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RBSE Class 8 Science Chapter 5 Solutions & Notes in Hindi

📅 अंतिम अपडेट: 2026-09-09📖 RBSE/NCERT Solutions
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भाग 1 — समाधान (Solutions)

📖 1. समाधान: अभ्यास एवं पाठ्यपुस्तक के संपूर्ण हल

राजस्थान बोर्ड कक्षा 8 विज्ञान — पाठगत प्रश्न एवं अभ्यास के चरण-दर-चरण सटीक हल।

5. पौधे एवं जंतुओं का संरक्षण

भाग 1: समाधान (अभ्यास एवं पाठगत प्रश्न)

पाठगत प्रश्न

प्रश्न 1. राष्ट्रीय उद्यानों (national parks), वन्य जंतु अभयारण्यों (wildlife sanctuaries) एवं जैवमंडल संरक्षित क्षेत्रों (biosphere reserves) को बनाने का क्या उद्देश्य है?

उत्तर- राष्ट्रीय उद्यानों, वन्य जंतु अभयारण्यों एवं जैवमंडल संरक्षित क्षेत्रों को बनाने का उद्देश्य पौधों और जंतुओं के लिए संरक्षित एवं सुरक्षित क्षेत्र उपलब्ध कराना है।

प्रश्न 2. वनोन्मूलन (deforestation) से एक ओर जहाँ वर्षा में कमी आती है, तो दूसरी ओर बाढ़ आना कैसे सम्भव हो सकता है?

484 ————————————————————————————————————————

उत्तर—वनोन्मूलन से वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ता है जिसके कारण पृथ्वी पर ताप एवं प्रदूषण के स्तर में वृद्धि होती है। पृथ्वी के ताप में वृद्धि के कारण जलचक्र का सन्तुलन बिगड़ता है और वर्षा दर में कमी आती है जिसके कारण सूखा पड़ता है। दूसरी ओर वनोन्मूलन से मृदा की जलधारण क्षमता तथा भूमि की ऊपरी सतह से जल के नीचे की ओर अंत:स्रवण पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है जिसके परिणामस्वरूप बाढ़ आती है।

[]

प्रश्न 3. 'कुछ विशेष क्षेत्रीय स्पीशीज (endemic species) विलुप्त हो सकती हैं।' क्या यह सच है?

उत्तर— हाँ, यह सच है। विशेष क्षेत्रीय स्पीशीज के आवास के नष्ट होने, बढ़ती जनसंख्या तथा नई स्पीशीज के प्रवेश से विशेष क्षेत्रीय स्पीशीज के प्राकृतिक आवास पर प्रभाव पड़ने से ये विलुप्त हो सकती हैं।

[]

प्रश्न 4. चिड़ियाघर और वन्यप्राणी अभयारण्य में क्या अन्तर है?

उत्तर— [नोट—इसके लिए पाठ्यपुस्तक के प्रश्न 2 (ख) का उत्तर देखें।]

[]

प्रश्न 5. क्या केवल बड़े जन्तुओं को ही विलुप्त होने का खतरा है?

उत्तर— नहीं, बड़े जन्तुओं की अपेक्षा छोटे जन्तुओं के विलुप्त होने का खतरा अधिक है।

[]

प्रश्न 6. क्या वनोन्मूलन का कोई स्थायी हल है?

उत्तर— हाँ, वनोन्मूलन का स्थायी हल पुनर्वनीकरण है। हमें काटे गये वृक्षों की कमी पूरी करने के लिए उससे अधिक संख्या में नये वृक्ष लगाने चाहिए।

—————— पाठ्यपुस्तक के प्रश्न ——————

प्रश्न 1. रिक्त स्थानों की उचित शब्दों द्वारा पूर्ति कीजिए—

(क) वह क्षेत्र जिसमें जन्तु अपने प्राकृतिक आवास में संरक्षित होते हैं, .................... कहलाता है।
(ख) किसी क्षेत्र विशेष में पाई जाने वाली स्पीशीज .................... कहलाती है।
(ग) प्रवासी पक्षी सुदूर क्षेत्रों से .................... परिवर्तन के कारण पलायन करते हैं।

उत्तर— (क) वन्य जीव अभयारण्य, (ख) विशेष क्षेत्रीय स्पीशीज, (ग) जलवायु।

प्रश्न 2. निम्नलिखित में अन्तर स्पष्ट कीजिए—

(क) वन्यप्राणी उद्यान एवं जैवमंडलीय आरक्षित क्षेत्र।
(ख) चिड़ियाघर एवं अभयारण्य।
(ग) संकटापन्न एवं विलुप्त स्पीशीज।
(घ) वनस्पतिजात एवं प्राणिजात।

उत्तर— (क) वन्यप्राणी उद्यान वह क्षेत्र है जहाँ वन्य प्राणी (जन्तु) सुरक्षित और संरक्षित रहते हैं। जैवमंडलीय आरक्षित क्षेत्र, वन्य जीवन, पौधों और जन्तु संसाधनों और उस क्षेत्र के आदिवासियों के पारम्परिक ढंग से जीवन-यापन हेतु विशाल संरक्षित क्षेत्र हैं।

(ख) चिड़ियाघर ऐसा स्थान है जहाँ प्राणी अपने कृत्रिम आवास में सुरक्षित रहते हैं। यहाँ जन्तुओं को भोजन उपलब्ध कराया जाता है। अभयारण्य वह क्षेत्र है जहाँ जन्तु एवं उनके आवास किसी भी प्रकार के विक्षोभ से सुरक्षित रहते हैं। यहाँ जानवर खुद ही शिकार कर भोजन प्राप्त करते हैं।
(ग) संकटापन्न (endangered) स्पीशीज वे स्पीशीज है जिनके सदस्यों की संख्या एक निर्धारित स्तर से कम होती जा रही है और वे विलुप्त हो सकते हैं। भारतीय शेर, गैंडा आदि इस श्रेणी में आते हैं।

विलुप्त स्पीशीज (extinct species) वे स्पीशीज हैं जो पृथ्वी पर अब देखने को नहीं मिलती हैं, जैसे—डायनासोर।

(घ) किसी विशेष क्षेत्र में पाए जाने वाले पेड़-पौधे उस क्षेत्र के वनस्पतिजात (flora) कहलाते हैं। किसी विशेष क्षेत्र में पाए जाने वाले जीव-जन्तु उस क्षेत्र के प्राणिजात (fauna) कहलाते हैं।
(क) वन्यप्राणी, (ख) पर्यावरण, (ग) गाँव (ग्रामीण क्षेत्र), (घ) शहर (शहरी क्षेत्र), (ङ) पृथ्वी, (च) अगली पीढ़ी।

उत्तर— (क) वन्यप्राणी पर प्रभाव—पेड़-पौधे वन्य प्राणियों को आवास एवं भोजन प्रदान करते हैं। वनोन्मूलन से प्राकृतिक आवास नष्ट हो जाते हैं तथा जन्तु संकटापन्न स्पीशीज बन जाते हैं।

(ख) पर्यावरण पर प्रभाव—वनोन्मूलन से वायुमण्डल में ऑक्सीजन की कमी आ जाती है। प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में पौधों को भोजन बनाने के लिए की आवश्यकता होती है। कम वृक्षों का अर्थ है कार्बन डाइऑक्साइड के उपयोग में कमी आना जिससे वायुमण्डल में इसकी मात्रा बढ़ जाती है, क्योंकि कार्बन डाइऑक्साइड पृथ्वी द्वारा उत्सर्जित ऊष्मीय विकिरणों को प्रग्रहण कर लेती है, अतः इसकी मात्रा में वृद्धि के परिणामस्वरूप वैश्विक ऊष्णन होता है। पृथ्वी के ताप में
(ग) गाँव (ग्रामीण क्षेत्र) पर प्रभाव - अधिकतर कृषि ग्रामीण क्षेत्र में होती है। भूमि पर वृक्षों की कमी होने से मृदा अपरदन अधिक होता है। मृदा की ऊपरी परत हटाने से नीचे की कठोर चट्टानें दिखाई देने लगती हैं। इससे मृदा में ह्यूमस की कमी होती है तथा इसकी उर्वरता भी अपेक्षाकृत कम होती है।
(घ) शहर (शहरी क्षेत्र) पर प्रभाव - शहरों में उद्योग और वाहन बड़ी मात्रा में चलते हैं। वनोन्मूलन से पर्यावरण प्रदूषित हो जाएगा और शहरों में रहने वाले स्वस्थ नहीं रहेंगे।
(ङ) पृथ्वी पर प्रभाव - पृथ्वी पर वृक्षों की कमी होने से मृदा अपरदन होता है। इससे मृदा में ह्यूमस की कमी होती है। धीरे-धीरे उर्वर भूमि मरुस्थल में परिवर्तित हो जाती है। वनोन्मूलन से मृदा की जलधारण क्षमता और भूमि की ऊपरी सतह से जल के नीचे की ओर अंत:स्रवण पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है जिसके परिणामस्वरूप बाढ़ आती है। मृदा के अन्य गुण, जैसे-पोषक तत्व, गठन इत्यादि भी वनोन्मूलन के कारण प्रभावित होते हैं।
(च) अगली पीढ़ी पर प्रभाव - वनोन्मूलन से दुर्लभ वनस्पति और जन्तु प्रजातियाँ नष्ट हो जाती हैं, जिन्हें अगली पीढ़ी चित्रों में ही देख सकती है। अगली पीढ़ी अनेक संसाधनों की कमी से भी जूझती है।
(क) हम वृक्षों की कटाई करते रहें?
(ख) किसी जन्तु का आवास बाधित हो?
(ग) मिट्टी की ऊपरी परत अनाविरत हो जाए?

उत्तर-

(क) यदि हम वृक्षों की कटाई करते रहें तो उस क्षेत्र में वर्षा कम होगी। बाढ़ भी अधिक आएगी। उस क्षेत्र का भूमि जल स्तर नीचे जाएगा। वायु की आर्द्रता घटेगी। प्रदूषण बढ़ेगा। वन्य प्राणी तथा वन्य पेड़-पौधे खत्म हो जाएंगे। ग्लोबल वार्मिंग बढ़ेगी तथा अन्ततः जीवन संभव नहीं होगा।
(ख) किसी जन्तु का आवास बाधित होने पर जन्तु अपनी सुरक्षा नहीं कर पाएगा तथा इससे जैव मंडल प्रभावित होगा तथा वह स्पीशीज, संकटापन्न प्रजाति में आ जाएगी।
(ग) मिट्टी की ऊपरी परत अनाविरत होने पर नीचे की कठोर चट्टानें दिखाई देने लगती हैं। इससे मृदा में ह्यूमस की कमी होती है तथा इसकी उर्वरता अपेक्षाकृत कम होती है। धीरे-धीरे उर्वर भूमि मरुस्थल में परिवर्तित हो जाती है।

प्रश्न 5. संक्षेप में उत्तर दीजिए-

(क) हमें जैव विविधता का संरक्षण क्यों करना चाहिए?
(ख) संरक्षित वन भी वन्य जन्तुओं के लिए पूर्ण रूप से सुरक्षित नहीं हैं, क्यों?
(ग) कुछ आदिवासी वन (जंगल) पर निर्भर करते हैं। कैसे?
(घ) वनोन्मूलन के कारक और उनके प्रभाव क्या हैं?
(ङ) रेड डाटा पुस्तक क्या है?
(च) प्रवास से आप क्या समझते हैं?

उत्तर-

(क) जैव विविधता का अर्थ है कि किसी क्षेत्र विशेष में पाए जाने वाले सभी पौधों, जन्तुओं और सूक्ष्म जीवों की विभिन्न प्रजातियाँ। हम इनका संरक्षण करने पर उस क्षेत्र की जैव विविधता और संस्कृति को बनाए रख सकते हैं। जैव विविधता के कारण ही हमें खाद्य पदार्थ प्राप्त होते हैं तथा जन्तुओं के जीवन-यापन के अनजान पहलुओं का अध्ययन हम उस क्षेत्र के जन्तुओं को सुरक्षित रखकर कर सकते हैं। अतः जैव विविधता का संरक्षण अति आवश्यक है। यह हमारे जीवन के लिए एक बहुमूल्य निधि है।
(ख) संरक्षित वन भी वन्य जन्तुओं के लिए पूर्ण रूप से सुरक्षित नहीं हैं, क्योंकि इनके आस-पास के क्षेत्रों में रहने वाले लोग वनों का अतिक्रमण करके उन्हें नष्ट कर देते हैं।
(ग) यह सत्य है कि कुछ आदिवासी वन पर निर्भर करते हैं। कुछ आदिवासी आज भी वनों में रहते हैं। वन उपजों का संग्रह कर, शिकार कर अपना पेट भरते हैं तथा पेड़ों की छाल और जन्तुओं की खाल से बने वस्त्र पहनते हैं।
(घ) वनोन्मूलन के कारक-

(1) कृषि के लिए भूमि प्राप्त करना।

(2) घरों एवं कारखानों का निर्माण।

(3) फर्नीचर बनाने अथवा लकड़ी का ईंधन के रूप में उपयोग।

(4) पशुओं के अतिचारण के लिए।

(5) प्राकृतिक कारक-(i) दावानल, (ii) भीषण सूखा।

वनोन्मूलन के प्रभाव- वनोन्मूलन के मुख्य दुष्प्रभाव हैं-

(1) ऑक्सीजन/कार्बन डाइऑक्साइड के अनुपात का असन्तुलन।

(2) अधिक बाढ़ें।

(3) भू-स्खलन।

(4) जलवायु परिवर्तन।

(5) वन में रहने वाले पशु-पक्षियों का नष्ट होना या प्रवास करना।

(6) स्थलीय जल में कमी।

(7) भूमि की उर्वरता में कमी।

(ङ) रेड डाटा पुस्तक (Red Data Book) वह पुस्तक है जिसमें सभी संकटापन्न स्पीशीज का रिकॉर्ड रखा जाता है। पौधों, जन्तुओं और अन्य स्पीशीज के लिए अलग-अलग रेड डाटा पुस्तकें हैं।
(अ) ऑक्सीजन
(ब) कार्बन डाइऑक्साइड
(स) नाइट्रोजन
(द) ब और स दोनों

2. पृथ्वी का वह भाग जहाँ सजीव पाए जाते हैं, कहलाता है-

(अ) जलमण्डल
(ब) भूमण्डल
(स) जैवमण्डल
(द) नभमण्डल

3. भारतीय विशाल गिलहरी का नाम है-

(अ) विसन
(ब) किसन
(स) रतन
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं

4. भारत का प्रथम आरक्षित वन है-

(अ) सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान
(ब) पचमढ़ी उद्यान
(स) भरतपुर अभयारण्य
(द) काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान

5. एक टन कागज प्राप्त करने के लिए हम लगभग जितने वृक्षों को काटते हैं, उनकी संख्या है-

(अ) 7
(ब) 17
(स) 27
(द) 37
(अ) वन्य जंतु
(ब) वृक्ष
(स) कारखाने
(द) वनोन्मूलन

7. वनोन्मूलन का कारण है-

(अ) कृषि के लिए वनों को काटना
(ब) ईंधन के रूप में लकड़ी जलाना
(स) दावानल एवं भीषण सूखा
(द) उपरोक्त सभी

8. निम्नलिखित में से संकटापन्न वन्य जन्तु है-

(अ) बाघ
(ब) बारहसिंघा
(स) काले हिरण
(द) जंगली भैंसा

कक्षा 8 विज्ञान पाठ 5 चित्र 1

चित्र: भारत का मानचित्र जिसमें राष्ट्रीय उद्यान (राष्ट्रीय मरु उद्यान, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान) दर्शाए गए हैं

कक्षा 8 विज्ञान पाठ 5 चित्र 2

चित्र: शब्द पहेली ग्रिड

कक्षा 8 विज्ञान पाठ 5 चित्र 3

चित्र: भरी हुई शब्द पहेली ग्रिड

9. सागौन का दूसरा नाम है—

(अ) टीक
(ब) साल
(स) चीड़
(द) देवदार

10. वनों को समाप्त करने को क्या कहते हैं?

(अ) पुनर्वनरोपण
(ब) वनोन्मूलन
(स) वन्य प्राणी अभयारण्य
(द) इनमें से कोई नहीं

11. निम्न में से राष्ट्रीय उद्यान में किसका संरक्षण होता है?

(अ) वनस्पतिजात
(ब) प्राणिजात
(स) ऐतिहासिक वस्तु
(द) उपरोक्त सभी

12. वनोन्मूलन का स्थायी हल क्या है?

(अ) पुनःचक्रण
(ब) मरुस्थलीकरण
(स) जंतु संरक्षण
(द) पुनर्वनरोपण

उत्तर-तालिका— 1. (ब) 2. (स) 3. (अ) 4. (अ) 5. (ब) 6. (ब) 7. (द) 8. (अ) 9. (अ) 10. (ब) 11. (द) 12. (द)।

रिक्त स्थानों की पूर्ति—

1. .................... का अर्थ है किसी विशिष्ट क्षेत्र में पाये जाने वाले सजीवों की विभिन्न किस्में।

2. संकटापन्न स्पीशीज वे हैं जो .................... होने के कगार पर हैं।

3. .................... में संकटापन्न स्पीशीज का रिकार्ड रहता है।

4. जैव विविधता के संरक्षण के उद्देश्य से ............ क्षेत्र बनाये गये हैं।

5. प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में पौधों को भोजन बनाने के लिए ................ गैस की आवश्यकता होती है।

6. जैवमण्डल पृथ्वी का वह भाग है जिसमें ................ पाए जाते हैं।

7. सरकार ने बाघों के संरक्षण हेतु ................ लागू की है।

8. किसी विशेष क्षेत्र में पाए जाने वाले पेड़-पौधे उस क्षेत्र के ................ कहलाते हैं।

उत्तर— 1. जैव विविधता 2. विलुप्त 3. रेड डाटा पुस्तक 4. जैवमण्डल आरक्षित 5. कार्बन डाइऑक्साइड 6. सजीव 7. प्रोजेक्ट टाइगर/बाघ परियोजना 8. वनस्पतिजात।

सत्य/असत्य—

निम्नलिखित कथनों में सही पर 'T' तथा गलत पर 'F' अंकित कीजिए—

(1) वनोन्मूलन से पृथ्वी पर ताप एवं प्रदूषण में वृद्धि होती है।

(2) किसी विशेष क्षेत्र में पाये जाने वाले पेड़-पौधे उस क्षेत्र के प्राणिजात कहलाते हैं।

(3) रेड डाटा पुस्तक में महत्त्वपूर्ण लोगों का नाम लिखा होता है।

(4) कागज के पुनः चक्रण से वनोन्मूलन को कम किया जा सकता है।

(5) धीरे-धीरे उपजाऊ भूमि मरुस्थल में बदल जाती है। उसे मरुस्थलीकरण कहते हैं।

(6) वनोन्मूलन से वर्षा दर प्रभावित नहीं होती है।

(7) वन्य प्राणी अभयारण्य वह क्षेत्र है जहाँ पर जंतु सुरक्षित व संरक्षित रहते हैं।

(8) 'संकटापन्न जंतु' वे जंतु हैं जिनकी संख्या एक निर्धारित स्तर से कम होती जा रही है।

उत्तर— (1) T (2) F (3) F (4) T (5) T (6) F (7) T (8) T

'कॉलम-A' में दिए गए शब्दों का मिलान 'कॉलम-B' से कीजिए—

प्रश्न 1.

कॉलम-A

कॉलम-B

(i)

वनोन्मूलन

(a) उर्वर भूमि का मरुस्थल में बदलना

(ii)

सूखा

(b) वर्षा दर में कमी

(iii)

पुनर्वनरोपण

(c) वनों का समाप्त होना

(iv)

मरुस्थलीकरण

(d) नए वृक्षों का रोपण

प्रश्न 2.

कॉलम-A

कॉलम-B

(i)

प्रवासी पक्षी

(a) साइबेरियन सारस

(ii)

संकटापन्न स्पीशीज

(b) बाघ

(iii)

विलुप्त स्पीशीज

(c) डायनासोर

(iv)

विशेष क्षेत्री स्पीशीज

(d) विसन

उत्तर—

(i)

(ii)

(iii)

(iv)

1.

(c)

(b)

(d)

(a)

2.

(a)

(b)

(c)

(d)

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न—

प्रश्न 1. मरुस्थलीकरण से क्या आशय है?

उत्तर— मृदा की ऊपरी परत हटने से इसकी ह्यूमस तथा उर्वरता नष्ट हो जाती है। इससे उर्वर भूमि मरुस्थल में बदल जाती है। इसे मरुस्थलीकरण कहते हैं।

प्रश्न 2. अभयारण्य से क्या आशय है?

उत्तर— वह क्षेत्र जहाँ जंतु और उनके आवास किसी भी प्रकार के विक्षोभ से सुरक्षित रहते हैं, अभयारण्य कहलाते हैं।

प्रश्न 3. राष्ट्रीय उद्यान से आप क्या समझते हैं?

उत्तर— वन्य जंतुओं के लिए आरक्षित क्षेत्र जहाँ वे स्वतंत्र रूप से आवास और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं, राष्ट्रीय उद्यान कहलाता है।

प्रश्न 4. जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र क्या है?

उत्तर- वन्य जीवन, पौधों और जन्तु संसाधनों और उस क्षेत्र के आदिवासियों के पारम्परिक ढंग से जीवन-यापन हेतु विशाल संरक्षित क्षेत्र, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र कहलाता है।

प्रश्न 5. पचमढ़ी जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र में पाए जाने वाले एक राष्ट्रीय उद्यान और दो वन्य जन्तु अभयारण्यों के नाम लिखिए।

उत्तर- राष्ट्रीय उद्यान-सतपुड़ा, वन्य जन्तु अभयारण्य-बोरी एवं पचमढ़ी।

प्रश्न 6. स्पीशीज से क्या आशय है?

उत्तर- स्पीशीज सजीवों की समष्टि का वह समूह है जो एक-दूसरे से अंतर्जनन करने में सक्षम होते हैं तथा इनमें समान सामान्य लक्षण पाए जाते हैं।

प्रश्न 7. संकटापन्न जन्तु किन्हें कहते हैं?

उत्तर- वे जन्तु जिनकी संख्या एक निर्धारित स्तर से कम होती जा रही है और वे विलुप्त हो सकते हैं, संकटापन्न जन्तु कहलाते हैं।

प्रश्न 8. चार संकटापन्न जन्तुओं के नाम लिखिए।

उत्तर- (1) सफेद हाथी, (2) शेर, (3) जंगली भैंसा, (4) बारहसिंगा।

प्रश्न 9. प्रवासी पक्षी किन्हें कहते हैं?

उत्तर- ऐसे पक्षी जो उड़कर सुदूर क्षेत्रों तक लम्बी यात्रा करते हैं, प्रवासी पक्षी कहलाते हैं।

प्रश्न 10. भारत वन (संरक्षण) अधिनियम का क्या उद्देश्य है?

उत्तर- इस अधिनियम का उद्देश्य प्राकृतिक वनों का परिरक्षण और संरक्षण करना है।

प्रश्न 11. 'वनोन्मूलन' से क्या तात्पर्य है?

उत्तर- वनोन्मूलन का अर्थ है वनों को समाप्त करने पर प्राप्त भूमि का अन्य कार्यों में उपयोग करना।

प्रश्न 12. वनोन्मूलन के प्राकृतिक कारक हैं?

उत्तर- दावानल एवं भीषण सूखा वनोन्मूलन के प्रमुख प्राकृतिक कारक है।

प्रश्न 13. जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र बनाने का क्या लाभ है?

उत्तर- किसी क्षेत्र का जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र उस क्षेत्र की जैव विविधता एवं संस्कृति को बनाए रखने में सहायक होता है।

प्रश्न 14. विसन (भारतीय विशाल गिलहरी) की क्या विशेषता है?

उत्तर- इस गिलहरी में एक लम्बी फरदार पूँछ पाई जाती है।

प्रश्न 15. पचमढ़ी जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र की विशेष क्षेत्री वनस्पति तथा प्राणी का उदाहरण दीजिए।

उत्तर- विशेष क्षेत्री वनस्पति-(i) साल (ii) जंगली आम। विशेष क्षेत्री प्राणी-(i) विसन (ii) उड़ने वाली गिलहरी।

प्रश्न 16. प्रोजेक्ट टाइगर (बाघ परियोजना) का क्या उद्देश्य है?

उत्तर- इस परियोजना का उद्देश्य अपने देश में बाघों की उत्तरजीविता बढ़ाना एवं संवर्धन करना है।

प्रश्न 17. आज वन्यप्राणियों को सबसे अधिक खतरा किससे है?

उत्तर- आज वन्यप्राणियों को सबसे अधिक खतरा अतिक्रमण से उनके आवास नष्ट होने का है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न-(I-Type)

प्रश्न 1. 'पुनर्वनरोपण' से क्या तात्पर्य है?

उत्तर- पुनर्वनरोपण में काटे गए वृक्षों की कमी पूरी करने के उद्देश्य से नए वृक्षों का रोपण किया जाता है। रोपण किए जाने वाले वृक्ष सामान्यतः उसी स्पीशीज के होते हैं जो उस वन में पाए जाते हैं।

प्रश्न 2. कागज का पुनःचक्रण कर वनोन्मूलन रोका जा सकता है। सिद्ध कीजिए।

उत्तर- हम जानते हैं कि कागज प्राप्त करने के लिए पूर्ण विकसित वृक्षों को काटा जाता है अतः हम कागज का पुनःचक्रण कर वनोन्मूलन को कम कर सकते हैं। कागज को पुनःचक्रण कर से बार तक काम में लिया जा सकता है। यदि कागज को अधिकतम बार पुनः चक्रित किया जाये तो एक वर्ष में अनेक वृक्षों को बचा सकते हैं।

प्रश्न 3. विशेष क्षेत्री प्रजाति से क्या आशय है? समझाइए।

उत्तर- विशेष क्षेत्री स्पीशीज-पौधे एवं जन्तुओं की वह स्पीशीज जो किसी विशेष क्षेत्र में विशिष्ट रूप से पाई जाती है, उसे विशेष क्षेत्री स्पीशीज कहते हैं। जैसे-पचमढ़ी जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र में साल और जंगली आम के पेड़ विशेष क्षेत्री वनस्पति प्रजाति हैं। विशालकाय गिलहरी यहाँ की विशेष क्षेत्री जन्तु प्रजाति है।

प्रश्न 4. वन में वृक्षों की कटाई किन उद्देश्यों से की जाती है?

उत्तर- वन में वृक्षों की कटाई निम्न उद्देश्यों से की जाती है-

(i) कृषि के लिए भूमि प्राप्त करना।

(ii) घरों एवं कारखानों का निर्माण।

(iii) फर्नीचर बनाने अथवा लकड़ी का ईंधन के रूप में उपयोग।

प्रश्न 5. 'जैव विविधता' से क्या तात्पर्य है?

उत्तर- जैव विविधता का अर्थ है पृथ्वी पर पाए जाने वाले विभिन्न जीवों की प्रजातियाँ, उनके पारस्परिक संबंध एवं पर्यावरण से उनका संबंध।

प्रश्न 6. 'प्राकृतिक पुनर्वनरोपण' क्या होता है?

उत्तर- यदि वनोन्मूलित क्षेत्र को अबाधित छोड़ दिया जाए।

490 ——————————————————————————————————————

तो वह यह स्वतः पुनर्संस्थापित हो जाता है। इसे प्राकृतिक पुनर्वनीकरण कहते हैं। प्राकृतिक पुनर्वनीकरण में मानव गतिविधियों का कोई स्थान नहीं है।

प्रश्न 7. रेड डाटा पुस्तक क्या है? किन्हीं दो संकटापन्न जंतुओं के नाम बताइए।

उत्तर : रेड डाटा पुस्तक वह पुस्तक है जिसमें सभी संकटापन्न स्पीशीज का रिकार्ड रखा जाता है। पौधों, जंतुओं और अन्य स्पीशीज के लिए अलग-अलग रेड डाटा पुस्तकें हैं।

संकटापन्न जंतु—(i) बाघ (ii) भारतीय गैंडा।

प्रश्न 8. 'भारत वन (संरक्षण) अधिनियम' क्या है?

उत्तर : भारत वन (संरक्षण) अधिनियम भारत सरकार द्वारा बनाया गया अधिनियम है। इस अधिनियम का उद्देश्य प्राकृतिक वनों का परिरक्षण और संरक्षण करना है साथ ही साथ ऐसे उपाय भी करना है जिससे वन में और उसके समीप रहने वाले लोगों की आधारभूत आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके।

लघूत्तरात्मक प्रश्न-(II-Type)

प्रश्न 1. जैवमंडल से क्या आशय है? जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र क्यों बनाए जाते हैं?

उत्तर : जैवमंडल—यह पृथ्वी का वह भाग है जिसमें सजीव पाए जाते हैं अथवा जो जीवन-यापन योग्य है, जैवमंडल कहलाता है।

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र—यह एक ऐसा क्षेत्र होता है जहाँ जैव विविधता को संरक्षित किया जाता है। जैव विविधता से आशय किसी क्षेत्र विशेष में पाए जाने वाले सभी पौधे, जंतु और सूक्ष्मजीवों की विभिन्न प्रजातियों से है। आरक्षित क्षेत्र से हम उस क्षेत्र की जैव विविधता एवं संस्कृति को सुरक्षित रखते हैं। किसी जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र के अन्तर्गत अन्य संरक्षित क्षेत्र भी हो सकते हैं। पचमढ़ी जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र में सतपुड़ा नामक एक राष्ट्रीय उद्यान तथा बोरी एवं पचमढ़ी नामक दो वन्य जन्तु अभयारण्य आते हैं। अतः आरक्षित क्षेत्र से क्षेत्र पारितन्त्र को भी सुरक्षा मिलती है।

प्रश्न 2. वनस्पतिजात एवं प्राणिजात से क्या आशय है? समझाइए।

उत्तर : वनस्पतिजात—किसी विशेष क्षेत्र में पाए जाने वाले पेड़-पौधे उस क्षेत्र के वनस्पतिजात हैं, जैसे-पचमढ़ी जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र में साल, सागौन, आम, जामुन, सिल्वर फर्न, अर्जुन आदि वनस्पतिजात हैं।

प्राणिजात—किसी विशेष क्षेत्र में पाए जाने वाले जीव-जंतु उस क्षेत्र के प्राणिजात कहलाते हैं, जैसे-चिंकारा, नील गाय, बार्किंग हिरण, चीतल, तेंदुआ, जंगली कुत्ता, भेड़िया आदि पचमढ़ी जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र के प्राणिजात हैं।

प्रश्न 3. सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान के बारे में आप क्या जानते हैं?

उत्तर : सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान—यह विशाल आरक्षित क्षेत्र है। यहाँ पर्यावरण के सम्पूर्ण संघटकों का संरक्षण पूर्णरूपेण होता है। यहाँ वनस्पतिजात, प्राणिजात, दृश्य भूमि और ऐतिहासिक वस्तुओं का संरक्षण करते हैं। सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान भारत का प्रथम आरक्षित वन है। सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान की चट्टानों में आवास भी स्थित हैं। यह इन वनों में मनुष्य की गतिविधियों के प्रागैतिहासिक प्रमाण हैं जिनसे हमें आदिमानव के जीवन-यापन का पता चलता है। चट्टानों के इन मानव आवासों में कुछ पेंटिंग कृतियाँ भी मिलती हैं। पचमढ़ी जैवमंडल संरक्षित क्षेत्र में 55 चट्टान आवास की पहचान की जा चुकी है।

प्रश्न 4. बाघ परियोजना क्या है? समझाइए।

उत्तर : हमारी सरकार ने बाघों के संरक्षण हेतु प्रोजेक्ट टाइगर अथवा बाघ परियोजना प्रारम्भ की है। इसका उद्देश्य अपने देश में बाघों की उत्तरजीविता एवं संवर्धन करना है। बाघ उन स्पीशीज में से एक है जो धीरे-धीरे वनों से विलुप्त होते जा रहे हैं। इस परियोजना के तहत बाघों को संरक्षित किया गया है। सतपुड़ा आरक्षित क्षेत्र में इनकी वृद्धि भी हुई है।

प्रश्न 5. पारितंत्र के निर्माण में कौन-कौनसे घटक होते हैं? क्या छोटे प्राणी भी पारितंत्र को प्रभावित कर सकते हैं?

उत्तर : पारितंत्र के निर्माण में प्राणी, पौधे और सूक्ष्म जीव जैविक घटक के रूप में तथा अजैव घटक के रूप में जलवायु, भूमि (मिट्टी), नदी, डेल्टा आदि सहयोग देते हैं। पारितंत्र को छोटे-छोटे प्राणी भी प्रभावित करते हैं; जैसे-यदि हम साँप, मेंढक, छिपकली, चमगादड़ आदि को समाप्त कर दें, तो ये हमारे आहार जाल व आहार श्रृंखला को प्रभावित करेंगे क्योंकि इन जीवों पर आश्रित रहने वाले सजीव भी नष्ट हो जाएंगे तथा ये जीव जिन पर आश्रित हैं उनकी संख्या बढ़ जाएगी जो सीधे रूप से पारितंत्र को असंतुलित कर देगी।

निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. वन्य जीवन का संरक्षण क्यों आवश्यक है?

उत्तर : वन्य जीवन का संरक्षण करने के निम्नलिखित कारण हैं-

(1) वन्य जीवन का संरक्षण प्रकृति में पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है। उदाहरण के लिए यदि हम वन में रहने वाले शेरों तथा बाघों जैसे माँसाहारी जानवरों के शिकार पर प्रतिबन्ध लगाकर उन्हें संरक्षित करते हैं, तो वे हिरणों जैसे शाकाहारी जानवरों की संख्या पर नियन्त्रण रखेंगे जो वन के हरे-भरे पौधों को खाते हैं। इससे वन के पौधे अधिक हानि से बच जाएँगे तथा पारिस्थितिक संतुलन बना रहेगा।

(2) वन्य जीवन का संरक्षण करना प्रकृति में जीन भंडार को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक है अर्थात वन्य जीवन का संरक्षण इस पृथ्वी से जानवरों और पक्षियों की दुर्लभ प्रजातियों की पूर्णतया समाप्ति (extinction) को रोकने के लिए आवश्यक है।

(3) वन्य जीवन हमारे लिए आर्थिक दृष्टि से भी उपयोगी है। हजारों देशी-विदेशी पर्यटक उन्हें देखने के लिए हमारे देश में आते हैं जिनसे बहुमूल्य विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। कुछ जन्तु तो केवल भारत में ही पाए जाते हैं, जैसे-पश्चिम बंगाल का एक सींग वाला गैंडा, रॉयल बंगाल टाइगर आदि।

प्रश्न 2. निम्न पर टिप्पणी लिखिए।

(a) प्रोजेक्ट हाथी
(b) जैव विविधता तप्तस्थल

(c) भारत में संकटपन्न स्पीशीज।

उत्तर-(a) प्रोजेक्ट हाथी- प्रोजेक्ट हाथी कर्नाटक सरकार द्वारा प्रारम्भ की गई है, जिसका उद्देश्य राज्य में एशियन हाथी की सुरक्षा करना है।

(b) जैव विविधता तप्तस्थल- वे क्षेत्र जहाँ जैव विविधता बहुत धनी है जैव विविधता तप्तस्थल कहलाते हैं। विश्व के 34 जैव विविधता तप्तस्थलों में से दो भारत में स्थित हैं। यह है पूर्वी हिमालय और पश्चिमी घाट।
(c) भारत में संकटपन्न स्पीशीज- भारत में संकटपन्न स्पीशीज की संख्या 172 है जो विश्व की संकटपन्न स्पीशीज का है। भारत में एशिया की कुछ दुर्लभ प्रजातियाँ जैसे कि बंगाल लोमड़ी, संगमरमरी बिल्ली, एशियाटिक शेर, भारतीय हाथी, एशियन जंगली गधा, भारतीय गैंडा, गौर, जंगली एशियाटिक जल भैंसा इत्यादि पाई जाती है।

प्रश्न 3. वनोन्मूलन का अर्थ बताइए एवं इसके कारणों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर- वनोन्मूलन का अर्थ है वनों को समाप्त करने पर प्राप्त भूमि का अन्य कार्यों में उपयोग करना। वन विभिन्न जीवों एवं मानवजाति के अस्तित्व एवं भली प्रकार से रहने के लिए आवश्यक होते हैं। आज इन जीवों के अस्तित्व के लिए वनोन्मूलन एक बहुत बड़ा खतरा बन गया है।

वनोन्मूलन के कारण- वन में वृक्षों की कटाई निम्न उद्देश्यों से की जाती है-

(i) कृषि के लिए भूमि प्राप्त करने के लिए।

(ii) घरों एवं कारखानों का निर्माण करने के लिए।

(iii) फर्नीचर बनाने अथवा लकड़ी का ईंधन के रूप में उपयोग करने हेतु।

(iv) दावानल एवं भीषण सूखा भी वनोन्मूलन के कुछ प्राकृतिक कारक है।

प्रश्न 4. निम्न पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए-

(a) राष्ट्रीय उद्यान
(b) संकटपन्न जंतु।
(b) संकटपन्न जंतु- वे जंतु जिनकी संख्या एक निर्धारित स्तर से कम होती जा रही है ओर वे विलुप्त हो सकते हैं संकटपन्न जंतु कहलाते हैं। भारत में संकटपन्न स्पीशीज की संख्या 172 है जिनमें एशियाटिक शेर, भारतीय गैंडा, गौर, जंगली भैंसा प्रमुख हैं।