Class 7 Hindi Malhar Chapter 8 Question Answer बिरजू महाराज से साक्षात्कार
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बिरजू महाराज से साक्षात्कार Class 7 Question Answer
Class 7 Hindi बिरजू महाराज से साक्षात्कार Question Answer
Malhar Class 7 Chapter 8 Question Answer
पाठ से
मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे सही उत्तर कौनसा है? कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
प्रश्न 1.
बिरजू महाराज ने गंडा बाँधने की परंपरा में परिवर्तन क्यों किया होगा?
(अ) वे गुरु के प्रति शिष्य की निष्ठा को परखना चाहते थे।
(ब) वे नृत्य शिक्षण के लिए इस परंपरा को महत्त्वपूर्ण नहीं मानते थे।
(स) वे नृत्य के प्रति शिष्य की लगन व समर्पण को जाँचना चाहते थे।
(द) वे शिष्य की भेंट देने की सामर्थ्य को परखना चाहते थे।
उत्तर:
(स) वे नृत्य के प्रति शिष्य की लगन व समर्पण को जाँचना चाहते थे।

प्रश्न 2.
“जीवन में उतार-चढ़ाव तो होता ही है।” बिरजू महाराज के जीवन में किस तरह के उतार-चढ़ाव आए?
(अ) पिता के देहांत के बाद आर्थिक अभावों का सामना करना पड़ा।
(ब) कोई भी संस्था नृत्य प्रस्तुतियों के लिए आमंत्रित नहीं करती थी।
(स) किसी समय विशेष में घर में सुख-समृद्धि थी।
(द) नृत्य के औपचारिक प्रशिक्षण के अवसर बहुत ही सीमित हो गए थे।
उत्तर:
(अ) पिता के देहांत के बाद आर्थिक अभावों का सामना करना पड़ा।
प्रश्न 3.
बिरजू महाराज के अनुसार बच्चों को लय के साथ खेलने की अनुशंसा क्यों की जानी चाहिए?
(अ) संगीत, नृत्य, नाटक और अन्य कलाएँ बच्चों में मानवीय मूल्यों का विकास नहीं करती हैं।
(ब) कला संबंधी विषयों से जुड़ाव बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है।
(स) कला भी एक खेल है, जिसमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है।
(द) वर्तमान समय में कला एक सफल माध्यम नहीं है।
उत्तर:
(ब) कला संबंधी विषयों से जुड़ाव बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है।
(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर:
हमने ऊपर दिये गये उत्तर इसलिए चुने क्योंकि—
- बिरजू महाराज कई वर्षों तक नृत्य सिखाने के बाद यह देखकर गंडा बाँधते थे कि शिष्य में सच्ची लगन है या नहीं।
- एक समय बिरजू महाराज सम्पन्न थे, छोटे नवाब कहलाते थे, परन्तु पिताजी की मृत्यु के बाद आर्थिक परेशानियाँ बढ़ने लगीं।
- उन्होंने कला को एक ऐसा खेल बताया है जिसमें सीखने को बहुत कुछ मिलता है और खेल की दुनिया में संतुलन, समय का अंदाजा व सदुपयोग बच्चे के बौद्धिक विकास के लिए महत्त्वपूर्ण है।
मिलकर करें मिलान
पाठ में से चुनकर कुछ शब्द एवं शब्द समूह नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही संदर्भों या अवधारणाओं से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।


शीर्षक
इस पाठ का शीर्षक ‘बिरजू महाराज से साक्षात्कार’ है। यदि आप इस साक्षात्कार को कोई अन्य नाम देना चाहते हैं, तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों चुना? लिखिए।
उत्तर:
मैं इस साक्षात्कार का अन्य नाम ‘बिरजू महाराज की कहानी उनकी ही जुबानी’ देना चाहूँगा/चाहूँगी। मैंने यह नाम इसलिए चुना है, क्योंकि इस पाठ में बिरजू महाराज ने अपने जीवन के उतार-चढ़ाव का वर्णन अपने ही मुँह से किया है।
पंक्तियों पर चर्चा
साक्षात्कार में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन्हें ध्यान से पढ़ें और इन पर विचार करें। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार लिखिए। “तुम नौकरी में बँट जाओगे। तुम्हारे अंदर का नर्तक पूरी तरह पनप नहीं पाएगा।”
उत्तर:
इस वाक्य का हमें यह अर्थ समझ में आया कि नौकरी करने से उनका ध्यान नृत्य से हट जाएगा और वे कथक में पूर्ण रूप से पारंगत नहीं हो पाएँगे क्योंकि कला एक साधना है और उसके लिए एकाग्र मन और पूर्ण समर्पण होना चाहिए, जो नौकरी करने पर संभव ही नहीं है।
• “लय हम नर्तकों के लिए देवता है।”
उत्तर:
लय नर्तकों के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण और देवताओं जैसी पूजनीय होती है, क्योंकि बिना लय के संगीत नहीं होगा और संगीत नहीं होगा तो नृत्य हो ही नहीं पायेगा।
• “नृत्य में शरीर, ध्यान और तपस्या का साधन होता है।”
उत्तर:
नृत्य केवल शारीरिक गतिविधि नहीं है बल्कि ध्यान और तपस्या से ही भाव-भंगिमाएँ उभरकर आती हैं और वे नृत्य की मुद्राओं के माध्यम से प्रकट होती हैं।
• “कथक में गर्दन को हल्के से हिलाया जाता है, चिराग की लौ के समान।”
उत्तर:
कथक में गर्दन को हल्की और कोमल गति से उसी तरह हिलाया जाता है जिस तरह से दीपक की लौ हिलती है, क्योंकि कथक में कोमलता और ओज दोनों होते हैं।
सोच-विचार के लिए
प्रश्न 1.
साक्षात्कार को एक बार पुनः पढ़िए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
(क) बिरजू महाराज नृत्य का औपचारिक प्रशिक्षण आरंभ होने से पहले ही कथक कैसे सीख गए थे?
उत्तर:
बिरजू महाराज औपचारिक प्रशिक्षण आरम्भ होने से पहले ही अपने घर के माहौल से कथक सीख गये थे और नवाब के दरबार में नाचने लगे थे क्योंकि वे अपने पिता अच्छन महाराज, चाचा शंभू महाराज और लच्छू महाराज को बचपन से कथक करते देखते आए थे।
(ख) नृत्य सीखने के लिए संगीत की समझ होना क्यों अनिवार्य है?
उत्तर:
नृत्य सीखने के लिए संगीत की समझ होना अनिवार्य है क्योंकि संगीत में स्वर और ताल दोनों होते हैं। नृत्य सीखने वाले में स्वर और ताल की समझ हो तो वह गलत लय को पहचानकर अपने नृत्य को बेहतर बना सकता है। क्योंकि लय नृत्य को सुंदरता और संतुलन देती है।
(ग) नृत्य के अतिरिक्त बिरजू महाराज को और किन-किन कार्यों में रुचि थी?
उत्तर:
नृत्य के अतिरिक्त बिरजू महाराज को मशीनों, यंत्रों और चित्रकला के कार्यों में रुचि थी। वे अपने ब्रीफकेस में हमेशा पेचकस और अन्य छोटे औजार रखते थे जिनसे कभी पंखा, कभी फ्रिज तो कभी मशीनें ठीक करते थे। इसके अलावा बेटी-दामाद से प्रेरित होकर अकसर रात को बारह बजे चित्र बनाने बैठते थे। इस प्रकार उन्होंने पिछले दो साल में लगभग सत्तर चित्र बना लिए थे।
(घ) बिरजू महाराज ने बच्चों की शिक्षा और रुचियों के बारे में अभिभावकों से क्या कहा है?
उत्तर:
बिरजू महाराज ने बच्चों की शिक्षा और रुचियों के बारे में अभिभावकों से यह कहा है कि अगर बच्चे को संगीत या नृत्य में रुचि है, तो उसे लय के साथ खेलने दें। कला एक खेल की तरह है, जो अनुशासन, संतुलन और बौद्धिक विकास सिखाती है। इस प्रकार उन्होंने बच्चों को संगीत सीखने की सलाह दी है, क्योंकि यह मन की शांति के लिए जरूरी है।
प्रश्न 2.
पाठ में से उन प्रसंगों की पहचानकर उन पर चर्चा करें, जिनसे पता चलता है कि—
(क) बिरजू महाराज बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे।
उत्तर:
पाठ में आये इन प्रसंगों से पता चलता है कि बिरजू महाराज बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे—
- चाचा लोग और बाबूजी की नाचते समय खड़े होने की भाव-भंगिमाओं को कथक में शामिल करना।
- अलग-अलग भाषाओं, आधुनिक कवियों की रचनाओं पर कथक रचना तैयार करना। वे तबला, हारमोनियम बजाते थे, गाना भी गाते थे, नृत्य भी करते थे और पेंटिंग बनाने का भी शौक था।
- ब्रीफकेस में हरदम पेचकस और दूसरे छोटे-मोटे औजार रखना और अपना पंखा, फ्रिज और मशीनों को ठीक करना। अतः स्पष्ट है कि बिरजू महाराज केवल नर्तक ही नहीं थे, बल्कि संगीत, चित्रकला और तकनीकी कार्यों में भी निपुण थे।
(ख) बिरजू महाराज को नृत्य की ऊँचाइयों तक पहुँचाने में उनकी माँ का बहुत योगदान रहा।
उत्तर:
बिरजू महाराज को नृत्य की ऊँचाइयों तक पहुँचाने में उनकी माँ का बहुत योगदान रहा क्योंकि पिता के देहांत हो जाने के बाद जब आर्थिक परेशानियाँ बढ़ गयीं तब उनकी माँ उनकी सबसे बड़ी सहयोगी थीं। वे कभी कर्ज लेकर तो कभी पुरानी जरी की साड़ियाँ जलाकर उनके सोने-चाँदी के तार बेचकर परिवार का गुजारा करती थीं और खाने को भले चना ही मिले या कुछ भी न मिले पर अभ्यास जरूर करने की प्रेरणा देती थीं। माँ की इसी प्रेरणा और त्याग ने बिरजू महाराज को कठिन समय में भी कथक की साधना करने की शक्ति दी थी जिसका परिणाम सबके सामने है।

(ग) बिरजू महाराज महिलाओं के लिए समानता के पक्षधर थे।
उत्तर:
बिरजू महाराज महिलाओं के लिए समानता के पक्षधर सु थे। उनके परिवार में उनकी बहनों को कथक नहीं सिखाया गया था, परन्तु उन्होंने अपनी बेटियों को खूब कथक सिखाया इक क्योंकि उनका मानना था कि लड़कियों के पास शिक्षा या कोई-न-कोई हुनर अवश्य होना चाहिए जिससे वे आत्मनिर्भर हो सकें।
शब्दों की बात
(क) पाठ में आए हुए कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं, इन्हें ध्यान से पढ़िए—

आपने इन शब्दों पर ध्यान दिया होगा कि मूल शब्द के आगे या पीछे कोई शब्दांश जोड़कर नया शब्द बना है । इससे शब्द के अर्थ में परिवर्तन आ गया है। शब्द के आगे जुड़ने वाले शब्दांश उपसर्ग कहलाते हैं, जैसे कि—
अदृश्य – अ + दृश्य
आवरण – आ + वरण
प्रशिक्षण – प्र + शिक्षण

यहाँ पर ‘अ’, ‘आ’ और ‘प्र’ उपसर्ग हैं।
शब्द के पीछे जुड़ने वाले शब्दांश प्रत्यय कहलाते हैं और मूल शब्द के अर्थ में नवीनता, परिवर्तन या विशेष प्रभाव उत्पन्न करते हैं, जैसे कि—
सीमित – सीमा + इत
सुंदरता – सुंदर + ता
भारतीय – भारत + ईय
सामूहिक – समूह + इक

यहाँ पर ‘इत’, ‘ता’, ‘ईय’ और ‘इक’ प्रत्यय हैं।
उत्तर:
विद्यार्थी ध्यान से पढ़ें।
(ख) नीचे दो तबले हैं, एक में कुछ शब्दांश (उपसर्ग व प्रत्यय) हैं, दूसरे तबले में मूल शब्द हैं। इनकी सहायता से नए शब्द बनाइए—
उत्तर:


(ग) इस पाठ में से उपसर्ग व प्रत्यय की सहायता से बने कुछ और शब्द छाँटकर उनसे वाक्य बनाइए।
उत्तर:
(1) उपसर्ग युक्त शब्द तथा उनके वाक्य प्रयोग—


(2) प्रत्यय युक्त शब्द और उनके वाक्य प्रयोग—

(3) उपसर्ग और प्रत्यय युक्त शब्द—
शब्द उपसर्ग + मूल शब्द + प्रत्यय
सहयोगी सह + योग + ई
औपचारिक उप + चार + इक
प्रशिक्षण प्र + शिक्ष + अन
अनौपचारिक अन + उप + चार + इक
प्रचलित प्र + चल् + इत
निमंत्रण नि + मंत्र + अन
संतुष्टि सम् + तुष्ट + इ
शब्दों का प्रभाव
पाठ में आए नीचे दिए गए वाक्य पढ़िए—
1. “कुछ कथिक डर गए किंतु उन कथिकों की कला मेंइतनादम था कि डाकू सब कुछ भूलकर उन कथिकों के कथक में मग्न हो गए।” इस वाक्य में रेखांकित शब्द ‘इतना’ हटाकर वाक्य पढ़िए और पहचानिए कि क्या परिवर्तन आया है?
पाठ में आए हुए वाक्यों में से ऐसे ही कुछ और शब्द ढूँढ़कर उन्हें रेखांकित कीजिए, जिनके प्रयोग से वाक्य में विशेष प्रभाव उत्पन्न होता है।
उत्तर:
“कुछ कथिक डर गए किंतु उन कथिकों की कला में दम था कि डाकू सब कुछ भूलकर उन कथिकों के कथक में मग्न हो गए।”

इस वाक्य में से ‘इतना’ शब्द हटाने पर वाक्य का प्रभाव बदलकर कुछ हल्का हो गया है क्योंकि ‘इतना’ शब्द दम की मात्रा पर जोर दे रहा है।
वाक्य- “लय एकतरह काआवरण है, जो नृत्य को सुंदरता प्रदान करती है।”
यहाँ वाक्य में ‘तरह का’ शब्द लय और आवरण में अप्रत्यक्ष सम्बन्ध बताते हुए वाक्य में विशेष प्रभाव प्रस्तुत कर रहा है। इसे हटा देने पर लय और आवरण में सीधा सम्बन्ध स्थापित हो जाने से वाक्य का प्रभाव बदल जायेगा।
वाक्य – “बस डर के मारेतुरंतसब कुछ उतार फेंका और छिप गया।”
यहाँ वाक्य में ‘तुरंत’ शब्द सब कुछ उतार फेंका का समय बता रहा है जिससे वाक्य में विशेष प्रभाव है। इसे हटा देने पर वाक्य का प्रभाव कम हो जाता है क्योंकि यहाँ सब कुछ उतार फेंकने का समय स्पष्ट नहीं हो रहा है।
[नोट-इ – इस तरह से विद्यार्थी और भी वाक्य छाँटकर स्वयं लिख सकते हैं।]
पाठ से आगे
कला का संसार
(क) बिरजू महाराज – “कथक की पुरानी परंपरा को तो कायम रखा है। हाँ, उसके प्रस्तुतीकरण में बदलाव किए हैं।” इस कथन को ध्यान में रखते हुए लिखिए कि कथक की प्रस्तुतियों में किस प्रकार के परिवर्तन आए हैं?
उत्तर:
कथक की प्रस्तुतियों में आए परिवर्तन इस प्रकार हैं—
• मंचीय रूप में विकास— पहले कथक दरबारों और मंदिरों में प्रस्तुत किया जाता था, लेकिन अब यह मंच पर नाट्य रूप में प्रस्तुत किया जाने लगा है।
• कथावाचन का समावेश— बिरजू महाराज ने कथक में भाव और अभिनय के साथ कथावाचन जोड़ा, जिससे नृत्य की प्रस्तुति और अधिक प्रभावशाली और संवादपूर्ण बन गई।
• नई विषयवस्तु का चयन— परंपरागत धार्मिक कथाओं के साथ-साथ सामाजिक, ऐतिहासिक और समकालीन विषयों को भी कथक में शामिल किया गया।
• लाइटिंग और संगीत में प्रयोग— मंच पर रोशनी, बैकग्राउंड संगीत और तकनीकी प्रभावों का उपयोग कर कथक को और आकर्षक बनाया गया।
• दर्शकों से संवाद— बिरजू महाराज ने कथक को केवल देखने की कला न बनाकर दर्शकों से जुड़ने की कला बना दिया। वे दर्शकों को समझाते, मुस्कुराते और भावों जोड़ते थे।
(ख) लोकनृत्य और शास्त्रीय नृत्य में क्या अंतर है? लिखिए।
(इस प्रश्न के उत्तर के लिए आप अपने सहपाठियों, अभिभावकों, शिक्षकों, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।)
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।
(ग) “बैरगिया नाला जुलुम जोर,
नौ कथिक नचावें तीन चोर।
जब तबला बोले धीन- धीन,
तब एक-एक पर तीन-तीन।”
इस पाठ में हरिया गाँव में गाए जाने वाले उपर्युक्त पद का उल्लेख है। आप अपने क्षेत्र में गाए जाने वाले किसी लोकगीत को कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।

साक्षात्कार की रचना
प्रस्तुत पाठ की विधा ‘साक्षात्कार’ है। सामान्यत: इसे बातचीत या भेंटवार्ता का पर्याय मान लिया जाता है, लेकिन यह भेंटवार्ता से इस संदर्भ में भिन्न है कि इसका एक निश्चित उद्देश्य और ढाँचा होता है। यह साक्षात्कार किसी नौकरी या पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के लिए होने वाले साक्षात्कार से बिल्कुल भिन्न है। प्रस्तुत साक्षात्कार एक प्रकार से व्यक्तिपरक साक्षात्कार है। इसका उद्देश्य साक्षात्कारदाता के निजी जीवन, उनके कामकाज, उपलब्धियों, रुचि अरुचि, विचारों आदि को पाठकों के सामने लाना है। किसी भी प्रकार के साक्षात्कार के लिए पर्याप्त तैयारी, संवेदनशीलता और धैर्य की आवश्यकता होती है। साक्षात्कार की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि साक्षात्कारदाता के संदर्भ में कितना शोध किया गया है और प्रश्न किस प्रकार के बनाए गए हैं।
प्रस्तुत ‘साक्षात्कार’ के आधार पर बताइए—
(क) साक्षात्कार से पहले क्या-क्या तैयारियाँ की गई होंगी?
उत्तर:
साक्षात्कार से पहले निम्नलिखित तैयारियाँ की गई होंगी—

- बिरजू महाराज के जीवन, कथक करियर और उपलब्धियों पर शोध किया गया होगा।
- उनके कथक घराने और योगदान के बारे में जानकारी एकत्र की गई होगी।
- बच्चों के लिए सरल और प्रासंगिक प्रश्न तैयार किए गए होंगे।
- साक्षात्कार का समय और स्थान निश्चित किया गया होगा।
(ख) आप इस साक्षात्कार में और क्या-क्या प्रश्न जोड़ना चाहेंगे?
उत्तर:
हम इस साक्षात्कार में निम्नलिखित प्रश्न जोड़ना चाहेंगे—
- अगर आपके घर का माहौल कथक का न होता तब आप क्या करते हैं?
- आप आज की नई पीढ़ी को कथक सीखने के लिए कैसे प्रेरित करते हैं?
- विदेशों में कथक की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए आपने क्या प्रयास किए?
- कथक को फिल्मी नृत्य के प्रभाव से बचाने के लिए आपने क्या प्रयास हैं?
- कथक के भविष्य को आप कैसे देखते हैं? आदि।
(ग) यह साक्षात्कार एक सुप्रसिद्ध कलाकार का है। यदि आपको किसी सब्जी विक्रेता, रिक्शा चालक, घरेलू सहायक या सहायिका का साक्षात्कार लेना हो तो आपके. प्रश्न किस प्रकार के होंगे?
उत्तर:
यदि मुझे सब्जी विक्रेता, रिक्शा चालक या घरेलू सहायक का साक्षात्कार लेना हो, तो मेरे प्रश्न निम्न प्रकार के हो सकते हैं—
- आपने यह काम कब शुरू किया?
- इस काम के शुरू करने का क्या कारण था?
- आप किसे अपना आदर्श मानते हैं?
- आपके काम में सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
- दिनभर के काम करने के बाद आप अपने परिवार के साथ समय कैसे निकाल पाते हैं?
- आपके परिवार में कौन-कौन हैं और वे क्या काम करते हैं?
- आपके सपने और भविष्य की योजनाएँ क्या हैं?
- आप इस साक्षात्कार के माध्यम से लोगों को क्या संदेश देना चाहते हैं? आदि।
सृजन
आपके विद्यालय में कथक नृत्य का आयोजन होने जा रहा है।
(क) आप दर्शकों को कथक नृत्यकला के बारे में क्या-क्या बताएँगे? लिखिए।
उत्तर:
हम दर्शकों को कथक नृत्य कला के बारे में बताएँगे कि यह भारत का एक प्रमुख शास्त्रीय नृत्य है जिसकी उत्पत्ति उत्तर भारत में हुई। ‘कथक’ शब्द का अर्थ है— कहानी कहने वाला’। कथक की विशेषता इसकी सुंदर मुद्राएँ, भावपूर्ण अभिनय (प्रदर्शन), घुंघरुओं की लयबद्ध झंकार तथा ताल की सटीकता में निहित होती है। इसमें कलाकार तालबद्ध नृत्यों तेज पैर की थापों और आँखों के भावों से कथा को प्रस्तुत करता है। प्रसिद्ध कथक नर्तक बिरजू जी ने इस नृत्य को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।
(ख) इस कार्यक्रम की सूचना देने के लिए एक विज्ञापन तैयार कीजिए।
उत्तर:
सूचना / विज्ञापनदिनांक : 10 मई, xxविषय: विद्यालय में कथक नृत्य कार्यक्रमसमस्त विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं शिक्षक- शिक्षिकाओं को सहर्ष सूचित किया जाता है कि हमारे विद्यालय में एक विशेष कथक नृत्य कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में विद्यालय के प्रतिभाशाली छात्र-छात्राएँ अपनी नृत्य प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।तिथि : 15 मई, 20xxसमय प्रातः 10:30 बजेस्थान : विद्यालय सभागारविशेष आकर्षण : कथक सम्राट बिरजू महाराज की शिष्या जयश्री आचार्य द्वारा कार्यक्रम का उद्घाटन। सभी से अनुरोध है कि समय पर उपस्थित होकर कलाकारों का उत्साहवर्धन करें।प्रधानाचार्यराजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जयपुरचौगान गेट, जयपुर |
(ग) यदि इस नृत्य कार्यक्रम में कोई दृष्टिबाधित दर्शक है और वह नृत्य का आनंद लेना चाहे तो इसके लिए विद्यालय की ओर से क्या व्यवस्था की जानी चाहिए?
उत्तर:
यदि कार्यक्रम में कोई दृष्टिबाधित दर्शक है और वह नृत्य का आनन्द लेना चाहे, तो इसके लिए विद्यालय की ओर से एक मूकबधिर विद्यालय के शिक्षक या अपने विद्यालय के शिक्षक या टिप्पणीकार को नियुक्त किया जाना चाहिए जो उन्हें कार्यक्रम के दौरान मौखिक रूप में नृत्य की प्रत्येक गतिविधि, भाव-भंगिमा, वेशभूषा, मंच सजावट और कथा की जानकारी दें। इस तरह की जानकारी देने के लिए हैडफोन की व्यवस्था करना उचित रहेगा जिससे अन्य दर्शकों को असुविधा न हो और वह दर्शक कथक के संगीत, ताल और घुंघरूओं की आवाज से नृत्य के भावों को अनुभव कर सके।
आज की पहेली
“अगर नर्तक को सुर-ताल की समझ है तो वह जान पाएगा कि यह लहरा ठीक नहीं है, इसके माध्यम से नृत्य अंगों में प्रवेश नहीं करेगा।” संगीत में लय को प्रदर्शित करने के लिए ताल का सहारा लिया जाता है। किसी भी गीत की पंक्तियों में लगने वाले समय को मात्राओं द्वारा ठीक उसी प्रकार मापा जाता है, जैसे दैनिक जीवन में व्यतीत हो रहे समय को हम सेकंड के द्वारा मापते हैं। ताल कई मात्रा समूहों का संयुक्त रूप होता है। संगीत के समय को मापने की सबसे छोटी इकाई ‘मात्रा’ है और ताल कई मात्राओं का संयुक्त रूप होता है। जिस तरह घंटे में मिनट और मिनट में सेकंड होते हैं, उसी तरह ताल में मात्रा होती है। आज हम आपके लिए ताल से जुड़ी एक अनोखी पहेली लाए हैं।
एक विद्यार्थी ने अपनी डायरी में अपने विद्यालय के किसी एक दिन का उल्लेख किया है। उस उल्लेख में संगीत की कुछ तालों के नाम आए हैं। आप उन तालों के नाम ढूँढ़िए—
उत्तर:
डायरी के उल्लेख में रूपक, लक्ष्मी, तिलवाड़ा, दादरा, झूमरा, दीपचंदी और कहरवा तालों के नाम आए हैं।

अब नीचे दी गई शब्द पहेली में से संगीत की उन तालों के नाम ढूँढ़कर लिखिए—
उत्तर:
शब्द पहेली में संगीत के उन तालों के नाम हैं-
1. ऊपर से नीचे — रूपक, लक्ष्मी, दादरा तथा तिलवाड़ा
2. दायें से बायें – कहरवा, झूमरा तथा दीपचंदी।
