Rajasthan Board RBSE Class 12 Hindi व्याकरण पद परिचय

जब व्याकरण के नियमों के अनुसार शब्द को वाक्य में प्रयोग की योग्यता प्रदान की जाती है, तो वह पद कहलाता है। यह योग्यता विभक्ति, वचन, लिंग, काल आदि द्वारा प्राप्त होती है।

पद के भेद-पद के दो भेद किये गये हैं – 1. विकारी 2. अविकारी ।

1. विकारी पद-जिन पदों का स्वरूप लिंग, वचन, कारक तथा काल के अनुसार प्रयोग किये जाने पर परिवर्तित होता रहता है, वे ‘विकारी पद’ कहे जाते हैं। ‘विकारी पद’ चार प्रकार के होते हैं-

  • संज्ञा
  • सर्वनाम
  • विशेषण
  • क्रिया।

2. अविकारी पद – जो पद लिंग, वचन, कारक आदि के प्रयोग से अप्रभावित रहते हैं, वे अविकारी पद कहे जाते हैं। इन पदों को अव्यय भी कहा जाता है। अव्यय के चार प्रकार हैं-

  • क्रिया-विशेषण
  • विस्मयादिबोधक
  • सम्बन्ध-बोधक तथा
  • समुच्चय–बोधक।

RBSE Class 12 Hindi पद परिचय विकारी पद

(i) संज्ञा
संज्ञा का अर्थ है-‘नाम’। किसी प्राणी, वस्तु, स्थान, गुण, भाव आदि के नाम को संज्ञा कहा जाता है। यथा-मनुष्य, गाय, वस्त्र, पर्वत, गंगा, मधुरता, क्रोध आदि।

संज्ञा के भेद – संज्ञा तीन प्रकार की होती है –

  • व्यक्तिवाचक
  • जातिवाचक
  • भाववाचक।

व्याकरण के कुछ विद्वाने अंग्रेजी के अनुकरण पर संज्ञा के दो अन्य ‘द्रव्य-वाचक’ तथा ‘समूह-वाचक’ भेद भी मानते हैं।

  1. व्यक्तिवाचक संज्ञा – जिस संज्ञा से किसी एक व्यक्ति, वस्तु या स्थान का बोध होता है, उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं। यथा–ब्रजेश, गांडीव, हिमालय, मथुरा आदि।
  2. जातिवाचक संज्ञा – किसी प्राणी, वस्तु या स्थान की पूरी जाति का बोध कराने वाली संज्ञा जातिवाचक कही जाती है। यथा-बालक, पक्षी, भवन, वन आदि।
  3. भाववाचक संज्ञा – किसी गुण, देशा, व्यापार तथा भाव का बोध कराने वाली संज्ञा भाववाचक कही जाती है। यथा–शीत, गर्मी, उन्नति, पढ़ाई प्रेम आदि।

(ii) सर्वनाम –
संज्ञा के बदले प्रयोग किये जाने वाले शब्द सर्वनाम कहे जाते हैं। एक ही वाक्य में संज्ञा के बदले प्रयोग किये जाने वाले शब्द सर्वनाम कहे जाते हैं। एक ही वाक्य में संज्ञा-पदों की पुनरुक्ति से बचने के लिए सर्वनामों का प्रयोग किया जाता है। यथा- भुवनेश ने कहा कि भुवनेश पढ़ रहा है। इसके स्थान पर भुवनेश ने कहा कि ‘वह’ पढ़ रहा है, अधिक उपयुक्त प्रतीत होता है।

सर्वनार्म के भेद – सर्वनाम छह प्रकार के होते हैं –

  1. पुरुषवाचक – व्यक्तिवाचक संज्ञा के बदले जिस सर्वनाम का प्रयोग किया जाता है, उसे पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं। पुरुषवाचक सर्वनाम तीन प्रकार के हैं-उत्तम पुरुष, मध्यम पुरुष तथा अन्य पुरुष ।
    • उत्तम पुरुष – बात के कहने वाले को उत्तम पुरुष कहते हैं। जैसे-मैं, हम, मेरा, हमारा, मुझको, हमको आदि।
    • मध्यम पुरुष – बात जिससे कही जाती है, उसे मध्यम पुरुष कहते हैं। तू, तुम, तुमको, तुम्हारा आदि मध्यम पुरुष के अंतर्गत आते
    • अन्य पुरुष – जिसके सम्बन्ध में बात की जाती है, उसे अन्य पुरुष कहते हैं। वह, वे, उसका, उनका आदि अन्य पुरुष के अंतर्गत आते हैं।
  2. निजवाचक – निज के लिए प्रयुक्त सर्वनाम निजवाचक कहे जाते हैं। यथा-अपना, अपनी, स्वयं आदि।
  3. निश्चयवाचक – किसी निश्चित वस्तु, व्यक्ति का बोध कराने वाले सर्वनाम को निश्चयवाचक सर्वनाम कहा जाता है। यथा-यह लड़का, वह वृक्ष, वे फल।
  4. अनिश्चयवाचक – किसी निश्चित वस्तु, व्यक्ति का बोध न कराने वाले सर्वनाम अनिश्चयवाचक कहे जाते हैं। यथा-कोई आ रहा है। पानी में कुछ पड़ा है।
  5. सम्बन्धवाचक – दो वस्तुओं या व्यक्तियों के सम्बन्ध को सूचित करने वाले सर्वनाम सम्बन्धवाचक कहे जाते हैं। यथा-जो, जिसे, जिन्हें आदि।
  6. प्रश्नवाचक – जिन सर्वनामों का प्रयोग प्रश्न करने के लिए किया जाता है, वे प्रश्नवाचक सर्वनाम होते हैं। यथा-कौन, क्या, किस आदि।

(iii) विशेषण – संज्ञा-पदों की विशेषता व्यक्त करने वाले शब्द विशेषण कहे जाते हैं। यथा-स्वच्छ जल, ‘ऊँचा’ शब्द ‘पर्वत’ संज्ञा की विशेषता बता रहा है। अत: ये शब्द विशेषण हैं। विशेषण सर्वनाम की भी विशेषता बता सकता है। यथा-तुम मूर्ख हो। यहाँ ‘तुम’ सर्वनाम का विशेषण ‘मूर्ख’ है।

विशेषण के भेद – विशेषण के निम्नलिखित चार भेद हैं –

  1. गुणवाचक – संज्ञा के किसी गुण, रूप, रंग, आकार, दशा आदि को बताने वाले विशेषण गुणवाचक विशेषण कहे जाते हैं। यथा-सुन्दर लड़की, काला साँप, टेढ़ा बाँस, बीमार स्त्री आदि।
  2. संख्यावाचक – संज्ञा की संख्या प्रकट करने वाले विशेषण संख्यावाचक विशेषण कहे जाते हैं। यथा-दो पुस्तके, पाँच पंच, पहला लड़का, तीसरी गली आदि।
  3. परिमाणवाचक – किसी वस्तु की माप या मात्रा को व्यक्त करने वाले विशेषण को परिमाणवाचक विशेषण कहा जाता है। यथा– थोड़ा पानी, बहुत काम, दो किलो आम, पाँच मीटर खादी आदि ।
  4. संकेतवाचक विशेषण – इसे सार्वनामिक विशेषण भी कहा जाता है। किसी संज्ञा की ओर संकेत करने वाले सर्वनाम शब्द संकेतवाचक विशेषण कहे जाते हैं। यथा- यह बच्चा, वह पक्षी, ये पुस्तकें, कोई आदमी, जो बात आदि।

विशेषण की कोटियाँ – कुछ विशेषणों को तीन कोटियाँ होती हैं –

  1. मूलावस्था
  2. उत्तरावस्था
  3. उत्तमावस्था।

जैसे – उच्च – (मूल या सामान्यावस्था )
उच्चतरे – (उत्तरावस्था)
उच्चतम – (उत्तमावस्था)

विशेष्य – संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताई जाती है, उसे विशेष्य कहा जाता है। विशेषण का लिंग और वचन विशेष्य के अनुसार होता है। यथा-अच्छा लड़का, अच्छी लड़की, अच्छे लड़के आदि।

(iv) क्रिया – जो शब्द किसी कार्य का किया जाना या होना प्रकट करते हैं, उनको क्रिया कहते हैं। यथा-पढ़ना, गिरना, सोना, दौड़ना आदि।

क्रिया के भेद – क्रिया दो प्रकार की होती हैं

  1. सकर्मक क्रिया – जिस क्रिया का प्रभाव कर्ता के अतिरिक्त किसी अन्य पर भी होता है, उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं। क्रिया के इस लक्ष्य को कर्म कहते हैं। यथा-गौरव ‘आम’ खाता है। इस वाक्य में ‘खाता है’ क्रिया-पद है। खाने की क्रिया का फल ‘गौरव’ के अतिरिक्त ‘आम’ कर्म है।
  2. अकर्मक क्रिया – अकर्मक क्रिया का कर्म नहीं होता। वह कर्ता तक ही सीमित रहती है। यथा-वह सोती है। यहाँ ‘सोती है क्रिया का फल कर्ता तक ही सीमित है। अत: यह अकर्मक क्रिया है।

अकर्मक व सकर्मक क्रिया की पहचान – क्रिया के पूर्व ‘क्या’ लगाने पर यदि उसका उत्तर सम्भव हो तो क्रिया सकर्मक होती है। यदि ‘क्या’ का उत्तर सम्भव न हो तो क्रिया अकर्मक होती है। यथा-खाता है के पूर्व ‘क्या’ जोड़े तो क्या खाता है?’ प्रश्न हुआ। इसका कोई न कोई उत्तर मिल सकता है। फल खाता है, मिठाई खाता है आदि । किन्तु सोता है, दौड़ता है, रहता है आदि क्रियाओं के साथ क्या लगाने पर कोई उत्तर नहीं मिलता। अतः ये अकर्मक क्रियाएँ हैं।

इनके अतिरिक्त क्रिया के अन्य भेद द्विकर्मक क्रिया तथा प्रेरणार्थक क्रिया हैं।

द्विकर्मक क्रिया – माँ ने बच्चे को दूध पिलाया। इस वाक्य में ‘पिलाया’ क्रिया के दो कर्म हैं-बच्चा तथा दूध। यह द्विकर्मक क्रिया है।

प्रेरणार्थक क्रिया – उसने घर को दो भागों में बँटवाया। यहाँ क्रिया स्वयं कर्ता की न होकर अन्य को प्रेरित करके कराई गई है, अतः यह प्रेरणार्थक क्रिया है। कटवाना, लिखवाना, दिलवाना आदि प्रेरणार्थक क्रियाएँ हैं।

वाक्य पूर्ति के निमित्त आने वाली क्रिया को समापिका क्रिया कहा जाता है।

काल – क्रिया के सम्पन्न होने के समय को काल कहा जाता है। काल तीन हैं –

  1. वर्तमान काल – जो क्रिया वर्तमान समय में की जा रही है, वह वर्तमान कालिक क्रिया होती है। यथा- मैं लिख रहा हूँ।
  2. भूतकाल – जो क्रिया पहले सम्पन्न हो चुकी है, वह भूतकालिक क्रिया होती है। यथा-मैंने लिखा था।
  3. भविष्यत् काल – जो क्रिया आगे सम्पन्न होगी, उसे भविष्यत् कालीन क्रिया कहते हैं। यथा- मैं लिबँगा।

क्रिया अपने कर्ता के लिंग और वचन का अनुसरण करती है।

यथा – राधा सोती है। (स्त्रीलिंग कर्ता)
गोविन्द सोता है। (पुल्लिंग कर्ता)
लड़के सोते हैं। (बहुवचन कर्ता)

लिंग –
हिन्दी में दो लिंगों का प्रयोग होता है –

(i) स्त्रीलिंग – संज्ञा का जो रूप उसके स्त्रीवाचक होने को सूचित करता है, स्त्रीलिंग माना जाता है। यथा-नारी, बालिका, मोरनी, लता, कृष्णा, हरिणी, दिल्ली, मुम्बई आदि।
(ii) पुल्लिंग – संज्ञा शब्द का जो रूप उसके पुरुषवाचक होने को सूचित करता है, उसे पुल्लिंग कहा जाता है। यथा-पुरुष, बालक, सिंह, पर्वत, कोलकाता, आगरा आदि।

लिंग का निर्णय – हिन्दी में किसी शब्द के लिंग का निर्णय करने के लिए कोई निश्चित नियम नहीं है। यह अभ्यास और निरीक्षण से समझ में आता है। वैसे प्राणीवाचक संज्ञाओं में लिंग निर्णय सरल होता है, क्योंकि प्राणियों का लिंग प्रकृति द्वारा ही निश्चित होता है।

वाक्य में प्रयुक्त संज्ञा का लिंग-निर्णय क्रिया के स्वरूप से भी होता है यथा –
करता – करती
जाएगा – जाएगी।
गया था – गयी थी।

विशेषण के स्वरूप से भी लिंग का निर्णय होता है। यथा –
अच्छा – अच्छी
बूढ़ा – बूढ़ी
छोटा – छोटी
मीठी – मीठी।

वचन –
हिन्दी में दो वचन होते हैं –

  • एकवचन – पद के जिस रूप से उसके एक होने का बोध होता है, उसे एकवचन कहते हैं। यथा–पुस्तक, स्त्री, सड़क, नदी आदि।
  • बहुवचन – पद के जिस रूप से उसके एक से अधिक होने का बोध हो, उसे बहुवचन कहते हैं। यथा-पुस्तके, स्त्रियाँ, लड़के नदियाँ आदि।

RBSE Class 12 Hindi पद परिचय अविकारी पद (अव्यय)

(1) क्रिया-विशेषण –
क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द क्रिया-विशेषण कहे जाते हैं। क्रिया-विशेषण क्रिया की रीति, स्थान, दिशा, मात्रा तथा कारण आदि का उल्लेख करते हैं। यथा-वह धीरे चलता है। यहाँ ‘ धीरे’ शब्द ‘चलता है’ क्रिया की रीति बता रहा है, अत: वह क्रिया-विशेषण है। अन्य उदाहरण इस प्रकार हैं।

  • रीतिवाचक क्रिया-विशेषण – धीरे, तेज, जोर से, क्रमशः
  • कालवाचक क्रिया-विशेषण – अब, तब, जब, आज, कल
  • परिमाणवाचक क्रिया-विशेषण – कम, अधिक, कुछ
  • स्थानवाचक क्रिया-विशेषण – ऊपर, नीचे, यहाँ, वहाँ
  • कारणवाचक क्रिया-विशेषण – अतः, इस प्रकार, इसलिए
  • प्रश्नवाचक क्रिया-विशेषण – क्यों, कब, कैसे, कहाँ
  • निषेधवाचक क्रिया-विशेषण – न, नहीं, मत।

प्रक्रिया – विशेषण – जो शब्द क्रिया-विशेषण की विशेषता बताते हैं, वे प्रक्रिया-विशेषण कहे जाते हैं यथा-वह तेज चलता है। इस वाक्य में ‘तेज’ क्रिया-विशेषण है। यदि कहा जाय वह बहुत तेज चलता है। तो ‘बहुत’ शब्द ‘तेज’ विशेषण हुआ। अत: वह प्रक्रिया-विशेषण है।

प्रविशेषण – विशेषण की भी विशेषता बताने वाले शब्द प्रविशेषण कहलाते हैं। यथा-वह सुन्दर लड़की है। यहाँ ‘सुन्दर’ विशेषण पद है। यदि कही जाय ‘वह बहुत सुन्दर लड़की है।’ तो ‘बहुत’ सुन्दर की विशेषता बताता है, अत: यह प्रविशेषण है।

(2) सम्बन्धबोधक – संज्ञा और सर्वनाम पदों का अन्य पदों से सम्बन्ध प्रकट करने वाले पद को सम्बन्धबोधक अव्यय कहा जाता है। ये पद हैं-ऊपर, नीचे, आगे, पीछे, बिना, अंदर, बाहर आदि।
(3) समुच्चयबोधक – दो पदों या दो वाक्यों को जोड़ने वाले अव्यय शब्द को समुच्चयबोधक कहते हैं। ये शब्द हैं-इसलिए, यद्यपि, परन्तु, किन्तु, एवं, कि, जो आदि।
(4) विस्मयादिबोधक – जो अव्यय शब्द विस्मय, हर्ष, शोक, घृणा, तिरस्कार आदि व्यक्त करते हैं, वे विस्मयादिबोधक कहे। जाते हैं। यथा-आह ! वाह ! छि ! अरे ! ओह ! हे ! आदि ।

RBSE Class 12 Hindi पद परिचय पद-परिचय
वाक्य में प्रयुक्त पदों का व्याकरण की दृष्टि से पूरा परिचय देना ही पद-परिचय कहा जाता है। पद-परिचय को पद-व्याख्या, पदान्वय आदि भी कहा जाता है। आगे संज्ञा आदि पदों का पर्द-परिचय दिया जा रहा है

RBSE Class 12 Hindi पद परिचय संज्ञा-पद-परिचय
(1) चन्द्रभूषण बाग में आम खा रहा है।
उपर्युक्त वाक्य में चन्द्रभूषण, बाग तथा आम संज्ञाएँ हैं। इनका क्रमशः पद-परिचय इस प्रकार होगा-

  • चन्द्रभूषण – व्यक्तिवाचक संज्ञा, एकवचन, पुल्लिग, कर्ता कारक, ‘खा रहा है’ क्रिया का कर्ता।
  • बाग में – जातिवाचक संज्ञा, एकवचन, पुल्लिग, अधिकरण कारक, ‘खा रहा है’ क्रिया का आधार
  • आम – जातिवाचक संज्ञा, एकवचन, पुल्लिग, कर्म कारक, ‘खा रहा है’ क्रिया का कर्म।

(2) लड़कियाँ हाथों से वस्त्र धो रही हैं।

  • लड़कियाँ – जातिवाचक संज्ञा, बहुवचन, स्त्रीलिंग, कर्ता कारक, ‘धो रही हैं’ क्रिया का कर्ता।
  • हाथों से – जातिवाचक संज्ञा, बहुवचन, पुल्लिग, करण कारक, ‘ धो रही हैं’ क्रिया में सहायक।
  • वस्त्र – जातिवाचक संज्ञा, बहुवचन, कर्म कारक, ‘धो रही हैं’ क्रिया का कर्म।

(3) बचपन के दिन कितने अच्छे होते हैं।
बचपन – भाववाचक संज्ञा, एकवचन, पुल्लिग, सम्बन्ध कारक, ‘दिन’ संज्ञा से सम्बन्ध।
दिन – जातिवाचक संज्ञा, बहुवचन, पुल्लिग, कर्ता कारक होते हैं’ क्रिया का कर्ता।

RBSE Class 12 Hindi पद परिचय सर्वनाम-पद-परिचय

(1) मैं राम के साथ उसके घर गया।
मैं – पुरुषवाचक सर्वनाम, उत्तम पुरुष, एकवचन, पुल्लिग, कर्ता कारक, ‘गया’ क्रिया का कर्ता।
उसके – पुरुषवाचक सर्वनाम, अन्य पुरुष, एकवचन, पुल्लिग, सम्बन्ध कारक, ‘घर’ संज्ञा से सम्बन्ध।

(2) वे कहते हैं कि कोई आ रहा है।
वे – पुरुषवाचक सर्वनाम, अन्य पुरुष, बहुवचन, पुल्लिग, कर्ता कारक, ‘कहते हैं’ क्रिया का कर्ता।
कोई – अनिश्चयवाचक सर्वनाम, एकवचन, पुल्लिग, कर्ता कारक, ‘आ रहा है’ क्रिया का कर्ता।

(3) यह अच्छा नहीं हुआ।
यह – निश्चयवाचक सर्वनाम, एकवचन, पुल्लिग, कर्ता कारक, ‘हुआ’ क्रिया का कर्ता।

RBSE Class 12 Hindi पद परिचय विशेषण-पद-परिचय

(1) श्रेष्ठ पुरुष इन बातों पर कम ध्यान देते हैं।

  • श्रेष्ठ – गुणवाचक विशेषण, बहुवचन, पुल्लिग, इसका विशेष्य ‘पुरुष’ है।
  • इन – संकेतवाचक (सार्वनामिक) विशेषण, बहुवचन, स्त्रीलिंग, ‘बातों’ इसका विशेष्य है।
  • कम – परिमाणवाचक विशेषण, एकवचन, पुल्लिग, ‘ध्यान’ इसका विशेष्य है।”

(2) तीन दिन बाद वह चौथी कक्षा में आया है।

  • तीन – संख्यावाचक विशेषण, बहुवचन, पुल्लिंग, ‘दिन’ इसका विशेष्य है।
  • चौथी – संख्यावाचक विशेषण, एकवचन, स्त्रीलिंग, ‘कक्षा’ इसका विशेष्य है।

RBSE Class 12 Hindi पद परिचय क्रिया-पद-परिचय

(1) स्त्रियाँ नृत्य कर रही हैं।

  • कर रही हैं – क्रिया सकर्मक, वर्तमान काल, कर्तृवाच्य, अन्य पुरुष, स्त्रीलिंग। इसका कर्ता ‘स्त्रियाँ’ है।

(2) श्रीकान्त पुस्तक पढ़कर घर को जाएगा।

  • पढ़कर – क्रिया पूर्वकालिक, सकर्मक, कर्तृवाच्य, मुख्य क्रिया जाएगा’, कर्म ‘पुस्तक’ है, कर्ता ‘ श्रीकान्त’ है।
  • जाएगा  क्रिया सकर्मक, भविष्यत् काले, अन्यपुरुष, कर्तृवाच्य, एकवचन, पुल्लिंग, कर्ता ‘श्रीकान्त’ है।

(3) शिक्षक ने छात्र से पाठ पढ़वाया।

  • पढ़वाया – प्रेरणार्थक क्रिया, सकर्मक, भूतकाल, कर्मवाच्य, एकवचन, पुल्लिग, कर्म ‘पाठ’ है। कर्ता, ‘छात्र’ है।

RBSE Class 12 Hindi पद परिचय क्रिया-विशेषण-पद-परिचय
(1) ऋषि तेज दौड़ता है।

  • तेज – रीतिवाचक क्रिया-विशेषण, ‘दौड़ता है’ क्रिया की ‘रीति’ बताता है।

(2) वह कल आएगा और यहाँ सोएगा।

  • कल – कालवाचक क्रिया-विशेषण, ‘आएगा’ क्रिया को समय सूचित करता है।
  • यहाँ – स्थानवाचक क्रिया-विशेषण, ‘सोएगा’ क्रिया का स्थान सूचित करता है।

RBSE Class 12 Hindi पद परिचय प्रक्रिया-विशेषण-पद-परिचय

(1) अरविन्द बहुत धीरे चलता है।

  • बहुत – प्रक्रियाविशेषण, ‘धीरे’ क्रिया-विशेषण की विशेषता बता रहा है।

(2) थोड़ा तेज चलो।

  • थोड़ा – प्रक्रियाविशेषण, ‘तेज’ क्रिया-विशेषण की विशेषता बता रहा है।

RBSE Class 12 Hindi पद परिचय प्रविशेषण-पद-परिचय

(1) चन्द्रगुप्त बहुत पराक्रमी शासक था।

  • बहुत – प्रविशेषण, पराक्रमी’ विशेषण की विशेषता बला-रल्ल है।

(2) वह कम सुन्दर है।

  • कम – प्रविशेषण, ‘सुन्दर’ विशेषण की विशेषता बता रहा है।

RBSE Class 12 Hindi पद परिचय अव्यय-पद-आरिचय

विस्मयादिबोधक –
(1) वाह ! कितना सुन्दर चित्र है।

  • वाह – विस्मयादिबोधक अव्यय, हर्ष सूचित करता है।

(2) अरे ! यह मकान कैसे गिर गया ?

  • अरे – विस्मयादिबोधक अव्यय, आश्चर्य सूचित करता है।

(3) आह ! मैं तो लुट गया।

  • आह – विस्मयादिबोधक अव्यय, शोक सूचित करता है।
  • समुच्चयबोधक – (1) गुरु और शिष्य कहाँ गये हैं ?
  • और – समुच्चयबोधक अव्यय, गुरु और शिष्य शब्दों को जोड़ता है।

(2) वे बुद्धिमान हैं, परन्तु अनुभवी नहीं।

  • परन्तु – समुच्चयबोधक अव्यय, दो वाक्यों को जोड़ता है।
  • सम्बन्धबोधक – (1) घर के पीछे बगीचा है।
  • पीछे – सम्बन्धबोधक अव्यय, ‘घर’ संज्ञा का सम्बन्ध शेष शब्दों से बताता है।

(2) सड़क के पार बगीचा है।
पार – सम्बन्धबोधक अव्यय, ‘सड़क’ संज्ञा का शेष शब्दों से सम्बन्ध बताता है।

RBSE Class 12 Hindi पद परिचय अभ्यास-प्रश्न

RBSE Class 12 Hindi पद परिचय वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्न में से जातिवाचक संज्ञा-पद है –

(क) हिमालय
(ख) पक्षी
(ग) शीत
(घ) उदयपुर

प्रश्न 2.
संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त शब्द कहलाते हैं –

(क) सर्वनाम
(ख) विशेषण
(ग) क्रिया
(घ) अव्यय

प्रश्न 3.
‘काला साँप’ पद में विशेषण है –

(क) संकेतवाचक
(ख) परिमाणवाचक
(ग) गुणवाचक
(घ) संख्यावाचक

प्रश्न 4.
विशेषण की कोटियाँ हैं –

(क) मूलावस्था
(ख) उत्तरावस्था
(ग) उत्तमावस्था
(घ) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 5.
निम्न में से अकर्मक क्रिया युक्त वाक्य है –

(क) वह पुस्तक पढ़ रहा है।
(ख) रमा खाना बना रही है।
(ग) मैं खेलने जा रहा हूँ।
(घ) बच्चा जोर-जोर से रो रहा है।

प्रश्न 6.
प्रेरणार्थक क्रिया का उदाहरण है –

(क) वह नौकर से खाना बनवाता है।
(ख) माँ ने बच्चे को दूध पिलाया।
(ग) वह सो रही है।
(घ) राम और श्याम जयपुर जा रहे हैं।

प्रश्न 7.
‘घोड़ा तेज दौड़ता है।’ वाक्य में क्रिया-विशेषण है –

(क) घोड़ा
(ख) तेज
(ग) है।
(घ) दौड़ता।

प्रश्न 8.
विशेषण की विशेषता बताने वाले शब्द कहलाते हैं –

(क) प्रक्रिया विशेषण
(ख) विशेष्य
(ग) प्रविशेषण
(घ) क्रिया-विशेषण

प्रश्न 9.
समुच्चयबोधक अव्यय है –

(क) क्रमशः
(ख) तेज
(ग) किंतु
(घ) ऊपर।

प्रश्न 10.
‘यह अच्छा कार्य है।’ -वाक्य में रेखांकित पद का परिचय है –

(क) निश्चयवाचक सर्वनाम
(ख) एकवचन
(ग) पुल्लिंग
(घ) उपर्युक्त सभी।

उत्तर:

  1. (ख)
  2. (क)
  3. (ग)
  4. (घ)
  5. (घ)
  6. (क)
  7. (ख)
  8. (ग)
  9. (ग)
  10. (घ)

RBSE Class 12 Hindi पद परिचय अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
‘विद्यार्थी ने कहा कि मैं विद्यालय जाऊँगा।’ इस वाक्य में रेखांकित शब्दों की पद-व्याख्या कीजिए।
उत्तर:

  • विद्यार्थी – जातिवाचक संज्ञा, एकवचने, पुल्लिग, कर्ता कारक, ‘कहा क्रिया का कर्ता।
  • जाऊँगा – अकर्मक क्रिया, भविष्यत् काल, एकवचन, ‘मैं’ इसको कर्ता है।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित वाक्य में प्रत्येक रेखांकित शब्द की पद-व्याख्या कीजिए
वह गाय तुम्हें नहीं मारेगी।
उत्तर:

  • गाय – जातिवाचक संज्ञा, एकवचन, स्त्रीलिंग, कर्ताकारक।
  • मारेगी – क्रिया सकर्मक, एकवचन, स्त्रीलिंग, भविष्यत्काल, कर्तृवाच्य।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित वाक्य के प्रत्येक रेखांकित शब्द की पद-व्याख्या के दो-दो बिन्दु लिखिए –
राम घर चला गया।
उत्तर:

  • राम – व्यक्तिवाचक संज्ञा, एकवचन।
  • गया – क्रिया सकर्मक, एकवचन।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित वाक्य के रेखांकित पद की व्याख्या के दो बिन्दु लिखिए
दिव्यांशी मधुर गाना गाती है।
उत्तर:

  • गाना – भाववाचक संज्ञा, एकवचन।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्य के रेखांकित शब्द के पद-परिचय सम्बन्धी कोई दो बिन्दु लिखिए।
श्याम मोहन की अपेक्षा अधिक बुद्धिमान है।
उत्तर:
बुद्धिमान-विशेषण, पुल्लिग।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित वाक्य में रेखांकित शब्द के पद-व्याख्या सम्बन्धी कोई दो बिन्दु लिखिए।
यहाँ कोई आया।
उत्तर:

  • कोई – अनिश्चयवाचक सर्वनाम, एकवचन।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित वाक्य में रेखांकित शब्द की पद व्याख्या संबंधी कोई दो बिन्दु लिखिए।
इस बालक ने निर्धन मनुष्य को थोड़ा भोजन दिया।
उत्तर:

  • थोड़ा – पुल्लिग, परिमाणवाचक विशेषण।

प्रश्न 8.
संज्ञा शब्द के पद-परिचय हेतु किन्हीं चार बिन्दुओं को लिखिए।
उत्तर:

  1. संज्ञा का भेद
  2. वचन
  3. लिंग
  4. कारक।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित पद में रेखांकित पद की पद-व्याख्या संबंधी कोई दो बिन्दु लिखिए।
यह अच्छा नहीं हुआ।
उत्तर:
निश्चयवाचक सर्वनाम, एकवचन, पुल्लिग।

प्रश्न 10.
‘चीता बहुत तेज दौड़ता है।’ इस वाक्य में ‘बहुत’ तथा ‘तेज’ पदों का पद-परिचय दीजिए।
उत्तर:

  • बहुत – प्रक्रियाविशेषण, ‘तेज’ क्रिया-विशेषण की विशेषता बता रहा है।
  • तेज – क्रिया-विशेषण, ‘दौड़ता है’ क्रिया की विशेषता बता रहा है।

प्रश्न 11.
‘लाओ, यह सुन्दर पुस्तक मुझे दो ।’ वाक्य में रेखांकित शब्दों की पद-व्याख्या कीजिए
उत्तर:

  • यह – संकेतवाचक विशेषण, एकवचन, स्त्रीलिंग ‘पुस्तक’ की ओर संकेत कर रहा है।
  • मुझे – पुरुषवाचक सर्वनाम, एकवचन, पुल्लिग/स्त्रीलिंग, कर्म कारक ‘दो’ क्रिया का कर्म है।

प्रश्न 12.
बच्चों ने खिलौना तोड़ दिया।’ इस वाक्य में बच्चों’ तथा ‘खिलौना’ पदों का पद-परिचय दीजिए।
उत्तर:

  • बच्चों – जातिवाचक संज्ञा, बहुवचन, पुल्लिग, कर्ताकारक, ‘तोड़ दिया’ क्रिया का कर्ता।
  • खिलौना – जातिवाचक संज्ञा, एकवचन, पुल्लिग, कर्मकारक, ‘तोड़ डाला’ क्रिया को कर्म।

प्रश्न 13.
‘मैंने देखा, कोई आ रहा था।’ इस वाक्य में मैंने’ तथा ‘कोई पदों का पद-परिचय दीजिए।
उत्तर:

  • मैंने – पुरुषवाचक सर्वनाम, उत्तम पुरुष, एकवचन, उभयलिंग, कर्ता कारक, ‘देखा’ क्रिया का कर्ता।
  • कोई – अनिश्चयवाचक सर्वनाम, अन्य पुरुष, एकवचन, पुल्लिंग, कर्ता कारक, ‘आ रहा है’ क्रिया का कर्ता।

प्रश्न 14.
निम्नलिखित वाक्य में रेखांकित शब्द के पद व्याख्या संबंधी दो बिन्दु लिखिए –
यह अच्छा नहीं हुआ।
उत्तर:

  • यह – निश्चयवाचक सर्वनाम, एकवचन।

प्रश्न 15.
दिये गये वाक्य में रेखांकित शब्द के पद व्याख्या संबंधी दो बिन्दुओं का उल्लेख कीजिए
शिक्षक ने छात्र से पाठ पढ़वाया
उत्तर:
पढ़वाया-प्रेरणार्थक क्रिया, भूतकाल।

RBSE Class 12 Hindi पद परिचय लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
विकारी और अविकारी पदों में भेद बताइये।
उत्तर:
जिन पदों का स्वरूप लिंग, वचन, कारक तथा काल के अनुसार प्रयोग किए जाने पर परिवर्तित होता रहता है, उन्हें विकारी पद कहते हैं। ये चार प्रकार के होते हैं-संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण एवं क्रिया।

जबकि जो पद लिंग, वचन, कारक आदि के प्रयोग से अप्रभावित रहते हैं, वे अविकारी कहलाते हैं। ये चार प्रकार के होते हैंक्रिया-विशेषण, विस्मयादिबोधक, संबंध बोधक तथा समुच्चयबोधक ।

प्रश्न 2.
पुरुषवाचक सर्वनाम किसे कहते हैं ? इसके भेद बताइये।
उत्तर:
व्यक्तिवाचक संज्ञा के बदले जिन शब्दों का प्रयोग होता है, उन्हें पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं। ये तीन के होते हैं –

  1. उत्तम पुरुष – बात को कहने वाला उत्तम पुरुष होता है। जैसे- मैं, तुम।
  2. मध्यम पुरुष – बात जिससे कही जाती है, उसे मध्यम पुरुष कहते हैं। जैसे- वह, वे।

प्रश्न 3.
निम्न वाक्यों में कौन-सा विशेषण है ?

  1. सरिता सुंदर लड़की है।
  2. मेज पर दो पुस्तकें पड़ी हैं।
  3. कोई स्त्री द्वार पर है।
  4. घड़े में बहुत कम पानी है।

उत्तर:

  1. गुणवाचक विशेषण
  2. संख्यावाचक विशेषण
  3. संकेतवाचक विशेषण
  4. परिमाणवाचक विशेषण

प्रश्न 4.
सकर्मक और अकर्मक क्रिया में अंतर बताइये।
उत्तर:
जिस क्रिया का प्रभाव कर्ता के अतिरिक्त किसी अन्य पर भी होता है, उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं। जैसे-वह फल खा रहा है।

जबकि अकर्मक क्रिया का कर्म नहीं होता। वह कर्ता तक ही सीमित रहती है। जैसे-वह रो रहा है। यहाँ रो रहा है का फल कर्ता तक ही सीमित है। अत: अकर्मक क्रिया है।

प्रश्न 5.
प्रविशेषण और प्रक्रिया-विशेषण में अंतर उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:

  • प्रविशेषण – विशेषण की विशेषता बताने वाले शब्द प्रविशेषण कहलाते हैं। जैसे-”घोड़ा बहुत सुंदर है। यहाँ ‘सुंदर’ विशेषण है। ‘बहुत’ शब्द सुंदर की विशेषता बताता है। अत: ‘बहुत’ प्रविशेषण है।
  • प्रक्रिया – विशेषण – जो शब्द क्रिया-विशेषण की विशेषता बताते हैं, वे प्रक्रिया-विशेषण कहलाते हैं। जैसे-घोड़ा बहुत तेज दौड़ता है।” यहाँ ‘तेज’ क्रिया-विशेषण शब्द है। बहुत’ इसकी विशेषता बताता है। अत: प्रक्रिया-विशेषण है।