📖 1. समाधान: पाठगत एवं पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नोत्तर
राजस्थान बोर्ड कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान (इतिहास) — सभी पाठगत प्रश्नों एवं पाठ्यपुस्तक अभ्यास के संपूर्ण सटीक उत्तर।
पाठगत प्रश्न
चर्चा करें-पृष्ठ 56
प्रश्न 1. जब हम कहते हैं कि सोलहवीं सदी में दुनिया 'सिकुड़ने' लगी थी, तो इसका क्या मतलब है?
उत्तर— सोलहवीं सदी में यूरोपीय जहाजों ने एशिया तक का समुद्री मार्ग ढूंढ लिया था और वे अमेरिका तक जा पहुँचे थे। अपनी खोज से पूर्व सदियों से अमेरिका का विश्व से कोई सम्पर्क नहीं था। परन्तु सोलहवीं सदी से उसका विभिन्न देशों से सम्पर्क स्थापित हुआ और उनके बीच आर्थिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान शुरू हो गया। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि सोलहवीं सदी में दुनिया सिकुड़ने लगी थी और विश्व के देश एक-दूसरे के निकट आने लगे थे।
गतिविधि-पृष्ठ 59
प्रश्न 2. फ्लो चार्ट के माध्यम से दर्शाइये कि जब ब्रिटेन ने खाद्य पदार्थों के आयात का निर्णय लिया तो उसके कारण अमेरिका और आस्ट्रेलिया की ओर पलायन करने वालों की संख्या क्यों बढ़ने लगी?
उत्तर— ब्रिटेन द्वारा खाद्य पदार्थों के आयात का निर्णय लेने पर अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की ओर पलायन करने वालों की संख्या बढ़ने के कारणों को फ्लो चार्ट में निम्न प्रकार दर्शाया गया है-
[फ्लो चार्ट - ब्रिटेन में खाद्य पदार्थों के आयात का प्रभाव]

- ब्रिटेन द्वारा खाद्य पदार्थों के आयात का निर्णय लेना
- ↓
- आयातित खाद्य पदार्थों की लागत ब्रिटेन में उत्पादित खाद्य पदार्थों की लागत से कम होना
- ↓
- ब्रिटेन में विशाल भू-भागों में खेती बन्द होना
- ↓
- हजारों लोगों का बेरोजगार होना
- ↓
- ब्रिटेन में औद्योगिक प्रगति से लोगों की आय बढ़ना
- ↓
- खाद्य पदार्थों का और अधिक आयात करना
- ↓
- पूर्वी यूरोप, रूस, अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया में खेती योग्य भूमि का निर्माण करना एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास की आवश्यकता
- ↓
- वन क्षेत्रों को साफ करने एवं खाद्य उत्पादन हेतु बड़ी संख्या में श्रमिकों की आवश्यकता
- ↓
- अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया में श्रमिकों की कमी
- ↓
- बेहतर भविष्य की चाह में लोगों का अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की ओर पलायन
गतिविधि-पृष्ठ 59
प्रश्न 3. कल्पना कीजिए कि आप आयरलैंड से अमेरिका में आए एक खेत मजदूर हैं। इस बारे में एक
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सामाजिक विज्ञान (इतिहास) कक्षा X 65
पैराग्राफ लिखिए कि आपने यहां आने का फैसला क्यों किया और अब आप अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए क्या करते हैं?
उत्तर— मैं, राबर्ट, आयरलैंड से अमेरिका आया एक खेत मजदूर हूँ।
आयरलैंड में बहुतायत से खाद्य पदार्थ आयात किये जाने लगे थे। वहां आयातित खाद्य पदार्थों की लागत आयरलैंड में पैदा होने वाले खाद्य पदार्थों से काफी कम थी। वहां के किसान आयातित माल की कीमत का मुकाबला नहीं कर पाये। वहां विशाल भू-भागों पर खेती बंद हो गई। हजारों लोगों के साथ मैं भी बेरोजगार हो गया। इसलिए मैंने बेहतर भविष्य की चाह में अमेरिका आने का फैसला किया।
मैंने अमेरिका आकर अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए खेती का कार्य किया। मैंने खेती के लिए जमीन साफ की और उसमें खेती का कार्य शुरू किया।
चर्चा करें-पृष्ठ 64
प्रश्न 4. राष्ट्रीय पहचान के निर्माण में भाषा और लोक परम्पराओं के महत्त्व पर चर्चा करें।
उत्तर— राष्ट्रीय पहचान के निर्माण में भाषा और लोक परम्पराओं का महत्वपूर्ण स्थान होता है। प्रत्येक राष्ट्र की एक राष्ट्र भाषा होती है जो वहां प्रमुखता से बोली जाती है। इसके अलावा प्रत्येक राष्ट्र की कुछ विशिष्ट लोक परम्पराएं होती हैं जो वहां की संस्कृति का अभिन्न अंग होती हैं। लोक परम्पराएं पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती रहती हैं और लोग उन्हें अपनाते रहते हैं। अतः भाषा एवं लोक परम्पराओं से किसी भी व्यक्ति की राष्ट्रीय पहचान की जा सकती है।
चर्चा करें-पृष्ठ 73
प्रश्न 5. पटसन (जूट) उगाने वालों के विलाप में पटसन की खेती से किसके मुनाफे का जिक्र आया है? स्पष्ट करें।
उत्तर— पटसन उगाने वालों के विलाप में पटसन की खेती से व्यापारी के मुनाफे का जिक्र आया है क्योंकि वे फसल का बहुत कम भाव देते थे। कवि काश्तकारों से कहता है कि तुम कर्जा लेकर खूब पटसन उगाओ। अपनी समस्त पूंजी लगाने के बाद भी तुम्हें निराशा मिलेगी। जब फसल पकेगी तो इसकी कुछ भी कीमत नहीं रहेगी। व्यापारी अपने घर पर बैठे तुम्हें इसका पांच रुपया मन देंगे और इसका समस्त मुनाफा स्वयं हड़प लेंगे।
चर्चा करें-पृष्ठ 75
प्रश्न 6. संक्षेप में बताएं कि दो महायुद्धों के बीच जो आर्थिक परिस्थितियां पैदा हुईं, उनसे अर्थशास्त्रियों और राजनेताओं ने क्या सबक सीखे?
उत्तर— दो महायुद्धों के बीच जो आर्थिक परिस्थितियां उत्पन्न हुईं, उनसे अर्थशास्त्रियों तथा राजनेताओं ने निम्नलिखित दो सबक सीखे-
(1) पहला सबक, वृहत् उत्पादन पर आधारित किसी औद्योगिक समाज को व्यापक उपभोग के बिना कायम नहीं रखा जा सकता। परन्तु व्यापक उपभोग को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक था कि आय काफी अधिक और स्थिर हो। यदि रोजगार अस्थिर होंगे, तो आय स्थिर नहीं हो सकती थी। स्थिर आय के लिए पूर्ण रोजगार भी आवश्यक था। मूल्य, उपज और रोजगार में आने वाले उतार-चढ़ावों को नियंत्रित करने के लिए सरकार का हस्तक्षेप आवश्यक था। सरकार के हस्तक्षेप के द्वारा ही आर्थिक स्थिरता कायम रह सकती थी।
(2) दूसरा सबक बाह्य विश्व के साथ आर्थिक सम्बन्धों के बारे में था। पूर्ण रोजगार का लक्ष्य केवल तभी प्राप्त किया जा सकता है, जब सरकार के पास वस्तुओं, पूंजी और श्रम के आवागमन को नियंत्रित करने की शक्ति प्राप्त हो।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
संक्षेप में लिखें-
प्रश्न 1. सत्रहवीं सदी से पहले होने वाले आदान-प्रदान के दो उदाहरण दीजिए। एक उदाहरण एशिया से और एक उदाहरण अमेरिका महाद्वीपों के बारे में चुनें।
उत्तर— (1) एशिया महाद्वीप-17वीं शताब्दी से पूर्व रेशम मार्ग से चीनी रेशम तथा चीनी पोटरी एवं भारत तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के कपड़े व मसाले विश्व के विभिन्न देशों में जाते थे। वापसी में सोना-चांदी जैसी बहुमूल्य धातुएं यूरोप से एशिया में पहुंचती थीं।
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( 2 ) अमेरिका महाद्वीप- आज से लगभग 500 वर्ष पूर्व हमारे पास आलू, सोया, मूंगफली, मक्का, टमाटर, मिर्च, शकरकन्द आदि खाद्य-पदार्थ उपलब्ध नहीं थे, परन्तु कोलम्बस द्वारा अमेरिका की खोज के पश्चात् ये खाद्य पदार्थ अमेरिका से यूरोप एवं एशिया के देशों में पहुँच गए।
प्रश्न 2. बताएँ कि पूर्व-आधुनिक विश्व में बीमारियों के वैश्विक प्रसार ने अमेरिकी भू-भागों के उपनिवेशीकरण में किस प्रकार मदद दी?
उत्तर— 16वीं सदी में अमेरिकी भू-भागों के उपनिवेशीकरण में चेचक के कीटाणुओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ये चेचक के कीटाणु स्पेन के सैनिकों एवं सैनिक अधिकारियों के साथ अमेरिका पहुँचे। अमेरिकियों के शरीर में यूरोप से आने वाली इन बीमारियों से बचने की रोग-प्रतिरोधी क्षमता नहीं थी। परिणामस्वरूप चेचक की महामारी अमेरिकी लोगों के लिए अत्यन्त विनाशकारी सिद्ध हुई। यह सम्पूर्ण अमेरिकी महाद्वीप में फैल गई जिसके परिणामस्वरूप हजारों लोग मौत के मुँह में चले गए। इस तरह घुसपैठियों की जीत का रास्ता आसान हो गया।
स्पेनिश सैनिकों के पास चेचक से बचाव के पूरे साधन थे और उनके शरीर में रोग-प्रतिरोध की क्षमता भी विकसित हो चुकी थी परन्तु अमेरिकी लोगों में इनका अभाव था। इस कारण स्पेनिश सेनाओं द्वारा अमेरिका को अपना उपनिवेश बनाना आसान हो गया।
प्रश्न 3. निम्नलिखित के प्रभावों की व्याख्या करते हुए संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखें-
( क ) कॉर्न लॉ के समाप्त करने के बारे में ब्रिटिश सरकार का फैसला।
अथवा
कॉर्न लॉ को समाप्त करने के बारे में ब्रिटिश सरकार के फैसले पर टिप्पणी लिखिए। इस कानून के एक प्रभाव की चर्चा भी कीजिए।
( ख ) अफ्रीका में रिंडरपेस्ट का आना।
( ग ) विश्वयुद्ध के कारण यूरोप में कामकाजी उम्र के पुरुषों की मौत।
( घ ) भारतीय अर्थव्यवस्था पर महामन्दी का प्रभाव।
अथवा
वैश्विक महामंदी से भारत पर क्या असर पड़ा? ( प्रश्न बैंक )
( ङ ) बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा अपने उत्पादन को एशियाई देशों में स्थानान्तरित करने का फैसला।
उत्तर— ( क ) कॉर्न लॉ को समाप्त करने के बारे में ब्रिटिश सरकार का फैसला- खाद्य पदार्थों की ऊँची कीमतों से परेशान उद्योगपतियों और शहरी लोगों ने सरकार को मजबूर कर दिया कि वह 'कॉर्न लॉ' को तुरन्त समाप्त करे और सरकार को इसे समाप्त करने का फैसला करना पड़ा। ब्रिटेन की सरकार द्वारा कॉर्न लॉ की समाप्ति के बाद बहुत कम कीमत पर खाद्य पदार्थों का आयात किया जाने लगा। आयातित खाद्य पदार्थों की लागत ब्रिटेन में उत्पादित खाद्य पदार्थों से भी कम थी। परिणामस्वरूप ब्रिटेन के किसानों की आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई; क्योंकि वे आयातित माल के मूल्यों का मुकाबला नहीं कर सकते थे। विशाल भू-भागों पर कृषि कार्य बन्द हो गया और हजारों किसान बेरोजगार हो गए। गाँवों से उजड़कर वे या तो शहरों या अन्य देशों की ओर पलायन करने लगे।
( ख ) अफ्रीका में रिंडरपेस्ट का आना- 1880 के दशक के अन्तिम वर्षों में अफ्रीका में रिंडरपेस्ट नामक बीमारी एशियाई मवेशियों से अफ्रीकी मवेशियों में फैल गई। उस समय पूर्वी अफ्रीका में एरिट्रिया पर हमला कर रहे इतालवी सैनिकों का पेट भरने के लिए एशियाई देशों से जानवर लाए जाते थे। एशियाई देशों से आए उन्हीं जानवरों के द्वारा रिंडरपेस्ट या मवेशी प्लेग बीमारी अफ्रीका में आई। यह बीमारी 'जंगल में आग' की भाँति अफ्रीकी महाद्वीप में फैलने लगी।
रिंडरपेस्ट के प्रभाव-
(1) इसने अफ्रीकी महाद्वीप के 90 प्रतिशत पशुओं को मार डाला।
(2) बड़ी संख्या में पशुओं के मारे जाने से अफ्रीकी लोगों के जीवन-निर्वाह के साधन समाप्त हो गए।
(3) अपनी सत्ता को सुदृढ़ करने तथा अफ्रीकी लोगों को श्रम बाजार में ढकेलने के लिए वहाँ के बागान मालिकों, खान मालिकों और औपनिवेशिक सरकारों ने उनके शेष बचे हुए पशुओं को भी अपने अधिकार में कर लिया।
(4) इससे यूरोपीय साम्राज्यवादियों को सम्पूर्ण अफ्रीका पर विजय प्राप्त करने एवं उसे अपना दास बना लेने का स्वर्णिम अवसर मिल गया था।
( ग ) विश्वयुद्ध के कारण यूरोप में कामकाजी उम्र के पुरुषों की मौत- प्रथम विश्वयुद्ध में 90 लाख से अधिक लोग मारे गए तथा 2 करोड़ लोग घायल हुए थे। मृतकों तथा घायलों में से अधिकतर कामकाजी आयु के पुरुष
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सामाजिक विज्ञान (इतिहास) कक्षा X 67
थे। इसके परिणामस्वरूप यूरोप में कामकाज के योग्य लोगों की संख्या बहुत कम रह गई। परिवार के सदस्य घट जाने से युद्ध के बाद परिवारों की आय भी कम हो गई।
(घ) भारतीय अर्थव्यवस्था पर महामन्दी का प्रभाव- भारतीय अर्थव्यवस्था पर वैश्विक महामन्दी का बहुत अधिक प्रभाव पड़ा। यथा-
(i) 1928 से 1934 के बीच देश के आयात-निर्यात घटकर लगभग आधे रह गये थे।
(ii) जब अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में कीमतें गिरने लगीं तो यहाँ भी कीमतें नीचे आ गईं।
(iii) शहरी निवासियों के मुकाबले किसानों और काश्तकारों को ज्यादा नुकसान हुआ। यद्यपि कृषि उत्पादों की कीमतें तेजी से गिरीं लेकिन सरकार ने लगान वसूली में छूट नहीं दी।
(iv) सबसे बुरी मार उन काश्तकारों पर पड़ी जो विश्व बाजार के लिए उपज पैदा करते थे। उन्होंने अपनी बेहतर आय हेतु उपज बढ़ाने के लिए कर्ज लिये थे। वे दिनोंदिन और कर्ज में डूबते गए।
(v) शहरों में निश्चित आय वाले लोगों पर इस महामन्दी का कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा। इस महामन्दी से शहरी लोगों की बजाय किसानों और काश्तकारों को बहुत अधिक नुकसान हुआ।
(ङ) बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा अपने उत्पादन को एशियाई देशों में स्थानान्तरित करने का फैसला- 1970 ई. के दशक के मध्य से विश्व में बेरोजगारी बढ़ने लगी। अतः सत्तर के दशक के अन्तिम वर्षों से बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ भी एशिया के ऐसे देशों में उत्पादन केन्द्रित करने लगीं जहाँ वेतन कम थे। चीन जैसे देशों में वेतन तुलनात्मक रूप से कम थे। अतः विश्व बाजार पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही विदेशी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने वहाँ जमकर निवेश करना शुरू कर दिया। उद्योगों को कम वेतन वाले देशों में ले जाने से वैश्विक व्यापार और पूँजी प्रवाहों पर भी असर पड़ा।
प्रश्न 4. खाद्य उपलब्धता पर तकनीक के प्रभाव को दर्शाने के लिए इतिहास से दो उदाहरण दें।
उत्तर—खाद्य उपलब्धता पर तकनीक का प्रभाव- (1) यातायात और परिवहन साधनों में सुधार-तीव्र गति से चलने वाली रेलगाड़ियों का निर्माण किया गया तथा बोगियों का भार कम किया गया। बड़े आकार के जलपोतों का निर्माण किया गया जिससे किसी भी उत्पाद को खेतों से दूर-दूर के बाजारों में कम लागत पर तथा अधिक आसानी से पहुँचाया जा सके।
(2) मांस का निर्यात-नई तकनीक के आने पर पानी के जहाजों में रेफ्रिजरेशन की तकनीक स्थापित कर दी गई जिससे जल्दी खराब होने वाली चीजों को भी लम्बी यात्राओं पर ले जाया जा सकता था। अब अमेरिका, आस्ट्रेलिया या न्यूजीलैंड, सब जगह से जीवित जानवरों को भेजने के स्थान पर उनका मांस ही यूरोपीय देशों में भेजा जाने लगा। इससे समुद्री यात्रा में आने वाला खर्च कम हो गया तथा यूरोप में मांस सस्ता मिलने लगा। अब यूरोप के गरीब लोगों के भोजन में भी मांसाहार (और मक्खन व अंडे) शामिल हो गया।
प्रश्न 5. ब्रेटन वुड्स समझौते का क्या अर्थ है?
अथवा
ब्रेटन वुड्स समझौता क्या है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)
उत्तर—ब्रेटन वुड्स समझौता-दोनों विश्व युद्धों के मध्य अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था को सुनिश्चित करने, औद्योगिक विश्व में आर्थिक स्थिरता एवं पूर्ण रोजगार को बनाये रखने हेतु जुलाई 1944 में अमेरिका स्थित न्यू हैम्पशर के ब्रेटन वुड्स नामक स्थान पर संयुक्त राष्ट्र मौद्रिक एवं वित्तीय सम्मेलन में सहमति बनी थी। इसे ही ब्रेटन वुड्स समझौता कहा जाता है।
ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में ही अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आई.एम.एफ.) की स्थापना की गई। युद्धोत्तर पुनर्निर्माण के लिए धन की व्यवस्था करने हेतु अन्तर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक (विश्व बैंक) का गठन किया गया। इसलिए विश्व बैंक और अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष को ब्रेटन वुड्स संस्थान या 'ब्रेटन वुड्स ट्विन' (इसकी जुड़वां सन्तानें) भी कहा जाता है। इसी आधार पर युद्धोत्तर अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था को प्रायः ब्रेटन वुड्स व्यवस्था भी कहा जाता है। ब्रेटन वुड्स व्यवस्था निश्चित विनिमय दरों पर आधारित थी। इसमें राष्ट्रीय मुद्राएँ एक निश्चित विनिमय दर में बंधी हुई थीं। उदाहरणार्थ, एक डालर के बदले में रुपयों की संख्या निश्चित थी और डॉलर का मूल्य भी सोने से बंधा हुआ था।
[चर्चा करें]
प्रश्न 6. कल्पना कीजिए कि आप कैरीबियाई क्षेत्र में काम करने वाले गिरमिटिया मजदूर हैं। इस अध्याय
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में दिए गए विवरणों के आधार पर अपने हालात और अपनी भावनाओं का वर्णन करते हुए अपने परिवार के नाम एक पत्र लिखें।
उत्तर—आदरणीय पिताजी,
सादर प्रणाम।
मुझे दुःख के साथ कहना पड़ता है कि यहाँ वैसी परिस्थितियाँ नहीं हैं जैसा कि एजेंट ने बताया था। यहाँ का जीवन और कार्य स्थितियाँ बहुत कठोर हैं। भरसक प्रयासों के बावजूद मैं उन कामों को संतोषजनक तरीके से नहीं कर पाया जो मुझे सौंपे गए थे। यहाँ पर हमें दिन-रात कठोर परिश्रम करना पड़ता है। हमें काम बहुत भारी पड़ता है और हम दिनभर में अपना काम पूरा नहीं कर पाते हैं। काम संतोषजनक ढंग से पूरा न होने पर हमारा वेतन काट लिया जाता है। इसलिए हमें कई बार हमारा पूरा वेतन नहीं मिल पाता है और हमें विभिन्न प्रकार के दण्ड दिए जाते हैं। हम मजदूरों के पास कानूनी अधिकार नहीं हैं। यदि कोई मजदूर कठोर परिश्रम से बचने के लिए जंगलों में भाग जाता है, तो उसे पकड़कर कठोर दण्ड दिया जाता है। मजदूरों को अपने अनुबन्ध की अवधि में भारी कठिनाइयों एवं कष्टों का सामना करना पड़ता है। अतः एजेंट के आश्वासन पर मैं जो एक सुखद जीवन की आशाएँ लेकर यहाँ आया था, वे समस्त आशाएँ मिट्टी में मिल गई हैं। मैं अपने मालिक के बागान में पांच वर्ष काम करके स्वदेश लौटने का भरसक प्रयास करूँगा।
सबको मेरा प्रणाम।
आपका पुत्र
क.ख.ग.
प्रश्न 7. अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक विनिमयों में तीन तरह की गतियों या प्रवाहों की व्याख्या करें। तीनों प्रकार की गतियों के भारत और भारतीयों से सम्बन्धित एक-एक उदाहरण दें और उनके बारे में संक्षेप में लिखें।
उत्तर— अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक विनिमयों के प्रवाह—अर्थशास्त्रियों ने अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक विनिमयों में तीन प्रकार की गतियों या प्रवाहों का उल्लेख किया है, ये प्रवाह निम्नलिखित हैं-
(1) व्यापार का प्रवाह— पहला प्रवाह व्यापार का होता है। उन्नीसवीं शताब्दी में व्यापार का प्रवाह मुख्य रूप से वस्तुओं के व्यापार तक ही सीमित था। इन वस्तुओं में कपड़ा, गेहूँ, कपास आदि सम्मिलित थे।
भारत से गेहूँ, समस्त प्रकार के कपड़े आदि ब्रिटेन भेजे जाते थे। नील का व्यापार भी बड़े पैमाने पर होता था।
(2) श्रम का प्रवाह— दूसरा, श्रम का प्रवाह होता है। इसमें लोग काम या रोजगार की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं।
उदाहरणार्थ, उन्नीसवीं सदी में भारत के लाखों अनुबंधित मजदूरों को बागानों, खदानों और सड़क एवं रेलवे निर्माण परियोजनाओं में काम करने के लिए त्रिनिदाद, गुयाना, सूरीनाम, मॉरीशस, फिजी, श्रीलंका आदि देशों में ले जाया गया।
(3) पूँजी का प्रवाह— तीसरा, प्रवाह पूँजी का होता है। इसमें पूँजीपति लोग अल्प अवधि अथवा दीर्घ अवधि के लिए दूर-दराज के प्रदेशों में पूँजी का निवेश करते हैं। ब्रिटेन के अनेक पूँजीपतियों ने बागानों, खानों, रेल परियोजनाओं आदि में पूँजी का निवेश किया और इसके माध्यम से अत्यधिक धन कमाया।
शिकारीपुरी श्रॉफ तथा नट्टुकोट्टई चेट्टियार भारत के प्रसिद्ध बैंकर तथा व्यापारी थे जो मध्य एवं दक्षिण-पूर्व एशिया में निर्यातन्मुखी खेती के लिए ऋण देते थे।
प्रश्न 8. महामन्दी के कारणों की व्याख्या करें।
उत्तर—महामन्दी के कारण— 1929-30 की विश्वव्यापी आर्थिक महामन्दी के प्रमुख कारण अग्रलिखित थे-
(1) कृषि में अति उत्पादन— कृषि के क्षेत्र में अति उत्पादन की समस्या बनी हुई थी। कृषि उत्पादों के गिरते मूल्यों के कारण आर्थिक स्थिति और भी शोचनीय हो गई थी। कृषि उत्पादों के गिरते मूल्यों के कारण किसानों की आय कम हो गई। अतः अपनी आय बढ़ाने के लिए वे किसान उत्पादन बढ़ाने का प्रयास करने लगे। अतः बाजार कृषि उत्पादों से भर गए। इसके परिणामस्वरूप मूल्य और गिर गए। क्रेताओं के अभाव में कृषि उपज पड़ी-पड़ी सड़ने लगी।
(2) अमेरिकी ऋणों में कमी— 1920 के दशक के मध्य में बहुत सारे देशों ने अमेरिका से कर्जे लेकर अपनी निवेश संबंधी जरूरतों को पूरा किया था। जब हालात अच्छे थे तो अमेरिका से कर्जा जुटाना बहुत आसान था लेकिन संकट का संकेत मिलते ही अमेरिकी उद्यमियों में घबराहट पैदा हो गई। वे अपनी पूँजी वापस निकालने लगे। 1928 के पहले छह माह तक विदेशों में अमेरिका का कर्जा एक अरब डॉलर था। सालभर के भीतर यह कर्जा घटकर केवल चौथाई रह गया था। जो देश अमेरिकी कर्जे पर सबसे ज्यादा निर्भर थे उनके सामने गहरा संकट आ खड़ा हुआ।
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सामाजिक विज्ञान (इतिहास) कक्षा X 69
प्रश्न 9. जी-77 देशों से आप क्या समझते हैं? जी-77 को किस आधार पर ब्रेटन वुड्स की जुड़वाँ सन्तानों की प्रतिक्रिया कहा जा सकता है? व्याख्या करें।
उत्तर— जी-77-जी-77 विश्व के विभिन्न विकासशील देशों का एक ऐसा समूह है, जिसने एक नई अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली की स्थापना पर बल दिया है।
ब्रेटन वुड्स की जुड़वाँ सन्तानों की प्रतिक्रिया— 1944 में ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष तथा अन्तर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक (विश्व बैंक) की स्थापना की गई थी। इन्हें ब्रेटन वुड्स संस्थान अथवा ब्रेटन वुड्स की जुड़वाँ सन्तान कहा जाता है। इनका उद्देश्य सदस्य-देशों के विदेश व्यापार में लाभ और घाटे से निपटने तथा युद्धोत्तर पुनर्निर्माण के लिए धन की व्यवस्था करना था।
जी-77 के देश भी इसी प्रकार संगठन बनाकर ऐसी आर्थिक प्रगति लागू करना चाहते थे जिसमें उन्हें अपने संस्थानों पर सही नियंत्रण मिल सके, विकास के लिए अधिक सहायता मिले, कच्चे माल की उचित कीमत मिले तथा तैयार माल को विकसित देशों में बेचने का मौका मिले।
इस प्रकार जी-77 को ब्रेटन वुड्स की जुड़वाँ सन्तानों की प्रतिक्रिया कहा जा सकता है।
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📝 2. नोट्स: पाठ-सार, मुख्य बिंदु एवं शब्दावली
महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं, भौगोलिक परिभाषाएं, राजनीतिक सिद्धांत एवं संपूर्ण अध्याय का सारगर्भित सारांश।
पाठ-सार
1. आधुनिक युग से पहले भूमंडलीकृत विश्व बनने की प्रक्रिया-व्यापार, काम की तलाश में एक जगह से दूसरी जगह जाते लोगों, पूँजी तथा बहुत सारी चीजों की वैश्विक आवाजाही का एक लम्बा इतिहास रहा है। इतिहास के प्रत्येक दौर में विश्व के मानव समाज एक-दूसरे के ज्यादा नजदीक आते गये हैं। प्राचीन काल से ही यात्री, व्यापारी, पुजारी और तीर्थयात्री ज्ञान, अवसरों और आध्यात्मिक शांति के लिए या उत्पीड़न से बचने के लिए दूर-दूर की यात्राओं पर जाते रहे हैं। सिंधु घाटी सभ्यता (3000 ईसा पूर्व), मालदीव के समुद्र में पाई जाने वाली हजार साल पहले की कौड़ियाँ इसके उदाहरण हैं।
1.1 रेशम मार्ग से जुड़ती दुनिया-आधुनिक काल से पूर्व के युग में विश्व के भिन्न-भिन्न देशों के बीच व्यापारिक और सांस्कृतिक सम्पर्क स्थापित करने का श्रेष्ठ उदाहरण रेशम मार्गों के रूप में दिखाई देता है। ये सिल्क मार्ग एशिया के विशाल क्षेत्रों को एक-दूसरे से जोड़ते थे। ये एशिया को उत्तरी अफ्रीका तथा यूरोप से भी जोड़ते थे।
ऐसे मार्ग ईसा पूर्व के समय से लेकर लगभग 15वीं शताब्दी तक अस्तित्व में रहे। इन मार्गों से चीनी पॉटरी, कपड़े, मसाले का व्यापार होता था। ईसाई मिशनरी, मुस्लिम धर्मोपदेशक, इसी रास्ते से दुनिया में फैले तथा बौद्ध धर्म कई दिशाओं में फैला।
1.2 भोजन की यात्रा (स्पैघेत्ती और आलू)-जब भी व्यापारी और मुसाफिर किसी नये देश में जाते थे तो वे जाने-अनजाने में वहाँ नई फसलों के बीज बो आते थे अथवा वे झटपट तैयार होने वाले खाद्य पदार्थ अपने साथ लेकर प्रवास करते थे। संभवतः इसी प्रकार स्पैघेत्ती और आलू यूरोप तथा अन्य देशों में पहुँचे।
1.3 विजय, बीमारी और व्यापार-सोलहवीं शताब्दी के मध्य में पुर्तगाली और स्पेन की सेनाओं ने अमेरिका को उपनिवेश बनाना शुरू कर दिया। स्पेन के सैनिकों के साथ चेचक के कीटाणु अमेरिका जा पहुँचे। चेचक के प्रकोप के कारण वहाँ बड़ी संख्या में लोग मारे गए। इससे उपनिवेशकारों को अमेरिका पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने का अवसर मिला। अठारहवीं शताब्दी तथा उसके बाद विश्व व्यापार के केन्द्र पश्चिम की ओर खिसकने लगा। अब यूरोप विश्व व्यापार का बड़ा केन्द्र बन गया।
2. उन्नीसवीं शताब्दी (1815-1914)-19वीं सदी में दुनिया तेजी से बदलने लगी। आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और तकनीकी कारकों ने पूरे समाजों की कायापलट कर दी और विदेश सम्बन्धों के नये ढर्रे में ढाल दिया। अर्थशास्त्रियों ने अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक विनिमय में तीन प्रकार के प्रवाहों का उल्लेख किया है-(1) व्यापार का प्रवाह (2) श्रम का प्रवाह तथा (3) पूँजी का प्रवाह।
2.1 विश्व अर्थव्यवस्था का उदय-कॉर्न लॉ के निरस्त होने के बाद ब्रिटेन में आयातित खाद्य पदार्थों की लागत ब्रिटेन में पैदा होने वाले खाद्य पदार्थों से भी कम थी। उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य में ब्रिटेन की औद्योगिक प्रगति काफी तेज हो गई। अब वहाँ खाद्य पदार्थों का और भी अधिक मात्रा में आयात होने लगा। इससे पूर्वी यूरोप, रूस, अमेरिका और आस्ट्रेलिया में कृषि क्षेत्र में वृद्धि हुई। इसके लिए लंदन से पूँजी का प्रवाह हुआ तथा अमेरिका और आस्ट्रेलिया में लोगों को ले जाकर बसाया जाने लगा। इससे श्रम प्रवाह होने लगा। 19वीं शताब्दी में यूरोप के लगभग 5 करोड़ लोग अमेरिका और आस्ट्रेलिया में जाकर बस गए। वे वहाँ उत्तम भविष्य की चाह में गए थे।
2.2 तकनीक की भूमिका-1890 तक एक वैश्विक कृषि अर्थव्यवस्था सामने आ चुकी थी। अब श्रम विस्थापन रुझानों, पूँजीप्रवाह, पारिस्थितिकी और तकनीक में गम्भीर परिवर्तन आ चुके थे।
2.3 उन्नीसवीं सदी के अन्त में उपनिवेशवाद-उन्नीसवीं शताब्दी में यूरोप के शक्तिशाली देशों ने अपने-अपने उपनिवेश स्थापित कर लिए। 1885 में यूरोप के शक्तिशाली देशों की बर्लिन में एक बैठक हुई जिसमें उन्होंने अफ्रीका को आपस में बाँट लिया।
2.4 रिंडरपेस्ट या मवेशी प्लेग-अफ्रीका में 1890 के दशक में रिंडरपेस्ट नामक बीमारी बहुत तेजी से फैल गई। इससे लोगों की आजीविका और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा। 19वीं सदी में यूरोपीय लोग अफ्रीका में बागानी खेती करने और खदानों का दोहन करना चाहते थे। लेकिन वहाँ के लोग वेतन पर काम नहीं करना चाहते थे। मजदूरों की भर्ती और उन्हें अपने पास रोके रखने के लिए मालिकों ने उन पर भारी-भरकम कर, उत्तराधिकारी कानून में
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बदलाव, खानकर्मियों की बाड़ेबन्दी आदि अनेक हथकण्डे अपनाए लेकिन बात नहीं बनी। तभी वहां रिंडरपेस्ट नामक बीमारी फैली जिसने 90 प्रतिशत मवेशियों को मौत की नींद सुला दिया। पशुओं के खत्म हो जाने से अफ्रीकियों के रोजी-रोटी के साधन खत्म हो गए और बागान मालिकों, खान मालिकों को उन्हें गुलाम बनाने का मौका मिल गया।
2.5 भारत से अनुबन्धित श्रमिकों का जाना-उन्नीसवीं सदी में भारत और चीन के लाखों मजदूरों को बागानों, खदानों, सड़कों, रेलों की निर्माण परियोजनाओं में काम करने के लिए दूर-दूर के देशों में ले जाया गया। भारतीय अनुबन्धित श्रमिकों को मुख्य रूप से कैरिबियाई द्वीप समूह, मॉरिशस व फिजी में ले जाया जाता था।
2.6 विदेश में भारतीय उद्यमी-अफ्रीका में यूरोपीय उपनिवेशकारों के पीछे-पीछे भारतीय व्यापारी और महाजन भी जा पहुँचे।
2.7 भारतीय व्यापार, उपनिवेशवाद और वैश्विक व्यवस्था-भारतीय सूती कपड़े के निर्यात में निरन्तर गिरावट आती गई। सन् 1800 के आसपास निर्यात में सूती कपड़े का प्रतिशत 30 था जो 1870 में घटकर केवल 3 प्रतिशत रह गया।
भारत के साथ ब्रिटेन हमेशा 'व्यापार अधिशेष' की अवस्था में रहता था। इसका मतलब है कि आपसी व्यापार में हमेशा ब्रिटेन को ही लाभ रहता था।
ब्रिटेन के व्यापार से जो अधिशेष प्राप्त होता था, उससे तथाकथित होम चार्जेज (देसी खर्चे) का निपटारा होता था। होम चार्जेज के अन्तर्गत ब्रिटिश अधिकारियों तथा व्यापारियों द्वारा अपने घर में भेजी गई रकम, भारतीय बाहरी कर्ज पर ब्याज और भारत में नौकरी कर चुके ब्रिटिश अधिकारियों की पेंशन सम्मिलित थी।
3. महायुद्धों के बीच अर्थव्यवस्था-पहला महायुद्ध यद्यपि मुख्यतः यूरोप में ही लड़ा गया लेकिन उसके प्रभाव पूरे विश्व में महसूस किए गए। इस युद्ध ने विश्व अर्थव्यवस्था को एक गहरे संकट में डाल दिया। इस दौरान पूरी दुनिया में चौतरफा आर्थिक एवं राजनैतिक अस्थिरता बनी रही। यथा-
3.1 युद्धकालीन रूपान्तरण-पहला विश्व युद्ध दो खेमों के बीच लड़ा गया था-(i) मित्र राष्ट्र और (ii) केन्द्रीय शक्तियाँ। यह विश्व युद्ध पहला आधुनिक औद्योगिक युद्ध था। इस युद्ध में 90 लाख से अधिक लोग मारे गए तथा 2 करोड़ घायल हुए। कामकाज के योग्य लोगों की संख्या बहुत कम रह गई। परिवारों की आय गिर गई। युद्ध के कारण दुनिया के कुछ सबसे शक्तिशाली आर्थिक ताकतों के बीच आर्थिक सम्बन्ध टूट गए। इस युद्ध ने अमेरिका को एक साहूकार एवं ऋणदाता देश बना दिया।
3.2 युद्धोत्तर सुधार-युद्ध खत्म होने तक ब्रिटेन भारी विदेशी कर्जों में दब चुका था। युद्ध के कारण पैदा हुआ आर्थिक उछाह शान्त होने लगा तो उत्पादन गिरने लगा और बेरोजगारी बढ़ने लगी। 1921 में हर पाँच में से एक ब्रिटिश मजदूर के पास काम नहीं था। रोजगार के बारे में बेचैनी और अनिश्चितता युद्धोत्तर वातावरण का अंग बन गई थी। दूसरे, युद्ध के बाद कनाडा, अमेरिका, आस्ट्रेलिया तथा पूर्वी यूरोप में गेहूँ की पैदावार सुधरने से विश्व बाजारों में गेहूँ की अति के हालात हो गए। इससे अनाज की कीमतें गिर गई और किसान गहरे कर्ज में फँस गए।
3.3 बड़े पैमाने पर उत्पादन और उपभोग-अमेरिकी अर्थव्यवस्था की एक बड़ी विशेषता थी-वृहत् उत्पादन का चलना। कार निर्माता हेनरी फोर्ड वृहत् उत्पादन के प्रणेता थे। हेनरी फोर्ड ने कारों के उत्पादन के लिए असेंबली लाइन की पद्धति अपनाई जिससे हर तीन मिनट में एक कार तैयार होकर निकलने लगी। अमेरिका में कारों का उत्पादन बहुत बढ़ गया। फोर्ड उत्पादन पद्धति को जल्दी ही पूरे अमेरिका में अपनाया जाने लगा। वृहत् उत्पादन पद्धति ने इंजीनियर आधारित चीजों की लागत और कीमत में कमी ला दी। अब लोग कार, फ्रिज, वाशिंग मशीन आदि वस्तुएं हायर-परचेज पद्धति पर खरीदने लगे। घरों का निर्माण या खरीददारी भी कर्ज पर ही की जा रही थी। इससे रोजगार, माँग और उपभोग बढ़ता गया और 1923 में अमेरिका शेष विश्व को पूँजी का निर्यात पुनः करने लगा। इससे यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं में भी सुधार आया और विश्व व्यापार में सुधार आया।
3.4 महामन्दी-1929 में विश्वव्यापी आर्थिक मन्दी शुरू हुई और यह संकट तीस के दशक तक बना रहा। कृषि क्षेत्रों तथा समुदायों पर इसका सबसे बुरा प्रभाव पड़ा। इस महान मन्दी के कारण यूरोप के अनेक बड़े बैंक धराशायी हो गए, मुद्रा की कीमत बुरी तरह बिगड़ गई। इस मन्दी का सबसे बुरा असर अमेरिका पर पड़ा। वहाँ हजारों बैंक दिवालिया हो गए और बन्द कर दिए गए।
3.5 भारत और महामन्दी-औपनिवेशिक भारत कृषि वस्तुओं का निर्यातक और तैयार मालों का आयातक बन चुका था। 1928 से 1934 के बीच भारत के आयात-निर्यात घटकर लगभग आधे रह गये। इसी अवधि में भारत में गेहूँ की कीमत 50 प्रतिशत गिर गई। किसानों और काश्तकारों को सर्वाधिक हानि पहुँची। काश्तकार पहले से भी अधिक कर्ज में डूब गए। शहरी भारत के लिए यह मन्दी अधिक दुखदायी नहीं थी।
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सामाजिक विज्ञान (इतिहास) कक्षा X 63
4. विश्व अर्थव्यवस्था का पुनर्निर्माण : युद्धोत्तर काल—पहला विश्व युद्ध खत्म होने के केवल दो दशक बाद दूसरा विश्व युद्ध शुरू हो गया। यह युद्ध धुरी राष्ट्रों और मित्र राष्ट्रों के बीच लड़ा गया। इस युद्ध में ऐसे लोग ज्यादा मरे जो किसी मोर्चे पर नहीं लड़ रहे थे। इस युद्ध ने बेहिसाब आर्थिक और सामाजिक तबाही को जन्म दिया। ऐसे हालात में पुनर्निर्माण का काम कठिन था।
युद्धोत्तर काल में विश्व अमेरिका और सोवियत संघ के प्रभावों के साये में आगे बढ़ा। दोनों वर्चस्वशाली ताकत के रूप में दुनिया के सामने आ गए थे।
4.1 युद्धोत्तर बन्दोबस्त और ब्रेटन वुड्स संस्थान—युद्धोत्तर अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह था कि औद्योगिक विश्व में आर्थिक स्थिरता तथा पूर्ण रोजगार बनाए रखा जाए।
जुलाई, 1944 में अमेरिका स्थित न्यू हैम्पशर के ब्रेटन वुड्स नामक स्थान पर संयुक्त राष्ट्र मौद्रिक एवं वित्तीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में ही अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आई.एम.एफ.) की स्थापना की गई। इसके अतिरिक्त अन्तर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक (विश्व बैंक) का भी गठन किया गया। इसी वजह से विश्व बैंक और आई.एम.एफ. को ब्रेटन वुड्स संस्था भी कहा जाता है।
4.2 प्रारंभिक युद्धोत्तर वर्ष—युद्ध के बाद 1950 से 1970 के प्रारंभिक वर्षों के बीच विश्व व्यापार की विकास दर सालाना 8 प्रतिशत से भी ज्यादा रही। इस दौरान वैश्विक आय में लगभग 5 प्रतिशत की दर से वृद्धि हो रही थी। विकास दर स्थिर थी तथा औद्योगिक देशों में बेरोजगारी औसतन 5 प्रतिशत से भी कम रही।
4.3 अनौपनिवेशीकरण और स्वतन्त्रता—द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद अगले दो दशकों में एशिया और अफ्रीका के अधिकांश उपनिवेश स्वतन्त्र राष्ट्र बन गए थे। परन्तु उनकी अर्थव्यवस्थाएँ अस्त-व्यस्त हो गई थीं। अनौपनिवेशीकरण के अनेक वर्ष बीत जाने के बाद भी अनेक नवस्वाधीन राष्ट्रों की अर्थव्यवस्थाओं पर भूतपूर्व औपनिवेशिक शक्तियों का ही नियन्त्रण बना हुआ था। कई बार शक्तिशाली देशों की बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ भी विकासशील देशों के प्राकृतिक संसाधनों का बहुत कम कीमत पर दोहन करने लगती थीं।
ऐसी स्थिति में विकासशील देशों ने एक नई अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली के लिए आवाज उठाई और ये राष्ट्र समूह 77 (जी-77) के रूप में संगठित हो गए।
4.4 ब्रेटन वुड्स का समापन तथा 'वैश्वीकरण' की शुरुआत—60 के दशक में स्थिर विनिमय दर की व्यवस्था विफल हो गई और अस्थिर विनिमय दर की व्यवस्था शुरू की गई। 70 के दशक के मध्य से अन्तर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में भी भारी बदलाव आ चुके थे। अब विकासशील देशों को पश्चिम के व्यावसायिक बैंकों और निजी ऋणदाता संस्थानों से कर्ज न लेने के लिए बाध्य किया जाने लगा। विकासशील देशों में कर्ज संकट उत्पन्न हो गया। इसके कारण आय में गिरावट आयी, गरीबी बढ़ी। औद्योगिक देशों में भी बेरोजगारी की समस्या ने उग्र रूप धारण कर लिया। पिछले दो दशकों में भारत, चीन और ब्राजील की अर्थव्यवस्थाओं में आए भारी परिवर्तनों के कारण विश्व का आर्थिक भूगोल पूरी तरह बदल चुका है।
महत्त्वपूर्ण तिथियाँ एवं घटनाएँ
[महत्वपूर्ण तिथियाँ एवं घटनाएँ तालिका]

क्र. सं. | तिथि | घटनाएँ |
1. | 1840 ई. | 1840 के दशक (1845 से 1849 के बीच) में आयरलैंड में आलू की फसल बीमारी के कारण खराब होने से लाखों लोग भुखमरी के कारण मौत के मुँह में चले गये। |
2. | 1885 ई. | 1885 ई. में यूरोप के शक्तिशाली देशों की बर्लिन में एक बैठक हुई जिसमें अफ्रीका के मानचित्र पर सीधी लकीरें खींचकर उसको आपस में बाँट लिया था। |
3. | 1890 ई. | 1890 ई. के दशक में अफ्रीका में पशुओं की रिंडरपेस्ट नामक बीमारी फैली। |
4. | 1914 ई. | प्रथम विश्व युद्ध प्रारम्भ हुआ। |
5. | 1929 ई. | आर्थिक महामंदी की शुरुआत। |
6. | 1931 ई. | महात्मा गाँधी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन शुरू किया। |
7. | जुलाई 1944 ई. | अमेरिका स्थित न्यू हैम्पशर के ब्रेटन वुड्स नामक स्थान पर विश्व में आर्थिक स्थिरता एवं पूर्ण रोजगार बनाए रखने हेतु संयुक्त राष्ट्र मौद्रिक एवं वित्तीय सम्मेलन में सहमति। |
8. | 1947 ई. | विश्व बैंक व अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने औपचारिक रूप से कार्य करना प्रारम्भ किया। |
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⭐ 3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर एवं बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक, लघूत्तरात्मक एवं निबंधात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
● बहुविकल्पीय प्रश्न-
1. आधुनिक काल से पहले विश्व के विभिन्न देशों के बीच व्यापारिक और सांस्कृतिक सम्पर्क स्थापित करने वाला मार्ग था-
(अ) सूती मार्ग (ब) शहद मार्ग (स) हवाई मार्ग (द) रेशम मार्ग
2. 1890 के दशक में अफ्रीका में कौनसी घातक बीमारी पशुओं में फैल गई थी?
(अ) रिंडरपेस्ट (ब) पशु चेचक (स) काली बीमारी (द) इन्फ्लुएंजा
3. उन्नीसवीं शताब्दी में प्रचलित अनुबन्धित व्यवस्था को क्या नाम दिया गया था?
(अ) गिरमिटिया व्यवस्था (ब) कुली व्यवस्था (स) बेगार व्यवस्था (द) नई दास प्रथा
4. विश्वव्यापी आर्थिक मन्दी की शुरुआत हुई- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)
(अ) 1919 (ब) 1929 (स) 1935 (द) 1933
5. विश्वव्यापी आर्थिक मन्दी का सबसे बुरा असर पड़ा- (प्रश्न बैंक)
(अ) जापान (ब) अमेरिका (स) फ्रांस (द) ब्रिटेन
6. 18वीं शताब्दी के अन्त में विश्व व्यापार का सबसे बड़ा केन्द्र कौनसा था?
(अ) यूरोप (ब) एशिया (स) अफ्रीका (द) अमेरिका
7. 1885 में यूरोप के ताकतवर देशों ने किस महाद्वीप को नक्शे पर लकीरें खींच कर आपस में बांट लिया?
(अ) एशिया (ब) अमेरिका (स) अफ्रीका (द) अंटार्कटिका
8. भारत से विदेशों में ले जाये जाने वाले अनुबन्धित श्रमिक क्या कहलाते थे?
(अ) दास श्रमिक (ब) गिरमिटिया (स) फटफटिया (द) उपनिवेश श्रमिक
9. प्रसिद्ध ब्रेटन वुड्स नामक स्थान किस देश में है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)
(अ) अमेरिका (ब) इंग्लैण्ड (स) द. अफ्रीका (द) चीन
10. ब्रेटन वुड्स व्यवस्था पर सहमति बनी थी-
(अ) दिसम्बर, 1943 में (ब) जनवरी, 1944 में (स) मार्च, 1944 में (द) जुलाई, 1944 में
11. द्वितीय विश्व युद्ध में निम्न में से कौन-सा राष्ट्र धुरी शक्तियों में सम्मिलित नहीं था? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)
(अ) नाज़ी जर्मनी (ब) जापान (स) ब्रिटेन (द) इटली
12. प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत कब हुई? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)
(अ) 1914 (ब) 1918 (स) 1929 (द) 1939
13. समूह-77 (G-77) में कौनसे देश संगठित हैं?
(अ) विकासशील (ब) विकसित (स) अत्यन्त पिछड़े (द) उच्च विकसित
14. ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में किस संस्था की स्थापना की गई? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2021-22)
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(अ) यूनिसेफ (ब) अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष
(स) विश्व स्वास्थ्य संगठन (द) यूनेस्को
15. भूमण्डलीकृत विश्व बनने की प्रक्रिया में एक देश से दूसरे देशों में आवाजाही की प्रक्रिया बढ़ती है-
(अ) श्रम की (ब) पूँजी की
(स) व्यापार की (द) उपर्युक्त सभी
16. प्राचीन काल से ही लोग जिस कारण से दूर-दूर की यात्राओं पर जाते थे, वह था-
(अ) व्यापार हेतु (ब) ज्ञान और आध्यात्मिक शांति हेतु
(स) उत्पीड़न या यातनापूर्ण जीवन से बचने के लिए (द) उपर्युक्त सभी
17. अर्थशास्त्रियों ने अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक विनिमय में कितने प्रकार के प्रवाहों का उल्लेख किया है?
(अ) तीन प्रकार के (ब) दो प्रकार के (स) चार प्रकार के (द) पाँच प्रकार के
18. 19वीं सदी में विश्व व्यापार में चीन की घटती भूमिका और अमेरिका के बढ़ते महत्त्व के कारण विश्व व्यापार का केन्द्र बन गया-
(अ) एशिया (ब) अफ्रीका (स) यूरोप (द) आस्ट्रेलिया
19. 18वीं सदी तक जिन दो देशों को दुनिया के सबसे धनी देशों में गिना जाता था, वे थे-
(अ) उत्तरी-अमेरिका और कनाडा (ब) फ्रांस और ब्रिटेन
(स) जर्मनी और इटली (द) भारत और चीन
20. ब्रिटेन की सरकार ने किसके दबाव में 'कॉर्न लॉ' को समाप्त किया-
(अ) भूस्वामियों के (ब) उद्योगपतियों व शहरी निवासियों के
(स) ग्रामीण निवासियों के (द) श्रमिकों के
21. 1820 से 1914 के बीच होने वाले कुल विश्व व्यापार का कितने प्रतिशत हिस्सा प्राथमिक उत्पादों (गेहूँ, कपास तथा कोयला) का था?
(अ) 20 प्रतिशत (ब) 40 प्रतिशत (स) 60 प्रतिशत (द) 10 प्रतिशत
22. 1890 के दशक में जिस महाद्वीप में मवेशी प्लेग (रिंडरपेस्ट) नामक बीमारी बहुत तेजी से फैली, वह महाद्वीप है-
(अ) एशिया (ब) अफ्रीका (स) यूरोप (द) अमेरिका
23. भारतीय श्रमिकों को अनुबंध के तहत दूसरे देशों को ले जाने की प्रथा को खत्म कर दिया गया-
(अ) 1911 में (ब) 1901 में (स) 1921 में (द) 1931 में
24. प्रथम विश्व युद्ध से पहले दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी-
(अ) फ्रांस की अर्थव्यवस्था (ब) जर्मनी की अर्थव्यवस्था
(स) अमेरिका की अर्थव्यवस्था (द) ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था
25. विभिन्न देशों के बीच परस्पर सम्बन्धों और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया है-
(अ) उदारीकरण (ब) निजीकरण (स) राष्ट्रीयकरण (द) वैश्वीकरण
26. जमीन को उपजाऊ बनाकर गेहूँ और कपास की खेती हेतु 'केनाल कॉलोनी' बसाई गयी-
(अ) हरियाणा में (ब) उत्तर प्रदेश में (स) गुजरात में (द) पंजाब में
27. विश्व बैंक और आई.एम.एफ. ने औपचारिक रूप से काम करना शुरू किया-
(अ) 1944 में (ब) 1945 में (स) 1946 में (द) 1947 में
28. द्वितीय विश्वयुद्ध कितने वर्षों तक चला था? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)
(अ) दो (ब) चार (स) छह (द) आठ
29. कैरीबियाई द्वीप समूह में शामिल नहीं है- (प्रश्न बैंक)
(अ) त्रिनिदाद (ब) गुयाना (स) सूरीनाम (द) आयरलैण्ड
30. अमेरिका की खोज किसने की? (प्रश्न बैंक)
(अ) वास्कोडिगामा (ब) अल्बुकर्क (स) कोलम्बस (द) डूपले
31. हेनरी मॉर्टन स्टेनली कौन थे? (प्रश्न बैंक)
(अ) पत्रकार व खोजी (ब) इंजीनियर (स) डॉक्टर (द) वैज्ञानिक
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सामाजिक विज्ञान (इतिहास) कक्षा X | 71
32. बर्लिन सम्मेलन कब हुआ, जिसमें अफ्रीका के विभाजन का नक्शा तैयार हुआ? (प्रश्न बैंक)
(अ) 1885 (ब) 1858 (स) 1862 (द) 1898
33. 19वीं शताब्दी में आये परिवर्तनों का आधार है- (प्रश्न बैंक)
(अ) रेल्वे (ब) भाप के जहाज (स) टेलीग्राफ (द) उपर्युक्त सभी
34. प्रथम विश्व युद्ध (1914) में मित्र राष्ट्रों के खेमे में कौन-सा राष्ट्र शामिल नहीं था- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)
(अ) ब्रिटेन (ब) फ्रांस (स) जर्मनी (द) रूस
उत्तरमाला
1. (द) 2. (अ) 3. (द) 4. (ब) 5. (ब) 6. (अ) 7. (स)
8. (ब) 9. (अ) 10. (द) 11. (स) 12. (अ) 13. (अ) 14. (ब)
15. (द) 16. (द) 17. (अ) 18. (स) 19. (द) 20. (ब) 21. (स)
22. (ब) 23. (स) 24. (द) 25. (द) 26. (द) 27. (द) 28. (स)
29. (द) 30. (स) 31. (अ) 32. (अ) 33. (द) 34. (स)।
● रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
1. आधुनिक काल से पहले के युग में दुनिया के दूर-दूर स्थित भागों के बीच व्यापारिक और सांस्कृतिक संपर्कों का सबसे जीवंत उदाहरण .......... है।
2. उन्नीसवीं सदी में यूरोप के लगभग पाँच करोड़ लोग अमेरिका और ............ में जाकर बस गये।
3. .......... का निर्यात तभी संभव हो पाया जब जहाजों को ठंडा रखने की व्यवस्था कर ली गई थी। (प्रश्न बैंक)
4. उन्नीसवीं सदी की मजदूरों की अनुबंध व्यवस्था को बहुत सारे लोगों ने .......... का भी नाम दिया।
5. वर्ष .......... में विश्वव्यापी महामंदी अपने चरम पर थी। (प्रश्न बैंक)
6. अफ्रीका में .......... नामक बीमारी सबसे पहले 1880 के दशक के आखिरी सालों में दिखाई दी। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)
7. प्रथम विश्व युद्ध मित्र राष्ट्रों और .......... के बीच लड़ा गया था।
8. द्वितीय विश्व युद्ध मित्र राष्ट्रों और .......... शक्तियों के बीच लड़ा गया।
9. प्रथम महायुद्ध मुख्य रूप से .......... महाद्वीप में ही लड़ा गया। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)
10. 18वीं सदी में मक्का के आयात पर लगी पाबन्दी को ................ के नाम से जाना जाता है।
11. अफ्रीका में 1890 के दशक में ................ नामक बीमारी बहुत तेजी से फैल गई। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)
12. भारत से विदेशों को भेजे जाने वाले श्रमिक ................ नाम से जाने जाते थे। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022-23)
13. प्रथम विश्व युद्ध सन् ................ ई. में प्रारम्भ हुआ। (प्रश्न बैंक)
उत्तरमाला
1. सिल्क मार्ग 2. ऑस्ट्रेलिया 3. मांस 4. नयी दास प्रथा 5. 1931
6. रिंडरपेस्ट 7. केन्द्रीय शक्तियों 8. धुरी 9. यूरोप 10. कॉर्न लॉ
11. रिंडरपेस्ट 12. गिरमिटिया 13. 1914
● अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. प्रथम विश्व युद्ध कौनसे दो गुटों के बीच लड़ा गया था? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— प्रथम विश्व युद्ध मित्र राष्ट्रों और केन्द्रीय शक्तियों के बीच लड़ा गया था।
प्रश्न 2. प्रथम विश्व युद्ध के दोनों गुटों में कौन-कौन से देश शामिल थे?
उत्तर— मित्र राष्ट्रों में-ब्रिटेन, फ्रांस और रूस थे तथा केन्द्रीय शक्तियों में जर्मनी, आस्ट्रिया-हंगरी और ओटोमन तुर्की शामिल थे।
प्रश्न 3. "प्रथम विश्व युद्ध पहला आधुनिक औद्योगिक युद्ध था।" कोई एक कारण लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)
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उत्तर—प्रथम विश्व युद्ध पहला आधुनिक औद्योगिक युद्ध था क्योंकि इसमें विश्व के सबसे अग्रणी औद्योगिक राष्ट्र परस्पर संघर्षरत थे।
प्रश्न 4. 18वीं शताब्दी तक कौन से दो देशों की गिनती दुनिया के धनी देशों में होती थी?
उत्तर— भारत तथा चीन।
प्रश्न 5. 19वीं शताब्दी में यूरोप में लोग किन महाद्वीपों में जाकर बसे?
उत्तर— अमेरिका एवं ऑस्ट्रेलिया महाद्वीपों में।
प्रश्न 6. प्रथम विश्व युद्ध के बाद विश्व को किस आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा?
उत्तर— आर्थिक महामंदी का।
प्रश्न 7. यूरोपीय देशों ने अफ्रीका के बंटवारे के लिए कहाँ बैठक आयोजित की और कब की?
उत्तर— (1) बर्लिन में (2) 1885 में।
प्रश्न 8. भारत से विदेशों में निर्यात की जाने वाली दो वस्तुओं के नाम बताओ। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— (1) कपास (2) नील।
प्रश्न 9. आर्थिक महामंदी की शुरुआत कब से हुई और यह संकट कब तक बना रहा? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— आर्थिक महामंदी की शुरुआत 1929 से हुई तथा यह संकट 1930 के दशक के मध्य तक बना रहा।
प्रश्न 10. द्वितीय विश्वयुद्ध में शामिल होने वाली धुरी शक्तियाँ कौनसी थीं?
उत्तर— (1) जर्मनी (2) जापान (3) इटली।
प्रश्न 11. द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद किन दो महाशक्तियों का उदय हुआ? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— (1) संयुक्त राज्य अमेरिका (2) सोवियत संघ।
प्रश्न 12. वैश्वीकरण की प्रक्रिया में मुख्यतः कितने प्रवाह हैं?
अथवा
भूमंडलीकृत विश्व के बनने की प्रक्रिया में सहायक तत्वों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर— भूमंडलीकृत विश्व के बनने की प्रक्रिया में सहायक तत्व हैं-(1) व्यापार प्रवाह (2) श्रम प्रवाह और (3) पूँजी प्रवाह।
प्रश्न 13. वैश्वीकरण की प्रक्रिया को उत्प्रेरित करने वाला मुख्य कारक कौनसा है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)
उत्तर— वैश्वीकरण की प्रक्रिया को उत्प्रेरित करने वाला सबसे महत्त्वपूर्ण कारक परिवहन प्रौद्योगिकी की तीव्र उन्नति है।
प्रश्न 14. 'रेशम मार्ग' से क्या अभिप्राय है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— आधुनिक काल से पहले जिन मार्गों से चीनी रेशम पश्चिम के देशों में भेजा जाता था, वह रेशम मार्ग कहलाते हैं।
प्रश्न 15. रेशम मार्ग किन-किन क्षेत्रों को एक-दूसरे से जोड़ते थे?
उत्तर— (1) रेशम मार्ग एशिया के विशाल क्षेत्रों को एक-दूसरे से जोड़ते थे। (2) ये एशिया को यूरोप तथा उत्तरी अफ्रीका से भी जोड़ते थे।
प्रश्न 16. 1840 के दशक में यूरोप के किस देश में आलू की फसल खराब होने पर लाखों लोग भुखमरी के कारण मौत के मुँह में चले गए।
उत्तर— आयरलैंड में।
प्रश्न 17. किन कारणों से यूरोप के देशों से बड़ी संख्या में लोग अमेरिका पहुँचे?
उत्तर— 19वीं सदी तक यूरोप में गरीबी और भूख का साम्राज्य था। बेहिसाब भीड़ थी, बीमारियों का बोलबाला था, धार्मिक टकराव आम थे। इन कारणों से हजारों लोग यूरोप से अमेरिका पहुँचे।
प्रश्न 18. कॉर्न लॉ क्या था?
उत्तर— ब्रिटिश सरकार ने जिन कानूनों के सहारे मक्का के आयात पर पाबन्दी लगा दी थी, उन्हें 'कॉर्न लॉ' कहा जाता था।
प्रश्न 19. 'केनाल कॉलोनी' से आप क्या समझते हैं?
उत्तर— ब्रिटिशकाल में नई नहरों की सिंचाई वाले क्षेत्रों में पंजाब में बसी अन्य स्थानों के लोगों की बस्तियों को 'केनाल कॉलोनी' कहा जाता था।
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सामाजिक विज्ञान (इतिहास) कक्षा X 73
प्रश्न 20. रिंडरपेस्ट के बारे में आप क्या जानते हैं?
अथवा
रिंडरपेस्ट क्या है? (प्रश्न बैंक)
अथवा
किस बीमारी ने 1890 के दशक में 90 प्रतिशत मवेशियों को मौत की नींद सुला दिया? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)
अथवा
अफ्रीका में 1890 के दशक में कौनसी बीमारी तेजी से फैली? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)
उत्तर— अफ्रीका में 1890 के दशक में मवेशियों में प्लेग की तरह फैलने वाली बीमारी को रिंडरपेस्ट के नाम से जाना जाता है। इससे अफ्रीका में लगभग 90 प्रतिशत पशु मौत के मुँह में चले गए।
प्रश्न 21. 'होसे' से आप क्या समझते हैं?
उत्तर— त्रिनिदाद में मुहर्रम के वार्षिक जुलूस को एक विशाल उत्सवी मेले का रूप दिया गया। इस मेले को 'होसे' कहा जाता है।
प्रश्न 22. 'चटनी म्यूजिक' कहाँ प्रसिद्ध था?
उत्तर— त्रिनिदाद और गुयाना में 'चटनी म्यूजिक' बड़ा लोकप्रिय था।
प्रश्न 23. शिकारीपुरी श्रॉफ तथा नट्टुकोट्टई चेट्टियार कौन थे?
उत्तर— शिकारीपुरी श्रॉफ तथा नट्टुकोट्टई चेट्टियार विदेशों में भारतीय उद्यमी थे। ये मध्य एवं दक्षिण-पूर्वी एशिया में निर्यातोनमुखी खेती के लिए ऋण देते थे।
प्रश्न 24. क्रिस्टोफर कोलम्बस गलती से किस अज्ञात महाद्वीप में पहुँचा था?
उत्तर— अमेरिका।
प्रश्न 25. हेनरी फोर्ड ने कारों के उत्पादन के लिए कौनसी पद्धति अपनाई?
उत्तर— हेनरी फोर्ड ने कारों के उत्पादन के लिए असेम्बली लाइन की पद्धति अपनाई।
प्रश्न 26. 'हायर-परचेज' व्यवस्था क्या थी?
उत्तर— 'हायर-परचेज' व्यवस्था में अमेरिकी लोग कार आदि चीजें कर्ज पर खरीदते थे और उनका मूल्य किस्तों में चुकाते थे।
प्रश्न 27. विश्वव्यापी आर्थिक महामन्दी से आप क्या समझते हैं?
उत्तर— समस्त विश्व के देशों में व्याप्त आर्थिक मंदी को विश्वव्यापी आर्थिक महामन्दी कहा जाता है। ऐसी आर्थिक मंदी 1929 से 1934 के काल में रही।
प्रश्न 28. विश्वव्यापी आर्थिक मन्दी का भारत पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर— विश्वव्यापी आर्थिक मन्दी के फलस्वरूप 1928 से 1934 के बीच भारत के आयात-निर्यात घटकर लगभग आधे रह गए थे।
प्रश्न 29. विश्व बैंक की स्थापना कब और क्यों की गई? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— युद्धोत्तर पुनर्निर्माण के लिए धन की व्यवस्था करने हेतु 1944 के ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में विश्व बैंक की स्थापना की गई।
प्रश्न 30. 'ब्रेटन वुड्स व्यवस्था' से क्या अभिप्राय है?
उत्तर— युद्धोत्तर अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक बंदोबस्त की व्यवस्था को 'ब्रेटन वुड्स व्यवस्था' भी कहा जाता है।
प्रश्न 31. 'ब्रेटन वुड्स संस्थान' या ब्रेटन वुड्स की जुड़वाँ संतान किसे कहा जाता है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— विश्व बैंक और अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष को 'ब्रेटन वुड्स की जुड़वाँ सन्तान' अथवा ब्रेटन वुड्स संस्थान कहा जाता है।
प्रश्न 32. अन्तर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक को अन्य किस नाम से जाना जाता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)
उत्तर— विश्व बैंक के नाम से।
प्रश्न 33. 19वीं शताब्दी में बढ़ते व्यापार और बाजार का एक नकारात्मक परिणाम लिखिए।
उत्तर— दुनिया के बहुत सारे भागों में स्वतंत्रता और आजीविका के साधनों का छिनना।
प्रश्न 34. अधिकांश अफ्रीकी देशों की सीमाएँ बिल्कुल सीधी लकीर जैसी क्यों हैं?
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उत्तर—क्योंकि यूरोप के ताकतवर देशों ने 1885 में बर्लिन में एक बैठक में अफ्रीका के नक्शे पर इसी तरह की लकीरें खींचकर उसे आपस में बाँट लिया था।
प्रश्न 35. स्पेनियों द्वारा अमेरिका की विजय में कौनसा तत्व सबसे अधिक सहायक सिद्ध हुआ?
उत्तर—स्पेनिश सैनिकों के साथ चेचक के कीटाणु अमेरिका जा पहुँचे जिसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर अमेरिकी लोग मारे गए। इससे स्पेन का अमेरिका पर अधिकार हो गया।
प्रश्न 36. अफ्रीका में अपने उपनिवेश स्थापित करने वाले चार प्रमुख देशों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर—(1) ब्रिटेन (2) फ्रांस (3) बेल्जियम (4) जर्मनी।
प्रश्न 37. भारतीय अनुबन्धित श्रमिकों को मुख्य रूप से किन देशों में ले जाया जाता था?
उत्तर—भारतीय अनुबन्धित श्रमिकों को मुख्य रूप से कैरीबियन द्वीप समूह (मुख्यतः त्रिनिदाद, गुयाना और सूरीनाम), मारिशस तथा फिजी ले जाया जाता था।
प्रश्न 38. 1920 के दशक की अमेरिकी अर्थव्यवस्था की क्या बड़ी विशेषता थी?
उत्तर—1920 के दशक की अमेरिकी अर्थव्यवस्था की एक प्रमुख विशेषता वृहत् उत्पादन के चयन की थी।
प्रश्न 39. हेनरी फोर्ड कौन थे?
उत्तर—हेनरी फोर्ड अमेरिका के एक प्रसिद्ध उद्योगपति तथा कार निर्माता थे। वह अमेरिका के वृहत् उत्पादन के विख्यात प्रणेता थे।
प्रश्न 40. विश्वव्यापी आर्थिक मन्दी का सबसे बुरा प्रभाव किस देश पर पड़ा?
उत्तर—विश्वव्यापी आर्थिक मन्दी का सबसे बुरा प्रभाव अमेरिका पर पड़ा।
प्रश्न 41. विश्वव्यापी आर्थिक मन्दी के अमेरिका पर पड़े दो प्रभाव बताइए।
उत्तर—(1) अमेरिका के हजारों बैंक दिवालिया हो गए और बन्द कर दिये गये। (2) व्यापार चौपट हो गया और बेरोजगारी फैल गई।
प्रश्न 42. 'जी-77' से क्या अभिप्राय है?
उत्तर—विकासशील देशों ने एक नई अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली स्थापित करने के लिए एक समूह का गठन किया, जिसे 'जी-77' कहते हैं।
प्रश्न 43. संयुक्त राष्ट्र मौद्रिक एवं वित्तीय सम्मेलन कहाँ आयोजित किया गया और कब किया गया?
उत्तर—संयुक्त राष्ट्र मौद्रिक एवं वित्तीय सम्मेलन अमेरिका में स्थित न्यू हैम्पशर के ब्रेटन वुड्स नामक स्थान पर जुलाई, 1944 में आयोजित किया गया।
प्रश्न 44. ब्रेटन वुड्स सम्मेलन किस देश में आयोजित हुआ? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025, 2022)
उत्तर—संयुक्त राज्य अमेरिका में।
प्रश्न 45. वीटो (निषेधाधिकार) किसे कहते हैं? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)
उत्तर—वीटो (निषेधाधिकार) वह अधिकार है जिसके सहारे एक सदस्य की भी असहमति किसी भी प्रस्ताव को खारिज करने का आधार बन जाती है।
प्रश्न 46. विनिमय दर कितने प्रकार की होती है?
उत्तर—विनिमय दर दो प्रकार की होती है-(i) स्थिर विनिमय दर और (ii) परिवर्तनशील विनिमय दर।
● लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. रेशम मार्ग के बारे में आप क्या जानते हैं? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)
अथवा
रेशम मार्ग से किन-किन वस्तुओं का व्यापार होता था? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)
उत्तर—आधुनिक काल से पहले जिन मार्गों से चीनी रेशम पश्चिम के देशों को भेजा जाता था, वह रेशम मार्ग कहलाता है। रेशम मार्ग से अनेक वस्तुओं का व्यापार होता था। इस मार्ग से चीनी रेशम तथा पोटरी; भारत व दक्षिण-पूर्व एशिया से कपड़े तथा मसाले विश्व के दूसरे भागों में पहुँचते थे। वापसी में सोना-चाँदी जैसी बहुमूल्य धातुएँ इसी मार्ग से यूरोप से एशिया पहुँचती थीं। रेशम मार्ग द्वारा व्यापार के साथ-साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी होता था।
प्रश्न 2. "हमारे खाद्य पदार्थ दूर देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान के कई उदाहरण पेश करते हैं।" व्याख्या कीजिए।
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सामाजिक विज्ञान (इतिहास) कक्षा X 75
अथवा
"खाद्य पदार्थों ने दूर देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया।" इस कथन के दो उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर—व्यापारी और यात्री किसी नये देश में पहुँचने पर जाने-अनजाने वहाँ नई फसलों के बीज बो आते थे। उदाहरणार्थ, झटपट तैयार होने वाले खाद्य पदार्थों में नूडल्स चीन से पश्चिमी देशों में पहुँचे और वहाँ उन्हीं से स्पैघेत्ती का जन्म हुआ। इसी प्रकार पास्ता अरब यात्रियों के साथ पाँचवीं सदी में सिसली पहुँचा। आलू, सोया, मूँगफली, मक्का आदि अमेरिकन इंडियन से हमारे पास आए हैं।
प्रश्न 3. 18वीं सदी के आखिरी दशक में ब्रिटेन की तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या के किन्हीं तीन प्रभावों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर—18वीं सदी के आखिरी दशक में ब्रिटेन की तेजी से बढ़ती जनसंख्या के निम्नलिखित तीन प्रभाव हुए-
(i) देश में भोजन की माँग बढ़ी।
(ii) जैसे-जैसे शहर फैले और उद्योग बढ़ने लगे, कृषि उत्पादों की माँग भी बढ़ी।
(iii) माँग बढ़ने से कृषि उत्पाद महँगे हो गए।
प्रश्न 4. अमेरिका में यूरोप व अफ्रीकी देशों से लोगों के आने के क्या कारण थे?
उत्तर—(1) उन्नीसवीं सदी तक यूरोप में गरीबी और भुखमरी फैली हुई थी।
(2) यूरोपीय देशों के शहरों में अत्यधिक भीड़ थी और वहाँ अनेक बीमारियाँ फैली हुई थीं।
(3) धार्मिक अत्याचारों से बचने के लिए हजारों लोग यूरोप से भागकर अमेरिका गए।
(4) कृषि-कार्य के लिए अफ्रीका से गुलामों को पकड़कर अमेरिका लाया गया।
प्रश्न 5. अमेरिका में विश्व के विभिन्न देशों से लोगों के आने का क्या कारण था? (प्रश्न बैंक)
उत्तर—अमेरिका में दुनिया के अलग-अलग देशों से लोगों के आने के कई कारण थे-
(i) विभिन्न देशों में गरीबी, भूख, बीमारियाँ और धार्मिक टकराव आम थे।
(ii) धार्मिक असंतुष्टों को कड़ी सजा दी जाती थी।
(iii) अमेरिका में इंग्लैंड की पराधीनता खत्म हो गई थी, अतः वहाँ उच्च जीवन स्तर और सुविधाएँ थीं।
(iv) अमेरिका में विशाल उपजाऊ भूमि, खनिज संसाधन और उन्नत फसलें थीं।
(v) अमेरिका में ऊर्जा के भण्डार थे एवं व्यापारिक गतिविधियाँ भी तेज थीं।
प्रश्न 6. 'नई अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली' से क्या आशय था?
उत्तर—नई अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली से अभिप्राय ऐसी व्यवस्था से था जिसमें अपने संसाधनों पर वास्तविक अर्थों में नियन्त्रण मिल सके, जिसमें विकास के लिए अधिक सहायता मिल सके। कच्चे माल के सही दाम मिलें और अपने तैयार सामानों को विकसित देशों के बाजारों में बेचने के लिए उचित पहुँच मिले।
प्रश्न 7. अमेरिकी लोगों में रोग-प्रतिरोधी क्षमता के अभाव ने किस प्रकार यूरोपीय घुसपैठियों की जीत का रास्ता प्रशस्त किया?
उत्तर—यूरोपीय सैनिकों के साथ अमेरिका में चेचक के कीटाणु भी पहुँच गए। अमरीकी लोगों में यूरोप से आने वाली इन बीमारियों से बचने की रोग-प्रतिरोधी क्षमता नहीं थी। परिणामस्वरूप चेचक की महामारी फैलने से बहुत बड़ी संख्या में अमेरिकी लोग मारे गए और इस प्रकार अमेरिकी लोगों में रोग-प्रतिरोधी क्षमता के अभाव ने यूरोपीय घुसपैठियों की जीत का रास्ता प्रशस्त किया।
प्रश्न 8. कॉर्न लॉ क्या था? उसे क्यों समाप्त किया गया? उसकी समाप्ति के क्या परिणाम हुए?
उत्तर—कॉर्न लॉ-18वीं सदी में बड़े भूस्वामियों के दबाव में ब्रिटिश सरकार ने मक्का के आयात पर भी पाबंदी लगा दी थी। जिन कानूनों के सहारे सरकार ने यह पाबंदी लागू की थी, उन्हें 'कॉर्न लॉ' कहा जाता था। 18वीं सदी के आखिरी दशक में खाद्य पदार्थों की ऊँची कीमतों से परेशान उद्योगपतियों और शहरी वाशिंदों ने सरकार को मजबूर कर दिया कि वह कॉर्न लॉ को फौरन समाप्त कर दे और ब्रिटिश सरकार ने उसे समाप्त कर दिया। कॉर्न लॉ के समाप्त होने पर खाद्य पदार्थ की कीमतों में कमी आ गई तथा ब्रिटेन की खाद्य समस्या दूर हो गई।
प्रश्न 9. 'केनाल कॉलोनी' से क्या अभिप्राय है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर—पंजाब में ब्रिटिश भारतीय सरकार ने अर्द्ध-रेगिस्तानी परती जमीनों को उपजाऊ बनाने के लिए नहरों का जाल बिछा दिया ताकि निर्यात के लिए गेहूँ और कपास की खेती की जा सके। नई नहरों की सिंचाई वाले क्षेत्रों में पंजाब के अन्य स्थानों से लोगों को लाकर बसाया गया। उनकी बस्तियों को 'केनाल कॉलोनी' कहा जाता था।
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प्रश्न 10. 'रेंडरपेस्ट' का 1890 के दशक में अफ्रीका के लोगों की आजीविका और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़े प्रभावों का वर्णन कीजिए।
अथवा
रेंडरपेस्ट बीमारी का अफ्रीका पर क्या प्रभाव पड़ा? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— (1) 1890 के दशक में अफ्रीका में रेंडरपेस्ट नामक बीमारी फैल गई। मवेशियों में प्लेग की भाँति फैलने वाली इस बीमारी से लोगों की आजीविका और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर घातक प्रभाव पड़ा।
(2) इस बीमारी से अफ्रीका के 90 प्रतिशत पशु मर गए।
(3) पशुओं के मर जाने से अफ्रीकी लोगों के रोजी-रोटी के साधन समाप्त हो गए। इसके परिणामस्वरूप सम्पूर्ण अफ्रीका धीरे-धीरे यूरोपीय उपनिवेशकारों का गुलाम हो गया।
प्रश्न 11. "गिरमिटिया मजदूरों ने कैरीबियन क्षेत्र में एक नई संस्कृति को जन्म दिया।" इस कथन को दो उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर— गिरमिटिया अनुबंधित मजदूरों ने अपनी पुरानी और नई संस्कृतियों का सम्मिश्रण करते हुए एक नई संस्कृति को जन्म दिया। उदाहरण के लिए-
(i) त्रिनिदाद में मुहर्रम के वार्षिक जुलूस को होसे नामक विशाल मेले का रूप दे दिया गया।
(ii) त्रिनिदाद और गुयाना में प्रसिद्ध चटनी म्यूजिक भी भारतीय आप्रवासियों के वहाँ पहुँचने के बाद सामने आया।
प्रश्न 12. 19वीं सदी की अनुबन्ध व्यवस्था को 'नई दास प्रथा' का नाम क्यों दिया गया?
उत्तर— 19वीं सदी की अनुबन्ध व्यवस्था में अप्रवासी अनुबंधित श्रमिकों को बहुत कम कानूनी अधिकार दिए गए थे। उनको रहने व कार्य करने की कठोर परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था। वे वहाँ से भयभीत होकर यदि जंगलों में भाग जाते तो उन्हें पकड़कर कठोर दण्ड दिया जाता था। यही कारण है कि 19वीं सदी की अनुबंध व्यवस्था को 'नई दास प्रथा' का नाम दिया गया।
प्रश्न 13. ब्रिटेन के व्यापार से प्राप्त होने वाले अधिशेष से किन होम चार्जेज का निपटारा होता था?
उत्तर— ब्रिटेन के व्यापार से प्राप्त होने वाले अधिशेष से होम चार्जेज का निपटारा होता था। इनके अन्तर्गत ब्रिटिश अधिकारियों और व्यापारियों द्वारा अपने घर में भेजी गई राशि, भारतीय बाहरी कर्जे पर ब्याज और भारत में काम कर चुके ब्रिटिश अधिकारियों की पेंशन शामिल थी।
प्रश्न 14. प्रथम विश्व युद्ध किन दो खेमों के बीच लड़ा गया था? इन खेमों में कौन-कौनसे देश शामिल थे? यह युद्ध कितने वर्षों तक चला?
उत्तर— (1) प्रथम विश्व युद्ध दो खेमों-(i) मित्र राष्ट्र एवं (ii) केन्द्रीय शक्तियों के बीच लड़ा गया था।
(2) मित्र राष्ट्र में-ब्रिटेन, फ्रांस और रूस तथा केन्द्रीय शक्तियों में-जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी तथा ऑटोमन तुर्की शामिल थे।
(3) यह युद्ध 1914 में शुरू हुआ और चार साल से भी ज्यादा समय तक चला।
प्रश्न 15. 1929 की महामंदी के कोई दो कारणों की व्याख्या कीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)
उत्तर— (1) पहला कारण यह था कि कृषि क्षेत्र में अतित्पादन की समस्या बनी हुई थी। आमदनी बढ़ाने के लिए किसानों ने उत्पादन बढ़ाया जिससे बाजार में कृषि उत्पादों की आमद बढ़ी। इस कारण कीमतें और नीचे चली गईं।
(2) दूसरा मुख्य कारण यह कि अमेरिकी पूँजीपतियों ने कर्जे देने कम कर दिए, जिससे दुनियाभर के देशों पर बुरा असर पड़ा। सामान्य स्थिति में विभिन्न देश अमेरिका से कर्जे लेकर अपनी जरूरतें पूरी करते थे, लेकिन संकट का संकेत मिलने पर यह व्यवस्था बंद-सी हो गई।
प्रश्न 16. 'असेंबली लाइन' क्या थी? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— अमेरिका के प्रसिद्ध उद्योगपति और कार-निर्माता हेनरी फोर्ड ने कारों के उत्पादन के लिए जिस पद्धति को अपनाया, उसे 'असेंबली लाइन' कहते हैं। असेंबली लाइन पर मजदूरों को एक ही काम जैसे कार के किसी विशेष पुर्जे को ही लगाते रहना, मशीनी ढंग से बार-बार करते रहना होता था। इस पद्धति में हर तीन मिनट में एक कार तैयार हो जाती थी।
प्रश्न 17. विश्वव्यापी आर्थिक मंदी के भारत पर क्या प्रभाव पड़े?
उत्तर— विश्वव्यापी आर्थिक मंदी के भारत पर प्रभाव-(1) 1928 से 1934 के बीच भारत के आयात-निर्यात घट कर लगभग आधे रह गए।
--- [ पृष्ठ संख्या: 84 ] ---
सामाजिक विज्ञान (इतिहास) कक्षा X 77
(2) भारत में गेहूँ की कीमत 50 प्रतिशत गिर गई।
(3) कच्चे पटसन की कीमतों में भारी गिरावट से किसानों की दशा दयनीय हो गई। वे कर्ज में डूब गए और उनके लिए जीवन-निर्वाह करना भी कठिन हो गया।
प्रश्न 18. भारतीय कृषक वैश्विक आर्थिक महामंदी से किस प्रकार प्रभावित हुए?
उत्तर— भारतीय कृषक वैश्विक आर्थिक महामंदी से निम्न प्रकार प्रभावित हुए-
(i) कृषि उत्पादों की कीमतों में तेजी से कमी आई लेकिन सरकार ने लगान वसूली में छूट नहीं दी। इससे किसान कर्ज में डूब गए।
(ii) कच्चे पटसन की कीमतों में भारी गिरावट आने से किसान बुरी तरह प्रभावित हुए।
(iii) किसानों के कर्ज में डूब जाने से उनके सोने-चाँदी के आभूषण बिक गए तथा जमीन सूदखोरों के पास गिरवी रख दी गई।
प्रश्न 19. 19वीं सदी में भारत के कपड़ा निर्यात में कमी क्यों आने लगी? किन्हीं तीन कारणों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर— 19वीं सदी में निम्न कारणों से भारत के कपड़ा निर्यात में कमी आयी-
(i) ब्रिटेन में आयातित कपड़ों पर सीमा शुल्क थोप दिए गए। वहाँ महीन भारतीय कपास का आयात कम होने लगा।
(ii) ब्रिटिश कपड़ा उत्पादक दूसरे देशों में भी अपने कपड़ों के लिए नये-नये बाजार ढूँढने लगे।
(iii) ब्रिटिश बाजारों से बेदखल हो जाने के बाद भारतीय कपड़ों को दूसरे अन्तर्राष्ट्रीय बाजारों में भी भारी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा।
प्रश्न 20. आयात शुल्क क्या है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)
अथवा
आयात शुल्क किसे कहते हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— आयात शुल्क-किसी दूसरे देश से आने वाली चीजों पर वसूल किया जाने वाला शुल्क, आयात शुल्क कहलाता है। यह शुल्क या कर उस जगह लिया जाता है जहाँ से वह चीज देश में आती है यानी सीमा पर, बंदरगाह या हवाई अड्डे पर।
प्रश्न 21. उन्नीसवीं शताब्दी की विश्व अर्थव्यवस्था को समझने के लिए किन गतियों अथवा प्रवाहों का अध्ययन करना आवश्यक है?
उत्तर— उन्नीसवीं शताब्दी की विश्व अर्थव्यवस्था को समझने के लिए निम्नलिखित गतियों अथवा प्रवाहों का अध्ययन करना आवश्यक है-
(1) व्यापार का प्रवाह-उन्नीसवीं शताब्दी में व्यापार मुख्य रूप से कपड़ा, गेहूँ आदि वस्तुओं तक ही सीमित था।
(2) श्रम का प्रवाह-इसके अन्तर्गत लोग काम अथवा रोजगार की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान जाते हैं।
(3) पूँजी का प्रवाह-इसमें पूँजी का अल्प अवधि अथवा दीर्घ अवधि के लिए दूर-दूर के प्रदेशों में निवेश किया जाता है।
ये तीनों प्रकार के प्रवाह एक-दूसरे से जुड़े हुए थे और लोगों के जीवन को प्रभावित करते थे।
प्रश्न 22. विनिमय दर से क्या आशय है?
उत्तर— विनिमय दर व्यवस्था के माध्यम से अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की सुविधा हेतु विभिन्न देशों की राष्ट्रीय मुद्राओं को एक-दूसरे देशों से जोड़ा जाता था। मुख्य रूप से विनिमय दर के दो प्रकार हैं-स्थिर विनिमय दर तथा परिवर्तनशील विनिमय दर।
प्रश्न 23. वीटो या निषेधाधिकार से आप क्या समझते हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— वीटो या निषेधाधिकार एक विशेषाधिकार है जो किसी संगठन, निर्णयकर्ता या आयोग को किसी निर्णय या प्रस्ताव को अस्वीकार करने की अनुमति देता है। यह विशेषाधिकार सामाजिक, राजनीतिक या आर्थिक आधार पर प्रयोग किया जाता है ताकि किसी विशेष निर्णय को रोका या प्रभावित किया जा सके। उदाहरण-अमेरिका विश्व बैंक और आई.एम.एफ. के किसी भी फैसले को 'वीटो' कर सकता है।
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● दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-
प्रश्न 1. प्रथम विश्व युद्ध के परिणामों की विवेचना कीजिए। (प्रश्न बैंक)
अथवा
प्रथम विश्व युद्ध के कोई दो परिणाम बताइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)
उत्तर—प्रथम विश्व युद्ध के परिणाम—
(1) प्रथम विश्व युद्ध में धन-जन की भीषण हानि हुई। इस युद्ध में 90 लाख से अधिक लोग मारे गए तथा 2 करोड़ घायल हुए। मृतकों और घायलों में ज्यादातर काम-काजी उम्र के लोग थे।
(2) युद्ध में हुए महाविनाश के कारण यूरोप में कामकाजी आयु के योग्य लोगों की संख्या बहुत कम रह गई। परिवार के सदस्यों की संख्या कम हो जाने के बाद परिवारों की आय भी कम हो गई।
(3) पुरुषों के युद्ध के मोर्चों पर जाने के कारण, उनके कार्यों को सम्भालने के लिए महिलाओं को घर छोड़कर बाहर आना पड़ा।
(4) प्रथम विश्वयुद्ध के कारण विश्व की कुछ सबसे शक्तिशाली आर्थिक शक्तियों के बीच आर्थिक सम्बन्ध टूट गए। अब वे देश एक-दूसरे से बदला लेने पर उतारू थे।
(5) प्रथम विश्व युद्ध के लिए ब्रिटेन आदि अनेक देशों को अमेरिकी बैंकों और अमेरिकी जनता से भारी ऋण लेना पड़ा। परिणामस्वरूप इस युद्ध ने अमेरिका को ऋणी के बजाय ऋणदाता बना दिया।
प्रश्न 2. सिल्क रूट क्या है? इसका महत्त्व बताइए। (प्रश्न बैंक)
अथवा
रेशम मार्ग के द्वारा होने वाले आर्थिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान का वर्णन कीजिए।
उत्तर—सिल्क रूट (रेशम मार्ग)— जमीन या समुद्र से होकर गुजरने वाले सिल्क रूट एशिया के विशाल क्षेत्रों (चीन, भारत) तथा एशिया को यूरोप और उत्तरी अफ्रीका से जोड़ने वाले व्यापारिक और सांस्कृतिक मार्ग थे। इनसे चीनी रेशम का व्यापार किया जाता था।
रेशम मार्ग का महत्त्व-आर्थिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान— रेशम मार्ग से पश्चिम को भेजे जाने वाले चीनी रेशम का बड़ा महत्त्व था। यथा-(i) रेशम मार्ग भूमि या समुद्र से होकर गुजरने वाले मार्ग थे जो एशिया के विशाल क्षेत्रों या एशिया को यूरोप और उत्तरी अफ्रीका से जोड़ते थे। (ii) रेशम मार्ग से चीनी रेशम तथा पोटरी तथा भारत व दक्षिण-पूर्व एशिया के कपड़े व मसाले विश्व के दूसरे भागों में पहुँचते थे। वापसी में सोना-चाँदी जैसी बहुमूल्य धातुएँ यूरोप से एशिया पहुँचती थीं। (iii) व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान, दोनों प्रक्रियाएँ साथ-साथ चलती थीं। इस्लाम धर्म के प्रचारक भी रेशम मार्ग से विश्व के अन्य देशों में गए। इससे पहले बौद्ध धर्म का रेशम मार्ग के द्वारा ही अनेक स्थानों पर प्रसार हुआ था।
प्रश्न 3. वैश्विक कृषि-व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं का विवेचन कीजिए।
उत्तर— 1890 तक एक वैश्विक कृषि-व्यवस्था स्थापित हो चुकी थी। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं-
(1) श्रम विस्थापन रुझानों, पूँजी प्रवाह, पारिस्थितिकी और तकनीक में गहरे परिवर्तन आए।
(2) अब भोजन हजारों मील दूर से भी आने लगा था।
(3) अब बाहर से आए ऐसे औद्योगिक मजदूर खेतों में काम कर रहे थे जो एक पीढ़ी पूर्व सम्भवतः जंगल में रहे होंगे।
(4) खाद्य पदार्थों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने के लिए रेलवे का प्रयोग किया जाता था।
(5) पानी के जहाजों से खाद्य पदार्थों को दूसरे देशों में पहुँचाया जाता था।
प्रश्न 4. यूरोप के लोग उन्नीसवीं शताब्दी में अफ्रीका महाद्वीप की तरफ क्यों आकर्षित हुए?
उत्तर— यूरोप के लोग उन्नीसवीं शताब्दी में अफ्रीका महाद्वीप की तरफ निम्न कारणों से आकर्षित हुए-
(1) अफ्रीका में जमीन की कोई कमी नहीं थी और वहां की आबादी कम थी। वहां खनिज भण्डार भी खूब थे। यूरोप के लोग इनका उपयोग करना चाहते थे।
(2) यूरोपीय लोग अफ्रीका में बागानी खेती करने और खनिजों का दोहन करना चाहते थे ताकि उन्हें पुनः यूरोप भेजा जा सके।
(3) ट्रांसवाल की सोने की खदानें भी अफ्रीका की तरफ आकर्षण का बहुत बड़ा कारण थीं। बीमारियों और मौत की आशंका एवं रास्ते की कठिनाइयों के बावजूद यूरोप के लोग उस इलाके की ओर भागने लगे।
प्रश्न 5. अफ्रीका में वेतन पर मजदूरों की भर्ती करके और उन्हें अपने पास रोके रखने के लिए यूरोपीय लोगों द्वारा अपनाये गए हथकंडों का वर्णन कीजिए।
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सामाजिक विज्ञान (इतिहास) कक्षा X | 79
उत्तर—अफ्रीकी लोग वेतन पर काम करने के लिए तैयार नहीं थे। अतः वहाँ मजदूरों की भर्ती करने तथा उन्हें अपने पास रोके रखने के लिए यूरोपीय लोगों ने निम्नलिखित हथकंडे अपनाये-
(1) उन पर भारी-भरकम कर लाद दिए गए। इन करों का भुगतान केवल तभी किया जा सकता था जब करदाता बागानों या खदानों में काम करता हो।
(2) नए उत्तराधिकार कानून में यह व्यवस्था की गई कि अब परिवार के केवल एक ही सदस्य को पैतृक सम्पत्ति प्राप्त होगी। इस कानून के द्वारा परिवार के अन्य सदस्यों को श्रम बाजार में ढकेलने का प्रयास किया जाने लगा।
(3) खानकर्मियों को बाड़ों में बंद कर दिया गया। उनके खुले आम घूमने-फिरने पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया।
प्रश्न 6. 19वीं सदी के दौरान भारत से अनुबन्धित प्रवासी श्रमिकों की स्थिति का वर्णन कीजिए।
उत्तर—19वीं सदी में भारत के लाखों मजदूरों को बागानों, खदानों और सड़क व रेलवे निर्माण परियोजनाओं में काम करने के लिए दूर-दूर के देशों में ले जाया जाता था। उन्हें एक खास तरह के अनुबन्ध के तहत ले जाया जाता था जिसमें यह शर्त होती थी कि यदि मजदूर अपने मालिक के बागानों में पाँच साल काम कर लेंगे तो वे स्वदेश लौट सकते हैं।
बागानों या कार्यस्थल पर पहुँचने के बाद इन मजदूरों ने देखा कि-
(i) नयी जगह का जीवन व कार्य स्थितियाँ कठोर थीं।
(ii) मजदूरों के पास कानूनी अधिकार कहने भर को भी नहीं थे।
(iii) इसके बावजूद मजदूरों ने भी जिंदगी बसर करने के अपने तरीके ढूँढ निकाले। बहुत सारे तो भाग कर जंगलों में ही चले गए। अगर ऐसे मजदूर पकड़े जाते तो उन्हें भारी सजा दी जाती थी।
(iv) बहुतों ने अपनी पुरानी और नई संस्कृतियों का सम्मिश्रण करते हुए व्यक्तिगत एवं सामूहिक अभिव्यक्ति के नए रूप खोज लिए। ज्यादातर अनुबन्धित श्रमिक 5 साल बाद भी वापस नहीं लौटे।
प्रश्न 7. विदेशों में भारतीय उद्यमियों की भूमिका का वर्णन कीजिए।
उत्तर—(1) शिकारीपुरी श्रॉफ तथा नट्टुकोट्टई चेट्टियार भारत के प्रसिद्ध बैंकर और व्यापारी थे जो मध्य एवं दक्षिण-पूर्व एशिया में निर्यातन्मुखी खेती के लिए ऋण देते थे। इसके लिए या तो वे अपनी जेब से पैसा लगाते थे अथवा यूरोपीय बैंकों से ऋण लेते थे। उनके पास दूर-दूर तक धनराशि पहुँचाने की एक संगठित पद्धति होती थी।
(2) हैदराबादी सिन्धी व्यापारी तो यूरोपीय उपनिवेशों से भी आगे तक पहुँचे। 1860 के दशक से उन्होंने संसार भर के बन्दरगाहों पर अपने बड़े-बड़े एमपोरियम खोल दिए। इन दुकानों में पर्यटकों को आकर्षक स्थानीय और विदेशी वस्तुएँ मिलती थीं।
प्रश्न 8. 'कॉर्न लॉ' के निरस्त होने के बाद ब्रिटेन की खाद्य समस्या का हल किस प्रकार हुआ? वहां इसका क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर—कॉर्न लॉ के निरस्त होने का ब्रिटेन की खाद्य समस्या पर प्रभाव-
(1) कॉर्न लॉ के निरस्त हो जाने के बाद बहुत कम कीमत पर खाद्य पदार्थों का आयात किया जाने लगा।
(2) आयातित खाद्य पदार्थों की लागत ब्रिटेन में पैदा होने वाले खाद्य पदार्थों से भी कम थी। खाद्य पदार्थों की कीमतों में गिरावट आने से ब्रिटेन में उपभोग का स्तर बढ़ गया।
(3) उन्नीसवीं सदी के मध्य से ब्रिटेन की औद्योगिक प्रगति काफी तेज रही जिससे लोगों की आय में वृद्धि हुई। इससे खाद्य पदार्थों का और भी ज्यादा मात्रा में आयात होने लगा।
कॉर्न लॉ के निरस्त होने का किसानों पर प्रभाव—कॉर्न लॉ के निरस्त होने से ब्रिटिश किसानों की हालत बिगड़ने लगी क्योंकि वे आयातित माल की कीमत का मुकाबला नहीं कर सकते थे। विशाल भूभागों पर खेती बंद हो गई। हजारों लोग बेरोजगार हो गए। गाँवों से उजड़ कर वे या तो शहरों में या दूसरे देशों में जाने लगे।
प्रश्न 9. 19वीं सदी के मध्य में भारत में सूती कपड़ा उद्योग में गिरावट के लिए उत्तरदायी किन्हीं तीन कारकों की व्याख्या कीजिए।
अथवा
"ब्रिटिश सरकार की आर्थिक नीति के कारण भारत का वस्त्र उद्योग चौपट हो गया।" व्याख्या कीजिए।
उत्तर—(1) ब्रिटेन में आयातित कपड़ों पर सीमा शुल्क लगाना—भारत में उत्पादित होने वाली बारीक कपास का यूरोपीय देशों को निर्यात किया जाता था। दूसरी ओर औद्योगीकरण के बाद ब्रिटेन में कपास का उत्पादन बढ़ने लगा था। अतः ब्रिटेन के उद्योगपतियों के दबाव में ब्रिटिश सरकार ने आयातित कपड़ों पर सीमा शुल्क लगा दिए। परिणामस्वरूप ब्रिटेन में बारीक भारतीय कपड़े का आयात कम होने लगा।
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(2) ब्रिटिश कपड़ा उत्पादकों द्वारा नये बाजार ढूँढना- 19वीं शताब्दी के प्रारम्भ से ही ब्रिटिश कपड़ा उत्पादक दूसरे देशों में भी अपने कपड़े के लिए नए-नए बाजार ढूँढने लगे थे।
(3) अन्य अन्तर्राष्ट्रीय बाजारों में भारी प्रतिस्पर्धा- सीमा शुल्क की व्यवस्था के कारण भारतीय कपड़ों को अन्य अन्तर्राष्ट्रीय बाजारों में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा। फलस्वरूप भारतीय कपड़े के निर्यात में निरन्तर गिरावट आती गई, सन् 1800 के आसपास निर्यात में सूती कपड़े का प्रतिशत 30 था जो 1870 तक घटकर केवल 3 प्रतिशत रह गया था।
प्रश्न 10. प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात् ब्रिटेन को आर्थिक संकट का सामना क्यों करना पड़ा?
उत्तर—प्रथम विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटेन को आर्थिक संकट झेलना पड़ा। इस आर्थिक संकट के निम्नलिखित कारण थे-
(1) जिस समय ब्रिटेन युद्ध में व्यस्त था, उसी समय भारत और जापान में उद्योग विकसित होने लगे थे। अतः युद्ध के पश्चात् ब्रिटेन के लिए भारतीय बाजार में पहले वाली स्थिति प्राप्त करना बहुत कठिन हो गया था।
(2) अब जापान भी इंग्लैंड का प्रतिद्वन्द्वी हो गया था।
(3) युद्ध के खर्चे की भरपाई करने के लिए ब्रिटेन ने अमेरिका से जमकर कर्ज लिए थे। इसका परिणाम यह हुआ कि युद्ध समाप्त होने तक ब्रिटेन भारी विदेशी ऋणों से दब चुका था।
(4) युद्ध के बाद ब्रिटिश सरकार ने युद्ध-सम्बन्धी खर्चे में भी कटौती शुरू कर दी ताकि शांतिकालीन करों के सहारे ही उनकी भरपाई की जा सके। इससे रोजगार के अवसरों में भारी कमी हो गई। रोजगार के बारे में बेचैनी और अनिश्चितता युद्धोत्तर वातावरण का अंग बन गई थी।
प्रश्न 11. विश्वव्यापी महामन्दी के विश्व पर क्या प्रभाव पड़े? अमेरिका पर इसका सर्वाधिक बुरा प्रभाव पड़ा। कैसे?
उत्तर—1929 से 1934 तक विश्वव्यापी आर्थिक महामन्दी का काल रहा। इस महामन्दी के विश्व पर निम्न प्रमुख प्रभाव पड़े-
(1) यूरोप में कई बड़े बैंक बन्द हो गए।
(2) अनेक देशों की मुद्रा की कीमत गिर गई। ब्रिटिश पाउंड की भी कीमत गिर गई।
(3) लैटिन अमेरिका और अन्य स्थानों पर कृषि एवं कच्चे मालों की कीमतें बहुत कम हो गईं।
(4) अमेरिका ने आयातित पदार्थों पर दुगुना सीमा शुल्क वसूल करना शुरू किया जिसका विश्व-व्यापार पर घातक प्रभाव पड़ा।
(5) अमेरिका पर महामन्दी का सर्वाधिक विनाशकारी प्रभाव पड़ा। अमेरिकी बैंकों ने घरेलू कर्ज देना बंद कर दिया, जो कर्जें दिये जा चुके थे, उनकी वसूली तेज कर दी गई थी। परिवार तबाह हो गए और कारोबार ठप पड़ गए। अन्ततः अमेरिका के हजारों बैंक दिवालिया हो गए और बन्द कर दिए गए। व्यापार-व्यवसाय चौपट हो गए और देश में बेरोजगारी फैल गई। कर्ज न चुकाने के कारण अनेक अमेरिकी लोगों के मकान, कार आदि कुर्क कर लिए गए।
प्रश्न 12. रिंडरपेस्ट क्या थी? अफ्रीका में रिंडरपेस्ट का क्या प्रभाव पड़ा? (प्रश्न बैंक)
उत्तर—अफ्रीका में 1890 के दशक में आखिरी सालों में मवेशियों में रिंडरपेस्ट नाम की बीमारी फैली, इससे अफ्रीका में निम्न प्रभाव पड़े-
(i) रिंडरपेस्ट मवेशियों में प्लेग की तरह फैलने वाली बीमारी से लोगों की आजीविका और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ा। इसने अपने मार्ग से आने-जाने वाले 90 प्रतिशत मवेशियों को मौत की नींद सुला दिया।
(ii) पशुओं के खत्म हो जाने के बाद अफ्रीकियों को श्रम बाजार की ओर ले जाने वाले बागान व खान मालिकों तथा औपनिवेशिक सरकारों ने बचे हुए जानवरों को अपने कब्जे में ले लिया। इससे यूरोपीय उपनिवेशकारों को पूरे अफ्रीका को जीतने और गुलाम बनाने का अवसर मिल गया।
(iii) बड़ी संख्या में पशुओं के मारे जाने से अफ्रीकी लोगों के जीवन निर्वाह के साधन खत्म हो गए।
प्रश्न 13. द्वितीय विश्वयुद्ध के परिणामों की विवेचना कीजिए।
उत्तर—द्वितीय विश्व युद्ध के परिणाम- (1) द्वितीय विश्वयुद्ध में मानव जाति को भीषण विनाश लीला का सामना करना पड़ा। इस युद्ध में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 6 करोड़ लोग मारे गए। यह 1939 की वैश्विक जनसंख्या का लगभग 3 प्रतिशत था। इसके अतिरिक्त करोड़ों लोग घायल हो गए।
(2) यूरोप और एशिया के विशाल भू-भाग नष्ट हुए। हवाई बमबारी अथवा निरन्तर गोलाबारी के कारण कई शहर ध्वस्त हो गए।
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सामाजिक विज्ञान (इतिहास) कक्षा X 81
(3) इस युद्ध ने बेहिसाब आर्थिक एवं सामाजिक तबाही को जन्म दिया। ऐसी अवस्था में पुनर्निर्माण का काम कठिन और लम्बा सिद्ध हुआ।
(4) इस महायुद्ध में ऐसे लोग ज्यादा मरे, जो किसी मोर्चे पर नहीं लड़ रहे थे।
(5) इस युद्ध के परिणामस्वरूप संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ दोनों वर्चस्वशाली शक्तियों के रूप में उभरे।
प्रश्न 14. 'ब्रेटन वुड्स व्यवस्था' का विश्व अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर— ब्रेटन वुड्स व्यवस्था के विश्व अर्थव्यवस्था पर निम्न प्रभाव पड़े-
(i) इसने पश्चिमी औद्योगिक राष्ट्रों और जापान के लिए व्यापार तथा आय में वृद्धि का मार्ग खोल दिया।
(ii) इसके प्रभावस्वरूप विश्व व्यापार की विकास दर वार्षिक 8 प्रतिशत से भी अधिक रही।
(iii) इस अवधि में वैश्विक आय में लगभग 5 प्रतिशत की दर से वृद्धि हो रही थी।
(iv) इस दौरान अधिकांश औद्योगिक देशों में बेरोजगारी औसतन 5 प्रतिशत से भी कम रही।
(v) इस अवधि में तकनीक और उद्यम का विश्वव्यापी प्रसार हुआ।
(vi) विकासशील देश आधुनिक तकनीक वाले संयंत्रों व उपकरणों में विपुल पूँजी निवेश कर विकसित और औद्योगिक देशों के बराबरी करने के लिए भरसक प्रयास करने लगे।
प्रश्न 15. द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद औपनिवेशिक शासन से स्वतन्त्र होने वाले देशों को किन आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ा?
उत्तर— द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद एशिया और अफ्रीका के ज्यादातर देश औपनिवेशिक शासन से स्वतन्त्र हुए। लेकिन इन देशों को निम्नलिखित आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ा-
(1) सभी नवोदित राष्ट्र गरीबी और संसाधनों की कमी से जूझ रहे थे।
(2) इन देशों की अर्थव्यवस्थाएँ और समाज लम्बे समय तक औपनिवेशिक शासन के कारण अस्त-व्यस्त हो चुके थे।
(3) इन नवोदित राष्ट्रों को अपनी जनता की निर्धनता तथा पिछड़ेपन को दूर करने के लिए ऐसे अन्तर्राष्ट्रीय संस्थानों की सहायता लेनी पड़ी जिन पर भूतपूर्व औपनिवेशिक शक्तियों का ही प्रभुत्व था।
(4) जो देश ब्रिटेन अथवा फ्रांस के उपनिवेश रह चुके थे, वहाँ की खनिज सम्पदा, जमीन आदि महत्वपूर्ण संसाधनों पर अभी भी ब्रिटिश तथा फ्रांसीसी कम्पनियों का ही नियन्त्रण बना हुआ था और वे वहाँ अपना प्रभुत्व बनाये रखने के लिए कटिबद्ध थीं तथा अमेरिका जैसे अन्य शक्तिशाली देशों की बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ भी इन देशों के प्राकृतिक संसाधनों का बहुत कम कीमत पर दोहन करने लगी थीं।
प्रश्न 16. 'विनिमय दर' से आप क्या समझते हैं? इसके प्रकार बतलाइये।
उत्तर— विनिमय दर-विनिमय दर की व्यवस्था के द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की सुविधा के लिए विभिन्न देशों की राष्ट्रीय मुद्राओं को एक-दूसरे से जोड़ा जाता है।
प्रकार-विनिमय दर दो प्रकार की होती हैं-(1) स्थिर विनिमय दर तथा
(2) लचीली या परिवर्तनशील विनिमय दर।
(1) स्थिर विनिमय दर-जब विनिमय दर स्थिर होती है और उसमें आने वाले उतार-चढ़ाव को नियन्त्रित करने हेतु सरकारें हस्तक्षेप करती हैं तो ऐसी विनिमय दर को स्थिर विनिमय दर कहा जाता है।
(2) लचीली या परिवर्तनशील विनिमय दर-परिवर्तनशील विनिमय दर विदेशी मुद्रा बाजार में विभिन्न मुद्राओं की माँग या आपूर्ति के आधार पर और सिद्धान्ततः सरकारों के हस्तक्षेप के बिना घटती-बढ़ती रहती है।
प्रश्न 17. भारत के साथ ब्रिटेन सदैव 'व्यापार अधिशेष' की अवस्था में कैसे रहता था? इस व्यापार अधिशेष से होम चार्जेज का निपटारा कैसे होता था?
उत्तर— भारत के साथ ब्रिटेन सदैव 'व्यापार अधिशेष' की अवस्था में रहता था। इससे तात्पर्य है कि आपसी व्यापार में सदैव ब्रिटेन को ही लाभ रहता था। ब्रिटेन इस लाभ के सहारे दूसरे देशों के साथ होने वाले व्यापारिक घाटे की पूर्ति कर लेता था। ब्रिटेन के व्यापार से जो अधिशेष प्राप्त होता था उससे तथाकथित 'होम चार्जेज' (देसी खर्च) का निबटारा होता था। इसके अन्तर्गत ब्रिटिश अधिकारियों तथा व्यापारियों द्वारा अपने घर भेजी गई निजी रकम, भारतीय बाह्य कर्जे पर ब्याज तथा भारत में काम कर चुके ब्रिटिश अधिकारियों की पेंशन शामिल थी।
प्रश्न 18. गिरमिटिया प्रथा का अर्थ स्पष्ट करते हुए अध्याय में दिए गए विवरणों के आधार पर उनके हालातों के बारे में बताइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)
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उत्तर—गिरमिटिया प्रथा-19वीं सदी में भारत और चीन के लाखों गिरमिटिया (अनुबन्धित) मजदूरों को बागानों, खदानों और सड़क व रेलवे निर्माण परियोजनाओं में काम करने के लिए दूर-दूर के देशों में ले जाया जाता था। भारतीय गिरमिटिया श्रमिकों को इस अनुबन्ध के तहत ले जाया जाता था कि यदि मजदूर अपने मालिक के बागानों में पाँच साल काम कर लेंगे तो वे स्वदेश लौट सकते हैं।
19वीं सदी की इस गिरमिटिया प्रथा को बहुत सारे लोगों ने नई दास-प्रथा का भी नाम दिया है। नयी जगह की जीवन एवं कार्य स्थितियाँ कठोर थीं। मजदूरों के पास कानूनी अधिकार कहने भर को भी नहीं थे। ज्यादातर गिरमिटिया श्रमिक अनुबन्ध समाप्त हो जाने के बाद भी वापस नहीं लौटे। इन मजदूरों ने जिंदगी बसर करने के अपने तरीके निकाल लिए। यथा-
(i) बहुत सारे तो भाग कर जंगलों में चले गए।
(ii) बहुतों ने अपनी पुरानी और नयी संस्कृतियों का सम्मिश्रण करते हुए अभिव्यक्ति के नए रूप खोज लिए। होसे और चटनी म्यूजिक इसके उदाहरण हैं।
प्रश्न 19. 'विश्व बैंक' पर टिप्पणी लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— युद्धोत्तर पुनर्निर्माण के लिए पैसे का इंतजाम करने हेतु अन्तर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक (जिसे आम बोलचाल में विश्व बैंक कहा जाता है) का गठन किया गया। विश्व बैंक ने 1947 में औपचारिक रूप से काम करना शुरू किया। विश्व बैंक की निर्णय प्रक्रिया पर मुख्य रूप से पश्चिमी देशों का नियंत्रण रहता है। अमेरिका, विश्व बैंक के किसी भी फैसले को वीटो कर सकता है। विश्व बैंक का गठन मुख्य रूप से औद्योगिक देशों की जरूरतों को पूर्ण करने हेतु किया गया था। हालाँकि यह संस्थान भूतपूर्व उपनिवेशों में गरीबी की समस्या और विकास की कमी से निपटने में दक्ष नहीं थे।
● निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. "व्यापार की वृद्धि और विश्व अर्थव्यवस्था के साथ निकटता ने उपनिवेशवाद को बढ़ावा दिया।" विवेचना कीजिए।
उत्तर— उपनिवेशवाद को बढ़ावा-19वीं शताब्दी के आखिरी दशकों में व्यापार बढ़ा और बाजार तेजी से फैलने लगे। व्यापार की वृद्धि तथा विश्व अर्थव्यवस्था के साथ निकटता का एक परिणाम यह हुआ कि दुनिया के बहुत सारे भागों में स्वतन्त्रता और आजीविका के साधन छिनने लगे। इस स्थिति ने उपनिवेशवाद को बढ़ावा दिया। 19वीं सदी के आखिरी दशकों में यूरोपीय विजयों से बहुत सारे कष्टदायक आर्थिक, सामाजिक और पारिस्थितिकीय परिवर्तन आए और औपनिवेशिक समाजों को विश्व अर्थव्यवस्था में समाहित कर लिया गया।
1. साम्राज्यवादी देशों द्वारा अफ्रीका में अपने उपनिवेश स्थापित करना- यूरोप के शक्तिशाली देशों ने अफ्रीकी देशों की दुर्बलता तथा पिछड़ेपन का लाभ उठाया और वहाँ अपने-अपने उपनिवेश स्थापित करने शुरू कर दिए। 1885 में यूरोप के शक्तिशाली देशों की बर्लिन में एक सभा हुई जिसमें उन्होंने अफ्रीका को आपस में बाँट लिया।
2. औपनिवेशिक शक्तियों द्वारा औपनिवेशिक साम्राज्य का विस्तार करना- उन्नीसवीं सदी के अन्त में ब्रिटेन और फ्रांस ने अपने शासन वाले विदेशी क्षेत्रफल में भारी वृद्धि कर ली थी। बेल्जियम तथा जर्मनी नवीन औपनिवेशिक शक्तियों के रूप में प्रकट हुए। 1890 के दशक के अन्तिम वर्षों में संयुक्त राज्य अमेरिका ने भी स्पेन के आधिपत्य में रह चुके कुछ उपनिवेशों पर अधिकार कर लिया। इस प्रकार संयुक्त राज्य अमेरिका भी एक औपनिवेशिक शक्ति बन गया।
प्रश्न 2. भारत से अनुबन्धित श्रमिकों को विदेशों में क्यों ले जाया गया? अनुबन्धित श्रमिक विदेशों में जाने के लिए क्यों बाध्य हुए?
उत्तर— भारत से अनुबन्धित श्रमिकों का विदेशों में ले जाया जाना-उन्नीसवीं शताब्दी में भारत के लाखों मजदूरों को बागानों, खदानों और सड़क तथा रेलवे निर्माण परियोजनाओं में काम करने के लिए विदेशों विशेषकर कैरीबियाई द्वीप समूह, मॉरिशस तथा फिजी में ले जाया जाता था। भारतीय अनुबन्धित श्रमिकों को विशेष प्रकार के अनुबन्ध या एग्रीमेंट के अन्तर्गत ले जाया जाता था। इन अनुबन्धों में यह शर्त होती थी कि यदि मजदूर अपने मालिक के बागानों में पाँच वर्ष तक काम कर लेगा, तो वे स्वदेश लौट सकते हैं।
अनुबन्धित श्रमिकों के दूसरे देशों में जाने के कारण- भारत के अधिकतर अनुबन्धित मजदूर वर्तमान पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य भारत तथा तमिलनाडु के सूखे क्षेत्रों से जाते थे। उनके विदेशों में जाने के निम्नलिखित कारण थे-
(1) इन प्रदेशों में कुटीर उद्योग समाप्त हो रहे थे।
(2) जमीनों का भाड़ा बहुत बढ़ गया था।
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सामाजिक विज्ञान (इतिहास) कक्षा X 83
(3) खानों और बागानों के लिए जमीनों को साफ किया जा रहा था।
(4) लोग बटाई पर जमीन तो ले लेते थे, परन्तु उसका भाड़ा चुकाने में असमर्थ थे।
(5) उन पर कर्जा बढ़ने लगा था। अतः काम की तलाश में उन्हें अपना घर-बार छोड़ कर दूसरे देशों में जाना पड़ा।
प्रश्न 3. आर्थिक महामंदी की शुरुआत कब हुई और यह कब तक चली? महामंदी की दो विशेषताएँ और दो कारण बताइए।
अथवा
1929 की महामंदी को समझाते हुए इसके दो कारणों का उल्लेख कीजिए।
(माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)
अथवा
आर्थिक महामंदी से आप क्या समझते हैं? इसके प्रमुख कारण बताइए।
अथवा
आर्थिक महामंदी क्या थी? अमेरिका पर पड़े इसके प्रभावों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर— आर्थिक महामंदी—आर्थिक महामंदी की शुरुआत 1929 से हुई और यह संकट 1930 के दशक के मध्य तक बना रहा।
महामंदी की विशेषताएँ—
(1) महामंदी के दौरान दुनिया के ज्यादातर हिस्सों के उत्पादन, रोजगार और व्यापार में भयानक गिरावट दर्ज की गई।
(2) इस मंदी का समय और असर सब देशों में एक जैसा नहीं था, लेकिन सामान्यतः कृषि क्षेत्रों और समुदायों पर इसका सबसे बुरा असर पड़ा क्योंकि औद्योगिक उत्पादों की तुलना में खेतिहर उत्पादों की कीमतों में ज्यादा भारी और ज्यादा समय तक कमी बनी रही।
महामंदी के कारण—
(i) कृषि उत्पादों का अतिउत्पादन—कृषि उत्पादों की गिरती कीमतों के कारण किसानों की आय में कमी हुई जिसे पूरा करने के लिए उन्होंने उत्पादन बढ़ाने का प्रयास किया। परिणामस्वरूप बाजार में कृषि उत्पादों की वृद्धि हो गई और उनकी कीमतें और नीचे चली गईं। खरीदारों के अभाव में कृषि उत्पादन सड़ने लगा था।
(ii) अमेरिका से कर्जा न मिलना—1920 के दशक के मध्य में अनेक देशों ने अमेरिका से कर्ज लेकर अपनी निवेश सम्बन्धी आवश्यकताएँ पूरी की थीं। परन्तु संकट का संकेत मिलते ही अमेरिकी उद्योगपतियों में घबराहट उत्पन्न हुई। 1928 के पहले 6 माह तक विदेशों में अमेरिका का कर्जा एक अरब डालर था। सालभर के भीतर यह कर्जा घटकर केवल चौथाई रह गया था। जो देश अमेरिकी कर्जे पर सबसे अधिक निर्भर थे, उनके सामने गहरा संकट उत्पन्न हो गया।
आर्थिक महामंदी के अमेरिका पर पड़े प्रभाव—
(i) कीमतों में कमी एवं मंदी की आशंका देखते हुए अमेरिकी बैंकों ने घरेलू कर्जा बन्द कर दिया और जो कर्जे दिए जा चुके थे, उसकी वसूली तेज कर दी गई।
(ii) आय में कमी आने पर अमेरिका के बहुत से परिवार कर्जा चुकाने में नाकामयाब हो गए जिसके चलते उनके मकान, कार और सारी जरूरी चीजें कुर्क कर ली गईं।
(iii) किसान उपज नहीं बेच पा रहे थे, परिवार तबाह हो गए, कारोबार ठप्प पड़ गए।
(iv) 1920 के दशक में जो उपभोक्तावादी सम्पन्नता दिखाई दे रही थी, वह अचानक गायब हो गई।
(v) बेरोजगारी बढ़ी तो लोग काम की तलाश में दूर-दूर तक जाने लगे।
(vi) अन्ततः अमेरिकी बैंकिंग व्यवस्था भी धराशायी हो गई, हजारों बैंक दिवालिया हो गए और बंद कर दिए गए।
प्रश्न 4. महामंदी के कारणों की विस्तृत व्याख्या कीजिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— महामंदी का अभिप्राय किसी देश की ऐसी आर्थिक दशा से है जब उत्पादन में भारी वृद्धि, लोगों की क्रयशक्ति में तीव्र गिरावट और मुद्रा के वास्तविक मूल्य में कमी आ जाए। ऐसी आर्थिक महामंदी 1929 में अमेरिका में आई थी और इसने समस्त विश्व को ग्रास बना लिया था, जिसके कारण इसे वैश्विक महामंदी कहा जाता है।
महामंदी के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे-
(i) युद्ध द्वारा उत्पन्न स्थितियाँ—प्रथम विश्व युद्ध काल में सेना से सम्बन्धित वस्तुओं की मांग में वृद्धि के कारण भारी औद्योगिक प्रसार किए गए। युद्ध के बाद उद्योग अपनी सामान्य स्थिति में आ गए। इस प्रकार, सैनिक व युद्ध सम्बन्धी माल की मांग में तीव्र कमी के कारण आर्थिक महामंदी का जन्म हुआ।
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(ii) कृषि क्षेत्र में अत्यधिक उत्पादन-महामंदी के लिए उत्तरदायी प्रमुख घटकों में से एक कृषि सम्बन्धी अति-उत्पादन भी था। इससे कृषि-वस्तुओं की कीमतों में भारी कमी आई। कीमतें घटने से कृषि सम्बन्धी आय भी घट गई जिसके कारण किसानों ने अपना उत्पादन बढ़ाने की कोशिश की ताकि वे अपनी समग्र आय स्तर को बनाये रखने के लिए भारी मात्रा में उत्पादों को बाजार में ला सकें। परन्तु असर उल्टा हुआ क्योंकि बाजार में कृषि उत्पादों की आमद बढ़ने से कीमतें और नीचे चली गईं, परिणामतः खरीदारों के अभाव में उपज सड़ने लगी।
(iii) ऋणों में कमी आना-1920 दशक के मध्य में बहुत से देशों ने अमेरिका से ऋण लेकर अपनी निवेश सम्बन्धी जरूरतों को पूरा किया था। जब स्थिति सामान्य थी तो अमेरिका से ऋण लेना सरल था परन्तु संकट की स्थिति की आशंका से अमेरिकी उद्यमियों ने ऋण देना कम कर दिया। अतः विदेशों में अमेरिका का ऋण घटकर एक-चौथाई रह गया। जो देश अमेरिकी ऋण पर आश्रित थे, उनके सामने गहरा संकट आ गया।
(iv) अन्य विविध कारण-अमेरिकी ऋणदाताओं के पीछे हटने से यूरोप में कई बड़े बैंक धराशायी हो गए, मुद्रा लुढ़क गई और ब्रिटिश पाउण्ड भी कमजोर होने लगा। लैटिन अमेरिका और अन्य स्थानों पर कृषि व कच्चे माल की कीमतें तेजी से गिरीं। अमेरिकी सरकार वैश्विक महामंदी से अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए आयातित पदार्थों पर दोगुना सीमा शुल्क वसूलने लगी, जिससे विश्व व्यापार की स्थिति खस्ताहाल हो गई।
प्रश्न 5. "प्रथम विश्व युद्ध पहला आधुनिक औद्योगिक युद्ध था।" विवेचना कीजिए। आर्थिक क्षेत्र में विश्व पर इसके क्या प्रभाव पड़े?
उत्तर-पहला आधुनिक औद्योगिक युद्ध-प्रथम विश्व युद्ध पहला औद्योगिक युद्ध था क्योंकि (1) इस युद्ध में विश्व के सबसे अग्रणी औद्योगिक राष्ट्र एक-दूसरे के विरुद्ध संघर्ष कर रहे थे।
(2) इस युद्ध में मशीनगनों, टैंकों, हवाई जहाजों और रासायनिक हथियारों का बड़े पैमाने पर प्रयोग किया गया। ये सभी हथियार आधुनिक विशाल उद्योगों की देन थी।
(3) युद्ध के लिए सम्पूर्ण विश्व से असंख्य सैनिकों की भर्ती की गई। उन्हें विशाल जलपोतों एवं रेलगाड़ियों में भर कर युद्ध के मोर्चों पर ले जाया गया।
(4) इस युद्ध में जो भीषण जन-हानि और विनाशलीला देखने को मिली, उसकी औद्योगिक युग से पहले और औद्योगिक शक्ति के बिना कल्पना नहीं की जा सकती थी।
आर्थिक क्षेत्र में प्रभाव-प्रथम विश्व युद्ध के आर्थिक क्षेत्र में निम्नलिखित प्रभाव हुए-
(1) कामकाजी आयु के लोगों की संख्या का कम होना-इस युद्ध से यूरोप में कामकाजी आयु के लोगों की संख्या बहुत कम रह गई। परिवार के सदस्यों में कमी हो जाने से युद्ध के बाद परिवारों की आय भी बहुत कम हो गई।
(2) उद्योगों का पुनर्गठन-युद्ध सम्बन्धी सामग्री का उत्पादन करने के लिए उद्योगों का पुनर्गठन किया गया।
(3) आर्थिक कार्यों में महिलाओं की भागीदारी-युद्ध की आवश्यकताओं को देखते हुए सम्पूर्ण समाजों को बदल दिया गया। पुरुष युद्ध के मोर्चों पर जाने लगे, तो उन कार्यों को सम्भालने के लिए महिलाओं को घर छोड़कर बाहर आना पड़ा।
(4) आर्थिक शक्तियों के बीच आर्थिक सम्बन्ध टूटना-प्रथम विश्व युद्ध के कारण विश्व की कुछ सबसे शक्तिशाली आर्थिक शक्तियों के बीच आर्थिक सम्बन्ध टूट गए। अब वे देश एक-दूसरे से बदला लेने पर उतारू थे।
(5) अमेरिका का ऋणदाता बनना-प्रथम विश्व युद्ध के लिए ब्रिटेन को अमेरिकी बैंकों और अमेरिकी जनता से भारी ऋण लेना पड़ा। परिणामस्वरूप इस युद्ध ने अमेरिका को ऋणी की बजाय ऋणदाता बना दिया।
प्रश्न 6. 1920 के दशक में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में किस प्रकार तेजी आयी? विस्तार से बताइए।
अथवा
हेनरी फोर्ड द्वारा अपनाई गई पद्धतियों के अमेरिका पर पड़े प्रभावों का विवेचन कीजिए।
उत्तर-हेनरी फोर्ड द्वारा अपनाई गई वृहत् उत्पादन पद्धति के अमेरिका पर प्रभाव-हेनरी फोर्ड द्वारा अपनाई गई पद्धतियों को जल्दी ही पूरे अमेरिका में अपनाया जाने लगा। इन पद्धतियों को अपनाये जाने से अमेरिका पर निम्नलिखित प्रभाव पड़े-
(1) इन्जीनियरिंग आधारित वस्तुओं की लागत तथा मूल्यों में कमी-वृहत् उत्पादन पद्धति ने इन्जीनियरिंग आधारित वस्तुओं की लागत तथा कीमतों में कमी ला दी। अच्छे वेतनों के कारण अब अनेक मजदूर भी कार आदि वस्तुएँ खरीद सकते थे।
(2) कारों के उत्पादन में वृद्धि-वृहत् उत्पादन पद्धति के कारण कारों के उत्पादन में वृद्धि हुई। जहाँ 1919 में अमेरिका में 20 लाख कारों का उत्पादन होता था, जो 1929 में बढ़कर 50 लाख कार प्रतिवर्ष से भी ऊपर जा पहुँचा।
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(3) अन्य घरेलू सामान की बिक्री में वृद्धि- अब बहुत सारे अमेरिकी लोग फ्रिज, वाशिंग मशीन, रेडियो, ग्रामोफोन प्लेयर्स आदि वस्तुएँ भी खरीदने लगे। ये सब वस्तुएँ 'हायर-परचेज' व्यवस्था के अन्तर्गत खरीदी जाती थीं। दूसरे शब्दों में ये लोग समस्त वस्तुएँ कर्जे पर खरीदते थे और उनका मूल्य साप्ताहिक अथवा मासिक किस्तों में चुकाया जाता था। मकानों के निर्माण और निजी मकानों की संख्या में वृद्धि से भी फ्रिज, वाशिंग मशीन आदि उपकरणों की माँग में वृद्धि हुई। अब घरों का निर्माण व खरीदारी भी कर्जे पर की जाने लगी।
प्रश्न 7. उपनिवेशवाद से औपनिवेशिक समाज की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा? विवेचना कीजिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— उपनिवेशवाद वह प्रक्रिया है जिसमें एक देश दूसरे देश या क्षेत्र पर नियंत्रण और शासन करता है। उपनिवेशवाद से औपनिवेशिक समाज की अर्थव्यवस्था पर हुए प्रभावों को हम अफ्रीका और भारत के उदाहरण से समझ सकते हैं।
(1) 19वीं सदी के अन्त में, यूरोप के लोग अफ्रीका की भूमि और खनिजों के विशाल संसाधनों की उपलब्धता के कारण आकर्षित हुए थे। उनका उद्देश्य यूरोप को फसल और खनिज निर्यात हेतु बागान और खदानें स्थापित करना था। हालाँकि उन्हें एक ऐसी चुनौती का सामना करना पड़ा जिसकी उन्होंने कल्पना नहीं की थी। अफ्रीकी मेहनताना पर श्रमिक नहीं बनना चाहते थे क्योंकि अफ्रीकी आजीविका भूमि और पशुधन पर निर्भर थी, लोग मजदूरी के लिए काम नहीं करते थे। यूरोपीय नियोक्ताओं ने मजदूरों की भर्ती करने तथा उन्हें बनाये रखने के लिए कठोर कानूनों जैसे भारी कर तथा विरासत कानूनों का सहारा लिया। इसी बीच, 1890 के दशक में अफ्रीका में रिंडरपेस्ट नामक बीमारी जंगल की आग की तरह फैली जिससे 90% से ज्यादा मवेशी मर गए, जिससे अफ्रीकी आजीविका नष्ट हो गई। बचे मवेशियों तथा अधिकांश भूमि पर यूरोपियों ने अपना कब्जा स्थापित कर लिया था। इस प्रकार यूरोपीय उपनिवेशवादियों को अफ्रीका को उनके अधीन करने में सक्षम बनाया।
(2) इसी प्रकार, उन्नीसवीं सदी में भारत से अनुबंधित श्रमिकों को बागानों, खदानों, सड़क तथा रेलवे परियोजनाओं में काम करने हेतु बड़ी मात्रा में ले जाया गया। ये श्रमिक अधिकतर उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश तथा तमिलनाडु के सूखाग्रस्त इलाकों से ले जाए जाते थे, जिससे उन इलाकों के कुटीर उद्योग खत्म होने के कगार पर आ गए।
इस प्रकार उपर्युक्त दो देशों के उदाहरण से हम यह कह सकते हैं कि उपनिवेशवाद का औपनिवेशिक समाज की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
प्रश्न 8. "खाद्य पदार्थों ने दूर देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया।" इस कथन को तीन उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— जब भी व्यापारी नए देश जाते थे तब जाने-अनजाने में वहाँ नई खाद्य फसलों के बीज बो आते थे। सम्भव है कि दुनिया के विभिन्न भागों में झटपट तैयार होने वाले खाद्य पदार्थों के साझा स्रोत रहे हों। हमारे खाद्य पदार्थों ने दूर देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया है, इस कथन को हम निम्न उदाहरण द्वारा स्पष्ट कर सकते हैं-
(i) स्पैघेत्ती और नूडल्स— माना जाता है कि नूडल्स चीन से पश्चिम में पहुँचे और उन्हीं से स्पैघेत्ती का जन्म हुआ है।
(ii) पास्ता— यह भी मान्यता है कि पास्ता अरब यात्रियों के साथ पाँचवीं सदी में सिसली (जो अब इटली का टापू है) पहुँचा।
(iii) आलू, सोया, मूँगफली इत्यादि फसल— आलू, सोया, मूँगफली, मक्का, टमाटर, मिर्च, शकरकंद और ऐसे ही अन्य खाद्य पदार्थ यूरोप और एशिया में तब पहुँचे जब कोलम्बस गलती से उन अज्ञात महाद्वीपों (जिन्हें बाद में अमेरिका के नाम से जाना जाता है) में पहुँच गया था।
इन अनुमानों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि आधुनिक काल से पहले भी सुदूर देशों के बीच सांस्कृतिक लेन-देन चल रहा होगा।
प्रश्न 9. अमेरिका के कार निर्माता हेनरी फोर्ड द्वारा अपने कारखाने में स्थापित असेंबली लाइन की विवेचना कीजिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— कार निर्माता हेनरी फोर्ड वृहत उत्पादन के विख्यात प्रणेता थे। उन्होंने शिकागो के एक बूचड़खाने की असेंबली लाइन की तर्ज पर डेट्रॉयट के अपने कारखानों में आधुनिक असेंबली लाइन स्थापित की थी क्योंकि
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फोर्ड का मानना था कि गाड़ियों के उत्पादन के लिए भी असेंबली लाइन का तरीका समय और पैसे दोनों के लिहाज से किफायती साबित हो सकता है। उनके द्वारा स्थापित असेंबली लाइन की विवेचना निम्न बिन्दुओं के अन्तर्गत की जा सकती है-
(i) असेंबली लाइन में श्रमिकों को एक ही कार्य यांत्रिक रूप से बार-बार करते रहना होता है, जैसे कार के किसी पुर्जे को ही लगाते रहना।
(ii) कन्वेयर बेल्ट की रफ्तार द्वारा काम की रफ्तार का नियंत्रण किया जाता था। इस तरीके से काम की गति को बढ़ाकर मजदूर की उत्पादकता को बढ़ाया जाता था।
(iii) कन्वेयर बेल्ट के सामने खड़े होकर कोई कर्मचारी काम में देरी नहीं कर सकता था या अपने सहकर्मी के साथ बातचीत करने का जोखिम भी नहीं उठा सकता था।
(iv) परिणामस्वरूप, हेनरी फोर्ड के कारखाने की असेंबली लाइन से एक कार प्रत्येक तीन मिनट के अन्तराल पर निकलती थी, जो पिछले तरीकों की गति से कई गुना तेज थी। टी-मॉडल नामक कार वृहत् उत्पादन पद्धति से बनी पहली कार थी।
प्रश्न 10. विकासशील देशों द्वारा वैश्वीकरण की नीति अपनाने के लिए कौनसी परिस्थितियाँ उत्तरदायी थीं? इसका क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर— विकासशील देशों द्वारा वैश्वीकरण की नीति अपनाने के लिए उत्तरदायी परिस्थितियाँ-
विकासशील देशों द्वारा वैश्वीकरण की नीति अपनाने के लिए निम्नलिखित परिस्थितियाँ उत्तरदायी थीं-
(1) अन्तर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में परिवर्तन-बीसवीं शताब्दी के सातवें दशक के मध्य अन्तर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में भारी परिवर्तन आ चुके थे। अब तक विकासशील देश ऋण और विकास सम्बन्धी सहायता के लिए अन्तर्राष्ट्रीय संस्थानों की सहायता ले सकते थे परन्तु अब उन्हें पश्चिम के व्यावसायिक बैंकों और निजी ऋणदाता संस्थानों से ऋण न लेने के लिए विवश किया जाने लगा। परिणामस्वरूप विकासशील विश्व में विभिन्न अवसरों पर ऋण संकट उत्पन्न होने लगा जिसके कारण आय में गिरावट आ रही थी और निर्धनता में वृद्धि होने लगी थी। अफ्रीकी तथा लैटिन अमेरिकी देशों में इस प्रकार की समस्या सर्वाधिक विकट थी।
(2) विकसित देशों में बेरोजगारी-विकसित देश भी बेरोजगारी की समस्या से परेशान थे। सत्तर के दशक के मध्य से बेरोजगारी बढ़ने लगी और नब्बे के दशक के प्रारम्भिक वर्षों तक वहाँ पर्याप्त बेरोजगारी रही। सत्तर के दशक के अन्तिम वर्षों से बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ भी एशिया के ऐसे देशों में उत्पादन केन्द्रित करने लगीं जहाँ वेतन कम थे। परिणामस्वरूप विदेशी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने इन देशों में निवेश करना शुरू कर दिया। चीन जैसे देश में वेतन तुलनात्मक रूप से कम थे। फलस्वरूप विश्व बाजारों में अपना प्रभुत्व कायम करने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही विदेशी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने वहाँ जम कर निवेश करना शुरू कर दिया और यहाँ टेलीविजन, मोबाइल फोन, खिलौने बड़े पैमाने पर बनाये जाने लगे।
वैश्वीकरण का प्रभाव- उद्योगों को कम वेतन वाले देशों में ले जाने से वैश्विक व्यापार और पूँजी प्रवाहों पर भी प्रभाव पड़ा। पिछले दो दशक में भारत, चीन और ब्राजील आदि देशों की अर्थव्यवस्था में आए परिवर्तनों के कारण विश्व का आर्थिक भूगोल पूर्णरूप से बदल चुका है।
प्रश्न 11. वैश्विक अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण में ब्रेटन वुड्स संस्थान की भूमिका को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर— वैश्विक अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण में ब्रेटन वुड्स संस्थान की भूमिका
(1) युद्धोत्तर अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह था कि औद्योगिक विश्व में आर्थिक स्थिरता एवं पूर्ण रोजगार बनाए रखा जाए। इस फ्रेमवर्क पर जुलाई 1944 में अमेरिका के ब्रेटन वुड्स नामक स्थान पर संयुक्त राष्ट्र मौद्रिक एवं वित्तीय सम्मेलन में सहमति बनी थी।
(2) सदस्य देशों के विदेश व्यापार में लाभ और घाटे से निपटने के लिए ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में ही अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आई.एम.एफ.) की स्थापना की गई।
(3) युद्धोत्तर पुनर्निर्माण के लिए पैसे का इन्तजाम करने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक (विश्व बैंक) का गठन किया गया। इसी कारण आई.एम.एफ. और विश्व बैंक दोनों को ब्रेटन वुड्स संस्थान या ब्रेटन वुड्स की जुड़वां संस्था कहा जाता है।
(4) विश्व बैंक और आई.एम.एफ. ने 1947 में औपचारिक रूप से काम करना शुरू किया। इन संस्थानों की निर्णय प्रक्रिया पर पश्चिमी औद्योगिक देशों का नियन्त्रण रहता है। अमेरिका इनके किसी भी निर्णय पर वीटो कर सकता है।
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(5) ब्रेटन वुड्स व्यवस्था निश्चित विनिमय दरों पर आधारित होती थी। इसमें राष्ट्रीय मुद्राएँ, जैसे-भारतीय रुपया, डॉलर के साथ एक निश्चित विनिमय दर से बँधा हुआ था। डॉलर का मूल्य भी सोने से बँधा हुआ था। एक डॉलर की कीमत 35 औंस के बराबर निर्धारित की गई थी।
प्रश्न 12. ब्रेटन वुड्स प्रणाली के समाप्त होने के लिए उत्तरदायी कारकों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर— ब्रेटन वुड्स प्रणाली के समाप्त होने के प्रमुख उत्तरदायी कारण निम्नलिखित हैं-
(1) डॉलर की कीमत में गिरावट आना-साठ के दशक से ही विदेशों में अपनी गतिविधियों की भारी लागत ने अमेरिका की वित्तीय और प्रतिस्पर्धी क्षमता को कमजोर कर दिया था। अमेरिकी डॉलर अब दुनिया की प्रधान मुद्रा के रूप में पहले जितना सम्मानित और निर्विवाद नहीं रह गया था। सोने की तुलना में डॉलर की कीमत गिरने लगी थी। अन्ततः स्थिर विनिमय दर की ब्रेटन वुड्स की व्यवस्था विफल हो गई और प्रवाह्मयी या अस्थिर विनिमय दर की व्यवस्था शुरू की गई।
(2) पश्चिमी व्यावसायिक बैंकों का उदय-सत्तर के दशक के मध्य से अन्तर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में भी भारी बदलाव आ चुके थे। अब तक विकासशील देश कर्जें और विकास सम्बन्धी सहायता के लिए अन्तर्राष्ट्रीय संस्थानों की शरण ले सकते थे।
लेकिन अब उन्हें पश्चिम के व्यावसायिक बैंकों और निजी ऋणदाता संस्थानों से कर्ज न लेने के लिए बाध्य किया जाने लगा। इससे विकासशील विश्व में समय-समय कर्ज-संकट पैदा होने लगा जिससे आय में गिरावट होती गयी और गरीबी बढ़ने लगी थी। अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में यह समस्या सबसे ज्यादा दिखाई दी।
(3) बेरोजगारी की समस्या-औद्योगिक विश्व भी बेरोजगारी की समस्या में फँसने लगा था। सत्तर के दशक के मध्य बेरोजगारी बढ़ने लगी थी जो 90 के दशक के प्रारम्भ तक वहाँ बेरोजगारी रही। सत्तर के दशक के अन्तिम वर्षों से बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ भी एशिया के ऐसे देशों में उत्पादन केन्द्रित करने लगीं, जहाँ वेतन कम थे।
(4) चीन का अर्थव्यवस्था की एक नयी महाशक्ति के रूप में उभरना-चीन में नयी आर्थिक नीतियों, सोवियत खेमे के बिखराव तथा पूर्वी यूरोप में सोवियत शैली की व्यवस्था समाप्त हो जाने के पश्चात बहुत सारे देश पुनः विश्व अर्थव्यवस्था का अंग बन गए।
चीन में वेतन तुलनात्मक रूप से कम थे। फलतः विदेशी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने वहाँ जमकर निवेश करना शुरू कर दिया। इससे चीनी अर्थव्यवस्था उभरी। चीनी अर्थव्यवस्था का यह उभार उसकी अल्प लागत और कम वेतन का परिणाम था।
उद्योगों को कम वेतन वाले देशों में ले जाने से वैश्विक व्यापार और पूँजी प्रवाहों पर भी असर पड़ा। पिछले दो दशक के भारत, चीन तथा ब्राजील की अर्थव्यवस्थाओं में आए भारी बदलाव के कारण दुनिया का आर्थिक भूगोल बदल गया है।
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