📖 1. समाधान: अभ्यास एवं पाठ्यपुस्तक के संपूर्ण हल
राजस्थान बोर्ड कक्षा 8 विज्ञान — पाठगत प्रश्न एवं अभ्यास के चरण-दर-चरण सटीक हल।
4. दहन और ज्वाला
भाग 1: समाधान (अभ्यास एवं पाठगत प्रश्न)
पाठगत प्रश्न
प्रश्न 1. सूर्य अपनी ऊष्मा और प्रकाश स्वयं उत्पन्न करता है। क्या यह भी एक प्रकार का दहन है?
उत्तर- सूर्य में ऊष्मा और प्रकाश नाभिकीय अभिक्रियाओं द्वारा उत्पन्न होता है। हाँ, यह भी एक प्रकार का दहन है।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
प्रश्न 1. दहन की परिस्थितियों की सूची बनाइए।
उत्तर- दहन की परिस्थितियाँ-
(1) किसी ज्वलनशील पदार्थ की उपस्थिति अनिवार्य है।
(2) दहन के लिए ऑक्सीजन की उपस्थिति।
(3) ज्वलनशील पदार्थ को उसके ज्वलन ताप तक गर्म करना।
प्रश्न 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
उत्तर- (क) प्रदूषण, (ख) केरोसिन, (ग) ज्वलन ताप, (घ) पानी।
प्रश्न 3. समझाइए कि मोटर वाहनों में सीएनजी (CNG) के उपयोग से हमारे शहरों का प्रदूषण किस प्रकार कम हुआ है।
उत्तर- सीएनजी के उपयोग से हमारे शहरों में प्रदूषण निम्न प्रकार कम हुआ है-
(1) सीएनजी एक अधिक स्वच्छ ईंधन है।
(2) सीएनजी सल्फर और नाइट्रोजन के ऑक्साइडों का उत्पादन अल्प मात्रा में करती है। इसलिए, अम्ल वर्षा नहीं होती और उसके कारण फसलों, भवनों तथा मृदा के लिए कोई हानिकारक प्रभाव नहीं होता।
(3) इसका वायु में पूर्ण दहन होता है और कोई हानिकारक गैसें उत्पन्न नहीं होतीं।

चित्र: पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस के भण्डार
प्रश्न 4. ईंधन के रूप में एलपीजी और लकड़ी की तुलना कीजिए।
उत्तर- ईंधन के रूप में एलपीजी और लकड़ी की तुलना-
एलपीजी | लकड़ी |
1. यह पूर्ण रूप से जल जाती है तथा कोई अवशेष नहीं छोड़ती है। | 1. यह जलने पर बड़ी मात्रा में धुआँ उत्पन्न करती है जो मनुष्य के लिए हानिकारक है। |
2. इसका ऊष्मीय मान है जो काफी अधिक है। अतः एलपीजी को जलाने पर अधिक ऊष्मा मिलती है। | 2. इसका ऊष्मीय मान से है जो कम है अतः लकड़ी को जलाने पर कम ऊष्मा प्राप्त होगी। |
3. एलपीजी द्वारा कोई वायु प्रदूषण नहीं होता है। | 3. इसके जलाने से वायु प्रदूषण होता है। |
4. एलपीजी वन संरक्षण में योगदान देती है। | 4. यह वनोन्मूलन का कारण बनती है, जो पर्यावरण के लिए हानिप्रद है। |
प्रश्न 5. कारण बताइए-
उत्तर-
(2) एलपीजी पूर्ण रूप से जल जाती है और कोई अवशेष नहीं छोड़ती। इसके विपरीत लकड़ी के जलाने से बहुत मात्रा में राख पीछे रह जाती है। इस प्रकार एलपीजी के जलने पर कोई प्रदूषण नहीं होता है जबकि लकड़ी के जलने पर प्रदूषण होता है।
(ब) काष्ठ कोयला
(स) लोहा
(द) लकड़ी
2. पेट्रोल जैसे ज्वलनशील पदार्थों में लगी आग को बुझाने में उपयोगी है-
(ब)
(स) ऑक्सीजन
(द) इनमें से कोई नहीं
(ब) पीला
(स) लाल
(द) नीला
4. ईंधन के ऊष्मीय मान का मात्रक है-
(ब)
(स) जूल
(द) वाट
(ब) कार्बन डाइऑक्साइड
(स) हाइड्रोजन
(द) ऑक्सीजन
6. सोने, चाँदी को पिघलाने हेतु सुनार ज्वाला के जिस क्षेत्र का उपयोग करते हैं, वह है-
(ब) ज्वाला का मध्य क्षेत्र
(स) ज्वाला का आंतरिक क्षेत्र
(द) इनमें से कोई नहीं
(ब) किरोसीन
(स)
(द) हाइड्रोजन
8. निम्न में कौन स्वतः दहन का उदाहरण है?
(ब) फॉस्फोरस
(स) नाइट्रोजन
(द) ऑक्सीजन
(ब) ऑक्सीजन
(स) कार्बन मोनोक्साइड
(द) कार्बन डाइऑक्साइड
10. वह ताप जिस पर कोई पदार्थ जलना शुरू करता है, क्या कहलाता है?
(ब) ज्वाला
(स) गलनांक
(द) इनमें से कोई नहीं
(ब)
(स)
(द)
12. विद्युत उपकरणों में लगी आग बुझाने के लिए सबसे अच्छा अग्निशामक हैं-
(अ) पेट्रोल
(ब) जल
(स) रेत
(द) कार्बन डाइऑक्साइड
उत्तर-तालिका- 1. (स) 2. (ब) 3. (द) 4. (अ) 5. (ब) 6. (अ) 7. (द) 8. (ब) 9. (द) 10. (अ) 11. (ब) 12. (द)।
रिक्त स्थानों की पूर्ति-
1. जो पदार्थ वायु में जलते हैं, ............... कहलाते हैं।
2. ज्वलनशील पदार्थों का ज्वलन ताप बहुत ............... होता है।
3. ईंधन के अपूर्ण दहन से विषैली ............... गैस बनती है।
4. ............... वर्षा फसलों, भवनों तथा मृदा के लिए हानिकारक होती है।
5. सूर्य में ऊष्मा और प्रकाश ............... अभिक्रियाओं द्वारा उत्पन्न होते हैं।
6. ...............ज्वलनशील पदार्थों को ठंडा करता है।
7. वायु में कार्बन डाइऑक्साइड की बढ़ी हुई मात्रा को ...............का कारण बताया जाता है।
8. दहन के प्रक्रम में ...............तथा ...............उत्पन्न होते हैं।
उत्तर- 1. दाह्य 2. कम 3. कार्बन मोनोक्साइड 4. अम्ल 5. नाभिकीय 6. जल 7. विश्व उष्णन 8. उष्मा, प्रकाश।
सत्य/असत्य-
निम्नलिखित कथनों में सही पर 'T' तथा गलत पर 'F' अंकित कीजिए-
(1) दहन के लिए वायु में कार्बन डाइऑक्साइड होना आवश्यक है।
(2) ज्वलनशील पदार्थों का ज्वलन ताप बहुत अधिक होता है।
(3) तेल में लगी आग को नियंत्रित करने के लिए जल का उपयोग नहीं करते हैं।
(4) दहन के प्रक्रम में ऊष्मा तथा प्रकाश उत्पन्न होते हैं।
(5) ईंधन के सम्पूर्ण दहन से विषैली गैस कार्बन मोनोक्साइड बनती है।
(6) सीएनजी एक अधिक स्वच्छ ईंधन है।
उत्तर- (1) F (2) F (3) T (4) T (5) F (6) T
'कॉलम-A' में दिए गए शब्दों का मिलान 'कॉलम-B' से कीजिए-
प्रश्न 1.
कॉलम-A (ईंधन) | कॉलम-B (ऊष्मीय मान ) |
(i) लकड़ी | (a) 55000 |
(ii) कोयला | (b) 45000 |
(iii) पेट्रोल | (c) 33000 |
(iv) एलपीजी | (d) 22000 |
प्रश्न 2.
कॉलम-A | कॉलम-B |
(i) विश्व उष्णन | (a) कार्बन मोनोक्साइड |
(ii) ज्वलनशील | (b) कार्बन डाइऑक्साइड |
(iii) अग्नि शामक | (c) पेट्रोल |
(iv) विषैली गैस | (d) पोटैशियम बाइकार्बोनेट |
उत्तर-
(i) (ii) (iii) (iv)
1.
(d)
(c)
(b)
(a)
2.
(b)
(c)
(d)
(a)
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. दहन किसे कहते हैं?
उत्तर- वह रासायनिक प्रक्रम जिसमें पदार्थ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया कर ऊष्मा देता है, दहन कहलाता है।
प्रश्न 2. आप इस कथन से क्या समझते हैं कि चारकोल का ऊष्मीय मान किलो जूल प्रति ग्राम है?
उत्तर- इसका अर्थ है जब एक ग्राम चारकोल को पूर्णतया जलाया जाता है तो किलो जूल ऊष्मा उत्पन्न होती है।
प्रश्न 3. किसी पदार्थ के ज्वलन ताप की परिभाषा लिखिए।
उत्तर- उस न्यूनतम ताप को जिस पर कोई पदार्थ आग पकड़ लेता है और जलने लगता है, उस पदार्थ का ज्वलन ताप कहते हैं।
प्रश्न 4. निरापद दियासलाई की तीली के सिरे पर लगने वाले दो रसायनों के नाम लिखिए।
उत्तर- (i) ऐन्टिमनी ट्राइसल्फाइड (ii) पोटैशियम क्लोरेट।
प्रश्न 5. ज्वलनशील पदार्थ से क्या आशय है?
उत्तर- जिन पदार्थों का ज्वलन ताप कम होता है और जो ज्वाला के साथ सरलतापूर्वक आग पकड़ लेते हैं, ज्वलनशील पदार्थ कहलाते हैं; जैसे-पेट्रोल।
प्रश्न 6. स्वतः दहन से क्या आशय है?
उत्तर- ऐसा दहन जिसमें पदार्थ बिना किसी प्रत्यक्ष कारण के अचानक लपटों के साथ जल उठता है, स्वतः दहन कहलाता है।
प्रश्न 7. बन्द कमरे में कोयला जलाकर नहीं सोना चाहिए, क्यों?
उत्तर- क्योंकि कोयला जलकर कार्बन मोनोक्साइड गैस देता है जो जहरीली गैस है। इससे मृत्यु तक हो सकती है।
प्रश्न 8. अम्ल वर्षा के लिए उत्तरदायी दो गैसों के नाम लिखिए।
उत्तर- (i) सल्फर डाइऑक्साइड तथा (ii) नाइट्रोजन डाइऑक्साइड।
प्रश्न 9. कमरे के ताप पर माचिस की तीली स्वयं आग क्यों नहीं पकड़ती?
उत्तर- क्योंकि इसका ज्वलन ताप कमरे के तापमान से अधिक होता है। इसी कारण यह स्वयं आग नहीं पकड़ती है।
प्रश्न 10. हमारे द्वारा प्रयुक्त प्रमुख ईंधनों के नाम बताइए।
उत्तर- हमारे द्वारा प्रयुक्त प्रमुख ईंधन-गोबर, लकड़ी, कोयला, पेट्रोल, काष्ठ-कोयला, डीजल, संपीडित प्राकृतिक गैस (CNG) आदि है।
प्रश्न 11. विश्व उष्णन के लिए उत्तरदायी गैस का नाम लिखिए।
उत्तर- कार्बन डाइऑक्साइड।
प्रश्न 12. मोमबत्ती के जलने और कोयले जैसे ईंधन के जलने में क्या अंतर है?
उत्तर- मोमबत्ती ज्वाला के साथ जलती है जबकि कोयला नहीं।
प्रश्न 13. किन्हीं तीन ज्वलनशील पदार्थों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर- (i) पेट्रोल (ii) ऐल्कोहल (iii) द्रवित पेट्रोलियम गैस (LPG)।
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प्रश्न 14. आग बुझाने के लिए कैसे प्राप्त कर सकते हैं।
उत्तर— सोडियम बाइकार्बोनेट (बेकिंग सोडा) या पोटैशियम बाइकार्बोनेट जैसे रसायनों के पाउडर का भारी मात्रा में छिड़काव कर आग बुझाने के लिए प्राप्त कर सकते हैं।
प्रश्न 15. कोयले की खानों में आग लगने का प्रमुख कारण क्या है?
उत्तर— कोयले की खानों में कोयले की धूल का स्वतः दहन आग लगने का प्रमुख कारण है।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-(I-Type)
प्रश्न 1. आग बुझाने के लिए पानी के इस्तेमाल से पूर्व विद्युत आपूर्ति बंद क्यों की जाती है?
उत्तर— आग बुझाने के लिए पानी के इस्तेमाल से पूर्व विद्युत आपूर्ति बंद करना आवश्यक है क्योंकि जल विद्युत का चालन कर सकता है और आग बुझाने वालों को हानि हो सकती है।
प्रश्न 2. भोजन हमारे शरीर के लिए एक ईंधन कैसे है?
उत्तर— हमारे शरीर में भोजन ऑक्सीजन से अभिक्रिया कर अपघटित होता है और ऊष्मा उत्पन्न होती है। इस प्रकार भोजन हमारे शरीर के लिए एक ईंधन है।
प्रश्न 3. कभी-कभी भोजन पकाने वाला तेल आग क्यों पकड़ लेता है?
उत्तर— हम जानते हैं कि दाह्य पदार्थ तब तक आग नहीं पकड़ सकता या जल नहीं सकता जब तक उसका ताप उसके ज्वलन ताप से कम रहता है। इसलिए जब भोजन पकाने वाले तेल का बर्तन लम्बे समय तक जलते हुए स्टोव या गैस पर रखा रहता है तो तेल का ताप उसके ज्वलन ताप से अधिक हो जाता है और तेल आग पकड़ लेता है।
प्रश्न 4. लकड़ी की तुलना में हमें मिट्टी के तेल को रखने में विशेष सावधानी क्यों बरतनी चाहिए?
उत्तर— मिट्टी के तेल का ज्वलन ताप लकड़ी के ज्वलन ताप से कम होता है इसलिए मिट्टी के तेल को थोड़ा गर्म करने पर ही वह आग पकड़ लेता है। इसलिए लकड़ी की तुलना में हमें मिट्टी के तेल को रखने में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
प्रश्न 5. यदि किसी व्यक्ति के जलते हुए कपड़ों को कम्बल में लपेट दिया जाए तो आग बुझ जाती है। क्यों?
उत्तर— जब किसी व्यक्ति के जलते हुए कपड़ों को कम्बल से कसकर ढक दिया जाता है तो जलने के लिए आवश्यक ऑक्सीजन-युक्त वायु की सप्लाई बन्द हो जाती है। दहन के लिए आवश्यक वायु न मिलने के कारण कपड़ों की आग बुझ जाती है।
प्रश्न 6. दहन क्रिया में कौनसे पदार्थ ज्वाला प्रदान करते हैं?
उत्तर— दहन क्रिया में सभी पदार्थ ज्वाला नहीं देते हैं। दहन के समय जो पदार्थ वाष्पित होते हैं वे ज्वाला का निर्माण करते हैं। जैसे मोमबत्ती का पिघला हुआ मोम तथा मिट्टी के तेल के लैम्प ज्वाला देते हैं क्योंकि इनका वाष्पीकरण होता है। कोयला जलकर ज्वाला नहीं देता क्योंकि यह वाष्पित नहीं होता है।
प्रश्न 7. निरापद माचिस को जलाते समय होने वाली रासायनिक क्रिया को समझाइए।
उत्तर— जब माचिस की तीली को खुरदरी सतह पर रगड़ा जाता है तो कुछ लाल फॉस्फोरस, श्वेत फॉस्फोरस में परिवर्तित हो जाता है। यह तुरन्त माचिस की तीली के सिरे पर लगे पोटैशियम क्लोरेट से अभिक्रिया कर पर्याप्त ऊष्मा उत्पन्न कर देता है जिससे ऐन्टिमनी ट्राइसल्फाइड का दहन प्रारम्भ हो जाता है।
प्रश्न 8. एक अति उत्तम अग्निशामक क्यों है?
अथवा
अग्निशामक यंत्र में का उपयोग करना बेहतर क्यों है?
उत्तर— उच्च दाब पर द्रव के रूप में सिलिंडरों में भरी जा सकती है। सिलिंडर से छोड़े जाने पर बहुत अधिक फैलती है और ठंडी हो जाती है। अतः यह न केवल आग को चारों ओर से घेर लेती है बल्कि ईंधन के ताप को भी नीचे ले आती है। इसीलिए यह अति उत्तम अग्निशामक है।
प्रश्न 9. विस्फोट से क्या तात्पर्य है?
उत्तर— वह आकस्मिक अभिक्रिया जिसमें ऊष्मा, प्रकाश और ध्वनि पैदा होती है और अभिक्रिया से बड़ी मात्रा में गैस बनती है विस्फोट कहलाती है। पटाखे जलाने पर इस प्रकार की अभिक्रिया होती है।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-(II-Type)
प्रश्न 1. विद्युत उपकरणों में लगी आग बुझाने हेतु किसी विशेष अग्नि-शामक का ही उपयोग क्यों किया जाता है? इसका नाम लिखिए।
उत्तर— विद्युत उपकरणों में लगी आग को बुझाने के लिए कार्बन डाइऑक्साइड सबसे अच्छा अग्निशामक है क्योंकि ऑक्सीजन से भारी होने के कारण आग को कम्बल की तरह लपेट लेती है। इससे ईंधन और ऑक्सीजन के बीच सम्पर्क टूट जाता है जिससे आग पर नियंत्रण आसानी से हो जाता है, साथ ही से विद्युत उपकरणों को कोई हानि भी नहीं होती है।
आग बुझाने के इस यंत्र को अग्निशामक यंत्र कहते हैं। इसमें उच्च दाब पर द्रव के रूप में भरी रहती है।
प्रश्न 2. क्या कारण है कि कागज के बने कप में कागज के बिना जले पानी उबाला जा सकता है?
उत्तर—जब हम कागज के कप में पानी गर्म करते हैं तो बर्नर की ज्वाला द्वारा दी गई ऊष्मा तुरंत ही कागज के कप से उसमें रखे हुए पानी को स्थानान्तरित होती जाती है जिससे पानी का ताप बढ़ता जाता है और अन्ततः पानी उबलने लगता है। चूँकि इस प्रक्रम के दौरान कागज के कप को दी गई ऊष्मा लगातार उसमें रखे पानी को स्थानान्तरित होती रहती है इसलिए कागज के कप का ताप उसके ज्वलन ताप तक नहीं पहुँच जाता जिससे कागज नहीं जलता।
प्रश्न 3. ज्वलन ताप क्या है? इसका क्या महत्त्व है?
उत्तर—ज्वलन ताप (Ignition temperature)—वह न्यूनतम ताप जिस पर कोई पदार्थ जलने लगता है, उसका ज्वलन ताप कहलाता है। हर पदार्थ का ज्वलन ताप अलग-अलग होता है।
महत्त्व—पदार्थों को जलाने के लिए उनके ज्वलन ताप तक गर्म करना आवश्यक है। यही कारण है कि मिट्टी का तेल सामान्य अवस्था में नहीं जलता किन्तु थोड़ा गर्म करने पर वह जलने लगता है। अतः ज्वलन ताप के आधार पर ही पदार्थों को सुरक्षित रखना चाहिए।
प्रश्न 4. सामान्यतया आग बुझाने के लिए जल का उपयोग क्यों करते हैं?
उत्तर—सामान्यतया जब आग घर या अन्य स्थानों पर लग जाती है तो फायरमेन जल डालकर आग पर नियंत्रण करते हैं। जल ज्वलनशील पदार्थों को ठण्डा करता है जिससे उनका ताप उनके ज्वलन ताप से कम हो जाता है। ऐसा करने से आग का फैलना रुक जाता है। जल वाष्प ज्वलनशील पदार्थ को घेर लेता है जिससे वायु की आपूर्ति बन्द हो जाती है तथा आग बुझ जाती है।
प्रश्न 5. तेल या पेट्रोल में लगी आग को हम जल द्वारा क्यों नहीं बुझा सकते हैं?
उत्तर—हम जानते हैं कि जल तेल से भारी होता है। अतः जब तेल में लगी आग में जल डाला जाता है तो यह तेल के नीचे चला जाता है तथा तेल ऊपर जलता रहता है। अतः इसके लिए हम जल के स्थान पर कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करते हैं जो ऑक्सीजन से भारी होने के कारण आग को एक कम्बल की तरह लपेट लेती है। इससे ईंधन का ऑक्सीजन से सम्पर्क टूट जाता है जिससे आग पर नियंत्रण हो जाता है।
प्रश्न 6. दहन कितने प्रकार का होता है? समझाइए।
उत्तर—दहन तीन प्रकार का होता है-
(1) तीव्र दहन (Rapid combustion)—कुछ पदार्थ छोटी-सी चिंगारी से ही जलने लगते हैं, जैसे-गैस के चूल्हे में गैस, लाइटर की छोटी-सी चिंगारी से जलने लगती है। इस प्रकार का दहन तीव्र दहन है।
(2) स्वत: दहन (Spontaneous combustion)—कुछ पदार्थ बिना किसी प्रत्यक्ष कारण के अचानक लपटों के साथ जल उठते हैं। इस प्रकार का दहन स्वतः दहन है। जैसे-फास्फोरस कमरे के ताप पर ही वायु में जल उठता है।
(3) विस्फोट (Explosion)—इस प्रकार का दहन हमें पटाखों आदि में देखने को मिलता है। पटाखे जलाते हैं तो एक आकस्मिक अभिक्रिया होने से ऊष्मा, प्रकाश और ध्वनि पैदा होती है।
प्रश्न 7. ईंधन के ऊष्मीय मान से आप क्या समझते हैं? किसी ईंधन को पूर्णतया दहन करने पर ऊष्मा उत्पन्न होती है, तो इस ईंधन का ऊष्मीय मान क्या होगा? परिकलित कीजिए।
अथवा
ऊष्मीय मान से क्या आशय है? समझाइए।
उत्तर—ऊष्मीय मान—किसी ईंधन के किलोग्राम के पूर्ण दहन से प्राप्त ऊष्मा ऊर्जा की मात्रा, उसका ऊष्मीय मान कहलाती है। ईंधन के ऊष्मीय मान को किलो जूल प्रति किलोग्राम मात्रक द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
ईंधन को पूर्णतया दहन करने पर उत्पन्न ऊष्मा
ईंधन को पूर्णतया दहन करने पर उत्पन्न ऊष्मा
ईंधन का ऊष्मीय मान
प्रश्न 8. निम्न पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए-
(1) वैश्विक ऊष्मन (2) अम्ल वर्षा।
उत्तर—(1) वैश्विक ऊष्मन (Global warming)—वायु में कार्बन डाइऑक्साइड तथा कुछ अन्य गैसों की मात्रा में वृद्धि से वायुमण्डलीय ताप में वृद्धि होती है जिसे वैश्विक ऊष्मन कहते हैं। वैश्विक ऊष्मन को यदि नियोजित नहीं किया गया तो यह सभी जीवों के लिए बहुत विनाशकारी हो सकता है।
(2) अम्ल वर्षा (Acid rain)—सल्फर और नाइट्रोजन के ऑक्साइड वर्षा जल में घुल जाते हैं तथा अम्ल बनाते हैं। ऐसी वर्षा अम्ल वर्षा कहलाती है। अम्ल वर्षा फसलों, भवनों तथा मृदा के लिए बहुत हानिकारक होती है।
प्रश्न 9. क्या कारण है कि कुछ अवस्थाओं में तो ईंधन नीली ज्वाला के साथ जलता है परन्तु अन्य अवस्थाओं में पीली ज्वाला के साथ जलता है?
उत्तर—किसी भी ईंधन का नीली ज्वाला या पीली ज्वाला के साथ जलना, दहन के लिए उपलब्ध ऑक्सीजन की मात्रा पर निर्भर करता है।
(1) जब ऑक्सीजन (या वायु) की उपलब्धता पर्याप्त होती है तो ईंधन का दहन पूर्ण रूप से होता है जिससे नीली ज्वाला उत्पन्न होती है।
(2) जब ऑक्सीजन (या वायु) की उपलब्धता अपर्याप्त होती है तो ईंधन का दहन अपूर्ण होता है जिससे पीली ज्वाला निकलती है। इस परिस्थिति में ईंधन के अपूर्ण दहन से बने कार्बन के कण ज्वाला में पहुँच जाते हैं। जब ये कार्बन के कण गर्म होकर चमकते हैं तो पीला प्रकाश देते हैं जिससे ज्वाला भी पीली नजर आती है।
प्रश्न 10. कोई एक कारण बताइए कि कागज का कोई टुकड़ा पीली ज्वाला के साथ क्यों जलता है?
उत्तर- कागज का टुकड़ा पीली ज्वाला के साथ इसलिए जलता है क्योंकि ऑक्सीजन की उपलब्धता अपर्याप्त होने के कारण उसका दहन अपूर्ण होता है। जब कागज का दहन अपूर्ण होता है तो उससे 'बिना जले कार्बन कण' उत्पन्न होते हैं। ये कार्बन कण ज्वाला के साथ उठते हैं और गर्म होकर चमकते हैं। जब गर्म कार्बन कण चमकते हैं तो वे पीले रंग का प्रकाश छोड़ते हैं जिससे ज्वाला भी पीली दिखती है।
निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. सिद्ध कीजिए कि दहन हेतु वायु की आवश्यकता होती है। आवश्यक चित्र बनाइए।
उत्तर- दहन हेतु वायु की आवश्यकता होती है- एक जलती मोमबत्ती को मेज के ऊपर रखते हैं। काँच की चिमनी को मोमबत्ती के ऊपर लकड़ी के दो गुटकों की सहायता से इस प्रकार रखते हैं कि वायु का चिमनी में प्रवेश होता रहे, चित्र (a)। इसके बाद लकड़ी के गुटके को हटाकर चिमनी को मेज पर टिका देते हैं, चित्र (b)। अन्त में एक काँच की प्लेट चिमनी के ऊपर रख देते हैं, चित्र (c)। हम देखते हैं कि (a) में मोमबत्ती निर्बाध रूप से जलती है। (b) में जब चिमनी के नीचे से वायु प्रवेश नहीं कर पाती तो ज्वाला में कम्पन होता है और धुआँ उत्पन्न होता है। अवस्था (c) में ज्वाला बुझ जाती है क्योंकि उसे वायु उपलब्ध नहीं हो पाती। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि दहन के लिए वायु आवश्यक है।
प्रश्न 2. आधुनिक निरापद माचिस कैसे तैयार की जाती है? समझाइए।
उत्तर- आधुनिक निरापद माचिस (Modern safety match)- निरापद माचिस से यहाँ आशय यह है कि यह जलाने पर ही जले, स्वयं नहीं जले तथा बुझाने पर बुझ जाये। इसका विकास लगभग दो सौ वर्ष पूर्व हुआ था। इसके निर्माण के लिए ऐन्टिमनी ट्राइसल्फाइड, पोटैशियम क्लोरेट और श्वेत फास्फोरस का मिश्रण, कुछ गोंद और स्टार्च के साथ मिलाकर उचित लकड़ी की तीली के सिरे पर लगाया जाता था। जब इसे किसी खुरदरी सतह से रगड़ा जाता था तो घर्षण की ऊष्मा के कारण श्वेत फास्फोरस जल उठता था, इससे माचिस की तीली का दहन प्रारम्भ हो जाता था। परन्तु श्वेत फास्फोरस काफी खतरनाक था अतः आजकल निरापद माचिस के सिरे पर केवल ऐन्टिमनी ट्राइसल्फाइड और पोटैशियम क्लोरेट लगा रहता है। रगड़ने वाली सतह पर चूर्णित काँच और थोड़ा-सा लाल फास्फोरस लगाते हैं। जब माचिस की तीली को खुरदरी सतह पर रगड़ा जाता है तो कुछ लाल फास्फोरस श्वेत फास्फोरस में बदल जाता है। यह तुरन्त माचिस की तीली के सिरे पर लगे पोटैशियम क्लोरेट से क्रिया कर पर्याप्त ऊष्मा उत्पन्न कर देता है, जिससे ऐन्टिमनी ट्राइसल्फाइड का दहन प्रारम्भ हो जाता है एवं यह जलने लगता है।
प्रश्न 3. मोमबत्ती की ज्वाला के विभिन्न क्षेत्रों को नामांकित चित्र बनाते हुए समझाइए।
अथवा
मोमबत्ती की ज्वाला का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर- मोमबत्ती की ज्वाला के तीन क्षेत्र होते हैं-
(1) सबसे आंतरिक क्षेत्र- मोमबत्ती की ज्वाला का सबसे भीतरी क्षेत्र या सबसे निचला भाग (जो बत्ती के पास ही होता है) काले रंग का होता है। यह काला रंग उसमें ईंधन के बिना जले हुए कार्बन कणों की उपस्थिति के कारण होता है। इसका ताप न्यूनतम होता है।
(2) आंशिक दहन वाला मध्य भाग या दीप्त क्षेत्र- मोमबत्ती की ज्वाला का बीच वाला क्षेत्र मोम के अपूर्ण दहन का क्षेत्र है जो ऑक्सीजन (या वायु) की अपर्याप्त उपलब्धता के कारण होता है। जब बिना जले कार्बन कण मोमबत्ती की ज्वाला के मध्य भाग में से ऊपर उठते हैं तो वे गर्म होकर चमकने लगते हैं तथा पीले रंग का प्रकाश छोड़ते हैं जिससे ज्वाला का मध्य भाग पीला दिखता है। इसका ताप मध्यम होता है।
(3) पूर्ण दहन का बाह्य क्षेत्र या अदीप्त क्षेत्र- मोमबत्ती की ज्वाला का सबसे बाहरी क्षेत्र नीले रंग का होता है क्योंकि सबसे बाहरी भाग में ऑक्सीजन (या वायु) की पर्याप्त उपलब्धता के कारण मोम (ईंधन) का सम्पूर्ण दहन होता है। मोमबत्ती की ज्वाला का नीला भाग बहुत ही छोटा होता है। मोमबत्ती की ज्वाला के इस क्षेत्र का ताप उच्चतम होता है।

चित्र: दहन के लिए वायु आवश्यक है - प्रदर्शित करने हेतु प्रयोग (a), (b), (c)
[नोट-चित्र के लिए इसी अध्याय के पाठ्यपुस्तक के प्रश्न संख्या 6 का उत्तर देखें।]
प्रश्न 4. आदर्श ईंधन की पाँच विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर- आदर्श ईंधन की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
(1) ईंधन का ऊष्मीय मान उच्च होना चाहिए ताकि वह प्रति इकाई भार के हिसाब से अधिक ऊष्मा दे सके।
(2) ईंधन का ज्वलन ताप उचित होना चाहिए ताकि उसे आसानी से जलाया जा सके। ईंधन का ज्वलन ताप न तो बहुत कम और न ही बहुत अधिक होना चाहिए।
(3) ईंधन में अज्वलनशील पदार्थों की मात्रा कम होनी चाहिए ताकि वह जलने पर अधिक राख पीछे न छोड़े।
(4) ईंधन के जलने से कोई हानिकारक तथा विषैली गैस उत्पन्न नहीं होनी चाहिए जो वायु को प्रदूषित कर सके।
(5) ईंधन सस्ता होना चाहिए और आसानी से उपलब्ध होना चाहिए।
प्रश्न 5. ईंधन दहन से उत्पन्न हानिकारक उत्पादों के क्या प्रभाव होते हैं? लिखिए।
उत्तर- हम जानते हैं कि ईंधन का उपयोग काफी बढ़ता जा रहा है। इसके उपयोग से पर्यावरण पर हानिकारक प्रभाव हो रहा है, उनमें से कुछ अग्र हैं-
(1) लकड़ी, कोयले और पेट्रोल जैसे कार्बन ईंधन बिना जले कार्बन कण छोड़ते हैं। ये सूक्ष्म कण खतरनाक प्रदूषक होते हैं, जो दमा जैसे श्वास रोग उत्पन्न करते हैं। लकड़ी का उपयोग ईंधन के रूप में करने से वृक्षों की कटाई की जाती है जो वनोन्मूलन का कारण बनता है। वन क्षेत्र कम होने से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता जा रहा है।
(2) लकड़ी, कोयला आदि का अपूर्ण दहन होने पर कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बनती है जो अत्यंत विषैली होती है। यदि बन्द कमरे में कोयला जलाकर छोड़ दें तो वहाँ सो रहे व्यक्तियों की मृत्यु तक हो सकती है।
(3) अधिक कार्बन डाइऑक्साइड गैस विश्व ऊष्मन का कारण बनती है। इससे पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है जिससे हिमनद पिघल रहे हैं, जो समुद्र में जल स्तर को बढ़ा रहे हैं। इससे तटीय क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
(4) कोयले और डीजल के दहन से सल्फर डाइऑक्साइड गैस निकलती है। यह अत्यंत दमघोंटू और संक्षारक गैस है। इसके अतिरिक्त पेट्रोल इंजन नाइट्रोजन के गैसीय ऑक्साइड छोड़ते हैं। सल्फर और नाइट्रोजन के ऑक्साइड वर्षा जल में घुल जाते हैं तथा अम्ल बनाते हैं। ऐसी वर्षा अम्ल वर्षा कहलाती है, जो फसलों, भवनों और मृदा के लिए हानिकारक है।