📖 1. समाधान: पाठगत एवं पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नोत्तर
राजस्थान बोर्ड कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) — सभी पाठगत प्रश्नों एवं पाठ्यपुस्तक अभ्यास के संपूर्ण सटीक उत्तर।
पाठगत प्रश्न
(आओ इन पर विचार करें)- पृष्ठ 59 पर दिए गए अनुच्छेद को पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर दें।
प्रश्न 1. क्या आप मानते हैं कि फोर्ड मोटर्स एक बहुराष्ट्रीय कंपनी है? क्यों?
उत्तर— हाँ, हम मानते हैं कि फोर्ड मोटर्स एक मोटरगाड़ी निर्माता बहुराष्ट्रीय कम्पनी है क्योंकि वह मूल रूप से अमेरिकी कम्पनी है जो कई देशों में व्यवसाय करती है।
प्रश्न 2. विदेशी निवेश क्या है? फोर्ड मोटर्स ने भारत में कितना निवेश किया था?
उत्तर— किसी बहुराष्ट्रीय कम्पनी द्वारा दूसरे देश में किया गया निवेश विदेशी निवेश कहलाता है। फोर्ड मोटर्स ने भारत में 1995 में 1700 करोड़ रुपये का निवेश किया था।
प्रश्न 3. भारत में उत्पादन संयंत्र स्थापित करके फोर्ड मोटर्स जैसी बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ केवल भारत जैसे देशों के विशाल बाजार का ही लाभ नहीं उठाती हैं, बल्कि कम उत्पादन लागत का भी लाभ प्राप्त करती हैं। कथन की व्याख्या करें।
उत्तर— भारत की श्रम शक्ति की लागत बहुत कम है, साथ ही यहाँ का श्रम कुशल है। अतः बहुत-सी बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ यहाँ अपने उत्पाद का सस्ती लागत पर उत्पादन कर भारत के विशाल बाजार में आसानी से विक्रय कर सकती हैं। इस प्रकार वे भारत के विशाल बाजार के साथ-साथ कम उत्पादन लागत का भी लाभ प्राप्त करती हैं।
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प्रश्न 4. आपके विचार से कम्पनी अपने वैश्विक कारोबार के लिए कार के पुर्जों के विनिर्माण केन्द्र के रूप में भारत का विकास क्यों करना चाहती है? निम्न कारकों पर विचार करें-
(अ) भारत में श्रम और अन्य संसाधनों पर लागत।
(ब) कई स्थानीय विनिर्माताओं की उपस्थिति, जो फोर्ड मोटर्स के कल-पुर्जों की आपूर्ति करते हैं।
(स) अधिक संख्या में भारत और चीन के ग्राहकों से निकटता।
उत्तर—फोर्ड कम्पनी अपने वैश्विक कारोबार के लिए कार के पुर्जों के विनिर्माण केन्द्र के रूप में भारत का विकास करना चाहती है उस सम्बन्ध में तीनों कारक ही उपयुक्त हैं, जिनका विश्लेषण निम्न प्रकार है-
(अ) भारत एक विकासशील देश है जहाँ मानवीय एवं प्राकृतिक संसाधन प्रचुर मात्रा में हैं, अतः यहाँ पर कम्पनी के कल-पुर्जों की लागत कम आएगी।
(ब) भारत में कई छोटे-छोटे विनिर्माता भी हैं जो फोर्ड कम्पनी के लिए कम लागत पर तथा अच्छे कल-पुर्जे बनाकर दे सकते हैं।
(स) भारत एक विकासशील राष्ट्र है तथा यहाँ पर कारों की माँग भी अधिक है, साथ ही चीन भी जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़ा देश है तथा दोनों देशों में कारों की माँग निरन्तर बढ़ती जा रही है, अतः भारत में ही कारों का निर्माण कर भारत व चीन में विक्रय करने से कम्पनी को लाभ होगा।
प्रश्न 5. भारत में फोर्ड मोटर्स द्वारा कारों के निर्माण से उत्पादन किस प्रकार परस्पर संबंधित होगा?
उत्तर—भारत में अनेक छोटी एवं बड़ी कम्पनियाँ हैं जिनके साथ मिलकर फोर्ड मोटर्स कारों का उत्पादन कर सकती है। इससे देश के उत्पादकों को भी विकास के अवसर प्राप्त होंगे।
प्रश्न 6. बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ, अन्य कम्पनियों से किस प्रकार अलग हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ तथा अन्य कम्पनियों में अन्तर
क्र. सं. | बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ | अन्य कम्पनियाँ |
1. | बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ एक से अधिक देशों में अपनी औद्योगिक इकाइयाँ व कार्यालय स्थापित करती हैं। | अन्य कम्पनियाँ एक ही देश में औद्योगिक इकाइयाँ व कार्यालय स्थापित करती हैं। |
2. | इन कम्पनियों में पूँजी निवेश अधिक होता है। | इन कम्पनियों में पूँजी निवेश कम होता है। |
3. | इन कम्पनियों के उत्पादन की माँग और पूर्ति बड़े पैमाने पर होती है। | अन्य कम्पनियों के उत्पादन की माँग व पूर्ति छोटे पैमाने पर होती है। |
4. | इन कम्पनियों के उत्पादन की लागत कम होती है। इसलिए ये अधिक लाभ कमाती हैं। | इन कम्पनियों की उत्पादन की लागत अधिक होने के कारण ये कम लाभ कमा पाती हैं। |
5. | इनका आकार विशाल होता है। | इनका आकार छोटा होता है। |
प्रश्न 7. लगभग सभी बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ, अमेरिका, जापान या यूरोप की हैं, जैसे-नोकिया, कोका-कोला, पेप्सी, होण्डा, नाइकी। क्या आप अनुमान कर सकते हैं कि ऐसा क्यों?
उत्तर—अमेरिका, जापान, यूरोप आदि विकसित राष्ट्र हैं तथा इनके पास कुशल प्रबन्धन तथा उच्चस्तरीय उद्यमीय क्षमता है तथा दूसरे देशों में निवेश हेतु पूँजी एवं नवीन प्रौद्योगिकी है। अतः यहाँ की कई कम्पनियाँ बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ हैं।
पृष्ठ 61 (आओ इन पर विचार करें)-
प्रश्न 1. अतीत में देशों को जोड़ने वाला मुख्य माध्यम क्या था? अब यह अलग कैसे है?
उत्तर—अतीत में देशों को जोड़ने वाला मुख्य माध्यम विदेश व्यापार था, जो प्रायः स्थल मार्गों या समुद्री मार्गों द्वारा किया जाता था; जबकि वर्तमान में विदेश व्यापार विभिन्न मार्गों-वायु, स्थल, समुद्री तथा दूरसंचार माध्यमों आदि से होता है। दूसरा, वर्तमान में विभिन्न देशों के बाजारों के जुड़ने से विदेशों में ही निवेश किया जा रहा है, इसलिए अब यह अतीत से अलग है।
प्रश्न 2. विदेश व्यापार और विदेशी निवेश में अन्तर स्पष्ट करें।
उत्तर—विदेश व्यापार-दो या दो से अधिक देशों में वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान विदेश व्यापार
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कहलाता है। विदेश व्यापार उत्पादकों को घरेलू बाजारों से बाहर के बाजारों में पहुँचने का अवसर प्रदान करता है तथा यह देशों के बाजारों को जोड़ता है।
विदेशी निवेश- किसी बहुराष्ट्रीय कम्पनी द्वारा दूसरे देश में किए गए निवेश को विदेशी निवेश कहते हैं। बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा विदेशी निवेश अधिक लाभ कमाने के लिए किया जाता है।
प्रश्न 3. हाल के वर्षों में चीन भारत से इस्पात आयात कर रहा है। व्याख्या करें कि चीन द्वारा इस्पात का आयात कैसे प्रभावित करेगा?
(क) चीन की इस्पात कम्पनियों को
(ख) भारत की इस्पात कम्पनियों को
(ग) चीन में अन्य औद्योगिक वस्तुओं के उत्पादन के लिए इस्पात खरीदने वाले उद्योगों को।
उत्तर— (क) चीन द्वारा भारत से इस्पात आयात करने पर चीन की इस्पात कम्पनियों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ जाएगी जिस कारण उन्हें कम कीमत पर अधिक गुणवत्ता वाली वस्तुएँ उत्पादित करनी पड़ेंगी। इससे उनके लाभ में कमी आयेगी और उनके विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
(ख) चीन द्वारा इस्पात आयात करने पर भारतीय कम्पनियों का निर्यात बढ़ेगा तथा अधिक माँग के कारण भारतीय कम्पनियाँ बढ़ायेंगी तथा उनकी आय में वृद्धि होगी। अतः उन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
(ग) चीन में अन्य औद्योगिक वस्तुओं के उत्पादन हेतु इस्पात खरीदने वाले उद्योगों पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा क्योंकि उन्हें अपनी आवश्यकता पूर्ति के लिए चीन में ही इस्पात आसानी से तथा उचित कीमत पर उपलब्ध हो जायेगा।
प्रश्न 4. चीन के बाजारों में भारत से इस्पात का आयात किस प्रकार दोनों देशों के इस्पात-बाजार के एकीकरण में सहायता करेगा? व्याख्या करें।
उत्तर— चीन द्वारा भारत से इस्पात का आयात करने से दोनों देशों के व्यापारिक सम्पर्कों में वृद्धि होगी। चीन कच्चे माल का आयात करेगा तथा भारत चीन से निर्मित माल का आयात करेगा। हो सकता है वे भविष्य में संयुक्त उत्पादन या विदेशी निवेश हेतु भी प्रेरित हों तथा दोनों देश अच्छे मित्रों की तरह वस्तुओं और सेवाओं का विनिर्माण कर सकेंगे तथा दोनों के मध्य नवीनतम उन्नत प्रौद्योगिकी का भी आदान-प्रदान हो सकेगा।
पृष्ठ 62 (आओ इन पर विचार करें)-
प्रश्न 1. वैश्वीकरण प्रक्रिया में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की क्या भूमिका है?
उत्तर— वैश्वीकरण की प्रक्रिया का तीव्र विकास विदेशी निवेश के कारण हुआ है तथा मुख्यतः बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा ही विदेशों में निवेश किया जाता है। वैश्वीकरण प्रक्रिया में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका है क्योंकि-(i) ये कम्पनियाँ अन्य देशों में अपने उत्पादन का विस्तार कर रही हैं। (ii) इनके कारण ही विभिन्न देशों के बीच अधिक से अधिक वस्तुओं और सेवाओं, पूँजी और प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान हो रहा है।
प्रश्न 2. वे कौनसे विभिन्न तरीके हैं, जिनके द्वारा देशों को परस्पर संबंधित किया जा सकता है?
उत्तर— विभिन्न देशों के बीच-(i) लोगों का आवागमन, (ii) वस्तुओं व सेवाओं का आदान-प्रदान, (iii) विभिन्न देशों के बीच विदेश व्यापार तथा विदेशी निवेश तथा (iv) नवीनतम एवं उन्नत प्रौद्योगिकी का आवागमन ऐसे महत्त्वपूर्ण तरीके हैं जिनके द्वारा देशों को परस्पर सम्बन्धित किया जा सकता है।
प्रश्न 3. सही विकल्प का चयन करें-
देशों को जोड़ने से वैश्वीकरण के परिणाम होंगे-
(क) उत्पादकों के बीच कम प्रतिस्पर्धा होगी।
(ख) उत्पादकों के बीच अधिक प्रतिस्पर्धा होगी।
(ग) उत्पादकों के बीच प्रतिस्पर्धा में परिवर्तन नहीं होगा।
उत्तर— (ख) उत्पादकों के बीच अधिक प्रतिस्पर्धा होगी।
पृष्ठ 63 (आओ इन पर विचार करें)-
प्रश्न 2. सूचना प्रौद्योगिकी वैश्वीकरण से कैसे जुड़ी हुई है? क्या सूचना प्रौद्योगिकी के प्रसार के बिना वैश्वीकरण संभव होता?
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उत्तर—सूचना प्रौद्योगिकी का वैश्वीकरण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान है, बिना सूचना प्रौद्योगिकी के प्रसार के वैश्वीकरण की प्रक्रिया काफी जटिल हो जाती। वर्तमान समय में दूरसंचार, कंप्यूटर, इंटरनेट आदि से वैश्वीकरण की प्रक्रिया को तीव्र गति मिली है क्योंकि इन सुविधाओं ने विश्व में परस्पर सम्पर्क करने, सूचनाओं को तत्काल प्राप्त करने तथा दूरवर्ती क्षेत्रों से संवाद करने को आसान बना दिया है।
पृष्ठ 64 (आओ इन पर विचार करें)-
प्रश्न 1. विदेश व्यापार के उदारीकरण से आप क्या समझते हैं?
(माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)
उत्तर— विदेश व्यापार के उदारीकरण से हमारा तात्पर्य आयात एवं निर्यात एवं विदेशी निवेश पर से सरकार द्वारा निर्धारित अवरोधों व प्रतिबंधों को समाप्त करने की प्रक्रिया से है।
प्रश्न 2. आयात पर कर एक प्रकार का व्यापार अवरोधक है। सरकार आयात होने वाली वस्तुओं की संख्या भी सीमित कर सकती है। इसे कोटा कहते हैं। क्या आप चीन के खिलौनों के उदाहरण से व्याख्या कर सकते हैं कि व्यापार अवरोधक के रूप में कोटा का प्रयोग कैसे किया जा सकता है? आपके विचार से क्या इसका प्रयोग किया जाना चाहिए? चर्चा करें।
उत्तर— कोटा के अन्तर्गत सरकार आयातित वस्तु की मात्रा को निश्चित कर देती है अर्थात् सरकार द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा में आयात नहीं किया जा सकता है। यदि सरकार चीनी खिलौनों की आयात मात्रा को निश्चित कर दे तो देश में चीनी खिलौनों की पूर्ति कम हो जाएगी जिससे देश में उत्पादित खिलौनों की मांग एवं बिक्री बढ़ेगी। इससे हमारे देश में खिलौना उद्योग को बढ़ावा मिलेगा तथा रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे। अतः देश के उद्योगों को संरक्षण देने हेतु सीमित रूप में कोटा का उपयोग किया जाना चाहिए।
पृष्ठ 66 (आओ इन पर विचार करें)-
प्रश्न 1. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें-
उत्तर— विश्व व्यापार संगठन विकसित देशों की पहल पर शुरू हुआ था। विश्व व्यापार संगठन का ध्येय अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का उदारीकरण करना है। विश्व व्यापार संगठन सभी देशों के लिए अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से सम्बन्धित नियम बनाता और देखता है कि इन नियमों का पालन होता है या नहीं। व्यवहार में, देशों के बीच व्यापार पूर्णतः मुक्त नहीं है। विकासशील देश, जैसे भारत में व्यापार अवरोधों को हटा लिया गया है, जबकि अधिकांश स्थितियों में विकसित देशों ने अपने उत्पादकों को संरक्षण देना जारी रखा है।
प्रश्न 2. आपके विचार से विभिन्न देशों के बीच अधिकाधिक न्यायसंगत व्यापार के लिए क्या किया जा सकता है?
उत्तर— विभिन्न देशों के बीच अधिकाधिक न्यायसंगत व्यापार के लिए सभी देशों द्वारा आयात-निर्यात प्रतिबन्धों को एक निश्चित सीमा तक समाप्त किया जाना चाहिए तथा साथ ही विश्व व्यापार संगठन जैसे संगठनों द्वारा सभी देशों के साथ समानता का व्यवहार किया जाना चाहिए।
पृष्ठ 67 (आओ इन पर विचार करें)-
प्रश्न 1. प्रतिस्पर्धा से भारत के लोगों को कैसे लाभ हुआ है?
उत्तर— वैश्वीकरण के फलस्वरूप हुई प्रतिस्पर्धा से भारत के लोगों को काफी लाभ हुआ है। अब भारतीय उपभोक्ताओं के पास वस्तुओं एवं सेवाओं के अनेक विकल्प हैं तथा उन्हें कम कीमत पर अधिक गुणवत्ता वाली वस्तु प्राप्त हो रही है। इसके अतिरिक्त नवीन प्रौद्योगिकी के आगमन से देश के उत्पादकों का उत्पादन भी बढ़ा है। देश में बहुराष्ट्रीय निगमों के आगमन से रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। रोजगार वृद्धि एवं गुणवत्ता वाली वस्तुओं के उपभोग से लोगों के जीवन स्तर में भी वृद्धि हुई है। साथ ही इन उद्योगों को कच्चे माल इत्यादि की आपूर्ति करने वाली स्थानीय कम्पनियाँ समृद्ध हुई हैं।
प्रश्न 2. क्या और भारतीय कंपनियों को बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के रूप में उभारना चाहिए? इससे देश की जनता को क्या लाभ होगा?
उत्तर— हाँ, देश की और अधिक कम्पनियों को बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के रूप में उभारना चाहिए। इससे देश में औद्योगिक विकास होगा, विदेश व्यापार बढ़ेगा। इससे देश के लोगों को और अधिक रोजगार मिलेगा। विभिन्न देशों की
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कम्पनियों के मध्य प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और लोगों को कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण वस्तुएँ मिलेंगी। भारतीय कंपनियाँ जब बहुराष्ट्रीय कंपनी के रूप में कार्य करेंगी तो देश के लिए विदेशी मुद्रा प्राप्त होगी।
प्रश्न 3. सरकारें अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करने का प्रयास क्यों करती हैं?
उत्तर— सरकारें अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करने का प्रयास इसलिए करती हैं। क्योंकि इससे-(i) देश में आधारभूत संरचना का विकास होता है, (ii) देश में नए-नए उद्योग खुलते हैं, (iii) नई प्रौद्योगिकी का आगमन होता है, (iv) इससे देश के लोगों को रोजगार उपलब्ध होता है तथा (v) उपभोक्ताओं को कम कीमत पर अच्छी गुणवत्ता वाली वस्तु उपलब्ध होती है।
पृष्ठ 68 (आओ इन पर विचार करें)-
प्रश्न 3. नवीनतम अध्ययनों ने संकेत किया है कि भारत के लघु उत्पादकों को बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धा के लिए तीन चीजों की आवश्यकता है-
(अ) बेहतर सड़कें, बिजली, पानी, कच्चा माल, विपणन और सूचना तंत्र, (ब) प्रौद्योगिकी में सुधार एवं आधुनिकीकरण और (स) उचित ब्याज दर पर साख की समय पर उपलब्धता।
• क्या आप व्याख्या कर सकते हैं कि ये तीन चीजें भारतीय उत्पादकों को किस प्रकार मदद करेंगी?
• क्या आप मानते हैं कि बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ इन क्षेत्रों में निवेश करने के लिए इच्छुक होंगी? क्यों?
• क्या आप मानते हैं कि इन सुविधाओं को उपलब्ध कराने में सरकार की भूमिका है? क्यों?
• क्या आप कोई ऐसा उपाय सुझा सकते हैं जिसे कि सरकार अपना सके? चर्चा करें।
उत्तर— (क) हाँ, हम मानते हैं कि भारतीय उत्पादकों के लिए ये तीनों चीजें-(अ) बेहतर सड़कें; बिजली, पानी, कच्चा माल; विपणन और सूचना तंत्र, (ब) प्रौद्योगिकी में सुधार एवं आधुनिकीकरण और (स) उचित ब्याज दर पर साख की समय पर उपलब्धता-आवश्यक हैं। बेहतर सड़कों से कच्चे माल तथा तैयार माल के परिवहन में तेजी लाई जा सकती है तथा हम तीव्रता से वस्तुओं का उत्पादन कर सकते हैं। बिजली, पानी, कच्चा माल आदि से वस्तुओं का उत्पादन करने; विपणन और सूचना माल का विक्रय करने में; प्रौद्योगिकी में सुधार एवं आधुनिकीकरण से वस्तुओं की गुणवत्ता को बढ़ाने में मदद मिलेगी तथा उचित ब्याज दर पर साख की उपलब्धता से भारतीय उत्पादकों को सहायता प्राप्त होगी। इससे लघु उत्पादक उत्पादन लागत को कम करके उत्पादों की किस्म में सुधार ला सकते हैं।
(ख) नहीं, मैं नहीं मानता कि बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ इन क्षेत्रों में निवेश करने के लिए इच्छुक होंगी; क्योंकि इन क्षेत्रों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों को प्रतिफल बहुत देरी से मिलते हैं तथा लाभ भी बहुत कम होता है।
(ग) हाँ, हम मानते हैं कि इन सुविधाओं को उपलब्ध कराने में सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका है। इन सुविधाओं को उपलब्ध कराने में बहुत अधिक धनराशि खर्च होती है जो कि सरकार के अतिरिक्त कोई अन्य व्यक्ति एकत्रित नहीं कर सकता है। इसके अतिरिक्त इन सुविधाओं से सामाजिक कल्याण में वृद्धि होती है, जो सरकार का मुख्य लक्ष्य होता है।
(घ) हाँ, हम इस बारे में निम्नलिखित सुझाव दे सकते हैं-
(i) सरकार विदेशों में रहने वाले भारतीय लोगों को भारत में पूँजी निवेश के लिए आमंत्रित करे;
(ii) इन क्षेत्रों में निवेश हेतु उदार नीति बनाए तथा
(iii) इस क्षेत्र के उद्यमियों को अधिक सुविधाएँ उपलब्ध कराये।
पृष्ठ 70 (आओ इन पर विचार करें)-
प्रश्न 1. वस्त्र उद्योग के श्रमिकों, भारतीय निर्यातकों और विदेशी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को प्रतिस्पर्धा ने किस प्रकार प्रभावित किया है?
उत्तर— (1) वस्त्र उद्योग के श्रमिकों पर प्रभाव-प्रतिस्पर्धा के फलस्वरूप वस्त्र उद्योग के श्रमिकों को हानि हुई है, उनका स्थायी एवं नियमित रोजगार अब अस्थायी रोजगार में बदल गया है। श्रमिकों की मजदूरी कम हो गई है तथा उन्हें अधिक घंटे काम करना पड़ता है। हस्तशिल्प एवं कुटीर उद्योगों के नष्ट होने से कई श्रमिक बेरोजगार हो गए हैं।
(2) भारतीय निर्यातकों पर प्रभाव-प्रतिस्पर्धा से भारतीय निर्यातकों को लाभ तो हुआ है किन्तु सस्ता उत्पादन करने के कारण उन्हें लागत कम रखनी पड़ती है जिससे उन्हें कुशल श्रमिक नहीं मिल पाते हैं।
(3) विदेशी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों पर प्रभाव-विदेशी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को प्रतिस्पर्धा का लाभ हुआ है, उन्हें प्रतिस्पर्धा से सस्ती लागत में उत्पाद प्राप्त हो रहे हैं।
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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
प्रश्न 1. वैश्वीकरण से आप क्या समझते हैं? अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।
(प्रश्न बैंक; माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)
अथवा
वैश्वीकरण को परिभाषित कीजिए। (प्रश्न बैंक)
अथवा
वैश्वीकरण से क्या अभिप्राय है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)
उत्तर— वैश्वीकरण का तात्पर्य विभिन्न देशों द्वारा अपनी अर्थव्यवस्था को अन्य देशों के लिए खोलने से है तथा विभिन्न अवरोधों को हटाने से है ताकि विभिन्न देशों के मध्य आर्थिक गतिविधियों का विस्तार हो सके; पूँजी व श्रम का स्वतंत्र रूप में आवागमन हो सके तथा विदेशी व्यापार एवं विदेशी निवेश में भी वृद्धि हो सके। इस प्रकार विभिन्न देशों के बीच परस्पर सम्बन्ध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया ही वैश्वीकरण है।
प्रश्न 2. भारत सरकार द्वारा विदेश व्यापार एवं विदेशी निवेश पर अवरोधक लगाने के क्या कारण थे? इन अवरोधकों को सरकार क्यों हटाना चाहती थी?
उत्तर— स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् भारत सरकार ने विदेश व्यापार एवं विदेशी निवेश पर प्रतिबंध लगा रखा था। इसका मुख्य कारण भारतीय उत्पादकों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से संरक्षण प्रदान करना था। 1950 और 1960 के दशकों में भारत में उद्योगों का उदय हो रहा था। वे उत्पादन की परम्परागत तकनीकों का उपयोग करते थे। ऐसी स्थिति में यदि सरकार द्वारा विदेश व्यापार एवं विदेशी निवेश पर प्रतिबंध नहीं लगाया जाता तो ये उद्योग आयातित विदेशी वस्तुओं से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाते तथा देश में औद्योगिक पतन प्रारम्भ हो जाता और उद्योग-धन्धों के नष्ट होने से यहाँ के श्रमिक बेरोजगार हो जाते एवं उनकी आर्थिक स्थिति दयनीय हो जाती। इसीलिए भारत ने केवल अनिवार्य चीजें, जैसे- मशीनरी, उर्वरक और पेट्रोलियम के आयात की ही अनुमति दी।
वर्ष 1991 में भारत को अपनी नीतियों में परिवर्तन करना पड़ा तथा इन अवरोधकों को हटाना पड़ा क्योंकि-
(i) सन् 1991 तक भारतीय उत्पादक विश्व के उत्पादकों से प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हो गये थे।
(ii) अब यह महसूस किया जाने लगा था कि प्रतिस्पर्धा से उत्पादकों की गुणवत्ता में सुधार होगा।
(iii) हम अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों का सहयोग प्राप्त करना चाहते थे।
(iv) अवरोधकों को हटाने से हमारे विदेश व्यापार में वृद्धि होगी जिससे यहाँ के उत्पादकों एवं उपभोक्ताओं दोनों का लाभ होगा।
प्रश्न 3. श्रम कानूनों में लचीलापन कम्पनियों को कैसे मदद करेगा?
उत्तर— (i) श्रम कानूनों में लचीलेपन से कम्पनियाँ नियमित आधार पर श्रमिकों को रोजगार देने के बजाय लोचदार ढंग से छोटी अवधि के लिए कार्य पर रख सकेंगी।
(ii) श्रम कानूनों में लचीलेपन से कम्पनियों को श्रम लागत कम उठानी पड़ेगी जिससे उनके उत्पादों की लागत भी कम हो जाएगी।
(iii) उत्पादन लागत कम होने से कम्पनियों को प्राप्त होने वाले लाभ में वृद्धि होगी।
प्रश्न 4. दूसरे देशों में बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ किस प्रकार उत्पादन या उत्पादन पर नियंत्रण स्थापित करती हैं?
उत्तर— दूसरे देशों में बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ विदेश व्यापार तथा विदेशी निवेश के द्वारा उत्पादन पर निम्न प्रकार नियंत्रण स्थापित करती हैं-
(i) स्थानीय कंपनियाँ खरीदकर— बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के निवेश का सबसे आम रास्ता स्थानीय कम्पनियों को खरीदना और उसके बाद उत्पादन का प्रसार करना है तथा अपार सम्पदा वाली बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ यह कार्य आसानी से कर लेती हैं।
(ii) संयुक्त उत्पादन द्वारा— ये कम्पनियाँ दूसरे देशों के साथ मिलकर संयुक्त उत्पादन भी करती हैं तथा धीरे-धीरे दूसरे देश के उत्पादन पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लेती हैं।
(iii) छोटे उत्पादकों को उत्पादन का ऑर्डर देना— बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ छोटे उत्पादकों को उत्पादन का ऑर्डर देती हैं। वस्त्र, जूते-चप्पल एवं खेल के सामान ऐसे उद्योग हैं जहाँ विश्वभर में बड़ी संख्या में छोटे उत्पादकों
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सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) कक्षा X 417
द्वारा उत्पादन किया जाता है। इनके द्वारा बहुराष्ट्रीय कंपनियों को इन उत्पादों की आपूर्ति की जाती है। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ इन वस्तुओं को अपने ब्राण्ड नाम से उपभोक्ताओं को बेच देती हैं। इन बड़ी कंपनियों में दूरस्थ उत्पादकों के मूल्य, गुणवत्ता, आपूर्ति और श्रम-शर्तों का निर्धारण करने की प्रचण्ड क्षमता होती है।
प्रश्न 5. विकसित देश, विकासशील देशों से उनके व्यापार और निवेश का उदारीकरण क्यों चाहते हैं? क्या आप मानते हैं कि विकासशील देशों को भी बदले में ऐसी माँग करनी चाहिए?
उत्तर— विकसित देश, विकासशील देशों से उनके व्यापार और निवेश का उदारीकरण चाहते हैं क्योंकि-
(i) बहुराष्ट्रीय कंपनियों के द्वारा वे विदेश व्यापार व विदेशी निवेश के माध्यम से विकासशील देशों में अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकें।
(ii) वे वहाँ ऊँची दर का लाभ अर्जित करने के लिए विकासशील देशों में निवेश करना चाहते हैं।
हाँ, हम मानते हैं कि विकासशील देशों को भी विकसित देशों द्वारा अनुचित ढंग से लगाये हुए व्यापार अवरोधकों को हटाने, उनके बाजार तक पहुँचने तथा अधिक आर्थिक सहायता की माँग करनी चाहिए।
प्रश्न 6. 'वैश्वीकरण का प्रभाव एकसमान नहीं है।' इस कथन की अपने शब्दों में व्याख्या कीजिए।
उत्तर— वैश्वीकरण का प्रभाव देश के सभी वर्गों पर एकसमान नहीं हुआ है। कुछ वर्गों पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ा है तो कुछ वर्गों पर नकारात्मक। यथा-
(अ) सकारात्मक प्रभाव— (i) वैश्वीकरण से बड़े उद्योगों एवं धनी वर्ग के उपभोक्ताओं को तो लाभ होता है। बड़े उद्योगों को अपना विस्तार करने का अवसर मिलता है जबकि धनी वर्ग के उपभोक्ताओं को कम कीमत पर अधिक गुणवत्ता वाली वस्तुएँ प्राप्त होती हैं। परिणामतः ये लोग पहले की अपेक्षा आज अपेक्षाकृत उच्चतर जीवन स्तर का आनंद ले रहे हैं।
(ii) वैश्वीकरण के फलस्वरूप कई भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा क्षमता में सुधार हुआ है तथा वे बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ बन गई हैं।
(iii) वैश्वीकरण से बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आगमन से रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं।
(iv) वैश्वीकरण से भारतीय कंपनियों को भी आधुनिक विदेशी तकनीकियों का लाभ मिला है।
(ब) नकारात्मक प्रभाव— (i) वैश्वीकरण से छोटे उद्योगों, कुटीर उद्योगों को भारी क्षति होती है क्योंकि ये उद्योग वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना नहीं कर पाते हैं तथा बन्द हो जाते हैं। अतः इससे बेरोजगारी फैलती है।
(ii) वैश्वीकरण के फलस्वरूप कई बार श्रमिकों के हितों का संरक्षण भी नहीं हो पाता है। बढ़ती हुई प्रतिस्पर्धा के कारण अधिकांश नियोक्ता आजकल श्रमिकों को रोजगार देने में लचीलापन पसंद करते हैं। इससे श्रमिकों का रोजगार सुनिश्चित और सुरक्षित नहीं रह गया है।
(iii) नियोक्ता श्रम लागतों में निरन्तर कटौती कर कम वेतन पर श्रमिकों से अधिक समय काम ले रहे हैं।
अतः स्पष्ट है कि वैश्वीकरण का प्रभाव एक समान नहीं होता है।
प्रश्न 7. व्यापार और निवेश नीतियों का उदारीकरण वैश्वीकरण प्रक्रिया में कैसे सहायता पहुँचाता है?
उत्तर— व्यापार एवं निवेश नीतियों का उदारीकरण वैश्वीकरण की प्रक्रिया में निम्न प्रकार सहायता पहुँचाता है-
(1) व्यापार अवरोधों को हटाना— वैश्वीकरण का तात्पर्य विभिन्न देशों के मध्य आर्थिक गतिविधियों का बिना अवरोध संचालन से है। व्यापार एवं निवेश नीतियों के उदारीकरण से हमारा तात्पर्य आयात-निर्यात पर लगे प्रतिबन्धों को कम करने से है। यदि इन प्रतिबन्धों को कम कर दिया जाएगा तो दो देशों के बीच आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी, विदेश व्यापार में वृद्धि होगी तथा विदेशी निवेश बढ़ेगा। इस प्रकार उदारीकरण के फलस्वरूप वैश्वीकरण की प्रक्रिया में तेजी आएगी। अतः उदारीकरण वैश्वीकरण की प्रक्रिया में सहायक है।
(2) निवेश का उदारीकरण— इस नीति के अन्तर्गत बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ दूसरे देश में, जहाँ निवेश का उदारीकरण किया गया है, निवेश करने के लिए स्वतंत्र होती हैं। उस देश की सरकार विभिन्न सुविधाएँ प्रदान कर देश में निवेश के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनियों को आमंत्रित कर रही हैं। इससे उस देश में विदेशी निवेश निरन्तर बढ़ रहा है।
(3) सूचना व संचार प्रौद्योगिक का विकास— उदारीकरण की प्रक्रिया के फलस्वरूप सूचना और प्रौद्योगिकी का विकास होता है। इससे वैश्वीकरण को बढ़ावा मिलता है। सूचना एवं प्रौद्योगिकी ने विभिन्न देशों में सेवाओं के उत्पादन के प्रसार में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
प्रश्न 8. विदेश व्यापार विभिन्न देशों के बाजारों के एकीकरण में किस प्रकार मदद करता है? यहाँ दिए गए उदाहरण से भिन्न उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।
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अथवा
विदेश व्यापार विभिन्न देशों के बाजारों के एकीकरण में किस प्रकार सहायक होता है? इस कथन के पक्ष में अपने तीन तर्क दीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)
उत्तर—लम्बे समय से विदेश व्यापार विभिन्न देशों को जोड़ने का मुख्य माध्यम रहा है। यह विभिन्न देशों के बाजारों के एकीकरण में निम्न प्रकार से मदद करता है-
(1) विदेश व्यापार घरेलू बाजारों अर्थात् अपने देश के बाजारों से बाहर के बाजारों में पहुँचने के लिए उत्पादकों को एक अवसर प्रदान करता है। उत्पादक केवल अपने देश के बाजारों में ही अपने उत्पाद नहीं बेच सकते, बल्कि विश्व के अन्य देशों के बाजारों में प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, भारत में सूती वस्त्रों का पर्याप्त मात्रा में उत्पादन होता है, भारत में किसी अन्य देश द्वारा इनकी माँग होने पर इन वस्तुओं का वहाँ निर्यात किया जा सकता है। इसी प्रकार भारत अफ्रीका से हीरे-जवाहरात का कच्चा माल आयात करके, यूरोप, अमेरिका आदि देशों को निर्मित माल निर्यात करता है।
(2) दूसरे देशों में उत्पादित वस्तुओं के आयात से खरीदारों के समक्ष उन वस्तुओं के घरेलू उत्पादन के अन्य विकल्पों का विस्तार होता है।
(3) विदेशी व्यापार से वस्तुओं का एक बाजार से दूसरे बाजार में आवागमन होता है। बाजार में वस्तुओं के विकल्प बढ़ जाते हैं।
(4) विदेश व्यापार से दो बाजारों में एक ही वस्तु का मूल्य एक समान होने लगता है। अब दो देशों के उत्पादक एक-दूसरे से हजारों मील दूर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं। इस प्रकार, विदेश व्यापार विभिन्न देशों के बाजारों के एकीकरण में सहायक होता है।
प्रश्न 9. वैश्वीकरण भविष्य में जारी रहेगा। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आज से बीस वर्ष बाद विश्व कैसा होगा? अपने उत्तर का कारण दीजिए।
उत्तर—वैश्वीकरण निरन्तर बढ़ रहा है तथा विगत दो दशकों में इसमें तीव्र वृद्धि आई है। इससे लगता है कि वैश्वीकरण भविष्य में भी जारी रहेगा। आज से बीस वर्ष पश्चात पूरे विश्व के देशों का बाजार समान हो जाएगा तथा सभी देशों में समान वस्तुएँ एवं सेवाएँ उपलब्ध हो पायेंगी तथा सम्पूर्ण विश्व एक बड़े बाजार के रूप में दिखाई देगा। इसके अनेक कारण हैं। यथा-
(i) सम्पूर्ण विश्व में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का विस्तार अत्यधिक होगा जिससे विश्व के बाजार एक-दूसरे के निकट आयेंगे।
(ii) बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा विदेशी निवेश में वृद्धि होगी।
(iii) विभिन्न देशों के मध्य विदेशी व्यापार में अत्यधिक वृद्धि होगी।
(iv) अधिक से अधिक वस्तुओं, सेवाओं, निवेश तथा प्रौद्योगिकी का विभिन्न देशों के मध्य आवागमन बढ़ेगा।
(v) श्रम की गतिशीलता बढ़ने से कुशल एवं अकुशल श्रमिक विश्व में फैल जायेंगे; विभिन्न देशों में लोगों का वृहत स्तर पर आवागमन बढ़ेगा, सांस्कृतिक मूल्यों के आदान-प्रदान में वृद्धि होगी तथा सभी देशों के लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा।
प्रश्न 10. मान लीजिए कि आप दो लोगों को तर्क करते हुए पाते हैं-एक कह रहा है कि वैश्वीकरण ने हमारे देश के विकास को क्षति पहुँचाई है, दूसरा कह रहा है कि वैश्वीकरण ने भारत के विकास में सहायता की है। इन लोगों को आप कैसे जवाब दोगे?
उत्तर—ये दोनों लोग अपने तर्कों के आधार पर सही हो सकते हैं; क्योंकि पहला व्यक्ति इस आधार पर सही हो सकता है कि वैश्वीकरण के फलस्वरूप हमारे लघु एवं कुटीर उद्योग प्रतिस्पर्धा का सामना नहीं कर पाते तथा वे नष्ट हो रहे हैं, साथ ही देश में उपभोक्तावाद को बढ़ावा मिला है। इससे अकुशल श्रमिकों के रोजगार की निश्चितता व सुरक्षा घटी है।
दूसरे व्यक्ति का तर्क इस आधार पर सही हो सकता है कि देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ता है, रोजगार में वृद्धि होती है, नई प्रौद्योगिकी आती है, उपभोक्ताओं को कम कीमत पर अधिक गुणवत्ता वाली वस्तुएँ उपलब्ध होती हैं, देश का निर्यात बढ़ता है आदि। वैश्वीकरण ने देश की अर्थव्यवस्था को अधिक प्रतियोगी बनाया है। इससे भारत प्रतिस्पर्धा के समक्ष ठहरने में समर्थ हो गया है। इससे धनी उपभोक्ता, बड़े उत्पादक, कुशल श्रमिक लाभान्वित हुए हैं।
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सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) कक्षा X 419
प्रश्न 11. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
दो दशक पहले की तुलना ............... के बीच अधिकतम ...............।
उत्तर— दो दशक पहले की तुलना में भारतीय खरीदारों के पास वस्तुओं के अधिक विकल्प हैं। यह वैश्वीकरण की प्रक्रिया से नजदीक से जुड़ा हुआ है। अनेक दूसरे देशों में उत्पादित वस्तुओं को भारत के बाजारों में बेचा जा रहा है। इसका अर्थ है कि अन्य देशों के साथ व्यापार बढ़ रहा है। इससे भी आगे भारत में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा उत्पादित ब्रांडों की बढ़ती संख्या हम बाजारों में देखते हैं। बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ भारत में निवेश कर रही हैं; क्योंकि यहाँ वे अधिक लाभ अर्जित करती हैं जबकि बाजार में उपभोक्ताओं के लिए अधिक विकल्प उपलब्ध हैं इसलिए बढ़ते विदेशी व्यापार और विदेशी निवेश के प्रभाव का अर्थ है, उत्पादकों के बीच अधिकतम प्रतिस्पर्धा।
प्रश्न 12. निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए-
(क) बहुराष्ट्रीय कंपनियां छोटे उत्पादकों से सस्ते दरों पर खरीदती हैं। | (अ) मोटर गाड़ियाँ |
(ख) आयात पर कर और कोटा का उपयोग, व्यापार नियमन के लिए किया जाता है। | (ब) कपड़ा, जूते-चप्पल, खेल के सामान |
(ग) विदेशों में निवेश करने वाली भारतीय कंपनियां। | (स) कॉल सेंटर |
(घ) आई.टी. ने सेवाओं के उत्पादन के प्रसार में सहायता की है। | (द) टाटा मोटर्स, इंफोसिस, रैनबैक्सी |
(ङ) अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने उत्पादन करने के लिए निवेश किया है। | (य) व्यापार अवरोधक |
उत्तर—
(क)-(ब)
(ख)-(य)
(ग)-(द)
(घ)-(स)
(ङ)-(अ)
प्रश्न 13. सही विकल्प का चयन कीजिए-
(अ) वैश्वीकरण के विगत दो दशकों में द्रुत आवागमन देखा गया है-
(क) देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं और लोगों का
(ख) देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं और निवेशों का
(ग) देशों के बीच वस्तुओं, निवेशों और लोगों का
(आ) विश्व के देशों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा निवेश का सबसे अधिक सामान्य मार्ग है-
(क) नये कारखानों की स्थापना
(ख) स्थानीय कंपनियों को खरीद लेना
(ग) स्थानीय कंपनियों से साझेदारी करना
(इ) वैश्वीकरण ने जीवन-स्तर के सुधार में सहायता पहुँचाई है-
(क) सभी लोगों के
(ख) विकसित देशों के लोगों के
(ग) विकासशील देशों के श्रमिकों के
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर— (अ) (ख), (आ) (ख), (इ) (ख)।
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📝 2. नोट्स: पाठ-सार, मुख्य बिंदु एवं शब्दावली
महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं, भौगोलिक परिभाषाएं, राजनीतिक सिद्धांत एवं संपूर्ण अध्याय का सारगर्भित सारांश।
[पाठ-सार बॉक्स]

पाठ-सार
विगत कुछ वर्षों में भारतीय बाजार पूर्णतः परिवर्तित हो गया है। अब हमारे उपभोक्ताओं के सम्मुख वस्तुओं एवं सेवाओं के अनेक विकल्प हैं। इसका मुख्य कारण वैश्वीकरण है।
अन्तरदेशीय उत्पादन- बीसवीं शताब्दी के मध्य तक भारत से केवल कच्चे माल और खाद्य पदार्थ का निर्यात किया जाता था तथा तैयार माल यहाँ आयात कर भारतवासियों को बेचा जाता था। व्यापार ही दूरस्थ देशों को आपस में जोड़ने का मुख्य जरिया था। लेकिन बहुराष्ट्रीय कंपनियों के उभरने से यह विश्व परिदृश्य परिवर्तित हो गया है।
एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी वह है, जो एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण व स्वामित्व रखती है। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ उन प्रदेशों में कार्यालय तथा उत्पादन के लिए कारखाने स्थापित करती हैं, जहाँ उसे सस्ता श्रम तथा अन्य संसाधन मिल सकते हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ केवल वैश्विक स्तर पर अपना तैयार उत्पाद ही नहीं बेच रही हैं, बल्कि वे वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन विश्व स्तर पर कर रही हैं। परिणामतः उत्पादन प्रक्रिया क्रमशः जटिल ढंग से संगठित हुई है।
विश्व-भर के उत्पादन को एक-दूसरे से जोड़ना- बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा कम लागत वाले स्थानों पर वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन करने का निश्चय किया जाता है। इस सम्बन्ध में वे बाजार की नजदीकी, कम लागत पर कुशल व अकुशल श्रम की उपलब्धता, उत्पादन के अन्य कारकों की उपलब्धता तथा सरकारी नीतियों की अनुकूलता आदि पर ध्यान देती हैं। इसके पश्चात् वे उत्पादन के कार्यालय और कारखानों की स्थापना करने हेतु वहाँ परिसम्पत्तियों में निवेश करती हैं। बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा किया गया निवेश विदेशी निवेश कहलाता है। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ कई तरह से अपने उत्पादन कार्य का प्रसार कर रही हैं, जैसे-स्वयं फैक्ट्री खोलकर, स्थानीय कंपनियों के साथ संयुक्त उत्पादन कर, स्थानीय कंपनियों को खरीदकर, छोटे उत्पादकों को उत्पादन का आर्डर देकर उसकी स्वयं द्वारा आपूर्ति करना आदि। परिणामतः दूर-दूर स्थानों पर फैला उत्पादन परस्पर संबंधित हो रहा है।
विदेश व्यापार और बाजारों का एकीकरण- विदेश व्यापार विभिन्न देशों को आपस में जोड़ने का मुख्य माध्यम है। विदेश व्यापार घरेलू बाजारों अर्थात् अपने देश के बाजारों से बाहर के बाजारों में पहुँचने के लिए उत्पादकों को एक अवसर प्रदान करता है। इसी प्रकार दूसरे देशों में उत्पादित वस्तुओं के आयात से खरीददारों के समक्ष उन वस्तुओं के घरेलू उत्पादन के अन्य विकल्पों का विस्तार होता है। अतः विदेश व्यापार विभिन्न देशों के बाजारों को जोड़ने या एकीकरण में सहायक होता है।
वैश्वीकरण क्या है?- विभिन्न देशों के बीच परस्पर सम्बन्ध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया ही वैश्वीकरण कहलाती है। वर्तमान में बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ वैश्वीकरण की प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभा रही हैं।
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सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) कक्षा X 411
वैश्वीकरण को सम्भव बनाने वाले कारक-(i) विभिन्न देशों के बीच अधिकाधिक वस्तुओं और सेवाओं, निवेश और प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान हो रहा है। (ii) इसके अतिरिक्त विभिन्न देशों के बीच लोगों के आवागमन में भी वृद्धि हुई है। (iii) वैश्वीकरण की प्रक्रिया को उत्प्रेरित करने वाला सबसे महत्त्वपूर्ण कारक परिवहन प्रौद्योगिकी की तीव्र उन्नति है। (iv) इसके अतिरिक्त सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी की उन्नति इससे भी महत्त्वपूर्ण कारक है।
विदेश व्यापार तथा विदेशी निवेश का उदारीकरण-भारत में 1991 की नीतियों के फलस्वरूप अर्थव्यवस्था को खोल दिया गया तथा विदेश व्यापार एवं विदेशी निवेश से प्रतिबन्धों को काफी हद तक हटा दिया गया जिससे विदेश व्यापार एवं विदेशी निवेश का उदारीकरण हो गया है, यही प्रक्रिया उदारीकरण के नाम से जानी जाती है।
विश्व व्यापार संगठन-विश्व व्यापार संगठन एक ऐसा संगठन है जिसका उद्देश्य अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना है। यह अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार सम्बन्धी नियमों का निर्धारण करता है।
भारत में वैश्वीकरण का प्रभाव-वैश्वीकरण से उपभोक्ताओं को कम कीमत पर अधिक गुणवत्ता वाली वस्तुएँ एवं सेवाएँ मिलने लगी हैं। भारत में अधिकांश क्षेत्रों में विदेशी निवेश में वृद्धि हुई है। नवीन प्रौद्योगिकी का आगमन हुआ है तथा भारतीय कम्पनियों की प्रतिस्पर्धा क्षमता में वृद्धि हुई है। वैश्वीकरण से भारत के कई उद्योग प्रतिस्पर्धा का सामना नहीं कर पाए, उन्हें हानि भी हुई है।
छोटे उत्पादक-प्रतिस्पर्धा करो या नष्ट हो जाओ-वैश्वीकरण ने बड़ी संख्या में छोटे उत्पादकों और श्रमिकों के लिए बड़ी चुनौतियाँ खड़ी की हैं। कई इकाइयाँ बन्द हो गईं जिसके चलते अनेक श्रमिक बेरोजगार हो गए।
प्रतिस्पर्धा और अनिश्चित रोजगार-वैश्वीकरण और प्रतिस्पर्धा के दबाव ने श्रमिकों के जीवन को व्यापक रूप से प्रभावित किया। इसके परिणामस्वरूप ही श्रमिकों का रोजगार अब सुनिश्चित नहीं है। आज अधिकांश श्रमिक असंगठित क्षेत्र में नियोजित हैं तथा संगठित क्षेत्र में भी कार्य-परिस्थितियाँ असंगठित क्षेत्र के समान होती जा रही हैं। संगठित क्षेत्र के श्रमिकों को अब कोई संरक्षण और लाभ नहीं मिलता है, जिसका वे पहले उपभोग करते थे।
न्यायसंगत वैश्वीकरण के लिए संघर्ष-वैश्वीकरण से देश के सभी लोगों का फायदा नहीं हुआ है। अतः वैश्वीकरण को न्यायसंगत बनाने की आवश्यकता है। वैश्वीकरण के दौर में देश के लोगों के हितों का संरक्षण किया जाना चाहिए। इसके लिए आवश्यक है कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि-
(i) श्रमिक कानूनों का उचित कार्यान्वयन हो तथा श्रमिकों को अपने अधिकार मिलें।
(ii) छोटे उत्पादकों को प्रतिस्पर्धाक्षम होने तक उनके कार्य निष्पादन में सुधार के लिए मदद करे।
(iii) सरकार व्यापार और निवेश अवरोधकों का उपयोग कर सकती है।
(iv) न्यायसंगत नियमों के लिए विश्व व्यापार संगठन से समझौता कर सकती है।
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⭐ 3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर एवं बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक, लघूत्तरात्मक एवं निबंधात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
● बहुविकल्पीय प्रश्न-
1. कौनसी भारतीय कम्पनी नहीं है? (प्रश्न बैंक)
(अ) टाटा मोटर्स (ब) इंफोसिस (स) रैनबैक्सी (द) करगिल फूड्स
2. बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा किये जाने वाले निवेश को कहा जाता है-
(अ) विदेशी निवेश (ब) देशी निवेश (स) अन्तर्राष्ट्रीय निवेश (द) सरकारी निवेश
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3. बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के निवेश का रास्ता है-
(अ) स्थानीय कम्पनियों को खरीदना (ब) स्थानीय कम्पनियों के साथ संयुक्त उत्पादन
(स) दूसरे देश में कारखाने स्थापित करना (द) उपर्युक्त सभी
4. बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का उद्देश्य है-
(अ) लाभ अर्जित करना (ब) व्यापार को विदेशों में फैलाना
(स) अपने सामान व सेवाओं को विदेश में बेचना (द) उपर्युक्त सभी
5. बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ किस दृष्टि से काफी सम्पन्न होती हैं?
(अ) तकनीक की दृष्टि से (ब) वित्त की दृष्टि से
(स) वस्तुओं एवं सेवाओं की गुणवत्ता की दृष्टि से (द) उपर्युक्त सभी
6. निम्न में से कौनसी भारत की बहुराष्ट्रीय कम्पनी है?
(अ) टाटा मोटर्स (ब) फोर्ड मोटर्स (स) सेवरलेट (द) सुजुकी
7. निम्न में से वैश्वीकरण का कारण नहीं है-
(अ) प्रौद्योगिकी में तीव्र उन्नति (ब) आयात पर कर और कोटा का उपयोग
(स) व्यापार और निवेश नीतियों का उदारीकरण (द) डब्ल्यू.टी.ओ. जैसे अन्तर्राष्ट्रीय संगठन
8. विभिन्न देशों के बीच तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया क्या कहलाती है?
(माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)
अथवा
विभिन्न देशों के बीच परस्पर सम्बन्ध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया है-
(माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)
(अ) उदारीकरण (ब) निजीकरण (स) राष्ट्रीयकरण (द) वैश्वीकरण
9. दूरसंचार का सबसे आधुनिक माध्यम है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)
(अ) टेलीग्राफ (ब) ई-मेल (स) टेलीफोन (द) फैक्स
10. तत्काल इलेक्ट्रॉनिक डाक (ई-मेल) किसके द्वारा भेजी जा सकती है?
(अ) वायु परिवहन द्वारा (ब) डाकघर द्वारा (स) इंटरनेट द्वारा (द) फैक्स द्वारा
11. वैश्वीकरण और प्रतिस्पर्धा के दबाव में सबसे ज्यादा प्रभावित कौन हुए हैं?
(अ) श्रमिक (ब) बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ
(स) भू-स्वामी (द) इनमें से कोई नहीं
12. वैश्वीकरण से सर्वाधिक लाभान्वित हुए हैं-
(अ) ग्रामीण मजदूर (ब) शहरी गरीब वर्ग
(स) शहरी मध्यम वर्ग (द) धनी वर्ग के उपभोक्ता
13. न्यायसंगत वैश्वीकरण के लिए सरकार को करना चाहिए-
(अ) श्रमिक कानूनों का उचित कार्यान्वयन
(ब) छोटे उत्पादकों को कार्य निष्पादन में सुधार हेतु सहायता
(स) व्यापार और निवेश अवरोधकों का उपयोग (द) उपर्युक्त सभी
14. विश्व के दूरस्थ भागों को जोड़ने वाली वैश्वीकरण की प्रक्रिया में मुख्य भूमिका रही है-
(अ) बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की (ब) राष्ट्र राज्यों की
(स) स्थानीय कम्पनियों की (द) संयुक्त राष्ट्र संघ की
15. वैश्वीकरण को सुगमता प्रदान करने वाला कारक है-
(अ) प्रौद्योगिकी में तीव्र उन्नति (ब) व्यापार और निवेश नीतियों का उदारीकरण
(स) विश्व व्यापार संगठन का दबाव (द) उपरोक्त सभी
16. 20वीं शताब्दी के मध्य तक बहुराष्ट्रीय कंपनियों के परिदृश्य पर उभरने से पहले राष्ट्र की सीमाओं को लाँघने वाली वस्तु थी-
(अ) कच्चा माल (ब) खाद्य पदार्थ (स) तैयार उत्पाद (द) उपरोक्त सभी
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सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) कक्षा X 421
17. निम्न में से कौनसी कम्पनी एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण और स्वामित्व रखती है?
(माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)
अथवा
वह कंपनी जो एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण और स्वामित्व रखती है, कहलाती है-
(अ) राष्ट्रीय कंपनी (ब) स्थानीय कंपनी (स) बहुराष्ट्रीय कम्पनी (द) सरकारी कम्पनी
18. निम्न में जो बहुराष्ट्रीय कंपनियों की उत्पादन प्रक्रिया का अंग नहीं है, वह है-
(अ) ये एक देश के अनुसंधान केन्द्र में अपने उत्पादों की डिजाइन तैयार करती हैं।
(ब) किसी अन्य देश में उसके पुर्जे बनाए जाते हैं।
(स) इसके उपकरणों के पुर्जों को अन्य देशों में जोड़ा जाता है।
(द) तैयार उत्पाद को डिजाइन करने वाले देश में बेचा जाता है।
19. जिस कारण से ईस्ट इण्डिया कम्पनी भारत की ओर आकर्षित हुई थी, वह था-
(अ) भारत की समृद्धि से (ब) भारत में सत्ता स्थापित करना
(स) अन्य यूरोपीय कंपनियों का अनुकरण (द) व्यापारिक हित
20. फोर्ड मोटर्स कम्पनी किस देश की बहुराष्ट्रीय कम्पनी है?
(अ) भारत (ब) चीन (स) अमेरिका (द) द. कोरिया
21. कारगिल फूड्स किस देश की बहुराष्ट्रीय कम्पनी है?
(अ) भारत (ब) फ्रांस (स) कनाडा (द) अमरीका
22. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से सम्बन्धित नियमों को निर्धारित करता है-
(माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)
(अ) W.T.O. (ब) U.N.O. (स) R.B.I. (द) ये सभी
अथवा
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाने वाली संस्था है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)
(अ) विश्व व्यापार संगठन (ब) विश्व बैंक (स) संयुक्त राष्ट्र संघ (द) अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष
23. भारत में चीनी खिलौने लोकप्रिय हैं, क्योंकि-
(अ) वे विदेशी हैं (ब) वे अधिक मजबूत हैं
(स) वे सस्ते और नवीन डिजाइन के हैं (द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
24. सरकार द्वारा अवरोधों अथवा प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया जिस नाम से जानी जाती है, वह है-
(अ) नगरीकरण की प्रक्रिया (ब) उदारीकरण की प्रक्रिया
(स) स्थानीयकरण की प्रक्रिया (द) समाजीकरण की प्रक्रिया
25. भारत में वैश्वीकरण ने बड़ी चुनौती खड़ी की है-
(अ) विदेशी निवेश के लिए (ब) नवीन प्रौद्योगिकी के लिए
(स) छोटे उत्पादकों और श्रमिकों के लिए (द) नवीन अवसरों के सृजन के लिए
26. विश्व व्यापार संगठन ने व्यापार और निवेश के उदारीकरण के लिए दबाव डाला है-
(अ) विकसित देशों पर (ब) धनी देशों पर
(स) विकासशील देशों पर (द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
27. वैश्वीकरण की प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभा रही हैं-
(अ) कुटीर उद्योग (ब) लघु उद्योग (स) राष्ट्रीय कम्पनियाँ (द) बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ
28. व्यापार अवरोधक के रूप में कर आरोपित किया जाता है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)
(अ) निर्यात पर (ब) आयात पर (स) पूँजी निवेश पर (द) सहायिका पर
29. विश्व की सबसे बड़ी मोटर गाड़ी निर्माता कम्पनी है- (प्रश्न बैंक)
(अ) महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा (ब) होण्डा मोटर्स (स) फोर्ड मोटर्स (द) मारुति - सुजूकि
30. किसी देश में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की स्थापना में महत्वपूर्ण कारण है- (प्रश्न बैंक)
(अ) बाजार से नजदीकी (ब) कुशल व अकुशल श्रम की उपलब्धता
(स) सरकारी नीतियाँ (द) उपर्युक्त सभी
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31. कौनसी बहुराष्ट्रीय कम्पनी अमरीकी नहीं है? (प्रश्न बैंक)
(अ) करगिल फूड्स (ब) फोर्ड मोटर्स (स) कोका कोला (द) नोकिया
32. कौनसा वैश्वीकरण का परिणाम है- (प्रश्न बैंक)
(अ) तीव्र वैश्विक एकीकरण (ब) निवेश व प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान
(स) वस्तुओं व सेवाओं में निवेश (द) उपर्युक्त सभी
उत्तरमाला
1. (द) 2. (अ) 3. (द) 4. (द) 5. (द) 6. (अ) 7. (ब)
8. (द) 9. (ब) 10. (स) 11. (अ) 12. (द) 13. (द) 14. (अ)
15. (द) 16. (द) 17. (स) 18. (द) 19. (द) 20. (स) 21. (द)
22. (अ) 23. (स) 24. (ब) 25. (स) 26. (स) 27. (द) 28. (ब)
29. (स) 30. (द) 31. (द) 32. (द)।
● रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
1. कोई भी ......... इस आशा से किया जाता है कि ये परिसंपत्तियाँ लाभ अर्जित करेंगी।
2. विभिन्न देशों के बीच परस्पर सम्बन्ध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया .......... है। (प्रश्न बैंक)
3. आयात पर कर ......... का एक उदाहरण है। (प्रश्न बैंक)
4. ......... व्यापार अवरोधक का एक उदाहरण है। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)
5. भारत में सन् ......... के प्रारंभ से नीतियों में कुछ दूरगामी परिवर्तन किये गये। (प्रश्न बैंक)
6. वर्तमान में विश्व के लगभग ......... देश विश्व व्यापार संगठन के सदस्य हैं। (प्रश्न बैंक)
7. बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किए गए निवेश को...........कहते हैं। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024; मॉडल पेपर, 2021-22)
8. एक साथ बहुत सारे देशों में व्यवसाय करने वाली कंपनियों को...............निगम कहा जाता है। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)
9. .............में तीव्र उन्नति ने वैश्वीकरण की प्रक्रिया को उत्प्रेरित किया है। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)
10. देश की अर्थव्यवस्था को विश्व की अर्थव्यवस्था से जोड़ना ............... कहलाता है।
11. विदेशी व्यापार का एक बड़ा भाग ................. कंपनियों द्वारा नियंत्रित है। (प्रश्न बैंक)
12. ............... का एक बड़ा हिस्सा बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा नियंत्रित होता है। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)
उत्तरमाला
1. निवेश 2. वैश्वीकरण 3. व्यापार अवरोधक 4. आयात पर कर 5. 1991
6. 164¹ 7. विदेशी निवेश 8. बहुराष्ट्रीय 9. प्रौद्योगिकी 10. वैश्वीकरण
11. बहुराष्ट्रीय 12. व्यापार
● अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. निवेश क्या है?
अथवा
'निवेश' से क्या अभिप्राय है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— परिसम्पत्तियों, जैसे-भूमि, भवन, मशीन तथा अन्य उपकरणों की खरीद में व्यय की गई मुद्रा को निवेश कहते हैं।
प्रश्न 2. दो देशों के मध्य होने वाले व्यापार को क्या कहा जाता है?
उत्तर— दो देशों के मध्य होने वाले व्यापार को विदेशी व्यापार कहा जाता है।
प्रश्न 3. बहुराष्ट्रीय कम्पनी किसे कहते हैं? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)
उत्तर— बहुराष्ट्रीय कम्पनी ऐसी कम्पनी को कहते हैं जिसका व्यवसाय एक से अधिक राष्ट्रों तक फैला होता है।
प्रश्न 4. वैश्वीकरण के फलस्वरूप भारत को होने वाली कोई एक हानि बताइए।
---
1. मार्च, 2024 की स्थिति के अनुसार विश्व व्यापार संगठन में 164 सदस्य हैं।
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सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) कक्षा X 423
उत्तर—वैश्वीकरण से भारत के लघु एवं कुटीर उद्योगों का पतन हुआ है।
प्रश्न 5. रैनबैक्सी कम्पनी क्या उत्पादन करती है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)
उत्तर—दवाइयों का।
प्रश्न 6. बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के कोई दो मुख्य उद्देश्य बताइए।
उत्तर—(1) अपने लाभ को अधिकतम करना। (2) व्यापार का विदेशों तक विस्तार करना।
प्रश्न 7. भारत की किन्हीं चार बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के नाम लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर—(1) टाटा मोटर्स (2) रैनबैक्सी (3) इंफोसिस (4) एशियन पेंट्स।
प्रश्न 8. भारत में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा उत्पादित कोई दो तरह के उत्पादों के नाम बताइए।
उत्तर—(1) इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद (2) ठंडे पेय पदार्थ।
प्रश्न 9. विदेशी निवेश किसे कहा जाता है?
उत्तर—बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा दूसरे देश में किए गए निवेश को विदेशी निवेश कहा जाता है।
प्रश्न 10. विदेश व्यापार से आप क्या समझते हैं?
उत्तर—दो या दो से अधिक देशों के मध्य वस्तुओं तथा सेवाओं के क्रय-विक्रय को विदेश व्यापार कहा जाता है।
प्रश्न 11. वे कम्पनियाँ जिनका कारोबार एक से अधिक देशों में है, क्या कहलाती हैं? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)
उत्तर—बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ।
प्रश्न 12. 'WTO' का पूरा नाम लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर—विश्व व्यापार संगठन।
प्रश्न 13. वैश्वीकरण की दृष्टि से किस वर्ष में दूरगामी नीतिगत परिवर्तन किये गये? (प्रश्न बैंक)
उत्तर—1991 में।
प्रश्न 14. 'कोटा' से आप क्या समझते हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर—सरकार आयात होने वाली वस्तुओं की संख्या सीमित कर सकती है। इसे ही 'कोटा' कहते हैं।
प्रश्न 15. ई-मेल का पूरा नाम लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर—इलेक्ट्रॉनिक डाक (इंटरनेट द्वारा भेजा जाता है)।
प्रश्न 16. बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा दूसरे देशों में निवेश करने के कोई दो तरीके बताइए।
उत्तर—(1) स्थानीय कम्पनियों को खरीदना।
(2) स्थानीय कम्पनियों के साथ संयुक्त उत्पादन।
प्रश्न 17. विदेश व्यापार का कोई एक लाभ बताइए।
उत्तर—विदेश व्यापार विभिन्न देशों के बाजारों को जोड़ने या एकीकरण में सहायक होता है।
प्रश्न 18. वैश्वीकरण का कोई एक महत्व अथवा लाभ बताइए।
उत्तर—वैश्वीकरण से विभिन्न देशों के बीच अधिक से अधिक वस्तुओं और सेवाओं, निवेश और प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान हो रहा है।
प्रश्न 19. वैश्वीकरण की प्रक्रिया को उत्प्रेरित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक कौनसा है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024; मॉडल पेपर, 2021-22)
उत्तर—वैश्वीकरण की प्रक्रिया को उत्प्रेरित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक प्रौद्योगिकी में तीव्र उन्नति है।
प्रश्न 20. वैश्वीकरण को संभव बनाने वाले कोई दो कारकों के नाम बताइए।
उत्तर—(1) परिवहन प्रौद्योगिकी का तीव्र विकास। (2) सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का विकास।
प्रश्न 21. किन लोगों पर वैश्वीकरण का एक समान प्रभाव नहीं पड़ा है?
उत्तर—उत्पादकों एवं श्रमिकों पर।
प्रश्न 22. विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकार ने किन कानूनों में लचीलापन लाने की अनुमति प्रदान की है?
उत्तर—श्रम कानूनों में।
प्रश्न 23. आयात कोटा का क्या अभिप्राय है?
--- [ पृष्ठ संख्या: 431 ] ---
उत्तर—इसमें सरकार द्वारा आयात की जाने वाली मात्रा को निर्धारित कर दिया जाता है उससे अधिक मात्रा का आयात नहीं किया जा सकता है।
प्रश्न 24. विश्व व्यापार संगठन की स्थापना क्यों की गई है?
उत्तर—सदस्य देशों के बीच व्यापार करने के लिए ही विश्व व्यापार संगठन की स्थापना की गई है।
प्रश्न 25. विश्व व्यापार संगठन का मुख्य ध्येय क्या है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)
उत्तर—विश्व व्यापार संगठन का मुख्य ध्येय विश्व व्यापार को बढ़ावा देना और व्यापारिक गतिविधियों को सुगम बनाना है। साथ ही, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सम्बन्धी नियमों का निर्धारण करना एवं उनकी अनुपालना करवाना है।
प्रश्न 26. उदारीकरण से आप क्या समझते हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर—सरकार द्वारा व्यापार एवं निवेश पर अवरोधों अथवा प्रतिबन्धों को हटाने की प्रक्रिया को उदारीकरण कहा जाता है।
प्रश्न 27. निजीकरण को परिभाषित कीजिए।
उत्तर—निजीकरण से तात्पर्य है-निजी क्षेत्र पर से कड़े नियंत्रण को हटाकर उन्हें जरूरी निर्णय लेने के लिए मुक्त करना।
प्रश्न 28. व्यापार अवरोधक से क्या अभिप्राय है?
उत्तर—व्यापार अवरोधक सरकार द्वारा लगाए वे प्रतिबन्ध हैं जिनसे वह विदेशी व्यापार को नियमित करती है।
प्रश्न 29. कौनसा वैश्विक संगठन विश्व व्यापार से सम्बन्धित नियमों को निर्धारित करता है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर—विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यू.टी.ओ.) अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से सम्बन्धित नियमों को निर्धारित करता है।
● लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. बहुराष्ट्रीय कम्पनी से आप क्या समझते हैं? इसकी कोई दो विशेषताएँ लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर—बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ ऐसी कम्पनियाँ होती हैं जिनका व्यवसाय एक से अधिक राष्ट्रों में फैला होता है।
विशेषताएँ—(i) बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का मुख्य उद्देश्य अपने व्यापार का अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार कर अधिक से अधिक लाभ कमाना होता है। (ii) बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ उन देशों में अपने उत्पादन के लिए कारखाने स्थापित करती हैं जहाँ उसे सस्ता श्रम व अन्य संसाधन मिल सकते हैं।
प्रश्न 2. बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ कैसे कार्य करती हैं? समझाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)
उत्तर—(1) बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ एक से अधिक देशों में अपनी औद्योगिक इकाइयाँ व कार्यालय स्थापित करती हैं।
(2) इन कम्पनियों में पूँजी निवेश अधिक होता है। इसलिए इनके उत्पादन की माँग और पूर्ति बड़े पैमाने पर होती है।
(3) इनका आकार विशाल होता है तथा इनकी उत्पादन लागत कम होती है। इसलिए ये अधिक लाभ कमाती हैं।
प्रश्न 3. बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ अन्य देशों में निवेश करने से पूर्व किन बातों को ध्यान में रखती हैं? कोई दो बातें बताइए।
अथवा
बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ किन स्थितियों में किसी देश में उत्पादन इकाई स्थापित करती हैं?
उत्तर—बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ अन्य देशों में निवेश करने या अपनी उत्पादन इकाई स्थापित करने से पूर्व निम्न बातों पर ध्यान रखती हैं-
(i) बाजार की निकटता, कम लागत पर कुशल व अकुशल श्रम की उपलब्धता तथा उत्पादन के अन्य कारकों की उपलब्धता।
(ii) वे उस देश की सरकार की सरकारी नीतियों को भी ध्यान में रखती हैं कि सरकारी नीतियाँ उनके अनुकूल हैं या नहीं।
प्रश्न 4. विदेशी व्यापार के बुनियादी कार्य क्या हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर—उत्पादकों को उनका उत्पाद विदेशी बाजारों तक पहुँचाने का अवसर प्रदान करना विदेशी व्यापार का बुनियादी कार्य है, जिससे उत्पादक विश्व के अन्य देशों के बाजारों में प्रतिस्पर्धा कर सकें।
प्रश्न 5. किन कारणों ने वैश्वीकरण को सुगमता प्रदान की? स्पष्ट कीजिये। (प्रश्न बैंक)
उत्तर—निम्न कारणों ने वैश्वीकरण को सुगमता प्रदान की-
(i) प्रौद्योगिकी में तीव्र उन्नति
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सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) कक्षा X 425
(ii) व्यापार तथा निवेश नीतियों का उदारीकरण
(iii) W.T.O. जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों का दबाव।
प्रश्न 6. वैश्वीकरण व विदेशी निवेश आकर्षित करने हेतु भारत सरकार द्वारा उठाये गये कदमों की विवेचना कीजिये। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— वैश्वीकरण व विदेशी निवेश को भारत में लाने हेतु भारतीय सरकार ने सन् 1991 के प्रारम्भ में अर्थव्यवस्था की नीतियों में परिवर्तन किए अर्थात् भारतीय अर्थव्यवस्था का उदारीकरण किया गया। परिणामस्वरूप विदेशी व्यापार तथा विदेशी निवेश पर अवरोधों के हटने के कारण भारत में निवेश करने की प्रक्रिया सरल हुई और विदेशी कम्पनियों ने भारत में अपना कारखाना तथा कार्यालय स्थापित किया।
प्रश्न 7. 1991 के पूर्व की व 1991 के बाद की भारतीय अर्थव्यवस्था में आये परिवर्तन का संक्षेप में उल्लेख कीजिये। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— 1991 के पूर्व भारतीय सरकार ने व्यापार तथा विदेशी निवेश पर प्रतिबन्ध लगा रखा था। भारतीय सरकार केवल अनिवार्य वस्तुओं के आयात की अनुमति देती थी। ऐसा करके सरकार ने घरेलू उद्योगों को बढ़ने हेतु संरक्षण प्रदान किया था। 1991 के बाद भारतीय सरकार ने भारतीय उत्पादकों को विश्व के उत्पादकों से प्रतिस्पर्धा हेतु उदारीकरण की नीति अपनाई। इसके अन्तर्गत विदेश व्यापार तथा विदेशी निवेश से अवरोधों को काफी हद तक हटा दिया। फलस्वरूप भारत में आयात-निर्यात आसान हो गया।
प्रश्न 8. बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ विदेशों में किस तरह से निवेश करती हैं?
उत्तर— बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ विदेशों में कई तरीके से निवेश करती हैं-
(1) वे सीधे कारखानों की स्थापना कर सकती हैं।
(2) वे स्थानीय कम्पनियों को खरीदती हैं।
(3) कई बार वे स्थानीय कम्पनियों के साथ मिलकर संयुक्त रूप से भी उत्पादन करती हैं।
प्रश्न 9. बहुराष्ट्रीय कम्पनी किस प्रकार लाभकारी है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— बहुराष्ट्रीय कम्पनी कई तरह से लाभकारी होती है, जैसे-यह रोजगार के अवसर पैदा करती है, देशों की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देती है, अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ाती है, लोगों के जीवन स्तर को सुधारने में मदद करती है, देशों के बीच आर्थिक एकीकरण को बढ़ाती है।
प्रश्न 10. विदेश व्यापार के कोई दो लाभ बताइए।
उत्तर— (1) विदेश व्यापार से देश के उपभोक्ताओं को कम मूल्य पर उच्च गुणवत्ता वाली वस्तुएँ एवं सेवाएँ प्राप्त होती हैं।
(2) विदेश व्यापार से उत्पादकों को अपना उत्पाद विदेशों में बेचने का अवसर प्राप्त होता है जिससे उन्हें अधिक लाभ प्राप्त होता है।
प्रश्न 11. वैश्वीकरण के भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले कोई दो सकारात्मक प्रभाव बताइए।
उत्तर— (1) वैश्वीकरण से बड़े उद्योगों को अपना विस्तार करने का अवसर मिला है तथा देश के उपभोक्ताओं को कम कीमत पर अधिक गुणवत्ता वाली वस्तुएँ प्राप्त हुई हैं।
(2) वैश्वीकरण के फलस्वरूप बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के आगमन से रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं।
प्रश्न 12. वैश्वीकरण के भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले कोई दो नकारात्मक प्रभाव बताइए।
उत्तर— (1) वैश्वीकरण के फलस्वरूप देश के छोटे एवं कुटीर उद्योगों का पतन हुआ है, क्योंकि उनकी प्रतिस्पर्धा क्षमता कम है।
(2) वैश्वीकरण से कई बार श्रमिकों के हितों का संरक्षण नहीं हो पाता है।
प्रश्न 13. सूचना एवं प्रौद्योगिकी ने वैश्वीकरण को किस प्रकार सम्भव बनाया है?
उत्तर— सूचना एवं प्रौद्योगिकी के अन्तर्गत दूरसंचार, कम्प्यूटर, इंटरनेट आदि के उपयोग से विभिन्न देश के व्यापारियों एवं उपभोक्ताओं का आसानी से सम्पर्क हुआ है तथा नवीन प्रौद्योगिकी से अब घर बैठे वस्तुओं एवं सेवाओं का आदान-प्रदान सम्भव हो गया है।
प्रश्न 14. भारत सरकार द्वारा विदेशी व्यापार पर अवरोधक लगाने के किन्हीं दो कारणों का उल्लेख कीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)
उत्तर— भारत सरकार द्वारा विदेशी व्यापार पर अवरोधक लगाने के कारण थे-
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(1) भारतीय उत्पादकों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से संरक्षण प्रदान करना।
(2) उद्योग-धन्धों के नष्ट होने से यहाँ के श्रमिकों को संरक्षण प्रदान करना।
प्रश्न 15. बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के साथ संयुक्त उत्पादन से स्थानीय कंपनियों को क्या लाभ होते हैं? कोई दो लाभ लिखिए।
उत्तर— संयुक्त उत्पादन से स्थानीय कंपनियों को निम्नलिखित दो प्रमुख लाभ होते हैं-
(1) बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ अतिरिक्त निवेश के लिए धन प्रदान कर सकती हैं, जैसे-तीव्र उत्पादन हेतु मशीन खरीदना।
(2) बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ उत्पादन की नवीनतम प्रौद्योगिकी अपने साथ ला सकती हैं।
प्रश्न 16. विश्व व्यापार संगठन के कोई दो प्रमुख कार्य लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)
उत्तर— W.T.O. के दो प्रमुख कार्य-(i) अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना है।
(ii) यह अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से सम्बन्धित नियमों का निर्धारण करता है।
प्रश्न 17. सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के विकास से हुए कोई चार लाभों की सूची बताइये। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)
उत्तर— (1) दुनियाभर के लोग एक-दूसरे के साथ संवाद कर सकते हैं और जानकारी साझा कर सकते हैं।
(2) लोग इंटरनेट के माध्यम से विभिन्न प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
(3) लोग ऑनलाइन व्यवसाय शुरू कर सकते हैं और ग्राहकों तक पहुँच सकते हैं।
(4) छात्र ऑनलाइन पाठ्यक्रम और संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं और अपनी शिक्षा में सुधार कर सकते हैं।
● दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-
प्रश्न 1. वैश्वीकरण में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी की भूमिका को किन्हीं तीन आधार पर स्पष्ट कीजिए।
अथवा
प्रौद्योगिकी ने वैश्वीकरण की प्रक्रिया को किस प्रकार उत्प्रेरित किया है? उदाहरणों सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर— प्रौद्योगिकी में तीव्र उन्नति वह मुख्य कारक है जिसने वैश्वीकरण की प्रक्रिया को उत्प्रेरित किया है। यथा-
(i) विगत 50 वर्षों में परिवहन प्रौद्योगिकी में बहुत उन्नति हुई है। इसने लम्बी दूरियों तक वस्तुओं की तीव्रतर आपूर्ति को कम लागत पर संभव किया है।
(ii) सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी में द्रुत गति से हो रहे परिवर्तनों के कारण दूरसंचार सुविधाओं का विश्वभर में एक-दूसरे से सम्पर्क करने, सूचनाओं को तत्काल प्राप्त करने तथा दूरवर्ती क्षेत्रों से संवाद करने में प्रयोग किया जाता है।
(iii) कम्प्यूटर और इन्टरनेट के माध्यम से हम जहाँ जो कुछ भी जानना चाहते हैं, लगभग उसकी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और सूचनाओं को आपस में बाँट सकते हैं।
(iv) प्रौद्योगिकी ने विभिन्न देशों के बीच सेवाओं के उत्पादन के प्रसार में मुख्य भूमिका निभाई है।
प्रश्न 2. वैश्वीकरण से आप क्या समझते हैं? इसे सम्भव बनाने वाले कारण बताइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)
उत्तर— वैश्वीकरण का अर्थ-विभिन्न देशों के बीच परस्पर सम्बन्ध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया ही वैश्वीकरण है। इसमें विश्व के विभिन्न देशों के बाजार एक बाजार के समान कार्य करते हैं।
वैश्वीकरण को सम्भव बनाने वाले कारक-वैश्वीकरण को सम्भव बनाने वाले दो प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं-
(1) सूचना प्रौद्योगिकी का विकास-सूचना प्रौद्योगिकी के तहत दूरसंचार, कम्प्यूटर, इंटरनेट आदि की सहायता से सम्पूर्ण विश्व में सरलता से सम्पर्क किया जा सकता है एवं व्यापार किया जा सकता है जिससे वैश्वीकरण की गति तीव्र हुई है। अनेक बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ विकासशील देशों में काल सेंटर स्थापित करके विश्व में फैले ग्राहकों को जानकारी प्रदान कर रही हैं। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी ने विभिन्न देशों के बीच सेवाओं के उत्पादन के प्रसार में मुख्य भूमिका निभाई है।
(2) निवेश तथा अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार नीतियों का उदारीकरण-व्यापार के उदारीकरण से व्यवसायियों को मुक्त रूप से निर्णय लेने की अनुमति मिली तथा सरकार ने पहले की तुलना में कम नियंत्रण करना शुरू कर दिया। विदेश व्यापार एवं विदेशी निवेश पर से अवरोधों के हट जाने से वस्तुओं का आयात-निर्यात सुगमता से किया जा सकता था तथा विदेशी कम्पनियाँ यहाँ अपने कारखाने स्थापित कर सकती थी।
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(3) परिवहन प्रौद्योगिकी में तेज उन्नति- परिवहन प्रौद्योगिकी में उन्नति से लम्बी दूरियों तक वस्तुओं को कम लागत पर शीघ्र पहुँचाया जा सकता है, जिसके फलस्वरूप तीव्र वैश्वीकरण सम्भव हो पाया है।
प्रश्न 3. विश्व व्यापार संगठन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर— विश्व व्यापार संगठन एक ऐसा अन्तर्राष्ट्रीय संगठन है जिसका मुख्य उद्देश्य अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना है। यह संगठन अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से सम्बन्धित नियमों का निर्धारण करता है तथा यह देखता है कि इन नियमों का पालन हो। विश्व व्यापार संगठन विदेश व्यापार के अवरोधों को कम करने का प्रयास करता है जिससे विदेश व्यापार में वृद्धि की जा सके। यद्यपि विश्व व्यापार संगठन सभी देशों को मुक्त व्यापार की सुविधा प्रदान करता है। व्यवहार में यह देखा गया है कि विकसित देशों ने अनुचित ढंग से व्यापार अवरोधकों को बरकरार रखा है। दूसरी ओर विश्व व्यापार संगठन के नियमों ने विकासशील देशों के व्यापार अवरोधों को हटाने के लिए विवश किया है। विकसित देशों ने किसानों को भारी धनराशि देना बरकरार रखा है, जबकि संगठन ने विकासशील देशों की सरकारों को अपने किसानों की सहायता बंद करने को कहा।
वर्तमान (मार्च, 2024) में विश्व के लगभग 164 देश विश्व व्यापार संगठन के सदस्य हैं।
प्रश्न 4. न्यायसंगत वैश्वीकरण को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर— न्यायसंगत वैश्वीकरण का तात्पर्य यह है कि वैश्वीकरण से सभी लोगों को समान लाभ हो तथा देश के पिछड़े वर्गों को भी संरक्षित किया जाना चाहिए। वैश्वीकरण के हानिकारक प्रभावों को कम करने के प्रयास किए जाने चाहिए तथा लघु एवं कुटीर उद्योगों का भी संरक्षण किया जाना चाहिए। न्यायसंगत वैश्वीकरण में यह ध्यान दिया जाता है कि वैश्वीकरण का लाभ केवल धनी लोगों को ही न मिले एवं निर्धनों की भी बेहतर हिस्सेदारी हो। इसमें छोटे उद्योगों के कार्य निष्पादन में सुधार हो तथा श्रमिक कानूनों का भी उचित रूप से क्रियान्वयन किया जाए ताकि श्रमिकों के हितों का भी संरक्षण हो।
प्रश्न 5. आयात पर कर को व्यापार अवरोधक के रूप में क्यों जाना जाता है? स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने विदेशी व्यापार तथा विदेशी निवेशों पर प्रतिबंध क्यों लगाया? तीन कारण दीजिए।
उत्तर— आयात पर 'कर' को व्यापार अवरोधक के रूप में इसलिए जाना जाता है क्योंकि इससे सरकार विदेशी व्यापार पर कुछ प्रतिबंध लगाकर उसे नियमित करती है, जिससे विदेशी व्यापार सीमित हो जाता है।
स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार द्वारा विदेशी व्यापार व निवेश पर प्रतिबंध लगाने के कारण-
(i) देश के छोटे उद्योगपतियों को प्रतियोगिता से बचाने हेतु ताकि वे अपना पर्याप्त विकास सकें एवं उनका पतन न हो।
(ii) विदेशी कम्पनियाँ अच्छी गुणवत्ता के साथ-साथ कम मूल्य पर वस्तुएँ उपलब्ध कराती थीं, जबकि भारतीय कम्पनियों के लिए ऐसा करना कठिन था।
(iii) भारतीय उत्पादकों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से संरक्षण प्रदान करने के लिए।
प्रश्न 6. "वैश्वीकरण और उत्पादकों के बीच प्रतिस्पर्धा से उपभोक्ताओं को लाभ हुआ है।" इस कथन के पक्ष में तर्क दीजिए।
उत्तर— वैश्वीकरण और उत्पादकों के बीच प्रतिस्पर्धा से उपभोक्ताओं को निम्न लाभ हुए हैं-
(1) उपभोक्ता अब अच्छी गुणवत्ता वाली वस्तुएँ कम कीमत पर खरीद सकते हैं।
(2) इससे लोगों के सामने वस्तुओं एवं सेवाओं के बेहतर विकल्पों में वृद्धि हुई है एवं उनके उपभोग में भी वृद्धि हुई है।
(3) वैश्वीकरण के फलस्वरूप लोगों के जीवन-स्तर में वृद्धि हुई है।
(4) प्रतिस्पर्धा के कारण उत्पादक उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएँ उपलब्ध करवा रहे हैं।
● निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. बहुराष्ट्रीय कम्पनियों से आप क्या समझते हैं? भारत में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की भूमिका को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ अर्थव्यवस्था में किस प्रकार बदलाव ला रही हैं? स्पष्ट कीजिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ- बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ वे कम्पनियाँ होती हैं, जो एक से अधिक देशों में लाभ के उद्देश्य से व्यापार अथवा उत्पादन गतिविधियाँ करती हैं। ये बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ एक से अधिक देशों में उत्पादन
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पर नियंत्रण अथवा स्वामित्व रखती हैं। इन कंपनियों का व्यापार कई देशों तक फैला होता है तथा ये कंपनियाँ वहाँ उत्पादन करती हैं जहाँ पर प्रचुर मात्रा में कच्चा माल एवं सस्ता श्रम उपलब्ध है। उत्पादन लागत में कमी करने तथा अधिक लाभ कमाने के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ ऐसा करती हैं।
भारतीय अर्थव्यवस्था में बहुराष्ट्रीय निगमों की भूमिका
भारतीय अर्थव्यवस्था में बहुराष्ट्रीय निगमों अथवा कंपनियों की भूमिका को निम्न बिन्दुओं से स्पष्ट किया जा सकता है-
(1) विदेशी निवेश में वृद्धि- विगत 20 वर्षों में बहुराष्ट्रीय निगमों ने भारत में विदेशी निवेश में तीव्र गति से वृद्धि की हैं तथा देश में कई नए-नए उद्योगों की स्थापना की है। इसका अर्थ है कि भारत में निवेश करना उनके लिए लाभप्रद रहा है।
(2) देश का औद्योगिक विकास- बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने शहरी क्षेत्रों के उद्योगों जैसे-सेलफोन, मोटर गाड़ियाँ, इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों, ठंडे पेय पदार्थों, जंक खाद्य पदार्थों एवं बैंकिंग जैसी सेवाओं के निवेश में रुचि दिखाई। इन उत्पादों के अधिकांश खरीदार सम्पन्न वर्ग के लोग हैं।
(3) नवीन तकनीक का आगमन- बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ काफी सम्पन्न होती हैं तथा उत्पादन हेतु वे नवीन प्रौद्योगिकी का प्रयोग करती हैं, इसके फलस्वरूप देश में नवीन प्रौद्योगिकी का आगमन होता है। अनेक शीर्ष भारतीय कंपनियाँ बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा से लाभान्वित हुई हैं। इन कंपनियों ने नवीनतम प्रौद्योगिकी और उत्पादन प्रणाली में निवेश कर अपने उत्पादन मानकों को ऊंचा उठाया है।
(4) रोजगार में वृद्धि- बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ देश में अनेक उद्योगों की स्थापना कर रही हैं जिससे भारत के लोगों को नये रोजगार उपलब्ध हो रहे हैं।
(5) उपभोक्ताओं को लाभ- बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा भारत में कम कीमत पर अच्छी गुणवत्ता वाली वस्तुएँ उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इसके फलस्वरूप भारतीय उपभोक्ताओं के पास अनेक विकल्प हो गए हैं। अब भारतीय उपभोक्ता कम कीमत पर उच्च गुणवत्ता वाली वस्तुएँ प्राप्त कर सकते हैं।
(6) स्थानीय कंपनियों को लाभ- बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा स्थापित उद्योगों को कच्चे माल आदि की आपूर्ति करने वाली स्थानीय कंपनियाँ समृद्ध हुई हैं। कुछ स्थानीय कंपनियों ने विदेशी कंपनियों के साथ सफलतापूर्वक सहयोग कर लाभ अर्जित किया है।
प्रश्न 2. विदेश व्यापार से आप क्या समझते हैं? विदेश व्यापार की भूमिका को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर— विदेश व्यापार-विदेश व्यापार का अभिप्राय दो या दो से अधिक देशों के मध्य होने वाला वस्तुओं तथा सेवाओं का क्रय-विक्रय है। विदेश व्यापार में एक देश अपने अतिरिक्त उत्पादन को अन्य देश को बेचता है तथा देश में कम उत्पादित होने वाली वस्तुओं एवं सेवाओं को खरीदता है।
विदेश व्यापार की भूमिका अथवा लाभ
विदेश व्यापार की भूमिका को निम्न बिन्दुओं से स्पष्ट किया जा सकता है-
(1) बाजारों का एकीकरण- विभिन्न देशों के बाजारों के एकीकरण का सर्वोत्तम माध्यम विदेश व्यापार है। विदेश व्यापार के माध्यम से दो देशों अथवा अधिक देशों के मध्य वस्तुओं एवं सेवाओं का क्रय-विक्रय होता है जो दो या अधिक देशों के बाजारों को जोड़ने में मदद करता है।
(2) उत्पादकों को लाभ- विदेश व्यापार से देशी उत्पादकों को काफी लाभ होता है, विदेश व्यापार के माध्यम से देशी उत्पादक विदेशी बाजारों से जुड़ते हैं तथा वहाँ अपना माल बेचकर लाभ अर्जित करते हैं।
(3) देश का औद्योगिक विकास- विदेश व्यापार के माध्यम से देशी उत्पादक अधिक से अधिक उत्पादन करने का प्रयास करते हैं तथा अधिक से अधिक निर्यात करने का प्रयास करते हैं जिससे देश का औद्योगिक विकास होता है।
(4) उपभोक्ताओं को लाभ- दूसरे देशों से उत्पादित वस्तुओं के आयात से उपभोक्ताओं के समक्ष वस्तुओं के घरेलू उत्पादन के अन्य विकल्पों का विस्तार होता है। इससे लोगों को कम कीमत पर अच्छी गुणवत्ता की वस्तुएँ मिलती हैं।
(5) अन्य लाभ- विदेश व्यापार के अन्य लाभ निम्न प्रकार हैं-
(i) देश में रोजगार के अवसरों में वृद्धि होती है।
(ii) लोगों के जीवन स्तर में वृद्धि होती है।
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सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) कक्षा X 429
(iii) नवीन प्रौद्योगिकी द्वारा निर्मित वस्तुओं की उपलब्धता बढ़ती है।
(iv) देश के उत्पादकों की आय बढ़ती है।
(v) सरकार की आय में वृद्धि होती है।
प्रश्न 3. क्या 'वैश्वीकरण व उदारीकरण' की प्रक्रिया सदैव किसी देश हेतु लाभकारी होती है? अपने उत्तर का तार्किक समर्थन दीजिये। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— नहीं, 'वैश्वीकरण तथा उदारीकरण' की प्रक्रिया सदैव किसी देश हेतु लाभकारी नहीं होती है, इस कथन के समर्थन हेतु हम निम्न तर्क दे सकते हैं-
(1) वैश्वीकरण तथा उदारीकरण से सम्बन्धित अधिकतर नीतियाँ विकसित देशों को ध्यान में रखकर बनाई गई थीं, जो विकासशील देशों के लिए लाभकारी नहीं हैं। विकसित देशों ने अनुचित ढंग से व्यापार अवरोधकों को आज भी बरकरार रखा है।
(2) उदारीकरण तथा वैश्वीकरण के प्रभावस्वरूप देश में बेरोजगारी जैसी समस्या में बढ़ोत्तरी हुई है। लघु तथा कुटीर उद्योग में काम करने वाले लोगों का रोजगार छिन गया।
(3) वैश्वीकरण के कारण शीर्ष कम्पनियाँ लाभान्वित हुई हैं परन्तु छोटे उद्यमी को इस प्रक्रिया के कारण हानि ही उठानी पड़ी है। इसके कारण देश का एक वर्ग अत्यधिक अमीर तथा दूसरा वर्ग अत्यधिक गरीब हो गया है। देश में आर्थिक असमानता की खाई बढ़ी है।
(4) वैश्वीकरण ने बड़ी संख्या में छोटे उत्पादकों और श्रमिकों के लिए बड़ी चुनौतियाँ खड़ी की हैं। श्रमिक वर्ग को कठिन कार्य-परिस्थिति (जैसे लम्बे कार्य-घंटे, अस्थायी रोजगार स्थिति) का सामना करना पड़ा है।
प्रश्न 4. "वैश्वीकरण का प्रभाव एकसमान नहीं है।" इस कथन की अपने शब्दों में व्याख्या कीजिए।
अथवा
वैश्वीकरण के सकारात्मक तथा नकारात्मक प्रभाव बताइए।
अथवा
वैश्वीकरण से आप क्या समझते हैं? भारतीय अर्थव्यवस्था पर वैश्वीकरण के सकारात्मक तथा नकारात्मक प्रभावों की विवेचना कीजिए।
उत्तर— वैश्वीकरण का अर्थ-वैश्वीकरण के अन्तर्गत विभिन्न देशों में वस्तुओं एवं सेवाओं, प्रौद्योगिकी, निवेश, वित्त आदि का बिना किसी अवरोध के आदान-प्रदान होता है। वैश्वीकरण में विश्व के सभी बाजार एक बाजार के समान कार्य करते हैं।
वैश्वीकरण का प्रभाव
वैश्वीकरण का प्रभाव सभी वर्गों पर एकसमान नहीं पड़ा है। कुछ क्षेत्रों में इसका अनुकूल प्रभाव पड़ा है तो कुछ में इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। यथा-
वैश्वीकरण के सकारात्मक प्रभाव-
(1) वैश्वीकरण के फलस्वरूप देश के विदेशी व्यापार में वृद्धि हुई है जिससे भारतीय उत्पादकों को लाभ हुआ है।
(2) वैश्वीकरण से उपभोक्ताओं को विश्व स्तर की वस्तुएँ एवं सेवाएँ उपलब्ध हुई हैं।
(3) वैश्वीकरण से देश में नवीन प्रौद्योगिकी का आगमन हुआ है जिससे देश के उत्पादकों को लाभ हुआ है।
(4) वैश्वीकरण से देश में विदेशी पूँजी निवेश बढ़ा है जिससे देश में उत्पादन एवं रोजगार दोनों में वृद्धि हुई है।
वैश्वीकरण के नकारात्मक प्रभाव-
(1) वैश्वीकरण के कारण उपजी प्रतिस्पर्धा के कारण छोटी औद्योगिक इकाइयाँ बंद हो गईं जिससे बड़ी संख्या में श्रमिक बेरोजगार हो गए।
(2) रोजगार के लचीलेपन के कारण श्रमिकों का रोजगार सुरक्षित नहीं रह गया है।
(3) संगठित क्षेत्रों के श्रमिकों की कार्यदशाएँ असंगठित क्षेत्र के समान हो गई हैं तथा उनकी अतिरिक्त सुविधाएँ समाप्त हो गई हैं।
प्रश्न 5. 'न्यायसंगत वैश्वीकरण हेतु सुझाव प्रस्तुत कीजिये। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— न्यायसंगत वैश्वीकरण इसलिए जरूरी है क्योंकि वैश्वीकरण आज की जरूरत है और इससे सभी को लाभ होना चाहिए। न्यायसंगत वैश्वीकरण के लिए कई सुझाव दिए जा सकते हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था में समानता, न्याय और स्थायित्व को बढ़ावा देते हैं। यहाँ कुछ महत्त्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं-
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(i) वैश्विक नीतियों में सुधार-वैश्विक स्तर पर नीतियों को इस तरह तैयार किया जाना चाहिए कि वे विकासशील देशों के हितों का भी ध्यान रखें। इसके लिए अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों में सुधार करना और विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व देना आवश्यक है।
(ii) व्यापार में समानता-व्यापार समझौतों में विकासशील देशों के लिए समानता और न्याय को बढ़ावा देना चाहिए। इसके लिए व्यापार समझौतों में विकासशील देशों के हितों का ध्यान रखना आवश्यक है।
(iii) श्रम अधिकारों का सम्मान-वैश्विक अर्थव्यवस्था में श्रम अधिकारों का सम्मान करना आवश्यक है। इसके लिए अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के मानकों का पालन करना अनिवार्य है।
(iv) पर्यावरण संरक्षण-वैश्विक अर्थव्यवस्था में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना आवश्यक है। इसके लिए अन्तर्राष्ट्रीय समझौतों और नीतियों का पालन करना चाहिए।
(v) विकासशील देशों के लिए सहायता-विकासशील देशों को आर्थिक सहायता और तकनीकी सहायता प्रदान करनी चाहिए ताकि वे वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका को मजबूत कर सकें।
(vi) वैश्विक शासन में सुधार-वैश्विक शासन में सुधार करना अतिआवश्यक है ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था में न्याय और समानता को बढ़ावा दिया जा सके।
प्रश्न 6. वैश्वीकरण व उदारीकरण ने आम लोगों को किस प्रकार प्रभावित किया है? स्पष्ट कीजिए।
(प्रश्न बैंक)
उत्तर— वैश्वीकरण व उदारीकरण ने आम लोगों को कई तरह से प्रभावित किया, जिनमें से कुछ प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित हैं-
(i) आर्थिक लाभ-वैश्वीकरण और उदारीकरण के कारण अर्थव्यवस्थाएँ विस्तारित और समृद्ध हुई हैं, जिससे सभी को आर्थिक लाभ हुआ है।
(ii) निजीकरण-वैश्वीकरण के कारण सार्वजनिक उपयोगिताओं और जल, स्वास्थ्य, सुरक्षा, परिवहन व विद्युत जैसी वस्तुओं का निजीकरण हुआ है।
(iii) वित्तीय संकट-वित्तीय वैश्वीकरण से जुड़े जोखिम कारक जैसे कि भ्रष्टाचार, अत्यधिक मूल्यांकित विनिमय दर और घरेलू ऋण की दरों में उछाल मुद्रा संकट को पैदा करते हैं।
(iv) अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार-वैश्वीकरण ने अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा दिया है, जिससे कई देशों में आर्थिक विकास हुआ है और लोगों के जीवन स्तर में वृद्धि हुई है।
(v) आर्थिक अस्थिरता-वैश्वीकरण के कारण अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में अस्थिरता आने की पूर्ण सम्भावना रहती है, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था में भी अस्थिरता पैदा हो सकती है।
(vi) उपभोक्ता वस्तुओं की उपलब्धता-वैश्वीकरण ने उपभोक्ता वस्तुओं की उपलब्धता में वृद्धि की है, जिससे लोगों को वैश्विक स्तर पर अधिक विकल्प मिलते हैं।
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