📖 1. समाधान: अभ्यास एवं पाठ्यपुस्तक के संपूर्ण हल
राजस्थान बोर्ड कक्षा 8 विज्ञान — पाठगत प्रश्न एवं अभ्यास के चरण-दर-चरण सटीक हल।
पाठगत प्रश्न
प्रश्न 1. शरीर में होने वाले ऐसे परिवर्तन जिनसे जनन परिपक्वता आती है, की अवधि कब तक रहती है?
उत्तर— शरीर में होने वाले ऐसे परिवर्तन की अवधि लगभग 11 वर्ष की आयु से प्रारम्भ होकर 18 अथवा 19 वर्ष की आयु तक रहती है।
प्रश्न 2. क्या बाल्यकाल एवं युवावस्था के मध्य की अवधि का कोई विशेष नाम है?
उत्तर— बाल्यकाल एवं युवावस्था के मध्य की अवधि को किशोरावस्था कहते हैं।
प्रश्न 3. यौवनारम्भ में होने वाले परिवर्तनों का प्रारम्भ कौन करता है?
उत्तर— यौवनारम्भ में होने वाले परिवर्तनों का प्रारम्भ विभिन्न हार्मोन करते हैं।
प्रश्न 4. क्या जननकाल एक बार प्रारम्भ होने के बाद जीवन पर्यन्त तक चलता रहता है या कभी समाप्त होता है?
उत्तर— जननकाल जीवन पर्यन्त नहीं चलता है। स्त्रियों में यह सामान्यतः 45 से 50 वर्ष की आयु तक चलता है। पुरुषों में स्त्रियों की अपेक्षा अधिक अवधि तक चलता है।
प्रश्न 5. स्त्रियों में जननकाल की अवधि रजोदर्शन से रजोनिवृत्ति तक होती है। क्या यह सही है?
उत्तर— हाँ, यह सही है।
प्रश्न 6. इस बात का निर्धारण कैसे होता है कि निषेचित अण्डाणु लड़के में अथवा लड़की में विकसित होगा?
📝 2. नोट्स: मुख्य अवधारणाएँ, सूत्र व स्मरणीय तथ्य
महत्वपूर्ण नियम, सूत्र, परिभाषाएँ, भावार्थ एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।
पाठ-सार-
(1) 11 वर्ष की आयु से 19 वर्ष की आयु तक की अवधि किशोरावस्था (adolescence) कहलाती है। यौवनारम्भ का प्रारम्भ होने पर जनन अंगों की वृद्धि होती है।
(2) जनन अंगों का परिपक्व होना हार्मोन पर निर्भर करता है। हार्मोन अंतःस्रावी ग्रंथियों (endocrine glands) द्वारा स्रावित पदार्थ हैं जो रुधिर में सीधे पहुँचते हैं।
(3) पीयूष ग्रंथि वृद्धि हार्मोन का, अग्नाशय इन्सुलिन का, थायरॉइड थायरॉक्सिन का तथा एड्रिनल ग्रंथि एड्रिनेलिन हार्मोन का उत्पादन करती है।
(4) टेस्टोस्टेरॉन नर हार्मोन है तथा एस्ट्रोजन मादा हार्मोन है। इनके उत्पादन का नियंत्रण पीयूष ग्रंथि द्वारा होता है।
(5) गर्भाशय की दीवार निषेचित अण्डाणु (युग्मनज) को ग्रहण करने के लिए अपने आपको तैयार करती है। निषेचन न होने की स्थिति में गर्भाशय की दीवार की आन्तरिक सतह निस्तारित होकर शरीर से बाहर रक्त के साथ प्रवाहित हो जाती है। इसे ऋतुस्राव अथवा रजोधर्म कहते हैं।
(6) जन्म से पूर्व शिशु के लिंग का निर्धारण इस बात पर निर्भर करता है कि युग्मनज में गुणसूत्र है अथवा गुणसूत्र।
(7) किशोरावस्था में संतुलित आहार करना तथा व्यक्तिगत स्वच्छता का पालन करना महत्त्वपूर्ण है।
⭐ 3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
बहुविकल्पात्मक प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थान, अतिलघूत्तरात्मक एवं लघूत्तरात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।
उत्तर— [नोट- इसके लिए अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नों में निबन्धात्मक प्रश्न संख्या 1 का उत्तर देखें।]
प्रश्न 7. क्या अन्य जन्तुओं में भी हार्मोन स्रावित होते हैं? क्या जनन प्रक्रिया में उनका कोई योगदान है?
उत्तर— हाँ, अन्य जन्तुओं में भी हार्मोन स्रावित होते हैं। जनन प्रक्रिया में इनका योगदान होता है।
प्रश्न 8. यदि व्यक्ति के आहार में पर्याप्त आयोडीन न हो तो क्या उन्हें थायरॉक्सिन की कमी के कारण 'गॉयटर' हो जायेगा?
उत्तर— थायरॉइड ग्रंथि को थायरॉक्सिन हार्मोन बनाने के लिए आयोडीन की आवश्यकता होती है। यदि व्यक्ति के आहार में पर्याप्त आयोडीन न हो तो पर्याप्त थायरॉक्सिन...
का निर्माण नहीं होगा जिससे उसे 'गॉयटर' (घेंघा) रोग हो जायेगा।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
प्रश्न 1. शरीर में होने वाले परिवर्तनों के लिए उत्तरदायी अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा स्रावित पदार्थ का क्या नाम है?
उत्तर- हार्मोन।
प्रश्न 2. किशोरावस्था को परिभाषित कीजिए।
उत्तर- जीवनकाल की वह अवधि जब शरीर में ऐसे परिवर्तन होते हैं जिसके परिणामस्वरूप जनन परिपक्वता आती है, किशोरावस्था कहलाती है। यह अवस्था 11 वर्ष की आयु से प्रारम्भ होकर 18 अथवा 19 वर्ष तक होती है।
प्रश्न 3. ऋतुस्राव (menstruation) क्या है? वर्णन कीजिए।
उत्तर- यदि अण्डाणु का निषेचन नहीं हो पाता तब उस स्थिति में अण्डाणु तथा गर्भाशय का मोटा स्तर उसकी रुधिर वाहिकाओं सहित निस्तारित हो जाता है। इससे स्त्रियों में रक्तस्राव होता है, जिसे ऋतुस्राव कहते हैं। ऋतुस्राव लगभग 28 से 30 दिन में एक बार होता है। पहला ऋतुस्राव यौवनारम्भ में होता है जिसे रजोदर्शन कहते हैं। लगभग 45 से 50 वर्ष की आयु में ऋतुस्राव होना रुक जाता है, जिसे रजोनिवृत्ति कहते हैं।
प्रश्न 4. यौवनारम्भ के समय होने वाले शारीरिक परिवर्तनों की सूची बनाइए।
उत्तर- यौवनारम्भ के समय होने वाले शारीरिक परिवर्तन-
1. लम्बाई में वृद्धि- इस समय शरीर की लम्बी अस्थियों की लम्बाई में वृद्धि होती है और व्यक्ति लम्बा हो जाता है। लगभग 18 वर्ष की आयु तक लड़के व लड़कियाँ अपनी अधिकतम लम्बाई प्राप्त कर लेते हैं, जो आनुवंशिक जीन पर निर्भर करती है।
2. शारीरिक आकृति में परिवर्तन- लड़कों में कंधे फैलकर चौड़े हो जाते हैं और लड़कियों की कमर का निचला भाग चौड़ा हो जाता है। लड़कों में शारीरिक पेशियाँ लड़कियों की अपेक्षा सुस्पष्ट एवं गठी दिखाई देती हैं।
3. स्वर में परिवर्तन- लड़कों का स्वरयंत्र विकसित होकर बड़ा हो जाता है और कभी-कभी आवाज भरने या फटने लगती है। लड़कियों का स्वरयंत्र अपेक्षाकृत छोटा और स्वर उच्चतारत्व वाला होता है।
4. स्वेद एवं तैल-ग्रन्थियों में वृद्धि- किशोरावस्था में इनका स्राव बढ़ जाता है, जिससे कुछ व्यक्तियों के चेहरे पर फुंसियाँ एवं मुँहासे आदि हो जाते हैं।
5. जनन अंगों का विकास- नर जननांग विकसित हो जाते हैं। वृषण से शुक्राणुओं का उत्पादन प्रारम्भ हो जाता है। लड़कियों में अण्डाशय के आकार में वृद्धि होती है तथा अण्ड परिपक्व होने लगते हैं। अण्डाशय से अण्डाणुओं का निर्मोचन भी प्रारम्भ हो जाता है।
6. मानसिक, बौद्धिक एवं संवेदात्मक परिपक्वता- किशोर अधिक स्वतंत्र तथा सचेत होते हैं। इस समय सीखने की क्षमता सर्वाधिक होती है। कभी-कभी परिवर्तनों की वजह से किशोर अपने आपको असुरक्षित महसूस करते हैं।
प्रश्न 5. दो कॉलम वाली एक सारणी बनाइए जिसमें अंतःस्रावी ग्रंथियों के नाम तथा उनके द्वारा स्रावित हार्मोन के नाम दर्शाए गए हों।
उत्तर-
अंतःस्रावी ग्रन्थि | हार्मोन |
1. पीयूष | वृद्धि हार्मोन |
2. थायरॉइड | थायरॉक्सिन हार्मोन |
3. एड्रीनल | एड्रिनलिन |
4. अग्नाशय | इंसुलिन |
5. वृषण | पौरुष हार्मोन (टेस्टोस्टेरॉन) |
6. अण्डाशय | एस्ट्रोजन |
प्रश्न 6. लिंग हार्मोन क्या हैं? उनका नामकरण इस प्रकार क्यों किया गया? उनके प्रकार्य बताइए।
उत्तर- लिंग हार्मोन- नर में वृषण द्वारा एवं मादा में अण्डाशय द्वारा स्रावित हार्मोन, लिंग हार्मोन कहलाते हैं। इन्हें यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि यह नर और मादा लिंग में भिन्न-भिन्न होते हैं।
नर लिंग हार्मोन (टेस्टोस्टेरॉन)-
(1) यह वृषण द्वारा स्रावित होता है।
(2) इससे लड़के के चेहरे के बालों में वृद्धि होती है।
(3) यह शुक्राणु उत्पन्न करने की क्षमता उत्पन्न करता है।
मादा लिंग हार्मोन (एस्ट्रोजन)-
(1) अण्डाशय द्वारा स्रावित होते हैं।
(2) ये मादा में गौण जनन लक्षण जैसे स्तनों की वृद्धि आदि को नियंत्रित करते हैं।
(3) यह गर्भधारण में सहायक है।
प्रश्न 7. सही विकल्प चुनिए-
(क) किशोर को सचेत रहना चाहिए कि वह क्या खा रहे हैं, क्योंकि-
(i) उचित भोजन से उनके मस्तिष्क का विकास होता है।
(ii) शरीर में तीव्र गति से होने वाली वृद्धि के लिए उचित आहार की आवश्यकता होती है।
(iii) किशोर को हर समय भूख लगती रहती है।
(iv) किशोर में स्वाद कलिकाएँ (ग्रन्थियाँ) भली-भाँति विकसित होती हैं।
(ख) स्त्रियों में जनन आयु (काल) का प्रारम्भ उस समय होता है जब उनके-
(i) ऋतुस्राव प्रारम्भ होता है।
(ii) स्तन विकसित होना प्रारम्भ करते हैं।
(iii) शारीरिक भार में वृद्धि होने लगती है।
(iv) शरीर की लम्बाई बढ़ती है।
(ग) निम्न में से कौन-सा आहार किशोर के लिए सर्वोचित है-
(i) चिप्स, नूडल्स, कोक
(ii) रोटी, दाल, सब्जियाँ
(iii) चावल, नूडल्स, बर्गर
(iv) शाकाहारी टिक्की, चिप्स तथा लेमन पेय
उत्तर- (क) (ii) शरीर में तीव्र गति से होने वाली वृद्धि के लिए उचित आहार की आवश्यकता होती है।
प्रश्न 8. निम्न पर टिप्पणियाँ लिखिए-
1. ऐडम्स ऐपल
2. गौण लैंगिक लक्षण
3. गर्भस्थ शिशु में लिंग निर्धारण।
उत्तर- 1. ऐडम्स ऐपल—यौवनारम्भ में लड़कों के स्वरयंत्र के बढ़ने से जो अंग गले में सुस्पष्ट उभरा हुआ नजर आता है, उसे ऐडम्स ऐपल कहते हैं।
2. गौण लैंगिक लक्षण—युवावस्था में लड़कियों में स्तनों का विकास होने लगता है तथा लड़कों के चेहरे पर बाल उगने लगते हैं अर्थात् दाढ़ी-मूँछ आने लगती है। ये लक्षण क्योंकि लड़कियों को लड़कों से पहचानने में सहायता करते हैं अतः इन्हें गौण लैंगिक लक्षण कहते हैं। लड़कों के सीने पर भी बाल आ जाते हैं। लड़कों एवं लड़कियों दोनों में ही बगल एवं जाँघ के ऊपरी भाग अथवा प्यूबिक क्षेत्र में बाल आ जाते हैं।
3. गर्भस्थ शिशु में लिंग निर्धारण—सभी मनुष्यों की कोशिकाओं के केन्द्रक में जोड़े गुणसूत्र पाए जाते हैं। इनमें से गुणसूत्र ( जोड़ी) लिंग सूत्र हैं जिन्हें एवं कहते हैं। स्त्री में दो गुणसूत्र होते हैं जबकि पुरुष में एक तथा एक गुणसूत्र होता है। युग्मक (अण्डाणु तथा शुक्राणु) में गुणसूत्रों का एक जोड़ा होता है। जब गुणसूत्र वाला शुक्राणु अण्डाणु को निषेचित करता है तो युग्मनज में दो गुणसूत्र होंगे तथा वह मादा शिशु में विकसित होगा। यदि अण्डाणु को निषेचित करने वाले शुक्राणु में गुणसूत्र हैं तो युग्मनज नर शिशु में विकसित होगा।
प्रश्न 9. शब्द पहेली-शब्द बनाने के लिए संकेत संदेश का प्रयोग कीजिए-
बाईं से दाईं ओर-
3. एड्रिनल ग्रन्थि से स्रावित हार्मोन
4. मेंढक में लारवा से वयस्क तक होने वाला परिवर्तन
5. अंत:स्रावी ग्रन्थियों द्वारा स्रावित पदार्थ
6. किशोरावस्था को कहा जाता है
ऊपर से नीचे की ओर-
1. अंत:स्रावी ग्रन्थियों का दूसरा नाम
2. स्वर पैदा करने वाला अंग
3. स्त्री हार्मोन
उत्तर-
प्रश्न 10. नीचे दी गई सारणी में आयु वृद्धि के अनुपात में लड़कों एवं लड़कियों की अनुमानित लम्बाई के आँकड़े दर्शाए गए हैं। लड़के एवं लड़कियों दोनों की लम्बाई एवं आयु को प्रदर्शित करते हुए एक ही ग्राफ कागज पर ग्राफ खींचिए। इस ग्राफ से आप क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?

चित्र: Crossword Puzzle Question Grid

चित्र: Crossword Puzzle Solution Grid
आयु (वर्षों में) | लम्बाई (सेमी. में) | |
लड़के | लड़कियाँ | |
0 | 53 | 53 |
4 | 96 | 92 |
8 | ||
12 | ||
16 | ||
20 |
उत्तर-उपरोक्त ग्राफ से निष्कर्ष निकलता है कि लड़कों तथा लड़कियों दोनों की जन्म के समय लम्बाई समान होती है, 4-8 वर्ष के अन्तराल में लड़कों की लम्बाई लड़कियों से तेज गति से तथा 8-12 वर्ष के अन्तराल में लड़कियों की लम्बाई लड़कों से तेज गति से बढ़ती है। 16 वर्ष की आयु तक पहुँचते-पहुँचते दोनों की लम्बाई समान हो जाती है किन्तु 16 से 20 वर्ष की आयु में लड़कों की लम्बाई लड़कियों से अधिक हो जाती है।
--- अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न ---
बहुचयनात्मक प्रश्न-
1. निम्न में से नर/पौरुष हार्मोन है-
(ब) थायरॉक्सिन
(द) पिट्यूटराइन
2. निम्न में स्त्री हार्मोन है-
(ब) टेस्टोस्टेरॉन
(द) इंसुलिन
3. रजोनिवृत्ति से आशय है-
(ब) ऋतुस्राव का प्रारम्भ
(द) गर्भाधान
4. गॉयटर रोग का कारण है-
5. यदि X गुणसूत्र वाला शुक्राणु अण्डाणु को निषेचित करता है तो इससे शिशु होगा-
(ब) नर
(द) जुड़वाँ
6. थायरॉक्सिन के उत्पादन के लिए जल में किसकी उपस्थिति आवश्यक है?
(ब) आयोडीन
(द) आयरन
7. किसी भी व्यक्ति के शरीर को स्वस्थ रखने के लिए किसकी आवश्यकता होती है?
(ब) विटामिन
(द) संतुलित आहार
8. किशोरावस्था में व्यक्ति का किस प्रकार का विकास होता है?
(ब) बौद्धिक
(द) उपरोक्त सभी
9. मानव कोशिका में कितने गुणसूत्र पाये जाते हैं?
(ब) 22 जोड़े
(द) 24 जोड़े
10. निम्न में से अन्तःस्रावी ग्रन्थि है-
(ब) अग्न्याशय
(द) उपरोक्त सभी
11. HIV क्या है?
(ब) जीवाणु
(द) कवक
12. मेंढक में थायरॉइड द्वारा स्रावित हार्मोन किसका नियमन करता है?
(ब) जनन
उत्तर-तालिका- 1. (स) 2. (अ) 3. (स) 4. (ब) 5. (अ) 6. (ब) 7. (द) 8. (द) 9. (स) 10. (द) 11. (अ) 12. (स)।
रिक्त स्थानों की पूर्ति-
1. किशोरों को .................... भी कहा जाता है।
2. यौवनारम्भ एवं जनन अंगों का परिपक्व होना .................... द्वारा नियंत्रित होता है।
3. .................... मादा हार्मोन है।
4. अग्न्याशय .................... हार्मोन का उत्पादन करता है।
5. वृद्धि .................... के समय से ही होने लगती है।
6. .................... में एकाएक वृद्धि यौवनारम्भ के दौरान होने वाला सबसे अधिक दृष्टिगोचर परिवर्तन है।
7. .................... ग्रन्थियाँ हार्मोन को सीधे रुधिर प्रवाह में निर्मोचित करती हैं।
8. हार्मोन .................... पदार्थ है।

चित्र: ग्राफ - आयु बनाम लम्बाई (लड़के और लड़कियाँ)
504 —
उत्तर- 1. टीनेजर्स 2. हार्मोन 3. एस्ट्रोजन 4. इन्सुलिन 5. जन्म 6. लंबाई 7. अन्तःस्रावी 8. रासायनिक।
सत्य/असत्य-
निम्नलिखित कथनों में सही के लिए 'T' तथा गलत के लिए 'F' अंकित कीजिए-
(1) किशोरावस्था के दौरान होने वाले परिवर्तन यौवनारम्भ का संकेत होते हैं।
(2) किशोरावस्था में लड़कों का स्वर उच्च तारत्व वाला होता है।
(3) हार्मोन रासायनिक पदार्थ है।
(4) वृषण एस्ट्रोजन हार्मोन स्रावित करता है।
(5) ऋतुस्राव के रुक जाने को रजोदर्शन कहते हैं।
(6) अण्डाणु को निषेचित करने वाले शुक्राणु में गुणसूत्र होने पर नर शिशु (लड़का) होता है।
(7) किशोरावस्था में लंबाई में वृद्धि होती है।
उत्तर- (1) T (2) F (3) T (4) F (5) F (6) T (7) T
'कॉलम-A' में दिए गए शब्दों का मिलान 'कॉलम-B' से कीजिए-
प्रश्न 1.
कॉलम-A | कॉलम-B |
(i) टेस्टोस्टेरॉन | (a) थायरॉइड ग्रंथि |
(ii) एस्ट्रोजन | (b) अग्न्याशय |
(iii) थायरॉक्सिन | (c) वृषण |
(iv) इन्सुलिन | (d) अण्डाशय |
प्रश्न 2.
कॉलम-A | कॉलम-B |
(i) गॉयटर | (a) इन्सुलिन |
(ii) मधुमेह | (b) थायरॉक्सिन |
(iii) कायान्तरण | (c) कीट हार्मोन |
(iv) तनाव संयोजन | (d) एड्रिनेलिन |
प्रश्न 3.
कॉलम-A | कॉलम-B |
(i) गौण लैंगिक लक्षण | (a) जनन क्षमता का विकास |
(ii) कायान्तरण | (b) ऋतुस्राव के रुक जाने की घटना |
(iii) यौवनारम्भ | (c) चेहरे पर बालों का आना |
(iv) रजोनिवृत्ति | (d) लार्वा का वयस्क में परिवर्तन |
उत्तर-
(i) (ii) (iii) (iv)
1.
(c)
(d)
(a)
(b)
2.
(b)
(a)
(c)
(d)
3.
(c)
(d)
(a)
(b)
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. मानव की पूर्ण लंबाई ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।
उत्तर- पूर्ण लंबाई =
प्रश्न 2. लड़के-लड़की अपनी अधिकतम लंबाई कितने वर्ष की आयु में प्राप्त कर लेते हैं?
उत्तर- 18 वर्ष की आयु तक।
प्रश्न 3. नलिकाविहीन ग्रंथियों से क्या आशय है?
उत्तर- अन्तःस्रावी ग्रंथियाँ नलिकाविहीन ग्रंथियाँ कहलाती हैं क्योंकि इनसे निकले रसायन सीधे रुधिर में प्रवाहित हो जाते हैं।
प्रश्न 4. गौण लैंगिक लक्षण से क्या आशय है?
उत्तर- वे लक्षण जो लड़कियों को लड़कों से पहचानने में सहायता करते हैं, गौण लैंगिक लक्षण कहलाते हैं।
प्रश्न 5. स्तन में दुग्ध ग्रंथियों के विकास में कौनसा हार्मोन सहायक है?
उत्तर- पीयूष ग्रंथि द्वारा स्रावित हार्मोन इस कार्य में सहायक है।
प्रश्न 6. रजोदर्शन से क्या आशय है?
उत्तर- पहला ऋतुस्राव जो यौवनारम्भ में होता है, रजोदर्शन कहलाता है।
प्रश्न 7. रजोनिवृत्ति क्या है?
उत्तर- ऋतुस्राव के रुक जाने को रजोनिवृत्ति कहते हैं। यह 45 से 50 वर्ष की आयु में महिलाओं में होती है।
प्रश्न 8. ऋतुस्राव चक्र का नियंत्रण किसके द्वारा होता है?
उत्तर- ऋतुस्राव चक्र का नियंत्रण हार्मोन द्वारा होता है।
प्रश्न 9. ऋतुस्राव चक्र में शामिल क्रियाएँ बतलाइए।
उत्तर- (1) अण्डाणु का परिपक्व होना (2) अण्डाणु का निर्मोचन होना (3) गर्भाशय की दीवार का मोटा होना (4) निषेचन न होने की स्थिति में उसका टूटना।
प्रश्न 10. लड़की या लड़के के निर्धारण के लिए क्या माँ उत्तरदायी है?
उत्तर- लड़की व लड़के का निर्धारण पिता के लिंग गुणसूत्र द्वारा होता है। इसमें माँ उत्तरदायी नहीं है।
प्रश्न 11. थायरॉइड ग्रंथि कहाँ पायी जाती है? इससे स्रावित हार्मोन का नाम लिखिए।
उत्तर- थायरॉइड ग्रंथि गले में होती है। इससे स्रावित हार्मोन थायरॉक्सिन है।
प्रश्न 12. रुधिर में नमक की मात्रा का संतुलन किस हार्मोन से होता है?
उत्तर- एड्रिनल ग्रंथि द्वारा स्रावित हार्मोन (एल्डोस्टिरोन) से।
प्रश्न 13. पौरुष हार्मोन का नाम लिखिए।
उत्तर- 'टेस्टोस्टेरॉन' पौरुष हार्मोन कहलाता है।
प्रश्न 14. किशोरावस्था के दौरान होने वाले परिवर्तन किसका संकेत देते हैं?
उत्तर- ये परिवर्तन यौवनारम्भ का संकेत देते हैं।
प्रश्न 15. किशोरावस्था के दौरान होने वाला सबसे महत्त्वपूर्ण परिवर्तन कौनसा है?
उत्तर- लड़के एवं लड़कियों की जनन क्षमता का विकास किशोरावस्था के दौरान होने वाला सबसे महत्त्वपूर्ण परिवर्तन है।
प्रश्न 16. यौवनारम्भ कब समाप्त हो जाता है?
उत्तर- किशोर की जनन परिपक्वता के साथ ही यौवनारम्भ समाप्त हो जाता है।
प्रश्न 17. उन ग्रन्थियों के तीन उदाहरण दीजिए जो अपना स्राव वाहिकाओं द्वारा स्रावित करती हैं।
उत्तर- (i) स्वेद ग्रंथि (ii) तेल ग्रंथि (iii) लार ग्रंथि।
प्रश्न 18. 'कायान्तरण' किसे कहते हैं?
उत्तर- लारवा से वयस्क बनने की प्रक्रिया को कायान्तरण कहते हैं।
प्रश्न 19. कीटों में कायान्तरण का नियन्त्रण किसके द्वारा किया जाता है?
उत्तर- कीटों में कायान्तरण का नियन्त्रण 'कीट हॉर्मोन' द्वारा होता है।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-(I-Type)
प्रश्न 1. यौवनारम्भ में शरीर के अंगों में असमान वृद्धि होती है परन्तु फिर भी शरीर सुडौल कैसे हो जाता है?
उत्तर- यौवनारम्भ में शरीर के सभी अंग समान दर से वृद्धि नहीं करते। कभी-कभी किशोर के हाथ अथवा पैर शरीर के अन्य अंगों की अपेक्षा बड़े दिखाई देते हैं। परन्तु शीघ्र ही दूसरे भाग भी वृद्धि कर शारीरिक अनुपात को सन्तुलित कर देते हैं, फलतः शरीर सुडौल हो जाता है।
प्रश्न 2. यौवनारम्भ के समय शारीरिक आकृति में क्या परिवर्तन होते हैं?
उत्तर- यौवनारम्भ के समय व्यक्ति के कंधे व सीने में परिवर्तन तीव्रता से होता है। कंधे फैलकर चौड़े हो जाते हैं। लड़कियों में कमर का निचला भाग चौड़ा हो जाता है। वृद्धि के कारण लड़कों में शारीरिक पेशियाँ लड़कियों की अपेक्षा सुस्पष्ट एवं गठी हुई दिखाई देती हैं।
प्रश्न 3. हॉर्मोन किस प्रकार कार्य करते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर- अन्तःस्रावी ग्रंथियाँ हॉर्मोन रुधिर प्रवाह से स्रावित करती हैं जिससे वह शरीर के विशिष्ट भाग अथवा लक्ष्य-स्थल तक पहुँच सके। लक्ष्य-स्थल हॉर्मोन के प्रति अनुक्रिया करता है। उदाहरण के लिए पीयूष-ग्रंथि अनेक हॉर्मोन स्रावित करती है। उनमें से एक हॉर्मोन अण्डाशय में अण्डाणु एवं वृषण में शुक्राणु के परिपक्व होने को नियंत्रित करता है।
प्रश्न 4. यौवनारम्भ के समय जनन अंगों में विकास किस प्रकार से होता है? लिखिए।
उत्तर- यौवनारम्भ में नर जननांग जैसे कि वृषण एवं शिश्न पूर्णतः विकसित हो जाते हैं। वृषण से शुक्राणुओं का उत्पादन भी प्रारम्भ हो जाता है। लड़कियों में अण्डाशय के साइज में वृद्धि हो जाती है तथा अण्ड परिपक्व होने लगते हैं। अण्डाशय से अण्डाणुओं का निर्मोचन भी प्रारम्भ हो जाता है।
प्रश्न 5. किशोरावस्था में व्यक्तियों के चेहरे पर फुंसियाँ और मुँहासे क्यों हो जाते हैं?
उत्तर- किशोरावस्था में स्वेद एवं तेल ग्रंथियों का स्राव बढ़ जाता है। इन ग्रंथियों की अधिक क्रियाशीलता के कारण कुछ व्यक्तियों के चेहरे पर फुंसियाँ और मुँहासे हो जाते हैं।
प्रश्न 6. एड्रिनल ग्रंथि द्वारा स्रावित हॉर्मोन का नाम तथा इसके कार्य बताइए।
उत्तर- एड्रिनल ग्रंथि द्वारा एड्रिनेलिन हॉर्मोन स्रावित किया जाता है।
एड्रिनेलिन का कार्य- एड्रिनेलिन क्रोध, चिंता एवं उत्तेजना की अवस्था में तनाव के संयोजन का कार्य करता है।
प्रश्न 7. यदि टेडपोल जिस जल में वृद्धि कर रहा हो, उसमें आयोडीन अनुपस्थित हो तो क्या होगा?
उत्तर- यदि टेडपोल जिस जल में वृद्धि कर रहा हो, उसमें आयोडीन अनुपस्थित हो तो टेडपोल वयस्क मेंढक में परिवर्धित नहीं हो सकते क्योंकि मेंढक में थायरॉइड ग्रंथि द्वारा स्रावित हॉर्मोन 'थायरोक्सिन' कायान्तरण का नियमन करता है और थायरोक्सिन के उत्पादन के लिए जल में आयोडीन की उपस्थिति आवश्यक है।
प्रश्न 8. नर लैंगिक हॉर्मोन का नाम तथा इसके दो प्रमुख कार्य बताइए।
उत्तर- नर लैंगिक हॉर्मोन का नाम टेस्टोस्टेरोन है। यह वृषण द्वारा स्रावित होता है। इसके मुख्य कार्य इस प्रकार हैं-
(1) नर युग्मक 'शुक्राणुओं' का उत्पादन।
(2) पुरुषों में सहायक लैंगिक अंगों तथा द्वितीयक लैंगिक लक्षणों जैसे-दाढ़ी, मूँछ तथा आवाज को नियंत्रित करना।
प्रश्न 9. स्त्री लैंगिक हॉर्मोनों के नाम तथा कार्य बताइए।
उत्तर- एस्ट्रोजन स्त्री लैंगिक हॉर्मोन है।
एस्ट्रोजन के कार्य-
(1) मादा युग्मक (अर्थात् अण्डाणु) के उत्पादन पर नियंत्रण।
(2) सहायक लैंगिक अंगों तथा द्वितीयक लैंगिक लक्षणों, जैसे-स्तन ग्रंथियों, केश-विन्यास तथा आवाज का नियंत्रण।
प्रश्न 10. रजोदर्शन तथा रजोनिवृत्ति में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
506 —
उत्तर-
रजोदर्शन (Menarche) | रजोनिवृत्ति (Menopause) |
1. रजोधर्म या ऋतुस्राव का प्रारम्भ। | 1. ऋतुस्राव की समाप्ति। |
2. 10 से 12 वर्ष की आयु में लैंगिक चक्र प्रारम्भ होता है। | 2. लैंगिक चक्र समाप्त होता है। |
3. जनन काल का प्रारम्भ। | 3. जनन काल की समाप्ति। |
प्रश्न 11. एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
एस्ट्रोजन (Estrogen) | टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) |
1. यह मादा हार्मोन है, अण्डाशय द्वारा स्रावित होता है। | 1. यह नर हार्मोन है, वृषण द्वारा स्रावित होता है। |
2. यह हार्मोन द्वितीयक मादा लक्षणों का विकास करता है, जैसे-स्तनों का विकास। | 2. यह हार्मोन द्वितीयक नर लक्षणों का विकास करता है, जैसे-दाढ़ी-मूँछ का उगना। |
लघूत्तरात्मक प्रश्न-(II-Type)
प्रश्न 1. यौवनारम्भ के समय हमारी लम्बाई में वृद्धि किस प्रकार होती है? समझाइए।
उत्तर- यौवनारम्भ के समय लड़के-लड़कियों में अनेक परिवर्तन होते हैं, उनमें से लम्बाई में वृद्धि भी एक परिवर्तन है। इस समय लम्बाई में एकाएक वृद्धि होती है जिसे हम आसानी से देख सकते हैं। इस समय शरीर की लम्बी अस्थियों की अर्थात् हाथ एवं पैरों की अस्थियों की लम्बाई में वृद्धि होती है, इससे व्यक्ति लम्बा हो जाता है। प्रारम्भ में लड़कियाँ लड़कों की अपेक्षा अधिक तीव्रता से बढ़ती हैं। परन्तु लगभग 18 वर्ष की आयु तक दोनों अपनी अधिकतम लम्बाई प्राप्त कर लेते हैं। अलग-अलग व्यक्तियों की लम्बाई में वृद्धि की दर भी भिन्न-भिन्न होती है। कुछ यौवनारम्भ में तीव्र गति से बढ़ते हैं तथा बाद में यह गति धीमी हो जाती है, जबकि कुछ धीरे-धीरे वृद्धि करते हैं।
प्रश्न 2. स्वर में परिवर्तन भी यौवनारम्भ के समय होता है। क्यों?
उत्तर- यौवनारम्भ में स्वरयंत्र अथवा लैरिक्स में वृद्धि का प्रारम्भ होता है। लड़कों का स्वरयंत्र विकसित होकर अपेक्षाकृत बड़ा हो जाता है। लड़कों में बढ़ता हुआ स्वरयंत्र गले के सामने की ओर सुस्पष्ट उभरे भाग के रूप में दिखाई देता है जिसे ऐडम्स ऐपल (कंठमणि) कहते हैं। लड़कियों का स्वरयंत्र अपेक्षाकृत छोटा होता है अतः बाहर से सामान्यतया दिखाई नहीं देता। सामान्यतः लड़कियों का स्वर उच्चतारत्व वाला होता है जबकि लड़कों का स्वर गहरा होता है। किशोर लड़कों में कभी-कभी स्वरयंत्र की पेशियों में अनियंत्रित वृद्धि हो जाती है और आवाज फटने या भराने लगती है। यह स्थिति कुछ दिनों अथवा कुछ सप्ताह तक रहती है जिसके बाद स्वर सामान्य हो जाता है।
प्रश्न 3. यौवनारम्भ में शारीरिक परिवर्तन हार्मोन द्वारा नियंत्रित होते हैं। इसे आरेख चित्र द्वारा दर्शाइए।
उत्तर-
प्रश्न 4. किशोरावस्था में किशोर कैसा महसूस करते हैं?
उत्तर- किशोरावस्था अनेक बदलावों की अवस्था होती है। यह अवधि किशोरों की सोच में परिवर्तन लाती है। विचारों में बदलाव आते हैं और किशोर कल्पनाओं में अपना समय व्यतीत करता है। सच्चाई यह है कि इस अवधि में मस्तिष्क की सीखने की क्षमता अत्यधिक होती है। कभी-कभी, किशोर अपने आप को अपने शरीर और मन के बदलावों के अनुरूप नहीं ढाल पाते और स्वयं को असुरक्षित समझते हैं। परन्तु किशोर होने के नाते आपको समझना चाहिए कि असुरक्षित महसूस करने का कोई कारण नहीं है। ये परिवर्तन प्राकृतिक हैं जो शारीरिक वृद्धि के कारण उत्पन्न हो रहे हैं।
प्रश्न 5. "ऋतुस्राव के समय यदि कोई लड़की लड़के को देखती है तो वह गर्भवती हो जाती है।" इस कथन पर अपना मत स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- उपरोक्त कथन 'मिथ' अथवा असत्य है। हम जानते हैं कि जनन क्रिया में नर जनन अंग एवं मादा जनन

चित्र: Flowchart showing hormonal control of physical changes
अंग का सहयोग होता है। जनन में शुक्राणु मादा अण्डाणु के सम्पर्क में आकर संलयित होता है जिसे हम निषेचन कहते हैं। इसके अभाव में कोई भी लड़की गर्भवती नहीं हो सकती है। अतः उपरोक्त कथन भ्रामक एवं पूर्णतया असत्य है।
प्रश्न 6. मानव में जननकाल का निर्धारण कब व कैसे होता है?
उत्तर- मानव में किशोरावस्था में जब वृषण तथा अण्डाशय युग्मक उत्पादित करने लगते हैं तब वे जनन के योग्य हो जाते हैं। स्त्रियों में जननावस्था का प्रारम्भ यौवनारम्भ (10 से 12 वर्ष की आयु) से हो जाता है तथा सामान्यतः 45 से 50 वर्ष की आयु तक चलता है। यौवनारम्भ पर अण्डाणु परिपक्व होने लगते हैं। अण्डाशयों में एक अण्डाणु परिपक्व होता है तथा लगभग 28 से 30 दिनों के अन्तराल पर किसी एक अण्डाशय द्वारा निर्मोचित होता है। इस अवधि में गर्भाशय की दीवार मोटी हो जाती है, जिससे वह अण्डाणु के निषेचन के पश्चात् युग्मनज को ग्रहण कर सके जिसके फलस्वरूप गर्भधारण होता है। पुरुषों में जननकाल स्त्रियों की अपेक्षा अधिक अवधि तक रहता है।
प्रश्न 7. कीट एवं मेंढक में जीवनचक्र पूर्ण करने में हार्मोन का क्या योगदान है?
उत्तर- हम जानते हैं कि कीट एवं मेंढक के जीवनचक्र में कई अवस्थाएँ होती हैं। इस प्रकार टेडपोल से मेंढक बनने तथा लारवा से वयस्क कीट बनने में कई परिवर्तन होते हैं, जिन्हें कायान्तरण कहते हैं। कीटों में कायान्तरण का नियंत्रण कीट हार्मोन द्वारा होता है जबकि मेंढक में थायराइड द्वारा स्रावित हार्मोन थायरॉक्सिन इसका नियमन करता है। थायरॉक्सिन के उत्पादन के लिए जल में आयोडीन की उपस्थिति आवश्यक है। यदि जल में, जिसमें टेडपोल वृद्धि कर रहे हैं, पर्याप्त मात्रा में आयोडीन नहीं है तो टेडपोल वयस्क मेंढक में परिवर्धित नहीं हो सकते।
प्रश्न 8. हमारे जीवन में व्यक्तिगत स्वच्छता एवं शारीरिक व्यायाम का क्या महत्त्व है?
उत्तर- व्यक्तिगत स्वच्छता-हमारे जीवन में व्यक्तिगत स्वच्छता पर ध्यान देना अतिआवश्यक है। प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन एक बार स्नान करना चाहिए क्योंकि स्वेद ग्रन्थियों की अधिक क्रियाशीलता के कारण शरीर से गंध आने लगती है। शरीर के सभी भागों को स्नान करते समय भली प्रकार धोकर साफ करना चाहिए। यदि सफाई नहीं रखी गई तो जीवाणु संक्रमण का खतरा रहता है। लड़कियों को ऋतुस्राव के समय सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्हें अपने ऋतुस्राव चक्र का ध्यान रखते हुए ऋतुस्राव के लिए तैयार रहना चाहिए।
शारीरिक व्यायाम-ताजी हवा में खेलना तथा टहलना शरीर को स्वस्थ व चुस्त रखता है। सभी युवा/किशोरों एवं लड़कियों को टहलना, व्यायाम करना एवं बाहर खेलना चाहिए।
प्रश्न 9. 'स्वास्थ्य' से क्या तात्पर्य है? व्यक्ति को स्वस्थ रहने के लिए क्या करना चाहिए?
उत्तर- व्यक्ति का कायिक एवं मानसिक विसंतियुक्त होना उस व्यक्ति का स्वास्थ्य कहलाता है। किसी भी आयु के व्यक्ति के शरीर को स्वस्थ रखने के लिए उसे संतुलित आहार की आवश्यकता होती है। व्यक्ति को वैयक्तिक स्वच्छता एवं सफाई का नियमित रूप से पालन एवं पर्याप्त शारीरिक व्यायाम भी करना चाहिए।
प्रश्न 10. हमारे देश में विवाह की विधिसंगत (कानूनी) आयु का निर्धारण क्यों किया गया है?
उत्तर- हमारे देश में विवाह की विधिसंगत (कानूनी) आयु लड़कियों के लिए 18 वर्ष एवं लड़कों के लिए 21 वर्ष है। इसका कारण है कि किशोर लड़कियाँ/माँ शारीरिक एवं मानसिक रूप से मातृत्व के लिए तैयार नहीं होतीं। बाल विवाह तथा मातृत्व से माँ एवं संतान दोनों में ही स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। इससे युवा स्त्रियों के लिए व्यवसाय के अवसरों में भी कमी आती है क्योंकि वे मातृत्व की जिम्मेदारी उठाने के लिए सक्षम नहीं होतीं। अतः वह मानसिक पीड़ा से ग्रस्त रहती है।
प्रश्न 11. किशोरों को नशीले पदार्थों को 'न' कहना चाहिए, क्यों?
उत्तर- किशोर अवस्था में मन और शरीर अत्यधिक क्रियाशील होता है। इसलिए असुरक्षित और बेचैन नहीं होना चाहिए और किसी भी व्यक्ति द्वारा यह सुझाने पर कि नशीली दवा (ड्रग) का सेवन करने से आराम मिल सकता है, कभी न अपनाएँ। जब एक बार नशा करने की लत लग जाती है तब बार-बार नशा करने को मन करता है। नशे शरीर को नुकसान पहुँचाते हैं। ये स्वास्थ्य और खुशियों को खत्म कर देते हैं।
प्रश्न 12. AIDS क्या है? यह कैसे फैलता है?
उत्तर- AIDS का पूरा नाम एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिसिएंसी सिन्ड्रोम है। इससे आशय है उपार्जित प्रतिरक्षा अभाव संलक्षण। इससे हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता समाप्त हो जाती है। यह रोग HIV नामक विषाणु द्वारा होता है। यह वायरस एक पीड़ित व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में ड्रग के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सिरिंज द्वारा भी जा सकता है। वायरस का संक्रमण दूसरे माध्यम जैसे कि पीड़ित (रोगी) माँ से दूध द्वारा उसके शिशु में हो सकता है। HIV से पीड़ित व्यक्ति के साथ लैंगिक सम्पर्क स्थापित करने से भी इस रोग का संक्रमण हो सकता है।
प्रश्न 13. यदि यौवनारम्भ से पूर्व पीयूष ग्रंथि को हटा दिया जाए तो शरीर पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर-पीयूष ग्रंथि अनेक हार्मोन स्रावित करती है। इनमें से एक हार्मोन वृषण तथा अण्डाशय द्वारा स्रावित हार्मोंनों पर नियंत्रण रखता है जो जनन क्षमता विकास के लिए अनिवार्य होते हैं। इसके द्वारा वृद्धि हार्मोन भी स्रावित किया जाता है जो शरीर की सामान्य वृद्धि के लिए आवश्यक है। पीयूष ग्रंथि द्वारा ऐसे हार्मोन भी स्रावित किये जाते हैं जो अन्य अन्तःस्रावी ग्रंथियों के कार्य पर नियंत्रण रखते हैं। इसलिए यदि यौवनारम्भ से पूर्व पीयूष ग्रंथि को हटा दिया जाए तो शरीर की सामान्य वृद्धि के साथ-साथ जनन क्षमता भी अवरुद्ध हो जाएगी।
निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. संतति के लिंग निर्धारण की प्रक्रिया किस प्रकार होती है? चित्र सहित समझाइए।
उत्तर- निषेचित अण्डाणु अथवा युग्मनज में जन्म लेने वाले शिशु के लिंग निर्धारण का संदेश होता है। इस क्रिया में लिंग गुणसूत्र सहयोग करते हैं। हम जानते हैं कि मनुष्यों की कोशिका के केन्द्रक में 23 जोड़े गुणसूत्र पाये जाते हैं। इनमें से 2 गुणसूत्र (1 जोड़ी) लिंग गुणसूत्र होते हैं जिन्हें X तथा Y कहते हैं। स्त्री में दो X गुणसूत्र होते हैं जबकि पुरुष में एक X तथा एक Y गुणसूत्र होता है। युग्मक (अण्डाणु तथा शुक्राणु) में एक जोड़ा गुणसूत्रों का होता है जबकि अनिशेचित अण्डाणु में सदैव X गुणसूत्र होता है किन्तु शुक्राणु दो प्रकार के होते हैं जिनमें एक प्रकार में X गुणसूत्र एवं दूसरे प्रकार में Y गुणसूत्र होता है। जब X गुणसूत्र वाला शुक्राणु अण्डाणु को निषेचित करता है तो युग्मनज में दो X गुणसूत्र होंगे तथा वह मादा शिशु में विकसित होगा। यदि अण्डाणु को निषेचित करने वाले शुक्राणु में Y गुणसूत्र है तो युग्मनज नर शिशु में विकसित होगा।
प्रश्न 2. हमारे शरीर में पायी जाने वाली विभिन्न अन्तःस्रावी ग्रंथियों की स्थिति का चित्र बनाइए। इन ग्रंथियों द्वारा स्रावित हार्मोन के कार्य लिखिए।
उत्तर- अन्तःस्रावी ग्रंथियाँ-
चित्र-मानव में अन्तःस्रावी ग्रंथियाँ
1. पीयूष ग्रंथि- यह हमारे मस्तिष्क के निचले भाग में स्थित होती है। इसका आकार मटर के दाने के आकार का होता है। इससे निकलने वाले हार्मोन अन्य अन्तःस्रावी ग्रंथियों की क्रियाविधि पर नियंत्रण रखते हैं।
2. थायराइड ग्रंथि- यह ग्रंथि श्वास नली के दोनों ओर अधरतल पर स्थित होती है। इससे स्रावित हार्मोन थायरॉक्सिन है जो आयोडीन द्वारा बनता है। इसकी कमी से गलग्रन्थि रोग (गॉयटर) हो जाता है, जिसमें गला फूला हुआ रहता है।
3. एड्रिनल ग्रंथि- यह ग्रंथि वृक्क के ऊपरी भाग पर स्थित होती है। इससे स्रावित हार्मोन एड्रिनलीन हार्मोन है। यह क्रोध, चिन्ता एवं उत्तेजना की अवस्था में तनाव के संयोजन का कार्य करता है।
4. अग्न्याशय ग्रंथि- यह आमाशय के नीचे स्थित होती है। इससे स्रावित हार्मोन इन्सुलिन है। यह रुधिर में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करता है। इसकी कमी से मूत्र के साथ ग्लूकोज बाहर आता है जिसे हम मधुमेह रोग कहते हैं।
5. जनन ग्रंथियाँ- इनसे जनन हार्मोन्स निकलते हैं जो जननांगों की परिपक्वता तथा गौण लैंगिक लक्षणों के लिए उत्तरदायी होते हैं। ये दो प्रकार की होती हैं-(i) मादा जनन ग्रन्थि (ii) नर जनन ग्रन्थि।
(i) मादा जनन ग्रन्थि-अण्डाशय- इससे एस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्टेरॉन हार्मोन्स उत्पन्न होते हैं जो मादा के गौण लैंगिक लक्षण के लिए उत्तरदायी हैं।

चित्र: लिंग निर्धारण प्रक्रिया

चित्र: मानव अन्तःस्रावी ग्रंथियाँ
(ii) नर जनन ग्रन्थि-वृषण-इससे टेस्टोस्टेरोन हार्मोन स्रावित होता है जो नर के गौण लैंगिक लक्षणों के लिए उत्तरदायी है।
प्रश्न 3. निम्न पर टिप्पणियाँ लिखिए-
(a) संतुलित आहार
(b) जंक फूड।
उत्तर-(a) संतुलित आहार- संतुलित आहार का अर्थ है भोजन में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स, वसा, विटामिन एवं खनिज का पर्याप्त मात्रा में समावेश। हमारा भारतीय भोजन जिसमें रोटी, चावल, दाल एवं सब्जियाँ होती हैं, एक संतुलित आहार है। दूध अपने आप में संतुलित भोजन है। शिशुओं को माँ के दूध से सम्पूर्ण पोषण मिलता है क्योंकि वह भी संतुलित आहार है।
(b) जंक फूड-चिप्स तथा पैक किए हुए अथवा डिब्बाबंद खाद्य जंक फूड कहलाते हैं। ये स्वादिष्ट तो होते हैं लेकिन इनमें पर्याप्त मात्रा में पोषक नहीं होते हैं इसलिए इन्हें नियमित भोजन के स्थान पर नहीं खाना चाहिए।
प्रश्न 4. किशोरावस्था में किस प्रकार का आहार आवश्यक है? समझाइए।
उत्तर- किशोरावस्था तीव्र वृद्धि एवं विकास की अवस्था है। अतः किसी भी किशोर को आहार नियोजन अत्यंत सावधानीपूर्वक करना चाहिए। हमें इस अवस्था में संतुलित आहार लेना चाहिए जिसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन एवं खनिज का पर्याप्त मात्रा में समावेश होता है। हमारा भारतीय भोजन जिसमें रोटी, चावल, दाल एवं सब्जियाँ होती हैं, एक संतुलित आहार है। दूध अपने आप में संतुलित भोजन है। फल भी हमें पोषण देते हैं। लौह (आयरन) तत्व रुधिर का निर्माण करता है तथा लौह प्रचुर खाद्य जैसे कि पत्तीदार सब्जियाँ, गुड़, मांस, संतरा, आँवला इत्यादि किशोर के लिए अच्छे खाद्य हैं। अपने दोपहर एवं रात्रि के भोजन में ऊर्जा प्रदान करने वाले खाद्यान्न लेने चाहिए। इसमें दूध, मांस, नट एवं दालें सम्मिलित कर सकते हैं। साथ ही वसा एवं शक्कर भी इसमें शामिल करना आवश्यक है, जो ऊर्जा के स्रोत हैं। रक्षी भोजन के रूप में फल एवं सब्जियों का उपयोग अवश्य करना चाहिए। डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों को यदि उपयोग में नहीं लें तो अच्छा है क्योंकि ये पोषक नहीं होते हैं।