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सामाजिक विज्ञान (Social Science)हिंदी माध्यम2026-27

RBSE Class 10 SST Chapter 8 Solutions in Hindi — [भूगोल] जल संसाधन | पासबुक हल, नोट्स

📅 अंतिम अपडेट: 2026-09-10📖 RBSE/NCERT Solutions
भाग 1 — समाधान (भूगोल पाठ 3)

📖 1. समाधान: पाठगत एवं पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नोत्तर

राजस्थान बोर्ड कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान (भूगोल) — सभी पाठगत प्रश्नों एवं पाठ्यपुस्तक अभ्यास के संपूर्ण सटीक उत्तर।

पाठगत प्रश्न

पृष्ठ 21

प्रश्न 1. अपने दिन-प्रतिदिन के अनुभव के आधार पर जल संरक्षण के लिए एक संक्षिप्त प्रस्ताव लिखें।

उत्तर- मेरे विचार में जल संरक्षण हेतु निम्न बातों पर ध्यान देना चाहिए-

(1) जल को व्यर्थ नहीं बहाना चाहिए।

(2) नहाने हेतु शॉवर के स्थान पर बाल्टी-मगों का प्रयोग करना चाहिए।

(3) पेस्ट करते समय तथा हाथ धोते समय नल को लगातार चालू न रखें।

(4) मग्गे में पानी लेकर दाढ़ी बनानी चाहिए।

(5) शौचालय में फ्लश टंकी को कम पानी पर सैट करना चाहिए।

(6) पीने के लिए गिलास में उतना ही पानी लेना चाहिए जितना पीना हो।

(7) कार तथा अन्य वाहनों को सीधे पाइप से धोने की बजाय बाल्टी में पानी लेकर कपड़े से पोंछना चाहिए।

(8) रसोईघर तथा बाथरूम से निकलने वाले पानी को बगीचे में काम में लेना चाहिए।

(9) उपयोग के पश्चात् नल को तुरन्त बन्द करना चाहिए।

(10) यदि किसी नल से पानी का रिसाव हो रहा हो तो उसे तुरन्त ठीक करना चाहिए।

(11) आजकल मोटरों से छत पर टंकी में पानी पहुँचाया जाता है। टंकी भरने का अलार्म सिस्टम लगवाया जाना चाहिए अन्यथा ध्यान रखकर समय पर मोटर बंद करनी चाहिए।

--- [ पृष्ठ संख्या: 167 ] ---

(12) वर्षा जल का पाइपों के द्वारा भूमिगत टैंक में संग्रहण करना चाहिए।

(13) वर्षा जल संग्रहण के प्राचीन तरीकों, यथा-जोहड़, खादीन, टांका आदि को काम में लेना चाहिए।

पृष्ठ 23

प्रश्न 2. अन्तर्राज्यीय जल विवादों की एक सूची तैयार करें।

उत्तर— भारत के प्रमुख अन्तर्राज्यीय जल विवाद निम्न प्रकार हैं-

(1) कृष्णा-गोदावरी जल विवाद

(2) कावेरी जल विवाद

(3) रावी-व्यास जल विवाद

(4) नर्मदा नदी जल विवाद।

पृष्ठ 27

प्रश्न 3. अपने क्षेत्र में पाये जाने वाले अन्य वर्षा जल संग्रहण तंत्रों के बारे में पता लगाएँ।

उत्तर— हमारे क्षेत्र में पाये जाने वाले वर्षा जल संग्रहण तंत्र निम्न प्रकार हैं-

(1) टांका (2) जोहड़ (3) खादीन (4) कुई (5) तालाब (6) बावड़ी

(7) पोखर (8) चेक डैम (9) एनिकट (10) छत वर्षा जल संग्रहण आदि।

पृष्ठ 29

प्रश्न 4. सूचना एकत्रित करें कि उद्योग किस प्रकार हमारे जल संसाधनों को प्रदूषित कर रहे हैं?

उत्तर— उद्योग निम्न प्रकार हमारे जल संसाधनों को प्रभावित तथा प्रदूषित कर रहे हैं-

(1) उद्योगों को अत्यधिक जल की आवश्यकता होती है। इससे हमारे अलवणीय जल संसाधनों पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है।

(2) उत्पादन प्रक्रिया के दौरान तथा अन्त में उद्योगों से निकलने वाला बहिःस्राव हानिकारक अपशिष्ट पदार्थों से युक्त होता है जो कि प्रायः अनुपचारित ही निकटतम जलाशयों में स्रावित कर दिया जाता है।

(3) अधिकांश उद्योगों के बहिःस्राव में अनेक रासायनिक तथा धात्विक हानिकारक तत्व यथा-वसा, अम्ल, क्षार, लवण, तेल, पारा, ताँबा, केडमियम, सीसा आदि उपस्थित रहते हैं जो कि जल संसाधनों को गम्भीर रूप से प्रदूषित करते हैं।

(4) लुगदी उद्योग, चमड़ा उद्योग, औषधि निर्माण उद्योग, चीनी उद्योग, कपड़ा रंगाई-छपाई उद्योग, शराब उद्योग, रासायनिक उद्योग एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों द्वारा विशाल मात्रा में हानिकारक अपशिष्ट बहिःस्राव के रूप में जल स्रोतों में बहाये जाते हैं और जल संसाधन को प्रदूषित करते हैं।

(5) विभिन्न धातुओं के खनन के बाद खुली खदानों में से वर्षा जल के साथ बहकर बहुत सी खनिज युक्त मृदा भी जलाशयों में जाकर मिल जाती है। इस मृदा में अनेक धातु अयस्क होते हैं जो जलस्रोतों को प्रदूषित करते हैं।

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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

1. बहुवैकल्पिक प्रश्न-

(i) नीचे दी गई सूचना के आधार पर स्थितियों को 'जल की कमी से प्रभावित' या 'जल की कमी से अप्रभावित' में वर्गीकृत कीजिये-

(क) अधिक वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्र

(ख) अधिक वर्षा और अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्र

(ग) अधिक वर्षा वाले परन्तु अत्यधिक प्रदूषित जल क्षेत्र

(घ) कम वर्षा और कम जनसंख्या वाले क्षेत्र

उत्तर— जल की कमी से प्रभावित-(ख), (ग), (घ)

जल की कमी से अप्रभावित-(क)।

(ii) निम्नलिखित में से कौनसा वक्तव्य बहुउद्देशीय नदी परियोजनाओं के पक्ष में दिया गया तर्क नहीं है-

(क) बहुउद्देशीय परियोजनाएँ उन क्षेत्रों में जल लाती हैं जहाँ जल की कमी होती है।

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सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X | 161

(ख) बहुउद्देश्यीय परियोजनाएँ जल बहाव को नियंत्रित करके बाढ़ पर काबू पाती हैं।

(ग) बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं से वृहत् स्तर पर विस्थापन होता है और आजीविका खत्म होती है।

(घ) बहुउद्देश्यीय परियोजनाएँ हमारे उद्योग और घरों के लिए विद्युत पैदा करती हैं।

उत्तर—(ग)

(iii) यहाँ कुछ गलत वक्तव्य दिए गये हैं। इनमें गलती पहचानें और दोबारा लिखें-

(क) शहरों की बढ़ती संख्या, उनकी विशालता और सघन जनसंख्या तथा शहरी जीवन शैली ने जल संसाधनों के सही उपयोग में मदद की है।

(ख) नदियों पर बाँध बनाने और उनको नियंत्रित करने से उनका प्राकृतिक बहाव और तलछट बहाव प्रभावित नहीं होता।

(ग) गुजरात में साबरमती बेसिन में सूखे के दौरान शहरी क्षेत्रों में अधिक जल आपूर्ति करने पर किसान नहीं भड़के।

(घ) आज राजस्थान में इन्दिरा गाँधी नहर से उपलब्ध पेयजल के बावजूद छत वर्षा जल संग्रहण लोकप्रिय हो रहा है।

उत्तर—(क) शहरों की बढ़ती संख्या, उनकी विशालता और सघन जनसंख्या तथा शहरी जीवन शैली ने जल संसाधनों के सही उपयोग में बाधा डाली है।

(ख) नदियों पर बाँध बनाने और उनको नियंत्रित करने से उनका प्राकृतिक बहाव अवरुद्ध होता है जिससे तलछट बहाव कम हो जाता है।

(ग) गुजरात में साबरमती बेसिन में सूखे के दौरान शहरी क्षेत्रों में अधिक जल आपूर्ति करने पर किसान भड़क उठे।

(घ) आज राजस्थान में इन्दिरा गाँधी नहर से उपलब्ध पेयजल के कारण छत वर्षा जल संग्रहण की लोकप्रियता कम हो रही है।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।

प्रश्न (i) व्याख्या करें कि जल किस प्रकार नवीकरण योग्य संसाधन है?

उत्तर—विश्व में प्रयोग में लाने योग्य अलवणीय जल सतही अपवाह और भौम जल स्रोत से प्राप्त होता है जिसका लगातार नवीकरण और पुनर्भरण जलीय चक्र द्वारा होता रहता है। अतः जल नवीकरण योग्य संसाधन है।

प्रश्न (ii) जल दुर्लभता क्या है? इसके मुख्य कारण क्या हैं?

उत्तर—जल दुर्लभता—आवश्यकता की तुलना में स्वच्छ जल की कमी होना जल दुर्लभता कहलाती है।

जल दुर्लभता के कारण—(1) अत्यधिक और निरन्तर बढ़ती जनसंख्या, (2) जल का असमान वितरण, (3) वर्षा की कमी, (4) जल का अतिदोहन, (5) जल का प्रदूषित होना।

प्रश्न (iii) बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं से होने वाले लाभ और हानियों की तुलना करें।

उत्तर—बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं से लाभ—सिंचाई, विद्युत उत्पादन, घरेलू और औद्योगिक उपभोग के लिए जल आपूर्ति, बाढ़ नियंत्रण, मनोरंजन, आन्तरिक नौ संचालन तथा मत्स्यपालन आदि।

हानियाँ—लोगों का विस्थापन होना, नदी जलीय आवासों में भोजन की कमी, जलाशय की तली में तलछट जमा हो जाना, प्राकृतिक बहाव अवरुद्ध होना, भूकम्प की संभावना बढ़ना, बाढ़ आना, जल जनित बीमारियाँ होना तथा मृदा व वनस्पति का अपघटन आदि समस्यायें उत्पन्न होती हैं।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए।

प्रश्न (i) राजस्थान के अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों में वर्षा जल संग्रहण किस प्रकार किया जाता है? व्याख्या कीजिये।

अथवा

राजस्थान में वर्षा जल संग्रहण के तरीकों की संक्षेप में व्याख्या कीजिए।

(माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)

उत्तर—राजस्थान में वर्षा जल संग्रहण निम्न प्रकार किया जाता है—

(1) खादीन एवं जोहड़—राजस्थान के अर्द्ध-शुष्क और शुष्क क्षेत्रों में खेतों में वर्षा के जल को एकत्रित करने के लिए गड्ढे बनाए जाते थे जिससे भूमि की सिंचाई की जा सके तथा संरक्षित जल को कृषि के काम में प्रयुक्त किया जा सके। राजस्थान के जैसलमेर जिले में 'खादीन' तथा अन्य क्षेत्रों में 'जोहड़' इसके उदाहरण हैं।

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(2) टांका अथवा भूमिगत टैंक- राजस्थान के अर्द्धशुष्क और शुष्क क्षेत्रों में विशेष रूप से बीकानेर, फलौदी और बाड़मेर में लगभग प्रत्येक घर में पीने का पानी संग्रहित करने के लिए भूमिगत टैंक अथवा टांका हुआ करते थे। इसका आकार एक बड़े कमरे के समान होता है। फलौदी में एक घर में 6.1 मीटर गहरा, 4.27 मीटर लम्बा तथा 2.44 मीटर चौड़ा टांका था। टांका यहाँ सुविकसित छत वर्षा जल संग्रहण तंत्र का अभिन्न हिस्सा होता है जिसे मुख्य घर अथवा आंगन में बनाया जाता था। ये घरों की ढलवां छतों से पाइप द्वारा जुड़े होते हैं। छत से वर्षा का जल इन नलों से होकर भूमिगत टांका तक पहुँचता है जहाँ इसे एकत्रित किया जाता है।

प्रश्न: परम्परागत वर्षा जल संग्रहण की पद्धतियों को आधुनिक काल में अपना कर जल संरक्षण एवं भण्डारण किस प्रकार किया जा रहा है?

उत्तर— भारत में प्राचीन काल से ही वर्षा जल संग्रहण की परम्परा रही है। तत्कालीन समय में जल संग्रहण के उन्नत तरीकों के प्रमाण भी मिलते हैं। उस समय नहरों, तालाबों, टैंकों तथा बावड़ियों आदि के रूप में जल संग्रहित किया जाता था। आधुनिक काल में भी जल संग्रहण की इन पद्धतियों द्वारा निम्न प्रकार जल संरक्षण एवं भण्डारण किया जा रहा है-

(1) पहाड़ी एवं पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों ने 'गुल' अथवा 'कुल' (पश्चिमी हिमालय) जैसी वाहिकाएँ, नदी की धारा का रास्ता बदलकर खेतों में सिंचाई के लिए बनाई हैं।

(2) राजस्थान में छत के वर्षा जल को कृत्रिम रूप से विकसित कुओं (टांकों) में जमा कर लिया जाता था। वर्तमान समय में भी ये तरीके कारगर हैं।

(3) पश्चिम बंगाल में बाढ़ के मैदान में लोग अपने खेतों की सिंचाई के लिए बाढ़ जलवाहिकाएँ बनाते हैं।

(4) शुष्क और अर्द्धशुष्क क्षेत्रों में खेतों में वर्षा जल एकत्रित करने के लिए गड्ढे बनाये जाते हैं ताकि जल को संरक्षित करके खेती के काम में लिया जा सके। राजस्थान के जैसलमेर में 'खादीन' तथा अन्य क्षेत्रों में 'जोहड़' इसके उदाहरण हैं।

(5) आधुनिक काल में बेकार पड़े कुओं तथा हैंडपंप के माध्यम से भी छत वर्षाजल संग्रहण किया जा रहा है।

(6) कर्नाटक के मैसूर जिले के एक सुदूर गाँव गंडाथूर में ग्रामीणों ने अपने घरों में जल आवश्यकता पूर्ति हेतु छत वर्षाजल संग्रहण की व्यवस्था की हुई है।

(7) मेघालय में नदियों व झरनों के जल को बांस द्वारा बने पाइप द्वारा एकत्रित करने की 200 वर्ष पुरानी विधि प्रचलित है। लगभग 18 से 20 लीटर सिंचाई पानी बांस पाइप में आ जाता है तथा उसे सैकड़ों मीटर की दूरी तक ले जाया जाता है। अन्त में पानी का बहाव 20 से 80 बूंद प्रति मिनट तक कम करके पौधे पर छोड़ दिया जाता है।

(8) मेघालय की राजधानी शिलांग में वर्षा जल संग्रहण की पद्धति प्रचलित है। इस शहर के लगभग प्रत्येक घर में छत वर्षा जल संग्रहण की व्यवस्था है। घरेलू जल आवश्यकता की कुल मांग के लगभग 15 से 25 प्रतिशत भाग की पूर्ति छत जल संग्रहण व्यवस्था से होती है।

(9) तमिलनाडु एक ऐसा राज्य है जहाँ पूरे राज्य में हर घर में छत वर्षा जल संग्रहण ढाँचों को बनाना आवश्यक कर दिया गया है। इस संदर्भ में दोषी व्यक्तियों पर कानूनी कार्यवाही हो सकती है।

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भाग 2 — रिवीजन नोट्स (Notes & Summary)

📝 2. नोट्स: पाठ-सार, मुख्य बिंदु एवं शब्दावली

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं, भौगोलिक परिभाषाएं, राजनीतिक सिद्धांत एवं संपूर्ण अध्याय का सारगर्भित सारांश।

[पाठ-सार]

कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान पाठ 8 जल संसाधन चित्र 1

पाठ-सार

जल संसाधन-लगभग तीन-चौथाई धरातल जल से ढका हुआ है लेकिन इसमें प्रयोग में लाने योग्य अलवणीय जल का अनुपात बहुत कम है। अलवणीय जल सतही अपवाह और भौम जल स्रोत से प्राप्त होता है जिसका लगातार नवीकरण और पुनर्भरण जलीय चक्र द्वारा होता रहता है।

जल दुर्लभता-जल दुर्लभता को मोटे रूप से दो वर्गों में विभाजित किया जा सकता है-

(अ) जल दुर्लभता का मात्रात्मक पक्ष-(i) भारत में वर्षा में वार्षिक और मौसमी परिवर्तन के कारण जल संसाधनों की उपलब्धता में समय और स्थान के अनुसार विभिन्नता पाई जाती है लेकिन अधिकांशतया जल की कमी इसके अतिशोषण, अत्यधिक प्रयोग और समाज के विभिन्न वर्गों में जल के असमान वितरण के कारण होती है।

(ii) जल दुर्लभता अत्यधिक बढ़ती जनसंख्या और उसके परिणामस्वरूप जल की बढ़ती माँग और उसके असमान वितरण का परिणाम है।

(iii) अनाज का उत्पादन बढ़ाने के लिए सिंचित क्षेत्र बढ़ाया गया है और सिंचित कृषि में जल का सर्वाधिक उपयोग होता है।

(iv) स्वतंत्रता के उपरान्त भारत में तीव्र गति से औद्योगीकरण, शहरीकरण, उद्योगों की बढ़ती संख्या, ऊर्जा की आवश्यकता तथा मानव की जीवन शैली के कारण जल की मांग में वृद्धि हो रही है। उक्त सभी कारणों से जल संसाधनों पर दबाव बढ़ गया है।

(ब) जल दुर्लभता का गुणात्मक पक्ष-जल की दुर्लभता जल की खराब गुणवत्ता के कारण हो सकती है। यही कारण है कि लोगों की आवश्यकता के लिए प्रचुर मात्रा में जल उपलब्ध होने के बावजूद यह घरेलू और औद्योगिक अपशिष्टों, रसायनों, कीटनाशकों और कृषि में प्रयुक्त उर्वरकों के द्वारा प्रदूषित है तथा मानव उपयोग के लिए खतरनाक है।

जल संरक्षण और प्रबंधन की आवश्यकता-जल संसाधनों के अतिशोषण और कुप्रबंधन से जल संसाधनों का ह्रास हो सकता है और पारिस्थितिकी संकट की समस्या पैदा हो सकती है। अतः समय की माँग है कि हम अपने जल संसाधनों का संरक्षण और प्रबंधन करें।

बहुउद्देश्यीय नदी परियोजनाएँ और समन्वित जल संसाधन प्रबंधन-परम्परागत बाँध, नदियों और वर्षा जल को इकट्ठा करने के बाद, उसे खेतों की सिंचाई के लिए उपलब्ध करवाते थे। आजकल सिंचाई के साथ-साथ बाँधों के निर्माण का उद्देश्य विद्युत उत्पादन, घरेलू और औद्योगिक उपयोग, जल आपूर्ति, बाढ़ नियंत्रण, मनोरंजन, आन्तरिक नौ-संचालन और मछली पालन भी है। इसी कारण इन बाँधों को बहुउद्देश्यीय परियोजनाएँ भी कहा जाता है।

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सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X 159

बाँध का अर्थ- बहते जल को रोकने, दिशा देने या बहाव कम करने के लिए खड़ी की गई बाधा जो आमतौर पर जलाशय, झील अथवा जल भरण बनाती है, बाँध कहलाती है।

बाँधों के प्रकार- संरचना और उनमें प्रयुक्त पदार्थों के अनुसार बाँधों के प्रकार हैं-(i) लकड़ी के बाँध (ii) तटबंध बाँध (iii) पक्का बाँध।

ऊँचाई के अनुसार बाँधों को बड़े बाँध और मुख्य बाँध या नीचे बाँध, मध्यम और उच्च बाँधों में वर्गीकृत किया जा सकता है।

बड़े बाँधों की हानियाँ-(i) नदियों पर बाँध बनाने से उनका प्राकृतिक बहाव अवरुद्ध होता है, जिसके कारण तलछट जलाशय की तली में जमा होता रहता है। फलतः नदी तल अधिक चट्टानी हो जाता है और नदी जलीय जीव-आवासों में भोजन की कमी हो जाती है।

(ii) नदियों को टुकड़ों में बाँटने से अंडे देने की ऋतु में जलीय जीवों का नदियों में स्थानांतरण रुक जाता है।

(iii) वहाँ मौजूद वनस्पति और मिट्टी कालांतर में अपघटित हो जाती है।

(iv) लोगों के विस्थापन की समस्या पैदा हो जाती है।

(v) सिंचाई के कारण किसान जल गहन और वाणिज्यिक फसलों की तरफ आकर्षित हो रहा है। इससे मृदाओं का लवणीकरण हो रहा है।

(vi) भूमि मालिकों और भूमिहीनों में सामाजिक दूरी बढ़ रही है।

(vii) तलछट जमा होने से बाढ़ आने का कारण बन जाते हैं और भूमि निम्नीकरण की समस्याएँ बढ़ती हैं।

(viii) भूकंप आने की संभावना बढ़ती हैं।

(ix) बीमारियाँ बढ़ती हैं।

वर्षा जल संग्रहण- प्राचीनकाल में लोगों ने स्थानीय पारिस्थितिकीय परिस्थितियों और उनकी जल आवश्यकतानुसार वर्षा जल, भौम जल, नदी जल तथा बाढ़ जल संग्रहण के अनेक तरीके विकसित कर लिए थे। पहाड़ी और पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों ने 'गुल' अथवा 'कुल' जैसी वाहिकाएँ, नदी की धारा का रास्ता बदल कर खेतों में सिंचाई के लिए बनाई हैं।

राजस्थान में जल संग्रहण की परम्परा- राजस्थान के अर्द्ध शुष्क और शुष्क क्षेत्रों में विशेषकर बीकानेर, फलौदी और बाड़मेर में लगभग घर में पीने का पानी संग्रहित करने के लिए भूमिगत टैंक अथवा टाँका हुआ करते थे।

दुःख की बात है कि आज पश्चिमी राजस्थान में छत वर्षाजल संग्रहण की रीति इंदिरा गाँधी नहर से उपलब्ध बारहमासी पेयजल के कारण कम होती जा रही है।

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भाग 3 — परीक्षा उपयोगी प्रश्न (Important Questions)

3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर एवं बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक, लघूत्तरात्मक एवं निबंधात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

● बहुविकल्पीय प्रश्न-

1. जल के नवीकरण और पुनर्भरण को सुनिश्चित करने वाला प्रक्रम है-

(अ) वाष्पीकरण (ब) अपवाहन (स) संघनन (द) जलीय चक्र

2. सतलज-व्यास नदी बेसिन पर निर्मित बहुउद्देश्यीय परियोजना है-

(अ) हीराकुंड परियोजना (ब) भाखड़ा-नांगल परियोजना

(स) नागार्जुन सागर परियोजना (द) चम्बल परियोजना

3. महानदी बेसिन पर निर्मित बहुउद्देश्यीय परियोजना है-

(अ) सरदार सरोवर परियोजना (ब) सलाल परियोजना

(स) मैटूर परियोजना (द) हीराकुंड परियोजना

4. पश्चिमी राजस्थान में छत वर्षा जल संग्रहण की रीति कम होने का कारण है-

(अ) गंग नहर (ब) इन्दिरा गांधी नहर (स) घाघरा नदी (द) माही नदी की वितरिकाएँ

5. हीराकुंड बांध बनाया गया है-

(प्रश्न बैंक)

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सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X | 163

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(अ) महानदी | (ब) कृष्णा | (स) कावेरी | (द) चम्बल

6. कौनसा राज्य है जहाँ हर घर में छत वर्षा जल संग्रहण ढाँचों को बनाना आवश्यक कर दिया है- (प्रश्न बैंक)

(अ) हरियाणा | (ब) मेघालय | (स) तमिलनाडु | (द) कर्नाटक

7. बाँधों को 'आधुनिक भारत के मन्दिर' कौन कहा करते थे? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)

(अ) महात्मा गांधी | (ब) सरदार वल्लभ भाई पटेल

(स) जवाहर लाल नेहरू | (द) मोरारजी देसाई

8. बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं का उद्देश्य है-

(अ) विद्युत उत्पादन | (ब) बाढ़ नियंत्रण

(स) घरेलू एवं औद्योगिक उपयोग हेतु जल आपूर्ति | (द) उपर्युक्त सभी

9. राजस्थान के अर्ध-शुष्क और शुष्क क्षेत्रों में छत वर्षाजल संग्रहण हेतु प्राय: हर घर में बनाया जाता था-

(अ) टाँका | (ब) गुल | (स) जोहड़ | (द) कुआँ

10. विश्व में सबसे अधिक वर्षा कहाँ होती है? (प्रश्न बैंक)

(अ) केरल | (ब) चेरापूँजी और मॉसिनराम

(स) राजस्थान | (द) उत्तराखण्ड

11. ईसा से एक शताब्दी पहले गंगा नदी की बाढ़ के जल को संरक्षित करने के लिए एक उत्कृष्ट जल संग्रहण तंत्र बनाया गया था-

(अ) श्रृंगवेरा में | (ब) वेन्नूर में | (स) कलिंग में | (द) कोल्हापुर में

12. अपने समय की सबसे बड़ी कृत्रिम झीलों में से एक भोपाल झील बनाई गई- (प्रश्न बैंक)

(अ) 11वीं शताब्दी में | (ब) 12वीं शताब्दी में | (स) 13वीं शताब्दी में | (द) 14वीं शताब्दी में

13. सरदार सरोवर बाँध किस नदी पर बनाया गया है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)

(अ) महानदी | (ब) गंगा | (स) नर्मदा | (द) गोदावरी

अथवा

सरदार सरोवर बाँध बनाया गया है- (प्रश्न बैंक)

(अ) महानदी | (ब) दामोदर | (स) नर्मदा नदी | (द) कावेरी

14. भारत के किस क्षेत्र के लोगों ने 'गुल' अथवा 'कुल' जैसी वाहिकाएँ नदी की धारा का रास्ता बदलकर खेतों में सिंचाई के लिए बनाई हैं-

(अ) मैदानी क्षेत्रों में | (ब) रेगिस्तानी क्षेत्रों में

(स) समुद्र तटीय क्षेत्रों में | (द) पहाड़ी क्षेत्रों में

15. किस राज्य में बाढ़ के मैदान में लोग अपने खेतों की सिंचाई के लिए बाढ़ जल वाहिकाएँ बनाते थे?

(अ) पश्चिम बंगाल में | (ब) असम में | (स) केरल में | (द) पांडिचेरी में

16. शुष्क और अर्धशुष्क क्षेत्रों में वर्षा जल एकत्रित करने के लिए किस स्थान पर खादीन या जोहड़ नामक गड्ढे बनाए जाते थे?

(अ) घरों में | (ब) सार्वजनिक स्थानों में

(स) खेतों में | (द) उपर्युक्त सभी स्थानों में

17. निम्न में से किस मिशन का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना है?

(अ) बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ | (ब) बिजली बचाओ

(स) पेड़ लगाओ | (द) जल जीवन मिशन

18. 14वीं सदी में दिल्ली में सिरी फोर्ट क्षेत्र में जल की सप्लाई हेतु हौज खास बनवाया था-

(अ) अलाउद्दीन खिलजी ने | (ब) इल्तुतमिश ने | (स) चन्द्रगुप्त मौर्य ने | (द) कुतुबुद्दीन ऐबक ने

19. पृथ्वी का कितने प्रतिशत भाग जल से घिरा है? (प्रश्न बैंक)

(अ) 1/4 भाग | (ब) 1/3 भाग | (स) 3/4 भाग | (द) 3/2 भाग

20. धरातल पर अधिकतर क्षेत्रों में जल की कमी होने का कारण है-

(अ) जल का अतिशोषण | (ब) जल का अत्यधिक प्रयोग

(स) समाज के विभिन्न वर्गों में जल का असमान वितरण

(द) उपर्युक्त सभी कारण

--- [ पृष्ठ संख्या: 171 ] ---

21. भारत की नदियों पर अत्यधिक दुष्प्रभाव डालने का कारक है-

(अ) नगरीकरण (ब) औद्योगीकरण (स) बढ़ती जनसंख्या (द) उपर्युक्त सभी

22. बहुउद्देशीय परियोजनाओं के कारण सम्भावना बढ़ जाती है-

(अ) भूकम्प आने की (ब) सूखे की (स) अकाल की (द) बाढ़ आने की

23. गाँव गंडाथूर जिसमें ग्रामीणों ने अपने घर में जल आवश्यकता पूर्ति हेतु छत वर्षा जल संग्रहण की व्यवस्था की हुई है, भारत के किस राज्य में स्थित है?

(अ) राजस्थान (ब) महाराष्ट्र (स) कर्नाटक (द) गुजरात

24. भाखड़ा नांगल परियोजना बनाई गई है- (प्रश्न बैंक)

(अ) ब्रह्मपुत्र नदी पर (ब) सतलज-व्यास नदी पर

(स) महानदी पर (द) गंगा नदी पर

25. नर्मदा नदी पर स्थित बाँध है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)

(अ) सरदार सरोवर बाँध (ब) हरिके बैराज

(स) राणा प्रताप सागर बाँध (द) जवाई बाँध

26. निम्न में से कौनसी नदी को शोक की नदी कहा जाता है?

(अ) गंगा नदी (ब) नर्मदा नदी (स) दामोदर नदी (द) व्यास नदी

27. भारत की सबसे बड़ी जल संसाधन परियोजना है-

(अ) सरदार सरोवर बाँध (ब) भाखड़ा-नांगल बाँध

(स) हीराकुंड बाँध (द) कोयना बाँध

28. प्राकृतिक जल का शुद्धतम रूप है-

(अ) नदी का जल (ब) पालर पानी (स) हैंडपंप का पानी (द) नलकूप का पानी

29. पहाड़ी शिखरों पर सदानीरा झरनों की दिशा परिवर्तित करने के लिए उपयोग किया जाता है-

(अ) पीवीसी पाइप (ब) प्लास्टिक का पाइप (स) बाँस के पाइप (द) उपर्युक्त में से कोई नहीं

उत्तरमाला

1. (द) 2. (ब) 3. (द) 4. (ब) 5. (अ) 6. (स) 7. (स)

8. (द) 9. (अ) 10. (ब) 11. (अ) 12. (अ) 13. (स) 14. (द)

15. (अ) 16. (स) 17. (द) 18. (अ) 19. (स) 20. (द) 21. (द)

22. (अ) 23. (स) 24. (ब) 25. (अ) 26. (स) 27. (अ) 28. (ब) 29. (स)।

● रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

1. समुचित जल प्रबंधन के कारण ............. जैसे 25 सेमी. औसत वार्षिक वाले देश में जल का कोई अभाव नहीं है।

2. ............. शहर में घरेलू जल आवश्यकता की कुल माँग के लगभग 15-25 प्रतिशत हिस्से की पूर्ति छत जल संग्रहण व्यवस्था से होती है।

3. बाँध के जलाशयों में ............. जमा होने से वे बाढ़ आने का कारण बन जाते हैं।

4. पालर पानी प्राकृतिक जल का ............. रूप समझा जाता है।

5. वर्षा का ............. जल छत और नलों को साफ करने में प्रयोग होता था।

6. ............. में नदियों व झरनों के जल को बाँस द्वारा बने पाइप द्वारा एकत्रित करने की 200 वर्ष पुरानी विधि प्रचलित है।

7. ............. नदी शोक की नदी कही जाती है।

8. जवाहरलाल नेहरू गर्व से ............. को 'आधुनिक भारत का मंदिर' कहा करते थे। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)

9. सम्पूर्ण पृथ्वी के लगभग ............. भाग पर जल का विस्तार पाया जाता है।

10. 2006 में ............. और ............. में भारी वर्षा के दौरान बाँधों से जल छोड़ा गया। (प्रश्न बैंक)

11. खादीन राजस्थान के ............. जिले में पाए जाते हैं। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)

12. हीराकुंड बाँध ............. पर स्थित है। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)

13. अलवणीय जल हमें सतही अपवाह और ............. स्रोत से प्राप्त होता है। (प्रश्न बैंक)

--- [ पृष्ठ संख्या: 172 ] ---

सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X | 165

14. जवाहर लाल नेहरू ने बहु-उद्देशीय परियोजनाओं को .................... कहा है। (प्रश्न बैंक)

15. भाखड़ा-नांगल परियोजना .................... उत्पादन और .................... दोनों के काम आती है। (प्रश्न बैंक)

16. .................... में वर्षा जल अगली वर्षा ऋतु तक संग्रहित किया जा सकता है। (प्रश्न बैंक)

उत्तरमाला

1. इजराइल 2. शिलांग 3. तलछट 4. शुद्धतम 5. पहला 6. मेघालय 7. दामोदर 8. बाँधों 9. तीन-चौथाई 10. महाराष्ट्र, गुजरात 11. जैसलमेर 12. महानदी नदी 13. भौमजल 14. आधुनिक भारत के मन्दिर 15. जल विद्युत, सिंचाई 16. टांका।

● अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. विश्व का सबसे अधिक वर्षा वाला स्थान कौनसा है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— चेरापूंजी तथा मॉसिनराम।

प्रश्न 2. गुल अथवा कुल से आप क्या समझते हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— गुल अथवा कुल शब्द पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों द्वारा बनाई गई वाहिकाएँ जिनका उपयोग सिंचाई के लिए होता है, को कहा जाता है। इन वाहिकाओं को नदी की धारा का रास्ता बदलकर बनाया जाता है।

प्रश्न 3. वर्ष 2025 में अनुमानतः कितने प्रतिशत लोग जल की नितांत कमी झेलेंगे? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— वर्ष 2025 में अनुमानतः 20 करोड़ लोग जल की नितांत कमी झेलेंगे।

प्रश्न 4. हमारे देश में सिंचाई के प्रमुख साधन कौन-कौनसे हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— सिंचाई के प्रमुख साधन हैं-नदियाँ, नहरें, कुएं और नलकूप, तालाब और झीलें, टांक और बावड़ी, ड्रिप सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकें।

प्रश्न 5. जल संसाधन के प्रमुख स्रोतों को संक्षेप में बताइए।

उत्तर— हालांकि तीन-चौथाई पृथ्वी जल से ढकी है तथापि प्रयोग में लाने योग्य अलवणीय जल का अनुपात अत्यधिक कम है। अलवणीय जल का प्रमुख स्रोत सतही अपवाह और भौमजल स्रोत हैं।

प्रश्न 6. भारत में अलवणीय जल के दो स्रोत कौन-कौन से हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— (1) सतही अपवाह (2) भौम जल स्रोत।

प्रश्न 7. 'बाँस ड्रिप सिंचाई प्रणाली' को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर— 'बाँस ड्रिप सिंचाई प्रणाली' मेघालय में नदियों व झरनों के जल को बाँस द्वारा बने पाइप द्वारा एकत्रित करने की विधि है।

प्रश्न 8. बाँस ड्रिप सिंचाई प्रणाली कौनसे राज्य में प्रचलित है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— बाँस ड्रिप सिंचाई प्रणाली भारत के पूर्वोत्तर राज्य 'मेघालय' में प्रचलित है।

प्रश्न 9. सरदार सरोवर बाँध किस राज्य में बनाया गया है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— गुजरात राज्य में।

प्रश्न 10. जल संभरण क्षेत्र का अर्थ बताइए।

उत्तर— एक ऐसा भू-आकृति क्षेत्र जिसमें विभिन्न उपक्षेत्रों का जल हेतु समन्वित विकास किया गया हो, जल संभरण क्षेत्र कहलाता है।

प्रश्न 11. छत वर्षा जल संग्रहण के दो माध्यमों के नाम बताइए।

उत्तर— (1) हैण्डपम्प के माध्यम से (2) बेकार पड़े कुएं के माध्यम से।

प्रश्न 12. भारत के उस राज्य का नाम बताइए जिसमें प्रत्येक घर में छत वर्षा जल संग्रहण ढाँचों का बनाना आवश्यक कर दिया गया है।

उत्तर— तमिलनाडु राज्य।

प्रश्न 13. भारत के उन राज्यों के नाम बताइए जो कि कृष्णा-गोदावरी विवाद से सम्बन्धित हैं।

उत्तर— महाराष्ट्र, कर्नाटक और आन्ध्र प्रदेश।

प्रश्न 14. अलवणीय जल के तीन प्रत्यक्ष स्रोतों के नाम बताइए।

उत्तर— (i) वर्षण, (ii) सतही अपवाह, (iii) भूमिगत जल।

प्रश्न 15. बहुउद्देशीय परियोजनाओं से आप क्या समझते हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— बहुउद्देशीय परियोजनाएँ वे हैं जो एक साथ अनेक उद्देश्यों की पूर्ति करती हैं, जैसे-सिंचाई, विद्युत उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण और मत्स्य पालन आदि।

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प्रश्न 16. बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं द्वारा पूरित किन्हीं दो उद्देश्यों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर— (i) बाढ़ नियंत्रण करना। (ii) सिंचाई को बढ़ावा देना।

प्रश्न 17. बाढ़ नियंत्रण हेतु कोई एक उपाय सुझाइए।

(माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22; मॉडल पेपर, 2022-23)

उत्तर— बाँध बनाकर बाढ़ों को रोका जा सकता है।

प्रश्न 18. जल के चार प्रमुख उपयोग बताइए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— जल के प्रमुख उपयोग हैं-(i) पीने में तथा घरेलू कार्यों में (ii) सिंचाई में (iii) औद्योगिक उद्देश्यों की पूर्ति में (iv) बिजली उत्पादन में।

प्रश्न 19. "कुएं और नलकूप भारत के उत्तरी मैदानों में सिंचाई के सबसे अधिक लोकप्रिय साधन हैं।" कोई दो तर्क देकर इस कथन की पुष्टि कीजिए।

उत्तर— (i) उत्तरी मैदानों में भौमिक जल धरातल के कुछ ही नीचे मिलता है तथा (ii) मिट्टी मुलायम है जिससे कुएं व नलकूप लगाना आसान है।

प्रश्न 20. महानदी पर स्थित बहुउद्देशीय परियोजना का नाम बताइये।

उत्तर— हीराकुंड परियोजना।

प्रश्न 21. भारत की नदियों के जल के प्रदूषित होने के दो कारण बताइये।

उत्तर— (1) बढ़ती जनसंख्या, (2) नगरीकरण और औद्योगीकरण।

प्रश्न 22. प्राचीन भारत में उत्कृष्ट सिंचाई तंत्र होने के सबूत कौन-कौनसे स्थानों पर पाए जाते हैं? किन्हीं दो स्थानों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर— भारत में उड़ीसा में कलिंग, आन्ध्रप्रदेश में नागार्जुन कोंडा में उत्कृष्ट सिंचाई तंत्र होने के सबूत मिलते हैं।

प्रश्न 23. बाँध से क्या अभिप्राय है?

उत्तर— प्रवाहित जल को रोकने, दिशा देने या बहाव कम करने के लिए खड़ी की गई बाधा जो कि आमतौर पर जलभरण बनाती है, बाँध कहलाती है।

प्रश्न 24. वर्षा जल संग्रहण के दो प्रमुख उद्देश्य बताइये।

उत्तर— (i) पीने के पानी की बढ़ती हुई माँग को पूरा करना।

(ii) जल प्रवाह को कम करना तथा एकत्रित जल से आवश्यकता के समय सिंचाई करना।

प्रश्न 25. वर्षा जल संग्रहण का अर्थ बताइए।

उत्तर— वर्षा के जल को एकत्रित करना वर्षा जल संग्रहण कहलाता है।

प्रश्न 26. जल संरक्षण के कोई दो उपाय बताइए।

उत्तर— (i) छत वर्षा जल संग्रहण। (ii) नदियों के जल को एक-दूसरे से मिलाना।

प्रश्न 27. बड़े बाँधों के निर्माण के फलस्वरूप उत्पन्न होने वाली दो प्रमुख हानियाँ बताइये।

उत्तर— (i) बड़ी संख्या में लोगों का विस्थापन।

(ii) बड़ी संख्या में पेड़-पौधों का जलमग्न होना।

प्रश्न 28. बहुउद्देशीय परियोजनाओं के निर्माण के विरोध में एक तर्क दीजिए।

उत्तर— इन परियोजनाओं के निर्माण से स्थानीय समुदायों का विस्थापन होता है।

प्रश्न 29. भारत के ऐसे तीन राज्यों के नाम लिखिए जहाँ छत वर्षा जल संग्रहण का तरीका अपनाया जाता है।

उत्तर— (1) राजस्थान (2) तमिलनाडु (3) मेघालय।

प्रश्न 30. भारत में सिंचाई के तीन प्रमुख साधन बताइए। दक्षिणी राज्यों में कौनसा सिंचाई का साधन अधिक लोकप्रिय है?

उत्तर— भारत में तीन प्रमुख सिंचाई के साधन हैं-(i) कुएं, नलकूप (ii) नहरें (iii) तालाब।

दक्षिणी भारत में तालाब अधिक लोकप्रिय हैं।

प्रश्न 31. टांका क्या है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)

उत्तर— राजस्थान में घर में पीने के पानी के लिए वर्षा जल संग्रहित करने के लिए बनाए गए भूमिगत टैंक को टांका कहा जाता है।

प्रश्न 32. वर्षा जल संग्रहण की आवश्यकता क्यों है? लिखिए। (प्रश्न बैंक)

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सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X 167

उत्तर—वर्षा जल संग्रहण की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि यह जल संरक्षण का एक असरदार तरीका है। इससे भूजल स्तर बढ़ता है और पानी की कमी को कम करने में मदद मिलती है।

प्रश्न 33. पृथ्वी का कितना भाग जल से घिरा हुआ है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— पृथ्वी का तीन-चौथाई भाग जल से घिरा हुआ है।

प्रश्न 34. भारत के उस क्षेत्र का नाम बताइये जो जल की कमी से पीड़ित रहता है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— राजस्थान का थार मरुस्थल।

प्रश्न 35. जल प्रदूषण के मुख्य कारण क्या हैं? (कोई दो) (प्रश्न बैंक; माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)

उत्तर— घरेलू और औद्योगिक अपशिष्टों, रसायनों, कीटनाशकों और कृषि में प्रयोग किए जाने वाले उर्वरकों से जल प्रदूषण होता है।

● लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. राजस्थान के अर्द्धशुष्क एवं शुष्क क्षेत्रों में वर्षा जल संग्रहण किस प्रकार किया जाता है?

अथवा

हमारे राज्य में अर्द्धशुष्क एवं शुष्क क्षेत्रों में वर्षा जल किस प्रकार संग्रहण किया जाता है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— राजस्थान के अर्द्ध-शुष्क और शुष्क क्षेत्रों में खेतों में वर्षा के जल को एकत्रित करने के लिए गड्ढे बनाए जाते थे जिससे भूमि की सिंचाई की जा सके तथा संरक्षित जल को कृषि के काम में प्रयुक्त किया जा सके। राजस्थान के जैसलमेर जिले में 'खादीन' तथा अन्य क्षेत्रों में 'जोहड़' इसके उदाहरण हैं। पीने के पानी के लिए टांका बनाकर वर्षा जल को संग्रहित किया जाता है।

प्रश्न 2. आपके मतानुसार 'बाँध' कैसे उपयोगी हैं?

उत्तर— (1) बाँधों द्वारा जल संरक्षण एवं बाढ़ नियंत्रण किया जाता है। साथ ही सिंचाई के लिए जल की आपूर्ति की जाती है।

(2) बाँध विद्युत उत्पादन, घरेलू और औद्योगिक उपयोग, मनोरंजन, आन्तरिक नौसंचालन एवं मत्स्य पालन के लिए भी उपयोगी होते हैं।

प्रश्न 3. कृष्णा-गोदावरी विवाद क्या है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर— कृष्णा-गोदावरी विवाद की शुरुआत महाराष्ट्र सरकार के द्वारा कोयना पर जलविद्युत परियोजना के लिए बाँध बनाकर जल की दिशा परिवर्तित करने पर कर्नाटक और आन्ध्रप्रदेश सरकारों द्वारा यह आपत्ति उठाए जाने के फलस्वरूप हुई कि इससे नदी के निचले हिस्सों में जल प्रवाह कम हो जायेगा और कृषि और उद्योगों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

प्रश्न 4. जल की कमी के प्रमुख कारण क्या हैं?

उत्तर— यद्यपि वर्षा में वार्षिक और मौसमी परिवर्तन के कारण जल संसाधनों की उपलब्धता में समय और स्थान के अनुसार विभिन्नता है, तथापि अधिकतर जल की कमी इसके अतिशोषण, अत्यधिक प्रयोग और समाज के विभिन्न वर्गों में जल के असमान वितरण के कारण होती है।

प्रश्न 5. अत्यधिक बढ़ती जनसंख्या कैसे जल दुर्लभता के लिए उत्तरदायी है?

अथवा

अधिक जनसंख्या के कारण जल दुर्लभता होती है। स्पष्ट कीजिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— किसी क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में जल संसाधन होने के बावजूद वहाँ अत्यधिक बढ़ती जनसंख्या जल दुर्लभता के लिए उत्तरदायी है क्योंकि-

(i) जल अधिक जनसंख्या के लिए घरेलू उपयोग में ही नहीं बल्कि अधिक अनाज उगाने के लिए सिंचित क्षेत्र बढ़ाने की आवश्यकता होती है।

(ii) बढ़ती जनसंख्या के परिणामस्वरूप जल की बढ़ती माँग और उसके असमान वितरण का परिणाम हो सकता है।

प्रश्न 6. "भारत में जल संकटग्रस्त संसाधन है।" इस कथन की पुष्टि कीजिए।

उत्तर— भारत में जल संकटग्रस्त संसाधन है-

(i) भारत में बढ़ती जनसंख्या के कारण जल के अत्यधिक प्रयोग से जल की कमी हो गई है।

(ii) भारत में जल प्रदूषित किये जाने के कारण उपयोग में लाने योग्य नहीं रह गया है।

(iii) वर्षा की कमी के कारण जल और भी अधिक संकटग्रस्त संसाधन हो जाता है।

प्रश्न 7. "समय की माँग है कि हम अपने जल संसाधनों का संरक्षण और प्रबन्ध करें।" स्पष्ट कीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)

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उत्तर—समय की माँग है कि हम अपने जल संसाधनों का संरक्षण और प्रबन्ध करें क्योंकि जल संसाधनों के अतिशोषण और कुप्रबन्धन से इन संसाधनों का ह्रास हो सकता है और पारिस्थितिकी संकट की समस्या पैदा हो सकती है जिसका हमारे जीवन पर गम्भीर प्रभाव हो सकता है।

प्रश्न 8. जल जीवन मिशन के लक्ष्य पर प्रकाश डालिए।

उत्तर—जल जीवन मिशन का लक्ष्य नल जल कनेक्शनों की कार्यशीलता सुनिश्चित करके प्रत्येक ग्रामीण परिवार को दीर्घावधि आधार पर नियमित रूप से 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन की दर से पीने योग्य नल के जल की आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

प्रश्न 9. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के उद्देश्यों के बारे में संक्षेप में लिखिए।

उत्तर—प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के उद्देश्य—इस योजना के कुछ व्यापक उद्देश्य हैं-खेत पर जल की भौतिक पहुँच को बढ़ाना और सुनिश्चित सिंचाई (हर खेत को पानी) के अंतर्गत कृषि योग्य क्षेत्र का विस्तार करना, अपव्यय को कम करने हेतु जल उपयोग दक्षता में सुधार करना तथा अवधि और सीमा दोनों में उपलब्धता बढ़ाना, सिंचाई और अन्य जल बचत प्रौद्योगिकियाँ (प्रति बूँद अधिक फसल) और सतत जल संरक्षण प्रणाली को अपनाना आदि।

प्रश्न 10. बहुउद्देशीय परियोजनाएँ और बड़े बाँध कई कारणों से परिनिरीक्षण और विरोध के विषय बन गये हैं। कोई दो कारण लिखिए।

उत्तर—बहुउद्देशीय परियोजनाएँ और बड़े बाँध परिनिरीक्षण और विरोध के विषय बन गए हैं। इसके दो कारण निम्न प्रकार हैं-

(i) नदियों पर बाँध बनाने और उनका बहाव नियंत्रित करने से उनका प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित होता है, जिससे तलछट का प्रवाह खराब होता है और जलाशय के तल पर अत्यधिक तलछट जम जाने से तलछट चट्टानी हो जाती है जिससे नदियों के जलीय जीवन को भोजन की कमी हो जाती है।

(ii) बाँध नदियों को टुकड़ों में बाँट देता है जिससे अण्डे देने की ऋतु में जलीय जीवों का स्थानान्तरण कठिन हो जाता है।

प्रश्न 11. भारत में जलीय अभाव का प्रमुख कारण क्या है? क्या इसे नियंत्रित किया जा सकता है?

उत्तर—भारत में जलीय अभाव का प्रमुख कारण समुचित जल प्रबन्धन का न होना है। देश में जल की उपलब्धता और उसके स्वरूप के अनुसार समुचित जलप्रबंधन न होने के कारण ही वर्षा का जल नदी-नालों में तेजी से बहकर समुद्र में चला जाता है जिससे वर्षा के बाद के लगभग नौ महीने देश के लिए पानी की कमी के होते हैं। इसे उचित प्रबंधन के द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है।

प्रश्न 12. जल-दुर्लभता के गुणात्मक पहलू का वर्णन कीजिए।

उत्तर—जल-दुर्लभता जल की खराब गुणवत्ता के कारण भी हो सकती है। कई क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ लोगों की आवश्यकता के लिए प्रचुर मात्रा में जल उपलब्ध होने के बावजूद यह घरेलू और औद्योगिक अपशिष्टों, रसायनों, कीटनाशकों और कृषि में प्रयुक्त उर्वरकों द्वारा प्रदूषित है और मानव उपयोग के लिए खतरनाक है। यही जल-दुर्लभता का गुणात्मक पहलू है।

प्रश्न 13. चित्र की सहायता से वर्षा जल संचयन प्रणाली को पहचान कर उस पर चर्चा कीजिए।

(माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)

[वर्षा जल संचयन प्रणाली (हैंडपंप और छत का जल संग्रहण)]

कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान पाठ 8 जल संसाधन चित्र 2

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सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X 169

अथवा

छत वर्षा जल संग्रहण पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

अथवा

छत वर्षा जल संग्रहण की विधि समझाइए।

अथवा

बेकार पड़े कुएं के माध्यम से जल पुनर्भरण का वर्णन कीजिए।

उत्तर—'छत वर्षाजल संग्रहण' की विधि निम्न प्रकार है-

(1) पी वी सी पाइप का इस्तेमाल करके छत का वर्षाजल एकत्रित किया जाता है।

(2) रेत और ईंट का प्रयोग करके जल का छनन (filter) किया जाता है।

(3) भूमिगत पाइप के द्वारा जल हौज तक ले जाया जाता है जहाँ से इसे तुरन्त प्रयोग किया जा सकता है।

(4) हौज से अतिरिक्त जल बेकार पड़े कुएं तक ले जाया जाता है।

(5) कुएं का जल भूमिगत जल का पुनर्भरण करता है।

(6) बाद में इस जल का उपयोग किया जा सकता है।

प्रश्न 14. बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं के दो लाभ बताइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)

उत्तर— बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं के दो लाभ निम्नलिखित हैं-

(1) इनसे खेती को निर्बाध गति से जलापूर्ति होने से समय पर फसलों की सिंचाई होती है और कृषि उत्पादन बढ़ता है। कृषि उत्पादन बढ़ने से किसानों की आय में वृद्धि होती है।

(2) इनसे उद्योगों को ऊर्जा मिलती है जिससे औद्योगिक उत्पादन बढ़ता है।

प्रश्न 15. सरदार सरोवर बाँध के बारे में आप क्या जानते हैं?

उत्तर— सरदार सरोवर बाँध गुजरात में नर्मदा नदी पर बनाया गया है। यह भारत की एक बड़ी जल संसाधन परियोजना है जिसमें चार राज्य-महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात तथा राजस्थान सम्मिलित हैं। सरदार सरोवर परियोजना गुजरात (3112 गाँवों तथा 15 जिलों) तथा राजस्थान के सूखाग्रस्त तथा मरुस्थलीय भागों तथा महाराष्ट्र के आदिवासी पहाड़ी भागों की जल की आवश्यकता को पूरा करेगी।

प्रश्न 16. भारत के जल-संसाधन मंत्री के रूप में यदि आपको नदी घाटी परियोजना का मसौदा तैयार करने को कहा जाए तो आप किन-किन बिन्दुओं का ध्यान रखेंगे? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)

उत्तर— भारत के जल-संसाधन मंत्री के रूप में यदि मुझे नदी घाटी परियोजना का मसौदा तैयार करने को कहा जाए तो मैं निम्न बिन्दुओं का ध्यान रखूँगा-(i) बाँध से होने वाली सिंचाई (ii) विद्युत उत्पादन (iii) घरेलू व औद्योगिक उपयोग के लिए जल आपूर्ति (iv) बाढ़ नियंत्रण तथा (v) क्षेत्र में होने वाली विस्थापन की समस्या का निराकरण।

प्रश्न 17. 'नर्मदा बचाओ आन्दोलन' के कोई दो लक्ष्य बताइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)

उत्तर— नर्मदा बचाओ आन्दोलन के दो लक्ष्य ये हैं-

(1) यह आन्दोलन जंगलों के बाँध के पानी में डूबने जैसे पर्यावरणीय मुद्दों पर केन्द्रित है।

(2) इस आन्दोलन का लक्ष्य बाँध से विस्थापित गरीब लोगों को सरकार से सम्पूर्ण पुनर्वास की सुविधाएँ दिलाना है।

● दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1. बाँध क्या है? इसके निर्माण के उद्देश्य बताइये।

अथवा

बाँध क्या है? इन्हें बहु-उद्देश्य परियोजनाएँ क्यों कहते हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— बाँध का अर्थ-प्रवाहित जल को रोकने, दिशा देने या बहाव को कम करने के लिए खड़ी की गई बाधा जो कि आम तौर पर जलाशय, झील अथवा जल भरण बनाती है, बाँध कहलाती है। बाँध का अर्थ जलाशय से होता है न कि इसके ढाँचे से।

उद्देश्य-सिंचाई के अलावा बाँधों का उद्देश्य विद्युत उत्पादन, घरेलू और औद्योगिक उपयोग, जल आपूर्ति, बाढ़ नियंत्रण, मनोरंजन, आन्तरिक नौसंचालन और मत्स्य पालन भी है। इसी कारण बाँधों को बहुउद्देश्यीय परियोजनाएँ कहा जाता है। जहाँ एकत्रित जल के अनेकों उपयोग समन्वित होते हैं। उदाहरण के लिए, सतलज-व्यास बेसिन में

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भाखड़ा-नांगल परियोजना जलविद्युत उत्पादन और सिंचाई दोनों के काम में आती है। इसी प्रकार महानदी बेसिन में हीराकुंड परियोजना जल संरक्षण और बाढ़ नियंत्रण का समन्वय है।

प्रश्न 2. आपके अनुसार, पानी के संरक्षण और प्रबंधन में बाँध किस प्रकार मदद करते हैं?

(माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)

उत्तर— पानी के संरक्षण और प्रबंधन में बाँध निम्न प्रकार मदद करते हैं-

(1) बाँधों द्वारा जल संरक्षण एवं बाढ़ का नियंत्रण किया जाता है।

(2) बाँधों से सिंचाई के लिए जल की आपूर्ति की जाती है।

(3) बाँध विद्युत उत्पादन, घरेलू और औद्योगिक उपयोग, मनोरंजन, आंतरिक नौसंचालन एवं मत्स्य पालन के लिये भी उपयोगी होते हैं।

प्रश्न 3. बाढ़ से बचाव के लिए तीन सुरक्षा उपाय सुझाइए।

(माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)

उत्तर— बाढ़ से बचाव के तीन सुरक्षा उपाय निम्न हैं-

(1) बाढ़ से बचाव हेतु बाँध बनाए जाने चाहिए। सहायक नदियों व धाराओं पर अनेक छोटे-छोटे बाँधों का निर्माण किया जाना चाहिए जिससे मुख्य नदी में बाढ़ के खतरे को कम किया जा सके।

(2) वर्षा जल का उचित संग्रहण किया जाना चाहिए। भौम जल पुनर्भरण के प्रयास करने चाहिए।

(3) नदियों के ऊपरी जल संग्रहण क्षेत्रों में सघन वृक्षारोपण किया जाना चाहिए।

प्रश्न 4. भारत में नदी परियोजनाओं के निर्माण पर उठाई गई आपत्तियों के कारण बताइये।

उत्तर— भारत में नदी परियोजनाओं पर उठाई गई अधिकतर आपत्तियाँ उनके उद्देश्यों में विफल हो जाने से सम्बन्धित हैं, यथा-

(1) जो बाँध बाढ़ नियंत्रण के लिए बनाए जाते हैं उनके जलाशयों में तलछट जमा होने से वे बाढ़ आने का कारण बन जाते हैं।

(2) बाँधों के जलाशय में तलछट जमा हो जाने के कारण भूमि निम्नीकरण की समस्याएँ बनी हैं।

(3) बहुउद्देश्यीय योजनाओं के कारण भूकंप आने की संभावना बढ़ जाती है।

(4) अत्यधिक जल उपयोग से जलजनित बीमारियाँ, फसलों में कीटाणुजनित बीमारियाँ और प्रदूषण में वृद्धि हो जाती है।

(5) इसके अलावा बाँध बनाने से नदियों का प्राकृतिक बहाव अवरुद्ध होता है जिससे तलछट बहाव कम हो जाता है। इससे नदी का तल अधिक चट्टानी हो जाता है और नदी जलीय जीव आवासों में भोजन की कमी हो जाती है।

(6) बाँध नदियों को टुकड़ों में बाँट देते हैं जिससे विशेषकर अंडे देने की ऋतु में जलीय जीवों का नदियों में स्थानांतरण अवरुद्ध हो जाता है।

प्रश्न 5. तीव्र शहरीकरण ने जल दुर्लभता को बढ़ाया है। व्याख्या कीजिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— स्वतंत्रता के पश्चात् भारत में तीव्र गति से शहरीकरण हुआ। बढ़ती बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के कारण शहरों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई। शहरों की बढ़ती संख्या तथा जनसंख्या और शहरी जीवन शैली के कारण जल तथा ऊर्जा की आवश्यकता में बढ़ोतरी के साथ ही इनसे सम्बन्धित समस्याएँ भी गहरी हुई हैं। शहरी आवास समितियों अथवा कॉलोनियों में जल आपूर्ति हेतु नलकूप स्थापित किए गए हैं। यदि हम यह कहें कि शहरों में जल संसाधनों का अतिशोषण हो रहा है तथा इसके कारण जल संसाधन में कमी आ रही है, तो यह कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी।

अतः हम यह कह सकते हैं कि तीव्र शहरीकरण ने जल दुर्लभता को बढ़ाया है।

प्रश्न 6. अटल भूजल योजना का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।

उत्तर— अटल भूजल योजना-अटल भूजल योजना को सात राज्यों-गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के 80 जिलों के 229 प्रशासनिक तालुकाओं के 8220 जल संकटग्रस्त ग्राम पंचायतों में लागू किया जा रहा है। चयनित राज्यों में भारत के कुल जल संकटग्रस्त (अति-दोहित, गम्भीर, अर्ध-गम्भीर) ब्लॉकों की संख्या का लगभग 37 प्रतिशत हिस्सा है। अटल जल का एक प्रमुख पहलू समुदाय में व्यवहारगत परिवर्तन लाना है, जिसमें उपभोग के प्रचलित दृष्टिकोण से लेकर जल संरक्षण शामिल है।

प्रश्न 7. वर्षा जल संग्रहण किसे कहते हैं? वर्षा जल संग्रहण के उद्देश्य लिखिए।

उत्तर— वर्षा जल संग्रहण-वर्षा के जल को शुष्क मौसम में उपयोग करने के लिए भण्डारित करके रखना वर्षा जल संग्रहण कहा जाता है।

--- [ पृष्ठ संख्या: 178 ] ---

सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X 171

वर्षा जल संग्रहण के उद्देश्य-

(1) वर्षा जल संग्रहण से नदियों में आई बाढ़ पर नियंत्रण होता है।

(2) इसके अन्तर्गत एकत्रित जल से शुष्क मौसम में जल की आवश्यकता की पूर्ति की जाती है।

(3) संग्रहित पानी जमीन में रिस-रिस कर जाता है, जिससे भौमिक जल स्तर ऊँचा उठता है।

(4) वर्षा जल संग्रहण से सिंचाई के साथ-साथ अन्य कार्यों के लिए भी जल उपलब्ध हो पाता है।

प्रश्न 8. प्राचीनकाल की कुछ जलीय कृतियों का विवरण दीजिए। (प्रश्न बैंक)

अथवा

"पुरातत्वीय और ऐतिहासिक अभिलेख बताते हैं कि हमने प्राचीन काल से ही भारत में उत्कृष्ट जलीय कृतियाँ बनाई हैं।" इस कथन को प्रमाणित करने के लिए तीन साक्ष्य दीजिए।

उत्तर— प्राचीन भारत में निर्मित की गई कुछ जलीय कृतियाँ निम्नलिखित हैं-

(1) देश में ईसा से एक शताब्दी पूर्व इलाहाबाद के नजदीक श्रृंगवेरा नामक स्थान पर गंगा नदी की बाढ़ के जल को संरक्षित करने के लिए एक उत्कृष्ट जल संग्रहण तंत्र बनाया गया था।

(2) चन्द्रगुप्त मौर्य के समय वृहत् स्तर पर बाँध, झील और सिंचाई तंत्रों का निर्माण करवाया गया था।

(3) देश में प्राचीन काल में उत्कृष्ट सिंचाई के प्रमाण उड़ीसा में कलिंग, आन्ध्रप्रदेश में नागार्जुन कोण्डा, कर्नाटक में बेन्नूर तथा महाराष्ट्र में कोल्हापुर में मिलते हैं।

(4) 11वीं शताब्दी में निर्मित की गई भोपाल झील अपने समय की सबसे बड़ी कृत्रिम झीलों में से एक है।

(5) 14वीं शताब्दी में अलाउद्दीन खिलजी ने दिल्ली में सिरी फोर्ट क्षेत्र में जल की सप्लाई के लिए हौज खास अर्थात् एक विशिष्ट तालाब बनवाया था।

प्रश्न 9. बहुउद्देश्यीय परियोजनाएँ किस प्रकार देश को आत्मनिर्भर बनाने तथा लोगों का जीवन स्तर सुधारने में सहायक हैं? किन्हीं पाँच बिन्दुओं में व्याख्या कीजिए।

उत्तर— (अ) देश को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक-

(i) इनसे खेती को निर्बाध गति से जल की पूर्ति होती है जिससे समय पर फसलों की सिंचाई होने से कृषि उत्पादन बढ़ता है।

(ii) इन परियोजनाओं से कृषि को ऊर्जा मिलने से कृषि में मशीनीकरण सम्भव हो गया है।

(iii) इन योजनाओं से उद्योगों को ऊर्जा मिलती है जिससे देश में औद्योगिक उत्पादन बढ़ा है।

(ब) लोगों का जीवन स्तर सुधारने में सहायक-

(iv) कृषि उत्पादन बढ़ने से किसानों की आय में वृद्धि होती है।

(v) औद्योगिक उत्पादन बढ़ने से श्रमिकों के रोजगार के अवसर बढ़ते हैं तथा उनकी आय में वृद्धि होती है।

प्रश्न 10. वर्षा जल संग्रहण हेतु बनाये जाने वाले 'टांका' की प्रमुख विशेषताएँ बताइये।

उत्तर— टांका की विशेषताएँ-

(1) टांका एक भूमिगत टैंक होता है जो राजस्थान के अर्ध-शुष्क एवं शुष्क क्षेत्रों में घरों में वर्षा जल को संग्रहित करने के लिए बनाया जाता था।

(2) इसका आकार एक बड़े कमरे जितना हो सकता है।

(3) टांका मुख्य घर या आँगन में बनाया जाता था।

(4) वे घरों की ढलवाँ छतों से पाइप द्वारा जुड़े हुए थे। छत से वर्षा का पानी इन नलों से होकर भूमिगत टांका तक पहुँचता था जहाँ इसे एकत्रित किया जाता था।

(5) टांका में वर्षा जल अगली वर्षा ऋतु तक संग्रहित किया जा सकता है।

(6) कुछ घरों में तो टांकों के साथ भूमिगत कमरे भी बनाए जाते हैं क्योंकि जल का यह स्रोत इन कमरों को भी ठंडा रखता था जिससे ग्रीष्म ऋतु में गर्मी से राहत मिलती है।

प्रश्न 11. किसी क्षेत्र में जल संसाधन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होने पर भी वहाँ जल दुर्लभता किस प्रकार सम्भव है? समझाइए।

उत्तर— किसी क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में जल संसाधन होने के बावजूद भी वहाँ जल की दुर्लभता हो सकती है। इसके लिए जल की अत्यधिक माँग, अतिशोषण तथा जल की खराब गुणवत्ता उत्तरदायी है।

(1) अत्यधिक और बढ़ती जनसंख्या और उसके परिणामस्वरूप जल की बढ़ती माँग जल दुर्लभता को जन्म देती है।

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(2) समाज के विभिन्न वर्गों में जल का असमान वितरण भी जल दुर्लभता के लिए उत्तरदायी है।

(3) अधिक जनसंख्या के लिए घरेलू उपयोग में ही नहीं बल्कि अधिक अनाज उगाने के लिए भी जल संसाधनों का अतिशोषण किया जाता है।

(4) शहरीकरण, औद्योगिकीकरण तथा शहरी जीवनशैली के कारण भी प्रचुर मात्रा वाले क्षेत्रों में जल दुर्लभता दिखाई देती है।

(5) प्रचुर मात्रा में जल उपलब्ध हो लेकिन वह प्रदूषित हो तो यह भी जल दुर्लभता की श्रेणी में आता है।

प्रश्न 12. निम्नांकित को स्पष्ट कीजिए-

(i) जल जीवन मिशन, (ii) बांस ड्रिप सिंचाई प्रणाली। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)

उत्तर—(i) जल जीवन मिशन- भारत सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने और उनके जीवनयापन को आसान बनाने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। जल जीवन मिशन का लक्ष्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार को लंबी अवधि के आधार पर नियमित रूप से प्रति व्यक्ति 55 लीटर के सेवा स्तर पर पीने योग्य पाइप के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने में सक्षम बनाना है।

(ii) बांस ड्रिप सिंचाई प्रणाली- मेघालय में नदियों व झरनों के जल को बांस द्वारा बने पाइप द्वारा एकत्रित करने की 200 वर्ष पुरानी विधि प्रचलित है। लगभग 18 से 20 लीटर सिंचाई-पानी बांस पाइप में आ जाता है तथा उसे सैकड़ों मीटर की दूरी तक ले जाया जाता है। अंत में पानी का बहाव 20 से 80 बूंद प्रति मिनट तक घटाकर पौधे पर छोड़ दिया जाता है।

प्रश्न 13. भारत में औद्योगिकीकरण एवं शहरीकरण जल दुर्लभता के लिए किस प्रकार उत्तरदायी हैं?

अथवा

औद्योगिकीकरण किस प्रकार जल दुर्लभता के लिए उत्तरदायी है? संक्षेप में बताइये। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— स्वतंत्रता के बाद भारत में तेजी से औद्योगिकीकरण और शहरीकरण हुआ है। उद्योगों की बढ़ती हुई संख्या के कारण अलवणीय जल संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। उद्योगों को अत्यधिक जल के अलावा उनको चलाने के लिए ऊर्जा की भी आवश्यकता होती है और इसकी काफी हद तक पूर्ति जल-विद्युत से होती है।

इसके अलावा शहरों की बढ़ती संख्या और जनसंख्या वृद्धि तथा शहरी जीवनशैली के कारण न केवल जल और ऊर्जा की आवश्यकता में बढ़ोतरी हुई है अपितु शहरी आवास समितियों या कॉलोनियों में जल संसाधनों का अतिशोषण देखने को भी मिलता है। साथ ही घरेलू व औद्योगिक अपशिष्टों, रसायनों, कीटनाशकों आदि के कारण जल गुणवत्ता खराब हो रही है। परिणामतः पर्याप्त जल संसाधनों के कारण भी इन क्षेत्रों में जल की दुर्लभता है।

प्रश्न 14. जल संरक्षण एवं प्रबंधन की आवश्यकता क्यों है? लिखिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— जल संसाधनों के अतिशोषण और कुप्रबंधन से जल संसाधनों का ह्रास हो सकता है। इसके परिणामस्वरूप पारिस्थितिकी संकट की समस्या पैदा हो सकती है जिसका हमारे जीवन पर गंभीर प्रभाव हो सकता है। अतः स्वयं को स्वास्थ्य सम्बन्धी खतरों से बचाने, खाद्य सुरक्षा, अपनी आजीविका और उत्पादक क्रियाओं की निरन्तरता को बनाए रखने तथा अपने प्राकृतिक परितंत्रों को निम्नीकृत होने से बचाने के लिए समय की माँग है कि हम अपने जल संसाधनों का संरक्षण और प्रबंधन करें। इसके अतिरिक्त औद्योगिकीकरण और नगरीकरण के कारण घरेलू व औद्योगिक अपशिष्टों, रसायनों, कीटनाशकों आदि के कारण जल गुणवत्ता खराब हो रही है और पर्याप्त जल संसाधनों के कारण भी इन क्षेत्रों में जल की दुर्लभता है।

प्रश्न 15. 'नर्मदा बचाओ आन्दोलन' के कोई दो लक्ष्य बताइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)

अथवा

नर्मदा बचाओ आन्दोलन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— नर्मदा बचाओ आन्दोलन एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) है। यह संगठन जनजातीय लोगों, किसानों, पर्यावरणविदों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को गुजरात में नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बाँध के विरोध में एकजुट करता है। मूल रूप से शुरू में यह आन्दोलन जंगलों के बाँध के पानी में डूबने जैसे पर्यावरणीय मुद्दों पर केन्द्रित था। लेकिन हाल ही में इस आन्दोलन का लक्ष्य बाँध से विस्थापित गरीब लोगों को सरकार से सम्पूर्ण पुनर्वास सुविधाएँ दिलाना हो गया है। क्योंकि वहाँ से विस्थापित गरीब लोगों को अपनी आजीविका चलाना दुश्वार होता जा रहा है। उनकी जमीन, आजीविका तथा संसाधन सब इस बाँध की भेंट चढ़ गये। उनकी इस कुर्बानी के बावजूद उन्हें पुनर्वास की कोई बेहतर सुविधाएँ प्रदान नहीं की गई।

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प्रश्न 16. सिंचाई ने किस प्रकार फसल प्रारूप, मृदा एवं सामाजिक परिदृश्यों को परिवर्तित कर दिया?

(माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)

उत्तर— सिंचाई ने कई क्षेत्रों में फसल प्रारूप परिवर्तित कर दिया है जहाँ किसान जल गहन और वाणिज्य फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इससे मृदाओं के लवणीकरण जैसे गंभीर पारिस्थितिकीय परिणाम हो सकते हैं। इसी दौरान इसने भूमि मालिकों और गरीब भूमिहीनों में सामाजिक दूरी बढ़ाकर सामाजिक परिदृश्य बदल दिया है।

प्रश्न 17. बहु-उद्देश्यीय नदी घाटी परियोजनाओं पर प्रकाश डालिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— बहु-उद्देश्यीय नदी घाटी परियोजनाएँ नदी के जल संसाधनों का इस्तेमाल कई कार्यों के लिए करने वाली परियोजनाएँ होती हैं। इन परियोजनाओं से सिंचाई, बिजली, बाढ़ नियंत्रण, जल आपूर्ति और मछली पालन जैसे कार्य सम्पन्न होते हैं।

भारत की कुछ बहु-उद्देश्यीय नदी घाटी परियोजनाएँ हैं- दामोदर घाटी परियोजना, हीराकुंड परियोजना, चम्बल नदी परियोजना, भाखड़ा नांगल परियोजना व गोविन्दबल्लभ पंत सागर परियोजना।

प्रश्न 18. बाँधों से कौन-कौनसे लाभ होते हैं? स्पष्ट कीजिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— बाँधों से निम्नलिखित लाभ होते हैं-

(i) बाँधों द्वारा अतिरिक्त पानी को संग्रहित करके बाढ़ को रोका जा सकता है।

(ii) बाँधों के पानी का उपयोग नहरों के माध्यम से फसलों की सिंचाई के लिए किया जाता है।

(iii) बाँधों का पानी उपचारित करके कस्बों और शहरों के लोगों को उपयोग हेतु मिलता है।

(iv) बाँधों से गिरने वाले पानी का उपयोग जल विद्युत संयंत्रों में बिजली पैदा करने हेतु किया जाता है।

प्रश्न 19. जल संसाधन के प्रमुख स्रोतों को संक्षेप में बताइये। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— जल संसाधन के प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं-

(i) वर्षा- यह जल का सर्वप्रमुख स्रोत है। वर्षा जल को संरक्षित करके समुचित उपयोग कर सकते हैं।

(ii) नदियाँ- नदियों का जल सिंचाई एवं अन्य घरेलू और व्यावसायिक जरूरतों हेतु उपयोग किया जाता है।

(iii) भूमिगत जल- भूमिगत जल को कुएँ, नलकूप और झरनों द्वारा प्राप्त किया जाता है।

(iv) ग्लेशियर- गर्मियों में बर्फ पिघलती है जिससे नदियों का पानी बढ़ता है।

(v) झील, तालाब एवं अन्य जलाशय- ये भी जल प्राप्ति के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।

प्रश्न 20. राजस्थान के जल संग्रहण के परम्परागत जल स्रोतों का वर्णन कीजिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— राजस्थान के जल संग्रहण के परम्परागत जल स्रोत निम्नलिखित हैं-

(i) खादीन- यह मिट्टी का बना हुआ एक अस्थायी तालाब होता है।

(ii) जोहड़- छोटे तालाब होते हैं, जिनमें वर्षा का पानी इकट्ठा होता है।

(iii) टाँका- यह वर्षाजल को संग्रहित करने हेतु घरों में बना भूमिगत टैंक होता है।

(iv) टोबा- यह थार मरुस्थल में वर्षा जल संग्रहण का एक पारम्परिक स्रोत है।

(v) नाडी- यह एक प्राकृतिक जल-संग्रहण तकनीक है।

(vi) बावड़ी- यह गहरी होती है व इसमें उतरने के लिए सीढ़ियाँ एवं तिबारे होते हैं।

(vii) तालाब- तालाब की तलहटी में कुआँ बना होता है, जिसे बेरी कहते हैं।

(viii) झील- राजस्थान में प्राकृतिक एवं कृत्रिम दोनों प्रकार की झीलें पाई जाती हैं।

● निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. जल दुर्लभता का अर्थ एवं कारण बतलाइये।

उत्तर— जल दुर्लभता का अर्थ- आवश्यकता की तुलना में स्वच्छ एवं अलवणीय जल की कमी होना जल दुर्लभता कहलाती है।

जल की दुर्लभता के कारण- भारत में जल की दुर्लभता के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-

(1) जल का असमान वितरण- वर्षा में वार्षिक और मौसमी परिवर्तन के कारण जल संसाधनों की उपलब्धता में समय और स्थान के अनुसार विभिन्नता पाई जाती है।

(2) जनसंख्या वृद्धि- देश में जल की दुर्लभता अत्यधिक और बढ़ती जनसंख्या और उसके परिणामस्वरूप जल की बढ़ती माँग और उसके असमान वितरण का परिणाम है। जल अधिक जनसंख्या के लिए घरेलू उपयोग में ही नहीं बल्कि अधिक अनाज उत्पादन के लिए भी चाहिए। अतः अनाज का उत्पादन बढ़ाने के लिए जल संसाधनों का

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अतिशोषण करके ही सिंचित क्षेत्र बढ़ाया जा सकता है और शुष्क ऋतु में भी खेती की जा सकती है। सिंचित कृषि में जल का सबसे अधिक उपयोग होता है।

अधिक सिंचाई के फलस्वरूप भौम जल स्तर नीचे गिर रहा है और लोगों के लिए जल की उपलब्धता में कमी हो रही है।

(3) औद्योगीकरण एवं शहरीकरण-भारत में स्वतंत्रता के उपरान्त तीव्र गति से औद्योगीकरण तथा शहरीकरण हुआ। उद्योगों की बढ़ती हुई संख्या के कारण अलवणीय जल संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। इसके अलावा शहरों की बढ़ती संख्या और जनसंख्या तथा शहरी जीवन शैली के कारण जल और ऊर्जा की आवश्यकता में वृद्धि हुई है। शहरों में जल संसाधनों का अतिशोषण हो रहा है तथा इनकी कमी होती जा रही है।

(4) जल प्रदूषण-लोगों की आवश्यकता के लिए प्रचुर मात्रा में उपलब्ध जल घरेलू और औद्योगिक अपशिष्टों, रसायनों, कीटनाशकों तथा कृषि में प्रयुक्त उर्वरकों के द्वारा प्रदूषित है तथा मानव उपयोग के लिए खतरनाक है।

प्रश्न 2. नदी घाटी परियोजनाओं को बहुउद्देश्यीय परियोजनाएँ क्यों कहते हैं? बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं द्वारा पूरित किन्हीं पाँच उद्देश्यों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर— बहुउद्देश्यीय परियोजनाएँ-प्राय: नदी घाटी परियोजनाएँ एक ही साथ कई उद्देश्यों, जैसे-बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, जल-विद्युत का विकास आदि की पूर्ति के उद्देश्यों को पूरी करती हैं, इसलिए उन्हें बहुउद्देश्यीय परियोजनाएँ कहा जाता है।

इसके पाँच प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं-

(1) बाढ़ नियंत्रण तथा मृदा संरक्षण-नदी घाटी परियोजनाओं ने नदियों पर बाँध बनाकर उनके प्रवाह की तीव्रता को नियंत्रण कर बाढ़ पर नियंत्रण स्थापित करने तथा मृदा संरक्षण करने में सफलता पाई है।

(2) सिंचाई सुविधाओं का विस्तार-नदियों पर बाँधों के पीछे बड़ी-बड़ी झीलों का निर्माण किया जाता है। इनसे वर्षा का पानी एकत्र हो जाता है। शुष्क ऋतु में जब पानी की आवश्यकता होती है, तब इस पानी का सदुपयोग नहरों द्वारा सिंचाई के लिए किया जाता है।

(3) जल-विद्युत का निर्माण-बाँधों के बन जाने से प्रवाहित जल को ऊँचाई से गिराया जाता है, जिसकी मदद से जल-विद्युत का निर्माण होता है।

(4) औद्योगिक विकास-इन योजनाओं से उद्योगों को सस्ती बिजली की शक्ति तथा पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध होता है।

(5) वन्य भूमि विस्तार-बाँधों के जल ग्रहण क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से वृक्षारोपण से वनों का विस्तार होता है।

प्रश्न 3. बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं से होने वाले लाभ और हानियों की तुलना करें।

उत्तर— बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं से होने वाले लाभ-

(i) इन परियोजनाओं पर बने बाँधों के पीछे बनी झीलों में भारी मात्रा में वर्षा का पानी एकत्रित किया जाता है, जिससे बाढ़ों पर नियंत्रण तथा मृदा का संरक्षण होता है।

(ii) इन बाँधों के जलग्रहण क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से वृक्षारोपण कर वन्य भूमि का विस्तार किया जाता है, जिससे परितंत्र के संरक्षण में सहायता मिलती है।

(iii) इन परियोजनाओं से जल-विद्युत पैदा की जाती है जिससे घरेलू और औद्योगिक विद्युत की पूर्ति होती है।

(iv) बाँधों के पीछे बने जलाशयों में मछलियों के बीज तैयार किये जाते हैं।

(v) इन परियोजनाओं से पेयजल तथा कृषि हेतु सिंचाई की सुविधा मिलती है।

बहुउद्देश्यीय नदी घाटी परियोजनाओं से हानियाँ-

(i) बाँध बनाने से नदी जल के प्राकृतिक बहाव में बाधा आती है, जिससे अधिकांश तलछट जलाशय के तल पर जमा हो जाता है और वह धीरे-धीरे कठोर हो जाता है। इससे जलीय प्राणियों को अच्छा आवास नहीं मिल पाता।

(ii) बाढ़ के मैदानों में जलाशय बनाने पर वहाँ की वनस्पति नष्ट हो जाती है तथा उपजाऊ मिट्टी जल में समा जाती है।

(iii) बाँधों के कारण स्थायी समुदायों का बड़े पैमाने पर विस्थापन होता है तथा उनकी भूमि व आजीविका के साधन छिन जाते हैं।

(iv) जलाशयों में तलछट जमा होने से वे स्वयं बाढ़ों का कारण बन जाते हैं।

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(v) सिंचाई सुविधाओं से किसान जल गहन और वाणिज्यिक फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इससे मृदाओं के लवणीकरण जैसे गंभीर पारिस्थितिकीय परिणाम हो सकते हैं।

(vi) बहुउद्देशीय योजनाओं के कारण भूकंप आने की भी संभावना बढ़ जाती है और अत्यधिक जल के उपयोग से जल-जनित बीमारियाँ, फसलों में कीटाणु जनित बीमारियाँ और प्रदूषण फैलते हैं।

प्रश्न 4. बहुउद्देशीय नदी परियोजनाओं के विरोध का कारण बताइये।

उत्तर— वर्तमान समय में बहुउद्देशीय नदी परियोजनाओं के विरोध के कारण—

(1) नदी जलीय जीव-आवासों में भोजन की कमी हो जाना—नदियों पर बाँध बनाने और उनका बहाव नियन्त्रित करने से उनका प्राकृतिक बहाव अवरुद्ध हो जाता है तथा जलाशय की तली में अत्यधिक तलछट जमा हो जाती है जिससे नदी का तल अधिक चट्टानी हो जाता है जिसके फलस्वरूप नदी जलीय जीव-आवासों में भोजन की कमी हो जाती है।

(2) वनस्पति और मिट्टियाँ जल में डूब जाना—बाढ़ के मैदान में बनाए जाने वाले जलाशयों द्वारा वहाँ उपलब्ध वनस्पति और मिट्टियाँ जल में डूब जाती हैं जो कालान्तर में अपघटित हो जाती हैं।

(3) स्थानीय समुदायों का वृहद् स्तर पर विस्थापन होना—इन परियोजनाओं का विरोध मुख्य रूप से स्थानीय समुदायों के वृहद् स्तर पर विस्थापन के कारण है। आमतौर पर स्थानीय लोगों को उनकी जमीन, आजीविका और संसाधनों से हाथ धोना पड़ता है।

(4) मृदाओं का लवणीकरण होना—बहुउद्देशीय परियोजनाओं के फलस्वरूप अत्यधिक सिंचाई के कारण देश के अनेक क्षेत्रों में फसल प्रारूप परिवर्तित हो गया है। इससे मृदाओं के लवणीकरण जैसी गंभीर पारिस्थितिकीय समस्याएँ पैदा हो गई हैं।

(5) झगड़ों में वृद्धि होना—बहुउद्देशीय परियोजनाओं के फलस्वरूप अमीर भूमि मालिकों तथा गरीब भूमिहीनों के मध्य, ग्रामीण किसानों और शहरी नागरिकों के मध्य झगड़े बढ़ रहे हैं। इन परियोजनाओं के लागत और लाभ के बँटवारे को लेकर अन्तर्राज्यीय झगड़े आम होते जा रहे हैं।

(6) बाढ़ें आना—जो बाँध बाढ़ नियंत्रण के लिए बनाए जाते हैं उनके जलाशयों में तलछट जमा हो जाने से वे बाढ़ आने का कारण बन जाते हैं। अत्यधिक वर्षा होने की स्थिति में तो बड़े बाँध भी अनेक बार बाढ़ नियंत्रण में असफल रहते हैं।

(7) भूमि निम्नीकरण की समस्याएँ बढ़ना—बाँधों के जलाशय में तलछट जमा होने से वह बाढ़ के मैदानों तक नहीं पहुँचती है जिससे भूमि निम्नीकरण की समस्याओं में वृद्धि होती है।

(8) भूकम्प तथा जल जनित बीमारियाँ—बहुउद्देशीय योजनाओं के कारण क्षेत्र विशेष में भूकम्प आने की संभावना बढ़ जाती है तथा अत्यधिक जल के उपयोग से जलजनित बीमारियाँ, फसलों में कीटाणुजनित बीमारियाँ उत्पन्न हो जाती हैं तथा जल प्रदूषण में वृद्धि होती है।

प्रश्न 5. वर्तमान में जल संरक्षण की आवश्यकता क्यों है? जल संरक्षण हेतु उपाय बताइये। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— बढ़ती जनसंख्या के फलस्वरूप जल के उपलब्ध स्रोतों पर दबाव बढ़ रहा है। अधिक जनसंख्या के लिए घरेलू उपयोग ही नहीं बल्कि अधिक अनाज उत्पादन हेतु भी जल संसाधनों का दोहन हो रहा है। किसानों द्वारा निजी कुओं तथा नलकूपों से सिंचाई करने के कारण भी जल उपलब्धता में कमी आ रही है। औद्योगीकरण तथा शहरीकरण के कारण भी उपलब्ध अलवणीय जल संसाधन पर दबाव बढ़ा है। शहरों की बढ़ती जनसंख्या तथा शहरी जीवनशैली के कारण केवल जल तथा ऊर्जा की आवश्यकता में वृद्धि होने के साथ-साथ इनसे सम्बन्धित समस्याएँ और गम्भीर हुई हैं।

लोगों के लिए पर्याप्त जल संसाधन होने के बावजूद यह घरेलू और औद्योगिक अपशिष्टों, रसायनों, कीटनाशकों तथा कृषि में प्रयोग किए जाने वाले उर्वरकों द्वारा प्रदूषित हैं और मानव उपयोग के लिए अनुपयुक्त हैं। अतः वर्तमान में जल संरक्षण की नितांत आवश्यकता है।

जल संरक्षण हेतु उपाय—(i) घर में पानी का उचित प्रकार से उपयोग करना; जैसे-नहाने के लिए बाल्टी-मग का प्रयोग, वाहनों को पानी से धोने की जगह पोंछना, अनुचित तरीके से पानी को बहने न देना आदि।

(ii) हमें वर्षा जल का संग्रह करना चाहिए।

(iii) तालाब तथा झीलों का निर्माण करके भौम जल के स्तर में सुधार करना।

प्रश्न 6. बाँस ड्रिप सिंचाई प्रणाली क्या है? इसके विभिन्न चरण बताइये। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— बाँस ड्रिप सिंचाई प्रणाली—मेघालय में नदियों व झरनों के जल को बाँस द्वारा बने पाइप द्वारा एकत्रित

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करने की 200 वर्ष पुरानी विधि प्रचलित है। लगभग 18 से 20 लीटर सिंचाई पानी बाँस पाइप में आ जाता है तथा उसे सैकड़ों मीटर की दूरी तक ले जाया जाता है। अंत में पानी का बहाव 20 से 80 बूँद प्रति मिनट तक घटाकर पौधे पर छोड़ दिया जाता है।

इसके विभिन्न चरण निम्न प्रकार हैं-

(1) पहाड़ी शिखरों पर सदानीरा झरनों की दिशा परिवर्तित करने के लिए बाँस के पाइपों का उपयोग किया जाता है। इन पाइपों के माध्यम से गुरुत्वाकर्षण द्वारा जल पहाड़ के निचले स्थानों तक पहुँचाया जाता है।

(2) बाँस से निर्मित चैनल से पौधे के स्थान तक जल का बहाव परिवर्तित किया जाता है।

(3) पौधे तक बाँस पाइप से बनाई व बिछाई गई विभिन्न जल शाखाओं में जल वितरित किया जाता है। पाइपों में जल प्रवाह इनकी स्थितियों में परिवर्तन करके नियंत्रित किया जाता है।

(4) यदि पाइपों को सड़क पार ले जाना हो तो उन्हें भूमि पर ऊँचाई से ले जाया जाता है।

(5) संकुचित किये हुए चैनल सेक्शन और पथंतरण इकाई जल सिंचाई के अंतिम चरण में प्रयुक्त की जाती है। अंतिम चैनल सेक्शन से पौधे की जड़ों के निकट जल गिराया जाता है।

प्रश्न 7. बाँध किस प्रकार से बाढ़ एवं अन्य पर्यावरणीय समस्याओं के जनक होते हैं? विवेचना कीजिए।

(प्रश्न बैंक)

उत्तर— बाँधों के निर्माण से बाढ़ और अन्य कई तरह की पर्यावरणीय समस्याएँ आती हैं। बाँधों के कारण नदी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ आने का खतरा बढ़ जाता है।

बाँध के कारण बाढ़ की समस्या-

(i) बाढ़ आने से बहुत से जानवरों एवं मनुष्यों को अपनी जान गँवानी पड़ती है।

(ii) भारी संख्या में स्थानीय लोगों को विस्थापित होना पड़ता है।

(iii) विस्थापित लोगों को सामाजिक-आर्थिक कठिनाइयाँ झेलनी पड़ती हैं।

(iv) बाढ़ के कारण कई बार संक्रमित बीमारियाँ भी फैल जाती हैं।

(v) विस्थापन होने पर जीवनशैली एवं सामाजिक परम्पराओं में काफी उतार-चढ़ाव आते हैं।

बाँध के कारण पर्यावरणीय समस्या-

(i) बाँध के निर्माण से जल निकाय का मार्ग बदल जाता है।

(ii) जल भराव होने से क्षेत्र की वनस्पतियों एवं प्राणियों का विनाश हो जाता है, परिणामतः पारिस्थितिक तंत्र दुष्प्रभावित होता है।

(iii) बाँध के कारण जल निकाय में तलछट की कमी आती है और तल में कटाव उत्पन्न होता है।

(iv) बाँध बन जाने से जल निकाय में जलीय जन्तुओं की आवाजाही बाधित होती है।

(v) बाँध निर्माण से ठहरे जल के तापमान एवं ऑक्सीजन स्तर में अनावश्यक बदलाव होता है, जिससे पर्यावरण प्रदूषित होता है।

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