📖 1. समाधान: अभ्यास एवं पाठ्यपुस्तक के संपूर्ण हल
राजस्थान बोर्ड कक्षा 8 हिन्दी — पाठगत प्रश्न एवं अभ्यास के चरण-दर-चरण सटीक हल।
प्रसंग– यह पद 'सूरदास के पद' शीर्षक पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता महाकवि सूरदास हैं। श्रीकृष्ण बड़े भाई बलराम की लम्बी चोटी देखकर माता यशोदा से बार-बार पूछते हैं कि माँ मेरी चोटी कब बढ़ेगी?
व्याख्या– बालक श्रीकृष्ण जब देखते हैं कि उनके सिर की चोटी छोटी है तो वे अपनी माता यशोदा से पूछते हैं कि हे माँ! मेरी चोटी कब बढ़ेगी? मुझे कितना समय दूध पीते हुए हो गया फिर भी यह अब भी छोटी-सी ही बनी हुई है! तुम तो कहती थीं कि दूध पीते रहने से यह बलराम भैया की चोटी की तरह लम्बी और मोटी हो जायेगी। तुम यह भी कहती थीं कि बार-बार बाल बनाने, गूँथने से, नहलाने-धुलवाने से यह इतनी बड़ी हो जायेगी कि खुलने पर नागिन की तरह जमीन पर लोट जायेगी। तुम बार-बार मुझे कच्चा दूध पिलाती रहती हो और खाने के लिए माखन और रोटी भी नहीं देती हो। सूरदास कहते हैं कि कृष्ण की ऐसी बातों को सुनकर माता यशोदा आशीर्वाद देती हुई कहती हैं कि भगवान करें कि तुम दोनों भाई (श्रीकृष्ण और बलराम) लम्बी समय तक जीओ और तुम दोनों की जोड़ी बनी रहे।
(2) तैंरै लाल .................................................................................................................................... अनोखौ जायौ।
कठिन शब्दार्थ- सूनो = सुनसान। ढूँढि-ढूँढोरि = खोज-खोजकर। किवारि = दरवाजा। पैठि = बैठकर। खवायौ = खिला दिया। ऊखल = ओखली। सींके = छींका। अनभावत = जो अच्छा न लगे। ढरकायौ = फैला देना। गोरस = दूध, दही, मक्खन। ढोटा = बेटा। जायौ = पैदा करना।
प्रसंग– यह पद सूरदास द्वारा रचित 'सूरदास के पद' पाठ से लिया गया है। कृष्ण कुछ बड़े हो जाने पर ग्वालिनों के घर से दूध-मक्खन आदि चुराकर खाते हैं। कृष्ण की इस चोरी का पता एक गोपी को चल जाता है। वह यशोदा के पास जाकर उलाहने भरे शब्दों में शिकायत करती है।
व्याख्या– गोपी यशोदाजी से कहती है कि तुम्हारे लाल कृष्ण ने मेरा माखन (मक्खन) खा लिया है। दिन में दोपहर के समय घर को सूना कहकर, ढूँढ़ता हुआ खुद ही घर में आ गया और उसने घर का दरवाजा खोलकर घर
में बैठकर दूध-दही अपने सब संगी-साथियों को खिलाया। मैंने मक्खन का पात्र छींके के ऊपर रखा था, परन्तु तुम्हारे लड़के ने ऊखल पर चढ़कर छींके से सारा मक्खन ले लिया और जो अच्छा लगा उसे खा लिया और जो अच्छा नहीं लगा, उसे जमीन पर गिरा दिया। यह एक दिन की बात नहीं है, प्रतिदिन की बात हो गयी है। इससे मुझे सदैव दूध-दही व मक्खन की हानि हो रही है। पता नहीं तुम्हारा यह बेटा ऐसे ढंग कहाँ से सीख आया है! सूरदासजी कहते हैं कि गोपी यशोदा से कहती है कि तुमने अपने पुत्र को मना तो किया नहीं। लगता है कि तुम्हीं ने अनोखे पुत्र को पैदा किया है।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
पदों से-
प्रश्न 1. बालक श्रीकृष्ण किस लोभ के कारण दूध पीने के लिए तैयार हुए?
उत्तर- बालक श्रीकृष्ण चोटी बड़ी होने के लोभ में आकर दूध पीने को तैयार हुए।
प्रश्न 2. श्रीकृष्ण अपनी चोटी के विषय में क्या-क्या सोच रहे थे?
उत्तर- श्रीकृष्ण अपनी चोटी के विषय में सोच रहे थे कि कब उनकी चोटी बड़ी होगी और कब यह लम्बी और मोटी होगी।
प्रश्न 3. दूध की तुलना में श्रीकृष्ण कौनसे खाद्य पदार्थ को अधिक पसन्द करते हैं?
उत्तर- दूध की तुलना में श्रीकृष्ण माखन-रोटी को खाना अधिक पसन्द करते हैं।
प्रश्न 4. "तैं ही पूत अनोखै जायौ" पंक्तियों में ग्वालिन के मन के कौनसे भाव मुखरित हो रहे हैं?
उत्तर- गोपी के इस कथन में शिकायत रूप में उलाहना के भाव मुखरित हो रहे हैं, क्योंकि बार-बार शिकायत करने पर भी यशोदा कुछ नहीं कहती हैं। बालक कृष्ण घर में घुसकर माखन-दही खाने के अलावा उनका नुकसान भी करता है। इसके साथ ही चोरी खुद करता है और खाने-पीने में अपने साथियों को भी शामिल कर लेता है। लगता है कि तुमने ही अनोखे पुत्र को जन्म दिया है।
प्रश्न 5. मक्खन चुराते और खाते समय श्रीकृष्ण थोड़ा-सा मक्खन बिखरा क्यों देते हैं?
उत्तर- मक्खन चुराते और खाते समय श्रीकृष्ण थोड़ा-सा मक्खन बिखरा देते हैं, क्योंकि मक्खन ऊँचाई पर छींके पर रखा हुआ होता था, उसे चुराने और निकालने में जल्दीबाजी और हड़बड़ाहट के कारण थोड़ा-सा बिखर जाता होगा।
प्रश्न 6. दोनों पदों में से आपको कौनसा पद अधिक अच्छा लगा और क्यों?
उत्तर- दोनों पदों में से हमें दूसरा पद अधिक अच्छा लगा, क्योंकि उसमें कृष्ण का माखन चुराना, अपने मित्रों को दही-माखन का आनन्द लुटावाना तथा गोपी द्वारा यशोदाजी से उनकी शिकायत करना में सहजता और सरसता विद्यमान है।
अनुमान और कल्पना-
प्रश्न 1. दूसरे पद को पढ़कर बताइए कि आपके अनुसार उस समय श्रीकृष्ण की उम्र क्या रही होगी?
उत्तर- जब श्रीकृष्ण ऊखल के सहारे चढ़कर छींके में रखा माखन खाया करते थे, उस समय उनकी उम्र सात-आठ साल की रही होगी, क्योंकि तभी तो सावधानी बरतने पर भी चोरी का भाव उनके मन में रहता था जिससे हड़बड़ाहट के कारण उतारते और खाते समय मक्खन बिखर जाता था।
प्रश्न 2. ऐसा हुआ हो कभी कि माँ के मना करने पर भी घर में उपलब्ध किसी स्वादिष्ट वस्तु को आपने चुपके-चुपके थोड़ा-बहुत खा लिया हो और चोरी पकड़े जाने पर कोई बहाना भी बनाया हो। अपनी आपबीती की तुलना श्रीकृष्ण की बाल-लीला से कीजिए।
उत्तर- रविवार को घर पर अतिथि आने वाले थे इसलिए पिताजी बाजार से उनके स्वागत-सत्कार के लिए शनिवार को ही मिठाइयाँ खरीदकर घर ले आये और उन्होंने माँ को रखने के लिए दे दीं। मैं यह बात जान गया और मिठाई का नाम सुनते ही मेरे मुँह में पानी आ गया। उसी समय माँ पड़ोस में कुछ लेने चली गयी। मौका देखकर मैं रसोई में घुस गया और डिब्बा खोलकर जैसे ही मैंने एक रसगुल्ला खाया कि माँ आ गयी। मैंने हड़बड़ाहट में डिब्बा बन्द किया लेकिन वह ठीक तरह से बन्द नहीं हुआ। उस डिब्बे को देखकर माँ ने मेरी चोरी पकड ली और पूछिका तू यहाँ क्या कर रहा था? मैंने कहा कि कुछ भी नहीं कर रहा था, केवल मिठाई का डिब्बा खोलकर रसगुल्ले गिन रहा था और देख रहा था कि कहीं चींटियाँ तो नहीं घुस गयी हैं। यदि घुस गयी हों तो उन्हें निकाल दूं। माँ मेरी बहानेपूर्ण बातों को सुनकर मुसकराई और उसने मुझे गले लगा लिया।
प्रश्न 3. किसी ऐसी घटना के विषय में लिखिए जब किसी ने आपकी शिकायत की हो और फिर आपके किसी अभिभावक (माता-पिता, बड़ा भाई-बहिन्, इत्यादि) ने आपसे उत्तर माँगा हो।
उत्तर- मैं गर्मियों में अपनी बहिन के ससुराल गया। वहाँ उनके पिछवाड़े में लीची का पेड़ था। मैं उस पर चढ़कर लीचीयाँ खाने लगा। हड़बड़ी में पेड़ से उतरते समय कुछ
हिन्दी — कक्षा-8
लीचियाँ नीचे गिर गईं और एक टहनी भी टूट गई। तभी जीजाजी की छोटी बहिन ने मुझे देख लिया और उसने बहिन से मेरी शिकायत कर दी। तब बहिन ने मुझे डाँटा और भविष्य में ऐसी गलती न करने के लिए कहा।
भाषा की बात-
प्रश्न 1. श्रीकृष्ण गोपियों का माखन चुरा-चुराकर खाते थे इसलिए उन्हें माखन चुराने वाला भी कहा गया है। इसके लिए एक शब्द दीजिए।
उत्तर- माखनचोर।
प्रश्न 2. श्रीकृष्ण के लिए पाँच पर्यायवाची शब्द लिखिए।
उत्तर- गिरधर, माखनचोर, बंशीधर, गोपाल, मुरारी।
प्रश्न 3. कुछ शब्द परस्पर मिलते-जुलते अर्थ वाले होते हैं, उन्हें पर्यायवाची कहते हैं और कुछ विपरीत अर्थ वाले भी। समानार्थी शब्द पर्यायवाची कहे जाते हैं और विपरीतार्थक शब्द विलोम। जैसे—
पर्यायवाची—
चन्द्रमा : शशि, इंदु, राका
मधुकर : भ्रमर, भौंरा, मधुप।
सूर्य : रवि, भानु, दिनकर।
विपरीतार्थक— दिन-रात, शवेत-श्याम, शीत-उष्णा।
पाठों से दोनों प्रकार के शब्दों को खोजकर लिखिए।
उत्तर-(i)
शब्द | पर्यायवाची |
मैया | = माता, जननी, माँ, धात्री। |
बलराम | = हलधर, बलदाऊ। |
हरि | = प्रभु, ईश्वर, नारायण, परमात्मा। |
मन्दिर | = घर, आलय, निकेतन। |
दूध | = दुग्ध, पय, क्षीर, गोरस। |
सूरज | = रवि, भानु, दिनकर, दिवाकर, भास्कर। |
दिवस | = दिन, दिवा, वासर, वार। |
सखा | = मित्र, सहचर, मीत, दोस्त। |
(ii) शब्द | विपरीतार्थक
कच्चा | = पक्का |
दिवस | = रात्रि |
समर्थ | = असमर्थ |
पक्ष | = विपक्ष |
प्रकट | = ओझल |
प्रधान | = गौण |
आकर्षण | = अपकर्षण |
लोभ | = निर्लोभ |
(अन्य शब्द ढूँढ़कर स्वयं लिखिए।)
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📝 2. नोट्स: मुख्य अवधारणाएँ, सूत्र व स्मरणीय तथ्य
महत्वपूर्ण नियम, सूत्र, परिभाषाएँ, भावार्थ एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।
पाठ सार: 'सूरदास के पद' भक्तिकाल के महाकवि सूरदास द्वारा रचित वात्सल्य रस के अद्वितीय पद हैं। प्रथम पद में बालकृष्ण अपनी चोटी न बढ़ने की शिकायत माता यशोदा से करते हैं और द्वितीय पद में गोपी माता यशोदा से कृष्ण द्वारा माखन चोरी की मधुर उलाहना देती है।
पाठ 11 : सूरदास के पद
*( सूरदास )*
सप्रसंग व्याख्याएँ–
(1) मैया, कबहिं बढ़ैगी ..................................................................................................................... हरि-हलधर की जोटी।
कठिन शब्दार्थ- किती = कितनी। पियत = पीते हुए। अजहुँ = आज भी। लांबी = लम्बी। काढ़त = कंघी करना। गुहत = गूँथना। भुइँ = भूमि। लोटी = लोटना। काँचॉ = कच्चा। पचि-पचि = बार-बार। चिरंजीवी = दीर्घायु हो। जोटी = जोड़ी।
⭐ 3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पात्मक प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक एवं लघूत्तरात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
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बहुविकल्पात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. श्रीकृष्ण को सबसे प्रिय लगता था—
प्रश्न 2. गोपी ने यशोदा को शिकायत की—
प्रश्न 3. कृष्ण यशोदा से पूछते थे—
प्रश्न 4. गोपी ने यशोदा से कृष्ण की शिकायत की थी—
प्रश्न 5. बाल कृष्ण माता यशोदा से किसके बारे में पूछ रहे हैं?
प्रश्न 6. बाल कृष्ण किसको लंबी और मोटी होने की बात कहते हैं?
प्रश्न 7. भैया बाल कृष्ण को क्या नहीं देती है?
प्रश्न 8. माता यशोदा ने किसमें डूबकर बाल कृष्ण को गले से लगा लिया?
प्रश्न 9. गोपी के अनुसार बाल कृष्ण किसके सहारे छींके पर चढ़े थे?
प्रश्न 10. गोपी कृष्ण को कैसा पुत्र कहती है?
प्रश्न 11. यशोदा कृष्ण की भोली बातें सुनकर क्या आशीर्वाद देती हैं?
प्रश्न 12. कृष्ण की चोटी बढ़ाने हेतु मैया उन्हें क्या-क्या खिलाती है?
268 संजीब आल इन वन
प्रश्न 13. यशोदा ने श्रीकृष्ण की चोटी को किसकी चोटी के समान लम्बी और मोटी होने का प्रलोभन दिया था?
प्रश्न 14. इस कविता में 'हलधर' किसे कहा गया है?
प्रश्न 15. इस कविता के अनुसार कौन दो व्यक्ति एक-दूसरे के भाई थे?
उत्तर-1. (घ) 2. (ग) 3. (ख) 4. (ग) 5. (क) 6. (क) 7. (घ) 8. (ग) 9. (क) 10. (ख) 11. (ख) 12. (ख) 13. (ग) 14. (ग) 15. (ग)।
रिक्त स्थानों की पूर्ति-
प्रश्न 16. रिक्त स्थानों की पूर्ति कोष्ठक में दिए गये सही शब्दों से कीजिए-
(i) किती बार ............ दूध पियत भई, यह अजहूँ है छोटी। (मोहिं/तोहिं)
(ii) .......... दिवस जानि घर सूनी ढूँढ़ि-ढूँढि आप ही आयौ। (सायं/दुपहर)
(iii) सूर स्याम कौं हटकि न राख्यौ तैं ही ....... अनोखौ जायौ। (पूत/सपूत)
उत्तर-(i) मोहिं (ii) दुपहर (iii) पूत।
अतिलघूत्तरसनात्मक प्रश्न-
प्रश्न 17. माता यशोदा दोनों भाइयों को क्या आशीर्वाद देती थीं?
उत्तर-माता यशोदा दोनों भाइयों को दीर्घजीवी होने का आशीर्वाद देती थीं।
प्रश्न 18. माँ यशोदा ने चोटी बढ़ने का कृष्ण को क्या प्रलोभन दिया?
उत्तर-माँ यशोदा ने कृष्ण को प्रलोभन दिया कि कच्चा दूध पीने से चोटी लम्बी हो जायेगी।
प्रश्न 19. कृष्ण कैसी चोटी चाहते हैं?
उत्तर-कृष्ण भाई बलराम के समान लम्बी और मोटी चोटी चाहते हैं।
प्रश्न 20. 'गोरस' का आशय क्या है?
उत्तर-गोरस का आशय है-दूध से बने पदार्थ-दही, मक्खन, घी आदि।
प्रश्न 21. निम्नलिखित पंक्ति का भाव लिखिए-
सूर स्याम कौं हरकि न राख्यौ
तैं ही पूत अनोखौ जायौ।
उत्तर-गोपी ने कहा कि तुम अपने पुत्र को धमका-समझकर नहीं रखती हो, तुमने ही कोई ऐसा अनोखा पुत्र पैदा किया है क्या!
प्रश्न 22. मैया यशोदा बाल कृष्ण को रोजाना पीने के लिए क्या देती है?
उत्तर-मैया यशोदा बाल कृष्ण को रोजाना पीने के लिए कच्चा दूध देती है।
प्रश्न 23. पहले पद में कृष्ण के किस रूप का चित्रण हुआ है?
उत्तर-पहले पद में कृष्ण के बाल रूप का चित्रण हुआ है।
प्रश्न 24. माँ यशोदा कृष्ण को माखन-रोटी खाने के लिए क्यों नहीं देती है?
उत्तर-माँ यशोदा कृष्ण को माखन-रोटी खाने के लिए इसलिए नहीं देती, क्योंकि उनके अनुसार माखन-रोटी खाने से चोटी नहीं बढ़ती है।
प्रश्न 25. बाल कृष्ण किसके घर किस समय और क्यों आए थे?
उत्तर-बाल कृष्ण गोपी के घर दोपहर के समय माखन-चोरी करने आए थे।
प्रश्न 26. बाल कृष्ण दूध-दही और माखन का क्या करते थे?
उत्तर-बाल-कृष्ण दूध-दही और माखन को खुद खाते, सखाओं को खिलाते तथा जमीन पर भी गिरा देते।
लघूत्तरसनात्मक प्रश्न-
प्रश्न 27. गोपी यशोदाजी के पास क्यों गयीं?
उत्तर-गोपी यशोदाजी के पास कृष्ण की शिकायत करने के लिए गयी कि वह दोपहर को सूना घर समझकर दरवाजा खोलकर माखन व दूध-दही खा जाता है और अपने साथियों को भी खिलाता है।
प्रश्न 28. आपके अनुसार श्रीकृष्ण बाल सखाओं के साथ दोपहर को ही माखन चोरी क्यों करते हैं?
उत्तर-श्रीकृष्ण बाल सखाओं के साथ दोपहर को माखन इसलिए चुराते थे, क्योंकि उस समय सभी गोपियाँ व औरतें घरों में आराम कर रही होती थीं। वातावरण एकदम शांत होता था। इसलिए यही समय माखन चोरी हेतु उत्तम होता था।
निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 29. गोपी ने यशोदा को यह उलाहना क्यों दिया कि क्या तूने ही अनोखा पुत्र पैदा किया है?
उत्तर-गोपियों को ऐसा लगता था कि यशोदा से कृष्ण की कितनी भी शिकायत करो लेकिन वे उससे कुछ भी नहीं कहतीं। यशोदा उनकी हर अच्छी-बुरी हरकत पर हमेशा ही हँसती रहती थीं। परिणामस्वरुप वे चाहकर भी कृष्ण को दण्डित न कर पाती थीं। इसलिए गोपी ने यशोदा को उलाहना दिया।