📖 1. समाधान: अभ्यास एवं पाठ्यपुस्तक के संपूर्ण हल
राजस्थान बोर्ड कक्षा 8 संस्कृत — पाठगत प्रश्न एवं अभ्यास के चरण-दर-चरण सटीक हल।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत—
(क) दृष्ट्या का समागता?
उत्तरम्—दिृष्ट्या राकेशस्य भगिनी शालिनी समागता।
(ख) राकेशस्य कार्यालया का निश्चिता?
उत्तरम्—राकेशस्य कार्यालये एका महत्त्वपूर्ण गोष्ठी निश्चिता।
(ग) राकेशः शालिनी कुत्र गन्तुं कथयति?
उत्तरम्—राकेशः शालिनीं मालया सह चिकित्सिकां प्रति गन्तुं कथयति।
(घ) सायंकाले भ्राता कार्यालयात् आगत्य किम् करोति?
उत्तरम्—सायंकाले भ्राता कार्यालयात् आगत्य हस्तपादादिकं प्रक्षाल्य वस्त्राणि च परिवर्त्य पूजागृहं गत्वा दीपं प्रज्जयल्यति भवानीस्तुतिं चापि करोति।
(ङ) राकेशः कस्याः तिरस्कारं करोति?
उत्तरम्—राकेशः सृष्टेः उत्पादिन्याः शक्त्याः तिरस्कारं करोति।
(च) शालिनी भ्रातरम् कां प्रतिज्ञां कर्तुं कथयति?
उत्तरम्—शालिनी भ्रातरं कन्यायाः रक्षणे, तस्याः पाठने च दत्तचित्तः भवितुं प्रतिज्ञां कर्तुं कथयति।
(छ) यत्र नार्यः न पूज्यन्ते तत्र किम् भवति?
उत्तरम्—यत्र नार्यः न पूज्यन्ते तत्र सर्वाः क्रियाः अफलाः भवन्ति।
प्रश्न 2. अधोलिखितपदानां संस्कृतरूपं (तत्समरूपं) लिखत—
उत्तरम्—(क) कोख — कुक्षि
उत्तरम्—(ख) परिश्रमेण विना विद्या न लभ्यते।
प्रश्न 4. 'क' स्तम्भे विशेषणपदं दत्तम् 'ख' स्तम्भे च विशेष्यपदम्। तयोर्मेलनं कुरुत—
'क' स्तम्भः | 'ख' स्तम्भः
(1) स्वस्था | (क) कृत्यम्
(2) महत्त्वपूर्ण | (ख) पुत्री
(3) जघन्यम् | (ग) वृत्तिः
(4) क्रीडन्ती | (घ) मनोदशा
(5) कुत्सित्ता | (ङ) गोष्ठी
उत्तरम्—(1) स्वस्था — (घ) मनोदशा
(2) महत्त्वपूर्ण — (ङ) गोष्ठी
(3) जघन्यम् — (क) कृत्यम्
(4) क्रीडन्ती — (ख) पुत्री
(5) कुत्सित्ता — (ग) वृत्तिः
प्रश्न 5. अधोलिखितानां पदानां विलोमपदं पाठात् चित्वा लिखत—
उत्तरम्—(क) श्वः — ह्यः
प्रश्न 6. रेखांकितपदमादृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत—
प्रश्न 7. अधोलिखिते सन्धिच्छेदे रिक्त स्थानानि पूरयत—
यथा—नोक्तवती = न + उक्तवती
उत्तरम्—सहसैव = सहसा + एव
परामर्शानुसारम् = परामर्श + अनुसारम्
वर्धाहा = वध + अर्हा
अधुनैव = अधुना + एव
प्रवृत्तोऽपि = प्रवृत्तिः + अपि
योग्यता-विस्तारः
कुछ सफल महिलाएँ—
* गायिकाएँ
एम.एस. सुबुलक्ष्मी
गंगूबाई हंगलग
लता मंगेशकर
आशा भोंसले
* साहित्य
सरोजनी नायडू
कमला सुरैया
शोभाडे
अरुंधती राय
अनीता देसाई
* राजनीति
इन्दिरा गाँधी
सुमित्रा महाजन
प्रतिभा पटेल
सुषमा स्वराज
* चित्रकार
आंजोल्नी इला मेनन
* खेल
पी.टी. ऊषा
जे शोभा (एथलेटिक्स)
कुंजरानी देवी (भारोत्तोलन)
साइना नेहवाल (बैडमिंटन)
कोनेरू हम्पी (शतरंज)
सानिया मिर्ज़ा (टेनिस)
कर्णममल्लेश्वरी (भारोत्तोलन)
* वाणिज्य
अरुंधती भट्टाचार्य
चंदा कोचर
चित्रारामकृष्ण
भाषिक विस्तार—
* अलम् (व्यर्थ) के योग में तृतीया विभक्ति का प्रयोग होता है।
यथा—पश्चात्तापेन अलम्। कलहेन अलम्। विवादेन अलम्। लज्जया अलम्।
* 'साथ' अर्थ वाले शब्दों (सह, साकम्, समम् तथा सार्द्धम्) के साथ भी तृतीया विभक्ति का प्रयोग होता है।
संस्कृत—कक्षा-8
यथा— सर्वैः साकं भोजनं करिष्यामि।
मालया साद्धूँ गच्छ।
चिकित्सिकया सह मेलनं भविष्यति।
पित्रो सह पुत्रः गच्छति। मित्रेण सह क्रीडति।
\*अवव्य—जिन शब्दों में किसी लिंग, किसी विभक्ति अथवा किसी वचन में कोई परिवर्तन नहीं होता उन्हें अव्यय कहते हैं।
पाठ में प्रयुक्त कुछ अव्यय पद—
इव — के समान
खलु — निश्चयबोधक अव्यय
वा — या
अधुना — इस समय
अद्य — आज
सहसा — अचानक
एव — ही
ह्यः — बीता हुआ कल
श्वः — आने वाला कल
यद् — जो
तद् — वह
चेत् — यदि
कथम् — कैसे
तूष्णीम् — चुपचाप
यदा — जब, तदा, तब
यदि — यदि, तर्हि-तो
वृथा — व्यर्थ
अलम् — व्यर्थ
किम् — क्या
किमर्थम् — किस लिए
📝 2. नोट्स: मुख्य अवधारणाएँ, सूत्र व स्मरणीय तथ्य
महत्वपूर्ण नियम, सूत्र, परिभाषाएँ, भावार्थ एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।
नाट्यांशों के कठिन शब्दार्थ एवं हिन्दी-अनुवाद-
1. "शालिनी ग्रीष्माकाशे पितृगृहम् ................................................................................................. सह भोजनमेव करिष्यामि।"
कठन-शब्दार्थ- भ्रातृजाया = भाभी। दृश्यते = दिखाई देती है। प्रतीयसे = प्रतीत हो रही हो। त्वदर्थम् = तुम्हारे लिए। आनयानि = लाऊँ। वाञ्छामि = चाहती हूँ।
हिन्दी अनुवाद- "शालिनी ग्रीष्मावकाश में पिता के घर आती है। सभी प्रसन्न मन से उसका स्वागत करते हैं परन्तु उसकी भाभी उदास जैसी दिखाई देती है।"
शालिनी | - | भाभी! चिन्तित जैसी प्रतीत हो रही हो, सब कुशल तो है? |
माला | - | हाँ शालिनी! मैं कुशल हूँ। तुम्हारे लिए क्या लाऊँ, शीतल पेय (ठंडा) अथवा चाय? |
शालिनी | - | इस समय तो कुछ भी नहीं चाहती हूँ। रात में सभी के साथ भोजन ही करूंगी। |
2. (भोजनकालेऽपि मालायाः मनोदशा ......................................................................................... यद्विधेयं तद् सम्पादय।
कठिन-शब्दार्थ-नोक्तवती = (न + उक्तवती) नहीं बोली। भगिनि = बहिन। दिष्ट्या = भाग्य से। समागता = आई हो। सहसैव = (सहसा + एव) अचानक ही।
हिन्दी अनुवाद- (भोजन के समय भी माला की मनोदशा स्वस्थ (ठीक) प्रतीत नहीं हो रही थी, परन्तु वह मुख से कुछ भी नहीं बोली।)
राकेश- बहिन शालिनी! भाग्य से तुम आई हो। आज मेरे कार्यालय में एक महत्त्वपूर्ण गोष्ठी (मीटिंग) अचानक ही निश्चित हो गई है। आज ही चिकित्सक के साथ मिलने का समय निर्धारित है। तुम माला के साथ चिकित्सक (महिला डॉक्टर) के पास जाओ, उसके परामर्श (सलाह) के अनुसार जो भी करने योग्य है, उसे पूरा कीजिए।
3. शालिनी- किम्भवत्? भ्रातृजायायाः ................................................................................................. गच्छन्त्यों वार्ता कुरुतः।)
कठिन-शब्दार्थ-भ्रातृजायायाः = भाभी का। ह्यः = कल (बीता हुआ)। ज्ञापयिष्यति = बतला देगी। गच्छन्त्यौ = (दोनों) जाती हुई। वार्ताम् = बातचीत।
हिन्दी अनुवाद-
शालिनी - क्या हुआ? क्या भाभी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है? मैं तो कल से ही देख रही हूँ कि वह स्वस्थ नहीं है, ऐसा प्रतीत हो रहा था।
राकेश - चिन्ता की बात नहीं है। तुम माला के साथ जाओ। रास्ते में वह सब कुछ बतला देगी।
(माला और शालिनी महिला चिकित्सक की ओर जाती हुई बातचीत करती हैं।)
4. शालिनी - किम्भवत्? भ्रातृजाये! ................................................................ अहम् वार्ता करिष्ये।
कठिन-शब्दार्थ-स्वकुक्षौ = अपनी कोख में। उद्दिग्ना = चिन्तित। शृणोति = सुनता है। वध्यार्हा = वध के योग्य। जघन्यं = घोर पाप। कृत्यम् = कार्य, कर्म। तूष्णीम् = चुप। अधुनाैव = (अधुना + एव) इसी समय।
हिन्दी अनुवाद-
शालिनी - क्या हुआ? भाभी! क्या समस्या है?
माला - शालिनी! मैं अपनी कोख में तीन महीने का गर्भ धारण किये हुए हूँ। तुम्हारे भाई का आग्रह है कि मैं लिङ्ग-परीक्षण (पुत्र अथवा पुत्री की पहचान) कराऊँ। कोख में यदि कन्या है तो गर्भपात करा दूँ। मैं अत्यधिक चिन्तित हूँ, किन्तु तुम्हारा भाई बात ही नहीं सुनता है।
शालिनी - भाई इस प्रकार से सोच भी कैसे सकता है? शिशु कन्या है तो क्या वह वध के योग्य है? यह कार्य घोर पाप है। तुमने विरोध नहीं किया? वह तुम्हारे शरीर में स्थित शिशु के वध के लिए सोच रहा है और तुम चुप बैठी हो? इसी समय घर चलो, लिंग-परीक्षण की आवश्यकता नहीं है। भाई जब घर आयेगा तब मैं बात करूँगी।
5. ( संध्याकाले भ्राता आगच्छति ................................................................ आसीत्, किम् कथयत् सा?
कठिन-शब्दार्थ-हस्तपादादिकम् = हाथ-पैरों आदि को। प्रक्षाल्य = धोकर। परिवर्त्य = बदलकर।
हिन्दी अनुवाद-[ सायंकाल (शालिनी का) भाई आता है। हाथ-पैरों धोकर और वस्त्र बदलकर पूजा-घर में जाकर दीपक प्रज्ज्वलित करता है और देवी (भवानी) की स्तुति भी करता है। उसके बाद चायपान के लिए सभी एकत्रित होते हैं।]
राकेश - माला! तुम महिला चिकित्सक के पास गई थी, उसने क्या कहा?
6. ( माला मौनमेवाश्रयति। तदैव ................................................................ पुत्रस्य आवश्यकताऽस्ति तर्हि ....................।
कठिन-शब्दार्थ-तदैव = (तदा + एव) तभी। क्रोडे = गोदी में। चाकलेहम् = चाकलेट। लालयति = स्नेह (लाड़-प्यार) करता है। अवतारयति = उतारता है। क्षिपति = डालता है। कुक्षि = कोख में।
हिन्दी अनुवाद-(माला चुप ही रहती है। तभी खेलती हुई तीन साल की पुत्री अम्बिका पिता की गोदी में बैठ जाती है और उससे चाकलेट माँगती है। राकेश अम्बिका को स्नेह (लाड़-प्यार) करता है तथा चाकलेट देकर उसको गोदी से उतारता है। फिर से वह माला की ओर प्रश्न-वाचक दृष्टि डालता है। शालिनी यह सब देखकर उत्तर देती है।)
शालिनी - हे भाई! तुम क्या जानना चाहते हो? उसकी कोख में पुत्र है अथवा पुत्री है? किसलिए? छह माह के बाद सब स्पष्ट हो जायेगा, समय से पूर्व किसलिए यह प्रयास है?
राकेश - बहिन, तुम तो जानती ही हो कि हमारे घर में अम्बिका पुत्री के रूप में है ही। इस समय एक पुत्र की आवश्यकता है तब ....................।
7. शालिनी - तर्हि कुक्षि पुत्री ............................................................................................... तव शिक्षा वृथा......।
कठिन-शब्दार्थ-हन्तव्या = मारने योग्य। प्रवृत्तः = तत्पर। निर्घृणम् = घृणा योग्य। विस्मृतवान् = भूल गये हो। विभेदम् = भेदभाव। सर्वदैव = (सर्वदा + एव) हमेशा ही। दुहिता = पुत्री। इयती = इतनी (अव्यय)। कुत्सिता = निन्दनीय, घृणा योग्य। कुण्ठिता = दुःखी।
हिन्दी अनुवाद-
शालिनी - तब कोख में यदि पुत्री है तो क्या (उसे) मार देना चाहिए? (तीव्र स्वर से) तुम हत्या का पाप करने के लिए तत्पर हो।
राकेश - नहीं, हत्या तो नहीं ....................।
संस्कृत—कक्षा-8
शालिनी—तब यह घृणा योग्य कार्य क्या है? क्या तुम सब तरह से भूल गये हो कि हमारे पिताजी ने कभी भी पुत्र और पुत्री के रूप में भेदभाव नहीं किया? वे हमेशा ही मनुस्मृति की इस पंक्ति को उदाहरण के रूप में देते थे— "पुत्र पिता की आत्मा स्वरूप होता है और पुत्री पुत्र के समान होती है।" तुम भी सुबह-सायं देवी की स्तुति करते हो। इसलिए संसार को उत्पन्न करने वाली शक्ति का तिरस्कार (अपमान) कर रहे हो? तुम्हारे मन में इतनी घृणित वृत्ति (निन्दनीय व्यवहार) आ गई है, यह सोचकर ही मैं कुण्ठित (दुःखी) हूँ। तुम्हारी शिक्षा व्यर्थ............................।
8. राकेशः—भगिनि! विरम ..................................................................................... कनिष्ठोऽपि त्वम् मम गुरुर्असि।
श्लोकस्य अन्वयः—यत्र नार्यः पूज्यन्ते तु तत्र देवताः रमन्ते। यत्र एताः न पूज्यन्ते तत्र सर्वाः क्रियाः अफलाः (भवन्ति)।
कठिन-शब्दार्थ—विरम = रुको। स्वापराधम् = अपना अपराध। गर्हितम् = निन्दित। रमन्ते = रमण करते हैं, प्रसन्न होते हैं। अफलाः = निष्फल। कनिष्ठा = छोटी।
हिन्दी अनुवाद—
राकेश—बहिन! रुको, रुको (चुप रहो)। मैं अपना अपराध स्वीकार करता हूँ और लज्जित हूँ। अब से कभी भी यह निन्दित कार्य स्वप्न में भी नहीं सोचूँगा। जिस प्रकार से अम्बिका मेरे हृदय के सम्पूर्ण स्नेह की अधिकारिणी है, उसी प्रकार आने वाला शिशु भी स्नेह का अधिकार होगा चाहे पुत्र होवे अथवा पुत्री। मैं अपने निन्दित विचार के प्रति पश्चाताप युक्त हूँ, मैं कैसे भूल गया—
श्लोक का भावार्थ—स्त्रियों का महत्त्व दर्शाते हुए कहा गया है कि "जहाँ स्त्रियों का सम्मान किया जाता है वहाँ देवता प्रसन्न होते हैं। जहाँ ये (स्त्रियाँ) सम्मानित नहीं होती हैं वहाँ सभी कार्य निष्फल हो जाते हैं।" अर्थात् हमें सदैव स्त्रियों का सम्मान करना चाहिए। उनका अपमान करने से घर-परिवार व समाज का पतन होता है।
अथवा "पिता से दस गुना माता (गौरव में) बढ़कर है।" बहिन तुमने श्रेष्ठ मार्ग दिखला दिया है। छोटी होने पर भी तुम गुरु (बड़ी) हो।
9. शालिनी—अलम् पश्चात्तापेन .............................................................................. सबला सर्वैः सदोत्साहताम्।
कठिन-शब्दार्थ—अपगतः = दूर हो गया। सन्नद्धा = तैयार। सर्वकारस्य = सरकार की। श्रुतचिन्तने = तत्त्वों (ज्ञान) के चिन्तन-मनन में। नृपणये = राजनीति में। पाञ्चालिका = द्रौपदी। ख्याताभितः = नाम से सुप्रसिद्ध। दिक्षु = दिशाओं में।
हिन्दी अनुवाद—
शालिनी—पश्चात्ताप मत करो। तुम्हारे मन का अन्धकार दूर हो गया, यह प्रसन्नता का विषय है। हे भाभी! आओ। सभी चिन्ता को छोड़ो और आने वाले शिशु के स्वागत के लिए तैयार हो जाओ। भाई! तुम भी प्रतिज्ञा करो—कन्या की रक्षा करने में, उसको पढ़ाने में दत्तचित्त रहोगे। "पुत्र की रक्षा करो, पुत्री को पढ़ाओ" यह सरकार की घोषणा तभी सार्थक होगी जब हम सब मिलकर इस चिन्तन को यथार्थ रूप से करेंगे—
तत्त्वों (ज्ञान) के चिन्तन-मनन में जो गार्गी है, राजनीति में और पराक्रम में जो द्रौपदी है, शत्रुओं को पराजित करने में जो लक्ष्मी है, आकाश के विज्ञानरूपी प्राङ्गण में जो कल्पना चावला है, खेलजगत् में अपना पराक्रम दिखाने में जो साइना नेहवाल (बैडमिन्टन खिलाड़ी) के नाम से सुप्रसिद्ध है। वही यह स्त्री सभी दिशाओं में बल से युक्त (सबला) है। सभी लोगों के द्वारा हमेशा उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए।
⭐ 3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पात्मक प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक एवं लघूत्तरात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पात्मकप्रश्नाः—
प्रश्नः—अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि प्रदत्तविकल्पेभ्यः चित्वा लिखत—
1. गृहं शून्यं ....................... विना।
2. यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र ....................।
3. 'गृहं शून्यं सुतां विना' इति पाठस्य क्रमः कः?
4. शालिनी ग्रीष्मावकाशे कुत्र आगच्छति?
5. मालायाः पुत्राः किन्नाम आसीत्?
6. "पुत्रीं रक्ष, पुत्रीं पाठय" इति कस्य घोषणा वर्तते?
7. शालिनी किं त्यक्त्वा आगन्तोः शिशोः स्वागताय कथयति?
8. श्रुतचिन्तने का प्रसिद्धा?
9. विज्ञानाङ्गणे का प्रसिद्धा?
10. लक्ष्मीः कस्मिन् प्रसिद्धा?
11. का उदासीना इव दृश्यते?
12. शालिनी कया सह चिकित्सकำ प्रति गच्छति?
13. मालायाः मनोदशा कीदृशी न प्रतीयते स्म?
14. लिङ्गपरीक्षार्थं कस्य आग्रहः आसीत्?
15. अम्बिका कति वर्षीया आसीत्?
16. राकेशस्य पुत्राः किन्नाम आसीत्?
17. राकेशस्य भगिनी का आसीत्?
18. "आत्मा वै जायते........................।" रिक्तस्थाने पूरणीयपदं किम्?
(स) पुत्री |
(ब) जाता <br>
(द) पुत्रः
उत्तराणि-(क) ग्रीष्मावकाशे (ख) मालायाः (ग) अम्बिका (घ) पुत्रीपुत्रयोः (ङ) माता।
लघूत्तरत्मकप्रश्नाः -
प्रश्न 1. पूर्णवाक्येन प्रश्नान् उत्तरत -
(क) मालायाः कया सह मेलनस्य समयः निर्धारितः? किमर्थञ्च?
उत्तरम्— मालायाः चिकित्सकया सह मेलनस्य समयः निर्धारितः। गर्भस्य लिङ्गपरीक्षणार्थम्।
(क) राकेशः पूजागृहं गत्वा किं करोति?
उत्तरम्-राकेशः पूजागृहं गत्वा दीपं प्रज्जयति भवानीस्तुतिं च करोति।
उत्तरम्-सः उद्धरति स्म—“आत्मा वै जायते पुत्रः पुत्रेण दुहिता समा।”
(ङ) कुत्र सर्वाः क्रियाः अफलाः भवन्ति?
उत्तरम्-यत्र नार्यः न पूज्यन्ते तत्र सर्वाः क्रियाः अफलाः भवन्ति।
प्रश्न 2. सुमेलनं कुरुत -
| (क) | (ख) |
|---|---|
| (i) गार्गी | शत्रुविदारणे |
| (ii) पाञ्चालिका | श्रुतचिन्तने |
| (iii) लक्ष्मीः | विज्ञानाङ्गणे |
| (iv) कल्पना | नृपनये |
उत्तरम्-(i) गार्गी श्रुतचिन्तने। <br> (ii) पाञ्चालिका नृपनये। <br> (iii) लक्ष्मीः शत्रुविदारणे। <br> (iv) कल्पना विज्ञानाङ्गणे।
प्रश्न 3. रेखाङ्कितपदानि अधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत -
(i) शालिनी ग्रीष्मावकाशे पितृगृहम् आगच्छति।
(ii) सर्वे प्रसन्नमनसा तस्याः स्वागतं कुर्वन्ति।
(iii) तस्याः भ्रातृजाया उदासीना दृश्यते।
(iv) सा मुखेन किमपि नोक्तवती।
(v) कार्यालये एका गोष्ठी सहसैवै निश्चिता।
(vi) भ्रातृजायायाः स्वास्थ्यं समीचीनं नास्ति।
(vii) सः शिशोः वधार्थं चिन्तयति।
(viii) राकेशः अम्बिकां लालयति।
(ix) षण्मासानन्तरं सर्वं स्पष्टं भविष्यति।
(x) त्वया सन्मार्गः प्रदर्शितः।
उत्तरम्-प्रश्न-निर्माणम्-
(i) शालिनी ग्रीष्मावकाशे कुत्र आगच्छति?
(ii) सर्वे प्रसन्नमनसा कस्याः स्वागतं कुर्वन्ति?
(iii) तस्याः भ्रातृजाया कीदृशी दृश्यते?
(iv) सा केन किमपि नोक्तवती?
(v) कार्यालये का सहसैवै निश्चिता?
(vi) कस्याः स्वास्थ्यं समीचीनं नास्ति?
(vii) सः कस्य वधार्थं चिन्तयति?
(viii) राकेशः काम् लालयति?
(ix) कदा सर्वं स्पष्टं भविष्यति?
(x) कया सन्मार्गः प्रदर्शितः?
संस्कृत—कक्षा-8
प्रश्न 4. अधोलिखितशब्दानाम् अर्थैः सह उचितमेलनं कुरुत-
<table><tbody><tr><td>शब्दाः</td><td>-</td><td>अर्थाः</td></tr><tr><td>(i) साकम्</td><td>-</td><td>भाग्येन</td></tr><tr><td>(ii) सन्नद्धः</td><td>-</td><td>पुत्री</td></tr><tr><td>(iii) उद्दिग्ना</td><td>-</td><td>संसारस्य</td></tr><tr><td>(iv) दिक्षु</td><td>-</td><td>चिन्तिता</td></tr><tr><td>(v) आयासः</td><td>-</td><td>तत्परः</td></tr><tr><td>(vi) सृष्टेः</td><td>-</td><td>निन्दितम्</td></tr><tr><td>(vii) दुहिता</td><td>-</td><td>सर्वासु</td></tr><tr><td>(viii) सकलासु</td><td>-</td><td>सह</td></tr><tr><td>(ix) गर्हितम्</td><td>-</td><td>दिशासु</td></tr></tbody></table>
<table><tbody><tr><td>(x) दिष्ट्या</td><td>-</td><td>प्रयासः</td></tr><tr><td>उत्तरम्-शब्दाः</td><td>-</td><td>अर्थाः</td></tr><tr><td>(i) साकम्</td><td>-</td><td>सह</td></tr><tr><td>(ii) सन्नद्धः</td><td>-</td><td>तत्परः</td></tr><tr><td>(iii) उद्दिग्ना</td><td>-</td><td>चिन्तिता</td></tr><tr><td>(iv) दिक्षु</td><td>-</td><td>दिशासु</td></tr><tr><td>(v) आयासः</td><td>-</td><td>प्रयासः</td></tr><tr><td>(vi) सृष्टेः</td><td>-</td><td>संसारस्य</td></tr><tr><td>(vii) दुहिता</td><td>-</td><td>पुत्री</td></tr><tr><td>(viii) सकलासु</td><td>-</td><td>सर्वासु</td></tr><tr><td>(ix) गर्हितम्</td><td>-</td><td>निन्दितम्</td></tr><tr><td>(x) दिष्ट्या</td><td>-</td><td>भाग्येन</td></tr></tbody></table>