📖 1. समाधान: पाठगत एवं पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्नोत्तर
राजस्थान बोर्ड कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान (भूगोल) — सभी पाठगत प्रश्नों एवं पाठ्यपुस्तक अभ्यास के संपूर्ण सटीक उत्तर।
पाठगत प्रश्न
पृष्ठ 30
प्रश्न 1. क्या आप कृषिगत कच्चे माल पर आधारित कुछ उद्योगों के नाम बता सकते हैं?
अथवा
भारत में कृषि पर आधारित किन्हीं चार उद्योगों के नाम लिखिए।
उत्तर— (1) चीनी उद्योग, (2) सूती वस्त्र उद्योग, (3) पटसन उद्योग, (4) रबर उद्योग, (5) खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, गलीचा उद्योग, तेल उद्योग आदि।
पृष्ठ 31
प्रश्न 2. क्या आप उन फसलों के नाम बता सकते हैं, जो प्रारम्भिक जीविका निर्वाह कृषि में उगाई जाती हैं?
उत्तर— कसावा, रतालू, आलू, टेपिओका, जड़ीय फसलें तथा चावल आदि प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि में उगाई जाने वाली प्रमुख फसलें हैं।
पृष्ठ 31
प्रश्न 3. क्या आप भारत के कुछ राज्यों के नाम बता सकते हैं जहाँ गहन जीविका कृषि की जाती है?
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उत्तर-पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, आन्ध्रप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान राज्यों में गहन जीविका कृषि की जाती है।
पृष्ठ 31
प्रश्न 4. क्या आप उन फसलों के कुछ और उदाहरण दे सकते हैं जो एक प्रदेश में वाणिज्यिक फसल के रूप में तथा दूसरे प्रदेश में जीविका फसल के रूप में उगाई जाती हैं?
उत्तर— (1) चावल-यह पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तरी-पूर्वी राज्यों तथा दक्षिणी राज्यों में जीविका फसल है जबकि पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में वाणिज्यिक फसल है।
(2) गेहूँ-यह उत्तर प्रदेश, बिहार में जीविका फसल है, जबकि पंजाब तथा हरियाणा में वाणिज्यिक फसल है।
पृष्ठ 38
प्रश्न 5. उन वस्तुओं की सूची बनाइये जो रबड़ से बनती हैं और हम इनका प्रयोग करते हैं।
उत्तर— टायर, ट्यूब, खिलौने, बर्तन, नाव, जूते-चप्पल, रबड़ फोम, चादरें, ढक्कन, ऊँट की काठी, साईकिल टायर, पाइप, दस्ताने, गद्देदार वस्तुएँ आदि रबड़ से बनाई जाती हैं तथा हम इनका प्रयोग करते हैं।
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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
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1. बहुवैकल्पिक प्रश्न-
(i) निम्नलिखित में से कौनसा उस कृषि प्रणाली को दर्शाता है जिसमें एक ही फसल लम्बे-चौड़े क्षेत्र में उगाई जाती है? (प्रश्न बैंक)
(क) स्थानान्तरी कृषि (ख) रोपण कृषि (ग) बागवानी (घ) गहन कृषि
(ii) इनमें से कौनसी रबी फसल है? (प्रश्न बैंक)
(क) चावल (ख) मोटे अनाज (ग) चना (घ) कपास
(iii) इनमें से कौनसी एक फलीदार फसल है? (प्रश्न बैंक)
(क) दालें (ख) मोटे अनाज (ग) ज्वार-तिल (घ) तिल
उत्तर— (i) (ख) (ii) (ग) (iii) (क)।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।
प्रश्न (i) एक पेय फसल का नाम बताएँ तथा उसको उगाने के लिए अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियों का विवरण दें।
उत्तर— पेय फसल-चाय एक महत्वपूर्ण पेय फसल है।
अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियाँ-चाय के उत्पादन के लिए उपोष्ण कटिबन्धीय जलवायु, ह्यूमस एवं जीवाश्मयुक्त गहरी मिट्टी, सुगम जल निकास वाले ढलवाँ क्षेत्र, वर्षभर समान रूप से होने वाली वर्षा की बौछारें अनुकूल होती हैं।
प्रश्न (ii) भारत की एक खाद्य फसल का नाम बताएँ और जहाँ यह पैदा की जाती है उन क्षेत्रों का विवरण दें। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)
उत्तर— भारत की एक खाद्य फसल-चावल भारतीय लोगों की प्रमुख खाद्य फसल है।
उत्पादन क्षेत्र-भारत में चावल उत्तर और उत्तर-पूर्वी मैदानों, तटीय क्षेत्रों और डेल्टाई प्रदेशों में उगाया जाता है। नहरों के जाल और नलकूपों की सघनता के कारण चावल पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश तथा राजस्थान के कुछ भागों में भी पैदा किया जाता है।
प्रश्न (iii) सरकार द्वारा किसानों के हित में किए गये संस्थागत सुधार कार्यक्रमों की सूची बनाएँ।
उत्तर— (1) जोतों की चकबन्दी, (2) सहकारिता का विकास करना, (3) जमींदारी प्रथा की समाप्ति, (4) भूमि सुधार कानून, (5) हरित क्रान्ति तथा श्वेत क्रान्ति, (6) व्यापक भूमि विकास कार्यक्रम, (7) फसल बीमा के प्रावधान, (8) ग्रामीण बैंकों, सहकारी समितियों तथा बैंकों की स्थापना, (9) किसान क्रेडिट कार्ड, (10) व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना, (11) कृषि कार्यक्रमों का प्रसारण, (12) न्यूनतम सहायता मूल्य तथा (13) खरीद मूल्यों की घोषणा।
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सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X 179
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए।
प्रश्न (i) कृषि पैदावार बढ़ाने के लिए सरकार भारतीय किसानों को किस प्रकार सहायता कर रही है? किन्हीं चार बिन्दुओं को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
कृषि उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा किए गए उपाय सुझाइये।
उत्तर— कृषि उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा निम्नलिखित उपाय किये गये हैं-
(1) संस्थागत सुधार— स्वतंत्रता के उपरान्त देश में संस्थागत सुधार करने के लिए जोतों की चकबन्दी तथा सहकारिता का विकास करना तथा जमींदारी प्रथा को समाप्त करने को प्राथमिकता दी गई।
(2) सिंचाई के साधनों का विस्तार— नदियों पर बाँध बाँधकर कृत्रिम जलाशय बनाकर नहरों द्वारा खेतों तक पानी पहुँचाकर सिंचाई का विस्तार किया गया है। सिंचाई सुविधा बढ़ाने के लिए किसानों को ऋण की सुविधा भी प्रदान की गई है।
(3) रासायनिक उर्वरकों के उत्पादन में वृद्धि— रासायनिक खाद उपलब्ध कराने के लिए कई उर्वरक कारखाने देश के विभिन्न भागों में स्थापित किए गए हैं। साथ ही उर्वरकों का आयात भी किया जा रहा है।
(4) फसलों की बर्बादी को रोकना— कीड़ों, नाशक जीवों, फफूंदी, खरपतवार से फसलों को बचाने के लिए कीटनाशक, फफूंदीनाशी तथा खरपतवार नाशक दवाइयाँ उपलब्ध कराकर फसलों को बचाया जाने लगा है।
(5) व्यापक भूमि विकास कार्यक्रम— भारत में सन् 1980 तथा 1990 के दशकों में व्यापक भूमि विकास कार्यक्रम में सूखा, बाढ़, चक्रवात, आग तथा बीमारी के लिए फसल बीमा के प्रावधान किये गये और किसानों को कम दर पर ऋण सुविधाएँ प्रदान करने के लिए ग्रामीण बैंकों, सहकारी समितियों और बैंकों की स्थापना की गई।
(6) अन्य— किसानों के लाभ के लिए किसान क्रेडिट कार्ड और व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना शुरू की गई है। आकाशवाणी पर मौसम की जानकारी और कृषि कार्यक्रम प्रसारित किये जाते हैं। किसानों हेतु न्यूनतम सहायता मूल्य तथा कुछ महत्वपूर्ण फसलों के लाभदायक खरीद मूल्यों की भी सरकार घोषणा करती है।
प्रश्न (ii) चावल की खेती के लिए उपयुक्त भौगोलिक परिस्थितियों का वर्णन करें।
(प्रश्न बैंक; माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)
अथवा
भारत में चावल की कृषि के लिए भौगोलिक दशाओं का उल्लेख कीजिये।
उत्तर— चावल की खेती के लिए उपयुक्त भौगोलिक परिस्थितियाँ- भारत में चावल की खेती खरीफ की फसलों के अन्तर्गत की जाती है। चावल की खेती के लिए निम्नलिखित भौगोलिक परिस्थितियाँ अनुकूल रहती हैं-
(1) मिट्टी— चावल की कृषि के लिए डेल्टाई मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है।
(2) तापमान— चावल की खेती के लिए बोने से लेकर काटने तक की अवधि में उच्च तापमान (25° सेल्सियस से ऊपर) की आवश्यकता होती है।
(3) वर्षा— चावल की कृषि के लिए 100 सेन्टीमीटर से अधिक वर्षा अर्थात् अधिक आर्द्रता की आवश्यकता होती है। अतः इसके लिए पर्याप्त जल की आवश्यकता होती है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में इसे सिंचाई करके उगाया जाता है।
परियोजना कार्य
प्रश्न 1. किसानों की साक्षरता विषय पर एक सामूहिक वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन करें।
उत्तर— अपने शिक्षक की निगरानी में कक्षा में समूह बनाकर किसानों की साक्षरता विषय पर निम्न बिन्दुओं पर वाद-विवाद करें-
(1) भारत में साक्षरता की स्थिति
(2) कुल साक्षरता, पुरुष साक्षरता, महिला साक्षरता
(3) शहरी एवं ग्रामीण साक्षरता
(4) किसानों में साक्षरता की स्थिति
(5) किसानों में न्यून साक्षरता का कृषि पर प्रभाव
(6) साक्षरता से लाभ
(7) निष्कर्ष।
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प्रश्न 2. भारत के मानचित्र में गेहूँ उत्पादन दर्शाइए।
उत्तर— [नोट-इसके लिए मानचित्र सम्बन्धी प्रश्न देखें।]
क्रियाकलाप
प्रश्न— ऊपर-नीचे और दायें-बायें चलते हुए वर्ग पहेली को सुलझाएँ और छिपे उत्तर ढूँढें।
(i) भारत की दो खाद्य फसलें।
(ii) यह भारत की ग्रीष्म फसल ऋतु है।
(iii) अरहर, मूँग, चना, उड़द जैसी दालों से ........ मिलता है।
(iv) यह एक मोटा अनाज है।
(v) भारत की दो महत्वपूर्ण पेय फसलें ....... हैं।
(vi) काली मिट्टी पर उगाई जाने वाली चार रेशेदार फसलों में से एक।
[नोट: पहेली के उत्तर अंग्रेजी के शब्दों में हैं।]
उत्तर—
[वर्ग पहेली (Word Puzzle)]

A | Z | M | X | N | C | B | V | N | X | A | H | D | Q |
S | D | E | W | S | R | J | D | Q | J | Z | V | R | E |
D | K | H | A | R | I | F | G | W | F | M | R | F | W |
F | N | L | R | G | C | H | H | R | S | B | S | V | T |
G | B | C | W | H | E | A | T | Y | A | C | H | B | R |
H | R | T | K | A | S | S | E | P | H | X | A | N | W |
J | I | E | S | J | O | W | A | R | J | Z | H | D | T |
K | C | L | A | E | G | A | C | O | F | F | E | E | Y |
L | T | E | F | Y | M | T | A | T | S | S | R | G | I |
P | D | E | J | O | U | Y | V | E | J | G | F | A | U |
O | U | M | H | Q | S | U | D | I | T | S | W | S | P |
U | O | A | C | O | T | T | O | N | E | A | H | F | O |
Y | O | L | F | L | U | S | R | Q | Q | D | T | W | I |
T | M | U | A | H | R | G | Y | K | T | R | A | B | F |
E | A | K | D | G | D | Q | H | S | U | O | I | W | H |
W | Q | Z | C | X | V | B | N | M | K | J | A | S | L |
(i) WHEAT, RICE (ii) KHARIF (iii) PROTEIN (iv) JOWAR
(v) TEA, COFFEE (vi) COTTON
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📝 2. नोट्स: पाठ-सार, मुख्य बिंदु एवं शब्दावली
महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं, भौगोलिक परिभाषाएं, राजनीतिक सिद्धांत एवं संपूर्ण अध्याय का सारगर्भित सारांश।
पाठ-सार |
:--- |
**कृषि-** कृषि एक प्राथमिक क्रिया है जो व्यक्ति के लिए अधिकांश खाद्यान्न तथा विभिन्न उद्योगों के लिए कच्चा माल उत्पन्न करती है तथा कुछ कृषि उत्पादों (चाय, कॉफी आदि) का निर्यात भी किया जाता है। |
**कृषि के प्रकार-** (1) **प्रारम्भिक जीविका निर्वाह कृषि-** प्रारम्भिक जीवन निर्वाह कृषि भूमि के छोटे टुकड़ों पर आदिम कृषि औजारों तथा परिवार अथवा समुदाय श्रम की सहायता से की जाती है। यह कर्तन दहन प्रणाली कृषि है। उत्तर-पूर्वी राज्यों असम, मेघालय, मिजोरम और नागालैण्ड में इसे 'झूम', मणिपुर में 'पामलू' तथा छत्तीसगढ़ तथा निकोबार द्वीप समूह में 'दीपा' कहा जाता है। अनेक देशों में तथा भारत के अन्य प्रान्तों में भी इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है। |
(2) **गहन जीविका कृषि-** इस प्रकार की कृषि उन क्षेत्रों में की जाती है जहाँ भूमि पर जनसंख्या का दबाव अधिक होता है। यह श्रम गहन खेती है, जहाँ अधिक मात्रा में जैव रासायनिक निवेशों और सिंचाई का प्रयोग किया जाता है। |
--- [ पृष्ठ संख्या: 184 ] ---
सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X 177
(3) वाणिज्यिक कृषि-इस प्रकार की कृषि के मुख्य लक्षण आधुनिक निवेशों जैसे-अधिक पैदावार देने वाले बीजों, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग से उच्च पैदावार प्राप्त करना है।
(4) रोपण कृषि-रोपण कृषि भी एक प्रकार की वाणिज्यिक कृषि है। इस प्रकार की कृषि में लम्बे-चौड़े क्षेत्र में एकल फसल बोई जाती है। रोपण कृषि उद्योग और कृषि के बीच एक अंतरापृष्ठ है।
भारत में चाय, कॉफी, रबड़, गन्ना, केला आदि महत्त्वपूर्ण रोपण फसलें हैं।
शस्य प्रारूप-भारत में तीन शस्य ऋतुएँ हैं, यथा-रबी, खरीफ और जायद। रबी की फसलों को शीत ऋतु के प्रारम्भ में बोया जाता है तथा ग्रीष्म ऋतु में काटा जाता है। प्रमुख रबी की फसलें हैं-गेहूँ, जौ, मटर, चना, सरसों आदि।
खरीफ की फसलें देश के विभिन्न क्षेत्रों में मानसून के आगमन के साथ बोई जाती हैं और सितम्बर-अक्टूबर में काट ली जाती है। खरीफ की प्रमुख फसलें हैं-चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, अरहर, मूँग, मोठ, उड़द, कपास, जूट, मूँगफली और सोयाबीन।
रबी और खरीफ की फसल ऋतुओं के बीच ग्रीष्म ऋतु में बोई जाने वाली फसल को जायद कहा जाता है। जायद की प्रमुख फसलें हैं-तरबूज, खरबूज, खीरा, ककड़ी, सब्जियाँ और चारे की फसलें आदि।
मुख्य फसलें-भारत में मुख्य रूप से निम्नलिखित फसलें पैदा की जाती हैं-(i) चावल (ii) गेहूँ (iii) मोटे अनाज यथा-ज्वार, बाजरा, रागी (iv) मक्का (v) दालें।
खाद्यान्नों के अलावा अन्य खाद्य फसलें-खाद्यान्नों के अलावा भारत में निम्नलिखित अन्य खाद्य फसलें उगाई जाती हैं-
(i) गन्ना (ii) तिलहन (iii) चाय (iv) कॉफी (v) बागवानी फसलें, जैसे-आम, संतरा, केला, लीची, अनन्नास, अंगूर, सेब, नाशपाती, खूबानी तथा अखरोट एवं सब्जियाँ, जैसे-मटर, फूलगोभी, प्याज, बंदगोभी, टमाटर, बैंगन और आलू।
अखाद्य फसलें-भारत में निम्नलिखित मुख्य अखाद्य फसलें पैदा की जाती हैं-
(i) रबड़ (ii) कपास (iii) जूट।
प्रौद्योगिकीय और संस्थागत सुधार-देश में 60 प्रतिशत से भी अधिक लोगों को आजीविका प्रदान करने वाली कृषि में कुछ गंभीर तकनीकी एवं संस्थागत सुधार लाने की आवश्यकता है। सन् 1980 तथा 1990 के दशकों में व्यापक भूमि विकास कार्यक्रम शुरू किया गया जो कि संस्थागत और तकनीकी सुधारों पर आधारित था। किसानों के लाभ के लिए भारत सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड और व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना भी शुरू की है।
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⭐ 3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर एवं बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक, लघूत्तरात्मक एवं निबंधात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
● बहुविकल्पीय प्रश्न—
1. कर्तन दहन प्रणाली की कृषि को इण्डोनेशिया में कहा जाता है-
(अ) कोनुको (ब) रोका (स) लदांग (द) मसोले
2. निम्न में से कौनसी रोपण फसल नहीं है?
(अ) चाय (ब) कॉफी (स) रबड़ (द) गेहूँ
3. इनमें से कौनसी 'जायद' की फसल है?
(अ) गेहूँ (ब) जौ (स) ग्वार (द) तरबूज
(प्रश्न बैंक)
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सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X 181
4. निम्नलिखित में से कौनसी अखाद्य फसल है?
(अ) कपास (ब) गन्ना (स) चावल (द) गेहूँ
5. इनमें से कौनसी खरीफ की फसल है? (प्रश्न बैंक)
(अ) जौ (ब) बाजरा (स) चना (द) सरसों
6. संसार का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है- (प्रश्न बैंक)
(अ) भारत (ब) अमेरिका (स) ब्राजील (द) चीन
7. इनमें से कौनसा मोटा अनाज नहीं है- (प्रश्न बैंक)
(अ) गेहूँ (ब) रागी (स) बाजरा (द) ज्वार
8. खाद्यान्न व चारा दोनों रूप में प्रयोग होने वाली फसल है-
(अ) मक्का (ब) चावल (स) बाजरा (द) जौ
9. निम्न में से दलहनी फसल कौनसी है?
(अ) सोयाबीन (ब) रागी (स) मटर (द) अलसी
10. इनमें से कौनसी रेशेदार फसल है- (प्रश्न बैंक)
(अ) जूट (ब) गन्ना (स) चावल (द) बाजरा
11. कृषि एक क्रिया है- (प्रश्न बैंक)
(अ) प्राथमिक (ब) द्वितीयक (स) तृतीयक (द) इनमें से कोई नहीं
12. कृषि एक महत्त्वपूर्ण प्राथमिक क्रिया है, क्योंकि इससे-
(अ) खाद्यान्न उत्पन्न होते हैं (ब) विभिन्न उद्योगों के लिए कच्चा माल पैदा होता है
(स) रोजगार उत्पन्न होता है (द) उपर्युक्त सभी
13. 'कर्तन दहन प्रणाली' कृषि को भारत के उत्तरी-पूर्वी राज्यों में कहा जाता है-
(अ) दीपा (ब) झूम (स) दहिया (द) वालरे
14. फसल जो हरियाणा और पंजाब में वाणिज्यिक फसल कहलाती है और उड़ीसा में जीविका फसल, वह है-
(अ) गेहूँ की फसल (ब) दलहन फसलें (स) चावल की फसल (द) तिलहन फसलें
15. उत्तरप्रदेश, बिहार में जो जीविका फसल है, जबकि पंजाब, हरियाणा में वाणिज्यिक फसल है, वह फसल है-
(अ) गेहूँ (ब) चावल (स) सरसों (द) चना
16. जहाँ भूमि पर जनसंख्या का दबाव होता है, उन क्षेत्रों में किस प्रकार की कृषि की जाती है?
(अ) प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि (ब) गहन जीविका कृषि
(स) वाणिज्यिक कृषि (द) रोपड़ कृषि
17. प्रारंभिक जीवन निर्वाह कृषि में उगाई जाने वाली फसल है-
(अ) आलू (ब) सरसों (स) मूंगफली (द) गन्ना
18. छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि को कहा जाता है-
(अ) झूम (ब) दीपा (स) पोडु (द) कोमान
19. वाणिज्यिक कृषि का जो लक्षण नहीं है, वह है-
(अ) अधिक पैदावार देने वाले बीजों का प्रयोग (ब) रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग
(स) कीटनाशकों का प्रयोग (द) लकड़ी के हल का प्रयोग
20. किस प्रकार की कृषि से प्राप्त सारा उत्पादन उद्योग में कच्चे माल के रूप में प्रयोग होता है?
(अ) रोपण कृषि (ब) गहन जीविका कृषि
(स) झूम कृषि (द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
21. 'झूम खेती' क्या है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)
(अ) स्थानांतरित कृषि (ब) वाणिज्यिक कृषि (स) रोपण कृषि (द) गहन जीविका कृषि
22. रबी फसलों का युग्म है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)
(अ) गेहूँ-जौ (ब) गेहूँ-चावल (स) ज्वार-बाजरा (द) सरसों-कपास
23. भारत की प्राचीन आर्थिक क्रिया है-
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(अ) उद्योग (ब) कृषि (स) अध्ययन (द) संचार
24. 2017 के अनुसार कपास के उत्पादन में विश्व में भारत का कौनसा स्थान है?
(अ) पहला (ब) दूसरा (स) तीसरा (द) चौथा
25. नागपुर और चेरापूंजी के किस फल की विश्वभर में बहुत माँग है?
(अ) आम (ब) लीची (स) संतरा (द) अंगूर
26. कर्नाटक में मुख्य रोपण फसल है-
(अ) चाय (ब) रबड़ (स) गन्ना (द) कॉफी
27. कर्तन दहन कृषि को आंध्रप्रदेश में किस नाम से जाना जाता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)
(अ) वालरे (ब) पोडू (स) खिल (द) कुरुवा
उत्तरमाला
1. (स) 2. (द) 3. (द) 4. (अ) 5. (अ) 6. (द) 7. (अ)
8. (अ) 9. (स) 10. (अ) 11. (अ) 12. (द) 13. (ब) 14. (स)
15. (अ) 16. (ब) 17. (अ) 18. (ब) 19. (द) 20. (अ) 21. (अ)
22. (अ) 23. (ब) 24. (ब) 25. (स) 26. (द) 27. (ब)।
● रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
1. ग्रामीण क्षेत्रों हेतु ............ महत्वपूर्ण है। (प्रश्न बैंक)
2. ............ हमारे देश की प्राचीन आर्थिक क्रिया है।
3. कृषि एक ............ क्रिया है।
4. ............ विश्व में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक तथा उपभोक्ता देश है। (प्रश्न बैंक)
5. हमारे देश में अरेबिका किस्म की ........ पैदा की जाती है।
6. भूदान आंदोलन ............ द्वारा प्रारम्भ किया गया। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)
7. भारत को ......... के पौधे का मूल स्थान माना जाता है।
8. भू-स्वामित्व में ......... के अधिकार के कारण पीढ़ी दर पीढ़ी जोतों का आकार छोटा और अलाभप्रद होता जा रहा है।
9. ......... वाणिज्यिक कृषि का एक प्रकार है। (प्रश्न बैंक)
10. ............ फसलों को शीत ऋतु में अक्टूबर से दिसंबर के मध्य बोया जाता है तथा अप्रैल से जून के मध्य काटा जाता है।
11. ............ भारत की मुख्य खाद्य फसल है। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)
12. हमारे देश में जीवन निर्वाह खेती से लेकर .................... खेती तक कृषि के अनेक प्रकार हैं।
13. हमारे देश की दो-तिहाई जनसंख्या ................ कार्यों में संलग्न है। (प्रश्न बैंक)
14. 'कर्तन दहन' कृषि को मणिपुर में ................ कहते हैं। (प्रश्न बैंक)
15. रबी की फसलों को .................... में अक्टूबर से दिसम्बर के मध्य बोया जाता है। (प्रश्न बैंक)
उत्तरमाला
1. कृषि 2. कृषि 3. प्राथमिक 4. भारत 5. कॉफी 6. विनोबा भावे 7. कपास 8. विरासत 9. रोपण कृषि 10. रबी 11. चावल 12. वाणिज्यिक 13. कृषि 14. पामलू 15. शीत ऋतु।
● अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. भारत की सबसे महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसल कौनसी है? इस फसल के दो प्रमुख उत्पादक राज्यों के नाम लिखिए।
उत्तर— भारत की सबसे महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसल चावल है। इसके दो प्रमुख उत्पादक राज्य हैं-(i) पश्चिम बंगाल (ii) असम।
प्रश्न 2. हमारे देश की दो प्रमुख पेय फसलों के नाम लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर—(i) चाय (ii) कॉफी।
प्रश्न 3. रोपण कृषि से आप क्या समझते हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— यह एक प्रकार की वाणिज्यिक कृषि है जिसमें लम्बे-चौड़े क्षेत्र में एकल फसल बोई जाती है।
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सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X 183
प्रश्न 4. भारत में ज्वार और बाजरा के दो-दो प्रमुख उत्पादक राज्यों के नाम बताइए।
अथवा
ज्वार व बाजरा उत्पादन करने वाले अग्रणी राज्यों के नाम लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— (i) ज्वार-महाराष्ट्र, कर्नाटक। (ii) बाजरा-राजस्थान, उत्तर प्रदेश।
प्रश्न 5. भारत में उगाई जाने वाली दो मुख्य रेशेदार फसलों के नाम बताइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)
अथवा
हमारे देश की मुख्य रेशेदार फसलों के नाम लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— भारत की प्रमुख रेशेदार फसलों में कपास, जूट, सन एवं प्राकृतिक रेशम प्रमुख हैं।
प्रश्न 6. सर्वाधिक गन्ना उत्पादक राज्य का नाम लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— भारत में गन्ने का सर्वाधिक उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश है।
प्रश्न 7. हरियाणा एवं पंजाब राज्यों की वाणिज्यिक फसल का नाम बताइये।
उत्तर— चावल।
प्रश्न 8. भारत की प्रमुख रोपण फसलों के नाम बताइये।
उत्तर— चाय, कॉफी, रबड़, गन्ना तथा केला।
प्रश्न 9. उद्योग और कृषि के बीच एक अन्तरापृष्ठ कृषि का नाम बताइये।
उत्तर— रोपण कृषि।
प्रश्न 10. हमारे देश की तीन शस्य ऋतुओं के नाम बताइये। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— (i) रबी (ii) खरीफ (iii) जायद।
प्रश्न 11. खरीफ की किन्हीं चार फसलों के नाम लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— खरीफ की प्रमुख फसलें हैं-चावल, ज्वार, बाजरा, मक्का, जूट, कपास आदि। (किन्हीं चार के नाम लिखें)
प्रश्न 12. हमारे देश में बाजरा उत्पादक मुख्य राज्य कौनसा है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— राजस्थान।
प्रश्न 13. भारत में पैदा की जाने वाली शुष्क प्रदेशों की फसल का नाम बताइये।
उत्तर— रागी।
प्रश्न 14. कौनसी फसलों को अन्य फसलों के आवर्तन में बोया जाता है?
उत्तर— दालों की फसलों को अन्य फसलों के आवर्तन में बोया जाता है।
प्रश्न 15. प्रारम्भिक जीवन निर्वाह कृषि किस प्रकार की जाती है?
उत्तर— प्रारम्भिक जीवन निर्वाह कृषि भूमि के छोटे टुकड़ों पर आदिम कृषि औजारों तथा समुदाय के श्रम की सहायता से की जाती है।
प्रश्न 16. हमारे देश में उगाये जाने वाले प्रमुख मोटे अनाज कौन-कौनसे हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— ज्वार, बाजरा तथा रागी भारत में उगाये जाने वाले प्रमुख मोटे अनाज हैं।
प्रश्न 17. जायद की फसलों के नाम लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— तरबूज, खरबूज, खीरा, सब्जियाँ तथा चारे की फसल।
प्रश्न 18. चार दलहन फसलों के नाम लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— तुर, उड़द, मूंग तथा मसूर।
प्रश्न 19. वाणिज्यिक कृषि से आप क्या समझते हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— वाणिज्यिक कृषि-वाणिज्यिक कृषि के अन्तर्गत अधिक उत्पादकता हेतु आधुनिक बीजों, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग अधिक मात्रा में किया जाता है। रोपण कृषि एक प्रकार की वाणिज्यिक कृषि है।
प्रश्न 20. बाजरा उत्पादन की अनुकूल दशाओं पर प्रकाश डालिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— बाजरा भारत में उगाए जाने वाले मुख्य मोटे अनाज में से एक है। यह बलुआ और उथली काली मिट्टी पर उगाया जाता है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और हरियाणा इसके मुख्य उत्पादक राज्य हैं।
प्रश्न 21. 'रक्तहीन क्रान्ति' से आप क्या समझते हैं?
उत्तर— विनोबा भावे द्वारा शुरू किए गए भूदान-ग्रामदान आंदोलन को 'रक्तहीन क्रान्ति' का नाम दिया गया।
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प्रश्न 22. 'ग्रामदान' किसे कहा गया?
उत्तर— विनोबा भावे के आह्वान पर कुछ जमींदार जो कई गाँवों के मालिक थे, उन्होंने भूमिहीनों को पूरा गाँव देने की इच्छा जाहिर की। इसे 'ग्रामदान' कहा गया।
प्रश्न 23. भारत के उन राज्यों के नाम बताइये जहाँ प्रारम्भिक जीवन निर्वाह कृषि को झूम के नाम से जाना जाता है?
उत्तर— असम, मेघालय और नागालैण्ड।
प्रश्न 24. भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में कर्तन दहन कृषि को क्या कहा जाता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)
उत्तर— भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में कर्तन दहन कृषि को झूम कहा जाता है।
प्रश्न 25. जहाँ भूमि पर जनसंख्या का दबाव अधिक होता है वहाँ पर की जाने वाली कृषि का नाम बताइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)
उत्तर— गहन जीविका कृषि।
प्रश्न 26. मक्का फसल के लिए आवश्यक तापमान लिखिए।
उत्तर— 21°C से 27°C।
प्रश्न 27. गेहूँ की कृषि के लिए आवश्यक वार्षिक वर्षा की मात्रा लिखिए।
उत्तर— 50 सेमी. से 75 सेमी.।
प्रश्न 28. वाणिज्यिक कृषि के मुख्य लक्षण बताइये।
उत्तर— अधिक पैदावार देने वाले बीजों, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग से उच्च पैदावार प्राप्त करना।
प्रश्न 29. रोपण कृषि की विशेषता बताइये।
उत्तर— रोपण कृषि व्यापक क्षेत्र में की जाती है जो कि अत्यधिक पूँजी और श्रमिकों की सहायता से की जाती है।
प्रश्न 30. रबी की किन्हीं चार फसलों के नाम लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— (i) गेहूँ (ii) जौ (iii) चना (iv) मटर।
प्रश्न 31. गन्ने की फसल तैयार होने में कितना समय लगता है?
उत्तर— लगभग 1 वर्ष।
प्रश्न 32. चार तिलहन फसलों के नाम लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— (i) सरसों (ii) तिल (iii) मूँगफली (iv) सोयाबीन।
प्रश्न 33. जायद की फसल के बारे में आप क्या जानते हैं? इन्हें कब बोया जाता है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— भारत में रबी और खरीफ फसल ऋतुओं के बीच ग्रीष्म ऋतु में बोई जानी वाली फसल को जायद कहा जाता है। जायद की फसलें मार्च से जून के बीच बोई जाती हैं।
प्रश्न 34. भारत में विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की खाद्य और अखाद्य फसलें किस कारण उगाई जाती हैं?
उत्तर— भारत में मिट्टी, जलवायु और कृषि पद्धति में अन्तर के कारण विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की खाद्य और अखाद्य फसलें उगाई जाती हैं।
प्रश्न 35. भारत में गेहूँ की फसल उत्पादित करने वाले दो प्रमुख क्षेत्रों के नाम बताइये।
उत्तर— (1) उत्तर-पश्चिम में गंगा-सतलज का मैदान और (2) दक्कन का काली मिट्टी वाला प्रदेश।
प्रश्न 36. हमारे देश में कपास उत्पादक दो मुख्य राज्यों के नाम लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— (i) महाराष्ट्र (ii) गुजरात।
प्रश्न 37. वर्तमान समय में जूट की किस कारण से माँग कम हो रही है?
उत्तर— जूट की उच्च लागत और कृत्रिम रेशों तथा नाइलॉन की कीमत कम होने के कारण।
प्रश्न 38. स्वतंत्रता के पश्चात् भारत में संस्थागत सुधार लाने के लिए किसे प्राथमिकता प्रदान की गई?
उत्तर— भारत में संस्थागत सुधार लाने के लिए जोतों की चकबन्दी, सहकारिता तथा जमींदारी को समाप्त करने को प्राथमिकता दी गई।
प्रश्न 39. किसी एक रेशे वाली फसल का नाम बताइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)
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सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X 185
उत्तर—जूट।
प्रश्न 40. भारत में किस फसल को सुनहरा रेशा कहा जाता है?
उत्तर—भारत में जूट की फसल को सुनहरा रेशा कहा जाता है।
प्रश्न 41. भूदान से क्या अभिप्राय है? यह कार्यक्रम किसकी देन है?
उत्तर—भूमिहीन गरीब किसानों के लिए भूमि दान में देना भूदान कहलाता है। यह कार्यक्रम विनोबा भावे की देन है।
प्रश्न 42. रेशम किस प्रकार प्राप्त होता है?
उत्तर—रेशम के कीड़े कोकून जो मलबरी पेड़ की हरी पत्तियों पर पलता है, से रेशम प्राप्त होता है।
प्रश्न 43. जूट का क्या उपयोग है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)
अथवा
जूट से कौन-कौनसी वस्तुएँ बनाई जाती हैं? बताइये।
उत्तर—जूट का प्रयोग बोरियाँ, चटाई, रस्सी, तंतु व धागे, गलीचे और दूसरी दस्तकारी की वस्तुएँ बनाने में किया जाता है।
प्रश्न 44. भारत में अधिकांश लोगों का प्रमुख खाद्यान्न कौनसा है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर—भारत में अधिकांश लोगों का प्रमुख खाद्यान्न चावल है। चावल के बाद गेहूँ भारत का दूसरा महत्त्वपूर्ण खाद्यान्न है।
प्रश्न 45. रबी फसल का विश्लेषण कीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)
उत्तर—रबी फसलें सर्दियों में उगाई जाती हैं। गेहूँ, जौ, सरसों और चना महत्त्वपूर्ण रबी फसलें हैं। ये फसलें खाद्य सुरक्षा, रोजगार और आर्थिक विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
● लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. गेहूँ की खेती के लिए उपयुक्त भौगोलिक परिस्थितियों का वर्णन कीजिए। (प्रश्न बैंक)
अथवा
गेहूँ उत्पादन के लिए कौनसी भौगोलिक परिस्थितियाँ अनुकूल हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर—(1) गेहूँ की फसल को उगाने के लिए शीत ऋतु और पकने के समय खिली धूप की आवश्यकता होती है।
(2) इसके लिए समान रूप से वितरित 50 से 75 सेमी. वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है।
(3) उत्तर-पश्चिम में गंगा-सतलुज का मैदान तथा दक्कन की काली मृदा गेहूँ की खेती के लिए अधिक उपयुक्त होती है।
प्रश्न 2. प्रारम्भिक जीविका निर्वाह कृषि तथा वाणिज्यिक कृषि की तुलना कीजिए।
उत्तर—
प्रारम्भिक जीविका निर्वाह कृषि | वाणिज्यिक कृषि |
प्रारम्भिक जीविका निर्वाह कृषि भूमि के छोटे टुकड़ों पर आदिम कृषि औजारों जैसे लकड़ी के हल, डाओ (dao) और खुदाई करने वाली छड़ी तथा परिवार अथवा समुदाय श्रम की मदद से की जाती है। | वाणिज्यिक कृषि आधुनिक निवेशों, जैसे-अधिक पैदावार देने वाले बीजों, रासायनिक उर्वरकों तथा कीटनाशकों के प्रयोग द्वारा की जाती है। |
प्रश्न 3. गहन जीविका कृषि से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।
अथवा
गहन जीविका कृषि के बारे में आप क्या जानते हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर—गहन जीविका कृषि श्रम-गहन खेती है। इसमें अधिक उत्पादन के लिए अधिक मात्रा में जैव-रासायनिक निवेशों और सिंचाई का प्रयोग किया जाता है। यह उन क्षेत्रों में की जाती है जहाँ भूमि पर जनसंख्या का दबाव अधिक होता है।
प्रश्न 4. भारत में कृषि के महत्त्व का उल्लेख कीजिए।
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उत्तर—भारत में कृषि का महत्त्व-
(i) भारत की दो-तिहाई जनसंख्या कृषि कार्यों में संलग्न है।
(ii) कृषि एक प्राथमिक क्रिया है जो हमारे लिए अधिकांश खाद्यान्न उत्पन्न करती है।
(iii) कृषि विभिन्न उद्योगों के लिए कच्चा माल भी पैदा करती है। इसके अतिरिक्त कुछ कृषि उत्पादों, जैसे- चाय, कॉफी, मसाले आदि का निर्यात भी किया जाता है।
प्रश्न 5. रोपण कृषि की कोई तीन प्रमुख विशेषताएँ बताइये तथा मुख्य रोपण फसलों के नाम बताइये।
उत्तर— रोपण कृषि की तीन प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
(1) यह एक प्रकार की वाणिज्यिक कृषि होती है।
(2) इसके अन्तर्गत लम्बे-चौड़े क्षेत्र में एक ही फसल बोई जाती है।
(3) यह उद्योग तथा कृषि के मध्य एक अन्तरापृष्ठ होती है।
प्रमुख रोपण फसलें- चाय, कॉफी, रबड़, केला तथा गन्ना आदि।
प्रश्न 6. झूम कृषि से आप क्या समझते हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— झूम कृषि आदिम प्रकार की कृषि है, जिसमें किसान जमीन के टुकड़े को साफ कर उन पर अपने परिवार के भरण-पोषण हेतु फसलें उगाता है। वहाँ मृदा की उर्वरता कम होने पर किसान स्थानान्तरित होकर दूसरी भूमि का टुकड़ा साफ करके वहाँ कृषि करता है। कृषि के इस प्रकार को उत्तर-पूर्वी राज्यों (असम, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड) में 'झूम कृषि' कहा जाता है।
प्रश्न 7. रबड़ की कृषि के लिए आवश्यक भौगोलिक परिस्थितियों का वर्णन कीजिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— (i) रबड़ भूमध्यरेखीय क्षेत्र की फसल है परन्तु इनका उत्पादन उष्ण तथा उपोष्ण क्षेत्रों में भी किया जाता है (विशेष परिस्थितियों में)।
(ii) इनकी उपज के लिए 200 सेमी. से अधिक वर्षा की आवश्यकता होती है।
(iii) रबड़ की पैदावार के लिए 25° सेल्सियस से अधिक तापमान वाली नम तथा आर्द्र जलवायु की आवश्यकता होती है।
प्रश्न 8. हमारे देश की अर्थव्यवस्था में कृषि के महत्व को स्पष्ट कीजिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— हमारे देश की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है। भारत की दो-तिहाई जनसंख्या कृषि कार्यों में संलग्न है। कृषि एक प्राथमिक क्रिया है जो हमारे लिए अधिकांश खाद्यान्न उत्पन्न करती है। खाद्यान्नों के अलावा यह विभिन्न उद्योगों के लिए कच्चे माल का उत्पादन भी करती है। चाय, कॉफी तथा मसाले जैसे कुछ भारतीय उत्पादों का निर्यात भी किया जाता है, जिससे भारत विदेशी मुद्रा अर्जित करता है।
प्रश्न 9. वाणिज्यिक कृषि की प्रमुख विशेषताओं को संक्षेप में लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— वाणिज्यिक कृषि की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन निम्न प्रकार किया जा सकता है-
(i) इस प्रकार की कृषि में अधिक पैदावार हेतु आधुनिक बीजों, रासायनिक उर्वरकों तथा कीटनाशकों का उपयोग वृहद् स्तर पर किया जाता है।
(ii) कृषि के वाणिज्यीकरण का स्तर विभिन्न प्रदेशों में अलग-अलग है। उदाहरण- चावल की फसल ओडिशा में जीविका फसल है परन्तु हरियाणा तथा पंजाब में वाणिज्यिक फसल है।
प्रश्न 10. भारत में रबी की शस्य ऋतु के किन्हीं दो प्रमुख लक्षणों का उल्लेख कीजिये।
उत्तर— (i) भारत में रबी की फसलों को शीत ऋतु में अक्टूबर से दिसम्बर के मध्य बोया जाता है तथा ग्रीष्म ऋतु में अप्रैल से जून के मध्य तक काटा जाता है।
(ii) गेहूँ, जौ, मटर, चना और सरसों रबी की प्रमुख फसलें हैं। उत्तर और उत्तरी-पश्चिमी राज्य रबी की फसलों के उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण राज्य हैं।
प्रश्न 11. भारत में खरीफ की शस्य ऋतु की दो मुख्य विशेषताएँ बताइये।
उत्तर— (1) भारत में खरीफ की फसलें देश के विभिन्न भागों में मानसून के आगमन के साथ बोई जाती हैं तथा सितम्बर-अक्टूबर माह में काट ली जाती हैं।
(2) खरीफ की ऋतु में बोई जाने वाली प्रमुख फसलों में चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, अरहर, मूंग, उड़द, कपास, जूट, मूंगफली और सोयाबीन शामिल हैं।
प्रश्न 12. रबी और खरीफ फसल किसे कहते हैं? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)
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सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X 187
उत्तर—रबी फसल—जिन फसलों की बुवाई अक्टूबर से दिसम्बर के मध्य की जाती है तथा जिन्हें अप्रैल से जून माह के मध्य काट ली जाती है, रबी की फसल कहलाती है। गेहूँ, चना, जौ, मटर, सरसों प्रमुख रबी फसलें हैं।
खरीफ फसल—जो फसलें मानसून के आगमन के साथ ही जून-जुलाई के महीनों में बोई जाती हैं और सितम्बर-अक्टूबर माह में काटी जाती है, खरीफ फसल कहलाती हैं। प्रमुख खरीफ फसलें हैं-चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, दालें आदि।
प्रश्न 13. चावल की कृषि का वर्णन निम्न बिन्दुओं के आधार पर कीजिए-
(i) जलवायु (ii) उत्पादक क्षेत्र।
उत्तर—(i) जलवायु-चावल को उगाने के लिए उच्च तापमान (25° सेल्सियस से ऊपर) और अधिक आर्द्रता (100 सेमी. से अधिक वर्षा) की आवश्यकता होती है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में इसे सिंचाई करके उगाया जाता है।
(ii) उत्पादक क्षेत्र-चावल उत्तर और उत्तर-पूर्वी मैदानों, तटीय क्षेत्रों तथा डेल्टाई प्रदेशों में उगाया जाता है। सिंचाई सुविधा के कारण पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ कम वर्षा वाले क्षेत्रों में चावल की फसल उगाना संभव हो पाया है।
प्रश्न 14. रागी की फसल का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर—रागी एक मोटा अनाज है। रागी शुष्क प्रदेशों की फसल है और यह लाल, काली, बलुआ, दोमट और उथली काली मिट्टी पर अच्छी तरह उगाई जाती है। रागी के प्रमुख उत्पादक राज्य कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, सिक्किम, झारखंड और अरुणाचल प्रदेश हैं।
प्रश्न 15. 'कर्तन-दहन' कृषि क्या है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)
अथवा
कर्तन दहन प्रणाली (slash and burn) से आप क्या समझते हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर—कर्तन दहन प्रणाली में किसान जमीन के टुकड़े साफ करके उन पर अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए अनाज व अन्य खाद्य फसलें उगाते हैं। जब मिट्टी की उर्वरा शक्ति समाप्त हो जाती है तो उस भूमि को छोड़कर कृषि के लिए भूमि का दूसरा टुकड़ा साफ करते हैं।
प्रश्न 16. कर्तन दहन प्रणाली कृषि को विश्व के विभिन्न भागों में किन-किन नामों से जाना जाता है?
उत्तर—'कर्तन दहन प्रणाली' (slash and burn) कृषि को मैक्सिको और मध्य अमेरिका में 'मिलपा', वेनेजुएला में 'कोनुको', ब्राजील में 'रोका', मध्य अफ्रीका में 'मसोले', इंडोनेशिया में 'लदांग' और वियतनाम में 'रे' के नाम से जाना जाता है।
प्रश्न 17. कपास के उत्पादन के लिए कोई चार आवश्यक दशाएँ बतलाइये।
अथवा
कपास उत्पादन के लिए कोई चार अनुकूल दशाएँ लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर—(1) कपास की खेती के लिए उच्च तापमान और शुष्कतर क्षेत्र अनुकूल होता है। (2) कपास की अच्छी फसल हेतु हल्की वर्षा व सिंचाई की आवश्यकता होती है। (3) कपास की बेहतर उपज के लिए 210 पाला रहित दिन व खिली धूप की आवश्यकता होती है। (4) दक्कन पठार की काली मिट्टी कपास के उत्पादन के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
प्रश्न 18. जूट के उत्पादन के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ एवं जूट का उपयोग बताइए।
उत्तर—उत्पादन परिस्थितियाँ-(1) जूट की वृद्धि काल के दौरान उच्च तापमान की आवश्यकता होती है। (2) जूट की खेती के लिए बाढ़ के मैदानों की जल निकास वाली उपजाऊ मिट्टी आदर्श होती है।
उपयोग-(1) जूट का उपयोग बोरियां, चटाई, रस्सी, तन्तु, धागे व गलीचे आदि के निर्माण में होता है। (2) दस्तकारी की वस्तुओं के निर्माण में भी जूट का उपयोग होता है।
प्रश्न 19. तिलहन के रूप में मूँगफली की फसल का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर—मूँगफली-मूँगफली एक प्रमुख तिलहन फसल है। यह खरीफ की फसल है तथा देश में मुख्य तिलहनों के कुल उत्पादन का आधा भाग इसी फसल से प्राप्त होता है। 2019-20 के अनुसार गुजरात मूँगफली का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है और इसके अतिरिक्त राजस्थान और तमिलनाडु दूसरे मुख्य उत्पादक राज्य हैं।
प्रश्न 20. भूदान आंदोलन से आप क्या समझते हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर—भूदान आंदोलन-यह जमींदारों द्वारा अपनी जमीन को स्वेच्छा से भूमिहीन किसानों को देने का
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आंदोलन था। इसकी शुरुआत आचार्य विनोबा भावे ने की थी। इसका उद्देश्य भूमिहीन एवं गरीब किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार करना था। इस आंदोलन को रक्तहीन क्रान्ति भी कहा जाता है।
● दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-
प्रश्न 1. कृषि आधुनिकीकरण के लिए कौन-कौनसे कदम उठाये गये? (प्रश्न बैंक)
अथवा
हमारे देश में आजादी के बाद कृषि क्षेत्र में हुये सुधारों को संक्षेप में लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर—
(i) देश में संस्थागत सुधार हेतु जोतों की चकबंदी, सहकारिता तथा जमींदारी उन्मूलन आदि कार्य हुए।
(ii) पैकेज टेक्नोलॉजी पर आधारित हरित क्रान्ति व श्वेत क्रान्ति जैसी रणनीतियाँ आरम्भ हुईं।
(iii) सूखा, बाढ़, चक्रवात, आग तथा बीमारी के लिए फसल बीमा के प्रावधान किए गए।
(iv) किसानों को कम दर पर ऋण हेतु ग्रामीण बैंकर, सहकारी समितियों और बैंकों को स्थापित किया गया।
(v) भारत सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड और व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना शुरू की।
(vi) आकाशवाणी और दूरदर्शन पर किसानों हेतु मौसम व कृषि सम्बन्धी कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं।
प्रश्न 2. गहन जीविका कृषि को समझाते हुए इसकी प्रमुख समस्याएँ बताइये। (प्रश्न बैंक; माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)
उत्तर— गहन जीविका कृषि एक श्रम गहन खेती है। इस प्रकार की कृषि उन क्षेत्रों में की जाती है जहाँ भूमि पर जनसंख्या का दबाव अधिक होता है। इस कृषि में अधिक उत्पादन के लिए अधिक मात्रा में जैव-रासायनिक निवेशों और सिंचाई का प्रयोग किया जाता है।
भारत में भूस्वामित्व में विरासत के अधिकार के कारण पीढ़ी दर पीढ़ी जोतों का आकार छोटा और अलाभप्रद होता जा रहा है। किसान वैकल्पिक रोजगार के अभाव में सीमित भूमि से अधिकतम पैदावार लेने हेतु गहन जीविका कृषि कर रहे हैं।
प्रश्न 3. भारत में चाय को छोड़कर उगाई जाने वाली दो रोपण (बागानी) फसलों के नाम लिखो। गन्ना उत्पादन की आवश्यक दशाएँ लिखिए।
उत्तर— चाय के अलावा भारत में उगाई जाने वाली दो मुख्य रोपण (बागानी) फसलें हैं-(1) कॉफी (2) गन्ना।
गन्ना उत्पादन की आवश्यक भौगोलिक परिस्थितियाँ—(1) गन्ने की फसल के लिए 21° सेल्सियस से लेकर 27° सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है। (2) यह फसल 75 सेमी. से 100 सेमी. वार्षिक वर्षा वाली उष्ण और आर्द्र जलवायु में बोई जाती है। (3) इसे अनेक मिट्टियों में उगाया जा सकता है। (4) इसके लिए बुवाई से लेकर कटाई तक शारीरिक श्रम की आवश्यकता होती है। (5) कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सिंचाई की आवश्यकता होती है।
प्रश्न 4. भारत में दालों की कृषि का उल्लेख कीजिये।
उत्तर— भारत विश्व में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक एवं उपभोक्ता देश है। अरहर, उड़द, मूंग, मसूर, मटर तथा चना भारत की प्रमुख दलहनी फसलें हैं। दालों को कम नमी की आवश्यकता होती है। इस कारण इनकी कृषि शुष्क परिस्थितियों में भी की जा सकती है। फलीदार फसलें होने के कारण अरहर के अलावा अन्य सभी दालें वायु से नाइट्रोजन लेकर भूमि के उपजाऊपन को बनाए रखती हैं। इसी कारण इन फसलों को प्राय: फसलों के आवर्तन अर्थात् फसल-चक्र में बोया जाता है। शाकाहारी भोजन में दालों में सबसे अधिक प्रोटीन पाया जाता है।
भारत में मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक दालों के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।
प्रश्न 5. भारत में मक्का की कृषि का उल्लेख कीजिये।
उत्तर— मक्का-भारत में खरीफ की फसलों के अन्तर्गत मक्का की कृषि की जाती है। बिहार जैसे कुछ राज्यों में मक्का रबी की ऋतु में भी उगाई जाती है। यह खाद्यान्न व चारा दोनों रूपों में काम में आती है।
भौगोलिक परिस्थितियाँ-मक्का की फसल के लिए 21° सेल्सियस से 27° सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है तथा प्राचीन जलोढ़ मिट्टी में इसकी फसल अच्छी प्रकार से पैदा की जाती है।
उत्पादन-देश में आधुनिक प्रौद्योगिक निवेशों, जैसे-उच्च पैदावार देने वाले बीजों, उर्वरकों और सिंचाई के उपयोग से मक्का का उत्पादन बढ़ा है। कर्नाटक, उत्तरप्रदेश, बिहार, आन्ध्रप्रदेश और मध्यप्रदेश देश में मक्का के मुख्य उत्पादक राज्य हैं।
प्रश्न 6. रबी एवं खरीफ फसलों में कोई तीन अन्तर बताइए।
अथवा
रबी एवं खरीफ की फसलों में अन्तर लिखिए। (प्रश्न बैंक)
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सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X | 189
उत्तर— रबी एवं खरीफ फसलों में अन्तर
क्र.सं. | रबी फसल | खरीफ फसल |
1. | रबी फसलों की बुआई शीत ऋतु में अक्टूबर से दिसम्बर के मध्य की जाती है। | खरीफ फसलें मानसून के आगमन के साथ ही जून-जुलाई के महीनों में बोई जाती हैं। |
2. | इन्हें ग्रीष्म ऋतु में अप्रैल से जून माह के मध्य काट लिया जाता है। | इन फसलों को शीत ऋतु के प्रारम्भ होने से पूर्व ही सितम्बर-अक्टूबर माह में काट लिया जाता है। |
3. | गेहूँ, जौ, चना, मटर व सरसों आदि प्रमुख रबी फसलें हैं। | चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, दालें आदि प्रमुख खरीफ फसलें हैं। |
प्रश्न 7. मोटे अनाज पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— मोटे अनाज—भारत में उगाए जाने वाले मुख्य मोटे अनाज ज्वार, बाजरा और रागी हैं। हालांकि इन्हें मोटा अनाज कहा जाता है परन्तु इनमें पोषक तत्वों की मात्रा अत्यधिक होती है।
ज्वार-क्षेत्रफल और उत्पादन की दृष्टि से ज्वार देश की तीसरी महत्त्वपूर्ण खाद्यान्न फसल है। यह फसल वर्षा पर निर्भर होती है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश इसके अन्य मुख्य उत्पादक राज्य हैं।
बाजरा-बाजरा बलुआ और उथली काली मिट्टी पर उगाया जाता है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और हरियाणा इसके मुख्य उत्पादक राज्य हैं।
रागी-रागी शुष्क प्रदेशों की फसल है और यह लाल, काली, बलुआ, दोमट और उथली काली मिट्टी पर अच्छी तरह उगाई जाती है। कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, सिक्किम, झारखंड और अरुणाचल प्रदेश रागी के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।
प्रश्न 8. गेहूँ की खेती के लिए उपयुक्त भौगोलिक परिस्थितियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर— गेहूँ भारत की दूसरी सबसे महत्त्वपूर्ण खाद्य फसल है। इसकी पैदावार मुख्य रूप से देश के उत्तर तथा उत्तर-पश्चिमी भागों में की जाती है। यह रबी ऋतु की फसल है। गेहूँ की फसल की पैदावार के लिए शीत ऋतु तथा इसके पकने के लिए खिली धूप आवश्यक होती है। गेहूँ की उपज के लिए समान रूप से वितरित 50 से 75 सेमी. वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है। देश में गेहूँ उगाने वाले मुख्य क्षेत्र हैं-उत्तर-पश्चिम में गंगा-सतलुज का मैदान और दक्कन की काली मृदा वाला प्रदेश। हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे कुछ राज्य गेहूँ पैदा करने वाले मुख्य राज्य हैं।
प्रश्न 9. भारत में तिलहन की फसल के प्रमुख बिन्दु लिखिए।
उत्तर— तिलहन—भारत में तिलहन के प्रमुख बिन्दु निम्न प्रकार हैं-
(1) वर्ष 2018 में भारत विश्व में चीन के बाद दूसरा बड़ा तिलहन उत्पादक देश था।
(2) वर्ष 2018 में 'टोरिया' के उत्पादन में भारत का विश्व में कनाडा और चीन के बाद तीसरा स्थान था।
(3) देश में कुल बोए गए क्षेत्र के 12 प्रतिशत भाग पर कई तिलहन की फसलें उगाई जाती हैं।
(4) मूँगफली, सरसों, नारियल, तिल, सोयाबीन, अरंडी, बिनौला, अलसी और सूरजमुखी भारत में उगाई जाने वाली मुख्य तिलहन फसलें हैं।
(5) इनमें से अधिकतर खाद्य हैं और खाना बनाने में प्रयोग की जाती हैं। परन्तु इनमें से कुछ तिलहनों के बीजों को साबुन, प्रसाधन (श्रृंगार का सामान) और उबटन उद्योग में कच्चे माल के रूप में भी प्रयोग किया जाता है।
(6) देश में मुख्य तिलहनों के कुल उत्पादन का आधा भाग मूँगफली से प्राप्त होता है। गुजरात, राजस्थान और तमिलनाडु मूँगफली उत्पादन के प्रमुख राज्य हैं।
(7) तिल की फसल दक्षिणी भारत में रबी में बोई जाती हैं तो उत्तरी भारत में खरीफ में, अरंडी, खरीफ और रबी दोनों ही फसल ऋतुओं में बोई जाती है।
प्रश्न 10. भारत में बागवानी फसलों के बारे में बताइये।
उत्तर— भारत में बागवानी फसलों का वर्णन निम्न बिन्दुओं में स्पष्ट है-
(1) वर्ष 2018 में भारत का विश्व में फलों और सब्जियों के उत्पादन में चीन के बाद दूसरा स्थान था।
(2) भारत उष्ण और शीतोष्ण कटिबंधीय दोनों ही प्रकार के फलों का उत्पादक है।
(3) भारतीय फलों जिनमें महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बंगाल के आम, नागपुर
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और चेरापूँजी (मेघालय) के संतरे, केरल, मिजोरम, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के केले, उत्तर प्रदेश और बिहार की लीची, मेघालय के अनन्नास, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र के अंगूर तथा हिमाचल प्रदेश और जम्मू व कश्मीर के सेब, नाशपाती, खूबानी और अखरोट की विश्वभर में बहुत माँग है।
(4) सब्जियों में भारत का मटर, फूलगोभी, प्याज, बंदगोभी, टमाटर, बैंगन, आलू आदि के उत्पादन में प्रमुख स्थान है।
प्रश्न 11. स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् भारत में कृषि क्षेत्र में किये गये प्रमुख सुधारों को लिखिए।
उत्तर— (1) स्वतंत्रता के पश्चात् देश में संस्थागत सुधार करने के लिए जोतों की चकबंदी, सहकारिता तथा जमींदारी आदि समाप्त करने को प्राथमिकता दी गई। प्रथम पंचवर्षीय योजना में भूमि सुधार मुख्य लक्ष्य था। भूमि पर पुश्तैनी अधिकार के कारण यह टुकड़ों में बँटती जा रही थी जिसकी चकबंदी करना अनिवार्य था।
(2) भूमि सुधार कानून बने परन्तु इनके लागू करने में ढील दी गई।
(3) पैकेज टेक्नोलॉजी पर आधारित हरित क्रान्ति एवं श्वेत क्रान्ति जैसे कृषि सुधार कार्यक्रमों का संचालन किया गया।
(4) किसानों को सूखा, बाढ़, चक्रवात, आग एवं बीमारी के लिए फसल बीमा उपलब्ध कराया गया तथा उन्हें न्यूनतम दर पर ऋण उपलब्ध कराने के लिए ग्रामीण बैंकों, सहकारी समितियों एवं भूमि विकास बैंकों की स्थापना की गई।
(5) किसानों के लाभ के लिए किसान क्रेडिट कार्ड एवं व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा शुरू की गई।
(6) किसानों को बिचौलियों और दलालों से बचाने के लिए न्यूनतम सहायता मूल्य एवं कुछ महत्त्वपूर्ण फसलों के लिए लाभदायक खरीद मूल्यों की सरकार द्वारा घोषणा की जाती है।
(7) आकाशवाणी एवं दूरदर्शन पर कृषकों के लिए मौसम की जानकारी के बुलेटिन एवं कृषि कार्यक्रमों का प्रसारण किया जाता है।
प्रश्न 12. भूदान तथा ग्रामदान पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर— भूदान तथा ग्रामदान—भूदान तथा ग्रामदान आन्दोलन विनोबा भावे द्वारा चलाया गया था। विनोबा भावे एक बार जब आंध्र प्रदेश के एक गाँव पोचमपल्ली में बोल रहे थे तो कुछ भूमिहीन गरीब ग्रामीणों ने उनसे अपने आर्थिक भरण-पोषण के लिए कुछ भूमि माँगी। विनोबा भावे ने उनको आश्वासन दिया कि यदि वे सहकारी खेती करें तो वे भारत सरकार से बात करके उनके लिए जमीन मुहैया करवाएंगे।
अचानक श्री रामचन्द्र रेड्डी नामक एक महानुभाव उठ खड़े हुए और उन्होंने 80 भूमिहीन ग्रामीणों को 80 एकड़ भूमि बाँटने की पेशकश की। इसे 'भूदान' के नाम से जाना गया। बाद में विनोबा भावे ने पूरे देश में यात्राएँ कीं और अपना यह विचार पूरे भारत में फैलाया। कुछ जमींदारों ने, जो अनेक गाँवों के मालिक थे, भूमिहीनों को पूरा गाँव देने की पेशकश भी की। इसे 'ग्रामदान' कहा गया। कुछ जमींदारों ने भूमि सीमा कानून से बचने के लिए अपनी भूमि का एक हिस्सा दान किया था।
विनोबा भावे द्वारा शुरू किए गए इस भूदान-ग्रामदान आन्दोलन को 'रक्तहीन क्रान्ति' का भी नाम दिया गया।
प्रश्न 13. हमारे देश की तीन शस्य ऋतुओं के बारे में संक्षेप में लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— भारत में तीन शस्य ऋतुएँ होती हैं-रबी, खरीफ और जायद।
(i) रबी ऋतु—अक्टूबर से दिसम्बर के मध्य रबी की फसलें बोई जाती हैं जो अप्रैल से जून के मध्य तक इनकी कटाई होती है।
(ii) खरीफ ऋतु—मानसून के मौसम में खरीफ फसलें बोई जाती हैं तथा सितम्बर-अक्टूबर में इनकी कटाई होती है।
(iii) जायद ऋतु—रबी और खरीफ फसलों के मध्य काल में जायद फसलों की बुवाई की जाती है तथा आमतौर पर जून तक कटाई कर ली जाती है।
प्रश्न 14. जीविका कृषि की प्रमुख विशेषताएँ बताइये। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— जीविका कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
(i) जीविका कृषि छोटे-छोटे बँटे हुए जोतों (खेतों) में की जाती है।
(ii) यह कृषि मुख्यतः परिवार के भरण-पोषण के लिए की जाती है।
(iii) इससे जुड़े किसान गरीब होते हैं, अतः अच्छी किस्म के बीज व उर्वरक इस्तेमाल नहीं कर पाते।
(iv) इस कृषि में पारम्परिक औजारों तथा सीमित रसायनों का इस्तेमाल होता है।
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सामाजिक विज्ञान (भूगोल) कक्षा X 191
(v) इस प्रकार की कृषि में मिश्रित फसलें उगाई जाती हैं।
(vi) इस कृषि में अविकसित फसलें उत्पन्न होती हैं, जिससे उत्पादकता कम होती है।
(vii) इस कृषि द्वारा बिक्री हेतु बहुत कम या कोई अधिशेष उपज नहीं होती।
प्रश्न 15. गन्ना उत्पादन की अनुकूल दशाओं पर प्रकाश डालिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— गन्ना एक उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय फसल है। यह फसल 21° सेल्सियस से 27° सेल्सियस तापमान और 75 सेमी. से 100 सेमी. वार्षिक वर्षा वाली उष्ण और आर्द्र जलवायु में बोई जाती है। कम वर्षा वाले प्रदेशों में सिंचाई की आवश्यकता होती है। इसे अनेक मिट्टियों में उगाया जा सकता है तथा इसके लिए बुवाई से लेकर कटाई तक काफी शारीरिक श्रम की आवश्यकता होती है।
उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, पंजाब और हरियाणा गन्ने के मुख्य उत्पादक राज्य हैं।
प्रश्न 16. भारत में दलहन की फसल के मुख्य बिन्दु लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— भारत में दलहन की फसल के मुख्य बिन्दु निम्नलिखित हैं-
(i) भारत विश्व में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक तथा उपभोक्ता देश है।
(ii) शाकाहारी खाद्य सामग्रियों में से दालें सबसे अधिक प्रोटीन प्रदान करती हैं।
(iii) तुअर (अरहर), उड़द, मूँग, मसूर, मटर और चना भारत की मुख्य दलहनी फसलें हैं।
(iv) दालों को कम नमी की आवश्यकता होती है, अतः इन्हें शुष्क परिस्थितियों में भी उगाया जा सकता है।
(v) फलीदार फसलें होने के नाते सभी दालें (अरहर को छोड़कर) वायु से नाइट्रोजन लेकर भूमि की उर्वरता बनाए रखती हैं।
(vi) भारत में मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक दालों के मुख्य उत्पादक राज्य हैं।
● निबन्धात्मक प्रश्न—
प्रश्न 1. भारत में कृषि के प्रमुख प्रकार बताइये। प्रारम्भिक जीविका निर्वाह कृषि की प्रमुख विशेषताएँ बताइये।
उत्तर— भारत में कृषि के प्रमुख प्रकार—भारत में प्रमुख रूप से निम्नलिखित प्रकार की कृषि की जाती है-
(i) प्रारम्भिक जीविका निर्वाह कृषि
(ii) गहन जीविका कृषि
(iii) वाणिज्यिक कृषि
(iv) रोपण कृषि।
प्रारम्भिक जीविका निर्वाह कृषि की प्रमुख विशेषताएँ— प्रारम्भिक जीविका निर्वाह कृषि की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
(1) प्रारम्भिक जीविका निर्वाह कृषि भूमि के छोटे-छोटे टुकड़ों पर की जाती है।
(2) इस प्रकार की कृषि पद्धति में आदिम अथवा प्राचीन कृषि यंत्रों का प्रयोग किया जाता है। इन यंत्रों में लकड़ी का हल, डाओ तथा खुदाई करने वाली छड़ी आदि शामिल हैं।
(3) इस प्रकार की कृषि परिवार अथवा समुदाय श्रम की सहायता से की जाती है।
(4) यह कृषि प्रायः मानसून, मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता और फसल उगाने के लिए अन्य पर्यावरणीय परिस्थितियों की उपयुक्तता पर निर्भर करती है।
(5) यह 'कर्तन दहन प्रणाली' कृषि है। इसके अन्तर्गत किसान जमीन के टुकड़े को साफ करके उन पर अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए अनाज व अन्य खाद्य फसलें उगाते हैं। जब मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है तो किसान उस भूमि के टुकड़े से स्थानांतरित हो जाते हैं तथा कृषि के लिए भूमि का दूसरा टुकड़ा साफ करते हैं। कृषि के इस प्रकार के स्थानांतरण से प्राकृतिक क्रियाओं द्वारा मिट्टी की उर्वरता शक्ति बढ़ जाती है।
(6) चूंकि किसान उर्वरक अथवा अन्य आधुनिक तकनीकों का प्रयोग नहीं करते, इसलिए इस प्रकार की कृषि में उत्पादकता कम होती है।
(7) प्रारम्भिक जीविका निर्वाह कृषि में किसान केवल उतना ही उत्पादन करता है जो कि उसके जीवन निर्वाह के लिए आवश्यक होता है।
(8) विभिन्न देशों में तथा भारत के विभिन्न प्रान्तों में कर्तन दहन प्रणाली कृषि को विभिन्न नामों से जाना जाता है।
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प्रश्न 2. भारत में गहन जीविका कृषि तथा वाणिज्यिक कृषि की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिये।
उत्तर— गहन जीविका कृषि की प्रमुख विशेषताएँ—भारत में की जाने वाली गहन जीविका कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
(1) यह कृषि उन क्षेत्रों में की जाती है जहाँ भूमि पर जनसंख्या का दबाव अधिक होता है।
(2) यह श्रम-गहन खेती है जहाँ अधिक उत्पादन के लिए अधिक मात्रा में जैव-रासायनिक निवेशों और सिंचाई का प्रयोग किया जाता है।
(3) भूस्वामित्व में विरासत के अधिकार के कारण पीढ़ी-दर-पीढ़ी जोतों का आकार छोटा और अलाभप्रद होता जा रहा है।
(4) इस प्रकार की कृषि के अन्तर्गत किसान के पास वैकल्पिक रोजगार न होने के कारण सीमित भूमि से अधिकतम पैदावार लेने की कोशिश की जाती है। अतः कृषि भूमि पर दबाव बहुत अधिक है।
वाणिज्यिक कृषि की प्रमुख विशेषताएँ—भारत में की जाने वाली वाणिज्यिक कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
(1) वाणिज्यिक कृषि के अन्तर्गत अधिक पैदावार देने वाले बीजों, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग से अधिक पैदावार प्राप्त की जाती है।
(2) इसके अन्तर्गत वाणिज्यीकरण का स्तर विभिन्न प्रदेशों में अलग-अलग है।
(3) रोपण कृषि भी एक प्रकार की वाणिज्यिक कृषि है। इस प्रकार की कृषि में लम्बे-चौड़े क्षेत्र में एकल फसल बोई जाती है। इसके लिए अत्यधिक पूँजी तथा श्रमिकों की आवश्यकता होती है।
(4) वाणिज्यिक कृषि में उत्पादन बिक्री के लिए होता है इसलिए इसके विकास में परिवहन और संचार के साधनों से सम्बन्धित उद्योग और बाजार महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं।
प्रश्न 3. भारत में कृषि विकास के प्रौद्योगिकी एवं संस्थागत सुधारों का वर्णन कीजिए।
अथवा
'प्रौद्योगिकी और संस्थागत सुधार' पर एक निबंध लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— भारत में कृषि विकास के प्रौद्योगिकी एवं संस्थागत सुधारों का वर्णन निम्न बिन्दुओं के अन्तर्गत किया जा सकता है-
(i) संस्थागत सुधारों हेतु स्वतंत्रता के पश्चात् जोतों की चकबंदी, सहकारिता तथा जमींदारी आदि को प्राथमिकता दी गई।
(ii) 1960 तथा 1970 के दशक में कृषि सुधार हेतु कई योजनाओं की शुरुआत की; जैसे हरित क्रान्ति तथा श्वेत क्रान्ति।
(iii) सूखा, बाढ़, चक्रवात, आग तथा बीमारी हेतु फसल बीमा और किसानों को कम दर पर ऋण हेतु ग्रामीण बैंकों, सहकारी समितियों और बैंकों की स्थापना की।
(iv) किसानों के लाभ के लिए किसान क्रेडिट कार्ड और व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना शुरू की।
(v) आकाशवाणी और दूरदर्शन द्वारा किसानों के लिए मौसम की जानकारी सम्बन्धित बुलेटिन तथा कृषि कार्यक्रम प्रसारित किया गया।
(vi) सरकार, किसानों को बिचौलियों तथा दलालों द्वारा शोषण से बचाने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, लाभदायक खरीद मूल्य आदि की घोषणा करती है।
प्रश्न 4. भारत के शस्य प्रारूप पर एक भौगोलिक निबंध लिखिए।
अथवा
भारत में शस्य प्रारूप का वर्णन कीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)
उत्तर— भारत का शस्य प्रारूप
भारत में निम्नलिखित तीन प्रमुख शस्य ऋतुएँ हैं-(1) रबी (2) खरीफ और (3) जायद। यथा-
(1) रबी की शस्य ऋतु-भारत में रबी की फसलों को शीत ऋतु में अक्टूबर से दिसम्बर के मध्य बोया जाता है और ग्रीष्म ऋतु में अप्रैल से जून के मध्य काटा जाता है। शीत ऋतु में शीतोष्ण पश्चिमी विक्षोभों से होने वाली वर्षा से इस ऋतु की फसलों को बहुत लाभ मिलता है।
प्रमुख फसलें-भारत में रबी की फसलों के अन्तर्गत बोई जाने वाली प्रमुख फसलों में गेहूँ, जौ, मटर, चना और सरसों हैं।
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( 3 ) जूट-जूट को सुनहरा रेशा कहा जाता है। जूट की फसल बाढ़ के मैदानों में जल निकास वाली उपजाऊ मिट्टी में उगाई जाती है जहाँ प्रतिवर्ष बाढ़ से आई नवीन मिट्टी जमा रहती है। इसके बढ़ने के समय उच्च तापमान की आवश्यकता होती है। भारत में पश्चिमी बंगाल, बिहार, असम, उड़ीसा तथा मेघालय जूट उत्पादक प्रमुख राज्य हैं। इसका प्रयोग बोरियाँ, चटाई, रस्सी, तन्तु व धागे, गलीचे और दूसरी दस्तकारी की वस्तुएँ बनाने में किया जाता है।
प्रश्न 7. भारत में खाद्यान्नों के अलावा उत्पादित की जाने वाली अन्य खाद्य फसलों का विवेचन कीजिये।
उत्तर— भारत में खाद्यान्नों के अलावा अन्य खाद्य फसलें
भारत में उत्पादित की जाने वाली खाद्यान्नों के अलावा अन्य खाद्य फसलें निम्नलिखित हैं-गन्ना, तिलहन, कॉफी, चाय और बागवानी फसलें। यथा-
( 1 ) गन्ना-गन्ना एक उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय फसल है। गन्ने के उत्पादन की दृष्टि से भारत का विश्व में दूसरा स्थान है। यह फसल 21° सेल्सियस से 27° सेल्सियस तापमान और 75 सेमी. से 100 सेमी. वार्षिक वर्षा वाली उष्ण और आर्द्र जलवायु में बोई जाती है। यह चीनी, गुड़, खांडसारी और शीरा बनाने के काम में आता है। भारत में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आन्ध्रप्रदेश, बिहार, पंजाब और हरियाणा गन्ने के मुख्य उत्पादक राज्य हैं।
( 2 ) तिलहन-वर्ष 2018 में भारत विश्व में चीन के बाद दूसरा बड़ा तिलहन उत्पादक देश है। मूंगफली, सरसों, नारियल, तिल, सोयाबीन, अरण्डी, बिनौला, अलसी और सूरजमुखी भारत में पैदा की जाने वाली मुख्य तिलहन फसलें हैं। आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, गुजरात तथा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान प्रमुख तिलहन उत्पादक राज्य हैं। तिलहनों के कुल उत्पादन का आधा भाग मूंगफली से प्राप्त होता है।
( 3 ) कॉफी-भारतीय कॉफी अपनी गुणवत्ता के लिए विश्वविख्यात है। यहाँ अरेबिका किस्म की कॉफी पैदा की जाती है, जो कि शुरू में यमन से यहाँ लाई गई थी। वर्तमान समय में इसकी कृषि नीलगिरि की पहाड़ियों के आसपास कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में की जाती है।
( 4 ) चाय-भारत में चाय की कृषि पेय पदार्थ के रूप में की जाती है। वर्तमान समय में अधिकांश चाय बागानों के मालिक भारतीय हैं। भारत में असम, पश्चिमी बंगाल में दार्जिलिंग और जलपाईगुड़ी जिलों की पहाड़ियाँ, तमिलनाडु, केरल, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, मेघालय, आन्ध्रप्रदेश और त्रिपुरा आदि चाय उत्पादक राज्य हैं। सन् 2018 में भारत विश्व में चीन के बाद दूसरा बड़ा चाय उत्पादक देश था।
( 5 ) बागवानी फसलें-सन् 2018 के अनुसार भारत विश्व में चीन के बाद सबसे अधिक फलों और सब्जियों का उत्पादन करता है। यहाँ उष्ण और शीतोष्ण कटिबंधीय दोनों ही प्रकार के फल उत्पादित किए जाते हैं। भारतीय फलों में आम, संतरे, केला, लीची, अनन्नास, अंगूर, सेब, नाशपाती, खुबानी और अखरोट प्रमुख हैं। यहाँ मटर, फूलगोभी, प्याज, बन्द गोभी, टमाटर, बैंगन और आलू प्रमुख रूप से उत्पादित किए जाते हैं।
प्रश्न 8. चाय की उपज के लिए अनुकूल तापमान और वर्षा एवं अन्य दशाओं को स्पष्ट कीजिए। चाय उत्पादक प्रमुख राज्यों के नाम बताइए।
उत्तर— चाय-चाय रोपण कृषि से प्राप्त एक महत्त्वपूर्ण पेय पदार्थ है। सन् 2018 में भारत विश्व में चीन के बाद दूसरा बड़ा चाय उत्पादक देश है।
तापमान तथा वर्षा- चाय की पैदावार के लिए उष्ण तथा उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु की आवश्यकता होती है। इसकी कृषि के लिए आर्द्र और लम्बी अवधि वाली ग्रीष्म ऋतु चाहिए। चाय की झाड़ियों को उगाने के लिए वर्ष भर कोष्ण, नम और पालारहित जलवायु की आवश्यकता होती है। 200 से 250 सेमी. वर्षा इसके लिए आवश्यक होती है। वर्षा का फुहार के रूप में होना और वर्षभर होना अधिक लाभदायक होता है। वर्ष भर समान रूप से होने वाली वर्षा की बौछारें इसकी कोमल पत्तियों के विकास में सहायक होती हैं। इसके लिए ह्यूमस और जीवांशयुक्त गहरी मिट्टी तथा सुगम जल निकास वाले ढलवाँ क्षेत्र उपयुक्त हैं।
अन्य दशाएँ- चाय में श्रम की अत्यधिक आवश्यकता होती है। इसके लिए पर्याप्त मात्रा में सस्ता और कुशल श्रम आवश्यक होता है। इसकी ताजगी बनाये रखने के लिए चाय की पत्तियाँ बागान में ही संसाधित की जाती हैं।
प्रमुख उत्पादक क्षेत्र- भारत में असम, पश्चिमी बंगाल (दार्जिलिंग और जलपाईगुड़ी जिलों की पहाड़ियाँ), तमिलनाडु, केरल, मेघालय और त्रिपुरा आदि प्रमुख चाय उत्पादक राज्य हैं।
प्रश्न 9. सरकार द्वारा किसानों के हित में किये गये संस्थागत सुधारों के बारे में अपने विचार लिखिए।
( प्रश्न बैंक )
उत्तर— हम यह देख चुके हैं कि पूर्व में प्रौद्योगिकी तथा संस्थागत परिवर्तनों के अभाव में भूमि संसाधन के लगातार प्रयोग के कारण कृषि का विकास अवरुद्ध हो जाता था। आजादी के बाद से भारत में कृषि सुधार तथा किसानों
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के हित में कई संस्थागत और तकनीकी सुधार का निर्णय लिया गया। चूँकि भारत कृषि प्रधान देश रहा है इसलिए समावेशी विकास के लिए भारत में नीति-निर्माण के सबसे महत्त्वपूर्ण पहलुओं में से एक कृषि में सुधार है।
किसानों को भूमि से अच्छी पैदावार मिल सके इसलिए सरकार ने प्रथम पंचवर्षीय योजना में भूमि सुधार के लिए कई नीतियों, जैसे-जोतों की चकबंदी, सहकारिता तथा जमींदारी आदि समाप्त करने का कानून बनाया। हरित क्रान्ति तथा श्वेत क्रान्ति जैसी रणनीतियाँ प्रारम्भ की गईं। प्राकृतिक आपदा से किसानों को उनके नुकसान की भरपाई हेतु फसल बीमा जैसी सुविधा दी गई। किसानों को कम दर पर ऋण कृषि कार्य हेतु प्रदान किया गया।
इन सब सुधारों के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ। आकाशवाणी तथा दूरदर्शन पर किसानों के लिए विशेष कार्यक्रम प्रसारित किये गये जिससे किसानों को मौसम की जानकारी प्राप्त होती थी तथा इसके परिणामस्वरूप मौसम से फसलों को होने वाले नुकसान में कमी आई।