Class 7 Hindi Malhar Chapter 2 Question Answer तीन बुद्धिमान
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तीन बुद्धिमान Class 7 Question Answer
Class 7 Hindi तीन बुद्धिमान Question Answer
Malhar Class 7 Chapter 2 Question Answer
पाठ से
मेरी समझ से
(क) लोककथा के आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
प्रश्न 1.
लोककथा में पिता ने अपने बेटों से ‘धन संचय करने’ को कहा। उनकी इस बात का क्या अर्थ हो सकता है?
(अ) खेती-बारी करना और धन इकट्ठा करना
(ब) पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि का विकास करना
(स) ऊँट का व्यापार करना
(द) गाँव छोड़कर किसी नगर में जाकर बसना
उत्तर:
(ब) पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि का विकास करना

प्रश्न 2.
तीनों भाइयों ने अपने ज्ञान और बुद्धि का उपयोग करके ऊँट के बारे में बहुत कुछ बता दिया। इससे क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है ?
(अ) बुद्धि का प्रयोग करके ऊँट के बारे में सच – 3 व-झूठ बताया जा सकता है।
(ब) समस्या को सुलझाने के लिए ध्यान से निरीक्षण करना महत्त्वपूर्ण है।
(स) किसी व्यक्ति का ज्ञान, बुद्धि और धन ही सबसे बड़ी ताकत है।
(द) ऊँट के बारे में जानने के लिए दूसरों पर भरोसा करना चाहिए।
उत्तर:
(ब) समस्या को सुलझाने के लिए ध्यान से निरीक्षण करना महत्त्वपूर्ण है।
प्रश्न 3.
राजा ने भाइयों की बुद्धिमत्ता पर विश्वास क्यों किया?
(अ) भाइयों ने अपनी बात को तर्क के साथ समझाया।
(ब) राजा को ऊँट के स्वामी की बातों पर संदेह था।
(स) राजा ने स्वयं ऊँट और पेटी की जाँच कर ली थी।
(द) भाइयों ने राजा को अपनी बात में उलझा लिया था।
उत्तर:
(अ) भाइयों ने अपनी बात को तर्क के साथ समझाया।

प्रश्न 4.
लोककथा के पात्रों और घटनाओं के आधार पर, राजा के निर्णय के पीछे कौन-सा मूल्य छिपा है?
(अ) दोषी को कड़ा से कड़ा दंड देना हर समस्या का सबसे बड़ा समाधान है।
(ब) अच्छी तरह जाँच किए बिना किसी को दोषी नहीं ठहराना चाहिए।
(स) राजा की प्रत्येक बात और निर्णय को सदा सही माना जाना चाहिए।
(द) ऊँट की चोरी के निर्णय के लिए सेवक की बुद्धि का उपयोग करना चाहिए।
उत्तर:
(ब) अच्छी तरह जाँच किए बिना किसी को दोषी नहीं ठहराना चाहिए।
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने भिन्न-भिन्न उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने।
उत्तर:
हमने ऊपर दिये गये उत्तर इसलिए चुने हैं, क्योंकि—
- लोककथा में पिता अपने बेटों को रुपया-पैसा और सोना-चाँदी की जगह दूसरे प्रकार के धन; जैसे-स्थिति को समझने की क्षमता, पैनी दृष्टि, तीव्र बुद्धि आदि को संचित करने की सलाह देते हैं ताकि उनके जीवन में किसी भी प्रकार की कोई कमी न रहे।
- तीनों भाई बड़े ध्यान से रास्ते को देखते हुए चल रहे थे, जिससे उन्हें रास्ते में पड़े निशानों और संकेतों से ऊँट की जानकारी प्राप्त हुई। इससे यह स्पष्ट होता है कि समस्याओं को हल करने के लिए ध्यानपूर्वक अवलोकन और सोच-विचार जरूरी होता है।
- राजा ने पेटी के माध्यम से तीनों भाइयों की परीक्षा खुद ली, जिसमें तर्कों के साथ वे तीनों भाई सफल रहे। उन्होंने जो भी कहा, उसका तर्क भी दिया। इस प्रकार राजा ने पूरी तरह से संतुष्ट होने के बाद कि वे बिना देखे चीजों को समझ सकते हैं, उनकी बुद्धिमत्ता पर विश्वास किया।
- राजा ने पहले तीनों भाइयों को ऊँट चोरी का दोषी माना, लेकिन जल्दबाजी में कोई दंड नहीं दिया। उसने उनकी बुद्धिमत्ता की परीक्षा ली और जब वह स्वयं उनके उत्तरों की सत्यता से आश्वस्त हो गया, तब जाकर उन्हें निर्दोष घोषित किया। इससे यह सीख मिलती है कि किसी भी निर्णय से पहले अच्छी तरह से सत्यता की जाँच करना आवश्यक है।
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए-
(क) “रुपये-पैसे के स्थान पर तुम्हारे पास पैनी दृष्टि होगी और सोने चाँदी के स्थान पर तीव्र बुद्धि होगी। ऐसा धन संचित कर लेने पर तुम्हें कभी किसी प्रकार की कमी न रहेगी और तुम दूसरों की तुलना में उन्नीस नहीं रहोगे।”
उत्तर:
हमें इस पंक्ति का अर्थ यह समझ में आया कि भौतिक धन-संपदा से अधिक मूल्यवान ज्ञान, बुद्धि और अवलोकन शक्ति होती है क्योंकि यदि किसी के पास समझने की गहराई और सही निर्णय लेने की क्षमता है, तो वह जीवन में सफल होकर समाज में सम्मानित हो सकता है।
(ख) “हर वस्तु और स्थिति को पूर्णतः समझने और जानने का प्रयास करो। कुछ भी तुम्हारी दृष्टि से न बच पाए।”
उत्तर:
हमें इस पंक्ति का अर्थ यह समझ में आया कि किसी भी समस्या को हल करने के लिए हमें सतर्क रहकर उसके हर पहलुओं पर ध्यानपूर्वक विचार कर लेना चाहिए क्योंकि गहराई से देखने, सोचने और समझने से हर समस्या का समाधान हो जाता है।
(ग) “हमने अपने परिवेश को पैनी दृष्टि से देखने और बुद्धि से सोचने के प्रयास में बहुत समय लगाया है।”
उत्तर:
हमें इस पंक्ति का अर्थ यह समझ में आया कि किसी भी परिस्थिति को जानने के लिए उस पर पूरी तरह से सोच-विचार कर सूक्ष्म विश्लेषण कर लेना चाहिए। जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।

मिलकर करें मिलान
इस लोककथा में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे स्तंभ- 1 में दिए गए हैं। उनके भाव या अर्थ से मिलते-जुलते वाक्य स्तंभ 2 में दिए गए हैं। स्तंभ-1 के वाक्यों को स्तंभ- 2 के उपयुक्त वाक्यों से सुमेलित कीजिए—
उत्तर:


सोच-विचार के लिए
लोककथा को एक बार फिर ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए—
(क) तीनों भाइयों ने बिना ऊँट को देखे उसके विषय में कैसे बता दिया था?
उत्तर:
तीनों भाइयों की बचपन से कुछ भी अपनी पैनी दृष्टि से न चूकने देने की आदत थी। उन्होंने रास्ते की धूल पर पड़े ऊँट के पैरों के निशान, सड़क के दायीं ओर की घास चरी होने के निशान तथा ऊँट के घुटने टेककर बैठने के चिह्न के पास एक महिला के जूतों तथा छोटे-छोटे पैरों के चिह्न को देखकर बिना ऊँट को देखे उसके विषय में बता दिया था।
(ख) आपके अनुसार इस लोककथा में सबसे अधिक महत्त्व किस बात को दिया गया है-तार्किक सोच, अवलोकन या सत्यवादिता? लोककथा के आधार पर समझाइए।
उत्तर:
हमारे अनुसार इस लोककथा में तार्किक सोच, अवलोकन या सत्यवादिता में से अवलोकन को सबसे अधिक महत्त्व दिया गया है, क्योंकि तीनों भाइयों के पिता की सीख रुपये-पैसे के स्थान पर पैनी दृष्टि होने और सोने-चाँदी के स्थान पर तीव्र बुद्धि होने की थी। पैनी दृष्टि से ही तीव्र बुद्धि का विकास होता है। अपनी इसी पैनी दृष्टि एवं तीव्र बुद्धि की आदत के कारण ही तीनों भाई बिना देखे ऊँट व पेटी के बारे में बता पाये थे।
(ग) लोककथा में राजा ने पहले भाइयों पर संदेह किया लेकिन बाद में उन्हें निर्दोष माना। राजा की सोच क्यों बदल गई?
उत्तर:
लोककथा में राजा ने पहले भाइयों पर सन्देह किया तो उन्होंने बन्द पेटी में कच्चे अनार को अपनी पैनी दृष्टि से पहचान कर यह साबित कर दिया कि उन्होंने बिना देखे ऊँट के विषय में बताया था जिससे राजा को उनकी ईमानदारी व सच्चाई पर विश्वास हो गया और उसने अपना विचार बदलकर उन्हें निर्दोष माना।
(घ) ऊँट के स्वामी ने भाइयों पर तुरंत संदेह क्यों किया? आपके विचार से उसे क्या करना चाहिए था जिससे उसे अपना ऊँट मिल जाता?
उत्तर:
ऊँट के स्वामी ने भाइयों पर तुरंत संदेह इसलिए किया, क्योंकि उन्होंने ऊँट को देखे बिना ही इतनी सटीक जानकारी दे दी थी जिससे उसे लगा कि उन्होंने ही ऊँट चुराया होगा। मेरे विचार से उसे तुरंत क्रोधित होने के बजाय धैर्य से भाइयों की पूरी बात सुननी चाहिए थी और उनसे अपना ऊँट ढूँढ़ने में मदद करने का आग्रह करना चाहिए था, जिससे उसे अपना ऊँट मिल जाता।
(ङ) पिता ने बेटों को दूसरे प्रकार का धन” संचित करने की सलाह क्यों दी? इससे पिता के बारे में क्या- क्या पता चलता है?
उत्तर:
पिता ने बेटों को ‘दूसरे प्रकार का धन’ अर्थात् पैनी दृष्टि व तीव्र बुद्धि संचित करने की सलाह इसलिए दी क्योंकि इससे उनके जीवन में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं रहेगी। इससे पिता के बारे में यह पता चलता है कि वे निर्धन तो थे परन्तु उनके पास पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि थी।
(च) राजा ने भाइयों की परीक्षा लेने के लिए पेटी का उपयोग किया। इस परीक्षा से राजा के व्यक्तित्व और निर्णय शैली के बारे में क्या-क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है ?
उत्तर:
राजा ने भाइयों की परीक्षा लेने के लिए पेटी का उपयोग किया। इससे पता चलता है कि राजा चतुर, न्यायप्रिय और विवेकशील थे। उनकी निर्णय शैली यह दिखाती है कि वे किसी भी बात पर आँखें मूंदकर विश्वास नहीं करते थे, बल्कि सत्य को जानने के लिए स्वयं जाँच-परख करते थे।
(छ) आप इस लोककथा के भाइयों की किस विशेषता को अपनाना चाहेंगे और क्यों?
उत्तर:
हम इस लोककथा के भाइयों की पैनी दृष्टि और तीक्ष्ण बुद्धि की विशेषता को अपनाना चाहेंगे, क्योंकि यह हमें जीवन की हर समस्या को समझने और उसका समाधान खोजने में मदद करेगी, साथ ही हमें आत्मनिर्भर भी बनायेगी।
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-
(क) यदि राजा ने बिना सोचे ही भाइयों को दोषी ठहराया होता तो इस लोककथा का क्या परिणाम होता?
उत्तर:
यदि राजा ने बिना सोचे ही भाइयों को दोषी ठहराया होता, तो इस लोककथा का परिणाम बहुत दुःखद होता। निर्दोष भाइयों को दंड मिलता, न्याय नहीं हो पाता और राजा शायद अपनी प्रजा का विश्वास खो देता। कहानी का नैतिक संदेश भी अधूरा रह जाता।
(ख) यदि भाइयों ने अनार के बारे में सही अनुमान न लगाया होता तो लोककथा का अंत किस प्रकार होता? अपने विचार व्यक्त करें।
उत्तर:
यदि भाइयों ने अनार के बारे में सही अनुमान न लगाया होता तो लोककथा का अंत उन तीनों भाइयों को ऊँट चोरी, पत्नी व बच्चे की हत्या के आरोप में राजा द्वारा सजा दिये जाने से होता।
(ग) लोककथा में यदि तीनों भाई ऊँट को खोजने जाते तो उन्हें कौन-कौनसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता था?
उत्तर:
यदि तीनों भाई ऊँट को खोजने जाते तो उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता था, जैसे—ऊँट का सही रास्ता खोजना कठिन होता तथा उन्हें जंगल, रेगिस्तान या कठिन इलाकों से गुजरना पड़ सकता था। उन्हें जंगली जानवरों या चोर लुटेरों का खतरा हो सकता था। खाने-पीने और रहने की समस्या आती और ऊँट को ढूँढ़ने में बहुत समय एवं मेहनत लगती।
(घ) यदि राजा के स्थान पर आप होते तो भाइयों की परीक्षा लेने के लिए किस प्रकार के सवाल या गतिविधियाँ करते? अपनी कल्पना साझा करें।
उत्तर:
यदि राजा के स्थान पर मैं होता, तो भाइयों की परीक्षा लेने के लिए मैं उन्हें कुछ ऐसी पहेलियाँ देता जिनमें सूक्ष्म अवलोकन और तार्किक सोच की आवश्यकता होती। मैं उनसे इस प्रकार के सवाल पूछता कि “मेरे राज्य में एक ऐसी वस्तु है जो हर जगह मौजूद है, पर दिखाई नहीं देती?” “एक बंद कमरे में कुछ जानवर बंद हैं। बिना देखे बताओ, कमरे में कितने पैर हैं?” या मैं उन्हें किसी जटिल समस्या का व्यावहारिक समाधान निकालने को कहता, जैसे— किसी विवादित भूमि का न्यायपूर्ण बँटवारा आदि।

शब्द से जुड़े शब्द
नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘बुद्धि’ से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए—
उत्तर:


कारक
नीचे दिए गए वाक्य को ध्यान से पढ़िए—
“भाइयों जवाब दिया।”
यह वाक्य कुछ अटपटा लग रहा है न? अब नीचे दिए गए वाक्य को पढ़िए—
“भाइयोंनेजवाब दिया।”
इन दोनों वाक्यों में अंतर समझ में आया? बिल्कुल सही पहचाना आपने! दूसरे वाक्य में ‘ने’ शब्द ‘भाइयों’ और ‘जवाब दिया’ के बीच संबंध को जोड़ रहा है। संज्ञा या सर्वनाम के साथ प्रयुक्त होने वाले शब्दों के ऐसे रूपों को कारक या परसर्ग कहते हैं। कारक शब्दों के कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं—
ने, को, पर, से, के द्वारा, का, में, के लिए, की, के, हे, हो, अरे
नीचे दिए गए वाक्यों में कारक लिखकर इन्हें पूरा कीजिए—
1. “हमने तो तुम्हारे ऊँट ……. देखा तक नहीं”, भाइयों ……. परेशान होते हुए कहा।
उत्तर:
को, ने
2. “मैं अपने रेवड़ों ……. पहाड़ों ……. लिये जा रहा था”, उसने कहा, “और मेरी पत्नी मेरे छोटे-से बेटे ……. साथ एक बड़े-से ऊँट मेरे पीछे-पीछे आ रही थी।”
उत्तर:
को, पर के, पर
3. राजा ……. उसी समय अपने मंत्री ……. बुलाया और उसके कान ……. कुछ फुसफुसाया।
उत्तर:
ने, को, में
4. यह सुनकर राजा ……. पेटी ……. पास लाने ……. आदेश दिया। सेवकों ……. तुरंत आदेश पूरा किया। राजा ……. सेवकों ……. पेटी खोलने ……. लिए कहा।
उत्तर:
ने, को, का, ने, ने, को, के
सूचनापत्र
कल्पना कीजिए कि आप इस लोककथा के वह घुड़सवार हैं जिसका ऊँट खो गया हैं। आप अपने ऊँट को खोजने के लिए एक सूचना कागज पर लिखकर पूरे शहर में जगह-जगह चिपकाना चाहते हैं। अपनी कल्पना और लोककथा में दी गई जानकारी के आधार पर एक सूचनापत्र लिखिए।
उत्तर:
सूचनापत्रसूचना का विषय: ऊँट खोने के संबंध मेंदिनांक 12 अगस्त, 20xxइस नगर के सम्मानित नागरिकों को सूचित किया जाता है। कि मैं पशुओं का एक व्यापारी हूँ। मेरा एक ऊँट रास्ते में कहीं खो गया है। उस ऊँट पर मेरी पत्नी और मेरा बेटा भी सवार हैं। मेरे ऊँट की पहचान इस प्रकार है—• वह केवल एक आँख से देख सकता है क्योंकि वह काना है।• ऊँट पर एक महिला और एक बच्चा सवार हैं।• उसके गले में लाल रंग की डोरी बँधी हुई है।यदि किसी ने ऐसे ऊँट को देखा हो या दिखाई दे, तो नीचे लिखे फोन नं. पर सूचित करें। उसे उचित इनाम दिया जाएगा।निवेदकहरनाम सिंहग्राम – भगवतगढ़ जिला – सवाई माधोपुर (राज.)मो. नं. 94321××××× |
पाठ से आगे
आज की पहेली
आपने पढ़ा कि तीनों बुद्धिमान भाई किस प्रकार अपने अवलोकन से वे बातें भी जान जाते थे जो अन्य लोग नहीं जान पाते। अब आपके सामने कुछ पहेलियाँ प्रस्तुत हैं जहाँ आपको कुछ संकेत दिए जाएँगे। संकेतों के आधार पर आपको उत्तर खोजने हैं—
1. कौन है यह प्राणी?
1. इसकी लंबी पूँछ होती है जो पेड़ों की शाखाओं के चारों ओर लिपटी रहती है।
2. इसका मुख्य आहार कीट और छोटे जीव होते हैं जिन्हें यह चुपके से पकड़ता है।
3. यह प्राणी अपने परिवेश में घुल-मिल जाता है और अपनी रंगत को बदल सकता है।
4. इसके पास तेज आँखें होती हैं जो चारों दिशाओं में देख सकती हैं।
उत्तर:
गिरगिट।
कारण- गिरगिट की पूँछ लचीली होती है, यह रंग बदल सकता है, कीट खाता है और उसकी आँखें अलग-अलग दिशाओं में घूम सकती हैं।
2. रंगीन डिब्बे
एक मेज पर चार रंगीन डिब्बे बराबर-बराबर रखे हैं-
लाल, हरा, नीला और पीला। बताइए पीले डिब्बे के बराबर में कौन-सा डिब्बा है? यदि—
1. लाल डिब्बा नीले डिब्बे के पास है।
2. हरा डिब्बा पीले डिब्बे के पास नहीं है।
3. पीला डिब्बा लाल डिब्बे के पास नहीं है।
4. हरा डिब्बा लाल डिब्बे के पास है।
उत्तर:
पीले डिब्बे के बराबर में नीला डिब्बा है।
कारण- लाल और नीला साथ हैं, हरा और पीला साथ नहीं हैं, लाल और पीला साथ नहीं हैं, हरा और लाल साथ हैं।
अतः रंगों का क्रम होगा—हरा लाल-नीला-पीला।