📖 1. समाधान: अभ्यास एवं पाठ्यपुस्तक के संपूर्ण हल
राजस्थान बोर्ड कक्षा 8 हिन्दी — पाठगत प्रश्न एवं अभ्यास के चरण-दर-चरण सटीक हल।
पाठ 4 - भगवान के डाकिए
भाग 1: समाधान (पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर)
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
कविता से–
प्रश्न 1. कवि ने पक्षी और बादल को भगवान के डाकिए क्यों बताया है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- कवि ने पक्षी और बादल को भगवान के डाकिए बताया है, क्योंकि ये दोनों मनुष्य द्वारा बनाई सीमा-रेखा को पार कर एक देश से दूसरे देश में जाते हैं। पक्षी अपने पंखों द्वारा फूलों की सुगन्ध दूर-दूर के देशों तक फैलाते हैं और बादल एक देश के पानी से बनकर दूसरे देश में जाकर बरसते हैं। इसलिए ये मानो भगवान् की ओर से संसार में भाईचारा, प्रेम, सद्भाव और एकता का सन्देश देते हैं।
प्रश्न 2. पक्षी और बादल द्वारा लाई गयी चिट्ठियों को कौन-कौन पढ़ पाते हैं? सोचकर लिखिए।
उत्तर- पक्षी और बादलों द्वारा लाई गयी चिट्ठियों को मनुष्य के अलावा प्रकृति के विभिन्न अंग पेड़-पौधे, तालाब, नदियाँ, सागर तथा पहाड़ पढ़ पाते हैं।
प्रश्न 3. किन पंक्तियों का भाव है-
उत्तर-(ख) भाव–
हम तो केवल यह आँकते हैं
कि एक देश की धरती
दूसरे देश को सुगन्ध भेजती है।
और वह सौरभ हवा में तैरते हुए
पक्षियों की पाँखों पर तिरता है।
और एक देश का भाप
दूसरे देश में पानी
बनकर गिरता है।
प्रश्न 4. पक्षी और बादल की चिट्ठियों में पेड़-पौधे, पानी और पहाड़ क्या पढ़ पाते हैं?
उत्तर-पक्षी और बादल की चिट्ठियों में से पेड़-पौधे, पानी और पहाड़ ईश्वर द्वारा दिया गया प्रेम, सद्भाव, परस्पर भाईचारा और एकता का सन्देश पढ़ लेते हैं और उसी को विश्व के आँगन में प्रसारित करते हैं।
प्रश्न 5. "एक देश की धरती दूसरे देश को सुगन्ध भेजती है।" कथन का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-भाव-प्रकृति के लिए सभी मनुष्य समान हैं। अपने-पराये की भावना तो मनुष्य में स्वार्थ के कारण ही पनपती है। प्रकृति तो मनुष्य को समान दृष्टि से देखती है। वह प्रेम, एकता एवं सद्भाव की सन्देश रूपी सुगन्ध हवा और पक्षियों के माध्यम से एक देश से दूसरे देश को भेजती है जिससे मनुष्य-मनुष्य के बीच विश्वबन्धुत्व की भावना का प्रसार हो।
पाठ से आगे-
प्रश्न 1. पक्षी और बादल की चिट्ठियों के आदान-प्रदान को आप किस दृष्टि से देख सकते हैं ?
उत्तर-पक्षी और बादल की चिट्ठियों के आदान-प्रदान को हम प्रेम और सद्भाव का सन्देश देने की दृष्टि से देखते हैं, क्योंकि उन चिट्ठियों में ईश्वर के प्रेम, एकता, सद्भाव, भाईचारे और आपस में मिलकर रहने का सन्देश छिपा होता है। यह सन्देश किसी क्षेत्र विशेष के लिए न होकर पूरी धरती के लिए होता है।
प्रश्न 2. आज विश्व में कहीं भी संवाद भेजने और पाने का एक बड़ा साधन इंटरनेट है। पक्षी और बादल की चिट्ठियों की तुलना इंटरनेट से करते हुए दस पंक्तियाँ लिखिए।
उत्तर-आज विश्व में कहीं भी संवाद भेजने और उसे पाने का एक बड़ा साधन इन्टरनेट है। इस साधन के माध्यम से व्यक्ति जब चाहे, जहाँ चाहे, घर बैठे-बैठे अपना सन्देश अपने प्रियजन को भेज सकता है और साथ ही उत्तर रूप में उसका सन्देश पा सकता है। इससे बहुत कम समय लगता है जबकि पक्षी और बादल की चिट्ठियों में छिपा ईश्वरीय सन्देश सम्पूर्ण मानवता के लिए होता है। वहीं हमारा सन्देश केवल हमारे प्रियजनों के लिए ही होता है। उसमें सुख-दुःख की भावनाएँ समायी हुई होती हैं जबकि ईश्वरीय सन्देश में प्रेम, सद्भाव और एकता की भावनाएँ समायी हुई होती हैं।
प्रश्न 3. 'हमारे जीवन में डाकिए की भूमिका' क्या है? इस विषय पर दस वाक्य लिखिए।
उत्तर-हमारे जीवन में डाकिए की महत्त्वपूर्ण भूमिका है, क्योंकि वह पत्रों के माध्यम से एक मनुष्य से दूर-दराज बैठे दूसरे मनुष्य तक सन्देश पहुँचाता है। आज धन कमाने की लालसा व एकाकी परिवारों के प्रचलन से संयुक्त परिवार टूटते जा रहे हैं जिससे सगे-सम्बन्धी भी दूर-दूर रहने लगे
हैं। ऐसे में उनके विचार, भावनाएँ, सुख-दुःख की बातें पत्राचार द्वारा डाकिया के माध्यम से पहुँचायी जाती हैं। इसलिए जब डाकिया आता है तो किसी के लिए खुशियों का सन्देश और किसी के लिए दुःखों का सन्देश लेकर आता है। इस प्रकार डाकिया हमारे जीवन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसीलिए डाकिया को देवदूत से कम नहीं समझा जाता है।
अनुमान और कल्पना-
प्रश्न 1. डाकिया, इंटरनेट के वर्ल्ड वाइड वेब (डब्ल्यू. डब्ल्यू. डब्ल्यू.) तथा पक्षी और बादल-इन तीनों संवादवाहकों के विषय में अपनी कल्पना से एक लेख तैयार कीजिए। लेख लिखने के लिए आप 'चिट्ठियों की अनूठी दुनिया' पाठ का सहयोग ले सकते हैं।
उत्तर-डाकिया सरकारी नौकर होता है। वह मेहनती, ईमानदार और धैर्यवान होता है। वह मौसम की परवाह न करके अपने दायित्व को हर संभव निभाता रहता है। इन्टरनेट सूचना प्रसारण का आधुनिक साधन है, जो सूचनाओं की जानकारी भी देता है और उन्हें प्रेषित भी करता है। पक्षी हमारे यहाँ प्राचीन काल से ही संदेशवाहक के रूप में कार्य करते हुए आए हैं। पुराने जमाने में कबूतर, तोते आदि के माध्यम से संदेश भेजे और प्राप्त किए जाते थे। बादलों के माध्यम से कालिदास तथा अन्य कवियों ने अपने काव्यों में पात्रों के संदेश भिजवाने का वर्णन किया है।
भाग 2: पाठ सार (सारांश, कवि/लेखक परिचय एवं मुख्य भाव)
पाठ सार: 'भगवान के डाकिए' रामधारी सिंह 'दिनकर' द्वारा रचित कविता है। इसमें पक्षी और बादल को प्रकृति के ऐसे दूत बताया गया है जो किसी देश की सीमा को नहीं मानते। वे एक देश की सुगन्ध और प्यार को दूसरे देश तक पहुँचाकर विश्व-बंधुत्व, सौहार्द और प्रेम का संदेश देते हैं।
प्रश्न 8. सौरभ किस पर तैरता है?
प्रश्न 9. प्रकृति की क्या विशेषता है?
प्रश्न 10. मनुष्य को किस राह पर चलना चाहिए?
प्रश्न 11. ‘बाँचना’ का अर्थ है—
प्रश्न 12. मनुष्य भगवान के डाकिए का संदेश कितना समझ पाता है?
प्रश्न 13. पक्षी एक देश की सुगन्ध को दूसरे देश कैसे भेजते हैं?
प्रश्न 14. बादल किस प्रकार दो देशों के बीच की तुच्छ सीमा को झुठला देता है?
प्रश्न 15. एक देश का भाप कहाँ गिरता है?
उत्तर- 1. (घ) 2. (ग) 3. (ख) 4. (ग) 5. (घ) 6. (ग) 7. (क) 8. (ख) 9. (क) 10. (ग) 11. (ग) 12. (ख) 13. (ग) 14. (घ) 15. (घ)।
रिक्त स्थानों की पूर्ति—
प्रश्न 16. रिक्त स्थानों की पूर्ति कोष्ठक में दिए गये सही शब्दों से कीजिए—
(i) हम तो केवल यह ............... हैं। (ताकते/आँकते)
(ii) पक्षियों की पाँखों पर ............... है। (तिरता/फिरता)
(iii) हम तो ............... नहीं पाते। (जान/समझ)
(iv) दूसरे देश में पानी बनकर ............... है। (गिरता/झरता)
उत्तर-(i) आँकते (ii) तिरता (iii) समझ (iv) गिरता।
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न—
प्रश्न 17. पक्षी और बादलों के सन्देश कौन पढ़ने में सक्षम होते हैं?
उत्तर-पक्षी और बादलों के सन्देश पेड़-पौधे, सरोवर, पर्वत आदि पढ़ने में सक्षम होते हैं।
प्रश्न 18. कवि ने भगवान के डाकिए किन्हें कहा है?
उत्तर-कवि ने भगवान के डाकिए पक्षी और बादल को कहा है।
प्रश्न 19. ‘हम तो केवल यह आँकते हैं।’ हम केवल क्या आँकते हैं?
उत्तर-हम केवल यह आँकते हैं कि एक देश की धरती से दूसरे देश में सुगन्ध फैलती है।
प्रश्न 20. ‘भगवान के डाकिए’ कविता किसके द्वारा रचित है?
उत्तर-‘भगवान के डाकिए’ कविता रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वारा रचित है।
प्रश्न 21. बादल और पक्षी किसके द्वारा भेजे गए संदेश को लेकर आते हैं?
उत्तर-बादल और पक्षी भगवान द्वारा दिए संदेश को लेकर आते हैं।
प्रश्न 22. बादल और पक्षी एक देश से दूसरे देश को किस भावना से मुक्त होकर जाते हैं?
उत्तर-बादल और पक्षी एक देश से दूसरे देश को बैर भावना से मुक्त होकर जाते हैं।
प्रश्न 23. एक देश की धरती दूसरे देश को सुगंध भेजकर हमें क्या संदेश देती है?
उत्तर-एक देश की धरती दूसरे देश को सुगंध भेजकर हमें सद्भावना व एकता का संदेश देती है।
प्रश्न 24. प्रकृति के माध्यम से मनुष्य को क्या संदेश दिया गया है?
उत्तर-प्रकृति के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि
232 संरजीव आल इन वन
मनुष्य को भी प्रकृति की तरह ही भेदभाव त्याग कर ही रहना चाहिए।
लघूत्तरात्मक प्रश्न -
प्रश्न 25. पेड़-पौधे, पानी और पहाड़ ही भगवान के डाकिए का सन्देश समझने में क्यों सक्षम हैं?
उत्तर - पेड़-पौधे, पानी और पहाड़ ही भगवान के डाकिए का सन्देश समझने में सक्षम हैं, क्योंकि उनके मन में किसी के प्रति भेदभाव की भावना नहीं होती है और न इनकी कोई सीमा-रेखा ही होती है।
प्रश्न 26. 'भगवान के डाकिए' कविता में क्या सन्देश दिया गया है?
उत्तर - 'भगवान के डाकिए' कविता में पक्षी और बादल को भगवान का डाकिए बताकर सन्देश दिया गया है कि हमें आपस में मिल-जुलकर रहना चाहिए और जीवन में ऐसे कार्य करने चाहिए जिनकी सुगन्ध सारे विश्व में फैल जाए।
प्रश्न 27. निम्नलिखित पंक्तियों का भाव लिखिए-
‘और एक देश का भाप
दूसरे देश में पानी बनकर गिरता है।’
उत्तर - एक देश का पानी भाप बनकर बादल के रूप में दूसरे देश में जाता है और पानी बनकर बरसता है। इस प्रकार वह कोई भेदभाव नहीं रखता है।
निबन्धात्मक प्रश्न -
प्रश्न 28. पक्षी और बादलों को भगवान के डाकिए क्यों कहा गया है?
उत्तर - डाकिया एक मनुष्य का सन्देश दूसरे मनुष्य तक पहुँचाने में जिस प्रकार सक्षम होता है, उसी प्रकार पक्षी और बादल सभी को एक-दूसरे से प्रेम, सद्भाव और बन्धुत्व की भावना से रहने का सन्देश देते हैं। तभी तो पक्षी अपने पंखों से फूलों की सुगन्ध को दूर-दाराज तक के देशों में फैलाते हैं और बादल एक देश की भाप से बनकर दूसरे देश में जल रूप में बरसा करते हैं। इसी कारण से पक्षी और बादलों को भगवान के डाकिए कहा गया है।