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सामाजिक विज्ञान (Social Science)हिंदी माध्यम2026-27

RBSE Class 7 Social Science Chapter 7 Solutions in Hindi — गुप्त काल अथक सृजनशीलता का युग

📅 अंतिम अपडेट: 2026-09-09📖 RBSE/NCERT Solutions

Class 7 SST Chapter 7 Question Answer in Hindi गुप्त काल अथक सृजनशीलता का युग

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Class 7 Social Science Chapter 7 Question Answer in Hindi

गुप्त काल अथक सृजनशीलता का युग कक्षा 7 प्रश्न उत्तर

Class 7 Samajik Vigyan Chapter 7 Question Answer गुप्त काल अथक सृजनशीलता का युग

महत्त्वपूर्ण प्रश्न (पृष्ठ संख्या 145)

प्रश्न 1.
गुप्त कौन थे? गुप्त काल को कभी-कभी भारतीय इतिहास में ‘उत्कृष्ट युग’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
गुप्त साम्राज्य की स्थापना श्रीगुप्त ने की थी। गुप्तों का उद्भव वर्तमान उत्तर प्रदेश के समीपवर्ती क्षेत्र में शासक के रूप में हुआ। समय के साथ वे प्रभुत्वशाली हुए और एक शक्तिशाली साम्राज्य की स्थापना की। इसके शासकों जैसे – चन्द्रगुप्त प्रथम, समुद्रगुप्त और चन्द्रगुप्त द्वितीय ने भारत के इतिहास को उत्कृष्ट युग के रूप में चिह्नित किया।

गुप्त काल : एक उत्कृष्ट युग
गुप्त काल को भारतीय इतिहास में ‘उत्कृष्ट युग’ कहने के पीछे निम्नलिखित प्रमुख कारण हैं-

(1) कला और साहित्य का विकास — इस युग में संस्कृत साहित्य अपने चरम पर पहुँचा जिसमें कालदास जैसे महान कवियों ने उत्कृष्ट रचनाएँ कीं।
इस काल में मूर्तिकला, स्थापत्यकला और चित्रकला के क्षेत्र में नए प्रतिमान स्थापित हुए जो कला की श्रेष्ठता को दर्शाते हैं।

(2) वैज्ञानिक और गणितीय प्रगति — आर्यभट्ट जैसे गणितज्ञों ने खगोलशास्त्र और गणित में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। शून्य और दशमलव पद्धति का विकास इसी काल में हुआ।

(3) राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक सामाजिक समृद्धि — गुप्त शासकों ने पूरे भारत में राजनीतिक स्थिरता कायम रखी, जिससे व्यापार और कृषि का विकास हुआ और आर्थिक समृद्धि आई, जिसने कला और संस्कृति के विकास को बढ़ावा दिया।

(4) धार्मिक सहिष्णुता — गुप्त काल में हिन्दू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म सभी का विकास हुआ तथा धार्मिक विविधता को सम्मान दिया गया।

प्रश्न 2.
इस समय भारतीय उपमहाद्वीप के अन्य भागों में क्या हो रहा था?
उत्तर:
गुप्त काल के दौरान भारतीय उपमहाद्वीप के अन्य हिस्सों में महत्त्वपूर्ण घटनाएँ घट रही थीं।
(1) पल्लव राजवंश— इस काल में दक्षिण में पल्लव एक शक्तिशाली राजवंश के रूप में उभरे। उन्होंने धीरे-धीरे आज के तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कुछ भागों को अपने राज्य में मिला लिया। उन्होंने कांचीपुरम को अपनी राजधानी बनाया। पल्लव कला और वास्तुकला के महान संरक्षक थे तथा वे शिव भक्त थे। उन्हें भव्य मंदिरों और चट्टानों को काटकर बनाई गई गुफाओं के निर्माण का श्रेय दिया जाता है।

(2) कामरूप राज्य— इस काल में पूर्वोत्तर में वर्मन राजवंश द्वारा शासित कामरूप साम्राज्य ब्रह्मपुत्र घाटी (वर्तमान असम, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के उत्तरी भाग) तक विस्तृत था। कामरूप साम्राज्य एक प्रमुख सांस्कृतिक और राजनैतिक केन्द्र था। यहाँ मंदिर और मठ शिक्षा के केन्द्रों के रूप में विकसित हुए।

दक्षिण भारत के अभियान के समय समुद्रगुप्त ने पल्लव शासक को पराजित किया तथा पूर्वोत्तर में कामरूप के शासक को युद्ध में हराया लेकिन इसके बाद इन क्षेत्रों को सीधे अपने अधिकार में नहीं लिया।

(3) वाकाटक राजवंश— इस काल में वाकाटक राजवंश ने भारतीय उपमहाद्वीप के मध्य क्षेत्रों पर शासन किया। उनकी राजधानी नंदिवर्धन (वर्तमान नागपुर के समीप) थी।

प्रश्न 3.
इस काल के कुछ महान व्यक्ति कौन थे? आज भी उनके बारे में प्रचलित कथाएँ क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?
उत्तर:
गुप्तकाल के कुछ महान व्यक्ति थे – (1) चन्द्रगुप्त प्रथम (2) समुद्रगुप्त (3) कालिदास (4) आर्यभट्ट और (5) वराहमिहिर। यथा-
(1) चन्द्रगुप्त प्रथम ने क्षेत्रीय लाभ के लिए लिच्छवि राजकुमारी से विवाह किया, कुशल राजनीतिक और प्रशासनिक नवाचारों को अपनाया और व्यापार व संस्कृति को बढ़ावा दिया।

(2) समुद्रगुप्त ने कई राजाओं को पराजित कर अपने साम्राज्य का विस्तार किया। स्वर्ण मुद्राएँ जारी कीं और हिन्दू धर्म का प्रचार किया।

(3) कालिदास ने ‘अभिज्ञान शाकुंतलम’ जैसी उत्कृष्ट रचनाएँ रचीं तथा ‘मेघदूत’ में प्रकृति का अद्भुत वर्णन किया।

(4) आर्यभट्ट – गणित और खगोल के क्षेत्र में किए गए उनके काम ने विज्ञान और गणित के क्षेत्र में नए मानक स्थापित किए।

(5) वराहमिहिर ने ज्योतिष और गणित के क्षेत्र में योगदान दिया।

उनके बारे में प्रचलित कथाओं का आज भी महत्त्वपूर्ण होने के कारण-
(1) ज्ञान और संस्कृति का आधार—ये व्यक्तित्व और उनकी कथाएँ गुप्त काल की समृद्ध वैज्ञानिक, साहित्यिक और कलात्मक उपलब्धि दर्शाती हैं, जिससे ये वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत बनती हैं।

(2) भारत के उत्कृष्ट युग का प्रतीक—गुप्त काल को भारत का एक उत्कृष्ट युग माना जाता है और इन महान व्यक्तियों की कथाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि उस समय कितनी प्रगति हुई थी।

(3) सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना—कालिदास द्वारा जो रचनाएँ प्रस्तुत की गईं, वे आज भी भारतीयता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करती हैं।

(4) प्रशासनिक और सामाजिक मूल्य—गुप्त शासकों की नीतियाँ और कार्यकुशल शासन और सहिष्णुता के मूल्य आज भी लोगों को सिखाते हैं।

(5) तकनीकी कौशल का प्रदर्शन—दिल्ली का महरौली स्थित लौह स्तंभ गुप्त काल के कारीगरों के उन्नत तकनीकी कौशल का अद्भुत उदाहरण है।

आइए विचार करें (पृष्ठ संख्या 150)

प्रश्न -आपके विचार से राजाओं ने अपनी उपलब्धियों को अभिलेखों के माध्यम से क्यों प्रस्तुत किया होगा?
उत्तर:
हमारे विचार से राजाओं ने अपनी उपलब्धियों को स्थायी दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत करने, साम्राज्य की शक्ति और वैधता को प्रदर्शित करने, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने और भावी पीढ़ियों के लिए ज्ञान का | स्रोत प्रदान करने के लिए अभिलेखों का उपयोग किया होगा। इन अभिलेखों के माध्यम से राजाओं ने अपनी विजय, शक्ति और साम्राज्य के विस्तार को दर्ज किया जिससे उनके शासन की वैधता स्थापित हुई और जनता पर उनका अधिकार मजबूत हुआ।

आइए पता लगाएँ (पृष्ठ संख्या 151)

प्रश्न – इस अध्याय में अब हम हमने जिन स्रोतों का उल्लेख किया है उनकी एक सूची बनाइए और प्रत्येक स्रोत से प्राप्त जानकारी को लिखिए।
उत्तर:
इस अध्याय में निम्नलिखित स्रोतों का उल्लेख किया गया है—
(1) दिल्ली स्थित लौह स्तंभ पर उत्कीर्ण अभिलेख, (2) प्रयागराज स्थित स्तंभ अभिलेख, (3) स्वर्ण मुद्रा, (4) विष्णु पुराण, (5) चीनी यात्री फा – शिएन का यात्रा वृत्तांत, (6) सारनाथ स्थित बुद्ध की मूर्तियाँ तथा अजंता की गुफाएं (7) आर्यभट्ट, वराहमिहिर तथा कालिदास के ग्रंथ। यथा—

(1) दिल्ली स्थित लौह स्तंभ पर उत्कीर्ण अभिलेख— दिल्ली के लौह स्तंभ पर उत्कीर्ण अभिलेख चन्द्र नामक राजा का उल्लेख करता है, जिसे इतिहासकारों ने चन्द्रगुप्त द्वितीय माना है।

(2) पृष्ठ 149 में चित्र सं. 7.4 में दर्शायी गई स्वर्ण मुद्रा— इसमें सम्राट चन्द्रगुप्त प्रथम अपनी रानी कुमारदेवी के साथ अंकित हैं। सिक्के के पृष्ठ भाग में आसन पर विराजित देवी हैं, जिन्हें लक्ष्मी के रूप में पहचाना गया है। इससे पता चलता है कि समुद्रगुप्त से पूर्व गुप्त साम्राज्य के शासक चन्द्रगुप्त प्रथम थे जो विष्णु के उपासक थे।

(3) प्रयाग प्रशस्ति— प्रयागराज स्थित स्तंभ अभिलेख प्रयाग प्रशस्ति में समुद्रगुप्त की उपलब्धियों की प्रशंसा है। उन्होंने अनेक युद्ध लड़े कई राजाओं को पराजित कर उनके राज्यों पर अधिकार किया तथा अपने राज्य का विस्तार किया।

(4) विष्णु पुराण— विष्णु पुराण में गुप्त साम्राज्य के प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख मिलता है।

(5) चीनी यात्री फा— शिएन का यात्रा वृत्तांत- इसमें गुप्त युग के समाज के बारे में पता लगता है।

(6) अभिलेख और सिक्के— गुप्त युग के अभिलेखों और सिक्कों से गुप्त युग की उपाधियों, जैसे—महाराजाधिराज, सम्राट और चक्रवर्ती आदि की जानकारी मिलती है।

कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान पाठ 7 के प्रश्न उत्तर

प्रश्न और क्रियाकलाप

प्रश्न 1.
कल्पना कीजिए कि आपको गुप्त साम्राज्य में रहने वाले किसी व्यक्ति से एक पत्र मिलता है। पत्र का आरंभ इस प्रकार होता है- “पटलिपुत्र से अभिवादन । यहाँ का जीवन सुखमय और उत्साह से भरा है। कल ही मैंने देखा…” गुप्त साम्राज्य में जीवन का वर्णन करते हुए एक संक्षिप्त लेख (250-300 शब्दों ) के साथ पत्र को पूरा कीजिए।
उत्तर:
गुप्त साम्राज्य में रहने वाले व्यक्ति से मिले पत्र का विवरण इस प्रकार हो सकता है” पटलिपुत्र से अभिवादन । यहाँ का जीवन सुखमय और उत्साह से भरा है। कल ही मैंने यहाँ गुप्त साम्राज्य में जीवन की प्रमुख विशेषताएँ उभरी हैं, देखा कि नगरों के निवासी धनी, समृद्ध और धर्मनिष्ट हैं।” उन्हें निम्न प्रकार स्पष्ट किया गया है—

(1) सामाजिक जीवन — लोग अत्यधिक संख्या में हैं और प्रसन्न हैं। जो लोग राजकीय भूमि पर खेती करते हैं, वे अनाज का एक भाग कर के रूप में देते हैं। राजा के अंग रक्षकों और सेवकों को वेतन मिलता है। नगरों के निवासी धनी, समृद्ध, दयालु और धर्मनिष्ठ हैं। वैश्य परिवारों के मुखिया अर्थात् व्यापारी और व्यवसायी दान और औषधि के लिए भवन बनवाते हैं। यहाँ निर्धनों, अनाथों और रोगियों की देखभाल की जाती है। वैद्य उपचार करते हैं और निर्धन को मुफ्त औषधि मिलती है। नगर की गलियों को अच्छी तरह से व्यवस्थित रखा गया है।

(2) आर्थिक जीवन — यहाँ की राजनीतिक स्थिरता और प्रशासनिक सुव्यवस्था ने कृषि, पशुपालन, उद्योग और व्यापार वाणिज्य को बढ़ावा दिया है। बड़ी संख्या में सोने के सिक्कों का प्रचलन है। साथ ही चाँदी और कांस्य के सिक्कों का भी चलन है।

(3) कला और वास्तुकला — यहाँ पत्थर से मंदिर निर्माण हो रहे हैं। अजंता और वाघ की गुफा, चित्रकला, मूर्तिकला और वास्तुकला की उत्कृष्टता दर्शनीय है।

(4) साहित्य और भाषा — संस्कृत भाषा अपनी उत्कृष्टता पर है। संस्कृत भाषा में लिखे कालिदास, वराहमिहिर और आर्यभट्ट के ग्रंथ उल्लेखनीय हैं।

(5) विज्ञान और गणित — आर्यभट्ट ने पृथ्वी के गोल होने और दशमलव प्रणाली के बारे में बताया है। वराहमिहिर ने ज्योतिष में ग्रंथ लिखे हैं। शल्य चिकित्या के क्षेत्र में भी विशेषज्ञों ने विशेषज्ञता हासिल की है।

(6) धार्मिक जीवन — गुप्त शासक यद्यपि हिन्दू धर्म के अनुयायी हैं, तथापि यहाँ बौद्ध और जैन धर्मों के अनुयायियों को अपने धर्मों का पालन करने की अनुमति है। संक्षेप में, यह काल एक समृद्ध और प्रगतिशील काल है, जहाँ आर्थिक स्थिरता के साथ-साथ कला, विज्ञान और साहित्य में भी महान उपलब्धियाँ हासिल की गई हैं।

प्रश्न 2.
किस गुप्तकालीन शासक को विक्रमादित्य के नाम से भी जाना जाता है?
उत्तर:
चन्द्रगुप्त द्वितीय नामक गुप्तकालीन शासक को विक्रमादित्य के नाम से भी जाना जाता है।

प्रश्न 3.
“शांतिकालीन सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन, साहित्य तथा विज्ञान व प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विकास लाने में सहायक होते हैं।” गुप्त साम्राज्य के संदर्भ में इस कथन का परीक्षण कीजिए।
उत्तर:
गुप्तकाल के अन्तर्गत शांति और स्थिरता लंबे समय तक बनी रही। गुप्त शासकों ने अपने विशाल साम्राज्य का विस्तार और सुदृढ़ीकरण करने के लिए युद्ध, कूटनीति और वैवाहिक गठबंधन सहित विभिन्न रणनीतियों का प्रयोग किया, जिससे इस साम्राज्य के अन्तर्गत लम्बे समय तक सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन शांतिपूर्ण रहा। शांतिपूर्ण सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन के कारण ही गुप्त साम्राज्य साहित्य तथा विज्ञान व प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विकास लाने में समर्थ रहा। इस काल में साहित्य, विज्ञान

व प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हुई प्रगति को निम्न प्रकार स्पष्ट किया गया है—

(1) साहित्य के क्षेत्र में हुई प्रगति — इस समय कालिदास की रचनाओं और अनेक प्रमुख पुराणों के साथ संस्कृत साहित्य का विकास हुआ। आर्यभट्ट ने आर्यभटीय ग्रंथ की रचना की तथा वराहमिहिर ने वृहत्संहिता नामक ग्रंथ की रचना की।

(2) विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हुई प्रगति — गुप्त काल में गणित, खगोल विज्ञान, चिकित्सा और धातु विज्ञान के क्षेत्र में हुई प्रगति ने भविष्य के वैज्ञानिक और तकनीकी विकास की नींव रखी। आर्यभट्ट और वराहमिहिर ने गणित और खगोल विज्ञान में उल्लेखनीय योगदान दिया। चिकित्सा के क्षेत्र में भी महत्त्वपूर्ण सिद्धान्तों और पद्धतियों को संकलित तथा परिष्कृत किया गया। धातु विज्ञान में हुई प्रगति का प्रत्यक्ष उदाहरण महरौली ( देहली) स्थित जंगरोधी लौह स्तंभ है।

प्रश्न 4.
किसी गुप्तकालीन शासक की राजसभा के एक दृश्य का नाटकीय रूपान्तरण कीजिए जिसमें राजा, मंत्री और विद्वानों जैसी भूमिकाएँ हों। इस प्रकार आप गुप्त युग को पुनर्जीवित कर सकते हैं।
उत्तर:
विद्यार्थी यह कार्य अपने कक्षाध्यापक की सहायता से स्वयं परस्पर मिलकर करें।

प्रश्न 5.
मिलान कीजिए-

(अ)

(ब)

1. कांचीपुरम

(क) जातक कथाओं को दर्शाने वाले जीवन्त गुफा चित्रों के लिए प्रसिद्ध है।

2. उज्जयिनी

(ख) यह चट्टान काटकर बनाई गई गुफाओं के लिए प्रसिद्ध है, जिनमें हिन्दू देवी-देवताओं, विशेषकर भगवान विष्णु की उत्कृष्ट प्रतिमाएँ उत्कीर्ण की गई हैं।

3. उदयगिरि

(ग) गुप्त शासकों की राजधानी

4. अजन्ता

(घ) एक हजार मंदिरों के शहर के रूप में प्रसिद्ध है।

5. पाटलिपुत्र

(ङ) प्राचीन भारत में शिक्षा का एक प्रमुख केन्द्र।

उत्तर:

(अ)

(ब)

1. कांचीपुरम

(घ) एक हजार मंदिरों के शहर के रूप में प्रसिद्ध है।

2. उज्जयिनी

(ङ) प्राचीन भारत में शिक्षा का एक प्रमुख केन्द्र।

3. उदयगिरि

(ख) यह चट्टान काटकर बनाई गई गुफाओं के लिए प्रसिद्ध है, जिनमें हिन्दू देवी-देवताओं, विशेषकर भगवान विष्णु की उत्कृष्ट प्रतिमाएँ उत्कीर्ण की गई हैं।

4. अजन्ता

(क) जातक कथाओं को दर्शाने वाले जीवन्त गुफा चित्रों के लिए प्रसिद्ध है।

5. पाटलिपुत्र

(ग) गुप्त शासकों की राजधानी

प्रश्न 6.
पल्लव कौन थे और उन्होंने कहाँ शासन किया?
उत्तर:
पल्लव- गुप्त शासन काल के समय दक्षिण भारत में पल्लव एक शक्तिशाली वंश के रूप में उभरे। ऐसा प्रतीत होता है कि पल्लव सातवाहनों के अधीन थे। सातवाहनों के पश्चात् उन्हें बल मिला।

पल्लवों ने चौथी से नवीं शताब्दी तक आधुनिक तमिलनाडु के कांचीपुरम शहर से शासन किया। उन्होंने धीरे-धीरे तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कुछ भागों को अपने राज्य में मिला लिया।

प्रश्न 7.
अपने शिक्षकों के साथ निकट के किसी ऐतिहासिक स्थल, संग्रहालय या विरासत भवन की यात्रा का आयोजन कीजिए। यात्रा के बाद अपने अनुभव का वर्णन करते हुए एक विस्तृत रिपोर्ट लिखिए। रिपोर्ट में इस स्थल के ऐतिहासिक महत्त्व, वास्तुकला, कलाकृतियों और यात्रा के दौरान आपके द्वारा सीखे गए किसी भी रोचक तथ्य के बारे में अपने महत्त्वपूर्ण अवलोकनों को सम्मिलित कीजिए। इस यात्रा ने इतिहास के बारे में आपकी समझ को कैसे विकसित किया?
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं अपने शिक्षकों के साथ ऐसी एक यात्रा का आयोजन कर अपने अनुभव की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें।