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सामाजिक विज्ञान (Social Science)हिंदी माध्यम2026-27

RBSE Class 10 SST Chapter 19 Solutions in Hindi — [अर्थशास्त्र] भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक | पासबुक हल, नोट्स

📅 अंतिम अपडेट: 2026-09-10📖 RBSE/NCERT Solutions
भाग 1 — समाधान (अर्थशास्त्र पाठ 2)

📖 1. समाधान: पाठगत एवं पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नोत्तर

राजस्थान बोर्ड कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) — सभी पाठगत प्रश्नों एवं पाठ्यपुस्तक अभ्यास के संपूर्ण सटीक उत्तर।

पाठगत प्रश्न

पृष्ठ 21 (आओ इन पर विचार करें)-

प्रश्न 1. विभिन्न क्षेत्रकों की परस्पर निर्भरता दिखाते हुए उपर्युक्त सारणी (पाठ्यपुस्तक में देखें) को भरें।

--- [ पृष्ठ संख्या: 369 ] ---

उत्तर—

[तालिका 2.1 : आर्थिक गतिविधियों के उदाहरण]

कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान पाठ 19 भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक चित्र 1

उदाहरण

यह क्या प्रदर्शित करता है?

कल्पना करें कि यदि किसान किसी चीनी मिल को गन्ना बेचने से इंकार कर दें, तो क्या होगा? मिल बंद हो जाएगी।

यह द्वितीयक या औद्योगिक क्षेत्रक का उदाहरण है, जो प्राथमिक क्षेत्रक पर निर्भर है।

कल्पना करें कि यदि कम्पनियाँ भारतीय बाजार से कपास नहीं खरीदतीं और अन्य देशों से कपास आयात करने का निर्णय करती हैं, तो कपास की खेती का क्या होगा? भारत में कपास की खेती कम लाभकारी रह जाएगी और यदि किसान शीघ्रता से अन्य फसलों की ओर उन्मुख नहीं होते हैं, तो वे दिवालिया भी हो सकते हैं तथा कपास की कीमत गिर जाएगी।

यह प्राथमिक क्षेत्रक का उदाहरण है। यह पूर्ण रूप से द्वितीयक क्षेत्रक पर निर्भर है।

किसान, ट्रैक्टर, पम्पसेट, बिजली, कीटनाशक और उर्वरक जैसी अनेक अनेक वस्तुएँ खरीदते हैं। कल्पना करें कि यदि उर्वरकों और पम्पसेटों की कीमत बढ़ जाती है, तो क्या होगा? खेती पर लागत बढ़ जाएगी और किसानों का लाभ कम हो जाएगा।

यह प्राथमिक क्षेत्रक का उदाहरण है, जो द्वितीयक क्षेत्रक पर निर्भर है।

औद्योगिक और सेवा क्षेत्रकों में काम करने वाले लोगों को भोजन की आवश्यकता होती है। कल्पना करें कि यदि ट्रांसपोर्टरों ने हड़ताल कर दी है और ग्रामीण क्षेत्रों से सब्जियाँ, दूध इत्यादि ले जाने से इंकार कर दिया, तो क्या होगा? शहरी क्षेत्रों में भोजन की कमी हो जाएगी और किसान अपने उत्पाद बेचने में असमर्थ हो जायेंगे।

यह द्वितीयक एवं सेवा क्षेत्रक और प्राथमिक क्षेत्रक का उदाहरण है। यहाँ इनकी आपस में निर्भरता बतलाई गयी है।

प्रश्न 2. पुस्तक में वर्णित उदाहरणों से भिन्न उदाहरणों के आधार पर प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रकों के अन्तर की व्याख्या करें।

उत्तर— प्राथमिक क्षेत्रक— इस क्षेत्रक में वे गतिविधियाँ सम्मिलित की जाती हैं जिनमें प्रकृति से सीधे उत्पाद प्राप्त किया जाता है जैसे किसी कृषक द्वारा भूमि से अनाज उत्पादित करना; मछली पालन, खानों में खनिज उत्पादन, पशुपालन।

द्वितीयक क्षेत्रक— इस क्षेत्रक में प्रकृति से प्राप्त उत्पादों का रूप परिवर्तित किया जाता है जैसे खेती से प्राप्त कपास से कपड़ा बनाना; कागज निर्माण उद्योग, फर्नीचर उद्योग।

तृतीयक क्षेत्रक— इसमें विभिन्न प्रकार की सेवाओं को शामिल किया जाता है, जैसे-अध्यापक, चिकित्सक, वकील, पुजारी आदि।

प्रश्न 3. निम्नलिखित व्यवसायों को प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रकों में विभाजित करें।

• दर्जी • पुजारी • कुम्हार

• टोकरी बुनकर • कूरियर पहुँचाने वाला • मधुमक्खी पालक

• फूल की खेती करने वाला • दियासलाई कारखाना में श्रमिक • अन्तरिक्ष यात्री

• दूध विक्रेता • महाजन • कॉल सेन्टर का कर्मचारी • मछुआरा • माली

उत्तर— प्राथमिक क्षेत्रक में शामिल गतिविधियाँ— फूल की खेती करने वाला, मछुआरा, माली, मधुमक्खी पालक।

द्वितीयक क्षेत्रक में शामिल गतिविधियाँ— टोकरी बुनकर, दियासलाई कारखाना में श्रमिक, कुम्हार।

तृतीयक क्षेत्रक में शामिल गतिविधियाँ— दर्जी, दूध विक्रेता, पुजारी, कूरियर पहुँचाने वाला, महाजन, अन्तरिक्ष यात्री, कॉल सेन्टर का कर्मचारी।

पृष्ठ 23 (आओ इन पर विचार करें)—

प्रश्न 1. विकसित देशों का इतिहास क्षेत्रकों में हुए परिवर्तन के सम्बन्ध में क्या संकेत करता है?

--- [ पृष्ठ संख्या: 370 ] ---

सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) कक्षा X | 363

उत्तर—विकसित देशों का इतिहास यह संकेत करता है कि विकास के प्रारंभिक चरण में प्राथमिक क्षेत्र ही आर्थिक सक्रियता का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है।

जैसे-जैसे कृषि प्रणाली परिवर्तित होती गई और कृषि क्षेत्र समृद्ध होता गया, वैसे-वैसे पहले की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक उत्पादन होने लगा। अब अनेक लोग दूसरे कार्य करने लगे। फिर भी इस अवस्था में अधिकांश उत्पादित वस्तुएँ प्राकृतिक उत्पाद थीं, जो प्राथमिक क्षेत्र में आती थीं और अधिकांश लोग इसी क्षेत्र में रोजगार करते थे।

लम्बे समय (100 वर्षों से अधिक) के बाद और विशेषकर विनिर्माण की नवीन प्रणाली के प्रचलन से कारखाने अस्तित्व में आए। अब खेतों में काम करने वाले काफी लोग इन कारखानों में काम करने लगे। उन्हें कारखानों में काम करने के लिए मजबूर किया गया। कारखानों में सस्ती दरों पर उत्पादित वस्तुओं का लोग इस्तेमाल करने लगे। कुल उत्पादन एवं रोजगार की दृष्टि से द्वितीयक क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण हो गया।

विगत 100 वर्षों में, विकसित देशों में द्वितीयक क्षेत्र से तृतीयक क्षेत्र की ओर पुनः बदलाव हुआ है। कुल उत्पादन की दृष्टि से तृतीयक क्षेत्र (सेवा क्षेत्र) का महत्व बढ़ गया है।

पृष्ठ 24 (आओ इन पर विचार करें)-

(आलेख 1 का अवलोकन करते हुए निम्नलिखित का उत्तर दें।)

प्रश्न 1. 1973-74 में सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्र कौन था?

उत्तर—1973-74 में सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्र प्राथमिक क्षेत्र था।

प्रश्न 2. 2013-14 में सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्र कौन था?

उत्तर—वर्ष 2013-14 में सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्र तृतीयक क्षेत्र था।

प्रश्न 3. क्या आप बता सकते हैं कि तीस वर्षों में किस क्षेत्र में सबसे अधिक संवृद्धि हुई?

उत्तर—तीस वर्षों में तृतीयक क्षेत्र में सबसे अधिक संवृद्धि हुई।

प्रश्न 4. 2013-14 में भारत का जी.डी.पी. क्या है?

उत्तर—2013-14 में भारत का जी.डी.पी. लगभग 56,50,000 करोड़ रुपये है।

पृष्ठ 27 (आओ इन पर विचार करें)-

प्रश्न 1. आलेख 2 और 3 पाठ्यपुस्तक की पृष्ठ संख्या 25 में दिए गए आँकड़े का प्रयोग कर सारणी की पूर्ति करें और नीचे दिए गए प्रश्नों का उत्तर दें। यदि आँकड़े कुछ वर्षों के नहीं हैं, तो उन्हें नजरअंदाज किया जा सकता है।

तालिका 2.2 : स.घ.उ. और रोजगार में प्राथमिक क्षेत्र की हिस्सेदारी

1973-74

1977-78

2013-14

2017-18

स.घ.उ. में हिस्सेदारी

रोजगार में हिस्सेदारी

1973-74

1977-78

2013-14

2017-18

स.घ.उ. में हिस्सेदारी

40%

-

13%

-

रोजगार में हिस्सेदारी

-

71%

-

44%

40 वर्षों में प्राथमिक क्षेत्र में आप क्या परिवर्तन देखते हैं?

उत्तर— स.घ.उ. और रोजगार में प्राथमिक क्षेत्र की हिस्सेदारी

40 वर्षों में प्राथमिक क्षेत्र में निम्न परिवर्तन देखने को मिले हैं-

(i) 1973-74 की तुलना में 2013-14 में स.घ.उ. में प्राथमिक क्षेत्र की हिस्सेदारी में कमी आई है।

(ii) 1977-78 की तुलना में 2017-18 में रोजगार में भी प्राथमिक क्षेत्र की हिस्सेदारी कम हुई है।

प्रश्न 2. सही उत्तर का चयन करें-

अल्प बेरोजगारी तब होती है जब लोग- (प्रश्न बैंक)

(अ) काम करना नहीं चाहते हैं।

(ब) सुस्त ढंग से काम करते हैं।

(स) अपनी क्षमता से कम काम करते हैं।

(द) उनके काम के लिए भुगतान नहीं किया जाता है।

--- [ पृष्ठ संख्या: 371 ] ---

उत्तर—(स) अपनी क्षमता से कम काम करते हैं।

प्रश्न 3. विकसित देशों में देखे गए लक्षण की भारत में हुए परिवर्तनों से तुलना करें और वैषम्य बतायें। भारत में क्षेत्रकों के बीच किस प्रकार के परिवर्तन वांछित थे, जो नहीं हुए?

उत्तर—(1) प्राथमिक क्षेत्रक—विकसित देशों में विकास की प्रारम्भिक अवस्था में प्राथमिक क्षेत्रक उत्पादन एवं रोजगार दोनों दृष्टि से सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण क्षेत्रक था; भारत में भी विकास की प्रारम्भिक अवस्था में यही स्थिति रही।

(2) द्वितीयक क्षेत्रक—अर्थव्यवस्था में विकास के साथ-साथ विकसित देशों में धीरे-धीरे द्वितीयक क्षेत्रक उत्पादन और रोजगार की दृष्टि से सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण हो गया, लेकिन भारत में यह क्षेत्रक दोनों ही दृष्टि से सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण अभी तक नहीं हुआ है।

(3) तृतीयक क्षेत्रक—विकास के उच्च स्तरों पर विकसित देशों में जी.डी.पी. और रोजगार में तृतीयक क्षेत्रक की हिस्सेदारी सबसे अधिक है, जबकि भारत में वर्तमान में जी.डी.पी. में तो तृतीयक क्षेत्रक की सर्वाधिक हिस्सेदारी हो गई है लेकिन रोजगार की दृष्टि से भारत में अभी भी सर्वाधिक रोजगार प्राथमिक क्षेत्रक में ही है।

प्रश्न 4. हमें अल्प बेरोजगारी के सम्बन्ध में क्यों विचार करना चाहिए?

उत्तर—भारत में कई क्षेत्रों में अल्प बेरोजगारी पाई जाती है विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में अल्प बेरोजगारी पाई जाती है। अल्प बेरोजगारी में लोगों को उनकी क्षमता के अनुरूप रोजगार नहीं मिलता है, वे रोजगार पर लगे हुए तो प्रतीत होते हैं किन्तु उत्पादन में उनका बहुत ही कम योगदान होता है। ऐसे लोगों को यदि रोजगार से हटा भी दिया जाए तो उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। यदि ऐसे लोगों को अन्य क्षेत्रों में लगाया जाए तो वे अधिक उत्पादक बन जाते हैं जिससे राष्ट्रीय आय एवं प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि होती है तथा बेरोजगारी एवं निर्धनता की समस्या का भी समाधान होगा। अतः अल्प बेरोजगारी पर विचार करना अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है।

पृष्ठ 29 (आओ इन पर विचार करें)—

प्रश्न 1. आपके विचार से म.गाँ.रा.ग्रा.रो.गा.अ. को 'काम का अधिकार' क्यों कहा गया है?

उत्तर—महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम-2005 (म.गाँ.रा.ग्रा.रो.गा.अ.-2005) ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार प्रदान करने का एक महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम ही नहीं बल्कि एक कानून है, क्योंकि इस कार्यक्रम के अन्तर्गत उन सभी लोगों को जो काम करने में सक्षम हैं और जिन्हें काम की जरूरत है, उन्हें सरकार द्वारा वर्ष में 100 दिन के रोजगार की गारण्टी दी गई है। इसके अन्तर्गत यदि सरकार रोजगार उपलब्ध कराने में असफल रहती है तो वह लोगों को बेरोजगारी भत्ता देगी। अतः इसे 'काम का अधिकार' कहा गया है।

प्रश्न 3. यदि किसानों को सिंचाई और विपणन सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं तो रोजगार और आय में वृद्धि कैसे होगी?

उत्तर—(1) सिंचाई सुविधाओं से वर्ष में एक से अधिक फसलें उत्पादित की जा सकेंगी। इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी। साथ ही लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे तथा कृषकों की आय में वृद्धि होगी।

(2) विपणन सुविधाओं से परिवहन सम्बन्धी रोजगार बढ़ेंगे, व्यापारिक रोजगार बढ़ेंगे तथा किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य प्राप्त होगा व अन्य सम्बन्धित लोगों की आय भी बढ़ेगी।

प्रश्न 4. शहरी क्षेत्रों में रोजगार में वृद्धि कैसे की जा सकती है?

उत्तर—शहरी क्षेत्रों में रोजगार में वृद्धि हेतु व्यापारिक गतिविधियों एवं सेवा क्षेत्र में वृद्धि की जानी चाहिए।

पृष्ठ 31 (आओ इन पर विचार करें)—

प्रश्न 1. निम्नलिखित उदाहरणों को देखें। इनमें से कौन असंगठित क्षेत्रक की गतिविधियाँ हैं?

• विद्यालय में पढ़ाता एक शिक्षक

• बाजार में अपनी पीठ पर सीमेन्ट की बोरी ढोता हुआ एक श्रमिक

• अपने खेत की सिंचाई करता एक किसान

• अस्पताल में मरीज का इलाज करता एक डॉक्टर

• एक ठेकेदार के अधीन काम करता एक दैनिक मजदूरी वाला श्रमिक

• एक बड़े कारखाने में काम करने जाता एक कारखाना श्रमिक

• अपने घर में काम करता एक करघा बुनकर।

उत्तर—उपर्युक्त गतिविधियों में से निम्न गतिविधियाँ असंगठित क्षेत्रक की गतिविधियाँ हैं—

--- [ पृष्ठ संख्या: 372 ] ---

सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) कक्षा X 365

(1) बाजार में अपनी पीठ पर सीमेन्ट की बोरी ढोता हुआ एक श्रमिक।

(2) अपने खेत की सिंचाई करता एक किसान।

(3) एक ठेकेदार के अधीन काम करता एक दैनिक मजदूरी वाला श्रमिक।

(4) अपने घर में काम करता एक करघा बुनकर।

प्रश्न 3. असंगठित और संगठित क्षेत्रक के बीच आप विभेद कैसे करेंगे? अपने शब्दों में व्याख्या करें।

उत्तर— असंगठित क्षेत्रक—असंगठित क्षेत्रक का आशय उन छोटी-छोटी एवं बिखरी हुई इकाइयों से होता है जिन पर किसी प्रकार का सरकारी नियन्त्रण नहीं होता है। इसमें रोजगार की शर्तें अनियमित होती हैं। यहाँ काम के घण्टे निश्चित नहीं होते। अतिरिक्त काम के समय की कोई अतिरिक्त मजदूरी नहीं मिलती। इसमें रोजगार की सुरक्षा नहीं होती है। उदाहरण के लिए एक दैनिक मजदूरी करने वाला श्रमिक।

संगठित क्षेत्रक—संगठित क्षेत्रक में वे उद्यम अथवा कार्य-स्थान आते हैं जहाँ रोजगार की अवधि नियमित होती है तथा वहाँ सरकारी नियमों एवं विनियमों का अनुपालन किया जाता है। इसमें रोजगार की शर्तें नियमित होती हैं। यहाँ काम के घंटे निश्चित होते हैं तथा अतिरिक्त कार्य के समय के लिए अतिरिक्त मजदूरी मिलती है। इसमें रोजगार की सुरक्षा होती है। उदाहरण के लिए एक बड़े कारखाने में काम करने वाला श्रमिक।

प्रश्न 4. संगठित एवं असंगठित क्षेत्रक में भारत के सभी श्रमिकों की अनुमानित संख्या नीचे दी गई सारणी में दी गई है। सारणी को सावधानी से पढ़ें। विलुप्त आँकड़ों की पूर्ति करें और प्रश्नों के उत्तर दें।

[सारणी : विभिन्न क्षेत्रकों में श्रमिकों की संख्या (दस लाख में)]

कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान पाठ 19 भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक चित्र 2

क्षेत्रक

संगठित

असंगठित

कुल

प्राथमिक

1

-

232

द्वितीयक

41

74

115

तृतीयक

40

88

128

कुल

82

कुल प्रतिशत में

100%

(i) असंगठित क्षेत्रक में कृषि में लगे लोगों का प्रतिशत क्या है?

(ii) क्या आप सहमत हैं कि कृषि असंगठित क्षेत्रक की गतिविधि है? क्यों?

(iii) यदि हम सम्पूर्ण देश पर नजर डालते हैं तो पाते हैं कि भारत में ........% श्रमिक असंगठित क्षेत्रक में हैं। भारत में लगभग ........% श्रमिकों को ही संगठित क्षेत्रक में रोजगार उपलब्ध है।

उत्तर— सारणी : विभिन्न क्षेत्रकों में श्रमिकों की संख्या (दस लाख में)

[पूर्ण की गई सारणी]

कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान पाठ 19 भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक चित्र 3

क्षेत्रक

संगठित

असंगठित

कुल

प्राथमिक

1

231

232

द्वितीयक

41

74

115

तृतीयक

40

88

128

कुल

82

393

475

कुल प्रतिशत में

17.26%

82.74%

100%

असंगठित क्षेत्रक की विशेषताएँ—

(i) असंगठित क्षेत्रक में कृषि में लगे लोगों का प्रतिशत निम्न प्रकार है-

$= \frac{231}{393} \times 100 = 58.78\%$

(ii) कृषि असंगठित क्षेत्र की गतिविधि है क्योंकि ये छोटी-छोटी तथा बिखरी हुई इकाइयाँ हैं तथा यहाँ रोजगार की अवधि अनियमित है।

(iii) यदि हम सम्पूर्ण देश पर नजर डालते हैं तो पाते हैं कि भारत में 82.74% श्रमिक असंगठित क्षेत्रक में हैं। भारत में लगभग 17.26% श्रमिकों को ही संगठित क्षेत्रक में रोजगार उपलब्ध है।

--- [ पृष्ठ संख्या: 373 ] ---

---

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1. कोष्ठक में दिए गए सही विकल्प का प्रयोग कर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

(क) सेवा क्षेत्रक में रोजगार के समान अनुपात में वृद्धि ..........। (हुई है/नहीं हुई है) (प्रश्न बैंक)

(ख) .......... क्षेत्रक के श्रमिक वस्तुओं का उत्पादन नहीं करते हैं। (तृतीयक/कृषि) (प्रश्न बैंक)

(ग) .......... क्षेत्रक के अधिकांश श्रमिकों को रोजगार-सुरक्षा प्राप्त होती है। (संगठित/असंगठित)

(घ) भारत में ............अनुपात में श्रमिक असंगठित क्षेत्रक में काम कर रहे हैं। (बड़े/छोटे) (प्रश्न बैंक)

(ङ) कपास एक............उत्पाद है और कपड़ा एक............उत्पाद है। (प्राकृतिक/विनिर्मित) (प्रश्न बैंक)

(च) प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रकों की गतिविधियाँ...........हैं। (स्वतंत्र/परस्पर निर्भर) (प्रश्न बैंक)

उत्तर— (क) नहीं हुई है (ख) तृतीयक (ग) संगठित (घ) बड़े (ङ) प्राकृतिक, विनिर्मित (च) परस्पर निर्भर।

प्रश्न 2. सही उत्तर का चयन करें-

(अ) सार्वजनिक और निजी क्षेत्रक............आधार पर विभाजित है।

(क) रोजगार की शर्तों के (ख) आर्थिक गतिविधि के स्वभाव के

(ग) उद्यमों के स्वामित्व के (घ) उद्यम में नियोजित श्रमिकों की संख्या के।

(ब) एक वस्तु का अधिकांशतः प्राकृतिक प्रक्रिया से उत्पादन............क्षेत्रक की गतिविधि है।

(क) प्राथमिक (ख) द्वितीयक (ग) तृतीयक (घ) सूचना प्रौद्योगिकी।

(स) किसी वर्ष में उत्पादित .......... के कुल मूल्य को स.घ.उ. कहते हैं।

(क) सभी वस्तुओं और सेवाओं (ख) सभी अन्तिम वस्तुओं और सेवाओं

(ग) सभी मध्यवर्ती वस्तुओं और सेवाओं (घ) सभी मध्यवर्ती एवं अन्तिम वस्तुओं और सेवाओं।

(द) स.घ.उ. के पदों में वर्ष 2013-14 के बीच तृतीयक क्षेत्रक की हिस्सेदारी .......... प्रतिशत है।

(क) 20 से 30 (ख) 30 से 40 (ग) 50 से 60 (घ) 60 से 70

उत्तरमाला— (अ)-(ग), (ब)-(क), (स)-(ख), (द)-(घ)।

प्रश्न 3. निम्नलिखित का मेल कीजिए-

कृषि क्षेत्रक की समस्याएँ

कृषि सम्भावित उपाय

1. असिंचित भूमि

(अ) कृषि आधारित मिलों की स्थापना

2. फसलों का कम मूल्य

(ब) सहकारी विपणन समिति

3. कर्ज भार

(स) सरकार द्वारा खाद्यान्नों की वसूली

4. मंदी काल में रोजगार का अभाव

(द) सरकार द्वारा नहरों का निर्माण

5. कटाई के तुरन्त बाद स्थानीय व्यापारियों को अपना अनाज बेचने की विवशता।

(य) कम ब्याज पर बैंकों द्वारा साख उपलब्ध कराना।

उत्तर—

1. (द)

2. (स)

3. (य)

4. (अ)

5. (ब)

प्रश्न 4. विषम की पहचान करें और बताइए क्यों?

(क) पर्यटन-निर्देशक, धोबी, दर्जी, कुम्हार

(ख) शिक्षक, डॉक्टर, सब्जी विक्रेता, वकील

(ग) डाकिया, मोची, सैनिक, पुलिस कांस्टेबल

(घ) एम.टी.एन.एल., भारतीय रेल, एयर इण्डिया, जेट एयरवेज, ऑल इण्डिया रेडियो।

उत्तर— (क) इस वर्ग में पर्यटन-निर्देशक असंगत है क्योंकि यह तृतीयक क्षेत्रक का कार्य है।

(ख) इस वर्ग में सब्जी विक्रेता असंगत है क्योंकि वह असंगठित क्षेत्रक के अन्तर्गत आता है।

(ग) इस वर्ग में मोची असंगत है क्योंकि वह असंगठित क्षेत्रक के अन्तर्गत आता है।

(घ) इस वर्ग में जेट एयरवेज असंगत है क्योंकि यह निजी क्षेत्रक का उपक्रम है।

प्रश्न 5. एक शोध छात्र ने सूरत शहर में काम करने वाले लोगों का अध्ययन करके अग्र आँकड़े जुटाए-

--- [ पृष्ठ संख्या: 374 ] ---

सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) कक्षा X 367

कार्य स्थल

रोजगार की प्रकृति

श्रमिकों का प्रतिशत

सरकार द्वारा पंजीकृत कार्यालयों और कारखानों में

संगठित

15

औपचारिक अधिकार-पत्र सहित बाजारों में अपनी दुकान, कार्यालय और क्लिनिक

संगठित

15

सड़कों पर काम करते लोग, निर्माण श्रमिक, घरेलू श्रमिक

असंगठित

20

छोटी कार्यशालाओं में काम करते लोग, जो प्राय: सरकार द्वारा पंजीकृत नहीं हैं।

असंगठित

50

तालिका को पूरा कीजिए। इस शहर में असंगठित क्षेत्रक में श्रमिकों की प्रतिशतता क्या है?

उत्तर— इस शहर में असंगठित क्षेत्रक में 70 प्रतिशत श्रमिक कार्यरत हैं।

प्रश्न 6. क्या आप मानते हैं कि आर्थिक गतिविधियों का प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्र में विभाजन की उपयोगिता है? व्याख्या कीजिए कि कैसे?

उत्तर— हाँ, हम मानते हैं कि आर्थिक गतिविधियों का प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्र में विभाजन की उपयोगिता है। इसके आधार पर विभिन्न आर्थिक गतिविधियों को सरलता से वर्गीकृत किया जा सकता है। इस विभाजन के आधार पर देश की राष्ट्रीय आय अथवा राष्ट्रीय उत्पादन की गणना भी आसानी से की जा सकती है तथा विभिन्न क्षेत्रकों में श्रमिकों की संख्या का पता आसानी से लगाया जा सकता है। इस विभाजन की सहायता से ही राष्ट्रीय आय में विभिन्न क्षेत्रकों के योगदान का पता लगाया जा सकता है। अतः यह विभाजन उपयोगी है।

प्रश्न 7. इस अध्याय में आए प्रत्येक क्षेत्रक को रोजगार और सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) पर ही क्यों केन्द्रित करना चाहिए? क्या अन्य वाद-पदों का परीक्षण किया जा सकता है? चर्चा करें।

उत्तर— इस अध्याय में आर्थिक गतिविधियों के क्षेत्रकों को तीन भागों में विभाजित किया गया-प्राथमिक क्षेत्रक, द्वितीयक क्षेत्रक तथा तृतीयक क्षेत्रक। इन तीनों में देश की सभी आर्थिक गतिविधियों को सम्मिलित किया गया है जिनका आकलन रोजगार एवं सकल घरेलू उत्पाद के आधार पर ही किया जा सकता है। यह वर्गीकरण अत्यधिक उपयोगी है क्योंकि-

(i) इसके द्वारा हमें विकास के साथ-साथ व्यावसायिक स्थिति के बारे में भी ज्ञान प्राप्त होता है।

(ii) इसके द्वारा हमें निम्नलिखित की जानकारी प्राप्त होती है-आर्थिक क्रियाओं का स्पष्ट विभाजन; सकल घरेलू उत्पाद में विभिन्न क्षेत्रों का योगदान; विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों की संख्या; विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध रोजगार का वितरण तथा विभिन्न क्षेत्रों का राष्ट्रीय आय में योगदान।

प्रश्न 8. जीविका के लिए काम करने वाले अपने आस-पास के वयस्कों के सभी कार्यों की लंबी सूची बनाइए। उन्हें आप किस तरीके से वर्गीकृत कर सकते हैं? अपने चयन की व्याख्या कीजिए।

उत्तर— हमारे आस-पास वयस्कों द्वारा किए जाने वाले प्रमुख कार्य निम्न प्रकार हैं-

(1) कृषि कार्य

(2) पशुपालन

(3) दुग्ध उत्पादन

(4) दुकान चलाना

(5) व्यवसाय करना

(6) कुटीर उद्योग चलाना

(7) कुम्हार द्वारा घड़े बनाना

(8) दर्जी

(9) मजदूर

(10) परिवहन संचालन

(11) अध्यापक

(12) चिकित्सक

(13) नाई

(14) सड़क निर्माण

(15) ठेले चलाने वाला

--- [ पृष्ठ संख्या: 375 ] ---

(16) बैंक कर्मी (17) बीमा कर्मी (18) डाकिया

(19) डेयरी चलाने वाला (20) सब्जी विक्रेता आदि।

हमारे आस-पास वयस्कों द्वारा किए जाने वाले कार्यों का वर्गीकरण हम मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों के आधार पर कर सकते हैं जो निम्न प्रकार हैं- प्राथमिक क्षेत्र, द्वितीयक क्षेत्र तथा तृतीयक क्षेत्र।

प्रश्न 9. तृतीयक क्षेत्रक अन्य क्षेत्रकों से भिन्न कैसे है? सोदाहरण व्याख्या कीजिए।

उत्तर— तृतीयक क्षेत्रक अथवा सेवा क्षेत्रक में वे गतिविधियाँ सम्मिलित की जाती हैं जो प्राथमिक तथा द्वितीयक क्षेत्रक के विकास में सहायक होती हैं। तृतीयक क्षेत्रक अन्य क्षेत्रकों से इसलिए भिन्न होता है क्योंकि इस क्षेत्रक में किसी वस्तु का उत्पादन नहीं किया जाता है बल्कि विभिन्न प्रकार की सेवाओं को सम्मिलित किया जाता है जैसे चिकित्सक, वकील, अध्यापक द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं को तृतीयक क्षेत्रक में सम्मिलित किया जाता है। तृतीयक क्षेत्रक की क्रियाएँ प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्रक के विकास में योगदान देती हैं। उदाहरण के लिए संचार, परिवहन, बैंकिंग, भण्डार आदि के बिना प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्रक का विकास सम्भव नहीं है। अतः यह क्षेत्रक अन्य क्षेत्रकों को सेवाएँ उपलब्ध करवाता है।

प्रश्न 10. प्रच्छन्न बेरोजगारी से आप क्या समझते हैं? शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों से उदाहरण देकर व्याख्या कीजिए।

उत्तर— प्रच्छन्न बेरोजगारी-प्रच्छन्न बेरोजगारी को छिपी हुई बेरोजगारी भी कहा जाता है। यह अल्प बेरोजगारी का ही एक रूप है। इसमें व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुरूप पूरा कार्य नहीं मिलता है। इसमें व्यक्ति रोजगार पर लगा हुआ प्रतीत होता है किन्तु उस व्यक्ति का उत्पादन में कोई योगदान नहीं होता है। यदि उसे उस आर्थिक गतिविधि से हटा दिया जाए तो भी उत्पादन पर किसी प्रकार का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। प्रच्छन्न बेरोजगारी अथवा छिपी हुई बेरोजगारी प्रायः शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों दोनों में पाई जाती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में उदाहरण— प्रायः गाँवों में यह देखा जाता है कि एक खेत पर उस खेत के मालिक अथवा कृषक का पूरा परिवार कृषि कार्यों में लगा रहता है जबकि वास्तव में इतने लोगों की आवश्यकता नहीं होती है अतः उस खेत पर लगे अतिरिक्त लोगों में छिपी हुई अथवा प्रच्छन्न बेरोजगारी पाई जाती है।

शहरी क्षेत्रों में उदाहरण— प्रायः शहरी क्षेत्रों में कई लोगों को उनकी योग्यता के अनुसार पूरा रोजगार नहीं मिलता है जैसे-कई बार पढ़े-लिखे लोगों को रोजगार न मिलने के कारण वे मजदूरी करने लगते हैं। अतः वे प्रच्छन्न अथवा अल्प बेरोजगारी के अन्तर्गत आते हैं।

प्रश्न 11. खुली बेरोजगारी और प्रच्छन्न बेरोजगारी के बीच विभेद कीजिए।

(माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)

अथवा

खुली बेरोजगारी और प्रच्छन्न बेरोजगारी में अन्तर कीजिए।

(माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)

उत्तर— खुली बेरोजगारी और प्रच्छन्न बेरोजगारी के बीच निम्नलिखित अन्तर हैं-

(1) खुली बेरोजगारी का तात्पर्य उस स्थिति से है जिसमें योग्य व्यक्ति प्रचलित मजदूरी पर कार्य करना चाहते हैं किन्तु उन्हें रोजगार अथवा काम नहीं मिल पाता है अर्थात् वे पूरी तरह बेरोजगार रहते हैं। इसके विपरीत प्रच्छन्न बेरोजगारी में लोगों को उनकी योग्यता के अनुरूप पूरा काम नहीं मिल पाता है तथा वे रोजगार पर तो लगे होते हैं किन्तु उत्पादन में उनका कोई योगदान नहीं होता है।

(2) खुली बेरोजगारी स्थायी प्रकृति की होती है जबकि प्रच्छन्न बेरोजगारी अस्थायी प्रकृति की होती है।

(3) खुली बेरोजगारी प्रायः औद्योगिक क्षेत्रों में पाई जाती है, जबकि प्रच्छन्न बेरोजगारी प्रायः कृषि क्षेत्र में पाई जाती है।

(4) खुली बेरोजगारी ग्रामीण क्षेत्रों में भूमिहीन खेतिहर मजदूरों में भी पाई जाती है और प्रच्छन्न बेरोजगारी शहरी क्षेत्रों में छोटी-छोटी दुकानों व छोटे व्यवसायों में लगे परिवारों में भी पाई जाती है।

प्रश्न 12. "भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में तृतीयक क्षेत्रक कोई महत्त्वपूर्ण भूमिका नहीं निभा रहा है।" क्या आप इससे सहमत हैं? अपने उत्तर के समर्थन में कारण दीजिए।

उत्तर— हम इस कथन से सहमत नहीं हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में तृतीयक क्षेत्रक कोई महत्त्वपूर्ण भूमिका नहीं निभा रहा है। यदि हम आँकड़ों को देखें तो (i) भारत में जी.डी.पी. में तृतीयक क्षेत्रक का योगदान निरन्तर

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सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) कक्षा X 369

बढ़ रहा है। वर्ष 1973-74 में जी.डी.पी. में तृतीयक क्षेत्र का योगदान लगभग 48 प्रतिशत था, वह वर्ष 2013-14 में बढ़कर लगभग 68 प्रतिशत हो गया है। अतः वर्तमान में देश के आर्थिक विकास में तृतीयक क्षेत्र की भूमिका महत्त्वपूर्ण है। (ii) इस क्षेत्र में रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि हो रही है। वर्ष 1977-78 में रोजगार में तृतीयक क्षेत्र की हिस्सेदारी जहाँ 18 प्रतिशत थी, वहीं यह 2017-18 में बढ़कर 31 प्रतिशत हो गई। (iii) प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्र के विकास में भी तृतीयक क्षेत्र का योगदान महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्र को सेवाएँ उपलब्ध करता है।

प्रश्न 13. "भारत में सेवा क्षेत्रक दो विभिन्न प्रकार के लोग नियोजित करता है।" ये लोग कौन हैं?

उत्तर— भारत में सेवा क्षेत्रक दो विभिन्न प्रकार के लोग नियोजित करता है। ये लोग हैं-

(1) वे लोग जिनकी सेवाएँ प्रत्यक्ष रूप से वस्तुओं के उत्पादन में सहायता करती हैं। यह सहायता प्राथमिक एवं द्वितीयक दोनों ही क्षेत्रों को प्राप्त होती है। जैसे-परिवहन, भण्डारण, संचार, बैंकिंग, व्यापार में नियोजित लोग।

(2) वे लोग जिनकी सेवाएँ प्रत्यक्ष रूप से वस्तुओं के उत्पादन में सहायता नहीं करती हैं, जैसे-अध्यापक, डॉक्टर, वकील, धोबी, मोची, नाई, इंटरनेट कैफे, ए.टी.एम. बूथ, कॉल सेन्टर, सॉफ्टवेयर कम्पनी आदि।

प्रश्न 14. "असंगठित क्षेत्रक में श्रमिकों का शोषण किया जाता है।" क्या आप इस विचार से सहमत हैं? अपने उत्तर के समर्थन में कारण दीजिए।

उत्तर— हाँ, मैं इस विचार से सहमत हूँ कि असंगठित क्षेत्रक में श्रमिकों का शोषण किया जाता है। इसके समर्थन में निम्नलिखित तर्क दिए जा सकते हैं-

(i) इस क्षेत्रक में श्रमिकों के संरक्षण के लिए बनाए गए सरकारी नियमों एवं विनियमों का पालन नहीं होता है।

(ii) इस क्षेत्रक में श्रमिकों को बहुत कम मजदूरी/वेतन दिया जाता है और उसे भी नियमित रूप से नहीं दिया जाता है।

(iii) इस क्षेत्रक में अतिरिक्त समय में काम तो लिया जाता है, लेकिन अतिरिक्त वेतन नहीं दिया जाता है।

(iv) इस क्षेत्रक में रोजगार की सुरक्षा भी नहीं होती है। नियोक्ता द्वारा कर्मचारियों को बिना किसी कारण के काम से निकाला जा सकता है।

(v) इस क्षेत्रक में सवेतन छुट्टी, अवकाश, बीमारी के कारण छुट्टी का कोई प्रावधान नहीं है।

प्रश्न 15. अर्थव्यवस्था में गतिविधियाँ रोजगार की परिस्थितियों के आधार पर कैसे वर्गीकृत की जाती हैं?

उत्तर— अर्थव्यवस्था में गतिविधियाँ रोजगार की परिस्थितियों के आधार पर निम्न दो भागों में विभाजित की जा सकती हैं-

(1) संगठित क्षेत्रक-संगठित क्षेत्र में वे उद्यम अथवा कार्य स्थान आते हैं जहाँ रोजगार की अवधि नियमित होती है और इसलिए लोगों के पास सुनिश्चित काम होता है। वे क्षेत्रक सरकार द्वारा पंजीकृत होते हैं और उन्हें सरकारी नियमों एवं विनियमों की अनुपालना करनी होती है।

(2) असंगठित क्षेत्रक-असंगठित क्षेत्रक में छोटे-छोटे एवं बिखरे हुए उद्यमों को शामिल किया जाता है जहाँ सरकार का कोई नियन्त्रण नहीं होता है। इस क्षेत्रक के नियम और विनियम तो होते हैं परन्तु उनका अनुपालन नहीं होता है। इसमें रोजगार नियमित तथा सुरक्षित नहीं होता है।

प्रश्न 16. संगठित और असंगठित क्षेत्रकों में विद्यमान रोजगार परिस्थितियों की तुलना करें।

उत्तर— संगठित और असंगठित क्षेत्रकों में विद्यमान रोजगार परिस्थितियों की तुलना निम्न आधार पर की जा सकती है-

(1) रोजगार की सुरक्षा-संगठित क्षेत्रक में श्रमिकों को नियमित रोजगार उपलब्ध होता है जबकि असंगठित क्षेत्रक में श्रमिकों को रोजगार के सम्बन्ध में असुरक्षा रहती है।

(2) सरकार का नियन्त्रण-संगठित क्षेत्रक में प्रायः सरकार का नियन्त्रण होता है जबकि असंगठित क्षेत्रक में सरकार का कोई नियन्त्रण नहीं होता है।

(3) सरकारी नियम एवं विनियम-संगठित क्षेत्रक में सरकारी नियमों एवं विनियमों का अनुपालन किया जाता है जबकि असंगठित क्षेत्रों में इनका पालन नहीं किया जाता है।

(4) सुविधाएँ-संगठित क्षेत्रक के अन्तर्गत कर्मचारी मासिक वेतन के अतिरिक्त विभिन्न प्रकार के भत्ते, समर्पित अवकाश का भुगतान, प्रोविडेंट फंड, चिकित्सीय लाभ, वार्षिक वेतन वृद्धि आदि सुविधाएँ प्राप्त करते हैं, जबकि असंगठित क्षेत्रक के अन्तर्गत श्रमिकों को दैनिक मजदूरी के अतिरिक्त अन्य कोई भत्ता नहीं मिलता।

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( 5 ) कार्य अवधि-संगठित क्षेत्रक में कार्य करने की अवधि निश्चित होती है जबकि असंगठित क्षेत्रक में कार्य अवधि निश्चित नहीं होती है।

( 6 ) श्रम संघ-असंगठित क्षेत्रक में श्रम संघों का अभाव पाया जाता है जबकि संगठित क्षेत्रक में श्रम संघ महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

( 7 ) पेंशन-संगठित क्षेत्रक के कर्मचारी जब सेवानिवृत्त होते हैं तो वे पेंशन या प्रोविडेंट फण्ड का लाभ प्राप्त करते हैं, जबकि असंगठित क्षेत्रक के कर्मचारियों को ये लाभ नहीं मिलते हैं।

प्रश्न 17. मनरेगा 2005 (MGNREGA 2005) के उद्देश्यों की व्याख्या कीजिए।

अथवा

महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण गारंटी अधिनियम के उद्देश्य लिखिए। ( प्रश्न बैंक )

उत्तर— भारत में केन्द्र सरकार ने भारत के लगभग 625 जिलों में काम का अधिकार लागू करने के लिए एक कानून बनाया है। इसे महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) 2005 कहते हैं। इस कानून के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में उन सभी लोगों को, जो काम करने में सक्षम हैं तथा जो काम करना चाहते हैं उन्हें सरकार द्वारा एक वर्ष में 100 दिन के रोजगार की गारण्टी दी गई है, यही इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है। यदि सरकार रोजगार उपलब्ध करवाने में असफल रहती है तो लोगों को बेरोजगारी भत्ता देगी। इस अधिनियम में उन कार्यों को वरीयता दी गई है जिनसे भविष्य में भूमि से उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।

प्रश्न 18. अपने क्षेत्र से उदाहरण लेकर सार्वजनिक और निजी क्षेत्रक की गतिविधियों एवं कार्यों की तुलना तथा वैषम्य कीजिए।

अथवा

सार्वजनिक क्षेत्र एवं निजी क्षेत्र में कोई तीन अन्तर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर— (1) सार्वजनिक क्षेत्र के अन्तर्गत आर्थिक गतिविधियों पर सरकार का स्वामित्व एवं नियन्त्रण होता है तथा ये गतिविधियाँ सरकार द्वारा चलाई जाती हैं, जैसे-रेल विभाग एक सार्वजनिक उपक्रम है। इसके विपरीत निजी क्षेत्रक में आर्थिक गतिविधियों पर निजी व्यक्तियों का स्वामित्व एवं नियन्त्रण होता है तथा वे निजी हित हेतु उन आर्थिक गतिविधियों का संचालन करते हैं, जैसे-हमारे पास स्थित ICICI बैंक एक निजी क्षेत्र का उपक्रम है।

(2) सार्वजनिक क्षेत्र का उद्देश्य सार्वजनिक कल्याण में वृद्धि करना होता है, जबकि निजी क्षेत्रक की गतिविधियों का उद्देश्य लाभ अर्जित करना होता है।

(3) सार्वजनिक क्षेत्र में किए गए व्यय की भरपाई सरकार करों के माध्यम से करती है जबकि निजी क्षेत्र में किए गए ऐसे व्ययों की भरपाई लाभ में से की जाती है।

वैषम्य—

(i) कुछ गतिविधियों पर सरकार के समर्थन की आवश्यकता होती है, जैसे-उत्पादन लागत पर बिजली की बिक्री से बहुत से उद्योगों में वस्तुओं की उत्पादन लागत में वृद्धि हो सकती है, इससे अनेक बन्द हो सकती हैं। इसलिए इन इकाइयों को चलाए रखने के लिए सरकार लागत का कुछ अंश वहन कर सकती है।

(ii) भारत सरकार किसानों से उचित मूल्य पर गेहूँ और चावल आदि खरीदकर गोदामों में भण्डारण कर राशन की दुकानों के माध्यम से उपभोक्ताओं को कम मूल्य पर बेचती है।

प्रश्न 19. अपने क्षेत्र से एक-एक उदाहरण देकर निम्न तालिका को पूरा कीजिए और चर्चा कीजिए :

सुव्यवस्थित प्रबन्ध वाले संगठन

कुव्यवस्थित प्रबन्ध वाले संगठन

सार्वजनिक क्षेत्रक

निजी क्षेत्रक

उत्तर—

क्षेत्रक

सुव्यवस्थित प्रबन्ध वाले संगठन

कुव्यवस्थित प्रबन्ध वाले संगठन

सार्वजनिक क्षेत्रक

स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया

राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम आगार-भरतपुर

निजी क्षेत्रक

आई.सी.आई.सी.आई. बैंक

सेठी फाइनेंस कार्पोरेशन, जयपुर

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सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) कक्षा X 371

प्रश्न 20. सार्वजनिक क्षेत्रक की गतिविधियों के कुछ उदाहरण दीजिए और व्याख्या कीजिए कि सरकार द्वारा इन गतिविधियों का कार्यान्वयन क्यों किया जाता है?

उत्तर— सार्वजनिक क्षेत्रक में वे गतिविधियाँ आती हैं जिन पर सरकार का स्वामित्व एवं नियन्त्रण होता है। उदाहरण के लिए भारतीय रेलवे, भारत संचार निगम लिमिटेड, सवाई मानसिंह चिकित्सालय, भारतीय खाद्य निगम आदि। सरकार इन गतिविधियों का क्रियान्वयन सामाजिक कल्याण हेतु करती है। सरकार इन गतिविधियों के माध्यम से लोगों की सुविधाएँ बढ़ाकर उनका जीवन स्तर उठाने का प्रयास करती है। इन गतिविधियों के माध्यम से सरकार उचित मूल्य पर या निःशुल्क लोगों की आवश्यकताएँ पूरी करती है। इन गतिविधियों के अन्तर्गत सरकार रेलवे, चिकित्सा, शिक्षा, सड़क निर्माण, पुल निर्माण आदि गतिविधियों का संचालन करती है।

प्रश्न 21. व्याख्या कीजिए कि एक देश के आर्थिक विकास में सार्वजनिक क्षेत्रक कैसे योगदान करता है?

उत्तर— एक देश के आर्थिक विकास में सार्वजनिक क्षेत्रक की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है जिसे निम्न बिन्दुओं से स्पष्ट किया जा सकता है-

(1) आधारभूत सुविधाओं का विस्तार— सरकार अनेक कार्य करती है तथा देश में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करती है जैसे सड़कों एवं रेल परिवहन का विस्तार, संचार सुविधाओं का विस्तार, पत्तनों, बिजली आदि का निर्माण और बाँध आदि से सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराना आदि। सरकार ऐसे भारी व्यय स्वयं उठाकर सभी लोगों के लिए इन सुविधाओं को सुनिश्चित करती है।

(2) सामाजिक कल्याण— सरकार समाज के कल्याण हेतु लोगों को अनेक सार्वजनिक सेवाएँ उपलब्ध करवाती है। जैसे-सरकार बिजली के लागत का कुछ अंश वहन कर लघु इकाइयों को बंद होने से बचाने के लिए, उस दर पर बिजली वितरण करती है जिस पर उद्योग बिजली खरीद सकते हैं। इसी प्रकार सरकार किसानों से उचित मूल्य पर गेहूँ व चावल खरीदकर राशन की दुकानों के माध्यम से उपभोक्ताओं को कम मूल्य पर बेचती है। इस प्रकार वह किसानों व उपभोक्ताओं दोनों को सहायता पहुँचाती है।

(3) गरीबी एवं बेरोजगारी निवारण— सार्वजनिक क्षेत्रक देश में गरीबी एवं बेरोजगारी दूर करने हेतु अनेक प्रयास करता है जो निजी क्षेत्र में संभव नहीं हैं।

(4) लोगों के जीवन स्तर में सुधार— सार्वजनिक क्षेत्रक में सरकार ऐसी अनेक गतिविधियाँ चलाती है जिनसे लोगों का जीवन स्तर उठाने में मदद मिलती है। जैसे-सभी के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाएँ उपलब्ध कराना; सुरक्षित पेय जल उपलब्ध कराना, निर्धनों के लिए आवासीय सुविधाएँ और भोजन एवं पोषण पर ध्यान देना आदि। इस प्रकार सरकार सार्वजनिक क्षेत्रकों के द्वारा मानव विकास के सभी पक्षों पर ध्यान देकर लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने का प्रयत्न करती है।

(5) पूँजी निर्माण— सार्वजनिक क्षेत्रक अधिक पूँजी निवेश द्वारा पूँजी निर्माण की दर में वृद्धि करने में सहायक है।

(6) औद्योगिक विकास— देश में औद्योगिक ढाँचे के विकास में भी सार्वजनिक क्षेत्रक की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है।

प्रश्न 22. असंगठित क्षेत्रक के श्रमिकों को निम्नलिखित मुद्दों पर संरक्षण की आवश्यकता है-मजदूरी, सुरक्षा और स्वास्थ्य। उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।

उत्तर— असंगठित क्षेत्रक में श्रमिकों को बहुत कम मजदूरी दी जाती है तथा अधिक समय तक काम करवाया जाता है तथा उन्हें कभी भी रोजगार से निकाला जा सकता है। श्रमिकों के संरक्षण हेतु असंगठित क्षेत्र में कोई भी सुरक्षा उपाय नहीं अपनाये जाते हैं। दुर्घटनाओं के समय होने वाली हानि को उन्हें स्वयं ही वहन करना पड़ता है। अतः वे सदैव असुरक्षित रहते हैं तथा उनके चिकित्सा व स्वास्थ्य सम्बन्धी कोई प्रावधान नहीं किए जाते हैं। किसी भी बीमारी के समय उन्हें निजी चिकित्सकों से स्वयं के खर्चे पर ही इलाज करवाना पड़ता है। अतः इस क्षेत्र में सरकारी नियन्त्रण की आवश्यकता है। इन क्षेत्रों को रोजगार सम्बन्धी कुछ नियमों का पालन करने हेतु बाध्य किया जाना चाहिए।

प्रश्न 23. अहमदाबाद में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि नगर के 15,00,000 श्रमिकों में से 11,00,000 श्रमिक असंगठित क्षेत्रक में काम करते थे। वर्ष 1997-98 में नगर की कुल आय 600 करोड़ रुपये

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थी। इसमें से 320 करोड़ रुपये संगठित क्षेत्रक से प्राप्त होती थी। इस आँकड़े को तालिका में प्रदर्शित कीजिए।

नगर में और अधिक रोजगार सृजन के लिए किन तरीकों पर विचार किया जाना चाहिए?

उत्तर— सारणी : अहमदाबाद शहर में श्रमिक वर्गीकरण (वर्ष 1997-98)

मद

संगठित क्षेत्रक

असंगठित क्षेत्रक

कुल

श्रमिक

4,00,000

11,00,000

15,00,000

आय

320 करोड़

280 करोड़

600 करोड़

उपर्युक्त तालिका से स्पष्ट है कि अहमदाबाद शहर में अधिकांश श्रमिक असंगठित क्षेत्रक में कार्यरत हैं तथा उनसे अर्जित आय भी संगठित क्षेत्रक की तुलना में कम है।

अतः इस नगर में संगठित क्षेत्र में रोजगार के अवसरों में और अधिक वृद्धि हेतु प्रयास किए जाने चाहिए। विशेष रूप से सार्वजनिक उपक्रमों की स्थापना की जानी चाहिए। सरकार को सड़क, पुल, सम्पर्क मार्ग, विद्यालय भवन, व्यावसायिक भवनों के निर्माण, अस्पताल आदि पर निवेश बढ़ाया जाना चाहिए। यहाँ तृतीयक क्षेत्र का पर्याप्त मात्रा में विकास किया जाना चाहिए। बैंक, बीमा, डाकघर, परिवहन, संचार, स्वास्थ्य, चिकित्सा, शैक्षणिक सेवाएँ आदि का पर्याप्त विकास किया जाना चाहिए ताकि संगठित क्षेत्रक में रोजगार के अधिक अवसर सृजित किए जा सकें। दूसरी तरफ, असंगठित क्षेत्र में भी रोजगार के विस्तार के प्रयास किए जाने चाहिए। इसके लिए सरकार को कम ब्याज दरों के साथ-साथ आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराना चाहिए ताकि लोग अपना व्यवसाय प्रारंभ कर सकें। लघु एवं कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए तथा उत्पादन में श्रम-गहन तकनीकों को अपनाया जाना चाहिए।

प्रश्न 24. निम्नलिखित तालिका में तीनों क्षेत्रकों का सकल घरेलू उत्पाद (स.घ.उ.-जी.डी.पी.) रुपये (करोड़) में दिया गया है :

वर्ष

प्राथमिक

द्वितीयक

तृतीयक

2000

52,000

48,500

1,33,500

2013

8,00,500

10,74,000

38,68,000

(क) वर्ष 2000 एवं 2013 के लिए स.घ.उ. में तीनों क्षेत्रकों की हिस्सेदारी की गणना कीजिए।

(ख) इन आँकड़ों को अध्याय में दिए आलेख 2 के समान एक दण्ड आलेख के रूप में प्रदर्शित कीजिए।

(ग) दण्ड आलेख से हम क्या निष्कर्ष प्राप्त करते हैं?

उत्तर— (क) वर्ष 2000 एवं 2013 के लिए स.घ.उ. (जी.डी.पी.) में तीनों क्षेत्रकों की हिस्सेदारी निम्न प्रकार है—

क्षेत्रक

2000

2013

प्राथमिक क्षेत्रक की हिस्सेदारी

$\frac{52,000}{2,34,000} \times 100 = 22.22\%$

$\frac{8,00,500}{57,42,500} \times 100 = 13.94\%$

द्वितीयक क्षेत्रक की हिस्सेदारी

$\frac{48,500}{2,34,000} \times 100 = 20.73\%$

$\frac{10,74,000}{57,42,500} \times 100 = 18.70\%$

तृतीयक क्षेत्रक की हिस्सेदारी

$\frac{1,33,500}{2,34,000} \times 100 = 57.05\%$

$\frac{38,68,000}{57,42,500} \times 100 = 67.36\%$

कुल

100%

100%

2000 में कुल जी.डी.पी. = 52,000 + 48,500 + 1,33,500 = 2,34,000

2013 में कुल जी.डी.पी. = 8,00,500 + 10,74,000 + 38,68,000 = 57,42,500

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सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) कक्षा X 373

(ख) दण्ड-आलेख : जी.डी.पी. में क्षेत्रकों की हिस्सेदारी (प्रतिशत में)

[दण्ड-आलेख : जी.डी.पी. में क्षेत्रकों की हिस्सेदारी (प्रतिशत में)]

कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान पाठ 19 भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक चित्र 4

संकेत:

  • प्राथमिक क्षेत्रक
  • द्वितीयक क्षेत्रक
  • तृतीयक क्षेत्रक

(ग) दण्ड-आलेख से निष्कर्ष- वर्ष 2000 से 2013 में जी.डी.पी. में तीनों क्षेत्रकों की हिस्सेदारी में काफी परिवर्तन हुआ है। वर्ष 2000 में जी.डी.पी. में प्राथमिक क्षेत्रक का योगदान 22.22% था वह वर्ष 2013 में घटकर 13.94% ही रह गया। द्वितीयक क्षेत्रक का जी.डी.पी. में योगदान 2000 में 20.73% था वह 2013 में घटकर 18.70% रह गया। इसी प्रकार वर्ष 2000 में तृतीयक क्षेत्रक का योगदान 57.05% था वह वर्ष 2013 में बढ़कर 67.36% हो गया है। अतः देश में जी.डी.पी. में तृतीयक क्षेत्र के योगदान में महत्त्वपूर्ण वृद्धि हुई।

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भाग 2 — रिवीजन नोट्स (Notes & Summary)

📝 2. नोट्स: पाठ-सार, मुख्य बिंदु एवं शब्दावली

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं, भौगोलिक परिभाषाएं, राजनीतिक सिद्धांत एवं संपूर्ण अध्याय का सारगर्भित सारांश।

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पाठ-सार

किसी भी अर्थव्यवस्था को सही तरीके से समझने हेतु उस अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रकों का अध्ययन करना आवश्यक है।

आर्थिक कार्यों के क्षेत्रक— अर्थव्यवस्था में विभिन्न आर्थिक गतिविधियों को निम्न तीन क्षेत्रकों में विभाजित कर अध्ययन किया जा सकता है-

(1) प्राथमिक क्षेत्रक— इस क्षेत्रक में वे गतिविधियाँ सम्मिलित की जाती हैं जिनमें उत्पादन प्रकृति पर निर्भर होता है। इसमें कृषि, डेयरी, मत्स्यन, वन उत्पाद आदि को शामिल किया जाता है।

(2) द्वितीयक क्षेत्रक— द्वितीयक क्षेत्रक की गतिविधियों के अन्तर्गत प्राकृतिक उत्पादों को विनिर्माण प्रणाली के द्वारा अन्य रूपों में परिवर्तित किया जाता है। जैसे गन्ने से चीनी एवं गुड़ बनाना।

(3) तृतीयक क्षेत्रक— प्राथमिक तथा द्वितीयक क्षेत्रक की गतिविधियों के अतिरिक्त अन्य गतिविधियों को तृतीयक क्षेत्रक में शामिल किया जाता है। जैसे परिवहन, भण्डारण, संचार, व्यापार, बैंकिंग सेवाएँ इत्यादि।

तीन क्षेत्रकों की तुलना— किसी भी देश के कुल उत्पादन की गणना करने में तीनों क्षेत्रकों के उत्पादन का योग किया जाता है। किसी देश के राष्ट्रीय उत्पाद अथवा आय का तात्पर्य एक वर्ष में तीनों क्षेत्रकों द्वारा उत्पादित अन्तिम वस्तुओं तथा सेवाओं के बाजार मूल्य के योग से है। राष्ट्रीय आय में इन क्षेत्रकों के योगदान में देश के विकास के आधार पर परिवर्तन होता रहता है। विकास की प्रारम्भिक अवस्था में प्राथमिक क्षेत्रक का योगदान अधिक रहता है तथा विकास के साथ-साथ विनिर्माण क्षेत्रक का योगदान बढ़ता है तथा विकसित देशों में सेवा क्षेत्रक का योगदान सर्वाधिक रहता है।

भारत में प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रक— भारत में पहले प्राथमिक क्षेत्रक का योगदान सबसे अधिक था किन्तु विकास के साथ-साथ वर्तमान में सेवा क्षेत्रक का योगदान सबसे अधिक हो गया है। किन्तु वर्तमान में भी भारत के अधिकांश लोग कृषि तथा सहायक क्षेत्रक में ही नियोजित हैं हालांकि पहले से यह अनुपात कुछ कम हुआ है। भारत में कृषि में बेरोजगारी पाई जाती है जिसमें अल्प बेरोजगारी प्रमुख है। इसे कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाकर कम किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योगों की स्थापना करके भी रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं। सरकार ने भी रोजगार उपलब्ध करवाने हेतु कई कार्यक्रम चला रखे हैं।

संगठित और असंगठित के रूप में क्षेत्रकों का विभाजन— एक अन्य आधार पर आर्थिक कार्यों को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है- संगठित क्षेत्रक तथा असंगठित क्षेत्रक। संगठित क्षेत्रक में वे उद्यम अथवा कार्य स्थान आते हैं जहाँ रोजगार की अवधि नियमित होती है तथा विभिन्न नियमों व विनियमों का पालन किया जाता है। जबकि असंगठित क्षेत्रक में छोटी-छोटी एवं बिखरी इकाइयाँ होती हैं जिन पर प्रायः सरकार का नियन्त्रण नहीं होता है। वर्तमान में देश में असंगठित क्षेत्रक के कर्मचारियों का संरक्षण करना आवश्यक है। सरकार इस क्षेत्र के कर्मचारियों के संरक्षण हेतु अनेक प्रयास कर रही है।

स्वामित्व आधारित क्षेत्रक—सार्वजनिक और निजी क्षेत्रक— स्वामित्व के आधार पर आर्थिक गतिविधियों को सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रक में विभाजित किया जा सकता है। सार्वजनिक क्षेत्रक में परिसम्पत्तियों का स्वामित्व एवं सेवाओं का संचालन सरकार के हाथ में होता है जबकि निजी क्षेत्रक में यह निजी व्यक्तियों के हाथ में होता है।

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भाग 3 — परीक्षा उपयोगी प्रश्न (Important Questions)

3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर एवं बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक, लघूत्तरात्मक एवं निबंधात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

● बहुविकल्पीय प्रश्न-

प्रश्न 1. आर्थिक कार्यों के आधार पर किसी देश की अर्थव्यवस्था को विभाजित किया जा सकता है-

(अ) प्राथमिक क्षेत्रक (ब) द्वितीयक क्षेत्रक (स) तृतीयक क्षेत्रक (द) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 2. प्राथमिक क्षेत्रक में सम्मिलित आर्थिक गतिविधि है-

(अ) कृषि (ब) डेयरी (स) मत्स्यन (द) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 3. निम्न में से कौनसी क्रिया अथवा कार्य तृतीयक क्षेत्रक का नहीं है?

(अ) बैंकिंग (ब) कृषि (स) संचार (द) परिवहन

प्रश्न 4. उद्योगों को किस क्षेत्रक में सम्मिलित किया जाता है?

अथवा

औद्योगिक क्षेत्रक कहा जाता है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)

(अ) प्राथमिक क्षेत्रक (ब) द्वितीयक क्षेत्रक (स) तृतीयक क्षेत्रक (द) चतुर्थ क्षेत्रक

प्रश्न 5. विकसित देशों के जी.डी.पी. में सर्वाधिक योगदान किस क्षेत्रक का होता है?

(अ) प्राथमिक क्षेत्रक का (ब) द्वितीयक क्षेत्रक का

(स) तृतीयक क्षेत्रक का (द) विनिर्माण क्षेत्रक का

प्रश्न 6. किसी देश के भीतर किसी विशेष वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य क्या कहलाता है?

(अ) सकल घरेलू उत्पाद (ब) शुद्ध घरेलू उत्पाद (स) प्रति व्यक्ति आय (द) सकल घरेलू खर्च

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7. भारत में सबसे बड़ा नियोक्ता कौनसा क्षेत्रक है?

(अ) प्राथमिक क्षेत्रक (ब) द्वितीयक क्षेत्रक (स) तृतीयक क्षेत्रक (द) इनमें से कोई नहीं

8. अल्प बेरोजगारी मुख्यतः कहाँ पाई जाती है?

(अ) व्यापार में (ब) कृषि में (स) डॉक्टरी में (द) इंजीनियरिंग में

9. भारत का सर्वाधिक रोजगार क्षेत्रक है- (प्रश्न बैंक)

(अ) सेवा क्षेत्र (ब) कृषि क्षेत्र (स) औद्योगिक क्षेत्र (द) उपर्युक्त में से कोई नहीं

10. निम्न में से निजी क्षेत्रक का उदाहरण है-

(अ) भारतीय रेलवे (ब) डाकघर

(स) रिलायंस इण्डस्ट्रीज लिमिटेड (द) उपर्युक्त सभी

11. म.गाँ.रा.ग्रा.रो.गा. अधिनियम कब बनाया गया?

(अ) 1992 (ब) 1996 (स) 2002 (द) 2005

12. आर्थिक कार्यों के प्राथमिक क्षेत्रक को कहा जाता है-

(अ) कृषि एवं सहायक क्षेत्रक (ब) औद्योगिक क्षेत्रक

(स) सेवा क्षेत्रक (द) उपर्युक्त में से कोई नहीं

13. किस क्षेत्रक की गतिविधियाँ प्राकृतिक संसाधनों के प्रत्यक्ष उपभोग पर आधारित है?

अथवा

एक वस्तु का अधिकांशतः प्राकृतिक प्रक्रिया से उत्पादन किस क्षेत्र की गतिविधि है?

(माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)

(अ) प्राथमिक (ब) द्वितीयक (स) तृतीयक (द) उपरोक्त सभी

14. आर्थिक कार्यों का द्वितीयक क्षेत्रक क्रमशः विभिन्न प्रकार के उद्योगों से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे कहा जाता है-

(अ) कृषि एवं सहायक क्षेत्रक (ब) औद्योगिक क्षेत्रक

(स) सेवा क्षेत्रक (द) संचार क्षेत्रक

15. निम्न में से कौनसी गतिविधि तृतीयक क्षेत्रक के अन्तर्गत नहीं आती है?

(अ) परिवहन (ब) भण्डारण (स) भवन निर्माण (द) बैंक सेवाएँ

16. जो आर्थिक गतिविधियाँ स्वतः वस्तुओं का उत्पादन नहीं करती हैं, वे संबंधित हैं-

(अ) कृषि एवं सहायक क्षेत्रक से (ब) औद्योगिक क्षेत्रक से

(स) सेवा क्षेत्रक से (द) उपर्युक्त में से कोई नहीं

17. विकास की प्रारंभिक अवस्थाओं में आर्थिक सक्रियता का सबसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रक रहा है-

(अ) प्राथमिक क्षेत्रक (ब) द्वितीयक क्षेत्रक

(स) सेवा क्षेत्रक (द) उपर्युक्त में से कोई नहीं

18. जिस वर्ष में भारत में प्राथमिक क्षेत्र को प्रतिस्थापित करते हुए तृतीयक क्षेत्र सबसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रक के रूप में उभरा, वह वर्ष था-

(अ) 2008-09 (ब) 2009-10 (स) 2011-12 (द) 2013-14

19. उन लोगों की बेरोजगारी, जिनके पास कोई रोजगार नहीं है और बेकार बैठे हुए हैं, कहलाती है-

(अ) अल्प बेरोजगारी (ब) खुली बेरोजगारी (स) प्रच्छन्न बेरोजगारी (द) मौसमी बेरोजगारी

20. निम्न में जो विशेषता संगठित क्षेत्र की नहीं है, वह है-

(अ) ये क्षेत्रक सरकार द्वारा पंजीकृत होते हैं।

(ब) उन्हें सरकारी नियमों, विनियमों का अनुपालन करना होता है।

(स) इसके कर्मचारियों को रोजगार सुरक्षा के लाभ मिलते हैं।

(द) यहाँ अतिरिक्त समय में काम करने, सवेतन छुट्टी, अवकाश का कोई प्रावधान नहीं है।

21. निम्न में कौनसी असंगठित क्षेत्र की विशेषता नहीं है-

(अ) इसकी छोटी-छोटी बिखरी इकाइयाँ होती हैं।

(ब) इसकी इकाइयाँ अधिकांशतः सरकारी नियंत्रण से बाहर होती हैं।

(स) ये कम वेतन वाले अनियमित रोजगार हैं।

--- [ पृष्ठ संख्या: 382 ] ---

सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) कक्षा X 375

(द) इनमें सवैतनिक छुट्टी व अवकाश काल में भुगतान का लाभ मिलता है।

22. भारत में कितने प्रतिशत ग्रामीण परिवार छोटे और सीमान्त किसानों की श्रेणी में आते हैं?

(अ) 50 प्रतिशत (ब) 30 प्रतिशत (स) 40 प्रतिशत (द) 80 प्रतिशत

23. द्वितीयक क्षेत्र से संबंधित व्यवसाय है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)

(अ) उद्योग (ब) बैंकिंग (स) संचार सेवाएँ (द) भण्डारण सेवाएँ

24. निम्न में कौनसा देश सस्ता विनिर्माण केन्द्र का उदाहरण है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)

(अ) इंग्लैंड (ब) चीन (स) ऑस्ट्रेलिया (द) अमेरिका

25. भारत में ग्रामीण क्षेत्र में किस क्षेत्रक का सर्वाधिक योगदान है-

(अ) प्राथमिक क्षेत्रक (ब) द्वितीयक क्षेत्रक (स) तृतीयक क्षेत्रक (द) उपर्युक्त सभी

26. निम्न में से कौनसी एक असंगठित क्षेत्रक से संबंधित गतिविधि है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)

(अ) विद्यालय में शिक्षक (ब) कारखाने में श्रमिक

(स) अस्पताल में डॉक्टर (द) दैनिक मजदूरी वाला श्रमिक

27. कौनसा विकास सेवा क्षेत्र को व्यक्त नहीं करता है? (प्रश्न बैंक)

(अ) डेयरी उत्पादन (ब) परिवहन (स) भण्डारण (द) संचार

28. 'सकल' घरेलू उत्पाद है- (प्रश्न बैंक)

(अ) कृषि क्षेत्र + औद्योगिक क्षेत्र (ब) औद्योगिक क्षेत्र + सेवा क्षेत्र

(स) कृषि क्षेत्र + औद्योगिक क्षेत्र + सेवा क्षेत्र (द) कृषि क्षेत्र + सेवा क्षेत्र

29. भारत में सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्र है- (प्रश्न बैंक)

(अ) कृषि क्षेत्र (ब) औद्योगिक क्षेत्र (स) सेवा क्षेत्र (द) उपर्युक्त में से कोई नहीं

उत्तरमाला

1. (द) 2. (द) 3. (ब) 4. (ब) 5. (स) 6. (अ) 7. (अ)

8. (ब) 9. (ब) 10. (स) 11. (द) 12. (अ) 13. (अ) 14. (ब)

15. (स) 16. (स) 17. (अ) 18. (द) 19. (ब) 20. (द) 21. (द)

22. (द) 23. (अ) 24. (ब) 25. (अ) 26. (द) 27. (अ) 28. (स)

29. (स)।

● रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

1. ......... क्षेत्र अन्य क्षेत्रों के विकास में मदद पहुँचाता है।

2. अंतिम वस्तुओं के मूल्य में .......... वस्तुओं का मूल्य पहले से ही शामिल होता है।

3. भारत में .......... प्रतिशत जनसंख्या 5-29 वर्ष आयु की है।

4. ......... क्षेत्रक के कर्मचारियों को रोजगार-सुरक्षा के लाभ मिलते हैं।

5. असंगठित क्षेत्रक अधिकांशतः .......... नियंत्रण से बाहर होता है।

6. किसी देश के भीतर किसी विशेष वर्ष में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य ........ कहलाता है। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)

7. तृतीयक क्षेत्रक को............भी कहा जाता है। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022, 2024)

8. ............. क्षेत्रक को कृषि एवं संबंधित क्षेत्रक भी कहा जाता है। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)

9. भारत में छिपी हुई बेरोजगारी सबसे अधिक ................. क्षेत्रक में पाई जाती है।

10. आर्थिक एवं सामाजिक विकास के लिए ................. क्षेत्रक के श्रमिकों को संरक्षण और सहायता अनिवार्य है।

11. एक वस्तु का प्राकृतिक संसाधनों से उत्पादन ................. क्षेत्रक की गतिविधि है। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)

उत्तरमाला

1. तृतीयक 2. मध्यवर्ती 3. 60 4. संगठित 5. सरकारी

6. सकल घरेलू उत्पाद 7. सेवा क्षेत्र 8. प्राथमिक 9. प्राथमिक 10. असंगठित

11. प्राथमिक

--- [ पृष्ठ संख्या: 383 ] ---

● अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. प्राथमिक क्षेत्र की कोई दो गतिविधियों के उदाहरण दीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)

उत्तर— (1) कृषि कार्य (2) मछली पकड़ना।

प्रश्न 2. तृतीयक क्षेत्रक की किन्हीं दो सेवाओं के नाम लिखिए।

अथवा

तृतीयक क्षेत्र में शामिल की जाने वाली किन्हीं दो गतिविधियों के नाम बताइए।

उत्तर— (1) संचार (2) बैंकिंग।

प्रश्न 3. किसी बैंक में कार्यरत मैनेजर को किस क्षेत्रक में शामिल किया जाएगा?

उत्तर— तृतीयक क्षेत्रक में।

प्रश्न 4. वर्तमान में भारत की राष्ट्रीय आय में सर्वाधिक योगदान किस क्षेत्रक का है?

उत्तर— तृतीयक क्षेत्रक का।

प्रश्न 5. वर्तमान में किस क्षेत्रक में परिसम्पत्तियों का स्वामित्व एवं सेवाओं का संचालन सरकार के हाथ में होता है?

उत्तर— सार्वजनिक क्षेत्रक।

प्रश्न 6. भारत में सार्वजनिक क्षेत्रक का कोई एक उदाहरण दीजिए।

उत्तर— भारतीय रेलवे।

प्रश्न 7. कार्यों के आधार पर अर्थव्यवस्था को कितने भागों में विभाजित किया गया है?

उत्तर— कार्यों के आधार पर अर्थव्यवस्था को तीन भागों में विभाजित किया गया है-(1) प्राथमिक क्षेत्रक (2) द्वितीयक क्षेत्रक (3) तृतीयक क्षेत्रक।

प्रश्न 8. प्राथमिक क्षेत्र किसे कहते हैं?

अथवा

प्राथमिक क्षेत्रक से आप क्या समझते हैं? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)

उत्तर— जब हम प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके किसी वस्तु का उत्पादन करते हैं तो इसे प्राथमिक क्षेत्र अथवा प्राथमिक क्षेत्रक की गतिविधि कहते हैं।

प्रश्न 9. 'सेवा क्षेत्र' के कोई चार उदाहरण दीजिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— सेवा क्षेत्र के चार उदाहरण हैं-(i) शिक्षक, (ii) डॉक्टर, (iii) धोबी, (iv) नाई।

प्रश्न 10. द्वितीयक क्षेत्रक से आपका क्या अभिप्राय है?

उत्तर— द्वितीयक क्षेत्रक की गतिविधियों के अन्तर्गत प्राकृतिक उत्पादों को विनिर्माण प्रणाली के जरिए अन्य रूपों में परिवर्तित किया जाता है।

प्रश्न 11. तृतीयक क्षेत्र से आप क्या समझते हैं? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)

उत्तर— तृतीयक क्षेत्रक में उन गतिविधियों को शामिल किया जाता है जो स्वतः वस्तुओं का उत्पादन नहीं करती बल्कि उत्पादन प्रक्रिया में सहयोग करती हैं। इस क्षेत्रक में सेवाओं का सृजन किया जाता है।

प्रश्न 12. तृतीयक क्षेत्रक को सेवा क्षेत्रक क्यों कहा जाता है?

उत्तर— तृतीयक क्षेत्रक की गतिविधियों से वस्तुओं के बजाय सेवाओं का सृजन किया जाता है अतः इसे सेवा क्षेत्रक कहा जाता है।

प्रश्न 13. सेवा क्षेत्र को परिभाषित कीजिए।

उत्तर— परिवहन, संचार, वित्त, बीमा संग्रहण, बैंकिंग आदि सेवाएँ प्रदान करने वाले क्षेत्रक को सेवा क्षेत्र कहते हैं।

प्रश्न 14. किसी देश के विकास की प्रारम्भिक अवस्था में किस क्षेत्रक का योगदान सर्वाधिक होता है?

उत्तर— विकास की प्रारम्भिक अवस्था में प्राथमिक क्षेत्रक का योगदान सर्वाधिक होता है।

प्रश्न 15. सकल घरेलू उत्पाद किसे कहते हैं? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)

अथवा

सकल घरेलू उत्पाद को परिभाषित कीजिए। (प्रश्न बैंक; माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)

अथवा

सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) का क्या अभिप्राय है?

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सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) कक्षा X 377

उत्तर—तीनों क्षेत्रकों के उत्पादनों के योगफल को देश का सकल घरेलू उत्पाद कहते हैं। यह किसी देश के भीतर किसी विशेष वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य होता है।

प्रश्न 16. आर्थिक विकास के साथ-साथ किस क्षेत्र की भूमिका बढ़ती जाती है?

उत्तर— आर्थिक विकास के साथ-साथ तृतीयक अथवा सेवा क्षेत्रक की भूमिका निरन्तर बढ़ती जाती है।

प्रश्न 17. मध्यवर्ती वस्तुएँ किन्हें कहा जाता है?

उत्तर— मध्यवर्ती वस्तुएँ वे होती हैं जिन्हें अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में इस्तेमाल किया जाता है।

प्रश्न 18. आपके अनुसार भारत में अधिकांश लोग कहाँ नियोजित हैं? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)

अथवा

भारत में वर्तमान में रोजगार की दृष्टि से किस क्षेत्रक की भूमिका महत्त्वपूर्ण है?

उत्तर— प्राथमिक क्षेत्र में।

प्रश्न 19. वर्तमान में जी.डी.पी. में योगदान की दृष्टि से भारत में किस क्षेत्रक की भूमिका महत्त्वपूर्ण है?

उत्तर— जी.डी.पी. में योगदान की दृष्टि से भारत में तृतीयक क्षेत्रक की भूमिका महत्त्वपूर्ण है।

प्रश्न 20. खुली बेरोजगारी का क्या अभिप्राय है?

उत्तर— खुली बेरोजगारी वह स्थिति है जिसमें लोगों के पास कोई काम नहीं होता है तथा वे बेकार बैठे रहते हैं।

प्रश्न 21. भारत में छिपी हुई बेरोजगारी सर्वाधिक किस क्षेत्रक में पाई जाती है?

उत्तर— भारत में छिपी हुई बेरोजगारी सबसे अधिक प्राथमिक क्षेत्रक में पाई जाती है।

प्रश्न 22. रोजगार वृद्धि के कोई दो उपाय बताइए।

उत्तर— (1) सस्ती ब्याज दर पर आसान किश्तों पर व्यवसाय हेतु ऋण सुविधा उपलब्ध करायी जाये जिससे लोग अपना व्यवसाय शुरू कर सकें।

(2) देश में लघु एवं कुटीर उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

प्रश्न 23. स्वामित्व के आधार पर क्षेत्रकों को कितने भागों में विभाजित किया जाता है?

अथवा

स्वामित्व आधारित क्षेत्रक कौनसे हैं? नाम लिखिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— स्वामित्व के आधार पर क्षेत्रकों को दो भागों में बाँटा गया है-

(1) सार्वजनिक क्षेत्रक, (2) निजी क्षेत्रक।

प्रश्न 24. संगठित क्षेत्रक से क्या अभिप्राय है?

उत्तर— संगठित क्षेत्रक वे कार्य-स्थान होते हैं जहाँ रोजगार की अवधि नियमित होती है तथा सरकारी नियमों का अनुपालन होता है।

प्रश्न 25. असंगठित क्षेत्रक के कोई दो दोष बताइए।

उत्तर— (1) कर्मचारियों अथवा श्रमिकों को नियमित रोजगार नहीं मिलता है।

(2) इस क्षेत्रक में अवकाश व अन्य भत्ते नहीं मिलते हैं।

प्रश्न 26. ग्रामीण क्षेत्र में असंगठित क्षेत्रक के श्रमिकों का संरक्षण कैसे हो सकता है? कोई एक उदाहरण दीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)

उत्तर— ग्रामीण क्षेत्र के श्रमिकों के संरक्षण हेतु विभिन्न लघु एवं कुटीर उद्योगों का विकास किया जाए और उन्हें सरकार द्वारा संरक्षण दिया जाना चाहिए।

प्रश्न 27. संगठित क्षेत्रक के कोई दो लाभ बताइए।

उत्तर— (1) कर्मचारियों को नियमित रोजगार मिलता है।

(2) कर्मचारियों को अवकाश एवं भत्ते मिलते हैं।

प्रश्न 28. सार्वजनिक क्षेत्रक का प्रमुख उद्देश्य क्या है?

उत्तर— सार्वजनिक क्षेत्रक का प्रमुख उद्देश्य समाज कल्याण में वृद्धि करना है।

प्रश्न 29. निजी क्षेत्रक का प्रमुख उद्देश्य क्या है?

उत्तर— निजी क्षेत्रक का प्रमुख उद्देश्य अधिकतम लाभ अर्जित करना है।

प्रश्न 30. संगठित क्षेत्रक में रोजगार की अवधि कैसी होती है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)

उत्तर— संगठित क्षेत्रक में रोजगार की अवधि नियमित होती है।

--- [ पृष्ठ संख्या: 385 ] ---

प्रश्न 31. 'औद्योगिक क्षेत्र' के दो उदाहरण लिखिए जो आपके जिले में स्थित हों। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— औद्योगिक क्षेत्र के दो उदाहरण हैं-(i) चीनी मिल, (ii) कपड़ा मिल।

प्रश्न 32. भारत में रोजगार क्षेत्रक में हिस्सेदारी को घटते क्रम में लिखिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— वर्ष 1977-78 में प्राथमिक क्षेत्र की रोजगार में हिस्सेदारी 71 प्रतिशत थी जो 2017-18 में गिरकर 44 प्रतिशत हो गई। द्वितीयक तथा तृतीयक क्षेत्रक में भी रोजगार के पर्याप्त अवसरों का सृजन नहीं हुआ है।

प्रश्न 33. महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी अधिनियम कब लागू हुआ एवं इसमें कितने दिनों की रोजगार की गारंटी दी गई? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— 2005 में लागू हुआ एवं इसमें 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी गई।

प्रश्न 34. कृषि क्षेत्रक की कोई दो समस्याएँ लिखिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— कृषि क्षेत्रक की दो समस्याएँ-(1) सिंचाई की कमी, (2) उपजाऊ मृदा का क्षरण।

● लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. भारत में प्राथमिक क्षेत्र के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।

अथवा

भारत में प्राथमिक क्षेत्रक की भूमिका को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर— (1) भारत में रोजगार की दृष्टि से प्राथमिक क्षेत्रक की भूमिका महत्वपूर्ण है। आज भी देश की अधिकांश जनसंख्या रोजगार की दृष्टि से प्राथमिक क्षेत्र पर निर्भर है। 2017-18 में भारत के रोजगार में प्राथमिक क्षेत्र की हिस्सेदारी 44 प्रतिशत है। (2) प्राथमिक क्षेत्र से देश को खाद्यान्न आपूर्ति होती है। यह द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्र के विकास का आधार है। (3) भारत के सकल घरेलू उत्पाद में प्राथमिक क्षेत्र का योगदान 2013-14 में 13 प्रतिशत रहा।

प्रश्न 2. क्या अर्थव्यवस्था के तीनों क्षेत्र एक-दूसरे पर निर्भर हैं?

उत्तर— किसी अर्थव्यवस्था के तीनों क्षेत्र एक-दूसरे पर निर्भर हैं। प्रत्येक क्षेत्र का विकास अन्य क्षेत्र पर निर्भर है क्योंकि प्रत्येक क्षेत्र अन्य क्षेत्र को वस्तुएँ अथवा सेवाएँ बेचता है तथा अपने स्वयं की जरूरत की वस्तुएँ अथवा सेवाएँ अन्य क्षेत्रक से खरीदता है।

प्रश्न 3. सकल घरेलू उत्पाद की गणना करते समय केवल अन्तिम वस्तुओं तथा सेवाओं को ही क्यों शामिल किया जाता है?

उत्तर— सकल घरेलू उत्पाद की गणना में केवल अन्तिम वस्तुओं तथा सेवाओं को ही शामिल किया जाता है क्योंकि इससे दोहरी गणना की संभावना नहीं रहती है। यदि मध्यवर्ती वस्तुओं को भी शामिल कर लिया जाए तो दोहरी गणना हो जाएगी तथा सकल घरेलू उत्पाद का सही ज्ञान नहीं हो पाएगा।

प्रश्न 4. ग्रामीण क्षेत्र हेतु 'कृषि' क्यों महत्वपूर्ण है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— भारत की लगभग आधी जनसंख्या गाँवों में निवास करती है तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आय का मुख्य स्रोत कृषि है। खेती तथा सम्बन्धित गतिविधियाँ ग्रामीण क्षेत्रों के बुनियादी ढाँचे, रोजगार के अवसर आदि प्रदान करता है।

प्रश्न 5. 'संगठित' व 'असंगठित' रोजगार क्षेत्र से आप क्या समझते हैं? दो उदाहरण दीजिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— संगठित रोजगार क्षेत्र- संगठित क्षेत्रक वे कार्य-स्थान हैं जो सरकार द्वारा पंजीकृत होते हैं तथा जहाँ रोजगार की अवधि नियमित होती है। जैसे-शिक्षक, डॉक्टर।

असंगठित रोजगार क्षेत्र- असंगठित क्षेत्र का तात्पर्य उन छोटी-छोटी बिखरी इकाइयों से है जो सरकारी नियंत्रण के बाहर हैं तथा सरकारी नियमों का अनुपालन नहीं होता है। जैसे-बुनकर, ठेकेदार के अधीन काम करता दिहाड़ी मजदूर।

प्रश्न 6. भारत में 1973-74 से 2013-14 में कृषि, उद्योग व सेवा क्षेत्र की भूमिका में क्या अन्तर आया है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— वर्ष 1973-74 और 2013-14 के बीच यद्यपि सभी क्षेत्रकों (कृषि, उद्योग व सेवा क्षेत्र) में उत्पादन में वृद्धि हुई परन्तु सेवा क्षेत्र के उत्पादन में सबसे अधिक वृद्धि हुई। परिणामस्वरूप वर्ष 2013-14 में भारत में कृषि क्षेत्र को प्रतिस्थापित करते हुए सेवा क्षेत्रक सबसे बड़े उत्पादक क्षेत्र के रूप में उभरा है।

प्रश्न 7. संगठित एवं असंगठित क्षेत्रक में कोई दो अन्तर बताइए।

उत्तर— (1) संगठित क्षेत्रक में श्रमिकों को नियमित रोजगार उपलब्ध होता है जबकि असंगठित क्षेत्रक में श्रमिकों को रोजगार के सम्बन्ध में असुरक्षा रहती है।

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सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) कक्षा X | 379

(2) संगठित क्षेत्रक में प्रायः सरकार का नियंत्रण होता है जबकि असंगठित क्षेत्रक में सरकार का कोई नियंत्रण नहीं होता है।

प्रश्न 8. देश के आर्थिक विकास में सार्वजनिक क्षेत्रक के कोई दो महत्त्व बताइए।

उत्तर— (1) सार्वजनिक क्षेत्रक देश में आधारभूत सुविधाएँ उपलब्ध करवाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

(2) सार्वजनिक क्षेत्रक में अधिक पूँजी निवेश से तीव्र गति से पूँजी निर्माण सम्भव हो पाता है।

प्रश्न 9. सार्वजनिक और निजी क्षेत्रकों में विभेद कीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)

अथवा

सार्वजनिक क्षेत्रक तथा निजी क्षेत्रक में अन्तर स्पष्ट कीजिए। (प्रश्न बैंक)

अथवा

सार्वजनिक क्षेत्रक तथा निजी क्षेत्रक में उदाहरण सहित अन्तर स्पष्ट कीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)

उत्तर— सार्वजनिक क्षेत्रक एवं निजी क्षेत्रक में अन्तर-सार्वजनिक क्षेत्रक का तात्पर्य ऐसी गतिविधियों से है जिन पर सरकार का स्वामित्व होता है तथा जिनका संचालन सरकार द्वारा किया जाता है, जैसे-भारतीय रेल। दूसरी तरफ निजी क्षेत्रक का तात्पर्य ऐसी गतिविधियों से है जिन पर निजी लोगों का स्वामित्व होता है तथा निजी क्षेत्र द्वारा ही संचालन किया जाता है, जैसे-रिलायंस इण्डस्ट्रीज।

प्रश्न 10. अल्प बेरोजगारी से आपका क्या अभिप्राय है?

अथवा

'अल्प बेरोजगारी' से क्या आशय है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— अल्प बेरोजगारी वह अवस्था होती है जिसमें व्यक्ति को उसकी क्षमता तथा योग्यता के अनुसार पूरा रोजगार नहीं मिलता है तथा वह काम पर लगा हुआ प्रतीत तो होता है परन्तु उत्पादन में उसका योगदान बहुत ही कम होता है। कृषि क्षेत्रक में छिपी हुई बेरोजगारी इसका उदाहरण है।

प्रश्न 11. तृतीयक क्षेत्रक को सेवा क्षेत्रक भी कहा जाता है। स्पष्ट कीजिए।

उत्तर— तृतीयक क्षेत्रक की गतिविधियाँ प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रक के विकास में योगदान करती है। ये गतिविधियाँ स्वतः वस्तुओं का उत्पादन नहीं करती अपितु उत्पादन प्रक्रिया में सहयोग करती हैं। चूंकि ये गतिविधियाँ वस्तुओं के स्थान पर सेवाओं का सृजन करती हैं, इसलिए तृतीयक क्षेत्रक को सेवा क्षेत्रक भी कहा जाता है।

प्रश्न 12. भारत में बेरोजगारी दूर करने के कोई दो सुझाव दीजिए।

उत्तर— (1) प्राथमिक अथवा कृषि क्षेत्रक में रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाने चाहिए ताकि अल्प बेरोजगारी दूर हो सके।

(2) देश में आधारभूत संरचना जैसे परिवहन, संचार, बैंकिंग आदि का विकास किया जाना चाहिए ताकि कृषि एवं उद्योगों का विकास हो सके।

प्रश्न 13. संगठित क्षेत्रक से आपका क्या अभिप्राय है?

उत्तर— संगठित क्षेत्रक में वे उद्यम अथवा कार्य स्थान आते हैं जहाँ रोजगार की अवधि नियमित होती है तथा वहाँ सरकारी नियमों एवं विनियमों का अनुपालन किया जाता है। इस क्षेत्रक में रोजगार की शर्तें नियमित होती हैं तथा कार्य करने का समय भी निश्चित होता है।

प्रश्न 14. असंगठित क्षेत्रक से आप क्या समझते हैं?

उत्तर— असंगठित क्षेत्रक का आशय उन छोटी-छोटी एवं बिखरी हुई इकाइयों से होता है जिन पर किसी प्रकार का सरकारी नियंत्रण नहीं होता है। इस क्षेत्रक के नियम और विनियम तो होते हैं परन्तु उनका अनुपालन नहीं होता तथा श्रमिक का कार्य करने का समय निश्चित नहीं होता है एवं उसका रोजगार सुरक्षित नहीं होता है।

प्रश्न 15. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 की रणनीति बताइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)

उत्तर— राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में, उन सभी लोगों को, जो काम करने में सक्षम हैं तथा जो काम करना चाहते हैं, उन्हें सरकार द्वारा एक वर्ष में 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी गई है। यदि सरकार रोजगार उपलब्ध कराने में असफल रहती है तो लोगों को बेरोजगारी भत्ता देगी।

--- [ पृष्ठ संख्या: 387 ] ---

प्रश्न 16. असंगठित क्षेत्रक की कोई दो रोजगार गतिविधियों का उल्लेख कीजिए।

(माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)

उत्तर— (1) सड़कों पर विक्रय—यह असंगठित क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण रोजगार गतिविधि है, जिसमें लोग सड़कों और बाजारों में विभिन्न प्रकार के सामान बेचते हैं।

(2) निर्माण से जुड़े श्रमिक—यह असंगठित क्षेत्र में एक अन्य महत्त्वपूर्ण रोजगार गतिविधि है, जिसमें लोग भवन निर्माण, सड़क निर्माण और अन्य निर्माण परियोजनाओं में कार्य करते हैं।

प्रश्न 17. निम्नलिखित तालिका में तीनों क्षेत्रकों का सकल घरेलू उत्पाद (करोड़ में) दिया गया है—

[तालिका: तीनों क्षेत्रकों का सकल घरेलू उत्पाद]

कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान पाठ 19 भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक चित्र 5

वर्ष

प्राथमिक क्षेत्रक

द्वितीयक क्षेत्रक

तृतीयक क्षेत्रक

2000

52,000

48,000

1,35,000

(i) उपरोक्त आंकड़ों से वर्ष 2000 में सकल घरेलू उत्पाद की गणना कीजिए।

(ii) वर्ष 2000 में तृतीयक क्षेत्रक का योगदान प्राथमिक क्षेत्रक से कितना अधिक था, गणना कीजिए।

(माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)

उत्तर— (i) वर्ष 2000 में सकल घरेलू उत्पाद = तीनों क्षेत्रकों का सकल घरेलू उत्पाद में योगदान

= प्राथमिक क्षेत्रक + द्वितीयक क्षेत्रक + तृतीयक क्षेत्रक

= 52,000 + 48,000 + 1,35,000

= 2,35,000

(ii) वर्ष 2000 में तृतीयक क्षेत्रक का प्राथमिक क्षेत्रक की तुलना में अधिक योगदान

= तृतीयक क्षेत्रक का योगदान – प्राथमिक क्षेत्रक का योगदान

= 1,35,000 – 52,000

= 83,000

प्रश्न 18. प्रच्छन्न बेरोजगारी से क्या अभिप्राय है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— प्रच्छन्न बेरोजगारी से अभिप्राय है कि किसी कार्य में जरूरत से ज्यादा लोगों का संलग्न होना। इस स्थिति में, लोगों की उत्पादकता शून्य होती है। अर्थात् अगर इनमें से कुछ लोगों को कार्य से हटा दिया जाए, तो भी कुल उत्पादन पर असर नहीं पड़ेगा। इसे अल्प बेरोजगारी या छिपी हुई बेरोजगारी भी कहा जाता है।

● दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1. अर्थव्यवस्था में प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक क्षेत्रों की परस्पर निर्भरता को समझाइए।

उत्तर— किसी भी अर्थव्यवस्था के तीनों क्षेत्र एक-दूसरे पर निर्भर हैं। प्रत्येक क्षेत्र का विकास अन्य क्षेत्र पर निर्भर है क्योंकि प्रत्येक क्षेत्र अन्य क्षेत्र को वस्तुएँ अथवा सेवाएँ बेचता है तथा अपने स्वयं की जरूरत की वस्तुएँ अथवा सेवाएँ अन्य क्षेत्र से खरीदता है। प्राथमिक क्षेत्रक मुख्यतः न कि पूर्णतया, प्रकृति एवं प्राकृतिक कारकों पर निर्भर करता है। द्वितीयक क्षेत्र की गतिविधियों में प्राथमिक क्षेत्र के उत्पादों को विनिर्माण प्रणाली द्वारा अन्य रूपों में परिवर्तित किया जाता है। द्वितीयक क्षेत्र की माँग द्वारा प्राथमिक क्षेत्र प्रभावित होता है तथा द्वितीयक क्षेत्र पूर्णतः प्राथमिक क्षेत्र के उत्पादों पर निर्भर रहता है। इसी प्रकार तृतीयक क्षेत्र की गतिविधियाँ प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रक के विकास में मदद करती हैं। ये गतिविधियाँ स्वतः वस्तुओं का उत्पादन नहीं करतीं, बल्कि उत्पादन प्रक्रिया में सहयोग करती हैं।

प्रश्न 2. असंगठित क्षेत्र की किन्हीं तीन विशेषताओं की व्याख्या कीजिए।

अथवा

असंगठित क्षेत्रक की विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर— असंगठित क्षेत्रक की विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं-

(1) इस क्षेत्रक में उत्पादन इकाइयाँ छोटी-छोटी एवं बिखरी हुई होती हैं।

(2) असंगठित क्षेत्रक पर सरकार का नियंत्रण नहीं होता है।

(3) इस क्षेत्रक में श्रमिकों के संरक्षण हेतु नियम और विनियम तो होते हैं, लेकिन उनका पालन नहीं होता है।

(4) असंगठित क्षेत्रक में सेवा-शर्तों अर्थात् वेतन, कार्य अवधि, अन्य लाभ आदि का अभाव पाया जाता है।

--- [ पृष्ठ संख्या: 388 ] ---

सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) कक्षा X 381

(5) असंगठित क्षेत्रक में श्रमिकों का रोजगार सुरक्षित नहीं होता है।

(6) श्रमिकों को कम मजदूरी दी जाती है तथा रोजगार भी अनियमित होता है।

प्रश्न 3. असंगठित क्षेत्रक की प्रमुख दो विशेषताएँ बताइए। असंगठित श्रमिकों के संरक्षण के उपाय भी लिखिए।

उत्तर—विशेषताएँ—

(i) असंगठित क्षेत्र छोटे तथा सरकारी नियंत्रण से बाहर होते हैं।

(ii) असंगठित क्षेत्र कम वेतन वाले रोजगार हैं और प्रायः नियमित नहीं हैं।

श्रमिकों के संरक्षण के उपाय—

(i) असंगठित क्षेत्रक में सरकार को कुछ नियम व कानून बनाने चाहिए।

(ii) लोगों को उस क्षेत्र में काम करना चाहिए जहाँ काम नियमित, तत्काल भुगतान की व्यवस्था तथा काम की सुरक्षा हो।

(iii) इस क्षेत्रक में काम करने वाले लोगों हेतु सरकार को सार्वजनिक सेवाओं में वृद्धि करनी चाहिए।

(iv) इस क्षेत्रक में सरकार को नियमों की कठोरता से अनुपालना करवानी चाहिए।

(v) सरकार द्वारा लघु एवं कुटीर उद्योगों का विकास किया जाना चाहिए।

प्रश्न 4. संगठित क्षेत्रक व असंगठित क्षेत्रक में कोई चार अन्तर लिखिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— संगठित क्षेत्रक व असंगठित क्षेत्रक में निम्नलिखित अन्तर हैं-

(i) संगठित क्षेत्रक में रोजगार की सुरक्षा होती है, जबकि असंगठित क्षेत्रक में नौकरी असुरक्षित होती है।

(ii) संगठित क्षेत्रक में कर्मचारियों को नियमित वेतन मिलता है, जबकि असंगठित क्षेत्रक में श्रमिकों को दैनिक आधार पर भुगतान किया जाता है।

(iii) संगठित क्षेत्रक में कर्मचारियों को भविष्य निधि, पेंशन और चिकित्सा सुविधाएँ मिलती हैं, जबकि असंगठित क्षेत्रक में कर्मचारियों को ऐसी सुविधाएँ नहीं मिलती हैं।

(iv) संगठित क्षेत्रक में सरकारी नियमों का सख्ती से पालन किया जाता है, जबकि असंगठित क्षेत्रक में ऐसा नहीं होता है।

प्रश्न 5. कर्मचारियों द्वारा संगठित क्षेत्रक को प्राथमिकता क्यों दी जाती है?

उत्तर— कर्मचारियों द्वारा संगठित क्षेत्रक को प्राथमिकता देने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-

(1) संगठित क्षेत्र के उद्यमों में रोजगार की अवधि नियमित होती है और इसलिए लोगों के पास सुनिश्चित काम होता है।

(2) संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को रोजगार-सुरक्षा के लाभ मिलते हैं।

(3) कर्मचारियों के कार्य के घंटे निश्चित होते हैं। यदि वे अधिक काम करते हैं तो नियोक्ता द्वारा उन्हें अतिरिक्त वेतन दिया जाता है।

(4) संगठित क्षेत्र के कर्मचारी नियोक्ता से वेतन के अतिरिक्त अन्य दूसरे लाभ भी प्राप्त करते हैं, जैसे-सवेतन छुट्टी, भविष्य निधि, सेवा अनुदान, चिकित्सीय लाभ आदि। जब वे सेवानिवृत्त होते हैं तो पेंशन भी प्राप्त करते हैं।

असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को ये सुविधाएँ नहीं मिलती हैं इसलिए कर्मचारी संगठित क्षेत्र को प्राथमिकता देते हैं।

प्रश्न 6. तृतीयक क्षेत्र किस प्रकार प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्रकों के विकास में सहायता करता है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर— तृतीयक क्षेत्र निम्न प्रकार से प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रों में सहायता करता है-

(i) यह परिवहन के रूप में इनके द्वारा उत्पादित वस्तुओं को बाजार तक ले जाने में सहायता करता है।

(ii) यह गोदामों तक इनकी उत्पादित वस्तुएँ ले जाकर सहायता प्रदान करता है।

(iii) यह उत्पादन और व्यापार हेतु वार्तालाप के लिए संचार के रूप में सहायता करता है।

(iv) यह इन क्षेत्रों को पूँजी की आवश्यकता की पूर्ति के लिए बैंक के रूप में सहायता करता है।

(v) तृतीयक क्षेत्र प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्रक को कई व्यापारिक सेवाएँ उपलब्ध करवाता है। परिवहन, भण्डारण, संचार, बैंक सेवाएँ आदि तृतीयक क्षेत्रों के उदाहरण हैं।

(vi) इस क्षेत्र में कुछ ऐसी अपरिहार्य सेवाएँ हैं, जो तीनों क्षेत्रों के लोगों के लिए आवश्यक हैं, जैसे-शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ।

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प्रश्न 7. अल्प बेरोजगारी किसे कहते हैं? अल्प बेरोजगारी को दूर करने के तरीके बताइए जिससे अतिरिक्त रोजगार का सृजन हो सके।

अथवा

छिपी बेरोजगारी से क्या अभिप्राय है? इसे कम करने के लिए कोई दो सुझाव दीजिए।

उत्तर— अल्प बेरोजगारी वह स्थिति है जिसमें लोग प्रत्यक्ष रूप से काम करते हैं परन्तु उन्हें कार्य करने का अवसर उनकी क्षमता से कम मिलता है। अल्प बेरोजगारी को छिपी हुई बेरोजगारी भी कहा जाता है।

अल्प अथवा छिपी बेरोजगारी दूर करने के उपाय-

(i) बैंक उचित ब्याज दर पर लोगों को ऋण दे ताकि वे स्वरोजगार कर सकें।

(ii) अर्द्ध-ग्रामीण क्षेत्र में उद्योगों व सेवाओं में वृद्धि हो।

(iii) किसानों के उत्पादन के भण्डारण के लिए शीत भण्डारण की व्यवस्था कराई जाए।

(iv) कृषि क्षेत्र में रोजगार के नए अवसरों में वृद्धि का प्रयास करना चाहिए।

(v) ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार कार्यक्रमों एवं योजनाओं का विस्तार किया जाना चाहिए।

(vi) सार्वजनिक क्षेत्रकों का अधिक विस्तार किया जाना चाहिए ताकि रोजगार के अधिक अवसर सृजित हो सकें।

प्रश्न 8. व्याख्या कीजिए कि किसी देश के आर्थिक विकास में सार्वजनिक क्षेत्रक कैसे योगदान करता है।

अथवा

आपके विचार में सार्वजनिक क्षेत्र क्यों आवश्यक है? कोई तीन बिन्दु लिखिए।

अथवा

'सार्वजनिक' क्षेत्र क्यों आवश्यक है? कारण प्रस्तुत कीजिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— (1) सार्वजनिक क्षेत्र में सरकार सड़कों, पुलों, रेलवे, बिजली, बाँध आदि का निर्माण कर ढाँचागत विकास तथा सिंचाई के क्षेत्र में योगदान देती है।

(2) सार्वजनिक क्षेत्रक जोखिम भरी सार्वजनिक कल्याण सम्बन्धी गतिविधियों में निवेश करके देश के आर्थिक विकास में योगदान करता है।

(3) यह देश के विकास में भारी पैमाने पर परियोजनाओं को चलाकर महत्वपूर्ण योगदान करता है।

(4) सार्वजनिक क्षेत्र में अनेक समाज कल्याण की योजनाएँ चलाई जाती हैं जो देश के विकास में सहायक हैं।

(5) सार्वजनिक क्षेत्रक से देश में गरीबी एवं बेरोजगारी दूर करने में मदद मिलती है।

(6) सार्वजनिक क्षेत्रों में भारी पूँजी निवेश होता है जिससे पूँजी निर्माण की दर तीव्र होती है।

प्रश्न 9. अल्प बेरोजगारी व प्रच्छन्न बेरोजगारी में क्या अन्तर है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— अल्प बेरोजगारी व प्रच्छन्न बेरोजगारी में अन्तर

अल्प बेरोजगारी

प्रच्छन्न बेरोजगारी

अल्प बेरोजगारी वह अवस्था होती है जिसमें व्यक्ति को उसकी क्षमता तथा योग्यता के अनुसार पूरा रोजगार नहीं मिलता है। वह काम पर लगा हुआ प्रतीत होता है परन्तु उत्पादन में उसका योगदान कम होता है। उदाहरण-कृषि क्षेत्र।

प्रच्छन्न बेरोजगारी वह है जिसमें लोगों की योग्यता के अनुरूप काम नहीं मिलता है। वे रोजगार में लगे होते हैं किन्तु उत्पादन में उनका कोई योगदान नहीं होता है।

प्रश्न 10. असंगठित क्षेत्रक की क्या समस्याएँ हैं? यह क्यों असुरक्षित माना जाता है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— असंगठित क्षेत्रक की समस्याएँ-असंगठित क्षेत्रक में रोजगार की गारंटी नहीं होती इसलिए इसे रोजगार का अस्थायी रूप माना जाता है। इस क्षेत्र में सरकारी नियमों का पालन नहीं होता है। यह कम वेतन वाला तथा अनियमित होता है।

यहाँ अतिरिक्त समय में काम करने, सवेतन छुट्टी, अवकाश, बीमारी के कारण छुट्टी आदि का कोई नियम नहीं होता। जिस मौसम में काम कम होता है, उस मौसम में लोगों काम से छुट्टी दे दिया जाता है। उपरोक्त कारणों से यह असुरक्षित माने जाते हैं।

प्रश्न 11. भारत में किस आर्थिक क्षेत्र के अन्तर्गत अल्प रोजगार की दशाएँ अधिक पाई जाती हैं? प्रमुख कारण बताइए।

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सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) कक्षा X 383

उत्तर—प्राथमिक क्षेत्रक के अन्तर्गत अल्प रोजगार की दशाएँ अधिक पाई जाती हैं। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-

(1) देश का अधिकांश श्रमिक कृषि क्षेत्र में जुटा है जहाँ कार्य केवल कुछ महीनों के लिए होता है। अतः यह अल्प बेरोजगारी की स्थिति पैदा करता है।

(2) परिवार के सभी सदस्य कृषि कार्य में लगे होते हैं जिसमें प्रत्येक व्यक्ति कुछ काम तो करता है किन्तु किसी को भी पूर्ण रोजगार प्राप्त नहीं होता है।

(3) देश की अधिकांश जनसंख्या गाँवों में निवास कर रही है जबकि वहाँ पर रोजगार के अवसर बहुत कम हैं अतः वहाँ अल्प रोजगार पाया जाता है।

(4) गाँवों में वैकल्पिक रोजगार के अवसर न होने के कारण लोग कृषि कार्यों में ही लगे रहते हैं जिससे अल्प बेरोजगारी की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

प्रश्न 12. भारत में किन कारणों से सेवा क्षेत्रक के केवल कुछ भागों का ही महत्त्व बढ़ रहा है?

उत्तर— भारत में सेवा क्षेत्रक की सभी सेवाओं में समान रूप से संवृद्धि नहीं हो रही है। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-

(i) भारत में उन सेवाओं की संख्या सीमित है, जिसमें अत्यन्त कुशल और शिक्षित श्रमिकों को रोजगार मिलता है।

(ii) बहुत अधिक संख्या में लोग छोटी दुकानों, मरम्मत कार्यों, परिवहन जैसी सेवाओं में लगे हुए हैं। वे लोग बड़ी मुश्किल से जीविका निर्वाह कर पाते हैं और वे इन सेवाओं में इसलिए लगे हुए हैं क्योंकि उनके पास कोई अन्य वैकल्पिक अवसर नहीं है।

इस कारण सेवा क्षेत्रक के केवल कुछ भागों का ही महत्त्व बढ़ रहा है।

प्रश्न 13. देश में अतिरिक्त रोजगार के अवसर सृजित करने के उपाय बताइये।

अथवा

आपके मतानुसार अतिरिक्त रोजगार का सृजन कैसे किया जा सकता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)

उत्तर— देश में निम्न उपायों से अतिरिक्त रोजगार अवसर सृजित किए जा सकते हैं-

(1) कृषि क्षेत्रक का विकास कर अतिरिक्त रोजगार अवसर सृजित किए जा सकते हैं।

(2) कृषि में सहायक गतिविधियों का विकास किया जाना चाहिए।

(3) लघु एवं कुटीर उद्योगों का विकास किया जाना चाहिए।

(4) औद्योगिक क्षेत्रक में अतिरिक्त विनियोग करना चाहिए।

(5) सरकार को सार्वजनिक क्षेत्रक का विस्तार कर अतिरिक्त रोजगार अवसर उत्पन्न करने का प्रयास करना चाहिए।

(6) देश में आधारभूत संरचना का विकास करना चाहिए ताकि कृषि एवं उद्योगों का विकास हो सके एवं रोजगार अवसरों में वृद्धि हो सके।

(7) देश में निजी क्षेत्रक में भी विनियोग को बढ़ावा देने का प्रयास करना चाहिए।

प्रश्न 14. अन्तिम वस्तुओं एवं मध्यवर्ती वस्तुओं में अन्तर बतलाइये।

उत्तर—

[अन्तिम वस्तुओं एवं मध्यवर्ती वस्तुओं में अन्तर]

कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान पाठ 19 भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक चित्र 6

क्र.सं.

अन्तिम वस्तुएँ

मध्यवर्ती वस्तुएँ

1.

वे वस्तुएँ जो उपभोक्ताओं तक पहुँचती हैं, अन्तिम वस्तुएँ कहलाती हैं।

ऐसी वस्तुएँ जो अन्तिम वस्तुओं तथा सेवाओं के निर्माण में प्रयुक्त की जाती हैं, मध्यवर्ती वस्तुएँ कहलाती हैं।

2.

अन्तिम वस्तुओं का मूल्य सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में शामिल किया जाता है।

मध्यवर्ती वस्तुओं का मूल्य अन्तिम वस्तुओं के मूल्यों में पहले से शामिल रहता है, अतः इसे सकल घरेलू उत्पाद में नहीं जोड़ा जाता।

3.

उदाहरण : बिस्कुट, ब्रेड, रेडीमेड कपड़े आदि।

उदाहरण : गेहूँ, कपास, सिले कपड़े आदि।

प्रश्न 15. बेरोजगारी से क्या अभिप्राय है? बेरोजगारी के दो प्रकारों का उल्लेख कीजिए।

(माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)

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उत्तर—बेरोजगारी—बेरोजगारी का अभिप्राय ऐसी अवस्था से है जिसमें व्यक्ति काम करने के योग्य है तथा काम करना चाहता है, लेकिन उसे काम नहीं मिलता।

बेरोजगारी के दो प्रमुख प्रकार-

(i) खुली बेरोजगारी—खुली बेरोजगारी से अभिप्राय उस स्थिति से है जिसमें योग्य व्यक्ति प्रचलित मजदूरी दर पर कार्य करना चाहता है, लेकिन उसे काम नहीं मिल पाता जिससे वे पूरी तरह बेरोजगार रहते हैं।

(ii) प्रच्छन्न या छिपी बेरोजगारी—प्रच्छन्न बेरोजगारी वह है जिसमें लोगों की योग्यता के अनुरूप पूरा काम नहीं मिल पाता है। वे रोजगार पर लगे होते हैं किन्तु उत्पादन में उनका कोई योगदान नहीं होता है।

प्रश्न 16. आप विभिन्न क्षेत्रकों से उत्पादित वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य की गणना कैसे करेंगे? उचित उदाहरण की सहायता से समझाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)

उत्तर—विभिन्न क्षेत्रकों से उत्पादित वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य की गणना को हम इस उदाहरण के माध्यम से समझ सकते हैं : एक किसान किसी आटा मिल को ₹ 20 प्रति किग्रा. की दर से गेहूँ बेचता है। मिल में गेहूँ की पिसाई होती है और बिस्कुट कंपनी को आटा ₹ 25 प्रति किग्रा. की दर से बेचा जाता है। बिस्कुट कंपनी आटा के साथ चीनी एवं तेल जैसी चीजों का उपयोग करती है और बिस्कुट के चार पैकेट बनाती है बाजार में उपभोक्ता को ₹ 80 में (₹ 20 प्रति पैकेट) बिस्कुट बेचती है। अतः बिस्कुट ही अंतिम उत्पाद है। अतः किसी विशेष वर्ष में प्रत्येक क्षेत्रक द्वारा उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य, उस वर्ष में क्षेत्रक के कुल उत्पादन की जानकारी प्रदान करता है। तीनों क्षेत्रकों के उत्पादों के योगफल को देश का सकल घरेलू उत्पाद कहते हैं।

प्रश्न 17. प्राथमिक क्षेत्रक, द्वितीयक क्षेत्रक व तृतीयक क्षेत्रक की गतिविधियों की क्या विशेषताएँ हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर—प्राथमिक, द्वितीयक व तृतीयक क्षेत्रक की गतिविधियों की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

प्राथमिक क्षेत्रक—यह प्राकृतिक संसाधनों के उत्पादन एवं निष्कर्षण से जुड़ा है। इसे कृषि या सम्बद्ध क्षेत्रक के नाम से भी जाना जाता है।

द्वितीयक क्षेत्रक—यह कच्चे माल को तैयार वस्तुओं में बदलने से जुड़ा है। इसे विनिर्माण या औद्योगिक क्षेत्रक के नाम से भी जाना जाता है।

तृतीयक क्षेत्रक—यह प्राथमिक व द्वितीयक क्षेत्रकों को सेवाएँ देने से जुड़ा है। इसे सेवा क्षेत्रक के नाम से भी जाना जाता है।

प्रश्न 18. 'मनरेगा 2005' के विभिन्न प्रावधान लिखिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर—'मनरेगा 2005' के विभिन्न प्रावधान निम्नलिखित हैं-

(i) मनरेगा 2005 के अन्तर्गत उन सभी लोगों, जो काम करने में सक्षम हैं और जिन्हें काम की जरूरत है, को सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी गई है।

(ii) इस योजना का लाभ उठाने के लिए, ग्राम पंचायत में आवेदन किया जा सकता है। इस योजना का कार्यान्वयन मुख्य रूप से ग्राम पंचायतों द्वारा किया जाता है।

(iii) आवेदन करने के 15 दिन के भीतर यदि सरकार रोजगार उपलब्ध कराने में असफल रहती है तो वह लोगों को बेरोजगारी भत्ता देती है।

(iv) अधिनियम के तहत उस तरह के कार्यों को वरीयता दी जाती है, जिनसे भविष्य में भूमि से उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।

प्रश्न 19. सार्वजनिक क्षेत्रक तथा निजी क्षेत्रक में अन्तर कीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)

उत्तर—सार्वजनिक क्षेत्रक तथा निजी क्षेत्रक में अन्तर—

(1) सार्वजनिक क्षेत्रक के अन्तर्गत आर्थिक गतिविधियों पर सरकार का स्वामित्व एवं नियन्त्रण होता है, इसके विपरीत निजी क्षेत्रक में आर्थिक गतिविधियों पर निजी व्यक्तियों का स्वामित्व एवं नियन्त्रण होता है।

(2) सार्वजनिक क्षेत्रक का उद्देश्य सार्वजनिक कल्याण में वृद्धि करना होता है, जबकि निजी क्षेत्रक का उद्देश्य लाभ अर्जित करना होता है।

(3) सार्वजनिक क्षेत्र में किए गए व्यय की भरपाई सरकार करों के माध्यम से करती है, जबकि निजी क्षेत्र में किए गए व्ययों की भरपाई लाभ में से की जाती है।

(4) रेल विभाग एक सार्वजनिक क्षेत्र का उदाहरण, तो ICICI बैंक निजी क्षेत्र का उदाहरण है।

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सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) कक्षा X 385

● निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. अर्थव्यवस्था के तीनों क्षेत्रों का संक्षिप्त वर्णन करते हुए बताइए कि तृतीयक क्षेत्रक अन्य क्षेत्रों से भिन्न कैसे हैं?

अथवा

आर्थिक कार्यों के आधार पर अर्थव्यवस्था के क्षेत्रकों का विस्तार से वर्णन कीजिए।

अथवा

निम्न को स्पष्ट कीजिए-

(1) प्राथमिक क्षेत्रक (2) द्वितीयक क्षेत्रक (3) तृतीयक क्षेत्रक।

उत्तर— आर्थिक कार्यों के आधार पर अर्थव्यवस्था को तीन प्रमुख क्षेत्रकों में विभाजित किया जा सकता है-

(1) प्राथमिक क्षेत्रक- जब हम प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके किसी वस्तु का उत्पादन करते हैं तो इसे प्राथमिक क्षेत्रक की गतिविधि कहा जाता है। इस क्षेत्रक में मुख्य रूप से कृषि, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य, वन उत्पाद आदि को सम्मिलित किया जाता है। इसलिए इस क्षेत्रक को 'कृषि एवं सहायक क्षेत्रक' भी कहा जाता है। भारतीय अर्थव्यवस्था में रोजगार की दृष्टि से प्राथमिक क्षेत्रक की भूमिका अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। वर्ष 2017-18 में भारत में प्राथमिक क्षेत्र की रोजगार में हिस्सेदारी 44 प्रतिशत रही है, जबकि द्वितीयक व तृतीयक क्षेत्र की हिस्सेदारी क्रमशः 25 और 31 प्रतिशत रही है।

(2) द्वितीयक क्षेत्रक- किसी देश में द्वितीयक क्षेत्रक की गतिविधियों के अन्तर्गत प्राकृतिक उत्पादों को विनिर्माण प्रणाली के जरिए अन्य रूपों में परिवर्तित किया जाता है। जैसे-गन्ने से गुड़ और चीनी बनाना, मिट्टी से ईंट और ईंटों से घर बनाना आदि। इस क्षेत्रक में विनिर्माण की प्रक्रिया अपरिहार्य है। यह प्रक्रिया किसी कारखाने अथवा घर से संचालित की जा सकती है। यह क्षेत्रक क्रमशः संवर्धित विभिन्न प्रकार के उद्योगों से जुड़ा हुआ है अतः इसे औद्योगिक क्षेत्रक भी कहा जाता है।

(3) तृतीयक क्षेत्रक- तृतीयक क्षेत्रक में उन गतिविधियों को शामिल किया जाता है जो स्वतः वस्तुओं का उत्पादन नहीं करती हैं, बल्कि उत्पादन प्रक्रिया में सहयोग करती हैं। इस क्षेत्रक में विभिन्न गतिविधियाँ वस्तुओं के बजाय सेवाओं का सृजन करती हैं। अतः इस क्षेत्रक को सेवा क्षेत्रक भी कहा जाता है। इस क्षेत्रक में मुख्य रूप से परिवहन, भण्डारण, संचार, बैंकिंग, वित्त, व्यापार आदि गतिविधियों को शामिल किया जाता है। सेवा क्षेत्रक में कुछ ऐसी अपरिहार्य सेवाएँ भी हैं, जो प्रत्यक्ष रूप से वस्तुओं के उत्पादन में सहायता नहीं करतीं, जैसे-शिक्षकों, डॉक्टरों, धोबी, नाई, मोची और वकील की सेवाएँ, प्रशासनिक एवं लेखाकरण कार्य सेवाएँ।

वर्तमान समय में सूचना प्रौद्योगिकी पर आधारित कुछ नवीन सेवाएँ, जैसे-इंटरनेट, कैफे, कॉल सेंटर, सॉफ्टवेयर कम्पनी इत्यादि भी महत्त्वपूर्ण हो गई हैं।

तृतीयक क्षेत्रक की अन्य क्षेत्रों से भिन्नता- तृतीयक क्षेत्रक अन्य दो क्षेत्रकों से भिन्न हैं क्योंकि अन्य दो क्षेत्रक (प्राथमिक व द्वितीयक) वस्तुएँ उत्पादित करते हैं, जबकि तृतीयक क्षेत्रक अपने आप में कोई वस्तु उत्पादित नहीं करता है। इस क्षेत्रक में सम्मिलित क्रियाएँ अन्य दोनों क्षेत्रकों की उत्पादन प्रक्रिया में मदद करती हैं। ये क्रियाएँ हैं-परिवहन, भण्डारण, संचार एवं बैंकिंग आदि।

इस प्रकार हम कह सकते हैं कि अर्थव्यवस्था में तीनों क्षेत्र परस्पर एक-दूसरे पर निर्भर हैं।

प्रश्न 2. भारत में रोजगार के विभिन्न क्षेत्रक उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। इन क्षेत्रों की रोजगार सृजन की स्थिति बताते हुए अतिरिक्त रोजगार सृजन के उपाय सुझाइये। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— भारत में रोजगार के विभिन्न क्षेत्र निम्न प्रकार हैं-

(1) प्राथमिक क्षेत्र- अर्थव्यवस्था का वह क्षेत्र जो प्राकृतिक संसाधनों का सीधा उपयोग करता है। इस क्षेत्र में प्रकृति द्वारा प्रदत्त वस्तु को उपलब्ध कराने से जुड़ी क्रियाओं का समावेश होता है। उदाहरण-कृषि, पशुपालन, खनन, मत्स्य पालन आदि।

(2) द्वितीयक क्षेत्र- किसी अर्थव्यवस्था के द्वितीयक क्षेत्रक की गतिविधियों के अन्तर्गत प्राकृतिक उत्पादों को विनिर्माण प्रणाली द्वारा अन्य रूपों में परिवर्तित किया जाता है। उदाहरण-गन्ने से गुड़ अथवा चीनी का उत्पादन।

(3) तृतीयक क्षेत्र- तृतीयक क्षेत्रक में उन गतिविधियों का समावेश किया जाता है जो स्वतः वस्तु का उत्पादन नहीं करती बल्कि उत्पादन प्रक्रिया में सहयोग देती हैं। इस क्षेत्र में सेवाओं का सृजन किया जाता है। उदाहरण-अध्यापक, डॉक्टर, वकील आदि।

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प्राथमिक क्षेत्र में रोजगार में कमी आई है परन्तु द्वितीयक तथा तृतीयक क्षेत्र में रोजगारों में वृद्धि हुई है।

देश में निम्न उपायों से अतिरिक्त रोजगार अवसर सृजित किए जा सकते हैं-

(1) कृषि क्षेत्रक का विकास कर अतिरिक्त रोजगार अवसर सृजित किए जा सकते हैं।

(2) कृषि में सहायक गतिविधियों का विकास किया जाना चाहिए।

(3) लघु एवं कुटीर उद्योगों का विकास किया जाना चाहिए।

(4) औद्योगिक क्षेत्रक में अतिरिक्त विनियोग करना चाहिए।

(5) सरकार को सार्वजनिक क्षेत्रक का विस्तार कर अतिरिक्त रोजगार अवसर उत्पन्न करने का प्रयास करना चाहिए।

(6) देश में आधारभूत संरचना का विकास करना चाहिए ताकि कृषि एवं उद्योगों का विकास हो सके एवं रोजगार अवसरों में वृद्धि हो सके।

(7) देश में निजी क्षेत्रक में भी विनियोग को बढ़ावा देने का प्रयास करना चाहिए।

प्रश्न 3. बेरोजगारी एवं अल्प बेरोजगारी से आप क्या समझते हैं? भारतीय अर्थव्यवस्था में बेरोजगारी दूर करने हेतु सुझाव दीजिए।

उत्तर—

बेरोजगारी— बेरोजगारी का तात्पर्य ऐसी अवस्था से है जिसमें व्यक्ति काम करने के योग्य है तथा काम करना चाहता है किन्तु उसे काम नहीं मिलता।

अल्प बेरोजगारी— अल्प बेरोजगारी वह अवस्था होती है जिसमें व्यक्ति को उसकी क्षमता तथा योग्यता के अनुसार पूरा रोजगार नहीं मिलता है तथा वह काम पर लगा हुआ तो प्रतीत होता है किन्तु उत्पादन में उसका योगदान बहुत ही कम होता है। कृषि क्षेत्रक में छिपी हुई बेरोजगारी इसका उदाहरण है।

बेरोजगारी दूर करने हेतु सुझाव

भारत में बेरोजगारी की समस्या महत्त्वपूर्ण है तथा इसे दूर करने हेतु निम्न सुझाव दिए जा सकते हैं-

(1) प्राथमिक क्षेत्रक में रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाने चाहिए ताकि अल्प बेरोजगारी दूर की जा सके।

(2) कृषि क्षेत्रक में सिंचाई सुविधाओं, भण्डारण, वित्त तथा विपणन सुविधाओं का विस्तार किया जाना चाहिए। इससे नए रोजगार सृजित होंगे।

(3) ग्रामीण क्षेत्रों में लघु एवं कुटीर उद्योगों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

(4) देश में आधारभूत संरचना जैसे परिवहन, संचार, बैंकिंग आदि का विकास किया जाना चाहिए ताकि कृषि एवं उद्योगों का विकास हो सके।

(5) ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्रक का विस्तार किया जाना चाहिए।

(6) देश में शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जाना चाहिए तथा शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाया जाना चाहिए।

(7) देश में रोजगार सृजक कार्यक्रमों का विस्तार किया जाना चाहिए तथा उनका क्रियान्वयन सही ढंग से किया जाना चाहिए।

(8) देश में निजी क्षेत्रक में भी विनियोग को बढ़ावा देने का प्रयास करना चाहिए।

(9) ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के वैकल्पिक अवसरों का विकास किया जाना चाहिए।

(10) ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को स्वरोजगार हेतु प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

प्रश्न 4. भारत में तृतीयक क्षेत्रक अधिक महत्त्वपूर्ण क्यों हो रहा है? स्पष्ट कीजिए।

अथवा

भारत में तृतीयक क्षेत्रक क्यों महत्त्वपूर्ण बनता जा रहा है? कारण लिखिए। (प्रश्न बैंक)

अथवा

भारत में तृतीयक क्षेत्रक के विस्तार और महत्त्व को बढ़ाने वाले कारकों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर— वर्ष 1973-74 और 2013-14 के बीच के चालीस वर्षों में यद्यपि सभी क्षेत्रकों में उत्पादन वृद्धि हुई, परन्तु सबसे अधिक वृद्धि तृतीयक क्षेत्रक के उत्पादन में हुई। परिणामतः, वर्ष 2013-14 में भारत में प्राथमिक क्षेत्रक को प्रतिस्थापित करते हुए तृतीयक क्षेत्रक सबसे बड़े उत्पादन क्षेत्र के रूप में उभरा। तृतीयक क्षेत्रक के इतने महत्त्वपूर्ण होने के प्रमुख कारण अग्रलिखित हैं-

(1) बुनियादी सेवाएँ—किसी भी देश में अनेक सेवाओं, जैसे-अस्पताल, शैक्षिक संस्थाएँ, डाक एवं तार

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सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) कक्षा X 387

सेवा, थाना, कचहरी, ग्रामीण प्रशासनिक कार्यालय, नगर निगम, रक्षा, परिवहन, बैंक, बीमा कम्पनी इत्यादि की आवश्यकता होती है। इन्हें बुनियादी सेवाएँ माना जाता है। इनके प्रबन्धन की जिम्मेदारी सरकार स्वयं उठाती है।

(2) परिवहन और भण्डारण सेवाओं का विकास-कृषि एवं उद्योग के विकास से परिवहन, व्यापार एवं भण्डारण सेवाओं का विकास होता है। प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्रों का विकास जितना अधिक होगा, इन सेवाओं की माँग उतनी ही अधिक होगी।

(3) नई सेवाओं की बढ़ती माँग-जैसे-जैसे आय बढ़ती है, वैसे-वैसे कुछ लोग अन्य कई नई सेवाओं, जैसे-रेस्तरां, पर्यटन, शॉपिंग, निजी अस्पताल, निजी विद्यालय, व्यावसायिक परीक्षण आदि की माँग शुरू कर देते हैं। बड़े नगरों में इन सेवाओं की बढ़ती माँग को देखा जा सकता है।

(4) प्रौद्योगिक आधारित सेवाओं की बढ़ती अपरिहार्यता-विगत दशकों में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी पर आधारित सेवाएँ महत्त्वपूर्ण एवं अपरिहार्य हो गई हैं। इन सेवाओं के उत्पादन में तीव्र वृद्धि हो रही है।

प्रश्न 5. आर्थिक गतिविधियाँ रोजगार की परिस्थितियों के अनुसार कैसे वर्गीकृत की जाती हैं?

उत्तर— रोजगार की परिस्थितियों के अनुसार आर्थिक गतिविधियों को दो क्षेत्रों में विभाजित किया जाता है- (1) संगठित क्षेत्रक और (2) असंगठित क्षेत्रक। यथा-

(1) संगठित क्षेत्रक-संगठित क्षेत्रक में वे उद्यम अथवा कार्य स्थान आते हैं जहाँ रोजगार की अवधि नियमित होती है। इस कारण लोगों के पास सुनिश्चित काम होता है। इस क्षेत्रक में सरकार का नियन्त्रण होता है। ये क्षेत्रक सरकार द्वारा पंजीकृत होते हैं और उन्हें सरकारी नियमों एवं विनियमों का अनुपालन करना होता है। इसे संगठित क्षेत्र इसलिए कहते हैं क्योंकि इसकी कुछ औपचारिक प्रक्रिया एवं कार्यविधि होती है। संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को रोजगार-सुरक्षा के लाभ मिलते हैं। उनसे एक निश्चित समय तक काम लिया जाता है। यदि वे अतिरिक्त समय में काम करते हैं तो नियोक्ता द्वारा उन्हें अतिरिक्त वेतन दिया जाता है। वे नियोक्ता से सवेतन छुट्टी, भविष्य निधि, सेवा अनुदान व चिकित्सीय लाभ की सुविधा भी प्राप्त करते हैं।

(2) असंगठित क्षेत्रक-असंगठित क्षेत्रक में छोटी-छोटी एवं बिखरी हुई उत्पादन इकाइयों को शामिल किया जाता है जिन पर सरकार का कोई नियन्त्रण नहीं होता है तथा सरकार के नियमों व विनियमों का अनुपालन नहीं किया जाता है। इस क्षेत्रक में श्रमिकों के लिए न तो सवेतन अवकाश का ही कोई प्रावधान होता है और न ही निश्चितता होती है। काम के एवज में दैनिक मजदूरी के अतिरिक्त मजदूर को कोई अन्य सुविधा नहीं मिलती है। इस क्षेत्रक में काफी संख्या में लोग अपने-अपने छोटे कार्यों, जैसे-सड़कों पर विक्रय, मरम्मत कार्य, कृषि कार्य आदि में स्वतः नियोजित हैं।

प्रश्न 6. स्वामित्व के आधार पर आर्थिक गतिविधियों के वर्गीकरण को स्पष्ट कीजिए।

अथवा

सार्वजनिक क्षेत्रक एवं निजी क्षेत्रक क्या हैं? इनमें कोई तीन अन्तर बताइए।

उत्तर— स्वामित्व के आधार पर आर्थिक गतिविधियों के क्षेत्रकों का वर्गीकरण

स्वामित्व के आधार पर आर्थिक गतिविधियों को दो भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है-

(1) सार्वजनिक क्षेत्रक-सार्वजनिक क्षेत्रक का तात्पर्य ऐसी गतिविधियों से है जिन पर सरकार का स्वामित्व होता है तथा जिनका संचालन सरकार द्वारा किया जाता है। उदाहरण के लिए भारतीय रेल, भारत संचार निगम लिमिटेड, स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया, सवाई मानसिंह चिकित्सालय, राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम आदि। सामान्यतः सार्वजनिक क्षेत्रक का मुख्य उद्देश्य सामाजिक कल्याण करना होता है तथा लोगों के जीवन स्तर को ऊँचा उठाना होता है। सार्वजनिक क्षेत्रक के माध्यम से सरकार अनेक सार्वजनिक सेवाएँ लोगों को उपलब्ध करवाती है तथा गरीब लोगों के उत्थान हेतु विशेष प्रयास करती है। सरकार सेवाओं पर किए गए व्यय की भरपाई करों अथवा अन्य तरीकों से करती है। आधुनिक दिनों में सरकार सभी तरह की गतिविधियों पर व्यय करती है।

(2) निजी क्षेत्रक-निजी क्षेत्रक का तात्पर्य ऐसी गतिविधियों से है जिन पर निजी लोगों का स्वामित्व होता है तथा वे निजी उद्देश्यों की पूर्ति हेतु इन गतिविधियों का संचालन करते हैं। निजी क्षेत्रक का प्रमुख उद्देश्य लाभ कमाना होता है। भारत जैसे देश में सरकार के पास विकास हेतु पर्याप्त वित्तीय स्रोत नहीं हैं अतः यहाँ पर देश के आर्थिक विकास में निजी क्षेत्रक की भूमिका अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। भारत में अधिकांश जनसंख्या निजी क्षेत्रक में कार्यरत है, भारत में निजी क्षेत्रक की भूमिका में निरन्तर वृद्धि होती जा रही है।

सार्वजनिक क्षेत्रक एवं निजी क्षेत्रक में अन्तर-सार्वजनिक क्षेत्रक एवं निजी क्षेत्रक में प्रमुख अन्तर निम्नलिखित हैं-

(1) सार्वजनिक क्षेत्रक में, अधिकांश परिसम्पत्तियों पर सरकार का स्वामित्व होता है और सरकार ही सभी

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सेवाएँ उपलब्ध कराती है, जबकि निजी क्षेत्रक में परिसम्पत्तियों पर स्वामित्व और सेवाओं के वितरण की जिम्मेदारी एकल व्यक्ति या कम्पनी के हाथों में होती है।

(2) सार्वजनिक क्षेत्रक का ध्येय केवल लाभ कमाना नहीं होता बल्कि जन कल्याण भी होता है। सरकार इन सेवाओं पर किए गए व्यय की भरपाई करों आदि से करती है।

दूसरी तरफ निजी क्षेत्रक की गतिविधियों का ध्येय लाभ अर्जित करना होता है और इनकी सेवाओं को प्राप्त करने के लिए हमें उन एकल स्वामियों और कम्पनियों को भुगतान करना पड़ता है।

(3) कई प्रकार की गतिविधियों को पूरा करना सरकार का प्राथमिक दायित्व होता है जिन्हें सरकार सार्वजनिक क्षेत्रक के माध्यम से पूरा करती है, जैसे-शिक्षा, स्वास्थ्य, विद्युत आदि।

दूसरी तरफ, निजी क्षेत्रक का ऐसी सेवाओं को प्रदान करने का कोई दायित्व नहीं होता है।

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