📖 1. समाधान: अभ्यास एवं पाठ्यपुस्तक के संपूर्ण हल
राजस्थान बोर्ड कक्षा 8 संस्कृत — पाठगत प्रश्न एवं अभ्यास के चरण-दर-चरण सटीक हल।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखत–
( क ) कुत्र 'डिजिटल इण्डिया' इत्यस्य चर्चा भवति?
उत्तरम्– सम्पूर्णविश्वे।
( ख ) केन सह मानवस्य आवश्यकता परिवर्तते?
उत्तरम्– कालपरिवर्तने सह।
( ग ) आपणे वस्तूनां क्रयसमये केषां अनिवार्यता न भविष्यति?
उत्तरम्– रूप्यकाणाम्।
( घ ) कस्मिन् उद्योगे वृक्षाः उपयुज्यन्ते?
उत्तरम्– कर्गदोद्योगे।
अथवा
करगदोद्योगे वृक्षाः उपयुज्यन्ते।
( ङ ) अद्य सर्वाणि कार्याणि केन साधितानि भवन्ति?
संस्कृत—कक्षा-8
उत्तरम्—संगणकयन्त्रेन।
प्रश्न 2. अधोलिखितान् प्रश्नान् पूर्णवाक्येन उत्तरत—
(क) प्राचीनकाले विद्या कथं गृह्यते स्म?
उत्तरम्—प्राचीनकाले विद्या श्रुतिपरम्परा गृह्यते स्म।
(ख) वृक्षाणां कर्तनं कथं न्यूनतां यास्यति?
उत्तरम्—कर्र्गदोद्योगे वृक्षाणां उपयोगेन वृक्षाः कर्त्यन्ते, अतः संगणकस्य अधिकाधिक प्रयोगेण वृक्षाणां कर्तनं न्यूनतां यास्यति।
(ग) चिकित्सालये कस्य आवश्यकता अद्य नानुभूयते?
उत्तरम्—चिकित्सालये रूप्यकाणाम् आवश्यकता अद्य नानुभूयते।
(घ) वयम् कस्यां दिशि अग्रेसरामः?
उत्तरम्—वयम् 'डिजीभारतम्' इति अस्यां दिशि अग्रेसरामः।
(ङ) वस्त्रपुटके केषाम् आवश्यकता न भविष्यति?
उत्तरम्—वस्त्रपुटके रूप्यकाणाम् आवश्यकता न भविष्यति।
प्रश्न 3. रेखांकितपदानाधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरूत—
(क) भोजपत्रोपरि लेखनम् आरब्धम्।
(ख) लेखनार्थम् कर्ग्दस्य आवश्यकतायाः अनुभूतिः न भविष्यति।
(ग) विश्रामगृहेषु कक्षं सुनिश्चितं भवेत्।
(घ) सर्वाणि पत्राणि चलदूरभाषयन्त्रे सुरक्षितानि भवन्ति।
(ङ) वयम् उपचारार्थम् चिकित्सालयं गच्छामः।
उत्तरम्–प्रश्ननिर्माणम्–
(क) भोजपत्रोपरि किम् आरब्धम्?
(ख) लेखनार्थम् कस्य आवश्यकतायाः अनुभूतिः न भविष्यति?
(ग) केषु कक्षं सुनिश्चितं भवेत्?
(घ) सर्वाणि पत्राणि कुत्र सुरक्षितानि भवन्ति?
(ङ) वयम् किमर्थम् चिकित्सालयं गच्छामः?
प्रश्न 4. उदाहरणमनुसृत्य विशेषण-विशेष्यमेलनं कुरूत—
यथा– विशेषण विशेष्य
सम्पूर्णे भारते
(क) मौखिकम् (1) ज्ञानम्
(ख) मनोगताः (2) उपकारः
(ग) महान् (3) भावाः
(घ) टंकिता (4) विनिमयः
(ङ) मुद्राविहीनः (5) सामग्री
उत्तरम्–विशेषण विशेष्य
(क) मौखिकम् (1) ज्ञानम्
(ख) मनोगताः (3) भावाः
(ग) महान् (5) सामग्री
(घ) टंकिता (2) उपकारः
(ङ) मुद्राविहीनः (4) विनिमयः
प्रश्न 5. अधोलिखितपदयोः सन्धिं कृत्वा लिखत।
उत्तरम्—पदस्य अस्य पदस्यास्य।
तालपत्र उपरि तालपत्रोपरि।
च अतिष्ठत चातिष्ठत।
कर्गद उद्योगे कर्ग्दोद्योगे।
क्रय अर्थम् क्रयार्थम्।
इति अन्योः इत्यन्योः।
उपचार अर्थम् उपचारार्थम्।
प्रश्न 6. उदाहरणमनुसृत्य अधोलिखतेन पदेन लघु वाक्य निर्माणं कुरूत—
यथा– जिज्ञासा मम मनसि वैज्ञानिकानां विषये जिज्ञासा अस्ति।
उत्तरम्–
(क) आवश्यकता अद्य रूप्यकाणाम् आवश्यकता नास्ति।
(ख) सामग्री तत्र भोजनस्य सर्वा सामग्री वर्तते।
(ग) पर्यावरण सुरक्षा वृक्षाणां संवर्धनेन पर्यावरण सुरक्षा भवति।
(घ) विश्रामगृहम् अहं विश्रामगृहं गच्छामि।
प्रश्न 7. उदाहरणानुसारम् कोष्ठकप्रदतेषु पदेषु चतुर्थी प्रयुज्य रिक्तस्थानपूर्तिं कुरूत—
यथा– भिक्षुकैाय धनं ददातु। (भिक्षुक)
(क) ........................ पुस्तकं देहि। (छात्र)
(ख) अहम् ........................ वस्त्राणि ददािि (निर्धन)
(ग) ........................ पठनं रोचते। (लता)
(घ) रमेशः ........................ अलम्। (सुरेश)
(ङ) ........................ नमः। (अध्यापक)
उत्तरम्–(क) छात्राय पुस्तकं देहि।
(ख) अहम् निर्धनाय वस्त्राणि ददाामि।
(ग) लतायै पठनं रोचते।
(घ) रमेशः सुरेशाया अलम्।
(ङ) अध्यापकाय नमः।
योग्यता-विस्तारः
1. अनेक शब्दों के लिए एक शब्द–
ज्ञातुम् इच्छा जिज्ञासा जानने की इच्छा
कर्तुम् इच्छा चिकीर्षा करने की इच्छा
पातुम् इच्छा पिपासा पीने की इच्छा
भोक्तुम् इच्छा बुभुक्षा खाने की इच्छा
जीवितुम् इच्छा जिजीविषा जीने की इच्छा
गन्तुम् इच्छा जिगमिषा जाने की इच्छा
2. 'तुमुन्' प्रत्यय में 'तुम्' शेष बचता है। यह प्रत्यय के लिए अर्थ में प्रयुक्त होता है। जैसे–
कृ तुमुन् कर्तुम् करने के लिए
दा तुमुन् दातुम् देने के लिए
खाद् तुमुन् खादितुम् खाने के लिए
पठ् + तुमुन् - पठितुम् - पढ़ने के लिए
लिख् + तुमुन् - लिखितुम् - लिखने के लिए
गम् + तुमुन् - गन्तुम् - जाने के लिए।
(स) दिशि
(द) महान्
उत्तर-माला
1. (अ) 2. (स) 3. (ब) 4. (द) 5. (अ)
6. (स) 7. (ब) 8. (द) 9. (अ) 10. (स)
11. (ब) 12 (द)।
📝 2. नोट्स: मुख्य अवधारणाएँ, सूत्र व स्मरणीय तथ्य
महत्वपूर्ण नियम, सूत्र, परिभाषाएँ, भावार्थ एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।
पाठ के गद्यांशों का हिन्दी-अनुवाद एवं पठितावबोधनम् -
1. अद्य सम्पूर्णविश्वे "डिजिटलइण्डिया" .................................................... लेखनकार्यम् आरब्धम्।
कठिन-शब्दार्थ- श्रूयते = सुनी जाती है। उत्पद्यते = उत्पन्न होता है/होती है। परिवर्तते = बदल जाता है/जाती है। आरब्धम् = आरम्भ हुआ।
हिन्दी अनुवाद - आज पूरे संसार में 'डिजिटल-इण्डिया' की चर्चा सुनी जाती है। इस शब्द का क्या भाव है, यह मन में जानने की इच्छा उत्पन्न होती है। समय के बदलने के साथ ही मानव की आवश्यकता भी बदल जाती है।
प्राचीन काल में ज्ञान का आदान-प्रदान मौखिक था और विद्या श्रुति-परम्परा (एक कान से दूसरे कान तक मौखिक रूप से सुनाना) के द्वारा ग्रहण की जाती थी। बाद में तालपत्रों के ऊपर और भोजपत्रों के ऊपर लेखन-कार्य आरम्भ हुआ।
पठितावबोधनम्–
निर्देशः–उपर्युक्तं गद्यांशं पठित्वा प्रदत्तप्रश्नानां यथानिर्देशम् उत्तराणि लिखत–
प्रश्नाः– (क) केन सह मानवस्य आवश्यकता परिवर्तते? (एकपदेन उत्तरत)
(ख) प्राचीनकाले विद्या कया गृह्यते स्म? (एकपदेन उत्तरत)
(ग) अद्य संपूर्णविश्वे कस्य चर्चा श्रूयते? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
(घ) गद्यांशं पठित्वा उचितं शीर्षकं लिखत।
उत्तराणि– (क) कालपरिवर्तनेन।
(ख) श्रुतिपरम्पऱ्या।
(ग) अद्य संपूर्णविश्वे ‘डिजिटलइण्डिया’ इत्यस्य चर्चा श्रूयते।
(घ) डिजिटलइण्डिया।
2. पर्वर्तिनि काले कर्गदस्य ................................................................ यंत्रेण साधितानि भवन्ति।
कठिन-शब्दार्थ– कर्गदस्य = कागज का। लेखनयाः = लेखनी (कलम/पैन) का। टंकणयंत्रस्य = टाईप करने की मशीन का। प्रविधिः = तकनीक, विधि की। संगणक = कम्प्यूटर। साधितानि = सम्पन्न।
हिन्दी अनुवाद–परिवर्तन के समय में कागज और कलम (पैन) के आविष्कार से सभी मनोभावों का कागज के ऊपर लिखना आरंभ हो गया। टंकण (टाईप) मशीन के आविष्कार से तो लिखित सामग्री टंकित (मुद्रित) होने पर बहुत समय तक के लिए सुरक्षित हो गई। वैज्ञानिक तकनीक (विधि) की प्रगति-यात्रा फिर से आगे बढ़ती गई। आज सभी कार्य कम्प्यूटर नामक यन्त्र से सम्पन्न होते हैं।
पठितावबोधनम्–
प्रश्नाः– (क) कस्याः प्रगतियात्रा पुनरपि अग्रे गता? (एकपदेन उत्तरत)
(ख) अद्य सर्वाणि कार्याणि केन यंत्रेण साधितानि भवन्ति? (एकपदेन उत्तरत)
(ग) कस्य आविष्कारेन लिखिता सामग्री बहुकालाय सुरक्षिता अतिष्ठत्? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
(घ) 'काले' इति विशेषपदस्य विशेषणपदं गद्यांशात् चित्वा लिखत।
उत्तराणि– (क) वैज्ञानिकप्रविधेः।
(ख) संगणकयन्त्रेण।
(ग) टंकणयंत्रस्य आविष्कारेन लिखिता सामग्री बहुकालाय सुरक्षिता अतिष्ठत्।
(घ) परिवर्तिनि।
3. समाचार-पत्राणि, पुस्तकानि ................................................................ महान् उपकरो भविष्यति।
कठिन-शब्दार्थ– कर्गदद्योगे = कागज के उद्योग में। कर्त्यन्ते स्म = काटे जाते थे। अधिकाधिकिक = (अधिक + अधिक) अधिक से अधिक। दिशि = दिशा में।
हिन्दी अनुवाद–समाचार-पत्र और पुस्तकें कम्प्यूटर के माध्यम से पढ़ी जाती हैं। कागज के उद्योग में वृक्षों के उपयोग से वृक्षों का काटा जाता था, परन्तु कम्प्यूटर का अधिक से अधिक प्रयोग होने से वृक्षों के काटने में कमी होगी, ऐसा विश्वास है। इससे पर्यावरण-सुरक्षा की दिशा में महान् उपकार होगा।
पठितावबोधनम्–
प्रश्नाः– (क) गद्यांशं पठित्वा उचितं शीर्षकं लिखत।
(ख) कर्गदोद्योगे केषाम् उपयोगः भवति स्म? (एकपदेन उत्तरत)
(ग) कस्याः दिशि महान् उपकारो भविष्यति? (एकपदेन उत्तरत)
(घ) कथं वृक्षाणां कर्तने न्यूनता भविष्यति? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
उत्तराणि– (क) सङ्गणकस्य महत्त्वम्।
(ख) वृक्षाणाम्।
(ग) पर्यावरणसुरक्षायाः।
(घ) सङ्गणकस्य अधिकाधिक-प्रयोगेन वृक्षाणां कर्तने न्यूनता भविष्यति।
अथवा
निम्नलिखित गद्यांशम् अवधानेन् पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि ददाततु–
संस्कृत—कक्षा-8
अद्य सर्वाणि कार्याणि सङ्गणकनाम्केन यन्त्रेन साधितानि भवन्ति। समाचार-पत्राणि, पुस्तकानि च कम्पूटरमाध्यमेन पठ्यन्ते लिख्यन्ते च। कर्गदोद्यোগे वृक्षाणाम् उपयोगेन वृक्षाणां कर्तने न्यूनता भविष्यति इति विश्वासः। अनेन पर्यावरणसुरक्षायाः दिशि महान् उपकारो भविष्यति। अधुना आपण वस्तुक्रयार्थम् रूप्यकाणाम् अनिवार्यता नास्ति। "डेबिट कार्ड", "क्रेडिट कार्ड" इत्यादयः सर्वत्र रूप्यकाणां स्थानं गृहीतवन्तः।
प्रश्नाः—(क) उपर्युक्त गद्यांशस्य उपयुक्तं शीर्षकं लिखत। (एकपदेन उत्तरत)
(ख) अद्य सर्वाणि कार्याणि केन यन्त्रेन साधितानि भवन्ति (एकपदेन उत्तरत)
(ग) समाचार पत्राणि पुस्तकानि च केन माध्यमने पठ्यन्ते लिख्यन्ते च? (एकपदेन उत्तरत)
(घ) कर्गदोद्योगे केषाम् उपयोगः भवति? (एकपदेन उत्तरत)
(ङ) कस्यां दिशि महान् उपकारो भविष्यति? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
(च) अद्य सर्वत्र रूप्यकाणां स्थानं गृहीतवन्तः? (एकपदेन उत्तरत)
उत्तराणि—(क) सङ्गणकस्य महत्त्वम्/डिजिटलस्य प्रभावम्। (ख) सङ्गणकयन्त्रेण।
(ग) कम्प्यूटरमाध्यमेन।
(घ) वृक्षाणाम्।
(ङ) पर्यावरणसुरक्षायाः दिशि महान् उपकारो भविष्यति।
(च) "डेबिट कार्ड", "क्रेडिटकार्ड" इत्यादयः।
4. अधुना आपण वस्तुक्रयार्थम् .............................................................. सहायकाः सन्ति।
कठिन-शब्दार्थ—आपणे = बाजार में। वस्तुक्रयार्थम् = वस्तुएँ खरीदने के लिए। गृहीतवन्तः = स्वीकार किये जाते हैं। वित्तकोशस्य = बैंक का। अनुप्रयोगाः = ऐप (APP)। विनिमयाय = लेन-देन के लिए।
हिन्दी अनुवाद—इस समय बाजार में वस्तुएँ खरीदने के लिए रुपयों की अनिवार्यता नहीं है। 'डेबिट कार्ड', 'क्रेडिट कार्ड' आदि सभी जगह रुपयों के स्थान पर स्वीकार किये जाते हैं। बैंक के भी सभी कार्य कम्प्यूटर द्वारा सम्पन्न किये जाते हैं। अनेक प्रकार के 'ऐप' (APP) मुद्रा से रहित लेन-देन में सहायक हैं।
पठितावबोधनम्–
प्रश्नाः—(क) गद्यांशं पठित्वा उचितं शीर्षकं लिखत।
(ख) अधुना आपण वस्तुक्रयार्थम् केषाम् अनिवार्यता नास्ति? (एकपदेन उत्तरत)
(ग) बैंकस्य सर्वाणि कार्याणि केन सम्पाद्यन्ते? (एकपदेन उत्तरत)
(घ) मुद्राहीनआय विनिमयाय के सहायकाः सन्ति? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
उत्तराणि—(क) डिजिटलइण्डिया/अनुप्रयोगानाम् महत्त्वम् (ख) रूप्यकाणाम्।
(ग) संगणकयन्त्रेण।
(घ) मुद्राहीनआय विनिमयाय बहुविधाः अनुप्रयोगाः सहायकाः सन्ति।
5. कुत्रापि यात्रा करणीया .......................................................................................... शुल्कं प्रदาตุं शक्यते।
कठिन-शब्दार्थ—कुत्रापि = (कुत्र + अपि) कहीं भी। रेलयानयात्रापत्रस्य = रेल टिकट की। चलदूरभाषयन्त्रे = मोबाइल फोन में। सन्दृश्यं = दिखाकर। सौकर्येण = आसानी से, सुगमता से। नानुभूयते = (न + अनुभूयते) अनुभव नहीं की जाती है। शुल्कम् = फीस।
हिन्दी अनुवाद—आज कहीं भी यात्रा करनी हो, रेल टिकट की, हवाई जहाज के टिकट की अनिवार्यता नहीं है। सभी टिकट हमारे मोबाइल फोन में 'ई-मेल' नामक स्थान पर सुरक्षित होते हैं, जिनको दिखाकर हम आसानी से यात्रा का आनन्द लेते हैं। चिकित्सालय में भी उपचार (इलाज) के लिए रुपयों की आवश्यकता का आज अनुभव नहीं किया जाता है। सभी जगह कार्ड के माध्यम से, ई-बैंक के माध्यम से फीस प्रदान कर सकते हैं।
पठितावबोधनम्–
प्रश्नाः—(क) गद्यांशं पठित्वा उचितं शीर्षकं लिखत।
(ख) अद्य उपचारार्थ कुत्र रूप्यकाणाम् आवश्यकता नानुभूयते? (एकपदेन उत्तरत)
(ग) वयं सौकर्येण कस्याः आनन्दं गृहीमः? (एकपदेन उत्तरत)
(घ) अद्य यात्रापत्राणि कुत्र सुरक्षितानि भवन्ति? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
उत्तराणि—(क) डिजिटलस्य प्रभावम्। (ख) चिकित्सालये।
(ग) यात्रायाः।
(घ) अद्य यात्रापत्राणि चलदूरभाषयन्त्रे 'ई-मेल' इति स्थाने सुरक्षितानि भवन्ति।
6. तद्दिनं नातिदूरम् यदा ............................................................................................ अनुभूतिः अपि न भविष्यति।
कठिन-शब्दार्थ– नातिदूरम् = (न + अतिदूरम्) अधिक दूर नहीं। आदाय = लेकर। साढयितुम् = सम्पन्न करने के लिए। वस्त्रपुटके = जेब में। अन्वेषणार्थम् = खोजने के लिए।
हिन्दी अनुवाद– वह दिन अधिक दूर नहीं है जब हम हाथ में एकमात्र मोबाइल फोन को लेकर सभी कार्य सम्पन्न करने में समर्थ हो जायेंगे। जेब में रुपयों की आवश्यकता नहीं होगी। 'पासबुक', 'चैक्बुक' इन दोनों की आवश्यकता नहीं होगी। पढ़ने के लिए पुस्तकों, समाचार-पत्रों की अनिवार्यता लगभग समाप्त हो जायेगी। लिखने के लिए अभ्यास-पुस्तिका अथवा कागज की, अथवा नवीन ज्ञान को खोजने के लिए शब्दकोश की भी आवश्यकता नहीं होगी। अपरिचित मार्ग (रास्ते) को जानने के लिए मार्गदर्शक मानचित्र की आवश्यकता का अनुभव भी नहीं होगा।
पठितावबोधनम्–
प्रश्नाः– (क) गद्यांशस्य उपयुक्तं शीर्षकं किम्?
(ख) वस्त्रपुटके केषां आवश्यकता न भविष्यति? ( एकपदेन उत्तरत )
(ग) कस्य ज्ञानाथं मार्गदर्शकस्य मानचित्रस्य आवश्यकता न भविष्यति? ( एकपदेन उत्तरत )
(घ) वयं हस्ते किम् आदाय सर्वाणि कार्याणि साढयितुं समर्थाः भविष्यामः? ( पूर्णवाक्येन उत्तरत )
(ङ) 'ज्ञानम्' इत्यस्य विशेषणपदं किं प्रयुक्तम्?
(च) 'आदाय' इति पदे कः प्रत्ययः?
उत्तराणि– (क) चलदूरभाषयन्त्रम्। (ख) रूप्यकाणाम्। (ग) अपरिचित-मार्गस्य।
(घ) वयं हस्ते चलदूरभाषयन्त्रमादाय सर्वाणि कार्याणि साढयितुं समर्थाः भविष्यामः।
(ङ) नूतनम्।
(च) ल्यप्।
7. एतत् सर्वं एकनैव यन्त्रेन ............................................................................................ भारतीयाः द्रुतगत्या अग्रेसरामः।
कठिन-शब्दार्थ– शाकादिक्रयार्थम् = शाक (सब्जियाँ) खरीदने के लिए। कक्षम् = कमरा। अलम् = पर्याप्त। अग्रेसरामः = आगे बढ़ रहे हैं।
हिन्दी अनुवाद– यह सब एक ही यन्त्र (मोबाइल फोन) से कर सकते हैं। शाक (सब्जियाँ) खरीदने के लिए, फल खरीदने के लिए, विश्रामघरों (गैस्ट हाऊस) में कमरा सुनिश्चित (बुक) करने के लिए, अस्पताल में फीस देने के लिए, विद्यालय और महाविद्यालय में भी शुल्क देने के लिए, अधिक क्या, दान देने के लिए भी मोबाइल फोन ही पर्याप्त है। 'डिजिटल भारत' इस दिशा में हम भारतीय तीव्र गति से आगे बढ़ रहें हैं।
पठितावबोधनम्–
प्रश्नाः– (क) गद्यांशस्य उपयुक्तं शीर्षकं किम्?
(ख) अद्य केन यन्त्रेन सर्वं कर्तुं शक्यते? ( एकपदेन उत्तरत )
(ग) वयं भारतीयाः 'डिजीभारतम्' इति दिशि कया गत्या अग्रेसरामः? ( एकपदेन उत्तरत )
(घ) अद्य विविधशुल्कं दानं च दातुं किम् अलम्? ( पूर्णवाक्येन उत्तरत )
(ङ) "अस्यां दिशि वयं भारतीयाः"-इत्यत्र 'अस्याम्' पदस्य विशेष्यपदं किम्?
(च) 'चापि' इति पदस्य सन्धिच्छेदं कुरुत।
उत्तराणि– (क) डिजीभारतम्। (ख) चलदूरभाषयन्त्रेण। (ग) द्रुतगत्या।
(घ) अद्य विविधशुल्कं दानं च दातुं चलदूरभाषयन्त्रमेव अलम्।
(ङ) दिशि।
(च) च + अपि।
⭐ 3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पात्मक प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक एवं लघूत्तरात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पीयप्रश्नाः:-
1. कुत्र 'डिजिटल इण्डिया' इत्यस्य चर्चा भवति?
2. केन सह मानवस्य आवश्यकता परिवर्तते?
3. कस्मिन् उद्योगे वृक्षाः उपयुज्यन्ते?
4. अद्य सर्वाणि कार्याणि कानि साधितानि भवन्ति?
5. प्राचीनकाले विद्या कथं गृह्यते स्म?
6. कस्य अधिकाधिकप्रयोगेण वृक्षाणां कर्तनं न्यूनतां यास्यति?
7. अद्य चिकित्सालये कस्य आवश्यकता नानुभूयते?
8. प्राचीनकाले भोजपत्रोपरि किम् आरब्धम्?
9. वयं किमर्थं चिकित्सालयं गच्छामः?
10. अधुना 'डेबिट कार्ड' इत्यादयः सर्वत्र केषां स्थानं गृहीतवन्तः?
11. कस्याः प्रगतियात्रा पुनरपि अग्रे गता?
12. 'अनेन पर्यावरणसुरक्षायाः दिशि महान् उपकारो भविष्यति।' अत्र विशेषणपदं किम्?
प्रश्नः - कोष्टकेभ्यः समुचितं पदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत-
(i) अधुना आपणें वस्तुक्रयार्थम् ......................... आवश्यकता नास्ति। (रूप्यकाणाम्, पदार्थानाम्, वस्तुनाम्)
(ii) प्राचीनकाले ज्ञानस्य आदान-प्रदानं ......................... आसीत्। (लिखितम्, मौखिकम्, यन्त्रबद्धम्)
(iii) अद्य सर्वाणि ......................... सङ्गणकयन्त्रेन साधितानि भवन्ति। (कार्यम्, कार्येण, कार्याणि)
(iv) एतत् सर्वम् एकेनैव ......................... कर्तुं शक्यते। (यन्त्रेण, यन्त्रम्, यन्त्रात्)
(v) अस्यां दिशि वयं भारतीयः ......................... अग्रेसरसामः। (मन्दगत्या, द्रुतगत्या, अधोगत्या)
उत्तरम्— (i) रूप्यकाणाम् (ii) मौखिकम् (iii) कार्याणि (iv) यन्त्रेण (v) द्रुतगत्या।
अतिलघूत्तरात्मकप्रश्नाः:-
प्रश्नः - अधोलिखितप्रश्नानां उत्तराणि एकपदेन लिखत -
(ङ) अद्य पुस्तकानि केन पध्यन्ते लिख्यन्ते च?
उत्तराणि - (क) मौखिकम्। (ख) विद्या। (ग) कर्गदोपरि। (घ) वैज्ञानिकप्रविधेः। (ङ) कम्पूटरमाध्यमेन।
लघूत्तरात्मकप्रश्नाः:-
प्रश्न 1. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखत -
(क) अद्य सम्पूर्णविश्वे कस्य चर्चा श्रूयते?
उत्तरम्— अद्य सम्पूर्णविश्वे "डिजिटलइण्डिया" इत्यस्य चर्चा श्रूयते।
(क) केन सह मानवस्य आवश्यकताऽपि परिवर्तते?
उत्तरम्— कालपरिवर्तनेन सह मानवस्य आवश्यकताऽपि परिवर्तते।
(ग) किमर्थं वृक्षाः कर्तन्यन्ते स्म?
उत्तरम्— कर्गदोद्योगे वृक्षाणां उपयोगेन वृक्षाः कर्तन्यन्ते स्म।
(घ) अधुना के सर्वत्र रूप्यकाणां स्थानं गृहीतवन्तः?
उत्तरम्— अधुना 'डेबिट कार्ड', 'क्रेडिट कार्ड' इत्यादयः सर्वत्र रूप्यकाणां स्थानं गृहीतवन्तः।
(ङ) वयं ಹस्ते एकमात्रं किम् आदाय सर्वाणि कार्याणि साध्यितुं समर्थाः भविष्यामः?
संस्कृत—कक्षा-8
उत्तरम्—वयम् हस्ते एकमात्रं चलदूरभाषयन्त्रमादाय सर्वाणि कार्याणि साधयितुं समर्थाः भविष्य्यामः।
प्रश्न 2. रेखांकितपदानि अधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत—
(i) इति मनसि जिज्ञासा उत्पद्यते।
(ii) कालपरिवर्तनेन सह मानवस्य आवश्यकताऽपि परिवर्तते।
(iii) प्राचीनकाले ज्ञानस्य आदान-प्रदानं मौखिकम् आसीत्।
(iv) विद्या श्रुतिपरम्परया गृह्यते स्म।
(v) मनोगतानां भावानां करगोदोपरि लेखनं प्रारब्धम्।
(vi) वैज्ञानिकप्रविधेः प्रगतियात्रा पुनरपि अग्रे गता।
(vii) करगोधोद्योगे वृक्षाणाम् उपयोगः भवति।
(viii) संगणकयन्त्रेण सर्वाणि कार्याणि साधितानि भवन्ति।
(ix) सर्वाणि पत्राणि चलदूरभाषयन्त्रे सुरक्षितानि भवन्ति।
(x) सर्वत्र कार्डमाध्यमेन शुल्कं दातुं शक्यते।
उत्तरम्—प्रश्न-निर्माणम्—
(i) का इति मनसि उत्पद्यते?
(ii) केन सह मानवस्य आवश्यकताऽपि परिवर्तते?
(iii) प्राचीनकाले कस्य आदान-प्रदानं मौखिकम् आसीत्?
(iv) विद्या कया गृह्यते स्म?
(v) केषां कर्गदोपरि लेखनं प्रारब्धम्?
(vi) कस्याः प्रगतियात्रा पुनरपि अग्रे गता?
(vii) कर्गदोद्योगे केषाम् उपयोगः भवति?
(viii) केन सर्वाणि कार्याणि साधितानि भवन्ति?
(ix) सर्वाणि पत्राणि कस्मिन् सुरक्षितानि भवन्ति?
(x) सर्वत्र केन शुल्कं प्रदातुं शक्यते?
प्रश्न 3. अधोलिखितशब्दानां समक्षं प्रदत्तैः अर्थैः सह उचितमेलनं कुरुत—
शब्दाः | - | अर्थाः |
(i) विश्वे | - | करे |
(ii) जिज्ञासा | - | कम्प्यूटरः |
(iii) कालः | - | पर्याप्तम् |
(iv) प्रविधिः | - | बैंकस्य |
(v) सौकर्येण | - | तीव्रगत्या |
(vi) द्रुतगत्या | - | तकनीकम् |
(vii) संगणकः | - | ज्ञातुम् इच्छा |
(viii) वित्तकोशस्य | - | संसारे |
(ix) हस्ते | - | सुगमतया |
(x) अलम् | - | समयः |
उत्तरम्—शब्दाः — अर्थाः
(i) विश्वे — संसारे
(ii) जिज्ञासा — ज्ञातुम् इच्छा
(iii) कालः — समयः
(iv) प्रविधिः — तकनीकम्
(v) सौकर्येण — सुगमतया
(vi) द्रुतगत्या — तीव्रगत्या
(vii) संगणकः — कम्प्यूटरः
(viii) वित्तकोशस्य — बैंकस्य
(ix) हस्ते — करे
(x) अलम् — पर्याप्तम्।