबाल्डी ने अपने सशस्त्र स्वयंसेवकों को लेकर सिसली और नेपल्स पर आक्रमण किया और शीघ्र ही सिसली तथा नेपल्स पर अधिकार कर लिया। गैरीबाल्डी ने सिसली तथा नेपल्स के राज्य सार्डीनिया, पीडमॉण्ट के राजा विक्टर इमेनुएल द्वितीय को सौंप दिए। 1861 में विक्टर इमेनुएल द्वितीय को एकीकृत इटली का सम्राट घोषित किया गया।

इस व्यंग्य-चित्र से ज्ञात होता है कि गैरीबाल्डी के प्रयासों से ही सिसली तथा नेपल्स को एकीकृत इटली में शामिल किया जा सका था। इस चित्र से इटली के एकीकरण में गैरीबाल्डी के योगदान को दिखाया गया है।

गतिविधि—पृष्ठ 24

प्रश्न—बॉक्स 3 में दिए गए चार्ट की सहायता से वेइत की जर्मेनिया के गुणों को पहचानें और तस्वीर के प्रतीकात्मक अर्थ की व्याख्या करें। 1836 की एक पुरानी रूपकात्मक तस्वीर में वेइत ने काइजर के मुकुट को उस जगह चित्रित किया था जहाँ अब उन्होंने टूटी हुई बेड़ियाँ दिखाई हैं। इस बदलाव का महत्त्व स्पष्ट करें।

उत्तर—बॉक्स 3 में दिये गये चार्ट के अनुसार जर्मेनिया के गुण तथा उनका प्रतीकात्मक अर्थ अग्र प्रकार है—

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सामाजिक विज्ञान (इतिहास) कक्षा X 7

जर्मेनिया के गुण

प्रतीकात्मक अर्थ

टूटी हुई बेड़ियाँ

आजादी मिलना

बाज-छाप कवच

जर्मन साम्राज्य की प्रतीक-शक्ति

बलूत पत्तियों का मुकुट

बहादुरी

तलवार

मुकाबले की तैयारी

तलवार पर लिपटी जैतून की डाली

शांति की चाह

काला, लाल और सुनहरा तिरंगा

1848 में उदारवादी-राष्ट्रवादियों का झंडा, जिसे जर्मन राज्यों के ड्यूक्स ने प्रतिबंधित घोषित कर दिया।

उगते सूर्य की किरणें

एक नए युग का सूत्रपात

इस चित्र से ज्ञात होता है कि जर्मनी ने अपनी बहादुरी और सैन्य-शक्ति के बल पर आजादी प्राप्त की है। जर्मनी ने विदेशी शक्तियों—डेनमार्क, ऑस्ट्रिया तथा फ्रांस को अपनी उत्कृष्ट सैन्य-शक्ति के बल पर पराजित किया, जिसके फलस्वरूप एक नवीन जर्मन-साम्राज्य का उदय हुआ। इस प्रकार जर्मनी में एक नये युग का सूत्रपात हुआ।

1836 की पुरानी रूपकात्मक तस्वीर में वेइत ने काइजर के मुकुट को उस जगह चित्रित किया था जहां अब उन्होंने टूटी हुई बेड़ियाँ दिखाई हैं। इसका अर्थ है कि अब जर्मेनिया की बेड़ियाँ टूट गई हैं। वह आजाद हो गई है अर्थात् उसका एकीकरण हो गया है और उसने अपने मुकुट को सिर पर धारण कर लिया है और बेड़ियों को तोड़कर जमीन पर फेंक दिया है।

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गतिविधि-पृष्ठ 24

प्रश्न—बताएँ कि चित्र 18 (पाठ्यपुस्तक) में आपको क्या दिखाई पड़ रहा है? राष्ट्र के इस रूपकात्मक चित्रण में ह्यूबनर किन ऐतिहासिक घटनाओं की ओर संकेत कर रहे हैं?

उत्तर—चित्र 18 में जर्मन राष्ट्र की रूपक जर्मेनिया को निराश मुद्रा में लेटे हुए प्रदर्शित किया गया है। सन् 1850 में जूलियस ह्यूबनर द्वारा चित्रित इस चित्र में जर्मेनिया काइजर के मुकुट तथा छड़ी के समक्ष गिरी पड़ी है। जर्मन राष्ट्र के रूपक जर्मेनिया के इस रूपकात्मक चित्रण का अर्थ है कि सर्व-जर्मन नेशन एसेंबली, जो फ्रैंकफर्ट संसद के रूप में आयोजित हुई थी, असफल हो गई। चित्र में मुकुट और छड़ी इस बात के प्रतीक हैं कि फ्रैंकफर्ट संसद को सेना तथा राजशाही द्वारा भंग कर दिया गया।

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गतिविधि-पृष्ठ 25

प्रश्न—चित्र 10 को एक बार फिर देखें। कल्पना करें कि आप मार्च, 1848 में फ्रैंकफर्ट के नागरिक हैं और संसद की कार्यवाही के समय वहीं मौजूद हैं। यदि आप हाल ऑफ डेप्यूटीज में बैठे हुए पुरुष होते तो दीवार पर लगे जर्मेनिया के बैनर को देखकर क्या महसूस करते और अगर आप हाल ऑफ डेप्यूटीज में बैठी महिला होतीं तो इस चित्र को देखकर क्या महसूस करतीं? दोनों भाव लिखें।

उत्तर—यदि मैं मार्च, 1848 में फ्रैंकफर्ट का नागरिक होता/होती—

(i) यदि मैं हाल ऑफ डेप्यूटीज में बैठा हुआ पुरुष होता, तो जर्मेनिया के बैनर को देखकर यह महसूस करता कि अब विदेशी शक्तियों के प्रभुत्व से मुक्ति पाने का समय आ गया है।

(ii) यदि मैं हाल ऑफ डेप्यूटीज में बैठी महिला होती तो जर्मेनिया के इस चित्र को देखकर महसूस करती कि जर्मनी के एकीकरण के आन्दोलन में महिलाओं को राजनीतिक अधिकारों से वंचित रखने तथा उन्हें एसेम्बली के चुनाव में मताधिकार से वंचित रखने से जर्मनी के एकीकरण के आन्दोलन को आघात पहुँचेगा और उदारवादी-राष्ट्रवादी विचारधारा को असफलता का सामना करना पड़ेगा।

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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

संक्षेप में लिखें—

प्रश्न 1. निम्नलिखित पर टिप्पणियाँ लिखें—

(क) जूसेपे मेत्सिनी

(ख) काउंट कैमिलो दे कावूर

(ग) यूनानी स्वतन्त्रता युद्ध

(घ) फ्रैंकफर्ट संसद

(ङ) राष्ट्रवादी संघर्षों में महिलाओं की भूमिका।

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उत्तर—

( क ) ज्यूसेपे मेत्सिनी—ज्यूसेपे मेत्सिनी इटली का एक महान क्रान्तिकारी था। उसका जन्म 1805 ई. में जेनोआ में हुआ था। देशभक्ति की भावना से प्रेरित होकर वह 'कार्बोनरी' नामक एक गुप्त क्रान्तिकारी संगठन का सदस्य बन गया और क्रान्तिकारी गतिविधियों में भाग लेने लगा। 24 वर्ष की आयु में लिगुरिया में क्रान्ति करने के कारण उसे बहिष्कृत कर दिया गया। इसके पश्चात् उसने 1831 ई. में मार्सेई में 'यंग इटली' नामक संगठन की स्थापना की और 1833 ई. में उसने बर्न में 'यंग यूरोप' नामक संगठन स्थापित किया। जिसके सदस्य पोलैण्ड, फ्रांस, इटली और जर्मन राज्यों में समान विचार रखने वाले युवा थे।

मेत्सिनी का विश्वास था कि ईश्वर की इच्छा के अनुसार राष्ट्र ही मनुष्यों की प्राकृतिक इकाई थी। अतः इटली छोटे-छोटे राज्यों और प्रदेशों में विभाजित नहीं रह सकता था। इन राज्यों को संगठित कर एक एकीकृत इटली राष्ट्र एवं गणतन्त्र का निर्माण करना आवश्यक था। मेत्सिनी के अनुसार केवल एकीकरण ही इटली की मुक्ति का आधार हो सकता था। मेत्सिनी ने राजतन्त्र का घोर विरोध किया और प्रजातान्त्रिक गणतन्त्र की स्थापना पर बल देकर रूढ़िवादियों और अनुदारवादियों को परास्त कर दिया।

( ख ) काउण्ट कैमिलो दे कावूर—कावूर सार्डीनिया-पीडमॉण्ट राज्य का प्रधानमन्त्री था। उसने इटली के राज्यों को एकीकृत करने वाले आन्दोलन का नेतृत्व किया। वह न तो एक क्रान्तिकारी था और न ही जनतन्त्र में विश्वास करता था। वह इतालवी भाषा से अच्छी फ्रांसीसी भाषा बोलता था। उसके प्रयत्नों से ही फ्रांस और सार्डीनिया-पीडमॉण्ट के बीच एक कूटनैतिक सन्धि हुई थी। इस सन्धि के अनुसार फ्रांस ने आस्ट्रिया के विरुद्ध सार्डीनिया-पीडमॉण्ट को सैनिक सहायता देना स्वीकार कर लिया। इसी सन्धि के परिणामस्वरूप 1859 ई. में सार्डीनिया-पीडमॉण्ट आस्ट्रिया की सेना को पराजित करने में सफल रहा था।

( ग ) यूनानी स्वतन्त्रता युद्ध—15वीं शताब्दी से ही यूनान पर ऑटोमन साम्राज्य का शासन था। यूनानी ऑटोमन साम्राज्य के आधिपत्य से मुक्त होना चाहते थे। सन् 1821 ई. में यूनानियों का स्वतंत्रता संग्राम शुरू हुआ। वह स्वतंत्रता संग्राम राष्ट्रवादी भावना से प्रेरित था। इस स्वतन्त्रता संग्राम में निर्वासन में रह रहे यूनानी राष्ट्रवादियों ने सहायता दी। इसके अतिरिक्त पश्चिमी यूरोप के अनेक लोगों ने भी यूनानियों के स्वतन्त्रता-संग्राम का समर्थन किया। ये लोग प्राचीन यूनानी संस्कृति के प्रति सहानुभूति रखते थे। अनेक कवियों और कलाकारों ने यूनान को 'यूरोपीय सभ्यता का पालना' बताकर उसकी मुक्तकंठ से प्रशंसा की और ऑटोमन-साम्राज्य के विरुद्ध यूनान के स्वतन्त्रता-संघर्ष के लिए जनमत जुटाया। अंग्रेज कवि लार्ड बायरन ने धन एकत्रित किया और युद्ध में लड़ने भी गए। लेकिन दुर्भाग्यवश वहाँ 1824 में बुखार के कारण लार्ड बायरन की मृत्यु हो गई। अन्ततः 1832 में कुस्तुनतुनिया की सन्धि हुई जिसने यूनान को एक स्वतन्त्र राष्ट्र की मान्यता प्रदान की।

यूनानी स्वतन्त्रता-युद्ध का विश्व के इतिहास में महत्त्वपूर्ण स्थान है। इस युद्ध ने सम्पूर्ण यूरोप के शिक्षित अभिजात वर्ग में राष्ट्रवादी भावनाओं का संचार किया।

( घ ) फ्रैंकफर्ट संसद—जर्मन इलाकों में बड़ी संख्या में राजनीतिक संगठनों ने फ्रैंकफर्ट शहर में मिलकर एक सर्व-जर्मन नेशनल असेंबली की स्थापना करने का निश्चय किया। इसे फ्रैंकफर्ट संसद के नाम से जाना गया। 18 मई, 1848 को विभिन्न जर्मन राज्यों के 831 निर्वाचित प्रतिनिधियों ने फ्रैंकफर्ट संसद में अपना स्थान ग्रहण किया। यह संसद सेंट पॉल चर्च में आयोजित हुई। उन्होंने एक जर्मन राष्ट्र के लिए एक संविधान का प्रारूप तैयार किया। इस राष्ट्र की अध्यक्षता एक ऐसे राजा को सौंपी गई जिसे संसद के अधीन रहना था। जब फ्रैंकफर्ट संसद के प्रतिनिधियों ने प्रशा के सम्राट फ्रेडरीख विल्हेम चतुर्थ से राजमुकुट पहनने का आग्रह किया, तो उसने उसे अस्वीकार कर दिया, और उन राजाओं का साथ दिया जो रूढ़िवादी थे तथा निर्वाचित सभा के विरोधी थे। इस प्रकार जर्मनी के एकीकरण का प्रयास विफल हो गया क्योंकि एक तरफ जहाँ कुलीन वर्ग और सेना का विरोध बढ़ गया था, वहीं दूसरी तरफ संसद का सामाजिक आधार कमजोर हो गया था। इसका कारण यह था कि संसद में मध्य वर्गों का प्रभाव अधिक था जिन्होंने मजदूरों और कारीगरों की माँगों का विरोध किया जिससे वे उनका समर्थन खो बैठे। अन्त में सेना की सहायता से संसद को भंग कर दिया गया।

( ङ ) राष्ट्रवादी संघर्षों में महिलाओं की भूमिका—राष्ट्रवादी संघर्षों में महिलाओं ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने राजनीतिक अधिकार प्राप्त करने के लिए आन्दोलन चलाए और बड़ी संख्या में महिलाओं ने उन आन्दोलनों में सक्रिय रूप से भाग लिया। महिलाओं ने अपने राजनीतिक संगठन स्थापित किये, समाचार-पत्र शुरू किये और राजनीतिक बैठकों तथा प्रदर्शनों में भाग लिया। इसके बावजूद महिलाओं को असेंबली के चुनाव के दौरान मताधिकार से वंचित रखा गया। जब 1848 में सेंट पॉल चर्च में फ्रैंकफर्ट संसद की सभा आयोजित की गई थी, तब महिलाओं को केवल प्रेक्षकों के रूप में ही दर्शक-दीर्घा में खड़े होने की अनुमति दी गई।

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सामाजिक विज्ञान (इतिहास) कक्षा X | 9

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प्रश्न 2. फ्रांसीसी लोगों के बीच सामूहिक पहचान का भाव पैदा करने के लिए फ्रांसीसी क्रान्तिकारियों ने क्या कदम उठाए?

( प्रश्न बैंक )

अथवा

फ्रांसीसी लोगों के बीच सामूहिक पहचान का भाव पैदा करने के लिए फ्रांसीसी क्रान्तिकारियों द्वारा उठाये गये चार कदमों का उल्लेख करें।

उत्तर—फ्रांसीसी लोगों के बीच सामूहिक पहचान का भाव पैदा करने के लिए फ्रांसीसी क्रान्तिकारियों ने निम्नलिखित कदम उठाये—

( 1 ) पितृभूमि और नागरिक जैसे विचार—फ्रांसीसी क्रान्तिकारियों ने 'पितृभूमि' तथा 'नागरिक' जैसे विचारों को फ्रांसीसी लोगों तक पहुँचाया। इन विचारों ने एक संयुक्त समुदाय के विचार पर बल दिया, जिसे एक संविधान के अन्तर्गत समान अधिकार प्राप्त थे।

( 2 ) तिरंगा झेंडे का चुनाव—उनके द्वारा एक नया फ्रांसीसी झण्डा तिरंगा चुना गया जिसने पहले के राजध्वज का स्थान ले लिया।

( 3 ) नेशनल असेम्बली—उन्होंने इस्टेट जनरल का चुनाव सक्रिय नागरिकों के समूह द्वारा करवाया और उसका नाम बदल कर नेशनल असेम्बली कर दिया गया।

( 4 ) नई स्तुतियाँ तथा शपथें—उनके द्वारा नई स्तुतियों की रचना की गई, शपथें ली गईं तथा शहीदों का गुणगान किया गया और यह सब राष्ट्र के नाम पर हुआ।

( 5 ) केन्द्रीय प्रशासनिक व्यवस्था—उन्होंने एक केन्द्रीय प्रशासनिक व्यवस्था लागू की जिसने अपने भू-भाग में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए समान कानून बनाए।

( 6 ) आयात-निर्यात शुल्क की समाप्ति—उन्होंने आन्तरिक आयात-निर्यात शुल्क समाप्त कर दिये तथा सम्पूर्ण देश में माप-तौल की एकसमान व्यवस्था लागू की।

( 7 ) राष्ट्रीय भाषा—उन्होंने क्षेत्रीय बोलियों को हतोत्साहित किया तथा पेरिस में फ्रेंच जिस प्रकार बोली और लिखी जाती थी, उसे ही राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित किया।

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प्रश्न 3. मारीआन और जर्मेनिया कौन थे? जिस तरह उन्हें चित्रित किया गया, उसका क्या महत्त्व था?

उत्तर—मारीआन और जर्मेनिया दो नारियों के चित्र हैं। इन्हें राष्ट्रों के रूपकों के रूप में चित्रित किया गया है। मारीआन फ्रांसीसी गणराज्य का प्रतिनिधित्व करती है और जर्मेनिया जर्मन राष्ट्र का रूपक है।

मारीआन—फ्रांसीसी क्रान्ति के दौरान कलाकारों ने स्वतन्त्रता, न्याय तथा गणतंत्र जैसे विचारों को व्यक्त करने के लिए नारी रूपक का प्रयोग किया। फ्रांस में नारी रूपक को लोकप्रिय ईसाई नाम मारीआन दिया गया, जिसने जन-राष्ट्र के विचार को रेखांकित किया। उसके चिह्न भी स्वतंत्रता और गणतंत्र के थे—लाल टोपी, तिरंगा तथा कलगी। मारीआन की प्रतिमाएँ सार्वजनिक चौकों पर लगाई गई, उसकी छवि सिक्कों और डाक टिकटों पर अंकित की गई, ताकि जनता को एकता के राष्ट्रीय प्रतीक की याद रहे।

जर्मेनिया—जर्मेनिया जर्मन राष्ट्र का रूपक थी। फ्रांस में एक डाक टिकट पर मारीआन की तस्वीर छापी। उसकी प्रतिमाओं को सार्वजनिक स्थानों पर लगाया गया ताकि लोगों में राष्ट्रीय भावना की जागृति हो।

जर्मेनिया को बलूत वृक्ष के पत्तों का मुकुट पहने दिखाया गया क्योंकि जर्मन बलूत को वीरता का प्रतीक मानते हैं। जर्मेनिया की जर्मन तलवार जर्मन राइन की रक्षा करती है। नारी रूप में जर्मेनिया का चित्र जर्मनी की स्वतन्त्रता तथा अखण्डता को प्रतिबिम्बित करता है।

महत्त्व—इन चित्रों ने लोगों में राष्ट्रीयता की भावना को प्रबल किया तथा फ्रांस और जर्मनी को एक अलग-अलग राष्ट्र के रूप में पहचान दी।

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प्रश्न 4. जर्मन एकीकरण की प्रक्रिया का संक्षेप में पता लगाएँ।

अथवा

जर्मनी के एकीकरण के प्रमुख चरण लिखिए।

( प्रश्न बैंक )

उत्तर—जर्मन एकीकरण की प्रक्रिया का वर्णन निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत किया जा सकता है—

( 1 ) जर्मन लोगों में सन् 1848 से पहले ही राष्ट्रीयता की भावना जाग्रत हो चुकी थी। राष्ट्रीयता की यह भावना मध्यम वर्ग के जर्मन लोगों में बहुत अधिक थी।

( 2 ) 1848 की क्रान्तियों से प्रभावित होकर जर्मन-राज्यों के राष्ट्रवादियों ने विभिन्न क्षेत्रों को जोड़कर एक स्वतन्त्र जर्मन राष्ट्र-राज्य के निर्माण की माँगों पर बल दिया। यह राष्ट्र-राज्य संविधान, प्रेस की स्वतन्त्रता तथा संगठन

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के निर्माण की स्वतन्त्रता पर आधारित था। राष्ट्र निर्माण का यह उदारवादी प्रयास विफल हो गया। राष्ट्र-निर्माण की यह उदारवादी पहल राजशाही, सेना की शक्ति तथा प्रशा के बड़े भू-स्वामियों ने मिलकर दबा दी।

(3) इसके बाद प्रशा ने जर्मनी के एकीकरण के लिए प्रयास किया। प्रशा का प्रधानमन्त्री आटोवॉन बिस्मार्क जर्मनी के एकीकरण की प्रक्रिया का जनक था। उसने इस कार्य हेतु प्रशा की सेना और नौकरशाही से सहायता ली। उसने 'लौह और रक्त' की नीति अपनाई और सात वर्ष की अवधि में डेनमार्क, आस्ट्रिया तथा फ्रांस को तीन युद्धों में पराजित किया। इस प्रकार 1871 में जर्मनी के एकीकरण की प्रक्रिया पूरी हुई।

(4) 18 जनवरी, 1871 को बिस्मार्क ने वर्साय के शीशमहल में हुए एक समारोह में प्रशा के राजा विलियम प्रथम को जर्मनी का सम्राट घोषित किया।

इस तरह जर्मनी के एकीकरण की प्रक्रिया पूरी हुई।

प्रश्न 5. अपने शासन वाले क्षेत्रों में शासन व्यवस्था को ज्यादा कुशल बनाने के लिए नेपोलियन ने क्या बदलाव किए?

अथवा

नेपोलियन की संहिता का संक्षिप्त वर्णन कीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)

अथवा

नेपोलियन संहिता की विशेषताएँ लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)

उत्तर—शासन व्यवस्था को ज्यादा कुशल बनाने के लिए नेपोलियन द्वारा किये गये परिवर्तन—अपने शासन वाले क्षेत्रों में शासन व्यवस्था को अधिक कुशल बनाने के लिए 1804 ई. में नेपोलियन ने नागरिक संहिता लागू की। यह संहिता 'नेपोलियन की संहिता' के नाम से जानी जाती है। इस संहिता को फ्रांसीसी नियंत्रण के अधीन क्षेत्रों में भी लागू किया गया। इस संहिता की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं—

(1) इस संहिता ने जन्म पर आधारित विशेषाधिकार समाप्त कर दिए।

(2) इसने कानून के समक्ष समानता तथा सम्पत्ति के अधिकार को सुरक्षित बनाया।

(3) डच गणतंत्र, स्विट्जरलैण्ड, इटली और जर्मनी में नेपोलियन ने प्रशासनिक विभाजनों को सरल बनाया।

(4) इसने डच गणतंत्र, स्विट्जरलैण्ड, इटली और जर्मनी में सामन्ती व्यवस्था को समाप्त किया तथा किसानों को भू-दासत्व तथा जागीरदारी करों से मुक्ति दिलाई।

(5) इसने शहरों में भी कारीगरों के श्रेणी-संघों के नियन्त्रणों को हटा दिया था।

(6) यातायात तथा संचार व्यवस्थाओं में सुधार किये गए।

(7) इसके द्वारा एक समान कानून व्यवस्था तथा माप-तौल की एक जैसी प्रणाली लागू की गई।

(8) सम्पूर्ण देश में एक राष्ट्रीय मुद्रा प्रचलित की गई।

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चर्चा करें

प्रश्न 1. उदारवादियों की 1848 की क्रान्ति का क्या अर्थ लगाया जाता है? उदारवादियों ने किन राजनीतिक, सामाजिक एवं आर्थिक विचारों को बढ़ावा दिया?

अथवा

उदारवाद क्या है? उदारवादियों की 1848 की क्रान्ति ने विश्व में किन विचारों को बढ़ावा दिया?

उत्तर—उदारवादियों की 1848 की क्रान्ति तथा उदारवाद का अर्थ—उदारवादियों की 1848 की क्रान्ति का अर्थ था—राजतन्त्र की समाप्ति एवं गणतन्त्र की स्थापना। वे स्वतंत्र राष्ट्र राज्य की स्थापना करना चाहते थे, जहाँ सभी लोगों के लिए समान कानून तथा स्वतंत्रता हो। उदारवादियों की 1848 की क्रान्ति फ्रांस के मध्यमवर्गीय लोगों से सम्बन्धित थी। नये मध्य वर्गों के लिए उदारवाद का आशय था—व्यक्ति के लिए आजादी और कानून के समक्ष सबकी बराबरी। राजनीतिक रूप से उदारवाद एक ऐसी सरकार पर जोर देता था जो सहमति से बनी हो। इस प्रकार उदारवाद गणतंत्र, राष्ट्र-राज्य, संविधानवाद, प्रेस की स्वतंत्रता तथा संगठन बनाने की स्वतंत्रता के संसदीय विचारों पर आधारित है। उदारवादी क्रान्ति के फलस्वरूप फरवरी, 1848 में फ्रांस के सम्राट को सिंहासन छोड़ना पड़ा और फ्रांस में गणतन्त्र की स्थापना की गई। यह गणतन्त्र पुरुषों के सर्वव्यापी मताधिकार पर आधारित था।

उदारवादियों के विचार—उदारवादियों ने विश्व में निम्नलिखित विचारों को बढ़ावा दिया—

( 1 ) राजनीतिक विचार—(i) उदारवादियों ने संविधान तथा संसदीय प्रतिनिधि सरकार का समर्थन किया। उदारवादी ऐसी सरकार की स्थापना पर बल देते थे जो सभी की सहमति से बनी हो।

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सामाजिक विज्ञान (इतिहास) कक्षा X 11

(ii) एक ऐसे गणतंत्र की स्थापना पर बल दिया जो वयस्क पुरुष मताधिकार पर आधारित था।

(iii) उदारवादियों ने संविधानवाद की माँग को राष्ट्रीय एकीकरण की माँग से जोड़कर एक राष्ट्र-राज्य के निर्माण की माँगों को आगे बढ़ाया। यह राष्ट्र-राज्य संविधान, प्रेस की स्वतंत्रता और संगठन बनाने की आजादी जैसे संसदीय सिद्धान्तों पर आधारित था।

(iv) वे कानून के सामने समानता के पक्षपाती थे परन्तु उनका यह विचार सबके लिए मताधिकार के पक्ष में नहीं था।

(v) वे पादरी वर्ग के विशेषाधिकारों की समाप्ति के पक्षधर थे।

( 2 ) सामाजिक विचार—(i) उदारवादी आन्दोलन के अन्तर्गत महिलाओं को राजनीतिक अधिकार प्रदान करने का मुद्दा विवादास्पद था।

(ii) भू-दासत्व तथा बंधुआ मजदूरी को समाप्त करने पर बल दिया गया।

( 3 ) आर्थिक विचार—(i) उदारवादियों ने बाजारों की मुक्ति, वस्तुओं तथा पूँजी के आयात-निर्यात पर राज्य द्वारा लगाए गए नियन्त्रणों को समाप्त करने पर बल दिया।

(ii) उदारवादी निजी सम्पत्ति के स्वामित्व को अनिवार्य बना देना चाहते थे।

प्रश्न 2. यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास में संस्कृति के योगदान को दर्शाने के लिए तीन उदाहरण दें।

अथवा

रूमानीवाद से आप क्या समझते हैं? रूमानीवाद ने राष्ट्रीयता की धारणा के विकास में किस प्रकार योगदान दिया? वर्णन कीजिए।

उत्तर—रूमानीवाद—यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास में संस्कृति ने भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास में इस सांस्कृतिक जुड़ाव को रूमानीवाद नाम दिया गया। रूमानीवाद एक ऐसा सांस्कृतिक आन्दोलन था जो एक विशेष प्रकार की राष्ट्रीय भावना का विकास करना चाहता था। रूमानी कलाकारों और कवियों का प्रयास था कि एक साझा-सामूहिक विरासत की अनुभूति और एक साझे सांस्कृतिक अतीत को राष्ट्र का आधार बनाया जाए।

राष्ट्रीयता की धारणा के विकास में संस्कृति या रूमानीवाद का योगदान—इस रूमानीवाद के तीन प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं—

( 1 ) लोक संस्कृति—जर्मन दार्शनिक योहान गॉटफ्रीड जैसे रोमानी चिंतकों ने दावा किया कि रूमानी सच्ची जर्मन संस्कृति उसके आम लोगों में निहित थी। उसने लोक संगीत, लोक काव्य और लोक नृत्यों के माध्यम से जर्मन राष्ट्र की भावना को प्रचारित-प्रसारित किया।

( 2 ) भाषा—राष्ट्रवाद के विकास में भाषा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उदाहरण के लिए पोलैण्ड के रूसी कब्जे वाले हिस्सों में पोलिश भाषा को स्कूलों से बलपूर्वक हटा कर रूसी भाषा को हर जगह लादा गया। लेकिन पोलैण्ड में पोलिश भाषा-भाषियों ने रूसी भाषा के प्रभुत्व का विरोध किया और इस प्रकार पोलिश भाषा रूसी प्रभुत्व के विरुद्ध संघर्ष के प्रतीक के रूप में देखी जाने लगी।

( 3 ) संगीत—पोलैण्ड में परतंत्रता की स्थिति में संगीत के द्वारा भी राष्ट्रीय भावना जागृत रखी गई। एक पोलिश नागरिक कैरोल कुर्पिंस्की ने राष्ट्रीय संघर्ष का अपने ऑपेरा व संगीत से गुणगान किया तथा पोलेनेस व माजुरका जैसे लोक नृत्यों को राष्ट्रीय प्रतीकों में बदल दिया।

प्रश्न 3. किन्हीं दो देशों पर ध्यान केन्द्रित करते हुए बताएँ कि उन्नीसवीं सदी में राष्ट्र किस प्रकार विकसित हुए?

उत्तर—

उन्नीसवीं शताब्दी में राष्ट्रों का विकास

उन्नीसवीं शताब्दी में अनेक देशों में राष्ट्रवाद का विकास विभिन्न तरीकों से हुआ जिनमें जर्मनी और इटली प्रमुख हैं—

( 1 ) जर्मन राष्ट्र-राज्य का विकास—

(i) फ्रैंकफर्ट संसद के प्रयास—जर्मनी में राष्ट्रवादी भावनाएँ मध्य वर्ग के लोगों में अधिक थीं। उन्होंने सन् 1848 में जर्मन महासंघ के विभिन्न क्षेत्रों को जोड़कर एक निर्वाचित संसद (फ्रैंकफर्ट संसद) द्वारा शासित राष्ट्र-राज्य बनाने का प्रयास किया। लेकिन राष्ट्र निर्माण का वह उदारवादी प्रयास राजशाही तथा सैन्य शक्ति ने मिलकर विफल कर दिया। उनका प्रशा के बड़े भू-स्वामियों ने भी समर्थन किया।

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(ii) प्रेशा का नेतृत्व तथा बिस्मार्क की भूमिका—इसके बाद प्रेशा ने राष्ट्रीय एकीकरण के आन्दोलन का नेतृत्व सम्भाला। उसका प्रमुख मंत्री, ऑटो वॉन बिस्मार्क इस प्रक्रिया का जनक था। उसने प्रेशा की सेना तथा नौकरशाही की सहायता ली। प्रेशा ने सात वर्ष की अवधि में डेनमार्क, आस्ट्रिया तथा फ्रांस को तीन युद्धों में पराजित कर दिया और जर्मनी की एकीकरण की प्रक्रिया पूरी हुई।

(iii) जर्मन साम्राज्य की घोषणा—18 जनवरी, 1871 को बिस्मार्क ने वर्साय के शीशमहल में विलियम प्रथम को जर्मनी का सम्राट घोषित किया। इस प्रकार जर्मनी में राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया ने प्रेशा राज्य की राज्य शक्ति के प्रभुत्व को दर्शाया है। एकीकरण के पश्चात् नये जर्मन राज्य ने जर्मनी की मुद्रा, बैंकिंग, कानूनी तथा न्यायिक व्यवस्थाओं के आधुनिकीकरण पर बल दिया।

( 2 ) इटली राष्ट्र-राज्य का विकास—

(i) ज्युसेपे मेत्सिनी का योगदान—इटली अपने एकीकरण के पूर्व सात राज्यों में बँटा हुआ था। इनमें से केवल एक राज्य सार्डिनिया-पीडमॉण्ट में इतालवी राजवंश का शासन था। इतालवी भाषा ने भी साझा रूप हासिल नहीं किया था और अभी तक उसके विविध क्षेत्रीय और स्थानीय रूप मौजूद थे। इटली के क्रान्तिकारी नेता ज्युसेपे मेत्सिनी ने 1831 में 'यंग इटली' नामक एक क्रान्तिकारी संस्था की स्थापना की और इसके माध्यम से उसने एकीकृत इतालवी गणराज्य के लिए एक सुविचारित कार्यक्रम प्रस्तुत किया।

(ii) कावूर का योगदान—कावूर सार्डिनिया-पीडमॉण्ट का प्रधानमन्त्री था। सार्डिनिया-पीडमॉण्ट ने फ्रांस के साथ एक चतुर कूटनीतिक संधि की। इस संधि के पीछे कावूर का हाथ था। इस संधि के परिणामस्वरूप 1859 में फ्रांस की सैनिक सहायता प्राप्त करके सार्डिनिया-पीडमॉण्ट ने आस्ट्रिया की सेनाओं को पराजित कर दिया और लोम्बार्डी को सार्डिनिया-पीडमॉण्ट में मिला लिया गया।

(iii) गैरीबाल्डी का योगदान—गैरीबाल्डी इटली का एक महान स्वतन्त्रता सेनानी था। 1859 के युद्ध में नियमित सैनिकों के अतिरिक्त ज्युसेपे गैरीबाल्डी के नेतृत्व में भारी संख्या में सशस्त्र स्वयंसेवकों ने भी हिस्सा लिया। उसने 1860 में सिसली और दक्षिण इटली पर आक्रमण किया और उन पर अधिकार कर लिया। जनमत संग्रह के बाद सिसली और दक्षिण इटली को सार्डिनिया-पीडमॉण्ट में मिला लिया गया।

(iv) विक्टर इमेनुएल द्वितीय का योगदान—विक्टर इमेनुएल द्वितीय सार्डिनिया-पीडमॉण्ट का राजा था। 1861 में उसे एकीकृत इटली का राजा घोषित किया गया। 1866 में वेनेशिया को भी इटली में मिला लिया गया। 1870 में इटली की सेनाओं ने रोम (पेपल राज्य) पर भी अधिकार कर लिया। इस प्रकार इटली का एकीकरण पूरा हुआ।

प्रश्न 4. ब्रिटेन में राष्ट्रवाद का इतिहास शेष यूरोप की तुलना में किस प्रकार भिन्न था? वर्णन कीजिए।

( माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24 )

अथवा

ब्रिटेन एवं अन्य यूरोपीय देशों के राष्ट्रवाद का तुलनात्मक अध्ययन कीजिए।

उत्तर—

ब्रिटेन में राष्ट्रवाद

ब्रिटेन में राष्ट्र-राज्य का निर्माण अचानक हुई कोई उथल-पुथल अथवा क्रान्ति का परिणाम नहीं था, बल्कि यह एक लम्बी चलने वाली प्रक्रिया का परिणाम था। अतः ब्रिटेन में राष्ट्रवाद का इतिहास शेष यूरोप की तुलना में भिन्न था। यथा—

(i) ब्रितानी द्वीपसमूह में रहने वाले लोगों—अंग्रेज, वेल्स, स्कॉटिश व आयरिश—की मुख्य पहचान नृजातीय थी।

(ii) इन सभी जातीय समूहों की अपनी सांस्कृतिक और राजनीतिक परम्पराएँ थीं।

(iii) इन जातीय समूहों में अंग्रेजों की शक्ति, धन-सम्पत्ति तथा गौरव की वृद्धि हुई तो वह द्वीप-समूह के अन्य जातीय समूहों पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने में सफल हुए।

(iv) एक लम्बे टकराव और संघर्ष के बाद आंगल संसद ने 1688 में राजतंत्र से ताकत छीन ली थी। इस संसद के माध्यम से एक राष्ट्र-राज्य का निर्माण हुआ जिसके केन्द्र में इंग्लैण्ड था।

(v) सर्वप्रथम उन्होंने स्काटिश लोगों को अपने देश में सम्मिलित किया। इंग्लैण्ड और स्कॉटलैण्ड के बीच ऐक्ट ऑफ यूनियन (1707) से 'यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट-ब्रिटेन' का गठन हुआ। इससे इंग्लैण्ड, व्यवहार में स्कॉटलैण्ड पर अपना प्रभुत्व जमा पाया।

(vi) इसके पश्चात् उन्होंने आयरिश लोगों पर नियंत्रण किया तथा वोल्फ टोन और उसकी यूनाइटेड आयरिशमेन (1798) की अगुवाई में हुए असफल विद्रोह के बाद 1801 में आयरलैण्ड को बलपूर्वक ब्रितानी राज्य में सम्मिलित कर लिया।

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सामाजिक विज्ञान (इतिहास) कक्षा X 13

इस प्रकार 'यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन' का शान्तिपूर्ण तरीके से गठन हुआ। जबकि अन्य यूरोपीय राष्ट्रों के राष्ट्रवाद अचानक हुई कोई उथल-पुथल अथवा क्रान्ति के परिणाम थे। उदाहरण के लिए जर्मन राष्ट्रवाद प्रशा के नेतृत्व और बिस्मार्क की भूमिका का प्रमुख परिणाम था तो इटली के राष्ट्रवाद में कावूर, गैरीबाल्डी, विक्टर इमैनुअल का महत्त्वपूर्ण योगदान था।

प्रश्न 5. बाल्कन प्रदेशों में राष्ट्रवादी तनाव क्यों पनपा? (प्रश्न बैंक)

अथवा

यूरोप में सन् 1871 के बाद बाल्कन क्षेत्र में बनी विस्फोटक परिस्थितियों का वर्णन कीजिए।

उत्तर— बाल्कन प्रदेशों में राष्ट्रवादी तनाव पनपने के कारण

1871 के बाद इस क्षेत्र में तनाव पनपने के निम्नलिखित कारण थे—

(1) भौगोलिक और जातीय भिन्नता— बाल्कन क्षेत्र में भौगोलिक और जातीय भिन्नता थी। इसमें रोमानिया, बुल्गेरिया, अल्बानिया, यूनान, मेसिडोनिया, क्रोएशिया, बोस्निया-हर्जेगोविना, सर्बिया, मान्टिनिग्रो आदि शामिल थे। बाल्कन क्षेत्र के एक बड़े हिस्से पर आटोमन साम्राज्य का प्रभुत्व स्थापित था। तुर्क लोग बाल्कन या ईसाई जातियों का शोषण करते थे, जिससे बाल्कन जातियों में असन्तोष व्याप्त था।

(2) बाल्कन क्षेत्र में राष्ट्रीयता की भावना का प्रसार— बाल्कन क्षेत्र में रूमानी राष्ट्रवाद के विचारों के प्रसार तथा आटोमन-साम्राज्य के विघटन के कारण बाल्कन क्षेत्र की स्थिति काफी विस्फोटक हो गई।

(3) आटोमन साम्राज्य द्वारा आधुनिकीकरण के प्रयास— 19वीं सदी में आटोमन साम्राज्य ने आधुनिकीकरण तथा आन्तरिक सुधारों के द्वारा अपने साम्राज्य को सुदृढ़ बनाने का प्रयास किया परन्तु उसे सफलता नहीं मिली। एक के बाद एक उसके अधीन यूरोपीय राष्ट्रीयताएँ उसके चंगुल से निकलकर स्वतंत्रता की घोषणा करने लगीं।

(4) बाल्कन राज्यों में एकता का अभाव— बाल्कन राज्यों में परस्पर एकता का अभाव था। बाल्कन लोगों ने आजादी या राजनीतिक अधिकारों के अपने दावे को राष्ट्रीयता का आधार दिया। प्रत्येक राज्य अपने लिए अधिक से अधिक प्रदेश प्राप्त करना चाहता था। इस कारण बाल्कन क्षेत्र गहरे टकराव का क्षेत्र बन गया।

(5) बाल्कन क्षेत्र में यूरोपीय शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा— बाल्कन क्षेत्र में बड़ी शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा के कारण बाल्कन क्षेत्र में यह तनाव और अधिक बढ़ गया। इस समय यूरोपीय शक्तियों के बीच व्यापार, उपनिवेश-स्थापना, नौसैनिक एवं सैन्य शक्ति के लिए गहरी प्रतिस्पर्धा थी। रूस, जर्मनी, इंग्लैण्ड, आस्ट्रिया-हंगरी आदि देश अन्य शक्तियों की पकड़ को कमजोर करके बाल्कन-क्षेत्र में अपना-अपना प्रभाव बढ़ाना चाहते थे। इससे इस क्षेत्र में कई युद्ध हुए और अन्ततः प्रथम विश्वयुद्ध भी हुआ।

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भाग 2 — रिवीजन नोट्स (Notes & Summary)

📝 2. नोट्स: पाठ-सार, मुख्य बिंदु एवं शब्दावली

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं, भौगोलिक परिभाषाएं, राजनीतिक सिद्धांत एवं संपूर्ण अध्याय का सारगर्भित सारांश।

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पाठ-सार

1. 1789 ई. की फ्रांसीसी क्रान्ति और राष्ट्र का विचार— राष्ट्रवाद की प्रथम स्पष्ट अभिव्यक्ति 1789 ई. की फ्रांस की क्रान्ति के साथ हुई। इस क्रान्ति के फलस्वरूप प्रभुसत्ता राजतन्त्र से निकल कर फ्रांसीसी नागरिकों में केन्द्रित हो गई। इस क्रान्ति में फ्रांसीसी क्रान्तिकारियों ने ऐसे अनेक कदम उठाए जिससे फ्रांसीसी लोगों में एक सामूहिक पहचान की भावना उत्पन्न हो सकती थी; जैसे पितृभूमि, नागरिक, फ्रांसीसी तिरंगा झंडा, इस्टेट जनरल का नाम बदलकर नेशनल असेंबली करना, शहीदों का गुणगान आदि।

1.1 फ्रांस की सेनाओं का अन्य राष्ट्रों में प्रवेश— फ्रांसीसी क्रान्तिकारियों ने यह भी घोषणा की कि फ्रांस यूरोप के अन्य लोगों को राष्ट्रों में गठित होने में मदद देगा। जब फ्रांस की घटनाओं की खबर यूरोप के विभिन्न शहरों में पहुँची तो छात्र तथा शिक्षित मध्य वर्गों के अन्य सदस्य जैकोबिन क्लबों की स्थापना करने लगे। उनकी गतिविधियों और अभियानों ने उन फ्रेंच सेनाओं के लिए रास्ता तैयार किया जो 1790 के दशक में हॉलैंड, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड और इटली के बड़े इलाके में घुसीं और राष्ट्रवाद के विचार को भी विदेशों में ले जाने लगीं।

1.2 नेपोलियन बोनापार्ट— नेपोलियन बोनापार्ट ने अपने नियंत्रण वाले फ्रांस के विशाल क्षेत्र में राजतंत्र को वापस लाकर प्रजातंत्र को नष्ट किया, लेकिन प्रशासन के क्षेत्र में क्रांतिकारी सिद्धांतों का समावेश किया। उसने 1804 ई. में ‘नागरिक संहिता’ का निर्माण करवाया, जो ‘नेपोलियन संहिता’ के नाम से प्रसिद्ध है। इस संहिता ने कानून के समक्ष समानता तथा सम्पत्ति के अधिकार को सुरक्षित बनाया। इस संहिता को फ्रांसीसी नियन्त्रण के अधीन क्षेत्रों में भी लागू किया गया। लेकिन इन क्षेत्रों के स्थानीय लोगों ने पाया कि यह नयी प्रशासनिक व्यवस्थाएँ राजनीतिक स्वतंत्रता के अनुरूप नहीं थीं। बढ़े हुए कर, सेंसरशिप और बाकी यूरोप को जीतने के लिए फ्रेंच सेना में जबरन भर्ती से हो रहे नुकसान प्रशासनिक परिवर्तनों से मिले फायदों से कहीं ज्यादा नजर आने लगे।

2. यूरोप में राष्ट्रवाद का निर्माण— मध्य 18वीं सदी में आज के जर्मनी, इटली और स्विट्जरलैण्ड जैसे राष्ट्र-राज्य राजशाहियों, डचियों और कैंटनों में बाँटे थे, जिनके शासकों के स्वायत्त क्षेत्र थे। पूर्वी और मध्य यूरोप निरंकुश राजतंत्रों के अधीन थे और इन इलाकों में तरह-तरह के लोग रहते थे, उनकी अलग-अलग भाषाएँ थीं तथा वे विभिन्न जातीय समूहों के सदस्य थे। इन तरह-तरह के समूहों को आपस में बाँधने वाला तत्त्व, केवल सम्राट के प्रति सबकी निष्ठा थी।

2.1 कुलीन वर्ग और नया मध्य वर्ग— यूरोपीय महाद्वीप में कुलीन वर्ग सर्वाधिक शक्तिशाली वर्ग था, लेकिन यह एक छोटा समूह था। कुलीन वर्ग के लोग ग्रामीण इलाकों में जायदाद और शहरों में हवेलियों के मालिक थे। राजनीतिक कार्यों व उच्च वर्गों के बीच वे फ्रेंच भाषा का प्रयोग करते थे। जनसंख्या में अधिकांश लोग कृषक थे। औद्योगिक उत्पादन एवं व्यापार में वृद्धि होने से विभिन्न शहरों में नये सामाजिक वर्गों का जन्म हुआ। ये थे—श्रमिक वर्ग और मध्य वर्ग। कुलीन वर्ग को प्राप्त विशेषाधिकारों की समाप्ति के बाद शिक्षित और उदारवादी मध्य वर्गों के बीच राष्ट्रीय एकता के विचारों का प्रचार-प्रसार हुआ।

2.2 उदारवादी राष्ट्रवाद के मायने— यूरोप के नवीन मध्य वर्ग के लिए उदारवाद का अर्थ था—लोगों के लिए स्वतंत्रता और कानून के समक्ष सभी की समानता। फ्रांसीसी क्रान्ति के पश्चात् से ही उदारवादी वर्ग राजनीतिक क्षेत्र में संविधान, संसदीय लोकतंत्र, प्रतिनिधि सरकार का समर्थक था लेकिन इस उदारवाद में मत देने और चुने जाने का अधिकार केवल सम्पत्तिवान पुरुषों को ही हासिल था। सम्पत्तिविहीन पुरुष और सभी महिलाओं को राजनीतिक अधिकारों से वंचित रखा गया था। केवल थोड़े समय के लिए जैकोबिन शासन के समय सभी वयस्क पुरुषों को मताधिकार प्राप्त था। लेकिन

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नेपोलियन संहिता पुनः सीमित मताधिकार वापस लायी। आर्थिक क्षेत्र में उदारवाद बाजारों की मुक्ति, व्यापार पर राज्य के नियंत्रणों की समाप्ति के पक्ष में था। 1834 में प्रशा की पहल पर एक शुल्क संघ जोलवेराइन स्थापित किया गया जिसने शुल्क अवरोधों को समाप्त कर दिया, मुद्राओं की संख्या 30 से घटाकर दो कर दी गई, रेलवे ने इसमें गतिशीलता बढ़ाई। इस प्रकार आर्थिक राष्ट्रवाद की लहर ने व्यापक राष्ट्रवादी भावनाओं को मजबूत बनाया।

2.3 1815 के बाद एक नया रूढ़िवाद—1815 में नेपोलियन की हार के बाद वियना सम्मेलन के प्रतिनिधियों ने 1815 की वियना-सन्धि तैयार की जिसका उद्देश्य उन समस्त परिवर्तनों को समाप्त करना था जो नेपोलियन के युद्धों के दौरान हुए थे। इस सम्मेलन ने यूरोप में एक नई रूढ़िवादी व्यवस्था स्थापित कर दी, जिसमें पारम्परिक संस्थाओं-चर्च, सामाजिक भेदभाव, राजतंत्र और परिवार को बनाये रखा गया। वियना संधि के तहत बूर्बो राजवंश को शासन करने का पुनः अधिकार दे दिया गया। इस काल में स्थापित रूढ़िवादी शासन व्यवस्थाएँ निरंकुश थीं। इस नयी रूढ़िवादी व्यवस्था के आलोचक उदारवादी राष्ट्रवादी लोग प्रेस की स्वतंत्रता चाहते थे।

2.4 क्रांतिकारी—1815 के बाद के वर्षों में दमन के भय ने अनेक उदारवादियों-राष्ट्रवादियों को भूमिगत कर दिया। बहुत सारे यूरोपीय राज्यों में क्रांतिकारियों को राजतंत्रीय संस्थाओं का विरोध करने एवं स्वतंत्रता की प्रतिबद्धता का प्रशिक्षण देने और विचारों का प्रचार-प्रसार करने के लिए गुप्त संगठन उभर आए। ऐसा ही एक व्यक्ति था-इटली का क्रांतिकारी ज्युसेपी मेत्सिनी। उसने 'यंग इटली' तथा 'यंग यूरोप' नामक दो संस्थाओं की स्थापना की। उसने एकीकृत इटली के गणराज्य के लिए एक कार्यक्रम प्रस्तुत किया।

3. क्रांतियों का युग : 1830-1848— फ्रांस में जुलाई, 1830 में क्रान्ति का सूत्रपात हुआ, जिसके फलस्वरूप वहाँ बूर्बो राजा की सत्ता को उखाड़कर एक संवैधानिक राजतन्त्र की स्थापना हुई। यूनान के स्वतंत्रता संग्राम ने पूरे यूरोप के शिक्षित अभिजात वर्ग में राष्ट्रीय भावनाओं का संचार किया। यह संग्राम 1821 में प्रारम्भ हो गया था। अन्त में 1832 की कुस्तुनतुनिया की संधि ने यूनान को एक स्वतन्त्र राष्ट्र की मान्यता दी।

3.1 रूभानी कल्पना और राष्ट्रीय भावना—राष्ट्र के विचार के निर्माण में संस्कृति ने एक अहम् भूमिका निभाई। कला, काव्य, कहानियों-किस्सों और संगीत ने राष्ट्रवादी भावनाओं को गढ़ने और व्यक्त करने में सहयोग दिया। रूमानिवाद एक ऐसा सांस्कृतिक आंदोलन था जिसने तर्क-वितर्क और विज्ञान के स्थान पर भावनाओं, अन्तर्दृष्टि और रहस्यवादी भावनाओं पर जोर दिया तथा एक साझा सामूहिक विरासत की अनुभूति व एक साझा सांस्कृतिक अतीत को राष्ट्र का आधार बनाने पर बल दिया। भाषा ने भी राष्ट्रीय भावनाओं के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा पोलिश भाषा रूसी प्रभुत्व के विरुद्ध संघर्ष के प्रतीक के रूप में देखी जाने लगी।

3.2 भूख, कठिनायाँ और जन विद्रोह—19वीं सदी के प्रारंभ में यूरोप में जनसंख्या में हुई भारी वृद्धि, नगरों में भीड़-भरी गरीब बस्तियों का बनना, इंग्लैंड से आयातित कपड़े से बढ़ती प्रतिस्पर्धा, कृषकों का सामन्ती शुल्कों और जिम्मेदारियों के तले दबना आदि कठिनायाँ बढ़ीं। 1845 में सिलेसिया में बुनकरों ने ठेकेदारों के विरुद्ध विद्रोह किया तथा 1848 में व्यापक बेरोजगारी के कारण पेरिस के लोग सड़कों पर उतर आए और राष्ट्रीय सभा ने एक गणतंत्र की घोषणा करते हुए पुरुषों को वयस्क मताधिकार तथा काम के अधिकार की गारंटी दी। रोजगार उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय कारखाने स्थापित किए गए।

3.3 1848 : उदारवादियों की क्रांति—फरवरी, 1848 में फ्रांस में पुनः क्रान्ति का सूत्रपात हुआ और वहाँ गणतन्त्र की स्थापना हुई। जर्मन इलाकों में भी 1848 में क्रान्तियाँ हुईं। फ्रैंकफर्ट की संसद ने एक जर्मन राष्ट्र के लिए एक संविधान का प्रारूप तैयार किया। जब निर्वाचित प्रतिनिधियों ने प्रशा के सम्राट फ्रेडरीख विल्हेम चतुर्थ को ताज पहनाने का प्रस्ताव किया, तो उसने उसे अस्वीकार कर निर्वाचित सभा के विरोधियों का साथ दिया। इस प्रकार राष्ट्रवादियों तथा उदारवादियों को असफलता का मुँह देखना पड़ा। हालाँकि रूढ़िवादी ताकतें 1848 में उदारवादी आन्दोलनों को दबा पाने में कामयाब हुईं, लेकिन वे पुरानी व्यवस्था बहाल नहीं कर पाईं।

4. जर्मनी और इटली का निर्माण—

4.1 जर्मनी का एकीकरण—1848 में मध्य वर्ग के जर्मन राष्ट्रवादी लोगों ने जर्मन महासंघ को विभिन्न इलाकों को जोड़कर एक निर्वाचित संसद द्वारा शासित राष्ट्र-राज्य बनाने का प्रयास किया था, लेकिन इस पहल को राजशाही और फौज की ताकत ने मिलकर दबा दिया। इसके पश्चात् जर्मनी के राष्ट्रवादियों ने प्रशा के नेतृत्व में जर्मनी के एकीकरण के लिए आन्दोलन शुरू किया। प्रशा के प्रधानमन्त्री ऑटो वॉन बिस्मार्क ने 'लौह और रक्त' की नीति अपनाई और सात वर्ष की अवधि में डेनमार्क, आस्ट्रिया और फ्रांस को पराजित कर जर्मनी का एकीकरण पूरा किया। जनवरी, 1871 में नए जर्मन

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सामाजिक विज्ञान (इतिहास) कक्षा X

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साम्राज्य की घोषणा की गई तथा प्रशा के राजा विलियम प्रथम को जर्मनी का सम्राट घोषित किया गया। नए राज्य ने जर्मनी की मुद्रा, बैंकिंग और कानूनी तथा नागरिक व्यवस्थाओं के आधुनिकीकरण पर काफी जोर दिया जो शेष जर्मनी के लिए एक मॉडल बना।

4.2 इटली का एकीकरण—19वीं सदी के मध्य में इटली अपने एकीकरण से पूर्व सात राज्यों में विभाजित था। इटली के क्रान्तिकारी नेता ज्युसेपे मेत्सिनी ने इटली के एकीकरण के लिए 1830 के दशक में सुविचारित कार्यक्रम प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया। उसने इटलीवासियों में राष्ट्रीयता की भावनाओं का प्रसार किया। सार्डिनिया-पीडमॉण्ट के प्रधानमन्त्री कावूर ने फ्रांस की सहायता से 1859 में आस्ट्रिया को पराजित किया। नियमित सैनिकों के अलावा ज्युसेपे गैरीबाल्डी के नेतृत्व में भारी संख्या में सशस्त्र स्वयंसेवकों ने इस युद्ध में हिस्सा लिया। 1860 में उसने अपने सशस्त्र स्वयंसेवकों को लेकर सिसली और नेपल्स पर आक्रमण किया और उन पर अधिकार कर लिया। 1861 में इमेनुएल द्वितीय को एकीकृत इटली का राजा घोषित किया गया।

4.3 ब्रिटेन की अजीब दास्तान—इंग्लैण्ड में 1688 ई. में एक क्रान्ति हुई जिसके फलस्वरूप इंग्लैण्ड की संसद ने राजतन्त्र की शक्ति छीन ली और इस संसद के माध्यम से एक राष्ट्र-राज्य का निर्माण हुआ जिसके केन्द्र में इंग्लैण्ड था। 1707 में इंग्लैण्ड और स्कॉटलैण्ड के बीच 'एक्ट ऑफ यूनियन' से 'यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन' का गठन हुआ। इसके बाद ब्रिटिश संसद में आंग्ल सदस्यों का प्रभुत्व स्थापित हुआ। 1801 में आयरलैण्ड को बलपूर्वक यूनाइटेड किंगडम में सम्मिलित कर लिया गया। एक नवीन 'ब्रितानी राष्ट्र' का निर्माण किया गया जिस पर हावी आंग्ल-संस्कृति का प्रचार-प्रसार किया गया।

5. राष्ट्र की दृश्य-कल्पना—18वीं तथा 19वीं शताब्दी में कलाकारों ने एक देश को इस प्रकार चित्रित किया जैसे वह कोई व्यक्ति हो। उस समय राष्ट्रों को नारी भेष में प्रस्तुत किया जाता था। फ्रांस में मारीआन नामक महिला को राष्ट्र के रूपक के रूप में चित्रित किया गया। उसके चिह्न भी स्वतंत्रता और गणतंत्र के थे—लाल टोपी, तिरंगा और कलगी। इसी प्रकार जर्मेनिया जर्मन राष्ट्र का रूपक बन गई। जर्मेनिया बलूत वृक्ष के पत्तों का मुकुट पहनती है क्योंकि जर्मन बलूत वीरता का प्रतीक है।

6. राष्ट्रवाद और साम्राज्यवाद—उन्नीसवीं शताब्दी की अन्तिम चौथाई तक राष्ट्रवाद सीमित लक्ष्यों वाला संकीर्ण सिद्धान्त बन गया था। 1871 के बाद यूरोप में गंभीर राष्ट्रवादी तनाव का स्रोत बाल्कन क्षेत्र था। इस क्षेत्र में भौगोलिक और जातीय भिन्नता थी। बाल्कन क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा ऑटोमन साम्राज्य के नियंत्रण में था। ऑटोमन साम्राज्य के विघटन तथा बाल्कन क्षेत्र में राष्ट्रवाद की प्रबलता के कारण बाल्कन क्षेत्र की अनेक जातियाँ तुर्की-साम्राज्य के चंगुल से स्वतन्त्र होने के लिए संघर्ष करने लगीं। अनेक यूरोपीय राष्ट्रीयताओं ने ऑटोमन-साम्राज्य के चंगुल से निकल कर स्वतन्त्रता की घोषणा कर दी।

दूसरी ओर बाल्कन-राज्य एक-दूसरे से घृणा करते थे। इसके अतिरिक्त बाल्कन क्षेत्र में बड़ी शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई। इसके फलस्वरूप बाल्कन क्षेत्र में कई युद्ध हुए और अन्ततः प्रथम विश्व-युद्ध हुआ।

महत्त्वपूर्ण तिथियाँ एवं घटनाएँ

क्र. सं.

तिथि

घटनाएँ

1.

1688 ई.

आंग्ल संसद ने राजतंत्र से ताकत छीन ली एवं एक राष्ट्र-राज्य का निर्माण हुआ।

2.

1707 ई.

इंग्लैण्ड और स्कॉटलैण्ड के बीच एक्ट ऑफ यूनियन (1707) से यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन का गठन।

3.

1789 ई.

फ्रांस की क्रान्ति।

4.

1797 ई.

नेपोलियन का इटली पर हमला; नेपोलियाई युद्धों की शुरुआत।

5.

1801 ई.

आयरलैंड को बलपूर्वक यूनाइटेड किंगडम में शामिल किया गया।

6.

1804 ई.

फ्रांस में नागरिक संहिता (नेपोलियन संहिता) का निर्माण।

7.

1814-1815 ई.

नेपोलियन का पतन, वियना शांति संधि।

8.

1821 ई.

यूनानी स्वतंत्रता के लिए संघर्ष प्रारंभ।

9.

1830 ई.

फ्रांस में जुलाई विद्रोह।

--- [ पृष्ठ संख्या: 11 ] ---

4

10.

1831 ई.

रूस के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह।

11.

1832 ई.

कुस्तुनतुनिया की संधि ने यूनान को एक स्वतंत्र राष्ट्र की मान्यता दी।

12.

1833 ई.

बर्न में यंग यूरोप की स्थापना।

13.

1834 ई.

प्रशा की पहल पर एक शुल्क संघ ज़ॉलवेराइन की स्थापना।

14.

1848 ई.

फ्रांस में क्रान्ति, आर्थिक परेशानियों से ग्रस्त कारीगरों, औद्योगिक मजदूरों और किसानों की बगावत, मध्य वर्ग संविधान और प्रतिनिध्यात्मक सरकार के गठन की माँग, इतालवी, जर्मन, मैग्यार, पोलिश, चेक आदि राष्ट्र-राज्यों की माँग की।

15.

1859–1870 ई.

इटली का एकीकरण।

16.

1861 ई.

इमेनुएल द्वितीय एकीकृत इटली का राजा घोषित।

17.

1866–1871 ई.

जर्मनी का एकीकरण।

18.

1871 ई.

वर्साय के हुए एक समारोह में प्रशा के राजा विलियम प्रथम को जर्मनी का सम्राट घोषित किया गया।

19.

1905 ई.

हैब्सबर्ग और ऑटोमन साम्राज्यों में स्लाव राष्ट्रवाद मजबूत।

20.

1914 ई.

प्रथम विश्वयुद्ध प्रारंभ।

भाग 3 — परीक्षा उपयोगी प्रश्न (Important Questions)

3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर एवं बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक, लघूत्तरात्मक एवं निबंधात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

● बहुविकल्पीय प्रश्न—

1. 'नेपोलियन की संहिता' का निर्माण हुआ— (प्रश्न बैंक)

(अ) 1788

(ब) 1816

(स) 1804

(द) 1806 में

2. 1834 में किस राज्य की पहल पर जॉलवेराइन शुल्क संघ स्थापित किया गया? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024–25)

(अ) आस्ट्रिया

(ब) प्रशा

(स) ब्रिटेन

(द) रूस

3. वियना सन्धि कब हुई? (प्रश्न बैंक)

(अ) 1815 में

(ब) 1825 में

(स) 1804 में

(द) 1830 में

4. जर्मनी में राष्ट्र-राज्य के निर्माण की प्रक्रिया का जनक था—

(अ) विलियम चतुर्थ

(ब) विलियम प्रथम

(स) ऑटो वॉन बिस्मार्क

(द) विलियम द्वितीय

5. कावूर कौन था? (प्रश्न बैंक)

(अ) सार्डीनिया-पीडमॉण्ट का प्रधानमन्त्री

(ब) वियना का प्रधानमन्त्री

(स) इंग्लैण्ड का प्रधानमन्त्री

(द) ऑस्ट्रिया का प्रधानमन्त्री

6. यूरोप में राष्ट्रवाद की प्रथम अभिव्यक्ति कौनसी घटना में दिखाई दी?

(अ) फ्रांसीसी क्रान्ति में

(ब) यूनान के स्वतन्त्रता संग्राम में

(स) इटली के एकीकरण में

(द) बाल्कन विद्रोह में

--- [ पृष्ठ संख्या: 21 ] ---

अथवा

राष्ट्रवाद का प्रारम्भ जिस देश से हुआ, वह है-

(अ) फ्रांस (ब) जर्मनी (स) इंग्लैण्ड (द) इटली

प्रश्न [7]. हंगरी में आधे लोग कौनसी भाषा बोलते थे?

(अ) पोलिश भाषा (ब) मैग्यार भाषा (स) इतालवी भाषा (द) इंग्लिश भाषा

प्रश्न [8]. 'यंग इटली' की स्थापना किसने की? (प्रश्न बैंक)

(अ) मैटरनिख (ब) ज्युसेपे मेत्सिनी (स) नेपोलियन (द) कावूर

प्रश्न [9]. 'जब फ्रांस छींकता है तो बाकी यूरोप को सर्दी-जुकाम हो जाता है।' यह टिप्पणी किसने की थी?

(अ) अर्न्स्ट रेनन (ब) नेपोलियन (स) मैटरनिख (द) लॉर्ड बायरन

प्रश्न [10]. पेपल राज्य इटली में कब सम्मिलित हुए?

(अ) 1858 (ब) 1860 (स) 1867 (द) 1870

प्रश्न [11]. जर्मन बलूत किसका प्रतीक है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)

(अ) आजादी (ब) शांति की चाह

(स) एक नये युग का सूत्रपात (द) वीरता

प्रश्न [12]. निम्नलिखित में से किस संधि ने यूनान को स्वतंत्र राष्ट्र की मान्यता दी?

(अ) वियना शांति संधि (ब) विश्वव्यापी प्रजातांत्रिक राष्ट्रों की संधि

(स) कुस्तुनतुनिया की संधि (द) कांग्रेस संधि

प्रश्न [13]. फ्रांसीसी क्रांति के फलस्वरूप फ्रांसीसी प्रभुसत्ता केन्द्रित हो गई-

(अ) राजा में (ब) कुलीन लोगों में (स) सेना में (द) नागरिकों में।

प्रश्न [14]. यूरोपीय महाद्वीप में औद्योगिक उत्पादन एवं व्यापार में वृद्धि होने से विभिन्न शहरों में जिस नये वर्ग का जन्म हुआ, वह था-

(अ) सैनिक वर्ग (ब) वाणिज्यिक वर्ग (स) कुलीन वर्ग (द) उपर्युक्त में से कोई नहीं

प्रश्न [15]. फ्रांस की जिस क्रांति के फलस्वरूप गणतंत्र की स्थापना हुई, वह हुई थी-

(अ) 1789 में (ब) 1830 में (स) 1848 में (द) उपर्युक्त में से कोई नहीं

प्रश्न [16]. कुलीन विशेषाधिकारों की समाप्ति के बाद यूरोप के राज्यों में जिस वर्ग में राष्ट्रीय एकता के विचार लोकप्रिय हुए, वह था-

(अ) कुलीन वर्ग (ब) शासक वर्ग

(स) मजदूर वर्ग (द) शिक्षित और उदारवादी मध्य वर्ग

प्रश्न [17]. 19वीं सदी के प्रारंभ में राष्ट्रीय एकता से संबंधित विचार किस राजनैतिक विचारधारा से जुड़े थे?

(अ) मार्क्सवाद (ब) उदारवाद (स) पूँजीवाद (द) निरंकुशवाद

प्रश्न [18]. 19वीं सदी के यूरोप में उदारवादी निम्न में से किस तर्क के पक्ष में नहीं थे?

(अ) महिलाओं को मताधिकार देने के

(ब) सम्पत्तिवान सभी वयस्क पुरुषों को मताधिकार देने के

(स) निरंकुश शासन की समाप्ति के (द) पादरी वर्ग के विशेषाधिकारों की समाप्ति के

प्रश्न [19]. 1815 में नेपोलियन की हार के बाद यूरोपीय सरकारें किस भावना से प्रेरित थीं?

(अ) समाजवादी (ब) उदारवादी (स) रूढ़िवादी (द) लोकतांत्रिक

प्रश्न [20]. यूरोप में क्रांतिकारी राष्ट्रवाद की प्रगति से यूनानियों का आजादी के लिए संघर्ष प्रारंभ हो गया-

(अ) 1815 में (ब) 1821 में (स) 1830 में (द) 1832 में

प्रश्न [21]. 1832 की कुस्तुनतुनिया की संधि ने किस देश को एक स्वतंत्र राष्ट्र की मान्यता दी?

(अ) फ्रांस को (ब) नीदरलैंड्स को (स) यूनान को (द) इटली को

प्रश्न [22]. 18 जनवरी, 1871 को वर्साय के महल में प्रशा के महत्त्वपूर्ण मंत्रियों की सभा ने किसके नेतृत्व में जर्मन साम्राज्य की घोषणा की?

(अ) काइजर विलियम प्रथम (ब) ऑटो वान बिस्मार्क

(स) जनरल वॉन रून (द) आन्ताक वॉन वर्नर

--- [ पृष्ठ संख्या: 22 ] ---

सामाजिक विज्ञान (इतिहास) कक्षा X | 15

23. जर्मनीया किस राष्ट्र का रूपक बन गई थी? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)

(अ) ब्रिटेन (ब) फ्रांस (स) जर्मनी (द) रूस

24. उगते सूर्य की किरणें निम्न में से किसका प्रतीक हैं? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)

(अ) आजादी मिलना (ब) बहादुरी (स) शांति (द) एक नये युग का सूत्रपात

25. 18वीं सदी में यूरोप में कौनसा वर्ग सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से प्रभुत्व रखता था?

(अ) भू-स्वामी कुलीन वर्ग (ब) पादरी (स) मजदूर (द) सैनिक

26. ज्युसेपे मेत्सिनी किस देश के प्रसिद्ध क्रांतिकारी थे? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)

(अ) इंग्लैंड (ब) ऑस्ट्रिया (स) इटली (द) फ्रांस

27. 1871 में राजा विलियम प्रथम को किस देश का सम्राट घोषित किया गया? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)

(अ) इटली (ब) फ्रांस (स) जर्मनी (द) अमेरिका

28. फ्रांस की क्रांति कब हुई? (प्रश्न बैंक)

(अ) 1769 (ब) 1779 (स) 1789 (द) 1799

29. फ्रांस का प्रथम शासक कौन था? (प्रश्न बैंक)

(अ) लुई चौदहवाँ (ब) नेपोलियन (स) लुई सोलहवाँ (द) मैटरनिख

30. यूनानियों का आजादी के लिये संघर्ष कब प्रारंभ हुआ? (प्रश्न बैंक)

(अ) 1810 (ब) 1821 (स) 1834 (द) 1839

31. किस व्यक्ति का संबंध इटली के एकीकरण से नहीं है? (प्रश्न बैंक)

(अ) ज्युसेपे मेत्सिनी (ब) गैरीबाल्डी (स) मेटरनिख (द) कावूर

32. निम्नलिखित में से कौनसा असंगत है? (प्रश्न बैंक)

(अ) ऑस्ट्रिया-हंगरी-हेप्सबर्ग वंश (ब) फ्रांस-बूर्बो वंश

(स) तुर्की-आटोमन साम्राज्य (द) उपर्युक्त सभी सही हैं

उत्तरमाला

1. (स) 2. (ब) 3. (अ) 4. (स) 5. (अ) 6. (अ) 7. (ब)

8. (ब) 9. (स) 10. (द) 11. (द) 12. (स) 13. (द) 14. (ब)

15. (स) 16. (द) 17. (ब) 18. (अ) 19. (स) 20. (ब) 21. (स)

22. (अ) 23. (स) 24. (द) 25. (अ) 26. (स) 27. (स) 28. (स)

29. (स) 30. (ब) 31. (स) 32. (द)

● रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

1. 1848 में, एक फ्रांसीसी कलाकार ............... ने चार चित्रों की एक श्रृंखला बनाई। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)

2. सौर्यू के .......... में दुनिया के लोग अलग राष्ट्रों के समूह में बँटे हुए हैं।

3. वियना सम्मेलन (1815) की अध्यक्षता ............... ने की। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)

4. ........... की कुस्तुनतुनिया की संधि ने यूनान को एक स्वतन्त्र राष्ट्र की मान्यता दी।

5. .......... के एकीकरण में बिस्मार्क की महत्त्वपूर्ण प्रमुख भूमिका थी। (प्रश्न बैंक)

6. यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन का गठन सन् .......... में हुआ।

7. फ्रांस में ............... को राष्ट्र के नारी रूपक के रूप में चित्रित किया गया था।

8. ........... ने एक कूटनीतिक संधि द्वारा फ्रांस की सैनिक सहायता प्राप्त कर 1859 में ऑस्ट्रिया की सेनाओं को पराजित किया।

9. 1834 में प्रशा की पहल पर .......... नामक एक शुल्क संघ स्थापित किया गया।

10. 18 मई, 1848 ई. को गठित जर्मन नेशनल असेम्बली को ............... के नाम से जाना जाता है।

11. राष्ट्रवाद की पहली अभिव्यक्ति सन् ............... में फ्रांसीसी क्रान्ति के साथ हुई।

उत्तरमाला

1. फ्रेडरिक सौर्यू, 2. कल्पनादर्श (यूटोपिया), 3. ऑस्ट्रिया के चांसलर ड्यूक मैटरनिख, 4. 1832, 5. जर्मनी, 6. 1707, 7. मारीआन, 8. कावूर, 9. ज़ॉलवेराइन, 10. फ्रैंकफर्ट संसद, 11. 1789

--- [ पृष्ठ संख्या: 23 ] ---

● अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. मारीआन कौन थी?

उत्तर— फ्रांस में मारीआन को राष्ट्र के नारी रूपक के रूप में चित्रित किया गया था।

प्रश्न 2. 'निरंकुशवाद' का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर— 'निरंकुशवाद' का अर्थ है- ऐसी सरकार या शासन व्यवस्था, जिसकी सत्ता पर किसी प्रकार का कोई अंकुश नहीं होता। निरंकुश सरकार अत्यन्त केन्द्रीकृत तथा सैन्य बल पर आधारित होती है।

प्रश्न 3. कल्पनादर्श (यूटोपिया) से क्या तात्पर्य है? (प्रश्न बैंक)

अथवा

कल्पनादर्श (यूटोपिया) क्या है?

उत्तर— कल्पनादर्श (यूटोपिया) एक ऐसे समाज की कल्पना है जो इतना आदर्श है कि उसका साकार होना लगभग असंभव है।

प्रश्न 4. 'जनमत संग्रह' से क्या आशय है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— 'जनमत संग्रह' में प्रत्यक्ष मतदान के माध्यम से एक क्षेत्र के सभी लोगों से किसी प्रस्ताव को स्वीकार अथवा अस्वीकार करने के लिए पूछा जाता है।

प्रश्न 5. यह कथन किसका है? "जब फ्रांस छींकता है तो बाकी यूरोप को सर्दी-जुकाम हो जाता है।" (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)

अथवा

"जब फ्रांस छींकता है तो बाकी यूरोप को सर्दी-जुकाम हो जाता है।" यह शब्द किसने कहे? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— मैटरनिख का।

प्रश्न 6. 1804 की नागरिक संहिता (नेपोलियन की संहिता) की दो मुख्य विशेषताएँ बताइए।

उत्तर— (1) इसने जन्म पर आधारित विशेषाधिकार समाप्त कर दिये।

(2) इसने कानून के सामने बराबरी और सम्पत्ति के अधिकार को सुरक्षित बनाया।

प्रश्न 7. 'जॉलवेराइन' नामक शुल्क संघ से आप क्या समझते हैं?

उत्तर— 1834 में प्रशा की पहल पर 'जॉलवेराइन' नामक एक शुल्क संघ स्थापित किया गया जिसने विभिन्न जर्मन राज्यों के बीच शुल्क अवरोधों को समाप्त कर दिया था।

प्रश्न 8. जॉलवेराइन शुल्क संघ की स्थापना कब की गई?

उत्तर— 1834 में।

प्रश्न 9. 'उदारवाद' से क्या अभिप्राय है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— 'उदारवाद' शब्द लातिन भाषा के मूल 'Liber' पर आधारित है जिसका अर्थ है- आजाद अर्थात् व्यक्ति के लिए स्वतन्त्रता और कानून के समक्ष सबकी बराबरी।

प्रश्न 10. 18वीं शताब्दी में रूमानीवाद किसे राष्ट्र का आधार बनाना चाहता था?

उत्तर— 18वीं सदी में रूमानीवाद एक साझा-सामूहिक विरासत की अनुभूति और एक साझा सांस्कृतिक अतीत को राष्ट्र का आधार बनाना चाहता था।

प्रश्न 11. जर्मनी के एकीकरण का कर्णधार/जनक कौन था? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— जर्मनी के एकीकरण का कर्णधार/जनक प्रशा का मुख्यमंत्री ऑटो वॉन बिस्मार्क था।

प्रश्न 12. जर्मनी के एकीकरण के पश्चात् जर्मनी का सम्राट किसे घोषित किया गया? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— प्रशा के राजा विलियम प्रथम को।

प्रश्न 13. किसे और कब जर्मनी का सम्राट घोषित किया गया?

उत्तर— प्रशा के राजा विलियम प्रथम को 18 जनवरी, 1871 को जर्मनी का सम्राट घोषित किया गया।

प्रश्न 14. जर्मन पंचांग के मुख्य पृष्ठ को कब और किसने बनाया?

उत्तर— जर्मन पंचांग के मुख्य पृष्ठ को 1798 ई. में पत्रकार एंड्रियस रेबमान ने डिजाइन किया था।

प्रश्न 15. वियना सम्मेलन कब आयोजित किया गया? इसकी मेजबानी (अध्यक्षता) किसने की थी?

अथवा

वियना सम्मेलन की अध्यक्षता किसने की थी? (प्रश्न बैंक)

--- [ पृष्ठ संख्या: 24 ] ---

सामाजिक विज्ञान (इतिहास) कक्षा X 17

उत्तर—(1) वियना सम्मेलन 1815 में आयोजित किया गया था।

(2) इस सम्मेलन की मेजबानी आस्ट्रिया के चांसलर ड्यूक मेटरनिक ने की थी।

प्रश्न 16. मेत्सिनी ने किन दो गुप्त संगठनों की स्थापना की थी और कहाँ की थी?

उत्तर— मेत्सिनी ने मार्सई में 'यंग इटली' की तथा बर्न में 'यंग यूरोप' की स्थापना की थी।

प्रश्न 17. नारीवाद से क्या तात्पर्य है?

उत्तर— स्त्री-पुरुष की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समानता की सोच के आधार पर महिलाओं के अधिकारों और हितों का बोध ही नारीवाद है।

प्रश्न 18. बिस्मार्क ने सैन्य शक्ति के बल पर किन तीन देशों को युद्धों में पराजित कर जर्मनी का एकीकरण पूरा किया?

उत्तर— बिस्मार्क ने सात वर्ष की अवधि में सैन्य शक्ति के बल पर तीन युद्धों में डेनमार्क, आस्ट्रिया तथा फ्रांस को पराजित कर जर्मनी के एकीकरण की प्रक्रिया पूरी की।

प्रश्न 19. 'नृजातीय' का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर— 'नृजातीय' से अभिप्राय है-एक साझा नस्ली, जनजातीय या सांस्कृतिक उद्गम अथवा पृष्ठभूमि जिसे कोई समुदाय अपनी पहचान मानता है।

प्रश्न 20. इटली के एकीकरण में योगदान देने वाले किन्हीं चार व्यक्तियों के नाम लिखिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— (1) कावूर (2) मेत्सिनी (3) गैरीबाल्डी (4) विक्टर इमेनुएल द्वितीय।

प्रश्न 21. कार्बोनारी क्या था? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— कार्बोनारी इटली के क्रांतिकारियों का एक गुप्त संगठन था।

प्रश्न 22. यंग इटली की स्थापना किसने की?

उत्तर— जुसेपे मेत्सिनी ने।

प्रश्न 23. कावूर ने इटली के एकीकरण में क्या योगदान दिया?

उत्तर— कावूर ने एक कूटनीतिक संधि द्वारा फ्रांस की सैनिक सहायता प्राप्त कर 1859 में आस्ट्रिया की सेनाओं को पराजित कर दिया।

प्रश्न 24. फ्रांस तथा जर्मनी में किन नारियों को राष्ट्र के रूपक के रूप में चित्रित किया गया?

उत्तर— फ्रांस में मारियान को तथा जर्मनी में जर्मेनिया को राष्ट्र के रूपक के रूप में चित्रित किया गया।

प्रश्न 25. गैरीबाल्डी ने इटली के एकीकरण में क्या योगदान दिया?

उत्तर— 1860 में गैरीबाल्डी ने दो सिसलियों तथा दक्षिण इटली पर अधिकार करने के बाद जनमत संग्रह के आधार पर इन्हें सार्डिनिया-पीडमॉन्ट में शामिल कर लिया।

प्रश्न 26. बिस्मार्क कौन था?

उत्तर— ऑटो वॉन बिस्मार्क प्रशा का प्रमुख मंत्री था। उसने डेनमार्क, आस्ट्रिया तथा फ्रांस को पराजित कर जर्मनी का एकीकरण पूरा किया।

प्रश्न 27. सिलेसिया में बुनकरों ने कब विद्रोह किया और क्यों किया?

उत्तर— सिलेसिया में 1845 में बुनकरों ने ठेकेदारों के विरुद्ध विद्रोह कर दिया क्योंकि वे उनके निर्मित कपड़े का बहुत कम दाम देते थे।

प्रश्न 28. जर्मनी के एकीकरण की प्रक्रियाओं में 'जॉलवेराइन' ने क्या योगदान दिया?

उत्तर— 'जॉलवेराइन' ने जर्मन लोगों को आर्थिक रूप में एक राष्ट्र के रूप में बाँध दिया।

प्रश्न 29. वियना सम्मेलन में भाग लेने वाले चार प्रमुख देशों के नाम लिखिए जिनके प्रतिनिधि सम्मेलन में सम्मिलित हुए थे।

उत्तर— वियना सम्मेलन में जिन चार प्रमुख देशों के प्रतिनिधि सम्मिलित हुए थे, वे थे-(1) ब्रिटेन (2) रूस (3) प्रशा (4) आस्ट्रिया।

प्रश्न 30. वह कौनसी घटना थी, जिसने सम्पूर्ण यूरोप के शिक्षित अभिजात वर्ग में राष्ट्रीय भावनाओं का संचार किया?

उत्तर— यूनान का स्वतंत्रता-संग्राम।

प्रश्न 31. यूनानियों का स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कब शुरू हुआ था?

उत्तर— यूनानियों का स्वतंत्रता के लिए संघर्ष 1821 ई. में शुरू हुआ था।

--- [ पृष्ठ संख्या: 25 ] ---

प्रश्न 32. किस संधि ने यूनान को एक स्वतंत्र राष्ट्र की मान्यता प्रदान की?

उत्तर— 1832 की कुस्तुनतुनिया की संधि ने।

प्रश्न 33. योहान गॉट फ्रीड कौन था?

उत्तर— योहान गॉट फ्रीड एक जर्मन दार्शनिक था। उसका कहना था कि सच्ची जर्मनी संस्कृति उसके आम लोगों में निहित थी।

प्रश्न 34. इटली अपने एकीकरण से पूर्व कितने राज्यों में विभाजित था? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— इटली अपने एकीकरण से पूर्व सात राज्यों में विभाजित था।

प्रश्न 35. इटली के किस राज्य में एक इतालवी राजघराने का शासन स्थापित था?

उत्तर— इटली के केवल एक राज्य सार्डिनिया-पीडमाण्ट में एक इतालवी राजघराने का शासन स्थापित था।

प्रश्न 36. बाल्कन-क्षेत्र में किन चार बड़ी शक्तियों में गहरी प्रतिस्पर्धा थी?

उत्तर— बाल्कन-क्षेत्र में रूस, जर्मनी, इंग्लैण्ड तथा आस्ट्रिया-हंगरी में गहरी प्रतिस्पर्धा थी।

प्रश्न 37. यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन का गठन कब हुआ था? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— सन् 1707 ई. में यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन का गठन हुआ।

प्रश्न 38. लुईजे ऑटो-पीटर्स के बारे में आप क्या जानते हैं?

उत्तर— लुईजे ऑटो-पीटर्स एक राजनैतिक कार्यकर्ता थी जिसने महिलाओं की पत्रिका और तत्पश्चात् एक नारीवादी राजनैतिक संगठन की स्थापना की।

प्रश्न 39. 'टूटी हुई बेड़ियाँ' किसका प्रतीक थीं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— 'टूटी हुई बेड़ियाँ' 'आजादी मिलना' का प्रतीक थीं।

प्रश्न 40. मारीआन की प्रतिमाएँ सार्वजनिक चौकों पर क्यों लगाई गईं? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)

उत्तर— मारीआन की प्रतिमाएँ सार्वजनिक चौकों पर लगाई गईं ताकि जनता को एकता के राष्ट्रीय प्रतीक की याद आती रहे और लोग उससे तादात्म्य स्थापित कर सकें।

प्रश्न 41. वर्साय शहर कौनसे देश में स्थित है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— वर्साय शहर फ्रांस देश में स्थित है।

प्रश्न 42. क्रांति के बाद इस्टेट जनरल का नाम बदलकर क्या किया गया? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— क्रांति के बाद इस्टेट जनरल का नाम बदलकर नेशनल असेंबली कर दिया गया।

प्रश्न 43. फ्रांसीसी लोगों का अंतिम राजा कौन था? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— लुई फिलिप फ्रांसीसी लोगों का अंतिम राजा था।

प्रश्न 44. फ्रैंकफर्ट संसद का आयोजन कहाँ पर हुआ? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— फ्रैंकफर्ट संसद का आयोजन जर्मन इलाके के सेंट पॉल चर्च में हुआ था।

प्रश्न 45. इटली के एकीकरण के जनक कौन थे? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— ज्युसेप्पे मेत्सिनी इटली के एकीकरण के जनक थे?

प्रश्न 46. बाल्कन क्षेत्र में कौन-कौन से क्षेत्र शामिल थे? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— बाल्कन क्षेत्र में आधुनिक रोमानिया, बुल्गेरिया, अल्बेनिया, यूनान, मेसिडोनिया, क्रोएशिया, बोस्निया-हर्जेगोविना, स्लोवेनिया, सर्बिया और मॉन्टेनिग्रो शामिल थे।

प्रश्न 47. कुस्तुनतुनिया की संधि कब हुई? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— 1832 में।

प्रश्न 48. इटली के क्रांतिकारियों के गुप्त संगठन का नाम क्या था? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— इटली के क्रांतिकारियों के गुप्त संगठन का नाम कार्बोनारी था।

प्रश्न 49. जर्मन राष्ट्र का रूपक कौन थी? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— जर्मन राष्ट्र का रूपक जर्मेनिया थी।

प्रश्न 50. 'उगते हुए सूर्य की किरणें' किसका प्रतीक है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— 'उगते हुए सूर्य की किरणें' एक नए युग के सूत्रपात का प्रतीक है।

प्रश्न 51. 'इस्टेट जनरल' का चुनाव कौनसे नागरिकों के द्वारा किया जाता था? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— 'इस्टेट जनरल' का चुनाव सक्रिय नागरिकों के द्वारा किया जाता था।

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सामाजिक विज्ञान (इतिहास) कक्षा X 19

प्रश्न 52. जैकोबिन क्लबों की स्थापना किसने की थी? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— जैकोबिन क्लबों की स्थापना यूरोप के छात्र तथा शिक्षित मध्य वर्गों के अन्य सदस्यों ने की थी।

● लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. जर्मेनिया व मारीआन रूपक की तुलना कीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)

उत्तर— (1) जर्मेनिया की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि जर्मनी की एकता और स्वतंत्रता से जुड़ी हुई है, जबकि मारीआन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि फ्रांस की क्रांति और स्वतंत्रता से जुड़ी हुई है।

(2) जर्मेनिया के प्रतीकात्मक तत्त्वों में ओक की पत्तियों का मुकुट, शील्ड और तलवार शामिल हैं, जबकि मारीआन के प्रतीकात्मक तत्त्वों में लाल टोपी, तलवार और शील्ड शामिल हैं।

प्रश्न 2. फ्रांस के क्रांतिकारियों ने फ्रांसीसी लोगों में सामूहिक पहचान की भावना उत्पन्न करने के लिए किन चार चीजों का चुनाव किया?

उत्तर— फ्रांस के क्रांतिकारियों ने सामूहिक पहचान के लिए निम्न चार चीजों का चुनाव किया-

(1) पितृ भूमि (la patrie)

(2) नागरिक (le citoyen)

(3) नया फ्रांसीसी झंडा-तिरंगा (the tricolour)

(4) फ्रेंच भाषा (French language)।

प्रश्न 3. 1789 की फ्रांसीसी क्रान्ति के परिणामस्वरूप हुए दो परिवर्तनों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर— (1) 1789 की फ्रांसीसी क्रान्ति के परिणामस्वरूप प्रभुसत्ता राजतन्त्र से निकल कर फ्रांसीसी नागरिकों के समूह में हस्तांतरित हो गई।

(2) क्रान्ति में स्पष्ट रूप से घोषणा की गई कि अब लोगों द्वारा राष्ट्र का गठन होगा तथा वे ही राष्ट्र का भाग्य निर्धारित करेंगे।

प्रश्न 4. फ्रांस में नेपोलियन द्वारा प्रारम्भ की गई नागरिक संहिता 1804 की किन्हीं चार विशेषताओं का वर्णन कीजिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— (1) नागरिक संहिता 1804 ने जन्माधारित विशेषाधिकारों को समाप्त किया। कानून के समक्ष समानता और सम्पत्ति के अधिकार को सुरक्षित बनाया गया।

(2) शहरों में कारीगरों को श्रेणी संघों के नियंत्रण से मुक्त कर दिया गया।

(3) यातायात व संचार व्यवस्था को सुधारा गया।

(4) सामन्ती व्यवस्था को खत्म किया गया।

प्रश्न 5. फ्रांस पर नेपोलियन के आधिपत्य के बाद फ्रांस के लोगों का प्रारम्भिक उत्साह किस प्रकार शीघ्र ही दुश्मनी में बदल गया? कोई चार कारण स्पष्ट कीजिए।

उत्तर— (1) नयी प्रशासनिक व्यवस्थाएँ राजनीतिक स्वतंत्रता के अनुरूप नहीं थीं।

(2) स्वतंत्र विचारों पर प्रतिबंध लगाने के लिए नेपोलियन ने सेंसरशिप लागू कर दी।

(3) नेपोलियन ने सत्ता संभालते ही करों में वृद्धि कर दी।

(4) नेपोलियन द्वारा शेष यूरोप को जीतने के लिए फ्रेंच सेना में जबरन भर्ती से हो रहे नुकसान, प्रशासनिक परिवर्तनों से मिले फायदों की अपेक्षा अधिक नजर आने लगे थे।

प्रश्न 6. फ्रांस ने यूरोप के अन्य देशों के लोगों को राष्ट्रों में गठित होने में किस प्रकार सहायता दी?

उत्तर— जब फ्रांस की क्रान्ति का समाचार यूरोप के विभिन्न नगरों में पहुँचा, तो छात्र तथा शिक्षित मध्य-वर्गों के अन्य लोग जैकोबिन क्लबों की स्थापना करने लगे। उनकी गतिविधियों और अभियानों ने उन फ्रांसीसी सेनाओं के लिए मार्ग प्रशस्त किया जो 1790 के दशक में हॉलैंड, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड तथा इटली के बड़े क्षेत्रों में घुसीं। ये फ्रांसीसी सेनाएँ अपने साथ राष्ट्रवाद के विचार को विदेशों में ले गईं।

प्रश्न 7. उदारवादी राष्ट्रवाद से क्या अभिप्राय है?

उत्तर— उदारवादी राष्ट्रवाद का अभिप्राय था- व्यक्ति के लिए स्वतंत्रता तथा कानून के सामने सबकी बराबरी। उदारवादी राष्ट्रवाद निरंकुश शासन का विरोधी तथा शासकों एवं पादरियों के विशेषाधिकारों की समाप्ति, संविधान तथा संसदीय प्रतिनिधि सरकार का समर्थक था। उदारवादी निजी सम्पत्ति के स्वामित्व की अनिवार्यता पर भी बल देते थे।

प्रश्न 8. 'जॉलवेराइन' पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

उत्तर— 1834 ई. में प्रशा की पहल पर 'जॉलवेराइन' नामक एक शुल्क संघ की स्थापना हुई थी जिसमें

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अधिकांश जर्मन राज्य शामिल हो गए थे। इस संघ ने शुल्क अवरोधों को समाप्त कर दिया और मुद्राओं की संख्या दो कर दी जो उससे पहले तीस से ऊपर थी। इससे आर्थिक दृष्टि से समस्त जर्मनी एक हो गया।

प्रश्न 9. 1815 की वियना की संधि से आप क्या समझते हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— यह संधि 25 मार्च, 1815 को ऑस्ट्रिया, ग्रेट ब्रिटेन, प्रशिया और रूस के बीच हुई थी। इस संधि के द्वारा यूरोप में शांति और स्थिरता लाने का प्रयास किया गया। इस संधि के अंतर्गत यूरोप के नक्शे को बदला गया और राजशाही को बहाल किया गया।

प्रश्न 10. वियना संधि की कोई दो विशेषताएँ बताइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)

अथवा

वियना संधि (1815) के दो परिणाम बताइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)

उत्तर— वियना संधि की विशेषताएँ-

(i) इस संधि ने यूरोप में एक नई रूढ़िवादी व्यवस्था स्थापित कर दी जिसमें पारम्परिक संस्थाओं-चर्च, सामाजिक भेदभाव, राजतंत्र और परिवार को बनाए रखा गया।

(ii) इस संधि के तहत बूर्बों राजवंश को शासन करने का पुनः अधिकार दे दिया गया।

प्रश्न 11. 1804 की नागरिक संहिता से आप क्या समझते हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— 1804 की नागरिक संहिता को नेपोलियन की संहिता के नाम से भी जाना जाता है। इस संहिता के द्वारा नेपोलियन ने जन्म पर आधारित सभी विशेषाधिकार समाप्त कर दिए थे। कानून के समक्ष बराबरी और संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित बनाया।

प्रश्न 12. फ्रांसीसी सैनिकों की पोशाक कौनसी थी? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— फ्रांसीसी सैनिकों की पोशाक नीली, सफेद तथा लाल रंग की होती थी जो उनको दमनकारी के रूप में प्रस्तुत करते थे।

प्रश्न 13. बिस्मार्क के बारे में संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (प्रश्न बैंक)

अथवा

बिस्मार्क के बारे में आप क्या जानते हैं?

उत्तर— ओटोवॉन बिस्मार्क- ओटोवॉन बिस्मार्क प्रशिया का प्रधानमन्त्री था तथा जर्मनी के एकीकरण की प्रक्रिया का जनक था। जर्मनी के एकीकरण हेतु बिस्मार्क ने प्रशिया की सेना तथा नौकरशाही से सहायता ली। लौह तथा रक्त की नीति अपनाते हुए उसने सात वर्ष की अवधि में डेनमार्क, ऑस्ट्रिया तथा फ्रांस को तीन युद्धों में पराजित किया। इस प्रकार 1871 में जर्मनी के एकीकरण की प्रक्रिया पूर्ण हुई।

प्रश्न 14. 1815 के पश्चात् यूरोप में विकसित नवीन रूढ़िवाद के स्वरूप का विवेचन कीजिए।

उत्तर— 1815 के पश्चात् यूरोप में विकसित नवीन रूढ़िवाद इस बात पर बल देता था कि राज्य और समाज की स्थापित पारम्परिक संस्थाएँ, जैसे-राजतंत्र, चर्च, सामाजिक ऊँच-नीच, सम्पत्ति और परिवार को बनाए रखना चाहिए। साथ ही उसकी मान्यता थी कि आधुनिकीकरण राजतंत्र को मजबूत बनाने में सहायक था।

प्रश्न 15. 1815 में स्थापित रूढ़िवादी शासन व्यवस्थाओं की विशेषताओं की विवेचना कीजिए।

उत्तर— (1) रूढ़िवाद इस बात पर बल देता था कि राज्य व समाज की स्थापित पारम्परिक संस्थाओं को बनाए रखना चाहिए। (2) 1815 में स्थापित रूढ़िवादी शासन व्यवस्थाएँ निरंकुश थीं। (3) वे अपनी आलोचना और असहमति सहन नहीं करती थीं। (4) अधिकतर सरकारों ने सेंसरशिप के नियम बनाए जिनका उद्देश्य फ्रांसीसी क्रान्ति से सम्बन्धित स्वतन्त्रता, उदारवाद और मुक्ति के विचारों पर नियंत्रण लगाना था।

प्रश्न 16. ग्रिम बन्धु कौन थे? उन्होंने जर्मन राष्ट्रीय भावनाओं के विकास में क्या योगदान दिया?

उत्तर— ग्रिम बन्धु (जैकब ग्रिम और विल्हेल्म ग्रिम) जर्मनी के निवासी थे। उन्होंने अनेक पुरानी लोककथाएँ इकट्ठी कीं। उनका विश्वास था कि उन्होंने जो लोककथाएँ इकट्ठी कीं, वे बच्चों और बड़ों में समान रूप से पसंद की जाती थीं। बाद में दोनों भाई उदारवादी राजनीति में सक्रिय हो गए।

प्रश्न 17. फ्रांस की 1848 की क्रान्ति का वर्णन कीजिए।

उत्तर— 1848 में खाद्यान्नों की कमी तथा व्यापक बेरोजगारी से दुःखी पेरिसवासी सड़कों पर निकल पड़े और फ्रांस के सम्राट को गद्दी छोड़नी पड़ी। राष्ट्रीय सभा ने फ्रांस में गणतंत्र की घोषणा कर दी तथा 21 वर्ष के ऊपर के सभी वयस्क पुरुषों को मताधिकार प्रदान किया और काम के अधिकार की गारन्टी दी।

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सामाजिक विज्ञान (इतिहास) कक्षा X 21

प्रश्न 18. 1845 में सिलेसिया में हुए बुनकरों के विद्रोह का वर्णन कीजिए।

उत्तर— 4 जून, 1845 को दोपहर दो बजे बुनकरों की एक भीड़ ठेकेदार की कोठी पर पहुँची। उन्होंने अधिक मजदूरी की माँग की परन्तु उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। भीड़ ने घर में घुसकर खिड़कियाँ, फर्नीचर आदि को तोड़ दिया। सेना की सहायता से ठेकेदार अपने घर लौटा। इस संघर्ष के दौरान 11 बुनकरों को गोली मार दी गई।

प्रश्न 19. रूमान्यवाद से आप क्या समझते हैं? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)

उत्तर— रूमान्यवाद एक ऐसा सांस्कृतिक आन्दोलन था, जो एक विशेष प्रकार की राष्ट्रीय भावना का विकास करना चाहता था। रूमान्यवाद भावनाओं, अन्तर्दृष्टि और रहस्यवादी भावनाओं पर जोर देता था। इसने एक साझा सामूहिक विरासत की अनुभूति और साझा सांस्कृतिक अतीत को राष्ट्र का आधार बनाने पर बल दिया।

प्रश्न 20. वियना संधि के प्रमुख उद्देश्य लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)

उत्तर— 1815 ई. की वियना संधि के प्रमुख उद्देश्य—

(1) उन सभी बदलावों को खत्म करना जो नेपोलियाई युद्धों के दौरान हुए थे।

(2) भविष्य में फ्रांस की सीमाओं के विस्तार को रोकना।

(3) नेपोलियन द्वारा बर्खास्त किये गए राजतंत्रों की बहाली करना।

(4) यूरोप में एक नयी रूढ़िवादी व्यवस्था कायम करना।

प्रश्न 21. ऑटो वान बिस्मार्क को जर्मनी के एकीकरण का जनक क्यों कहा गया था?

उत्तर— प्रशा का प्रमुख मंत्री, ऑटो वान बिस्मार्क जर्मनी के एकीकरण की प्रक्रिया का जनक था। उसने प्रशा की सेना और नौकरशाही की मदद ली तथा सात वर्ष के दौरान ऑस्ट्रिया, डेनमार्क और फ्रांस से तीन युद्धों में प्रशा की जीत हुई तथा जर्मनी के एकीकरण की प्रक्रिया पूरी हुई।

प्रश्न 22. 1871 के बाद यूरोप में गंभीर राष्ट्रवादी तनाव का स्रोत कौनसा क्षेत्र था? इस क्षेत्र में आधुनिक कौन-कौनसे देश शामिल थे?

उत्तर— 1871 ई. के बाद यूरोप में गंभीर राष्ट्रवादी तनाव का स्रोत बाल्कन क्षेत्र था। इस क्षेत्र में आधुनिक रोमानिया, बुल्गेरिया, अल्बेनिया, यूनान, मेसिडोनिया, क्रोएशिया, बोस्निया-हर्जेगोविना, स्लोवेनिया, सर्बिया और मॉन्टेनेग्रो देश शामिल थे।

प्रश्न 23. रूढ़िवाद क्या है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)

उत्तर— रूढ़िवाद-ऐसा राजनीतिक दर्शन जो परम्परा, स्थापित संस्थानों और रिवाजों पर जोर देता है और तेज बदलावों की बजाय क्रमिक और धीरे-धीरे विकास को प्राथमिकता देता है, रूढ़िवाद कहलाता है।

प्रश्न 24. रूढ़िवादी से आप क्या समझते हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— ऐसे लोगों को रूढ़िवादी कहा जाता है जो पारंपरिक मान्यताओं एवं मूल्यों को बढ़ावा देने और संरक्षित करने का प्रयास करते हैं। रूढ़िवादियों के लिए, समाज तर्क पर नहीं अपितु पूर्वाग्रह पर आधारित है।

● दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1. अर्न्स्ट रेनत कौन था? उसने राष्ट्र की व्याख्या किस प्रकार की?

अथवा

अर्न्स्ट रेनत के अनुसार राष्ट्र क्या है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)

उत्तर— अर्न्स्ट रेनत एक फ्रांसीसी दार्शनिक था। उसने सन् 1882 में सॉबॉन (Sorbonne) विश्वविद्यालय में दिये एक व्याख्यान में राष्ट्र की व्याख्या निम्न प्रकार की-

(1) उसने इस विचार की आलोचना की कि राष्ट्र समान भाषा, नस्ल, धर्म या क्षेत्र से बनता है।

(2) उसके अनुसार एक राष्ट्र लम्बे प्रयासों, त्याग और निष्ठा का चरम बिन्दु होता है।

(3) एक राष्ट्रीय विचार शौर्य-वीरता से युक्त अतीत, महान पुरुषों के नाम और गौरव पर आधारित किया जाता है।

(4) अतीत में समान गौरव का होना, वर्तमान में एक समान इच्छा, संकल्प का होना, साथ मिल कर महान काम करना और आगे, ऐसे काम और करने की इच्छा-एक जनसमूह होने की यह सब जरूरी शर्तें हैं।

(5) राष्ट्र एक बड़ी और व्यापक एकता (Large-Scale Solidarity) है, उसका अस्तित्व रोज होने वाला जनमत-संग्रह है। प्रांत उसके निवासी हैं।

(6) राष्ट्रों का होना स्वतंत्रता की गारंटी है।

प्रश्न 2. 'जॉलवेराइन' की स्थापना किन परिस्थितियों में हुई? इसका क्या महत्त्व था?

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अथवा

जॉलवेराइन से आप क्या समझते हैं? इसके महत्त्व पर प्रकाश डालिए।

उत्तर—जॉलवेराइन की स्थापना की परिस्थितियाँ—नेपोलियन बोनापार्ट ने 39 जर्मन राज्यों के एक महासंघ का निर्माण किया था। इनमें से प्रत्येक राज्य की अपनी मुद्रा और नाप-तौल प्रणाली थी। 1833 में हैम्बर्ग से न्यूरेम्बर्ग जाकर अपना माल बेचने वाले एक व्यापारी को ग्यारह सीमा-शुल्क नाकों से गुजरना पड़ता था और हर बार लगभग 5% सीमा शुल्क देना पड़ता था। ये परिस्थितियाँ आर्थिक विनिमय और विकास में बाधक थीं। नए वाणिज्यिक वर्ग इस परिस्थिति से निजात पाने हेतु एक ऐसे एकीकृत आर्थिक क्षेत्र के निर्माण के पक्ष में तर्क दे रहे थे, जहाँ वस्तुओं, लोग और पूँजी का आवागमन बाधारहित हो।

अतः 1834 में प्रशा की पहल पर 'जॉलवेराइन' नामक एक शुल्क संघ की स्थापना हुई जिसमें अधिकांश जर्मन-राज्य सम्मिलित हो गए थे। इस संघ ने शुल्क के अवरोधों को समाप्त कर दिया और मुद्राओं की संख्या दो कर दी जो उससे पहले 30 से ऊपर थी। इससे आर्थिक दृष्टि से समस्त जर्मनी एक हो गया।

प्रश्न 3. जॉलवेराइन संघ की विशेषताएँ लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)

उत्तर— जॉलवेराइन संघ की प्रमुख विशेषताएँ निम्न प्रकार थीं-

(1) जॉलवेराइन संघ एक शुल्क संघ था।

(2) प्रशा की पहल पर 1834 ई. में इसकी स्थापना की गई।

(3) जॉलवेराइन संघ का उद्देश्य जर्मन लोगों को आर्थिक रूप से एक राष्ट्र में बाँध देना था।

(4) जॉलवेराइन संघ ने आर्थिक अवरोधों को समाप्त कर दिया और मुद्राओं की संख्या दो कर दी जबकि इससे पहले तीस से ऊपर मुद्राएँ थीं।

प्रश्न 4. यूनान की स्वतंत्रता प्राप्ति की मुख्य घटनाओं को क्रमबद्ध रूप में लिखिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— यूनान की स्वतंत्रता प्राप्ति की मुख्य घटनाओं का क्रमबद्ध रूप-

(i) यूरोप में क्रांतिकारी राष्ट्रवाद की प्रगति से यूनानियों का स्वतंत्रता प्राप्ति हेतु संघर्ष 1821 ई. में आरंभ हो गया था।

(ii) यूनान में राष्ट्रवादियों को निर्वासन में रह रहे अन्य यूनानियों तथा प्राचीन यूनान संस्कृति के प्रति सहानुभूति रखने वाले कई पश्चिमी यूरोपीय लोगों से भी समर्थन प्राप्त हुआ।

(iii) कवियों तथा कलाकारों ने यूनान को यूरोपीय सभ्यता का उद्गम स्थल बताकर प्रशंसा की तथा मुस्लिम साम्राज्य के विरुद्ध यूनान के संघर्ष हेतु जनमत तैयार किया।

(iv) अंग्रेज कवि लार्ड बायरन ने भी यूनान संघर्ष हेतु धन एकत्र किया तथा युद्ध में लड़ने भी गए जहाँ बुखार के कारण 1824 में उनकी मृत्यु हो गई।

(v) अंततः 1832 की कुस्तुनतुनिया की संधि हुई जिसके फलस्वरूप यूनान को एक स्वतंत्र राष्ट्र की मान्यता प्राप्त हुई।

प्रश्न 5. औद्योगीकरण से यूरोप में क्या परिवर्तन आये? राष्ट्रवाद के संदर्भ में इसे स्पष्ट कीजिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— 18वीं तथा 19वीं शताब्दी में यूरोप का औद्योगीकरण तकनीकी, आर्थिक एवं सामाजिक कारकों से प्रेरित एक बहुआयामी प्रक्रिया थी। औद्योगीकरण की प्रक्रिया के फलस्वरूप यूरोप में श्रमिक-वर्ग, मध्य-वर्ग (उद्योगपतियों, व्यापारियों, सेवा-क्षेत्र के लोग) जैसे समूह अस्तित्व में आये। 18वीं शताब्दी के आसपास समाज और अर्थव्यवस्था में आए परिवर्तन के फलस्वरूप राष्ट्रवाद का विकास हुआ। औद्योगिक क्रांति के कारण यूरोप के गाँवों, जिलों तथा प्रांतों का एक बड़े राज्य में राजनीतिक एकीकरण हुआ। औद्योगिक क्रांति के कारण व्यापक सामाजिक परिवर्तन हुआ। लोग औद्योगिक तथा राजनीतिक रूप से सक्रिय हुए। इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि औद्योगिक क्रांति के कारण ही यूरोप में राष्ट्रवाद का प्रारम्भ हुआ।

प्रश्न 6. एकीकरण से पूर्व इटली की राजनीतिक स्थिति का वर्णन कीजिए।

उत्तर— एकीकरण से पूर्व इटली अनेक वंशानुगत राज्यों तथा बहुराष्ट्रीय हैब्सबर्ग साम्राज्य में बिखरा हुआ था। यथा-

(1) उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य में इटली सात राज्यों में विभाजित था जिनमें से केवल एक सार्डिनिया-पीडमोंट में एक इतालवी राजघराने का शासन था।

(2) उत्तरी भाग आस्ट्रियाई हैब्सबर्गों के अधीन था।

(3) मध्य इलाकों पर पोप का शासन था।

(4) दक्षिणी क्षेत्र स्पेन के बूर्बों राजाओं के अधीन थे।

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सामाजिक विज्ञान (इतिहास) कक्षा X 23

(5) इतालवी भाषा ने साझा रूप हासिल नहीं किया था और अभी तक उसके विविध क्षेत्रीय और स्थानीय रूप मौजूद थे।

प्रश्न 7. "निःसन्देह नेपोलियन बोनापार्ट ने फ्रांस में लोकतंत्र को समाप्त कर दिया परन्तु उसने कई क्रान्तिकारी प्रशासनिक सुधार भी लागू किये।" इस कथन का औचित्य सिद्ध कीजिए।

उत्तर— फ्रांस में नेपोलियन बोनापार्ट ने निःसन्देह अनेक क्रान्तिकारी प्रशासनिक सुधार लागू किये। यथा-

1. नेपोलियन की संहिता— 1804 में नेपोलियन ने नागरिक संहिता को लागू किया। इस संहिता ने जन्म पर आधारित विशेषाधिकारों को समाप्त कर दिया। इसने न केवल न्याय के समक्ष समानता स्थापित की बल्कि सम्पत्ति के अधिकार को भी सुरक्षित बनाया।

2. ग्रामीण क्षेत्रों में सुधार— नेपोलियन ने प्रशासनिक विभाजनों को सरल बनाया तथा किसानों को भू-दासत्व तथा जागीरदारी शुल्कों से मुक्ति दिलाई। उसने सामन्ती व्यवस्था को समाप्त कर दिया।

3. शहरी क्षेत्र में सुधार— उसने शहरों में कारीगरों को श्रेणी संघों के नियंत्रण से मुक्त कर दिया। परिवहन तथा संचार व्यवस्था में सुधार किया।

4. व्यापार में सुधार— उसने एक समान कानून, मानक भार व नाप की व्यवस्था तथा एक राष्ट्रीय मुद्रा को लागू किया जिससे व्यापार का विकास हुआ तथा वस्तुओं व पूँजी के आवागमन में सुविधा हुई।

प्रश्न 8. 1830 के दशक में यूरोपवासियों को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?

उत्तर— (1) उन्नीसवीं शताब्दी के प्रथम भाग में सम्पूर्ण यूरोप में जनसंख्या में भारी वृद्धि हुई। अधिकांश देशों में नौकरी तलाश करने वालों की संख्या उपलब्ध रोजगार से अधिक थी। ग्रामीण क्षेत्रों की अतिरिक्त जनसंख्या शहर जाकर भीड़ से भरी बस्तियों में रहने लगी।

(2) नगरों के लघु उत्पादकों को प्रायः इंग्लैंड से आयातित मशीन से बने सस्ते कपड़े से कड़ी प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही थी। इस कारण लघु उद्योग चौपट हो रहे थे।

(3) यूरोप के जिन देशों में कुलीन वर्ग सत्तारूढ़ था, वहाँ कृषकों की दशा शोचनीय थी। वे सामन्ती शुल्कों के भार तले दबे थे। खाने-पीने की वस्तुओं के मूल्य बढ़ने या किसी वर्ष फसल के खराब होने के कारण शहरों और गाँवों में व्यापक गरीबी फैल जाती थी।

प्रश्न 9. उदारवादी राष्ट्रवाद की विशेषताएँ लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)

अथवा

19वीं शताब्दी में राजनीतिक और आर्थिक क्षेत्रों में व्याप्त उदारवादी स्वरूप की व्याख्या कीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)

उत्तर— 19वीं शताब्दी में उदारवादी राष्ट्रवाद का अभिप्राय था- व्यक्ति के लिए स्वतंत्रता तथा कानून के सामने सबकी बराबरी। इसकी प्रमुख राजनैतिक व आर्थिक विशेषताएँ निम्नलिखित थीं-

(अ) राजनीतिक क्षेत्र में उदारवादी राष्ट्रवाद की विशेषताएँ—

(i) उदारवाद एक ऐसी सरकार पर जोर देता था जो सहमति से बनी हो।

(ii) यह निरंकुश शासन और पादरी वर्ग के विशेषाधिकारों की समाप्ति, संविधान तथा संसदीय प्रतिनिधि सरकार का पक्षधर था।

(iii) यह मत देने और चुने जाने का अधिकार केवल संपत्तिवान पुरुषों को ही देता था।

(ब) आर्थिक क्षेत्रों में व्याप्त उदारवादी राष्ट्रवाद की विशेषताएँ—

(i) उदारवादी निजी सम्पत्ति के स्वामित्व को अनिवार्य बना देना चाहते थे।

(ii) इसने वस्तुओं और पूँजी के आयात-निर्यात पर राज्य द्वारा लगाए गए नियंत्रणों को समाप्त करने पर बल दिया।

प्रश्न 10. गैरीबाल्डी पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— गैरीबाल्डी इटली का एक महान स्वतंत्रता-सेनानी था। उसका जन्म 1807 में हुआ था। 1833 में वह 'यंग इटली' का सदस्य बन गया और 1834 में उसने पीडमॉन्ट के गणतंत्रीय विद्रोह में भाग लिया। विद्रोह कुचले जाने पर गैरीबाल्डी दक्षिणी अमेरिका भाग गया जहाँ वह 1848 तक निर्वासन में रहा। 1854 में उसने इटली लौटकर विक्टर इमैनुएल द्वितीय का समर्थन किया जो इटालवी राज्यों को एकीकृत करने का प्रयास कर रहा था। 1860 में उसने दक्षिण इटली की तरफ 'हजारों लोगों का अभियान' का नेतृत्व किया। इस अभियान में स्वयंसेवकों की संख्या 30,000 तक पहुंच गई। इन्हें 'रेड शर्ट्स' के नाम से जाना गया। 1860 में वे दक्षिण इटली और दो सिसलियों के राज्यों में प्रवेश कर।

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गए और इन्हें सार्डिनिया-पीडमॉन्ट में मिला लिया गया। 1867 में गैरीबाल्डी ने रोम पर आक्रमण किया लेकिन पराजित हुए। अन्ततः 1870 में पेपल राज्य इटली में शामिल हुए।

प्रश्न 11. वेइत की जर्मेनिया के निम्न गुणों के प्रतीकात्मक अर्थ बतलाइए-

टूटी हुई बेड़ियाँ, बाज-छाप कवच, बलूत पत्तियों का मुकुट, तलवार, तलवार पर लिपटी जैतून की डाली, काला, लाल और सुनहरा तिरंगा, उगते सूर्य की किरणें।

उत्तर—

गुण

प्रतीकात्मक अर्थ

1. टूटी हुई बेड़ियाँ

1. आजादी मिलना

2. बाज-छाप कवच

2. जर्मन साम्राज्य की प्रतीक-शक्ति

3. बलूत पत्तियों का मुकुट

3. बहादुरी

4. तलवार

4. मुकाबले की तैयारी

5. तलवार पर लिपटी जैतून की डाली

5. शान्ति की इच्छा

6. काला, लाल और सुनहरा तिरंगा

6. 1848 में उदारवादी-राष्ट्रवादियों का झण्डा, जिसे जर्मन राज्यों के ड्यूक्स ने प्रतिबन्धित घोषित कर दिया

7. उगते सूर्य की किरणें

7. एक नए युग का सूत्रपात।

प्रश्न 12. ब्रिटेन ने स्कॉटलैंड पर किस तरह अपना दबदबा कायम किया?

अथवा

स्कॉटलैंड को किस प्रकार यूनाइटेड किंगडम में शामिल किया गया? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर—इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के बीच 'एक्ट ऑफ यूनियन' (1707) के द्वारा 'यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन' का गठन किया गया। इस एक्ट के द्वारा व्यावहारिक रूप में इंग्लैंड स्कॉटलैंड पर अपना प्रभुत्व जमा पाया। इसके बाद ब्रितानी संसद में आंग्ल सदस्यों का दबदबा रहा। स्कॉटलैंड की अपनी संस्कृति तथा राजनीतिक संस्थानों को योजनाबद्ध तरीके से दबाया गया। स्कॉटिश हाइलैंड्स के निवासी कैथलिक कुलों की आजादी का दमन किया गया। स्कॉटिश हाइलैंड्स के लोगों को अपनी गेलिक भाषा बोलने या अपनी राष्ट्रीय पोशाक पहनने की मनाही थी। उनमें से बहुत से लोगों को अपना वतन छोड़ने को भी मजबूर किया गया।

प्रश्न 13. जुसेपी मेत्सिनी कौन था? इटली के एकीकरण में मेत्सिनी के योगदान का उल्लेख कीजिए।

अथवा

'जुसेपी मेत्सिनी' के बारे में आप क्या जानते हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर—जुसेपी मेत्सिनी इटली का एक क्रांतिकारी व्यक्ति था। उसका जन्म 1807 ई. में जेनोआ में हुआ था और वह कार्बोनारी के गुप्त संगठन का सदस्य बन गया। 24 साल की युवावस्था में लिगुरिया में क्रांति करने के लिए उसे बहिष्कृत कर दिया गया। इसके पश्चात् उसने दो और भूमिगत संगठनों की स्थापना की। पहला था-मार्सेई में यंग इटली और दूसरा बर्न में यंग यूरोप, जिसके सदस्य पोलैंड, फ्रांस, इटली और जर्मन राज्यों में समान विचार रखने वाले युवा थे।

मेत्सिनी का योगदान-(i) मेत्सिनी का विश्वास था कि ईश्वर की मर्जी के अनुसार राष्ट्र ही मनुष्यों की प्राकृतिक इकाई थी। अतः इटली छोटे राज्यों की तरह नहीं रह सकता था। उसे जोड़कर राष्ट्रों के व्यापक गठबंधन के अंदर एकीकृत गणतंत्र बनाना ही था। वह एकीकरण ही इटली की मुक्ति का आधार हो सकता था।

(ii) मेत्सिनी द्वारा राजतंत्र का घोर विरोध किया गया और उसने अपने प्रजातांत्रिक गणतंत्रों के स्वप्न से रूढ़िवादियों को हरा दिया था।

प्रश्न 14. इटली के एकीकरण का संक्षिप्त वर्णन कीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)

अथवा

इटली के एकीकरण की प्रक्रिया को स्पष्ट कीजिए। (प्रश्न बैंक)

अथवा

इटली के एकीकरण में मेत्सिनी, कावूर तथा गैरीबाल्डी के योगदान का संक्षिप्त विवेचन कीजिए।

उत्तर—इटली का एकीकरण-इटली के एकीकरण की प्रक्रिया का वर्णन अग्रलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत किया जा सकता है-

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सामाजिक विज्ञान (इतिहास) कक्षा X 25

(1) मेत्सिनी ने 1831 में 'यंग इटली' और 1833 में 'यंग यूरोप' नामक क्रान्तिकारी संस्थाओं की स्थापना कर इनके माध्यम से इटलीवासियों में राष्ट्रीयता, देश-भक्ति, त्याग तथा बलिदान की भावनाएँ उत्पन्न कीं।

(2) कावूर ने इटली के प्रदेशों को एकीकृत करने वाले आन्दोलन का नेतृत्व किया। 1859 में सार्डिनिया-पीडमॉन्ट ने फ्रांस की सैनिक सहायता प्राप्त कर आस्ट्रिया की सेनाओं को पराजित किया। इसके फलस्वरूप लोम्बार्डी को सार्डिनिया-पीडमॉन्ट में मिला लिया था। 1860 में दक्षिणी इटली और दो सिसलियों को भी सार्डिनिया-पीडमॉन्ट में मिला लिया गया।

(3) 1860 में गैरीबाल्डी ने एक हजार रेड शर्ट दल के स्वयंसेवकों को लेकर दक्षिणी इटली पर आक्रमण किया और शीघ्र ही दक्षिणी इटली और सिसलियों पर गैरीबाल्डी का अधिकार हो गया। 1861 में विक्टर इमेनुएल द्वितीय को एकीकृत इटली का सम्राट घोषित किया गया।

(4) 1866 में आस्ट्रिया को पराजित कर वेनेशिया को इटली में मिला लिया गया। 1867 में गैरीबाल्डी के नेतृत्व में स्वयंसेवकों की सेना पेपल राज्य से लड़ने रोम गई जहाँ फ्रांस की सेना तैनात थी। 1870 में प्रशा से युद्ध के दौरान फ्रांस ने अपनी सेना को रोम से हटा लिया तब पेपल राज्य इटली में सम्मिलित हुआ।

प्रश्न 15. रूढ़िवादी मेत्सिनी के गुप्त संगठनों और विचारों से क्यों डरे हुए थे? कोई दो कारण बताइए।

उत्तर— (1) मेत्सिनी इटली का एक क्रान्तिकारी था। वह राजतंत्र का घोर विरोधी था तथा प्रजातांत्रिक गणतंत्रों का समर्थक था। चौबीस साल की आयु में लिगुरिया में क्रांति करने के लिए उसे बहिष्कृत कर दिया गया। तत्पश्चात् उसने दो और भूमिगत संगठनों की स्थापना की। पहला था मार्सेई में यंग इटली और दूसरा, बर्ने में यंग यूरोप, जिसके सदस्य पोलैंड, फ्रांस, इटली और जर्मन राज्यों में समान विचार रखने वाले युवा थे। इनकी क्रांति के डर से रूढ़िवादी डरते थे।

(2) मेत्सिनी का विश्वास था कि ईश्वर की मर्जी के अनुसार राष्ट्र ही मनुष्यों की प्राकृतिक इकाई थी। वह इटली के छोटे राज्यों और प्रदेशों को जोड़ कर राष्ट्रों के व्यापक गठबंधन के अंदर एकीकृत गणतंत्र बनाना चाहता था। यह एकीकरण ही इटली की मुक्ति का आधार हो सकता था। उसके इस मॉडल की देखा-देखी जर्मनी, फ्रांस, स्विट्जरलैंड और पोलैंड में गुप्त संगठन कायम किए गए। इससे रूढ़िवादी डरते थे। मैटरनिख ने उसे 'सामाजिक व्यवस्था का सबसे खतरनाक दुश्मन' बताया था।

प्रश्न 16. यूरोप के कुलीन वर्ग की विशेषताओं का वर्णन कीजिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— यूरोप के कुलीन वर्ग की विशेषताएँ—यूरोप के कुलीन वर्ग की निम्नलिखित विशेषताएँ थीं-

(1) कुलीन वर्ग के लोग जमीनों के मालिक थे। इनके पास बड़ी-बड़ी जागीरें थीं।

(2) सामाजिक और राजनीतिक रूप से कुलीन वर्ग यूरोपीय महाद्वीप का सबसे प्रभुत्वशाली वर्ग था। इस वर्ग के सदस्य एक साझा जीवन-शैली से बँधे हुए थे जो क्षेत्रीय विभाजनों के आर-पार व्याप्त थी।

(3) ये लोग ग्रामीण क्षेत्रों में सम्पत्ति तथा शहरी हवेलियों के स्वामी थे।

(4) वे राजनीतिक कार्यों के लिए तथा उच्च वर्गों के बीच फ्रांसीसी भाषा का प्रयोग करते थे।

(5) उनके परिवार प्राय: वैवाहिक बन्धनों से आपस में जुड़े हुए थे।

(6) संख्या की दृष्टि से यह वर्ग एक छोटा समूह था।

प्रश्न 17. यूरोप में मध्य वर्ग के उदय के क्या कारण थे?

उत्तर— यूरोप में मध्य वर्ग के उदय के कारण—यूरोप में मध्य वर्ग के उदय के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे-

(1) पश्चिमी और मध्य यूरोप के भागों में औद्योगिक उत्पादन तथा व्यापार में वृद्धि से शहरों का विकास और वाणिज्यिक वर्गों का उदय हुआ। जिनका अस्तित्व बाजार के लिए उत्पादन पर टिका था।

(2) इंग्लैंड में अठारहवीं शताब्दी में ही औद्योगीकरण हो गया था। परन्तु फ्रांस और जर्मनी के राज्यों में उन्नीसवीं शताब्दी में औद्योगीकरण हुआ था। इस प्रक्रिया के फलस्वरूप नए सामाजिक समूह-श्रमिक वर्ग और मध्य वर्ग अस्तित्व में आए, जो उद्योगपतियों, व्यापारियों और सेवा क्षेत्र के लोगों से बने। इस प्रकार इस औद्योगीकरण के फलस्वरूप मध्यवर्ग का उत्कर्ष हुआ।

(3) मध्य और पूर्व यूरोप में इन समूहों का आकार 19वीं सदी के अन्तिम दशकों तक छोटा था।

(4) कुलीन विशेषाधिकारों की समाप्ति के बाद शिक्षित और उदारवादी मध्य वर्गों के बीच ही राष्ट्रीय एकता के विचार लोकप्रिय हुए।

प्रश्न 18. इंग्लैंड ने आयरलैंड पर प्रभुत्व किस प्रकार स्थापित किया? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— आयरलैंड कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट धार्मिक गुटों में गहराई में बँटा हुआ था। अंग्रेजों ने आयरलैंड में

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प्रोटेस्टेंट धर्म मानने वालों को बहुसंख्यक कैथोलिक देश पर प्रभुत्व बढ़ाने में सहायता की। ब्रिटानी प्रभाव के विरुद्ध हुए कैथोलिक विद्रोहों को निर्ममता से कुचल दिया गया। वोल्फ टोन और उसकी यूनाइटेड आयरिशमेन (1798) की अगुवाई में हुए असफल विद्रोह के बाद 1801 में आयरलैंड को बलपूर्वक यूनाइटेड किंगडम में शामिल कर लिया गया। इस प्रकार एक नए 'ब्रिटानी राष्ट्र' का निर्माण किया गया जिस पर हावी आंग्ल संस्कृति का आयरलैंड में खूब प्रचार-प्रसार किया गया। नए ब्रिटेन के प्रतीक-चिह्नों, ब्रिटानी झंडा (यूनियन जैक) और राष्ट्रीय गान (गॉड सेव अवर नोबल किंग) को भी खूब बढ़ावा दिया गया और पुराने राष्ट्र इस संघ में मातहत सहयोगी के रूप में ही रह पाए।

प्रश्न 19. उदारवादी राष्ट्रवाद के क्या मायने थे? समझाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)

उत्तर— उन्नीसवीं सदी के प्रारम्भ में यूरोप में राष्ट्रीय एकता का विचार प्रबल था जो कि उदारवाद की विचारधारा से निकटता से जुड़ा हुआ था। 'उदारवाद' शब्द लैटिन शब्द 'लिबर' से लिया गया है, जिसका अर्थ है- 'आजाद'। नए मध्यम वर्गों के लिए उदारवाद का अर्थ था- व्यक्ति के लिए आजादी तथा कानून के समक्ष सबकी बराबरी। राजनीतिक रूप से उदारवाद एक ऐसी सरकार पर बल देता था जो सहमति से बनी हो। फ्रांसीसी क्रान्ति के बाद से उदारवाद निरंकुश शासक और पादरीवर्ग के विशेषाधिकारों को समाप्त कर दिया, एक प्रतिनिधि सरकार और संसद के माध्यम से एक संविधान की स्थापना की। 19वीं सदी के उदारवादी निजी सम्पत्ति के स्वामित्व की अनिवार्यता पर भी बल देते थे।

● निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. ग्रेट ब्रिटेन के 'आदर्श राष्ट्र-राज्य' (Ideal Nation-State) बनने के कारण स्पष्ट कीजिए।

उत्तर— ग्रेट ब्रिटेन के 'आदर्श राष्ट्र-राज्य' बनने के प्रमुख कारण निम्न प्रकार हैं-

(1) ब्रिटेन में राष्ट्र-राज्य का निर्माण अचानक हुई कोई उथल-पुथल अथवा क्रान्ति का परिणाम नहीं था, बल्कि यह एक लम्बी चलने वाली प्रक्रिया का परिणाम था।

(2) अठारहवीं सदी के पहले ब्रिटानी राष्ट्र था ही नहीं। ब्रिटानी द्वीप-समूह में रहने वाले लोगों में-अंग्रेज, वेल्स, स्कॉटिश व आयरिश-की मुख्य पहचान नृजातीय थी। इन सभी जातीय समूहों की अपनी सांस्कृतिक और राजनैतिक परम्पराएँ थीं।

(3) जैसे-जैसे आंग्ल राष्ट्र की शक्ति, धन-सम्पत्ति तथा गौरव की वृद्धि हुई तो वह द्वीप-समूह के अन्य जातीय समूहों एवं राष्ट्रों पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने में सफल हुआ।

(4) एक लम्बे टकराव तथा संघर्ष के बाद आंग्ल संसद ने 1688 में राजतंत्र से ताकत छीन ली। इस संसद के माध्यम से एक राष्ट्र-राज्य का निर्माण हुआ जिसके केन्द्र में इंग्लैंड था।

(5) 1707 ई. में इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के बीच एक्ट ऑफ यूनियन हुआ जिससे 'यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन' का गठन हुआ।

(6) अंग्रेजों ने आयरलैंड में प्रोटेस्टेंट धर्म मानने वालों की बहुसंख्यक कैथोलिक देश पर प्रभुत्व बढ़ाने में सहायता की तथा 1801 ई. में आयरलैंड को बलपूर्वक यूनाइटेड किंगडम में शामिल कर लिया।

इस प्रकार एक नये 'ब्रिटानी राष्ट्र' का निर्माण हुआ जिसे कुछ विद्वानों ने 'आदर्श राष्ट्र-राज्य' का नाम दिया।

प्रश्न 2. वियना कांग्रेस द्वारा किये गये प्रमुख निर्णयों का विवेचन कीजिए।

अथवा

वियना सन्धि के मुख्य प्रावधानों की विवेचना कीजिए। इनका क्या उद्देश्य था?

उत्तर—वियना सम्मेलन- नेपोलियन की पराजय के बाद 1815 में वियना में एक सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें आस्ट्रिया, प्रशा, ब्रिटेन, रूस आदि देशों के प्रतिनिधि सम्मिलित हुए। इस सम्मेलन की मेजबानी आस्ट्रिया के चांसलर ड्यूक मेटरनिक ने की।

वियना सन्धि- वियना सम्मेलन में प्रतिनिधियों ने 1815 की वियना-सन्धि तैयार की। इस संधि का उद्देश्य उन कई सारे बदलावों को खत्म करना था जो नेपोलियाई युद्धों के दौरान हुए थे। इस सन्धि के प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित थे-

(1) फ्रांस की क्रान्ति के दौरान हटाए गए बूर्बों वंश की सत्ता को पुनर्स्थापित किया गया।

(2) फ्रांस को उन प्रदेशों से वंचित कर दिया गया जिन पर नेपोलियन ने अधिकार कर लिया था।

(3) फ्रांस की सीमाओं पर अनेक राज्यों की स्थापना की गई ताकि भविष्य में फ्रांस अपने साम्राज्य का विस्तार

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सामाजिक विज्ञान (इतिहास) कक्षा X 27

न कर सके। उत्तर में नीदरलैंड्स का राज्य स्थापित किया गया जिसमें बेल्जियम शामिल था। दक्षिण में पीडमॉण्ट में जेनोआ मिला दिया गया।

(4) प्रशा को उसकी पश्चिमी सीमाओं पर महत्त्वपूर्ण नये प्रदेश दिए गए।

(5) आस्ट्रिया को उत्तरी इटली का नियन्त्रण सौंपा गया।

(6) लेकिन नेपोलियन ने 39 राज्यों का जो जर्मन महासंघ स्थापित किया था, उसे बनाए रखा गया।

(7) पूर्व में रूस को पोलैण्ड का एक हिस्सा दिया गया, जबकि प्रशा को सैक्सनी का एक हिस्सा दिया गया।

वियना-सन्धि की व्यवस्थाओं का उद्देश्य-(1) वियना-सन्धि की व्यवस्थाओं का प्रमुख उद्देश्य उन राजतन्त्रों की पुनर्स्थापना करना था जिन्हें नेपोलियन ने बर्खास्त कर दिया था।

(2) दूसरा प्रमुख उद्देश्य यूरोप में एक नई रूढ़िवादी व्यवस्था स्थापित करना भी था।

प्रश्न 3. राष्ट्रीय राज्य निर्माण में 'लोक संस्कृति की भूमिका' स्पष्ट कीजिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— राष्ट्रीय राज्य निर्माण में 'लोक संस्कृति की भूमिका'

राष्ट्रवाद का विकास केवल युद्धों और क्षेत्रीय विस्तार से नहीं हुआ है अपितु राष्ट्रीय राज्य निर्माण में लोक संस्कृति की भी अहम भूमिका रही है। कला, काव्य, कहानियों-किस्सों और संगीत ने भी राष्ट्रवादी भावनाओं के निर्माण में सहयोग दिया है। उदाहरण के लिए, रूमानियाद जो कि एक सांस्कृतिक आंदोलन था, ने तर्क और विज्ञान की आलोचना की तथा राष्ट्रवादी भावना का निर्माण करने के लिए भावनाओं, अंतर्ज्ञान और विरासत की अनुभूति पर ध्यान केन्द्रित किया।

इसी प्रकार जर्मन दार्शनिक जोहान गॉटफ्रीड हार्डर, जो एक रूमानि चिंतक थे, का मानना था कि असली जर्मन संस्कृति जर्मनी के आम लोग जिन्हें दास वोल्क कहा जाता है, में पाई जा सकती है। हार्डर ने लोक संस्कृति के इन रूपों के संग्रह और संरक्षण की वकालत की, क्योंकि यह राष्ट्र निर्माण के लिए महत्त्वपूर्ण है। 1812 में ग्रिम बंधुओं ने स्थानीय लोककथाओं को एकत्रित करके पुरानी राष्ट्र भावना को पुनर्जीवित किया तथा अशिक्षित दर्शकों में राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया।

प्रश्न 4. 1830 से 1848 ई. तक के काल को क्रान्तियों का युग क्यों कहा जाता है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर— 1830 से 1848 ई. तक के काल में यूरोप में कई क्रांतियाँ हुईं। इसीलिए इस काल को क्रांतियों का युग कहा गया है। जैसे-जैसे रूढ़िवादी व्यवस्थाओं ने अपनी ताकत को और मजबूत बनाने की कोशिश की, वैसे-वैसे उदारवादियों तथा राष्ट्रवादियों ने उनका विरोध किया। अतः यूरोप के अनेक क्षेत्रों में उदारवाद और राष्ट्रवाद को क्रांति से जोड़कर देखा जाने लगा। इटली और जर्मनी के राज्य, ऑटोमन साम्राज्य के सूबे, आयरलैंड और पोलैंड ऐसे ही कुछ क्षेत्र थे। इन क्रांतियों का नेतृत्व उदारवादी-राष्ट्रवादियों ने किया जो शिक्षित मध्यमवर्गीय विशिष्ट लोग थे। इनमें प्रोफेसर, स्कूली-अध्यापक, क्लर्क और वाणिज्य व्यापार में लगे मध्यम वर्गों के लोग शामिल थे। यथा-

(1) फ्रांस में विद्रोह-प्रथम विद्रोह फ्रांस में जुलाई, 1830 में हुआ। बूर्बों राजा, जिन्हें 1815 के बाद हुई रूढ़िवादी प्रतिक्रिया के दौरान सत्ता में बहाल किया गया था, उन्हें अब उदारवादी क्रांतिकारियों ने उखाड़ फेंका। उनके स्थान पर एक संवैधानिक राजतंत्र स्थापित किया गया जिसका अध्यक्ष लुई फिलिप था।

(2) ब्रूसेल्स में विद्रोह-जुलाई क्रान्ति से ब्रूसेल्स में भी विद्रोह भड़क गया जिसके फलस्वरूप बेल्जियम यूनाइटेड किंगडम ऑफ द नीदरलैंड्स से अलग हो गया।

(3) यूनान का स्वतंत्रता संग्राम-यूनान में क्रांतिकारी राष्ट्रवाद की प्रगति से यूनानियों का आजादी के लिए संघर्ष 1821 में आरंभ हो गया। यूनान में उदारवादियों को निर्वासित यूनानियों तथा पश्चिमी यूरोप के अनेक लोगों का भी समर्थन मिला। कवियों और कलाकारों ने एक मुस्लिम साम्राज्य के विरुद्ध यूनानी संघर्ष के लिए जनमत जुटाया, धन इकट्ठा किया तथा युद्ध भी लड़ा। अन्ततः 1832 की कुस्तुनतुनिया की संधि ने यूनान को एक स्वतंत्र राष्ट्र की मान्यता दी।

(4) पेरिस क्रान्ति-1848 में खाने-पीने की कमी और व्यापक बेरोजगारी से पेरिस के लोग सड़कों पर उतर आए। जगह-जगह अवरोध लगाए और लुई फिलिप को भागने को मजबूर किया गया और एक गणतंत्र की घोषणा की गई।

प्रश्न 5. जर्मनी के एकीकरण की प्रक्रिया का संक्षेप में वर्णन कीजिए।

अथवा

जर्मनी के एकीकरण की प्रक्रिया को स्पष्ट कीजिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर-जर्मनी का एकीकरण- वियना कांग्रेस द्वारा जर्मनी के 39 राज्यों का एक शिथिल जर्मन संघ बनाया

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गया। एक जर्मन राष्ट्र सभा की स्थापना की गई जिसका अध्यक्ष आस्ट्रिया के सम्राट को बनाया गया। इससे जर्मन लोगों में घोर असन्तोष व्याप्त था। जर्मनी के राष्ट्रवादियों ने 1815 से जर्मनी के एकीकरण के प्रयास शुरू कर दिए जिनका वर्णन निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत किया जा सकता है-

(1) जॉलवेराइन की स्थापना- 1834 ई. में प्रशा की पहल पर जॉलवेराइन नामक एक शुल्क संघ की स्थापना की गई जिसमें अधिकांश जर्मन राज्य सम्मिलित हो गए। इस संघ ने शुल्क अवरोधों को समाप्त कर दिया तथा मुद्राओं की संख्या केवल दो कर दी जो उससे पहले तीस से ऊपर थी। इसके अलावा रेलवे के जाल ने गतिशीलता बढ़ाई और आर्थिक हितों को राष्ट्रीय एकीकरण का सहायक बनाया। इस प्रकार जॉलवेराइन से जर्मन राज्यों में राष्ट्रीयता की भावना का विकास हुआ। इसने भविष्य में प्रशा के नेतृत्व में जर्मनी के राजनीतिक एकीकरण का मार्ग प्रशस्त कर दिया।

(2) फ्रैंकफर्ट की संसद- सम्पूर्ण जर्मनी के लिए एक नवीन संविधान बनाने के लिए 18 मई, 1848 को फ्रैंकफर्ट संसद के 831 निर्वाचित सदस्यों की एक बैठक हुई। उन्होंने एक जर्मन राष्ट्र के लिए एक संविधान का प्रारूप तैयार किया। इस राष्ट्र की अध्यक्षता एक ऐसे राजा को सौंपी गई जिसे संसद के अधीन रहना था। जब प्रतिनिधियों ने प्रशा के राजा फ्रेडरिक विल्हेम चतुर्थ को ताज पहनाने की कोशिश की तो प्रशा के सम्राट द्वारा जर्मन राज्यों का राजमुकुट धारण करना स्वीकार न करने के कारण वैधानिक तरीकों से जर्मनी के एकीकरण के प्रयासों पर पानी फिर गया।

(3) बिस्मार्क का योगदान- सन् 1862 में प्रशा के सम्राट विलियम प्रथम तथा उसके प्रधानमंत्री ऑटो वॉन बिस्मार्क ने जर्मनी के एकीकरण के आन्दोलन का नेतृत्व सम्भाल लिया। बिस्मार्क ने प्रशा की सेना तथा नौकरशाही की सहायता ली। सात वर्ष के दौरान ऑस्ट्रिया, डेनमार्क और फ्रांस से तीन युद्ध हुए तथा इसमें प्रशा की जीत हुई तथा इसके साथ ही जर्मनी के एकीकरण की प्रक्रिया पूर्ण हुई। 18 जनवरी, 1871 को बिस्मार्क ने वसाय के शीश महल में प्रशा के सम्राट विलियम प्रथम को नवीन जर्मन साम्राज्य का सम्राट घोषित किया।

प्रश्न 6. राष्ट्रवाद की प्रथम स्पष्ट अभिव्यक्ति 1789 की फ्रांसीसी क्रान्ति से प्रारम्भ हुई थी। स्पष्ट करें।

अथवा

फ्रांसीसी क्रान्ति के पश्चात् फ्रांस में आए बदलावों का विस्तार से वर्णन कीजिए।

(माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)

उत्तर— यूरोप में राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति- यूरोप में राष्ट्रवाद की प्रथम स्पष्ट अभिव्यक्ति सन् 1789 में फ्रांसीसी क्रान्ति के साथ हुई। यथा-

(1) फ्रांस के लोगों में सामूहिक पहचान की भावना पैदा की- इस क्रान्ति में फ्रांसीसी क्रान्तिकारियों ने प्रारम्भ से ऐसे अनेक कदम उठाए जिनसे फ्रांसीसी लोगों में एक सामूहिक पहचान की भावना उत्पन्न हो सकती थी। यथा-

(i) फ्रांसीसी क्रान्तिकारियों के पितृभूमि और नागरिक जैसे विचारों ने एक संयुक्त समुदाय के विचार पर बल दिया जिसे एक संविधान के अन्तर्गत समान अधिकार प्राप्त थे।

(ii) एक नया फ्रांसीसी झंडा-तिरंगा चुना गया जिसने पहले के राष्ट्रध्वज की जगह ले ली।

(iii) इस्टेट जनरल का चुनाव सक्रिय नागरिकों के समूह द्वारा किया जाने लगा और उसका नाम बदलकर नेशनल एसेम्बली कर दिया गया।

(iv) नयी स्तुतियाँ रची गईं, शपथें ली गईं, शहीदों का गुणगान हुआ और यह सब राष्ट्र के नाम पर हुआ।

(v) एक केन्द्रीय प्रशासनिक व्यवस्था लागू की गई जिसने अपने भू-भाग में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए समान कानून बनाए।

(vi) आंतरिक आयात-निर्यात शुल्क समाप्त कर दिए गए और भार तथा मापने की एक समान व्यवस्था लागू की गई।

(vii) पेरिस की फ्रेंच बोली को राष्ट्र की साझा भाषा बनाया गया।

(2) क्रान्तिकारियों का लक्ष्य यूरोप के अन्य लोगों को राष्ट्रों में गठित होने में मदद करना- फ्रांसीसी क्रान्तिकारियों का प्रमुख लक्ष्य यूरोप के लोगों को निरंकुश शासकों से मुक्त कराना था। अर्थात् फ्रांस यूरोप के अन्य लोगों को राष्ट्रों में गठित होने में मदद देगा। जब फ्रांस की घटनाओं की खबर यूरोप के विभिन्न शहरों में पहुँची तो छात्र तथा शिक्षित मध्य वर्गों के सदस्य जैकोबिन क्लबों की स्थापना करने लगे, उनकी गतिविधियों और अभियानों ने उन फ्रेंच सेनाओं के लिए रास्ता तैयार किया जो 1790 के दशक में हालैंड, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड और इटली के बड़े इलाकों में घुसीं। इस प्रकार क्रान्तिकारी युद्धों के शुरू होने के साथ ही फ्रांसीसी सेनाएँ राष्ट्र के विचार को विदेशों में ले जाने लगीं।

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(3) क्रांति के बाद के परिणाम राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति-इस क्रांति के बाद नेपोलियन ने प्रशासनिक क्षेत्रों में जिन क्रान्तिकारी सिद्धान्तों को सम्मिलित किया वे राष्ट्रवाद की ही अभिव्यक्ति थे। यथा-

(i) सन् 1804 में नेपोलियन ने एक नागरिक संहिता का निर्माण किया था जिसमें जन्म पर आधारित विशेषाधिकारों को समाप्त कर दिया था।

(ii) इस नागरिक संहिता में कानून के समक्ष समानता एवं सम्पत्ति के अधिकार को सुरक्षित रखने की बात कही गई थी।

(iii) कुलीन वर्ग को प्राप्त विशेषाधिकारों की समाप्ति के पश्चात् शिक्षित एवं उदारवादी मध्य वर्गों के बीच राष्ट्रीय एकता के विचारों का अधिक प्रचार-प्रसार हुआ।

प्रश्न 7. 1848 ई. की जर्मन क्रान्ति का वर्णन कीजिए।

उत्तर- 1848 की जर्मन क्रान्ति

1848 में जब अनेक यूरोपीय देशों में गरीबी, बेरोजगारी और भुखमरी से किसान-मजदूर विद्रोह कर रहे थे, तब उसके समानान्तर पढ़े-लिखे मध्य वर्गों की एक क्रान्ति भी हो रही थी। जर्मनी भी उदारवादी मध्य वर्ग क्रान्ति की ओर अग्रसर हो रहा था। यथा-

(i) एक राष्ट्र-राज्य के निर्माण की माँग-1848 में जर्मनी के उदारवादी मध्य वर्गों के स्त्री-पुरुषों ने संविधानवाद की माँग को राष्ट्रीय एकीकरण की माँग से जोड़ दिया। उन्होंने बढ़ते जन-असंतोष का फायदा उठाते हुए एक राष्ट्र-राज्य के निर्माण की माँगों को आगे बढ़ाया। यह राष्ट्र-राज्य संविधान, प्रेस की स्वतंत्रता और संगठन बनाने की आजादी जैसे संसदीय सिद्धान्तों पर आधारित था।

(ii) एक सर्व-जर्मन नेशनल असेंबली का निर्माण-जर्मन इलाकों में राजनीतिक संगठनों ने फ्रैंकफर्ट शहर में मिलकर एक सर्व-जर्मन नेशनल एसेम्बली के पक्ष में मतदान का फैसला लिया। 18 मई, 1848 को 831 निर्वाचित प्रतिनिधियों ने फ्रैंकफर्ट संसद में अपना स्थान ग्रहण किया। यह संसद सेंट पॉल चर्च में आयोजित हुई।

(iii) एक जर्मन राष्ट्र के लिए एक संविधान का प्रारूप तैयार करना-संसद ने एक जर्मन राष्ट्र के लिए एक संविधान का प्रारूप तैयार किया। इस राष्ट्र की अध्यक्षता ऐसे राज्य को सौंपी गई जिसे संसद के अधीन रहना था।

(iv) एक राष्ट्र निर्माण की उदारवादी पहल की समाप्ति-जिस राज्य को राष्ट्र की अध्यक्षता सौंपी गई थी, उसे ताज पहनने की उदारवादियों की पेशकश को ठुकरा दिया और उन राजाओं का साथ दिया, जो निर्वाचित सभा संसद के विरोधी थे। संसद में मध्य वर्ग का प्रभाव अधिक था। मध्य वर्ग ने मजदूरों और कारीगरों की माँगों का विरोध किया था। इसलिए मजदूर और कारीगरों ने भी इनका समर्थन नहीं किया। इस प्रकार कुलीन वर्ग, सेना तथा राजशाही ने मिलकर असेंबली का विरोध किया और असेंबली भंग होने को मजबूर हो गई।

(v) यद्यपि रूढ़िवादी ताकतों ने 1848 की उदारवादी क्रान्ति को दबा दिया था तथापि उदारवादी क्रान्तिकारियों को उसे कुछ रियायतें देनी ही पड़ीं।

प्रश्न 8. यूरोप में राष्ट्रवाद में सहायक प्रमुख कारकों को स्पष्ट कीजिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर- यूरोप में राष्ट्रवाद में सहायक प्रमुख कारक निम्न प्रकार हैं-

1. मध्य वर्ग का उदय-पश्चिमी तथा मध्य यूरोप में औद्योगीकरण के फलस्वरूप शहरों का विकास हुआ तथा नया सामाजिक समूह (श्रमिक वर्ग, उद्योगपति, व्यापारियों) अस्तित्व में आया। इन वर्गों में सामंतवादी व्यवस्था के खिलाफ असंतोष राष्ट्रवाद के उदय का कारण बना।

2. उदारवादियों द्वारा राष्ट्रवाद का प्रसार-उदारवादी व्यक्तिगत स्वतंत्रताओं को (भाषण, लेखन, सभा संगठन, निजी सम्पत्ति की सुरक्षा) सुनिश्चित करना चाहते थे। उदारवादी राजतांत्रिक व्यवस्था और सामंतवादी व्यवस्था के विरोधी थे इसलिए उन्होंने लोगों में राष्ट्रीयता की भावना पैदा की।

3. इंग्लैंड और फ्रांस की क्रान्ति-इंग्लैंड की क्रान्ति ने इस मान्यता को बल दिया कि किसी भी प्रकार के शासनतंत्र में दैवीय अधिकार का औचित्य नहीं है। फ्रांस की क्रान्ति ने इस धारणा को जन्म दिया कि व्यक्ति की स्वतंत्रता इतनी पावन है कि कोई भी सत्ता उसकी अवहेलना नहीं कर सकती। फलस्वरूप यूरोप में भी राष्ट्रवाद की भावना बलवती हुई।

4. 1815 ई. के बाद का नया रूढ़िवाद-1815 में नेपोलियन की हार के बाद वियना सम्मेलन के प्रतिनिधियों ने वियना-सन्धि तैयार की जिसके परिणामस्वरूप यूरोप में नई रूढ़िवादी व्यवस्था स्थापित कर दी। इस संधि के कारण पुनः बूर्बो राजवंश को शासन करने का अधिकार दे दिया। इससे लोगों में आक्रोश की भावना जागृत हुई।

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5. क्रान्तिकारी—कई यूरोपीय राज्यों में क्रान्तिकारियों ने गुप्त संगठनों का निर्माण किया। 'यंग यूरोप' नामक संगठन का निर्माण मेत्सिनी द्वारा किया गया। अधिकतर क्रान्तिकारी राष्ट्रराज्यों की स्थापना को आजादी के संघर्ष के लिए अनिवार्य हिस्सा मानते थे।

6. यूनान का स्वतंत्रता संग्राम—यूनान के स्वतंत्रता संग्राम ने पूरे यूरोप के शिक्षित अभिजात वर्ग में राष्ट्रीय भावनाओं का संचार किया।

7. भाषा और लोककथाओं का योगदान—राष्ट्रवाद का विकास केवल युद्धों और क्षेत्रीय विस्तार से नहीं हुआ अपितु कला, संस्कृति, काव्य, लोककथाओं ने भी राष्ट्रवादी भावनाओं को गढ़ने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।

प्रश्न 9. 'राष्ट्रवाद' से क्या अभिप्राय है? यूरोप में राष्ट्रवाद के उद्भव व विकास के दौरान अपनाये गये प्रतीकों का संक्षिप्त उल्लेख कीजिए।

*( प्रश्न बैंक )*

उत्तर—राष्ट्रवाद—राष्ट्रवाद का अभिप्राय है किसी भी राष्ट्र के सदस्यों में एक साझा पहचान को बढ़ावा देना। राष्ट्रवाद वह विचारधारा है जो किसी राष्ट्र या राष्ट्र-राज्य के प्रति वफादारी, समर्पण या निष्ठा पर जोर देती है और मानती है कि ऐसे दायित्व अन्य व्यक्तिगत या समूह हितों से अधिक महत्त्वपूर्ण हैं। राष्ट्रवाद की भावनाओं की जड़ें जमाने के लिए कई प्रतीकों का सहारा लिया जाता है, जैसे—राष्ट्रध्वज, राष्ट्रीय प्रतीक, राष्ट्रगान। आइए अब हम कुछ प्रतीकों को देखते हैं—

(i) मारीआन—कलाकारों ने स्वतंत्रता, न्याय तथा गणतंत्र जैसे विचारों को व्यक्त करने के लिए नारी रूपक किया। इस नारी रूपक को लोकप्रिय ईसाई नाम मारीआन दिया गया, जिसने जन-राष्ट्र के विचार को रेखांकित किया। मारीआन की प्रतिमा की छवि को सिक्कों तथा डाक टिकटों पर अंकित किया गया ताकि जनता को एकता के राष्ट्रीय प्रतीक की याद रहे।

(ii) जर्मेनिया—मारीआन भी जर्मेनिया की भाँति नारी रूपक थी। नारी रूप में जर्मेनिया का चित्र जर्मनी की स्वतंत्रता तथा अखण्डता को प्रतिबिम्बित करता है।

(iii) कुछ अन्य प्रतीक—

गुण

प्रतीकात्मक अर्थ

टूटी हुई बेड़ियाँ

आजादी मिलना

बाज-छाप कवच

जर्मन साम्राज्य की प्रतीक-शक्ति

बलूत पत्तियों का मुकुट

बहादुरी

तलवार

मुकाबले की तैयारी

तलवार पर लिपटी जैतून की डाली

शान्ति की चाह

काला, लाल और सुनहरा तिरंगा

1848 में उदारवादी-राष्ट्रवादियों का झण्डा, जिसे जर्मन राज्यों के ड्यूक्स ने प्रतिबन्धित घोषित कर दिया

उगते सूर्य की किरणें

एक नए युग का सूत्रपात।

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