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RBSE Class 7 Hindi (Malhar) Chapter 5 Solutions in Hindi — नहीं होना बीमार

📅 अंतिम अपडेट: 2026-09-09📖 RBSE/NCERT Solutions

Class 7 Hindi Malhar Chapter 5 Question Answer नहीं होना बीमार

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नहीं होना बीमार Class 7 Question Answer

Class 7 Hindi नहीं होना बीमार Question Answer

Malhar Class 7 Chapter 5 Question Answer

पाठ से

मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सही उत्तर कौन-सा है? कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते है।
प्रश्न 1.
बच्चे के विद्यालय न जाने का मुख्य कारण क्या था?
(अ) उसका विद्यालय जाने का मन नहीं था।
(ब) उसका साबूदाने की खीर खाने का मन था।
(स) उसने गृहकार्य नहीं किया था।
(द) उसे बुखार हो गया था।

उत्तर:
(स) उसने गृहकार्य नहीं किया था।

नहीं होना बीमार Diagram 1

प्रश्न 2.
कहानी के अंत में बच्चे ने कहा, “इसके बाद स्कूल से छुट्टी मारने के लिए मैंने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया।” बच्चे ने यह निर्णय लिया क्योंकि-
(अ) घर में रहने के बजाय विद्यालय जाना अधिक रोचक है।
(ब) बीमारी का बहाना बनाने से साबूदाने की खीर नहीं मिलती।
(स) झूठ बोलने से झूठ के खुलने का डर हमेशा बना रहता है।
(द) इस बहाने के कारण उसे दिनभर अकेले और भूखे रहना पड़ा।
उत्तर:
(द) इस बहाने के कारण उसे दिनभर अकेले और भूखे रहना पड़ा।

प्रश्न 3.
“लेटे-लेटे पीठ दुखने लगी।” इस बात से बच्चे के बारे में क्या पता चलता है?

(अ) उसे बिस्तर पर लेटे रहने के कारण ऊब हो गई।
(ब) उसे अपनी बीमारी की कोई चिंता नहीं रह गई थी।
(स) वह बिस्तर पर आराम करने का आनंद ले रहा था।
(द) बीमारी के कारण उसकी पीठ में दर्द हो रहा था।
उत्तर:
(अ) उसे बिस्तर पर लेटे रहने के कारण ऊब हो गई।

नहीं होना बीमार Diagram 2

प्रश्न 4.
“क्या ठाठ हैं बीमारों के भी!” बच्चे के मन में यह बात आई क्योंकि—
(अ) बीमार व्यक्ति को बहुत आराम करने को मिलता है।
(ब) बीमार व्यक्ति को अच्छे खाने का आनंद मिलता है।
(स) बीमार व्यक्ति को विद्यालय नहीं जाना पड़ता है।
(द) बीमार व्यक्ति अस्पताल में शांति से लेटा रहता है।
उत्तर:
(ब) बीमार व्यक्ति को अच्छे खाने का आनंद मिलता है।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर:
हमने ऊपर दिये गये उत्तर इसलिए चुने हैं क्योंकि—

  1. पाठ में बच्चा खुद सोचता है कि उसका स्कूल जाने का मन नहीं है, क्योंकि उसने होमवर्क भी नहीं किया था।
  2. पाठ में बच्चा दिन भर अकेलापन, भूख, ऊब और बोरियत का अनुभव करते हुए बीमारी के बहाने पर पछताता रहा इसलिए उसने निर्णय लिया कि वह भविष्य में कभी स्कूल से छुट्टी लेने का बहाना नहीं बनाएगा।
  3. पाठ में बच्चा सोचता है कि “हे भगवान यह तो अच्छी खासी बोरियत हो गई। पूरा दिन कोई कैसे लेटा रहे?”
  4. पाठ में बच्चा पड़ोसी सुधाकर काका के बीमार होने पर अस्पताल में उनके ठाठ देखकर आकर्षित होता है।

मिलकर करें मिलान

पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थों से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने परिजनों और शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।

उत्तर:

नहीं होना बीमार Diagram 3

नहीं होना बीमार Diagram 4

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए—
(क) “मैंने सोचा बीमार पड़ने के लिए आज का दिन बिल्कुल ठीक रहेगा। चलो बीमार पड़ जाते हैं।”
उत्तर:
यह पंक्ति बच्चे की मासूम और चालाक सोच को दर्शाती है। उसने स्कूल का होमवर्क नहीं किया था और सजा से बचने के लिए बीमारी का झूठा बहाना बनाने की योजना बना ली। इस वाक्य में हास्य भी छिपा है क्योंकि कोई जान-बूझकर बीमार नहीं होता, लेकिन बच्चा सोचता है कि बीमारी एक मजेदार तरीका है स्कूल से छुट्टी पाने का। यह पंक्ति दिखाती है कि कभी-कभी बच्चे कितनी सहजता से झूठ का सहारा ले लेते हैं।

(ख) “देखो! उन्होंने एक बार भी आकर नहीं पूछा कि तू क्या खाएगा? पूछते तो मैं साबूदाने की खीर ही तो माँगता। कोई ताजमहल तो नहीं माँग लेता। लेकिन नहीं! भूखे रहो!! इससे सारे विकार निकल जाएँगे। विकार निकल जाएँ बस। चाहे इस चक्कर में तुम खुद शिकार हो जाओ।”
उत्तर:
यह पंक्ति बच्चे के मन में उपजी पीड़ा, क्रोध और निराशा को प्रकट करती है। उसे उम्मीद थी कि बीमार होने पर उसे साबूदाने की स्वादिष्ट खीर खाने को मिलेगी लेकिन उल्टा उसे भूखे रहने को कहा गया। यहाँ ‘ताजमहल’ शब्द का उपयोग एक व्यंग्यात्मक तुलना के रूप में किया गया है। वह विचार कर रहा है कि वह कोई बड़ी चीज नहीं माँगता, बस साबूदाने की खीर ही तो माँगता। यह पंक्ति झूठ बोलने के नतीजों पर गहरा कटाक्ष करती है और यह भी दिखाती है कि कैसे उसकी कल्पना और वास्तविकता में बड़ा अंतर है।

सोच-विचार के लिए

पाठ को एक बार फिर ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए—

(क) अस्पताल में बच्चे को कौन-कौनसी चीजें अच्छी लगीं और क्यों?
उत्तर:
अस्पताल में बच्चे को एक बड़े से वार्ड में लाइन से लगे एक जैसे पलंग, उन पर बिछी एक जैसी सफेद चादर और लाल कंबल, सफेद दीवारें, ऊँची छत, एकदम चमचमाता फर्श, खिड़कियों पर हरे परदे, उसके पास झूमते हरे-हरे पेड़ और ठाठ से बीमारों का साफ-सुथरे बिस्तर पर लेटे रहना अच्छा लगा क्योंकि वहाँ न धूल थी, न मच्छर-मक्खी थे और न ट्रैफिक का शोरगुल था बल्कि साफ-सुथरे और शांत वातावरण में अच्छी देखभाल थी।

(ख) कहानी के अंत में बच्चे को महसूस हुआ कि उसे स्कूल जाना चाहिए था। क्या आपको लगता है कि उसका निर्णय सही था? क्यों?
उत्तर:
बच्चे ने स्कूल न जाने और साबूदाने की खीर खाने के लालच में झूठ बोलकर बीमारी का बहाना बनाया और पूरा दिन अकेले भूखे व परेशान होकर बिताया। इससे उसे यह अनुभव हुआ कि स्कूल जाना ज्यादा अच्छा था जहाँ वह अपने दोस्तों के साथ मस्ती से खेल सकता था। उसका यह अनुभव उसे जीवन में सच्चाई और जिम्मेदारी का महत्त्व सिखाता है।

(ग) जब बच्चा बीमार पड़ने का बहाना बनाकर बिस्तर पर लेटा रहा तो उसके मन में कौन-कौन से भाव आ रहे थे?
(संकेत- मन में उत्पन्न होने वाले विकार या विचार को भाव कहते हैं, उदाहरण के लिए-क्रोध, दुःख, भय, करुणा, प्रेम आदि।).
उत्तर:
बच्चे के मन में कई भाव एक साथ आ रहे थे, जैसे—किसी के द्वारा उससे खाने के लिए न पूछने पर क्रोध का भाव आया। मुन्नू को आम खाते देखकर उसे ईर्ष्या हो रही थी। सबके चले जाने और उसके अकेला रह जाने पर उसे उदासी और अकेलेपन के भाव का एहसास हुआ जब वह लेटे-लेटे परेशान हो गया तब उसमें ऊब और झुंझलाहट का भाव उत्पन्न हो गया और वह पछताने लगा कि इससे अच्छा तो वह स्कूल चला जाता। इस प्रकार उसमें क्रोध, ईर्ष्या, उदासी, अकेलापन, झुंझलाहट, ऊब और पछतावे के भाव आ रहे थे।

(घ) कहानी में बच्चे ने सोचा था कि “ठाठ से साफ- सुथरे बिस्तर पर लेटे रहो और साबूदाने की खीर खाते रहो।” आपको क्या लगता है, असल में बीमार हो जाने और इस बच्चे की सोच में कौन-कौन सी समानताएँ और अंतर होंगे?
(संकेत – आप अपने अनुभवों के आधार पर इस प्रश्न पर विचार कर सकते हैं कि कहानी वाले बच्चे की कल्पना वास्तविकता से कितनी अलग है।)
उत्तर:
हमें लगता है असल में बीमार हो जाने और बच्चे की सोच में भी ठाठ से साफ-सुथरे बिस्तर पर लेटे-लेटे आराम में रोज के खान-पान से हटकर विशेष प्रकार के खान-पान के मिलने की अपेक्षा तो रहती ही है। इसलिए यह तो समानता हो सकती है, परन्तु वास्तव में बीमार होना सुखद नहीं होता। शरीर दुखता है, भूख नहीं लगती, दवा और काढ़ा पीना पड़ता है। बच्चे की कल्पना केवल आराम और स्वाद पर केंद्रित थी, लेकिन असल में बीमारी में दुःख और असहायता होती है। उसकी कल्पना और हकीकत में काफी अंतर होता है। इसी अंतर ने कहानी वाले बच्चे को अपनी गलती का पछतावा करवा दिया।

(ङ) नानीजी और नानाजी ने बच्चे को बीमारी की दवा दी और उसे आराम करने को कहा। बच्चे को खाना नहीं दिया गया। क्या आपको लगता है कि उन्होंने सही किया? आपको ऐसा क्यों लगता है?
उत्तर:
नानीजी और नानाजी ने बच्चे को बीमारी की दवा दी और उसे आराम करने को कहा। बच्चे को खाना नहीं | दिया गया। हमारे विचार से यह उन्होंने सही किया क्योंकि बुखार आने पर माथा गरम हो जाती है और नब्ज सामान्य से तेज हो जाती है, इस स्थिति में सामान्यतः परहेज करते हुए आराम करने की सलाह दी जाती है, परन्तु यहाँ नानाजी द्वारा बच्चे का माथा छूने और नब्ज देखने पर बुखार आने के कोई लक्षण नहीं दिखाई दिए इसलिए वे समझ गये थे कि बच्चा बुखार का बहाना बना रहा है। अतः उसे सबक सिखाने के लिए उन्होंने ऐसा किया था।

अनुमान और कल्पना से

(क) कहानी के अंत में बच्चा नानाजी और नानीजी को सब कुछ सच सच बताने का निर्णय कर लेता तो कहानी में आगे क्या होता?
(संकेत- उसका दिन कैसे बदल जाता? उसकी सोच और अनुभव कैसे होते?)
उत्तर:
कहानी के अंत में बच्चा नानीजी और नानाजी को सब कुछ सच सच बताने का निर्णय कर लेता और उन्हें सच-सच बता देता तो शायद वे पहले तो थोड़ा नाराज होते, लेकिन फिर समझदारी से उसे समझाते । उसे पूरे दिन भूखा नहीं रहना पड़ता और वह अपनी इच्छानुसार बाहर गली में घूमने जा सकता था। इससे उसकी सोच यह हो जाती कि ईमानदारी से भी अपनी इच्छा पूरी की जा सकती है। साथ ही यह भी अनुभव हो जाता कि स्कूल से छुट्टी मारने के लिए और साबूदाने की खीर खाने के लिए बीमारी का बहाना आवश्यक नहीं है।

(ख) कहानी में बच्चे की नानीजी के स्थान पर आप हैं। आप सारे नाटक को समझ गए हैं लेकिन चाहते हैं कि बच्चा सारी बात आपको स्वयं बता दे। अब आप क्या करेंगे?
(संकेत – इस सवाल में आपको नानीजी की जगह लेकर सोचना है और एक मनोरंजक योजना बनानी है जिससे बच्चा आपको स्वयं सारी बातें बता दे।)
उत्तर:
अगर मैं नानीजी की जगह होती, तो उससे बहला-फुसलाकर पूछती। भेड़िया आया ……… भेड़िया आया वाली कहानी सुनाकर और खेल-खेल में बात करके सत्य जानने की कोशिश करती। इस प्रकार मैं उसे कहानी या खेल के माध्यम से झूठ और सच्चाई पर चर्चा में उलझा देती और धीरे-धीरे उससे पूछती ” क्या तुम्हें सच में बुखार है?” या “सच-सच बताओ, क्या स्कूल का होमवर्क नहीं हुआ?” मैं ऐसा माहौल बनाती कि वह डरने की बजाय खुद से सच्चाई बता देता। शायद मैं उसे इस प्रकार का कोई लालच देती कि “जो बच्चा झूठ नहीं बोलता उसे मेरी बनाई स्पेशल खीर मिलती है।”

(ग) कहानी में बच्चे के स्थान पर आप हैं और घर में अकेले हैं। अब आप ऊबने से बचने के लिए क्या-क्या करेंगे?
उत्तर:
कहानी में बच्चे के स्थान पर मैं हूँ और घर में अकेला हूँ तो मैं ऊबने से बचने के लिए अपना होमवर्क करता, विषयों का रिवीजन करता, कुछ किताबें पढ़ता, ड्रॉइंग करता, अपनी कॉपी-पेंसिल सजाता, कोई छोटी-सी कहानी लिखता, टेलीविजन देखता, मोबाइल पर गेम खेलता या चुपचाप खिड़की से बाहर का दृश्य देखकर कल्पनाएँ करता। इस प्रकार मैं अपने मन को सकारात्मक और रचनात्मक कार्यों में लगाकर स्वयं को ऊबने से बचाता।

(घ) कहानी के अंत में बच्चे को लगा कि उसे स्कूल जाना चाहिए था। कल्पना कीजिए, अगर वह स्कूल जाता तो उसका दिन कैसा होता? अगले दिन जब वह स्कूल गया होगा तो उसने क्या क्या किया होगा?
उत्तर:
कहानी के अंत में बच्चे को लगा कि उसे स्कूल जाना चाहिए। अगर वह स्कूल चला जाता, तो सबसे पहले उसे होमवर्क पूरा न करने पर अपने शिक्षक-शिक्षिकाओं से डाँट पड़ती जिससे उसे बहुत कुछ सीखने को मिलता । वह बोर होने से बच जाता और अपने दोस्तों के साथ खेलता, रिसेस में अमरूद खाता और पूरे दिन का आनंद लेता। अब जब स्कूल न जाने की स्थिति में वह अगले दिन स्कूल गया होगा तब उसने अपने शिक्षकों से क्षमा माँगी होगी और दोस्तों से होमवर्क की जानकारी ली होगी। इस प्रकार आज उसका होमवर्क दुगुना हो गया होगा, जिसके लिए उसे दुगुना परिश्रम करना पड़ा होगा। इस स्थिति में शायद उसने आगे से झूठ न बोलने की ठान ली होगी।

(ङ) कहानी में नानाजी और नानीजी ने बच्चे की बीमारी ठीक करने के लिए उसे दवाई दी और खाने के लिए कुछ नहीं दिया। अगर आप नानीजी या नानाजी की जगह होते तो क्या-क्या करते?
उत्तर:
कहानी में नानाजी और नानीजी ने बच्चे की बीमारी ठीक करने के लिए उसे दवाई दी और खाने के लिए कुछ नहीं दिया। अगर मैं नानाजी और नानीजी की जगह होता, तो मैं उसे तुरन्त किसी डॉक्टर के पास ले जाकर दवा दिलवाता और उसके निर्देशानुसार खाने को देता। डॉक्टर के यहाँ ले जाने पर यह पता चलता कि बच्चा बीमारी का बहाना बना रहा है तो मैं यह समझने की कोशिश करता कि बच्चा झूठ क्यों बोल रहा है और उसके साथ बात करके सच्चाई जानने की कोशिश करता। मैं उसे यह भी समझाता कि झूठ बोलने से न सिर्फ परेशानी होती है, बल्कि विश्वास भी टूटता है।

कहानी की रचना

(क) इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और अपने समूह में मिलकर इस पाठ की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर:
इस पाठ की अन्य विशेषताओं की सूची—
1. चित्रात्मक भाषा का प्रयोग— जैसे अस्पताल का शांत वातावरण।

2. वर्णनात्मक भाषा— पलंग लाइन से लगे हुए थे। सब पर एक जैसी सफेद चादरें और लाल कंबल थे। सफेद दीवारें, ऊँची छत, खिड़कियों पर हरे पर्दे और फर्श एकदम चमकता हुआ एक पलंग पर सुधाकर काका लेटे हुए थे।

3. व्यंग्यात्मक भाषा— क्या ठाठ हैं बीमारों के भी।

4. हास्यात्मक भाषा— जैसे ताजमहल नहीं माँगा, केवल खीर माँगी थी।

5. उपदेशात्मक भाषा— तबीयत ढीली हो तो सबसे अच्छा उपाय है भूखे रहना। इससे सारे विकार निकल जाएँगे।

6. प्रश्नात्मक भाषा— पूरा दिन कोई कैसे लेटा रहे? और शाम को…..। क्या शाम को भी नानाजी बाहर जाने देंगे?

7. संवादात्मक भाषा— तभी नानाजी आये। “क्या हो गया ? क्या हो गया?” “बुखार आ गया।” मैंने कराहते हुए कहा।

8. आत्मविश्लेषणात्मक भाषा— अक्लमंद और बनो बीमार! और आज दिया गया होमवर्क! किससे कॉपी माँगोगे? मैं रुआँसा हो गया।

9. संदेशात्मक भाषा— इससे तो स्कूल चला जाता तो ही ठीक रहता। सजा मिलती तो मिल जाती। इसके बाद स्कूल से छुट्टी मारने के लिए मैंने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया।

(ख) कहानी में से निम्नलिखित के लिए उदाहरण खोजकर लिखिए—
उत्तर:
विशेष बिन्दु – कहानी में से उदाहरण
बच्चे द्वारा पिछली बातों को याद किया जाना — एक दिन मुझे लेकर नानीजी हमारे पड़ोसी सुधाकर काका को देखने गई। कुछ दिन बाद एक दिन मेरा स्कूल जाने का मन नहीं किया। मैंने होमवर्क भी नहीं किया था। स्कूल जाता तो सजा जरूर मिलती। बीमार पड़ने के लिए आज का दिन ठीक है।

हास्य यानी हँसी — क्या ठाठ हैं बीमारों के भी।

मजाक का उपयोग किया जाना — मैंने सोचा …. ठाठ से साफ-सुथरे बिस्तर पर लेटे रहो और साबूदाने की खीर खाते रहो! काश! सुधाकर काका की जगह मैं होता ! मैं बीमार पहूँगा । कैसे चूस रहा है। पूरी गुठली मुँह में ठूसे। जैसे आम कभी देखे न हों। भुक्कड़ कहीं का। पूरा का पूरा हाथ भी सान रहा है।

बच्चे द्वारा सोचने के तरीके में बदलाव आना — इससे तो स्कूल चला जाता तो ही ठीक रहता। सजा मिलती तो मिल जाती। अक्लमंद! और बनो बीमार और आज दिया गया होमवर्क! किससे कॉपी माँगोगे ? मैं रुआँसा हो गया।

कहानी में किसी का किसी बात से अनजान होना — मुन्नू एक बार भी मुझे देखने नहीं आया। आया भी होगा तो दबे पाँव आया होगा और मुझे सोता जान लौट गया होगा। उन्होंने एक बार भी आकर नहीं पूछा कि तू क्या खायेगा? पूछते तो मैं साबूदाना की खीर ही तो माँगता।

बच्चे द्वारा स्वयं से बातें किया जाना — अब नानीजी से जाकर कहूँ कि भूख लग रही है तो वे क्या करेंगी? ज्यादा से ज्यादा यही कि दूध पी ले। या नानाजी से पूछने चली जाएँगी – वो कह रहा है भूख लगी हैं। और फिर नानाजी क्या कहेंगे? वही जो सुबह कह रहे थे- तबीयत ढीली हो तो सबसे अच्छा उपाय है भूखे रहना। इससे सारे विकार निकल जाएँगे।

समस्या और समाधान

कहानी को एक बार पुनः पढ़कर पता लगाइए—

(क) बच्चे के सामने क्या समस्या थी? उसने उस समस्या का क्या समाधान निकाला?
उत्तर:
बच्चे को स्कूल का होमवर्क न किये जाने की समस्या थी। उसे डर था कि स्कूल में उसे सजा मिलेगी। उसने इस समस्या का समाधान बीमारी का बहाना बनाकर निकाला।

(ख) नानीजी – नानाजी के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने उस समस्या का क्या समाधान निकाला?
उत्तर:
नानीजी – नानाजी के सामने यह समस्या थी कि बच्चा स्वयं को बुखार बता रहा था, परन्तु उसके सिर तथा नब्ज से बुखार के कोई लक्षण दिखाई नहीं दे रहे थे। उन्होंने इस समस्या का समाधान बच्चे को दवाई और काढ़ा देकर तथा खाना न देते हुए आराम करने की सलाह देकर निकाला।

शब्द से जुड़े शब्द

नीचे दिए गए स्थानों में ‘बीमार’ से जुड़े शब्द पाठ में से बनाया। चुनकर लिखिए—

उत्तर:

नहीं होना बीमार Diagram 5

नहीं होना बीमार Diagram 6

खोजबीन

कहानी में से वे वाक्य ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि—

(क) कहानी में सर्दी के मौसम की घटनाएँ बताई गई हैं।
उत्तर:

  1. “मैं रजाई से निकला ही नहीं।”
  2. “मैं रजाई में पड़ा-पड़ा घर में चल रही गतिविधियों का अनुमान लगाता रहा।”
  3. नानाजी ने रजाई हटाकर मेरा माथा छुआ।
  4. मैं रजाई फेंककर खड़ा हो गया।

(ख) बच्चे को बहाना बनाने के परिणाम का आभास हो गया।
उत्तर:

  1. क्या मुसीबत है! पड़े रहो! आखिर कब तक कोई पड़ा रह सकता है? इससे तो स्कूल चला जाता तो ही ठीक रहता। सजा मिलती तो मिल जाती। कितना मजा आता जब रिसेस में ठेले पर जाकर नमक मिर्च लगे अमरूद खाते कटर-कटर।
  2. अक्लमंद और बनो बीमार! और आज दिया गया होमवर्क! किससे कॉपी माँगोगे? मैं रूआँसा हो गया।
  3. इसके बाद स्कूल से छुट्टी मारने के लिए मैंने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया।

(ग) बच्चे को खाना-पीना बहुत प्रिय है।
उत्तर:

  1. ठाठ से साफ- -सुथरे बिस्तर पर लेटे रहो और साबूदाने की खीर खाते रहो।
  2. भूख के कारण ठीक से नींद भी नहीं आ रही थी और आँख जरा लगती भी तो खाने ही खाने की चीजें दिखाई देतीं— गरमागरम खस्ता कचौड़ी, मावे की बर्फी, बेसन की चक्की, गोलगप्पे और सबसे ऊपर साबूदाने की खीर।
  3. दाल-चावल, तली हुई हरी मिर्च।
  4. पूछते तो मैं साबूदाने की खीर ही तो माँगता, कोई ताजमहल तो नहीं माँग लेता।

(घ) बच्चे को स्कूल जाना अच्छा लगता है।
उत्तर:

  1. “इससे तो स्कूल चला जाता तो ही ठीक रहता। सजा मिलती तो मिल जाती।”
  2. इसके बाद स्कूल से छुट्टी मारने के लिए मैंने बीमारी का बहाना कभी नहीं

शीर्षक

(क) आपने जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम ‘नहीं होना बीमार’ है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि इस कहानी का यह नाम उपयुक्त है या नहीं। अपने उत्तर के कारण भी बताइए।
उत्तर:
हाँ, यह नाम उपयुक्त है क्योंकि कहानी का मुख्य संदेश यही है कि बीमारी का झूठा बहाना बनाना गलत है। और बीमार होना कोई मजे की बात नहीं है। बच्चा जब खुद अनुभव करता है कि बीमारी में आराम की बजाय परेशानी होती है, तब वह यह निर्णय लेता है कि “बीमार नहीं होना चाहिए।”

(ख) यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए।
उत्तर:
हम इस कहानी को अन्य नाम ‘बहाने का फल देंगे। हमने यह नाम इसलिए सोचा क्योंकि बच्चा स्कूल न जाने और साबूदाने की खीर खाने के लिए बीमारी का बहाना बनाता है, लेकिन उसे खीर तो दूर सामान्य खाना भी नहीं मिलता है। इस प्रकार उसका परिणाम उल्टा होता है।

चेहरों पर मुस्कान, मुँह में पानी

(क) इस कहानी में अनेक रोचक घटनाएँ हैं जिन्हें पढ़कर चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। इस कहानी में किन बातों को पढ़कर आपके चेहरे पर भी मुस्कान आ गई थी? उन्हें रेखांकित कीजिए।
उत्तर:
मुस्कान लाने वाली पंक्तियाँ निम्नलिखित हैं-

  1. “क्या ठाठ हैं बीमारों के भी!”
  2. “पूछते तो मैं साबूदाने की खीर ही तो माँगता, कोई ताजमहल तो नहीं माँग लेता!”
  3. “भुक्कड़ कहीं का!”

(ख) इस कहानी में किन वाक्यों को पढ़कर आपके मुँह में पानी आ गया था? उन्हें रेखांकित कीजिए।
(इन्हें रेखांकित करने के लिए आप किसी अन्य रंग का उपयोग कर सकते हैं।)
उत्तर:
मुँह में पानी लाने वाली पंक्तियाँ निम्नलिखित हैं—

  1. काका को साबूदाने की खीर खिलाई। काका ने बहुत स्वाद लेकर खाई।
  2. “गरमागरम खस्ता कचौड़ी…… मावे की बर्फी…… बेसन की चक्की…. गोलगप्पे।”
  3. “अरहर की दाल में हींग जीरे का बघार, ऊपर से हरा धनिया और थोड़ा सा देशी घी फिर उसमें उन्होंने नींबू निचोड़ा होगा।”
  4. “तली हुई हरी मिर्च को दाल-चावल में मसलकर खा रहे हैं।”
  5. मुन्नू आम चूस रहा था। आम!

लेखक के अनोखे तरीके

मैं बिना आवाज किए दरवाजे तक गया और ऐसे झाँककर देखने लगा जिससे किसी को पता न चले कि मैं बिस्तर से उठ गया हूँ।

इस बात को कहानी में इस प्रकार लिखा गया है—
“दबे पाँव दरवाजे तक गया और चुपके से झाँककर देखा।” इस कहानी में अनेक स्थानों पर वाक्यों को विशेष ढंग से लिखा गया है। साधारण बातों को कुछ अलग तरह से लिखने से लेखन की सुंदरता बढ़ सकती है।
नीचे कुछ वाक्य दिए गए हैं। कहानी में ढूँढ़िए कि इन बातों को कैसे लिखा गया है—

उत्तर:

नहीं होना बीमार Diagram 7

साधारण वाक्य

कहानी में विशेष ढंग से लिखा गया वाक्य

1. ऐसा लगा मानो हमें देखकर सुधाकर काका खुश हो गए।

“हमें देखकर सुधाकर काका जैसे खुश हो गए।”

2. खिड़कियाँ बहुत बड़ी थीं और उनके बाहर हरे पेड़ हवा से हिल रहे थे।

“बड़ी-बड़ी खिड़कियों के पास हरे हरे पेड़ झूम रहे थे।”

3. वहाँ केवल लोगों के फुसफुसाने की आवाजें आ रही थीं।

“सिर्फ लोगों के धीरे-धीरे बातचीत करने की धीमी गुनगुन।”

4. फुसफुसाने की आवाजों के सिवा वहाँ कोई आवाज नहीं थी।

“बाकी एकदम शांति।”

5. बीमार लोगों के बहुत मजे होते हैं।

“क्या ठाठ हैं बीमारों के भी!”

6. मैं झूठमूठ बीमार पड़ जाता हूँ।

“चलो बीमार पड़ जाते हैं।”

विराम चिह्न

“देखें!” नानाजी ने रजाई हटाकर मेरा माथा छुआ। पेट देखा और नब्ज देखने लगे। इस बीच नानीजी भी आ गई। ‘क्या हुआ?”, नानीजी ने पूछा।

नहीं होना बीमार Diagram 8

ऊपर दिए गए वाक्यों को ध्यान से देखिए। इन वाक्यों में आपको कुछ शब्दों से पहले या बाद में कुछ चिह्न दिखाई दे रहे हैं। इन्हें विराम चिह्न कहते हैं।

अपने समूह के साथ मिलकर नीचे दिए गए विराम चिह्न को कहानी में ढूँढ़िए। ध्यानपूर्वक देखकर समझिए कि इनका प्रयोग वाक्यों में कहाँ-कहाँ किया जाता है। आपने जो पता किया, उसे नीचे लिखिए—
उत्तर:

विराम चिह्न

कहाँ प्रयोग किया जाता है

पूर्ण विराम (।)

जब कोई वाक्य समाप्त होता है।

अल्प विराम ( , )

जब एक ही वाक्य में कई बातें (उपवाक्य) या वस्तुएँ-नाम (शब्द) जोड़े जाते हैं।

प्रश्नवाचक चिह्न (?)

जब कोई प्रश्न पूछा जाता है।

विस्मयादिबोधक चिह्न (!)

जब किसी बात को आश्चर्य, खुशी, गुस्सा, संबोधन आदि के साथ व्यक्त किया जाता है।

उद्धरण चिह्न (“”)

किसी के बोले गए वाक्य या संवाद को ‘ज्यों का त्यों’ दिखाने के लिए प्रयुक्त होता है।

पाठ से आगे

बहाने

(क) कहानी में बच्चे ने बीमारी का बहाना बनाया ताकि से बहाना बनाया है? यदि हाँ, तो उसके बारे में बताइए। उसे स्कूल न जाना पड़े। क्या आपने कभी किसी कारण उस समय आपके मन में कौन-कौन से भाव आ जा रहे थे? आप कैसा अनुभव कर रहे थे?
उत्तर:
एक बार मासिक परीक्षा में कम अंक आने के कारण मैंने अपने शिक्षक/शिक्षिका व कक्षा के बच्चों के सामने अपने माता-पिता की डाँट से बचने के लिए पेट में दर्द होने का बहाना बनाया था। उस समय मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं पकड़ा न जाऊँ और थोड़ा पछतावा भी हो रहा था कि मैंने इतनी सी बात के लिए झूठ बोला जबकि वे सब मेरी भलाई के लिए ही मुझे डाँटते हैं। मुझे उनसे सच कहना चाहिए था।

(ख) आमतौर पर बनाए जाने वाले बहानों की एक सूची बनाइए।
उत्तर:
आमतौर पर बनाए जाने वाले बहानों की सूची—

  • तबीयत ठीक नहीं है।
  • पेन खो गया था ।
  • स्कूल बैग भूल गया था।
  • मम्मी ने काम में लगा लिया था।
  • बिजली चली गई थी।
  • घर पर मेहमान आ गए थे।
  • पापा ने काम में लगा लिया था आदि।

(ग) बहाने क्यों बनाने पड़ते हैं? बहाने न बनाने पड़ें, इसके लिए हम क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तर:
बहाने हमें अपनी लापरवाही व आलस्य के कारण बनाने पड़ते हैं, क्योंकि लापरवाही और आलस्य के कारण हम अपने काम समय पर नहीं करते तथा सच बोलने से डरते हैं। हमें बहाने न बनाने पड़े इसके लिए हमें लापरवाही और आलस्य को छोड़कर अपने समय का सही उपयोग करना चाहिए तथा ईमानदारी से अपना काम करना चाहिए। साथ ही अपने किये गये कार्यों की पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

आज की पहेली

कहानी में आपने खाने-पीने की अनेक वस्तुओं के बारे में पढ़ा है। अब हम आपके सामने खाने-पीने की वस्तुओं या व्यंजनों से जुड़ी कुछ पहेलियाँ लाए हैं। इन्हें बूझिए और उत्तर लिखिए—

पहेली

उत्तर

1. रोटी जैसा होता है ये,पर आलू से भरा-भराघी तेल साथी हैं इसके,दही चटनी से हरा-भरा।

पराठा

2. दाल-चावल का मेल है यह तो,भारत भर में तुम इसे पाओ,दक्षिण में ये खूब है बनता,चटनी – सांभर संग-संग खाओ,गोल- तिकोना इसका आकार,गरम-गरम तुम इसे बनाओ,कौन सा व्यंजन होता है यह,बोलो बोलो नाम बताओ।

इडली

3. नाश्ते का यह बड़ा है खास,महाराष्ट्र में इसका वास,मिर्च-मसाले से भरपूर,संग बटाटा भी मशहूर,चटपटी चटनी लगी किसे?बूझो नाम तो खाएँ इसे!

वड़ा पाव

4. बेसन से बने चौकोर या गोल,गुजरात में बड़ा है बोल।खाने में नर्म, पानी भरे,धनिया मिर्च संग सजे।

ढोकला

5. गोल-गोल पानी से भरके,चटनी सोंठ संग इसे खाओउत्तर-दक्षिण पूरब पश्चिम,गली-मुहल्लों में भी पाओ।खट्टी-मीठी तीखी हाय,खाना तो इसे हर कोई चाहे!

गोलगप्पे / पानी पूरी

6. हरे साग संग मुझको पाओ,मक्खन के संग मुझको खाओ।आटा मेरा हल्का पीला,स्वाद मेरा है बड़ा रंगीला।

मक्के की रोटी और सरसों का साग

7. आग में पकती हूँ,सोंधा-सा स्वाद,साथ में खाओ चूरमा,बन जाए फिर बात,गरम दाल से मुझको प्यार,राजस्थान का मैं उपहार।

बाटी

8. गोल-गोल और श्वेत रंग कारस से भरा हुआ हूँ खूब।मीठी दुनिया का महाराजाचाशनी मीठी डूब – डूब।

रसगुल्ला