📖 1. समाधान: अभ्यास एवं पाठ्यपुस्तक के संपूर्ण हल
राजस्थान बोर्ड कक्षा 8 हिन्दी — पाठगत प्रश्न एवं अभ्यास के चरण-दर-चरण सटीक हल।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
कारण बताएँ-
प्रश्न 1. "मैंने उस कम्पनी के हिस्सेदार की तरफ पहली बार श्रद्धा-भाव से देखा।"
लेखक के मन में हिस्सेदार साहब के लिए श्रद्धा क्यों जग गई?
उत्तर-लेखक के मन में हिस्सेदार के लिए श्रद्धा इसलिए जग गयी, क्योंकि बस के टायर घिस कर बिल्कुल खराब हो रहे थे। परिणामस्वरूप पुलिया के ऊपर बस का टायर पंचर हो गया जिससे बस जोर से हिलकर रुक गई। अगर बस तेज गति से चल रही होती तो अवश्य ही उछल कर नाले में गिर जाती। इससे अन्य यात्रियों के साथ-साथ उसकी जान को भी खतरा था। पर वह जान को जोखिम में डालकर यात्रा कर रहा था। उत्सर्ग की जैसी भावना उसके अन्दर थी, वैसी अन्यत्र दुर्लभ थी। उसके साहस और बलिदान की भावना के हिसाब से उसे क्रान्तिकारी आन्दोलन का नेता होना चाहिए था।
प्रश्न 2. "लोगों ने सलाह दी कि समझदार आदमी इस शाम वाली बस से सफर नहीं करते।"
लोगों ने यह सलाह क्यों दी?
उत्तर-लोगों ने यह सलाह लेखक को इसलिए दी, क्योंकि वे यह जानते थे कि बस की हालत बहुत खराब है। रास्ते में बस कभी भी और कहीं भी धोखा दे सकती है। बस यात्रियों को गंतव्य तक ठीक से पहुँचा ही देगी, यह कहना मुश्किल था।
प्रश्न 3. "ऐसा जैसे सारी बस ही इंजन है और हम इंजन के भीतर बैठे हैं।"
लेखक को ऐसा क्यों लगा?
उत्तर-लेखक को ऐसा इसलिए लगा, क्योंकि जब बस को स्टार्ट किया गया तब पूरी बस जोर की आवाज करती हुई हिलने लगी। ऐसे में लेखक और उसके मित्रों को लगा कि जैसे सारी बस ही इंजन है और वे सब इंजन के अन्दर बैठे हैं।
प्रश्न 4. "गजब हो गया। ऐसी बस अपने आप चलती है।"
लेखक को यह सुनकर हैरानी क्यों हुई?
उत्तर-लेखक को यह सुनकर हैरानी इसलिए हुई कि देखने में तो बस अत्यन्त पुरानी खटारा-सी लग रही थी। उसे देखकर विश्वास नहीं हो पा रहा था कि यह सफर तय कर सकेगी। इसी कारण उसने कम्पनी के हिस्सेदार से पूछा कि यह बस चलती भी है, तब उन्होंने कहा कि यह अपने-आप चलती है। लेखक की हैरानी का यही कारण था।
प्रश्न 5. "मैं हर पेड़ को अपना दुश्मन समझ रहा था।"
लेखक पेड़ों को दुश्मन क्यों समझ रहा था?
उत्तर-बस की दशा ऐसी थी कि उसे जबरदस्ती चलाया जा रहा था। कभी भी उसके ब्रेक फेल हो सकते थे या कोई
बस का पुर्जा खराब हो सकता था। इस भयभीत मनःस्थिति में जो भी पेड़ आता उसे देखकर लेखक को डर लगता कि उसकी बस उससे टकरा जायेगी। इसलिए लेखक पेड़ों को अपना दुश्मन समझ रहा था।
पाठ से आगे-
प्रश्न 1. 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' किसके नेतृत्व में, किस उद्देश्य से तथा कब हुआ था? इतिहास की उपलब्ध पुस्तकों के आधार पर लिखिए।
उत्तर-'सविनय अवज्ञा आंदोलन' महात्मा गाँधीजी के नेतृत्व में मार्च, 1930 में अंग्रेजों के खिलाफ हुआ था। उस समय भारतीय समाज की दशा अत्यन्त दयनीय थी। गरीब जन केवल नमक के साथ रोटी खाकर अपना पेट भरते थे। ऐसे में अंग्रेज़ी शासन ने नमक पर भी टैक्स लगा दिया। इससे गाँधीजी बहुत दुःखी हुए। उन्होंने गुजरात के साबरमती आश्रम से 250 किलोमीटर की पैदल यात्रा करके समुद्र किनारे बसे दांडी गाँव में नमक बनाकर कानून भंग किया। इसे 'दांडी यात्रा', 'नमक सत्याग्रह' व 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' आदि नामों से पुकारा जाता है।
प्रश्न 2. सविनय अवज्ञा का उपयोग व्यंग्यकार ने किस रूप में किया है? लिखिए।
उत्तर-'सविनय अवज्ञा' का उपयोग व्यंग्यकार ने बस की जीर्ण-शीर्ण दशा तथा उसके किसी प्रकार चलते जाने के संदर्भ में किया है। लेखक जिस बस में बैठकर यात्रा कर रहा था उस बस के चलने पर उसे उसका एक भी भाग सही नहीं लग रहा था, फिर भी थोड़ी देर चलाने के बाद वह इस प्रकार चलने लगी जैसे उसके सभी भाग मिलकर सविनय अवज्ञा आन्दोलन की तरह एक हो गये हों। अर्थात् उसके सारे हिस्सों के पुर्जों के भेदभाव समाप्त हो गये हों। जिस प्रकार 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' के समय सभी भारतीयों ने आपसी धार्मिक भेदभाव और आपसी मतभेदों को भूलकर अंग्रेजों के द्वारा नमक पर टैक्स लगाने के विरोध में गाँधीजी जैसे कुशल ड्राइवर का साथ दिया उसी प्रकार बस के सभी पुर्जों ने एक होकर चलना शुरू कर दिया था।
प्रश्न 3. आप अपनी किसी यात्रा के खट्टे-मीठे अनुभवों को याद करते हुए एक लेख लिखिए।
उत्तर-पिछले वर्ष मैं अपने विद्यालय की ओर से आगरा घूमने गया था। बस में चालीस बच्चे और चार शिक्षक थे। बड़ी खुशी-खुशी हमारी बस शाम पाँच बजे आगरा के लिए रवाना हुई। जैसे ही बस चली वैसे ही हमने खेल-खलना व नाच-गाना शुरू कर दिया। शिक्षक भी बड़े आनन्द भाव से हमारा साथ दे रहे थे। बस तेज गति से दौड़ रही थी। उसने लगभग सवा घण्टे में दौसा पार कर लिया। सूर्य छिप गया था। हम सबने अपने-अपने खाने के डिब्बे खोले और
मज़े से अपने मनपसंद भोजन का आनन्द लेने लगे। भोजन करने के बाद हमने फिर मौज-मस्ती करनी प्रारम्भ कर दी। मौज-मस्ती करते-करते कब हम सबकी पलकें भारी हो गयीं और महुआ निकल गया इसका पता नहीं चला। भरतपुर के पास अचानक हमारी बस के आगे के एक पहिए का टायर पंक्चर हो गया। बस वहीं की वहीं रुक गई। वह स्थान एक सुनसान जंगल था। अचानक दो लुटेरे बस में चढ़ आए। उन्होंने हम सबसे नगदी लूट ली और भाग गए। इससे हम सब डर गए। ड्राइवर टायर बदलता ही रह गया। टायर बदलते ही हम सब सोच में पड़ गए कि अब क्या किया जाए? तभी एक शिक्षक ने प्रधानाचार्यजी को फोन कर घटित घटना की जानकारी उन्हें दी। उन्होंने कहा बच्चों का उत्साह बनाए रखो और सीधा 'गोल्डन होटल' में जाकर ठहरो। सुबह तक हम स्वयं वहाँ आ रहे हैं। सुबह होते-होते ही उन्होंने वहाँ पहुँचकर सबके चेहरों को मुस्कराहट दे दी और हम सब नाश्ता करके ताजमहल देखने खुशी-खुशी से गए। ताजमहल देखने के बाद हम सबने आगरा के बाजारों का भी भ्रमण बस द्वारा किया और दोपहर का भोजन कर बस द्वारा घर के लिए रवाना हो गए।
मन-बहलाना–
प्रश्न 1. अनुमान कीजिए यदि बस जीवित प्राणी होती, बोल सकती तो वह अपनी बुरी हालत और भारी बोझ के कष्ट को किन शब्दों में व्यक्त करती? लिखिए।
उत्तर- यदि बस जीवित प्राणी होती तो अवश्य ही वह अपनी दर्दभरी व्यथा कहती कि आज मैं जर्जर हो चुकी हूँ। अब मेरे शरीर का ढाँचा हिलने लगा है और जगह-जगह से टूट चुका है। खिड़कियों में गिने-चुने काँच रह गये हैं। मेरे अंग अब साथ नहीं दे रहे हैं। मेरी आँखों (हैडलाइट) की रोशनी भी मद्धिम पड़ गयी है। मेरे पैर (टायर) कहीं पर भी पंक्चर होकर ठहर जाते हैं।
मेरी ऐसी दयनीय स्थिति में भी मेरा मालिक बिना मेरे जर्जर शरीर का ख्याल किए इतनी सवारियाँ भर लेता है कि एक ओर जहाँ मुझसे चला नहीं जाता, वहीं मेरा अंग-अंग दुखने लगता है। लेकिन बेरहम मालिक को मुझ पर दया नहीं आती।
भाषा की बात–
प्रश्न 1. बस, वश, बस तीन शब्द हैं-इनमें बस सवारी के अर्थ में, वश अधीनता के अर्थ में और बस पर्याप्त (काफी) के अर्थ में प्रयुक्त होता है। जैसे-बस से चलना होगा। मेरे वश में नहीं है। अब बस करो।
उपर्युक्त वाक्यों के समान बस, वश और बस शब्द से दो-दो वाक्य बनाइए।
उत्तर-(1) बस सवारी के अर्थ में–
(2) वश अधीनता के अर्थ में–
(3) बस पर्याप्त (काफी) के अर्थ में–
प्रश्न 2. ‘‘हम पाँच मित्रों ने तय किया कि शाम चार बजे की बस से चलें। पन्ना से इसी कम्पनी की बस सतना के लिए घंटे भर बाद मिलती है।’’
ऊपर दिए गए वाक्यों में ने, की, से आदि शब्द वाक्य के दो शब्दों के बीच संबंध स्थापित कर रहे हैं। ऐसे शब्दों को कारक कहते हैं। इसी तरह दो वाक्यों को एक साथ जोड़ने के लिए 'कि' का प्रयोग होता है। कहानी में से दोनों प्रकार के चार वाक्यों को चुनिए।
उत्तर-(1) कारक चिह्नों से जुड़े वाक्य–
1. डॉक्टर मित्र ने कहा, ‘‘डरो मत, चलो।’’
2. ‘‘यह बस पूजा के योग्य थी।’’
3. ‘‘पेट्रोल की टंकी में छेद हो गया।’’
4. ‘‘नयी-नवेली बसों से ज्यादा विश्वसनीय है।’’
(2) कि योजक शब्द से बनाने वाले वाक्य–
1. हमें लग रहा था कि हमारी सीट के नीचे इंजन है।
2. यह समझ में नहीं आता था कि सीट पर हम बैठे हैं या सीट हम पर बैठी है।
3. कभी लगता कि सीट को छोड़कर बॉडी आगे भागी जा रही है।
4. हमें ग्लानि हो रही थी कि बेचारी पर लदकर हम चले जा रहे हैं।
प्रश्न 3. ‘‘हम फौरन खिड़की से दूर सरक गये। चाँदनी में रास्ता टटोलकर वह रेंग रही थी।’’ दिए गए वाक्यों में आई ‘सरकना’ और ‘रेंगना’ जैसी क्रियाएँ दो प्रकार की गतियाँ दर्शाती हैं। ऐसी कुछ और क्रियाएँ एकत्र कीजिए, जो गति के लिए प्रयुक्त होती हैं। जैसे-घूमना इत्यादि। उन्हें वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
उत्तर-गति के लिए प्रयुक्त होने वाले शब्द–
1. चलना = स्कूल का समय हो गया है। आओ स्कूल चलें।
2. दौड़ना = मुझे तेज दौड़ना अच्छा लगता है।
3. टहलना = प्रात:काल टहलना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।
4. जाना = सुष्मा घर से जा रही है।
प्रश्न 4. ‘‘काँच बहुत कम बचे थे। जो बचे थे, उनसे हमें बचना था।’’
इस वाक्य में 'बच' शब्द को दो तरह से प्रयोग किया गया है। एक 'शेष' के अर्थ में और दूसरा 'सुरक्षा' के अर्थ में।
हिंदी—कक्षा-8
नीचे दिए गए शब्दों को वाक्यों में प्रयोग करके देखिए। ध्यान रहे, एक ही शब्द वाक्य में दो बार आना चाहिए और शब्दों के अर्थ में कुछ बदलाव होना चाहिए।
प्रश्न 5. बोलचाल में प्रचलित अंग्रेजी शब्द 'फर्स्टक्लास' में दो शब्द हैं-फर्स्ट और क्लास। यहाँ क्लास का विशेषण है फर्स्ट। चूँकि फर्स्ट संख्या है। फर्स्ट क्लास संख्यावाचक विशेषण का उदाहरण है। 'महान आदमी' में किसी आदमी की विशेषता है महान। यह गुणवाचक विशेषण है। संख्यावाचक विशेषण और गुणवाचक विशेषण के दो-दो उदाहरण खोजकर लिखिए।
उत्तर— संख्यावाचक विशेषण-पाँच, चार, आठ-दस, पन्द्रह-बीस आदि।
गुणवाचक विशेषण-वृद्धावस्था, अनुभवी, दयनीय, बलवान आदि।
📝 2. नोट्स: मुख्य अवधारणाएँ, सूत्र व स्मरणीय तथ्य
महत्वपूर्ण नियम, सूत्र, परिभाषाएँ, भावार्थ एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।
पाठ सार: 'बस की यात्रा' हरिशंकर परसाई द्वारा लिखित एक प्रसिद्ध व्यंग्य है। इसमें यातायात व्यवस्था की जर्जर और खस्ताहाल स्थिति पर कटाक्ष किया गया है। लेखक एक अत्यंत पुरानी और जीर्ण-शीर्ण बस में यात्रा का हास्यप्रद वर्णन करते हुए परिवहन निगम व मुनाफाखोर बस मालिकों की गैर-जिम्मेदारी को उजागर करते हैं।
पाठ 2 : बस की यात्रा
( हरिशंकर परसाई )
कठिन शब्दार्थ– डाकिन = डाका डालने वाली। श्रद्धा = आदरभाव। वयोवृद्ध = अधिक उम्र की। सदियोंों = युगों। रंक = गरीब। निमित्त = कारण। निशान = चिह्न। गजब = अजीब बात। नवेली = नई। विदा = छोड़कर जाना। कूच करना = आगे बढ़ना। असहयोग = साथ न देना। सविनय = प्रार्थना सहित। अवज्ञा = न मानना। ट्रेनिंग = प्रशिक्षण। उम्मीद = आशा। लुभावने = मनभावन। इत्तेफाक = संयोग। क्षीण = कमजोर। बियाबान = सुनसान। अंत्येष्टि = अन्तिम क्रिया कर्म। उत्सर्ग = त्याग। दुर्लभ = कठिन। बाहि प्रसारित = स्वागत करने को तैयार। बेताबी = बेचैनी। तनाव = मानसिक दबाव। इमीनान = निश्चित। प्रस्थान = प्रस्थान।
पाठ का सार– 'बस की यात्रा' हरिशंकर परसाई द्वारा लिखित एक व्यंग्यात्मक कहानी है। इसमें लेखक ने यह बताना चाहा है कि किस प्रकार पुरानी और खराब हालत की बसें सड़कों पर चलती हैं। उनके मालिक केवल धन कमाना चाहते हैं। यात्रियों के जान-माल की रक्षा को लेकर उन्हें कोई चिन्ता नहीं रहती है।
हिन्दी-कक्षा-8
⭐ 3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पात्मक प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक एवं लघूत्तरात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
बहुविकल्पीय प्रश्न-
प्रश्न 1. बस के खराब हो जाने पर ड्राइवर ने उसे रोका-
प्रश्न 2. 'निमित्त' शब्द का अर्थ है-
प्रश्न 3. लेखक को बस लग रही थी-
प्रश्न 4. गाँधीजी के नेतृत्व में सविनय अवज्ञा आन्दोलन हुआ था-
प्रश्न 5. 'बस की यात्रा' नामक पाठ के लेखक हैं-
प्रश्न 6. पन्ना से सतना के लिए बस कितनी देर बाद मिलती है?
प्रश्न 7. 'बस की यात्रा' में बस कैसी थी?
प्रश्न 8. लेखक हरे-भरें पेड़ों को क्या समझ रहे थे?
प्रश्न 9. बस में कम्पनी के कौन सवार थे?
प्रश्न 10. डॉक्टर मित्र ने बस के बारे में क्या कहा?
प्रश्न 11. लेखक हर पेड़ को अपना दुश्मन क्यों समझ रहे थे?
प्रश्न 12. 'बस की यात्रा' व्यंग्य के व्यंग्यकार कौन हैं?
प्रश्न 13. लेखक एवं उनके साथियों को कहाँ की ट्रेन पकड़नी थी?
प्रश्न 14. चलते-चलते एकाएक बस क्यों रुक गई?
प्रश्न 15. लेखक एवं उनके मित्रों को किस बात के लिए जल्दी थी?
प्रश्न 16. 'बस की यात्रा' पाठ में कितने मित्रों ने तय किया कि शाम चार बजे की बस से चलें?
उत्तर— 1. (ख) 2. (ग) 3. (क) 4. (ख) 5. (ख) 6. (ख) 7. (ग) 8. (ग) 9. (ख) 10. (ख)
222 संजय आल इन वन
11. (ग) 12. (ख) 13. (क) 14. (घ) 15. (ख) 16. (घ)।
रिक्त स्थानों की पूर्ति–
प्रश्न 17. रिक्त स्थानों की पूर्ति कोष्ठक में दिए गये सही शब्दों से कीजिये–
(i) बस को देखा तो........उमड़ पड़ी। (श्रद्धा/भक्ति)
(ii) पूरी बस सविनय अवज्ञा आन्दोलन के दौर से ........ रही थी। (गुजर/घूम)
(iii) क्षीण चाँदनी में वृक्षों की छाया के नीचे वह बस बड़ी ........ लग रही थी। (दयनीय/सुन्दर)
(iv) मैंने उस कम्पनी के हिस्सेदार की तरफ ........बार श्रद्धाभाव से देखा। (पहली/दूसरी)
उत्तर– (i) श्रद्धा (ii) गुजर (iii) दयनीय (iv) पहली।
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न–
प्रश्न 18. लेखक और उसके मित्रों को कहाँ जाना था?
उत्तर– लेखक और उसके मित्र किसी काम से पन्ना आये थे, उन्हें जबलपुर जाना था।
प्रश्न 19. पन्ना से सतना के लिए कब बस मिलती थी?
उत्तर– पन्ना से सतना के लिए एक घण्टे बाद बस मिलती थी।
प्रश्न 20. डॉक्टर मित्र ने किसे अनुभवी बताया?
उत्तर– डॉक्टर मित्र ने बस को अनुभवी बताया।
प्रश्न 21. बस की सीट का किससे असहयोग चल रहा था?
उत्तर– बस की सीट का उसकी बॉडी से असहयोग चल रहा था।
प्रश्न 22. एकाएक बस के रुक जाने का क्या कारण था?
उत्तर– बस के एकाएक रुक जाने का कारण टंकी में छेद हो जाना था।
प्रश्न 23. लेखक ने वृद्धा किसे कहा है?
उत्तर– लेखक ने बस को वृद्धा कहा है।
प्रश्न 24. लेखक को इंजन के अन्दर बैठने का अनुभव क्यों हुआ?
उत्तर– बस में उत्पन्न शोर एवं कम्पन के कारण अनुभव हुआ।
प्रश्न 25. बस को किससे अधिक विश्वसनीय बताया जा रहा था?
उत्तर– बस को नई सुन्दर बसों से अधिक विश्वसनीय बताया जा रहा था।
प्रश्न 26. लेखक और उनके मित्रों को विदा करने आये लोगों की आँखें क्या कह रही थीं?
उत्तर– उनकी आँखें कह रही थीं–जो आया, सो जाएगा ही। राजा, रंग, फकीर, सब जायेंगे।
प्रश्न 27. कम्पनी के हिस्सेदार ने बस के विषय में क्या कहा?
उत्तर– हिस्सेदार ने कहा कि बस तो फर्स्ट क्लास है।
प्रश्न 28. लेखक और उसके मित्रों के मन में बस के संबंध में क्या आशंका थी?
उत्तर– लेखक और उसके मित्रों के मन में बस के संबंध में यह आशंका थी कि यह बस चलती भी है या नहीं।
प्रश्न 29. लेखक और उसके साथियों को किनसे बचना था?
उत्तर– लेखक और उसके साथियों को बस की खिड़कियों में लगे टूटे काँचों से बचना था।
प्रश्न 30. सविनय अवज्ञा आन्दोलन में गाँधीजी ने किसके प्रति और किसलिए गहरा रोष व्यक्त किया था?
उत्तर– सविनय अवज्ञा आंदोलन में गाँधीजी ने अंग्रेजों के प्रति 'नमक कानून' को लेकर गहरा रोष व्यक्त किया था।
प्रश्न 31. लेखक ने पहली बार किसकी ओर श्रद्धा भाव से देखा था?
उत्तर– लेखक ने पहली बार कम्पनी के हिस्सेदार की ओर श्रद्धा भाव से देखा था।
लघूत्तरात्मक प्रश्न–
प्रश्न 32. लेखक के मन में बस को देखकर श्रद्धा क्यों उमड़ पड़ी थी?
उत्तर– जिस बस में चढ़कर लेखक और उनके मित्र यात्रा करने वाले थे, उस बस की अवस्था बहुत जीर्ण-शीर्ण थी तथा बस सदियों के अनुभवी निशान लिए हुई थी।
प्रश्न 33. 'आया है सो जायेगा, राजा-रंक, फकीर' लेखक का पंक्ति से क्या आशय है?
उत्तर– लेखक का यहाँ आशय है कि इस संसार में जो आया है उसे एक दिन अवश्य जाना पड़ेगा, चाहे वह राजा हो, फकीर हो या भिक्षारी।
प्रश्न 34. सतना जाने वाली बस में यात्रियों के साथ और कौन जाने वाला था? उसका बस के संबंध में क्या विश्वास था?
उत्तर– सतना जाने वाली बस में यात्रियों के साथ बस-कम्पनी का एक हिस्सेदार भी जाने वाला था। उसका विश्वास था कि बस फर्स्ट क्लास है और अवश्य ही चलेगी।
प्रश्न 35. "हमें ग्लानि हो रही थी।" लेखक और उसके मित्रों किस कारण ग्लानि हो रही थी?
उत्तर– वह बस बहुत पुरानी थी। उसे लेखक और उसके मित्र ऐसी वृद्धा मान रहे थे, जिसके प्राण कभी भी समाप्त हो सकते थे। इसलिए ग्लानि हो रही थी।
प्रश्न 36. "इसे तो किसी क्रिन्तकारी आन्दोलन का नेता होना चाहिए।" लेखक ने ऐसा क्यों कहा?
उत्तर– बस कम्पनी का हिस्सेदार भी बस में सवार था। वह बस की बुरी हालत के विषय में जानता था, फिर भी वह अपने प्राणों की परवाह न कर उसमें सवार था।
प्रश्न 37. डॉक्टर मित्र ने बस के संबंध में क्या व्यंग्य किया?
हिन्दी — कक्षा-8
उत्तर— डॉक्टर मित्र ने व्यंग्य करते हुए कहा कि "डरने की कोई बात नहीं है, नयी-नवेली बसों से ज्यादा विश्वसनीय है। हमें बेटी की तरह प्यार से गोद में लेकर जायेगी।"
प्रश्न 38. लोगों ने लेखक को शाम वाली बस से न जाने की सलाह क्यों दी?
उत्तर— शाम को जाने वाली बस बड़ी ही जर्जर अवस्था में थी। वह कहीं पर भी चलते-चलते रुक सकती थी या दुर्घटनाग्रस्त हो सकती थी। इसलिए लोगों ने सलाह दी।
प्रश्न 39. शाम वाली बस पूजा के योग्य क्यों मानी जाने लगी थी?
उत्तर— शाम वाली बस इतनी पुरानी थी कि वह एक वृद्धा के रूप में दिखाई देने लगी थी जिसका अंग-अंग क्षीण हो चुका था। इसलिए वह पूजा के योग्य मानी जाने लगी थी।
प्रश्न 40. बस के स्टार्ट होने पर लेखक को ऐसा क्यों लगा कि हम इंजन के भीतर बैठे हैं?
उत्तर— क्योंकि बस के स्टार्ट होते ही सारी बस जोर-जोर से हिलने लगी थी और बैठे यात्री भी इंजन के पुर्जों की तरह हिल रहे थे।
निबन्धात्मक प्रश्न—
प्रश्न 41. लेखक का यह कहना कहाँ तक उचित है कि यह बस गाँधीजी के असहयोग और सविनय अवज्ञा आन्दोलनों के वक्त अवश्य जवान रही होगी?
उत्तर— जब लेखक ने बस के चलने पर उसके किसी भी हिस्से का आपसी सहयोग न देखा तो उसे गाँधीजी के असहयोग आन्दोलन अर्थात् भारतीयों द्वारा अंग्रेजों का साथ न देना याद आ गया और बस का सही रूप में न चलना बार-बार रुक कर चलना अर्थात् विरोध प्रदर्शित करना लेखक को सविनय अवज्ञा आन्दोलन की याद दिलाने लगा। इसीलिये लेखक ने कहा कि यह बस गाँधीजी के असहयोग और सविनय अवज्ञा आन्दोलन के समय जवान रही होगी। अर्थात् अपने आप को आजाद कराने के सभी दाँव-पेंच जानती है। लेखक का यह कथन पूर्णतया उचित है।
प्रश्न 42. हरिशंकर परसाई की रचना 'बस की यात्रा' की आज के समाज में सार्थकता सिद्ध कीजिए।
उत्तर— हरिशंकर परसाई की रचना 'बस की यात्रा' एक व्यंग्यात्मक कहानी है। यह आज के समाज में भी सार्थक है, क्योंकि आज भी हम देखते हैं कि राजमार्ग पर पुराने वाहन धड़ा-धड़ चल रहे होते हैं। उनके मालिकों को उनकी जर्जर अवस्था की और यात्रियों की जान की कोई परवाह नहीं होती है। इस स्थिति-सुधार हेतु सरकार भी प्रयत्नशील रहती है फिर भी बस-मालिक अपने मतलब अर्थात् अधिक से अधिक पैसा कमाने की लालसा से मनमानी करते हैं।
गद्यांश पर आधारित प्रश्न—
निम्नलिखित गद्यांशों को पढ़कर पूछे गये प्रश्नों के उत्तर लिखिए—
( 1 )
लोगों ने सलाह दी कि समझदार आदमी इस शाम वाली बस में सफर नहीं करते। क्या रास्ते में डाकू मिलते हैं? नहीं, बस डाकिन है।
बस को देखा तो श्रद्धा उमड़ पड़ी। खूब वयोवृद्ध थी। सदियों के अनुभव के निशान लिए हुए थी। लोग इसलिए इससे सफर नहीं करना चाहते कि वृद्धावस्था में इसे कष्ट होगा। यह बस पूजा के योग्य थी। उस पर सवार कैसे हुआ जा सकता है।
प्रश्न (क) बस को देखकर श्रद्धा क्यों उमड़ पड़ी?
(ख) लोगों ने बस को 'डाकिन' क्यों कहा?
(ग) लोग इस बस से यात्रा करने को राजी क्यों नहीं थे?
(घ) निम्नलिखित शब्दों के विपरीत अर्थ वाले शब्द गद्यांश में से ढूँढकर लिखिए—
(i) घृणा (ii) अयोग्य।
उत्तर— (क) क्योंकि बस खूब वयोवृद्ध थी। सदियों के अनुभव निशान लिए हुए थी।
(ख) वह बस रास्ते में जगह-जगह खराब होकर समय बर्बाद करती थी, सारा समय खा लेती थी, इस कारण उसे डाकिन कहा गया।
(ग) बस जर्जर हालत में थी, वह कहीं पर भी खराब हो सकती थी, धोखा दे सकती थी, इसलिए लोग उससे यात्रा करने को राजी नहीं थे।
(घ) (i) श्रद्धा (ii) योग्य।
( 2 )
बस सचमुच चल पड़ी और हमें लगा कि यह गाँधीजी के असहयोग और सविनय अवज्ञा आन्दोलनों के वक्त अवश्य जवान रही होगी। इसे ट्रेनिंग मिल चुकी थी। हर हिस्सा दूसरे से असहयोग कर रहा था। पूरी बस सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौर से गुजर रही थी। सीटों का बॉडी से असहयोग चल रहा था। कभी लगता सीट बॉडी को छोड़कर आगे निकल गई है। कभी लगता कि सीट को छोड़कर बॉडी आगे भागी जा रही है। आठ-दस मील चलने पर सारे भेदभाव मिट गए। यह समझ में नहीं आता था कि सीट पर हम बैठे हैं या सीट हम पर बैठै है।
प्रश्न (क) बस के आठ-दस मील चलने पर सारे भेदभाव कैसे मिट गए?
(ख) सविनय अवज्ञा आन्दोलन से गाँधीजी ने किसके प्रति रोष व्यक्त किया था?
(ग) 'सीटों का बॉडी से असहयोग चल रहा था।' लेखक ने ऐसा क्यों कहा है?
(घ) निम्नलिखित शब्दों के विपरीत अर्थ वाले शब्द गद्यांश में से ढूँढकर लिखिए—
(i) सहयोग (ii) समानता।
उत्तर-(क) बस के सभी हिस्से इंजन, सीट, बॉडी सभी अलग-अलग कम्पन व शोर कर रहे थे। कुछ समय बाद सभी अपने भेदभाव भुलाकर एक हो गए थे।
( 3 )
बस की रफ्तार अब पंद्रह-बीस मील हो गई थी। मुझे उसके किसी हिस्से पर भरोसा नहीं था। ब्रेक फेल हो सकता है, स्टीयरिंग टूट सकता है। प्रकृति के दृश्य बहुत लुभावने थे। दोनों तरफ हरे-भरे पेड़ थे जिन पर पक्षी बैठे थे। मैं हर पेड़ को अपना दुश्मन समझ रहा था। जो भी पेड़ आता, डर लगता कि इससे बस टकराएगी। वह निकल जाता तो दूसरे पेड़ का इंतजार करता। झील दिखती तो सोचता कि इसमें बस गोता लगा जाएगी।
प्रश्न (क) लेखक को बस को लेकर क्या भय सता रहा था?
(i) मद्धिम (ii) घिनौना।
उत्तर-(क) लेखक को बस की जर्जर हालत देखकर लग रहा था कि बस के ब्रेक फेल हो सकते हैं या इसका स्टीयरिंग टूट सकता है।
( 4 )
मैंने उस कम्पनी के हिस्सेदार की तरफ पहली बार श्रद्धाभाव से देखा। वह टायरों की हालत जानते हैं फिर भी जान हथेली पर लेकर इस बस से सफर कर रहे हैं। उत्सर्ग की ऐसी भावना दुर्लभ है। सोचा, इस आदमी के साहस और बलिदान भावना का सही उपयोग नहीं हो रहा है। इसे तो किसी क्रान्तिकारी आन्दोलन का नेता होना चाहिए। अगर बस नाले में गिर पड़ती और हम मर जाते तो देवता बाहें पसारे उसका इन्जार करते। कहते-
"वह महान आदमी आ रहा है जिसने एक टायर के लिए प्राण दे दिए। मर गया, पर टायर नहीं बदला।"
प्रश्न (क) लेखक ने बस के हिस्सेदार को क्रांतिकारी दल का नेता होना क्यों बताया?
(i) क्षुद्र (ii) कायरता।
उत्तर-(क) जिस प्रकार की उत्सर्ग भावना क्रांतिकारियों में होती है वैसी ही उत्सर्ग की भावना बस के हिस्सेदार में थी। बस का टायर न बदलकर वह अपने व सभी यात्रियों की जान उत्सर्ग करने को तैयार था।
( 5 )
दूसरा घिसा टायर लगाकर बस फिर चली। अब हमने वक्त पर पन्ना पहुँचने की उम्मीद छोड़ दी थी। पन्ना कभी भी पहुँचने की उम्मीद छोड़ दी थी। पन्ना क्या, कहीं भी, कभी भी पहुँचने की उम्मीद छोड़ दी थी। लगता था, जिंदगी इसी बस में गुजारनी है और इससे सीधे उस लोक को प्रस्थान कर जाना है। इस पृथ्वी पर उसकी कोई मंजिल नहीं है। हमारी बेताबी, तनाव खत्म हो गए। हम बड़े इत्मीनान से घर की तरह बैठ गए। चिंता जाती रही। हँसी-मजाक चालू हो गया।
प्रश्न (क) लेखक ने कहीं भी पहुँचने क्यों छोड़ दी?
(i) नाउम्मीद (ii) मौत।
उत्तर-(क) बस का टायर पंचर होने पर दोबारा घिसा टायर लगाकर उसी बस से वापिस यात्रा शुरू की गई थी।
हिन्दी — कक्षा-8
बस की ऐसी खराब हालत को देखते हुए लेखक ने कहीं भी पहुँचने की उम्मीद छोड़ दी थी।