Class 7 SST Chapter 10 Question Answer in Hindi भारत का संविधान एक परिचय
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Class 7 Social Science Chapter 10 Question Answer in Hindi
भारत का संविधान एक परिचय कक्षा 7 प्रश्न उत्तर
Class 7 Samajik Vigyan Chapter 10 Question Answer भारत का संविधान एक परिचय
महत्त्वपूर्ण प्रश्न (पृष्ठ संख्या 209)
प्रश्न 1.
संविधान क्या है और इसकी आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर:
संविधान–संविधान वह प्रलेख है, जो किसी देश के मूल सिद्धान्तों और कानूनों को स्पष्ट रूप से निर्धारित करता है।
संविधान की आवश्यकता संविधान देश के लिए एक नियम पुस्तिका की तरह होता है जिसमें दिए गए मूल नियम यह निर्धारित करते हैं कि–
- देश में किस प्रकार की सरकार होगी, वह कैसे बनेगी और कैसे काम करेगी?
- कानून कैसे बनाए और लागू किए जायेंगे?
- कार्यपालिका का चुनाव कौन करेगा, न्यायपालिका का गठन कैसे होगा और नागरिकों के क्या अधिकार और कर्तव्य होंगे?
इस प्रकार देश के आदर्शों और मूल्यों को स्पष्ट रूप से दर्शाने तथा उन आदर्शों व मूल्यों को सरकार द्वारा किस प्रकार प्राप्त किया जायेगा, इसके मार्गदर्शन के लिए हमें संविधान की आवश्यकता होती है।
प्रश्न 2.
भारतीय संविधान का निर्माण किस प्रकार हुआ?
उत्तर:
भारतीय संविधान का निर्माण संविधान सभा ने किया जिसका गठन 9 दिसम्बर, 1946 को हुआ। प्रारंभ में इसमें 389 सदस्य थे परंतु विभाजन के बाद इसके सदस्यों की संख्या 299 हो गई। ये सदस्य प्रान्तीय विधायिकाओं द्वारा चुने गए थे, जो स्वयं जनता द्वारा निर्वाचित थे।
संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद थे और संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. अम्बेडकर थे। संविधान सभा ने लगभग तीन वर्षों की अवधि में 26 नवम्बर, 1949. को संविधान के निर्माण का कार्य पूरा किया और परिणामस्वरूप तैयार प्रलेख भारत के संविधान के रूप में 26 जनवरी, 1950 को अंगीकृत किया गया।
प्रश्न 3.
हमारे स्वाधीनता संग्राम और सभ्यता की विरासत ने संविधान को कैसे प्रभावित किया?
उत्तर:
हमारे संविधान को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में हमारा स्वाधीनता संग्राम और सभ्यता की विरासत रहे। इन्होंने संविधान को अग्र प्रकार से प्रभावित किया—
(1) भारत के स्वतंत्रता संग्राम का प्रभाव— भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अनेक मुख्य आदर्शों को संविधान में स्थान दिया गया। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के कई प्रमुख नेता संविधान सभा के सदस्य थे, जिन्होंने अपने अनुभव और विचार संविधान में सम्मिलित किए। ये आदर्श मूल्य हैं— सभी के लिए समानता, न्याय, बंधुत्व, भारत की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण तथा संविधान को इन आदर्शों की प्राप्ति के एक साधन के रूप में देखना।
(2) भारतीय सभ्यता की विरासत का प्रभाव— कुछ ज्ञान और शिक्षा की निरन्तर खोज, महिलाओं के प्रति सम्मान तथा वसुधैव कुटुम्बकम् और सर्वे भवन्तु सुखिनः जैसे आदर्श। भारतीय सभ्यता की विरासत के ये सभी आदर्श हमारे संविधान में विद्यमान हैं, यद्यपि कहीं-कहीं ये थोड़े भिन्न रूप से व्यक्त किए गए हैं। मौलिक कर्तव्य भी इसी का एक महत्वपूर्ण अंग है।
प्रश्न 4.
भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं? सत्तर वर्ष से भी पहले लिखा गया संविधान आज भी प्रासंगिक क्यों है?
उत्तर:
भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
(1) लोकतांत्रिक गणराज्य — भारतीय संविधान सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न लोकतांत्रिक गणराज्य की स्थापना करता है। इसके लिए एक ऐसा निर्वाचन तंत्र भी निर्धारित किया गया है जिससे देश के प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदान का अधिकार सुनिश्चित हो सके।
(2) संसदात्मक शासन व्यवस्था— संविधान में संसदात्मक शासन व्यवस्था को अपनाया गया है। यह संविधान सरकार के तीनों अंगों के गठन, उनकी शक्तियों, उनकी सीमाओं तथा उनकी भूमिका, कार्य, उत्तरदायित्व और जवाबदेही की व्यवस्था को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है।
(3) सरकार की त्रिस्तरीय व्यवस्था— संविधान में सरकार की त्रिस्तरीय व्यवस्था स्थापित करने के प्रावधान किए गए हैं। यह त्रिस्तरीय व्यवस्था (i) केन्द्र सरकार (ii) राज्य सरकार और (iii) स्थानीय स्वशासन तथा पंचायती राज व्यवस्था के रूप में की गई है।
(4) मौलिक अधिकार और मौलिक कर्तव्य— संविधान में नागरिकों के लिए कुछ मूल अधिकार प्रदान किए गए हैं। ये हैं- (i) समानता का अधिकार (ii) स्वतंत्रता का अधिकार (iii) शोषण के विरुद्ध अधिकार (iv) शिक्षा का अधिकार तथा (v) संवैधानिक उपचारों का अधिकार आदि। हमारे संविधान निर्माताओं ने देखा कि कुछ बड़े लक्ष्य ऐसे हैं जिन्हें तुरन्त प्राप्त नहीं किया जा सकता है, इसलिए संविधान में नीति-निर्देशक तत्वों के रूप में उन लक्ष्यों को बताया गया है और कहा गया है कि राज्य जब संभव हो सके इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कार्य करे। ये नीति निर्देशक तत्व भारत के सामाजिक और आर्थिक दृष्टिकोण का सार प्रस्तुत करते हैं, जैसे—सामाजिक और आर्थिक आय की स्थापना, कल्याणकारी सरकार, समान नागरिक मौलिक सिद्धान्त हमारी संस्कृति में गूढ़ रूप से समाहित संहिता, पर्यावरण और वन्य जीव संरक्षण आदि की व्यवस्था हैं, जैसे—मत वैभिन्य की स्वीकृति, प्रकृति को पवित्र मानना, करने के सरकार को निर्देश देना।
संविधान की प्रासंगिकता— सत्तर वर्ष से भी पहले लिखा गया संविधान आज भी प्रासंगिक बना हुआ है क्योंकि संविधान में समय के साथ और नए कानूनों की आवश्यकता होने पर उन्हें संशोधनों द्वारा जोड़ने की व्यवस्था की गई है। संविधान में संशोधन गहन चर्चा और विचार-विमर्श करके स्वीकार किए जाते हैं। अनेक बार जनता की राय भी ली जाती है। कुछ संशोधन जन आंदोलन के माध्यम से भी आरंभ हो सकते हैं। इन सब कारणों से भारतीय संविधान आज भी प्रासंगिक बना हुआ है क्योंकि समय की आवश्यकताओं के अनुसार उसमें संशोधनों द्वारा आवश्यक परिवर्तन होते रहे हैं।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ संख्या 211-212)
प्रश्न — किसी देश के लिए ऐसी ( खेलों की नियम पुस्तिका जैसी ) नियम पुस्तिका क्या हो सकती है? उसे कैसे बनाया जाता होगा?
उत्तर:
किसी देश के लिए खेलों जैसी नियम पुस्तिका संविधान हो सकती है। उसे उस देश के निर्वाचित सदस्यों से बनी संविधान सभा द्वारा लम्बे विचार-विमर्श के द्वारा बनाया जाता होगा।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ संख्या 215)
प्रश्न — छोटे-छोटे समूहों में मिलकर यह पता लगाने का प्रयास कीजिए कि आपके क्षेत्र से कौन-कौन से व्यक्ति भारतीय संविधान निर्माण में सम्मिलित हुए थे। इसके लिए आप कौन-से स्रोतों का उपयोग कर सकते हैं?
उत्तर:
आपके क्षेत्र से कौन-कौनसे व्यक्ति भारतीय संविधान निर्माण में शामिल हुए थे, इसके बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए आप अपने विद्यालय या स्थानीय पुस्तकालय में पुस्तक खोजें अथवा अपने शिक्षक, माता-पिता या पड़ोस के वृद्धों से भी पूछ सकते हैं। यह कार्य विद्यार्थी स्वयं करें।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ संख्या 221)
प्रश्न — नीचे दिए गए उद्धरण (पृष्ठ 221) को पढ़िए। आपके विचार से यह संविधान के किस अनुच्छेद का संदर्भ दे रहा है।
उत्तर:
हमारे विचार से यह उद्धरण संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का संदर्भ दे रहा है।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ संख्या 223)
प्रश्न – क्या आप पता कर सकते हैं कि पिछले 10 वर्षों में संविधान में कौन-कौनसे संशोधन किए गए हैं?
उत्तर:
पिछले 10 वर्षों में भारतीय संविधान में किए गए प्रमुख संशोधन निम्न प्रकार हैं-
(1) 100वां संशोधन अधिनियम, 2015 – यह भारत और बांग्लादेश के बीच भूमि सीमा समझौते को संवैधानिक दर्जा प्रदान करता है।
(2) 101वां संशोधन अधिनियम, 2016 – इसने पूरे देश में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू किया।
(3) 102वां संशोधन अधिनियम, 2018 – इसने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया।
(4) 103वां संशोधन अधिनियम, 2019 – यह संविधान संशोधन आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में 10% आरक्षण प्रदान करता है।
(5) 104वां संशोधन अधिनियम, 2019 – इसने लोक सभा और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों के आरक्षण की अवधि को 10 वर्ष के लिए बढ़ाया।
(6) 105वां संशोधन अधिनियम, 2021 – यह सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए राज्य को अपनी सूची बनाने की शक्ति बहाल करता है।
(7) 106वां संशोधन अधिनियम, 2023 – यह लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटों के आरक्षण का प्रावधान करता है। इसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम भी कहा जाता है।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ संख्या 226)
प्रस्तावना में उल्लेखित विशेषताओं की नीचे लिखी सूची में दिए गए मूल्यों के पालन के उदाहरण लिखिए–
प्रस्तावना की विशेषतएँ | हम इसे अपने दैनिक जीवन में कैसे देखते हैं? |
1. संप्रभु | लोकतंत्र में सभी मामलों में सर्वोच्च राजनीतिक शक्ति लोगों में निहित है, कोई भी बाहरी शक्ति भारत सरकार को निर्देश नहीं दे सकती। |
2. गणतंत्र | भारत में राष्ट्र का अध्यक्ष, राष्ट्रपति निर्वाचित है, न कि वंशानुगत। |
3. स्वतंत्रता | नागरिकों के सोचने, अपने विचार व्यक्त करने तथा अपने विश्वासों के अनुसार कार्य करने पर कोई अनुचित रोक नहीं है। |
4. समानता | कानून के समक्ष सभी समान हैं और सभी को समान अवसर प्रदान करना सरकार का कर्तव्य है। |
5. बंधुत्व | हम सभी को एक परिवार के सदस्यों की तरह व्यवहार करना चाहिए। |
कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान पाठ 10 के प्रश्न उत्तर
प्रश्न 1.
‘संविधान सभा में भारत के विभिन्न क्षेत्रों और पृष्ठभूमियों के प्रतिनिधि सम्मिलित थे।’ आपके अनुसार ऐसा होना क्यों महत्त्वपूर्ण था?
उत्तर:
संविधान सभा में भारत के विभिन्न क्षेत्रों और पृष्ठभूमियों के प्रतिनिधि सम्मिलित थे, यह हमारे विचार में निम्नलिखित कारणों से महत्त्वपूर्ण था–
(1) प्रतिनिधित्वपूर्ण, समावेशी और न्यायपूर्ण संविधान– हमारे अनुसार संविधान सभा में विभिन्न क्षेत्रों और पृष्ठभूमियों के प्रतिनिधियों का शामिल होना इसलिए महत्त्वपूर्ण था ताकि संविधान सभी के हितों और दृष्टिकोणों को प्रतिबिंबित करे। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि भारत का संविधान एक समावेशी दस्तावेज बने जो देश की विविधता को दर्शाता हो और सभी समुदायों और वर्गों के लिए न्यायपूर्ण हो।
(2) विचारों का विनिमय— अलग-अलग विचारधाराओं के प्रतिनिधियों के शामिल होने से विचारों का स्वस्थ आदान- प्रदान हुआ और संविधान के मसौदे को मजबूत बनाने में मदद मिली।
(3) राष्ट्र की एकता– संविधान सभा में विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों को शामिल करने से यह सुनिश्चित हुआ कि देश के विभिन्न हिस्सों और समुदायों के बीच एकता की भावना को बढ़ावा मिले।
(4) सामूहिक सहमति– विभिन्न दृष्टिकोणों वाले लोगों के एक साथ आने से बना संविधान अपने समय की व्यापक सहमति को दर्शाता है।
प्रश्न 2.
नीचे दिए गए कथनों को ध्यान से पढ़िए और पहचानिए कि इनमें भारतीय संविधान की कौन-कौनसी प्रमुख विशेषताएँ या मूल्य दिखाई देते हैं—
(क) शीना, रजत और हर्ष एक पंक्ति में खड़े हैं, वे आम चुनाव में अपना पहला वोट डालने के लिए उत्साहित हैं।
(ख) राधा, इमोन और हरप्रीत एक ही विद्यालय की एक ही कक्षा में पढ़ते हैं।
(ग) माता-पिता को अपने बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था करनी चाहिए।
(घ) गाँव के कुएँ का उपयोग सभी जाति, धर्म और लिंग के लोग कर सकते हैं।
उत्तर:
(क) सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का अधिकार।
(ख) यह स्थिति भारतीय संविधान की समानता और शिक्षा का अधिकार जैसे मूल्यों और प्रावधानों को दर्शाती है।
(ग) यह स्थिति भारतीय संविधान के मौलिक कर्तव्यों को बताता है जिसमें माता-पिता या अभिभावकों को अपने बच्चों के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने का कर्तव्य शामिल है।
(घ) यह भारतीय संविधान की समानता के अधिकार की विशेषता को दर्शाता है। समानता का अधिकार धर्म, जाति, लिंग और जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव को प्रतिबंधित करता है और सार्वजनिक स्थानों (जैसे- कुएँ, तालाब, स्नान घाट) तक समान पहुँच सुनिश्चित करता है।
प्रश्न 3.
यह कहा जाता है कि ‘भारत में सभी नागरिक कानून के समक्ष समान हैं।’ क्या आपको लगता है कि यह एक सच्चाई है? यदि हाँ, तो क्यों? यदि नहीं, तो क्यों नहीं? तर्कों के साथ उत्तर दीजिए।
उत्तर:
भारत में सभी नागरिक यद्यपि संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद-14) के अनुसार, कानून के समक्ष समान हैं, लेकिन हमारे विचार से यह सच्चाई नहीं है, क्योंकि सभी नागरिक कानून का समान रूप से लाभ निम्न कारणों से नहीं उठा पाते हैं—
(1) संसाधन की कमी— गरीबी या आर्थिक स्थिति के कारण, कुछ लोग कानूनी सहायता या अधिकारों का लाभ नहीं उठा पाते हैं।
(2) अशिक्षा और जागरूकता की कमी— कानूनी जागरूकता और शिक्षा की कमी के कारण कई नागरिक अपने अधिकारों को नहीं जानते और उनका उपयोग नहीं कर पाते हैं।
(3) सामाजिक भेदभाव— सामाजिक पूर्वाग्रह या सामाजिक भेदभाव के कारण भी कुछ लोग समानता के अधिकार का उपयोग करने से वंचित रह जाते हैं।
प्रश्न 4.
आपने पढ़ा कि ” भारत एकमात्र ऐसा देश है, जिसने आरंभ से ही अपने नागरिकों को सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार प्रदान किया।” क्या आप बता सकते हैं कि भारत ने ऐसा क्यों किया?
उत्तर:
भारत ने आरंभ से ही अपने नागरिकों को सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार संविधान सभा के सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक सिद्धान्तों तथा समानता के प्रति प्रतिबद्धता के कारण दिया। भारत का स्वतंत्रता संग्राम मूलतः विदेशी शासन के विरुद्ध और स्वशासन प्राप्ति के लिए संघर्ष था। सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार प्रदान करना एक सच्चे प्रजातांत्रिक तथा स्वतंत्र देश का शक्तिशाली दावा है।
सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार उपनिवेशवादी परम्पराओं से मुक्त होने की दृष्टि से महत्वपूर्ण था।
दूसरे, भारत में आरंभ से ही वयस्क मताधिकार इसलिए भी प्रदान किया गया ताकि सभी वयस्क नागरिकों को उनकी पृष्ठभूमि (जैसे- जाति, धर्म, लिंग या आर्थिक स्थिति) की परवाह किए बिना, सरकार चुनने की राजनीतिक प्रक्रिया में समान रूप से भाग लेने का अधिकार मिल सके। तीसरे, भारत के संविधान निर्माताओं ने एक ऐसे राष्ट्र का निर्माण करना चाहा जहाँ स्वतंत्रता के बाद सभी को समान अवसर मिल सके। इसीलिए उन्होंने प्रारंभ से ही सभी वयस्क नागरिकों को मताधिकार दिया।
प्रश्न 5.
स्वतंत्रता संग्राम ने भारतीय संविधान के निर्माण को कैसे प्रेरित किया? भारतीय सभ्यता की विरासत ने संविधान की किन प्रमुख विशेषताओं को किस प्रकार प्रेरित किया? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
स्वतंत्रता संग्राम ने भारतीय संविधान के निर्माण को कई तरह से प्रेरित किया। यथा—
- इसने समानता, न्याय, स्वतंत्रता, बंधुत्व, भारत की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण जैसे मूल्यों की नींव रखी, जिससे संविधान की प्रस्तावना और मौलिक अधिकारों में वे सिद्धान्त समाहित हुए तथा संविधान को इन मूल्यों व आदर्शों को प्राप्ति के एक साधन के रूप में देखा गया।
- स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ही संविधान सभा की माँग उठी, जिसे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने समर्थन दिया। जवाहरलाल नेहरू जैसे नेताओं ने बाहरी हस्तक्षेप के बिना वयस्क मताधिकार के आधार पर संविधान सभा से संविधान बनाने की माँग की।
- स्वतंत्रता संग्राम ने विभिन्न धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों के लोगों को एकजुट किया, जिससे ‘विविधता में एकता’ के सिद्धान्त को बढ़ावा मिला। इस भावना को संविधान में शामिल किया गया।
- स्वतंत्रता संग्राम से अनुभव और शिक्षाओं ने अनेक ‘कैसे’ और ‘क्या’ सम्बन्धी प्रश्नों का समाधान भी प्रस्तुत किया। जैसे कि, यह कैसे सुनिश्चित करें कि प्रत्येक वयस्क नागरिक को मतदान का अधिकार मिले। इसी प्रकार, यदि हमें संविधान में संशोधन करना हो तो क्या प्रक्रिया होनी चाहिए? आदि अनेक ऐसे प्रश्नों का समाधान प्रस्तुत किया।
भारतीय सभ्यता की विरासत से प्रेरित संविधान की विशेषताएँ-
(1) विविधता और एकीकरण- विविधता और एकीकरण की संवैधानिक विशेषता भारतीय सभ्यता की विरासत से प्रेरित है। विविधता में एकता की भावना से प्रेरित होकर भारतीय संविधान में एक ऐसा संघीय ढाँचा अपनाया गया है जो शक्तियों के विभाजन की बात करता है, लेकिन इसमें एकात्मक विशेषताओं का भी संतुलन है।
(2) कुछ मौलिक सिद्धान्तों का समावेशन – कुछ मौलिक सिद्धान्त हमारी संस्कृति में गूढ़ रूप से समाहित हैं, जैसे— मत वैभिन्य की स्वीकृति, प्रकृति को पवित्र मानना, ज्ञान और शिक्षा की निरन्तर खोज, महिलाओं के प्रति सम्मान तथा वसुधैव कुटुम्बकम और सर्वे भवन्तु सुखिनः, जैसे आदर्श । ये सभी सिद्धान्त हमारे संविधान में भी विद्यमान हैं, यद्यपि कहीं- कहीं ये थोड़े भिन्न ढंग से व्यक्त किए गए हैं। इन मौलिक सिद्धान्तों का संविधान में समावेशन मुख्यतः मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों के रूप में हुआ है।
प्रश्न 6.
क्या आपको लगता है कि हम एक समाज के निर्माण के रूप में संविधान के सभी आदर्शों को प्राप्त कर चुके हैं? यदि नहीं, तो एक नागरिक के रूप में हम में से प्रत्येक क्या कर सकता है जिससे कि हमारा देश इन आदर्शों के निकट पहुँच सके?
उत्तर:
नहीं, एक समाज के रूप में हमने अभी तक संविधान के सभी आदर्शों को पूरी तरह से प्राप्त नहीं किया है।
संवैधानिक आदर्शों की प्राप्ति के लिए एक नागरिक के कार्य –
(1) समानता और न्याय को बढ़ावा दें–
(i) सभी नागरिकों के साथ समानता का व्यवहार करें और जाति, धर्म, लिंग या जन्म-स्थान के आधार पर भेदभाव न करें।
(ii) सामाजिक और आर्थिक बाधाओं से प्रभावित लोगों की मदद करें।
(iii) कानून का पालन करें और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करें।
(2) अपने मौलिक अधिकार और कर्तव्यों को समझें-
(i) हम संविधान में उल्लिखित अपने मौलिक अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और उनका प्रयोग करें।
(ii) अपने मौलिक कर्तव्यों का पालन करें।
(3) लोकतंत्र में सक्रिय भागीदारी —
(i) एक नागरिक के रूप में हम मतदान प्रक्रिया में भाग लें और एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में वोट दें।
(ii) सार्वजनिक बहसों और चर्चाओं में शामिल हों।
(iii) सरकार और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें और उन पर सवाल उठायें।
(4) व्यक्तिगत जिम्मेदारी — (i) स्वच्छ और स्वस्थ समाज के लिए योगदान दें।
(ii) अपने आस-पास के लोगों के प्रति दयालु और सम्मानजनक बनें।
(iii) जब भी संभव हो, जरूरतमंद लोगों की मदद करें।
प्रश्न 7.
पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 228 पर दी गई शब्द- पहेली को भारतीय संविधान की महत्त्वपूर्ण अवधारणाओं का प्रयोग करते हुए हल कीजिए।
[नोट-शब्द पहेली और संकेतों को पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 228 पर देखें।]
उत्तर:
- ही लि य म
- मू ल अ धि का र
- मौ लि क क र्त व्य
- सं विधा न स भा
- वि धा यि का
- सं शो ध न
- उ द्दे शि का
- का र्य पा लि का