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RBSE Class 8 Hindi Chapter 7 Solutions & Notes in Hindi

📅 अंतिम अपडेट: 2026-09-09📖 RBSE/NCERT Solutions
भाग 1 — समाधान (Solutions)

📖 1. समाधान: अभ्यास एवं पाठ्यपुस्तक के संपूर्ण हल

राजस्थान बोर्ड कक्षा 8 हिन्दी — पाठगत प्रश्न एवं अभ्यास के चरण-दर-चरण सटीक हल।

प्रसंग– प्रस्तुत साखी (दोहा) कबीरदास द्वारा रचित 'कबीर की साखियाँ' नामक पाठ से ली गई है। यहाँ कबीर ने मनुष्य को जाति-पाँति की भावना त्याग कर ज्ञान की बातों से ही मतलब रखने की सलाह दी है।

हिन्दी - कक्षा-8

व्याख्या—कबीरदासजी कहते हैं कि मनुष्य को कभी भी साधु की जाति के विषय में जानने की इच्छा नहीं करनी चाहिए। उससे अधिक से अधिक ज्ञान की बातें ही पूछनी चाहिए। कारण यह है कि मनुष्य का भला साधु की जाति से नहीं, बल्कि उसकी ज्ञानयुक्त बातों से ही होता है। जैसे मनुष्य को म्यान का मोल-भाव न करके तलवार का मोल-भाव करना चाहिए, क्योंकि मनुष्य को तलवार से काम लेना होता है, म्यान तो तलवार रखने के लिए होती है।

(2) आवत गारी ......................................................................................................... एक की एक ।।

कठिन शब्दार्थआवत = आती है। गारी = गाली। उलटत = पलट कर जवाब में।

प्रसंग—यह साखी कबीरदास द्वारा रचित 'कबीर की साखियाँ' नामक पाठ से ली गयी है। कबीर ने यहाँ गाली न देने की शिक्षा दी है।

व्याख्या—कबीर कहते हैं कि जब कोई व्यक्ति किसी को गाली देता है, तो वह एक ही होती है, किन्तु गाली सुनने वाला व्यक्ति जब पलटकर गाली देने वाले को गाली देगा, तब वह एक गाली नहीं देगा। वह तो एक गाली के स्थान पर अनेक गालियाँ देगा। इसलिए कबीरदासजी कहते हैं कि यदि गाली का जवाब नहीं दिया जाए, अर्थात् गाली के बदले में गालियाँ नहीं दी जाएँ, तो वह वही एक की एक रह जायेगी। अर्थात् गालियाँ देने और लगने की संख्या नहीं बढ़ेगी।

(3) माला तो कर ....................................................................................................... सुमिरन नाहिँ ।।

कठिन शब्दार्थमाला = मनकों की माला। कर = हाथ। जीभि = जिह्वा। मनुवाँ = मन। दहुँदिसि = दसों दिशाओं में। सुमिरन = ईश्वर का स्मरण।

प्रसंग—प्रस्तुत साखी कबीर द्वारा रचित 'कबीर की साखियाँ' शीर्षक से ली गयी है। इसमें कबीरदास ने आडम्बर एवं दिखावे की भक्ति करने वालों की आलोचना की है।

व्याख्या—कबीरदासजी कहते हैं कि भक्ति का दिखावा करने वाले व्यक्ति हाथों में माला फेरते रहते हैं और उनकी जीभ मुख के अन्दर चलती रहती है अर्थात् राम-नाम का उच्चारण करती रहती है किन्तु उनका मन दसों दिशाओं में भटकता रहता है। कबीरदासजी कहते हैं कि इस प्रकार यह ईश्वर का स्मरण नहीं है। अर्थात् भक्ति का दिखावा मात्र है, क्योंकि भक्ति के लिए मन की एकाग्रता आवश्यक है।

(4) कबीर घास ........................................................................................................... होइ ।।

कठिन शब्दार्थनींदिए = निंदा करना। पाँऊँ = पैर। तलिर = नीचे। उड़ि = उड़कर। पड़ै = पड़ जाता है। दुहेली = कष्टकारी।

प्रसंग—यह साखी कबीरदास द्वारा रचित 'कबीर की साखियाँ' नामक पाठ से ली गयी है। इसमें कबीर ने घास के छोटे से तिनके का भी अपमान न करने की सलाह दी है।

व्याख्या—कबीरदासजी कहते हैं कि घास की भी निंदा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि यह भले ही पैर तले रौंदी जाने वाली निर्बल होती है। लेकिन उसी घास का कोई तिनका आँख में पड़ जाए, तो वह अत्यधिक कष्टकारी बन जाता है। मनुष्य जब तक उस तिनके को अपनी आँख से निकाल नहीं देता, तब तक उसे चैन नहीं मिलता है। कहने का तात्पर्य यह है कि किसी भी आदमी को छोटा या कमजोर नहीं समझना चाहिए। शक्ति और अवसर पाकर वह भी कष्ट पहुँचा सकता है।

(5) जग में ................................................................................................................. सब कोय ।।

कठिन शब्दार्थजग = संसार। बैरी = दुश्मन। सीतल = शान्त। आपा = अहंकार। कोय = कोई।

प्रसंग—यह साखी कबीरदास द्वारा रचित 'कबीर की साखियाँ' नामक पाठ से ली गई है। इसमें कबीर ने मनुष्य को मन का अहम् त्याग कर सबसे मधुर वाणी में बोलने की शिक्षा दी है।

व्याख्या—कबीरदासजी कहते हैं कि इस संसार में कोई भी मनुष्य किसी का जन्म से दुश्मन नहीं है। बस मनुष्य को अपने व्यवहार और वाणी में शीतलता बनाए रखनी चाहिए। जो मनुष्य अपने अहंकार को त्यागकर दूसरों के साथ मधुर व्यवहार करते हैं, उन पर हर कोई दया करने को तैयार रहता है।

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

पाठ से-

प्रश्न 1. 'तलवार का महत्त्व होता है म्यान का नहीं' उक्त उदाहरण से कबीर क्या कहना चाहते हैं? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर- 'तलवार का महत्त्व होता है, म्यान का नहीं' इस उदाहरण के द्वारा कबीर यह कहना चाहते हैं कि महत्त्व हमेशा मुख्य कार्य या वस्तु का ही होता है। अनावश्यक वस्तु के विषय में जानकारी प्राप्त करने का कोई औचित्य नहीं होता है। जैसे तलवार खरीदने पर तलवार की चमक और उसकी धार के पैनेपन को देखकर ही उसका मोल-भाव किया जाता है, उसकी सुन्दर म्यान को देखकर नहीं। ठीक वैसे ही साधु-सन्तों के ज्ञान को महत्त्व देना चाहिए, उनकी जाति के बारे में नहीं पूछना चाहिए।

प्रश्न 2. पाठ की तीसरी साखी-जिसकी एक पंक्ति है-“मनुवाँ तो दहूँ दिसि फिरै, यह तो सुमिरन नाहिं'' के द्वारा कबीर क्या कहना चाहते हैं?

उत्तर- कबीरदासजी “मनुवाँ तो दहूँ दिसि फिरै, यह तो सुमिरन नाहिं'' पंक्ति के माध्यम से यह कहना चाहते हैं कि यदि ईश्वर-भक्ति के समय मन ईश्वर-भक्ति में लीन न होकर दसों दिशाओं में भटकता फिरे, अर्थात् अस्थिर बना रहे या बेकार की चिन्ता में लिप्त रहे तो ऐसी भक्ति बेकार है।

प्रश्न 3. कबीर घास की निन्दा करने से क्यों मना करते हैं? पढ़े हुए दोहे के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर- कबीर ने दोहे में पैरों के नीचे रौंदी जाने वाली घास के बारे में बताया है कि हमें कभी भी उस रौंदी जाने वाली घास को कमजोर नहीं समझना चाहिए, क्योंकि यदि उस घास का छोटा-सा तिनका भी उड़कर आँख में पड़ जाए तो वह आँख में किरकिरी कर देता है और बेचैनी ला देता है। इसके माध्यम से उन्होंने बताया है कि समाज में रहने वाले छोटे-से-छोटे अर्थात् कमजोर व्यक्ति को भी हमें निर्बल मानकर सताना या दबाना नहीं चाहिए, क्योंकि समय आने पर वह भी शक्ति प्राप्त कर हम पर आघात कर सकता है।

प्रश्न 4. मनुष्य के व्यवहार में ही दूसरों को विरोधी बना लेने वाले दोष होते हैं। यह भावार्थ किस दोहे से व्यक्त होता है?

उत्तर- यह भावार्थ निम्नलिखित दोहे से व्यक्त होता है-

जग में बैरी कोइ नहीं, जो मन सीतल होय।

या आपा को डारि दे, दया करै सब कोय॥

पाठ से आगे-

प्रश्न 1. "या आपा को डारि दे, दया करै सब कोय।"

"ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोय।"

इन दोनों पंक्तियों में 'आपा' को छोड़ देने या खो देने की बात की गई है। 'आपा' किस अर्थ में प्रयुक्त हुआ है? क्या 'आपा' स्वार्थ के निकट का अर्थ देता है या घमण्ड का?

उत्तर- यहाँ 'आपा' शब्द का प्रयोग 'घमण्ड' अर्थात् 'अहंकार' के लिए प्रयुक्त हुआ है। पहली पंक्ति में कबीर का कहना है कि मनुष्य को अपने स्वभाव से घमण्ड अर्थात् अहंकार को त्याग देना चाहिए ताकि सभी उसके प्रति कृपा का भाव रख सकें।

दूसरी काव्य पंक्ति में कबीर का कहना है कि मनुष्य को अपने स्वभाव से घमण्ड अर्थात् अहंकार को त्यागम कर मीठी वाणी का ही प्रयोग करना चाहिए ताकि सभी उसके प्रति अपनत्व भाव रख सकें।

प्रश्न 2. आपके विचार में 'आपा' और 'आत्म-विश्वास' में तथा 'आपा' और 'उत्साह' में क्या कोई अन्तर हो सकता है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर- आपा और आत्मविश्वास-आपा का अर्थ है— घमण्ड, जबकि आत्मविश्वास का अर्थ है—अपने ऊपर विश्वास। घमण्ड करने से मनुष्य का पतन होता है और आत्मविश्वास से मनुष्य आगे बढ़कर जीवन की ऊँचाइयों को छूता है।

आपा और उत्साह-आपा का अर्थ है—अहंकार, जबकि उत्साह का अर्थ है—किसी कार्य को करने में उमंग या जोश व साहस। अहंकार रखने से हानि होती है, परन्तु जोश या साहस से मनुष्य अपने जीवन-पथ पर आगे बढ़ता है।

प्रश्न 3. सभी मनुष्य एक ही प्रकार से देखते-सुनते हैं पर एक समान विचार नहीं रखते। सभी अपनी-अपनी मनोवृत्तियों के अनुसार कार्य करते हैं। पाठ में आयी कबीर की किस साखी से उपर्युक्त पंक्तियों के भाव मिलते हैं? एक समान होने के लिए आवश्यक क्या है? लिखिए।

उत्तर- कबीर द्वारा रचित निम्नलिखित साखी समाज में सभी को समान मानने का उपदेश देती है-

माला तो कर में फिरै, जीभ फिरै मुख माँहि।

मनुवाँ तो दहूँ दिसि फिरै, यह तो सुमिरन नाहिं॥

एकसमान होने के लिए आवश्यक है कि समाज में व्याप्त ऊँच-नीच, अमीर-गरीब, जातीय और वर्गों के भेदभाव समाप्त हो जाएँ। सभी धर्मों को समान महत्त्व दिया जाए और मनुष्य को केवल मनुष्य रूप में ही देखा जाए।

प्रश्न 4. कबीर के दोहों को साखी क्यों कहा जाता है? ज्ञात कीजिए।

उत्तर- कबीर के दोहों को साखी कहा जाता है, क्योंकि 'साखी' शब्द का अर्थ है—साक्षी, गवाह या प्रत्यक्ष रूप से, अर्थात् उन्होंने इस संसार-समाज को अपनी खुली आँखों से जैसा देखा, उसे वैसा ही व्यक्त किया है। वे

हिन्दी-कक्षा-8

समाज में व्याप्त कुरीतियों, अन्धविश्वासों और आडम्बरों को समाप्त करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने इनका विरोध कर जीवन-सत्य को अपनी वाणी में व्यक्त किया है।

भाषा की बात-

• बोलचाल की क्षेत्रीय विशेषताओं के कारण शब्दों के उच्चारण में परिवर्तन होता है। जैसे वाणी शब्द बानी बन जाता है। मन से मनवा, मनुवा आदि हो जाता है। उच्चारण के परिवर्तन से वर्तनी भी बदल जाती है। नीचे कुछ शब्द दिए जा रहे हैं, उनका वह रूप लिखिए जिससे आपका परिचय हो।

ग्यान, जीभि, पाऊँ, तलि, आँखि, बरी।

उत्तर–

शब्द

परिचित रूप

शब्द

परिचित रूप

ग्यान

ज्ञान

तलि

तले, नीचे

जीभि

जीभ

आँखि

आँख

पाऊँ

पाँव

बरी

बड़ी

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भाग 2 — नोट्स (Notes & Summary)

📝 2. नोट्स: मुख्य अवधारणाएँ, सूत्र व स्मरणीय तथ्य

महत्वपूर्ण नियम, सूत्र, परिभाषाएँ, भावार्थ एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।

पाठ सार: 'कबीर की साखियाँ' संत कबीरदास जी के नीतिपरक दोहों का संकलन है। इनमें जाति-पाँति से ऊपर उठकर ज्ञान का सम्मान करने, कटु वचनों का त्याग करने, मन की एकाग्रता साधने और आडम्बरों से दूर रहने का व्यावहारिक जीवन-दर्शन सिखाया गया है।

पाठ 7 : कबीर की साखियाँ

( कबीर )

सप्रसंग व्याख्याएँ–

( 1 ) जाति न पूछो..........................................................................................................................दो म्यान ।।

कठिन शब्दार्थ– साधु = साधु, सन्त। मोल = मूल्य। म्यान = जिसमें तलवार रखते हैं।

भाग 3 — परीक्षा उपयोगी प्रश्न (Important Q&A)

3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पात्मक प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक एवं लघूत्तरात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

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बहुविकल्पीय प्रश्न–

प्रश्न 1. कबीर के अनुसार तलवार खरीदते समय मोल-भाव करना चाहिए—

(क) तलवार की धार देखकर
(ख) तलवार की मजबूती देखकर
(ग) तलवार की म्यान देखकर
(घ) तलवार की लम्बाई देखकर

प्रश्न 2. कबीरजी के अनुसार मनुष्य का मन होना चाहिए—

(क) निर्मल
(ख) कठोर
(ग) शान्त
(घ) पवित्र

प्रश्न 3. कबीर के अनुसार मनुष्य को मतलब रखना चाहिए—

(क) ज्ञान की बातों से
(ख) स्वार्थ की बातों से
(ग) दया-धर्म की बातों से
(घ) संसार की बातों से

प्रश्न 4. कबीर के अनुसार मनुष्य को अपनी वाणी और व्यवहार में बनाये रखनी चाहिए—

(क) कठोरता
(ख) शीतलता
(ग) सरलता
(घ) दयाभाव

प्रश्न 5. कबीर ने किसकी जाति पूछने से मना किया है?

(क) साधु की
(ख) विद्वान की
(ग) महाजनों की
(घ) निर्धन की

प्रश्न 6. एक गाली अनेक कब हो जाती है?

(क) बढ़ाने पर
(ख) उल्टा देने पर
(ग) बोलने पर
(घ) चुप रहने पर

प्रश्न 7. कबीर के अनुसार ईश्वर की भक्ति कैसे की जा सकती है?

(क) हाथ में माला फेर कर
(ख) मन को बहला कर
(ग) मन को एकाग्र कर
(घ) राम-नाम का जाप करके

प्रश्न 8. किसी भी मनुष्य को कैसा नहीं समझना चाहिए?

(क) छोटा या कमजोर
(ख) बड़ा या श्रेष्ठ
(ग) शत्रु या मित्र
(घ) चोर या साहूकार

प्रश्न 9. मनुष्य को किसका त्याग कर देना चाहिए?

(क) प्रेम का
(ख) छल-कपट का
(ग) वैर-भाव का
(घ) अहंकार का

प्रश्न 10. 'आपा' शब्द का प्रयोग किस अर्थ में हुआ है?

(क) अपनापन
(ख) परायापन
(ग) घमंड
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 11. अहंकार क्यों त्यागना चाहिए?

(क) ताकि मन निर्मल हो जाए
(ख) ताकि मन का अज्ञान समाप्त हो जाए
(ग) उस पर सब कृपाभाव बनाए रखते हैं
(घ) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 12. "कबीर घास न नींदिए………… दुहेली होई" दोहे से क्या पता चलता है?

(क) सबके साथ प्यार से रहो
(ख) छोटे-बड़े में भेद मत करो
(ग) सबके महत्त्व को जानो
(घ) उपयुक्त सभी कथन सत्य हैं

प्रश्न 13. मन को शीतल रखने से क्या होता है?

(क) अहंकार नष्ट होता है (ख) प्यार बढ़ता है
(ग) वैर-भाव समाप्त होता है
(घ) सभी कथन सत्य हैं

प्रश्न 14. गाली के बदले गाली देने से क्या परिणाम होता है?

(क) क्रोध शांत होता है (ख) लड़ाई नहीं होती
(ग) सुलह जल्दी होती है (घ) वैर बढ़ता जाता है

प्रश्न 15. यदि कोई हमें गाली दे तो हमें क्या करना चाहिए?

(क) ईंट का जवाब पत्थर से देना चाहिए
(ख) कायर नहीं बनना चाहिए
(ग) चुप रहना चाहिए
(घ) उसको अनेक गालियाँ देनी चाहिए

उत्तर-1. (क) 2. (ग) 3. (क) 4. (ख) 5. (क) 6. (ख) 7. (ग) 8. (क) 9. (घ) 10. (ग) 11. (ग) 12. (घ) 13. (घ) 14. (घ) 15. (ग)।

रिक्त स्थानों की पूर्ति–

प्रश्न 16. रिक्त स्थानों की पूर्ति कोष्ठक में दिए गए सही शब्दों से कीजिए–

(i) साधु से ........................ पूछना चाहिए। (जाति/ज्ञान)

(ii) भक्ति के लिए मन की ........................ आवश्यकता है। (एकाग्रता/चंचलता)

(iii) कबीर ........................ न नींदिए। (घास/व्यक्ति)

(iv) मनुष्य को दूसरों से ........................ से व्यवहार करना चाहिए। (कठोरता/मधुरता)

उत्तर— (i) ज्ञान (ii) एकाग्रता (iii) घास (iv) मधुरता।

अतिलघूत्तरत्मक प्रश्न—

प्रश्न 17. साधु से क्या पूछना चाहिए और क्या नहीं?

उत्तर— साधु से ज्ञान पूछना चाहिए, उसकी जाति नहीं पूछनी चाहिए।

प्रश्न 18. कबीर ने किसे उलटने के लिए नहीं कहा है?

उत्तर— कबीर ने गाली को उलटने के लिए नहीं कहा है।

प्रश्न 19. कबीर किस भक्ति को ईश्वर की सच्ची भक्ति नहीं मानते हैं?

उत्तर— कबीर आडम्बरपूर्ण दिखावे की भक्ति को ईश्वर की सच्ची भक्ति नहीं मानते हैं।

प्रश्न 20. किसका त्याग करने पर मनुष्य का मन शान्त हो जाता है?

उत्तर— घमंड का त्याग करने पर मनुष्य का मन शान्त हो जाता है।

प्रश्न 21. ‘तलवार का मोल करने और म्यान का मोल न करने’ से कबीर ने क्या सन्देश दिया है?

उत्तर— कबीर ने सन्देश दिया है कि साधु-सन्त के शरीर की बाहरी वेशभूषा या आकार न देखकर उसके ज्ञान की परख करनी चाहिए।

प्रश्न 22. निम्नलिखित पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए—

*“या आपा को डारि दे, दया करै सब कोय।”*

उत्तर— इसका भाव है कि मनुष्य घमण्ड न करे, विनम्र एवं सरल स्वभाव का रहे, तो सभी उस पर दया करते हैं।

प्रश्न 23. ‘‘जाति न पूछो साध की.........दो ग्यान।’’ इस साखी में किस भाव की प्रधानता है?

उत्तर— इस साखी में उपदेशात्मक भाव की प्रधानता है।

प्रश्न 24. गाली सुनने वाला व्यक्ति जब गाली सुनता है, तब क्या करता है?

उत्तर— गाली सुनने वाला व्यक्ति जब गाली सुनता है, तब वह पलटकर अनेक गालियाँ देने लगता है।

प्रश्न 25. भक्ति का दिखावा करने वाले व्यक्ति क्या करते रहते हैं?

उत्तर— भक्ति का दिखावा करने वाले व्यक्ति हाथों में माला फेरते रहते हैं।

प्रश्न 26. मन के बारे में कबीर ने क्या कहना चाहा है?

उत्तर— मन के बारे में कबीर ने कहना चाहा है कि यह चंचल है। इसकी चंचलता के कारण भक्ति का कोई मूल्य नहीं है।

प्रश्न 27. कबीर ने किसकी निंदा करने को मना किया है?

उत्तर— कबीर ने पाँव तले रोंदी जाने वाली घास की निंदा करने को मना किया है।

प्रश्न 28. ‘पाँउँ तलि होई’ से क्या तात्पर्य है?

उत्तर— ‘पाँउँ तलि होई’ से तात्पर्य है—पैरों के नीचे दबने वाली घास।

प्रश्न 29. कबीर के अनुसार संसार में किसका शत्रु नहीं होता है?

उत्तर— जिस मनुष्य का मन शांत और निर्मल होता है, उसका संसार में कोई शत्रु नहीं होता है।

प्रश्न 30. मनुष्य को किस दुर्गुण का त्याग कर देना चाहिए?

उत्तर— मनुष्य को अहंकार रूपी दुर्गुण का त्याग कर देना चाहिए।

लघूत्तरत्मक प्रश्न—

प्रश्न 31. एक से अनेक गालियाँ कब हो जाती हैं?

उत्तर— जब कोई व्यक्ति किसी को एक गाली निकालता है, तब दूसरा उसके जवाब में पलट कर गाली देने लगता है तो इस प्रकार एक गाली अनेक में बदल जाती है।

प्रश्न 32. कबीर ने घास के माध्यम से क्या कहना चाहा है?

उत्तर— हमें कभी भी किसी भी मनुष्य को छोटा या कमज़ोर नहीं समझना चाहिए, क्योंकि शक्ति और अवसर पाकर पैरों तले दबाई हुई घास के तिनके की तरह वह भी हमें शारीरिक एवं मानसिक कष्ट पहुँचा सकता है।

प्रश्न 33. गाली की संख्या एक कैसे रह सकती है?

उत्तर— जब कोई व्यक्ति हमें गाली निकाले और हम उसका उत्तर मौन रह कर दें, इस स्थिति में गाली की संख्या एक की एक ही रह सकती है।

प्रश्न 34. कबीर ने मनुष्य को अहंकार छोड़ने का सन्देश क्यों दिया है?

उत्तर— कबीर ने मनुष्य को अहंकार त्यागने का सन्देश इसलिए दिया है, क्योंकि जो अहंकार त्याग देता है उस पर सभी कृपा भाव बनाए रखते हैं, और उसके मन को शक्ति मिलती है।

प्रश्न 35. कबीर ने कैसी भक्ति को निष्फल बताया है?

उत्तर— कबीर ने भक्ति के सम्बन्ध में बताया है कि जब मन दसों दिशाओं में घूम रहा हो अर्थात् व्यर्थ की मोह-माया में उलझा हो और माला हाथ में तथा जीभ मुख में चल रही हो, ऐसी स्थिति की की जाने वाली भक्ति का कोई लाभ नहीं होता है।

हिन्दी — कक्षा-8

निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 36. कबीर की साखियाँ क्या सन्देश देती हैं?

उत्तर— कबीर की साखियाँ यह सन्देश देती हैं कि हमें साधु-जन की जाति न पूछकर उससे ज्ञान प्राप्त करने की कोशिश करनी चाहिए। किसी को अपशब्द नहीं कहने चाहिए। मन को एकाग्र करके ईश्वर की भक्ति करनी चाहिए। पाखण्डों से बचना चाहिए। समाज में सभी को समान भाव से देखना चाहिए और मन को शान्त रखना चाहिए।