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संस्कृत (Sanskrit)हिंदी माध्यम2026-27

RBSE Class 8 Sanskrit Chapter 12 Solutions & Notes in Hindi

📅 अंतिम अपडेट: 2026-09-09📖 RBSE/NCERT Solutions
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भाग 1 — समाधान (Solutions)

📖 1. समाधान: अभ्यास एवं पाठ्यपुस्तक के संपूर्ण हल

राजस्थान बोर्ड कक्षा 8 संस्कृत — पाठगत प्रश्न एवं अभ्यास के चरण-दर-चरण सटीक हल।

पाठ १२ - कः रक्षति कः रक्षितः?

भाग 1: पाठ्यपुस्तकस्य प्रश्नोत्तराणि (अभ्यासः)

पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. प्रश्नानामुत्तराणि एकपदेन लिखत—

( क ) केन पीडितः वैभवः बहिरागतः?

( ख ) भवनेत्यादीनां निर्माणाय के कर्त्यन्ते?

( ग ) मार्गे किं दृष्ट्वा बालाः परस्परं वार्तालाप कुर्वन्ति?

( घ ) वयं शिक्षिताः अपि कथमाचरामः?

( ङ ) प्लास्टिकस्य मृत्तिकायाम् लयाभावात् कस्य कृते महती क्षतिः भवति?

( च ) अद्य निदाघातपतमस्य किं शुष्कतां याति?

उत्तरम्— (क) प्रचण्डोष्मणा।

अथवा

प्रचण्डोष्मणा पीडितः वैभवः बहिरागतः।

(ख) वृक्षाः।
(ग) अवकरभाण्डारम्। (घ) अशिक्षातः इव।
(ङ) पर्यावरणस्य कृते। (च) तालुः।

प्रश्न 2. पूर्णवाक्येन उत्तराणि लिखत—

( क ) परमिन्दर् गृहात् बहिरागत्त्य किं पश्यति ?

उत्तरम्—परमिन्दर् गृहात् बहिरागत्त्य पश्यति यत् वायुवेगः सर्वथाऽवरुद्धः।

( ख ) अस्माभिः केषां निर्माणाय वृक्षाः कर्त्यन्ते?

उत्तरम्—अस्माभिः बहुभूमिकभवनानां, भूमिगतमार्गाणाम्, मैट्रोमार्गणाम्, उपरिगामिसेतूनाम् मार्गेत्यादीनां निर्माणाय वृक्षाः कर्त्यन्ते।

( ग ) विनयः रोजलिनमाहूय किं वदति?

उत्तरम्—विनयः रोजलिनमाहूय वदति यत्—"महोदये! कृपां कुरु मार्गे एतत् तु सर्वथा अशोभनं कृत्यम्। अस्मद्सदृशैः बालेभ्यः भवतीसदृशैः एवं संस्काराः देयाः।"

( घ ) रोजलिन् आगत्य किं करोति?

उत्तरम्—रोजलिन् आगत्य बालैः साकं स्वक्षिथमवरकं मार्गे विकीर्णमन्यदकरं चापि संगृह्य अवकरकण्डोले पातयति।

( ङ ) अन्ते जोसेफः पर्यावरणरक्षायै कः उपायः बोधयति?

उत्तरम्—अन्ते जोसेफः पर्यावरणरक्षायै बोधयति यत् "अस्माभिः पित्रोः शिक्षकाणां च सहयोगेन प्लास्टिकस्य विविधपक्षाः विचारणीयाः। पर्यावरणं सह पशवः अवि रक्षणीयः।"

प्रश्न 3. रेखांकितपदमादृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरूत—

( क ) जागरूकतया एव स्वच्छताऽभियानम्पि गतिं प्राप्स्यति।

( ख ) धेनू शाकफलानामावरणैः सह प्लास्टिकस्यूपमपि खादति स्म।

( ग ) वायुवेगः सर्वथाऽवरुद्धः आसीत्।

( घ ) सर्वे अवकरं संगृह्य अवकरकण्डोले पातयन्ति।

( ङ ) अधुना प्लास्टिकनिर्मितानि वस्तुनि प्रायः प्राप्यन्ते।

( च ) सर्वे नदीतीरं प्राप्ताः प्रसन्नाः भवति।

हिन्दी अनुवाद—

जोसेफ — मित्रों! यहाँ-वहाँ बहुमंजिले भवनों, भूमिगत मार्गों, विशेष रूप से मैट्रो-मार्गों, ऊर्ध्वगामी पुलों, मार्गों आदि के निर्माण के लिए वृक्ष काटे जा रहे हैं, फिर अन्य क्या हमारे द्वारा अपेक्षा की जा सकती है? हम तो भूल ही गए हैं कि—

श्लोक का भावार्थ— जिस प्रकार एक कुपुत्र के द्वारा सम्पूर्ण कुल (वंश) को नष्ट कर दिया जाता है, उसी प्रकार अग्नि से जलते हुए एक सूखे वृक्ष के द्वारा ही उस वन को पूरा जला दिया जाता है।

परमिन्दर् — हाँ, यह भी सब तरह से सत्य है। आइए नदी के किनारे चलते हैं। शायद वहाँ कुछ शान्ति प्राप्त कर सकेंगे।

5. ( नदीतीरं गन्तुकामाः बालाः ..................................................................... स्वच्छतां प्रति ध्यानं न दीयते ।

कठिन-शब्दार्थ–गन्तुकामाः = जाने के इच्छुक। अवकरभाण्डारम् = कूड़े के ढेर को। प्लास्टिकस्यूतानि = प्लास्टिक के लिफाफे। प्रक्षिप्तम् = फेंका हुआ। इवाचरामः = (इव + आचरामः) के समान व्यवहार करते हैं।

हिन्दी अनुवाद—(नदी के किनारे जाने के इच्छुक बालक इधर-उधर कूड़े के ढेर को देखकर बातचीत करते हैं।)

जोसेफ — देखो मित्रो, इधर-उधर प्लास्टिक के लिफाफे और दूसरा कूड़ा फेंका हुआ है। कहा जाता है कि स्वच्छता स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है परन्तु हम शिक्षित होने पर भी अशिक्षित के समान व्यवहार करते हैं, इस प्रकार से.......

वैभव — घरों को तो हमारे द्वारा नित्य स्वच्छ किये जाते हैं परन्तु किसलिए अपने पर्यावरण की स्वच्छता की ओर ध्यान नहीं दिया जाता है?

6. विनयः–पश्य-पश्य उपरितः ..................................................................... चापि सङ्गृह्य अवकरकण्डोले पातयति )

कठिन-शब्दार्थ–उपरितः = ऊपर से। अवकरः = कूड़ा। कृत्यम् = कार्य। देयाः = देने योग्य। क्षम्यताम् = क्षमा कीजिए। विकीर्णम् = बिखरा (फैला) हुआ। संगृह्य = इकट्ठा करके। अवकरकण्डोले = कूड़ेदान में।

हिन्दी अनुवाद—

विनय — देखो-देखो ऊपर से इस समय भी कूड़ा रास्ते में फेंका जा रहा है। (बुलाकर) महोदय! रास्ते में चलने वालों पर कृपा करो। यह तो सब तरह से अशोभनीय कार्य है। हमारे जैसे बालकों के लिए आप जैसों के द्वारा इस प्रकार से संस्कार देने योग्य हैं?

रोजलिन् — हाँ पुत्र! सब तरह से सही कहते हो। क्षमा कीजिए। अभी आता हूँ। (रोजलिन् आकर के बालकों के साथ स्वयं के द्वारा फेंके गये कूड़े को तथा रास्ते में बिखरे हुए अन्य कूड़े को भी इकट्ठा करके कूड़ेदान में डालता है।)

7. बालाः–एवमेव जागरूकतया एव ..................................................................... पिहिते अवकरकण्डोले क्षिपन्ति )

कठिन-शब्दार्थ–शाकफलानामावरणैः सह = सब्जियों और फलों के छिलकों के साथ। यथाकथञ्चित् = जिस-किसी भी प्रकार से। आहवयन्ति = बुलाते हैं। भोजयन्ति = भोजन कराते हैं। अपसार्य = हटाकर। पिहिते = ढके हुए।

हिन्दी अनुवाद—

बालक– इसी प्रकार जागरूकता से ही प्रधानमंत्री महोदय का स्वच्छता-अभियान गति को प्राप्त करेगा।

विनय — देखो, देखो वहाँ गाय सब्जियों और फलों के छिलकों के साथ प्लास्टिक के लिफाफे को भी खा रही है। जिस किसी भी तरह उसे रोकना चाहिए। (रास्ते में केले का फल बेचने वाले को देखकर बालक केले खरीद कर गाय को बुलाते हैं और भोजन कराते हैं तथा रास्ते से प्लास्टिक के लिफाफों (थैलियों) को हटाकर ढके हुए कूड़ेदान में डालते हैं।)

8. परमिन्दर्–प्लास्टिकस्य मृत्तिकायां ..................................................................... तु प्लास्टिकनिर्मितानि भवन्ति।

कठिन-शब्दार्थ–लयाभावात् = नष्ट नहीं होने से। महती = अत्यधिक। क्षतिः = हानि। कार्पासेन = कपास से। चर्मणा = चमड़े से। लाक्षया = लाख से। काष्टेन = लकड़ी से। घटिपट्टिका = घड़ी की पट्टी।

हिन्दी अनुवाद—

परमिन्दूरु — प्लास्टिक के मिट्टी में नष्ट न होने से हमारे पर्यावरण के लिए अत्यधिक हानि होती है। पहले तो कपास से, चमड़े से, लोहे से, लाख से, मिट्टी से अथवा लकड़ी से निर्मित वस्तुएँ ही प्राप्त होती हैं।

वैभव — हाँ घड़ी की पट्टी, अन्य बहुत तरह के पात्र, कलम आदि सभी वस्तुएँ प्लास्टिक से निर्मित होती हैं।

9. जोसेफः — आम् अस्माभिः पित्रोः .................................................... अतीवानन्दप्रदोऽयं जलविहारः।

श्लोकस्य अन्वयः—सखे! सुपर्यावर्णेन जगतः सुस्थितिः, जगति जायमानानां भुवि सम्भवः सम्भवः अस्ति।

कठिन-शब्दार्थ—पित्रोः = माता-पिता का। विचारणीयाः = विचार करने योग्य। आलपन्तः = बात करते हुए। सुपर्यावर्णेन = स्वच्छ पर्यावरण से। जगतः = संसार की। जायमानानाम् = उत्पन्न होने वालों का। भुवि = पृथ्वी पर। सम्भवः = जीवन।

हिन्दी अनुवाद—

जोसेफ — हाँ हमारे द्वारा माता-पिता और शिक्षकों के सहयोग से प्लास्टिक के विभिन्न पक्षों पर विचार किया जाना चाहिए। पर्यावरण के साथ ही पशुओं की की रक्षा करनी चाहिए। (इस प्रकार बात करते हुए सभी नदी के किनारे पहुँच जाते हैं, नदी के जल में प्रवेश करते हैं और गाते हैं—

श्लोक का भावार्थ — हे मित्र ! श्रेष्ठ (स्वच्छ) पर्यावरण से संसार की सुस्थिति एवं संसार में उत्पन्न होने वालों का पृथ्वी पर जीवन सम्भव है। अर्थात् मानव-कल्याण एवं स्वस्थ जीवन के लिए स्वच्छ पर्यावरण अतिआवश्यक है।)

सभी — यह जल-विहार अत्यन्त आनन्ददायक है।

भाग 3: अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पात्मक-प्रश्नाः—

1. वयं शिक्षिताः अपि कथमाचरामः?

(अ) अशिक्षिताः इव
(ब) नायकाः इव
(स) पण्डिताः इव
(द) दुर्जनाः इव

2. भवनेत्यादीनां निर्माणाय के कर्तन्यते?

(अ) प्रस्तराणि
(ब) पशवः
(स) वृक्षाः
(द) जनाः

3. मार्गे किं दृष्ट्वा बालाः परस्परं वार्तालापं कुर्वन्ति?

(अ) शिक्षकम्
(ब) अवकरभाण्डाेरम्
(स) नाटकम्
(द) जनाक्रोशम्

4. प्लाष्टिकस्य मृत्तिकायां लयाभावात् कस्य महती क्षतिः भवति?

(अ) मृत्तिकायाः
(ब) उद्यानस्य
(स) समाजस्य
(द) पर्यावरणस्य

5. निदाघतपतस्य किं शुष्कतां याति?

(अ) तालुः
(ब) मुखम्
(स) कण्ठः
(द) शिरः

6. "महोदये! कृपां कुरु मार्गे भ्रमद्भ्यः।" इति कः कां कथयति?

(अ) परमिन्दुर सविताम्
(ब) रोजलिन् सविटाम्
(स) विनयः संगीताम्
(द) जोसेफः विनयम्

7. रोजलिन् बालैः साकं मार्गे विकीर्णमवकरं संगृह्य कुत्र पातयति?

(अ) उद्याने
(ब) अवकरकण्डोले
(स) रिक्तभवने
(द) नदीजले

8. अस्माभिः पित्रोः शिक्षाणां च सहयोगेन कस्य विविधपक्षः विचारणीयः?

(अ) कलहस्य
(ब) वस्त्रस्य
(स) पर्यावरणस्य
(द) प्लाष्टिकस्य

9. केन सकलं जगत् प्राप्णाति?

(अ) पवनेन
(ब) धनेन
(स) भोजनेन
(द) जलेन

10. केन विना क्षणमपि न जीव्यते?

(अ) मित्रेण
(ब) तापेन
(स) पवनेन
(द) अन्नेन

11. वातातैः तपतैः लोकान् अवितुं नभसि के न दृश्यन्ते?

(अ) खगाः
(ब) मेघाः
(स) ताराः
(द) रक्षकपुरुषाः

12. सर्वं कुलें केन दह्यते?

(अ) मित्रेण
(ब) वहिना
(स) सुपुत्रेण
(द) कुपुत्रेण

13. बालकाः नदीतीरं किं प्राप्तुं गच्छन्ति?

(अ) शान्तिम्
(ब) जलम्
(स) मत्स्यम्
(द) बालुकाम्

14. का स्वास्थ्यकरी कथ्यते?

(अ) क्रीडा
(ब) वार्ता
(स) स्वच्छता
(द) रुग्णता

15. जगतः सुस्थितिः केन अस्ति?

(अ) परिश्रमेण
(ब) सुपर्यावरणेन
(स) क्रीडनेन
(द) व्यापारेण

16. 'कः रक्षति कः रक्षितः' इति पाठस्य क्रमः कः?

(अ) द्वादशः
(ब) त्रयोदशः
(स) एकादशः
(द) चतुर्दशः

17. केन पीडितः वैभवः गृहात् निष्क्रामति?

(अ) धनाभावेन
(ब) जलाभावेन
(स) प्रचण्डोष्मणा
(द) मित्रभावेन

18. सर्वातिशायीमूल्यः कः?

(अ) धेनुः
(ब) जलम्
(स) सौन्दर्यः
(द) पवनः

उत्तराणि— 1. (अ) 2. (स) 3. (ब) 4. (द) 5. (अ) 6. (स) 7. (ब) 8. (द) 9. (अ) 10. (स) 11. (ब) 12. (द) 13. (अ) 14. (स) 15. (ब) 16. (अ) 17. (स) 18. (द)।

अतिलघूत्तररात्मकप्रश्नाः—

प्रश्नः—एकपदेन उत्तरत—

(क) केन विना क्षणमपि न जीव्यते?
(ख) ग्रीष्मर्तौ शरीरात् के प्रस्दवन्ति?
(ग) कस्य तालुः शुष्कताम् याति?
(घ) अस्माभिः कस्य स्वच्छतां प्रति ध्यानं न दीयते?
(ङ) कया स्वच्छताऽभियानं गतिं प्राप्स्यति?
(क) नदीतीरं गन्तुकामाः बालाः यत्र-तत्र किं दृष्ट्वा वार्तालापं कुर्वन्ति?

संस्कृत—कक्षा-8

उत्तरम्—नदीतीरं गन्तुकामाः बालाः यत्र-तत्र अवकरभाण्डारं दृष्ट्वा वार्तालापं कुर्वन्ति।

( ख ) धेनुः शाकफलानामावरणैः सह किम् अपि खादति?

उत्तरम्—धेनुः शाकफलानामावरणैः प्लाष्टिकस्यूतमपि खादति।

( ग ) बालाः मार्गात् प्लाष्टिकस्यूतानि अपसार्य कुत्र क्षिपन्ति?

उत्तरम्—बालाः मार्गात् प्लाष्टिकस्यूतानि अपसार्य पिहिते अवकरकण्डोले क्षिपन्ति।

( घ ) पर्यावरणेन सह के अपि रक्षणीयाः?

उत्तरम्—पर्यावरणेन सह पशवः अपि रक्षणीयाः।

प्रश्न 2. रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत—

(i) ग्रीष्मटौ विद्युदभावेन पीडितः वैभवः गृहात् बहिरागतः।

(ii) प्राणिफति पवनेन जगत् सकलम्।

(iii) सर्वातिशायिमूल्यः पवनः।

(iv) शरीरात् स्वेदधाराः प्रस्वतन्ति।

(v) स्मृतिपथमायाति शुक्लमहोदयेन रचितः श्लोकः।

(vi) नभसि मेघाः नैव दृश्यन्ते।

(vii) मार्गादीनां निर्माणाय वृक्षाः कर्त्यन्ते।

(viii) बालाः अवकरभाण्डारं दृष्ट्वा वार्तालापं कुर्वन्ति।

(ix) गृहाणि अस्माभिः नित्यं स्वच्छानि क्रियन्ते।

(x) उपरितः अवकरः मार्गे क्षिप्यते।

उत्तरम्—प्रश्न-निर्माणम्—

(i) ग्रीष्मटौ केन पीडितः वैभवः गृहात् बहिरागतः?

(ii) प्राणिफति केन जगत् सकलम्?

(iii) सर्वातिशायिमूल्यः कः?

(iv) कस्मात् स्वेदधाराः प्रस्वतन्ति?

(v) स्मृतिपथमायाति केन रचितः श्लोकः?

(vi) नभसि के नैव दृश्यन्ते?

(vii) केषां निर्माणाय वृक्षाः कर्त्यन्ते?

(viii) बालाः किं दृष्ट्वा वार्तालापं कुर्वन्ति?

(ix) कानि अस्माभिः नित्यं स्वच्छानि क्रियन्ते?

(x) कुतः अवकरः मार्गे क्षिप्यते?

प्रश्न 3. अधोलिखितशब्दानाम् अर्थैः सह उचितमेलनं कुरुत—

शब्दाः

अर्थाः

(i) पवनेन

मनुष्यस्य

(ii) अवितुम्

संसारः

(iii) निखिला

रक्षितुम्

(iv) याति

आकाशे

(v) जगत् – ग्रीष्मे

(vi) वपुः – गच्छति

(vii) नभसि – शरीरम्

(viii) पुंसः – वारिदाः

(ix) मेघाः – वायुना

(x) निदाघे – सकला

उत्तरम्—शब्दाः अर्थाः

(i) पवनेन – वायुना

(ii) अवितुम् – रक्षितुम्

(iii) निखिला – सकला

(iv) याति – गच्छति

(v) जगत् – संसारः

(vi) वपुः – शरीरम्

(vii) नभसि – आकाशे

(viii) पुंसः – मनुष्यस्य

(ix) मेघाः – वारिदाः

(x) निदाघे – ग्रीष्मे

प्रश्न 4. अधोलिखितानां वाक्यानां घटनाक्रमानुसारणं क्रमायोजनंकुरुत—

( क ) पर्यावरणेन सह पशवः अपि रक्षणीयाः।

( ख ) जागरूकतया एव स्वच्छताऽभियानं गतिं प्राप्यति।

( ग ) बालाः यत्र-तत्र अवकरभाण्डारं दृष्ट्वा वार्तालापं कुर्वन्ति।

( घ ) सुपर्यावरणेन जगतः सुस्थितिः अस्ति।

( ङ ) अस्माभिः प्लास्टिकस्य विविधपक्षाः विचारणीयाः।

( च ) प्रचण्डोष्मणा पीडितः वैभवः गृहात् निष्क्रामति।

( छ ) अस्माभिः स्वपर्यावरणस्य स्वच्छतां प्रति ध्यानं न दीयते।

( ज ) वयं तु शिक्षिताः अपि अशिक्षित इवाचरामः।

उत्तरम्—घटनाक्रमानुसारं वाक्यानि—

( क ) प्रचण्डोष्मणा पीडितः वैभवः गृहात् निष्क्रामति।

( ख ) बालाः यत्र-तत्र अवकरभाण्डारं दृष्ट्वा वार्तालापं कुर्वन्ति।

( ग ) वयं तु शिक्षिताः अपि अशिक्षित इवाचरामः।

( घ ) अस्माभिः स्वपर्यावरणस्य स्वच्छतां प्रति ध्यानं न दीयते।

( ङ ) जागरूकतया एव स्वच्छताऽभियानं गतिं प्राप्यति।

( च ) अस्माभिः प्लास्टिकस्य विविधपक्षाः विचारणीयाः।

( छ ) पर्यावरणेन सह पशवः अपि रक्षणीयाः।

( ज ) सुपर्यावरणेन जगतः सुस्थितिः अस्ति।