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सामाजिक विज्ञान (Social Science)हिंदी माध्यम2026-27

RBSE Class 6 Social Science Chapter 11 Solutions in Hindi — आधारभूत लोकतंत्र भाग 2 ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय सरकार

📅 अंतिम अपडेट: 2026-09-09📖 RBSE/NCERT Solutions

Class 6 SST Chapter 11 Question Answer in Hindi आधारभूत लोकतंत्र भाग 2 ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय सरकार

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Class 6 Social Science Chapter 11 Question Answer in Hindi

आधारभूत लोकतंत्र भाग 2 ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय सरकार Question Answer

कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान पाठ 11 के प्रश्न उत्तर (InText)

पृष्ठ 163

प्रश्न 1.
पंचायती राज संस्थाएँ क्या हैं?
उत्तर:
पंचायती राज संस्थाएँ भारत के ग्रामीण क्षेत्रों की स्थानीय स्वशासन की संस्थाएँ हैं। ये ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को स्वशासन का अधिकार देती हैं ताकि वे अपने मामले स्वयं सुलझा सके और गाँवों के विकासात्मक कार्यों में सरकार का सहयोग दें।

प्रश्न 2.
उनके क्या कार्य हैं?
उत्तर:

  1. पंचायती राज संस्थाएँ स्थानीय समस्याओं को हल करने, विकास कार्यों को आगे बढ़ाने और सरकारी योजनाओं के लाभ को जनसाधारण तक पहुँचाने का महत्त्वपूर्ण कार्य करती हैं।
  2. ये संस्थाएँ एक साथ मिलकर कृषि, आवास, सड़कों के रख-रखाव, जल संसाधनों का प्रबंधन, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण से लेकर सांस्कृतिक गतिविधियों तक जीवन के सभी पक्षों से जुड़े दायित्वों का निर्वहन करती हैं।

प्रश्न 3.
शासन और लोकतंत्र में पंचायती राज संस्थाएँ क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?
उत्तर:
शासन और लोकतंत्र में पंचायती राज संस्थाओं का महत्त्व-

  1. पंचायत राज व्यवस्था में पंचायती राज संस्थाओं में लोकतांत्रिक शासन के दोनों रूप प्रत्यक्ष लोकतंत्र और प्रतिनिधि लोकतंत्र – दिखाई देते हैं और इन संस्थाओं के माध्यम से लोकतंत्र के दोनों रूप कार्य करते हुए दिखाई देते हैं।
  2. ग्राम सभा के माध्यम से यहाँ प्रत्यक्ष लोकतंत्र कार्य करता हुआ दिखाई देता है तो ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के माध्यम से यहाँ प्रतिनिधि लोकतंत्र कार्य करता है।
  3. शासन के रूप में पंचायती राज संस्थाएँ इसलिए महत्त्वपूर्ण हैं कि ये संस्थाएँ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वशासन का अधिकार देती हैं ताकि वे अपने मामले स्वयं सुलझा सकें और विकासात्मक कार्यों में सहयोग दें। इस प्रकार ये ग्रामवासियों को अपने गाँवों और स्थानीय क्षेत्रों में प्रबंधन और विकास के कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेने में सक्षम बनाती हैं।

पृष्ठ 169

प्रश्न 1.
कक्षा की गतिविधि के रूप में चार अथवा पाँच विद्यार्थी मिलकर एक बाल पंचायत का गठन करें और कक्षा के शेष विद्यार्थी स्वयं को ग्रामवासी मान लें। यह ग्राम सभा किन विषयों पर विचार-विमर्श करेगी? कौनसी चुनौतियों का सामना करेगी? यह कौन से समाधान प्रस्तु करेगी?
उत्तर:

  1. बाल पंचायत के विद्यार्थी ग्रामवासियों के समक्ष गाँव के बच्चों की समस्यायें रख सकते हैं। जैसे-
  2. गाँव के बच्चों के लिए खेल का कोई मैदान नहीं है?
  3. गाँव के कुछ बच्चे अभी भी स्कूल में पढ़ने नहीं आ रहे हैं?
  4. गाँव में स्त्री – बाल विवाह की प्रथा अभी भी जारी है?
  5. गाँव में प्राथमिक विद्यालय ही है, बच्चों को उच्च कक्षा में पढ़ने के लिए काफी दूर के स्कूल में जाना पड़ता है। गाँव में ही स्कूल को क्रमोन्नत करवाया जाये?

बाल पंचायत के इन विषयों पर शेष विद्यार्थियों की ग्राम सभा विचार-विमर्श करेगी और वह इनके निम्न समाधान प्रस्तुत करेगी-
(1) खेल के मैदान की समस्या – वे इस समस्या पर विचार विमर्श कर गाँव के मध्य में एक बेकार पड़े सवार्वजनिक स्थल को खेल के मैदान के रूप में विकसित करने के लिए ग्राम पंचायत को कहेंगे।

(2) अशिक्षित रह रहे बच्चे – गाँव में जो बच्चे अभी भी अशिक्षित रह रहे हैं अर्थात् स्कूल नहीं आ पा रहे हैं, उनके लिए ग्राम सभा के सदस्य उनके माता-पिता के पास जाकर बच्चों को स्कूल में न भेजने की उनकी समस्याओं को समझेंगे तथा उन्हें शिक्षा के महत्त्व एवं बच्चे के भविष्य को स्पष्ट करते हुए समझाने का प्रयास करेंगे।

(3) गाँव में चल रही स्त्री बाल विवाह प्रथा की समस्या को ग्राम पंचायत के समक्ष रखकर उसे पूर्णतः रुकवायेंगे।

(4) स्कूल को क्रमोन्नत कर आठवीं कक्षा तक करने के लिए ग्राम पंचायत के समक्ष इस समस्या को रखेंगे तथा ग्राम पंचायत को आगे पंचायत समिति तथा जिला पंचायत के समक्ष इस समस्या को रखकर सरकार से स्कूल को क्रमोन्नत करवाने के लिए प्रयास करवायेंगे।

पृष्ठ 170

प्रश्न 1.
आप केन्द्र स्तर और पंचायत स्तर पर शासन प्रणाली के बीच क्या विभिन्नताएँ और समानताएँ पाते हैं?
उत्तर:
(1) केन्द्र स्तर और पंचायत स्तर पर शासन प्रणाली के बीच समानताएँ-

  • दोनों प्रकार की शासन प्रणाली प्रतिनिधि लोकतांत्रिक शासन प्रणाली हैं।
  • दोनों प्रकार की शासन प्रणाली अपने निर्धारित विषयों पर ही निर्णय लेती हैं।
  • दोनों ही प्रकार की शासन प्रणाली अपने कार्यों के लिए जनता के प्रति उत्तरदायी हैं।

(2) दोनों शासन प्रणाली के बीच असमानताएँ-

  • पंचायत स्तर की शासन प्रणाली में जहाँ प्रत्यक्ष लोकतंत्र और प्रतिनिधि लोकतंत्र दोनों के प्रकार दिखाई देते हैं, वहाँ केन्द्र स्तर की शासन प्रणाली केवल प्रतिनिधि लोकतांत्रिक शासन प्रणाली है।
  • पंचायत स्तर की शासन प्रणाली में शासन के तीनों अंगों विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका का स्पष्ट विभाजन नहीं है, जबकि केन्द्रीय स्तर की शासन प्रणाली में इसका स्पष्ट विभाजन है।
  • पंचायत स्तर की शासन प्रणाली में महिलाओं को एक तिहाई प्रतिनिधित्व दिया गया है, जबकि केन्द्र स्तर की शासन प्रणाली में यह नहीं दिया गया है।

आधारभूत लोकतंत्र भाग 2 ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय सरकार कक्षा 6 प्रश्न उत्तर (Exercise)

प्रश्न 1.
स्वयं को जाँचिए-
ऊपर दिए गए पाठ को देखे बिना क्या आप पंचायती राज व्यवस्था के तीन स्तर बता सकते हैं? तीनों स्तरों में प्रत्येक के मुख्य कार्य क्या हैं?
उत्तर:
हाँ, हम पंचायती राज स्तर के तीन स्तर बता सकते हैं। ये हैं- ग्राम स्तर पर ग्रामपंचायत, खंड स्तर पर पंचायत समिति तथा जिला स्तर पर जिला परिषद।

(1) ग्राम पंचायत के प्रमुख कार्य – ग्राम पंचायत के मुख्य कार्य अग्रलिखित हैं-

  • सड़कों, नालियों, स्कूलों, पानी के स्रोतों, सार्वजनिक भवनों का रखरखाव एवं प्रबंधन।
  • ग्राम विकास की सरकारी योजनाओं को कार्यान्वित करना।
  • गाँव की समस्याओं को पंचायत समिति के समक्ष समाधान हेतु रखना।
  • स्थानीय कर लगाना व इकट्ठा करना।

(2) पंचायत समिति के प्रमुख कार्य-

  1. पंचायत समिति क्षेत्र की कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य सम्बन्धी दायित्वों का निर्वहन करना। यह अपने क्षेत्र की समस्त ग्राम पंचायतों की विकास योजनाओं को एकत्रित कर उन्हें जिला स्तर पर प्रस्तुत करती है।
  2. यह विकासात्मक कार्यों और ग्रामीण इलाकों में सड़कों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकारी योजनाओं के लिए धनराशि के आवंटन में मदद करती है।

(3) जिला परिषद के कार्य-

  1. सभी ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों की विकास योजनाओं को एकत्रित करके उन्हें राज्य स्तर पर प्रस्तुत करती हैं।
  2. ग्रामीण विकासात्मक कार्यों के लिए सरकारी योजनाओं के लिए धन राशि आवंटन करने में मदद करती है।

प्रश्न 2.
गाँव की सड़क के किनारे पड़ी प्लास्टिक थैलियों से संबंधित विषय पर सरपंच को पत्र लिखिए।
उत्तर:
दिनांक ………………….
सेवा में
सरपंच
ग्राम पंचायत
क ख ग
विषय – सड़क किनारे पड़ी प्लास्टिक थैलियों के सम्बन्ध में महोदय

गाँव की सड़क के किनारे प्लास्टिक की थैलियाँ पड़ी रहती हैं। ये थैलियाँ उड़कर जल निकास नालियों में चली जाती हैं और जल निकास को अवरुद्ध कर देती हैं जिसके परिणाम में सड़क के किनारे-किनारे गंदा जल बहता रहता है। दूसरे, यह भी देखा गया है कि कुछ थैलियों में या थैलियों के ऊपर कुछ खाद्य पदार्थ होता है, जिसके कारण गायें उस खाद्य पदार्थ को खाने के साथ-साथ प्लास्टिक थैली को भी खा जाती हैं। इससे गायें बीमार हो जाती हैं।

अतः आपसे निवेदन है कि ग्राम सभा में ग्रामवासियों के समक्ष इस समस्या को उठाकर इस समस्या से निजात दिलायें।
प्रार्थी
क ख ग
ग्राम सभा सदस्य

प्रश्न 3.
आपके विचार से किस प्रकार का व्यक्ति ग्राम पंचायत का सदस्य हो सकता है?
उत्तर:
हमारे विचार से वह प्रत्येक वयस्क भारतीय नागरिक जिसकी आयु 25 वर्ष या उससे अधिक है और ग्राम सभा 5 का सदस्य है, ग्राम पंचायत का सदस्य हो सकता है, यदि वह उस गाँव के मतदाताओं द्वारा निर्वाचित किया गया हो।

प्रश्न 4.
मान लीजिए, आप एक गाँव के स्कूल में पढ़ते हैं। स्कूल राजमार्ग पर है तथा विद्यार्थियों को स्कूल आते- जाते समय सड़क पार करने में कठिनाई होती है। इस समस्या के समाधानों के विकल्प क्या-क्या हो सकते हैं? इसमें पंचायती राज की कौन-सी संस्थाएँ आपकी मदद कर सकती हैं? विद्यार्थी इसमें क्या कर सकते हैं?
उत्तर:
(1) इस समस्या का एक समाधान तो यह हो सकता है कि स्कूल के सामने की सड़क को 15-20 फीट छोड़कर दोनों तरफ स्पीड ब्रेकर बनवा दिए जाएं, ताकि 8. स्कूल के सामने वाहन तेज गति से नहीं निकले।

(2) दूसरा, इसके साथ ही किये जाने वाला विकल्प यह है कि स्कूल के आधा किलोमीटर की दूरी पर दोनों तरफ यह साइन बोर्ड लगा दिया जाएं, कि आगे बच्चों का स्कूल है, वाहन धीरे व सावधानी से चलाएं।

(3) स्कूल के गेट के समक्ष हरी व रेड लाइट के साथ जेबरा क्रासिंग की भी लाइट लगवाएं तथा जेबरा क्रासिंग स्थल को सड़क पर दिखाएं।

इसमें पंचायती राज की जिला परिषद संस्था हमारी मदद कर सकती है, क्योंकि वह हमारी इस समस्या को राज्य सरकार के समक्ष रखकर उसका समाधान करवा सकती है। विद्यार्थी इस समस्या को बाल हितैषी पंचायत के समक्ष रखकर ग्राम सभा से इसके समाधान के लिए कह सकते हैं।

आधारभूत लोकतंत्र भाग 2 ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय सरकार Class 6 Question Answer

बहुविकल्पात्मक प्रश्न

1. हमारे देश में लगभग कितने गाँव हैं-
(अ) 6 लाख
(ब) 6 हजार
(स) साठ हजार
(द) आठ हजार
उत्तर:
(अ) 6 लाख

2. हमारे देश की जनसंख्या का कितना भाग ग्रामीण क्षेत्रों में रहता है?
(अ) एक तिहाई भाग
(ब) आधा भाग
(स) दो तिहाई भाग
(द) चौथाई भाग
उत्तर:
(स) दो तिहाई भाग

3. भारत में ग्रामीण क्षेत्रों की स्थानीय सरकार को क्या कहा जाता है?
(अ) पंचायती राज व्यवस्था
(ब) ग्राम पंचायत
(स) पंचायत समिति
(द) जिला परिषद
उत्तर:
(अ) पंचायती राज व्यवस्था

4. पंचायती राज व्यवस्था कितने स्तरों पर कार्य करती है?
(अ) दो
(ब) तीन
(स) चार
(द) एक
उत्तर:
(ब) तीन

5. ग्राम पंचायत के प्रमुख (अध्यक्ष) को क्या कहा जाता है?
(अ) सरपंच
(स) प्रमुख
(ब) प्रधान
(द) मुख्यमंत्री
उत्तर:
(अ) सरपंच

6. पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम पंचायत और जिला परिषद के बीच की कड़ी है-
(अ) न्याय पंचायत
(ब) पंचायत समिति
(स) ग्राम सभा
(द) बाल पंचायत
उत्तर:
(ब) पंचायत समिति

7. गाँव की भूमि का माप और उसका रिकार्ड रखने का मुख्य कार्य करता है—
(अ) सरपंच
(ब) थानेदार
(स) पटवारी
(द) ग्राम सचिव
उत्तर:
(स) पटवारी

8. पंचायती राज संस्थाओं में किस वर्ग के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित रखने का प्रावधान है—
(अ) अनुसूचित जातियों के लिए
(ब) अनुसूचित जनजातियों के लिए
(स) अन्य पिछड़े वर्ग के लिए
(द) महिलाओं के लिए
उत्तर:
(द) महिलाओं के लिए

9. ग्राम पंचायत की बैठकों के लिए आयोजन और अभिलेखों के रख रखाव जैसे प्रशासनिक कार्य करता है-
(अ) सरपंच
(ब) उप सरपंच
(स) पंचायत सचिव
(द) पटवारी
उत्तर:
(स) पंचायत सचिव

10. ग्राम पंचायत के सदस्य चुने जाते हैं-
(अ) ग्राम सभा द्वारा
(ब) सरपंच द्वारा
(स) प्रधान द्वारा
(द) जिला प्रमुख द्वारा
उत्तर:
(अ) ग्राम सभा द्वारा

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

1. हमारी जनसंख्या लगभग 14 अरब पार कर चुकी है, जिसका …………………………. भाग ग्रामीण क्षेत्रों में रहता है।
उत्तर:
दो-तिहाई

2. ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय सरकार को एक …………………………. व्यवस्था के अन्तर्गत गठित किया जाता है।
उत्तर:
त्रिस्तरीय

3. …………………………. व्यवस्था में प्रत्यक्ष लोकतंत्र और प्रतिनिधि लोकतंत्र दोनों कार्य करते हैं।
उत्तर:
पंचायती राज

4. …………………………. में ग्राम के स्त्री-पुरुष अपने क्षेत्र से जुड़े सभी मामलों पर विचार विमर्श करते हैं।
उत्तर:
ग्राम सभा

5. पंचायती राज संस्थाओं में एक तिहाई सीटें …………………………. के लिए आरक्षित रखने का प्रावधान है।
उत्तर:
महिलाओं

6. एक प्राचीन ग्रंथ ‘अर्थशास्त्र’ के लेखक …………………………. हैं।
उत्तर:
कौटिल्य

सत्य / असत्य बताइये

1. पटवारी ग्राम पंचायत की बैठकों का आयोजन करता है।
उत्तर:
असत्य

2. खंड स्तर पर पंचायत समिति, ग्राम पंचायत और जिला परिषद के बीच की कड़ी है।
उत्तर:
सत्य

3. पंचायती राज संस्थाओं में एक तिहाई सीटें अनुसूचित जाति के लोगों के लिए आरक्षित रखने का प्रावधान है।
उत्तर:
असत्य

4. पूरे देश के विभिन्न राज्यों में पंचायती राज संस्थाओं के गठन और कार्यों में विविधताएँ हो सकती हैं।
उत्तर:
सत्य

स्तम्भ I का स्तंभ II से सही मिलान कीजिए।

प्रश्न 1.

I

II

1. जिला स्तर

(अ) ग्रामीण स्थानीय सरकार

2. ग्राम स्तर

(ब) पंचायत समिति

3. खंड स्तर

(स) जिला परिषद

4. अर्थशास्त्र

(द) ग्राम पंचायत

5. पंचायती राज संस्थाएँ

(य) कौटिल्य

उत्तर:

I

II

1. जिला स्तर

(स) जिला परिषद

2. ग्राम स्तर

(द) ग्राम पंचायत

3. खंड स्तर

(ब) पंचायत समिति

4. अर्थशास्त्र

(य) कौटिल्य

5. पंचायती राज संस्थाएँ

(अ) ग्रामीण स्थानीय सरकार

प्रश्न 2.

I

II

1. ग्राम पंचायत का निर्वाचित सदस्य

(अ) पार्षद

2. ग्राम पंचायत का प्रमुख

(ब) पंच

3. ग्राम पंचायत का एक

(स) सरपंच प्रशासनिक अधिकारी

4. पंचायत समिति का प्रमुख

(द) पटवारी

5. पंचायत समिति का निर्वाचित सदस्य

(य) प्रधान

उत्तर:

I

II

1. ग्राम पंचायत का निर्वाचित सदस्य

(ब) पंच

2. ग्राम पंचायत का प्रमुख

(स) सरपंच प्रशासनिक अधिकारी

3. ग्राम पंचायत का एक

(द) पटवारी

4. पंचायत समिति का प्रमुख

(य) प्रधान

5. पंचायत समिति का निर्वाचित सदस्य

(अ) पार्षद

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
पंचायती व्यवस्था को स्थानीय शासन व्यवस्था का एक रूप क्यों कहा गया है?
उत्तर:
पंचायत एक स्थानीय शासन व्यवस्था है क्योंकि यह शासन को लोगों के समीप लाती है और निर्णय प्रक्रिया में ग्रामीणों की सक्रिय साझेदारी संभव बनाती है।

प्रश्न 2.
पंचायती राज व्यवस्था के कितने स्तर हैं?
उत्तर:
पंचायती राज व्यवस्था के तीन स्तर हैं— (i) ग्राम स्तर (ii) खंड स्तर (iii) जिला स्तर।

प्रश्न 3.
पंचायती राज व्यवस्था के तीनों स्तरों की संस्थाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
(i) ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायत, (ii) खंड स्तर पर पंचायत समिति तथा (iii) जिला स्तर पर जिला परिषद नामक संस्थाएँ हैं।

प्रश्न 4.
ग्राम सभा क्या है?
उत्तर:
ग्राम सभा मतदाता के रूप में नामांकित गाँव (या आस-पास के गाँवों) के वयस्कों का एक समूह है।

प्रश्न 5.
ग्राम सभा क्या कार्य करती है?
उत्तर:
ग्राम सभा में स्त्री-पुरुष अपने क्षेत्र से जुड़े सभी मामलों पर विचार-विमर्श करते हैं और निर्णय लेते हैं।

प्रश्न 6.
प्रत्येक ग्राम पंचायत का अध्यक्ष क्या कहलाता है?
उत्तर:
प्रत्येक ग्राम पंचायत का अध्यक्ष सरपंच कहलाता है।

प्रश्न 7.
महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के तरंगफल गाँव के सरपंच दयानेश्वर कांपले का आदर्श वाक्य क्या है?
उत्तर:
उसका आदर्श वाक्य है—’गाँव की सेवा, जनता की सेवा है।’

प्रश्न 8.
महाराष्ट्र के गांव हिवरे बाजार के सरपंच पोपटराव बागुजी पवार ने किस मॉडल को लागू किया?
उत्तर:
पोपटराव बागुजी ने सरपंच बनने के बाद अन्ना हजारे के वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण और लाखों पेड़ लगाने के मॉडल को लागू किया।

प्रश्न 9.
पंचायत सचिव क्या कार्य करता है?
उत्तर:
पंचायत सचिव ग्राम पंचायत की बैठकों के आयोजन और अभिलेखों का रखरखाव करता है।

प्रश्न 10.
पटवारी का क्या कार्य है?
उत्तर:
पटवारी गाँव के भू-अभिलेखों का रख-रखाव करता है।

प्रश्न 11.
बाल हितैषी पंचायत की पहल से बच्चों को क्या लाभ मिलता है?
उत्तर:
बाल हितैषी पंचायत की पहल से बच्चों की भलाई से जुड़े मामलों पर स्वयं बच्चों को अपने विचार रखने का अवसर मिलता है।

प्रश्न 12.
पंचायत समिति के सदस्य किन लोगों द्वारा चुने जाते हैं?
उत्तर:
पंचायत समिति के सदस्य स्थानीय लोगों द्वारा चुने जाते हैं।

प्रश्न 13.
पंचायत समिति और जिला परिषद में निर्वाचित सदस्यों के अलावा अन्य सदस्य कौन हो सकते हैं?
उत्तर:
इन संस्थाओं में क्षेत्र के गाँवों के सरपंच और राज्य विधानमण्डल के स्थानीय सदस्य जैसे अन्य सदस्य हो सकते हैं।

प्रश्न 14.
पंचायत समिति का मुख्य कार्य क्या है?
उत्तर:
पंचायत समिति अपने क्षेत्र की सभी ग्राम पंचायतों की विकास योजनाएँ एकत्रित करके उन्हें जिला स्तर पर प्रस्तुत करती हैं।

प्रश्न 15.
जिला परिषद का कोई एक कार्य लिखिए।
उत्तर:
जिला परिषद जिले की सभी ग्राम पंचायतों की विकास योजनाओं को एकत्रित कर उन्हें राज्य स्तर पर प्रस्तुत करती हैं।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
पंचायती राज व्यवस्था कितने स्तरों पर कार्य करती है? इसकी संस्थाएँ एक साथ मिलकर किन दायित्वों का निर्वहन करती हैं?
उत्तर:

  1. पंचायती राज व्यवस्था तीन स्तरों-ग्राम, खंड और जिला स्तर पर निम्न से उच्च स्तर तक कार्य करती हैं।
  2. इसकी संस्थाएँ एक साथ मिलकर कृषि, आवास, सड़क प्रबंधन, जल संसाधनों का प्रबंधन, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण से लेकर सांस्कृतिक गतिविधियों तक जुड़े दायित्वों का निर्वहन करती है।

प्रश्न 2.
ग्राम पंचायत के संगठन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
ग्राम पंचायत में ग्राम पंचायत क्षेत्र के विभिन्न वार्डो से निर्वाचित सदस्य (जिन्हें पंच कहा जाता है), एक सरपंच तथा एक उपसरपंच होता है। सरपंच ग्राम पंचायत का प्रमुख होता है। इसके अतिरिक्त इसमें एक पंचायत सचिव तथा एक प्रशासनिक अधिकारी अर्थात् पटवारी होता है।

प्रश्न 3.
ग्राम पंचायत के सदस्यों व सरपंच का चुनाव किस प्रकार होता है?
उत्तर:
ग्राम पंचायत के सदस्य तथा सरपंच ग्राम सभा द्वारा सीधे चुने जाते हैं, जो कि मतदाता के रूप में नामांकित गाँव (या आस-पास के गाँवों) के वयस्कों का समूह होता है।

प्रश्न 4.
मध्य प्रदेश के खानखांडवी गाँव से भील समुदाय की पहली महिला सरपंच वंदना बहादुर मैदा को किन कार्यों के कारण व्यापक पहचान मिली?
उत्तर:
महिला सरपंच वंदना बहादुर मैदा ने गाँव की महिलाओं को सभा की बैठकों में आने के लिए प्रेरित किया और शिक्षा एवं स्वच्छता जैसी गंभीर समस्याओं को उठाया, जिससे उन्हें दूर-दूर तक व्यापक पहचान मिली।

प्रश्न 5.
बाल हितैषी पंचायत की पहल से क्या आशय है?
उत्तर:
पंचायतों में बाल हितैषी पंचायत की पहल से बच्चों की भलाई से जुड़े मामलों पर स्वयं बच्चों को अपने विचार और राय रखने का अवसर मिलता है। अनेक राज्यों में नियमित रूप से बच्चों को बाल सभाएँ और बाल पंचायतों में उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित करने के कदम उठाए हैं।

प्रश्न 6.
महाराष्ट्र की बाल पंचायतों द्वारा किये गए कार्यों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
महाराष्ट्र में कुछ बाल पंचायतों ने बाल श्रम और बाल विवाह को समाप्त करने पर कार्य किया। इसके सदस्य एक साथ मिलकर अभिभावकों और वयस्कों को यह भी समझाते हैं कि वे अपने बच्चों को पुनः विद्यालय भेजें तथा बालिकाओं को पढ़ने-पढ़ाने की आयु में उनका विवाह न करें।

प्रश्न 7.
पश्चिमी सिक्किम की सांगखू राधू खांडू ग्राम पंचायत को बाल हितैषी पंचायत क्यों घोषित किया गया है?
उत्तर:
इस ग्राम पंचायत ने बच्चों की सुरक्षा के लिए विद्यालयों की परिसर की दीवारें बनवाई हैं; विद्यालयों में रसोईघर बनवाए ताकि बच्चों को विद्यालय में ही सफाई से बना मध्याह्न भोजन (मिड डे मील) मिल सके। उसके इन प्रयासों के कारण इस गाँव की पंचायत को बाल हितैषी ग्राम पंचायत घोषित किया गया है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पूरे देश के विभिन्न राज्यों में पंचायती राज संस्थाओं के गठन एवं कार्यों में विविधताएँ क्यों हैं?
उत्तर:
पूरे देश के विभिन्न राज्यों में पंचायती राज संस्थाओं के गठन और कार्यों में विविधताएँ इसलिए हैं क्योंकि इन संस्थाओं पर राज्यों का अधिकार है, किन्तु उनके लक्ष्य समान हैं। ये संस्थाएँ ग्रामवासियों को अपने गाँवों और स्थानीय क्षेत्रों में प्रबंधन और विकास कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेने में सक्षम बनाती हैं।

प्रश्न 2.
बेयरफुट कॉलेज की शाखा ‘बाल संसद’ के गठन एवं कार्यों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
बेयरफुट कालेज की बाल संसद का गठन तथा कार्य –

  1. 8-14 वर्ष तक की आयु के बच्चों की संसद, चुनाव हेतु मतदाता के पहचान-पत्र और इसके प्रचार-प्रसार सहित सभी औपचारिकताओं का पालन करते हुए अपने संसद के सदस्यों का निर्वाचन करती है।
  2. निर्वाचित प्रतिनिधि ‘मंत्रिमंडल’ का गठन करते हैं, जो विद्यालय प्रबंधन का निरीक्षण तथा सामुदायिक आवश्यकताओं का समर्थन करते हैं।
  3. समाज के विकास के लिए शिक्षा तक पहुँच, स्वच्छता और सामाजिक समानता प्रदान करने के लिए बच्चे सक्रिय रूप से इन समस्याओं को उठाते हैं। बाल संसद के इन कार्यों के कारण उन्हें वर्ष 2001 में वर्ल्ड चिल्ड्रन ऑनरेरी अवार्ड सहित कई पुरस्कार मिले।

प्रश्न 3.
बेयरफुट कॉलेज की ‘बाल संसद’ की उपयोगिता को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:

  1. इस कॉलेज की बाल संसद ने राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों के वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा और लोकतांत्रिक भागीदारी के माध्यम से सशक्त बनाया।
  2. बाल संसद’ की पहल बच्चों में नेतृत्व के गुण और सामाजिक जागरूकता को विकसित करती है, जिससे बच्चे सामाजिक मानदंडों को चुनौती देने में समर्थ होते हैं और परिवर्तन की पैरोकारी कर सकते हैं।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
पंचायत समिति और जिला परिषद के संगठन तथा उसके कार्यों पर एक लेख लिखिए।
उत्तर:
पंचायत समिति और जिला परिषद का संगठन –

  1. पंचायती राज की त्रिस्तरीय व्यवस्था में खंड स्तर पर पंचायत समिति और जिला स्तर पर जिला परिषद होती है।
  2. खंड स्तर पर पंचायत समिति, ग्राम पंचायत और जिला परिषद के बीच की कड़ी है। पंचायती राज व्यवस्था की सर्वोच्च स्तर की संस्था जिला परिषद है।
  3. इन दोनों संस्थाओं के सदस्य स्थानीय लोगों द्वारा चुने जाते हैं। इसके निर्वाचित सदस्य अपने प्रमुख, जिसे प्रधान कहा जाता है, को अपनों में से ही चुनते हैं।
  4. निर्वाचित सदस्यों के अतिरिक्त इनमें गाँवों के सरपंच और राज्य विधानसभा के स्थानीय सदस्य जैसे अन्य सदस्य भी होते हैं।
  5. इनमें अनुसूचित जाति, जनजाति तथा महिलाओं की सीटें आरक्षित की गई हैं।

पंचायत समिति और जिला परिषद की भूमिका-

  1. ये संस्थाएँ (पंचायत समिति और जिला परिषद) सभी ग्राम पंचायतों की विकास योजनाएँ एकत्रित करके उन्हें क्रमश: जिला व राज्य स्तर पर प्रस्तुत करती हैं।
  2. ये विकासात्मक कार्यों और ग्रामीण इलाकों में बारहमासी सड़कों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी सरकारी योजनाओं के लिए धनराशि आवंटन में मदद करती है।

पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति Class 6 Notes

हमारे देश में लगभग 600000 गाँव, 8000 कस्बे तथा 4000 से अधिक नगर हैं। जनसंख्या का दो-तिहाई भाग ग्रामीण क्षेत्रों में रहता है। गाँव के लोग अपनी स्थानीय समस्याओं का समाधान पंचायती राज व्यवस्था के माध्यम से करते हैं।

पंचायती राज व्यवस्था-

  1. भारत के प्रत्येक गाँव के लोगों के पास ‘पंचायत’ नामक स्थानीय शासन व्यवस्था है, जिसे एक ग्रामीण परिषद कह सकते हैं।
  2. पंचायती व्यवस्था को ‘पंचायती राज व्यवस्था’ के नाम से जाना जाता है। यह स्वशासन का एक रूप है।
  3. स्थानीय समस्याओं को हल करने, विकास कार्यों को आगे बढ़ाने और सरकारी योजनाओं के लाभ को जनसाधारण तक पहुँचाने में यह व्यवस्था महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  4. पंचायतीराज व्यवस्था एक त्रिस्तरीय प्रणाली है। इसके तीन स्तर हैं— ग्राम, खंड और जिला। यह व्यवस्था इन तीनों स्तरों पर कार्य करती है।
  5. पंचायती राज व्यवस्था की संस्थाएँ एक साथ मिलकर कृषि, आवास, सड़कों का रख-रखाव, जल संसाधनों का प्रबंधन, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण से लेकर सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े दायित्वों का निर्वहन करती हैं।

ग्राम पंचायत-
(i) ग्रामसभा एवं ग्राम पंचायत के सदस्य ग्राम पंचायत के सदस्य ग्राम सभा द्वारा सीधे चुने जाते हैं, जो कि मतदाता के रूप में नामांकित गाँव के वयस्कों का समूह होता है।
ग्राम सभा में स्त्री-पुरुष अपने क्षेत्र से जुड़े सभी मामलों पर विचार-विमर्श करते हैं और निर्णय लेते हैं।

(ii) सरपंच- प्रत्येक ग्राम पंचायत एक प्रमुख अध्यक्ष ‘सरपंच’ का चयन करती है। गत वर्षों में अधिक से अधिक महिलाएँ सरपंच बनी हैं।

(iii) पंचायत सचिव- ग्राम पंचायत की सहायता के लिए एक पंचायत सचिव होता है, जो बैठकों के आयोजन और अभिलेखों के रख-रखाव जैसे प्रशासनिक कार्य करता है।

(iv) पटवारी (प्रशासनिक अधिकारी) – अधिकांश ग्राम पंचायतों में पटवारी / प्रशासनिक अधिकारी होता है, जो भू-अभिलेखों का रख-रखाव करता

बाल हितैषी पंचायत की पहल-
1. अनेक राज्यों में नियमित रूप से बच्चों की बाल सभाएँ और बाल – पंचायतों में बच्चों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के कदम उठाए गए हैं, जहाँ गाँव के बड़े-बुजुर्ग उनकी समस्याओं के समाधान ढूँढ़ने का प्रयास करते हैं।

2. बाल पंचायतों की प्रमुख पहलें रही हैं—बाल विवाह को समाप्त करना, बाल-श्रम को समाप्त करना, शिक्षा को बढ़ावा देना, बालिकाओं को पढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना; ग्रामीण क्षेत्र के वंचित वर्गों के लिए शिक्षा को बढ़ावा देना, लोकतांत्रिक भागीदारी की प्रक्रियाओं को समझना तथा उनका पालन व प्रचार-प्रसार करना, अस्वच्छता तथा सामाजिक असमानता की समस्याओं को उठाना तथा उनका समाधान खोजना आदि।

पंचायत समिति और जिला परिषद-

  1. खंड स्तर पर पंचायत समिति होती है। यह ग्राम पंचायत और जिला परिषद के बीच की कड़ी है। जिला परिषद जिला स्तर की संस्था है तथा पंचायती राज व्यवस्था की सर्वोच्च संस्था है।
  2. पंचायत समिति का गठन राज्य-दर-राज्य भिन्न होता है। सामान्यतः इसके सदस्य स्थानीय लोगों द्वारा चुने जाते हैं। जिला परिषद के सदस्य भी इसके क्षेत्र के स्थानीय सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं। इनमें क्षेत्र के गाँवों के सरपंच और राज्य विधान सभा के स्थानीय सदस्य जैसे अन्य सदस्य भी हो सकते हैं।
  3. पंचायतीराज की सभी संस्थाओं में अनुसूचित जाति, जनजाति तथा महिलाओं के लिए सीटों के आरक्षण के प्रावधान किए गए हैं।
  4. स्थानीय जनता की भागीदारी मजबूत करने की उनकी भूमिका समान रहती है।

जिला परिषद व पंचायत समिति की भूमिका-

(1) जिला परिषद दोनों सभी ग्राम पंचायतों की विकास योजनाएँ एकत्रित करके उन्हें क्रमशः जिला या राज्य स्तर पर प्रस्तुत करती है।

(2) यह विकासात्मक कार्यों, बारहमासी सड़कों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी सरकारी योजनाओं के लिए धनराशि के आवंटन में मदद करती है।

निष्कर्ष –

  1. पंचायतीराज व्यवस्था एक त्रिस्तरीय ग्राम स्वशासन की व्यवस्था है।
  2. इसमें लोकतंत्र द्वारा जनता द्वारा प्रत्यक्ष भागीदारी अर्थात् ग्रामसभा के रूप में प्रत्यक्ष लोकतंत्र तथा ग्रामं पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के निर्वाचित प्रतिनिधियों के रूप में ‘प्रतिनिधि प्रजातंत्र’ दोनों प्रकार के लोकतंत्र कार्य करते हैं।
  3. ये संस्थाएँ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वशासन का अधिकार देती हैं ताकि वे अपने मामले स्वयं सुलझा सकें और विकासात्मक कार्यों में सहयोग दें।