📖 1. समाधान: पाठगत एवं पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नोत्तर
राजस्थान बोर्ड कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान) — सभी पाठगत प्रश्नों एवं पाठ्यपुस्तक अभ्यास के संपूर्ण सटीक उत्तर।
पाठगत प्रश्न
पृष्ठ 49
प्रश्न 1. ठीक है, मान लिया कि हम राजनीतिक दलों के बगैर नहीं रह सकते। पर जरा यह बताइये कि किस आधार पर जनता किसी राजनीतिक दल का समर्थन करती है?
उत्तर— जनता किसी राजनीतिक दल का समर्थन उसके सिद्धान्तों तथा नीतियों के आधार पर करती है। जो दल जनता की उम्मीदों एवं आकांक्षाओं पर खरा उतरता है, जनता उसी का समर्थन करती है। चुनावों में दल अपनी नीतियाँ तथा कार्यक्रम मतदाताओं के सामने रखते हैं। मतदाता अपनी पसन्द की नीतियों एवं कार्यक्रमों के अनुसार दल का चुनाव करते हैं। यदि चुना गया दल अपनी मनमानी करता है तो अगले चुनाव में मताधिकार द्वारा जनता उसे ठुकरा देती है।
पृष्ठ 58
प्रश्न 2. दल महिलाओं को पर्याप्त टिकट क्यों नहीं देते? क्या इसका कारण आन्तरिक लोकतंत्र की कमी है?
उत्तर— राजनीतिक दल महिलाओं को पर्याप्त टिकट नहीं देते क्योंकि-
(i) बहुत कम संख्या में ऐसी महिलाएँ हैं जो राजनीति में दिलचस्पी लेती हैं।
(ii) भारत में ज्यादातर जनसंख्या गाँवों में निवास करती है, जहाँ अधिकांश महिलाएँ आज भी अशिक्षित हैं तथा उनमें राजनैतिक जागरूकता का अभाव है।
(iii) हमारा समाज पुरुष-प्रधान समाज है और पुरुष-प्रधान समाज महिलाओं को आगे न बढ़ाकर पुरुष को ही आगे बढ़ाता है। उदाहरण के लिए पंचायतों में आरक्षण के कारण चुनी गई महिलाएँ अपने कार्य घर के पुरुषों-पति, पिता, भाई आदि के कहने के अनुसार ही करती हैं।
(iv) दलों में आन्तरिक लोकतंत्र की कमी भी इसका महत्वपूर्ण कारण है।
पृष्ठ 59
प्रश्न 3. क्या आप इस हिस्से में (पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 57 से 59 तक) दिये गये कार्टूनों में दर्शायी गई चुनौतियों की पहचान कर सकते हैं? राजनीति में धन तथा बल के दुरुपयोग को रोकने के क्या तरीके हैं?
उत्तर— जी हाँ, पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 57 से 59 तक दिये गये कार्टूनों में दर्शायी गयी चुनौतियों की हम पहचान कर सकते हैं। इन कार्टूनों में सत्ता पर धन तथा बल के प्रभाव को दर्शाया गया है। इनसे पार्टी के अन्दर लोकतंत्र की कमी, पार्टी में वंशवाद, दलों में पैसा तथा अपराध की घुसपैठ तथा दलों के बीच विकल्पहीनता की चुनौती उत्पन्न होती है। इन चुनौतियों को पैदा करने में धन-बल का दुरुपयोग मुख्य भूमिका निभाता है।
राजनीति में धन तथा बल के दुरुपयोग को रोकने के प्रमुख तरीके निम्न प्रकार हैं-
(1) भ्रष्टाचार के विरुद्ध कदम उठाये चाहिए।
(2) सूचना के अधिकार द्वारा लोगों को जागरूक करना चाहिए।
(3) भ्रष्टाचारियों तथा अपराधियों के चुनाव लड़ने पर रोक लगानी चाहिए।
(4) दल-बदल कानून को सख्ती से लागू करना चाहिए।
(5) सभी उम्मीदवारों को अपनी सम्पत्ति की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
(6) सभी दलों को आयकर रिटर्न भरना अनिवार्य किया जाना चाहिए।
(7) चुनाव खर्च की सीमा तय की जानी चाहिए। उल्लंघन करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
(8) चुनाव का खर्च सरकार द्वारा भी उठाया जा सकता है।
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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
प्रश्न 1. लोकतंत्र में राजनीतिक दलों की विभिन्न भूमिकाओं की चर्चा करें। (प्रश्न बैंक)
अथवा
लोकतंत्र में राजनीतिक दलों की विभिन्न भूमिकाओं की व्याख्या कीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)
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उत्तर— लोकतंत्र में राजनीतिक दलों की विभिन्न भूमिकाएँ
लोकतंत्र में राजनीतिक दल की विभिन्न भूमिकाओं को निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत स्पष्ट किया गया है-
(1) उम्मीदवारों के रूप में भूमिका—अधिकांश लोकतांत्रिक देशों में चुनाव राजनीतिक दलों द्वारा खड़े किए गए उम्मीदवारों के बीच लड़ा जाता है। चुनावों में राजनीतिक दल अपने-अपने उम्मीदवार खड़ा करके चुनाव में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
(2) नीति निर्माता की भूमिका—राजनीतिक दल नीति निर्माता की भूमिका भी निभाते हैं। सरकार प्राय: दलों की राय के अनुरूप अपनी नीतियाँ तय करती है।
(3) कानून निर्माण में भूमिका—राजनैतिक दल देश के कानून के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कानूनों पर दलों के सदस्यों में औपचारिक बहस होती है और उन्हें विधायिका में पास करवाना पड़ता है।
(4) सरकार की भूमिका—बहुमत प्राप्त राजनीतिक दल ही सरकार बनाते और चलाते हैं। जो भी राजनीतिक दल विधायिका में बहुमत प्राप्त करता है, वह सरकार बनाता और अपनी विचारधारा के अनुसार सरकार को चलाता है तथा नीतियाँ बनाता है।
(5) विपक्ष के रूप में भूमिका—वे दल जो सरकार में सम्मिलित नहीं होते, उनके सदस्य विधायक विपक्ष की भूमिका निभाते हैं।
(6) जनमत निर्माण में भूमिका—जनमत निर्माण में राजनीतिक दल महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे मुद्दों को उठाते हैं और उन पर बहस करते हैं। दल कई बार लोगों की समस्याओं को लेकर आंदोलन भी करते हैं।
प्रश्न 2. राजनीतिक दलों के सामने क्या चुनौतियाँ हैं?
अथवा
भारत में राजनीतिक दलों के समक्ष किन्हीं चार चुनौतियों की व्याख्या कीजिए।
अथवा
राजनीतिक दलों के सामने प्रमुख चुनौतियाँ हैं। विवेचना कीजिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— राजनीतिक दलों के समक्ष चुनौतियाँ
किसी भी लोकतंत्र में राजनीतिक दल बहुत आवश्यक हैं क्योंकि वे यह बताते हैं कि लोकतंत्र में क्या हो रहा है? लोकतांत्रिक भारत में राजनीतिक दलों को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यथा-
(1) दल में आन्तरिक लोकतंत्र न होना—पार्टी के भीतर आन्तरिक लोकतंत्र का न होना एक प्रमुख चुनौती है। दल की सारी ताकत एक या कुछेक नेताओं के हाथ में सिमट जाती है। पार्टियों के पास न सदस्यों की खुली सूची होती है, न नियमित रूप से सांगठनिक बैठकें होती हैं। इनके आंतरिक चुनाव भी नहीं होते। कार्यकर्ताओं से वे सूचनाओं का साझा भी नहीं करते। सामान्य कार्यकर्ता अनजान ही रहता है कि पार्टी के अन्दर क्या चल रहा है? चूँकि कुछेक नेताओं के पास ही असली ताकत होती है; इसलिए जो उनसे असहमत होते हैं, उनका पार्टी में टिके रह पाना मुश्किल हो जाता है। पार्टी के सिद्धान्तों और नीतियों से निष्ठा की जगह नेता से निष्ठा ही ज्यादा महत्त्वपूर्ण हो जाती है।
(2) वंशवाद—राजनीतिक दलों में वंशवादी उत्तराधिकार का चलन बढ़ गया है। अर्थात् अनेक दलों में शीर्ष पद पर हमेशा एक ही परिवार के लोग आते हैं। यह दल के अन्य सदस्यों के साथ अन्याय है। यह लोकतंत्र के लिए भी अच्छा नहीं है क्योंकि इससे अनुभवहीन और जनाधारहीन लोग ताकत वाले पदों पर पहुँच जाते हैं। यह प्रवृत्ति कुछ प्राचीन लोकतांत्रिक देशों सहित कमोबेश पूरी दुनिया में दिखाई देती है।
(3) धन और अपराधी तत्त्वों की घुसपैठ—राजनीतिक दलों की तीसरी चुनौती दलों में पैसा और अपराधी तत्त्वों की बढ़ती घुसपैठ है। राजनीतिक दल चुनाव जीतने के लिए धन एवं बल का प्रयोग करते हैं। कई बार पार्टियाँ चुनाव जीत सकने वाले अपराधियों का समर्थन करती हैं या उनकी मदद लेती हैं। राजनीतिक दल प्राय: ऐसे ही उम्मीदवार उतारते हैं जिनके पास काफी पैसा हो या ज्यादा पैसे जुटा सके। इसी प्रकार किसी दल को ज्यादा धन देने वाली कंपनियाँ या अमीर लोग उसकी नीतियों व कार्यक्रमों को प्रभावित करते हैं। यह लोकतंत्र के विकास में बाधक है। दुनियाभर में लोकतंत्र के समर्थक लोकतांत्रिक राजनीति में अमीर लोग और बड़ी कम्पनियों की बढ़ती भूमिका को लेकर चिन्तित हैं।
(4) विकल्पहीनता की स्थिति—हाल के वर्षों में दलों के बीच वैचारिक अन्तर कम होता गया है। प्राय: मुख्य दल बुनियादी मसलों पर सहमत हैं और उनके बीच अन्तर केवल ब्यौरों का रह गया है। भारत में भी सभी बड़ी
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पार्टियों के बीच आर्थिक मसलों पर बहुत कम अन्तर रह गया है। जो लोग इससे अलग नीतियाँ चाहते हैं, उनके लिए कोई विकल्प उपलब्ध नहीं हैं।
दूसरे, अनेक बार लोगों के एकदम नया नेता चुनने का विकल्प भी नहीं होता क्योंकि थोड़े से नेता हर दल में आते-जाते रहते हैं। अतः लोगों के सामने सार्थक विकल्प कम हैं।
प्रश्न 3. राजनीतिक दल अपना कामकाज बेहतर ढंग से करें, इसके लिए उन्हें मजबूत बनाने के कुछ सुझाव दें। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— राजनीतिक दलों के बेहतर कार्य हेतु निम्न सुझाव दिए जा सकते हैं-
(1) कानून का निर्माण-राजनीतिक दलों के आन्तरिक कामकाज को नियंत्रित करने के लिए कानून बनाया जाना चाहिए। सभी दल अपने सदस्यों की सूची रखें, अपने संविधान का पालन करें। पार्टी में विवाद की स्थिति में एक स्वतंत्र प्राधिकारी को पंच बनाएँ और सबसे बड़े पदों के लिए खुला चुनाव करायें। यह व्यवस्था अनिवार्य की जानी चाहिए।
(2) महिलाओं के लिए आरक्षण व्यवस्था-राजनीतिक दल महिलाओं को एक खास न्यूनतम (लगभग एक-तिहाई) अनुपात में जरूर टिकट दें। इसी प्रकार दल के प्रमुख पदों पर भी औरतों के लिए आरक्षण होना चाहिए।
(3) चुनाव खर्च सरकार द्वारा वहन-चुनाव खर्च सरकार उठाए। दलों को सरकार चुनाव लड़ने के लिए धन दे। यह मदद पेट्रोल, कागज, फोन वगैरह के रूप में हो सकती है।
(4) जनता द्वारा दबाव बनाना-आम लोग दबाव समूह, आन्दोलन और मीडिया के माध्यम से राजनीतिक दलों पर सुधार के लिए दबाव बनायें। अगर दलों को लगे कि सुधार न करने से उनका जनाधार गिरने लगेगा या उनकी छवि खराब होगी, तो सुधार को लेकर वे गम्भीर होंगे।
(5) सुधार की इच्छा रखने वाले लोगों का दलों में शामिल होना-दलों में सुधार के लिए यह आवश्यक है कि सुधार की इच्छा रखने वाले लोगों को राजनीतिक दलों में शामिल होना चाहिए।
प्रश्न 4. राजनीतिक दल का क्या अर्थ होता है?
उत्तर— राजनीतिक दल का अर्थ-राजनीतिक दल को लोगों के एक ऐसे संगठित समूह के रूप में समझा जा सकता है जो चुनाव लड़ने और सरकार में राजनीतिक सत्ता हासिल करने के उद्देश्य से काम करता है तथा समाज के सामूहिक हित को ध्यान में रखकर कुछ नीतियाँ और कार्यक्रम तय करता है।
प्रश्न 5. किसी भी राजनीतिक दल के क्या गुण होते हैं?
उत्तर— एक राजनीतिक दल की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित होती हैं-
(1) संगठित समूह-एक राजनीतिक दल एक संगठित समूह होता है। संगठन के बिना वे एक राजनीतिक दल का रूप धारण नहीं कर सकते।
(2) मौलिक सिद्धान्तों पर समझौता-इसके सदस्य एक जैसे कार्यक्रम पर विश्वास रखते हैं तथा उन पर सहमत भी होते हैं। ये प्रत्येक स्तर पर उन कार्यक्रमों को ऊपर ही रखते हैं। उनका एक चुनाव चिह्न होता है।
(3) शान्तिपूर्ण तथा संवैधानिक साधनों में विश्वास-राजनीतिक दल के सदस्य अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए शान्तिपूर्ण तथा संवैधानिक साधनों में विश्वास रखते हैं।
(4) राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता-प्रत्येक राजनीतिक दल सदैव राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है।
(5) सत्ता प्राप्त करने का एकमात्र उद्देश्य-राजनीतिक दल चुनाव जीतकर सत्ता में भागीदारी करते हैं।
प्रश्न 6. चुनाव लड़ने और सरकार में सत्ता संभालने के लिए एकजुट हुए लोगों के समूह को ............. कहते हैं। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— राजनीतिक दल।
प्रश्न 7. पहली सूची (संगठन/दल) और दूसरी सूची (गठबंधन/मोर्चा) के नामों का मिलान करें और नीचे दिए गए कूट नामों के आधार पर सही उत्तर ढूँढें-
सूची-I | सूची-II |
1. इंडियन नेशनल कांग्रेस | (क) राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबंधन |
2. भारतीय जनता पार्टी | (ख) क्षेत्रीय दल |
3. कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) | (ग) संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन |
4. तेलुगुदेशम पार्टी | (घ) वाम मोर्चा |
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सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान) कक्षा X | 315
1 | 2 | 3 | 4 | |
(क) | ग | क | ख | घ |
(ख) | ग | घ | क | ख |
(ग) | ग | क | घ | ख |
(घ) | घ | ग | क | ख |
उत्तर—(ग) ग क घ ख
प्रश्न 8. इनमें से कौन बहुजन समाज पार्टी का संस्थापक है? (प्रश्न बैंक; माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)
(क) कांशीराम
(ख) साहू महाराज
(ग) बी.आर. अम्बेडकर
(घ) ज्योतिबा फुले।
उत्तर—(क) कांशीराम।
प्रश्न 9. भारतीय जनता पार्टी का मुख्य प्रेरक सिद्धान्त क्या है? (प्रश्न बैंक)
(अ) बहुजन समाज
(ब) क्रान्तिकारी लोकतन्त्र
(स) समग्र मानवतावाद
(द) आधुनिकता।
उत्तर—(स) समग्र मानवतावाद।
प्रश्न 10. पार्टियों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर गौर करें :
(अ) राजनीतिक दलों पर लोगों का ज्यादा भरोसा नहीं है।
(ब) दलों में अक्सर बड़े नेताओं के घोटालों की गूँज सुनाई देती है।
(स) सरकार चलाने के लिए पार्टियों का होना जरूरी नहीं।
इन कथनों में से कौन सही है?
(क) अ, ब और स
(ख) अ और ब
(ग) ब और स
(घ) अ और स।
उत्तर—(ख) अ और ब सही हैं।
प्रश्न 11. निम्नलिखित उद्धरण को पढ़ें और नीचे दिए गए प्रश्नों का जवाब दें :
मोहम्मद युनुस बांग्लादेश के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री हैं। गरीबों के आर्थिक और सामाजिक विकास के प्रयासों के लिए उन्हें अनेक अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं। उन्हें और उनके द्वारा स्थापित ग्रामीण बैंक को संयुक्त रूप से वर्ष 2006 का नोबेल शान्ति पुरस्कार दिया गया। फरवरी 2007 में उन्होंने एक राजनीतिक दल बनाने और संसदीय चुनाव लड़ने का फैसला किया। उनका उद्देश्य सही नेतृत्व को उभारना, अच्छा शासन देना और नए बांग्लादेश का निर्माण करना है। उन्हें लगता है कि पारम्परिक दलों से अलग एक नए राजनीतिक दल से ही नई राजनीतिक संस्कृति पैदा हो सकती है। उनका दल निचले स्तर से लेकर ऊपर तक लोकतान्त्रिक होगा।
नागरिक शक्ति नामक इस नये दल के गठन से बांग्लादेश में हलचल मच गई है। उनके फैसले को काफी लोगों ने पसन्द किया तो अनेक को यह अच्छा नहीं लगा। एक सरकारी अधिकारी शाहेदुल इस्लाम ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि अब बांग्लादेश में अच्छे और बुरे के बीच चुनाव करना सम्भव हो गया है। अब एक अच्छी सरकार की उम्मीद की जा सकती है। यह सरकार न केवल भ्रष्टाचार से दूर रहेगी बल्कि भ्रष्टाचार और काले धन की समाप्ति को भी अपनी प्राथमिकता बनाएगी।’’
पर दशकों से मुल्क की राजनीति में रुतबा रखने वाले पुराने दलों के नेताओं में संशय है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के एक बड़े नेता का कहना है : ‘‘नोबेल पुरस्कार जीतने पर क्या बहस हो सकती है पर राजनीति एकदम अलग चीज़ है। एकदम चुनौती भरी और अक्सर विवादास्पद।’’ कुछ अन्य लोगों का स्वर और कड़ा था। वे उनके राजनीति में आने पर सवाल उठाने लगे। एक राजनीतिक प्रेक्षक ने कहा, ‘‘देश से बाहर की ताकतें उन्हें राजनीति पर थोप रही हैं।’’
क्या आपको लगता है कि युनुस ने नयी राजनीतिक पार्टी बनाकर ठीक किया?
क्या आप विभिन्न लोगों द्वारा जारी बयानों और अंदेशों से सहमत हैं? इस पार्टी को दूसरों से अलग काम करने के लिए खुद को किस तरह संगठित करना चाहिए? अगर आप इस राजनीतिक दल के संस्थापकों में एक होते तो इसके पक्ष में क्या दलील देते?
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उत्तर—(i) हाँ, मेरे विचार से मोहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश में एक नई राजनीतिक पार्टी बनाकर ठीक किया है।
(ii) हाँ, मैं सभी प्रगतिशील लोकतांत्रिक जनता की भलाई के लिए किए गए उन लोगों के बयानों और संदेशों से सहमत हूँ जो किसी-न-किसी रूप में यूनुस के कार्यक्रम से सहमत हैं।
(iii) इस राजनैतिक दल को सभी लोगों के हित में काम करना चाहिए तथा ऐसी नीतियाँ बनानी चाहिए, जो सभी लोगों के हित में हों।
(iv) यदि मैं इस दल के संस्थापकों में से होता तो मैं लोगों को यह विश्वास दिलाने का प्रयत्न करता कि इस दल का उद्देश्य जनता की भलाई करना है। इस दल का स्वरूप नीचे से लेकर ऊपर तक लोकतान्त्रिक होगा।
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📝 2. नोट्स: पाठ-सार, मुख्य बिंदु एवं शब्दावली
महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं, भौगोलिक परिभाषाएं, राजनीतिक सिद्धांत एवं संपूर्ण अध्याय का सारगर्भित सारांश।
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पाठ-सार
राजनीतिक दल का अर्थ- राजनीतिक दल लोगों का एक ऐसा संगठित समूह होता है जो चुनाव लड़ने और सरकार में राजनीतिक सत्ता प्राप्त करने के उद्देश्य से काम करता है तथा समाज के सामूहिक हित को ध्यान में रखकर कुछ नीतियाँ और कार्यक्रम तय करता है। इसी आधार पर दल लोगों को यह समझाने का प्रयास करते हैं कि उनकी नीतियाँ औरों से बेहतर हैं। इस प्रकार दण्ड किसी समाज के बुनियादी राजनीतिक विभाजन को भी दर्शाते हैं। किसी दल की पहचान उसकी नीतियों और सामाजिक आधार से तय होती है। राजनीतिक दल के तीन प्रमुख हिस्से हैं-(i) नेता (ii) सक्रिय सदस्य और (iii) अनुयायी का समर्थक।
राजनीतिक दल के कार्य-
(1) दल चुनाव लड़ते हैं।
(2) वे अलग-अलग नीतियों और कार्यक्रमों को मतदाताओं के सामने रखते हैं।
(3) दल कानून निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
(4) दल ही सरकार बनाते और चलाते हैं।
(5) विपक्षी दल शासक दल के विरोधी पक्ष की भूमिका निभाते हैं।
(6) जनमत निर्माण में दल महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
(7) वे सरकार के कल्याण कार्यक्रमों को लोगों तक पहुँचाते हैं।
राजनीतिक दल की आवश्यकता- राजनीतिक दल लोकतंत्र की एक अनिवार्य शर्त है। राजनीतिक दलों की आवश्यकता निम्न कार्यों के लिए है-
(1) देश चलाने का उत्तरदायित्व निभाने हेतु।
(2) विभिन्न मुद्दों पर अलग-अलग विचारों को सामने लाने हेतु।
(3) विभिन्न मुद्दों पर अलग-अलग विचारों को सरकार तक पहुँचाने हेतु।
(4) ये जिम्मेदार सरकार का गठन करते हैं।
(5) ये सरकार पर अंकुश रखते हैं।
कितने राजनीतिक दल- लोकतंत्र में नागरिकों का कोई भी समूह राजनैतिक दल बना सकता है। इस अर्थ में सभी देशों में बहुत से राजनैतिक दल हैं। भारत में ही चुनाव आयोग में नाम पंजीकृत कराने वाले दलों की संख्या 750 से ज्यादा है। लेकिन हर दल चुनाव में गंभीर चुनौती देने की स्थिति में नहीं होता। चुनावी होड़ में कितनी पार्टियाँ गंभीर रूप से सक्रिय हैं, इस आधार पर विश्व में तीन प्रकार की दलीय व्यवस्था पाई जाती है-
(1) एकदलीय व्यवस्था- जिस देश में केवल एक ही दल को सरकार बनाने और चलाने की अनुमति होती है, उसे एकदलीय शासन व्यवस्था कहा जाता है। जैसे-चीन में केवल कम्युनिस्ट पार्टी को ही शासन करने की अनुमति है। हम एकदलीय व्यवस्था को अच्छा विकल्प नहीं मान सकते क्योंकि यह लोकतांत्रिक विकल्प नहीं है।
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सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान) कक्षा X 311
(2) द्विदलीय व्यवस्था- कुछ देशों में सत्ता आमतौर पर दो मुख्य दलों के बीच ही बदलती रहती है। उसे द्विदलीय व्यवस्था कहते हैं। अमेरिका और ब्रिटेन में ऐसी ही द्विदलीय व्यवस्था है।
(3) बहुदलीय व्यवस्था- जब अनेक दल सत्ता के लिए होड़ में हों और दो दलों से ज्यादा दलों के लिए अपने दम पर या दूसरों से गठबंधन करके सत्ता में आने का ठीक-ठीक अवसर हो तो उसे बहुदलीय व्यवस्था कहते हैं। भारत में ऐसी ही बहुदलीय व्यवस्था है। अक्सर बहुदलीय व्यवस्था बहुत घालमेल वाली लगती है और देश को राजनीतिक अस्थिरता की तरफ ले जाती है, पर इसके साथ ही इसमें विभिन्न हितों और विचारों को राजनैतिक प्रभुत्व मिल जाता है।
हर देश अपनी विशेष परिस्थितियों के अनुरूप दलीय व्यवस्था विकसित करता है और इसमें समाज की प्रकृति, इसके राजनैतिक विभाजन, राजनीति का इतिहास और इसकी चुनाव प्रणाली अपनी-अपनी भूमिका निभाती हैं।
भारत में राजनीतिक दल- भारत में बहुदलीय व्यवस्था है। यहाँ बहुदलीय व्यवस्था होने का कारण यह है कि दो-तीन पार्टियाँ इतने बड़े मुल्क की सारी सामाजिक और भौगोलिक विविधताओं को समेट पाने में अक्षम हैं। यहाँ दो तरह के राजनीतिक दल हैं-(1) राष्ट्रीय राजनीतिक दल (2) क्षेत्रीय राजनीतिक दल। यथा-
राष्ट्रीय राजनीतिक दल- चुनाव आयोग के नियम के अनुसार अगर कोई दल लोकसभा चुनाव में पड़े कुल वोट का अथवा चार राज्यों के विधानसभा चुनाव में पड़े कुल वोटों का 6 प्रतिशत हासिल करता है और लोकसभा के चुनाव में कम-से-कम चार सीटों पर जीत दर्ज करता है तो उसे राष्ट्रीय दल की मान्यता मिलती है।
इस हिसाब से सन् 2019¹ में भारत में सात दल राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त थे। ये हैं-(1) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, (2) भारतीय जनता पार्टी, (3) बहुजन समाज पार्टी, (4) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी (सीपीआई-एम), (5) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सी.पी.आई.) तथा (6) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी तथा (7) ऑल इण्डिया तृणमूल कांग्रेस।
क्षेत्रीय दल- जब कोई पार्टी राज्य विधानसभा के चुनाव में पड़े कुल मतों का 6 प्रतिशत या उससे अधिक हासिल करती है और कम से कम दो सीटों पर जीत दर्ज करती है तो उसे अपने राज्य के राजनीतिक दल के रूप में मान्यता मिल जाती है। इन्हें प्रायः 'प्रांतीय दल' या 'क्षेत्रीय दल' कहा जाता है। 13 अप्रैल, 2018 के अनुसार इनमें प्रमुख हैं-समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, बीजू जनता दल, सिक्किम लोकतान्त्रिक मोर्चा, मिजो नेशनल फ्रंट, झारखण्ड मुक्ति मोर्चा, इण्डियन नेशनल लोकदल, जम्मू एण्ड कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम, अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम, तेलुगुदेशम पार्टी, केरल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, शिव सेना, असम गण परिषद आदि।
राजनीतिक दलों के लिए चुनौतियाँ- राजनीतिक दलों की प्रमुख चुनौतियाँ ये हैं-
(1) पार्टी के भीतर आन्तरिक लोकतन्त्र का न होना,
(2) वंशवाद की चुनौती,
(3) दलों में पैसा और अपराधी तत्वों की बढ़ती घुसपैठ,
(4) सार्थक विकल्पहीनता की चुनौती।
दलों को कैसे सुधारा जाए- उपर्युक्त चुनौतियों का सामना करने के लिए जरूरी है कि राजनीतिक दलों में सुधार हो। भारत में राजनैतिक दलों और उसके नेताओं के सुधार हेतु निम्न प्रयास किये गये हैं-
(1) विधायकों और सांसदों को दल-बदल करने से रोकने के लिए संविधान में संशोधन किया गया।
(2) उम्मीदवारों से अपनी संपत्ति का और अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों का ब्यौरा एक शपथ-पत्र के रूप में लिया जाता है।
(3) सभी दलों के लिए सांगठनिक चुनाव कराना तथा आयकर रिटर्न भरना आवश्यक कर दिया गया है।
सुधार के सुझाव-
(1) राजनीतिक दलों के आन्तरिक काम-काज को व्यवस्थित करने के लिए कानून बनाया जाए।
(2) महिलाओं को आरक्षण दिया जाए।
(3) चुनाव का खर्च सरकार उठाये।
(4) राजनीतिक दलों पर लोगों द्वारा दबाव बनाया जाए।
(5) सुधार की इच्छा रखने वाले लोग स्वयं राजनीतिक दलों में शामिल हों।
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1. समय-समय पर होने वाले विभिन्न चुनावों में राजनीतिक दलों को प्राप्त मतों एवं सीटों के आधार पर चुनाव आयोग उन्हें राष्ट्रीय राजनीतिक दल अथवा क्षेत्रीय राजनीतिक दल की मान्यता प्रदान करता है।
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⭐ 3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर एवं बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक, लघूत्तरात्मक एवं निबंधात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
● बहुविकल्पीय प्रश्न-
1. लोगों का वह समूह जो सत्ता प्राप्त करने के उद्देश्य से समान विचारधारा के आधार पर एक संगठन बनाता है, कहलाता है-
(अ) राजनीतिक दल (ब) दबाव-समूह (स) लोककल्याण समूह (द) हित-समूह
2. निम्न में से जो राजनीतिक दल का कार्य है, वह है-
(अ) सरकारी अधिकारियों से साँठ-गाँठ करना।
(ब) मन्त्रियों और उद्योगपतियों के बीच सौदा तय कराना।
(स) चुनाव लड़ना। (द) बिना चुनाव लड़े सरकार पर दबाव डालना।
3. राजनीतिक दल जो सरकार बनाता है, कहलाता है- (प्रश्न बैंक)
(अ) विरोधी दल (ब) सत्ताधारी दल (स) छाया दल (द) इनमें से कोई नहीं
4. निम्न में से किस देश में एकदलीय व्यवस्था है?
(अ) संयुक्त राज्य अमेरिका (ब) भारत (स) ग्रेट ब्रिटेन (द) चीन
5. निम्न में से किस देश में द्विदलीय व्यवस्था है?
(अ) भारत (ब) फ्रांस (स) संयुक्त राज्य अमेरिका (द) पाकिस्तान
6. राजनीतिक दल का प्रमुख हिस्सा हैं-
(अ) नेता (ब) सक्रिय सदस्य (स) अनुयायी/समर्थक (द) उपर्युक्त सभी
7. भारत में कौनसी दलीय व्यवस्था है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)
अथवा
भारतीय लोकतंत्र में दलीय व्यवस्था है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)
(अ) एक दलीय (ब) दो दलीय (स) बहुदलीय (द) इनमें से कोई नहीं
8. वर्ष 2019 में देश में कितने दल राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त थे? (प्रश्न बैंक)
(अ) 7 (ब) 6 (स) 5 (द) 4
9. भारत में राजनीतिक दलों का पंजीकरण तथा उन्हें मान्यता प्रदान करने वाली संस्था कौनसी है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)
अथवा
राजनीतिक दलों का पंजीकरण और मान्यता कौन प्रदान करता है? (प्रश्न बैंक)
अथवा
निम्न में से कौन राजनीतिक दलों को मान्यता देता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)
(अ) विधि आयोग (ब) अल्पसंख्यक आयोग (स) चुनाव (निर्वाचन) आयोग (द) राष्ट्रीय महिला आयोग
10. ऑल इण्डिया तृणमूल कांग्रेस का निर्माण किसके नेतृत्व में हुआ?
(अ) मायावती (ब) जयललिता (स) ममता बनर्जी (द) सोनिया गाँधी
11. जब किसी बहुदलीय व्यवस्था में अनेक पार्टियाँ चुनाव लड़ने और सत्ता में आने के लिए आपस में हाथ मिला लेती हैं, तो इसे कहा जाता है-
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सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान) कक्षा X | 317
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(अ) प्रगतिशील दल | (ब) प्रगति विरोधी दल
(स) सत्तोनुख दल | (द) दलीय गठबंधन
12. निम्नलिखित में से कौनसा राजनीतिक दल राष्ट्रीय दल है?
(अ) द्रविड़ मुनेत्र कषगम | (ब) समाजवादी दल | (स) बहुजन समाज पार्टी | (द) बीजू जनता दल
13. जिस दल का शासन हो उसे कहते हैं-
(अ) विपक्षी दल | (ब) शासक दल | (स) लोकतांत्रिक दल | (द) प्रगतिशील दल
14. पूरे देश में फैली हुई पार्टी कहलाती है-
(अ) राष्ट्रीय पार्टी | (ब) क्षेत्रीय पार्टी
(स) (अ) और (ब) दोनों | (द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
15. भारत में निम्न में से कौनसा राष्ट्रीय दल नहीं है?
(अ) भाजपा | (ब) इण्डियन नेशनल कांग्रेस
(स) बहुजन समाज पार्टी | (द) द्रविड़ मुनेत्र कड़गम
16. भारत में निम्न में से कौनसा क्षेत्रीय दल नहीं है?
(अ) महाराष्ट्रवादी गोमान्तक पार्टी | (ब) शिव सेना
(स) भारतीय जनता पार्टी | (द) शिरोमणि अकाली दल
17. दुनिया के सबसे पुराने राजनैतिक दलों में से एक है-
(अ) भारतीय जनता पार्टी | (ब) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी
(स) बहुजन समाज पार्टी | (द) कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इण्डिया (सी.पी.आई.)
18. निम्न में से क्या राजनीतिक दलों के लिए चुनौती नहीं है?
(अ) पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र का न होना | (ब) वंशवाद
(स) पैसा और आपराधिक तत्वों का गठजोड़ | (द) सार्थक विकल्प का होना।
19. भारत में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इण्डिया-मार्क्सिस्ट (सी.पी.आई.-एम) का गठन हुआ-
(अ) 1885 में | (ब) 1925 में | (स) 1964 में | (द) 1999 में
20. कम्युनिस्ट पार्टी की विशेषता है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)
(अ) सामाजिक असमानता
(ब) आर्थिक सुधार अपनाती है पर राजनैतिक सत्ता पर एकाधिकार बनाए रखती है
(स) आर्थिक असमानता | (द) राजतंत्र का समर्थन
21. निम्न में कौन जनमत निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है?
(अ) राष्ट्रपति | (ब) सरपंच | (स) मुख्यमंत्री | (द) राजनीतिक दल
22. चीन में शासन करने वाली अकेली पार्टी का नाम है-
(अ) सोशलिस्ट पार्टी | (ब) बोल्शेविक पार्टी | (स) कम्युनिस्ट पार्टी | (द) कांग्रेस पार्टी
23. निम्न में जो बिहार राज्य की क्षेत्रीय पार्टी नहीं है, वह है-
(अ) जनता दल (यू) | (ब) राष्ट्रीय जनता दल | (स) लोक जनशक्ति पार्टी | (द) आम आदमी पार्टी
24. राजनीतिक दलों में सुधार के लिए संविधान संशोधन किया गया है-
(अ) दल-बदल रोकने के लिए
(ब) उम्मीदवारों को अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मुकदमों का ब्यौरा देने के लिए
(स) सभी दलों के सांगठनिक चुनाव कराने के लिए | (द) चुनाव का खर्च सरकार द्वारा उठाने के लिए
25. ऑल इण्डिया तृणमूल कांग्रेस पार्टी का निर्माण हुआ- (प्रश्न बैंक)
(अ) 1996 | (ब) 1997 | (स) 1998 | (द) 1999
26. निम्न में से कौन-सा दल 'राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबन्धन' का हिस्सा है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)
(अ) भारतीय जनता पार्टी | (ब) इण्डियन नेशनल कांग्रेस
(स) कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इण्डिया | (द) आम आदमी पार्टी
27. बहुजन समाज पार्टी का गठन हुआ- (प्रश्न बैंक)
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(अ) 1981 (ब) 1982 (स) 1983 (द) 1984
28. राजनीतिक दल के कितने प्रमुख हिस्से हैं- (प्रश्न बैंक)
(अ) 1 (ब) 2 (स) 3 (द) 4
29. भारतीय जनता पार्टी (जनसंघ) का गठन हुआ- (प्रश्न बैंक)
(अ) 1949 (ब) 1950 (स) 1951 (द) 1952
उत्तरमाला
1. (अ) 2. (स) 3. (ब) 4. (द) 5. (स) 6. (द) 7. (स)
8. (अ) 9. (स) 10. (स) 11. (द) 12. (स) 13. (ब) 14. (अ)
15. (द) 16. (स) 17. (ब) 18. (द) 19. (स) 20. (ब) 21. (द)
22. (स) 23. (द) 24. (अ) 25. (स) 26. (अ) 27. (द) 28. (स)
29. (स)।
● रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
1. अधिकतर लोग आम तौर पर राजनीतिक दलों के बारे में ......... राय रखते हैं।
2. अमेरिका जैसे कुछ देशों में .......... का चुनाव दल के सदस्य और समर्थक करते हैं।
3. पुराने भारतीय जनसंघ को पुनर्जीवित कर 1980 में .......... पार्टी बनी।
4. 2019 के लोकसभा चुनाव में इंडियन नेशनल काँग्रेस पार्टी को ......... सीटें मिलीं।
5. विधायकों और सांसदों को .......... करने से रोकने के लिए संविधान में संशोधन किया गया।
6. 2019 में हुए लोकसभा के चुनाव में ............. 303 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी।
7. राजनीतिक दल किसी समाज के बुनियादी राजनीतिक ............. को दर्शाते हैं।
8. अधिकांश लोकतांत्रिक देशों में ............. राजनीतिक दलों द्वारा खड़े किए गए उम्मीदवारों के बीच लड़ा जाता है।
9. अधिकतर आम नागरिकों के लिए लोकतंत्र का मतलब ................. ही है।
10. राजनीतिक दल अलग-अलग नीतियों और कार्यक्रमों को ................. के सामने रखते हैं।
11. शिरोमणि अकाली दल का सम्बन्ध मुख्यतः ................. राज्य से है।
(माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)
12. राजनीतिक दल के ............. प्रमुख हिस्से हैं। (प्रश्न बैंक)
13. सामूहिक हित एक ............. विचार है। (प्रश्न बैंक)
14. पार्टियाँ देश के कानून निर्माण में ............. भूमिका निभाती हैं। (प्रश्न बैंक)
15. बड़े फैसलों के मामले में निर्णय ............. ही लेते हैं। (प्रश्न बैंक)
उत्तरमाला
1. खराब 2. उम्मीदवार 3. भारतीय जनता 4. 52 5. दल-बदल
6. भारतीय जनता पार्टी 7. विभाजन 8. चुनाव 9. राजनीतिक दल 10. मतदाताओं
11. पंजाब 12. तीन 13. विवादास्पद 14. महत्त्वपूर्ण 15. राजनेता
● अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. किसी दल की पहचान किससे तय होती है?
उत्तर— किसी दल की पहचान उसकी नीतियों और उसके सामाजिक आधार से तय होती है।
प्रश्न 2. शासक दल से क्या आशय है?
उत्तर— जिस दल का शासन हो या जिस दल की सरकार बनी हो, उसे शासक दल कहते हैं।
प्रश्न 3. नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी कब बनी? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— कांग्रेस पार्टी में विभाजन के बाद 1999 में यह पार्टी बनी।
प्रश्न 4. राजनीतिक दल के प्रमुख हिस्सों के नाम लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— राजनीतिक दल के तीन प्रमुख हिस्से होते हैं-
(i) नेता, (ii) सक्रिय सदस्य और (iii) अनुयायी या समर्थक।
प्रश्न 5. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (इंडियन नेशनल कांग्रेस) की स्थापना कब हुई? (प्रश्न बैंक)
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सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान) कक्षा X 319
उत्तर—भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (इंडियन नेशनल कांग्रेस) की स्थापना सन् 1885 में हुई।
प्रश्न 6. संयुक्त राज्य अमेरिका में किस प्रकार की दलीय व्यवस्था है?
उत्तर—संयुक्त राज्य अमेरिका में द्विदलीय राजनीतिक व्यवस्था है।
प्रश्न 7. क्षेत्रीय दल क्या हैं? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)
अथवा
क्षेत्रीय पार्टी से आप क्या समझते हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर—संघीय इकाइयों में से सिर्फ एक इकाई में अस्तित्व रखने वाले राजनैतिक दल को क्षेत्रीय राजनैतिक दल या क्षेत्रीय पार्टी कहते हैं।
प्रश्न 8. भारत के किन्हीं दो क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के नाम लिखिए।
उत्तर—(1) द्रविड़ मुनेत्र कड़गम, (2) अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम।
प्रश्न 9. राजनीतिक दल की परिभाषा दीजिए।
अथवा
राजनीतिक दल का क्या अभिप्राय है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर—राजनीतिक दल लोगों का एक ऐसा राजनैतिक संगठित समूह है जो संवैधानिक उपायों द्वारा सत्ता प्राप्त करने के लिए प्रयत्नशील रहता है।
प्रश्न 10. बहुजन समाज पार्टी के प्रेरणा स्रोतों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर—बहुजन समाज पार्टी के प्रेरणा स्रोत महात्मा फुले, पेरियार, रामास्वामी तथा डॉ. अम्बेडकर हैं।
प्रश्न 11. एक राजनीतिक दल के तत्वों के नाम लिखिए।
उत्तर—एक राजनीतिक दल के तीन तत्त्व होते हैं। ये हैं-(1) नेतागण, (2) सक्रिय सदस्य और (3) समर्थक सदस्य।
प्रश्न 12. राजनीतिक दल के कोई दो कार्य लिखिए।
उत्तर—राजनीतिक दल के दो प्रमुख कार्य हैं-(1) चुनाव लड़ना और (2) सरकार बनाना या विपक्ष की भूमिका निभाना।
प्रश्न 13. भारत में राजनीतिक दल उम्मीदवारों का चुनाव कैसे करते हैं?
उत्तर—भारत में राजनीतिक दलों के नेता ही चुनावों में उम्मीदवारों का चुनाव करते हैं।
प्रश्न 14. विपक्षी दल क्या करता है?
उत्तर—विपक्षी दल सरकार की गलत नीतियों और असफलताओं की आलोचना करते हुए अपनी राय को जनता के समक्ष रखता है।
प्रश्न 15. लोकतंत्र में राजनीतिक दल की क्या आवश्यकता है?
उत्तर—लोकतंत्र में जवाबदेही या उत्तरदायी सरकार हेतु राजनीतिक दलों की आवश्यकता है।
प्रश्न 16. एकदलीय व्यवस्था से आप क्या समझते हैं?
उत्तर—जब किसी देश में केवल एक ही दल को सरकार बनाने की अनुमति होती है तो उसे एकदलीय व्यवस्था कहते हैं।
प्रश्न 17. द्विदलीय व्यवस्था से क्या आशय है?
उत्तर—जहाँ सिर्फ दो ही दल सरकार बनाने के प्रबल दावेदार होते हैं, उसे द्विदलीय व्यवस्था कहते हैं।
प्रश्न 18. बहुदलीय व्यवस्था को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर—जब दो से अधिक दल सत्ता के लिए होड़ में हों तो उसे बहुदलीय व्यवस्था कहते हैं।
प्रश्न 19. गठबंधन या मोर्चा किसे कहते हैं?
उत्तर—जब किसी बहुदलीय व्यवस्था वाले लोकतांत्रिक राज्य में चुनाव लड़ने तथा सत्ता प्राप्ति हेतु अनेक राजनीतिक दल आपस में हाथ मिला लेते हैं, तो उसे गठबंधन या मोर्चा कहते हैं।
प्रश्न 20. विश्व के संघीय व्यवस्था वाले लोकतंत्रों में कितने तरह के राजनीतिक दल हैं?
उत्तर—विश्व के संघीय व्यवस्था वाले लोकतंत्रों में दो तरह के राजनीतिक दल हैं-(1) प्रान्त स्तरीय राजनीतिक दल और (2) राष्ट्रीय या संघीय राजनीतिक दल।
प्रश्न 21. हमारे देश में कितने राष्ट्रीय दल हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर—चुनाव आयोग के अनुसार भारत में 7 राष्ट्रीय दल (वर्ष 2019) हैं।
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प्रश्न 22. दो दलीय व्यवस्था वाले किन्हीं दो देशों के नाम बताइये। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— (1) अमेरिका (2) ब्रिटेन।
प्रश्न 23. भारतीय जनता पार्टी का संस्थापक कौन है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— श्यामा प्रसाद मुखर्जी।
प्रश्न 24. राजनीतिक पार्टियों का पंजीकरण कहाँ होता है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— भारत निर्वाचन आयोग में।
प्रश्न 25. शपथ-पत्र से आप क्या समझते हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— शपथ-पत्र किसी अधिकारी को दिया गया वह दस्तावेज होता है जिसमें कोई व्यक्ति अपने बारे में व्यक्तिगत सूचना देता है तथा उस सूचना के सही होने की शपथ उठाता है। शपथ-पत्र पर सूचना देने वाले व्यक्ति का हस्ताक्षर होता है।
प्रश्न 26. राष्ट्रीय राजनीतिक दल कौनसे दल कहलाते हैं?
अथवा
राष्ट्रीय पार्टी से आप क्या समझते हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— जो दल संघ की सभी इकाइयों में या अनेक इकाइयों में अपना अस्तित्व रखते हैं, उन्हें राष्ट्रीय राजनीतिक दल कहा जाता है। ये लगभग पूरे देश में फैले हुए रहते हैं।
प्रश्न 27. मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल से क्या आशय है?
उत्तर— चुनाव आयोग द्वारा पंजीकृत राजनीतिक दलों को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल कहते हैं।
प्रश्न 28. भारत के कोई चार राष्ट्रीय दलों (वर्ष 2019) के नाम लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— (1) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, (2) भारतीय जनता पार्टी (3) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (4) बहुजन समाज पार्टी।
प्रश्न 29. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की विचारधारा का उल्लेख कीजिए।
उत्तर— 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस' की विचारधारा में राष्ट्रवाद, धर्मनिरपेक्षता, कमजोर तथा अल्पसंख्यकों के हितों पर बल दिया जाता है।
प्रश्न 30. राजनीतिक दलों की दो प्रमुख चुनौतियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर— (1) राजनीतिक दलों के भीतर आन्तरिक लोकतंत्र नहीं है।
(2) राजनीतिक दल वंशवादी नेतृत्व की चुनौती झेल रहे हैं।
प्रश्न 31. राजनीतिक दलों में सुधार के लिए चुनाव आयोग के किसी एक कदम का उल्लेख कीजिए।
उत्तर— चुनाव आयोग ने सभी दलों के लिए सांगठनिक चुनाव कराना और आयकर रिटर्न भरना जरूरी बना दिया है।
प्रश्न 32. राजनीतिक दलों में सुधार के लिए कोई दो सुझाव दें।
उत्तर— (1) राजनीतिक दलों के आन्तरिक लोकतंत्र हेतु कानून बनाया जाये। (2) चुनाव का खर्च सरकार उठाये।
प्रश्न 33. राजनीतिक दलों में पक्षपात क्यों विकसित होते हैं?
उत्तर— जब राजनीतिक दल समाज के किसी एक वर्ग या हिस्से से सम्बन्धित होता है, तो उसका नजरिया समाज के उस वर्ग/समुदाय विशेष की तरफ ही झुका होता है।
प्रश्न 34. हमारे देश में चुनाव आयोग में नाम पंजीकृत कराने वाले दलों की संख्या कितनी है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— हमारे देश में चुनाव आयोग में नाम पंजीकृत कराने वाले दलों की संख्या 750 से ज्यादा है।
प्रश्न 35. अमेरिका व ब्रिटेन में कितने दलीय व्यवस्था है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— अमेरिका व ब्रिटेन में दो दलीय व्यवस्था है।
● लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. अधिकतर लोग आमतौर पर राजनीतिक दलों के बारे में क्या राय रखते हैं?
उत्तर— अधिकतर लोग आमतौर पर दलों के बारे में खराब राय रखते हैं।
(1) वे आमतौर पर अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था और राजनीतिक जीवन की हर बुराई के लिए दलों को ही जिम्मेदार मानते हैं।
(2) वे सामाजिक और राजनैतिक विभाजनों के लिए भी दलों को ही दोषी मानते हैं।
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सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान) कक्षा X 321
प्रश्न 2. राजनीतिक दल के कोई चार कार्य बताइए।
अथवा
राजनीतिक दल के कोई दो कार्यों की विवेचना कीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)
उत्तर— (1) राजनीतिक दल चुनाव लड़ते हैं तथा ये चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों का चयन करते हैं।
(2) ये अलग-अलग नीतियों एवं कार्यक्रमों को जनता के समक्ष रखते हैं।
(3) राजनैतिक दल सरकार बनाते व चलाते हैं।
(4) ये देश के कानून निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
प्रश्न 3. तब क्या होगा जब राजनीतिक दल नहीं होंगे?
उत्तर— अगर राजनीतिक दल नहीं होंगे तो चुनाव में प्रत्येक उम्मीदवार स्वतंत्र रूप से खड़ा हो जायेगा। कोई उम्मीदवार सरकार की नीति सम्बन्धी कोई वायदा जनता के सम्मुख नहीं कर पायेगा। वह केवल अपने क्षेत्र के कार्यों के प्रति ही जिम्मेदारी लेगा। कोई भी देश के प्रति उत्तरदायी नहीं होगा।
प्रश्न 4. राजनीतिक दल जनमत का निर्माण किस प्रकार करते हैं?
उत्तर— राजनीतिक दल मुद्दों को उठाते हैं और उन पर बहस करते हैं। विभिन्न दलों द्वारा विभिन्न समस्याओं के बारे में जनता के समक्ष जो अलग-अलग राय रखी जाती है, उन्हीं के इर्द-गिर्द ही समाज या जनता अपना जनमत बनाती है।
प्रश्न 5. राजनीतिक दल की विपक्ष की भूमिका को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
चुनाव हारने वाले दल की क्या भूमिका होती है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— विधायिका में बहुमत हासिल न कर पाने वाले राजनीतिक दल शासक दल के विरोधी पक्ष की भूमिका निभाते हैं। वे विधायिका में सत्ता पक्ष से प्रश्न पूछकर उन्हें कटघरे में खड़ा करते हैं तथा जनता के समक्ष जनसभाओं द्वारा जन-जागरूकता को बढ़ाते हैं तथा सरकार को नियन्त्रण में रखते हैं।
प्रश्न 6. साम्यवादी चीन में किस प्रकार की दलीय व्यवस्था है? समझाइये।
उत्तर— साम्यवादी चीन में एकदलीय राजनैतिक व्यवस्था है। वहाँ केवल साम्यवादी दल को ही शासन करने की अनुमति है। वहाँ चुनाव प्रणाली सत्ता के लिए स्वतन्त्र प्रतियोगिता की अनुमति नहीं देती। इसलिए कोई नया दल नहीं बन पाता है।
प्रश्न 7. दलीय गठबंधन या दलीय मोर्चा से क्या आशय है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर— जब किसी बहुदलीय व्यवस्था वाले देश में अनेक पार्टियाँ चुनाव लड़ने और सत्ता में आने के लिए आपस में हाथ मिला लेती हैं तो इसे दलीय गठबंधन या दलीय मोर्चा कहा जाता है। जैसे-2004 के संसदीय चुनाव में भारत में ऐसे तीन प्रमुख गठबंधन थे-(1) राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबंधन, (2) संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन तथा (3) वाम मोर्चा।
प्रश्न 8. बहुदलीय प्रणाली का एक गुण तथा एक दोष बताइए।
उत्तर— बहुदलीय प्रणाली का गुण-इसमें विभिन्न हितों और विचारों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल जाता है।
दोष-अक्सर बहुदलीय प्रणाली देश को राजनीतिक अस्थिरता की तरफ ले जाती है।
प्रश्न 9. बहुदलीय व्यवस्था किसे कहते हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— जब कई दल सत्ता की प्राप्ति के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हों और दो दलों से ज्यादा के लिए अपने दम पर या दूसरे दलों से गठबंधन करके सत्ता में आने का अवसर हो, तब इस व्यवस्था को ही बहुदलीय व्यवस्था कहते हैं।
प्रश्न 10. राष्ट्रीय दल की मान्यता के मापदण्ड क्या हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— जब कोई दल लोकसभा चुनाव में पड़े कुल वोटों का अथवा चार राज्यों के विधानसभा में पड़े कुल वोटों का छह प्रतिशत वोट प्राप्त करता है और लोकसभा के चुनाव में कम से कम चार सीट पर जीत हासिल करता है तब उसे राष्ट्रीय दल की मान्यता प्राप्त होती है।
प्रश्न 11. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर— भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना सन् 1885 में हुई। तब से लेकर अब तक इस दल में कई बार विभाजन हुए हैं। इस दल की प्रमुख नीतियाँ हैं-उदारवादी आर्थिक नीतियाँ, मध्यम मार्ग, धर्मनिरपेक्षता, कमजोर वर्गों और अल्पसंख्यक वर्गों के हितों की रक्षा।
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प्रश्न 12. बहुजन समाज पार्टी पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर— बहुजन समाज पार्टी-बहुजन समाज पार्टी का गठन स्व. कांशीराम के नेतृत्व में सन् 1984 में हुआ। वर्तमान में मायावती इसकी नेता है। यह बहुजन समाज, जिसमें दलित, आदिवासी, पिछड़ी जातियाँ और धार्मिक अल्पसंख्यक शामिल हैं, के लिए राजनैतिक सत्ता हेतु प्रयासरत है। इस पार्टी का मुख्य आधार उत्तर प्रदेश में है।
प्रश्न 13. राजनीतिक दल की वंशवाद की चुनौती से क्या आशय है?
अथवा
'राजनीतिक दलों के समक्ष वंशवाद एक बड़ी चुनौती है।' इस कथन पर अपना मत स्पष्ट कीजिए।
(माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)
उत्तर— वंशवाद की चुनौती से यह आशय है कि अनेक दलों में शीर्ष पद पर हमेशा एक ही परिवार के लोग आते हैं। यह दल के अन्य सदस्यों के साथ अन्याय है। इससे अनुभवहीन और बिना जनाधार वाले लोग ताकत वाले पदों पर पहुँच जाते हैं। यह प्रवृत्ति लगभग पूरे विश्व के राजनीतिक दलों में विद्यमान है।
प्रश्न 14. राजनीतिक दलों के बीच विकल्पहीनता की स्थिति की चुनौती को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर— सार्थक विकल्प का मतलब होता है कि विभिन्न पार्टियों की नीतियों और कार्यक्रमों में महत्त्वपूर्ण अन्तर हो। हाल के वर्षों में दलों के बीच यह वैचारिक अन्तर कम होता गया है और यह प्रवृत्ति दुनिया भर में दिखती है। अतः जो लोग इससे अलग नीतियाँ चाहते हैं उनके लिए कोई विकल्प उपलब्ध नहीं है।
प्रश्न 15. विश्व के संघीय व्यवस्था वाले लोकतंत्रों में कितने तरह के राजनीतिक दल हैं?
उत्तर— विश्व के संघीय व्यवस्था वाले देशों में दो तरह के राजनीतिक दल हैं-
(1) संघीय इकाइयों में से सिर्फ एक इकाई में अस्तित्व रखने वाले दल। इन्हें क्षेत्रीय दल कहा जाता है।
(2) अनेक इकाइयों या संघ की इकाइयों में अस्तित्व रखने वाले दल। इन्हें राष्ट्रीय दल कहा जाता है।
प्रश्न 16. राजनीतिक दलों में सुधार के कोई दो बिन्दुओं का उल्लेख करें।
(माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)
उत्तर— राजनीतिक दलों में सुधार के उपाय-
(1) राजनीतिक दलों के नियमित संगठनात्मक चुनाव अनिवार्य करवाए जाएँ।
(2) राजनीतिक दलों के लिए आयकर की रिटर्न भरना अनिवार्य किया जाए।
प्रश्न 17. शासक दल से आप क्या समझते हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— जो भी राजनीतिक दल या गठबंधन देश में सरकार बनाता है और उसे संचालित करता है, उसे शासक दल या सत्तारूढ़ दल कहते हैं। शासक दल, देश के लिए कानून बनाता है और देश के भावी विकास की नीतियाँ तय करता है।
● दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-
प्रश्न 1. नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी की प्रमुख बातें बतलाइये।
उत्तर— (1) नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी वर्ष 1999 में कांग्रेस पार्टी के विभाजन से बनी।
(2) यह पार्टी भारत की एक राष्ट्रीय पार्टी है।
(3) घड़ी इस पार्टी का चुनाव चिन्ह है।
(4) यह पार्टी लोकतंत्र, गांधीवादी धर्मनिरपेक्षता, समता, सामाजिक न्याय और संघवाद में आस्था रखती है।
(5) यह पार्टी सरकार के प्रमुख पदों को सिर्फ भारत में जन्मे नागरिकों के लिए आरक्षित करना चाहती है।
(6) यह दल महाराष्ट्र में प्रमुख ताकत होने के साथ ही यह मेघालय, मणिपुर और असम में भी ताकतवर है।
(7) 2019 के लोकसभा चुनाव में इसने 1.4 प्रतिशत वोट तथा 5 सीटें प्राप्त कीं।
प्रश्न 2. भारत में राजनीतिक दलों के सम्बन्ध में चुनाव आयोग की क्या भूमिका है?
उत्तर— भारत में हर राजनीतिक दल को चुनाव आयोग में अपना पंजीकरण कराना पड़ता है। आयोग सभी दलों को समान मानता है पर बड़े और स्थापित दलों को कुछ विशेष सुविधाएँ देता है। इन्हें अलग चुनाव चिह्न दिया जाता है जिसका प्रयोग पार्टी का अधिकृत उम्मीदवार ही कर सकता है। इस विशेषाधिकार और कुछ अन्य लाभ पाने वाली पार्टियों को 'मान्यता प्राप्त' दल कहते हैं। चुनाव आयोग ने स्पष्ट नियम बनाये हैं कि कोई दल कितने प्रतिशत वोट पाकर और सीट जीतकर मान्यता प्राप्त दल बन सकता है।
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सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान) कक्षा X 323
प्रश्न 3. भारत के राजनीतिक दलों के समक्ष तीन चुनौतियाँ और तीन सुधारात्मक उपाय सुझाइए।
उत्तर— भारत के राजनीतिक दलों के समक्ष तीन प्रमुख चुनौतियाँ ये हैं-
(1) दलों के भीतर आंतरिक लोकतंत्र का न होना।
(2) वंशवाद की चुनौती।
(3) पैसा और अपराधी तत्वों की राजनैतिक दलों में बढ़ती घुसपैठ।
तीन सुधारात्मक उपाय—
(1) राजनीतिक दलों के नियमित संगठनात्मक चुनाव अनिवार्य करवाये जाएँ।
(2) सरकार द्वारा चुनाव का खर्चा वहन किया जाए।
(3) राजनीतिक दलों के लिए आयकर की रिटर्न भरना अनिवार्य किया जाए।
प्रश्न 4. मान्यता प्राप्त दल से आपका क्या अभिप्राय है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— चुनाव में भाग लेने हेतु सभी पार्टी को निर्वाचन आयोग में अपना पंजीकरण करवाना होता है। जिनमें से कुछ बड़े एवं स्थापित दलों को आयोग विशेष सुविधाएँ देता है। इन्हें अलग चुनाव चिह्न दिया जाता है, जिसका प्रयोग पार्टी द्वारा अधिकृत उम्मीदवार ही कर सकता है। इस विशेषाधिकार और अन्य लाभ प्राप्त करने वाली पार्टियाँ 'मान्यता प्राप्त दल' कहलाती हैं।
जब कोई पार्टी विधानसभा के चुनाव में 6 फीसदी या उससे ज्यादा मत प्राप्त करती है और कम से कम दो सीटों पर जीत दर्ज करती है तो उसे उस राज्य की राजनीतिक पार्टी की मान्यता मिल जाती है। वहीं अगर किसी पार्टी को लोकसभा चुनाव या चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में पड़े कुल मतों का 6 फीसदी हासिल हो जाता है और लोकसभा की चार सीटें भी मिल जाती हैं तो वह पार्टी राष्ट्रीय दल की मान्यता प्राप्त करती है।
प्रश्न 5. भारत में सन् 2019 के अनुसार कितने मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय दल हैं? उनके नाम लिखिए।
उत्तर— वर्ष 2019 के अनुसार भारत में मान्यता प्राप्त सात राष्ट्रीय दल हैं। इनके नाम निम्न प्रकार हैं-
(1) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
(2) भारतीय जनता पार्टी
(3) बहुजन समाज पार्टी
(4) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी (सी.पी.आई.-एम.)
(5) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सी.पी.आई.)
(6) भारतीय राष्ट्रवादी कांग्रेस
(7) ऑल इण्डिया तृणमूल कांग्रेस।
प्रश्न 6. क्षेत्रीय राजनैतिक दल से क्या अभिप्राय है? क्षेत्रीय राजनैतिक दल की मान्यता प्राप्त करने के लिए आवश्यक शर्तों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर— क्षेत्रीय राजनैतिक दल से आशय-संघीय इकाइयों में से सिर्फ एक इकाई में अस्तित्व रखने वाले राजनैतिक दल को क्षेत्रीय राजनैतिक दल कहा जाता है। इसे राज्यीय या प्रान्तीय दल भी कहते हैं।
क्षेत्रीय राजनैतिक दल की मान्यता प्राप्त करने के लिए आवश्यक शर्तें-जब कोई राजनैतिक दल राज्य विधानसभा के चुनाव में पड़े कुल मतों का 6 प्रतिशत या उससे अधिक मत प्राप्त करता है और कम से कम दो सीटों पर जीत दर्ज करता है तो उसे उस राज्य के राजनीतिक दल के रूप में चुनाव आयोग द्वारा मान्यता मिल जाती है।
प्रश्न 7. 'ऑल इण्डिया तृणमूल कांग्रेस' पर टिप्पणी लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— ऑल इण्डिया तृणमूल कांग्रेस पार्टी का वर्णन निम्न बिन्दुओं में स्पष्ट है-
(1) यह पार्टी 1 जनवरी 1998 को ममता बनर्जी के नेतृत्व में बनी।
(2) इसे 2016 में राष्ट्रीय दल के रूप में मान्यता प्राप्त हुई।
(3) 'पुष्प और तृण' इस पार्टी का प्रतीक है।
(4) यह दल धर्मनिरपेक्षता और संघवाद के प्रति प्रतिबद्ध है।
(5) 2011 से पश्चिम बंगाल में सत्ता में है। अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और त्रिपुरा में भी इसकी उपस्थिति है।
(6) 2019 में हुए आम चुनाव में इसे 4.07 फीसदी वोट मिले और 22 सीटों पर जीत हासिल हुई, जिससे लोकसभा में यह चौथी सबसे बड़ी पार्टी बन गई।
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प्रश्न 8. भारतीय जनता पार्टी एवं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की चार प्रमुख नीतियों-कार्यक्रमों को लिखिए।
उत्तर—भारतीय जनता पार्टी की चार प्रमुख नीतियाँ-कार्यक्रम-
(1) सबका साथ सबका विकास
(2) समान नागरिक संहिता एवं धर्मान्तरण पर रोक का समर्थन
(3) भारत की प्राचीन संस्कृति और मूल्यों से प्रेरणा लेकर मजबूत और आधुनिक भारत बनाने का लक्ष्य
(4) जम्मू और कश्मीर को क्षेत्रीय और राजनीतिक स्तर पर विशेष दर्जा देने के खिलाफ।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की चार प्रमुख नीतियाँ-कार्यक्रम-
(1) वैचारिक रुझान में मध्यमार्गी (न वामपंथी न दक्षिणपंथी)
(2) धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा
(3) कमजोर वर्गों एवं अल्पसंख्यक वर्गों के हितों की रक्षा
(4) नई आर्थिक नीतियों का समर्थन।
प्रश्न 9. जनमत निर्माण से आप क्या समझते हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता देशभर में बिखरे होते हैं। दलों द्वारा विभिन्न सामाजिक मुद्दों को उठाया जाता है तथा उन पर बहस की जाती है। समाज के विभिन्न संगठनों में दलों के मित्र संगठन अथवा दबाव समूह भी काम करते हैं। कई बार दल लोगों की समस्या के समाधान हेतु आंदोलन भी करते हैं। साधारणतया समाज के विभिन्न वर्गों की राय विभिन्न दलों द्वारा रखी गई राय के आस-पास ही बनती है। इसे ही जनमत निर्माण कहा जाता है। राजनीतिक दल जनमत निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रश्न 10. राजनीतिक दलों की लोकतंत्र में क्यों जरूरत होती है? इसके पक्ष में अपना मत स्पष्ट कीजिये। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)
अथवा
लोकतंत्र में राजनीतिक दलों की आवश्यकता क्यों है? किन्हीं तीन कारणों की विवेचना कीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)
उत्तर— लोकतांत्रिक देशों में राजनीतिक दलों की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से है-
(i) अगर दल नहीं होंगे तो सारे उम्मीदवार स्वतंत्र या निर्दलीय होंगे। तब, इनमें से कोई भी उम्मीदवार किसी बड़े नीतिगत बदलाव के बारे में लोगों से चुनावी वायदे करने की स्थिति में नहीं होगा।
(ii) अगर दल नहीं होंगे, तो चुनावों के बाद यदि सरकार बन जायेगी तो भी उसकी उपयोगिता संदिग्ध होगी।
(iii) निर्वाचित प्रतिनिधि सिर्फ अपने निर्वाचन क्षेत्रों में किए गए कामों के लिए जवाबदेह होंगे, लेकिन देश कैसे चले; इसके लिए कोई उत्तरदायी नहीं होगा।
प्रश्न 11. धनबल और बाहुबल किस प्रकार चुनाव में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर— धनबल और बाहुबल चुनाव में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं-(1) चूंकि पार्टियों की सारी चिन्ता चुनाव जीतने की होती है अतः उसके लिए कोई भी जायज-नाजायज तरीका अपनाने से वे परहेज नहीं करतीं। वे ऐसे ही उम्मीदवार उतारती हैं जिनके पास काफी पैसा हो या जो पैसे जुटा सकें।
(2) किसी पार्टी को ज्यादा धन देने वाली कंपनियाँ और अमीर लोग उस पार्टी की नीतियों और फैसलों को भी प्रभावित करते हैं।
(3) कई बार पार्टियाँ चुनाव जीत सकने वाले अपराधियों का समर्थन करती हैं या उनकी मदद लेती हैं।
दुनियाभर में लोकतंत्र के समर्थक लोकतांत्रिक राजनीति में अमीर लोगों और बढ़ती कंपनियों की भूमिका को लेकर चिंतित हैं।
प्रश्न 12. भारत में राजनीतिक दलों के लिये निम्न चुनौतियों पर अपना मत स्पष्ट कीजिये- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)
(अ) पार्टी के भीतर लोकतंत्र का अभाव।
(ब) वंशवाद की चुनौती।
उत्तर—(अ) पार्टी के भीतर लोकतंत्र का अभाव- अधिकांश राजनीतिक दलों में आन्तरिक लोकतंत्र की कमी होती है, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और भागीदारी निरन्तर घटती जाती है। इससे पार्टी के भीतर शक्ति का केन्द्रीकरण होता जाता है और परिणामस्वरूप नए नेताओं एवं विचारों को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिलता।
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सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान) कक्षा X 325
( ब ) वंशवाद की चुनौती-राजनीतिक दलों में वंशवाद एक बड़ी चुनौती है, जहाँ किसी एक परिवार के सदस्यों को हमेशा प्राथमिकता दी जाती है। इसके कारण योग्य उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिल पाता। परिणामतः राजनीति में योग्यता और प्रतिभा की कमी होती जाती है और परिवारवाद को भरपूर बढ़ावा मिलता है।
● निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. राजनीतिक दल क्या है? भारत में राजनीतिक दलों में सुधार के लिए क्या प्रयत्न किए गए हैं?
अथवा
भारत में राजनीतिक दलों में सुधार हेतु क्या प्रयास किये गये हैं? किन्हीं तीन सुधारों की विवेचना कीजिए।
( माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024 )
अथवा
भारत में राजनीतिक दलों के सुधार हेतु किए गए चार प्रमुख प्रयासों का वर्णन कीजिए।
उत्तर— राजनीतिक दल-राजनीतिक दल लोगों का एक समूह होता है जो चुनाव लड़कर सरकार में राजनीतिक सत्ता हासिल करने के उद्देश्य से कार्य करता है। यह सम्पूर्ण राष्ट्र के हितों को ध्यान में रखकर कुछ नीतियाँ और कार्यक्रम तय करता है।
भारत में राजनीतिक दलों तथा इनके नेताओं को सुधारने के लिए हाल ही में निम्नलिखित प्रयास किये गये हैं-
( 1 ) दल-बदल रोक विधेयक-भारत में विधायकों और सांसदों को दल-बदल करने से रोकने के लिए संविधान में संशोधन किया गया। निर्वाचित प्रतिनिधियों के मन्त्री पद या धन के लोभ में दल-बदल करने में आई तेजी को देखते हुए ऐसा किया गया। नए कानून के अनुसार अपना दल बदलने वाले सांसद या विधायक को अपनी सीट भी गंवानी होगी। इस नये कानून से दल-बदल में कमी आई है, लेकिन इससे पार्टी में विरोध का स्वर उठाना अब और भी मुश्किल हो गया है। पार्टी नेतृत्व जो कोई भी फैसला करता है, सांसद और विधायक को उसे मानना ही होता है।
( 2 ) उम्मीदवारों को अपनी सम्पत्ति और अपने आपराधिक मामलों का ब्यौरा देना अनिवार्य-उच्चतम न्यायालय ने पैसे और अपराधियों के प्रभाव को कम करने के लिए एक आदेश के द्वारा चुनाव लड़ने वाले हर उम्मीदवार को अपनी सम्पत्ति का और अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों का ब्यौरा एक शपथ-पत्र के माध्यम से देना अनिवार्य कर दिया है। इस नयी व्यवस्था से लोगों को अपने उम्मीदवारों के बारे में बहुत-सी पक्की सूचनाएँ उपलब्ध होने लगी हैं। पर उम्मीदवार द्वारा दी गई सूचनाएँ सही हैं या नहीं, यह जाँच करने की कोई व्यवस्था नहीं है।
( 3 ) दलों को सांगठनिक चुनाव कराना-चुनाव आयोग ने एक आदेश के जरिये सभी दलों के लिए सांगठनिक चुनाव कराना जरूरी बना दिया है। दलों ने ऐसा करना शुरू भी कर दिया है। यह दलों में अन्दरूनी लोकतन्त्र स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
( 4 ) आयकर रिटर्न भरना अनिवार्य-चुनाव आयोग ने सभी दलों के लिए आयकर रिटर्न भरना भी अनिवार्य कर दिया है।
प्रश्न 2. राजनीतिक व्यवस्था में दलीय व्यवस्था के विभिन्न प्रकारों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर— राजनीतिक दलीय व्यवस्था के प्रकार
विश्व में राजनीतिक दलीय व्यवस्था के प्रमुख रूपों को मोटे रूप से तीन प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है। ये हैं-(1) एकदलीय व्यवस्था, (2) द्विदलीय व्यवस्था और (3) बहुदलीय व्यवस्था। यथा-
( 1 ) एकदलीय व्यवस्था-किसी देश में जब सिर्फ एक ही दल को सरकार बनाने और चलाने की अनुमति होती, तो इसे एकदलीय व्यवस्था कहा जाता है। साम्यवादी चीन में सिर्फ साम्यवादी दल को ही शासन करने की अनुमति है, इसलिए वहाँ की दलीय व्यवस्था को एकदलीय कहा जाता है।
( 2 ) द्विदलीय व्यवस्था-कुछ देशों में सत्ता आम तौर पर दो मुख्य दलों के बीच ही बदलती रहती है। वहाँ अनेक अन्य पार्टियाँ भी हो सकती हैं, वे चुनाव भी लड़कर कुछ सीटें जीत सकती हैं, पर सिर्फ दो ही दल बहुमत पाने और सरकार बनाने के प्रबल दावेदार होते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन में ऐसी ही दो दलीय व्यवस्था है।
( 3 ) बहुदलीय व्यवस्था-जब अनेक दल सत्ता के लिए होड़ में हों और दो दलों से ज्यादा दलों के अपने दम पर या दूसरों से गठबंधन करके सत्ता में आने के ठीक-ठाक अवसर हों तो इसे बहुदलीय व्यवस्था कहते हैं। भारत में भी ऐसी ही बहुदलीय व्यवस्था है।
प्रश्न 3. राजनीतिक दल का क्या अर्थ है? इनके कार्य बतलाइये। राजनीतिक दलों की आवश्यकता क्यों होती है?
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उत्तर—राजनीतिक दल का अर्थ—राजनीतिक दल लोगों का एक ऐसा संगठित समूह होता है जो चुनाव लड़ने और सरकार में राजनीतिक सत्ता प्राप्त करने के उद्देश्य से काम करता है तथा समाज के सामूहिक हित को ध्यान में रखकर कुछ नीतियाँ और कार्यक्रम तय करता है।
राजनीतिक दल के कार्य—
(1) दल चुनाव लड़ते हैं। अधिकांश लोकतांत्रिक देशों में चुनाव राजनीतिक दलों द्वारा खड़े किए गए उम्मीदवारों के बीच लड़ा जाता है।
(2) दल अलग-अलग नीतियों और कार्यक्रमों को मतदाताओं के सामने रखते हैं और मतदाता अपनी पसंद की नीतियाँ और कार्यक्रम चुनते हैं।
(3) दल देश के कानून निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। कानूनों पर औपचारिक बहस होती है और उन्हें विधायिका में पास करवाना होता है। लेकिन विधायक किसी न किसी दल के सदस्य होते हैं। इस कारण वे अपने दल के नेता के निर्देश पर फैसला करते हैं।
(4) दल ही सरकार बनाते और चलाते हैं। दल नेता चुनते हैं, उनको प्रशिक्षित करते हैं और फिर दल के सिद्धान्तों और कार्यक्रम के अनुसार फैसला करने के लिए उन्हें मंत्री बनाते हैं ताकि वे दल की इच्छा के अनुसार सरकार चला सकें।
(5) विपक्षी दल शासक दल के विरोधी पक्ष की भूमिका निभाते हैं तथा सरकार के खिलाफ जनमत तैयार करते हैं।
(6) दल जनमत निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
(7) दल ही सरकार के कल्याण कार्यक्रमों को लोगों तक पहुँचाते हैं।
राजनीतिक दलों की आवश्यकता—
(1) लोकतंत्र में यदि राजनीतिक दल नहीं होंगे तो देश कैसे चले; इसके लिए कोई उत्तरदायी नहीं होगा। निर्वाचित प्रतिनिधि सिर्फ अपने निर्वाचन क्षेत्रों में किए गए कार्यों के लिए जवाबदेह होंगे लेकिन देश कैसे चले; इसके लिए कोई उत्तरदायी नहीं होगा।
(2) प्रतिनिधित्वात्मक लोकतंत्र में दल विभिन्न मुद्दों पर अलग-अलग विचारों को सामने लाते हैं।
(3) दल विभिन्न मुद्दों पर अलग-अलग विचारों को सरकार तक पहुँचाते हैं।
(4) ये एक जिम्मेदार सरकार का गठन करते हैं।
(5) ये सरकार पर अंकुश रखते हैं।
प्रश्न 4. राजनीतिक दल के कार्यों की व्याख्या कीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)
अथवा
राजनीतिक दल के कार्य बताइये। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— राजनीतिक दलों के कार्य
राजनीतिक दलों के कार्यों को निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत स्पष्ट किया गया है-
(1) चुनाव लड़ना—राजनीतिक दलों का मुख्य कार्य चुनाव लड़ना है। चुनाव राजनीतिक दलों द्वारा खड़े किए गए उम्मीदवारों के बीच लड़ा जाता है। राजनीतिक दल उम्मीदवारों का चुनाव कई तरीकों से करते हैं। अमेरिका जैसे देशों में उम्मीदवारों का चुनाव दल के सदस्य और समर्थक करते हैं। अन्य देशों, जैसे-भारत में दल के नेता ही उम्मीदवार चुनते हैं।
(2) दल की नीतियों और कार्यक्रमों को सामने लाना—राजनीतिक दल अलग-अलग नीतियों और कार्यक्रमों को मतदाताओं के सामने रखते हैं और मतदाता अपनी पसंद की नीतियाँ और कार्यक्रम चुनते हैं। राजनीतिक दल तरह-तरह के विचारों को कुछ बुनियादी राय तक समेट लाते हैं, जिनका वे समर्थन करते हैं। सरकार प्राय: दल की राय के अनुरूप अपनी नीतियाँ तय करती है।
(3) कानूनों का निर्माण करना—राजनैतिक दल सरकार बनाकर एवं विपक्ष में रहकर कानून के निर्माण का कार्य करते हैं। वे विधायिका में कानूनों पर बहस करते हैं और उन्हें विधायिका में पास करवाते हैं। लेकिन विधायिका के अधिकतर सदस्य किसी न किसी दल के सदस्य होते हैं। इस कारण वे अपने दल के नेता के निर्देश पर फैसला करते हैं।
(4) सरकार बनाना और चलाना—राजनीतिक दल चुनावों के द्वारा सरकार बनाते और चलाते हैं। जो भी
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राजनीतिक दल विधायिका में बहुमत प्राप्त करता है, वह सरकार बनाता है और अपनी विचारधारा के अनुसार सरकार को चलाता है तथा नीतियाँ बनाता है।
(5) सरकार की नीतियों का विरोध—राजनीतिक दल सरकार की गलत नीतियों और असफलताओं की आलोचना करने के साथ अपनी अलग राय भी रखते हैं तथा सरकार के खिलाफ आम जनता को गोलबंद करते हैं।
(6) जनमत का निर्माण—राजनीतिक दल जनमत निर्माण का कार्य भी करते हैं। वे मुद्दों को उठाते हैं और उन पर बहस करते हैं। दल कई बार लोगों की समस्याओं को लेकर आंदोलन भी करते हैं। अक्सर विभिन्न दलों द्वारा रखी जाने वाली राय के इर्द-गिर्द ही समाज के लोगों की राय बनती जाती है।
(7) सरकारी मशीनरी तक पहुँच उपलब्ध करवाना—साधारण जनता की सरकारी मशीनरी अर्थात् सरकारी तंत्रों तथा कल्याणकारी योजनाओं तक पहुँच नहीं होती है, राजनीतिक दल साधारण जनता को सरकारी मशीनरी तक ला खड़ा करते हैं क्योंकि एक साधारण नागरिक के लिए किसी सरकारी अधिकारी की तुलना में किसी राजनीतिक कार्यकर्ता से जान-पहचान बनाना, उससे सम्पर्क साधना आसान होता है।
प्रश्न 5. बहुजन समाज पार्टी का संक्षिप्त वर्णन कीजिये।
उत्तर—बहुजन समाज पार्टी—बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख बातों का वर्णन निम्न बिन्दुओं में स्पष्ट है-
(1) बहुजन समाज पार्टी का गठन स्वर्गीय कांशीराम के नेतृत्व में सन् 1984 में किया गया।
(2) वर्तमान में यह भारत की एक राष्ट्रीय पार्टी है।
(3) बहुजन समाज पार्टी का चुनाव चिन्ह हाथी है।
(4) यह पार्टी बहुजन समाज जिसमें दलित, आदिवासी, पिछड़ी जातियाँ और धार्मिक अल्पसंख्यक शामिल हैं, के लिए राजनीतिक सत्ता पाने का प्रयास और उनका प्रतिनिधित्व करने का दावा करती है।
(5) यह पार्टी साहू महाराज, महात्मा फुले, पेरियार रामास्वामी नायकर और बाबा साहब आंबेडकर के विचारों और शिक्षाओं से प्रेरणा लेती है।
(6) यह पार्टी दलितों और कमजोर वर्ग के लोगों के कल्याण और उनके हितों की रक्षा के मुद्दों पर सबसे ज्यादा सक्रिय है।
(7) इस पार्टी का मुख्य आधार उत्तर प्रदेश में है, पर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, दिल्ली और पंजाब में भी यह पार्टी पर्याप्त ताकतवर है।
(8) अलग-अलग पार्टियों से अलग-अलग अवसरों पर समर्थन लेकर इसने उत्तर प्रदेश में चार बार सरकार बनाई।
(9) इस दल को 2019 के लोकसभा चुनाव में करीब 3.63 फीसदी वोट मिले, और 10 सीटें मिलीं।
प्रश्न 6. भारतीय जनता पार्टी के बारे में आप क्या जानते हैं? बताइये।
उत्तर—भारतीय जनता पार्टी—भारतीय जनता पार्टी का वर्णन निम्न बिन्दुओं में स्पष्ट है-
(1) पुराने भारतीय जन संघ, जिसे श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1951 में गठित किया था, को पुनर्जीवित करके 1980 में भारतीय जनता पार्टी बनी।
(2) भारतीय जनता पार्टी भारत का एक राष्ट्रीय दल है।
(3) इस पार्टी का चुनाव चिन्ह 'कमल का फूल' है।
(4) भारत की प्राचीन संस्कृति और मूल्य; दीनदयाल उपाध्याय के विचार-समग्र मानवतावाद एवं अंत्योदय से प्रेरणा लेकर मजबूत और आधुनिक भारत बनाने का लक्ष्य; भारतीय राष्ट्रवाद और राजनीति की इसकी अवधारणा में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद (या हिंदुत्व) एक प्रमुख तत्व है।
(5) यह पार्टी जम्मू और कश्मीर को क्षेत्रीय और राजनीतिक स्तर पर विशेष दर्जा देने के खिलाफ रही है।
(6) भारतीय जनता पार्टी देश में रहने वाले सभी धर्म के लोगों के लिए समान नागरिक संहिता बनाने और धर्मांतरण पर रोक लगाने के पक्ष में है।
(7) पहले देश के उत्तरी और पश्चिमी तथा शहरी इलाकों तक ही सिमटी रहने वाली इस पार्टी का पिछले कुछ समय से दक्षिण, पूर्व, पूर्वोत्तर तथा देश के ग्रामीण इलाकों में जनाधार बहुत बढ़ा है।
(8) राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेता की हैसियत से यह पार्टी 1998 में सत्ता में आई। गठबंधन में कई क्षेत्रीय दल शामिल थे।
(9) 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में 303 सीटें जीतकर यह सबसे बड़े दल के रूप में उभरी।
(10) अभी केंद्र में शासन करने में शासन करने वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का नेतृत्व यही दल कर रहा है।
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प्रश्न 7. इंडियन नेशनल कांग्रेस के बारे में आप क्या जानते हैं? वर्णन कीजिये।
उत्तर— इंडियन नेशनल कांग्रेस-इंडियन नेशनल कांग्रेस जिसे आमतौर पर कांग्रेस पार्टी कहा जाता है, का वर्णन निम्न बिन्दुओं में किया गया है-
(1) इंडियन नेशनल कांग्रेस का गठन सन् 1885 में हुआ था। यह दुनिया के सबसे पुराने दलों में से एक है।
(2) 1885 में गठन के बाद से अब तक इस दल में कई बार विभाजन हुए हैं।
(3) यह भारत का एक राष्ट्रीय दल है।
(4) आजादी के बाद राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर अनेक दशकों तक इसने प्रमुख भूमिका निभाई है।
(5) जवाहरलाल नेहरू की अगुवाई में इस दल ने भारत को एक आधुनिक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने का प्रयास किया।
(6) हाथ के पंजे का निशान इस पार्टी का चुनाव चिन्ह है।
(7) 1971 तक लगातार और फिर 1980 से 1989 तक इसने देश पर शासन किया। 1989 के बाद से इस दल के जन-समर्थन में कमी आई पर अभी भी यह पूरे देश और समाज के सभी वर्गों में अपना जनाधार बनाए हुए है।
(8) यह दल मध्यमार्गी (न वामपंथी न दक्षिणपंथी) है।
(9) इस दल ने धर्मनिरपेक्षता और कमजोर वर्गों तथा अल्पसंख्यक समुदायों के हितों को अपना मुख्य कार्यक्षेत्र बनाया है।
(10) यह दल नयी आर्थिक नीतियों का समर्थक है पर इस बात को लेकर भी सचेत है कि इन नीतियों का गरीब और कमजोर वर्गों पर बुरा असर न पड़े।
(11) वर्ष 2004 से 2014 तक संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार का नेतृत्व इसी दल ने किया।
(12) वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में इसे 19.5 प्रतिशत वोट तथा 52 सीटें मिलीं।
प्रश्न 8. कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सी पी आई) की प्रमुख बातों का वर्णन कीजिये।
उत्तर— कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सी पी आई)-इस पार्टी की प्रमुख बातें निम्न बिन्दुओं में स्पष्ट हैं-
(1) कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया का गठन सन् 1925 में हुआ।
(2) 2019 के लोकसभा चुनावों में यह भारत का एक राष्ट्रीय दल था लेकिन अप्रैल, 2023 में चुनाव आयोग ने इसका राष्ट्रीय दल का स्तर समाप्त कर दिया है।
(3) 'बाली-हंसिया' इस पार्टी का चुनाव चिन्ह है।
(4) यह पार्टी मार्क्सवाद-लेनिनवाद, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र में आस्था रखती है। साथ ही अलगाववादी और सांप्रदायिक ताकतों की विरोधी है।
(5) यह पार्टी संसदीय लोकतंत्र को मजदूर वर्ग, किसानों और गरीबों के हितों को आगे बढ़ाने का एक उपकरण मानती है।
(6) वर्ष 1964 में इस दल में फूट पड़ी और माकपा इससे अलग हुई।
(7) माकपा के अलग होने के बाद इसका जनाधार सिकुड़ता चला गया लेकिन केरल, पश्चिम बंगाल, पंजाब, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में अभी भी ठीकठाक स्थिति है।
(8) वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में इसे 1 फीसदी से कम वोट और 2 सीट हासिल हुई।
(9) मजबूत वाम मोर्चा बनाने के लिए यह पार्टी सभी वामपंथी दलों को साथ लाने की पक्षधर है।
प्रश्न 9. कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-मार्क्सिस्ट (सीपीआई-एम) के बारे में आप क्या जानते हैं?
(प्रश्न बैंक)
उत्तर— इस पार्टी की प्रमुख बातें निम्न बिन्दुओं द्वारा स्पष्ट है-
(1) इस पार्टी का गठन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) से वर्ष 1964 में अलग होकर हुआ।
(2) यह पार्टी वर्तमान में भारत की एक राष्ट्रीय पार्टी है।
(3) 'हंसिया-हथौड़ा और तारा' इस पार्टी का चुनाव चिन्ह है।
(4) यह पार्टी मार्क्सवाद-लेनिनवाद में आस्था रखती है।
(5) यह दल समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता तथा लोकतंत्र का समर्थन करता है और साम्राज्यवाद तथा सांप्रदायिकता का विरोध करता है।
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(6) यह दल भारत में सामाजिक-आर्थिक न्याय का लक्ष्य साधने में लोकतांत्रिक चुनावों को सहायक और उपयोगी मानता है।
(7) इस दल का पश्चिम बंगाल, केरल और त्रिपुरा में बहुत मजबूत आधार है।
(8) गरीबों, कारखाना मजदूरों, खेतिहर मजदूरों और बुद्धिजीवियों के बीच इस दल की अच्छी पकड़ है।
(9) यह पार्टी देश में पूँजी और सामानों की मुक्त आवाजाही की अनुमति देने वाली नयी आर्थिक नीतियों की आलोचक है।
(10) पश्चिम बंगाल में यह पार्टी लगातार 34 वर्षों से शासन में रही।
(11) वर्ष 2019 के चुनाव में इसने करीब 1.75 फीसदी वोट और लोकसभा की 3 सीटें हासिल कीं।
प्रश्न 10. आपकी दृष्टि में राजनीतिक दल का नेता कैसा होना चाहिए? विस्तार से लिखिए।
(प्रश्न बैंक)
उत्तर— हमारी दृष्टि में किसी भी नेता में नेतृत्व करने की क्षमता, ईमानदारी, आत्म जागरूकता, साहस, लचीलापन, करुणा इत्यादि गुणों का होना आवश्यक होता है। एक नेता को निरन्तर सीखने के प्रति समर्पित होना चाहिए। एक अच्छे नेता में सकारात्मक दृष्टिकोण का होना जरूरी है, क्योंकि नेता का सकारात्मक दृष्टिकोण उसके दल के अन्य नेताओं को भी अच्छे काम करने के लिए प्रेरित करता है। एक अच्छे नेता को साहसी होना चाहिए जिससे जरूरत पड़ने पर यदि देशहित में उसको कोई ठोस कदम उठाना पड़े तो वह हिचकिचाए नहीं अथवा देश के बड़े वर्ग समूह के हित में कानून बनाने से पीछे न हटे।
एक अच्छे नेता को हमेशा अन्य नेताओं को लक्ष्य के प्रति जागरूक तथा प्रेरित करते रहना चाहिए। नेताओं का लक्ष्य जनता की सेवा होना चाहिए। नेता को तकनीक के प्रति भी जागरूक होना चाहिए। एक आदर्श नेता को हमेशा देश की समस्याओं का समाधान करने में तत्पर रहना चाहिए। नेता का दृष्टिकोण इतना व्यापक होना चाहिए कि भविष्य में आने वाली समस्याओं का भी अंदाजा लगा पाए तथा उसका समाधान भी कर ले।