📖 1. समाधान: पाठगत एवं पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नोत्तर
राजस्थान बोर्ड कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान) — सभी पाठगत प्रश्नों एवं पाठ्यपुस्तक अभ्यास के संपूर्ण सटीक उत्तर।
पाठगत प्रश्न
पृष्ठ 14
प्रश्न 1. मैं थोड़ी उलझन में हूँ। आखिर भारत की शासन व्यवस्था को क्या नाम दिया जाये? यह एकात्मक है, संघात्मक है अथवा केन्द्रीकृत।
उत्तर— भारत की संघीय व्यवस्था संघात्मक है। लेकिन इसमें राज्य सरकारों की तुलना में केन्द्र सरकार को अधिक शक्तिशाली बनाया गया है।
--- [ पृष्ठ संख्या: 282 ] ---
सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान) कक्षा X 275
पृष्ठ 15
प्रश्न 2. संघीय व्यवस्था जब सिर्फ बड़े देशों के अनुकूल है तो बेल्जियम ने इसे क्यों अपनाया?
उत्तर— बेल्जियम में भाषा के आधार पर अनेक विभिन्नताएँ मौजूद हैं और देश की एकता व अखंडता को बनाए रखने के लिए संघीय व्यवस्था को अपनाना आवश्यक था। इसीलिए बेल्जियम ने संघीय व्यवस्था को अपनाया।
पृष्ठ 17
प्रश्न 3. अगर कृषि और वाणिज्य राज्य के विषय हैं तो केन्द्र में कृषि और वाणिज्य मंत्री क्यों बनाए जाते हैं?
उत्तर— कृषि और वाणिज्य राज्य के विषय होते हुए भी केन्द्र में कृषि और वाणिज्य मंत्री इसलिए बनाए जाते हैं ताकि वे राज्यों में समन्वय बनाए रखें और इन विषयों से संबंधित राज्यों के बीच होने वाले झगड़ों को निपटाने में सहायता कर सकें।
पृष्ठ 19
प्रश्न 4. क्या आपका गाँव या शहर आजादी के बाद से एक ही प्रांत के अंतर्गत रहा है? अगर नहीं तो इससे पहले के राज्य का क्या नाम था?
उत्तर— हाँ, हमारा गाँव/शहर आजादी के बाद से एक ही प्रांत राजस्थान के अंतर्गत रहा है।
प्रश्न 5. क्या आप 1947 के तीन राज्यों के ऐसे नामों को याद कर सकते हैं जो आज बदल गये हैं?
उत्तर— राजपूताना, मैसूर और मद्रास राज्यों के नाम आज बदलकर क्रमशः राजस्थान, कर्नाटक और तमिलनाडु हो गये हैं।
प्रश्न 6. तीन ऐसे राज्यों की पहचान करें जिन्हें तीन बड़े राज्यों को काटकर बनाया गया है।
उत्तर— उत्तराखण्ड, झारखंड और छत्तीसगढ़ राज्यों को क्रमशः उत्तरप्रदेश, बिहार और मध्यप्रदेश से काटकर बनाया गया है।
पृष्ठ 21
प्रश्न 7. आप यह कह रहे हैं कि क्षेत्रवाद लोकतंत्र के लिए अच्छा है? क्या आप गंभीरता से ऐसा कह रहे हैं?
उत्तर— क्षेत्रवाद लोकतंत्र के लिए अच्छा है क्योंकि इससे सत्ता में साझेदारी और राज्य सरकारों की स्वायत्तता का आदर करने की नई प्रवृत्ति पनपती है। क्षेत्रवाद के कारण सत्ता की साझेदारी अधिक प्रभावी होती है। इसलिए हम गंभीरता से यह कह रहे हैं कि क्षेत्रवाद लोकतंत्र के लिए अच्छा है।
पृष्ठ 25
प्रश्न 8. प्रधानमंत्री देश चलाता है। मुख्यमंत्री राज्यों को चलाते हैं। इस तर्क से जिला परिषद् के प्रधान को जिले का शासन चलाना चाहिए। फिर, जिलों का शासन कलक्टर या जिलाधीश क्यों चलाते हैं?
उत्तर— जिले का प्रशासन जिला-परिषद् के प्रधान को नहीं दिया जा सकता क्योंकि इस व्यवस्था में प्रत्येक जिले के अलग-अलग कानून तथा अलग-अलग नीति होगी जिससे राज्य में अव्यवस्था हो जायेगी। विभिन्न जिलों के अधिकारियों के बीच सड़क, पानी, बिजली आदि के मामलों में झगड़े होंगे। वर्तमान व्यवस्था में राज्य सरकार द्वारा बनाई गई नीति के अनुसार सभी जिलों का प्रशासन जिलाधीश चलाते हैं जिससे शासन में एकरूपता और व्यवस्था बनी रहती है।
--- पाठ्यपुस्तक के प्रश्न ---
प्रश्न 1. भारत के खाली राजनीतिक नक्शे पर इन राज्यों की उपस्थिति दर्शाएँ-मणिपुर, सिक्किम, छत्तीसगढ़ और गोवा।
--- [ पृष्ठ संख्या: 283 ] ---
उत्तर—
[भारत का राजनीतिक मानचित्र जिसमें सिक्किम, मणिपुर, छत्तीसगढ़ और गोवा को छायांकित किया गया है]

मानचित्र पैमाने पर आधारित नहीं है।
प्रश्न 2. विश्व के खाली राजनीतिक मानचित्र पर भारत के अलावा संघीय शासन वाले तीन देशों की अवस्थिति बताएँ और उनके नक्शे को रंग से भरें।
उत्तर— भारत के अलावा संघीय शासन वाले तीन देश ये बताये जा सकते हैं-
(1) संयुक्त राज्य अमेरिका (2) आस्ट्रेलिया (3) बेल्जियम।
--- [ पृष्ठ संख्या: 284 ] ---
सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान) कक्षा X | 277
[विश्व राजनीतिक मानचित्र]

मानचित्र पर आधारित नहीं है।
--- [ पृष्ठ संख्या: 285 ] ---
प्रश्न 3. भारत की संघीय व्यवस्था में बेल्जियम से मिलती-जुलती एक विशेषता और उससे अलग एक विशेषता को बताएँ।
उत्तर— भारत की संघीय व्यवस्था में बेल्जियम से मिलती-जुलती एक विशेषता यह है कि दोनों में राज्य सरकारें केन्द्रीय सरकार के अधीन नहीं हैं तथा अलग विशेषता यह है कि भारत में केन्द्रीय सरकार में मंत्रियों की संख्या बेल्जियम की तरह भाषायी समुदायों के आधार पर निर्धारित नहीं की गई है।
प्रश्न 4. शासन के संघीय और एकात्मक स्वरूपों में क्या-क्या मुख्य अन्तर है? इसे उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट करें।
उत्तर— (1) संघीय शासन व्यवस्था में दो स्तर पर सरकारें होती हैं और सत्ता के इन दोनों स्तर की सरकारें अपने-अपने स्तर पर स्वतंत्र होकर अपना कार्य करती हैं। इसमें राज्य (प्रान्तीय) सरकारों को भी शक्तियाँ संविधान से प्राप्त होती हैं। जबकि एकात्मक शासन व्यवस्था में शासन का एक ही स्तर होता है और प्रान्तीय सरकारें उसके अधीन होकर काम करती हैं।
(2) एकात्मक शासन में केन्द्रीय सरकार प्रान्तीय सरकारों को आदेश दे सकती है लेकिन संघीय व्यवस्था में केन्द्रीय सरकार राज्य या प्रान्तीय सरकार को कुछ खास करने का आदेश नहीं दे सकती।
(3) एकात्मक शासन में प्रान्तीय सरकारें अपने कार्यों के लिए केन्द्रीय सरकार के प्रति जिम्मेदार होती हैं, जबकि संघीय व्यवस्था में प्रान्तीय सरकारें अपने कार्यों के लिए केन्द्रीय सरकार के प्रति जिम्मेदार नहीं होती हैं। इसमें दोनों ही सरकारें अपने-अपने स्तर पर लोगों के प्रति जवाबदेह होती हैं।
(4) संघीय व्यवस्था में संघ और राज्य सरकारों के बीच विषयों का विभाजन होता है, एकात्मक व्यवस्था में विषयों का विभाजन नहीं होता है।
उदाहरण के लिए, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील आदि देशों में संघीय शासन व्यवस्था को अपनाया है, लेकिन फ्रांस, ब्रिटेन, जापान आदि देशों में एकात्मक शासन व्यवस्था को अपनाया है।
प्रश्न 5. 1992 के संविधान संशोधन के पहले और बाद के स्थानीय शासन के महत्त्वपूर्ण अन्तरों को बताएँ। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)
उत्तर— भारत में 1992 के संविधान संशोधन के पहले और बाद के स्थानीय शासन के दो महत्त्वपूर्ण अन्तर निम्नलिखित हैं-
(1) संवैधानिक मान्यता— सन् 1992 से पहले स्थानीय शासन को संवैधानिक मान्यता प्राप्त नहीं थी, लेकिन 1992 के संशोधनों के बाद स्थानीय शासन संस्थाओं को संविधान की 11वीं तथा 12वीं अनुसूचियों में शामिल करके इन्हें संवैधानिक मान्यता प्रदान कर दी गई है।
(2) महिलाओं को आरक्षण की व्यवस्था— 1992 के पहले स्थानीय शासन संस्थाओं में महिलाओं को आरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं थी, जबकि 1992 के संविधान संशोधनों के बाद स्थानीय शासन संस्थाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई पदों पर आरक्षण की व्यवस्था की गई है।
प्रश्न 6. रिक्त स्थानों को भरें।
चूंकि अमेरिका ..........(1)..........तरह का संघ है इसलिए वहाँ सभी इकाइयों को समान अधिकार है। संघीय सरकार के मुकाबले प्रान्त..........(2)..........हैं। लेकिन भारत की संघीय प्रणाली..........(3)..........की है और यहाँ कुछ राज्यों को औरों से ज्यादा शक्तियाँ प्राप्त हैं।
उत्तर— (1) साथ आकर संघ बनाने की (Coming together) (2) शक्तिशाली (3) साथ रहकर (Holding together) संघ बनाने।
प्रश्न 7. भारत की भाषा नीति पर नीचे तीन प्रतिक्रियाएँ दी गई हैं। इनमें से आप जिसे ठीक समझते हैं उसके पक्ष में तर्क और उदाहरण दें।
संगीता : प्रमुख भाषाओं को समाहित करने की नीति ने राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया है।
अरमान : भाषा के आधार पर राज्यों के गठन ने हमें बाँट दिया है। हम इसी कारण अपनी भाषा के प्रति सचेत हो गए हैं।
हरीश : इस नीति ने अन्य भाषाओं के ऊपर अंग्रेजी के प्रभुत्व को मजबूत करने भर का काम किया है।
उत्तर— हम संगीता की इस प्रतिक्रिया से सहमत हैं कि भारत की प्रमुख भाषाओं को समाहित करने की भाषा नीति ने राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया है। एक व्यक्ति कन्नड़ और भारतीय या बंगाली और भारतीय अथवा तमिल और
--- [ पृष्ठ संख्या: 286 ] ---
सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान) कक्षा X | 279
भारतीय, गुजराती और भारतीय जैसी दो-दो पहचानों से आसानी से जीता है। भाषावार राज्यों के गठन ने भारत को 14-15 राष्ट्रों में विभाजित होने से बचा लिया है। स्पष्ट है कि भारत की भाषा नीति ने सभी भाषाओं को आदर व सम्मान दिया है, जिससे राष्ट्रीय एकता मजबूत हुई है। यद्यपि हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित किया गया है, लेकिन उसे किसी राज्य पर जबरन नहीं थोपा जा सकता। राज्यों की अपनी-अपनी भाषाएँ हैं जिनमें वह राज्य सरकार का कामकाज करते हैं।
प्रश्न 8. संघीय सरकार की एक विशिष्टता है :
(क) राष्ट्रीय सरकार अपने कुछ अधिकार प्रांतीय सरकारों को देती है।
(ख) अधिकार विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच बँट जाते हैं।
(ग) निर्वाचित पदाधिकारी ही सरकार में सर्वोच्च ताकत का उपयोग करते हैं।
(घ) सरकार की शक्ति शासन के विभिन्न स्तरों के बीच बँट जाती है।
उत्तर— (घ) सरकार की शक्ति शासन के विभिन्न स्तरों के बीच बँट जाती है।
प्रश्न 9. भारतीय संविधान की विभिन्न सूचियों में दर्ज कुछ विषय यहाँ दिए गए हैं। इन्हें नीचे दी गई तालिका में संघीय सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची वाले समूहों में लिखें।
(क) रक्षा; (ख) पुलिस; (ग) कृषि; (घ) शिक्षा; (ङ) बैंकिंग; (च) वन; (छ) संचार; (ज) व्यापार; (झ) विवाह।
[तालिका - सूचियों का वर्गीकरण]

संघीय सूची | |
**राज्य सूची** | |
**समवर्ती सूची** |
उत्तर—
संघीय सूची | (क) रक्षा (ङ) बैंकिंग (छ) संचार |
**राज्य सूची** | (ख) पुलिस (ग) कृषि (ज) व्यापार |
**समवर्ती सूची** | (घ) शिक्षा (च) वन (झ) विवाह |
प्रश्न 10. नीचे भारत में शासन के विभिन्न स्तरों और उनके कानून बनाने के अधिकार-क्षेत्र के जोड़े दिए गए हैं। इनमें से कौन-सा जोड़ा सही मेल वाला नहीं है?
(क) राज्य सरकार — राज्य सूची
(ख) केंद्र सरकार — संघीय सूची
(ग) केंद्र और राज्य सरकार — समवर्ती सूची
(घ) स्थानीय सरकार — अवशिष्ट अधिकार
उत्तर— इनमें से (घ) स्थानीय सरकार और अवशिष्ट अधिकार वाला जोड़ा सही मेल वाला नहीं है; क्योंकि अवशिष्ट अधिकार केन्द्र सरकार को प्रदान किये गये हैं।
प्रश्न 11. सूची I और सूची II में मेल ढूँढें और नीचे दिए गए कोड के आधार पर सही उत्तर चुनें।
सूची I | सूची II |
1. भारतीय संघ | (अ) प्रधानमंत्री |
2. राज्य | (ब) सरपंच |
3. नगर निगम | (स) राज्यपाल |
4. ग्राम पंचायत | (द) मेयर |
1 | 2 | 3 | 4 | |
(सा) | द | अ | ब | स |
(रे) | ब | स | द | अ |
(गा) | अ | स | द | ब |
(मा) | स | द | अ | ब |
उत्तर— सही उत्तर है—(गा) अ स द ब
प्रश्न 12. इन बयानों पर गौर करें :
--- [ पृष्ठ संख्या: 287 ] ---
(अ) संघीय व्यवस्था में संघ और प्रांतीय सरकारों के अधिकार स्पष्ट रूप से तय होते हैं।
(ब) भारत एक संघ है क्योंकि केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकार संविधान में स्पष्ट रूप से दर्ज हैं और अपने-अपने विषयों पर उनका स्पष्ट अधिकार है।
(स) श्रीलंका में संघीय व्यवस्था है क्योंकि उसे प्रांतों में बाँट दिया गया है।
(द) भारत में संघीय व्यवस्था नहीं रही क्योंकि राज्यों के कुछ अधिकार स्थानीय शासन की इकाइयों में बाँट दिए गए हैं।
ऊपर दिए गए बयानों में कौन-कौन सही हैं?
(सा) अ, ब और स (रे) अ, और द (गा) अ और ब (मा) ब और स।
उत्तर- ऊपर दिए गए बयानों में (गा) सही है क्योंकि अ और ब बयान ही सही हैं।
---
📝 2. नोट्स: पाठ-सार, मुख्य बिंदु एवं शब्दावली
महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं, भौगोलिक परिभाषाएं, राजनीतिक सिद्धांत एवं संपूर्ण अध्याय का सारगर्भित सारांश।
[पाठ-सार]

संघवाद क्या है?
आधुनिक लोकतंत्रों में सत्ता की साझेदारी का एक आम रूप है-शासन के विभिन्न स्तरों के बीच सत्ता का ऊर्ध्वाधर बँटवारा। इसे आमतौर पर संघवाद कहा जाता है। आमतौर पर संघीय व्यवस्था में दो स्तर पर सरकारें होती हैं। इसमें एक सरकार पूरे देश के लिए होती है जिसके जिम्मे राष्ट्रीय महत्त्व के विषय होते हैं और दूसरी सरकार, राज्य या प्रांतों के स्तर की सरकारें होती हैं जिनके जिम्मे स्थानीय महत्त्व के विषय होते हैं। सत्ता के इन दोनों स्तरों की सरकारें अपने-अपने स्तर पर स्वतंत्र होकर काम करती हैं।
--- [ पृष्ठ संख्या: 280 ] ---
सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान) कक्षा X 273
संघीय व्यवस्था की विशेषताएँ-
(1) यहाँ सरकार दो या अधिक स्तरों वाली होती हैं।
(2) अलग-अलग स्तर की सरकारें एक ही नागरिक समूह पर शासन करती हैं, पर कानून बनाने, कर वसूलने और प्रशासन करने का उनका अपना-अपना अलग अधिकार क्षेत्र होता है।
(3) इनके अधिकार क्षेत्र संविधान में स्पष्ट रूप से वर्णित होते हैं।
(4) संविधान के मौलिक प्रावधानों को किसी एक स्तर की सरकार अकेले नहीं बदल सकती। ऐसे बदलाव दोनों स्तर की सरकारों की सहमति से ही हो सकते हैं।
(5) विभिन्न स्तर की सरकारों के बीच अधिकारों के विवादों को निपटाने की शक्ति सर्वोच्च न्यायालय में निहित होती है।
(6) विभिन्न स्तर की सरकारों के लिए राजस्व के अलग-अलग स्रोत निर्धारित होते हैं।
(7) संघीय शासन व्यवस्था के दोहरे उद्देश्य हैं-(i) देश की एकता की सुरक्षा करना और उसे बढ़ावा देना तथा (ii) क्षेत्रीय विविधता का पूरा सम्मान करना।
संघीय व्यवस्था का गठन- संघीय व्यवस्था के गठन और कामकाज के लिए दो चीजें आवश्यक हैं- (1) आपसी भरोसा तथा (2) सत्ता के बँटवारे के नियम पर सहमति। संघीय शासन व्यवस्थाएँ आमतौर पर निम्नलिखित दो तरीकों से गठित होती हैं-
(1) केन्द्र और प्रान्तों के समान अधिकार- जहाँ दो या दो से अधिक स्वतंत्र राज्य साथ आकर एक बड़ी इकाई का गठन करते हैं, वहाँ प्राय: प्रान्तों को समान अधिकार प्राप्त होते हैं तथा वे केन्द्र की तुलना में ज्यादा शक्ति लिए होते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रेलिया में ऐसी ही संघीय व्यवस्था है।
(2) केन्द्र के प्रान्तों से अधिक अधिकार- जहाँ एक बड़ा देश अपनी आंतरिक विविधता को ध्यान में रखते हुए राज्यों का गठन करता है और फिर राज्य सरकार और राष्ट्रीय सरकार के बीच सत्ता का बँटवारा किया जाता है। ऐसी संघीय व्यवस्था में राज्यों की तुलना में केन्द्र सरकार अधिक ताकतवर होती है। भारत, बेल्जियम और स्पेन इसके उदाहरण हैं।
भारत में संघीय व्यवस्था- (1) भारतीय संविधान ने मौलिक रूप से दो स्तरीय शासन व्यवस्था का प्रावधान किया था-(i) संघ (केन्द्र) सरकार और (ii) राज्य सरकारें। केन्द्र सरकार को पूरे भारतीय संघ का प्रतिनिधित्व करना था। बाद में पंचायतों और नगरपालिकाओं के रूप में संघीय शासन का एक तीसरा रूप भी जोड़ा गया। यहाँ तीनों स्तरों की शासन व्यवस्थाओं के लिए अपने अलग-अलग अधिकार क्षेत्र हैं।
(2) संविधान में स्पष्ट रूप से केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच विधायी अधिकारों को तीन हिस्सों में बाँटा गया है। इन्हें तीन सूचियों-संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची-के द्वारा विभाजित किया गया है। बाकी बचे (अवशिष्ट) विषय केन्द्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में रखे गये हैं।
(3) भारतीय संघ के सारे राज्यों को भी बराबर अधिकार नहीं हैं। भारत में कुछ राज्यों को संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत कुछ विशेष शक्तियाँ प्राप्त हैं।
(4) भारत में कुछ इकाइयाँ 'केन्द्र शासित प्रदेश' कहलाती हैं। ये वे छोटे क्षेत्र हैं जो अपने आकार के चलते स्वतंत्र प्रान्त नहीं बन सकते। इनको राज्यों वाले अधिकार नहीं हैं। इनका शासन चलाने का विशेष अधिकार केन्द्र सरकार को है।
(5) केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच सत्ता का यह बँटवारा हमारे संविधान की बुनियादी बात है। इस बँटवारे में बदलाव करना आसान नहीं है।
(6) संवैधानिक प्रावधानों और कानूनों के क्रियान्वयन की देख-रेख में न्यायपालिका महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वह सत्ता के बँटवारे से संबंधित सरकारों के बीच के विवाद का निपटारा करती है।
(7) सरकार चलाने और अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह करने के लिए जरूरी राजस्व की उगाही के सम्बन्ध में केन्द्र और राज्य सरकारों को कर लगाने तथा संसाधन जमा करने का अधिकार है।
संघीय व्यवस्था कैसे चलती है?
संघीय व्यवस्था के कारगर कामकाज के लिए संवैधानिक प्रावधान जरूरी हैं, लेकिन इतना ही पर्याप्त नहीं है।
--- [ पृष्ठ संख्या: 281 ] ---
भारत में संघीय व्यवस्था की सफलता का मुख्य श्रेय संवैधानिक प्रावधानों के साथ-साथ यहाँ की लोकतांत्रिक राजनीति के चरित्र को है। भाषायी राज्यों का गठन, भाषायी नीति तथा केन्द्र-राज्य सम्बन्धों में लगातार आए बदलाव ने संघीय व्यवस्था को मजबूत बनाया है। यथा-
भाषायी राज्य- 1950 के दशक में देश में भाषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन हुआ।
इसके बाद कुछ राज्यों का गठन भाषा के आधार पर नहीं बल्कि संस्कृति, भूगोल अथवा जातीयताओं की विभिन्नताओं को रेखांकित करने व उन्हें आदर देने के लिए किया गया। जैसे-नागालैण्ड, उत्तराखण्ड, झारखण्ड आदि।
भाषावार राज्य बनाने से देश अधिक एकीकृत तथा मजबूत हुआ तथा इससे प्रशासन ज्यादा सुविधाजनक हो गया।
भाषायी नीति- संविधान में किसी भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं दिया गया। हिन्दी को राजभाषा बनाया गया तथा अन्य भाषाओं को भी अनुसूची भाषा का दर्जा दिया गया। राज्यों की भी अपनी राजभाषाएँ हैं। राजभाषा के रूप में अंग्रेजी के प्रयोग को भी जारी रखा गया है। राजभाषा के रूप में हिन्दी को बढ़ावा देने की केन्द्र सरकार की नीति बनी हुई है लेकिन किसी राज्य पर हिन्दी को थोपा नहीं जायेगा। भारतीय राजनेताओं ने इस सम्बन्ध में जो लचीला रुख अपनाया उसी से हम श्रीलंका जैसी स्थिति में पहुँचने से बच गए।
केन्द्र-राज्य सम्बन्ध- केन्द्र-राज्य सम्बन्धों में लगातार बदलाव आया है, लेकिन इससे संघवाद मजबूत हुआ है। इस सम्बन्ध में हम एकदलीय प्रभुत्व की व्यवस्था से प्रारंभ करके बहुदलीय व्यवस्था की तरफ बढ़े हैं। 1990 के बाद से देश में अनेक राज्यों में क्षेत्रीय दलों के उदय से केन्द्र और राज्यों में 'गठबंधन सरकारों' की शुरुआत हुई। इससे सत्ता में साझेदारी और राज्य सरकार की स्वायत्तता का आदर करने की नई संस्कृति पनपी। इसे सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले ने बल दिया कि केन्द्र सरकार मनमाने ढंग से राज्य सरकारों को भंग नहीं कर सकती।
भारत में भाषायी विविधता- भारत की 2011 की जनगणना में लोगों ने 1300 से ज्यादा अलग-अलग भाषाओं को अपनी मातृभाषा के रूप में दर्ज कराया था। इन्हें कुछ प्रमुख भाषाओं के साथ समूहबद्ध किये जाने के बावजूद जनगणना में 121 प्रमुख भाषाएँ पायी गयी हैं। इनमें 22 भाषाओं को भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में रखा गया है। इसमें सबसे बड़ी भाषा हिंदी भी सिर्फ 44% लोगों की ही मातृभाषा है। समूहबद्ध करने के बावजूद 2011 में यह संख्या 50 प्रतिशत से कम ही थी।
भारत में विकेन्द्रीकरण- भारत में संघीय सत्ता की साझेदारी तीन स्तरों पर की गई है-(1) केन्द्रीय स्तर (2) राज्य स्तर और (3) स्थानीय स्तर। जब केन्द्र और राज्य सरकार से शक्तियाँ लेकर स्थानीय सरकारों को दी जाती हैं तो इसे सत्ता का विकेन्द्रीकरण कहते हैं। अनेक मुद्दों और समस्याओं का निपटारा स्थानीय स्तर पर अधिक बढ़िया ढंग से हो सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर लोग सीधे फैसलों में भागीदार भी बनते हैं।
- 1992 में संविधान संशोधन करके स्थानीय स्वशासन को अधिक शक्तिशाली व प्रभावी बनाया गया है; क्योंकि अब इनके चुनाव नियमित रूप से होते हैं, अनुसूचित जातियों, जनजातियों, पिछड़ी जातियों तथा महिलाओं की सीटें आरक्षित की गई हैं; प्रत्येक राज्य में इन संस्थाओं के चुनाव हेतु चुनाव आयोग की व्यवस्था की गई है।
- ग्राम स्तर के स्थानीय स्वशासन को पंचायती राज के नाम से जाना जाता है; जिसमें ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों तथा जिला परिषद् की व्यवस्था की जाती है।
- शहरों में स्थानीय शासन की संस्थाओं को नगरपालिका, नगरपरिषद् और नगर निगम के रूप में व्यवस्थित किया गया है।
---
⭐ 3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर एवं बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक, लघूत्तरात्मक एवं निबंधात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
● बहुविकल्पीय प्रश्न-
1. वर्तमान में बेल्जियम में किस प्रकार की सरकार है-
(अ) संघात्मक (ब) एकात्मक (स) तानाशाही (द) राजतंत्रात्मक
2. निम्नलिखित में किस देश की सरकार एकात्मक है?
(अ) भारत (ब) संयुक्त राज्य अमेरिका (स) श्रीलंका (द) बेल्जियम
3. निम्नलिखित में जो संघ सरकार की विशेषता नहीं है, वह है-
(अ) दो स्तर की सरकारें
(ब) दोनों सरकारों को संविधान द्वारा शक्तियाँ प्राप्त
(स) राज्य सरकार को शक्तियाँ केंद्र सरकार से प्राप्त
(द) दोनों सरकारों के अपने अलग-अलग अधिकार क्षेत्र
4. साथ आकर (Coming together) संघ बनाने का उदाहरण है-
(अ) भारत (ब) संयुक्त राज्य अमेरिका (स) बेल्जियम (द) स्पेन
5. निम्न में से कौनसा राज्य साथ रहकर (Holding together) संघ का उदाहरण नहीं है?
(अ) भारत (ब) बेल्जियम (स) स्पेन (द) स्विट्जरलैंड
6. भारतीय संविधान में मौलिक रूप से कितने स्तरीय शासन व्यवस्था का प्रावधान किया गया था?
(अ) एक-स्तरीय (ब) दो-स्तरीय (स) त्रि-स्तरीय (द) चार-स्तरीय
7. भारतीय संविधान में 'पुलिस' किस सूची के अन्तर्गत है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)
(अ) संघ सूची (ब) राज्य सूची (स) समवर्ती सूची (द) अवशिष्ट विषय
8. संचार विषय किस सूची में शामिल है?
(अ) संघ सूची (ब) राज्य सूची (स) समवर्ती सूची (द) इनमें से कोई नहीं
9. अनुच्छेद 371 के तहत विशेष शक्तियों का लाभ उठाने वाला राज्य नहीं है-
(अ) असम (ब) नागालैंड (स) उत्तराखंड (द) मिजोरम
10. निम्न में केन्द्रशासित प्रदेश है-
(अ) चंडीगढ़ (ब) दिल्ली (स) लक्षद्वीप (द) उपर्युक्त सभी
11. ग्राम पंचायत के अध्यक्ष को क्या कहा जाता है?
(अ) सरपंच (ब) पंच (स) जिला प्रमुख (द) मेयर
12. जिस देश में प्रान्तीय सरकारों को अधिकार केन्द्र सरकार द्वारा दिये जाते हैं और केन्द्र सरकार उन अधिकारों को प्रान्तीय सरकारों से वापस भी ले सकती है, ऐसी सरकार को कहते हैं-
(अ) संघात्मक सरकार (ब) एकात्मक सरकार
(स) संसदात्मक सरकार (द) अध्यक्षात्मक सरकार
13. बेल्जियम ने एकात्मक शासन की जगह संघात्मक सरकार व्यवस्था को कब अपनाया?
(अ) 1983 में (ब) 1883 में (स) 1993 में (द) 2003 में
14. दुनिया के 193 देशों में से संघीय व्यवस्था वाले देशों की संख्या है-
--- [ पृष्ठ संख्या: 288 ] ---
सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान) कक्षा X | 281
(अ) 100 (ब) 93 (स) 40 (द) 25
प्रश्न 15. निम्नलिखित में से किस लोकतांत्रिक देश में संघीय व्यवस्था नहीं है?
(अ) इंग्लैंड (ब) संयुक्त राज्य अमेरिका (स) भारत (द) स्विट्जरलैंड
प्रश्न 16. विश्व के संघीय व्यवस्था वाले देशों में दुनिया की कितनी प्रतिशत जनसंख्या रहती है?
(अ) 20 प्रतिशत (ब) 40 प्रतिशत (स) 25 प्रतिशत (द) 30 प्रतिशत
प्रश्न 17. भारतीय संविधान में निम्न में से कौनसा विषय संघ सूची में रखा गया है?
(अ) प्रतिरक्षा (ब) पुलिस (स) व्यापार-वाणिज्य (द) कृषि
प्रश्न 18. निम्न में से कौनसा विषय समवर्ती सूची का नहीं है?
(अ) शिक्षा (ब) वन (स) सिंचाई (द) विवाह
प्रश्न 19. भारत में केन्द्र और राज्य दोनों को कानून बनाने का अधिकार दिया गया है-
(अ) संघ सूची के विषयों पर। (ब) राज्य सूची के विषयों पर।
(स) समवर्ती सूची के विषयों पर। (द) अवशिष्ट विषयों पर।
प्रश्न 20. भारत में सर्वाधिक कौन-सी भाषा बोली जाती है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)
अथवा
भारत में जिस भाषा को राजभाषा का दर्जा दिया गया है, वह है-
(अ) मराठी (ब) तेलुगु (स) हिन्दी (द) बांग्ला
प्रश्न 21. संविधान की आठवीं अनुसूची में दर्ज भाषाओं की संख्या है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)
(अ) 21 (ब) 20 (स) 22 (द) 24
अथवा
भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में कितनी भाषाओं को रखा गया है? (प्रश्न बैंक)
(अ) 20 (ब) 21 (स) 22 (द) 23
प्रश्न 22. केन्द्र एवं राज्य के मध्य विधायी अधिकारों को कितने हिस्से में बाँटा गया है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)
(अ) दो (ब) तीन (स) चार (द) पाँच
प्रश्न 23. निम्न में से कौनसा विषय संविधान में शक्ति वितरण की किसी भी सूची में नहीं है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)
(अ) व्यापार (ब) वैदेशिक सम्बन्ध (स) शिक्षा (द) कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर
प्रश्न 24. नगर निगम के अध्यक्ष को कहा जाता है-
(अ) सभापति (ब) सरपंच (स) मेयर (द) राज्यपाल
प्रश्न 25. शासन की जिस व्यवस्था में सरकार दो या अधिक स्तरों वाली होती है, उसे कहा जाता है-
(अ) एकात्मक सरकार (ब) संघात्मक सरकार (स) सामुदायिक सरकार (द) राजतंत्रीय सरकार
प्रश्न 26. निम्नलिखित में से कौनसा संघीय राज्य नहीं है?
(अ) जम्मू-कश्मीर (ब) राजस्थान (स) तेलंगाना (द) उत्तराखण्ड
प्रश्न 27. भारतीय संविधान में 'कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर' निम्न में से किस विकल्प में आता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)
(अ) संघ सूची (ब) राज्य सूची (स) समवर्ती सूची (द) अवशिष्ट विषय (बाकी बचे)
प्रश्न 28. निम्नांकित में से संघ सूची का विषय नहीं है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)
(अ) राष्ट्रीय सुरक्षा (ब) विदेशी मामले (स) बैंकिंग (द) शिक्षा
प्रश्न 29. भारत में विकेन्द्रीकरण की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम उठाया गया- (प्रश्न बैंक)
(अ) 1971 (ब) 1992 (स) 1999 (द) 2005
प्रश्न 30. 'विदेशी मामले' किस सूची से संबंधित विषय है? (प्रश्न बैंक)
--- [ पृष्ठ संख्या: 289 ] ---
(अ) राज्य सूची (ब) संघ सूची (स) समवर्ती सूची (द) इनमें से कोई नहीं
31. राज्य सूची में शामिल विषय है- (प्रश्न बैंक)
(अ) संचार (ब) शिक्षा (स) व्यापार (द) विवाह
32. 'शिक्षा' किस सूची से संबंधित है? (प्रश्न बैंक)
(अ) राज्य सूची (ब) समवर्ती सूची (स) संघ सूची (द) इनमें से कोई नहीं
33. पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान है- (प्रश्न बैंक)
(अ) 1/2 (ब) 3/4 (स) 1/4 (द) 1/3
उत्तरमाला
1. (अ) 2. (स) 3. (स) 4. (ब) 5. (द) 6. (ब) 7. (ब)
8. (अ) 9. (स) 10. (द) 11. (अ) 12. (ब) 13. (स) 14. (द)
15. (अ) 16. (ब) 17. (अ) 18. (स) 19. (स) 20. (स) 21. (स)
22. (ब) 23. (द) 24. (स) 25. (ब) 26. (अ) 27. (द) 28. (द)
29. (ब) 30. (ब) 31. (स) 32. (ब) 33. (द)।
● रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
1. .......... व्यवस्था में शासन का एक ही स्तर होता है और बाकी इकाइयाँ उसके अधीन होकर काम करती हैं।
2. जब केन्द्र एवं राज्य सरकारों के कानूनों में टकराव हो तो ............ द्वारा बनाया कानून ही मान्य होता है।
3. संवैधानिक प्रावधानों और कानूनों के क्रियान्वयन की देख-रेख में ........... महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
4. भारत में वास्तविक विकेन्द्रीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम सन् .......... में उठाया गया।
5. कई ग्राम पंचायतों को मिलाकर ........... का गठन होता है।
6. अब स्थानीय स्वशासी निकायों के चुनाव ............ रूप से कराना संवैधानिक बाध्यता है।
7. राज्य पुनर्गठन आयोग की रिपोर्ट को एक नवम्बर ............... को लागू किया गया था।
8. 1990 के बाद देश के अनेक राज्यों में ............. दलों का उदय हुआ।
9. हमारे संविधान में हिन्दी के अतिरिक्त ................... अन्य भाषाओं को अनुसूचित भाषा का दर्जा दिया गया है।
10. संघीय व्यवस्था के कारगर कामकाज के लिए ........................ प्रावधान जरूरी हैं।
11. सन् ................. में भारत ने लोकतंत्र की राह पर अपनी जीवन यात्रा शुरू की। (प्रश्न बैंक)
12. भारत में परमाणु परीक्षण राजस्थान के ................... में किया। (प्रश्न बैंक)
13. संघीय शासन व्यवस्था एकात्मक शासन व्यवस्था से ठीक ........................ है। (प्रश्न बैंक)
14. नये राज्य बनाने के लिए .................... के दशक में भारत के कई पुराने राज्यों की सीमाएँ बदलीं। (प्रश्न बैंक)
15. राजभाषा के रूप में .................... को बढ़ावा देने की भारत सरकार की नीति बनी हुई है। (प्रश्न बैंक)
16. ग्राम पंचायत का मुखिया .................... कहलाता है। (प्रश्न बैंक)
उत्तरमाला
1. एकात्मक 2. केन्द्र सरकार 3. न्यायपालिका 4. 1992 5. पंचायत समिति
6. नियमित 7. 1956 8. क्षेत्रीय 9. 21 10. संवैधानिक
11. 1947 12. पोकरण 13. उलट 14. 1950 15. हिन्दी
16. सरपंच।
● अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. सत्ता के विकेन्द्रीकरण से क्या आशय है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)
अथवा
विकेन्द्रीकरण से आप क्या समझते हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— जब केन्द्र तथा राज्य सरकारों से उनकी कुछ शक्तियाँ लेकर स्थानीय सरकारों में बाँट दी जाएँ तो इसे सत्ता का विकेन्द्रीकरण कहा जाता है।
प्रश्न 2. श्रीलंका में व्यावहारिक रूप से कौनसी शासन व्यवस्था है?
उत्तर— श्रीलंका में व्यावहारिक रूप से अभी भी एकात्मक शासन व्यवस्था है।
--- [ पृष्ठ संख्या: 290 ] ---
सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान) कक्षा X 283
प्रश्न 3. किसी ऐसे एक बड़े देश का नाम लिखिये जिसकी शासन व्यवस्था संघात्मक नहीं है।
उत्तर— साम्यवादी चीन।
प्रश्न 4. संघात्मक देशों में दुनिया की कितनी प्रतिशत जनसंख्या रहती है?
उत्तर— चालीस प्रतिशत।
प्रश्न 5. भारतीय संविधान में हिन्दी के अलावा कितनी भाषाओं को अनुसूचित भाषा का दर्जा दिया गया? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)
अथवा
संविधान में कितनी भाषाओं को अनुसूचित भाषा का दर्जा दिया गया है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— भारतीय संविधान में हिन्दी के अलावा 21 भाषाओं को अनुसूचित भाषा का दर्जा दिया गया है।
प्रश्न 6. भारत में राज्य पुनर्गठन आयोग की रिपोर्ट को कब लागू किया गया था? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— 1 नवम्बर, 1956 को।
प्रश्न 7. भारत में विषयों के बँटवारे के लिए कितनी सूचियाँ बनाई गई हैं?
उत्तर— तीन सूचियाँ-(1) संघ सूची (2) राज्य सूची और (3) समवर्ती सूची।
प्रश्न 8. संघवाद से क्या आशय है?
उत्तर— आधुनिक लोकतंत्र में शासन को विभिन्न स्तरों के बीच सत्ता के ऊर्ध्वाधर बँटवारे को संघवाद कहा जाता है।
प्रश्न 9. आदर्श संघीय व्यवस्था में कौनसे दो पक्ष अवश्य होते हैं?
उत्तर— (1) आपसी भरोसा (2) साथ रहने पर सहमति।
प्रश्न 10. एकात्मक शासन व्यवस्था से क्या आशय है?
उत्तर— एकात्मक व्यवस्था में शासन का एक ही स्तर होता है और बाकी इकाइयाँ उसके अधीन होकर काम करती हैं?
प्रश्न 11. किन्हीं पाँच संघीय व्यवस्था वाले देशों के नाम लिखो।
उत्तर— (1) कनाडा, (2) संयुक्त राज्य अमेरिका, (3) ब्राजील, (4) अर्जेन्टीना, (5) भारत।
प्रश्न 12. संघीय शासन व्यवस्था के दो उद्देश्य बताइये।
उत्तर— संघीय शासन व्यवस्था के दो उद्देश्य ये हैं-(1) देश की एकता की सुरक्षा करना और उसे बढ़ावा देना (2) क्षेत्रीय विविधताओं का पूरा सम्मान करना।
प्रश्न 13. संघीय शासन व्यवस्थाएँ कितने तरीकों से गठित होती हैं?
उत्तर— दो तरीकों से-(1) साथ आकर संघ बनाना (Coming together federation) और (2) बड़े देश द्वारा विविध राज्यों का गठन कर सत्ता का बँटवारा करना (Holding together federation)।
प्रश्न 14. पंचायती राज से आप क्या समझते हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— गाँवों के स्तर पर मौजूद स्थानीय शासन व्यवस्था को पंचायती राज के नाम से जाना जाता है।
प्रश्न 15. ग्राम पंचायत के प्रधान को क्या कहा जाता है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— ग्राम पंचायत के प्रधान को सरपंच कहा जाता है।
प्रश्न 16. ग्राम-सभा के सदस्य कौन होते हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— पंचायत के सभी पंजीकृत मतदाता ग्राम-सभा के सदस्य होते हैं।
प्रश्न 17. मंडल अथवा प्रखंड स्तरीय पंचायत किसे कहते हैं?
उत्तर— कई ग्राम पंचायतों को एक साथ मिलाकर पंचायत समिति का निर्माण होता है। इसे ही प्रखंड स्तरीय पंचायत कहते हैं।
प्रश्न 18. चार देशों के नाम बताएँ जहाँ एकात्मक प्रकार की सरकार है।
उत्तर— एकात्मक प्रकार की सरकार वाले प्रमुख देश ये हैं-ब्रिटेन, इटली, जापान और श्रीलंका।
प्रश्न 19. साथ आकर संघ बनाने वाले किन्हीं तीन देशों के नाम लिखिये।
उत्तर— साथ आकर संघ बनाने (Coming together federation) वाले तीन देश ये हैं-(1) संयुक्त राज्य अमेरिका (2) आस्ट्रेलिया (3) स्विट्जरलैंड।
प्रश्न 20. केन्द्र व राज्य सरकारों के बीच विधायी अधिकारों को कितने हिस्सों में बांटा गया है? (प्रश्न बैंक)
--- [ पृष्ठ संख्या: 291 ] ---
उत्तर—भारतीय संविधान में स्पष्ट रूप से केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच विधायी अधिकारों को तीन हिस्सों में बाँटा गया है।
प्रश्न 21. भारतीय संघ में केन्द्र और राज्यों की सरकारों के बीच सत्ता के बँटवारे हेतु क्या व्यवस्था की गई है?
उत्तर—भारतीय संघ में तीन सूचियों के माध्यम से संघ तथा राज्यों के बीच सत्ता के बँटवारे की व्यवस्था की गई है।
प्रश्न 22. संघ सूची क्या है?
उत्तर—संघ सूची में राष्ट्रीय महत्त्व के विषय रखे गये हैं जिन पर कानून बनाने का अधिकार केन्द्र सरकार को दिया गया है।
प्रश्न 23. राज्य सूची क्या है?
उत्तर—राज्य सूची वह सूची है जिसमें उन विषयों को गिनाया गया है जिन पर कानून बनाने का अधिकार राज्य सरकारों को दिया गया है।
प्रश्न 24. समवर्ती सूची से क्या आशय है?
उत्तर—समवर्ती सूची में ऐसे विषयों की सूची है जिन पर केन्द्र सरकार और राज्य सरकारें दोनों कानून बना सकती हैं।
प्रश्न 25. भारत में पंचायती राज व्यवस्था के तीन स्तर कौन-से हैं?
उत्तर—भारत में पंचायती राज व्यवस्था के तीन स्तर हैं-(1) गाँव के स्तर पर ग्राम पंचायत, (2) ब्लॉक स्तर पर पंचायत समिति और (3) जिला स्तर पर जिला परिषद्।
प्रश्न 26. मेयर कौन होता है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर—बड़े नगरों के नगर-निगमों के राजनीतिक प्रमुख को मेयर कहते हैं।
प्रश्न 27. भारतीय संघ में सरकार के कितने स्तर हैं?
उत्तर—मूल रूप से भारतीय संविधान में संघ में दो स्तर की सरकारों-केन्द्रीय और प्रान्तीय-की व्यवस्था की गयी थी।
प्रश्न 28. समवर्ती सूची के किन्हीं 5 विषयों को गिनाइये।
उत्तर—समवर्ती सूची के 5 विषय ये हैं-(1) शिक्षा (2) वन (3) विवाह (4) मजदूर-संघ और (5) उत्तराधिकार।
प्रश्न 29. राज्य सूची में रखे गये किन्हीं 5 विषयों के नाम लिखिये।
उत्तर—राज्य सूची के 5 विषय ये हैं-(1) पुलिस, (2) व्यापार, (3) वाणिज्य, (4) कृषि, (5) सिंचाई।
प्रश्न 30. संघ सूची में रखे गये किन्हीं 5 विषयों के नाम लिखिये।
उत्तर—(1) प्रतिरक्षा (2) विदेशी मामले (3) बैंकिंग (4) संचार और (5) मुद्रा।
प्रश्न 31. भारत में केन्द्र-शासित प्रदेश के कोई दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर—(1) लक्षद्वीप (2) चण्डीगढ़।
प्रश्न 32. सरकार चलाने और अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह करने के लिए सरकार धन कैसे एकत्रित करती है?
उत्तर—केन्द्र और राज्य सरकारें सरकार चलाने और अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह करने के लिए कर लगाकर तथा संसाधन जमा करके धन एकत्रित करती हैं।
प्रश्न 33. गठबंधन सरकार किसे कहते हैं?
उत्तर—एक से ज्यादा राजनीतिक पार्टियों द्वारा मिलकर बनाई गई सरकार को गठबंधन सरकार कहते हैं। यह एक साझा कार्यक्रम के आधार पर चलाई जाती है।
प्रश्न 34. भारत में गाँवों के स्तर पर स्थानीय शासन व्यवस्था को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर—पंचायतराज के नाम से।
प्रश्न 35. भारत में भूगोल, संस्कृति अथवा जातीयताओं के आधार पर भी राज्यों का गठन किया गया है। कोई एक उदाहरण दीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)
उत्तर—जैसे-नागालैण्ड, उत्तराखण्ड।
प्रश्न 36. संघ सूची में शामिल विषय कौन-कौनसे हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर—संघ सूची में प्रतिरक्षा, विदेशी मामले, बैंकिंग, संचार और मुद्रा जैसे राष्ट्रीय महत्त्व के विषय शामिल हैं।
--- [ पृष्ठ संख्या: 292 ] ---
सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान) कक्षा X 285
प्रश्न 37. 'राज्य सूची' में कौन-कौनसे विषय आते हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— राज्य सूची में पुलिस, व्यापार, वाणिज्य, कृषि और सिंचाई जैसे प्रांतीय और स्थानीय महत्त्व के विषय आते हैं।
प्रश्न 38. 'समवर्ती सूची' में शामिल विषय कौनसे हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— 'समवर्ती सूची' में शिक्षा, वन, मजदूर-संघ, विवाह, गोद लेना और उत्तराधिकार जैसे वे विषय शामिल हैं जो केन्द्र के साथ राज्य सरकारों की साझी दिलचस्पी में आते हैं।
● लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. गठबंधन सरकार से आप क्या समझते हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— जब चुनाव में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता तब प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियाँ अन्य दलों के सहयोग से सरकार बनाती हैं, इस प्रकार से बनी सरकार गठबंधन सरकार कहलाती है। सामान्यतया गठबंधन में शामिल दल एक साझा कार्यक्रम चलाते हैं।
प्रश्न 2. किस प्रकार बेल्जियम की सरकार एकात्मक शासन प्रणाली से संघात्मक शासन में बदली?
उत्तर— बेल्जियम की केन्द्रीय सरकार ने 1993 में संविधान संशोधन करके प्रांतीय सरकारों को कुछ संवैधानिक अधिकार दिए। इन अधिकारों के लिए प्रांतीय सरकारें अब केन्द्र पर निर्भर नहीं रहीं। इस प्रकार बेल्जियम ने एकात्मक शासन की जगह संघीय शासन प्रणाली अपना ली।
प्रश्न 3. संघीय शासन व्यवस्था से आप क्या समझते हैं? (प्रश्न बैंक; माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)
उत्तर— संघीय शासन व्यवस्था- संघीय शासन व्यवस्था में सर्वोच्च सत्ता दो स्तरों-केन्द्रीय सरकार और उसकी विभिन्न आनुषंगिक इकाइयों की सरकार के बीच बँट जाती है। सत्ता के इन दोनों स्तर की सरकारें अपने-अपने स्तर पर स्वतंत्र होकर अपना काम करती हैं। ये दोनों ही सरकारें अपने-अपने स्तर पर लोगों के प्रति जवाबदेह होती हैं।
प्रश्न 4. भारत में सत्ता के विकेन्द्रीकरण के कोई दो लाभ बताइए।
उत्तर— सत्ता के विकेन्द्रीकरण के दो लाभ निम्नलिखित हैं-
(1) स्थानीय सरकारों को संवैधानिक दर्जा दिए जाने से हमारे यहाँ लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत हुई हैं।
(2) इसने महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के साथ ही हमारे लोकतंत्र में उनकी आवाज को मजबूत किया है।
प्रश्न 5. भारतीय संघ में विशेष दर्जा प्राप्त राज्यों के बारे में बताइये।
उत्तर— भारतीय संघ के सारे राज्यों को बराबर अधिकार नहीं हैं। कुछ राज्यों को विशेष दर्जा प्राप्त है, जैसे कि असम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम को। ये भारत के संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत विशेष शक्तियों का लाभ उठाते हैं जो स्वदेशी लोगों, उनकी संस्कृति और सरकारी सेवाओं में अधिमान्य रोजगार के भूमि अधिकारों के संरक्षण के लिए उपयोगी हैं।
प्रश्न 6. विकेन्द्रीकरण हेतु किए गए संविधान संशोधन, 1992 की प्रमुख दो विशेषताएँ लिखिये।
उत्तर— 1992 में विकेन्द्रीकरण हेतु किए गए संविधान संशोधन की दो प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
(1) अब स्थानीय स्वशासी निकायों के चुनाव नियमित रूप से कराना संवैधानिक बाध्यता है।
(2) अब इन निकायों के सदस्यों के निर्वाचन में अनुसूचित जाति, जनजातियों तथा पिछड़ी जातियों तथा महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित हैं।
प्रश्न 7. भाषायी राज्यों का गठन क्यों हुआ? इसके क्या लाभ हुए?
उत्तर— भारत में भाषायी राज्यों का गठन यह सुनिश्चित करने के लिए हुआ कि एक भाषा बोलने वाले क्षेत्र एक राज्य में आ जायें।
भाषायी राज्यों से लाभ- (1) भाषावार राज्य बनाने से देश अधिक एकीकृत और मजबूत हुआ है।
(2) इससे प्रशासन अपेक्षाकृत अधिक सुविधाजनक हो गया है।
प्रश्न 8. संघीय व्यवस्था की कोई दो विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)
अथवा
आपके मतानुसार संघीय शासन की कोई दो प्रमुख विशेषताएँ कौनसी हैं? संक्षेप में लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)
उत्तर— संघीय व्यवस्था की दो प्रमुख विशेषताएँ ये हैं-
--- [ पृष्ठ संख्या: 293 ] ---
(1) दोहरा शासन-संघात्मक शासन व्यवस्था में दोहरा शासन प्रबन्ध होता है-(i) केन्द्रीय शासन और (ii) प्रान्तों का शासन।
(2) शक्तियों का बँटवारा-संघीय व्यवस्था में केन्द्र तथा प्रान्तों की सरकार के मध्य शक्तियों का विभाजन संविधान द्वारा किया जाता है तथा दोनों ही सरकारें अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में स्वतंत्र होती हैं।
प्रश्न 9. 'सत्ता का ऊर्ध्वाधर बँटवारा' का आशय स्पष्ट कीजिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— शासन के विभिन्न स्तर के बीच सत्ता के बँटवारे को सत्ता का ऊर्ध्वाधर बँटवारा कहते हैं। इस प्रकार की साझेदारी लोकतंत्र में सत्ता की साझेदारी का सबसे आम रूप है। दूसरे शब्दों में, इसे संघवाद भी कहते हैं। इस व्यवस्था के कारण ही लोकतांत्रिक व्यवस्था के अन्दर अलग-अलग इलाकों का साथ रहना तथा चलना सम्भव हो पाता है।
प्रश्न 10. एकात्मक शासन व्यवस्था से आप क्या समझते हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— एकात्मक शासन व्यवस्था के अन्तर्गत शासन का केवल एक ही स्तर होता है तथा बाकी इकाइयाँ उसके अधीन रहकर काम करती हैं। इसमें केन्द्र सरकार प्रांतीय या स्थानीय सरकार को आदेश दे सकती है।
प्रश्न 11. 1992 में संविधान संशोधन कर लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में स्थानीय निकायों को कैसे शक्तिशाली एवं प्रभावी बनाया गया? कोई दो प्रावधान बताइये। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)
उत्तर— (1) संवैधानिक दर्जा-स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा दिया गया, जिससे उनकी शक्तियाँ और अधिकार बढ़ गए। इससे उन्हें स्थानीय मामलों में निर्णय लेने की अधिक शक्ति मिली।
(2) नियमित चुनाव-स्थानीय निकायों के चुनाव नियमित रूप से आयोजित करना अनिवार्य किया गया। इससे स्थानीय निकायों में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ी।
● दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-
प्रश्न 1. संघीय शासन गठित करने के दो विभिन्न तरीकों का वर्णन कीजिए।
अथवा
संघ बनाने के अलग-अलग ढंगों का वर्णन कीजिये।
उत्तर— केन्द्र तथा राज्य सरकारों के मध्य सत्ता का बँटवारा मुख्य रूप से उन ऐतिहासिक संदर्भों पर निर्भर करता है जिन पर संघ की स्थापना हुई है। संघीय शासन व्यवस्थाएँ आमतौर पर दो तरीकों से गठित होती हैं-
(1) साथ आकर संघ बनाना (Coming together federation)-इसमें दो या अधिक स्वतंत्र राज्य अपनी इच्छा से साथ आकर एक संघ का निर्माण करते हैं। इसमें वे अपनी संप्रभुता तथा अपनी अलग पहचान को भी बनाए रखते हैं और अपनी सुरक्षा और खुशहाली बढ़ाने का रास्ता अख्तियार करते हैं। इसमें प्रायः प्रान्तों को केन्द्र के समान अधिकार होते हैं और केन्द्र से ज्यादा शक्तिशाली होते हैं। अमेरिका, स्विट्जरलैंड तथा आस्ट्रेलिया ऐसे ही संघ राज्य हैं।
(2) साथ रखने के द्वारा संघ बनाना (Holding together federation)-इसमें बड़े देश पहले राज्यों का गठन करते हैं फिर राज्य और राष्ट्रीय सरकार के बीच सत्ता का बँटवारा कर दिया जाता है। इसमें राज्यों की तुलना में केन्द्र सरकार अधिक शक्तिशाली होती है। भारत, बेल्जियम और स्पेन इसके उदाहरण हैं।
प्रश्न 2. भारत में सरकार के तृतीय स्तर की किन्हीं चार विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर— भारतीय शासन व्यवस्था में सरकार के तृतीय स्तर से आशय स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं से है। इसकी चार विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
(1) इन संस्थाओं के सदस्यों तथा पदाधिकारियों के पदों में अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटें आरक्षित होती हैं।
(2) इनमें 1/3 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं।
(3) सभी स्थानीय संस्थाओं के सदस्यों के चुनावों के लिए राज्य चुनाव आयोग की व्यवस्था की गई है।
(4) राज्य सरकारें अपनी आय का एक भाग विकास कार्य के लिए इन संस्थाओं को देती हैं।
प्रश्न 3. संघवाद क्या है? संघवाद की महत्त्वपूर्ण विशेषताओं को बताइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)
उत्तर— संघवाद से आशय-आधुनिक लोकतंत्रों में सत्ता की साझेदारी का एक आम रूप है-शासन के विभिन्न स्तरों के बीच सत्ता का ऊर्ध्वाधर बँटवारा। इसे ही प्रायः संघवाद कहा जाता है। संघवाद में संविधान द्वारा सर्वोच्च सत्ता केन्द्र और उसकी इकाइयों के बीच विभाजित होती है।
--- [ पृष्ठ संख्या: 294 ] ---
सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान) कक्षा X 287
संघवाद की महत्वपूर्ण विशेषताएँ-
(1) सरकार के दो स्तर-संघीय शासन व्यवस्था में प्रायः दो स्तर पर सरकारें होती हैं। इनमें एक सरकार पूरे देश के लिए होती है जिसके जिम्मे राष्ट्रीय महत्त्व के विषय होते हैं और दूसरी सरकार, राज्य या प्रान्तों के स्तर की सरकारें होती हैं जिनके जिम्मे स्थानीय महत्त्व के विषय होते हैं।
(2) न्यायालय की सर्वोच्चता-संघात्मक शासन व्यवस्था में विभिन्न स्तर की सरकारों के बीच अधिकारों के विवादों के निपटने की शक्ति सर्वोच्च न्यायालय में निहित होती है।
(3) संवैधानिक मान्यता-विभिन्न स्तर की सरकारों के अधिकार क्षेत्र संविधान में स्पष्ट रूप से वर्णित होते हैं तथा संविधान सरकार के हर स्तर के अस्तित्व और उनकी शक्तियों व अधिकारों की गारन्टी व सुरक्षा देता है।
प्रश्न 4. भारत में संघवाद का स्वरूप कैसा है? बताइए।
उत्तर— भारत में संघवाद का स्वरूप-
(1) भारतीय संघवाद राज्यों का संघ है।
(2) भारतीय संघीय व्यवस्था में त्रि-स्तरीय शासन व्यवस्था है। इसमें एक सरकार पूरे देश के लिए है और दूसरी सरकार प्रान्तों के स्तर पर होती है। 1992 में संविधान संशोधन द्वारा स्थानीय शासन की संस्थाओं को तीसरे स्तर के रूप में मान्यता दी गई है।
(3) भारतीय संघवाद में संविधान द्वारा शक्तियों का बँटवारा तीन सूचियों-संघ सूची, राज्य सूची तथा समवर्ती सूची के माध्यम से किया गया है।
(4) भारतीय संघवाद में न्यायपालिका स्वतंत्र तथा सर्वोच्च है।
(5) भारतीय संघवाद में सारे राज्यों को बराबर अधिकार नहीं हैं। यहाँ कुछ राज्यों को विशिष्ट अधिकार प्रदान किये गए हैं।
प्रश्न 5. भारत की भाषा नीति को स्पष्ट कीजिए। (प्रश्न बैंक)
अथवा
भारत की भाषा नीति को संक्षेप में बताइये।
उत्तर— भारत की भाषा नीति-हमारे संविधान में किसी एक भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं दिया गया है। हिंदी को राजभाषा माना गया, साथ ही अन्य भाषाओं के संरक्षण के अनेक दूसरे उपाय किये गये। संविधान में हिंदी के अलावा अन्य 21 भाषाओं को अनुसूचित भाषा का दर्जा दिया गया है। केन्द्र सरकार के किसी पद का उम्मीदवार उनमें से किसी भी भाषा में परीक्षा दे सकता है, बशर्ते कि उम्मीदवार इसको विकल्प के रूप में चुने। राज्यों की अपनी राजभाषाएँ हैं। राज्यों का अपना अधिकांश काम अपनी राजभाषा में ही होता है। केन्द्र सरकार ने गैर-हिंदी भाषी राज्यों की माँग पर हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी को राजकीय कामों में प्रयोग की अनुमति दे दी है।
प्रश्न 6. शक्तियों के विकेन्द्रीकरण के पीछे मूल भावना क्या है? (प्रश्न बैंक)
अथवा
भारत में राजनैतिक सत्ता के विकेन्द्रीकरण के पीछे बुनियादी सोच को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर— भारत में शक्तियों के विकेन्द्रीकरण के पीछे मूल भावना यह है कि अनेक मुद्दों और समस्याओं का निपटारा स्थानीय स्तर पर ही बढ़िया ढंग से ही हो सकता है। लोगों को अपने इलाके की समस्याओं की बेहतर समझ होती है। लोगों को इस बात की भी अच्छी जानकारी होती है कि पैसा कहाँ खर्च किया जाये और चीजों का अधिक कुशलता से उपयोग किस तरह किया जाये।
दूसरे, स्थानीय स्तर पर लोगों को फैसलों में सीधे भागीदार बनाना भी संभव हो जाता है। इससे लोकतांत्रिक भागीदारी की आदत पड़ती है। इस प्रकार स्थानीय सरकारों की स्थापना स्वशासन के लोकतांत्रिक सिद्धान्त को वास्तविक बनाने का सबसे अच्छा तरीका है।
प्रश्न 7. संविधान द्वारा प्रस्तावित संघ सरकार एवं राज्य सरकारों के बीच विधायी शक्तियों के बँटवारे की तीन सूची व्यवस्था का वर्णन कीजिए।
उत्तर— संविधान द्वारा संघ सरकार एवं राज्य सरकारों के बीच विधायी शक्तियों का बँटवारा निम्नलिखित तीन सूचियों के द्वारा किया गया है-
(1) संघ सूची-संघ सूची में दिये गए विषयों पर केवल केन्द्र सरकार कानून बना सकती है। ये विषय राष्ट्रीय महत्त्व के हैं, जैसे-रक्षा, वित्त, विदेश विभाग आदि।
--- [ पृष्ठ संख्या: 295 ] ---
( 2 ) राज्य सूची-राज्य सूची में दिए गए विषयों पर केवल राज्य सरकार कानून बना सकती है। ये स्थानीय महत्त्व के विषय हैं, जैसे-कृषि, पुलिस, वाणिज्य इत्यादि।
( 3 ) समवर्ती सूची-इस सूची में गिनाए गए विषयों पर केन्द्र तथा राज्य सरकारें दोनों ही कानून बना सकती हैं। एक ही समय में किसी एक विषय पर दोनों सरकारों के कानून में टकराहट होने की स्थिति में केन्द्र का कानून मान्य होगा और राज्य का कानून निरस्त हो जायेगा।
( 4 ) अवशिष्ट विषय-शेष विषय केन्द्र सरकार को प्रदान किये गये हैं।
प्रश्न 8. भारत में केन्द्र-राज्य संबंधों में आये बदलावों पर अपने विचार लिखिए। ( प्रश्न बैंक )
उत्तर— केन्द्र-राज्य सम्बन्ध भारतीय संघवाद की विशेषता है जो संविधान के प्रावधानों द्वारा नियंत्रित होती है। भारतीय संविधान ने भारत को 'राज्यों का संघ' नाम से उद्घृत किया है। मौलिक रूप से दो स्तरीय शासन व्यवस्था का प्रावधान था-संघ सरकार तथा राज्य सरकार। परन्तु बाद में पंचायती राज के रूप में तीसरे स्तर को भी जोड़ा गया। संविधान में विधायी अधिकारों को स्पष्ट रूप से तीन भागों-संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची में बाँटा गया है। भारतीय संघ के कई राज्यों को अनुच्छेद 371 के अन्तर्गत विशेष दर्जा प्राप्त है दूसरी ओर भारतीय संघ के कई राज्यों को बहुत कम अधिकार प्राप्त हैं। इस कारण राज्य और केन्द्र में टकराव भी होता है क्योंकि इन राज्यों को अन्य राज्यों की तरह अधिकार प्राप्त नहीं हैं। संविधान के अनुच्छेद 254 के तहत यह प्रावधान भी किया गया है कि संघ और राज्य कानूनों के बीच असंगति होने पर राज्य कानून निष्क्रिय हो जायेगा।
अतः हम यह कह सकते हैं कि भारत में केन्द्र-राज्य सम्बन्ध एक जटिल और संवेदनशील मुद्दा है। संविधान में संघीय शासन प्रणाली का प्रावधान किया है परन्तु यह पूर्ण रूप से लागू नहीं किया गया है। कई मुद्दों के कारण (जल-विवाद, राजस्व का बँटवारा, कानून और व्यवस्था) केन्द्र तथा राज्यों के बीच स्थिति तनावपूर्ण है।
● निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. संघवाद क्या है? इसकी मुख्य विशेषताओं को समझाइए। ( माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23 )
अथवा
संघीय व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए। ( प्रश्न बैंक; माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24 )
उत्तर— संघवाद या संघीय शासन व्यवस्था से आशय-संघीय शासन व्यवस्था में सर्वोच्च सत्ता केन्द्रीय प्राधिकार और उसकी विभिन्न अनुषांगिक इकाइयों के बीच बँट जाती है। इसमें आमतौर पर दो स्तर पर सरकारें होती हैं। इसमें एक सरकार पूरे देश के लिए होती है जिसके जिम्मे राष्ट्रीय महत्त्व के विषय होते हैं। दूसरे स्तर पर राज्य या प्रान्तों की सरकारें होती हैं जो स्थानीय महत्त्व के विषयों के काम-काज को देखती हैं। सत्ता के इन दोनों स्तर की सरकारें अपने-अपने स्तर पर स्वतंत्र होकर कार्य करती हैं।
संघवाद या संघीय शासन व्यवस्था की विशेषताएँ
संघीय शासन व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
( 1 ) सरकार के दो स्तर- संघीय व्यवस्था में सरकार दो या अधिक स्तरों वाली होती है।
( 2 ) अलग-अलग अधिकार क्षेत्र- संघीय शासन व्यवस्था में अलग-अलग स्तर की सरकारें एक ही नागरिक समूह पर शासन करती हैं, लेकिन कानून बनाने, कर वसूलने और प्रशासन का उनका अपना-अपना अधिकार क्षेत्र होता है।
( 3 ) संवैधानिक मान्यता- विभिन्न स्तर की सरकारों के अधिकार क्षेत्र संविधान में स्पष्ट रूप से वर्णित होते हैं। इसलिए संघीय शासन व्यवस्था में संविधान सरकार के हर स्तर के अस्तित्व और उनकी शक्तियों व अधिकारों की गारंटी व सुरक्षा देता है। केन्द्रीय सरकार प्रान्तों की सरकारों को कुछ खास करने का आदेश नहीं दे सकती। राज्य सरकारें अपने कार्यों के लिए केन्द्रीय सरकार को जवाबदेह नहीं होती हैं। ये दोनों ही सरकारें अपने-अपने स्तर पर लोगों की जवाबदेह होती हैं।
( 4 ) मौलिक प्रावधान- संघीय शासन व्यवस्था में संविधान के मौलिक प्रावधानों को किसी एक स्तर की सरकार अकेले नहीं बदल सकती। ऐसे बदलाव दोनों स्तर की सरकारों की सहमति से ही हो सकते हैं।
( 5 ) न्यायालय की सर्वोच्चता- संघीय शासन व्यवस्था में न्यायालयों को संविधान तथा विभिन्न स्तर की सरकारों के अधिकारों की व्याख्या करने का अधिकार होता है। इन सरकारों के बीच अधिकारों को लेकर उठने वाले विवादों को निपटाने में सर्वोच्च न्यायालय निर्णायक भूमिका निभाता है।
--- [ पृष्ठ संख्या: 296 ] ---
सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान) कक्षा X 289
(6) वित्तीय स्वायत्तता-संघीय शासन व्यवस्था में वित्तीय स्वायत्तता निश्चित करने के लिए विभिन्न स्तर की सरकारों के लिए राजस्व के अलग-अलग स्रोत निर्धारित होते हैं।
(7) दोहरा उद्देश्य-संघीय शासन व्यवस्था के दोहरे उद्देश्य हैं-(1) देश की एकता की सुरक्षा करना और उसे बढ़ावा देना तथा (2) क्षेत्रीय विविधताओं का पूरा सम्मान करना।
प्रश्न 2. संघवाद का अर्थ बताते हुए संघीय व्यवस्था के गठन के तरीकों को सोदाहरण समझाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)
अथवा
संघीय शासन व्यवस्थाएँ कितने तरीकों से गठित होती हैं? वर्णन कीजिये। भारत की संघीय व्यवस्था किस प्रकार की है?
उत्तर- संघवाद से आशय-संघवाद में सर्वोच्च सत्ता केन्द्र और प्रान्तों के बीच बँट जाती है। इसमें प्रायः दो स्तर पर सरकारें होती हैं। संघीय या केन्द्रीय स्तर पर एक सरकार पूरे देश के लिए होती है जिसके जिम्मे राष्ट्रीय महत्त्व के विषय होते हैं। दूसरे स्तर पर राज्य या प्रान्तों की सरकारें होती हैं जो स्थानीय महत्त्व के विषयों के कामकाज देखती हैं। सत्ता के इन दोनों स्तर की सरकारें अपने-अपने स्तर पर स्वतंत्र होकर कार्य करती हैं।
संघीय शासन व्यवस्थाओं के गठन के तरीके
संघीय शासन व्यवस्थाएँ आम तौर पर दो तरीकों से गठित होती हैं। यथा-
(1) साथ आकर संघ बनाना (Coming together federation)-इसके अन्तर्गत दो या अधिक स्वतंत्र राष्ट्रों को साथ लेकर एक बड़ी इकाई (राष्ट्र) का निर्माण किया जाता है। संयुक्त राज्य अमेरिका, स्विट्जरलैंड इसके प्रमुख उदाहरण हैं। ऐसी संघीय व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ हैं-
(i) इसमें सभी स्वतंत्र राष्ट्र अपनी संप्रभुता तथा अपनी अलग-अलग पहचान को बनाए रखते हैं।
(ii) वे अपनी खुशहाली और सुरक्षा बढ़ाने का रास्ता अख्तियार करते हैं।
(iii) इस तरह की संघीय व्यवस्था वाले देशों में प्रायः प्रान्तों की सरकारों को समान अधिकार होता है और वे केन्द्र की तुलना में अधिक शक्तिशाली होती हैं।
(2) साथ रखकर संघ बनाना (Holding together federation)-संघीय व्यवस्था के गठन का दूसरा तरीका है-बड़े देश द्वारा अपनी आंतरिक विविधता को ध्यान में रखते हुए राज्यों का गठन करना और फिर राज्य और राष्ट्रीय सरकार के बीच सत्ता का बँटवारा कर देना। भारत, बेल्जियम और स्पेन इसके उदाहरण हैं।
इस व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं-
(i) इसमें राज्यों की तुलना में केन्द्र सरकार अधिक शक्तिशाली होती है।
(ii) इस व्यवस्था में यद्यपि विभिन्न राज्यों को समान अधिकार दिये जाते हैं, तथापि विशेष स्थिति में किसी-किसी प्रान्त (राज्य) को विशेष अधिकार भी दिये जाते हैं।
प्रश्न 3. भारत में संघीय व्यवस्था के विविध स्तर बताते हुए इनमें शक्ति वितरण की सूचियों की विवेचना कीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)
उत्तर- भारत में संघीय व्यवस्था के विविध स्तर
भारतीय संविधान में मूल रूप से दो स्तर की शासन व्यवस्था का प्रावधान किया गया था-(1) संघीय सरकार या केन्द्र सरकार और (2) राज्य सरकारें। लेकिन 1992 ई. में संविधान संशोधन कर स्थानीय शासन की संस्थाओं (पंचायतों तथा नगरपालिकाओं) के रूप में एक तीसरे स्तर को भी संविधान में मान्यता दे दी गई है।
शक्ति वितरण- भारतीय संविधान में केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच शक्तियों का विभाजन निम्नलिखित तीन सूचियों के माध्यम से किया गया है-
(i) संघ सूची- संघ सूची में राष्ट्रीय महत्त्व के विषयों को रखा गया है, जैसे-प्रतिरक्षा, विदेशी मामले, संचार, बैंकिंग व मुद्रा आदि। पूरे देश के लिए इन मामलों में एक तरह की नीतियों की जरूरत होती है। इसी कारण इन विषयों को संघ सूची में रखा गया है।
संघ सूची में वर्णित विषयों पर कानून बनाने का अधिकार केन्द्र सरकार का है।
(ii) राज्य सूची- राज्य सूची में स्थानीय महत्त्व के विषयों को रखा गया है, जैसे-पुलिस, व्यापार, वाणिज्य, कृषि एवं सिंचाई आदि।
इस सूची में वर्णित विषयों पर कानून बनाने का अधिकार केवल राज्य सरकारों को है।
--- [ पृष्ठ संख्या: 297 ] ---
(iii) समवर्ती सूची-समवर्ती सूची में दिए गए विषयों पर कानून बनाने का अधिकार केन्द्र तथा राज्य दोनों प्रकार की सरकारों को दिया गया है, लेकिन जब किसी विषय पर बने दोनों के कानूनों में टकराव हो, तो केन्द्र सरकार द्वारा निर्मित कानून मान्य होगा।
(iv) अवशिष्ट विषय-जो विषय इन तीनों सूचियों में से किसी में नहीं आते हैं, उन पर कानून बनाने का अधिकार केन्द्र सरकार को है।
प्रश्न 4. भारतीय संघीय व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिये।
अथवा
भारत में संघीय व्यवस्था की समीक्षा कीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)
उत्तर- भारतीय संघीय व्यवस्था की विशेषताएँ
भारतीय संघीय व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
(1) त्रि-स्तरीय सरकारें-भारतीय संविधान में मूल रूप से दो स्तर की शासन व्यवस्था का प्रावधान किया था-(i) संघ या केन्द्र सरकार और (ii) राज्य सरकारें। बाद में स्थानीय शासन की संस्थाओं पंचायतों और नगरपालिकाओं के रूप में एक तीसरे स्तर को भी संविधान में मान्यता दे दी गई है।
(2) शक्तियों का विभाजन-किसी भी संघीय व्यवस्था की तरह भारत में भी तीनों स्तर की शासन व्यवस्थाओं के अपने अलग-अलग अधिकार क्षेत्र हैं। संविधान में स्पष्ट रूप से केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच विधायी अधिकारों को तीन सूचियों के द्वारा विभाजन किया गया है। ये हैं-(i) संघ सूची, (ii) राज्य सूची एवं (iii) समवर्ती सूची।
(i) संघ सूची में वर्णित विषयों पर कानून बनाने का अधिकार सिर्फ केन्द्र सरकार को है।
(ii) राज्य सूची में वर्णित विषयों पर कानून बनाने का अधिकार राज्य सरकारों को है।
(iii) समवर्ती सूची के विषयों पर कानून बनाने का अधिकार केन्द्र सरकार और राज्य सरकार दोनों को है। लेकिन जब दोनों के कानूनों में टकराव हो तो केन्द्र सरकार द्वारा बनाया कानून ही मान्य होता है।
(iv) अवशिष्ट विषय-शेष विषय केन्द्र सरकार को प्रदत्त किये गये हैं।
(3) कुछ राज्यों को विशिष्ट शक्तियाँ-भारतीय संघ के सारे राज्यों को बराबर अधिकार नहीं हैं। कुछ राज्यों को विशेष दर्जा प्राप्त है। जैसे कि असम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम अपने विशिष्ट सामाजिक तथा ऐतिहासिक परिस्थितियों के कारण भारत के संविधान के कुछ प्रावधानों (अनु. 371) के तहत विशेष शक्तियों का लाभ उठाते हैं।
(4) संविधान की सर्वोच्चता-भारत में संविधान की सर्वोच्चता है। केन्द्र और राज्यों के बीच संविधान द्वारा किये गए सत्ता के बँटवारे में बदलाव करना आसान नहीं है। अकेले संसद इस व्यवस्था में बदलाव नहीं कर सकती। ऐसे किसी बदलाव को पहले संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से मंजूर किया जाना होता है। फिर कम से कम आधे राज्यों की विधानसभाओं से उसे मंजूर करवाना होता है।
(5) न्यायपालिका की सर्वोच्चता-भारतीय संघीय व्यवस्था में न्यायपालिका स्वतंत्र तथा सर्वोच्च है। शक्तियों के बँटवारे के सम्बन्ध में कोई विवाद होने पर उसका फैसला उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में ही होता है।
प्रश्न 5. भारतीय संघवाद किस प्रकार कार्य करता है?
उत्तर- भारतीय संघवाद का क्रियान्वयन
संघीय व्यवस्था के कारगर कामकाज के लिए संवैधानिक प्रावधान जरूरी है, पर इतना ही पर्याप्त नहीं है। भारत सरकार ने भारतीय संघवाद को सुचारु रूप से चलाने के लिए कई नीतियों को अपनाया है। यथा-
(1) भाषायी राज्यों का गठन-स्वतंत्रता के बाद 1956 में सरकार ने राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों को लागू कर कई राज्यों का भाषायी आधार पर गठन किया। इसके बाद कुछ अन्य राज्यों का गठन संस्कृति, भूगोल अथवा जातीयताओं की विभिन्नताओं को रेखांकित करने और उन्हें आदर देने के लिए भी किया गया। जैसे-नागालैंड, उत्तराखंड और झारखण्ड आदि। भाषावार राज्य बनाने से देश ज्यादा एकीकृत और मजबूत हुआ।
(2) भाषा नीति-भारत एक बहुभाषायी देश है। भारतीय संविधान में 22 भाषाएँ दी गई हैं। हरेक राज्य अपनी भाषा तथा संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए स्वतंत्र है। हिंदी को राजभाषा माना गया है, लेकिन गैर-हिंदी भाषी प्रदेशों की माँग पर अंग्रेजी का भी प्रयोग जारी रखा गया है।
(3) केन्द्र-राज्य सम्बन्ध-संघवाद के लिए यह आवश्यक है कि केन्द्र और राज्यों के रिश्ते अच्छे रहें। 1990 के बाद केन्द्र में बनी गठबंधन सरकारों से सत्ता में साझेदारी और राज्य सरकारों की स्वायत्तता का आदर करने की नई संस्कृति पनपी है।
--- [ पृष्ठ संख्या: 298 ] ---
सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान) कक्षा X 291
उपर्युक्त विवेचन से यह स्पष्ट होता है कि भारत एक संघीय देश है जिसने हमेशा संघवाद के सुचारु रूप से कार्य करने का प्रयास किया है।
प्रश्न 6. 1992 के संविधान संशोधन के क्या प्रावधान हैं? (प्रश्न बैंक)
अथवा
भारत में संविधान संशोधन करके भारतीय लोकतंत्र के स्वशासी निकायों को अधिक शक्तिशाली तथा प्रभावी बनाने हेतु क्या कदम उठाये गये?
उत्तर— 1992 के संविधान संशोधन के प्रावधान
भारत में 1992 के संविधान संशोधन द्वारा स्थानीय शासन को निम्न प्रकार शक्तिशाली और प्रभावी बनाया गया है-
(1) अब स्थानीय स्वशासी निकायों के चुनाव 5 वर्ष में नियमित रूप से कराना संवैधानिक बाध्यता है।
(2) अब निर्वाचित स्थानीय निकायों के सदस्य तथा पदाधिकारियों के पदों में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और पिछड़ी जातियों के लिए सीटें आरक्षित की गई हैं।
(3) अब कम से कम एक-तिहाई पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
(4) हर राज्य में पंचायत और नगरपालिका चुनाव कराने के लिए राज्य चुनाव आयोग नामक स्वतंत्र संस्था का गठन किया गया है।
(5) अब राज्य सरकारों को अपने राजस्व और अधिकारों का कुछ हिस्सा इन स्थानीय स्वशासी निकायों को देना पड़ता है। सत्ता में भागीदारी की प्रकृति हर राज्य में अलग-अलग है।
(6) गाँवों के स्तर पर मौजूद स्थानीय शासन व्यवस्था को पंचायती राज के नाम से जाना जाता है; शहरों में इसे नगर निकायों (नगरपालिका और नगर निगम) के रूप में जाना जाता है।
(7) नगरपालिकाओं और ग्राम पंचायतों के लिए करीब 36 लाख लोगों का चुनाव होता है। यह संख्या ही अपने आप में दुनिया के कई देशों की कुल आबादी से ज्यादा है।
इससे स्पष्ट होता है कि 1992 के संविधान संशोधन के द्वारा भारत में तीसरे स्तर की शासन व्यवस्था को शक्तिशाली तथा प्रभावी बनाकर लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
प्रश्न 7. स्थानीय शासन व्यवस्था के विभिन्न स्तर कौन-कौनसे हैं? इसके गठन की प्रक्रिया बताइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)
उत्तर— स्थानीय शासन व्यवस्था के विभिन्न स्तर
(अ) भारत में ग्राम स्तर पर स्थानीय शासन व्यवस्था- भारत में गाँवों के स्तर पर विद्यमान स्थानीय शासन व्यवस्था को पंचायती राज के नाम से जाना जाता है। पंचायती राज व्यवस्था त्रि-स्तरीय है। इसके तीनों स्तरों के गठन की प्रक्रिया निम्न प्रकार है-
(1) ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायत- प्रत्येक गाँव या गाँव समूह में एक ग्राम पंचायत होती है। यह एक तरह की परिषद है, जिसमें कई सदस्य और एक अध्यक्ष होता है। सदस्य वार्डों से चुने जाते हैं और उन्हें पंच कहा जाता है। अध्यक्ष को सरपंच कहा जाता है। सरपंच का चुनाव गाँव में रहने वाले सभी वयस्क लोग मतदान के जरिये करते हैं।
यह पूरे पंचायत क्षेत्र के लिए फैसला लेने वाली संस्था है। पंचायतों का काम ग्राम सभा की देखरेख में चलता है। गाँव के सभी मतदाता इसके सदस्य होते हैं। ग्राम पंचायत का बजट पास करने और उसके कामकाज की समीक्षा के लिए ग्राम सभा को साल में कम से कम दो या तीन बार बैठकें करनी होती हैं।
(2) ब्लॉक स्तर पर पंचायत समिति- कई ग्राम पंचायतों को मिलाकर पंचायत समिति का गठन होता है। इसे मंडल या ब्लॉक (प्रखंड) स्तरीय पंचायत भी कहते हैं। इसके सदस्यों का चुनाव उस इलाके के मतदाताओं द्वारा किया जाता है।
(3) जिला परिषद्- किसी जिले की सभी पंचायत समितियों को मिलाकर जिला परिषद् का गठन होता है। जिला परिषद् के अधिकांश सदस्यों का चुनाव होता है। जिला परिषद् का प्रमुख जिला प्रमुख कहलाता है जो इस परिषद् का राजनीतिक प्रधान होता है। जिला परिषद में उस जिले से लोकसभा और विधान सभा के लिए चुने गए सांसद और विधायक तथा जिला स्तर की संस्थाओं के कुछ अधिकारी भी सदस्य के रूप में होते हैं।
(ब) नगरों में स्थानीय शासन व्यवस्था- स्थानीय शासन संस्थाएँ शहरों में भी काम करती हैं। छोटे-छोटे शहरों में नगरपालिका होती है। मध्यम दर्जे के शहरों में नगर परिषद होती है। बड़े शहरों में नगर निगम का गठन होता।
--- [ पृष्ठ संख्या: 299 ] ---
292
है। तीनों का कामकाज निर्वाचित प्रतिनिधि करते हैं। नगरपालिका का प्रमुख नगरपालिका के राजनैतिक प्रधान होते हैं। नगर परिषद के प्रमुख सभापति कहलाते हैं। नगर निगम में ऐसे पदाधिकारी को मेयर कहते हैं।
स्थानीय सरकारों को संवैधानिक दर्जा दिये जाने से लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हुई हैं, महिलाओं के आरक्षण से लोकतंत्र में उनकी भागीदारी बढ़ी है।
प्रश्न 8. भारत में पंचायती राज व्यवस्था के संगठन पर विस्तार से अपने विचार लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— स्वतंत्रता के पश्चात् पंचायती राज की स्थापना लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण की अवधारणा को साकार करने के लिए उठाये गये महत्त्वपूर्ण कदमों में से एक है। वास्तविक विकेन्द्रीकरण की दिशा में 1992 में बड़ा कदम उठाया गया। संविधान में संशोधन द्वारा पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक मान्यता दी गई तथा इसे और अधिक प्रभावी बनाया गया।
स्थानीय सरकारों की यह नयी व्यवस्था दुनिया में लोकतंत्र का अब तक का सबसे बड़ा प्रयोग है। स्थानीय सरकारों को संवैधानिक दर्जा दिए जाने से भारत में लोकतंत्र की नींव और ज्यादा गहरी हुई। इस व्यवस्था से महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ा, उनकी हिस्सेदारी बढ़ी तथा लोकतंत्र में इनकी आवाज बुलंद हुई; परिणामस्वरूप महिला सशक्तिकरण को भी बल प्राप्त हुआ। हालाँकि वर्तमान समय में भी अधिकांश राज्य सरकारों ने स्थानीय सरकार को पर्याप्त अधिकार नहीं दिए हैं तथा अब तक भारत स्वशासन की आदर्श स्थिति से दूर है अर्थात् सरकार को स्थानीय शासन तथा पंचायती राज हेतु बनाए गए कानूनों के क्रियान्वयन के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
प्रश्न 9. संघीय और एकात्मक शासन व्यवस्था में अंतर स्पष्ट कीजिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— संघीय और एकात्मक शासन व्यवस्था में अन्तर
संघीय शासन व्यवस्था में सत्ता का बँटवारा केन्द्र, राज्यों और स्थानीय इकाइयों के मध्य होता है, जबकि एकात्मक शासन व्यवस्था में सारी शक्तियाँ केन्द्र सरकार के पास होती हैं।
संघीय शासन व्यवस्था-
(i) संघीय शासन व्यवस्था में केन्द्र सरकार, राज्य सरकारें और स्थानीय प्रशासनिक इकाइयाँ होती हैं।
(ii) केन्द्र सरकार देश की विभिन्न घटक इकाइयों के साथ अपनी शक्तियों को साझा करती है।
(iii) संघीय व्यवस्था में राज्य सरकारों और स्थानीय घटक इकाइयों के पास अपनी शक्तियाँ होती हैं।
(iv) संघीय व्यवस्था में केन्द्रीय सरकार राज्य सरकारों और प्रान्तीय इकाइयों को कुछ खास करने का आदेश नहीं दे सकती है।
(v) राज्य सरकारों के अपने अधिकार क्षेत्र होते हैं और वे अपने कार्यों के लिए केन्द्रीय सरकार के प्रति जवाबदेह नहीं होती हैं।
एकात्मक शासन व्यवस्था-
(i) एकात्मक शासन व्यवस्था में शासन का एक ही स्तर होता है और उप-इकाइयाँ केन्द्र सरकार के अधीन होकर कार्य करती हैं।
(ii) एकात्मक व्यवस्था में केन्द्र सरकार बहुत शक्तिशाली होती है और वह अपनी शक्तियों को साझा नहीं करती है।
(iii) राज्य सरकारों या स्थानीय इकाइयों के पास सही मायने में कोई विशेष शक्ति नहीं होती है।
(iv) एकात्मक शासन व्यवस्था में केन्द्रीय सरकार प्रान्तीय या स्थानीय सरकारों को आदेश दे सकती है।
(v) एकात्मक शासन में सारी शक्तियों का प्रयोग केन्द्रीय सरकार करती है और स्थानीय व राज्य सरकारें उसके प्रति जवाबदेह होती हैं।
प्रश्न 10. भारत में 'भाषायी राज्यों का गठन' के बारे में आप क्या जानते हैं? विस्तार से वर्णन कीजिये।
उत्तर—भारत में भाषायी राज्यों का गठन— भारत एक बड़ा देश है। यहाँ अनेक भाषाएँ एवं बोलियाँ बोली जाती हैं। संविधान में भी 22 भाषाओं को अनुसूचित भाषा का दर्जा दिया गया है।
भारत में अनेक राज्यों का गठन भाषा के आधार पर किया गया है। आजादी के बाद भाषा के आधार पर प्रांतों का गठन हमारे देश की लोकतांत्रिक राजनीति के लिए पहली और एक कठिन परीक्षा थी। आजादी के वक्त से लेकर अब तक अनेक पुराने प्रांत गायब हो गए और कई नए प्रांत बनाए गए। कई प्रांतों की सीमाएँ, क्षेत्र और नाम बदल गए।
भाषा के आधार पर नए राज्यों को बनाने के लिए 1950 के दशक में भारत के कई पुराने राज्यों की सीमाएँ बदलीं। ऐसा यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया कि एक भाषा बोलने वाले लोग एक राज्य में आ जाएँ।
--- [ पृष्ठ संख्या: 300 ] ---
सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान) कक्षा X 293
इसके बाद कुछ अन्य राज्यों का गठन भाषा के आधार पर नहीं बल्कि संस्कृति, भूगोल अथवा जातीयताओं (एथनीसिटी) की विभिन्नता को रेखांकित करने और उन्हें आदर देने के लिए भी किया गया। इनमें नागालैंड, उत्तराखंड और झारखंड जैसे राज्य शामिल हैं।
भाषा के आधार पर राज्यों के गठन पर कई राष्ट्रीय नेताओं को डर था कि इससे देश टूट जाएगा। केंद्र सरकार ने इसी के चलते राज्यों का पुनर्गठन कुछ समय के लिए टाल दिया था। किन्तु आगे चलकर यह स्पष्ट हुआ कि भाषावार राज्य बनाने से देश ज्यादा एकीकृत और मजबूत हुआ। इससे प्रशासन भी पहले की अपेक्षा कहीं ज्यादा सुविधाजनक हो गया है।
प्रश्न 11. भारत में केंद्र-राज्य संबंधों में आये बदलावों के मद्देनजर संघीय व्यवस्था में सत्ता की साझेदारी आज ज्यादा प्रभावी है। स्पष्ट कीजिये।
उत्तर— भारत में केंद्र-राज्य संबंध- भारत में केंद्र-राज्य संबंधों में लगातार आये बदलावों के कारण व्यवहार में संघवाद बहुत मजबूत हुआ है और आज उनके बीच सत्ता की साझेदारी ज्यादा प्रभावी है।
सत्ता की साझेदारी की संवैधानिक व्यवस्था वास्तविकता में कैसा रूप लेगी यह ज्यादातर इस बात पर निर्भर करता है कि शासक दल और नेता किस तरह इस व्यवस्था का अनुसरण करते हैं। काफी समय तक हमारे यहाँ एक ही पार्टी का केंद्र और अधिकांश राज्यों में शासन रहा। इसका व्यावहारिक प्रभाव यह पड़ा जब राज्य सरकारों ने स्वायत्त संघीय इकाई के रूप में अपने अधिकारों का प्रयोग ही नहीं किया। इसके बाद जब केंद्र और राज्य में अलग-अलग दलों की सरकारें बनीं तो केंद्र सरकार ने राज्यों के अधिकारों की अनदेखी करने की कोशिश की। उन दिनों में केंद्र सरकार अक्सर संवैधानिक प्रावधानों का दुरुपयोग करके विपक्षी दलों की राज्य सरकारों को भंग कर देती थी। यह संघवाद की भावना के प्रतिकूल काम था।
सन् 1990 के बाद से इस स्थिति में कुछ सुधार आया। इस अवधि में देश के अनेक राज्यों में क्षेत्रीय दलों का उदय हुआ। इसी दौर में केंद्र में गठबंधन सरकारों की शुरुआत हुई। चूँकि किसी एक दल को लोकसभा में स्पष्ट बहुमत नहीं मिला इसलिए प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियों को क्षेत्रीय दलों समेत अनेक पार्टियों का गठबंधन बनाकर सरकार बनानी पड़ी। इससे सत्ता में साझेदारी और राज्य सरकारों की स्वायत्तता का आदर करने की नई संस्कृति पनपी। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट के एक बड़े फैसले से भी इस प्रक्रिया को बल मिला। इस फैसले के कारण राज्य सरकार को मनमाने ढंग से भंग करना केंद्र सरकार के लिए मुश्किल हो गया।
इस प्रकार आज संघीय व्यवस्था के तहत सत्ता की साझेदारी संविधान लागू होने के तत्काल बाद वाले दौर की तुलना में ज्यादा प्रभावी है।