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सामाजिक विज्ञान (Social Science)हिंदी माध्यम2026-27

RBSE Class 10 SST Chapter 10 Solutions in Hindi — [भूगोल] खनिज तथा ऊर्जा संसाधन | पासबुक हल, नोट्स

📅 अंतिम अपडेट: 2026-09-10📖 RBSE/NCERT Solutions
भाग 1 — समाधान (भूगोल पाठ 5)

📖 1. समाधान: पाठगत एवं पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नोत्तर

राजस्थान बोर्ड कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान (भूगोल) — सभी पाठगत प्रश्नों एवं पाठ्यपुस्तक अभ्यास के संपूर्ण सटीक उत्तर।

पाठगत प्रश्न

पृष्ठ 42

प्रश्न 1. रोशनी देने वाले बल्ब में कितने खनिज प्रयुक्त होते हैं?

उत्तर— रोशनी देने वाले बल्ब में ऐल्युमीनियम, ताँबा, टंगस्टन, डोलोमाइट तथा सीसा आदि खनिज प्रयुक्त होते हैं।

पृष्ठ 44

प्रश्न 2. एक खुली खदान (open pit mine), उत्खनन व एक शैफ्टयुक्त भूमिगत खदान में क्या अन्तर है?

उत्तर—

खुली खदान— जिस समय खनिज धरातल की ऊपरी परतों में पाए जाते हैं तो उन्हें ऊपर की मिट्टी हटाकर निकाल लिया जाता है। इस प्रकार की खदान खुली खदान के नाम से जानी जाती है।

उत्खनन— खदान से खनिजों को प्राप्त करने की प्रक्रिया उत्खनन कहलाती है। उत्खनन खुली खदान की अपेक्षा उथला होता है।

शैफ्टयुक्त भूमिगत खदान— कई सौ मीटर गहराई पर गली युक्त खदान शैफ्टयुक्त खदान कहलाती है। यथा-झरिया में कोयला की खदानें।

पृष्ठ 48

प्रश्न 3. भारत के भौतिक मानचित्र पर बॉक्साइट की खानें चिह्नित करें।

उत्तर—

[भारत - बॉक्साइट की प्रमुख खानें]

कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान पाठ 10 खनिज तथा ऊर्जा संसाधन चित्र 1

  • **संकेत:**
  • [●] बॉक्साइट की खानें
  • मानचित्र में चिह्नित स्थान: कटनी, अमरकंटक, बिलासपुर, मैकाल हिल, कोरापुट।
  • मानचित्र पैमाने पर आधारित नहीं है।

--- [ पृष्ठ संख्या: 205 ] ---

प्रश्न 4. छोटा नागपुर क्षेत्र खनिजों का भंडार क्यों है?

उत्तर— भारत में छोटा नागपुर का क्षेत्र खनिजों का भंडार है। यहाँ अनेक प्रकार के खनिज मिलते हैं। यहाँ कोयला, ताँबा, अभ्रक, बॉक्साइट, लौह अयस्क, मैंगनीज, चूना पत्थर, डोलोमाइट, एस्बेस्टस, क्रोनाइट, सोना आदि अनेक खनिज पाये जाते हैं। छोटा नागपुर क्षेत्र पठारी भूमि है। यह पठार आर्कियन ग्रेनाइट कोलाराइड, बेसाल्ट एवं नीस चट्टानों से बना हुआ है। इसकी उत्तरी एवं दक्षिणी सीमावर्ती सीमा पर कहीं-कहीं धारवाड़ चट्टानें भी मिलती हैं। यहाँ भूगर्भिक दृष्टि से अनेक विभिन्नताएँ देखने को मिलती हैं। इसी कारण से यहाँ चट्टानों की नसों में अनेक खनिज व्याप्त हैं। इन खनिजों में विभिन्नता भी पाई जाती है।

पृष्ठ 50

प्रश्न 5. उन पदार्थों की सूची बनाएँ जहाँ खनिजों की अपेक्षा उनके प्रतिस्थापनों का प्रयोग हो रहा है। ये प्रतिस्थापन क्या हैं और कहाँ से प्राप्त होते हैं?

उत्तर—

पदार्थ

प्रतिस्थापन

प्रतिस्थापन जहाँ से प्राप्त होते हैं

1.

पेट्रोलियम

सी.एन.जी.

भू-गर्भ

2.

तापीय ऊर्जा (कोयला से प्राप्त)

जल विद्युत

वर्षा का जल, नदियाँ

3.

धातुओं से बने बिजली के उपकरण

प्लास्टिक

रसायन

4.

धातु से बनी कुर्सियाँ

प्लास्टिक

रसायन

5.

काँच की बोतल

प्लास्टिक

रसायन

पृष्ठ 54

प्रश्न 6. कुछ नदी घाटी परियोजनाओं के नाम बताएँ तथा इन नदियों पर बने बाँधों का नाम लिखिए।

उत्तर—

नदी घाटी परियोजनाएँ

नदी का नाम

बाँध

(i) चम्बल नदी घाटी परियोजना

चम्बल नदी

कोटा बैराज, राणा प्रताप सागर बाँध, गाँधी सागर बाँध, जवाहर सागर बाँध

(ii) सरदार सरोवर परियोजना

नर्मदा नदी

सरदार सरोवर बाँध

(iii) महानदी परियोजना

महानदी

हीराकुंड बाँध

(iv) सोन नदी परियोजना

सोन नदी

रिहन्द बाँध

(v) कोयना परियोजना

कोयना नदी

कोयना बाँध

(vi) टिहरी बाँध परियोजना

गंगा नदी

टिहरी बाँध

(vii) भाखड़ा-नांगल परियोजना

सतलुज नदी

भाखड़ा-नांगल बाँध

(viii) दामोदर घाटी परियोजना

दामोदर, बराका और शेनार

पंचेत पहाड़ी बाँध, बर्मी बाँध

प्रश्न 7. भारत के मानचित्र पर 6 परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की अवस्थिति दिखाएँ तथा उनके राज्यों के नाम ज्ञात करें जिनमें ये अवस्थित हैं।

उत्तर—

परमाणु ऊर्जा संयंत्र

राज्य

1. नरोरा

उत्तरप्रदेश

2. रावतभाटा

राजस्थान

3. काकरापारा

गुजरात

4. तारापुर

महाराष्ट्र

5. कैगा

कर्नाटक

6. कलपक्कम

तमिलनाडु

[ नोट—मानचित्र में अवस्थिति मानचित्र सम्बन्धी प्रश्नों में देखें ]

--- [ पृष्ठ संख्या: 206 ] ---

सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X 199

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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

1. बहुवैकल्पिक प्रश्न-

(i) निम्नलिखित में से कौनसा खनिज अपक्षयित पदार्थ के अवशिष्ट भार को त्यागता हुआ चट्टानों के अपघटन से बनता है?

(क) कोयला (ख) बॉक्साइट (ग) सोना (घ) जस्ता।

(ii) झारखण्ड में स्थित कोडरमा निम्नलिखित में किस खनिज का अग्रणी उत्पादक है-

(क) बॉक्साइट (ख) अभ्रक (ग) लौह-अयस्क (घ) ताँबा।

(iii) निम्नलिखित चट्टानों में से किस चट्टान के स्तरों में खनिजों का निक्षेपण और संचयन होता है?

(क) तलछटी चट्टानें (ख) कायान्तरित चट्टानें

(ग) आग्नेय चट्टानें (घ) इनमें से कोई नहीं।

(iv) मोनाजाइट रेत में निम्नलिखित में से कौनसा खनिज पाया जाता है?

(क) खनिज तेल (ख) यूरेनियम (ग) थोरियम (घ) कोयला।

उत्तरमाला— (i) (ख) (ii) (ख) (iii) (क) (iv) (ग)।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।

प्रश्न (i) निम्नलिखित में अन्तर 30 शब्दों से अधिक न दें।

(क) लौह और अलौह खनिज (प्रश्न बैंक)

उत्तर—

लौह खनिज

अलौह खनिज

1. इन खनिजों में लोहे का अंश पाया जाता है।

1. इन खनिजों में लोहे के अंश का अभाव होता है।

2. इन खनिजों में लौह अयस्क, मैंगनीज, निकल कोबाल्ट आदि सम्मिलित हैं।

2. इन खनिजों में ताँबा, बॉक्साइट, सीसा, जस्ता, चाँदी आदि सम्मिलित हैं।

(ख) परम्परागत तथा गैर-परम्परागत ऊर्जा साधन

उत्तर—

ऊर्जा के परम्परागत साधन

ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधन

1. इनमें लकड़ी, उपले, कोयला, खनिज तेल, प्राकृतिक गैस तथा जल विद्युत शामिल हैं।

1. इनमें सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोगैस, भूतापीय ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा शामिल हैं।

2. कोयला, खनिज तेल व प्राकृतिक गैस अनवीकरण योग्य हैं।

2. परमाणु ऊर्जा को छोड़कर शेष नवीकरण योग्य हैं।

3. काफी खर्चीले हैं।

3. कम खर्चीले हैं।

4. पर्यावरण प्रदूषण करते हैं।

4. पर्यावरण प्रदूषण नहीं करते हैं।

प्रश्न (ii) खनिज क्या है?

उत्तर— भू-वैज्ञानिकों के अनुसार खनिज एक प्राकृतिक रूप से उत्पन्न ऐसा समरूप तत्त्व है जिसकी एक निश्चित आन्तरिक संरचना है। ये प्रकृति में अनेक रूपों में पाए जाते हैं जिसमें कठोर हीरा तथा नरम चूना तक शामिल हैं।

प्रश्न (iii) आग्नेय तथा कायान्तरित चट्टानों में खनिजों का निर्माण कैसे होता है?

उत्तर— आग्नेय तथा कायान्तरित चट्टानों में खनिजों का निर्माण दबाव एवं ताप वृद्धि का परिणाम है। इनका निर्माण अधिकतर उस समय होता है जब चट्टानों में विद्यमान खनिज तत्व ताप, द्रव एवं गैसीय प्रभाव से तरल अथवा गैसीय अवस्था में बदल जाते हैं तो ये दरारों के सहारे भू-पृष्ठ की तरफ धकेले जाते हैं तथा ऊपर जाते हुए ये ठण्डे होकर जम जाते हैं।

प्रश्न (iv) हमें खनिजों के संरक्षण की क्यों आवश्यकता है?

अथवा

खनिज संसाधनों का संरक्षण क्यों आवश्यक है? समझाइए।

उत्तर— (i) प्रकृति में उपलब्ध अधिकतर खनिज नवीकरण योग्य नहीं हैं। (ii) इसके निश्चित एवं सीमित भण्डार हैं तथा इनका निर्माण लाखों वर्षों में होता है। (iii) खनिज निर्माण की भूगर्भिक क्रिया इतनी धीमी है

--- [ पृष्ठ संख्या: 207 ] ---

कि उनके वर्तमान उपयोग दर की तुलना में इनके पुनर्भरन की गति बहुत कम है। अतः खनिजों का संरक्षण आवश्यक है।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए।

प्रश्न (i) भारत में कोयले के वितरण का वर्णन कीजिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— भारत में कोयले का वितरण

भारत में कोयले का वितरण बड़ा ही असमान है। भारत में कोयला निम्नलिखित दो प्रमुख भूगर्भिक युगों के शैल क्रम में पाया जाता है-

(1) गोंडवाना क्षेत्र— गोंडवाना क्षेत्र में 200 लाख वर्ष से अधिक आयु के कोयले के जमाव पाए जाते हैं। गोंडवाना क्षेत्र का कोयला धातुशोधन कोयला है। देश में इसके भण्डार दामोदर घाटी में पश्चिम बंगाल तथा झारखण्ड, झरिया, बोकारो, रानीगंज में स्थित हैं जो कि महत्त्वपूर्ण कोयला क्षेत्र हैं। गोदावरी, महानदी, सोन व वर्धा नदी घाटियों में भी कोयले के जमाव पाए जाते हैं।

(2) टरशियरी क्षेत्र— टरशियरी क्षेत्र में लगभग 55 लाख वर्ष पुराने कोयले के जमाव पाए जाते हैं। देश में इसके भण्डार उत्तर-पूर्वी राज्यों, यथा-मेघालय, असम, अरुणाचल प्रदेश तथा नागालैण्ड राज्यों में पाए जाते हैं।

कोयले की एक किस्म लिग्नाइट है जो कि घटिया किस्म का कोयला होता है। इसका रंग भूरा होता है। यह मुलायम होता है जिसमें नमी की मात्रा अधिक होती है। देश में लिग्नाइट कोयले के भण्डार तमिलनाडु के नैवेली क्षेत्र तथा राजस्थान में पाए जाते हैं।

प्रश्न (ii) भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्ज्वल है, क्यों? (प्रश्न बैंक)

अथवा

हमारे देश में सौर ऊर्जा का भविष्य कैसा है? लिखिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्ज्वल होने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-

(1) भारत एक उष्ण कटिबन्धीय देश है। यहाँ सौर ऊर्जा के दोहन की असीम सम्भावनाएँ हैं।

(2) सौर ऊर्जा का अर्थ सूर्य से प्राप्त ऊर्जा है। भारत में विपुल मात्रा में वर्ष-भर सौर ताप की प्राप्ति होती है।

(3) यह ऊर्जा का नवीकरणीय स्रोत है।

(4) सौर ऊर्जा के प्रयोग से प्रदूषण नहीं होता है।

(5) भारत में उपलब्ध परम्परागत ऊर्जा संसाधन वर्तमान उपयोग की दर के अनुसार आने वाले 50 वर्षों में समाप्त हो जायेंगे। अतः सौर ऊर्जा का महत्त्व बढ़ जाता है।

(6) धूप को फोटो-वोल्टाइक प्रौद्योगिकी के द्वारा सीधे विद्युत में परिवर्तित किया जा सकता है।

(7) थार का मरुस्थल भारत का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा केन्द्र बन सकता है।

(8) भारत के ग्रामीण तथा सुदूर क्षेत्रों में सौर ऊर्जा तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

(9) कुछ बड़े सौर ऊर्जा संयंत्र देश के विभिन्न भागों में स्थापित किये जा रहे हैं।

(10) सौर ऊर्जा के उपयोग से ग्रामीण घरों की ईंधन के लिए उपलों व लकड़ी की निर्भरता कम होगी जिससे पर्यावरण कम दूषित होगा तथा गोबर का उपयोग खाद के रूप में किया जा सकेगा।

अतः यह कहा जा सकता है कि भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्ज्वल है।

[वर्ग पहेली (खनिज)]

कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान पाठ 10 खनिज तथा ऊर्जा संसाधन चित्र 2

क्रियाकलाप

प्रश्न- नीचे दी गई वर्ग पहेली में उपयुक्त खनिजों का नाम भरें-

क्षैतिज

ऊर्ध्वाधर

1. एक लौह खनिज (9)

1. प्लेसर निक्षेपों से प्राप्त होता है

2. सीमेंट उद्योग में प्रयुक्त कच्चा माल (9)

2. बेलाडिला में खनन किया जाने वाला लौह-अयस्क (8)

3. चुंबकीय गुणों वाला सर्वश्रेष्ठ लोहा (9)

3. विद्युत उद्योग में अपरिहार्य (4)

4. उत्कृष्ट कोटि का कठोर कोयला (10)

4. उत्तरी-पूर्वी भारत में मिलने वाले कोयले की भूगर्भिक आयु (8)

5. इस अयस्क से एल्युमीनियम प्राप्त किया जाता है (7)

5. शिराओं तथा शिलानिक्षेपों में निर्मित (3)

6. इस खनिज के लिए खेतड़ी खदानें प्रसिद्ध हैं (6)

--- [ पृष्ठ संख्या: 208 ] ---

सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X 201

7. वाष्पीकरण से निर्मित (6)

[नोट : पहेली के उत्तर अंग्रेजी के शब्दों में हैं।]

उत्तर—

[खनिज पहेली (Crossword Puzzle)]

कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान पाठ 10 खनिज तथा ऊर्जा संसाधन चित्र 3

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भाग 2 — रिवीजन नोट्स (Notes & Summary)

📝 2. नोट्स: पाठ-सार, मुख्य बिंदु एवं शब्दावली

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं, भौगोलिक परिभाषाएं, राजनीतिक सिद्धांत एवं संपूर्ण अध्याय का सारगर्भित सारांश।

पाठ-सार

खनिज क्या है?-भू-वैज्ञानिकों के अनुसार खनिज एक प्राकृतिक रूप से विद्यमान समरूप तत्त्व है जिसकी एक निश्चित आन्तरिक संरचना होती है। खनिज प्रकृति में अनेक रूपों में पाए जाते हैं। एक खनिज विशेष जो निश्चित तत्त्वों का योग है और उन तत्त्वों का निर्माण उस समय के भौतिक व रासायनिक परिस्थितियों का परिणाम है। इसके फलस्वरूप ही खनिजों में विविध रंग, कठोरता, चमक, घनत्व तथा विविध क्रिस्टल पाये जाते हैं।

खनिजों का वर्गीकरण-सामान्य व वाणिज्यिक उद्देश्य से खनिज निम्न प्रकार से वर्गीकृत किये जाते हैं-

[खनिजों का वर्गीकरण चार्ट]

कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान पाठ 10 खनिज तथा ऊर्जा संसाधन चित्र 4

खनिजों की उपलब्धता-सामान्य रूप से खनिज आग्नेय तथा कायान्तरित चट्टानों की खनिज दरारों, जोड़ों, भ्रंशों व विदरों में, अवसादी चट्टानों के खनिज संस्तरों या परतों में, धरातलीय चट्टानों के अपघटन से, पहाड़ियों के आधार तथा घाटी तली के रेत में जलोढ़ जमाव के रूप में तथा महासागरीय जल में पाए जाते हैं।

(अ) लौह खनिज-लौह खनिज धात्विक खनिजों के कुल उत्पादन मूल्य के तीन-चौथाई भाग का योगदान करते हैं। ये धातु शोधन उद्योगों के विकास को मजबूत आधार प्रदान करते हैं।

(i) लौह अयस्क-लौह अयस्क एक आधारभूत खनिज है तथा औद्योगिक विकास की रीढ़ है। मैग्नेटाइट सर्वोत्तम प्रकार का लौह अयस्क है जिसमें 70 प्रतिशत लोहांश होता है। भारत में लौह अयस्क के विपुल संसाधन विद्यमान हैं। मैग्नेटाइट सर्वोत्तम प्रकार का लौह अयस्क है और हेमेटाइट सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण औद्योगिक लौह अयस्क है जिसका अधिकतम मात्रा में उपयोग हुआ है।

भारत में लौह अयस्क की निम्न प्रमुख पेटियाँ हैं-

(1) ओडिशा-झारखण्ड पेटी, (2) दुर्ग-बस्तर चन्द्रपुर पेटी, (3) वल्लारि चित्रदुर्ग, चिक्कमंगलूरू-तुमक्रू पेटी (4) महाराष्ट्र-गोवा पेटी।

(ii) मैंगनीज-मैंगनीज मुख्य रूप से इस्पात के विनिर्माण में प्रयोग किया जाता है। भारत में सबसे अधिक मैंगनीज उत्पादन उड़ीसा में होता है।

(ब) अलौह खनिज-भारत में अलौह खनिजों की संचित राशि व उत्पादन अधिक सन्तोषजनक नहीं है। अलौह खनिज धातु-शोधन, इंजीनियरिंग व विद्युत उद्योगों में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। यथा-

--- [ पृष्ठ संख्या: 203 ] ---

(i) ताँबा-भारत में ताँबे के भण्डार न्यून हैं। इसका मुख्य रूप से बिजली के तार बनाने, इलेक्ट्रॉनिक्स और रसायन उद्योगों में उपयोग किया जाता है। मध्य प्रदेश की बालाघाट खदानें देश का लगभग 52 प्रतिशत ताँबा उत्पादन करती हैं। इसके अतिरिक्त झारखण्ड की सिंहभूमि जिला और राजस्थान की खेतड़ी की खदानें ताँबे के लिए प्रसिद्ध हैं।

(ii) बॉक्साइट-बॉक्साइट अयस्क में एल्यूमीनियम धातु मिलती है। हल्की, मजबूत तथा जंगरोधी होने के कारण यह बहुत उपयोगी है। 2018-19 के अनुसार ओडिशा भारत का सबसे बड़ा बॉक्साइट उत्पादक राज्य है।

(स) अधात्विक खनिज-(i) अभ्रक-अभ्रक एक ऐसा खनिज है जो कि प्लेटों अथवा पत्रण क्रम में पाया जाता है। अभ्रक पारदर्शी, काले, हरे, लाल, पीले अथवा भूरे रंग का हो सकता है। बिहार-झारखण्ड की कोडरमा-गया-हजारीबाग पेटी अभ्रक की अग्रणी उत्पादक है। राजस्थान के मुख्य अभ्रक उत्पादक राज्य अजमेर के आस-पास हैं।

(ii) चूना-पत्थर-चूना-पत्थर कैल्शियम या कैल्शियम कार्बोनेट तथा मैग्नीशियम कार्बोनेट से निर्मित चट्टानों में पाया जाता है। सीमेण्ट उद्योग का आधारभूत कच्चा माल चूना-पत्थर होता है।

खनिजों का संरक्षण-भूपर्पटी का एक प्रतिशत खनन योग्य निक्षेप की कुल राशि है। खनिज निर्माण की भूगर्भिक प्रक्रियाएँ इतनी धीमी हैं कि उनके वर्तमान उपभोग की दर की तुलना में उनके पुनर्भरण की दर बहुत कम है। इसी कारण खनिज संसाधन सीमित तथा अनवीकरण योग्य है। अतः धातुओं का पुनः चक्रण, रद्दी धातुओं का प्रयोग तथा अन्य प्रतिस्थापनों का उपयोग भविष्य में खनिज संसाधनों के संरक्षण के उपाय हैं।

(द) ऊर्जा संसाधन-ऊर्जा का उत्पादन ईंधन खनिजों, यथा-कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, यूरेनियम तथा विद्युत से किया जाता है।

(1) परम्परागत ऊर्जा के स्रोत, यथा-

(i) कोयला-भारत में कोयला का उपयोग ऊर्जा उत्पादन तथा उद्योगों और घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ऊर्जा की आपूर्ति के लिए किया जाता है। भारत अपनी वाणिज्यिक ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु मुख्यतः कोयले पर निर्भर है। कोयले के चार रूप हैं-(i) पीट, (ii) लिग्नाइट, (iii) बिटुमिनस और (iv) ऐंथ्रेसाइट। ऐंथ्रेसाइट सर्वोत्तम गुण वाला कठोर कोयला है।

भारत में कोयला दो प्रमुख भूगर्भिक युगों के शैलक्रम में पाया जाता है-एक गोंडवाना में और दूसरा टरशियरी में।

(ii) पेट्रोलियम-पेट्रोलियम या खनिज तेल का उपयोग ताप व प्रकाश के लिए ईंधन, मशीनों को स्नेहक और अनेक विनिर्माण उद्योगों को कच्चा माल प्रदान करता है। भारत में मुम्बई हाई, गुजरात और असम प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादक क्षेत्र हैं।

(iii) प्राकृतिक गैस-प्राकृतिक गैस एक महत्त्वपूर्ण स्वच्छ ऊर्जा संसाधन है। इसे ऊर्जा के एक साधन के रूप में तथा पेट्रो-रसायन उद्योग के एक औद्योगिक कच्चे माल के रूप में प्रयोग किया जाता है। यह पेट्रोलियम के भण्डार के साथ पाई जाती है।

(iv) विद्युत-विद्युत मुख्य रूप से दो प्रकार से उत्पन्न की जाती है-(1) प्रवाही जल से जो कि हाइड्रो-टरबाइन चलाकर जल विद्युत उत्पन्न करता है। (2) तापीय विद्युत।

(2) गैर-परम्परागत ऊर्जा के साधन-सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, जैविक ऊर्जा तथा अवशिष्ट पदार्थ जनित ऊर्जा के उपयोग की देश में अधिक आवश्यकता है। ये ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधन कहलाते हैं।

(3) परमाणु अथवा आणविक ऊर्जा-परमाणु अथवा आणविक ऊर्जा अणुओं की संरचना को बदलने से प्राप्त की जाती है। यूरेनियम तथा थोरियम झारखण्ड, राजस्थान तथा केरल में पाए जाते हैं।

(4) भूतापीय ऊर्जा-पृथ्वी के आन्तरिक भागों से ताप का प्रयोग कर उत्पन्न की जाने वाली विद्युत को भूतापीय ऊर्जा कहते हैं। भूतापीय ऊर्जा के दोहन के लिए भारत में दो प्रायोगिक परियोजनाएँ शुरू की गई हैं- (i) हिमाचल के मणिकरण के निकट पार्वती घाटी में, (ii) लद्दाख में पूगा घाटी में।

ऊर्जा संसाधनों का संरक्षण-आर्थिक विकास के लिए ऊर्जा एक आधारभूत आवश्यकता है। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के प्रत्येक सेक्टर कृषि, उद्योग, परिवहन, वाणिज्य व घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ऊर्जा के निवेश की आवश्यकता है।

--- [ पृष्ठ संख्या: 204 ] ---

सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X | 197

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भाग 3 — परीक्षा उपयोगी प्रश्न (Important Questions)

3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर एवं बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक, लघूत्तरात्मक एवं निबंधात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

● बहुविकल्पीय प्रश्न-

1. निम्न में से धात्विक खनिज का उदाहरण है- (प्रश्न बैंक)

(अ) लौह अयस्क (ब) नमक (स) कोयला (द) अभ्रक

2. निम्न में से कौनसा ऊर्जा खनिज है- (प्रश्न बैंक)

(अ) चूना-पत्थर (ब) बलुआ पत्थर (स) कोयला (द) जस्ता

3. निम्न में से अधात्विक खनिज है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)

(अ) बॉक्साइट (ब) सीसा (स) अभ्रक (द) सोना

4. निम्न में से कौनसा अलौह खनिज है-

(अ) मैंगनीज (ब) निकल (स) कोबाल्ट (द) जस्ता

5. यूरेनियम तथा थोरियम से प्राप्त होती है- (प्रश्न बैंक)

(अ) जल विद्युत (ब) पवन ऊर्जा

(स) ताप विद्युत (द) आणविक तथा परमाणु ऊर्जा

6. दाँतों को गलने से रोकता है- (प्रश्न बैंक)

(अ) डोमेनाइट (ब) फ्लूराइड (स) इल्मेनाइट (द) चूना पत्थर

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7. सर्वश्रेष्ठ लौह अयस्क है? (प्रश्न बैंक)

(अ) मैग्नेटाइट (ब) सिडेराइट (स) हेमेटाइट (द) लिमोनाइट

8. वर्ष 2018-19 के अनुसार भारत का सबसे बड़ा बॉक्साइट उत्पादक राज्य कौन-सा है?

अथवा

हमारे देश का सर्वाधिक बॉक्साइट उत्पादक राज्य कौन-सा है? (प्रश्न बैंक)

(अ) राजस्थान (ब) उत्तरप्रदेश (स) ओडिशा (द) गुजरात

9. चूना-पत्थर का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य (2018-19) कौन-सा है?

(अ) गुजरात (ब) राजस्थान (स) मध्यप्रदेश (द) आन्ध्र प्रदेश

10. हमारे देश में ज्वारीय ऊर्जा उत्पन्न करने हेतु आदर्श क्षेत्र है- (प्रश्न बैंक)

(अ) कच्छ की खाड़ी (ब) खम्भात की खाड़ी (स) सुन्दरबन का डेल्टा (द) उपर्युक्त सभी

11. भारत में सबसे अधिक मैंगनीज उत्पादन किस राज्य में होता है?

(अ) राजस्थान (ब) उड़ीसा (स) कर्नाटक (द) मध्य प्रदेश

12. अधिकतर दंतमंजन टिटेनियम ऑक्साइड से सफेद बनाए जाते हैं। यह जिस खनिज से प्राप्त होता है, वह है-

(अ) रूटायल (ब) इल्मेनाइट (स) एनाटेज (द) उपर्युक्त सभी

13. हमारे कुल पौष्टिक उपभोग का कितने प्रतिशत भाग खनिज का है?

(अ) 3 प्रतिशत (ब) 0.3 प्रतिशत (स) 30 प्रतिशत (द) 0.03 प्रतिशत

14. आग्नेय और कायान्तरित चट्टानों की दरारों, जोड़ों, भ्रंशों में मिलने वाला खनिज है-

(अ) लौह अयस्क (ब) ताँबा (स) जिप्सम (द) पोटाश

15. अवसादी चट्टानों के संस्तरों व परतों में पाये जाने वाला खनिज है-

(अ) जस्ता (ब) ताँबा (स) लौह अयस्क (द) जिंक

16. धरातलीय चट्टानों के अपघटन से जिस खनिज का निर्माण होता है, वह है-

(अ) ताँबा (ब) लोहा (स) पोटाश (द) बॉक्साइट

17. पहाड़ियों के आधार तथा घाटी तल की रेत में जलोढ़ जमाव के रूप में पाए जाने वाला खनिज है-

(अ) सोना (ब) लोहा (स) जस्ता (द) ताँबा

18. मध्यप्रदेश की बालाघाट खदानें देश का कितने प्रतिशत ताँबा उत्पन्न करती हैं?

(अ) लगभग 8% (ब) लगभग 9% (स) लगभग 24% (द) लगभग 52%

19. वर्ष 2018-19 के अनुसार चूना पत्थर उत्पादन में राजस्थान का अंश है- (प्रश्न बैंक)

(अ) 11 प्रतिशत (ब) 22 प्रतिशत (स) 10 प्रतिशत (द) 8 प्रतिशत

20. हमारे देश का सबसे पुराना तेल उत्पादक राज्य है- (प्रश्न बैंक)

(अ) राजस्थान (ब) असम (स) गुजरात (द) बिहार

21. अणुओं की संरचना को बदलने से किस प्रकार की ऊर्जा प्राप्त होती है?

(अ) सौर ऊर्जा (ब) पवन ऊर्जा (स) ज्वारीय ऊर्जा (द) परमाणु ऊर्जा

22. गेल द्वारा निर्मित हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर गैस पाइप लाइन की लम्बाई कितनी है?

(अ) 1,400 किमी. (ब) 1,700 किमी. (स) 1,900 किमी. (द) 2,100 किमी.

23. रावतभाटा आणविक ऊर्जा संयंत्र निम्न में से किस राज्य में स्थित है?

(अ) गुजरात (ब) केरल (स) पंजाब (द) राजस्थान

24. पृथ्वी के आन्तरिक भागों से ताप का प्रयोग कर उत्पन्न की जाने वाली विद्युत को कहा जाता है-

(अ) ज्वारीय ऊर्जा (ब) बायो ऊर्जा (स) भूतापीय ऊर्जा (द) पवन ऊर्जा

25. विभिन्न खनिजों के योग से बनी चट्टानों से निर्मित है-

(अ) वायुमण्डल (ब) जलमण्डल (स) अन्तरिक्ष (द) भूपर्पटी

26. कितने प्रकार के खनिजों की पहचान की जा चुकी है? (प्रश्न बैंक)

(अ) 200 (ब) 500 (स) 2000 (द) 1500

27. 'मैग्नेटाइट' लौह अयस्क में लोहांश पाया जाता है- (प्रश्न बैंक)

(अ) 50% (ब) 60% (स) 70% (द) 80%

--- [ पृष्ठ संख्या: 210 ] ---

सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X | 203

28. कन्नड भाषा में 'कुदरे' शब्द का अर्थ है- (प्रश्न बैंक)

(अ) गधा (ब) घोड़ा (स) ऊँट (द) भैंस

29. राजस्थान में तांबे की खदानें हैं- (प्रश्न बैंक)

(अ) खेतड़ी (ब) अजमेर (स) कोटा (द) श्रीगंगानगर

30. ज्वारीय ऊर्जा किस प्रकार का संसाधन है? (प्रश्न बैंक)

(अ) अजैव (ब) मानवकृत (स) अचक्रीय (द) पुनः पूर्तियोग्य

उत्तरमाला

1. (अ) 2. (स) 3. (स) 4. (द) 5. (द) 6. (ब) 7. (स)

8. (स) 9. (ब) 10. (द) 11. (द) 12. (द) 13. (ब) 14. (ब)

15. (स) 16. (द) 17. (अ) 18. (द) 19. (ब) 20. (ब) 21. (द)

22. (ब) 23. (द) 24. (स) 25. (द) 26. (स) 27. (स) 28. (ब)

29. (अ) 30. (द)।

● रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

1. ............. भारत का सबसे बड़ा मैंगनीज उत्पादक राज्य है। (प्रश्न बैंक)

2. लौह अयस्क की .......... पेटी महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ राज्यों के अन्तर्गत पाई जाती है।

3. ............. मुख्य रूप से इस्पात के विनिर्माण में प्रयोग किया जाता है।

4. राजस्थान की ............. खदानें तांबे के लिए प्रसिद्ध थीं।

5. ......... एक निम्न कोटि का भूरा कोयला होता है।

6. ............. भारत का सबसे पुराना तेल उत्पादक राज्य है।

7. राजस्थान के मुख्य अभ्रक उत्पादक क्षेत्र ............. के आस-पास हैं।

8. उत्तर-पूर्वी भारत के अधिकांश ............. क्षेत्रों में खनिजों का स्वामित्व व्यक्तिगत व समुदायों को प्राप्त है।

9. 2018-19 में भारत में मैंगनीज उत्पादन में मध्यप्रदेश राज्य का अंश ............. प्रतिशत था।

10. केरल में मिलने वाले मोनाजाइट रेत में भी ............. की मात्रा पाई जाती है।

11. ............. प्रौद्योगिकी द्वारा धूप को सीधे विद्युत में परिवर्तित किया जा सकता है।

12. भारत एक ............. देश है। (प्रश्न बैंक)

13. ............. गुजरात का सबसे महत्वपूर्ण तेल क्षेत्र है। (प्रश्न बैंक)

14. कृष्णा-गोदावरी नदी बेसिन में ............. गैस के विशाल भण्डार खोजे गये हैं। (प्रश्न बैंक)

15. भारत में ............. ऊर्जा के उत्पादन की महान संभावनाएँ हैं। (प्रश्न बैंक)

16. महासागरीय ............. का उपयोग विद्युत उत्पादन के लिए किया जा सकता है। (प्रश्न बैंक)

17. आर्थिक विकास के लिए ............. एक आधारभूत आवश्यकता है। (प्रश्न बैंक)

18. खनिज सामान्यतः ............. में पाया जाता है। (प्रश्न बैंक)

उत्तरमाला

1. मध्य प्रदेश 2. दुर्ग-बस्तर-चन्द्रपुर 3. मैंगनीज 4. खेतड़ी 5. लिग्नाइट 6. असम 7. अजमेर 8. जनजातीय 9. तैंतीस 10. थोरियम 11. फोटोवोल्टाइक 12. उष्ण कटिबंधीय 13. अंकलेश्वर 14. प्राकृतिक 15. सौर 16. तरंगों 17. खनिज 18. आग्नेय व कायान्तरित चट्टानों।

● अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. भारत के दो अभ्रक उत्पादक राज्यों के नाम लिखिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— (i) राजस्थान (ii) आंध्र प्रदेश।

प्रश्न 2. पृथ्वी की सबसे ऊपरी परत का नाम लिखिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— पृथ्वी की सबसे ऊपरी परत का नाम 'भू-पर्पटी' है।

प्रश्न 3. अधिकतर दन्त मंजन किससे सफेद बनाये जाते हैं?

उत्तर— टिटेनियम ऑक्साइड से दंत मंजन सफेद बनाये जाते हैं।

प्रश्न 4. सर्वाधिक महत्वपूर्ण औद्योगिक लौह अयस्क का नाम बताइये।

--- [ पृष्ठ संख्या: 211 ] ---

उत्तर—हेमेटाइट।

प्रश्न 5. निम्न कोटि के भूरे कोयले का नाम बताइए।

उत्तर—लिग्नाइट।

प्रश्न 6. वर्ष 2018-19 के अनुसार भारत में मैंगनीज के सबसे बड़े उत्पादक राज्य का नाम बताइये।

अथवा

मैंगनीज का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौनसा है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर—मध्यप्रदेश।

प्रश्न 7. सीमेण्ट उद्योग के आधारभूत कच्चे माल का नाम बताइए।

उत्तर—चूना-पत्थर।

प्रश्न 8. उस खनिज का नाम बताइए जिससे मुख्यतः एल्युमीनियम प्राप्त किया जाता है।

उत्तर—बॉक्साइट।

प्रश्न 9. संश्लेषित वस्त्र, उर्वरक तथा असंख्य रसायन उद्योगों में एक नोडीय बिन्दु का कार्य कौन करता है?

उत्तर—तेल शोधनशालाएँ।

प्रश्न 10. हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर गैस-पाइप लाइन की लम्बाई कितनी है?

उत्तर—1700 किलोमीटर।

प्रश्न 11. रावतभाटा ऊर्जा संयंत्र किस राज्य में है?

उत्तर—राजस्थान राज्य में।

प्रश्न 12. परमाणु ऊर्जा कैसे प्राप्त की जाती है?

उत्तर—परमाणु अथवा आणविक ऊर्जा अणुओं की संरचना को बदलने से प्राप्त की जाती है।

प्रश्न 13. बेलाडिला लौह अयस्क खानें किस राज्य में स्थित हैं?

उत्तर—छत्तीसगढ़ राज्य में।

प्रश्न 14. पशुओं का गोबर प्रयोग करने वाले संयंत्र ग्रामीण भारत में किस नाम से जाने जाते हैं?

उत्तर—गोबर गैस प्लान्ट।

प्रश्न 15. दन्त मंजन में दाँतों की सफाई में मदद करने वाले खनिजों के नाम बताइए।

उत्तर—चूना-पत्थर, एल्युमीनियम ऑक्साइड व विभिन्न फॉस्फेट खनिज दन्त मंजन में दाँतों की सफाई में मदद करने वाले खनिज हैं।

प्रश्न 16. रैट होल खनन से क्या अभिप्राय है?

उत्तर—मेघालय राज्य में कोयले का खनन एक लम्बी संकीर्ण सुरंग के रूप में किया जाता है, जिसे रैट होल खनन कहते हैं।

प्रश्न 17. किसी खनिज भण्डार की आर्थिक जीव्यता को प्रभावित करने वाले कारक बताइए।

उत्तर—(1) अयस्क में खनिज की मात्रा, (2) उत्खनन में आसानी तथा (3) बाजार की निकटता।

प्रश्न 18. खनिज शब्द की परिभाषा दीजिए।

उत्तर—खनिज एक प्राकृतिक रूप से विद्यमान समरूप तत्व है जिसकी एक निश्चित आंतरिक संरचना होती है।

प्रश्न 19. खनिज अयस्क शब्द की परिभाषा दीजिए।

उत्तर—खनिज में अन्य तत्वों या अवयवों के मिश्रण या संचयन होने की अवस्था को खनिज अयस्क कहा जाता है।

प्रश्न 20. लौह अयस्क की किन्हीं दो किस्मों के नाम बताइए।

उत्तर—(i) हैमेटाइट (ii) मैग्नेटाइट।

प्रश्न 21. मैंगनीज अयस्क के कोई चार उपयोगों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर—मैंगनीज अयस्क के उपयोग हैं-(i) लौह-इस्पात बनाना (ii) मिश्रित धातु बनाना (iii) ब्लीचिंग पाउडर बनाना (iv) कीटनाशक दवाएँ बनाना।

प्रश्न 22. ताँबे के उपयोग बताइए।

उत्तर—ताँबे का उपयोग मुख्य रूप से बिजली के तार बनाने, इलेक्ट्रॉनिक्स और रसायन उद्योगों में किया जाता है।

प्रश्न 23. चूना-पत्थर के दो प्रमुख उपयोग बताइए।

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सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X 205

उत्तर—(i) चूना-पत्थर सीमेण्ट उद्योग का एक आधारभूत कच्चा माल होता है।

(ii) चूना-पत्थर लौह-प्रगलन की भट्टियों के लिए आवश्यक होता है।

प्रश्न 24. ऊर्जा के चार परम्परागत साधनों के नाम बताइए।

अथवा

परम्परागत ऊर्जा संसाधनों के कोई चार उदाहरण दीजिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर—ऊर्जा के परम्परागत साधनों में (i) कोयला, (ii) पेट्रोलियम, (iii) प्राकृतिक गैस तथा (iv) जल विद्युत शामिल हैं।

प्रश्न 25. ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधनों के नाम बताइए।

उत्तर—ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधनों में सौर, पवन, ज्वारीय, भू-तापीय, बायोगैस तथा परमाणु अथवा आणविक ऊर्जा शामिल किये जाते हैं।

प्रश्न 26. खनिज संसाधनों के संरक्षण के दो उपाय बताइए।

उत्तर—(i) धातुओं का पुनः चक्रण, (ii) रद्दी धातुओं का प्रयोग खनिज संसाधनों के संरक्षण के उपाय हैं।

प्रश्न 27. भारत के टरशियरी कोयला क्षेत्र के राज्यों के नाम बताइए।

उत्तर—भारत का टरशियरी कोयला क्षेत्र उत्तरी-पूर्वी राज्यों, यथा-मेघालय, असम, अरुणाचल प्रदेश व नागालैण्ड में पाया जाता है।

प्रश्न 28. भारत के दो प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादक क्षेत्र बताइए।

उत्तर—भारत में (i) मुम्बई हाई तथा (ii) असम में डिग्बोई, नहरकटिया और मोरन-हुगरीजन महत्त्वपूर्ण पेट्रोलियम उत्पादक क्षेत्र हैं।

प्रश्न 29. भारत में विद्युत ऊर्जा उत्पादित करने वाली किन्हीं दो प्रमुख बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं के नाम बताइए।

उत्तर—(i) भाखड़ा-नांगल, (ii) दामोदर घाटी कॉरपोरेशन।

प्रश्न 30. भूतापीय ऊर्जा से क्या अभिप्राय है?

उत्तर—पृथ्वी के आन्तरिक भागों से ताप का प्रयोग कर उत्पन्न की जाने वाली विद्युत को भूतापीय ऊर्जा कहते हैं।

प्रश्न 31. भारत में ऊर्जा का सर्वप्रमुख स्रोत क्या है?

उत्तर—कोयला।

प्रश्न 32. भारत में कौनसी खाड़ी ज्वारीय ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए आदर्श दशाएँ प्रदान करती है?

उत्तर—कच्छ की खाड़ी।

प्रश्न 33. कोयले को काला सोना क्यों कहा जाता है?

उत्तर—कोयला कई उद्योगों का आधार है। इसके अत्यधिक उपयोगों के कारण इसे काला सोना कहा जाता है।

प्रश्न 34. भारत में भूतापीय ऊर्जा के दोहन के लिए शुरू की गई दो प्रायोगिक परियोजनाओं के नाम बताइए।

उत्तर—(i) हिमाचल प्रदेश में मणिकरण के निकट पार्वती घाटी तथा (ii) लद्दाख में पूगा घाटी।

प्रश्न 35. सतत् पोषणीय ऊर्जा के दो आधार लिखिए।

उत्तर—(1) ऊर्जा संरक्षण की प्रोन्नति

(2) नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों का बढ़ता प्रयोग।

प्रश्न 36. किन दो प्रमुख भूगर्भिक युगों की शैलों से कोयला पाया जाता है? नाम बताइए।

उत्तर—निम्न दो प्रमुख भूगर्भिक युगों की शैलों से कोयला पाया जाता है-

(1) गोंडवाना (2) टरशियरी।

प्रश्न 37. खनिज से आप क्या समझते हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर—खनिज-भू-वैज्ञानिकों के अनुसार खनिज एक प्राकृतिक रूप से विद्यमान समरूप तत्व है जिसकी एक आन्तरिक संरचना है।

प्रश्न 38. अलौह धातु किसे कहते हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर—वह खनिज जिनमें ताँबा, बॉक्साइट, सीसा और सोना आते हैं, अलौह धातु कहलाते हैं।

प्रश्न 39. लौह खनिज किसे कहते हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर—लौह खनिज वह खनिज होते हैं जिनमें लोहा होता है; जैसे-लौह अयस्क, मैंगनीज आदि।

--- [ पृष्ठ संख्या: 213 ] ---

प्रश्न 40. टूथ ब्रश व पेस्ट की ट्यूब किसकी बनी होती है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— टूथ ब्रश व पेस्ट की ट्यूब पेट्रोलियम से प्राप्त प्लास्टिक की बनी होती है।

प्रश्न 41. बेलाडिला की पहाड़ियाँ किससे मिलती-जुलती हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— बेलाडिला की पहाड़ियाँ बैल के डील से मिलती-जुलती हैं।

प्रश्न 42. दुर्ग-बस्तर-चन्द्रपुर पेटी कहाँ पायी जाती है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— दुर्ग-बस्तर-चन्द्रपुर पेटी महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ राज्यों में पाई जाती है।

प्रश्न 43. महाराष्ट्र-गोवा पेटी कहाँ पायी जाती है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— महाराष्ट्र-गोवा पेटी गोवा तथा महाराष्ट्र राज्य के रत्नागिरी जिले में स्थित है।

प्रश्न 44. लिग्नाइट कोयला किस काम आता है? कहाँ पाया जाता है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— लिग्नाइट कोयले का उपयोग विद्युत उत्पादन में होता है। लिग्नाइट के प्रमुख भण्डार तमिलनाडु के नैवेली में मिलते हैं।

प्रश्न 45. टर्शियरी कोयला क्षेत्र का विस्तार लिखिए, यह कहाँ पाया जाता है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— टर्शियरी कोयला क्षेत्र उत्तर-पूर्वी राज्यों-मेघालय, असम, अरुणाचल प्रदेश तथा नागालैण्ड में पाया जाता है।

● लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. अभ्रक विद्युत व इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों में प्रयुक्त होने वाले अपरिहार्य खनिजों में से एक क्यों है?

उत्तर— अभ्रक का विद्युत व इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों में प्रयुक्त होने वाले अपरिहार्य खनिजों में से एक होने के मुख्य कारण निम्न प्रकार हैं-

(1) अभ्रक की सर्वोच्च परावैद्युत शक्ति होना

(2) ऊर्जा ह्रास का निम्न गुणांक होना

(3) विंसवाहन के गुण

(4) उच्च वोल्टेज की प्रतिरोधिता।

प्रश्न 2. निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए-

गैर पारम्परिक ऊर्जा स्रोत

अवस्थित क्षेत्र

(i) सौर ऊर्जा

(अ) कच्छ की खाड़ी

(ii) पवन ऊर्जा

(ब) भुज-माधापुर

(iii) ज्वारीय ऊर्जा

(स) लद्दाख

(iv) भू-तापीय ऊर्जा

(द) जैसलमेर

उत्तर— (i)-(ब), (ii)-(द), (iii)-(अ), (iv)-(स)।

प्रश्न 3. सुमेलित कीजिए-

खनिज

स्थान

(क) लौह अयस्क खानें

(1) अमरकंटक

(ख) अभ्रक

(2) मयूरभंज

(ग) बॉक्साइट

(3) नागपुर

(घ) मैंगनीज

(4) नेल्लौर

उत्तर— (क)-(2), (ख)-(4), (ग)-(1), (घ)-(3)।

प्रश्न 4. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए-

सूची-I (कोयले का प्रकार)

सूची-II (विशेषता)

(अ) बिटुमिनस

(1) सर्वोत्तम गुण वाला कठोर कोयला

(ब) लिग्नाइट

(2) कम कार्बन व निम्न ताप क्षमता

(स) पीट

(3) निम्न कोटि का भूरा कोयला

(द) एन्थ्रेसाइट

(4) वाणिज्यिक प्रयोग में सर्वाधिक लोकप्रिय

उत्तर— (अ)-(4), (ब)-(3), (स)-(2), (द)-(1)।

प्रश्न 5. भारत में परमाणु ऊर्जा का उपयोग किसलिए किया जाता है? दो परमाणु संयंत्रों के नाम बताइए।

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सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X 207

उत्तर—भारत में परमाणु ऊर्जा का उपयोग विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।

भारत के दो परमाणु संयंत्र हैं-(1) नरोरा (2) रावतभाटा।

प्रश्न 6. भारत में अभ्रक उत्पादक क्षेत्र कौन-कौनसे हैं?

उत्तर—भारत में अभ्रक उत्पादक क्षेत्र निम्नलिखित हैं-(1) छोटा नागपुर पठार में उत्तरी पठारी किनारे। (2) बिहार-झारखण्ड की कोडरमा-गया-हजारीबाग पेटी। (3) राजस्थान में अजमेर क्षेत्र। (4) आंध्रप्रदेश की नेल्लोर अभ्रक पेटी।

प्रश्न 7. भारत में मैंगनीज के उपयोग को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर—मैंगनीज का उपयोग-मैंगनीज प्रमुख रूप से इस्पात के विनिर्माण में प्रयुक्त किया जाता है। एक टन इस्पात बनाने में लगभग 10 किलोग्राम मैंगनीज की आवश्यकता होती है। इसका उपयोग ब्लीचिंग पाउडर, कीटनाशक दवाएँ व पेंट बनाने में किया जाता है।

प्रश्न 8. किन दो समान गुणों के कारण तांबा और एल्युमिनियम अत्यंत उपयोगी खनिज माना जाता है?

उत्तर—(1) तन्य और (2) ताप सुचालक होने के कारण तांबा और एल्युमिनियम अत्यंत उपयोगी खनिज माना जाता है। इनका उपयोग मुख्य रूप से बिजली के तार बनाने तथा इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों में किया जाता है।

प्रश्न 9. निम्न को सुमेलित कीजिए-

राज्य

परमाणु ऊर्जा संयंत्र

(अ) उत्तर प्रदेश

(i) कलपक्कम

(ब) कर्नाटक

(ii) काकरापारा

(स) गुजरात

(iii) नरोरा

(द) तमिलनाडु

(iv) कैगा

उत्तर—(अ)-(iii), (ब)-(iv), (स)-(ii), (द)-(i)।

प्रश्न 10. 'भारत गांवों का देश है' ऊर्जा संकट को कम करने के लिए आप किस प्रकार के ऊर्जा स्रोत का सुझाव देंगे?

उत्तर—ऊर्जा संकट को कम करने के लिए भारत के गाँवों में हम 'बायो गैस' का सुझाव देंगे क्योंकि यह झाड़ियों, कृषि अपशिष्ट, पशुओं और मानवजनित अपशिष्ट के उपयोग से उत्पन्न की जाती है तथा इसकी तापीय क्षमता मिट्टी के तेल, उपलों की अपेक्षा अधिक होती है।

प्रश्न 11. खनिज संसाधनों के संरक्षण के उपाय बताइये।

उत्तर—खनिज संसाधनों के संरक्षण निम्नलिखित उपायों को अपनाकर किया जा सकता है-

(i) निम्न कोटि के अयस्कों का उन्नत प्रौद्योगिकी द्वारा कम लागत पर प्रयोग करना।

(ii) धातुओं का पुनः चक्रण किया जाना।

(iii) रद्दी धातुओं का प्रयोग करना।

(iv) खनिजों के अन्य प्रतिस्थापनों (विकल्पों) का उपयोग करना।

प्रश्न 12. ऊर्जा के संरक्षण के उपाय बताइये।

उत्तर—संरक्षण के उपाय-ऊर्जा के संरक्षण के उपाय निम्नलिखित हैं-

(i) यातायात के लिए निजी वाहनों की अपेक्षा सार्वजनिक वाहनों का उपयोग किया चाहिए।

(ii) बिजली की आवश्यकतानुसार उपयोग करना।

(iii) बिजली की बचत करने वाले उपकरणों का प्रयोग किया जाये।

(iv) गैर-परम्परागत ऊर्जा साधनों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

प्रश्न 13. सभी सजीवों को खनिजों की आवश्यकता होती है। स्पष्ट कीजिए।

उत्तर—खनिजों के बिना जीवन प्रक्रिया असम्भव है। सभी सजीव खनिजों का उपभोग करते हैं। हमारे कुल पौष्टिक उपभोग का 0.3 प्रतिशत भाग खनिज है। इतना कम हिस्सा होने पर भी ये इतने महत्त्वपूर्ण और गुणकारी हैं कि इनके बिना हम 99.7 प्रतिशत भोज्य पदार्थों का उपभोग करने में असमर्थ होंगे। अतः सभी सजीवों को खनिजों की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 14. भूगोलविद्, भूगोलवेत्ता तथा भू-वैज्ञानिक खनिजों का अध्ययन किस रूप में करते हैं?

उत्तर—भूगोलविद् स्थलाकृतियों की बेहतर जानकारी हेतु खनिजों का अध्ययन भू-पृष्ठ के एक अंश के रूप में करते हैं।

--- [ पृष्ठ संख्या: 215 ] ---

भूगोलवेत्ता खनिज संसाधनों के वितरण व खनिजों से सम्बन्धित आर्थिक क्रियाओं में ज्यादा रुचि रखते हैं।

भू-वैज्ञानिक खनिजों की निर्माण प्रक्रिया, इनकी आयु व खनिजों के भौतिक व रासायनिक संगठन से सम्बन्धित विषयों का अध्ययन करते हैं।

प्रश्न 15. रैट होल खनन से आप क्या समझते हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— रैट होल खनन-भारत में उत्तरी-पूर्वी भारत के अधिकांश जनजातीय क्षेत्रों में खनिजों का स्वामित्व व्यक्तिगत एवं समुदायों को प्राप्त है। मेघालय में जोवाई व चेरापूँजी में कोयले का खनन परिवार के सदस्यों द्वारा एक लम्बी संकीर्ण सुरंग के रूप में किया जाता है, जिसे रैट होल खनन कहते हैं।

प्रश्न 16. जलोढ़ जमाव के रूप में खनिज किस प्रकार पाये जाते हैं?

उत्तर— पहाड़ियों के आधार एवं घाटी तल की बालू में जलोढ़ जमाव के रूप में कुछ मात्रा में खनिज पाये जाते हैं। खनिजों के इस प्रकार के निक्षेप प्लेसर निक्षेप के नाम से जाने जाते हैं। जलोढ़ जमाव के रूप में प्राप्त खनिजों में प्रायः ऐसे खनिज होते हैं जो जल द्वारा घर्षित नहीं होते हैं। इस रूप में प्राप्त खनिजों में सोना, चाँदी, टिन एवं प्लेटिनम आदि प्रमुख हैं।

प्रश्न 17. अभ्रक की प्रमुख विशेषताएँ बतलाइए।

उत्तर— (1) अभ्रक प्लेटों अथवा पत्रण क्रम में पाया जाता है। (2) इसका चादरों में विपाटन आसानी से हो सकता है। (3) अभ्रक पारदर्शी हो सकता है। (4) अभ्रक काले, हरे, लाल, पीले एवं भूरे रंग का भी हो सकता है। (5) इसका उपयोग विद्युत उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग, रेडियो व टेलीफोन आदि में किया जाता है।

प्रश्न 18. चूना पत्थर पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

अथवा

चूना पत्थर के बारे में आप क्या जानते हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— चूना पत्थर कैल्शियम या कैल्शियम कार्बोनेट तथा मैग्नीशियम कार्बोनेट से बनी चट्टानों में पाया जाता है। चूना पत्थर सीमेंट उद्योग का एक आधारभूत कच्चा माल है। इसका उपयोग लौह प्रगलन की भट्टियों में अनिवार्य रूप से होता है। भारत में चूना पत्थर की प्राप्ति आन्ध्र प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात व तमिलनाडु आदि राज्यों में होती है।

प्रश्न 19. पवन ऊर्जा पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

उत्तर— पवन ऊर्जा-पवन की गति से प्राप्त की जाने वाली ऊर्जा 'पवन ऊर्जा' कहलाती है। भारत में पवन ऊर्जा फार्म की विशालतम पेटी तमिलनाडु में नागरकोइल से मदुरई तक अवस्थित है। इसके अतिरिक्त आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान तथा केरल में भी महत्वपूर्ण पवन ऊर्जा फार्म हैं। नागरकोइल तथा जैसलमेर देश में पवन ऊर्जा के प्रभावी प्रयोग के लिए जाने जाते हैं।

प्रश्न 20. भारी उद्योग तथा ताप विद्युत गृह कोयला क्षेत्रों अथवा उनके निकट ही क्यों स्थापित किये जाते हैं?

उत्तर— कोयला एक स्थूल पदार्थ है। जिसका प्रयोग करने पर भार घटता है क्योंकि यह राख में परिवर्तित हो जाता है। इसी कारण भारी उद्योग तथा ताप विद्युत गृह कोयला क्षेत्रों अथवा उनके निकट ही स्थापित किये जाते हैं।

प्रश्न 21. गैर-परम्परागत ऊर्जा संसाधनों का महत्त्व बताइए।

उत्तर— गैर-परम्परागत ऊर्जा संसाधनों का महत्त्व-

(i) इन संसाधनों का नवीकरण किया जा सकता है।

(ii) ये संसाधन हमें प्रकृति से निःशुल्क प्राप्त होते हैं।

(iii) इनकी मात्रा असीमित है।

(iv) ये प्रदूषण मुक्त ऊर्जा संसाधन हैं।

प्रश्न 22. प्रमुख धात्विक खनिजों का निर्माण किस प्रकार होता है?

उत्तर— प्रमुख धात्विक खनिज, जैसे-जस्ता, ताँबा, जिंक और सीसा का निर्माण अधिकतर उस समय होता है जब ये तरल अथवा गैसीय अवस्था में दरारों के सहारे भू-पृष्ठ की ओर धकेले जाते हैं और ऊपर आते हुए ये ठण्डे होकर जम जाते हैं। ये धात्विक खनिज इसी तरह शिराओं व जमाओं के रूप में प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 23. खनिज कहाँ पाए जाते हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— खनिज आग्नेय तथा कायान्तरित चट्टानों में खनिज दरारों, जोड़ों, भ्रंशों व विदरों में, अवसादी चट्टानों के खनिज संस्तरों या परतों में, पहाड़ियों के आधार तथा घाटी तल की रेत में जलोढ़ जमाव के रूप में तथा महासागरीय जल में पाये जाते हैं।

--- [ पृष्ठ संख्या: 216 ] ---

सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X 209

प्रश्न 24. 'प्लेसर निक्षेप' किसे कहते हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— पहाड़ियों के आधार तथा घाटी तल की रेत में जलोढ़ जमाव के रूप में कुछ खनिज पाये जाते हैं। ये निक्षेप 'प्लेसर निक्षेप' के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 25. अवसादी चट्टानों में खनिज किस प्रकार पाये जाते हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— अवसादी चट्टानों में अनेक खनिज संस्तरों या परतों में पाये जाते हैं। अवसादी चट्टानों में दूसरी श्रेणी के खनिजों में जिप्सम, पोटाश, नमक व सोडियम शामिल हैं।

प्रश्न 26. पेट्रोलियम हमारे लिए क्यों उपयोगी है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— पेट्रोलियम हमारे लिए निम्न प्रकार उपयोगी है-

(i) यह ताप व प्रकाश के लिए ईंधन, मशीनों को स्नेहक तथा अनेक विनिर्माण उद्योगों को कच्चा माल प्रदान करता है।

(ii) पेट्रोलियम, तेल शोधन शालाएँ-संश्लेषित वस्त्र, उर्वरक तथा असंख्य रसायन उद्योगों में एक नोडीय बिन्दु का काम करता है।

प्रश्न 27. 'ओडिशा-झारखण्ड पेटी' के बारे में अपने विचार लिखिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— ओडिशा-झारखण्ड पेटी-ओडिशा में उत्तम कोटि का हेमेटाइट किस्म का लौह अयस्क मयूरभंज व केंदूझर जिलों में बादाम पहाड़ खदानों से निकाला जाता है। झारखण्ड के निकट सिंहभूम जिले में गुआ तथा नोआमुंडी से हेमेटाइट अयस्क का खनन किया जाता है।

प्रश्न 28. ऊर्जा संसाधन से आप क्या समझते हैं? ये किस काम आते हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— ऊर्जा संसाधन का अर्थ है-किसी भी सामग्री जिसका उपयोग ऊर्जा के आधार या स्रोत के रूप में किया जा सकता है। इनका उपयोग खाना पकाने, रोशनी व ताप के लिए, गाड़ियों के संचालन तथा उद्योगों में मशीनों के संचालन में होता है।

प्रश्न 29. लौह-खनिज विकास का मुख्य आधार है। इस कथन पर प्रकाश डालिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— लौह-खनिज धात्विक खनिजों के कुल उत्पादन मूल्य के तीन-चौथाई भाग का योगदान करते हैं। लौह-खनिज धातु शोधन उद्योगों के विकास को मजबूत आधार प्रदान करते हैं। भारत लौह-खनिज का निर्यातक देश है।

प्रश्न 30. तांबा खनिज के तीन उपयोग लिखिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— धानवर्ध, तन्य और ताप सुचालक होने के कारण ताँबा खनिज के तीन उपयोग निम्न प्रकार हैं-

(i) ताँबे का उपयोग मुख्यतः बिजली के तार बनाने के लिए किया जाता है।

(ii) ताँबे का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में किया जाता है।

(iii) ताँबे का उपयोग रसायन उद्योगों में भी प्रमुखतः किया जाता है।

● दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1. खनिजों में विविधता क्यों पाई जाती है? भू-वैज्ञानिक किन विशेषताओं के आधार पर खनिजों का वर्गीकरण करते हैं?

उत्तर— खनिजों में विविधता-खनिज प्रकृति में अनेक रूपों में पाए जाते हैं। चट्टानें खनिजों के समरूप तत्त्वों के यौगिक हैं। कुछ चट्टानें जैसे चूना पत्थर-केवल एक ही खनिज से बनी है; लेकिन अधिकतर चट्टानें विभिन्न अनुपातों के अनेक खनिजों का योग हैं। यद्यपि 2000 से अधिक खनिजों की पहचान की जा चुकी है, लेकिन अधिकतर चट्टानों में केवल कुछ ही खनिजों की बहुतायत है। एक खनिज विशेष जो निश्चित तत्त्वों का योग है, उन तत्त्वों का निर्माण उस समय के भौतिक व रासायनिक परिस्थितियों का परिणाम है। इसीलिए खनिजों में विविधता पाई जाती है।

भू-वैज्ञानिक निम्न विशेषताओं के आधार पर खनिजों का वर्गीकरण करते हैं-

(1) रंग (2) कठोरता (3) चमक (4) घनत्व (5) क्रिस्टल का रूप, आदि।

प्रश्न 2. बायो गैस पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

उत्तर— बायो गैस-कृषि अपशिष्टों, पशु एवं मानवजनित अपशिष्टों व झाड़ियों आदि के उपयोग द्वारा एक विशेष प्रकार के संयंत्र से बायो गैस का उत्पादन किया जाता है। इसमें कार्बनिक पदार्थों के विघटन से गैस उत्पन्न होती है जिसकी तापीय क्षमता मिट्टी के तेल, उपलों तथा चारकोल से अधिक होती है। बायो गैस संयंत्र नगरपालिका, सहकारिता एवं निजी स्तर पर लगाये जाते हैं।

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बायो गैस के उपयोग से होने वाले लाभ-

(1) बायो गैस का उपयोग घरेलू आवश्यकताओं के लिए विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।

(2) पशुओं के गोबर के उपयोग का यह एक सर्वाधिक उपयुक्त तरीका है तथा यह गोबर की खाद की गुणवत्ता बढ़ाता है।

(3) यह उपलों तथा लकड़ी के जलने से होने वाले वृक्षों व गोबर के नुकसान को रोकता है।

प्रश्न 3. सामान्य व वाणिज्यिक दृष्टि से खनिजों का वर्गीकरण चित्र बनाकर दर्शाइए।

अथवा

खनिज क्या है? खनिजों को वर्गीकृत कीजिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— खनिज-भू-वैज्ञानिकों के अनुसार खनिज एक प्राकृतिक रूप से विद्यमान समरूप तत्व है जिसकी एक निश्चित आंतरिक संरचना होती है।

[खनिजों का वर्गीकरण चार्ट]

कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान पाठ 10 खनिज तथा ऊर्जा संसाधन चित्र 5

प्रश्न 4. खनिजों का महत्त्व बताइये।

उत्तर— खनिज मानव की रोजमर्रा की जिन्दगी में बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनका महत्त्व इस प्रकार है-

(1) मानव की उपयोगिता की छोटी-सी सुई से लेकर कारें, बसें, वायुयान, रेलगाड़ियाँ तथा विशालकाय जहाज खनिजों से ही बनाए जाते हैं।

(2) कारें, बसें, रेलगाड़ियाँ, हवाई जहाज आदि धरती से प्राप्त ऊर्जा संसाधनों द्वारा ही चालित होते हैं।

(3) ऊँचे-ऊँचे भवनों के निर्माण में खनिजों का प्रयोग होता है।

(4) रेल लाइनें तथा सड़क के पत्थर आदि सभी खनिजों से बने हैं।

(5) मनुष्य के काम में आने वाले औजार तथा मशीनरी आदि सभी खनिजों से बने हैं।

(6) मनुष्य के भोजन में भी खनिज होते हैं, जिसे हम खाते हैं।

(7) हमारी जीविका, सजावट, त्यौहारों तथा धार्मिक अनुष्ठान में भी खनिजों का प्रयोग होता है।

प्रश्न 5. भारत में विविध प्रकार के खनिज पाए जाते हैं यद्यपि इनका वितरण असमान है। स्पष्ट कीजिए।

उत्तर— भारत में विविध प्रकार के खनिज पाए जाते हैं यद्यपि इनका वितरण असमान है क्योंकि-

(i) देश में मुख्य रूप से प्रायद्वीपीय चट्टानों में कोयला, धात्विक खनिज, अभ्रक व अन्य अनेक अधात्विक खनिजों के अधिकांश भण्डार संचित हैं।

(ii) प्रायद्वीप के पश्चिमी और पूर्वी पार्श्वों पर गुजरात और असम की तलछटी चट्टानों में अधिकांश खनिज तेल के निक्षेप पाए जाते हैं।

(iii) प्रायद्वीपीय शैल क्रम के साथ राजस्थान में अनेक अलौह खनिज पाए जाते हैं।

(iv) उत्तरी भारत के विस्तृत जलोढ़ मैदान आर्थिक महत्त्व के खनिजों से लगभग विहीन हैं।

खनिजों के वितरण में ये विभिन्नताएँ खनिजों की रचना में अंतरग्रस्त भू-गर्भिक संरचना, प्रक्रियाओं तथा समय के कारण देखने को मिलती हैं।

प्रश्न 6. भारत में ताँबे के उपयोग एवं उत्पादक क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए।

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सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X 211

उत्तर—ताँबे का उपयोग—घातवर्ध्य, तन्य और ताप सुचालक होने के कारण ताँबे का उपयोग मुख्य रूप से बिजली के तार बनाने, इलेक्ट्रॉनिक्स और रसायन उद्योगों में किया जाता है।

उत्पादक क्षेत्र—भारत में ताँबे के भण्डार व उत्पादन क्रान्तिक रूप से न्यून हैं। देश में मध्य प्रदेश राज्य की बालाघाट खानें देश का लगभग 52 प्रतिशत ताँबा उत्पादित करती हैं। झारखण्ड का सिंहभूम जिला भी ताँबे का मुख्य उत्पादक क्षेत्र है। राजस्थान में खेतड़ी की खानें ताँबे के उत्पादन की दृष्टि से प्रसिद्ध थीं।

प्रश्न 7. सामान्यतः खनिजों को किन दो वर्गों में बाँटा गया है? प्रत्येक वर्ग के खनिजों की तीन-तीन विशेषताएँ दीजिए।

उत्तर—सामान्यतः खनिजों को दो वर्गों में बाँटा गया है। ये हैं-(1) धात्विक खनिज (2) अधात्विक खनिज।

धात्विक खनिज की विशेषताएँ—

(1) ये पीटकर बढ़ाये जा सकते हैं।

(2) इनका चक्रीय उपयोग सम्भव है।

(3) इनसे छड़ें, चादर, पिंड आदि बनाये जा सकते हैं।

अधात्विक खनिज की विशेषताएँ—

(1) इनका मुख्यतः प्रयोग ऊर्जा संसाधनों के रूप में किया जा सकता है।

(2) इनमें से अनेक का प्रयोग रसायनों, रासायनिक खाद, भोज्य सामग्री, भवन निर्माण में किया जाता है।

(3) इनसे अनेक प्रकार की वस्तुएँ बनाई जाती हैं।

प्रश्न 8. खनन मजदूरों तथा वातावरण पर खनन का क्या प्रभाव पड़ता है? किन्हीं चार को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर—खनन का खनिकों के स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर निम्न प्रभाव पड़ता है-

(1) खदानों में काम करने वाले श्रमिक लगातार धूल व हानिकारक धुएँ में साँस लेते हुए फेफड़ों सम्बन्धी बीमारियों के शिकार हो जाते हैं।

(2) खदानों की छतों के गिरने, सैलाब आने अर्थात् जल-प्लावित होने, कोयला की खदानों में आग लगने आदि खदान श्रमिकों के लिए स्थाई खतरे हैं।

(3) खनन क्षेत्रों में खनन के कारण जल-स्रोत प्रदूषित हो जाते हैं।

(4) अवशिष्ट पदार्थों तथा खनिज तरल के मलबे के खत्ता लगाने से भूमि व मिट्टी का अवक्षय होता है तथा सरिताओं तथा नदियों के प्रदूषण में वृद्धि हो जाती है।

प्रश्न 9. ज्वारीय ऊर्जा किस प्रकार उत्पादित की जाती है?

अथवा

ज्वारीय ऊर्जा क्या है? संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर—ज्वारीय ऊर्जा—ज्वारीय ऊर्जा महासागरीय तरंगों के प्रयोग से उत्पन्न की जाती है। इसके लिए संकड़ी खाड़ी के आर-पार बाढ़-द्वार बनाकर बाँध बनाए जाते हैं। उच्च ज्वार आने के समय संकड़ी खाड़ीनुमा प्रवेश द्वार से जल अन्दर भर जाता है तथा द्वार बन्द होने पर पानी बाँध में ही रह जाता है। बाढ़ द्वार के बाहर ज्वार उतरने पर बाँध के पानी को इसी रास्ते पाइप द्वारा समुद्र की तरफ प्रवाहित किया जाता है जो कि इसे ऊर्जा उत्पादक टरबाइन की तरफ ले जाता है और वहाँ ज्वारीय ऊर्जा उत्पादित की जाती है।

भारत में खम्भात की खाड़ी, कच्छ की खाड़ी तथा पश्चिमी तट पर गुजरात में और पश्चिम बंगाल में सुंदरवन क्षेत्र में गंगा के डेल्टा में ज्वारीय तरंगों द्वारा ऊर्जा उत्पन्न करने हेतु आदर्श दशाएँ पाई जाती हैं।

प्रश्न 10. भारत के ग्रामीण क्षेत्र में ऊर्जा प्राप्ति के परिवर्तित स्वरूप का उल्लेख कीजिए।

उत्तर—भारत के ग्रामीण क्षेत्र में ऊर्जा प्राप्त करने के लिए लकड़ी तथा उपलों का बहुत अधिक उपयोग किया जाता है। एक अनुमान के अनुसार ग्रामीण अपनी आवश्यक ऊर्जा का 70 प्रतिशत से भी अधिक भाग इन्हीं दो स्रोतों से प्राप्त करते हैं। लेकिन वर्तमान समय में घटते वन क्षेत्र के कारण लकड़ी का ईंधन के रूप में प्रयोग कठिन होता जा रहा है। इसी प्रकार उपलों के उपयोग में भी कमी आ रही है। वर्तमान समय में गोबर से उपले बनाने के बजाय उससे गोबर गैस प्राप्त की जाने लगी है। गोबर का खाद के रूप में प्रयोग भी बढ़ता जा रहा है। इससे कृषि भूमि के पोषण में वृद्धि हो जायेगी।

प्रश्न 11. भारत में वर्तमान समय में ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधनों के उपयोग की आवश्यकता क्यों है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर—ऊर्जा के बढ़ते हुए उपयोग ने देश को कोयला, खनिज तेल और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों पर बहुत अधिक निर्भर कर दिया है। इसके अलावा प्राकृतिक गैस तथा खनिज तेल की बढ़ती कीमतों तथा इनकी

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सम्भावित कमी ने भविष्य में ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा के प्रति चिंताजनक स्थिति उत्पन्न कर दी है। इसका राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तथा पर्यावरण पर बहुत बुरा प्रभाव होता है। अतः वर्तमान समय में पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, जैविक ऊर्जा तथा अवशिष्ट पदार्थ जनित ऊर्जा के उपयोग की बहुत आवश्यकता है। ऊर्जा के ये गैर-परम्परागत साधन नवीकरण योग्य हैं तथा प्रदूषण मुक्त हैं। उक्त सभी कारणों से भारत में ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधनों का उपयोग बढ़ता जा रहा है क्योंकि भारत धूप, जल, पवन तथा जीवभार साधनों में समृद्ध है।

प्रश्न 12. प्राकृतिक गैस और बायोगैस में अन्तर स्पष्ट कीजिए। (प्रश्न बैंक; माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)

उत्तर— प्राकृतिक गैस-प्राकृतिक गैस एक महत्त्वपूर्ण स्वच्छ ऊर्जा संसाधन है जो कि खनिज तेल के साथ अथवा अलग भी पाई जाती है। इसे धरातल के अन्दर से निकाला जाता है। प्राकृतिक गैस को ऊर्जा के एक साधन के रूप में तथा पेट्रो-रसायन उद्योग के एक औद्योगिक कच्चे माल के रूप में प्रयोग किया जाता है।

बायोगैस-बायोगैस सड़ी-गली वनस्पति तथा मानव द्वारा जनित अपशिष्ट पदार्थों के द्वारा बनाई जाती है। यह एक स्वच्छ ईंधन है। इसमें मिट्टी के तेल, गोबर के कंडों तथा चारकोल की तुलना में अधिक ऊर्जा होती है। इसके निर्माण के दौरान प्राप्त अपशिष्ट का उपयोग खाद के रूप में खेतों में किया जाता है।

प्रश्न 13. आग्नेय और अवसादी चट्टानों में अन्तर स्पष्ट कीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)

उत्तर— आग्नेय और अवसादी चट्टानें दो प्रकार की चट्टानें हैं जो अपनी उत्पत्ति और संरचना में भिन्न होती हैं-

आग्नेय चट्टानें

अवसादी चट्टानें

1. आग्नेय चट्टानें मैग्मा या लावा के ठण्डा होने से बनती हैं।

1. अवसादी चट्टानें जल, हवा या बर्फ के ठण्डा होने से बनती हैं।

2. आग्नेय चट्टानों में खनिज की संरचना एकसमान होती है।

2. अवसादी चट्टानों में खनिज की संरचना विविध होती है।

3. आग्नेय चट्टानों के उदाहरण हैं-ग्रेनाइट, बेसाल्ट आदि।

3. अवसादी चट्टानों के उदाहरण हैं-चॉक, रोल, सैंड-स्टोन आदि।

[आग्नेय और अवसादी चट्टानों में अंतर तालिका]

कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान पाठ 10 खनिज तथा ऊर्जा संसाधन चित्र 6

प्रश्न 14. "भारत में कोयला ऊर्जा का मुख्य स्रोत होने के साथ-साथ उद्योगों के लिए कच्चा माल भी है।" प्रत्येक के लिए दो-दो तथ्य देते हुए इस कथन की पुष्टि कीजिए।

उत्तर— कोयला शक्ति तथा कच्चे माल दोनों के रूप में महत्त्वपूर्ण साधन है। यथा-

(अ) कोयला ऊर्जा के मुख्य स्रोत के रूप में-

(1) भारत में कोयला घरेलू ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाता है तथा इससे रेलें चलाई जाती हैं।

(2) इसको कारखानों में शक्ति के साधन के रूप में प्रयोग किया जाता है।

(ब) कोयला उद्योगों के लिए कच्चे माल के रूप में-

(1) यह लौह-इस्पात तथा मशीनरी उद्योग का महत्त्वपूर्ण कच्चा माल है। लोहे में मिलाकर इससे इस्पात बनाया जाता है।

(2) रासायनिक खादों तथा पेट्रोलियम के निर्माण में भी इसका उपयोग किया जाता है। कोयला अन्य पदार्थों में मिलाकर सीमेंट बनाया जाता है।

प्रश्न 15. कोयले के निर्माण तथा प्रकारों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

उत्तर— कोयले का निर्माण-कोयले का निर्माण पादप पदार्थों के लाखों वर्षों तक सम्पीड़न से हुआ है। इसी कारण सम्पीड़न की मात्रा, गहराई और दबने के समय के आधार पर कोयला अनेक रूपों में पाया जाता है। यथा-

(1) पीट-दलदलों में क्षय होते पादपों से पीट उत्पन्न होता है। इसमें कार्बन की मात्रा कम तथा नमी की मात्रा अधिक होती है। अधिक नमी के कारण पीट कोयला की ताप क्षमता कम होती है।

(2) लिग्नाइट-यह निम्न कोटि का भूरा कोयला होता है। लिग्नाइट कोयला मुलायम होने के साथ अधिक नमीयुक्त होता है। लिग्नाइट कोयले का उपयोग विद्युत उत्पादन में किया जाता है।

(3) बिटुमिनस-गहराई में दबे तथा अधिक तापमान से प्रभावित कोयला को बिटुमिनस कोयले के नाम से जाना जाता है। वाणिज्यिक उपयोग में यह सबसे अधिक लोकप्रिय है। धातुशोधन में उच्च श्रेणी के बिटुमिनस कोयले का प्रयोग किया जाता है। लोहे के प्रगलन हेतु इसका विशेष महत्त्व है।

(4) एन्थ्रेसाइट-एन्थ्रेसाइट सर्वोत्तम गुण वाला कठोर कोयला है। इसमें कार्बन की मात्रा सबसे अधिक होती है।

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सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X | 213

प्रश्न 16. धात्विक और अधात्विक खनिजों में अन्तर स्पष्ट कीजिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— धात्विक और अधात्विक खनिजों में अन्तर

क्र.सं.

धात्विक खनिज

अधात्विक खनिज

1.

वे खनिज जिनमें धातु अंश की प्रधानता पाई जाती है, धात्विक खनिज कहलाते हैं।

वे खनिज जिनमें धातु अंश नहीं पाया जाता है, अधात्विक खनिज कहलाते हैं।

2.

लौह अयस्क, मैंगनीज, निकल, ताँबा, जस्ता, सीसा, टंगस्टन व कोबाल्ट आदि धात्विक खनिज हैं।

अभ्रक, पोटाश, नमक, सल्फर, चूना पत्थर, संगमरमर, बलुआ पत्थर आदि अधात्विक खनिज हैं।

3.

प्रयोग करने से पूर्व इनका परिष्करण करना आवश्यक होता है।

इनके परिष्करण की आवश्यकता प्रायः नहीं पड़ती है।

4.

धात्विक खनिज ताप व विद्युत के सुचालक होते हैं।

अधात्विक खनिज ताप एवं विद्युत के कुचालक होते हैं।

5.

यह खनिज प्रायः आग्नेय शैलों में पाये जाते हैं।

यह खनिज प्रायः अवसादी शैलों में पाये जाते हैं।

6.

इन खनिजों को गलाकर पुनः प्रयोग में लाया जा सकता है।

इन खनिजों को सिर्फ एक बार ही प्रयोग में लिया जा सकता है।

7.

इन्हें पीटकर बढ़ाया जा सकता है।

इनमें ऐसा सम्भव नहीं है।

प्रश्न 17. खनिज हमारे लिए क्यों उपयोगी हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— खनिज हमारे लिए उपयोगी हैं क्योंकि ये हमारे जीवन के अतिअनिवार्य भाग हैं। लगभग हर चीज जो हम इस्तेमाल करते हैं-एक छोटी सुई से लेकर एक बड़ी इमारत तक, या फिर एक बड़ा जहाज-सभी खनिजों से बने हैं। यहाँ तक कि भोजन में भी खनिज होते हैं, जिसे हम खाते हैं। मनुष्य ने विकास की सभी अवस्थाओं में-अपनी जीविका तथा सजावट, त्योहारों व धार्मिक अनुष्ठानों के लिए खनिजों का प्रयोग किया है।

प्रश्न 18. खनन उद्योग को घातक उद्योग क्यों कहा जाता है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— खनन उद्योग को निम्नलिखित कारणों से घातक उद्योग कहा जाता है-

(i) खदानों में काम करने वाले श्रमिक लगातार धूल व हानिकारक धुएँ में सांस लेते हुए फेफड़ों सम्बन्धी बीमारियों के शिकार हो जाते हैं।

(ii) खदानों की छतों के गिरने, सैलाब आने, कोयले की खदानों में आग लगने आदि खतरे खदान श्रमिकों के लिए स्थायी हैं।

(iii) खदान क्षेत्रों में खनन के कारण जल स्रोत संदूषित हो जाते हैं।

(iv) अवशिष्ट पदार्थों तथा खनिज तरल के मलबे के खत्ता लगाने से भूमि व मिट्टी का अवक्षय होता है और सरिताओं तथा नदियों का प्रदूषण बढ़ता है।

● निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. खनिज कहाँ पाये जाते हैं?

अथवा

खनिज किन शैल समूहों से प्राप्त होते हैं? वर्णन कीजिए।

उत्तर— खनिजों की प्राप्ति

सामान्य रूप से खनिज अयस्कों में पाए जाते हैं। किसी भी खनिज में अन्य अवयवों या तत्त्वों के मिश्रण या संचयन के लिए अयस्क शब्द का प्रयोग किया जाता है। खनिज प्रायः निम्नलिखित शैल समूहों में पाए जाते हैं-

(1) आग्नेय तथा कायान्तरित चट्टानों में खनिजों की उपलब्धता-आग्नेय तथा कायान्तरित चट्टानों में खनिज दरारों, जोड़ों, भ्रंशों व विदरों में पाए जाते हैं। छोटे जमाव शिराओं के रूप में और वृहद् जमाव परत के रूप में पाए जाते हैं। मुख्य धात्विक खनिज, यथा-जस्ता, ताँबा, जिंक और सीसा आदि इसी प्रकार शिराओं व जमावों के रूप में प्राप्त होते हैं।

(2) अवसादी चट्टानों में खनिजों की उपलब्धता-अवसादी चट्टानों में अनेक खनिज संस्तरों या परतों में पाए जाते हैं। इनका निर्माण क्षैतिज परतों में निक्षेपण, संचयन या जमाव का परिणाम है। कोयला, कुछ अन्य प्रकार के लौह अयस्कों का निर्माण लम्बी अवधि तक अत्यधिक ऊष्ण व दबाव का परिणाम है।

अवसादी चट्टानों में दूसरी श्रेणी के खनिजों में जिप्सम, पोटाश, नमक व सोडियम सम्मिलित हैं। इनका निर्माण विशेषकर शुष्क प्रदेशों में वाष्पीकरण के फलस्वरूप होता है।

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(3) धरातलीय चट्टानों का अपघटन-खनिजों के निर्माण की एक अन्य विधि धरातलीय चट्टानों का अपघटन है। चट्टानों के घुलनशील तत्त्वों के अपरदन के उपरान्त अयस्क वाली अवशिष्ट चट्टानें रह जाती हैं। बॉक्साइट का निर्माण इसी प्रकार होता है।

(4) पहाड़ियों के आधार तथा घाटी तल में खनिजों की उपलब्धता-पहाड़ियों के आधार तथा घाटी तल की रेत में जलोढ़ जमाव के रूप में भी कुछ खनिज पाए जाते हैं। इनमें प्रायः ऐसे खनिज होते हैं जो जल द्वारा घर्षित नहीं होते। इस प्रकार के खनिजों में सोना, चाँदी, टिन व प्लेटिनम प्रमुख हैं।

(5) महासागरीय जल में खनिजों की उपलब्धता-महासागरीय जल में भी विशाल मात्रा में खनिज पाए जाते हैं। सामान्य नमक, मैग्नीशियम तथा ब्रोमाइन अधिकतर समुद्री जल से ही प्रग्रहित होते हैं। महासागरीय तली में मैंगनीज ग्रन्थिकाओं की उपस्थिति पाई जाती है।

प्रश्न 2. भारत में पाई जाने वाली लौह-अयस्क की पेटियों का वर्णन कीजिए।

उत्तर— लौह-अयस्क एक आधारभूत खनिज है तथा औद्योगिक विकास की रीढ़ की हड्डी है। भारत में लौह-अयस्क के विपुल भण्डार हैं। देश उच्च कोटि के लोहांश युक्त लौह-अयस्क में धनी है। भारत में पाई जाने वाली लौह-अयस्क की प्रमुख पेटियाँ निम्नलिखित हैं-

(1) उड़ीसा-झारखण्ड पेटी-उच्च कोटि का हेमेटाइट किस्म का लौह-अयस्क उड़ीसा में मयूरभंज व केन्द्रझर जिलों में बादाम पहाड़ की खानों से तथा झारखण्ड के सिंहभूम जिले में गुआ तथा नोआमुण्डी खानों से निकाला जाता है।

(2) दुर्ग-बस्तर-चन्द्रपुर पेटी-लौह-अयस्क की यह पेटी महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ राज्यों में पाई जाती है। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में बेलाडीला पहाड़ी श्रृंखलाओं में अत्यन्त उत्तम कोटि का हेमेटाइट लौह-अयस्क पाया जाता है जिसमें इस गुणवत्ता के लौह के 14 जमाव पाए जाते हैं। इन खदानों का लौह अयस्क विशाखापट्टनम पत्तन से जापान तथा दक्षिण कोरिया को निर्यात किया जाता है।

(3) बल्लारि-चित्रदुर्ग, चिकमगलूर-तुमकरु पेटी-कर्नाटक राज्य में विस्तृत इस पेटी में लौह-अयस्क की वृहद् राशि संचित है। कर्नाटक में पश्चिमी घाट में अवस्थित कुद्रेमुख निक्षेप विश्व के सबसे बड़े निक्षेपों में से एक माने जाते हैं। लौह अयस्क कर्दम (slurry) रूप में पाइप लाइन द्वारा मंगलूर के निकट एक पत्तन पर भेजा जाता है।

(4) महाराष्ट्र-गोवा पेटी-लौह-अयस्क की यह पेटी गोवा तथा महाराष्ट्र राज्य के रत्नागिरी जिले में स्थित है। यद्यपि यहाँ निकाले जाने वाला लोहा उत्तम किस्म का नहीं है, फिर भी दक्षता से इसका दोहन किया जाता है। मरमागाओ पत्तन से इसका निर्यात किया जाता है।

प्रश्न 3. अलौह खनिज के नाम बताइये एवं किन्हीं दो का वर्णन कीजिए।

अथवा

बॉक्साइट का महत्त्व बताइये तथा भारत में बॉक्साइट के वितरण का वर्णन कीजिए।

उत्तर— अलौह खनिज-प्रमुख अलौह खनिज हैं-ताँबा, जस्ता, बॉक्साइट, सीसा, सोना, चाँदी आदि।

प्रश्नानुसार दो अलौह खनिजों का वर्णन निम्न प्रकार है-

(1) ताँबा-ताँबा एक प्रमुख अलौह खनिज है। यह घातवर्ध्य, तन्य और ताप सुचालक होने के कारण ताँबे का उपयोग मुख्य रूप से बिजली के तार बनाने, इलेक्ट्रॉनिक्स और रसायन उद्योगों में किया जाता है।

भारत में ताँबे के भण्डार व उत्पादन क्रान्तिक रूप से न्यून हैं। देश में मध्य प्रदेश राज्य की बालाघाट खानें देश में लगभग 52 प्रतिशत ताँबा उत्पादित करती हैं। झारखण्ड का सिंहभूम जिला भी ताँबे का मुख्य उत्पादक क्षेत्र है। राजस्थान में खेतड़ी की खानें ताँबे के उत्पादन की दृष्टि से प्रसिद्ध थीं।

(2) बॉक्साइट-बॉक्साइट एल्यूमीनियम का मुख्य अयस्क है। यद्यपि अनेक अयस्कों में एल्यूमीनियम पाया जाता है; किन्तु सबसे अधिक एल्यूमिना क्ले जैसे दिखने वाले पदार्थ बॉक्साइट से ही प्राप्त किये जाते हैं। बॉक्साइट निक्षेपों की रचना एल्यूमीनियम सिलिकेटों से समृद्ध व्यापक भिन्नता वाली चट्टान के विघटन से होती है।

महत्त्व- एल्यूमीनियम एक महत्त्वपूर्ण धातु है; क्योंकि यह लोहे के समान शक्ति के साथ-साथ अत्यधिक हल्का तथा विद्युत का सुचालक है। इसमें अत्यधिक घातवर्ध्यता भी पाई जाती है।

वितरण- भारत में बॉक्साइट के जमाव मुख्य रूप से अमरकंटक पठार, मैकाल पहाड़ियों तथा बिलासपुर-कटनी के पठारी प्रदेश में पाए जाते हैं। उड़ीसा भारत का सबसे बड़ा बॉक्साइट उत्पादक राज्य है। 2018-19 में देश के लगभग 65 प्रतिशत बॉक्साइट का उत्पादन इसी राज्य में हुआ। यहाँ कोरापुट जिले में पंचपतमाली निक्षेप राज्य के सबसे महत्त्वपूर्ण बॉक्साइट निक्षेप हैं।

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सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X | 215

प्रश्न 4. परम्परागत ऊर्जा स्रोतों के नाम लिखिये एवं किसी एक पर लेख लिखिये। (प्रश्न बैंक)

अथवा

पेट्रोलियम का क्या उपयोग है? इसकी उत्पत्ति तथा भारत में इसके वितरण पर एक भौगोलिक निबन्ध लिखिये।

उत्तर— परम्परागत ऊर्जा स्रोत—ऊर्जा के मुख्य परम्परागत स्रोत हैं-

(1) कोयला (2) पेट्रोलियम (3) प्राकृतिक गैस (4) विद्युत।

प्रश्नानुसार किसी एक साधन अर्थात् पेट्रोलियम का वर्णन निम्न प्रकार है-

पेट्रोलियम— भारत में कोयले के उपरान्त ऊर्जा का द्वितीय प्रमुख साधन पेट्रोलियम या खनिज तेल है।

उपयोग— यह ताप एवं प्रकाश के लिए ईंधन, मशीनों को स्नेहक और अनेक विनिर्माण उद्योगों को कच्चा माल प्रदान करता है। तेल-शोधन शालाएँ-संश्लेषित वस्त्र, उर्वरक तथा असंख्य रसायन उद्योगों में एक नोडीय बिन्दु की भूमिका अदा करती हैं।

उत्पत्ति— पेट्रोलियम की उत्पत्ति समुद्री जीव-जन्तुओं तथा वनस्पतियों के अवशेषों से हुई है। समुद्र में अनेक छोटे-छोटे जैविक पौधे पानी में तैरते रहते हैं। मृत्यु होने के उपरान्त इनके जीवांश समुद्र में निर्मित अवसादी शैलों में दब जाते हैं। इन जीवांशों पर करोड़ों वर्षों तक गर्मी, दबाव तथा रासायनिक क्रियाओं का प्रभाव पड़ता है। इसके फलस्वरूप ये जीवांश पेट्रोलियम में परिवर्तित हो जाते हैं।

भारत में पेट्रोलियम का वितरण— भारत में अधिकांश पेट्रोलियम टरशियरी युग की शैल संरचनाओं के अपनति और भ्रंश ट्रैप में पाया जाता है। पेट्रोलियम सरन्ध्र और अरन्ध्र चट्टानों के बीच भ्रंश ट्रैप में भी पाया जाता है। भारत में पेट्रोलियम उत्पादक प्रमुख क्षेत्र मुम्बई हाई, गुजरात तथा असम हैं। अंकलेश्वर गुजरात का सबसे महत्त्वपूर्ण तेल क्षेत्र है। असम भारत का सबसे पुराना तेल उत्पादक राज्य है। डिग्बोई, नहरकटिया और मोरन-हुगरीजन असम के महत्त्वपूर्ण तेल उत्पादक क्षेत्र हैं। वर्तमान में राजस्थान के बाड़मेर जिले में भी पेट्रोलियम का उत्पादन किया जा रहा है।

प्रश्न 5. ऊर्जा संसाधनों में प्राकृतिक गैस के महत्त्व का उल्लेख कीजिये। भारत में इसके वितरण की व्याख्या करते हुए प्रमुख पाइप लाइन की जानकारी दीजिये।

उत्तर— प्राकृतिक गैस का महत्त्व— प्राकृतिक गैस एक महत्त्वपूर्ण स्वच्छ ऊर्जा संसाधन है, जो कि खनिज तेल के साथ अथवा अलग भी पाई जाती है। इसके महत्त्व को निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है-

(i) इसका उपयोग घरेलू और औद्योगिक ईंधन के रूप में किया जा सकता है।

(ii) इसका उपयोग बिजली क्षेत्र में ईंधन के रूप में बिजली पैदा करने के लिए, उद्योगों में हीटिंग के उद्देश्य के लिए किया जा सकता है।

(iii) रासायनिक, पैट्रोकेमिकल और उर्वरक उद्योगों में कच्चे माल के रूप, परिवहन ईंधन के रूप में तथा खाना पकाने के ईंधन के रूप में भी इसका उपयोग किया जाता है।

(iv) गैस के बुनियादी ढाँचे में विस्तार और स्थानीय शहर गैस वितरण (सी.ओ.डी.) नेटवर्क के विस्तार के साथ प्राकृतिक गैस पसंदीदा परिवहन ईंधन (सी.एन.जी.) के रूप में उभर रहा है।

वितरण— भारत में कृष्णा-गोदावरी नदी बेसिन में प्राकृतिक गैस के विशाल भण्डार खोजे गये हैं। पश्चिमी तट के साथ मुम्बई हाई और सन्निद्ध क्षेत्रों को खंभात की खाड़ी में पाए जाने वाले तेल क्षेत्र सम्पूरित करते हैं। अण्डमान-निकोबार द्वीप-समूह में भी महत्त्वपूर्ण क्षेत्र हैं जहाँ प्राकृतिक गैस के विशाल भण्डार ज्ञात किये गये हैं।

प्रमुख पाइप लाइन— भारत में प्राकृतिक गैस की प्रमुख पाइप लाइन हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर (HVJ) क्रास-कंट्री गैस पाइप लाइन है। इसकी लम्बाई 1700 किलोमीटर है। यह गैस पाइप लाइन मुम्बई हाई और बसीन को पश्चिमी व उत्तरी भारत के उर्वरक, विद्युत व अन्य औद्योगिक क्षेत्रों से जोड़ती है। इन गैस पाइप लाईनों ने भारतीय गैस बाजार के विकास को गति प्रदान की है। कुल मिलाकर भारत के गैस बुनियादी ढाँचे का विस्तार क्रास-कंट्री पाइप लाईनों के 1,700 किलोमीटर से बढ़कर 18,500 किलोमीटर तक हो गया है।

प्रश्न 6. भूतापीय ऊर्जा पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये।

अथवा

भूतापीय ऊर्जा से क्या आशय है? यह किस प्रकार उत्पन्न की जाती है? भारत में भूतापीय ऊर्जा के विकास का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

उत्तर— भूतापीय ऊर्जा का अर्थ— पृथ्वी के आन्तरिक भागों से ताप का प्रयोग करके उत्पन्न की जाने वाली विद्युत को भूतापीय ऊर्जा कहते हैं।

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उत्पत्ति-धरातल के नीचे की तरफ बढ़ती गहराई के साथ पृथ्वी के आन्तरिक भागों के तापमान में वृद्धि होती जाती है। जहाँ भी भू-तापीय प्रवणता अधिक होती है वहाँ कम गहराई पर भी अधिक तापमान पाया जाता है। इस प्रकार के क्षेत्रों में भूमिगत जल चट्टानों से ऊष्मा प्राप्त करके गर्म हो जाता है। यह इतना गर्म हो जाता है कि यह पृथ्वी की सतह की तरफ उठने लगता है और भाप में परिवर्तित हो जाता है। इसी भाप का उपयोग टरबाइन चलाने और विद्युत उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।

भारत में भूतापीय ऊर्जा का विकास-भारत में गर्म पानी के सैकड़ों चश्मे हैं जिनका प्रयोग विद्युत उत्पादन में किया जा सकता है। भूतापीय ऊर्जा के दोहन के लिए भारत में दो प्रायोगिक परियोजनाएँ शुरू की गई हैं। एक हिमाचल प्रदेश में मणिकरण के निकट पार्वती घाटी में स्थित है तथा दूसरी लद्दाख में पूगा घाटी में स्थित है।

प्रश्न 7. भारत में गैर-परम्परागत ऊर्जा संसाधनों का वर्णन कीजिए।

अथवा

भारत में प्रमुख गैर-परम्परागत शक्ति के साधन कौन-कौन से हैं? वर्णन कीजिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— गैर-परम्परागत ऊर्जा संसाधनों से अभिप्राय ऐसे ऊर्जा संसाधनों से है जो आधुनिक वैज्ञानिक युग की देन हैं। इनके अन्तर्गत सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा, बायो गैस एवं परमाणु ऊर्जा को सम्मिलित किया जाता है। इनमें परमाणु ऊर्जा को छोड़कर शेष सभी नवीकरणीय हैं।

(1) परमाणु ऊर्जा- परमाणु ऊर्जा अथवा आण्विक ऊर्जा अणुओं की संरचना को बदलने से प्राप्त की जाती है। जब ऐसा परिवर्तन किया जाता है तो ऊष्मा के रूप में काफी ऊर्जा विमुक्त होती है, और इसका उपयोग विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करने में किया जाता है। भारत के झारखंड एवं राजस्थान में मिलने वाले यूरेनियम व थोरियम का प्रयोग परमाणु ऊर्जा के उत्पादन में किया जाता है। केरल में मिलने वाली मोनाजाइट रेत में भी थोरियम की मात्रा पाई जाती है। भारत में आण्विक ऊर्जा के उत्पादन हेतु तारापुर (महाराष्ट्र), रावतभाटा (राजस्थान), कलपक्कम (तमिलनाडु), नरोरा (उत्तर प्रदेश), काकरापारा (गुजरात) एवं केगा (कर्नाटक) में अणु विद्युत गृहों की स्थापना की गई है।

(2) सौर ऊर्जा- सौर ऊर्जा सूर्य से प्राप्त होती है। भारत में सौर ऊर्जा के विकास की असीम सम्भावनाएँ हैं। फोटोवोल्टाइक प्रौद्योगिकी द्वारा धूप को सीधे विद्युत में परिवर्तित किया जाता है। भारत के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में सौर ऊर्जा तेजी से लोकप्रिय हो रही है। भारत का सबसे बड़ा सौर संयंत्र भुज (गुजरात) के निकट माधोपुर में स्थापित किया गया है, जहाँ सौर ऊर्जा से दूध के बड़े बर्तनों को कीटाणुमुक्त किया जाता है।

(3) पवन ऊर्जा- पवन की गति से उत्पन्न ऊर्जा पवन ऊर्जा कहलाती है। पवन ऊर्जा को पवनचक्कियों से प्राप्त किया जाता है। पवन की गतिज ऊर्जा को टरबाइन के माध्यम से विद्युत ऊर्जा में बदला जाता है। यह पूर्ण रूप से प्रदूषण मुक्त एवं ऊर्जा का असमाप्य स्रोत है। भारत में पवन ऊर्जा फार्म की विशालतम पेटी तमिलनाडु में नागरकोइल से मदुरई तक फैली हुई है।

इसके अतिरिक्त आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, केरल, महाराष्ट्र, राजस्थान एवं लक्षद्वीप में भी महत्त्वपूर्ण पवन ऊर्जा फार्म स्थापित हैं। नागरकोइल और जैसलमेर देश में पवन ऊर्जा के प्रभावी प्रयोग के लिए जाने जाते हैं।

(4) बायो गैस- भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में झाड़ियों, कृषि अपशिष्टों, पशुओं और मानवजनित अपशिष्टों के उपयोग से घरेलू उपयोग हेतु बायो गैस उत्पन्न की जाती है। यह गैस जैविक पदार्थों के अपघटन से उत्पन्न होती है। इसकी तापीय क्षमता मिट्टी के तेल, उपलों व चारकोल की अपेक्षा अधिक होती है। भारत में पशुओं का गोबर प्रयोग करने वाले संयंत्र गोबर गैस संयंत्र के नाम से जाने जाते हैं। ऊर्जा प्राप्ति का यह साधन पर्यावरण को संरक्षित करने वाला है।

(5) भू-तापीय ऊर्जा- पृथ्वी के आंतरिक भागों के ताप का प्रयोग कर उत्पन्न की जाने वाली विद्युत को भूतापीय ऊर्जा कहते हैं। भारत में सैकड़ों गर्म पानी के झरने हैं जिनका विद्युत उत्पादन में प्रयोग किया जा सकता है। भूतापीय ऊर्जा के दोहन के लिए भारत में दो प्रायोगिक परियोजनाएँ प्रारम्भ की गई हैं-

(i) पार्वती घाटी-मणिकरण (हिमाचल प्रदेश), (ii) पूगा घाटी-लद्दाख (जम्मू-कश्मीर)।

(6) ज्वारीय ऊर्जा- महासागरों में उठने वाली तरंगों का प्रयोग विद्युत उत्पादन में किया जाता है। संकरी खाड़ी के आर-पार बाढ़-द्वार बनाकर बाँध बनाए जाते हैं। उच्च ज्वार में इस संकरी खाड़ीनुमा प्रवेश द्वार से पानी भीतर भर जाता है और द्वार बन्द होने पर बाँध में ही रह जाता है। बाढ़ द्वार के बाहर ज्वार उतरने पर, बाँध के पानी को इसी रास्ते पाइप द्वारा समुद्र की तरफ बहाया जाता है जो इसे ऊर्जा उत्पादक टरबाइन की ओर ले जाता है। भारत में कच्छ की खाड़ी, खम्भात की खाड़ी तथा पश्चिमी तट पर गुजरात तथा पश्चिम बंगाल में सुंदरवन क्षेत्र में गंगा के डेल्टा में ज्वारीय तरंगों द्वारा ऊर्जा उत्पन्न करने की आदर्श दशाएँ उपस्थित हैं।

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सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X 217

प्रश्न 8. ऊर्जा संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता तथा उपायों का वर्णन कीजिये।

उत्तर— ऊर्जा संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता

(1) ऊर्जा सभी क्रियाकलापों के लिए आवश्यक है। खाना पकाने में, रोशनी व ताप के लिए, गाड़ियों के संचालन तथा उद्योगों में मशीनों के संचालन में ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

(2) आर्थिक विकास के लिए ऊर्जा एक आधारभूत आवश्यकता है। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के प्रत्येक सेक्टर-कृषि, उद्योग, परिवहन, वाणिज्य व घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ऊर्जा के निवेश की आवश्यकता है।

(3) स्वतंत्रता-प्राप्ति के पश्चात् क्रियान्वित आर्थिक विकास की योजनाओं को चालू रखने के लिए ऊर्जा की बड़ी मात्रा की आवश्यकता है।

(4) पूरे देश में ऊर्जा के सभी प्रकारों का उपभोग धीरे-धीरे बढ़ रहा है।

ऊर्जा संरक्षण के उपाय-

(1) ऊर्जा के विकास के सतत् पोषणीय मार्ग को विकसित किया जाना चाहिए। ऊर्जा संरक्षण की प्रोन्नति और नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों का बढ़ता प्रयोग सतत् पोषणीय ऊर्जा के दो आधार हैं।

(2) ऊर्जा के सीमित संसाधनों के न्यायसंगत उपयोग के लिए सावधानीपूर्ण उपागम अपनाना चाहिए। उदाहरणार्थ, एक जागरूक नागरिक के रूप में हम यातायात के लिए निजी वाहन की अपेक्षा सार्वजनिक वाहन का उपयोग करके, जब प्रयोग न हो रही हो तो बिजली बन्द करके, विद्युत बचत करने वाले उपकरणों के प्रयोग से तथा गैर पारंपरिक ऊर्जा साधनों के प्रयोग से हम अपना छोटा योगदान दे सकते हैं।

(3) ऊर्जा की बचत ही उसका सबसे बड़ा संरक्षण है।

प्रश्न 9. भारत में लौह अयस्क का वितरण समझाइये। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— भारत में लौह अयस्क का वितरण निम्नवत् है-

(i) ओडिशा-झारखंड पेटी- ओडिशा में उच्च कोटि का हेमेटाइट किस्म का लौह अयस्क मयूरभंज व केंदुझर जिलों में बादाम पहाड़ खदानों से निकाला जाता है। इसी से सन्निद्ध झारखंड के सिंहभूम जिले में गुआ तथा नोआमुंडी से हेमेटाइट अयस्क का खनन किया जाता है।

(ii) दुर्ग-बस्तर-चन्द्रपुर पेटी- यह पेटी महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ राज्यों के अंतर्गत पाई जाती है। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में बेलाडिला पहाड़ी श्रृंखलाओं में अति उत्तम कोटि का हेमेटाइट पाया जाता है जिसमें इस गुणवत्ता के लौह अयस्क के 14 जमाव मिलते हैं। इसमें इस्पात बनाने में आवश्यक सर्वश्रेष्ठ भौतिक गुण विद्यमान हैं।

(iii) बल्लारि-चित्रदुर्ग, चिक्कमंगलूरु-तुमकरू पेटी- कर्नाटक की इस पेटी में लौह अयस्क की बृहत् राशि संचित है। कर्नाटक में पश्चिमी घाट में अवस्थित कुद्रेमुख की खानें शत् प्रतिशत निर्यात इकाई हैं। कुद्रेमुख निक्षेप संसार के सबसे बड़े निक्षेपों में से एक माने जाते हैं।

(iv) महाराष्ट्र-गोवा पेटी- यह पेटी गोवा तथा महाराष्ट्र राज्य के रत्नागिरी जिले में स्थित है। यद्यपि यहाँ का लोहा उत्तम प्रकार का नहीं है तथापि इसका दक्षता से दोहन किया जाता है।

प्रश्न 10. परम्परागत ऊर्जा के स्रोत कौन-कौन से हैं? किन्हीं तीन पर अपने विचार लिखिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— परम्परागत ऊर्जा के स्रोत हैं-कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस तथा विद्युत।

कोयला- कोयले का निर्माण पादप पदार्थों के लाखों वर्षों तक संपीड़न से हुआ है। इसीलिए संपीड़न की मात्रा, गहराई और दबने के समय के आधार पर कोयला अनेक रूपों में पाया जाता है। दलदलों में क्षय होते पादपों से पीट उत्पन्न होता है, जिसमें कम कार्बन, नमी की उच्च मात्रा व निम्न ताप क्षमता होती है। लिग्नाइट एक निम्न कोटि का भूरा कोयला होता है। यह मुलायम होने के साथ अधिक नमीयुक्त होता है। गहराई में दबे तथा अधिक तापमान से प्रभावित कोयले को बिटुमिनस कोयला कहा जाता है। एंथ्रेसाइट सर्वोत्तम गुण वाला कठोर कोयला है।

भारत में कोयला दो प्रमुख भूगर्भिक युगों के शैल क्रम में पाया जाता है-एक गोंडवाना और दूसरा टरशियरी निक्षेप।

पेट्रोलियम- भारत में अधिकांश पेट्रोलियम की उपस्थिति टरशियरी युग की शैल संरचनाओं के अपनति व भ्रंश ट्रैप में पाई जाती है। वलन, अपनति और गुंबदों वाले प्रदेशों में यह वहाँ पाया जाता है जहाँ उद्‌वलन के शीर्ष में तेल ट्रैप हुआ होता है। तेल धारक परत संरंध्र चूना पत्थर या बालूपत्थर होता है जिसमें तेल प्रवाहित हो सकता है। मध्यवर्ती असरंध्र परतें तेल को ऊपर उठने व नीचे रिसने से रोकती हैं।

पेट्रोलियम संरंध्र और असरंध्र चट्टानों के बीच भ्रंश ट्रैप में भी पाया जाता है।

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भारत में मुम्बई हाई, गुजरात और असम प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादक क्षेत्र हैं।

प्राकृतिक गैस-प्राकृतिक गैस पेट्रोलियम के भंडार के साथ पाई जाती है और जब कच्चे तेल को सतह पर लाया जाता है तो यह मुक्त हो जाती है। इसका उपयोग घरेलू और औद्योगिक ईंधन के रूप में किया जा सकता है। भारत के प्रमुख गैस भंडार मुम्बई हाई और अन्य संबद्ध क्षेत्र पश्चिमी तट पर पाए जाते हैं जिनको खंभात बेसिन में पाए जाने वाले क्षेत्र संपूरित करते हैं। पूर्वी तट पर कृष्णा-गोदावरी बेसिन में प्राकृतिक गैस के नए भंडार की खोज की गई है।

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