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सामाजिक विज्ञान (Social Science)हिंदी माध्यम2026-27

RBSE Class 10 SST Chapter 11 Solutions in Hindi — [भूगोल] विनिर्माण उद्योग | पासबुक हल, नोट्स

📅 अंतिम अपडेट: 2026-09-10📖 RBSE/NCERT Solutions
भाग 1 — समाधान (भूगोल पाठ 6)

📖 1. समाधान: पाठगत एवं पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नोत्तर

राजस्थान बोर्ड कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान (भूगोल) — सभी पाठगत प्रश्नों एवं पाठ्यपुस्तक अभ्यास के संपूर्ण सटीक उत्तर।

पाठगत प्रश्न

पृष्ठ 59

प्रश्न 1. कच्चा माल और तैयार माल की मात्रा और भार के आधार पर निम्न को दो वर्गों में विभाजित करें।

तेल | सिलाई मशीन

बुुनने की सलाई | पोत निर्माण

पीतल के बर्तन | विद्युत बल्ब

फ्यूज तार | पेन्ट के ब्रश

घड़ियाँ | मोटरगाड़ी

उत्तर— कच्चा माल और तैयार माल की मात्रा के आधार पर उद्योगों को दो भागों में विभाजित किया जाता है-

(1) हल्के उद्योग-तेल, पीतल के बर्तन, फ्यूज तार, घड़ियाँ, सिलाई मशीन, पेन्ट के ब्रश, विद्युत बल्ब, बुनने की सलाई।

(2) भारी उद्योग-पोत निर्माण, मोटरगाड़ी।

पृष्ठ 60

प्रश्न 2. महात्मा गाँधी ने सूत कातने तथा खादी बुनने पर क्यों बल दिया?

उत्तर— महात्मा गाँधी ने सूत कातने तथा खादी बुनने पर बल इसलिए दिया जिससे कि मशीनों पर निर्भरता कम होकर अधिकांश व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त हो सके, कुटीर उद्योगों को बढ़ावा मिले, स्वदेशी व राष्ट्रीयता की भावना विकसित हो।

पृष्ठ 60

प्रश्न 3. हमारे देश में विद्युत चालित करघों तथा हथकरघों द्वारा निर्मित लूमेज की अपेक्षा कारखानों द्वारा निर्मित लूमेज को कम रखना महत्त्वपूर्ण है?

उत्तर— हमारे देश में विद्युत चालित करघों तथा हथकरघों द्वारा निर्मित लूमेज की अपेक्षा कारखानों द्वारा निर्मित लूमेज को कम रखना महत्त्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि कारखानों में लोगों को कम संख्या में रोजगार की प्राप्ति होती है। कारखानों की अधिकता के कारण बहुत से श्रमिक बेरोजगार हो जायेंगे।

पृष्ठ 62

प्रश्न 4. इस्पात से बनी उन सभी पदार्थों की सूची बनाएँ जो आप सोच सकते हैं।

उत्तर— इस्पात के बर्तन, दरवाजे, किवाड़, खिड़कियाँ, फर्नीचर, रेल के पुल, सरिया, वाहन, घरेलू उपकरण, कृषि उपकरण, विद्युत उपकरण, मशीनें, गाड़ियाँ, तिजोरियाँ तथा चिकित्सा उपकरण आदि अनेक वस्तुओं का निर्माण इस्पात से किया जाता है।

पृष्ठ 65

प्रश्न 5. सीमेण्ट विनिर्माण इकाइयों की स्थापना कहाँ पर आर्थिक रूप से व्यावहारिक होगी?

उत्तर— सीमेण्ट विनिर्माण इकाइयों की स्थापना चूने के पत्थर के क्षेत्रों के पास या निकटवर्ती क्षेत्रों में व्यावहारिक होगी जहाँ विद्युत की लगातार आपूर्ति हो तथा पर्याप्त रेल व सड़क परिवहन की व्यवस्था हो।

प्रश्न 6. भारत में यह (सीमेण्ट) उद्योग अन्य किन राज्यों में स्थित है? उनके नाम बताएँ।

उत्तर— भारत में सीमेण्ट उद्योग गुजरात के अलावा निम्न अन्य राज्यों में स्थित है-

(1) राजस्थान (2) मध्य प्रदेश (3) आन्ध्र प्रदेश (4) तमिलनाडु

(5) कर्नाटक (6) झारखण्ड (7) महाराष्ट्र (8) तेलंगाना आदि।

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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

1. बहुवैकल्पिक प्रश्न-

(i) निम्न में से कौनसा उद्योग चूना-पत्थर को कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त करता है? (प्रश्न बैंक)

--- [ पृष्ठ संख्या: 228 ] ---

सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X | 221

(क) एल्युमिनियम (ख) प्लास्टिक (ग) सीमेण्ट (घ) मोटरगाड़ी

(ii) निम्न में से कौनसा उद्योग बॉक्साइट को कच्चे माल के रूप में प्रयोग करता है? (प्रश्न बैंक)

(क) एल्युमिनियम प्रगलन (ख) सीमेण्ट (ग) कागज (घ) स्टील।

(iii) निम्न में से कौनसा उद्योग दूरभाष, कम्प्यूटर आदि संयंत्र निर्मित करता है? (प्रश्न बैंक)

(क) स्टील (ख) एल्युमिनियम प्रगलन

(ग) इलेक्ट्रॉनिक (घ) सूचना प्रौद्योगिकी।

उत्तर-(i) (ग) (ii) (क) (iii) (ग)।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।

प्रश्न (i) विनिर्माण क्या है?

अथवा

विनिर्माण या वस्तु निर्माण किसे कहा जाता है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— कच्चे पदार्थ को मूल्यवान उत्पाद में परिवर्तित कर बड़े पैमाने पर वस्तुओं के उत्पादन को विनिर्माण कहा जाता है। उदाहरण के लिए कपास से सूती वस्त्र, लौह अयस्क से लौह-इस्पात बनाना।

प्रश्न (ii) आधारभूत उद्योग क्या है? उदाहरण देकर बताएँ। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— वह उद्योग जो कि उपभोक्ता वस्तुओं के लिए मशीनों का निर्माण करते हैं, आधारभूत उद्योग कहलाते हैं। जैसे-लौह-इस्पात उद्योग।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए।

प्रश्न (i) उद्योग पर्यावरण को कैसे प्रदूषित करते हैं? (प्रश्न बैंक)

अथवा

उद्योगों से होने वाले वायु प्रदूषण एवं जल प्रदूषण का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

उत्तर— उद्योग पर्यावरण को निम्नलिखित प्रकार से प्रदूषित करते हैं-

(1) वायु प्रदूषण— उद्योगों से निकलने वाले धुएँ ने वायु को अत्यधिक प्रदूषित किया है। रसायन व कागज उद्योग, ईंटों के भट्टे, तेल-शोधन शालाएँ, प्रगलन उद्योग, जीवाश्म ईंधन दहन तथा छोटे-बड़े कारखाने प्रदूषण के नियमों का उल्लंघन करते हुए धुआँ निष्कासित करते हैं। जहरीली गैसों का रिसाव बहुत भयानक तथा दूरगामी प्रभावों वाला हो सकता है। जैसे-भोपाल गैस त्रासदी आदि।

(2) जल प्रदूषण— उद्योगों के द्वारा कार्बनिक तथा अकार्बनिक अपशिष्ट पदार्थों के नदी व तालाबों में छोड़ने से जल प्रदूषण फैलता है। जल प्रदूषण के प्रमुख कारक हैं-कागज, लुगदी, रसायन, वस्त्र तथा रंगाई उद्योग, तेल-शोधन शालाएँ, चमड़ा उद्योग तथा इलेक्ट्रो-प्लेटिंग उद्योग; जो कि रंग, अपमार्जक, अम्ल, लवण तथा भारी वस्तुएँ, यथा-सीसा, पारा, कीटनाशक, उर्वरक, कार्बन, प्लास्टिक, रबर सहित कृत्रिम रसायन आदि जल में वाहित करते हैं। ये अशुद्धियाँ जल को प्रदूषित करने के साथ-साथ पर्यावरण को भी प्रदूषित करती हैं।

(3) मृदा प्रदूषण— उद्योगों के बहुत से अपशिष्ट पदार्थ मिट्टी में मिलकर मृदा प्रदूषण करते हैं। मलबे के ढेर विशेषकर काँच, हानिकारक रसायन, औद्योगिक बहाव, पैकिंग लवण तथा कूड़ा-करकट मृदा को अनुपजाऊ बनाते हैं। रेडियोधर्मी पदार्थों और परमाणु परीक्षणों से भी भूमि प्रदूषित होती है।

(4) ध्वनि प्रदूषण— जब मशीन-जनित ध्वनि तीव्र, कर्कश एवं बेसुरी हो जाती है तो शोर ध्वनि प्रदूषण का रूप ले लेता है। कल-कारखानों की मशीनों से होने वाली आवाज तथा परिवहन के साधनों से होने वाली कर्कश आवाज ध्वनि प्रदूषण का प्रमुख कारण है।

(5) तापीय प्रदूषण— जब कारखानों तथा तापघरों से गर्म जल को बिना ठंडा किए ही नदियों तथा तालाबों में छोड़ दिया जाता है, तो जल में तापीय प्रदूषण होता है। इसका जलीय जीवन पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है।

प्रश्न (ii) उद्योगों द्वारा पर्यावरण निम्नीकरण को कम करने के लिए उठाए गए विभिन्न उपायों की चर्चा करें।

उत्तर— पर्यावरण निम्नीकरण को कम करने के उपाय-औद्योगिक प्रदूषण से पर्यावरण निम्नीकरण को कम करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं-

(1) विभिन्न प्रक्रियाओं में जल का न्यूनतम उपयोग तथा जल का दो या अधिक उत्तरोत्तर अवस्थाओं में पुनर्चक्रण द्वारा पुनः उपयोग करना।

(2) जल की आवश्यकता पूर्ति हेतु वर्षा जल का संग्रहण करना।

--- [ पृष्ठ संख्या: 229 ] ---

(3) नदियों व तालाबों में गर्म जल तथा अपशिष्ट पदार्थों को प्रवाहित करने से पूर्व उनका शोधन करना।

(4) जहाँ भूमिगत जल का स्तर कम है, वहाँ उद्योगों द्वारा इसके अधिक निष्कासन पर कानूनी प्रतिबन्ध लगाना।

(5) वायु में निलम्बित प्रदूषण को कम करने के लिए कारखानों में ऊँची चिमनियाँ, चिमनियों में इलेक्ट्रोस्टैटिक अवक्षेपण, स्क्रबर उपकरण तथा गैसीय प्रदूषक पदार्थों को जड़ तत्त्वीय रूप से पृथक् करने के लिए उपकरण लगाना अनिवार्य करना।

(6) कोयले की अपेक्षा तेल व गैस के प्रयोग से धुएँ का निष्कासन कम करना।

(7) मशीनों व उपकरणों का उपयोग करना तथा जेनरेटरों में साइलेन्सर लगाना।

(8) ऊर्जा सक्षम मशीनरी का प्रयोग करना ताकि कम ध्वनि प्रदूषण हो।

(9) ध्वनि अवशोषित करने वाले उपकरणों के इस्तेमाल के साथ कानों पर शोर नियन्त्रण उपकरण भी उपलब्ध कराना।

क्रियाकलाप

प्रश्न- उद्योगों के संदर्भ में प्रत्येक के लिए एक शब्द दें (संकेतिक अक्षर संख्या कोष्ठक में दी गई है तथा उत्तर अंग्रेजी के शब्दों में हैं)

(i) मशीनरी चलाने में प्रयुक्त (5) P .............

(ii) कारखानों में काम करने वाले व्यक्ति (6) W .............

(iii) उत्पाद को जहाँ बेचा जाता है (6) M .............

(iv) वह व्यक्ति जो सामान बेचता है (8) R .............

(v) वस्तु उत्पादन (7) P .............

(vi) निर्माण या उत्पादन (11) M .............

(vii) भूमि, जल तथा वायु अवनयन (9) P .............

उत्तर-(i) POWER (ii) WORKER (iii) MARKET (iv) RETAILER (v) PRODUCTION (vi) MANUFACTURE (vii) POLLUTION

प्रोजेक्ट कार्य

प्रश्न- अपने क्षेत्र के एक कृषि आधारित तथा एक खनिज आधारित उद्योग को चुनें।

(i) ये कच्चे माल के रूप में क्या प्रयोग करते हैं?

(ii) विनिर्माण प्रक्रिया में अन्य निवेश क्या हैं जिनसे परिवहन लागत बढ़ती है।

(iii) क्या ये कारखाने पर्यावरण नियमों का पालन करते हैं?

उत्तर- कृषि आधारित उद्योग-

चीनी उद्योग-(i) कच्चा माल-गन्ना।

(ii) अन्य निवेश-जल, पूंजी, श्रम, विद्युत, पैकिंग आदि।

(iii) हाँ, ये कारखाने पर्यावरण नियमों का पालन करते हैं।

खनिज आधारित उद्योग-

सीमेंट उद्योग-(i) कच्चा माल-चूना पत्थर, डोलोमाइट, मैंगनीज, कोयला।

(ii) अन्य निवेश-पूंजी, श्रम, विद्युत, जल, पैकिंग आदि।

(iii) हाँ, ये कारखाने पर्यावरण नियमों का पालन करते हैं।

क्रियाकलाप

प्रश्न 1. निम्न वर्ग पहेली में क्षैतिज अथवा ऊर्ध्वाधर अक्षरों को जोड़ते हुए निम्न प्रश्नों के उत्तर दें।

(i) वस्त्र, चीनी, वनस्पति तेल तथा रोपण उद्योग जो कृषि से कच्चा माल प्राप्त करते हैं, उन्हें कहते हैं.......

(ii) चीनी उद्योग में प्रयुक्त होने वाला कच्चा पदार्थ।

(iii) इस रेशे को गोल्डन फाइबर (Golden Fibre) भी कहते हैं।

(iv) लौह-अयस्क, कोकिंग कोयला तथा चूना पत्थर इस उद्योग के प्रमुख कच्चे माल हैं।

(v) छत्तीसगढ़ में स्थित सार्वजनिक क्षेत्र का लोहा-इस्पात उद्योग।

(vi) उत्तर प्रदेश में इस स्थान पर डीजल रेलवे इंजन बनाए जाते हैं।

[नोट : पहेली के उत्तर अंग्रेजी के शब्दों में हैं।]

--- [ पृष्ठ संख्या: 230 ] ---

सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X | 223

उत्तर—

[शब्द पहेली (Word Puzzle)]

कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान पाठ 11 विनिर्माण उद्योग चित्र 1

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(i) AGROBASED (ii) SUGARCANE (iii) JUTE

(iv) IRONSTEEL (v) BHILAI (vi) VARANASI

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भाग 2 — रिवीजन नोट्स (Notes & Summary)

📝 2. नोट्स: पाठ-सार, मुख्य बिंदु एवं शब्दावली

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं, भौगोलिक परिभाषाएं, राजनीतिक सिद्धांत एवं संपूर्ण अध्याय का सारगर्भित सारांश।

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पाठ-सार

विनिर्माण-कच्चे पदार्थ को मूल्यवान उत्पाद में परिवर्तित करके अधिक मात्रा में वस्तुओं के उत्पादन को विनिर्माण या वस्तु निर्माण कहा जाता है। द्वितीयक कार्यों में लगे व्यक्ति कच्चे माल को परिष्कृत वस्तुओं में परिवर्तित करते हैं।

विनिर्माण उद्योगों का महत्त्व-विनिर्माण उद्योग सामान्यतः विकास की तथा विशेषतः आर्थिक विकास की रीढ़ समझे जाते हैं। क्योंकि-(i) ये कृषि के आधुनिकीकरण में सहयोग देने के साथ-साथ द्वितीयक व तृतीयक सेवाओं में रोजगार देकर कृषि पर हमारी निर्भरता को कम करते हैं।

(ii) ये बेरोजगारी तथा गरीबी उन्मूलन के साथ-साथ क्षेत्रीय असमानताओं को कम करते हैं।

(iii) इनसे निर्मित वस्तुओं के निर्यात से विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है।

(iv) किसी देश की आर्थिक उन्नति विनिर्माण उद्योगों के विकास से मापी जाती है।

उद्योगों का वर्गीकरण-

1. प्रयुक्त कच्चे माल के स्रोत के आधार पर-

(i) कृषि आधारित, यथा-सूती वस्त्र, ऊनी वस्त्र, पटसन, रेशम वस्त्र, चीनी, चाय, कॉफी तथा वनस्पति तेल उद्योग आदि।

(ii) खनिज आधारित, यथा-लौह-इस्पात, सीमेण्ट, एल्यूमीनियम आदि।

2. प्रमुख भूमिका के आधार पर-

(i) आधारभूत उद्योग, यथा-लोहा, इस्पात, ताँबा प्रगलन व एल्यूमीनियम प्रगलन आदि।

(ii) उपभोक्ता उद्योग, यथा-चीनी, दंतमंजन, सिलाई मशीन आदि।

3. पूँजी निवेश के आधार पर

4. स्वामित्व के आधार पर-

(i) सार्वजनिक क्षेत्र में लगे उद्योग, यथा-भारत हैवी इलेक्ट्रिकल उद्योग आदि।

(ii) निजी क्षेत्र में लगे उद्योग, यथा-टिस्को, बजाज ऑटो लिमिटेड आदि।

(iii) संयुक्त उद्योग, यथा-ऑयल इण्डिया लिमिटेड आदि।

(iv) सहकारी उद्योग, यथा-केरल के नारियल उद्योग आदि।

5. कच्चे तथा तैयार माल की मात्रा तथा भार के आधार पर-

(i) भारी उद्योग, यथा-लौह-इस्पात आदि।

(ii) हल्के उद्योग, यथा-विद्युतीय उद्योग आदि।

कुछ प्रमुख उद्योग-

वस्त्र उद्योग-देश का यह अकेला उद्योग है जो कच्चे माल के उच्चतम अतिरिक्त मूल्य उत्पाद तक की श्रृंखला में परिपूर्ण तथा आत्मनिर्भर है।

सूती वस्त्र उद्योग-आरम्भिक वर्षों में सूती वस्त्र उद्योग महाराष्ट्र तथा गुजरात के कपास उत्पादक क्षेत्रों तक ही सीमित था।

निम्न कारकों ने इस उद्योग के स्थानीयरण को बढ़ावा दिया-कपास की उपलब्धता, बाजार, परिवहन, पत्तनों की समीपता, श्रम, नमी युक्त जलवायु आदि।

यह उद्योग कृषि से निकट रूप से सम्बन्धित है। यह अनेक प्रकार के लोगों को जीविका प्रदान करता है। इस उद्योग में कताई कार्य और बुनाई कार्य प्रमुख प्रक्रियाएँ हैं।

--- [ पृष्ठ संख्या: 226 ] ---

सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X 219

पटसन उद्योग- भारत पटसन व पटसन निर्मित सामान का सबसे बड़ा उत्पादक है। बांग्लादेश के पश्चात् भारत पटसन उत्पाद का दूसरा बड़ा निर्यातक भी है।

भारत का अधिकांश पटसन उद्योग पश्चिम बंगाल में हुगली नदी के किनारे स्थित है इसका कारण है-पटसन उत्पादक क्षेत्रों की निकटता, सस्ता जल परिवहन, सड़क व रेल व जल परिवहन का जाल, कच्चे माल की उपलब्धता तथा सस्ते श्रम की उपलब्धता।

चीनी उद्योग- भारत का चीनी उत्पादन में विश्व में दूसरा स्थान है। गुड़ व खांडसारी के उत्पादन में इसका प्रथम स्थान है। चीनी मिलें-उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, गुजरात, पंजाब, हरियाणा तथा मध्य प्रदेश राज्य में फैली है। लेकिन इनका 60 प्रतिशत भाग उत्तर प्रदेश और बिहार में है।

लोहा व इस्पात उद्योग- यह एक आधारभूत उद्योग है। यह एक भारी उद्योग है। इसके लिए अधिक परिवहन लागत की आवश्यकता होती है। इस उद्योग के लिए लौह अयस्क, कोकिंग कोल तथा चूना पत्थर का अनुपात 4 : 2 : 1 है।

भारत के छोटा नागपुर के पठारी क्षेत्र में अधिकांश लोहा-इस्पात उद्योग संकेन्द्रित हैं। इसका कारण है-लौह अयस्क की कम लागत, उच्च कोटि के कच्चे माल की निकटता, सस्ते श्रमिक तथा स्थानीय बाजार में इसकी माँग।

एल्युमिनियम प्रगलन-

(i) भारत में एल्युमिनियम प्रगलन दूसरा सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण धातु शोधन उद्योग है।

(ii) देश के एल्युमिनियम प्रगलन संयंत्र ओडिशा, पश्चिम बंगाल, केरल, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र तथा तमिलनाडु राज्यों में स्थित है।

(iii) प्रगलकों में बॉक्साइट को कच्चे माल के रूप में प्रयोग किया जाता है।

(iv) इस उद्योग के लिए आवश्यक है-नियमित ऊर्जा की पूर्ति तथा कम कीमत पर कच्चे माल की सुनिश्चित उपलब्धता।

रसायन उद्योग- भारत में रसायन उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है। इसकी भागीदारी सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 3 प्रतिशत है। इसमें लघु तथा वृहत् दोनों प्रकार की विनिर्माण इकाइयाँ सम्मिलित हैं।

अकार्बनिक रसायनों में सल्फ्यूरिक अम्ल, नाइट्रिक अम्ल, क्षार, सोडा एश तथा कास्टिक सोडा शामिल हैं और कार्बनिक रसायनों में पेट्रोसायन शामिल हैं। इस उद्योग में कार्बनिक और अकार्बनिक दोनों क्षेत्रों में तीव्र वृद्धि दर्ज की है।

उर्वरक उद्योग- उर्वरक उद्योग नाइट्रोजनी उर्वरक, फास्फेटिक उर्वरक तथा अमोनिया फास्फेट और मिश्रित उर्वरक के उत्पादन क्षेत्रों के इर्द-गिर्द केन्द्रित है। पोटाश आयात किया जाता है।

सीमेन्ट उद्योग- इस उद्योग को चूना पत्थर, सिलिका और जिप्सम की आवश्यकता होती है। इसमें रेल परिवहन, कोयला और विद्युत ऊर्जा भी आवश्यक है। खाड़ी देशों के बाजार की उपलब्धता को देखते हुए इसकी इकाई गुजरात में लगाई गई है।

मोटरगाड़ी उद्योग- भारत के विभिन्न केन्द्रों पर ट्रक, बसें, कारें, मोटर साइकिल, स्कूटर, तिपहिया और बहुउपयोगी वाहन निर्मित किए जाते हैं।

सूचना प्रौद्योगिकी तथा इलेक्ट्रॉनिक उद्योग- इस उद्योग के उत्पादों में टेलीविजन, टेलीफोन, सेल्युलर टेलीकाम, टेलीफोन एक्सचेंज, रडार, कम्प्यूटर तथा दूरसंचार उद्योग के अन्य अनेक उपकरण बनाए जाते हैं। बेंगलूर भारत की इलेक्ट्रॉनिक राजधानी के रूप में उभरा है। भारत में सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग के सफल होने का कारण हार्डवेयर व सॉफ्टवेयर का निरन्तर विकास है।

औद्योगिक प्रदूषण तथा पर्यावरण निम्नीकरण- उद्योग चार प्रकार के प्रदूषण के लिए उत्तरदायी हैं। यथा-वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, तापीय प्रदूषण तथा ध्वनि प्रदूषण।

पर्यावरणीय निम्नीकरण की रोकथाम-

(i) विभिन्न प्रक्रियाओं में जल का न्यूनतम उपयोग करना।

(ii) जल की आवश्यकता पूर्ति हेतु वर्षा जल का संग्रहण।

(iii) नदियों व तालाबों में गर्म जल तथा अपशिष्ट पदार्थों को प्रवाहित करने से पहले उनका शोधन करना। इसे तीन चरणों में किया जा सकता है-(क) यांत्रिक साधनों द्वारा प्राथमिक शोधन, (ख) जैविक प्रक्रियाओं द्वारा द्वितीयक शोधन (ग) जैविक, रासायनिक तथा भौतिक प्रक्रियाओं द्वारा तृतीयक शोधन।

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भाग 3 — परीक्षा उपयोगी प्रश्न (Important Questions)

3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर एवं बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक, लघूत्तरात्मक एवं निबंधात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

● बहुविकल्पीय प्रश्न—

प्रश्न [1]. निम्न में से कौनसा उद्योग चूना-पत्थर, सिलिका और जिप्सम को कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त करता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)

(अ) एल्युमिनियम (ब) प्लास्टिक (स) सीमेंट (द) मोटरगाड़ी

उत्तर— (स)

प्रश्न [2]. विश्व में पटसन तथा पटसन निर्मित माल का सबसे बड़ा उत्पादक देश कौनसा है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)

(अ) भारत (ब) श्रीलंका (स) बांग्लादेश (द) चीन

उत्तर— (अ)

प्रश्न [3]. निम्न में से कौनसा आधारभूत उद्योग है- (प्रश्न बैंक)

(अ) लौह-इस्पात (ब) सीमेंट प्रगलन (स) एल्युमिनियम प्रगलन (द) उपर्युक्त सभी

उत्तर— (द)

प्रश्न [4]. चीनी मिलों की सर्वाधिक सघनता किन राज्यों में है? (प्रश्न बैंक)

(अ) उत्तरप्रदेश व बिहार (ब) बिहार व महाराष्ट्र

(स) कर्नाटक व उत्तरप्रदेश (द) गुजरात व पंजाब

उत्तर— (अ)

प्रश्न [5]. निम्न में से कौनसा शहर भारत की इलेक्ट्रॉनिक राजधानी कहा जाता है- (प्रश्न बैंक)

(अ) मुम्बई (ब) बंगलौर (स) कोलकाता (द) चेन्नई

उत्तर— (ब)

प्रश्न [6]. निम्न में से कौनसा उपभोक्ता उद्योग है- (प्रश्न बैंक)

(अ) एल्युमिनियम प्रगलन (ब) तांबा प्रगलन (स) लौह-इस्पात (द) सिलाई मशीन

उत्तर— (द)

प्रश्न [7]. निम्न में से कौनसा उद्योग चूना-पत्थर को कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त करता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)

(अ) कागज (ब) सीमेंट (स) स्टील (द) मोटरगाड़ी

उत्तर— (ब)

प्रश्न [8]. कच्चे पदार्थ को मूल्यवान उत्पाद में परिवर्तित कर अधिक मात्रा में वस्तुओं के उत्पादन को कहा जाता है-

(अ) व्यापार (ब) उद्योग (स) सेवा (द) विनिर्माण

उत्तर— (द)

प्रश्न [9]. गुड़ व खांडसारी के उत्पादन में विश्व में प्रथम स्थान है-

उत्तर— भारत

--- [ पृष्ठ संख्या: 231 ] ---

(अ) चीन का (ब) भारत का (स) ब्राजील का (द) श्रीलंका का

प्रश्न [10]. भारत का मुख्य अपशिष्ट पदार्थ है-

(अ) फ्लाई ऐश (ब) फोस्को-जिप्सम

(स) लोहा-इस्पात की अशुद्धियाँ (slag) (द) उपर्युक्त सभी

प्रश्न [11]. निम्न में से कौनसा उद्योग खनिज आधारित उद्योग है-

(अ) सूती वस्त्र उद्योग (ब) पटसन उद्योग (स) सीमेण्ट उद्योग (द) जूट उद्योग

प्रश्न [12]. निम्न में से कौनसा कृषि आधारित उद्योग है-

(अ) सिलाई मशीन उद्योग (ब) सूती वस्त्र उद्योग

(स) एल्युमिनियम उद्योग (द) ताँबा उद्योग

प्रश्न [13]. निम्न में से कौनसा उद्योग आधारभूत उद्योग है-

(अ) पटसन उद्योग (ब) चीनी उद्योग

(स) ताँबा प्रगलन उद्योग (द) सीमेण्ट उद्योग

प्रश्न [14]. निम्न में कौनसा कृषि आधारित उद्योग नहीं है? (प्रश्न बैंक)

(अ) पटसन उद्योग (ब) रबड़ उद्योग (स) सीमेण्ट उद्योग (द) चीनी उद्योग

प्रश्न [15]. निम्नलिखित में से कृषि के पश्चात् किस उद्योग ने सर्वाधिक रोजगार प्रदान किया है?

(अ) चीनी उद्योग (ब) पटसन उद्योग (स) लौह-इस्पात उद्योग (द) वस्त्र उद्योग

प्रश्न [16]. निम्न में जो उद्योग भारी उद्योग की श्रेणी में आता है, वह है-

(अ) लौह-इस्पात उद्योग (ब) विद्युतीय उद्योग

(स) बुनने की सलाई उद्योग (द) पेंट के ब्रश का उद्योग

प्रश्न [17]. पटसन के सामान का विश्व में सबसे बड़ा निर्यातक देश है-

(अ) भारत (ब) पाकिस्तान (स) बांग्लादेश (द) चीन

प्रश्न [18]. भारत का चीनी के उत्पादन में विश्व में स्थान है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)

(अ) पहला (ब) दूसरा (स) तीसरा (द) चौथा

प्रश्न [19]. कार्बनिक रसायन उद्योग में जो पदार्थ प्रयुक्त होता है, वह है-

(अ) सल्फ्यूरिक अम्ल (ब) नाइट्रिक अम्ल (स) पेट्रोसायन (द) कास्टिक सोडा

प्रश्न [20]. कौनसा प्रगलन उद्योग भारत में दूसरा सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण धातु शोधन उद्योग है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)

(अ) लौह अयस्क उद्योग (ब) एल्युमिनियम प्रगलन (स) ताँबा प्रगलन (द) सीसा प्रगलन

प्रश्न [21]. एल्युमिनियम प्रगलन उद्योग निम्न में से किसे कच्चे माल के रूप में प्रयोग करता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)

(अ) गन्ना (ब) चूना पत्थर (स) लौह अयस्क (द) बॉक्साइट

प्रश्न [22]. उत्तेजना व मानसिक चिन्ता का स्रोत है-

(अ) अनचाही ध्वनि (ब) औद्योगिक प्रदूषण (स) तापीय प्रदूषण (द) वायु प्रदूषण

प्रश्न [23]. पहला सफल सूती वस्त्र उद्योग 1854 में कहाँ लगाया गया?

(अ) कोलकाता (ब) चेन्नई (स) मुंबई (द) पटना

प्रश्न [24]. अधिक अनुपात में अनचाही गैसों की उपस्थिति किसका कारण बनती है?

(अ) ध्वनि प्रदूषण का (ब) वायु प्रदूषण का (स) औद्योगिक प्रदूषण का (द) जल प्रदूषण का

प्रश्न [25]. उद्योगों द्वारा कार्बनिक और अकार्बनिक अपशिष्ट पदार्थों के नदी में छोड़ने से फैलता है-

(अ) जल प्रदूषण (ब) वायु प्रदूषण (स) औद्योगिक प्रदूषण (द) ध्वनि प्रदूषण

प्रश्न [26]. हमारे देश में पहला सीमेण्ट उद्योग कारखाना लगाया गया था- (प्रश्न बैंक)

(अ) चेन्नई (ब) मुम्बई (स) कोलकाता (द) उदयपुर

उत्तरमाला

1. (स) 2. (अ) 3. (अ) 4. (अ) 5. (ब) 6. (द) 7. (ब)

8. (द) 9. (ब) 10. (द) 11. (स) 12. (ब) 13. (स) 14. (स)

--- [ पृष्ठ संख्या: 232 ] ---

सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X 225

15. (द) 16. (अ) 17. (स) 18. (ब) 19. (स) 20. (ब) 21. (द)

22. (अ) 23. (स) 24. (ब) 25. (अ) 26. (अ)।

● रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

1. ......... कार्यों में लगे व्यक्ति कच्चे माल को परिष्कृत वस्तुओं में परिवर्तित करते हैं।

2. पहला सफल सूती वस्त्र उद्योग 1854 में .......... में लगाया गया।

3. इस्पात को कठोर बनाने के लिए इसमें ......... की कुछ मात्रा की भी आवश्यकता होती है।

4. भारत में ........... में अधिकांश लोहा तथा इस्पात उद्योग केंद्रित हैं।

5. कारखानों द्वारा निष्कासित एक लीटर अपशिष्ट से लगभग .......... स्वच्छ जल दूषित होता है।

6. हमारी वस्तुएँ ........... में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की हों तभी हम अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा कर पायेंगे।

7. किसी उद्योग की अवस्थिति का निर्धारण उसकी ............. उत्पादन लागत से निर्धारित होता है।

8. हाथ से बुनी खादी कुटीर उद्योग के रूप में बुनकरों को उनके घरों में बड़े पैमाने पर ............. प्रदान करता है।

9. कच्चे पदार्थ को मूल्यवान उत्पाद में परिवर्तित कर अधिक मात्रा में वस्तुओं के उत्पादन को ............. कहा जाता है।

10. निर्मित वस्तुओं का ............... वाणिज्य व्यापार को बढ़ाता है।

11. कृषि तथा ............. एक दूसरे से पृथक नहीं हैं। (प्रश्न बैंक)

12. भारत का पहला सीमेंट उद्योग सन् ............... में चेन्नई में स्थापित किया गया। (प्रश्न बैंक)

13. बैंगलुरू को भारत की ............... के रूप में जाना जाता है। (प्रश्न बैंक)

उत्तरमाला

1. द्वितीयक 2. मुंबई 3. मैंगनीज 4. छोटा नागपुर के पठारी क्षेत्र 5. आठ गुना 6. गुणवत्ता 7. न्यूनतम 8. रोजगार 9. विनिर्माण 10. निर्यात 11. उद्योग 12. 1904 13. इलेक्ट्रॉनिक राजधानी।

● अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. किसी देश के आर्थिक विकास की रीढ़ किसे कहा जाता है?

उत्तर— विनिर्माण उद्योग को।

प्रश्न 2. खनिज आधारित किन्हीं दो उद्योगों के नाम बताइये।

उत्तर—(i) लौह एवं इस्पात उद्योग (ii) सीमेण्ट उद्योग।

प्रश्न 3. भारत में सार्वजनिक क्षेत्र में लगे तथा सरकारी एजेन्सियों द्वारा प्रबन्धित तथा सरकार के द्वारा संचालित एक प्रमुख उद्योग का नाम बताइये।

उत्तर— स्टील अथॉरिटी ऑफ इण्डिया।

प्रश्न 4. किन्हीं दो प्रमुख उपभोक्ता उद्योगों के नाम बताइये।

उत्तर—(i) चीनी उद्योग (ii) कागज उद्योग।

प्रश्न 5. कृषि उत्पादों पर आधारित उद्योगों से क्या आशय है?

उत्तर— जिन उद्योगों के लिए कच्चा माल कृषि से प्राप्त होता है, कृषि उत्पादों पर आधारित कहलाते हैं।

प्रश्न 6. प्रयुक्त कच्चे माल के स्रोत के आधार पर विनिर्माण उद्योगों को दो वर्गों में वर्गीकृत कीजिए।

उत्तर—(i) कृषि आधारित विनिर्माण उद्योग।

(ii) खनिज आधारित विनिर्माण उद्योग।

प्रश्न 7. कृषि आधारित दो उद्योगों के नाम लिखिए।

उत्तर— कृषि आधारित दो उद्योग हैं-(i) चीनी उद्योग (ii) सूती वस्त्र उद्योग।

प्रश्न 8. सीमेण्ट बनाने के लिए काम में आने वाले किन्हीं दो कच्चे माल का नाम लिखिए।

उत्तर—(1) चूना पत्थर (2) सिलिका।

प्रश्न 9. भारत में वस्त्र निर्माण उद्योग के प्रमुख केन्द्रों के नाम बताइये।

उत्तर— मुम्बई, अहमदाबाद, कोयम्बटूर, नागपुर, कोलकाता तथा कानपुर भारत में वस्त्र निर्माण उद्योग के प्रमुख केन्द्र हैं।

प्रश्न 10. लौह-इस्पात उद्योग को भारी उद्योग क्यों कहा जाता है?

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उत्तर—लौह-इस्पात उद्योग का कच्चा माल तथा तैयार माल दोनों ही भारी तथा अधिक परिमाण वाले होते हैं। इसी कारण इसे भारी उद्योग कहा जाता है।

प्रश्न 11. हल्के उद्योग से क्या अभिप्राय है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर—वे उद्योग जो कम भार वाले कच्चे माल का प्रयोग करके हल्के तैयार माल का उत्पादन करते हैं, हल्के उद्योग कहलाते हैं।

प्रश्न 12. भारत का पहला सफल सूती वस्त्र उद्योग कब और कहाँ लगाया गया? (प्रश्न बैंक)

उत्तर—भारत का पहला सफल सूती वस्त्र उद्योग 1854 में मुंबई में लगाया गया।

प्रश्न 13. सार्वजनिक उद्योग किसे कहते हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर—ऐसे औद्योगिक अथवा वाणिज्यिक उपक्रम जिसका स्वामित्व और प्रबंधन सरकार के पास होता है।

प्रश्न 14. स्वामित्व के आधार पर उद्योगों को कितने भागों में बाँटा जा सकता है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर—स्वामित्व के आधार पर उद्योगों को (i) सार्वजनिक क्षेत्र (ii) निजी क्षेत्र तथा (iii) संयुक्त उद्योग में बाँटा जा सकता है।

प्रश्न 15. पहला पटसन उद्योग कब और कहाँ स्थापित हुआ? (प्रश्न बैंक)

उत्तर—पहला पटसन उद्योग कोलकाता के निकट रिशरा में 1855 में लगाया गया।

प्रश्न 16. प्रमुख भूमिका के आधार पर उद्योग कितने प्रकार के होते हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर—प्रमुख भूमिका के आधार पर उद्योग के दो प्रकार हैं-(i) आधारभूत उद्योग तथा (ii) उपभोक्ता उद्योग।

प्रश्न 17. द्वितीयक कार्य में लगा व्यक्ति क्या काम करता है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर—द्वितीयक कार्य में लगा व्यक्ति कच्चे माल को परिष्कृत वस्तुओं में परिवर्तित करने का काम करता है।

प्रश्न 18. खनिज आधारित उद्योग किसे कहा जाता है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर—वे उद्योग जो खनिज व धातुओं को कच्चे माल के रूप में प्रयोग करते हैं, खनिज आधारित उद्योग कहलाते हैं।

प्रश्न 19. उद्योगों की स्थापना को प्रभावित करने वाले कारक कौन-कौन से हैं?

उत्तर—उद्योगों की स्थापना (i) कच्चे माल की उपलब्धता, (ii) श्रमिक, (iii) पूँजी, (iv) शक्ति के साधन तथा (v) बाजार की उपलब्धता से प्रभावित होती है।

प्रश्न 20. उपभोक्ता उद्योग किसे कहा जाता है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर—वे उद्योग जो कि उत्पादन उपभोक्ताओं के सीधे उपयोग के लिए करते हैं, उपभोक्ता उद्योग कहलाते हैं।

प्रश्न 21. किस उद्योग का उपयोग हवाई जहाज बनाने में तथा तार बनाने में किया जाता है?

उत्तर—हवाई जहाज बनाने तथा बर्तन एवं तार बनाने में एल्यूमीनियम उद्योग का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 22. भारत में मोटरगाड़ी उद्योग के चार प्रमुख केन्द्र बताइए।

उत्तर—भारत में दिल्ली, गुड़गाँव, मुम्बई, पुणे, चेन्नई, कोलकाता, लखनऊ में मोटरगाड़ी उद्योग स्थित है।

प्रश्न 23. जल में तापीय प्रदूषण किस प्रकार होता है?

उत्तर—जब कारखानों तथा तापघरों से गर्म जल को बिना ठण्डा किए ही नदियों तथा तालाबों में छोड़ दिया जाता है, तो जल में तापीय प्रदूषण होता है।

प्रश्न 24. चीनी उद्योग के लिए कच्चा माल क्या है?

उत्तर—चीनी उद्योग के लिए गन्ना कच्चा माल है।

प्रश्न 25. एल्यूमीनियम किससे निर्मित किया जाता है?

उत्तर—एल्यूमीनियम बॉक्साइट से निर्मित किया जाता है।

प्रश्न 26. विनिर्माण उद्योग के कोई चार उदाहरण दीजिए।

उत्तर—(i) स्टील उद्योग (ii) मोटरगाड़ी उद्योग (iii) कपड़ा उद्योग (iv) बेकरी तथा पेय पदार्थ सम्बन्धी उद्योग।

प्रश्न 27. किसी देश की आर्थिक उन्नति किन उद्योगों के विकास से मापी जाती है?

उत्तर—किसी देश की आर्थिक उन्नति विनिर्माण उद्योगों के विकास से मापी जाती है।

प्रश्न 28. सतत् पोषणीय विकास हेतु किस प्रकार के आर्थिक विकास की जरूरत है?

उत्तर—सतत् पोषणीय विकास हेतु पर्यावरणीय संचेतना से युक्त आर्थिक विकास की जरूरत है।

प्रश्न 29. एल्यूमीनियम उद्योग की स्थापना की दो महत्वपूर्ण आवश्यकताएं क्या हैं?

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सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X 227

उत्तर—(i) नियमित ऊर्जा की पूर्ति

(ii) कम कीमत पर कच्चे माल की सुनिश्चित उपलब्धता।

प्रश्न 30. उद्योग कौन-कौनसे प्रदूषण के लिए उत्तरदायी हैं?

उत्तर— उद्योग चार प्रकार के प्रदूषण के लिए उत्तरदायी हैं-

(i) वायु, (ii) जल, (iii) भूमि एवं (iv) ध्वनि प्रदूषण।

प्रश्न 31. वायु प्रदूषण का क्या कारण है?

उत्तर— अधिक अनुपात में अनचाही गैसों की उपस्थिति, जैसे-सल्फर डाइऑक्साइड तथा कार्बन मोनोऑक्साइड, वायु प्रदूषण का कारण है।

प्रश्न 32. वायु प्रदूषण किस पर दुष्प्रभाव डालते हैं?

उत्तर— वायु प्रदूषण मानव स्वास्थ्य, पशुओं, पौधों, इमारतों तथा पूरे पर्यावरण पर दुष्प्रभाव डालते हैं।

प्रश्न 33. जल प्रदूषण के प्रमुख कारण कौन-कौनसे हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— जल प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं-कागज, लुग्दी, रसायन, वस्त्र तथा रंगाई उद्योग, तेल शोधन शालाएँ, चमड़ा उद्योग तथा इलेक्ट्रोप्लेटिंग उद्योग, जिनके द्वारा कार्बनिक तथा अकार्बनिक अपशिष्ट नदियों एवं जल स्रोतों में छोड़े जाते हैं।

प्रश्न 34. भारत के मुख्य अपशिष्ट पदार्थ क्या हैं?

उत्तर— भारत के मुख्य अपशिष्ट पदार्थ हैं-फ्लाई एश, फोस्को-जिप्सम तथा लोहा-इस्पात की अशुद्धियाँ।

प्रश्न 35. तापीय प्रदूषण क्या है?

उत्तर— जब कारखानों तथा तापघरों से गर्म जल को बिना ठण्डा किए ही नदियों तथा तालाबों में छोड़ दिया जाता है तो जल में तापीय प्रदूषण होता है।

प्रश्न 36. ध्वनि प्रदूषण से मानव पर क्या प्रभाव पड़ते हैं? संक्षेप में बताइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)

उत्तर— ध्वनि प्रदूषण से खिन्नता और उत्तेजना के साथ-साथ श्रवण असक्षमता, हृदयगति, रक्तचाप तथा अन्य कायिक व्यथाएँ भी बढ़ती हैं।

प्रश्न 37. कोई दो खनिज आधारित उद्योगों के नाम लिखिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— खनिज आधारित दो उद्योग हैं-(i) सीमेंट, (ii) एल्युमिनियम।

प्रश्न 38. प्रयुक्त कच्चे माल के स्रोत के आधार पर उद्योग कितने प्रकार के होते हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— प्रयुक्त कच्चे माल के स्रोत के आधार पर उद्योग दो प्रकार के होते हैं-(i) कृषि आधारित, (ii) खनिज आधारित।

प्रश्न 39. भारत का प्रथम सूती वस्त्र उद्योग कहाँ लगाया गया? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)

उत्तर— मुम्बई में।

प्रश्न 40. आधारभूत और उपभोक्ता उद्योग में क्या अंतर है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— आधारभूत उद्योग दूसरे उद्योगों के लिए कच्चा माल या मध्यवर्ती वस्तुएँ बनाते हैं, जबकि उपभोक्ता उद्योग सीधे उपभोक्ताओं के लिए वस्तुएँ बनाते हैं।

● लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. विनिर्माण उद्योग के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए। (प्रश्न बैंक)

अथवा

विनिर्माण उद्योग को आर्थिक विकास की रीढ़ क्यों कहा जाता है?

उत्तर— विनिर्माण उद्योग को आर्थिक विकास की रीढ़ कहा जाता है क्योंकि-(1) विनिर्माण उद्योग कृषि के आधुनिकीकरण में सहायक होने के साथ-साथ द्वितीयक एवं तृतीयक सेवाओं में रोजगार उपलब्ध कराता है।

(2) विनिर्माण उद्योगों में निर्मित सामान के निर्यात से विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होती है।

(3) देश में विनिर्माण उद्योगों की स्थापना से बेरोजगारी तथा गरीबी का उन्मूलन होता है।

(4) पिछड़े क्षेत्रों में विनिर्माण उद्योगों की स्थापना से क्षेत्रीय असमानताएँ कम होती हैं।

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प्रश्न 2. भारत में उद्योगों द्वारा उत्पन्न वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने वाले किन्हीं दो उपायों को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर— (1) कारखानों में कोयले की अपेक्षा तेल व गैस के प्रयोग से धुएँ के निष्कासन में कमी लाई जा सकती है।

(2) कारखानों में ऊँची चिमनियों, चिमनियों में इलेक्ट्रोस्टेरिक अवक्षेपण, स्क्रबर उपकर तथा गैसीय प्रदूषक पदार्थों को जड़त्वीय रूप से पृथक करने के लिए उपकरण होने चाहिए।

प्रश्न 3. रसायन उद्योग का क्या अर्थ है? रसायन उद्योग के महत्त्व के बारे में दो बिन्दु बताइए।

उत्तर— रसायन उद्योग का अर्थ—जिन औद्योगिक इकाइयों में कार्बनिक तथा अकार्बनिक रसायनों की मदद से वस्तुएँ बनाई जाती हैं, उसे रसायन उद्योग कहते हैं।

रसायन उद्योग का महत्त्व—

(1) रसायन उद्योग की भागीदारी एकल घरेलू उत्पाद में लगभग 3 प्रतिशत है।

(2) यह उद्योग एशिया का तीसरा बड़ा तथा विश्व में आकार की दृष्टि से 12वें स्थान पर है।

प्रश्न 4. वर्तमान में कृषि और उद्योग साथ-साथ बढ़ रहे हैं? स्पष्ट कीजिए।

अथवा

"कृषि और उद्योग एक-दूसरे के पूरक हैं।" स्पष्ट कीजिए।

उत्तर— कृषि और उद्योग एक-दूसरे के पूरक हैं। इनका विकास साथ-साथ होता है। उदाहरण के लिए, भारत में कृषि पर आधारित उद्योगों ने कृषि पैदावार बढ़ोत्तरी को प्रोत्साहित किया है। ये उद्योग कच्चे माल के लिए कृषि पर निर्भर हैं तथा इनके द्वारा निर्मित उत्पाद, जैसे-सिंचाई के लिए पंप, उर्वरक, कीटनाशक दवाएँ, प्लास्टिक पाइप, मशीनें व कृषि औजार आदि पर किसान निर्भर हैं।

प्रश्न 5. भारत की अर्थव्यवस्था में वस्त्र उद्योग के महत्त्व का उल्लेख कीजिए।

उत्तर— (1) देश का यह अकेला उद्योग है जो कच्चे माल से उच्चतम अतिरिक्त मूल्य उत्पाद तक की श्रृंखला में परिपूर्ण तथा आत्मनिर्भर है।

(2) वस्त्र उद्योग देश में बड़े पैमाने पर व्यक्तियों को रोजगार उपलब्ध करवाता है।

(3) भारत की सकल विदेशी मुद्रा का एक बड़ा भाग इसी उद्योग से प्राप्त होता है।

प्रश्न 6. भारत में औद्योगिक प्रदूषण से होने वाले कोई दो प्रभाव बताइये।

उत्तर— (1) भारत में औद्योगिक प्रदूषण वायु को प्रदूषित करता है। अधिक अनुपात में सल्फर-डाइ-ऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी गैसों की उपस्थिति के कारण वायु प्रदूषित होती है।

(2) औद्योगिक प्रदूषण से जल भी प्रदूषित होता है। उद्योगों द्वारा कार्बनिक और अकार्बनिक अपशिष्ट पदार्थों के नदी में विसर्जित होने से जल प्रदूषित होता है।

प्रश्न 7. भारत के दक्षिणी राज्यों में चीनी उद्योग के विस्तार के तीन कारण बताइए।

उत्तर— भारत के दक्षिणी राज्यों, विशेषकर महाराष्ट्र में चीनी उद्योग के विस्तार के तीन प्रमुख कारण ये हैं-

(1) यहाँ के गन्ने में सुक्रोस की मात्रा अधिक है।

(2) यहाँ की अपेक्षाकृत ठण्डी जलवायु भी गुणकारी है।

(3) इन राज्यों में सहकारी समितियाँ भी सफल रही हैं।

प्रश्न 8. प्रमुख भूमिका के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए।

उत्तर— प्रमुख भूमिका के आधार पर उद्योग निम्न दो प्रकार के होते हैं-

(1) आधारभूत उद्योग—ऐसे उद्योग जिनके उत्पादन या कच्चे माल पर दूसरे उद्योग निर्भर रहते हैं, जैसे-लोहा इस्पात, ताँबा, प्रगलन व एल्युमिनियम प्रगलन उद्योग।

(2) उपभोक्ता उद्योग—ऐसे उद्योग जो उत्पादन उपभोक्ताओं के सीधे उपयोग हेतु करते हैं। जैसे-चीनी, दंतमंजन, कागज, पंखे, सिलाई मशीन आदि।

प्रश्न 9. पूँजी निवेश के आधार पर उद्योगों को वर्गीकृत कीजिए।

उत्तर— पूँजी निवेश के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण—

(1) लघु उद्योग—एक लघु उद्योग को परिसंपत्ति की एक इकाई पर अधिकतम निवेश मूल्य के परिप्रेक्ष्य में परिभाषित किया जाता है। यह निवेश सीमा, समय के साथ परिवर्तित होती रहती है। वर्तमान में अधिकतम निवेश एक करोड़ रुपए तक वाले उद्योग लघु उद्योग कहलाते हैं।

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सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X | 229

(2) वृहत् उद्योग-अगर किसी उद्योग में यह निवेश एक करोड़ रुपए से अधिक है तो उसे वृहत् उद्योग कहा जाता है।

प्रश्न 10. लौह तथा इस्पात उद्योग की आवश्यकता क्यों है? लिखिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— लौह तथा इस्पात उद्योग की आवश्यकता को निम्न बिन्दुओं द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है-

(i) यह उद्योग एक आधारभूत उद्योग है क्योंकि अन्य सभी उद्योग (भारी, हल्के और मध्यम) इनसे बनी मशीनरी पर आश्रित हैं।

(ii) विभिन्न प्रकार के इंजीनियरिंग सामान, निर्माण सामग्री, रक्षा, चिकित्सा, टेलीफोन, वैज्ञानिक उपकरण तथा विभिन्न प्रकार की उपभोक्ता वस्तुओं के निर्माण में इस्पात की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 11. उद्योगों की स्थापना को प्रभावित करने वाले कारक कौन-कौनसे हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— उद्योगों की स्थिति को प्रभावित करने वाले कारक हैं-कच्चे माल की उपलब्धता, श्रम आपूर्ति, पूँजी की उपलब्धता, बाजार की निकटता, बिजली आपूर्ति की व्यवस्था, बुनियादी ढाँचा तथा उपयुक्त भूमि।

प्रश्न 12. रसायन उद्योग अपने आप में एक बड़ा उपभोक्ता किस प्रकार है? स्पष्ट कीजिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— रसायन उद्योग अपने आप में एक बड़ा उपभोक्ता है क्योंकि आधारभूत रसायन एक प्रक्रिया द्वारा अन्य रसायनों का उत्पादन करते हैं जिनका उपयोग औद्योगिक अनुप्रयोग, कृषि अथवा उपभोक्ता बाजारों के लिए किया जाता है।

प्रश्न 13. वस्त्र उद्योग में अतिरिक्त मूल्य उत्पाद को चित्र बनाकर दर्शाइए।

उत्तर—

[वस्त्र उद्योग में अतिरिक्त मूल्य उत्पाद]

कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान पाठ 11 विनिर्माण उद्योग चित्र 2

*चित्र : वस्त्र उद्योग में अतिरिक्त मूल्य उत्पाद*

प्रश्न 14. भारत में छोटा नागपुर के पठारी क्षेत्र में अधिकांश लोहा तथा इस्पात उद्योग संकेन्द्रित होने के क्या कारण हैं?

उत्तर— (1) भारत में छोटा नागपुर के पठारी क्षेत्र में लोहा तथा इस्पात उद्योग के विकास के लिए अधिक अनुकूल सापेक्षिक परिस्थितियाँ हैं।

(2) इनमें लौह अयस्क की कम लागत, उच्च कोटि के कच्चे माल की निकटता, सस्ते श्रमिक और स्थानीय बाजार में इनकी माँग सम्मिलित हैं।

प्रश्न 15. ध्वनि प्रदूषण के कोई चार कारण लिखिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— ध्वनि प्रदूषण के चार प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-

(i) औद्योगिक तथा निर्माण कार्य, (ii) जेनरेटर, (iii) लकड़ी चीरने के कारखाने तथा (iv) विद्युत ड्रिल।

प्रश्न 16. ध्वनि प्रदूषण को कम करने के उपाय बताइए।

उत्तर— ध्वनि प्रदूषण को कम करने के उपाय-

(i) जेनरेटरों पर साइलेंसर लगाया जाये।

(ii) ऐसी मशीनरी का प्रयोग किया जाये जो ऊर्जा सक्षम हो तथा कम ध्वनि प्रदूषण करे।

(iii) ध्वनि अवशोषित करने वाले उपकरणों का इस्तेमाल किया जाये।

(iv) कानों पर शोर नियंत्रण उपकरण भी पहनने चाहिए।

प्रश्न 17. वायु प्रदूषण को कम करने का सुझाव दीजिए।

उत्तर— वायु प्रदूषण को कम करने के सुझाव-

(i) वायु में निलम्बित प्रदूषण को कम करने के लिए कारखानों में ऊँची चिमनियाँ, चिमनियों में इलेक्ट्रोस्टैटिक अवक्षेपण, स्क्रबर उपकरण तथा गैसीय प्रदूषक पदार्थों को जड़त्वीय रूप से पृथक् करने के लिए उपलब्ध होने चाहिए।

(ii) कारखानों में कोयले की अपेक्षा तेल व गैस के प्रयोग से धुएँ के निष्कासन में कमी लायी जा सकती है।

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● दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1. भारत में कृषि पर आधारित चार उद्योगों के नाम लिखो। भारतीय अर्थव्यवस्था में इनका क्या महत्त्व है?

अथवा

कृषि पर आधारित उद्योग कौन-कौन से हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— कृषि आधारित उद्योग-भारत में कृषि आधारित चार उद्योग ये हैं-(1) सूती वस्त्र उद्योग, (2) रेशम वस्त्र उद्योग, (3) जूट या पटसन उद्योग तथा (4) वनस्पति तेल उद्योग।

भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि उद्योगों का महत्त्व-(1) कृषि पर आधारित विभिन्न उद्योगों में करोड़ों लोगों को रोजगार मिला हुआ है। (2) कृषि-आधारित उद्योगों का कुल औद्योगिक उत्पादन में सबसे बड़ा भाग है। (3) ये उद्योग विभिन्न उद्योगों के कच्चे माल के प्रमुख स्रोत हैं। (4) कृषि पर आधारित उद्योगों ने कृषि पैदावार में बढ़ोतरी को प्रोत्साहित किया है।

प्रश्न 2. उद्योग बाजार सम्बन्ध को दर्शाने वाली तालिका के रिक्त 1 और 2 स्थानों की पूर्ति कीजिए।

[उद्योग बाजार सम्बन्ध प्रवाह चार्ट]

कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान पाठ 11 विनिर्माण उद्योग चित्र 3

उत्तर— (1) कारखाना (2) पूँजी।

प्रश्न 3. निजी एवं सहकारी क्षेत्र के उद्योगों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर— निजी एवं सहकारी क्षेत्र के उद्योगों में अन्तर

क्र.सं.

निजी क्षेत्र के उद्योग

सहकारी क्षेत्र के उद्योग

1.

निजी क्षेत्र के उद्योगों का स्वामित्व किसी व्यक्ति, फर्म अथवा समूह के पास होता है।

सहकारी क्षेत्र के उद्योग का स्वामित्व कच्चे माल की पूर्ति करने वाले उत्पादकों, श्रमिकों या दोनों के हाथों में होता है।

2.

इन उद्योगों में व्यक्ति, फर्म अथवा समूह पूँजी का निवेश करते हैं।

इन उद्योगों में हिस्सेदार पूँजी का निवेश करते हैं। तथा संसाधनों का कोष संयुक्त होता है।

3.

इन उद्योगों में लाभ या हानि व्यक्ति, फर्म अथवा समूह को होती है।

इन उद्योगों में लाभ-हानि का विभाजन हिस्सेदारों में आनुपातिक रूप से होता है।

प्रश्न 4. निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों में अंतर स्पष्ट कीजिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— निजी क्षेत्र के उद्योग-वे उद्योग जिनका स्वामित्व एक व्यक्ति, फर्म या उनके अधीन अन्य लोगों के हाथों में होता है, निजी क्षेत्र के उद्योग कहलाते हैं। जैसे-टिस्को, बजाज ऑटो लिमिटेड, डाबर उद्योग आदि।

सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग-सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग उन्हें कहते हैं जिन्हें सरकारी एजेंसियों द्वारा प्रबंधित तथा सरकार द्वारा संचालित किया जाता है। जैसे-भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड (BHEL) तथा स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) आदि।

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सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X | 231

प्रश्न 5. भारत में एल्युमीनियम प्रगलन उद्योग का वर्णन कीजिए।

उत्तर— एल्युमीनियम प्रगलन उद्योग-भारत में एल्युमीनियम प्रगलन द्वितीय सबसे महत्त्वपूर्ण धातु शोधन उद्योग है। यह हल्का, जंग अवरोधी, ऊष्मा का सुचालक, लचीला तथा अन्य धातुओं के मिश्रण से अधिक कठोर बनाया जा सकता है। हवाई जहाज बनाने, बर्तन तथा तार बनाने में इसका उपयोग किया जाता है। कई उद्योगों में इसका महत्त्व इस्पात, ताँबा, जस्ता व सीसे के विकल्प के रूप में प्रयुक्त होने से बढ़ा है।

वितरण— वर्तमान समय में देश में एल्युमीनियम प्रगलन संयंत्र उड़ीसा, पश्चिमी बंगाल, केरल, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र व तमिलनाडु राज्यों में स्थित हैं।

प्रश्न 6. सार्वजनिक तथा संयुक्त उद्योग में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर— सार्वजनिक तथा संयुक्त उद्योग में अन्तर-

सार्वजनिक उद्योग

संयुक्त उद्योग

(i) सार्वजनिक उद्योग सरकारी एजेंसियों द्वारा प्रबंधित तथा सरकार द्वारा संचालित किए जाते हैं।

(i) संयुक्त उद्योग, राज्य सरकार तथा निजी क्षेत्र के संयुक्त प्रयास से चलाए जाते हैं।

(ii) उदाहरण-भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड (BHEL), स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL)

(ii) उदाहरण-ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL)।

प्रश्न 7. मृदा व जल प्रदूषण आपस में सम्बन्धित हैं। उदाहरण द्वारा समझाइए।

उत्तर— मृदा तथा जल प्रदूषण आपस में सम्बन्धित हैं, उदाहरण-कचरे के ढेर जिनमें काँच, हानिकारक रसायन, औद्योगिक अपशिष्ट, पैकेजिंग, लवण तथा कूड़ा-करकट मिट्टी के उपजाऊपन पर विपरीत प्रभाव डालते हैं। ये हानिकारक तत्व वर्षा जल के साथ रिसते हुए भूमिगत जल तक पहुँच जाते हैं, जिससे भौम जल प्रदूषित होता है। अतः हम कह सकते हैं कि मृदा व जल प्रदूषण आपस में सम्बन्धित हैं।

प्रश्न 8. भारत में मोटरगाड़ी उद्योग का वर्णन कीजिए।

उत्तर— मोटरगाड़ी उद्योग-मोटरगाड़ी यात्रियों तथा सामान के तीव्र परिवहन के साधन हैं। देश में विभिन्न केन्द्रों पर ट्रक, बस, कार, मोटर साइकिल, स्कूटर, तिपहिया तथा बहुउपयोगी वाहन बनाए जाते हैं। उदारीकरण के उपरान्त नये और आधुनिक मॉडल के वाहनों का बाजार तथा वाहनों की माँग बढ़ी है जिससे इस उद्योग में विशेषकर कार, दोपहिया तथा तिपहिया वाहनों में अपार वृद्धि हुई है। यह उद्योग दिल्ली, गुड़गाँव, मुम्बई, पुणे, चेन्नई, कोलकाता, लखनऊ, इन्दौर, हैदराबाद, जमशेदपुर तथा बंगलूरू के आसपास स्थित है।

प्रश्न 9. भारी उद्योग और हल्के उद्योग में अन्तर कीजिए।

उत्तर— (1) वे उद्योग जिनमें प्रयुक्त कच्चा माल व तैयार माल दोनों भारी होते हैं, वे भारी उद्योग और जिनमें ये दोनों हल्के होते हैं, वे हल्के उद्योग कहलाते हैं।

(2) भारी उद्योग अधिक स्थान घेरने वाले होते हैं जबकि हल्के उद्योग कम स्थान घेरते हैं।

(3) भारी उद्योगों में केन्द्रीकरण की प्रवृत्ति पाई जाती है जबकि हल्के उद्योगों का विस्तार सर्वत्र पाया जाता है।

(4) भारी उद्योगों में अधिक पूँजी की आवश्यकता होती है जबकि हल्के उद्योगों में अपेक्षाकृत कम पूँजी की आवश्यकता होती है।

(5) लोहा-इस्पात उद्योग, भारी मशीन उद्योग, सीमेण्ट उद्योग भारी उद्योग हैं; पंखा, साइकिल, पेन, टेलीफोन, विद्युतीय उद्योग आदि के उद्योग हल्के उद्योग हैं।

प्रश्न 10. भारतीय अर्थव्यवस्था में वस्त्र उद्योग का महत्त्व स्पष्ट कीजिए।

उत्तर— भारतीय अर्थव्यवस्था में वस्त्र उद्योग का महत्त्व-वस्त्र उद्योग एक कृषि आधारित उद्योग है। इसे अपने उत्पादों के निर्माण के लिए कृषि से प्राप्त कच्चे माल पर निर्भर रहना पड़ता है। भारतीय अर्थव्यवस्था में वस्त्र उद्योग का महत्त्व निम्न बिन्दुओं से स्पष्ट है-

(1) वस्त्र उद्योग का औद्योगिक उत्पादन में महत्त्वपूर्ण योगदान है।

(2) यह उद्योग लगभग लाखों व्यक्तियों को रोजगार उपलब्ध करवाता है। यह रोजगार उपलब्ध कराने की दृष्टि से कृषि के पश्चात् दूसरा बड़ा उद्योग है।

(3) वस्त्र उद्योग कृषकों, कपास चुनने वालों, गाँठ बनाने वालों, कताई करने वालों, रंगाई करने वालों, डिजाइन बनाने वालों, पैकेट बनाने वालों और सिलाई करने वालों को जीविका प्रदान करता है।

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(4) वस्त्र उद्योग के कारण रसायन रंजक मिल स्टोर तथा पैकेजिंग सामग्री और इंजीनियरिंग उद्योग की भी माँग बढ़ती है।

(5) धागे तथा तैयार वस्त्र के निर्यात से विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होती है।

(6) यह देश का एकमात्र उद्योग है जो कच्चे माल से उच्चतम अतिरिक्त मूल्य उत्पाद तक की श्रृंखला में परिपूर्ण एवं आत्मनिर्भर है।

प्रश्न 11. पटसन उद्योग के मुख्यतः हुगली नदी के तटों के साथ-साथ स्थित होने के लिए उत्तरदायी कारकों को स्पष्ट कीजिए।

अथवा

अधिकतर पटसन उद्योग हुगली नदी के तट पर ही क्यों स्थित है? कारण दीजिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— पटसन उद्योग के मुख्यतः हुगली नदी के तटों के साथ-साथ स्थित होने के लिए निम्न प्रमुख उत्तरदायी कारक हैं-

(i) पटसन उत्पादक क्षेत्रों की निकटता, (ii) सस्ता जल, (iii) सड़क, रेल व जल परिवहन का जाल जो कच्चे माल को मिलों तक ले जाने में सहायक है, (iv) कच्चे पटसन को संसाधित करने में प्रचुर जल की उपलब्धता, (v) पश्चिम बंगाल तथा समीपवर्ती राज्य उड़ीसा, बिहार व उत्तर प्रदेश से सस्ते श्रमिक उपलब्ध होना तथा (vi) कोलकाता का एक बड़े नगरीय केन्द्र के रूप में बैंकिंग, बीमा व जूट के सामान के निर्यात के लिए पत्तन की सुविधाएँ प्रदान करना आदि।

प्रश्न 12. सूचना प्रौद्योगिकी तथा इलेक्ट्रॉनिक उद्योग के बारे में बताइये।

उत्तर— सूचना प्रौद्योगिकी तथा इलेक्ट्रॉनिक उद्योग-पूरे विश्व में वर्तमान में इस उद्योग का महत्व बढ़ता जा रहा है। भारत में भी सूचना प्रौद्योगिकी तथा इलेक्ट्रॉनिक उद्योग का बहुत विकास हुआ है। इस उद्योग का वर्णन निम्न बिंदुओं में स्पष्ट है-

(1) भारत में इलेक्ट्रॉनिक उद्योग के अंतर्गत ट्रांजिस्टर से लेकर टेलीविजन, टेलीफोन, सेल्युलर टेलीकॉम, टेलीफोन एक्सचेंज, राडार, कम्प्यूटर तथा दूरसंचार उद्योग के लिए उपयोगी अनेक अन्य उपकरण तक बनाये जाते हैं।

(2) बेंगलूरु भारत की इलेक्ट्रॉनिक राजधानी के रूप में उभरा है।

(3) भारत में इलेक्ट्रॉनिक सामान के अन्य महत्वपूर्ण उत्पादक केंद्र मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद, पुणे, चेन्नई, कोलकाता तथा लखनऊ हैं। बेंगलूरु, नोएडा, मुम्बई, चेन्नई, हैदराबाद और पुणे में इस उद्योग का सर्वाधिक संकेंद्रण हुआ है।

(4) भारत में सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग के सफल होने का कारण हार्डवेयर व सॉफ्टवेयर का निरंतर विकास है।

प्रश्न 13. औद्योगिक प्रदूषण से स्वच्छ जल को कैसे बचाया जा सकता है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— औद्योगिक प्रदूषण से स्वच्छ जल को बचाने के लिए कुछ सुझाव निम्नलिखित हैं-

(1) विभिन्न प्रक्रियाओं में जल का न्यूनतम उपयोग किया जाये तथा जल का दो या अधिक उत्तरोत्तर अवस्थाओं में पुनर्चक्रण द्वारा पुनः उपयोग किया जाये।

(2) जल की आवश्यकता पूर्ति हेतु वर्षा जल संग्रहण किया जाये।

(3) नदियों व तालाबों में गर्म जल तथा अपशिष्ट पदार्थों को प्रवाहित करने से पहले उनका शोधन किया जाये।

औद्योगिक अपशिष्ट का शोधन तीन चरणों में किया जा सकता है-

(i) यांत्रिक साधनों द्वारा प्राथमिक शोधन।

(ii) जैविक प्रक्रियाओं द्वारा द्वितीयक शोधन।

(iii) जैविक, रासायनिक तथा भौतिक प्रक्रियाओं द्वारा तृतीयक शोधन। इसमें अपशिष्ट जल को पुनर्चक्रण द्वारा पुनः प्रयोग योग्य बनाया जाता है।

प्रश्न 14. स्वामित्व के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— स्वामित्व के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण निम्न प्रकार कर सकते हैं-

(i) सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग-इन उद्योगों का स्वामित्व और संचालन सरकार के पास होता है।

(ii) निजी क्षेत्र के उद्योग-इन उद्योगों का स्वामित्व और संचालन किसी व्यक्ति या कुछ व्यक्तियों के समूह के पास होता है।

(iii) संयुक्त क्षेत्र के उद्योग-इन उद्योगों का स्वामित्व और संचालन सरकार और निजी उद्योगपतियों के पास संयुक्त रूप से होता है।

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सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X 233

(iv) सहकारी क्षेत्र के उद्योग-इन उद्योगों का स्वामित्व और संचालन कच्चे माल के उत्पादकों और श्रमिकों या दोनों के हाथों में होता है।

प्रश्न 15. "कृषि और उद्योग एक-दूसरे से अलग नहीं हैं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं।" स्पष्ट कीजिए।

(प्रश्न बैंक)

उत्तर— कृषि और उद्योग एक-दूसरे से अलग नहीं हैं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। इसे निम्न उदाहरण द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है-भारत में कृषि पर आधारित उद्योगों ने कृषि पैदावार बढ़ोतरी को प्रोत्साहित किया है। ये उद्योग कच्चे माल हेतु कृषि पर निर्भर हैं तथा इनके द्वारा निर्मित उत्पाद, जैसे-सिंचाई के लिए पंप, उर्वरक, कीटनाशक दवाएँ, प्लास्टिक पाइप, मशीनें व कृषि औजार आदि पर किसान निर्भर हैं। इसलिए विनिर्माण उद्योग के विकास तथा स्पर्धा से न केवल कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिला है, अपितु उत्पादन प्रक्रिया भी सक्षम हुई है।

● निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. विनिर्माण उद्योग के महत्त्व पर भौगोलिक निबन्ध लिखिए।

अथवा

विनिर्माण उद्योग आर्थिक विकास की रीढ़ समझे जाते हैं। व्याख्या कीजिए।

उत्तर— विनिर्माण उद्योग का महत्त्व

विनिर्माण उद्योग सामान्य रूप से विकास तथा विशेष रूप से आर्थिक विकास की रीढ़ माने जाते हैं। विनिर्माण उद्योग के महत्त्व का विवेचन इस प्रकार है, यथा-

(i) विनिर्माण उद्योग न केवल कृषि के आधुनिकीकरण में सहायक होते हैं, अपितु द्वितीयक व तृतीयक सेवाओं में रोजगार उपलब्ध करवाकर कृषि पर निर्भरता को कम करते हैं।

(ii) भारत में औद्योगिक विकास बेरोजगारी तथा गरीबी उन्मूलन की एक आवश्यक शर्त है। देश में सार्वजनिक तथा संयुक्त क्षेत्र में लगे उद्योग इसी विचारधारा पर आधारित थे। जनजातीय तथा पिछड़े क्षेत्रों में उद्योगों की स्थापना का उद्देश्य भी क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना था।

(iii) विनिर्माण उद्योगों में निर्मित वस्तुओं के निर्यात से वाणिज्य-व्यापार को बढ़ावा मिलता है जिससे अपेक्षित विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होती है।

(iv) विश्व के वे देश ही विकसित हैं जो कि कच्चे माल को विभिन्न तथा अधिक मूल्यवान तैयार माल में विनिर्मित करते हैं। भारत का विकास विविध व शीघ्र औद्योगिक विकास में निहित है।

(v) कृषि तथा उद्योग एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। ये एक-दूसरे के पूरक हैं। यथा-भारत में कृषि पर आधारित उद्योगों ने कृषि पैदावार में वृद्धि को प्रोत्साहित किया है। ये उद्योग कच्चे माल के लिए कृषि पर निर्भर हैं तथा इनके द्वारा निर्मित उत्पाद यथा सिंचाई के लिए पम्प, उर्वरक, कीटनाशक दवाएँ, प्लास्टिक पाइप, मशीनें व कृषि औजार आदि पर किसान निर्भर हैं। इसी कारण विनिर्माण उद्योग के विकास तथा स्पर्धा से न केवल कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिला है, अपितु उत्पादन प्रक्रिया भी सक्षम हुई है।

अतः हम यह कह सकते हैं कि विनिर्माण उद्योग सामान्यतः विकास की तथा विशेषतः आर्थिक विकास की रीढ़ समझे जाते हैं।

प्रश्न 2. भारत में सूती वस्त्र उद्योग के विकास पर एक भौगोलिक निबन्ध लिखिए।

अथवा

भारत में सूती वस्त्र उद्योग के विकास का विस्तार से वर्णन कीजिए।

(प्रश्न बैंक)

उत्तर— सूती वस्त्र उद्योग

विकास— (i) प्राचीन भारत में सूती वस्त्र हाथ से कताई और हथकरघा बुनाई तकनीकों से बनाये जाते थे। (ii) अठारहवीं शताब्दी के बाद वस्त्र निर्माण के लिए विद्युतीय करघों का उपयोग किया जाने लगा। औपनिवेशिक काल के दौरान हमारे परंपरागत उद्योगों को बहुत हानि हुई क्योंकि हमारे उद्योग इंग्लैंड के मशीन निर्मित वस्त्रों से स्पर्धा नहीं कर पाये। (iii) भारत में सर्वप्रथम सफल सूती वस्त्र उद्योग 1854 में मुम्बई में स्थापित किया गया। (iv) 20वीं शताब्दी में यूरोप दो विश्व युद्धों से जूझ रहा था तथा भारत इंग्लैंड के अधीन था। ऐसे में इंग्लैंड में कपड़े की माँग आपूर्ति हेतु भारतीय सूती वस्त्र उद्योग को प्रोत्साहन मिला।

स्थानीयकरण के कारक— आरम्भिक वर्षों में सूती वस्त्र उद्योग महाराष्ट्र तथा गुजरात के कपास उत्पादन क्षेत्रों तक ही सीमित थे। कपास की उपलब्धता, बाजार, परिवहन, बन्दरगाहों की समीपता, श्रम, नमीयुक्त जलवायु आदि

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कारकों ने सूती वस्त्र के स्थानीयकरण को बढ़ावा दिया। भारत में सूती धागों की कताई का कार्य महाराष्ट्र, गुजरात तथा तमिलनाडु राज्यों में केन्द्रित है लेकिन सूती, रेशमी, जरी, कशीदाकारी आदि में बुनाई के परम्परागत कौशल और डिजाइन देने के लिए बुनाई अत्यधिक विकेन्द्रित है।

अन्य उद्योगों को लाभ-इस उद्योग का कृषि से निकट सम्बन्ध है; यह किसानों, कपास चुनने वालों, डिजाइन बनाने वालों, पैकेट बनाने वालों और सिलाई करने वालों को जीविका प्रदान करता है। इस उद्योग के कारण रसायन रंजक मिल स्टोर तथा पैकेजिंग सामग्री और इंजीनियरिंग उद्योग की माँग बढ़ती है। फलस्वरूप इन उद्योगों का विकास होता है।

प्रश्न 3. भारत में पटसन उद्योग पर एक भौगोलिक निबन्ध लिखिए।

उत्तर— पटसन उद्योग

विकास— भारत पटसन व पटसन निर्मित सामान का सबसे बड़ा उत्पादक है तथा बांग्लादेश के पश्चात् दूसरा बड़ा निर्यातक भी है। वर्ष 2010-11 में भारत में लगभग 80 पटसन उद्योग थे। इनमें अधिकांश पश्चिमी बंगाल में हुगली नदी के तट पर 98 किलोमीटर लम्बी तथा 3 किलोमीटर चौड़ी एक संकड़ी मेखला में स्थित हैं। पहला पटसन उद्योग कोलकाता के निकट रिशरा में 1855 में लगाया गया था। पटसन उद्योग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है।

हुगली नदी तट पर पटसन उद्योग के विकास के कारण— भारत में हुगली नदी तट पर पटसन उद्योग के विकसित होने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-

(i) पटसन उत्पादक क्षेत्रों की निकटता।

(ii) सस्ते जल परिवहन की सुविधा।

(iii) सड़क, रेल व जल परिवहन का जाल।

(iv) कच्चे माल का मिलों तक ले जाने में सहायक होना।

(v) प्रचुर जल उपलब्ध होना।

(vi) सस्ते श्रमिक उपलब्ध होना।

(vii) कोलकाता का एक बड़े नगरीय केन्द्र के रूप में बैंकिंग, बीमा और जूट के सामान के निर्यात के लिए बन्दरगाह की सुविधाएं प्रदान करना।

प्रश्न 4. भारत में लौह-इस्पात उद्योग पर एक भौगोलिक निबन्ध लिखिए।

अथवा

भारत में लौह-इस्पात उद्योग का विस्तार से वर्णन कीजिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— लौह-इस्पात उद्योग

लौह-इस्पात उद्योग एक आधारभूत उद्योग है; क्योंकि अन्य सभी भारी, हल्के और मध्यम उद्योग इनसे बनी मशीनरी पर निर्भर हैं। विविध प्रकार के इंजीनियरिंग सामान, निर्माण सामग्री, रक्षा, चिकित्सा, टेलीफोन, वैज्ञानिक उपकरण और विभिन्न प्रकार की उपभोक्ता वस्तुओं के निर्माण के लिए इस्पात की आवश्यकता होती है।

लौह-इस्पात उद्योग के विकास की दशाएँ-इस्पात के उत्पादन तथा खपत को प्राय: एक देश के विकास का पैमाना माना जाता है। लोहा तथा इस्पात एक भारी उद्योग है; क्योंकि इसमें प्रयुक्त कच्चा तथा तैयार माल दोनों ही भारी और स्थूल होते हैं और इसके लिए अधिक परिवहन लागत की आवश्यकता होती है। इस उद्योग के लिए लौह-अयस्क, कोकिंग कोल तथा चूना-पत्थर का अनुपात लगभग 4 : 2 : 1 का है। इस्पात को कठोर बनाने के लिए इसमें मैंगनीज की कुछ मात्रा की भी आवश्यकता होती है। इस्पात उद्योगों की स्थापना में सक्षम परिवहन की आवश्यकता होती है।

अवस्थिति— भारत में छोटा नागपुर के पठारी क्षेत्र में अधिकांश लोहा तथा इस्पात उद्योग संकेन्द्रित हैं। इस प्रदेश में इस उद्योग के विकास के लिए अधिक अनुकूल सापेक्षिक परिस्थितियाँ हैं। इनमें लौह अयस्क की कम लागत, उच्च कोटि के कच्चे माल की निकटता, सस्ते श्रमिक और स्थानीय बाजार में इसके माल की विशाल सम्भाव्यता सम्मिलित है।

प्रश्न 5. आधारभूत उद्योग के महत्त्व पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर— आधारभूत उद्योग का महत्त्व निम्न बिन्दुओं द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है-

(1) आधारभूत उद्योगों के उत्पादन या कच्चे माल पर दूसरे उद्योग निर्भर करते हैं। जैसे-लोहा इस्पात उद्योग, ताँबा प्रगलन उद्योग आदि।

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(2) अन्य सभी भारी, हल्के और मध्यम उद्योग इनसे बनी मशीनरी पर निर्भर हैं।

(3) विविध प्रकार के इंजीनियरिंग सामान, निर्माण सामग्री, रक्षा, चिकित्सा, टेलीफोन, वैज्ञानिक उपकरण और विभिन्न प्रकार की उपभोक्ता वस्तुओं के निर्माण के लिए आधारभूत उद्योगों द्वारा उत्पादित मशीनों तथा सामानों की आवश्यकता होती है।

(4) ये उद्योग एक देश के विकास के पैमाने होते हैं।

(5) आधारभूत उद्योग ही देश के आधुनिकीकरण में सहायक होते हैं।

(6) ये लाखों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार उपलब्ध कराते हैं।

प्रश्न 6. लोहा व इस्पात उद्योग मुख्यतः छोटा नागपुर के पठारी क्षेत्र में क्यों स्थित है? किन्हीं छ: कारणों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर— भारत के छोटा नागपुर के पठारी क्षेत्र में लौह-इस्पात उद्योग के स्थानीयकरण के कारण

भारतीय प्रायद्वीप में छोटा नागपुर के पठारी क्षेत्र का विस्तार बिहार, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ तथा मध्य प्रदेश राज्यों में है। इस क्षेत्र में देश के अधिकांश लोहा तथा इस्पात उद्योग संकेन्द्रित हैं। इस क्षेत्र के प्रमुख उद्योग हैं- जमशेदपुर, बोकारो, बर्नपुर, दुर्गापुर, राउरकेला तथा भिलाई। लोहा-इस्पात उद्योग के इस क्षेत्र में केन्द्रित होने के निम्नलिखित कारण हैं-

(1) कच्चे माल की उपलब्धि- इस उद्योग का कच्चा माल लौह-अयस्क, कोयला, मैंगनीज तथा चूना पत्थर है। यह पठारी क्षेत्र इन खनिजों में धनी है। इस क्षेत्र में उच्च कोटि का कच्चा माल है। अतः परिवहन व्यय से बचने के लिए इसी क्षेत्र में विभिन्न लौह-इस्पात उद्योगों की स्थापना हुई है।

(2) जलापूर्ति- इस उद्योग के लिए नियमित रूप से पर्याप्त जलापूर्ति की आवश्यकता होती है। इस क्षेत्र में दामोदर और दामोदर की सहायक नदियों से पर्याप्त मात्रा में पानी सुलभ है।

(3) शक्ति के साधन- कोयला तथा जल दोनों ही यहां शक्ति के साधन के रूप में सुलभ हैं।

(4) परिवहन- इस क्षेत्र में सड़क तथा रेल मार्गों का जाल बिछा हुआ है। इससे औद्योगिक केन्द्रों की स्थापना में भारी मदद मिली है।

(5) कुशल व सस्ते श्रमिक- यह सघन आबादी क्षेत्र है। सस्ते कुशल एवं अकुशल श्रमिक यहाँ पर्याप्त संख्या में मिलते हैं।

(6) विशाल पूँजी- इस उद्योग के लिए विशाल पूँजी की आवश्यकता होती है। अतः सरकार तथा टाटा ने इस क्षेत्र में लौह-इस्पात उद्योगों का विकास किया है।

(7) माँग- स्थानीय बाजार में इनके माँग की विशाल संभावना है।

प्रश्न 7. एल्यूमीनियम निर्माण प्रक्रिया को प्रवाह चार्ट चित्र द्वारा दर्शाइए।

उत्तर—

[प्रवाह चार्ट चित्र-एल्यूमीनियम उद्योग में विनिर्माण की प्रक्रिया]

कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान पाठ 11 विनिर्माण उद्योग चित्र 4

  • **बॉक्स 1 (बाएं):** बॉक्साइट (कच्चा माल) -> बॉक्साइट खनन -> परिवहन (रेल या समुद्री जहाज)
  • **बॉक्स 2 (मध्य):** बॉक्साइट दलन और एल्यूमिना घुलन -> एल्यूमीनियम शोधशाला
  • **बॉक्स 3 (दाएं):** एल्यूमीनियम प्रगालक (ऊपर से: क्रायोलाइट - एक पिघली धातु जो इलेक्ट्रोलाइट का काम करती है; नीचे से: विद्युत (18,600 कि.वाट प्रति टन अयस्क))
  • **तीर के निशान:**
  • 1. प्रगालक स्थल तक भारी अयस्क का पहुँचना
  • 2. शोधशाला से कैल्शियम युक्त पेट्रोलियम कोक
  • 3. कोयला खान से पिच

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प्रश्न 8. भारत में रसायन उद्योग के विकास पर भौगोलिक निबन्ध लिखिए।

उत्तर— रसायन उद्योग

भारत में रसायन उद्योग का तीव्र गति से विकास हो रहा है तथा फैल रहा है। सकल घरेलू उत्पाद में इसकी भागीदारी लगभग 3 प्रतिशत है। यह एशिया का तीसरा बड़ा उद्योग है तथा विश्व में आकार की दृष्टि से 12वें स्थान पर है। इसमें लघु और वृहत् दोनों प्रकार की विनिर्माण इकाइयाँ शामिल हैं। रसायन उद्योग ने निम्नलिखित दो क्षेत्रों में तीव्र गति से वृद्धि की है-

(1) अकार्बनिक रसायन— अकार्बनिक रसायनों में सल्फ्यूरिक अम्ल (उर्वरक, कृत्रिम वस्त्र, प्लास्टिक, गोंद, रंग-रोगन, डाई आदि के निर्माण में प्रयुक्त), नाइट्रिक अम्ल, क्षार, सोडा एश (काँच, साबुन, शोधक या अपमार्जक, कागज में प्रयुक्त होने वाले रसायन) तथा कास्टिक सोडा आदि शामिल हैं। इन उद्योगों का देश में विस्तृत फैलाव है।

(2) कार्बनिक रसायन— कार्बनिक रसायनों में पेट्रोरसायन शामिल हैं जो कि कृत्रिम वस्त्र, कृत्रिम रबर, प्लास्टिक, रंजक पदार्थ, दवाइयाँ, औषध रसायनों के बनाने में प्रयोग किए जाते हैं। ये उद्योग तेलशोधनशालाओं या पेट्रोरसायन संयंत्रों के समीप स्थापित हैं।

उपभोक्ता उद्योग होना— रसायन उद्योग अपने आप में एक बड़ा उपभोक्ता भी है। आधारभूत रसायन एक प्रक्रिया के द्वारा अन्य रसायन उत्पन्न करते हैं, जिनका उपयोग औद्योगिक अनुप्रयोग, कृषि अथवा उपभोक्ता बाजारों के लिए किया जाता है।

प्रश्न 9. औद्योगिक प्रदूषण से जल प्रदूषण को रोकने हेतु उपायों की विस्तारपूर्वक व्याख्या कीजिए।

उत्तर— औद्योगिक प्रदूषण से जल प्रदूषण को रोकने हेतु निम्न उपाय किये जा सकते हैं-

(i) विभिन्न प्रक्रियाओं में जल का कम से कम उपयोग और जल का दो या अधिक उत्तरोत्तर अवस्थाओं में पुनर्चक्रण द्वारा पुनः उपयोग करना।

(ii) जल की आवश्यकता को पूरा करने के लिए वर्षा जल संग्रहण करना।

(iii) गर्म पानी तथा अपशिष्टों को नदियों और तालाबों में छोड़ने से पहले उनका उपचार करना। औद्योगिक अपशिष्टों का उपचार अथवा शोधन तीन चरणों में किया जाता है-

(अ) प्राथमिक शोधन— प्राथमिक शोधन यंत्रों की सहायता से किया जाता है। इसके अन्तर्गत अपशिष्ट पदार्थों की छँटाई, उनके छोटे-छोटे टुकड़े करना, ढंकना तथा तलछट जमाव आदि शामिल हैं।

(ब) द्वितीयक शोधन— द्वितीयक शोधन जैविक प्रक्रियाओं द्वारा किया जाता है।

(स) तृतीयक शोधन— इस शोधन में जैविक, रासायनिक तथा भौतिक इन तीनों प्रकार की प्रक्रियाएँ सम्मिलित हैं। अपशिष्ट जल को पुनर्चक्रण द्वारा पुनः उपयोग के योग्य बनाया जाता है।

(iv) जहाँ भौम जल स्तर कम है, वहाँ उद्योगों द्वारा अपशिष्ट निष्कासन पर कानूनी प्रतिबंध होना चाहिए।

प्रश्न 10. राष्ट्रीय ताप विद्युत (NTPC) पर लेख लिखिए।

उत्तर— राष्ट्रीय ताप विद्युत भारत में राष्ट्रीय ताप विद्युत गृह कारपोरेशन विद्युत प्रदान करने वाली मुख्य कम्पनी है। इसके पास पर्यावरण प्रबंधन तंत्र (EMS) 14001 के लिए आईएसओ प्रमाण है। यह निगम प्राकृतिक पर्यावरण और संसाधन जैसे जल, खनिज तेल, गैस तथा ईंधन जैसे संसाधनों के संरक्षण हेतु सक्रिय दृष्टिकोण रखता है तथा इन्हें ध्यान में रखकर ही विद्युत संयंत्रों की स्थापना करता है। ऐसा करने के लिए NTPC निम्न उपायों को अपनाता है-

(i) आधुनिकतम तकनीकों पर आधारित उपकरणों का इस्तेमाल करना तथा मौजूदा उपकरणों को सुधारना।

(ii) राख का अधिक उपयोग करके अपशिष्ट उत्पादन को कम करना।

(iii) पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने हेतु हरित क्षेत्र की सुरक्षा तथा वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित करना।

(iv) तरल अपशिष्ट प्रबंधन, राखयुक्त जलीय पुनर्चक्रण तथा राख-संग्रह प्रबंधन द्वारा पर्यावरण प्रदूषण को कम करना।

(v) अपने सभी विद्युत स्टेशनों के लिए पारिस्थितिकी निगरानी, समीक्षा तथा ऑनलाइन आँकड़ों का प्रबंधन करना।

प्रश्न 11. भारत में उर्वरक उद्योग के विकास पर एक भौगोलिक निबन्ध लिखिए।

उत्तर— उर्वरक उद्योग

उर्वरक उद्योग नाइट्रोजनी उर्वरक मुख्य रूप से यूरिया, फॉस्फेटिक उर्वरक तथा अमोनियम फॉस्फेट और मिश्रित उर्वरक जिनमें तीन मुख्य पोषक उर्वरक नाइट्रोजन, फॉस्फेट व पोटाश शामिल हैं, के उत्पादन क्षेत्रों के आस-पास

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सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X 237

केन्द्रित है। पोटाश पूरी तरह से आयात किया जाता है; क्योंकि देश में वाणिज्यिक रूप से या किसी भी रूप में प्रयुक्त होने वाले पोटाश या पोटेशियम यौगिकों के भण्डार नहीं हैं।

उत्पादन-भारत नाइट्रोजनी उर्वरकों के उत्पादन में विश्व के प्रमुख देशों में एक है। यहाँ अनेक उर्वरक इकाइयाँ हैं जो कि नाइट्रोजन तथा मिश्रित नाइट्रोजनी उर्वरक निर्मित करती हैं, कुछ इकाइयाँ यूरिया उत्पादन तथा कुछ इकाइयाँ उप-उत्पाद के रूप में अमोनियम सल्फेट का उत्पादन करती हैं तथा कुछ लघु इकाइयाँ केवल सुपर फॉस्फेट का उत्पादन करती हैं।

प्रमुख उत्पादक राज्य-भारत में हरित क्रान्ति के पश्चात् यह उद्योग देश के अन्य अनेक भागों में भी फैल गया। गुजरात, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पंजाब और केरल राज्य कुल उर्वरक उत्पादन का लगभग 50 प्रतिशत उत्पादन करते हैं। देश के अन्य महत्त्वपूर्ण उत्पादक राज्य आन्ध्र प्रदेश, उड़ीसा, राजस्थान, बिहार, महाराष्ट्र, असम, पश्चिमी बंगाल, गोवा, दिल्ली, मध्य प्रदेश तथा कर्नाटक हैं।

प्रश्न 12. निम्न आधारों पर उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए-

(1) प्रयुक्त कच्चे माल के स्रोत के आधार पर

(2) स्वामित्व के आधार पर

(3) कच्चे तथा तैयार माल की मात्रा व भार के आधार पर।

अथवा

उद्योगों का विभिन्न आधारों पर वर्गीकरण कीजिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर- उद्योगों का वर्गीकरण के विभिन्न आधार निम्नलिखित हैं-

(1) प्रयुक्त कच्चे माल के स्रोत के आधार पर-

(i) कृषि आधारित उद्योग- वे उद्योग जिन्हें अपना कच्चा माल कृषि से प्राप्त होता है, कृषि आधारित उद्योग कहलाते हैं। उदाहरण-सूती वस्त्र, पटसन, चीनी, चाय, कॉफी एवं वनस्पति तेल उद्योग आदि।

(ii) खनिज आधारित उद्योग- वे उद्योग जिन्हें अपना कच्चा माल खनिजों से प्राप्त होता है, खनिज आधारित उद्योग कहलाते हैं। उदाहरण-लोहा व इस्पात, सीमेंट, एल्युमिनियम, पेट्रो-रसायन उद्योग आदि।

(2) स्वामित्व के आधार पर-

(i) सार्वजनिक उद्योग- ये उद्योग सरकारी एजेंसियों अथवा सरकार द्वारा प्रबंधित तथा संचालित होते हैं। उदाहरण-भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड (BHEL), स्टील अथॉरिटी ऑफ इण्डिया लिमिटेड (SAIL) आदि।

(ii) निजी उद्योग- इन उद्योगों का स्वामित्व निजी व्यक्तियों या उनके समूहों के पास होता है। उदाहरण-टिस्को, बजाज ऑटो लिमिटेड, डाबर उद्योग आदि।

(iii) संयुक्त उद्योग- ये उद्योग राज्य सरकार तथा निजी क्षेत्र के संयुक्त प्रयास से चलाये जाते हैं। उदाहरण-ऑयल इण्डिया लिमिटेड (OIL)।

(iv) सहकारी उद्योग- इन उद्योगों का स्वामित्व कच्चे माल की आपूर्ति करने वाले उत्पादकों, श्रमिकों अथवा दोनों के हाथों में होता है। संसाधनों का कोष संयुक्त होता है तथा लाभ-हानि का विभाजन भी आनुपातिक होता है। उदाहरण-महाराष्ट्र का चीनी उद्योग, केरल के नारियल पर आधारित उद्योग।

(3) कच्चे तथा तैयार माल की मात्रा व भार के आधार पर-

(i) भारी उद्योग- ये उद्योग अधिक वजन वाले व अधिक मात्रा में कच्चे माल का उपयोग कर भारी उत्पाद तैयार करते हैं। उदाहरण-लोहा इस्पात उद्योग, सीमेंट उद्योग।

(ii) हल्के उद्योग- ये उद्योग कम वजन वाले कच्चे माल का प्रयोग कर हल्के तैयार माल का उत्पादन करते हैं। उदाहरण-विद्युत सामान उद्योग, घड़ी उद्योग आदि।

प्रश्न 13. भारत में चीनी उद्योग पर एक लेख लिखिए।

उत्तर- चीनी उद्योग- चीनी उद्योग भारत का एक मुख्य कृषि आधारित उद्योग है। भारत का चीनी उत्पादन में विश्व में दूसरा स्थान है लेकिन गुड़ व खांडसारी के उत्पादन में इसका प्रथम स्थान है। इस उद्योग में प्रयुक्त कच्चा माल भारी होता है तथा ढुलाई में इसके सुक्रोस की मात्रा घट जाती है।

वितरण- भारत में चीनी मिलें उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, गुजरात, पंजाब, हरियाणा तथा मध्य प्रदेश राज्यों में फैली हैं। चीनी मिलों का 60 प्रतिशत उत्तर प्रदेश तथा बिहार में है। यह उद्योग मौसमी है, अतः सहकारी क्षेत्र के लिए उपयुक्त है।

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वर्तमान प्रवृत्ति- पिछले कुछ वर्षों से इन मिलों की संख्या दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों में विशेषकर महाराष्ट्र में बढ़ी है। इसका मुख्य कारण यहाँ के गन्ने में अधिक सुक्रोस की मात्रा है। अपेक्षाकृत ठंडी जलवायु भी गुणकारी है। इसके अतिरिक्त इन राज्यों में सहकारी समितियाँ भी सफल रही हैं।

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