RBSE Class 6 Hindi Malhar Chapter 6 Question Answer मेरी माँ
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मेरी माँ Class 6 Question Answer
मेरी माँ Question Answer Class 6
Class 6 Hindi Chapter 6 मेरी माँ Question Answer
मेरी समझ से-
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (*) बनाइए-
(1) “किंतु यह इच्छा पूर्ण होती नहीं दिखाई देती।” बिस्मिल को अपनी किस इच्छा के पूर्ण न होने की आशंका थी?
(अ) भारत माता के साथ रहने की
(ब) अपनी प्रतिज्ञा पर दृढ़ रहने की
(स) अपनी माँ की जीवनपर्यंत सेवा करने की
(द) भोग विलास तथा ऐश्वर्य भोगने की
उत्तर:
(स) अपनी माँ की जीवनपर्यंत सेवा करने की
(2) रामप्रसाद बिस्मिल की माँ का सबसे बड़ा आदेश क्या था?
(अ) देश की सेवा करें
(ब) कभी किसी के प्राण न लेना
(स) कभी किसी से छल न करना
(द) सदा सच बोलना
उत्तर:
(ब) कभी किसी के प्राण न लेना
(ख) अब अपने मित्रों के साथ तर्कपूर्ण चर्चा कीजिए कि आपने ये ही उत्तर क्यों चुने?
उत्तर:
(1) बिस्मिल की इच्छा थी कि अपनी माँ की जीवनपर्यन्त सेवा करूँ। किन्तु इसमें उन्हें इसलिए आशंका थी कि देशभक्ति के चलते कभी भी आत्मबलिदान करना पड़ सकता है।
(2) माता की प्रेरणा से ही लेखक क्रान्तिकारी बने तो उनकी माता ने सबसे बड़ा आदेश दिया कि ऐसा काम मत करना जिससे किसी की प्राण हानि हो। क्योंकि हम किसी को जीवन दे नहीं सकते तो हमें किसी के प्राण लेने का अधिकार भी नहीं है। माता के इस आदेश पूर्ति हेतु उन्हें एक-दो बार अपनी प्रतिज्ञा भंग करनी पड़ी।
पंक्तियों पर चर्चा-
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें पढ़कर समझिए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? कक्षा में अपने विचार साझा कीजिए और लिखिए-
(क) “यदि मुझे ऐसी माता न मिलतीं, तो मैं भी अति साधारण मनुष्यों की भाँति संसार-चक्र में फँसकर जीवन निर्वाह करता।”
उत्तर:
इस पंक्ति के माध्यम से यही कहा जा सकता है कि लेखक देश सेवा में समर्पित होना चाहते थे किन्तु उसके पिताजी, दादाजी एवं दादीजी इससे सहमत नहीं थे। माताजी की प्रेरणा की बदौलत ही वे सच्चे क्रान्तिकारी देशभक्त बने। देश की सेवा करते हुए शहीद होकर अमर हो गए। उन्हें प्रेरणादायी माँ नहीं मिलतीं तो वे संसार के मायाजाल में फँस जाते।
(ख) “उनके इस आदेश की पूर्ति करने के लिए मुझे मजबूरन दो-एक बार अपनी प्रतिज्ञा भंग भी करनी पड़ी थी।”
उत्तर:
लेखक की माता ने उन्हें सबसे बड़ा आदेश दिया था कि ऐसा कोई काम नहीं करना जिससे किसी की प्राण हानि हो। माता के आदेश पूर्ति हेतु उन्हें एक-दो बार अपनी प्रतिज्ञा भी तोड़नी पड़ी। बिस्मिल ने कुछ लोगों को प्राणदंड देने की प्रतिज्ञा कर रखी थी किंतु उन्हें छोड़ दिया ताकि मां से किया वादा ना टूट जाए।
मिलकर करें मिलान-
पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थ या संदर्भों से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट, पुस्तकालय या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।
उत्तर:


सोच-विचार के लिए-
पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
प्रश्न 1.
बिस्मिल की माता जी जब ब्याह कर आईं तो उनकी आयु काफ़ी कम थी।
(क) फिर भी उन्होंने स्वयं को अपने परिवार के अनुकूल कैसे ढाला?
उत्तर:
बिस्मिल की माताजी का विवाह 11 वर्ष की अवस्था में हो गया था। उस समय वे नितांत अशिक्षित ग्रामीण कन्या थीं। उन्होंने लेखक की दादीजी की छोटी बहिन से गृहकार्य की शिक्षा में पारंगत होकर स्वयं को परिवार के अनुकूल बनाया।
(ख) उन्होंने अपनी इच्छाशक्ति के बल पर स्वयं को कैसे शिक्षित किया?
उत्तर:
लेखक की माताजी की पढ़ाई-लिखाई के प्रति इच्छाशक्ति प्रबल थी। उन्होंने गृहकार्य समाप्ति के बाद मोहल्ले से आने-जाने वाली सखियों से अक्षर बोध सीखा। तत्पश्चात् निरन्तर अभ्यास में परिश्रम करके देवनागरी पुस्तकों का अध्ययन करने लगीं।
प्रश्न 2.
बिस्मिल को साहसी बनाने में उनकी माता जी ने कैसे सहयोग दिया?
उत्तर:
बिस्मिल को साहसी बनाने में उनकी माताजी एवं गुरुजी का विशेष योगदान रहा। उनके परिवारजन छोटी- सी उम्र में उनका विवाह करना चाहते थे। किन्तु मां ने कहा, इसकी शिक्षा पूर्ण होने दो। माता के प्रोत्साहन तथा सद्व्यवहार ने उनके जीवन में वह दृढ़ता उत्पन्न की कि किसी आपत्ति या संकट के आने पर भी अपने संकल्प को नहीं त्यागना चाहिए।
प्रश्न 3.
आज से कई दशक पहले बिस्मिल की माँ शिक्षा के महत्त्व को समझती थीं, बताइए कैसे?
उत्तर:
वे विवाह से पूर्व अशिक्षित थीं। उन्होंने विवाह पश्चात् गृहकार्य करने के साथ-साथ स्वयं ने भी शिक्षा ग्रहण की एवं अपनी सन्तानों को प्रारम्भिक शिक्षा दी। लेखक का विवाह घर के लोग छोटी उम्र में करना चाहते थे किन्तु माँ ने विरोध किया कि इसकी शिक्षा पूर्ण होने दो। क्योंकि वे शिक्षा का महत्त्व समझती थीं।
प्रश्न 4.
हम कैसे कह सकते हैं कि बिस्मिल की माँ स्वतंत्र और उदार विचारों वाली थीं?
उत्तर:
माँ की प्रेरणा एवं दया से बिस्मिल देश सेवा कार्य में संलग्न हुए और आर्य समाजी बन सके। इसके साथ ही माता ने संकल्प दिलवाया कि तुम किसी की प्राण-हानि नहीं करोगे। इसीलिए उन्हें स्वतन्त्र एवं उदार विचार वाली कहा जा सकता है।
आत्मकथा की रचना-
यह पाठ रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की आत्मकथा का एक अंश है। आत्मकथा यानी अपनी कथा। दुनिया में अनेक लोग अपनी आत्मकथा लिखते हैं, कभी अपने लिए, तो कभी दूसरों के पढ़ने के लिए।
(क) इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और अपने- अपने समूह में मिलकर इस पाठ की ऐसी पंक्तियों की सूची बनाइए जिनसे पता लगे कि लेखक अपने बारे में कह रहा है।
उत्तर:
- लखनऊ कांग्रेस में जाने के लिए मेरी बड़ी इच्छा थी।
- मैं बड़े उत्साह के साथ सेवा समिति में सहयोग देता था।
- माताजी मेरा उत्साह भंग न होने देती थीं।
- माताजी के प्रोत्साहन तथा सद्व्यवहार ने मेरे जीवन में दृढ़ता उत्पन्न की जिससे कि किसी आपत्ति तथा संकट के आने पर भी मैंने अपने संकल्प को न त्यागा।
- मैं अपने जीवन में हमेशा सत्य का आचरण करता था।
- जब मैंने आर्य समाज में प्रवेश किया, माताजी से खूब वार्तालाप होता।
- मुझे मजबूरन दो-एक बार अपनी प्रतिज्ञा भंग करनी पड़ी थी।
- तुम्हारी दया की छाया में मैंने अपने जीवनभर में कोई कष्ट अनुभव न किया।
- मैं परमात्मा का स्मरण करता हुआ शरीर त्याग करूँ।
(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।
शब्द प्रयोग तरह-तरह के-
(क) “माता जी उनसे अक्षर-बोध करतीं।” इस वाक्य में अक्षर-बोध का अर्थ है-अक्षर का बोध या ज्ञान। एक अन्य वाक्य देखिए- “जो कुछ समय मिल जाता, उसमें पढ़ना-लिखना करतीं।” इस वाक्य में पढ़ना- लिखना अर्थात् पढ़ना और लिखना।
हम लेखन में शब्दों को मिलाकर छोटा बना लेते हैं जिससे समय, स्याही, कागज आदि की बचत होती है। संक्षेपीकरण मानव का स्वभाव भी है। इस पाठ में ऐसे शब्द खोजकर सूची बनाइए।
उत्तर:
डाँट फटकार, धर्म विरुद्ध, सखी-सहेली, संसार- चक्र, प्राण-हानि, देश सेवा, जन्म-जन्मान्तर, पालन-पोषण, भोग-विलास, धर्म-रक्षार्थ।
पाठ से आगे-
आज की पहेली-
यहाँ दी गई वर्ग पहेली में पाठ से बारह विशेषण दिए गए हैं। उन्हें छाँटकर पाठ में रेखांकित कीजिए।
उत्तर:
1. मंगलमयी,
2. प्रत्येक,
3. छोटी,
4. ग्यारह,
5. खूब,
6. धार्मिक,
7. साधारण,
8. बड़ा,
9. दुखभरी,
10. महान,
11 स्वाधीन,
12. मनोहर।

Class 6 मेरी माँ Question Answer
बहुविकल्पात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1.
सेवा समिति का प्रारम्भ कहाँ हुआ?
(अ) शाहजहाँपुर
(ब) लखनऊ
(स) आगरा
(द) दिल्ली
उत्तर:
(अ) शाहजहाँपुर
प्रश्न 2.
लेखक का सेवाकार्य में उत्साह किसके कारण भंग नहीं हुआ?
(अ) पिताजी के
(ब) माताजी के
(स) दादाजी के
(द) दादीजी के
उत्तर:
(ब) माताजी के
प्रश्न 3.
लेखक के जीवन में साहस किनकी कृपाओं का परिणाम है?
(अ) पिताजी
(ब) दादाजी
(स) गुरुदेव
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(स) गुरुदेव
प्रश्न 4.
विवाह के समय लेखक की माताजी कैसी थीं?
(अ) गृहकार्य में दक्ष थीं
(ब) वह अत्यन्त समझदार थीं
(स) वह शिक्षित थीं
(द) वह नितान्त अशिक्षित थीं
उत्तर:
(द) वह नितान्त अशिक्षित थीं
प्रश्न 5.
लेखक की माताजी ने अक्षर-बोध कहाँ से किया?
(अ) विद्यालय से
(ब) आंगनबाड़ी से
(स) मोहल्ले की शिक्षित सहेलियों से
(द) प्रौढ़ शिक्षण केन्द्र से
उत्तर:
(स) मोहल्ले की शिक्षित सहेलियों से
प्रश्न 6.
किसके उपदेश से माँ ने लेखक का सुधार किया?
(अ) देववाणी के
(ब) देवनागरी के
(स) अक्षरबोध के
(द) आर्य समाज के
उत्तर:
(अ) देववाणी के
प्रश्न 7.
माताजी लेखक की कौनसी उन्नति में सहायक रहीं?
(अ) आत्मिक
(ब) धार्मिक
(स) सामाजिक
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी
प्रश्न 8.
महान संकट में भी माताजी ने लेखक को कैसा नहीं होने दिया?
(अ) पराजित
(ब) असक्षम
(स) अधीर
(द) पराश्रित
उत्तर:
(स) अधीर
प्रश्न 9.
माताओं की माता किसे कहा गया है?
(अ) भारत माता को
(ब) अपनी माता को
(स) कामधेनु को
(द) उपर्युक्त सभी को
उत्तर:
(अ) भारत माता को
प्रश्न 10.
गुरु गोबिन्द की धर्मपत्नी ने मिठाई कब बाँटी थी?
(अ) पुत्र जन्मोत्सव पर
(ब) पुत्र विवाहोत्सव पर
(स) पुत्रों के धर्म रक्षार्थ बलिदान पर
(द) देश की स्वतन्त्रता पर
उत्तर:
(स) पुत्रों के धर्म रक्षार्थ बलिदान पर
रिक्त स्थानों की पूर्ति –
प्रश्न 11.
रिक्त स्थानों की पूर्ति उचित शब्द से कीजिए-
(i) मैं बड़े उत्साह के साथ सेवा समिति में ………………………….. देता था। (सहयोग / धन)
उत्तर:
सहयोग
(ii) दादीजी और पिताजी मेरे ………………………….. के लिए बहुत अनुरोध करते। (अध्ययन / विवाह)
उत्तर:
विवाह
(iii) मैं पिताजी के हस्ताक्षर ………………………….. पर कर दूँ। (वकालतनामे/अंकतालिका)
उत्तर:
वकालतनामे
(iv) अपने जीवन में हमेशा ………………………….. का आचरण करता था। (झूठ / सत्य)
उत्तर:
सत्य
(v) जब से मैंने ………………………….. में प्रवेश किया। (आर्यसमाज / विद्यालय )
उत्तर:
आर्यसमाज
(vi) तुम्हें मेरी मृत्यु की ………………………….. खबर सुनाई जाएगी। (दुखभरी / सुखभरी)
उत्तर:
दुखभरी
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 12.
लेखक की कहाँ जाने की इच्छा थी?
उत्तर:
लेखक की लखनऊ कांग्रेस में जाने की इच्छा थी।
प्रश्न 13.
लेखक के देश सेवा कार्य किसे अच्छे नहीं लगते थे?
उत्तर:
लेखक के देश सेवा कार्य उनके पिताजी एवं दादीजी को अच्छे नहीं लगते थे।
प्रश्न 14.
लेखक के विवाह हेतु माँ ने क्या सुझाव दिया?
उत्तर:
माँ ने सुझाव दिया कि शिक्षा पा चुकने के बाद ही विवाह करना उचित होगा।
प्रश्न 15.
लेखक की माता का विवाह किस उम्र में कहाँ हुआ?
उत्तर:
लेखक की माता का विवाह ग्यारह वर्ष की उम्र में शाहजहाँपुर में हुआ।
प्रश्न 16.
माताजी ने लेखक की शिक्षादि के अतिरिक्त किस क्षेत्र में सहायता की?
उत्तर:
माताजी ने लेखक की शिक्षादि के अतिरिक्त क्रान्तिकारी जीवन में सहायता की।
प्रश्न 17.
लेखक ने अपने जीवन की शिक्षा का श्रेय किसे दिया है?
उत्तर:
लेखक ने अपने जीवन की सम्पूर्ण शिक्षा का श्रेय अपनी माँ को दिया है।
प्रश्न 18.
माता की छत्रछाया में लेखक ने कैसा अनुभव किया?
उत्तर:
लेखक ने माता की दया की छत्रछाया में जीवनभर कोई कष्ट अनुभव नहीं किया।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 19.
शहीद भगत सिंह ने ‘बिस्मिल’ के बारे में क्या कहा है?
उत्तर:
शहीद भगत सिंह ने कहा है कि “श्रीरामप्रसाद ‘बिस्मिल’ बड़े होनहार नौजवान थे। देखने में भी बहुत सुन्दर थे। योग्य बहुत थे। जानने वाले कहते हैं कि यदि किसी और जगह या किसी और देश या किसी और समय में पैदा हुए होते तो सेनाध्यक्ष बनते।”
प्रश्न 20.
माताजी के प्रोत्साहन से लेखक के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा? बताइए।
उत्तर:
माताजी के प्रोत्साहन एवं सद्व्यवहार से लेखक के जीवन में दृढ़ता की भावना उत्पन्न हुई। जिससे उन्होंने जीवन में किसी भी संकट या आपत्ति के आने पर अपने संकल्प का परित्याग नहीं किया।
प्रश्न 21.
लेखक के आर्य समाज में प्रवेश पर यदि उनकी माता सहयोग नहीं करतीं तो क्या परिणाम निकलते? बताइए।
उत्तर:
लेखक ने जब आर्य समाज में प्रवेश लिया तो उनकी माताजी के साथ उनका वार्तालाप होता रहता था जिससे उन्हें सहयोग मिला। यदि माता का सहयोग नहीं मिलता तो वे साधारण मनुष्यों की भाँति संसार चक्र में फंसकर जीवन निर्वाह करते।
प्रश्न 22.
जन्मदात्री के ऋण उतारने हेतु लेखक के क्या विचार थे? बताइए।
उत्तर:
लेखक को जन्मदात्री का ऋण उतारने का अवसर क्रान्तिकारी होने के कारण नहीं मिला। उनके विचार थे कि “मैं इस जन्म में तो क्या अनेक जन्मों में भी प्रयत्न करूं तो भी माता के ऋण से उऋण नहीं हो सकता हूँ।”
प्रश्न 23.
माता ने लेखक के जीवन में कैसे सुधार किया? बताइए।
उत्तर:
लेखक की माता ने लेखक के जीवन का सुधार प्रेम एवं दृढ़ता के साथ किया। उसे लेखक ने अवर्णनीय कहा है किन्तु लेखक के स्मरणानुसार उन्होंने देववाणी का उपदेश देकर उनके जीवन में सुधार किया।
निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 24.
लेखक की माँ गृहकार्य में कैसे दक्ष हुईं? समझाइए।
उत्तर:
लेखक की माताजी विवाह के समय नितान्त अशिक्षित ग्रामीण कन्या के समान थीं। लेखक की दादीजी ने अपनी छोटी बहिन को बुला लिया। उन्होंने लेखक की माताजी को गृहकार्य की शिक्षा दी। माताजी ने कुछ ही दिनों में सब कामकाज को ढंग से सीख लिया और भोजनादि का ठीक-ठीक प्रबन्ध करने लगीं। इस प्रकार उन्होंने गृहकार्य में दक्षता हासिल की।
प्रश्न 25.
लेखक जन्म-जन्मांतर में ऐसी माता क्यों चाहते हैं? समझाइए।
उत्तर:
लेखक की जन्मदात्री माँ ने केवल जन्म देकर पालन- पोषण ही नहीं किया अपितु आत्मिक, धार्मिक एवं सामाजिक उन्नति में भी सदैव उपदेश देकर उनकी पथ-प्रदर्शक के रूप में सहायक बनी रहीं। जिससे लेखक का जीवन देशभक्ति में सार्थक हुआ। इसलिए वे जन्म-जन्मान्तर ऐसी ही माता की आकांक्षा करते हैं।
प्रश्न 26.
लेखक की कौनसी इच्छा पूर्ण होती दिखाई नहीं देती है? बताइए।
उत्तर:
लेखक की किसी भी भोग-विलास तथा ऐश्वर्य की कोई इच्छा नहीं थी। उनकी केवल एक ही इच्छा थी कि वे एक बार श्रद्धापूर्वक माता के चरणों की सेवा करके अपने जीवन को सफल बना सकें। किन्तु यह इच्छा पूर्ण होती दिखाई नहीं देती है क्योंकि उन्हें भारत माता की सेवा में अपने जीवन का बलिदान करना पड़ेगा और जिसकी दुखभरी खबर उनकी माता को सुनाई जाएगी।
पठित गद्यांश पर आधारित प्रश्नोत्तर-
निम्नलिखित गद्यांशों को पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
(1)
माताजी मेरा उत्साह भंग न होने देती थीं, जिसके कारण उन्हें अक्सर पिताजी की डाँट फटकार तथा दंड सहन करना पड़ता था। वास्तव में, मेरी माताजी देवी हैं। मुझमें जो कुछ जीवन तथा साहस आया, वह मेरी माताजी तथा गुरुदेव श्री सोमदेव जी की कृपाओं का ही परिणाम है। दादीजी और पिताजी मेरे विवाह के लिए बहुत अनुरोध करते, किन्तु माताजी यही कहतीं कि शिक्षा पा चुकने के बाद ही विवाह करना उचित होगा। माताजी के प्रोत्साहन तथा सद्व्यवहार ने मेरे जीवन में वह दृढ़ता उत्पन्न की कि किसी आपत्ति तथा संकट के आने पर भी मैंने अपने संकल्प को न त्यागा।
प्रश्न –
1. लेखक का जीवन किनकी कृपा से साहसी बना?
2. लेखक की शादी का अनुरोध कौन करते थे?
3. लेखक के विवाह हेतु माताजी ने क्या सुझाव दिया?
4. लेखक के जीवन में दृढ़ता कैसे उत्पन्न हुई?
उत्तर:
1. लेखक का जीवन अपनी माताजी एवं गुरुदेव श्री सोमदेवजी की कृपा से साहसी बना।
2. लेखक की शादी का अनुरोध दादीजी और पिताजी करते थे।
3. माताजी ने सुझाव दिया कि शिक्षा पा चुकने के बाद ही विवाह करना उचित होगा।
4. माताजी के प्रोत्साहन तथा सद्व्यवहार से लेखक के जीवन में दृढ़ता उत्पन्न हुई।
(2)
जब से मैंने आर्यसमाज में प्रवेश किया, माताजी से खूब वार्तालाप होता। उस समय की अपेक्षा अब उनके विचार भी कुछ उदार हो गए हैं। यदि मुझे ऐसी माता न मिलतीं तो मैं भी अति साधारण मनुष्यों की भाँति संसार-चक्र में फँसकर जीवन निर्वाह करता। शिक्षादि के अतिरिक्त क्रांतिकारी जीवन में भी उन्होंने मेरी वैसी ही सहायता की है, जैसी मेजिनी को उनकी माता ने की थी। माताजी का सबसे बड़ा आदेश मेरे लिए यही था कि किसी की प्राणहानि न हो। उनका कहना था कि अपने शत्रु को भी कभी प्राणदंड न देना। उनके इस आदेश की पूर्ति करने के लिए मुझे मजबूरन दो-एक बार अपनी प्रतिज्ञा भंग करनी पड़ी थी।
प्रश्न-
1. लेखक का माताजी से खूब वार्तालाप क्यों होता था?
2. लेखक की माताजी ने उन्हें शिक्षादि के अतिरिक्त कौनसी शिक्षा दी?
3. लेखक की माताजी की तुलना किससे की गई है?
4. लेखक की माताजी का सबसे बड़ा आदेश क्या था?
उत्तर:
1. लेखक का आर्य समाज में प्रवेश लेने के कारण माताजी से खूब वार्तालाप होता था।
2. लेखक की माताजी ने उन्हें शिक्षादि के अतिरिक्त, क्रान्तिकारी जीवन की शिक्षा दी।
3. लेखक की माताजी की तुलना इटली के गुप्त राष्ट्रवादी दल के सेनापति मेजिनी की माता से की गई है।
4. लेखक की माताजी का सबसे बड़ा आदेश था कि किसी की प्राण हानि न हो। अर्थात् शत्रु को भी प्राण दण्ड न देना।
(3)
जो कुछ शिक्षा मैंने ग्रहण की उसका भी श्रेय तुम्हीं को है । जिस मनोहर रूप से तुम मुझे उपदेश करती थीं, उसका स्मरण कर तुम्हारी मंगलमयी मूर्ति का ध्यान आ जाता है और मस्तक झुक जाता है। तुम्हें यदि मुझे ताड़ना भी देनी हुई, तो बड़े स्नेह से हर बात को समझा दिया। यदि मैंने धृष्टतापूर्ण उत्तर दिया तब तुमने प्रेम भरे शब्दों में यही कहा कि तुम्हें जो अच्छा लगे, वह करो, किन्तु ऐसा करना ठीक नहीं, इसका परिणाम अच्छा न होगा। जीवनदात्री ! तुमने इस शरीर को जन्म देकर केवल पालन-पोषण ही नहीं किया बल्कि आत्मिक, धार्मिक तथा सामाजिक उन्नति में तुम्हीं मेरी सदैव सहायक रहीं। जन्म-जन्मांतर परमात्मा ऐसी ही माता दें।
प्रश्न-
1. लेखक ने अपनी शिक्षा का श्रेय किसे दिया है?
2. माताजी के उपदेश स्मरण होते ही लेखक की कैसी स्थिति होती है?
3. लेखक की धृष्टता पर माताजी ने कैसे समझाया?
4. लेखक की माताजी लेखक की किस-किस उन्नति में सहायक रहीं?
उत्तर:
1. लेखक ने अपनी शिक्षा का श्रेय अपनी माताजी को दिया है।
2. लेखक को जैसे ही माता के उपदेश स्मरण होते हैं तो उनकी मंगलमयी मूर्ति का ध्यान आ जाता और मस्तक झुक जाता है।
3. लेखक की धृष्टता पर माता ने प्रेमभरे शब्दों में यही कहा कि “तुम्हें जो अच्छा लगे, वह करो, किन्तु ऐसा करना ठीक नहीं, इसका परिणाम अच्छा न होगा।”
4. लेखक की माताजी लेखक की आत्मिक, धार्मिक एवं सामाजिक उन्नति में सदैव सहायक रहीं।
(4)
यह इच्छा पूर्ण होती नहीं दिखाई देती और तुम्हें मेरी मृत्यु की दुखभरी खबर सुनाई जाएगी। माँ! मुझे विश्वास है कि तुम यह समझ कर धैर्य धारण करोगी कि तुम्हारा पुत्र माताओं की माता या भारत माता की सेवा में अपने जीवन को बलि वेदी की भेंट कर गया और उसने तुम्हारी कोख कलंकित न की, अपनी प्रतिज्ञा पर दृढ़ रहा। जब स्वाधीन भारत का इतिहास लिखा जाएगा तो उसके किसी पृष्ठ पर उज्ज्वल अक्षरों में तुम्हारा भी नाम लिखा जाएगा। गुरु गोबिंद सिंह जी की धर्मपत्नी ने जब अपने पुत्रों की मृत्यु की खबर सुनी तो बहुत प्रसन्न हुई थीं और गुरु के नाम पर धर्म-रक्षार्थ अपने पुत्रों के बलिदान पर मिठाई बाँटी थी।
प्रश्न-
1. माताओं की माता किसे कहा गया है?
2. किसने माता की कोख कलंकित नहीं की?
3. धर्म की रक्षार्थ किसने बलिदान किया?
4. इतिहास के उज्ज्वल पृष्ठों में किसका नाम भी लिखा जाएगा?
उत्तर:
1. माताओं की माता भारत माता को कहा गया है।
2. लेखक शहीद रामप्रसाद बिस्मिल ने माता की कोख कलंकित नहीं की।
3. धर्म की रक्षार्थ गुरु गोबिन्द सिंह के पुत्रों ने बलिदान किया।
4. इतिहास के उज्ज्वल पृष्ठों में लेखक की माता का नाम भी लिखा जाएगा।
मेरी माँ Class 6 Summary
कठिन शब्दार्थ एवं पाठ का सार
कठिन – शब्दार्थ – उत्साह भंग = जोश समाप्त होना। प्रोत्साहन = मनोबल बढ़ाना। आपत्ति असहमति, संकट। मुकदमा = अभियोग, वाद, अदालत की लड़ाई। वकालतनामा किसी मुकदमे में वकील होने का प्रमाण-पत्र, वह लेख जिसके जरिये किसी वकील को किसी मुकदमे की पैरवी करने का अधिकार-पत्र दिया जाए। खारिज निरस्त। अक्षर-बोध = अक्षर का ज्ञान। देववाणी देवताओं की वाणी या आकाशवाणी। क्रान्तिकारी इन्कलाबी, अत्याचार विरोधी, सुधारवादी। धृष्टतापूर्ण = ढिठाई के साथ, उद्दंडतायुक्त। विचलित कलंकित = कलंकयुक्त।
पाठ का सार – ‘मेरी माँ’ आत्मकथांश में स्वतन्त्रता सेनानी वीर शहीद ‘बिस्मिल’ ने अपनी माँ की प्रेरणा का उद्बोधन किया है। उनकी माँ विवाह के समय अनपढ़ एवं अशिक्षित थीं। घर में गृहस्थी का कार्य सीखने के बाद अक्षर-बोध करते हुए पढ़ाई-लिखाई की। अपनी संतानों को प्रारम्भिक शिक्षा माँ ने ही दी। लेखक क्रान्तिकारी बनना चाहते थे जबकि उनके पिता एवं दादाजी इससे सहमत नहीं थे। किन्तु वे माता के पूर्ण सहयोग एवं प्रेरणा से देश सेवा में संलग्न हो गये। माता ने कहा था कि किसी की हत्या मत करना। उनके इस आदेश की पूर्ति हेतु उन्होंने एक-दो बार अपनी प्रतिज्ञा भंग की। वे अपनी माँ की सेवा करना चाहते थे किन्तु मातृभूमि की स्वतन्त्रार्थ अपना बलिदान कर दिया।