Class 7 Hindi Malhar Chapter 4 Question Answer पानी रे पानी
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पानी रे पानी Class 7 Question Answer
Class 7 Hindi पानी रे पानी Question Answer
Malhar Class 7 Chapter 4 Question Answer
पाठ से
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों का सही उत्तर कौनसा है? कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
प्रश्न 1.
हमारा भूजल भंडार निम्नलिखित में से किससे समृद्ध होता है?
(अ) नल सूख जाने से।
(ब) पानी बरसने से।
(स) तालाब और झीलों से।
(द) बाढ़ आने से।
उत्तर:
(स) तालाब और झीलों से।
प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन-सी बात जल चक्र से संबंधित है?
(अ) वर्षा जल का संग्रह करना।
(ब) समुद्र से उठी भाप का बादल बनकर बरसना।
(स) नदियों का समुद्र में जाकर मिलना।
(द) बरसात में चारों ओर पानी ही पानी दिखाई देना।
उत्तर:
(ब) समुद्र से उठी भाप का बादल बनकर बरसना।
प्रश्न 3.
“इस बड़ी गलती की सजा अब हम सबको मिल रही है।” यहाँ किस गलती की ओर संकेत किया गया है?
(अ) जल-चक्र की अवधारणा को न समझना।
(ब) आवश्यकता से अधिक पानी का उपयोग करना।
(स) तालाबों को कचरे से पाटकर समाप्त करना।
(द) भूजल भंडारण के विषय में विचार न करना।
उत्तर:
(स) तालाबों को कचरे से पाटकर समाप्त करना।
(ख) अब अपने मित्रों के साथ संवाद कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर:
हमने ऊपर दिए गए उत्तर इसलिए चुने हैं क्योंकि—
- भूजल भंडार वर्षा के पानी को तालाबों, झीलों से धीरे-धीरे रिसकर, छनकर जमीन के नीचे छिपे जल भंडार में मिलने से समृद्ध होता है।
- भाप से बादल बनना और नदियों का समुद्र में मिलना जल चक्र प्रक्रिया का मुख्य हिस्सा है, जो प्रकृति का चक्र है।
- तालाबों को कचरे से पाटकर बन्द करना हमारी सबसे बड़ी गलती है क्योंकि इनके न होने से धरती का उसके अन्दर नहीं समा पाता और बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
मिलकर करें मिलान
पाठ में से कुछ शब्द समूह या संदर्भ चुनकर स्तंभ-1 में दिए गए हैं और उनके अर्थ स्तंभ -2 में दिए गए हैं, अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और रेखा खींचकर सही मिलान कीजिए।
उत्तर:


पंक्तियों पर चर्चा
इस पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और अपने सहपाठियों से चर्चा कीजिए।
(क) “पानी आता भी है तो बेवक्त।”
उत्तर:
यहाँ लेखक का तात्पर्य यह है कि वैसे तो पानी आता ही नहीं है और कभी आ भी जाता है तो ऐसे समय आता है जब लोग या तो काम पर गये होते हैं या आधी रात के बाद जब सब लोग चैन की नींद सो रहे होते हैं।
(ख) “देश के कई हिस्सों में तो अकाल जैसे हालात बन जाते हैं।”
उत्तर:
यहाँ लेखक का तात्पर्य यह है कि पानी की कमी से कई जगहों पर सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। और बीमारियाँ फैलने लगती हैं।
(ग) “कुछ दिनों के लिए सब कुछ थम जाता है।”
उत्तर:
यहाँ लेखक का तात्पर्य यह है कि जब अधिक वर्षा होती है, तो जगह-जगह जलभराव हो जाता है, जिससे यातायात प्रभावित होता है और लोग जहाँ हैं वहीं रह जाते हैं। आस-पास के निचले क्षेत्रों में तो बाढ़ की सी स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिससे सारा जनजीवन प्रभावित होता है।
(घ) “अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।”
उत्तर:
यहाँ लेखक का तात्पर्य यह है कि अकाल और बाढ़ दोनों स्थितियों में पानी महत्त्वपूर्ण तत्त्व है, क्योंकि गर्मी के दिनों में पानी की अत्यधिक कमी अकाल का कारण बनती है और वर्षा के दिनों में अत्यधिक वर्षा होना बाढ़ का कारण बन जाता है। दोनों ही स्थितियों में हमें भयानक कष्टों का सामना करना पड़ता है।
सोच-विचार के लिए
लेख को एक बार पुनः पढ़िए और निम्नलिखित के विषय में पता लगाकर लिखिए।
(क) पाठ में धरती को एक बहुत बड़ी गुल्लक क्यों कहा गया है?
उत्तर:
पाठ में धरती को एक बहुत बड़ी गुल्लक इसलिए कहा गया है, क्योंकि यह वर्षा के पानी को अपने अंदर संचित करती है, जो जरूरत पड़ने पर हमें मिलता है।

(ख) जल चक्र की प्रक्रिया कैसे पूरी होती है?
उत्तर:
जल चक्र की प्रक्रिया इस प्रकार पूरी होती है- समुद्र से भाप उठती है, बादल बनते हैं, फिर वर्षा होती है। और वह पानी नदियों – झीलों के जरिए फिर समुद्र में पहुँचता है।
(ग) यदि सारी नदियाँ, झीलें और तालाब सूख जाएँ तो क्या होगा?
उत्तर:
यदि सारी नदियाँ, झीलें और तालाब सूख जाएँगे तो हमारा भूजल भंडार समाप्त हो जाएगा, जिससे हम सबका जीवन संकट में पड़ जाएगा।
(घ) पाठ में पानी को रुपयों से भी कई गुना मूल्यवान क्यों बताया गया है?
उत्तर:
रुपयों के बिना हम कुछ समय अपना काम चला सकते हैं, परन्तु पानी के बिना हमारा काम बिल्कुल भी नहीं चल सकता। पानी केवल बरसात के दिनों में ही बरसता है, जिसे जमीन के नीचे छिपे जल के भंडार में मिलाकर हमें अपना भूजल भंडार समृद्ध करना होता है ताकि बरसात के मौसम के बाद पूरे साल हम उस पानी को अपने उपयोग में ले सकें। इसलिए पानी रुपयों से भी कई गुना मूल्यवान होता है।
शीर्षक
(क) इस पाठ का शीर्षक ‘पानी रे पानी’ दिया गया है। पाठ का यह नाम क्यों दिया गया होगा? अपने सहपाठियों के साथ चर्चा करके लिखिए। अपने उत्तर का कारण भी लिखिए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।

(ख) आप इस पाठ को क्या नाम देना चाहेंगे? इसका कारण लिखिए।
उत्तर:
हम इस पाठ को यह नाम देना चाहेंगे — ‘बूँद-बूँद की कीमत’।
कारण— यह नाम इस बात को रेखांकित करता है कि आज पानी की हर बूंद कीमती है। पाठ में जिस तरह पानी की कमी और उसके दुष्परिणामों की चर्चा हुई है, वह यह दर्शाता है कि पानी अब पहले जैसी सुलभ वस्तु नहीं रह गई है। यह शीर्षक पाठ के संदेश को सरल और प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत करता है।
शब्दों की बात
बात पर बल देना—
“हमारी यह धरती भी इसी तरह की एक गुल्लक है।”
“हमारी यह धरती इसी तरह की एक गुल्लक है।”
(क) इन दोनों वाक्यों को ध्यान से पढ़िए। दूसरे वाक्य में कौन-सा शब्द हटा दिया गया है? उस शब्द को हटा देने से वाक्य के अर्थ में क्या अंतर आया है, पहचान कर लिखिए ।
उत्तर:
दूसरे वाक्य में ‘भी’ शब्द हटा दिया गया है इससे वाक्य में ‘धरती’ पर ‘गुल्लक’ का भेद रहित आरोप हो रहा है, जबकि पहले वाक्य में ‘भी’ लगा देने पर धरती और गुल्लक में तुलना हो रही है और ‘धरती’ शब्द पर अधिक जोर पड़ रहा है।
(ख) पाठ में ऐसे ही कुछ और शब्द भी आए हैं जो अपनी उपस्थिति से वाक्य में विशेष प्रभाव उत्पन्न करते हैं। पाठ को फिर से पढ़िए और इस तरह के शब्द वाले वाक्यों को चुनकर लिखिए।
उत्तर:
पाठ से प्रभाव पैदा करने वाले शब्दों वाले वाक्य—
1 सोचा तो नहीं होगा शायद, पर इस बारे में पढ़ा जरूर होगा।
2. एक सुन्दर – सा चित्र भी होता है।
3. चित्र में कुछ तीर भी बने रहते हैं।
4. अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
नोट—ऐसे ही वाक्य विद्यार्थी स्वयं ढूँढें।
समानार्थी शब्द
नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों के स्थान पर समान अर्थ देने वाले उपयुक्त शब्द लिखिए। इस कार्य के लिए आप बादल में से शब्द चुन सकते हैं।
(क)सूरजकी किरणें पड़ते ही फूल खिल उठे।
उत्तर:
सूर्य की किरणें पड़ते ही फूल खिल उठे।

(ख) समुद्र का पानीभापबनकर ऊपर जाता है।
उत्तर:
समुद्र का पानी वाष्प बनकर ऊपर जाता है।
(ग) अचानकबादलगरजने लगे।
उत्तर:
अचानक मेघ गरजने लगे।
(घ) जल चक्र मेंहवाकी भी बहुत बड़ी भूमिका है।
उत्तर:
जल चक्र में वायु की भी बहुत बड़ी भूमिका है।
उपसर्ग
“देश के कई हिस्सों में तोअकालजैसे हालात बन जाते हैं।”
उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्द में ‘अ’ ने ‘काल’ शब्द में जुड़कर एक नया अर्थ दिया है। काल का अर्थ है— समय, मृत्यु। जबकि अकाल का अर्थ है— कुसमय, सूखा। कुछ शब्दांश किसी शब्द के आरंभ में जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन कर देते हैं या कोई विशेषता उत्पन्न कर देते हैं और इस प्रकार नए शब्दों का निर्माण करते हैं। इस तरह के शब्दांश ‘ उपसर्ग’ कहलाते हैं।
आइए, कुछ और उपसर्गों की पहचान करते हैं—

अब आप भी उपसर्ग के प्रयोग से नए शब्द बनाकर उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए—
उत्तर:


पाठ से आगे
आपकी बात
(क) धरती की गुल्लक में जलराशि की कमी न हो इसके लिए आप क्या क्या प्रयास कर सकते हैं, अपने सहपाठियों के साथ चर्चा करके लिखिए।
उत्तर:
धरती की गुल्लक में जलराशि की कमी न हो इसके लिए हम निम्न प्रयास कर सकते हैं—
- पानी की बर्बादी रोकें, नल खुला छोड़ना एवं जरूरत से ज्यादा पानी का उपयोग करना बंद करें।
- वर्षा जल संचयन करें, घर की छतों पर वर्षा जल संग्रहण की व्यवस्था करें।
- पेड़ लगाएँ, पेड़ पानी को जमीन में समाहित करने में मदद करते हैं।
- तालाबों और कुओं की सफाई करें, पुराने जलस्रोतों को संवारें और बचाएँ ।
- जागरूकता फैलाएँ, लोगों को पानी बचाने के लिए प्रेरित करें।
- फव्वारे और पाइपलाइन की लीकेज ठीक करवाएँ, पानी की बर्बादी रोकें।
(ख) इस पाठ में एक छोटे से खंड में जल चक्र की प्रक्रिया को प्रस्तुत किया गया है। उस खण्ड की पहचान करें और चल चक्र को चित्र के माध्यम से प्रस्तुत करें।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।
(ग) अपने द्वारा बनाए गए जल चक्र के चित्र का विवरण प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।
सृजन
(क) कल्पना कीजिए कि किसी दिन आपके घर में पानी नहीं आया। आपको विद्यालय जाना है। आपके घर के समीप ही एक सार्वजनिक नल है। आप बाल्टी आदि लेकर वहाँ पहुँचते हैं और ठीक उसी समय आपके पड़ोसी भी पानी लेने पहुँच जाते हैं। आप दोनों ही अपनी-अपनी बाल्टी पहले भरना चाहते हैं। ऐसी परिस्थिति में आपस में किसी प्रकार का विवाद (तू-तू, मैं-मैं) न हो, यह ध्यान में रखते हुए पाँच संदेश वाक्य (स्लोगन) तैयार कीजिए।
उत्तर:
विवाद से बचने के लिए पाँच संदेश वाक्य (स्लोगन)—
- “पानी पर है सबका अधिकार, तू-तू, मैं-मैं न करें बेकार।”
- “पानी लेने आते हैं, प्यार बाँटते जाते हैं।”
- “झगड़ा नहीं पानी चाहिए, मिल-जुलकर घर ले जाइए।”
- “थोड़ा धैर्य, थोड़ी समझदारी, पानी मिलेगा बारी- बारी।”
- “पानी की हर बूँद अनमोल रिश्तों में है मिठास का मोल।”
(ख) “सूरज, समुद्र, बादल, हवा, धरती, फिर बरसात की बूँदें और फिर बहती हुई एक नदी और उसके किनारे बसा तुम्हारा, हमारा घर, गाँव या शहर।”
इस वाक्य को पढ़कर आपके सामने कोई एक चित्र उभर आया होगा, उस चित्र को बनाकर उसमें रंग भरिए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।
पानी रे पानी
आगे हम सबकी दिनचर्या से जुड़ी कुछ गतिविधियों के चित्र हैं। उन चित्रों पर बातचीत कीजिए जो धरती पर पानी के संकट को कम करने में सहायक हैं और उन चित्रों पर भी बात करें जो पानी की गुल्लक को जल्दी ही खाली कर रहे हैं।
उत्तर:
1. पानी के संकट को कम करने वाली गतिविधियाँ—

- बच्चे द्वारा बाल्टी में पानी लेकर मग्गे से नहाना नियंत्रित मात्रा में पानी का उपयोग है।
- पौधों को झारे (वाटर कैन) से पानी देना नल के बहते पानी की तुलना में कम पानी का उपयोग करना है।
- गाँव के लोगों का तालाब खुदाई व सफाई करके जल इकट्ठा करने का बहुत ही अच्छा प्रयास है। इससे वर्षा का जल इकट्ठा होता है और धीरे-धीरे रिसकर व छनकर जमीन के नीचे छिपे जल के भंडार में जाकर मिलता है, जिससे हमारा भूजल भंडार समृद्ध होता है।
- बच्चों द्वारा नये पौधे लगाते हुए झारे (वाटर कैन) से पानी देकर नियंत्रित मात्रा में पानी का उपयोग करना तथा वृक्षारोपण करना जल चक्र को संतुलित करने का प्रयास है।
2. पानी की गुल्लक को जल्दी खाली करने वाली गतिविधियाँ—
- आर.ओ. सिस्टम द्वारा पानी की बहुत बर्बादी होती है। क्योंकि इसमें 1 लीटर शुद्ध पानी प्राप्त करने के लिए 2-3 लीटर पानी व्यर्थ हो जाता है।
- नल खुला छोड़कर ब्रश करना पानी की गंभीर बर्बादी है।
- पाइपलाइन में मोटर लगाकर बाल्टी भरना पानी की गंभीर बर्बादी है।
- सीधे पाइप से स्कूटर धोना पानी की गंभीर बर्बादी है।
- खाली कक्षा में पंखे चलना व बिजली के बल्ब जलना ऊर्जा के दुरुपयोग को दर्शाता है। यह पानी की गुल्लक को जल्दी खाली करने वाला कार्य है क्योंकि बिजली का उत्पादन पानी से ही होता है।(विद्यार्थी कक्षा में स्वयं बातचीत करेंगे।)
बिन पानी सब सून
(क) पाठ में भूजल स्तर के कम होने के कुछ कारण बताए गए हैं, जैसे— तालाबों में कचरा फेंककर भरना आदि। भूजल स्तर कम होने के और क्या-क्या कारण हो सकते हैं? पता लगाइए और कक्षा में प्रस्तुत कीजिए। (इसके लिए आप अपने सहपाठियों, शिक्षकों और घर के सदस्यों की सहायता भी ले सकते हैं।)
उत्तर:
- अति दोहन।
- शहरीकरण।
- वनों की कटाई।
- कृषि में रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक प्रयोग।
- कृषि में सिंचाई के तरीकों की कमी।
- अपर्याप्त जल प्रबंधन आदि।
(ख) भूजल स्तर की कमी से हमें आजकल किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है?
उत्तर:
- पीने और सिंचाई के पानी की कमी।
- कृषि उत्पादन में गिरावट।
- स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ।
- आर्थिक समस्याएँ।
- भूमि धसाव आदि।
(ग) आपके विद्यालय, गाँव या शहर के स्थानीय प्रशासन द्वारा भूजल स्तर बढ़ाने के लिए क्या-क्या प्रयास किए जा रहे हैं, पता लगाकर लिखिए।
उत्तर:
- वृक्षारोपण अभियान एवं कार्यक्रम।
- कृषि में कुशल सिंचाई पद्धतियों का उपयोग।
- जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम।
- जल संचयन परियोजनाएँ।
- जल प्रबंधन योजनाएँ।
यह भी जानें
वर्षा जल संग्रहण
वर्षा के जल को एकत्र करना और उसका भंडारण करके बाद में प्रयोग करना जल की उपलब्धता में वृद्धि करने का एक उपाय है। इस उपाय द्वारा वर्षा का जल एकत्र करने को ‘वर्षा जल संग्रहण’ कहते हैं। वर्षा जल संग्रहण का मूल उद्देश्य यही है कि “जल जहाँ गिरे वहीं एकत्र कीजिए।” वर्षा जल संग्रहण की एक तकनीक इस प्रकार है—
छत के ऊपर वर्षा जल संग्रहण
इस प्रणाली में भवनों की छत पर एकत्रित वर्षा जल को पाइप द्वारा भण्डारण टंकी में पहुँचाया जाता है। इस जल में छत पर उपस्थित मिट्टी के कण मिल जाते हैं। अतः इसका उपयोग करने से पहले इसे स्वच्छ करना आवश्यक होता है।
अपने घर या विद्यालय के आस-पास, मुहल्ले या गाँव में पता लगाइए कि वर्षा जल संग्रहण की कोई विधि अपनाई जा रही है या नहीं? यदि हाँ, तो कौन-सी विधि है? उसके विषय में लिखिए। यदि नहीं, तो अपने शिक्षक या परिजनों की सहायता से इस विषय में समाचारपत्र के संपादक को एक पत्र लिखिए।
उत्तर:
सचिन कुमारमुहाना मंडी, मानसरोवरजयपुर15 जून, 20xxसेवा में,सम्पादक महोदय,राजस्थान पत्रिका,जयपुर।विषय- ‘वर्षा जल संग्रहण के सम्बन्ध में।’महोदय,मैं आपसे इस बात पर चर्चा करना चाहता हूँ कि हमारे समुदाय में वर्षा जल संग्रहण को कैसे बढ़ावा दिया जाए। वर्षा जल संग्रहण पानी की कमी की समस्या का समाधान करने में मदद कर सकता है। हमारे समुदाय में कई लोग पानी की कमी की समस्या से जूझ रहे हैं। वर्षा जल संग्रहण इस समस्या का एक सरल और किफायती समाधान हो सकता है।मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि आप हमारे समुदाय में वर्षा जल संग्रहण को बढ़ावा देने के लिए अपने समाचार पत्र में इस सन्दर्भ में किसी विशेषज्ञ का एक आलेख प्रकाशित करने की कृपा करें क्योंकि हम सभी को मिलकर वर्षा जल संग्रहण के महत्त्व को समझने और इसे अपनाने की आवश्यकता है।धन्यवाद,भवदीयसचिन कुमारई-मेल : Sachinkr11@gmail.comमो. नं. 9897xxxxxx |
आज की पहेली
जल के प्राकृतिक स्रोत हैं—वर्षा, नदी, झील और तालाब दिए गए वर्ग में जल और इन प्राकृतिक स्रोतों के समानार्थी ‘शब्द ढूँढ़िए और लिखिए।
उत्तर:
वर्षा – बारिश, मेह
नदी – प्रवाहिनी, तटिनी, तरंगिणी
झील / तालाब – जलाशय, सर, ताल, सरोवर
जल – नीर, अंबु, वारि, सलिल

