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RBSE Class 6 Science Chapter 2 Solutions in Hindi — सजीव जगत में विविधता

📅 अंतिम अपडेट: 2026-09-09📖 RBSE/NCERT Solutions

RBSE Class 6 Science Chapter 2 Question Answer in Hindi सजीव जगत में विविधता

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Class 6th Science Chapter 2 Question Answer in Hindi Medium

Science Class 6 Chapter 2 Question Answer in Hindi

प्रश्न 1.
यहाँ दो प्रकार के बीज दिए गए हैं। आप इनके पौधों की जड़ों और पत्तियों के शिरा-विन्यास में क्या अंतर पाते हैं?

उत्तर:
गेहूँ एक बीजपत्री पौधा है जिसमें झकड़ा (रेशेदार) जड़ें पाई जाती हैं तथा पत्तियों में समान्तर शिरा विन्यास पाया जाता है जबकि राजमा द्विबीजपत्री पौधा है जिसमें मूसला जड़ें पाई जाती हैं तथा पत्तियों में जालिकारूपी शिरा – विन्यास पाया जाता है।

प्रश्न 2.
नीचे कुछ जंतुओं के नाम दिए गए हैं, उनके आवास के आधार पर समूह बनाएँ। चिह्नांकित खंड ‘क’ में जलीय जंतुओं और चिह्नांकित खंड ‘ख’ में थलीय जंतुओं के नाम लिखिए। खंड ‘ग’ में दोनों आवासों में रहने वाले जंतुओं के नाम लिखिए। घोड़ा, डॉल्फिन, मेंढक, भेड़, मगरमच्छ, गिलहरी, व्हेल, केंचुआ, कबूतर, कछुआ

उत्तर:
खण्ड ‘क’ के जन्तु – 1. डॉल्फिन 2. व्हेल
खण्ड ‘ख’ के जन्तु – 1. घोड़ा 2. भेड़ 3. गिलहरी 4. केंचुआ 5. कबूतर
खण्ड ‘ग’ के जन्तु – 1. मेंढक 2 मगरमच्छ 3. कछुआ

प्रश्न 3.
मनु की माँ की एक शाक वाटिका (किचन गार्डन) है। एक दिन वह मिट्टी से मूली उखाड़ रही थीं। उन्होंने मनु को बताया कि मूली एक प्रकार की जड़ है। एक मूली को सावधानीपूर्वक देखें और लिखें कि वह किस प्रकार की जड़ है? मूली के पौधे की पत्तियों में आपको किस प्रकार का शिरा – विन्यास दिखाई देगा?
उत्तर:
मूली मूसला प्रकार की जड़ है। मूली के पौधे की पत्तियों में हमें जालिकावत् शिरा-विन्यास दिखाई देगा।

प्रश्न 4.
नीचे दिए गए चित्रों में पर्वतीय बकरी और मैदानों में पाई जाने वाली बकरी को देखें। उनके बीच समानताएँ और अंतर बताएँ। साथ ही यह भी बताएँ कि इन अंतरों के क्या कारण हैं?

उत्तर:
पर्वतीय बकरी व मैदानी बकरी में समानताएँ-

  1. दोनों के शरीर पर बाल पाये जाते हैं।
  2. दोनों में ही चलने के लिए खुरयुक्त पैर पाये जाते हैं।

अन्तर-

पर्वतीय बकरी

मैदानी बकरी

(i) शरीर पर लंबे, घने बाल उपस्थित होते हैं।

(i) शरीर पर छोटे बाल उपस्थित होते हैं।

(ii) इनके कान छोटे हैं।

(ii) इनमे लम्बे कान पाए जाते हैं।

(iii) इनके पैरों के खुर मजबूत होते हैं जिससे ये पथरीले रास्तों पर आसानी से चल सके।

(iii) इनके पैरों के खुर तुलनात्मक रूप से कम मजबूत होते हैं।

पर्वतीय बकरी व मैदानी बकरी में इन अंतरों का कारण इनके आवासों में भिन्नता का होना है।

प्रश्न 5.
पाठ में चर्चा की गई विशेषताओं के अतिरिक्त किसी अन्य विशेषता के आधार पर निम्नलिखित जंतुओं के दो समूह बनाएँ – गाय, तिलचट्टा ( कॉकरोच), कबूतर, चमगादड़, व्हेल, कछुआ, मछली, टिड्डा, छिपकली।
उत्तर:
1. न उड़ने वाले जंतु- गाय, व्हेल, कछुआ, मछली, छिपकली।

2. उड़ने वाले जंतु – तिलचट्टा (कॉकरोच), कबूतर, चमगादड़, टिड्डा।

प्रश्न 6.
जनसंख्या के बढ़ने और मनुष्यों द्वारा अधिक सुविधाजनक जीवन की चाह में विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वनों की कटाई की जा रही है। यह हमारे आस-पास के परिवेश को कैसे प्रभावित कर सकता है? आपके विचार से हम इस चुनौती का निदान कैसे कर सकते हैं?
उत्तर:
जनसंख्या के बढ़ने और मनुष्यों द्वारा अधिक सुविधाजनक जीवन की चाह में विभिन्न आवश्यकताओं हमारे आस-पास के परिवेश में प्रदूषण बढ़ रहा है। इसके की पूर्ति के लिए वनों की कटाई की जा रही है, जिससे साथ ही वन्य प्राणियों के आवास, भोजन व अन्य संसाधनों में कमी होती जा रही है। इन सबका दुष्परिणाम जैव विविधता में कमी के रूप में प्रकट हो रहा है।

हम इस चुनौती का निदान निम्न प्रयासों से कर सकते हैं-

  1. जनसंख्या वृद्धि को प्रभावी नियंत्रण विधियों द्वारा एक सीमा में रखने का प्रयास करना चाहिए।
  2. वन संपदा का विवेकपूर्ण उपयोग किया जाना चाहिए।
  3. वनों को सामुदायिक सहभागिता के साथ पवित्र उपवनों की तरह संरक्षित करने का प्रयास करना चाहिए।
  4. जिन स्थानों पर पूर्व में वन थे, वहाँ पुनर्वनीकरण द्वारा वनों को पुनः स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए।

प्रश्न 7.
फ्लोचार्ट का विश्लेषण करें। इसमें ‘क’ और ‘ख’ के कौन-कौन से उदाहरण हो सकते हैं?

उत्तर:
‘क’ द्विबीजपत्री पौधे के लक्षण प्रकट करता है। जिसके उदाहरण- चना, राजमा, मूली, सदाबहार, आम आदि हैं।

‘ख’ एकबीजपत्री पौधे की विशेषताओं को दर्शाता है। जिसके उदाहरण- गेहूँ, मक्का, चावल, बाजरा, लेमन घास आदि हैं।

प्रश्न 8.
राज अपने मित्र संजय से तर्क करता है, “गुड़हल का पौधा एक झाड़ी है।” संजय इसके स्पष्टीकरण के लिए कौन से प्रश्न पूछ सकता है?
उत्तर:
“गुड़हल का पौधा एक झाड़ी है।” संजय इसके स्पष्टीकरण के लिए निम्न प्रश्न पूछ सकता है-

  1. क्या गुड़हल का पौधा मेरे से छोटा है या मेरी बराबर ऊँचाई का है अथवा मेरे से अधिक ऊँचा है?
  2. गुड़हल के तने का रंग भूरा है या हरा?
  3. क्या गुड़हल के तने को सरलता से मोड़ सकते हैं। अथवा वह कठोर है?
  4. गुड़हल के पौधे की शाखाएँ भूमि के निकट से निकलती हैं या तने के ऊपरी भाग से निकलती हैं?

प्रश्न 9.
तालिका में कुछ आँकड़े दिए गए हैं। आँकड़ों के के आधार पर इन पौधों के उदाहरण का पता समूह लगाइए।

(I) समूह ‘क’ के पौधों में और क्या समानताएँ हैं?
(II) समूह ‘ख’ के पौधों में और क्या समानताएँ हैं?
उत्तर:
समूह ‘क’ के उदाहरण आम, चना, राजमा, मूली, समूह ‘ख’ के उदाहरण- गेहूँ, चावल, मक्का, बाजरा, घास
(I) समूह ‘क’ के पौधों में जालिकावत शिरा – विन्यास पाया जाता है।

(II) समूह ‘ख’ के पौधों में समांतर शिरा – विन्यास पाया जाता है।

प्रश्न 10.
नीचे दिए गए चित्र में बत्तख के नामांकित भाग को देखें। बत्तख के पंजों में अन्य पक्षियों की तुलना में आपको क्या भिन्नता दिखाई देती है? बत्तख अपने इस भाग का उपयोग करके कौन- सी गतिविधि करने में सक्षम होगी?

उत्तर:
अन्य पक्षियों की तुलना में बत्तख में झिल्लीयुक्त पंजे पाये जाते हैं। ये झिल्लीयुक्त पंजे पतवार की तरह कार्य कर बत्तख की जल में तैरने में सहायता करते हैं।

RBSE Class 6 Science Chapter 2 Important Questions in Hindi

बहुचयनात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
जैव विविधता में शामिल होते हैं—
(अ) पौधे
(ब) जंतु
(स) पौधे व जंतु
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(स) पौधे व जंतु

प्रश्न 2.
‘झाड़ी’ का उदाहरण है—
(अ) आम
(ब) गुलाब
(स) टमाटर
(द) चना
उत्तर:
(ब) गुलाब

प्रश्न 3.
समांतर शिरा विन्यास अनुपस्थित होता है-
(अ) गुड़हल की पत्ती में
(ब) केले की पत्ती में
(स) घास की पत्ती में
(द) गेहूँ की पत्ती में
उत्तर:
(अ) गुड़हल की पत्ती में

प्रश्न 4.
मूसला जड़ पाई जाती है.
(अ) चने में
(ब) गेहूँ में
(स) मक्का में
(द) चावल में
उत्तर:
(अ) चने में

प्रश्न 5.
एकबीजपत्री पादप की विशेषता है—
(अ) दो बीजपत्र
(ब) जालिकावत शिरा विन्यास
(स) मूसला जड़
(द) झकड़ा जड़
उत्तर:
(द) झकड़ा जड़

प्रश्न 6.
मेंढ़क है—
(अ) जलीय जंतु
(ब) थलीय जंतु
(स) उभयचर जंतु
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(स) उभयचर जंतु

प्रश्न 7.
वे पौधे जो भूमि की सतह पर फैलकर बढ़ते हैं, कहलाते हैं—
(अ) शाक
(ब) विसर्पी लता
(स) आरोही लता
(द) झाड़ी
उत्तर:
(ब) विसर्पी लता

प्रश्न 8.
सरसों के पौधे की विशेषता है—
(अ) जालिकावत शिरा विन्यास व झकड़ा जड़
(ब) समांतर शिरा विन्यास व मूसला जड़
(स) समांतर शिरा विन्यास व झकड़ा जड़
(द) जालिकावत शिरा विन्यास व मूसला जड़
उत्तर:
(द) जालिकावत शिरा विन्यास व मूसला जड़

प्रश्न 9.
द्विबीजपत्री पौधे का उदाहरण है-
(अ) ज्वार
(ब) केला
(स) राजमा
(द) मक्का
उत्तर:
(स) राजमा

प्रश्न 10.
जल में गति करने वाले जंतुओं की विशेषता
(अ) धारारेखित शरीर
(ब) पख
(स) झिल्लीयुक्त पंजे
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

1. आवास की क्षति से ___________ को हानि होती है।
उत्तर:
जैव विविधता

2. वह स्थान जहाँ पौधे और जंतु रहते हैं, उसे उनका ___________ कहते हैं।
उत्तर:
आवास

3. शिराओं द्वारा दर्शाए गए पैर्टन को ___________ कहते हैं।
उत्तर:
शिरा – विन्यास

4. केले और घास की पत्तियाँ ___________ शिरा – विन्यास को प्रदर्शित करती हैं।
उत्तर:
समांतर

5. मरुस्थल में पाए जाने वाले पौधों के मांसल तने ___________ को संग्रहित कर सकते हैं।
उत्तर:
जल

6. ऊँट अपने ___________ में भोजन संचित करते हैं।
उत्तर:
कूबड़

निम्न में से सत्य / असत्य कथन छांटिए

1. आवास किसी क्षेत्र की जैव विविधता को निर्मित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। (सत्य / असत्य)
उत्तर:
सत्य

2. ऐसे पौधे जिनके तने, कोमल और हरे होते हैं, झाड़ी कहलाते हैं। (सत्य / असत्य)
उत्तर:
असत्य

3. ठंडे मरुस्थल के ऊँटों की ऊँचाई और पैर गरम मरुस्थल के ऊँटों की तुलना में छोटे होते हैं। (सत्य / असत्य)
उत्तर:
सत्य

4. बुरांस की ऊँचाई कम होती है और उनके पत्ते बड़े होते हैं ताकि वे पहाड़ की चोटियों पर तेज हवाओं में जीवित रह सकें। (सत्य / असत्य)
उत्तर:
असत्य

कॉलम 1 में दिए गए शब्दों का मिलान कॉलम 2 से कीजिए

प्रश्न 1.

कॉलम 1

कॉलम 2

(1) विसर्पी लता

(A) आम

(2) शाक

(B) बेर

(3) झाड़ी

(C) अंगूर

(4) वृक्ष

(D) टमाटर

उत्तर:

कॉलम 1

कॉलम 2

(1) विसर्पी लता

(C) अंगूर

(2) शाक

(D) टमाटर

(3) झाड़ी

(B) बेर

(4) वृक्ष

(A) आम

प्रश्न 2.

कॉलम 1

कॉलम 2

(1) कूबड़

(A) बकरी

(2) पख

(B) ऊँट

(3) झिल्लीयुक्त पंजे

(C) मछली

(4) खुर

(D) बत्तख

उत्तर:

कॉलम 1

कॉलम 2

(1) कूबड़

(B) ऊँट

(2) पख

(C) मछली

(3) झिल्लीयुक्त पंजे

(D) बत्तख

(4) खुर

(A) बकरी

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
जैव विविधता किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी विशेष क्षेत्र में पाए जाने वाले पौधों और जंतुओं की विविधता को उस क्षेत्र की जैव विविधता कहते हैं।

प्रश्न 2.
पौधों एवं जंतुओं का समूह बनाने का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
समूह बनाने से पौधों और जंतुओं को उनकी समानताओं और विभिन्नताओं के आधार पर समझना और अध्ययन करना सरल हो जाता है।

प्रश्न 3.
आरोही लता ( क्लाइम्बर) किसे कहते हैं?
उत्तर:
वे पौधे जिनके तने दुर्बल होते हैं और उनको ऊपर चढ़ने और बढ़ने के लिए सहारे की जरूरत होती है आरोही लता ( क्लाइम्बर) कहलाते हैं।

प्रश्न 4.
‘शिराएँ’ किन्हें कहते हैं?
उत्तर:
पौधों की पत्तियों पर पाई जाने वाली पतली रेखाओं को शिराएँ कहते हैं।

प्रश्न 5.
‘मूसला जड़’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
पौधों में जड़ों का वह प्रकार जिसमें एक मुख्य जड़ होती है जिससे छोटी-छोटी पार्श्व जड़ें निकलती हैं, मूसला जड़ कहलाती है।

प्रश्न 6.
पर्वतीय क्षेत्र में पाए जाने वाले देवदार वृक्ष की क्या विशेषताएँ होती हैं?
उत्तर:
देवदार वृक्ष शंक्वाकार होते हैं और इनकी शाखाएँ लचीली तथा झुकी हुई होती हैं।

प्रश्न 7.
‘अनुकूलन’ किसे कहते हैं?
उत्तर:
वे विशिष्ट विशेषताएँ, जो पौधों और जंतुओं को किसी विशेष क्षेत्र में जीवित रहने में सक्षम बनाती हैं, अनुकूलन कहलाती हैं।

प्रश्न 8.
उभयचर जंतु क्या होते हैं?
उत्तर:
वे जंतु जो जल के साथ-साथ थल पर भी रह सकते हैं, उभयचर जंतु कहलाते हैं।

प्रश्न 9.
हमें अपने ग्रह को जीवन से परिपूर्ण बनाए रखने के लिए क्या करने की आवश्यकता है?
उत्तर:
हमें अपने ग्रह को जीवन से परिपूर्ण बनाए रखने के लिए जैव विविधता की रक्षा करने की आवश्यकता है।

प्रश्न 10.
‘समूहन’ किसे कहते हैं?
उत्तर:
पौधों और जंतुओं को उनकी सामान्य विशेषताओं के आधार पर समूहों में व्यवस्थित करने की विधि को समूहन कहते हैं।

प्रश्न 11.
प्रकृति की सैर ( नेचर वॉक) का क्या उद्देश्य होता है?
उत्तर:
प्रकृति की सैर का उद्देश्य प्रकृति में पौधों और जंतुओं की सुंदरता और विविधता का अनुभव करना होता है।

प्रश्न 12.
विसर्पी लता (क्रीपर) किसे कहते हैं?
उत्तर:
वे पौधे जो भूमि की सतह पर फैलकर बढ़ते हैं उन्हें विसर्पी लता (क्रीपर) कहते हैं।

प्रश्न 13.
‘जानकी अम्माल’ कौन थी?
उत्तर:
जानकी अम्माल एक भारतीय वनस्पतिशास्त्री थी, जिन्होंने ‘साइलेंट वैली बचाओ’ आंदोलन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रश्न 14.
‘भारत का पक्षी पुरुष’ (बर्ड मैन ऑफ इंडिया) के रूप में किसे जाना जाता है?
उत्तर:
‘सालिम अली’ को भारत का पक्षी पुरुष के रूप में जाना जाता है।

प्रश्न 15.
मछली में जल में गति करने के लिए क्या विशेषताएँ होती हैं?
उत्तर:
जल में गति करने के लिए मछली में धारारेखित (स्ट्रीमलाइन्ड) शरीर और पख (फिन) होते हैं।

प्रश्न 16.
राजस्थान के मरुस्थलों में पाये जाने वाले नागफनी के पौधे के तने की क्या विशेषता होती है?
उत्तर:
नागफनी का तना मोटा और मांसल होता है जिससे वह जल को संगृहित कर सकता है।

प्रश्न 17.
बाघ परियोजना’ (प्रोजेक्ट टाइगर) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
बंगाल टाइगर की घटती संख्या के संरक्षण के लिए 1973 में आरंभ की गई परियोजना बाघ परियोजना (प्रोजेक्ट टाइगर) के नाम से जानी जाती है।

प्रश्न 18.
चीता पुनर्वास परियोजना ( चीता रीइन्ट्रोडक्शन प्रोजेक्ट) कब प्रारम्भ की गई?
उत्तर:
चीता की संख्या को पुनः स्थापित करने के लिए 2022 में ‘चीता पुनर्वास परियोजना प्रारम्भ की गई है।

प्रश्न 19.
किन राज्यों में गोडावण के आवासों को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है?
उत्तर:
गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र राज्यों में गोडावण के आवासों को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
पौधों में पाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की विशेषताएँ बताइए जो उनके समूह बनाने में उपयोगी हो ?
उत्तर:
पौधों में विभिन्न प्रकार की विशेषताएँ पाई जाती हैं, जैसे—

  1. लंबा अथवा छोटा, कठोर अथवा कोमल तना
  2. विभिन्न आकृतियों की पत्तियाँ और तने पर पत्तियों का अभिविन्यास
  3. फूलों का रंग, आकार और सुगंध में भिन्नता।

प्रश्न 2.
कौन से पौधे ‘वृक्ष’ कहलाते हैं? एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
ऐसे पौधे जो बहुत ऊँचे होते हैं और उनके तने मोटे, कठोर, भूरे और काष्ठीय (लकड़ी जैसे) होते हैं तथा जिनकी शाखाएँ भूमि से दूर तने की कुछ ऊँचाई से निकलना प्रारम्भ होती हैं, वृक्ष कहलाते हैं। उदाहरण- आम का पेड़।

प्रश्न 3.
आरोही लता ( क्लाइम्बर) तथा विसर्पी लता (क्रीपर) में अन्तर बताइए।
उत्तर:
वे पौधे जिनके तने दुर्बल होते हैं और जिन्हें ऊपर चढ़ने और बढ़ने के लिए सहारे की आवश्यकता होती है, आरोही लता (क्लाइम्बर) कहलाते हैं जबकि वे पौधे जो भूमि की सतह पर फैलकर बढ़ते हैं उनको विसर्पी लता (क्रीपर) कहते हैं।

प्रश्न 4.
‘जालिकारूपी शिरा विन्यास’ से क्या तात्पर्य है? एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
जब पत्तियों के शिरा विन्यास में एक मोटी मध्य शिरा के दोनों ओर छोटी शिराओं का एक जाल जैसा विन्यास पाया जाता है तो इस विन्यास या पैटर्न को जालिकारूपी शिरा – विन्यास कहते हैं। उदाहरण- गुड़हल की पत्तियाँ।

प्रश्न 5.
क्या किसी पौधे के बीज, जड़ के प्रकार और पत्ती के शिरा – विन्यास में परस्पर संबंध होता है? समझाइए।
उत्तर:
पौधों के बीज, जड़ के प्रकार तथा पत्ती के शिरा- विन्यास में परस्पर संबंध पाया जाता है। जैसे- द्विबीजपत्री पौधों में जालिकारूपी शिरा – विन्यास और मूसला जड़तंत्र होता है जबकि एकबीजपत्री पौधों में समांतर शिरा – विन्यास और झकड़ा जड़तंत्र होता है।

प्रश्न 6.
विभिन्न जंतुओं द्वारा किस प्रकार की गतियाँ दर्शाई जाती हैं? जंतु ये गतियाँ किस प्रकार कर पाते हैं?
उत्तर:
विभिन्न जंतुओं में अलग-अलग प्रकार की गति होती है। जंतु उड़ सकते हैं, तैर सकते हैं, दौड़ सकते हैं, रेंग सकते हैं, चल सकते हैं, कूद या फाँद सकते हैं। ये जंतु एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए शरीर के विभिन्न अंगों का उपयोग करते हैं। जैसे इनके पास पंख, पैर, पख (फिन) और दूसरे अंग होते हैं जो इन्हें गति में सहायता करते हैं।

प्रश्न 7.
क्या जंतुओं की गति उनके परिवेश पर निर्भर करती है ? उदाहरण देकर समझाइए ।
उत्तर:
जंतुओं की गति पर परिवेश के प्रभाव को समझने के लिए उदाहरण के रूप में हम मछली और बकरी को ले सकते हैं। मछली जल में रहती है। जल में गति करने के लिए इनके पास धारारेखित (स्ट्रीमलाइन्ड) शरीर और पख (फिन) होते हैं जबकि बकरी घास वाले क्षेत्र में रहती है और टाँगों की सहायता से चलती है। दोनों के आकार एवं आकृति भी एक-दूसरे से भिन्न होते हैं। इस प्रकार जंतुओं की गति उनके परिवेश पर निर्भर करती है।

प्रश्न 8.
मरुस्थल में ऊँटों को जीवित रहने में कौन-सी विशेषताएँ सहायक होती हैं?
उत्तर:
मरुस्थल में ऊँटों को जीवित रहने में निम्न विशेषताएँ सहायक हैं-

  1. ऊँट के लंबे पैर और खुर उसे मरुस्थल की रेत में बिना धँसे चलने में सहायता करते हैं।
  2. ऊँट अपने कूबड़ में भोजन संचित करते हैं।
  3. ऊँट कम मात्रा में मूत्र विसर्जन करते हैं; उनका गोबर सूखा होता है और उन्हें पसीना भी नहीं आता है।

प्रश्न 9.
देवदार के पेड़ और बुरांस ( रोडोडेंड्रॉन) में कौन से अनुकूलन पाये जाते हैं जो उन्हें पर्वतीय क्षेत्रों में जीवित रहने में सक्षम बनाते हैं?
उत्तर:
देवदार के वृक्षों की शंक्वाकार आकृति और नीचे झुकी हुई शाखाओं के कारण उन पर बर्फ टिकती नहीं है। बल्कि आसानी से फिसल जाती है। इसी तरह बुरांस की ऊँचाई कम होती है और उसके पत्ते छोटे होते हैं ताकि वह पहाड़ की चोटियों पर तेज हवाओं में जीवित रह सके।

प्रश्न 10.
‘आवास’ किसे कहते हैं? पौधों एवं जंतुओं के लिए आवास किस प्रकार महत्त्वपूर्ण है?
उत्तर:
वह स्थान जहाँ पौधे और जंतु रहते हैं, उसे उनका आवास कहते हैं। पौधों और जीव-जंतुओं का आवास उन्हें जीवित रहने के लिए भोजन, जल, वायु, आश्रय और अन्य आवश्यकताएँ प्रदान करता है।

प्रश्न 11.
आवास किसी क्षेत्र की जैव विविधता को निर्मित करने में किस प्रकार महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है?
उत्तर:
पौधों और जीव-जंतुओं का आवास उन्हें जीवित रहने के लिए भोजन, जल, वायु, आश्रय और अन्य आवश्यकताएँ प्रदान करता है। विभिन्न पौधे और जंतु अलग-अलग आवासों में तथा कई पौधे और जंतु एक समान आवासों में रह सकते हैं। इस प्रकार आवास किसी क्षेत्र की जैव विविधता को निर्मित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रश्न 12.
यदि किसी पौधे या जंतु का आवास क्षतिग्रस्त हो जाए तो क्या होगा?
उत्तर:
पौधों और जंतुओं के आवास की क्षति से वे अपने घर, भोजन और अन्य संसाधनों से वंचित हो जाते हैं। इससे जैव विविधता की हानि होती है।

दीर्घउत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पवित्र उपवन’ (सेक्रेड ग्रोव्स) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
पवित्र उपवन वह अबाधित वन क्षेत्र है जिनका आकार बहुत छोटे से लेकर बहुत बड़े तक हो सकता है। पवित्र उपवन पूरे भारत में पाए जाते हैं। ये कई प्रकार के औषधीय पौधों समेत विविध प्रकार के पौधों और जंतुओं का घर हैं। इनका संरक्षण स्थानीय समुदाय द्वारा किया जाता है और यहाँ किसी को भी किसी जीव-जंतु को हानि पहुँचाने, पेड़ों को काटने या क्षेत्र को क्षति पहुँचाने की अनुमति नहीं है। इस प्रकार पवित्र उपवन सामुदायिक रूप से संरक्षित जैव संपदा है।

प्रश्न 2.
जैव विविधता से क्या तात्पर्य है? किसी क्षेत्र की जैव विविधता में उसके सदस्यों की क्या भूमिका होती है?
उत्तर:
किसी विशेष क्षेत्र में पाए जाने वाले पौधों और जंतुओं की विविधता को उस क्षेत्र की जैव विविधता कहते हैं। किसी क्षेत्र की जैव विविधता में प्रत्येक सदस्य की एक अलग भूमिका होती है, जैसे-पेड़ कुछ पक्षियों और जंतुओं को भोजन और आश्रय प्रदान करते हैं, जंतु फल खाने के बाद बीज फैलाने में सहायता करते हैं। इत्यादि। इससे पता चलता है कि पौधे और जंतु एक- दूसरे पर निर्भर रहते हैं।

प्रश्न 3.
हम पौधों के समूह शाक, झाड़ी और वृक्ष के रूप में कैसे बना सकते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:

  1. कुछ पौधे बहुत ऊँचे होते हैं और उनके तने मोटे, कठोर, भूरे और काष्ठीय (लकड़ी जैसे) होते हैं। उनकी शाखाएँ भूमि से दूर तने की कुछ ऊँचाई से निकलना प्रारम्भ होती हैं। ऐसे पौधों को वृक्ष कहा जाता है। उदाहरण के लिए-आम का पेड़।
  2. कुछ पौधों के तने वृक्षों की तरह ऊँचे-नीचे होते हैं। इनमें अनेक भूरे रंग के काष्ठीय तने होते हैं, जो भूमि के निकट से शाखाओं के रूप में निकलते हैं। ये तने कठोर होते हैं लेकिन वृक्ष के तने जितने मोटे नहीं होते हैं। ऐसे पौधों को झाड़ी कहा जाता है। उदाहरण के लिए- गुलाब का पौधा।
  3. कुछ पौधे आकार में छोटे होते हैं और उनके तने, कोमल और हरे होते हैं। इन्हें शाक कहते हैं। उदाहरण के लिए टमाटर का पौधा।

प्रश्न 4.
क्या किसी पौधे की पत्ती में शिरा – विन्यास के प्रकार और उसकी जड़ के प्रकार के मध्य कोई संबंध होता है? उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर:
पौधों की पत्तियों के शिरा विन्यास और जड़ों के प्रकार के मध्य संबंध देखने के लिए सदाबहार व लेमन घास के पौधे का उदाहरण ले सकते हैं। सदाबहार के पौधे में मूसला जड़ें और पत्तियों में जालिकारूपी शिरा – विन्यास होता है। दूसरी और लेमन घास के पौधों में झकड़ा जड़ें और पत्तियों में समांतर शिरा विन्यास होता है। इस प्रकार सामान्यतः जिन पौधों में जालिकारूपी शिरा – विन्यास होता है उनमें मूसला जड़ें होती हैं, जबकि जिनमें समांतर शिरा – विन्यास होता है उनमें झकड़ा जड़ें होती हैं।

प्रश्न 5.
निम्न पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए-
(i) थलीय आवास
(ii) जलीय आवास
(iii) उभयचर जंतु
उत्तर:
(i) थलीय आवास- थल पर रहने वाले पौधों और जंतुओं के आवास को थलीय आवास कहते हैं। वन, घास के मैदान, मरुस्थल एवं पर्वतीय क्षेत्र थलीय आवास के कुछ उदाहरण हैं।

(ii) जलीय आवास- जल में रहने वाले पौधों और जंतुओं के आवास को जलीय आवास कहते हैं। तालाब, झील, नदियाँ और महासागर जलीय आवास के कुछ उदाहरण हैं।

(iii) उभयचर जंतु कुछ जंतु जल के साथ-साथ थल पर भी रह सकते हैं। इन्हें उभयचर जंतु कहते हैं। जैसे- मेढ़क।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
शिरा – विन्यास किसे कहते हैं? इसके प्रकारों का नामांकित चित्र सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पौधों की पत्तियों पर पतली रेखाओं जैसी संरचनाएँ पाई जाती हैं जिन्हें शिराएँ कहते हैं। इन शिराओं द्वारा दर्शाए गए पैटर्न को शिरा – विन्यास कहते हैं।

पौधों की पत्तियों में दो प्रकार का शिरा – विन्यास पाया जाता है-
(i) जालिकारूपी शिरा विन्यास- जब पत्तियों में मोटी मध्य शिरा के दोनों ओर शिराओं का एक जाल जैसा पैटर्न पाया जाता है तो इस पैटर्न को जालिकारूपी शिरा – विन्यास कहते हैं। जैसे— गुड़हल की पत्तियाँ इस शिरा – विन्यास पैटर्न को प्रदर्शित करती हैं।

(ii) समांतर शिरा – विन्यास- जब पत्तियों में शिराएँ समानान्तर चलती हैं तो इस पैटर्न को समांतर शिरा- विन्यास कहते हैं। जैसे— केले और घास की पत्तियाँ समांतर शिरा – विन्यास प्रदर्शित करती हैं।

प्रश्न 2.
पौधों में पाई जाने वाली जड़ों के प्रकारों को नामांकित चित्र बनाते हुए समझाइए।
उत्तर:
पौधों में दो प्रकार की जड़ें पाई जाती हैं-
(1) मूसला जड़ – जब पौधे की जड़ में एक मुख्य जड़ होती है और उससे छोटी-छोटी पार्श्व जड़ें निकलती हैं। तो ऐसी जड़ों को मूसला जड़ें कहते हैं। जैसे— सरसों एवं गुड़हल की जड़।

(2) झकड़ा (रेशेदार) जड़- जब पौधे की जड़ें समान माप की पतली जड़ों के गुच्छों के रूप में दिखाई देती हैं। जोतने के आधार से निकलती हैं, झकड़ा जड़ या रेशेदार जड़ कहलाती है।

प्रश्न 3.
बीजपत्र के आधार पर पौधों को कितने समूहों में बाँटा जाता है? प्रत्येक समूह को समझाते हुए एकबीजपत्री बीज तथा द्विबीजपत्री बीज का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
बीजपत्र के आधार पर पौधों को दो समूहों में बाँटा जाता है—
(i) द्विबीजपत्री पौधे ऐसे पौधे जिनके बीजों में दो बीजपत्र होते हैं; उन्हें द्विबीजपत्री (डाइकॉटीलीडन्स या डाइकॉट) पौधे कहते हैं। जैसे चने के बीज।

(ii) एकबीजपत्री पौधे ऐसे पौधे जिनके बीजों में एक पतला बीजपत्र होता है, एकबीजपत्री (मोनोकॉटीलीडन्स या मोनोकॉट) पौधे कहलाते हैं। जैसे— मक्का के बीज।

एकबीजपत्री व द्विबीजपत्री बीज-

प्रश्न 4.
एक क्षेत्र की जैव विविधता अन्य क्षेत्रों की जैव विविधता से अलग क्यों होती है? उदाहरण द्वारा समझाइए।
उत्तर:
मरुस्थलीय भागों में जल बहुत कम उपलब्ध रहता है। शुष्क मरुस्थल दिन में अत्यधिक गर्म और रात में अत्यधिक ठंडे होते हैं। इसलिए इन क्षेत्रों में ऐसे पौधे और जंतु मिलेंगे, जो दिन के समय अत्यधिक गर्मी और रात्रि के समय अत्यधिक ठंड वाली परिस्थितियों में रह सकते हैं। मरुस्थल में पाए जाने वाले नागफनी जैसे पौधों के मांसल तने जल को संगृहित कर सकते हैं जो उन स्थानों की गर्म परिस्थितियों को सहन करने में पौधों की सहायता करते हैं।

बहुत ठंडे पर्वतीय क्षेत्रों में प्रायः हिमपात होता है। ऐसी स्थिति में जीवित रहने के लिए वृक्षों की बनावट ऐसी होती है कि उन पर बर्फ आसानी से फिसल जाती है। देवदार के पेड़ों की शंक्वाकार आकृति और नीचे झुकी हुई शाखाएँ उन्हें सरलता से ऐसा करने में सक्षम बनाती है। कुछ वृक्षों की ऊँचाई कम होती है और उनके पत्ते छोटे होते हैं ताकि वे पहाड़ की चोटियों पर तेज हवाओं में जीवित रह सके। इस प्रकार विभिन्न स्थानों की जैव विविधता भिन्न परिस्थितियों के कारण एक-दूसरे से बहुत अलग होती है।

प्रश्न 5.
राजस्थान के गरम मरुस्थल के ऊँट और लद्दाख के ठंडे मरुस्थल के ऊँट में क्या अंतर दिखाई देते हैं? इन अंतरों के कारण ऊँटों को क्या लाभ होते हैं?
उत्तर:
गरम मरुस्थल के ऊँटों के पैर लंबे होते हैं जिनमें चौड़े खुर होते हैं जो उन्हें मरुस्थल की रेत में बिना धँसे चलने में सहायता करते हैं। दूसरी ओर ठंडे मरुस्थल के ऊँटों की ऊँचाई और पैर गरम मरुस्थल के ऊँटों की तुलना में छोटे होते हैं जो उन्हें ठंडे पहाड़ी मरुस्थलीय क्षेत्रों में आसानी से चलने में सक्षम बनाते हैं।

मरुस्थलीय क्षेत्रों में भोजन आसानी से उपलब्ध नहीं होता है। ऊँट अपने कूबड़ में भोजन संचित करते हैं। गरम मरुस्थलों के ऊँटों में एक कूबड़ होता है जो भोजन की कमी के दौरान उन्हें जीवित रहने में सहायक होता है। ठंडे मरुस्थलों के ऊँटों में दो कूबड़ होते हैं जो सर्दियों में उनके लिए काफी उपयोगी साबित होते हैं। इनके सिर से लेकर गर्दन के निचले भाग तक लंबे बाल होते हैं, जो लद्दाख के बर्फीले मौसम में उनको जीवित रहने में सहायक होते हैं।

RBSE Class 6 Science Chapter 2 Notes in Hindi

  1. हम चारों ओर से विविध प्रकार के पौधों और जीव जन्तुओं से घिरे हुए हैं। किसी विशेष क्षेत्र में पाए जाने वाले पौधों और जन्तुओं की विविधता उस क्षेत्र की जैव विविधता का भाग होती है।
  2. पौधों और जंतुओं के उनके मध्य समानताओं और भिन्नताओं के आधार पर समूह बना सकते हैं।
  3. पौधों में उनके तने, पत्तियों, फूलों आदि से संबंधित विशेषताओं में विभिन्नताएँ होती हैं।
  4. विभिन्न जंतुओं में अलग-अलग प्रकार की गतियाँ पाई जाती हैं। गतियों के प्रकार के आधार पर उनके समूह बनाए जा सकते हैं।
  5. पौधों और जंतुओं को उनकी सामान्य विशेषताओं के आधार पर समूहों में व्यवस्थित करने की विधि को समूहन कहते हैं।
  6. पौधों को उनकी ऊँचाई तने के प्रकार और शाखाओं के पैटर्न के आधार पर शाक, झाड़ी और वृक्ष में समूहित किया जा सकता है।
  7. पौधों को उनके बीज में बीजपत्रों की संख्या के आधार पर एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री पौधों के समूह में बाँटा जा सकता है।
  8. एकबीजपत्री पौधों की पत्तियों में सामान्यतः समांतर शिरा-विन्यास और झकड़ा (रेशेदार) जड़ें पाई जाती हैं; जबकि द्विबीजपत्री पौधों में पत्तियों में प्रायः जालिकारूपी शिरा – विन्यास और मूसला जड़ें पाई जाती हैं।
  9. विभिन्न क्षेत्रों की जैव विविधता भिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों के कारण एक-दूसरे से भिन्न होती है।
  10. वे विशिष्ट विशेषताएँ जो पौधों और जंतुओं को किसी विशेष स्थान पर जीवित रहने में सक्षम बनाती है, अनुकूलन कहलाती है।
  11. आवास उस स्थान को कहते हैं जहाँ पौधे और जंतु रहते हैं।
  12. आवास के आधार पर पौधों और जंतुओं को जलीय और थलीय समूह में बाँटा जा सकता है।
  13. आवास की क्षति से जैव विविधता को नुकसान होता है क्योंकि पौधे और जंतु अपने आवास, भोजन अन्य संसाधनों से वंचित हो जाते हैं।
  14. हमें जैव विविधता की रक्षा करने की जरूरत है ताकि पौधे एवं जंतु बचे रहें और फलते-फूलते रहें।