📖 1. समाधान: अभ्यास एवं पाठ्यपुस्तक के संपूर्ण हल
राजस्थान बोर्ड कक्षा 8 संस्कृत — पाठगत प्रश्न एवं अभ्यास के चरण-दर-चरण सटीक हल।
पादपुस्तके के प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. एकपदेन उत्तरत—
( क ) सूर्यः कस्यां दिशायाम् उदेति?
उत्तरम्—पूर्वदिशायाम्।
( ख ) आर्यभटस्य वेधशाला कुत्र आसीत्?
उत्तरम्—पाटलिपुत्रं निकषा।
( ग ) महान् गणितज्ञः ज्योतिषविच्च कः अस्ति?
उत्तरम्—आर्यभटः।
( घ ) आर्यभटेन कः ग्रन्थः रचितः?
उत्तरम्—आर्यभटीयम्।
( ङ ) अस्माकं प्रथमोपग्रहस्य नाम किम् अस्ति?
उत्तरम्—आर्यभटः।
प्रश्न 2. पूर्णवाक्येन उत्तरत—
( क ) कः सुस्थापितः सिद्धान्तः?
उत्तरम्—सूर्योऽचलः पृथिवी च चला वा स्वकीये अक्षे घूर्णति इति सुस्थापितः सिद्धान्तः।
( ख ) चन्द्रग्रहणम् कथं भवति?
उत्तरम्—यदा पृथिव्याः छायापातेन चन्द्रस्य प्रकाशः अवरुध्यते तदा चन्द्रग्रहणम् भवति।
( ग ) सूर्यग्रहणम् कथं दृश्यते?
उत्तरम्—पृथ्वीसूर्ययोः मध्ये समागतस्य चन्द्रस्य छायापातेन सूर्यग्रहणम् दृश्यते।
( घ ) आर्यभटस्य विरोधः किमर्थमभवत्?
उत्तरम्—समाजे नूतानां विचाराणां स्वीकरणे प्रायः सामान्यजनाः काठिन्यमनुभवन्ति भारतीयज्योतिः शास्त्रे तथैव आर्यभटस्य विरोधः अभवत्।
( ङ ) प्रथमोपग्रहस्य नाम आर्यभटः इति कथं कृतम्?
उत्तरम्—आधुनिकैः वैज्ञानिकैः आर्यभटे, तस्य च सिद्धान्ते समादरः प्रकटितः। अस्मादेव कारणात् अस्माकं प्रथमोपग्रहस्य नाम आर्यभटः इति कृतम्।
प्रश्न 3. रेखांकितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत—
(ङ) पृथ्वीसूर्ययोः मध्ये चन्द्रस्य छाया पातेन सूर्यग्रहणम् भवति।
उत्तरम्—प्रश्ननिर्माणम्—
(ङ) कयोः मध्ये चन्द्रस्य छायापातेन सूर्यग्रहणं भवति?
प्रश्न 4. मञ्जूषातः पदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत—
[नौकाम्, पृथ्वी, तदा, चला, अस्तं]
उत्तरम्—
(ङ) नौकायाम् उपविष्टः मानवः नौकाम् स्थिरामनुभवति।
प्रश्न 5. सन्धिच्छेदं कुरुत।
उत्तरम्—
ग्रंथोऽयम् — ग्रन्थः + अयम्
सूर्याचलः — सूर्य + अचलः
तथैव — तथा + एव
कालातिगामिनी — काल + अतिगामिनी
प्रथमोपग्रहस्य — प्रथम + उपग्रहस्य
प्रश्न 6. ( अ ) अधोलिखितपदानां विपरीतार्थकपदानि लिखत।
उत्तरम्—
उदयः — अस्तम्।
अचलः — चलः।
अन्धकारः — प्रकाशः।
स्थिरः — अस्थिरः।
समादरः — निरादरः।
आकाशस्य — पातालस्य।
( आ ) अधोलिखितपदानां समानार्थकपदानि पाठात् चित्वा लिखत।
उत्तरम्—
संसारे — लोके।
इदानीम् — साम्प्रतम्।
वसुन्धरा — पृथ्वी।
समीपम् — निकषा।
गणनम् — आकलनम्।
राक्षसौ — दानヴォ।
प्रश्न 7. अधोलिखितनि पदानि आधृत्य वाक्यानि रचयत।
उत्तरम्—साम्प्रतम्—साम्प्रतं गृहगमनं सरलें जातम्।
निकषा—जयपुरं निकषा भव्यदुर्गम् अस्ति।
परितः—शिक्षकं परितः छात्राः सन्ति।
उपविष्टः—कृष्णः तत्र उपविष्टः।
कर्मभूमिः—राजस्थानप्रदेशः मम कर्मभूमिः वर्तते।
वैज्ञानिकः—पूर्वराष्ट्रपतिः अब्दुलकलामः महान् वैज्ञानिकः आसीत्।
📝 2. नोट्स: मुख्य अवधारणाएँ, सूत्र व स्मरणीय तथ्य
महत्वपूर्ण नियम, सूत्र, परिभाषाएँ, भावार्थ एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।
पाठ के गद्यांशों के कठिन शब्दार्थ, हिन्दी-अनुवाद एवं पठितावबोधनम्-
1. पूर्वदिशायुम् उदेति सूर्यः पश्चिमदिशायं .....................................................................ज्योतिर्विच्च आर्यभटः।
कठिन-शब्दार्थ-उदेति = उदय होता है। अचलः = स्थिर, गतिहीन। चला = अस्थिर, गतिशील। अक्षे = धुरी पर। घूर्णति = घूमती है। सुस्थापितः = भली-भाँति स्थापित। प्राथ्र्येन = सर्वप्रथम। ज्योतिर्विद् = ज्योतिषी।
(ङ) स्वकीये अक्षे पृथिवी घूर्णति।
(च) सूर्यः अचलः अस्ति।
2. पृथिवी स्थिरा वर्तते................................................................सूर्यादिग्रहान् च गतिशीलां वेत्ति।
कठिन-शब्दार्थ– रूढिः = प्रथा, रिवाज। प्रत्यादिष्टा = खण्डन किया। उदाहृतम् = उदाहरण दिया। वेत्ति = जानता है। अवस्थितः = विद्यमान, स्थित। उपविष्टः = बैठा हुआ।
हिन्दी अनुवाद– पृथिवी स्थिर है, इस परम्परा से प्रचलित प्रथा का उन्होंने खण्डन किया। उन्होंने उदाहरण दिया कि गतिशील नाव में बैठा हुआ मनुष्य नाव को स्थिर समझता है तथा अन्य पदार्थों को गतिशील समझता है। इसी प्रकार गतिशील पृथ्वी पर स्थित मनुष्य पृथ्वी में स्थिरता का अनुभव करता है और सूर्य आदि ग्रहों को गतिशील समझता है।
पठितावबोधनम्–
प्रश्नाः–
(ङ) 'गतिशीलां' इति पदस्य गद्यांशे विलोमपदं किमस्ति?
(च) 'स्थिरा' इति विशेषणस्य गद्यांशे विशेष्यपदं किम्?
उत्तराणि–
(ङ) स्थिраन्।
(च) पृथिवी।
3. 476 तमे खिस्ताब्दे................................................................कर्मभूमिः पाटलिपुत्रमेव आसीत्।
कठिन-शब्दार्थ– वयसि = आयु में। निकषा = निकट। वेधशाला = ग्रह, नक्षत्रों को जानने की प्रयोगशाला। इति = इस प्रकार। ज्ञायते = जाना जाता है।
हिन्दी अनुवाद– 476 ईस्वी वर्ष में आर्यभट ने जन्म लिया, ऐसा उनके द्वारा ही लिखित 'आर्यभटीयम्' नामक ग्रन्थ में उल्लेख किया गया है। यह ग्रन्थ उनके द्वारा तेईस वर्ष की आयु में लिखा गया था। ऐतिहासिक स्रोतों से ज्ञात होता है कि पाटलिपुत्र (पटना) के निकट आर्यभट की वेधशाला (ग्रह, नक्षत्रों को जानने की प्रयोगशाला) थी। इससे यह अनुमान किया जाता है कि उनकी कर्मभूमि पटना ही थी।
पठितावबोधनम्–
प्रश्नाः–
(ङ) 'त्रयोविंशतितमे' इति विशेषणस्य गद्यांशे विशेष्यपदं किमस्ति?
(च) 'समीपम्' इत्यर्थे गद्यांशे किं पदं प्रयुक्तम्?
उत्तराणि–
(ङ) वयसि।
(च) निकषा।
4. आर्यभटस्य योगदानं गणितज्योतिषा................................................................इति त्रीणि एव कारणानि।
कठिन-शब्दार्थ– आकलनम् = गणना। आदधाति = रखता है। प्रतिपादितम् = स्पष्ट किया। दानवौ = दो राक्षस।
हिन्दी अनुवाद– आर्यभट का योगदान गणित ज्योतिष से सम्बद्ध है जिसमें संख्याओं की गणना महत्त्व रखती है। आर्यभट फलित ज्योतिष में विश्वास नहीं रखते थे। गणितीय पद्धति से किये गये आकलन को आधार मानकर ही उन्होंने प्रतिपादित किया कि ग्रहण में राहु और केतु नामक दानव कारण नहीं हैं। उसके तो सूर्य, चन्द्रमा और पृथ्वी–ये तीन ही कारण हैं।
पठितावबोधनम्–
प्रश्नाः– (क) गद्यांशं पठित्वा उचितं शीर्षकं लिखत।
(ख) आर्यभटः कस्मिन् न विश्वसिति स्म?
(ग) आर्यभटस्य योगदानं कस्य संबद्धं वर्तते?
(घ) ग्रहणस्य कारणानि कैः सन्ति।
(ङ) 'दानवौ' शब्दस्य विलोमशब्द लिखत।
(च) राहु-केतवौ विशेष्य पदस्य गद्यांशे विशेषणं किं अस्ति?
उत्तराणि—
(ङ) देवौ
(च) दानवौ
5. सूर्य परितः भ्रमन्त्याः पृथिव्याः, ............................................चन्द्रस्य छायापातेन सूर्यग्रहणं दृश्यते।
कठिन-शब्दार्थ— पथेन = मार्ग से। छायापातेन = छाया पड़ने से। अवरुध्यते = रुक जाता है। परितः = चारों ओर।
हिन्दी अनुवाद— सूर्य के चारों ओर घूमती हुई पृथ्वी के चन्द्रमा के परिक्रमा-मार्ग के द्वारा संयोग होने से ग्रहण होता है। जब पृथ्वी की छाया पड़ने से चन्द्रमा का प्रकाश रुक जाता है तब चन्द्रग्रहण होता है। उसी प्रकार पृथ्वी और सूर्य के मध्य में आये हुए चन्द्रमा की छाया पड़ने से सूर्यग्रहण दिखाई देता है।
पठितावबोधनम्—
प्रश्नाः—
(ङ) 'चन्द्रस्य' पदस्य गद्यांशे विशेषणपदं किं अस्ति?
(च) 'चन्द्रग्रहणम्' विलोमपदम् किम् अस्ति?
उत्तराणि—
(ङ) प्रकाशः
(च) सूर्यग्रहणम्
6. समाजे नूतानां .....................................................................................असौ एकः शिखरपुरुषः आसीत्।
कठिन-शब्दार्थ— काठिन्यम् = कठिनता का। पण्डितममन्यानाम् = स्वयं को भारी विद्वान् मानने वालों का। कालातिगामिनी = समय को लाँघने वाली। दृष्टा = देखी गई।
हिन्दी अनुवाद— समाज में नवीन विचारों को स्वीकार करने में प्रायः सामान्य लोग कठिनता का अनुभव करते हैं। भारतीय ज्योतिःशास्त्र में उसी प्रकार आर्यभट का भी विरोध हुआ। उनके सिद्धान्त उपेक्षित हुए। वह स्वयं को भारी विद्वान् मानने वालों का उपहास का पात्र बना। फिर भी उनकी दृष्टि समय को लाँघने वाली देखी गई। आधुनिक वैज्ञानिकों ने उनमें और उनके सिद्धान्त में आदर प्रकट किया। इसी कारण हमारे प्रथम उपग्रह का नाम 'आर्यभट' ऐसा किया गया।
वास्तव में भारतीय गणित-परम्परा का और विज्ञान-परम्परा का वह एक शिखरपुरुष था।
पठितावबोधनम्—
प्रश्नाः—
(ङ) 'नूतानाम्' इति विशेषणस्य गद्यांशे विशेष्यपदं किं प्रयुक्तम्?
(च) 'तस्य सिद्धान्ताः उपेक्षिताः'-इत्यत्र 'तस्य' इति सर्वनामपदं कस्मै प्रयुक्तम्?
संस्कृत—कक्षा-8
उत्तराणि— (क) महान् आर्यभटः। (ख) आर्यभटः। (ग) आर्यभटः।
(घ) आधुनिकैः वैज्ञानिकैः आर्यभटे, तस्य च सिद्धान्ते समादरः प्रकटितः।
(ङ) विचाराणाम्।
(च) आर्यभटाय।
⭐ 3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पात्मक प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक एवं लघूत्तरात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पात्मक-प्रश्नाः—
1. आर्यभटेन ग्रन्थः रचितः।
2. आर्यभटस्य वेधशाला कुत्र आसीत्?
3. सूर्यः कस्यां दिशायाम् उदेति?
4. यदा पृथिव्याः छायापातेन चन्द्रस्य प्रकाशः अवरुध्यते तदा किं भवति?
5. आर्यभटस्य योगदानं केन सम्बद्धं वर्तते?
6. सूर्यः कुत्र अस्तं गच्छति?
7. पृथिवी कुत्र घूर्णति?
8. नौकायाम् उपविष्टः मानवः कान् गतिशीलाम् अवगच्छति?
9. आर्यभटः कस्मिन् वर्षे जन्म लब्धवान्?
10. 'आर्यभटीयम्' इति ग्रन्थः आर्यभटेन कस्मिन् वयसि विरचितः?
11. आर्यभटः कस्मिन् न विश्वसिति स्म?
12. कः पण्डितमন্যानाम् उपहासपात्रं जातः?
13. आर्यभटस्य दृष्टिः कीदृशी दृष्टा?
14. समाजे नूतनानां विचाराणां स्वीकारे प्रायः सामान्यजनाः किम् अनुभवन्ति?
15. "आधुनिकैः वैज्ञानिकैः तस्य सिद्धान्ते समादारः प्रकटितः"—अत्र 'तस्य' सर्वनामपदस्थाने संज्ञापदं किम्?
16. महान् गणितज्ञः ज्योतिषविच्च कः आसीत्?
17. आर्यभटस्य कर्मभूमिः का आसीत्?
18. पृथिवীसूर्ययोः मध्ये कस्य छायापातेन सूर्यग्रहणं दृश्यते?
19. अस्माकं प्रथमउपग्रहस्य नाम किम्?
20. 'तस्य सिद्धान्ताः उपेक्षिताः' इत्यत्र 'तस्य' इति सर्वनामपदं कस्मै प्रयुक्तम्?
उत्तराणि— 1. (ब) 2. (अ) 3. (स) 4. (द) 5. (अ) 6. (स) 7. (ब) 8. (द) 9. (अ) 10. (स) 11. (ब) 12. (द) 13. (अ) 14. (स) 15. (ब) 16. (अ) 17. (ब) 18. (द) 19. (अ) 20. (स)।
प्रश्न : कोष्ठकेभ्यः समुचितपदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत—
(i) ............................ पूर्वदिशायाम् उदेति।
(सूर्यः, चन्द्रः, नक्षत्रः)
(ii) पृथिवी स्वकीये अक्षे ............................।
(घूर्णतः, घूर्णाति, घूर्णन्ति)
(iii) ............................ सिद्धान्तः तेन प्रवर्तितः।
(अयम्, इदम्, इयम्)
(iv) मानवः अन्यान् पदार्थान् ............................ अवगच्छति।
(गतिशीला, गतिशीलात्, गतिशीलं)
संस्कृत—कक्षा-8
(v) आधुनिकैः ................................... तस्य सिद्धान्ते समादरः प्रकटीतः।
(वैज्ञानिकैः, वैज्ञानिकम्)
(vi) असौ ................................. शिखरपुरुषः आसीत्।
(एकः, एकम्, एका)
(vii) सूर्यचन्द्रपृथिवी इति ................................. एव कारणानि सन्ति।
(त्रयः, त्रीणि, त्रयम्)
(viii) ग्रहणे राहु-केतुनामकौ ................................. नास्ति कारणम्।
(दानवः, दानवाः, दानवौ)
उत्तराणि— (i) सूर्यः, (ii) घूर्णति, (iii) अयम्, (iv) गतिशीलात्, (v) वैज्ञानिकैः, (vi) एकः, (vii) त्रीणि, (viii) दानवौ।
अतिलघूत्तरत्मकप्रश्नाः—
प्रश्नः—एकपदेन उत्तरत—
(ङ) आर्यभटः केषाम् उपहासपात्रं जातः?
उत्तराणि— (क) पश्चिमदिशायाम् (ख) पाटलिपुत्रम् (ग) गणितज्योतिषा (घ) फलिज्योतिषशास्त्रे (ङ) पण्डितम्मन्यानाम्।
लघूत्तरत्मकप्रश्नाः—
प्रश्न 1. अधोलिखितानां प्रश्नाानां उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखत—
घ ( क ) आर्यभटेन परम्पतया प्रचलिता का रूढिः प्रत्यादिष्टा?
उत्तरम्— आर्यभटेन पृथ्वी स्थिरा वर्तते इति परम्परा प्रचलिता रूढिः प्रत्यादिष्टा?
( ख ) पृथिव्याम् अवस्थितः मानवः सूूर्यादिग्रहान् कथं वेत्ति?
उत्तरम्— पृथिव्याम् अवस्थितः मानवः सूूर्यादिग्रहान् गतिशीलात् वेत्ति।
( ग ) आर्यभटेन कः ग्रन्थः कस्मिन् वयसि च विरचितः?
उत्तरम्— आर्यभटेन 'आर्यभटीयम्' इति ग्रन्थः त्रयोविंशतितमे वयसि विरचितः।
( घ ) आर्यभटानुसारं ग्रहणे कानि कारणानि सन्ति?
उत्तरम्— आर्यभटानुसारं ग्रहणे सूर्यचन्द्रपृथिवी इति त्रीणि एव कारणानि सन्ति।
( ङ ) भारतीयायाः कस्याः परम्परायाः आर्यभटः एकः शिखरपुरुषः आसीत्?
उत्तरम्— भारतीयायाः गणितपरम्परायाः विज्ञानपरम्परायाः च आर्यभटः एकः शिखरपुरुषः आसीत्।
प्रश्न 2. रेखांकितपदानि अधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत—
(i) सूर्यः पूर्वस्यां दिशायाम् उदेति।
(ii) पृथ्वी स्वकीये अक्षे घूर्णति।
(iii) आर्यभटः महान् गणितज्ञः आसीत्।
(iv) नौकायाम् उपविष्टः मानवः नौकां स्थिरामनुभवति।
(v) पृथिव्याम् अवस्थितः मानवः सूर्यादिग्रहान् गतिशीलां वेत्ति।
(vi) ग्रन्थोऽयं तेन त्रयोविंशतितमे वयसि विरचितः।
(vii) पाटलिपुत्रं निकुषा आर्यभटस्य वेधशाला आसीत्।
(viii) तस्य कर्मभूमिः पाटलिपुत्रमेव आसीत्।
(ix) सः पण्डितम्मन्यानाम् उपहासपात्रं जातः।
(x) पुनरपि तस्य दृष्टिः कालातिगामिनी दृष्टा।
उत्तरम्–प्रश्न-निर्माणम्—
(i) सूर्यः कस्यां दिशायाम् उदेति?
(ii) का स्वकीये अक्षे घूर्णति?
(iii) कः महान् गणितज्ञः आसीत्?
(iv) कस्याम् उपविष्टः मानवः नौकां स्थिरामनुभवति?
(v) पृथिव्याम् अवस्थितः मानवः कान् गतिशीलां वेत्ति?
(vi) ग्रन्थोऽयं तेन कस्मिन् वयसि विरचितः?
(vii) पाटलिपुत्रं निकुषा कस्य वेधशाला आसीत्?
(viii) कस्य कर्मभूमिः पाटलिपुत्रमेव आसीत्?
(ix) सः केषाम् उपहासपात्रं जातः?
(x) पुनरपि तस्य दृष्टिः कीदृशी दृष्टा?
प्रश्न 3. अधोलिखितशब्दानाम् अर्थैः सह समुचितमेलनं कुरुत—
{lcl}
शब्दाः अर्थाः
(i) लोके - संसारे
(ii) अचलः - स्थिरः
(iii) चला - गतिशीला
(iv) रूढिः - परम्परा
(v) प्रत्यादिष्टा - खण्डिता
(vi) निकुषा - समीपे
(vii) आकलनम् - गणना
(viii) भ्रमन्त्याः - घूर्णन्याः
(ix) अपरत्र - अन्यत्र
(x) उपेक्षािता - तिरस्कृता